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Guest
Flashback.......................
ये बात है १९७० की..... रति की नयी-नयी शादी हुई थी..... वो पहली बार...... ससुराल से मैके आई.... थी.... जैसा गाओं मे होता है....हर कोई नयी नवेली दुल्हन की खबर लेने को उत्सुक रहता है...
माँ ने पूछा कैसी है बेटी...
ठीक हूँ माँ....
और लाला जी (दामाद रामलाल)
उन्हे क्या होगा वो भी ठीक हैं....
माँ को उसकी उदासी कुछ रहस्यमई सी दिखी.....माँ मेरा 12थ का पेपर है...कुछ पढ़ाई कर लूँ...
उसका भाई बिरजू.... जो गाओं का सबसे लाड़ला लड़का था.... ना जाने कितनी भाभियों को अभी... तक चोद चुका था... बहुत ही शैतान... और बदमाश किसम का लड़का था.... जब उसे पता लगा कि उसकी बेहन रति गाओं वापस आ गयी है तो वो दौड़ कर अपने घर पहुँच गया....
रति जो अभी केवल 18 साल की ही होगी.... और बिरजू अभी कोई 20 साल का बांका जवान था.....
रति अपनी साड़ी उतार कर ब्लाउस पेटिकोट में थी....
उसे एक पल देख कर बिरजू दंग सा रहा गया...... पर उसे चेहरे पर एक टेन्षन सी दिखी.....
क्या हुआ ये इतने गुस्से मैं क्यों हो.....रति के कड़े चूचक देख कर उसका लंड वैसे ही फनफना गया..............
कुछ देर ऐसे ही घूरता रहा.....
ऐसे क्या देख रहा है....
कुछ नहीं इतने दिन बाद तू आई है.... तुझे देख रहा हूँ... और एक टक उसकी चूचिओ को निहरता रहा...
उसे ऐसे देखते हुए.....रति ने अपनी नज़रें घुमा ली और उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली...
अब बिरजू उसकी मद मस्त गान्ड को घूर्ने लगा.....रति अपनी साड़ी की तह लगा रही थी.....बिरजू धीरे से उसकी पीछे गया.......और रति को अपनी.... बाहों में भर लिया......उसका लंड लोहे की रोड की तरह तन गया था......रति का मुलायम-मुलायम बदन पा कर तो वो बिल्कुल पागल हो गया....
रति चोन्कते हुई...... आए भैया क्या करते हो....चलो काम करने दो....
पर बिरजू कहाँ मान ने वाला था.... उसने रति को अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपने लौडे का अहसास उसकी गान्ड पर दे दिया....लौंडिया सिहर गयी.... जिस अहसास के लिए वो तरस रही थी.....जो उसे अपने पति से नहीं मिला , पर हाई री किस्मत , मिला तो वो भी सगे भाई से.......
संस्कारों की एक दीवार थी ....लेकिन बिरजू तो जैसे पागल आवारा.......वो तो रति को छोड़ ही नहीं रहा था.....
क्या भैया ऐसे क्यों कर रहा..... है...
वो बोला अपनी बेहन पर बहुत प्यार आ रहा है....और उसे ऐसे ही मसलता रहा......अब तो रति भी स्पर्श सुख का भरपूर आनंद ले रही थी....
बिरजू उसके गालों को भर-भर के चूस-चूस कर चूमने लगा... लौंडिया गन-गना गयी.... हाई क्या करते हो भैया.... कोई ऐसा करता है अपनी बेहन से....और आहें भरने लगी.....
बिरजू सोच रहा था.... अब तो उसकी बेहन की सील खुल चुकी होगी... अब तो उसका भी कुछ हक़ बनता है....ये कह कर बिरजू उसे लेकर पास पड़ी खटिया पर बैठ गया..... और उसने रति को अपनी गोद में बिठा लिया..... और उसे चारों तरफ से मसल रहा था....
.आज बहुत मन कर रहा है अपनी बहना को प्यार करने का....वो बोला....
तभी उनकी माँ दरवाज़े पर आई....और उसने देखा.... बिरजू अपनी बेहन रति को गोद में ले कर.... मसल-मसल के प्यार कर रहा है....वो थोड़ी देर दरवाज़े पर खड़ी हो कर दोनो की रास लीला देखने लगी...और मन ही मन मंद-मंद मुस्का गयी...... उसने सोचा रति अब सयानी हो गयी है.... शादी भी हो गयी है इसकी...... पर शादी का सुख नहीं मिला इसे.....वो कुछ सोचते हुए आगे बढ़ गयी.....
दोनो अभी भी अपनी मस्ती मे मस्त थे.....बिरजू अपना हाथ रति के पेट पर और उसकी गोलाईयों के नीचे फेर रहा था... और कभी-कभी उसकी गूलाईयों को भी टच कर रहा था....
तभी माँ को देख कर रति उठने को हुई.... पर बिरजू ने उसे कस लिया...
अरे बिरजू बड़ा प्यार हो रहा है... अपनी बहना पर..... ठीक है बेटा... खूब करो....
हां माँ बहुत दिनो बाद आई है... इसलिए....
रति का मुहँ शरम से लाल हो रहा था...उसने बिरजू को कोहनी मारी....और उसका हाथ वहाँ से हटा दिया....और एक दम से खड़ी हो गयी... और माँ के पास चली गयी....
बिरजू अपने लंड को पायजामे मे छुपाने लगा....और खड़ा हो गया.... माँ और रति किचन मे खाना बनाने लगे..... सबने साथ मे खाना खाया....और सोने की तैयारी करने लगे.....
माँ बोली मैं बाहर घैर(जहाँ जानवर बाँधते हैं) पर सोने जा रही हूँ.....
रति बोली क्यों माँ.....
अरे मुझे पता नहीं क्यों अंदर नींद नहीं आती...
अरे माँ मैं बाहर सो जाउन्गा....बिरजू बोला....(वैसे वो माँ के इस प्रस्ताव से मन ही मन बहुत खुश था)..
.नहीं माँ बोली तुम दोनो अंदर कमरे में सो जाना....और बंद कर लेना...और दोनो बेड पर सो जाना... नीचे कोई कीड़ा भी काट सकता है....माँ ने एक हिदायत से कहा और बाहर चली गयी...
बिरजू की तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा......उसने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया....
ये बात है १९७० की..... रति की नयी-नयी शादी हुई थी..... वो पहली बार...... ससुराल से मैके आई.... थी.... जैसा गाओं मे होता है....हर कोई नयी नवेली दुल्हन की खबर लेने को उत्सुक रहता है...
माँ ने पूछा कैसी है बेटी...
ठीक हूँ माँ....
और लाला जी (दामाद रामलाल)
उन्हे क्या होगा वो भी ठीक हैं....
माँ को उसकी उदासी कुछ रहस्यमई सी दिखी.....माँ मेरा 12थ का पेपर है...कुछ पढ़ाई कर लूँ...
उसका भाई बिरजू.... जो गाओं का सबसे लाड़ला लड़का था.... ना जाने कितनी भाभियों को अभी... तक चोद चुका था... बहुत ही शैतान... और बदमाश किसम का लड़का था.... जब उसे पता लगा कि उसकी बेहन रति गाओं वापस आ गयी है तो वो दौड़ कर अपने घर पहुँच गया....
रति जो अभी केवल 18 साल की ही होगी.... और बिरजू अभी कोई 20 साल का बांका जवान था.....
रति अपनी साड़ी उतार कर ब्लाउस पेटिकोट में थी....
उसे एक पल देख कर बिरजू दंग सा रहा गया...... पर उसे चेहरे पर एक टेन्षन सी दिखी.....
क्या हुआ ये इतने गुस्से मैं क्यों हो.....रति के कड़े चूचक देख कर उसका लंड वैसे ही फनफना गया..............
कुछ देर ऐसे ही घूरता रहा.....
ऐसे क्या देख रहा है....
कुछ नहीं इतने दिन बाद तू आई है.... तुझे देख रहा हूँ... और एक टक उसकी चूचिओ को निहरता रहा...
उसे ऐसे देखते हुए.....रति ने अपनी नज़रें घुमा ली और उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली...
अब बिरजू उसकी मद मस्त गान्ड को घूर्ने लगा.....रति अपनी साड़ी की तह लगा रही थी.....बिरजू धीरे से उसकी पीछे गया.......और रति को अपनी.... बाहों में भर लिया......उसका लंड लोहे की रोड की तरह तन गया था......रति का मुलायम-मुलायम बदन पा कर तो वो बिल्कुल पागल हो गया....
रति चोन्कते हुई...... आए भैया क्या करते हो....चलो काम करने दो....
पर बिरजू कहाँ मान ने वाला था.... उसने रति को अपने से बिल्कुल सटा लिया और अपने लौडे का अहसास उसकी गान्ड पर दे दिया....लौंडिया सिहर गयी.... जिस अहसास के लिए वो तरस रही थी.....जो उसे अपने पति से नहीं मिला , पर हाई री किस्मत , मिला तो वो भी सगे भाई से.......
संस्कारों की एक दीवार थी ....लेकिन बिरजू तो जैसे पागल आवारा.......वो तो रति को छोड़ ही नहीं रहा था.....
क्या भैया ऐसे क्यों कर रहा..... है...
वो बोला अपनी बेहन पर बहुत प्यार आ रहा है....और उसे ऐसे ही मसलता रहा......अब तो रति भी स्पर्श सुख का भरपूर आनंद ले रही थी....
बिरजू उसके गालों को भर-भर के चूस-चूस कर चूमने लगा... लौंडिया गन-गना गयी.... हाई क्या करते हो भैया.... कोई ऐसा करता है अपनी बेहन से....और आहें भरने लगी.....
बिरजू सोच रहा था.... अब तो उसकी बेहन की सील खुल चुकी होगी... अब तो उसका भी कुछ हक़ बनता है....ये कह कर बिरजू उसे लेकर पास पड़ी खटिया पर बैठ गया..... और उसने रति को अपनी गोद में बिठा लिया..... और उसे चारों तरफ से मसल रहा था....
.आज बहुत मन कर रहा है अपनी बहना को प्यार करने का....वो बोला....
तभी उनकी माँ दरवाज़े पर आई....और उसने देखा.... बिरजू अपनी बेहन रति को गोद में ले कर.... मसल-मसल के प्यार कर रहा है....वो थोड़ी देर दरवाज़े पर खड़ी हो कर दोनो की रास लीला देखने लगी...और मन ही मन मंद-मंद मुस्का गयी...... उसने सोचा रति अब सयानी हो गयी है.... शादी भी हो गयी है इसकी...... पर शादी का सुख नहीं मिला इसे.....वो कुछ सोचते हुए आगे बढ़ गयी.....
दोनो अभी भी अपनी मस्ती मे मस्त थे.....बिरजू अपना हाथ रति के पेट पर और उसकी गोलाईयों के नीचे फेर रहा था... और कभी-कभी उसकी गूलाईयों को भी टच कर रहा था....
तभी माँ को देख कर रति उठने को हुई.... पर बिरजू ने उसे कस लिया...
अरे बिरजू बड़ा प्यार हो रहा है... अपनी बहना पर..... ठीक है बेटा... खूब करो....
हां माँ बहुत दिनो बाद आई है... इसलिए....
रति का मुहँ शरम से लाल हो रहा था...उसने बिरजू को कोहनी मारी....और उसका हाथ वहाँ से हटा दिया....और एक दम से खड़ी हो गयी... और माँ के पास चली गयी....
बिरजू अपने लंड को पायजामे मे छुपाने लगा....और खड़ा हो गया.... माँ और रति किचन मे खाना बनाने लगे..... सबने साथ मे खाना खाया....और सोने की तैयारी करने लगे.....
माँ बोली मैं बाहर घैर(जहाँ जानवर बाँधते हैं) पर सोने जा रही हूँ.....
रति बोली क्यों माँ.....
अरे मुझे पता नहीं क्यों अंदर नींद नहीं आती...
अरे माँ मैं बाहर सो जाउन्गा....बिरजू बोला....(वैसे वो माँ के इस प्रस्ताव से मन ही मन बहुत खुश था)..
.नहीं माँ बोली तुम दोनो अंदर कमरे में सो जाना....और बंद कर लेना...और दोनो बेड पर सो जाना... नीचे कोई कीड़ा भी काट सकता है....माँ ने एक हिदायत से कहा और बाहर चली गयी...
बिरजू की तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा......उसने जल्दी से दरवाजा अंदर से बंद कर लिया....