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बहन का दर्द Complete

अब वापस आज पर आते हैं.... और इस तरह रति और बिरजू के संबध आज भी चल रहे थे......रति के पति की मौत के बाद बिरजू ने ही घर की ज़िम्मेदारी संभाल ली और उसने शादी भी नहीं की और पूरी तरह रति को समर्पित रहा......

रवि ने -बाइक देखी और उसकी आखें खिल उठी.... उसने बाइक को ठीक किया सफाई की और उसे स्टार्ट किया....

तभी अंदर से अलका कॉलेज जाने के लिए.... तैयार हो कर आ गयी.....

उसने उस समय गुलाबी कलर की लो कट गले कई सलवार कमीज़ पहनी हुई थी.....रवि की आखें फटी की फटी रह गयी.....

उस की नज़र उसकी मस्त चुचिओ पर टिक गयी....

अपने भाई को इस तरह घूरते हुए देखते हुई पाकर अलका अंदर से सिहर गयी....

पर रवि की नज़र तो जैसे उसकी चुचिओ पर चिपक सी गयी... थी...उसका क्लीवेज और चुचिओ की अंदर तक की ढलान उसे सॉफ-सॉफ दिखाई दे रही थी.... रवि का कंट्रोल करते-करते भी लॅंड तन तना गया.....

रवि को इस तरह घूर ने कारण ...अलका थोड़ी असहज सी हो गयी.....उसने अपनी नज़रें नीचे कर ली और किचिन की तरफ जाने लगी......

अब रवि को उसके चौड़े- चौड़े चूतड़ दिखाई दिए...बड़ी ही मद मस्त बाहर निकली हुई गान्ड थी अलका की.... रवि का मन किया अभी दबोच के चोद दे ......पर उसने अपने मन को काबू किया....

किचन मे अलका ने एक ग्लास पानी पिया.....उसे अब बाहर जाने मे शरम आ रही थी....क्यों कि फिर उसे पता था रवि उसे वैसे ही घूरेगा....

तभी अंदर के कमरे से माँ आ जाती है..... अलका की तो जैसे साँस मे साँस आती है.....अच्छा माँ मैं चलती हूँ....इतना कह कर वो बाहर की तरफ आती है....

तभी रवि अपनी बाइक मे किक मरता है....और बोलता है.... चलो दीदी मैं आपको छोड़ देता हूँ.....

अलका : नहीं मैं चली जाउन्गि.... एक सहेली भी है वो मिल जाएगी....

रवि: अरे क्या प्राब्लम मैं छोड़ देता हूँ ना...मुझे कुछ काम भी है स्टेशन पर ...बाइक मे पेट्रोल भी भरवाना है... चलो बैठो...

मा: अरे जब ये जा ही रहा है तो चली जा ना.....

अलका बड़े बेमन से मोटर-बाइक पर बैठ जाती है...... और मन ही मन ...सब समझती हूँ तेरी चाल तू क्या चाहता है....

अलका के बैठते ही.... रवि अपनी बाइक बाहर निकाल लेता है.... और सड़क पर दौड़ा देता है....

अलका थोड़ा डिस्टेन्स मेनटेन करके बैठी हुई थी... और हाथ हल्के से रवि के कंधे पर रखा होता है.....

अचानक रवि ब्रेक लगाता है....और अलका सरक के रवि से सॅट जाती है..और उसकी चुचियाँ .... रवि की पीठ से धँस जाती है....

अलका ...मन ही मन बड़ा बेशरम है रवि तू.....

रवि: दीदी ज़रा अच्छी तरह से पकड़ के बैठो नहीं तो गिर जाओगी.....

अलका समझ जाती है रवि क्या चाहता है.... वो कुछ सोचती उस से पहले एक गाय रास्ते मे आ जाती है.... और रवि फिर ब्रेक लगा ता है....और फिर उसकी चुचियाँ रवि की पीठ से टकराती हैं.....

अलका मन ही मन सोचती है...अगर वो दूर बैठी रही... तो ये चलाएगा कम और ब्रेक ज़्यादा मारेगा.... इस लिए वो रवि के थोड़ा करीब हो जाती है...जिससे उसे उसकी चुचिओ का आनंद भी मिलने लगता है.....

रवि आनंद के सातवें आसमान पर दौड़ने लगता है........उसके मुलायम मुलायम चूचक रवि के शरीर मे आनंद और रोमांच का संचार कर रहे थे..... और वो भी आनंदित थी.... पर मन मे एक पाप बोध भी था....अपने सगे भाई के साथ...

पता नहीं कितनी जल्दी कॉलेज आ गया.....

दीदी आपकी छुट्टी कितने बजे होगी....

.2 बजे वो बोली

ठीक है मैं लेने आ जाउन्गा....

अलका: क्यों परेशान हो रहा है.... मैं आ जाउन्गी ना...

रवि: मुझे ज़रा इस मोटर साइकल मे कुछ काम भी करवाना है..... उसके बाद मैं यहीं आपका वेट कर लूँगा....ठीक है ...2 बजे मिलते हैं.....

रवि ने बाइक मे काम करवाया और ठीक 2 बजे कॉलेज के गेट पर पहुँच गया .....

जब स्टूडेंट की भीड़ ख़तम हो गयी... तभी उसे अलका आती हुई दिखाई दी वो अपनी सहेली नीला के साथ थी...दोनो बात करते हुए आ रही थी...

अलका : आज मेरा भाई मुझ को लेने आ रहा है तू कैसे जाएगी ..

नीला: ओह ! फिर मेरे को अकेले जाना पड़ेगा....

अलका: तू हमारे साथ चल ना ... मोटर साइकल पर....

नीला: अरे यार कैसे बैठ पाएँगें...

अलका : चल ना ...अड्जस्ट हो जाएँगे....

 
तभी नीला की नज़र रवि पर पड़ी .... और उसके चेहरे पर मुस्कान सी खिल गयी....

नीला; देख अलका ये वो लड़का है ना आर्मी वाला जो उस दिन हमारे कॉलेज मे आया था....

अलका थोड़ी मुस्कुराइ पर बोली कुछ नहीं....

नीला : हाई कितना स्मार्ट है साला..... यार उस दिन तो तू इससे मिलने वाली थी.... क्या हुआ तूने बताया नहीं...

अलका ,चोंक गयी ... असल मे उस दिन दोनो की बात हुई थी वो उसने नीला को बता दी थी उसे क्या पता था कि रवि उसका भाई निकलेगा....

अलका : मैं तेरे को बताउन्गी...चल पहले तुझे अपने भाई से मिलवा दूं...

तब तक दोनो रवि के पास पहुँच गये थे...

रवि ये मेरी सहेली नीला है.....

अब चौंकने ! की बारी नीला की थी.... उसका मुहँ खुला का खुला रह गया.....

रवि : हाई नीला ....

नीला : हाई.....

उसके माथे पर पसीने की बूंदे सॉफ छलक रही थी.... और उसकी कुछ समझ मे नहीं आ रहा था....

अलका : हम दोनो बैठ जाएँगीं ना बाइक पर...

रवि : हां क्यों नहीं...पर पैर दोनो तरफ कर के बैठना होगा...

अलका और नीला ने एक दूसरे का चेहरा देखा और मुस्कुरा दी...

रवि ने बाइक मे किक मारी , पहले अलका और उसके पीछे नीला बैठ गयी...

अलका का बुरा हाल था.... उसकी जबरात चुचियाँ रवि की पीठ मे धसि जा रही थी....और वो भी इस का पूरा आनंद ले रहा था...

थोड़ी देर मे दोनो गाओं पहुँच गये... नीला को उसके घर उतार के वो दोनो भी अपने घर आ गये...

दोनो को देख कर माँ बहुत खुश हुई...

माँ: बेटा तूने सुबह से कुछ नहीं खाया....

रवि: हां माँ... हाथ मुहँ धो कर सभी ने खाना खाया.....

शाम हो गयी... तब रवि ने देखा अलका कहीं बाहर जा रही थी....वो माँ को बोली कि नीला के घर तक जा रही है.....

थोड़ी देर मे रवि ने भी बाइक उठाई और नदी किनारे पहुँच गया.....

वही कल वाला टाइम था....सूरज डूबने की तैयारी कर रहा था.... पानी का रंग सूरज की रोशिनी सी लाल्मय हो रहा था...

पन्छियो की चहचहाहट से सारा वातावरण बड़ा संगीतमय हो रहा था.......

रवि कल वाली जगह जा कर बैठ गया..... और पानी मे पत्थर फेंकने लगा.....

तभी उसको पानी मे एक आकृति दिखाई दी...उसने पीछे मूड के देखा....तो अलका को खड़े पाया....

आप...रवि के मुहँ से निकला....दोनो की आखें टकराई......

रवि ने खिसक के अलका के लिए बैठने की जगह बनाई....

अलका बैठ गयी.... दोनो चुप थे....लेकिन दिल की धड़कन बहुत तेज थी.....

तभी अलका ने अपनी उंगली से रिंग निकाल कर रवि को दी और बोली ये वापस ले लो...

रवि: नहीं ये तो मैने अपनी प्रेमिका को दी थी....

अलका: क्या बकवास कर रहे हो रवि....ये कैसे पासिबल है....

 
रवि:तुम मेरी पहले प्रेमिका हो...बाद मे मुझे पता चला कि तुम मेरी दीदी हो ...इस मे मेरी क्या ग़लती है....

अलका: अब तो पता चल गया.... ग़लती सुधार लो...

रवि: ये ग़लती नहीं है...विधि का विधान है.....दीदी आइ लव यू....

अलका : पागल हो गया है क्क्या.....

रवि: हां दीदी मैं सही मे पागल हो गया हूँ......तुम्हारे प्यार मे...

अलका: ये कैसे पासिबल है...हम भाई बेहन हैं रवि....

रवि: थे....... अब नहीं है....जब भावना ही नहीं रही...तुमने मुझ को प्रेमी के रूप मे स्वीकार किया है और मैने तुमको अपनी प्रेमिका माना है.... क्या हम उम्र भर ये भूल सकते हैं.....

बात करते-करते रवि बार -बार उसकी उपर नीचे होते हुई मादक चूचिओ को घूर रहा था.....उसने अलका के दोनो कंधे पकड़े....

और उसकी ठोडी पकड़ी....दीदी बोलो ना....

अलका ने दूसरी तरफ मुहँ मोड़ लिया और बोली कुछ नही...

रवि कुछ देर ऐसे ही खड़ा रहा..... सूरज लगभग डूब चुका था......

रवि अलका के प्यारे से चेहरे को बड़े प्यार से देख रहा था..... उसे ऐसे देखते अलका झेंप गयी और मुहँ दूसरी तरफ कर के खड़ी हो गयी....

रवि उसके पीछे से गया....और पीछे उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसको अपने से सटा लिया ....और उसके गालों से गाल सटाता हुआ बोला... दीदी यू हॅव नो ऑप्षन ... और एक प्यारा सा चुम्मा उसके गाल पर रख दिया...

लौंडिया सिहर उठी.....वो अपने आप को रवि की बाहों से छुड़ाने की कोशिश करने लगी.... लेकिन बाहें मजबूत थी.... और कोशिश कमजोर...शायद अंदर से वो भी उसकी बाहों मे खो जाना चाहती थी....

तभी रवि ने उसकी दोनो मादक चुचियाँ जोरो से दबा दी....लौंडिया सिहर गयी....

क्या करता है रवि ..तू..

पर रवि कहाँ मानने वाला था..... उसने ना तो चुचियाँ छोड़ी और ना ही...अलका को अपनी बाहों से.... लौंडिया कसमसा रही थी..... और रवि उसकी मदमस्त चुचिओ का आनंद ले रहा था.....

अलका ने कसमसाते हुए... अपने को रवि से छुड़ाया.... और बोली मैं जा रही हूँ.....

रवि: रूको ना...

अलका: नहीं मुझे जाना है.... और आज के बाद हम नहीं मिलेंगें...

रवि: अच्छा मैं भी आ रहा हूँ...

रवि ने बाइक मे किक मारी ही थी...उसका फोन बज उठा.....

फोन माँ का था..बोली जल्दी घर आ जाओ.... एक सर्प्राइज़ है....

अलका: किस का फोन है....

रवि: माँ का , बोल रही हैं एक सर्प्राइज़ है...क्या सर्प्राइज़ हो सकता है...

और वो उत्सुक भी था कि माँ ने क्या....सर्प्राइज़ रखा है घर मे....दोनो बाइक से घर पहुँच गये......

 
घर पहुँच कर उन्होने डोर नॉक किया..... रति ने डोर खोला.... माँ क्या सर्प्राइज़ है.....?.हमारे लिए... जल्दी बताओ...

वो मुस्कुराती हुई.....बोली...इतनी जल्दी क्या है..... बताती हूँ....

नहीं माँ बताओ ना .... क्या सर्प्राइज़ है.....?

तभी अंदर वाले कमरे से आल्साता हुआ बिरजू निकाला.....

अलका के मुहँ से निकला मामा...... रवि भी लगभग चीखा.... ममाआआअ...................

बिरजू ने दोनो को अपने गले से लगा लिया..... बिरजू की आखों से आँसू निकल आए.... रवि को देख कर......कितना बड़ा हो गया रे तू......और बड़े प्यार से उसे चूमने लगा..... आख़िर थी तो उसी-की ही रचना.....और फिर उसने रवि को अपने गले से लगा लिया....

बहुत प्यार हो गया...... रति बोली चलो चाइ पी लो..... सब लोग हॉल मे चाइ पीने लगे....

सब एक दूसरे से बातों मे मशगूल हो गये........ सालों बाद बिरजू और रवि मिल रहे थे एक दूसरे से...... रवि अपनी फ्यूचर प्लॅनिंग बता रहा था..... बिरजू खुश था....आख़िर था तो रवि उसी का खून उसी का...बेटा.....जो उसके लंड और बेहन रति की कोख से पैदा हुआ था....

पूरी फॅमिली बहुत सालों बाद ऐसे मिल रही थी....रति की तो जैसे ख़ुसी का ठिकाना ही नहीं था..... वो तो ख़ुसी के मारे उड़ी-उड़ी घूम रही थी....

रवि ने अलका की ओर देखते हुए.... धीरे से कहा.... माँ को क्या हो गया है ? इतनी खुश क्यों घूम रही है.....

अलका : तू बुद्धू है.....

रवि: इसमे बुद्दु की क्या बात है.....

अलका फुसफुसाती हुई इशारे से बोलती हुई...काम लग गया है.....

रवि: क्या.....? फिर उसकी समझ मे आया.... और हंसते हुए.... ओह ...हान्णन्न्.........

नोट -दोस्तो कंफ्यूज़न की कोई बात नही है अलका अपनी माँ और मामा के बारे में रवि को बहुत कुछ बता चुकी है

और आपका दूसरा कंफ्यूज़न कि रवि और अलका ने एक दूसर को क्यों नही पहचाना तो दोस्तो इसका आन्सर ये है कि रवि जब छोटा था तभी उसे बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया था रवि ने वही से पढ़ाई पूरी करके आर्मी में जॉब कर ली थी इसलिए रवि अपने गाँव बहुत सालों बाद लौटा था

तभी सामने से रति आती हुई दिखाई डी .... वो हँसते हुए बोली ...क्या खुसुर फुसुर हो रही है... भाई बेहन मे.....

वो माँ हम आपके ही बारे मे बात कर रहे थे.....

मेरे बारे मे .....क्या बात....?

पीछे से अलका ने रवि को नोच दिया कहीं ये कुछ बक ना दे...

आज आप कितनी खुश नज़र आ रही हो...... और कितनी प्यारी लग रही हो.......

रति शरमा सी गयी अपने बेटे से अपनी तारीफ सुन कर ....और उसे लगा ....जैसे उसकी चोरी पकड़ ली हो.....

वो शरमाते हुए...धत्त्त..... चल गुड़िया किचन में चल मेरी हेल्प कर... खाना बनाने मे....

अलका का घर का नाम गुड़िया भी है....

अलका किचन मे चली गयी.... बिरजू और रवि हॉल मे टीवी देखने लगे...... और साथ-साथ बातें भी करने लगे......

तभी रति किचन मे आई... बोली भैया आज खाने मे क्या बनायें.....

बिरजू बोला.....बहुत दिनो से तेरे हाथ का नोन वेज नहीं खाया.....

रति: अरे नोन वेज तो घर मे कुछ नहीं हैं...

रवि: मैं अभी चिकन ले आ आता हूँ.....

बिरजू: तू घर मे रहा...अभी अभी तो आया है....मैं ले कर आता हूँ....

रवि: आपको क्या पता होगा यहाँ का....

रति: मामा के साथ मैं चली जाती हूँ..... और उसने अलका को कुछ इन्स्ट्रक्षन दिए और बाहर निकल गयी......

अब घर मे अब रवि अलका थे..... अलका किचन मे काम कर रही थी......

रवि धीरे से पीछे से गया और अलका को बाहों मे भर लिया......

 
अलका एक-दम से चोन्कते हुए... रवि मैं तो डर ही गयी....और उसने अपना किचन का काम चालू रखा.....

रवि अलका से पीछे से सॅट गया और धीरे-धीरे उसे सहलाने लगा और अपने गाल उसके गालों से सटा लिए.....

रवि: मेली प्याली गुलिया दी......

अलका :बहुत प्यार आ रहा है.....

रवि: मैं तो शुरू से अपनी जानू का दीवाना हूँ......

अलका: अच्छा ज़्यादा बातें मत बनाओ...और मुझे काम करने दो....

रवि: मैं भी तो अपना काम कर रहा हूँ....

अलका: अरे भाई कुछ उल्टा सीधा हो जाएगा...

रवि कहाँ मानने वाला था...उसने.. अलका के पेट को सहलाते हुए....अपने हाथ उसकी मद मस्त चूचिओ पर डाल दिए.....लौंडिया सिहर गयी......और अंदर से सारे शरीर मे सिरहन दौड़ गयी.....

अलका: भैया प्लीज़ ...ऐसे मत करो.....गुदगुदी होती है.....

रवि: अच्छा एक बात बता...तूने नोटीस किया....आज माँ कितनी खुश है.....

अलका: क्यों नहीं होगी.....?

रवि: क्या मतलब ?

अलका: ज़्यादा बनो मत....जैसे तुम्हे कुछ पता ही नहीं.... हैं....अलका मुस्कराते हुए...बोली.....

रवि: इसका मतलब.....लगता है कार्य क्रम (चुदाई) हो चुका है.....

अलका: लगता तो ऐसा ही है.....मैने माँ को बहुत दिन बाद इतना खुश देखा...है.....

रवि: अपना कार्य क्रम कब होगा....?

अलका मूड कर बेलन दिखाते हुए.... बहुत नॉटी हो गया.... है.... हटो नहीं तो मारूँगी.....

रवि ने उसे अपनी बाहों मे ले लिया.....और उसके गालों को चूमने लगा..... अलका की चूत फूट पड़ी....और उसमे से जल धारा निकल पड़ी जो अलका ने अपनी जाघो पर फील किया.....

अलका: भाई प्लीज़ काम करने दो...माँ मामा कभी भी आ जायेंगें....बहुत काम पड़ा है.....

रवि: वो दोनो इतनी जल्दी नहीं आएगें.... हनी मून कपल हैं....

अलका : अच्छा जी......

रवि: उदास मुहँ बनाता हुआ.... मेरा नंबर कब आएगा.....?

अलका: अच्छा जी अब कॉमेडी करने लगे.... भैया आपको तो कपिल शर्मा के शो मे जाना चाहिए..... आपसे बड़ा कॉमेडी किंग कोई नहीं हो सकता.....

रवि: तू भी ....एक दम हॉट बॉम्ब हैं... सन्नी लीयोन और मल्लिका शहरावत की छुट्टी हो जाएगी.....

अलका: कितने गंदे हो तुम...अपनी बेहन के बारे मे ऐसे बोल रहे हो....मैं तुमको हॉट बॉम्ब लगती हूँ.....

रवि: कसम से ग़लत नहीं बोल रहा..... बता ना......मेरा नंबर कब आएगा.....?

अलका: कभी नहीं - आएगा....... बस इंतेज़ार करो.....

रवि: एक वो भाई बेहन हैं...(बिरजू/ रति) और एक हम हैं....!

अलका: कभी उनकी जुदाई का सोचा.....कितने दिन बाद मिल रहे हैं..... उनकी जिंदगी केवल संघर्ष मे ही निकल गयी..... अब जैसे बरसों के सूखे के बाद माँ के जीवन में शीतल बारिश हो रही है.......

रवि: हां गुड़िया दीदी तू सच कह रही है.....

अलका: कुछ सोचते हुए....भैया.... हम माँ और मामा को हर तरह से खुश रखने की कोशिश करेंगें...... उन्होने सारी ज़िंदगी संघर्ष मे निकाल दी है......

 


रवि: अलका के चेहरे को चूमते हुए.... हां गुड़िया दी....हम उनका हर तरह से ख़याल रखेगें..... उनकी खुशी मे ही हमारी खुशी है......

अलका: हां भैया अब प्लीज़ मुझे काम करने दो ना......

रवि : हां जाता हूँ....बस केवल एक बार किस करने दे....

अलका:कितनी बार करोगे...... कर तो लिया.....इतनी बार.....

रवि: बस लास्ट बार.....

अलका: मूड कर उसकी ओर मुहँ कर के ..आखें बंद कर के....लो ले लो.....

रवि ने अपने होठ- उसके होंठो से मिला दिए.......और उसे पॅशनेट स्मूचिंग किस करने लगा.....

हाई...क्या दीवाना किस था दोनो के बीच में..... अलका सोच रही थी कि वो उसके गालों को चूमेगा..... लेकिन रवि ने उसके होठों को पकड़ लिया.....

अलका जैसे पिघलने लगी....... रवि ने अपना मुहँ खोल दिया.....और अलका की जीभ अपने जीभ से सटा के चूसने लगा.....

दोनो अब एक दूसरे से खुलते जा रहे थे....

कहते है जब लंड खड़ा होता है तो उसे सिर्फ़ चूत और गान्ड ही

दिखाई देती है फिर वह चाहे जिसकी हो, और अगर वह चूत और

गान्ड किसी रिस्ते की हो तो लंड ज़्यादा झटके मारता है, और रिश्ता

जितना बड़ा या जितना करीबी औरत का होता है लंड उसके नाम पर

सबसे जल्दी खड़ा होता है, और सबसे ज़्यादा मज़ा सबसे करीबी

रिश्ते की औरत को चोदने मे आता है, बड़े बड़े शहरो का

आधुनिक जीवन और खुलापन इंसान की सोच को बहुत जल्दी

बदल कर रख देता है और वह रीलेशन के थोड़ा उपर उठ कर

सोचने लगता है और फिर वह लाइफ के सबसे ज़्यादा मज़ा देने

वाली चीज़ो को पाने की कोशिश मे लग जाता है और रीलेशन को

ताक पर रख कर अपनी एक नई थियरी तैयार करता है, और अपनी

सोच को बदलना ना चाहते हुए भी उसकी सोच मे एक बड़ा

चेंज धीरे धीरे आने लगता है और एक दिन वह पूरी तरह

बदल जाता है, जब वह पूरी तरह बदल जाता है तब अपने

लक्ष्य को पाने का हर संभव प्रयास करता है और अगर उसे

उस प्रयास मे सफलता हाथ नही लगती तो उस लक्ष्य को पाने का

कोई ना कोई आख़िरी रास्ता ज़रूर ढूँढ निकालता है.

तभी दरवाजे पर आहट हुई.... दोनो जैसे नींद से उठे हों और एक झटके में अलग हुए....

दरवाजा खोला रति और बिरजू अंदर आ गये.....

अलका : मैने तरी और रोटी बना दी है....

रति: ठीक है बेटा...अब तू जा... फ्रेश हो आ... मैं देख लेती हूँ....

अलका :ठीक है माँ...

और वो उपर अपने रूम मैं चली जाती है....

अलका उपर अपने रूम की तरफ चली जाती है...

रवि उठ कर बालकनी की ओर जाते हुए अलका को आने का इशारा करता है अलका अपनी गर्दन ना मे हिलाती है, और बाथ रूम मे फ्रेश हो कर जब बाहर आती है और थोड़ी देर बाद अलका भी बालकनी की ओर जाकर रवि के बगल मे खड़ी हो जाती है, क्यों बुला रहा था मुझे,

रवि-दीदी कब दोगि,

अलका- क्या,

रवि उसके दूध की और नज़रे करता है,

अलका -तुनक कर कभी नही,

रवि -दीदी कब तक अपने भाई को तडपाओगि तुम्हे मुझ पर ज़रा भी तरस नही आता है,

अलका -तू तड़प्ता ही रहेगा,

रवि- दीदी, इतना नखरा क्यो करती हो जबकि मैं जानता हूँ कि तुम भी मुझ से प्यार करती हो,

अलका -ओ हो हो बेटा किसी ग़लत फ़हमी मे मत रहना, अलका तेरे हाथ नही आने वाली,

रवि-दीदी तुम मुझे ज़बरदस्ती करने पर मजबूर कर रही हो,

अलका -तू अपनी बहन के साथ ज़बरदस्ती करेगा,

रवि -तुम प्यार से नही दोगि तो फिर मैं क्या करूँ,

अलका- मतलब तू अपनी बहन का रेप करेगा, रवि मुझे तेरी सोच पर घिन आती है, तू ऐसा भी सोच सकता है मुझे मालूम नही था,

रवि-दीदी मैं तुम्हारे लिए तड़प रहा हूँ और तुम मुझे भाषण दे रही हो,

अलका -मैं कोई तेरी प्रेमिका तो नही हूँ कि तू मेरे लिए तड़प रहा है,

रवि- दीदी तुम्हे मेरा यकीन नही है, लेकिन तुम मेरे लिए एक प्रेमिका से भी कही ज़्यादा हो, रवि का चेहरा सीरीयस हो गया था,

 
अलका उसकी आँखो मे देखती हुई, देख रवि अब बहुत मज़ाक हो गया, अब तुझे सुधर जाना चाहिए, ये तू भी जानता है कि तू ग़लत है, उसके बाद भी तू ग़लतियो से सबक लेने की बजाय ग़लती पर ग़लती करता जा रहा है,

रवि-दीदी क्या किसी लड़की से प्यार करना ग़लत है,

अलका -किसी लड़की से प्यार करना ग़लत नही है लेकिन अपनी बहन से प्यार करना ग़लत है,

रवि-पर दीदी मैं तुम्हारे बिना नही रह सकता,

अलका -ये सब बेकार की बातें है, अभी तुझसे कोई लड़की फस जाएगी तो तू अपनी बहन से भी किनारा कर लेगा,

रवि- दीदी तुम्हे अपने भाई पर भरोसा नही है,

अलका -बिल्कुल नही,

रवि -तो मैं ऐसा क्या करूँ कि तुम्हे मुझ पर भरोसा हो जाए,

अलका कुछ सोचते हुए, मुझे नही पता,

रवि- अच्छा क्या तुम मुझे पसंद नही करती,

अलका- नही,

रवि-तो ठीक है दीदी अब मैं तुम्हे परेशान नही करूँगा, लेकिन एक बाद याद रखना की मेरा प्यार सच्चा है इसमे कोई फरेब नही है, मैं आज तुमसे जितना प्यार करता हूँ उतना ही प्यार सारी जिंदगी करता रहूँगा और मेरे दिल मे जो जगह तुम्हारे लिए है वह जगह दुनिया की कोई लड़की नही ले सकती है, रवि अपने सीने पर हाथ रख कर आइ लव यू दीदी दिल से और उसकी आँखे भर आती है और वह वहाँ से चला जाता है,

अलका का चेहरा सीरीयस हो जाता है, और वह परेशान हो जाती है उसका दिल और दिमाग़ काम करना बंद कर देते है, वो थोड़ी देर वही खड़ी रह कर सोचती रहती है, अलका की हालत खराब हो जाती है उसके दिमाग़ मे सिर्फ़ और सिर्फ़ रवि ही घूमता रहता है, वह चिड कर बाल्कनी पर गुस्से मे अपना हाथ मारती है और बड़बड़ाती हुई इस लड़के ने तो मेरा दिमाग़ खराब कर दिया है, मैं भी पागल हूँ जब देखो इसी के ख्यालो मे डूबी रहती हूँ और अपने रूम मे आकर बेड पर लेट जाती है,

रात को खाने के वक़्त अलका रवि को देखती रहती है लेकिन रवि उसकी ओर कोई ध्यान नही देता और खाने मे बिज़ी रहता

है, अलका खाना आधा छोड़ कर उठने लगती है तो

रति- क्या हुआ बेटा खाना क्यो नही खाया,

अलका-मम्मी आज मन नही कर रहा है,

रति- तेरी तबीयत तो ठीक है ना,

अलका- हाँ मम्मी बस आज भूक नही है, और अपने रूम की ओर चली जाती है,

रति : बेटे रवि तुमने अलका को तो कुछ नही कहा ना,

रवि -नही मम्मी हो सकता है उसके पेट मे दर्द हो, और रवि खाना खा कर बालकनी मे आकर खड़ा हो जाता है, रवि मन ही मन सोचता है, अलका ऐसे हाथ आने वाली नही है पर अगर यह मुझसे थोड़ा भी प्यार अगर करती होगी तो वह ज़रूर मुझे ढूढ़ती हुई इधर आएगी,

अलका अपने बेड पर लेटी लेटी अपनी बुक पढ़ रही थी लेकिन उसे बुक मे बार बार रवि का चेहरा नज़र आ रहा था, वह बहुत बैचेनी महसूस कर रही थी, वह किताब को बंद करके रख देती है, रात के करीब 10 बज रहे थे, अलका अपने रूम से निकल कर आस पास देखती है और फिर धीरे से रवि के रूम की ओर जाती है रवि अपने बेड पर नही होता है तब अलका अपनी मम्मी के रूम की ओर जाकर अंदर देखती है उसकी मम्मी मामा के साथ गल-बहियाँ करे बैठी थी..

, अलका सोचने लगती है रवि कहाँ गया फिर वह वापस आकर बाथरूम का दरवाजा चेक करती है वह भी ओपन रहता है तभी अलका की नज़र बालकनी की ओर जाती है और वह बालकनी की ओर चल देती है,

अलका-रवि अभी तक सोया नही,

रवि पलट कर देखता है और उसका दिल खुस हो जाता है वह झूठा गुस्सा दिखाते हुए तुम्हे इससे क्या मैं कुछ भी करूँ,

अलका -उसके पास आकर क्या बात है बहुत नाराज़ दिख रहा है,

रवि -मुझे क्या हक है तुमसे नाराज़ होने का,

अलका -हूँ तो ये बात है, जनाब का गुस्सा हम पर कुछ ज़्यादा ही लग रहा है, खेर मैं तो ये कहने आई थी कि

कल हम पिक्चर देखने चले क्या,

रवि -मुझे नही जाना पिक्चर,

अलका -ठीक है तुम मत देखना तुम सिनिमा हाल मे सो जाना पर मुझे तो दिखा लाओ,

रवि -कॉन सी मूवी देखनी है,

अलका- हम दिल दे चुके सनम,

रवि -क्या,

अलका- अरे भाई पिक्चर का नाम है,

रवि -ठीक है लेकिन हम कॉलेज से ही मूवी देखने चले जाएगे,

अलका- ओके,

रवि- ठीक है सुबह जल्दी उठ जाना कॉलेज भी चलना है,

अलका- ओके बाबा अब मैं जाती हूँ सोने गुड नाइट,

रवि- धीमी आवाज़ मे कितना रंग बदलती हो,

अलका पलट कर तुमने कुछ कहा,

रवि- नही नही गुड नाइट,

और अलका अपनी मस्तानी गान्ड हिलाते हुए जाने लगती है और रवि मन ही मन मुस्कुराता हुआ उसकी मस्तानी गान्ड को देखते हुए दीदी अगर तुमने मुझे पलट कर देखा तो मैं समझुगा कि तुम्हारे दिल मे मैं अपनी मोहब्बत की चिंगारी लगा चुका हूँ,

 
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