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मैं झट से उठा और अम्मी की तरफ देखकर बोला- “जी अम्मी क्या बात है?”
अम्मी ने कहा- “7:00 बज चुके हैं और निदा नहाकर किचेन में चली गई है। कहीं वो यहाँ इस रूम में हमें उठाने ना आ जाए, इसलिए जल्दी से उठो और कपड़े पहनो नहाकर। कब तक नंगे ही पड़े रहोगे?”
मैं झट से उठा और देखा तो अंकल कहीं नजर नहीं आए। तो अम्मी ने कहा सफदर चला गया है अपने मकान पे। तुम नहा लो।
अब तो मैं झट से कपड़े लेकर बाथरूम में चला गया और नहाकर फरी बाजी वाले रूम में घुस गया जहाँ बाजी अपने ऊपर कम्बल लिए सो रही थी। मैं आगे बढ़ा और बाजी के ऊपर से हल्का सा कम्बल पकड़कर नीचे को। सरकाया तो बाजी की आँख खुल गई। लेकिन मेरी ये देखकर आँखें खुली की खुली रह गईं कि बाजी की चूचियां बिल्कुल नंगी थीं। बाजी ने मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा के अपनी आँखें बंद कर ली।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही खड़ा रहा और बाजी को देखता रहा और फिर एक झटके से बाजी का कम्बल उतार दिया तो मुझे भी झटका लगा, क्योंकी बाजी कम्बल के नीचे बिल्कुल नंगी नजर आ रही थी। मैंने एक हाथ से बाजी की रानों को जरा सा खोला तो बाजी बुरी तरह शर्मा गई और अपना चेहरा मेरी तरफ से घुमा लिया और अपना एक हाथ चेहरे पे रखकर मुझसे मुँह छुपाने लगी।
अभी मैं बाजी को इस हाल में देख ही रहा था और अपने खड़े हो जाने वाले लण्ड को सहला ही रहा था कि रूम का दरवाजा खुला और अम्मी रूम में आ गई और बाजी को इस हाल में देखकर और मुझे बाजी के पास खड़े। अपना लण्ड सहलाता देखकर अम्मी को थोड़ा गुस्सा सा आ गया और वो जरा गुस्से से बोली- “कुछ शर्म लिहाज भी है तुम लोगों को या नहीं?"
दरवाजा खुलने और अम्मी को इस तरह अंदर आते देखकर बाजी ने एक झटके से कम्बल को फिर से अपने ऊपर खींच लिया सिर से ऊपर तक।
तब अम्मी बोली- “चलो अब ये ड्रामा बंद करो शर्माने का, और जल्दी से नहाकर कपड़े पहन लो...” अम्मी इतना बोलकर रूम से निकल गई।
बाजी ने सिर से कम्बल हटाकर देखा और फिर उठते हये बोली- “भाई देख तो लेते कि दरवाजा भी बंद है या नहीं?” और बाथरूम की तरफ चल दी।
अम्मी ने कहा- “7:00 बज चुके हैं और निदा नहाकर किचेन में चली गई है। कहीं वो यहाँ इस रूम में हमें उठाने ना आ जाए, इसलिए जल्दी से उठो और कपड़े पहनो नहाकर। कब तक नंगे ही पड़े रहोगे?”
मैं झट से उठा और देखा तो अंकल कहीं नजर नहीं आए। तो अम्मी ने कहा सफदर चला गया है अपने मकान पे। तुम नहा लो।
अब तो मैं झट से कपड़े लेकर बाथरूम में चला गया और नहाकर फरी बाजी वाले रूम में घुस गया जहाँ बाजी अपने ऊपर कम्बल लिए सो रही थी। मैं आगे बढ़ा और बाजी के ऊपर से हल्का सा कम्बल पकड़कर नीचे को। सरकाया तो बाजी की आँख खुल गई। लेकिन मेरी ये देखकर आँखें खुली की खुली रह गईं कि बाजी की चूचियां बिल्कुल नंगी थीं। बाजी ने मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा के अपनी आँखें बंद कर ली।
कुछ देर तक मैं ऐसे ही खड़ा रहा और बाजी को देखता रहा और फिर एक झटके से बाजी का कम्बल उतार दिया तो मुझे भी झटका लगा, क्योंकी बाजी कम्बल के नीचे बिल्कुल नंगी नजर आ रही थी। मैंने एक हाथ से बाजी की रानों को जरा सा खोला तो बाजी बुरी तरह शर्मा गई और अपना चेहरा मेरी तरफ से घुमा लिया और अपना एक हाथ चेहरे पे रखकर मुझसे मुँह छुपाने लगी।
अभी मैं बाजी को इस हाल में देख ही रहा था और अपने खड़े हो जाने वाले लण्ड को सहला ही रहा था कि रूम का दरवाजा खुला और अम्मी रूम में आ गई और बाजी को इस हाल में देखकर और मुझे बाजी के पास खड़े। अपना लण्ड सहलाता देखकर अम्मी को थोड़ा गुस्सा सा आ गया और वो जरा गुस्से से बोली- “कुछ शर्म लिहाज भी है तुम लोगों को या नहीं?"
दरवाजा खुलने और अम्मी को इस तरह अंदर आते देखकर बाजी ने एक झटके से कम्बल को फिर से अपने ऊपर खींच लिया सिर से ऊपर तक।
तब अम्मी बोली- “चलो अब ये ड्रामा बंद करो शर्माने का, और जल्दी से नहाकर कपड़े पहन लो...” अम्मी इतना बोलकर रूम से निकल गई।
बाजी ने सिर से कम्बल हटाकर देखा और फिर उठते हये बोली- “भाई देख तो लेते कि दरवाजा भी बंद है या नहीं?” और बाथरूम की तरफ चल दी।