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गुप्तगू ... बहन के साथ : भाग 1

Neelkamal626

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम नील है , और मै महाराष्ट्र के सातारा के पास एक गांव का रहने वाला हूं | अब मेरी उम्र अठ्ठाईस साल की है और मै अभी पुणे मे बिझनेस करता हूं | मेरी खुद की चार फैक्ट्री है, एक सातारा मे और तिन पुणे मे है | मैने शुरुवात सातारा से की थी , और अब मेरा पुणे मे बहुत बडा बिझनेस है| मेरे पास बेशुमार दौलत है और इस बिझनेस को मै और मेरी छोटी बहन दिशा दोनों मिलकर संभालते है |


दोस्तों आज से दस साल पहले, मेरे पेरेंट्स की कार एक्सिडेंट मे डेथ हुई थी, तब हमारी कोई भी फैक्ट्री नही थी ना ही कोई बिझनेस था | हमारी गांव मे खेती थी 150 एकड और खेती मे बहुत जादा आय होती थी | गांव मे बडी सी हवेली, कार , बीस-पच्चीस नोकर चाकर सब कुछ था | सब नोकर हवेली के पिछे बने रूमस् मे रहते, उनका परिवार ही रहता सबका | मै उस समय पुणे मे रहकर पढाई करता था और दिशा घर पर ही गांव मे पढती थी | तब मेरी उम्र अठारा साल और दिशा सोला साल की थी |

हादसा होणे के बाद मै पढाई छोडकर गांव चला गया | पुरी खेती मुझे संभालनी थी पर खेती मे मेरा मन नही लगता था | मुझे कोई बडा बिझनेस करना था | खेती मे हमारे नोकर ही काम करते थे , मै जादा ध्यान नही देता था | मेरी बहन दिशा भी अभी बडी हो रही थी | मम्मी पापा के बाद हम दो नों ही एक दुसरे का सहारा थे |


दिशा दिखने मे बहुत ही सुंदर गोरी थी, और शरीर से भर रही थी | वैसे तो मेरा उस पर जादा ध्यान नही जाता था पर एक बार हमारे साथ एक ऐसा इनसिडंन्ट हुआ तब से हमारा एकदुसरे के प्रती देखने का नजरिया बदल गया | उस दिन मै खेत से आ रहा था, दोपहर का वक्त था , दिशा भी स्कूल से आयी थी | और अपने रूम मे कुछ कर रही थी | मुझे उससे बात करनी थी इसलिए मै उसके रुम मे चला गया | मुझे नही पता ऐसा कुछ दृश्य देखने को मिल जाएगा !

दिशा पूरी नंगी होकर बेड पर लेटी हुई थी, दोनों टांगों को घुटनों मे मोडकर जांघे खुली थी, गुप्तांग मे पेन घुसाया था और हात से अंदर बाहर कर रही थी, दुसरा हात छाती पर था, जैसे ही दरवाजा खुला दिशा उठकर बैठी और झट से कंबल मे घुस गयी पर मै सब कुछ देख चुका था | लेकिन मैने तुरंत पिछे मुडकर खडा हुआ, वो चिल्लाई... भैय्याsss
ऐसे कोई आता है क्या? दरवाजा खटकटाया क्यों नही आपने?
मै: sorry दिदी ... गलती हुई... आगे से ऐसा नही होगा...
दिशा: ओके भैया... अब जाईए यहां से...
मै भागकर वापस लौटा
तब से वो सीन बार बार मेरी आंखों के सामने आता है और मेरे शिश्न मे खुन भर जाता है | उसकी बडी बडी ,मोटी मोटी टांगे, टांगों के बिच भूरे रंग की योनी और उसपर भूरे- काले बडे हुए बाल, नाजूक पेट , भरी भरी छाती, नारियल के आकार के उरोज.... हाय sss
मै भूल ही नही सकता था, जब भी दिशा मेरे सामने आती मेरा शिश्न मोटा हो जाता था | दिशा भी गुस्साई नजर से मुझे घुरती और निकल जाती थी, वो अब मेरे सामने जादा नही आती थी | मुझे ये सब कुछ अच्छा नही लगा , क्योंकि वो मेरी सगी बहन थी और अब इस दुनिया में हमारा और कोई नही था |



इन चिजों को भूलने के लिए मैने एक छोटा बिझनेस शुरू किया और अपना पूरा फोकस उसी पर लगाया | एक साल मे दिशा भी कोलेज की पढाई के लिए पुणे चली गई | हमारी जादा बातचीत नही होती थी | कभी कभी मै उससे मिलने चला जाता था | अब वो मुझसे बडे प्यार से मिलती थी | दुर जाने की वजह से, हो सकता है|

दो साल तक वो गांव नही लौटी, सीधे बारवी के बाद ही घर आ गई | मै उसे देखकर हैरान रह गया | कमाल की लग रही थी वो | पांच फिप नौ इंच हाईट, लंबी नाक , मोटी मोटी आंखे बडेबडे उरोज, पतली कमर बडे नितंब और गोरा रंग ...बहुत जादा सेक्सी हो गई थी , उसे देखकर मेरे लिंग मे तनाव आ गया था , पर मैने अपने आप को कंट्रोल कर लिया, दिशा मुझसे गले मिली, उसके उरोज मेरी छाती पर टच हो गए | काफी बडे बडे हो गए थे |

दिशा अब दो महिनों तक घर मे रहने वाली थी, फिर आगे की एडमिशन कहां करवाएगी उसकी मर्जी थी | मेरा बिझनेस भी बढ गया था, अब खेती कम मै बिझनेस पर जादा फोकस देने लग रहा था | पैसा भी बढ गया था |


मेरी एज अब इक्कीस साल हुई थी और दिशा उन्नीस की | मैने दिशा के बारे मे गंदे खयालात काफी हद तक मन से निकाले थे | पर अब उसके आने से फिर से मेरा मन दिशा के कमरे की तरफ चला जाता था पर मै अपने आप को कंट्रोल करता था | मै दिल बहलाने के लिए अश्लील साहित्य पढता था , खासकर भाई बहन वाली कहाणीया | उस समय मैने एक बडी बूक खरीदकर लाया था | उसमे पूरी किताब मे एक ही बडी कहाणी थी , उपन्यास की तरह वो भी भाई बहन के प्यार के उपर | रोज थोडा थोडा पढकर पेंन्सिल से निशान लगाकर रखता था , फिर अगले दिन वही से आगे पढता और पहला निशान इरेसर से मिटा देता था | दिनभर काम मे व्यस्त रहता और रात को गैरह बारा बजे तक पढकर हस्तमैथून करके सो जाता था | दिशा दिनभर घर पर ही रहती थी |


एक बार मै कहाणी पढने के बाद निशान लगाकर किताब को तकिए के निचे छुपाकर रखा था | अगले दिन रात को खाना खाकर मै बिस्तर पर आया तो सोचा पढ लिया जाए, और मै किताब निकालकर निशान वाले पेज को खोला और आगे पढने लगा | तब अचानक मेरी नजर एक और दुसरे निशान पर गई जो निशान मैने नही बनाया था | मैने गौर से देखा मेरा निशान अलग था , एक और निशान लगाया था वो अलग तरिके का था |

लेकिन ये निशान किसने लगाया होगा? मै सोच मे पडा | इसका मतलब यह किताब कोई और भी पढ रहा था | पर कोण पढ रहा है? इस रूम मे कौन कौन आता है? मै याद करने लगा | मेरी बहन? नही वो कभी भी मेरी रूम मे गलती से भी नही आती है, ना पहले कभी आयी थी|
कामवाली लडकी? सुनंदा? हां वो आ सकती है | रोज तो आती है , सफाई के लिए| लेकिन कन्फर्म कैसे होगा? क्या किया जाए? मै कुछ सोचने लगा | फिर मेरे दिमाग मे एक आयडिया आया और मै अपनी पहली चाल चलने के लिए तैयार हुआ |


मैने उस दुसरे निशान के आगे एक ऐसी स्माईली बनाई जैसे वाटस् अप मे होती है, और यह दर्शाती है जैसे पुछ रही हो की तुम्हे कैसा लग रहा है? और आश्चर्य हुआ हो | मै किताब आगे पढने लगा और निंद आने पर आगे अपना निशान लगाकर सो गया |

अगले दिन जब मै घर आया तब दिशा दिदी मेरा इंतजार कर रही थी , मैने पुछा तो बोली भैया आज हम साथ मे खाना खाएंगे | आज मुझे खाना नोकरों ने नही दिशा ने बडे प्यार से परोसा , साथ ही उसने भी खाया और हम गुड नाइट बोलकर अपने अपने रुम मे चले गए | मैने तुरंत किताब खोली और कल वाले स्माईली के आगे कुछ और निशान या फिर कुछ और लिखा है की नही ये देखने लगा पर कुछ नही मिला | मै तो निराश हुआ | फिर आगे के पन्नै निकाले जहां तक मैने कल पढा था और निशान लगाया था | मेरी आंखे चमक गई | मै खुषी से उछल गया क्योंकी वहां पर एक ऐसा चित्र निकाला था | अब यह तो कन्फर्म हो ही गया की कोई तो किताब पढ रहा है और मुझे रिप्लाय भी दे रहा है |

फिर मैने आगे की स्टेप चढने का फैसला किया | जैसे उस किताब मे कहाणी अपने चरम पर थी, यानी की भाई बहन आपस मे प्यार करने लगे थे , और उन दोनों मे संबंध भी स्थापीत हो चुके थे |
फिर मैने अगली चाल चली | उसके इस निशान के आगे मैने यह निशान बनाया और आगे कुछ पन्नै पढकर निशान लगाया और सो गया |

अगले दिन भी सेम , दिशा ने ही मेरा खाना लगाया और हम साथ मे ही खाना खाने लगे | दिशा बार बार मुझे घुर रही थी | और बिच बिच मे स्माईल भी दे रही थी| बहुत ही सुंदर लग रही थी वह मुरत की तरह | लेकिन मै खाना जल्दी खतम करके अपने रुम मे चला गया | जल्दी से किताब निकाली और मैने कल जहां तक पढा था वहां का निशान देखा तो मेरी खुशी का कोई ठिकाणा नही रहा | उसने वहां पर ये वाले इतने निशान और आगे Too You ऐसा लिखा था | मै तो खुशी से उछलने लगा , पर अब तक ये कौन रिप्लाय कर रहा है ये नही पता था | अब मैने एक और चाल चली, फिर मैने उसके आगे लिखा " क्या मेरे लिए रास्ता खुला है ?" देखते है क्या रिप्लाय आता है? उस रात मै सो नही पाया... मुठ मारके सोना पढा |

अगले दिन मै काम पर देरी से गया और सुनंदा जब सफाई करने आ गई तो उससे कहां की आज मेरे रूम मे सफाई मत करना, वहां पर मैने कुछ जरूरी सामान रखा है, कही इधर उधर ना हो जाए और उसे रूम मे जाने के लिए मना भी कर दिया | वो ठिक है भैयाजी बोलकर चली गई |
फिर मै काम पर चला गया | आज फैक्ट्री के काम मे भी मन नही लग रहा था पर जैसे तैसे टाईम पास करके मै रात को घर आ गया , तो दिशा मेरा इंतजार कर रही थी |
दिशा: भैया आप भी ना बहुत देर करते हो , जरा जल्दी आया करो | वर्कर्स तो होते ही है ना, आप तो आया करो टाईम से | हमे इंतजार करना पडता है...

नील: दिशा तुम खाना खाकर सो जाया करो, मेरी राह मत तका करो...

दिशा: नही भैया मेरा मन नही लगता आपके बिना, आप बस जल्दी आया करो |

नील: ओके दिदी... कल से जल्दी आया करूंगा... खुश...

दिशा: प्रॉमिस?

नील: प्रॉमिस..

दिशा: चलो भैया खाना खाते है...

मै सोच रहा था की दिशा पिछले कुछ दिनों से मेरेसे बहुत प्यार से और खुलकर बात करने लगी थी | चलो अच्छा है | हम खाना खाकर, जल्दी से अपने अपने रुम मे चले गए | जाते ही पहले मैने किताब देखी |जल्दी जल्दी मैने वो पन्ना निकाला जहां मैने कल लिखा था | वहां पर अब कोई निशान नही था और ना ही कुछ लिखा था | एक छोटा कागज का तुकडा जो तय लगाकर रखा था| मैने उसे खोला , तो उसमे परफ्युम की खुशबू आयी | मेरी खुशी का ठिकाणा नही था दोस्तों, क्योंकि वो परफ्युम दिशा ही युज करती है, उसका फेवरेट परफ्युम है ये , जिसकी खुशबू मुझे ज्ञात थी | मैने पहले तो उस चिठ्ठी को सूंघा फिर किस किया और पढने लगा | छोटे अक्षरों मे लिखा था, " मै तो कब से तैयार हूं , आप ही ध्यान नही देते हम पर !"


इतना पढकर मेरा पुरा शरीर सिहर गया | आज मुझे अपनी बहन की ओर से खुला न्योता आया था , वो भी संभोग करने का | आज एक बात और क्लियर हुई थी, ये मेरी बहन ही है, क्योंकी आज मैने सुनंदा को मेरे रूम मे जाने से मना कर दिया था | सुनंदा और दिशा को छोडकर बाकी नोकरों को मेरे बेडरूम मे जाने की परमिशन नही थी|

अब यह तो क्लिअर हो चुका था की मेरे साथ गुप्तगू करने वाली दिशा है, सुनंदा नही | एक बार तो मै थोडा निराश भी हुआ क्योंकि सुनंदा भी दिशा से कम नही थी | उतनी ही सुंदर, और सेक्सी थी | दोनों की आयु भी सेम ही थी | सुनंदा के माता पिता भी हमारे यहां कई सालों से इमानदारी से काम करते है, और यही पर रहते थे | सुनंदा भी दिशा के साथ ही स्कूल मे जाती थी | फर्क इतना था की वो हमारे यहां काम करती थी बस | लेकिन अब मुझे सुनंदा नही दिशा के उपर ध्यान देना था , सो मै आगे का सोचने लगा की , मंजील तक कैसे पहुंचा जा सके?

अब मेरा मन किताब पढने मे नही लग रहा था, किताब वाली कहानी मेरी जिंदगी मे दोहरा रही थी | मैने भी एक चिठ्ठी लिखकर रखी, मैने लिखा " क्या यह तुम हो? मुझे यकिन नही हो रहा, अपनी किस्मत पर " अगले दिन जवाब आया " मुझे वाटस् अप पर मेसेज करो "

दोस्तों अगले पार्ट मे पढिए आगे क्या हुआ?
 
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