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मांगलिक बहन

उसने अपनी एक टांग को टेबल पर रखा और अपनी चूत को शीशे में देखा तो उसकी आंखे उत्तेजना से लाल हो गई। उसकी चूत पूरी तरह से लाल होकर सूज गई थी जिससे उसे दर्द का एहसास हो रहा था। शहनाज़ ने धीरे से अपनी चूत के होंठ को सहलाया फिर हल्के गुनगुने पानी से नहाने लगी। शहनाज़ के बदन में हो रहा चुदाई का दर्द काफी हद तक कम हो गया और वो अपने कपड़े पहनते हुए अजय के बारे में सोचने लगी। कमीना कहीं का, कोई भला ऐसे करता है क्या ? मेरी जगह कोई ए क कुंवारी लड़की होती तो उसका क्या हाल होगा।

ये ही सब सोचते सोचते वो बाहर आ गई और फिर सबने साथ में नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद अजय उन्हें आज रात होने वाली पूजा के बारे में समझाने लगा।

अजय:" बस आज रात शहनाज़ की आखिरी विधि होगी और उसके बाद कल आखिरी पूजा सिर्फ सौंदर्या के साथ होगी क्योंकि आज रात के बाद मंगल का प्रभाव कम हो जाएगा। आज पूर्णिमा की रात होगी और थोड़ी देर के लिए रात में इन्द्र धनुष दिखाई देगा जो इस बात का सबूत होगा कि हम कामयाब होने वाले है।

दोनो ने ध्यान से उसकी बाते सुनी और देखते ही देखते शाम के छह बज गए तो सभी ने हल्का सा खाना किया और फिर पूजा की आगे की विधि करने के लिए गंगा के किनारे आ गए।

बाहर अंधेरा हो गया था और तीनो के बदन पर अभी सिर्फ काली चादर लिपटी हुई थी।

अजय एक स्थान पर बैठ गया हवन के पास बैठ गया और मंत्र पढ़ने लगा। देखते ही देखते चारो ओर से जोर जोर से हवाएं चलने लगी और अजय के चेहरे पर मुस्कान फैल गई तो सौंदर्या और शहनाज़ दोनो स्माइल करने लगी।

अजय ने दोनो को उठने का इशारा किया और शहनाज़ के उठते ही उसके जिस्म पर लिपटी हुई चादर हवा के झोंके के साथ उड़ती चली गई और वो पूरी तरह से नंगी हो गई। शहनाज़ शर्म से लाल हो गई क्यूंकि सौंदर्या और अजय के सामने उसे बेहद शर्म आ रही थी।

अजय ने हवन कुंड के पास से एक लालटेन उठाई और शहनाज़ को अपने पास आने का इशारा किया। शहनाज़ मुंह नीचे किए धीरे धीरे चलती हुई उसके पास आई और अजय ने उसे लालटेन थमा दी और कुछ मंत्र पढ़ने लगा और फिर बोला:"

" शहनाज़ अब ये लालटेन जलती रहेगी चाहे कितनी भी तेज हवाएं चले। तुम इसे लेकर आगे आगे चलो और पीछे पीछे सौंदर्या आएगी। जैसे ही सामने इन्द्र धनुष दिख जाए तो आज की आधी पूजा कामयाब समझी जाएगी।

शहनाज़ का जिस्म लालटेन की रोशनी में बेहद खूबसूरत लग रहा था और उसकी चूत के आश पास मंगल यंत्र अभी भी हिल रहा था जिससे शहनाज़ बेचैन हो गई थी। उसने लालटेन को हाथ में लिया और आगे बढ़ने लगी।

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शहनाज़ के चलने के उसकी नंगी गांड़ पूरी तरह से कामुक अंदाज में हिल रही थी जिसका असर अजय के साथ साथ सौंदर्या पर भी हो रहा था। सौंदर्या को शहनाज़ के जिस्म पर पड़े हुए लाल निशान देखकर हैरानी हो रही थी कि इसे क्या हो गया है, कहीं ये सब पूजा का असर तो नहीं है या फिर अजय ने ही शहनाज़ को चोद....

सौंदर्या अगले ही पल सोचने लगी कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता, जरूर पूजा की वजह से ही ये सब हुआ है। वो शहनाज़ के पीछे पीछे चल रही थी और अजय उसके ठीक पीछे। तभी हवाएं बहुत तेजी से चलने लगी और लालटेन की बत्ती इधर उधर हिल रही थी लेकिन बुझ नहीं रही थी। हवाओं से सौंदर्या के जिस्म पर पड़ी हुई चादर भी हिल रही थी और उसकी गांड़ हल्की हल्की खुल कर दिख रही थी। अजय ने देखा कि उसकी बहन की गांड़ के दोनो हिस्से किसी भी तरह से शहनाज़ से बहुत ज्यादा कम कम नहीं थे। शायद एक या दो ही इंच कम लेकिन उसके मुकाबले काफी ठोस लग रहे थे।

तभी सामने आकाश में जोर जोर से बिजलियां कड़कने लगी और तेज हवाओं के साथ सौंदर्या की गांड़ पूरी तरह से नंगी हो गई। तभी सामने आकाश में इन्द्र धनुष बना हुआ दिखाई दिया और सौंदर्या उसे देखते ही खुशी से अजय की तरफ देखते हुए बोली:"

" भैया वो देखो इन्द्र धनुष।

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अजय ने एक बार इन्द्र धनुष की तरफ देखा और फिर उसने अपनी नजरे सौंदर्या की मोटी मोटी गांड़ पर टिका दी। उफ्फ क्या माल है उसकी बहन,सच में किसी भी तरह से शहनाज़ से कम नहीं, दोनो की गांड़ एक से बढ़कर एक। अजय इन्द्र धनुष कम और अपनी बहन की गांड़ ज्यादा देख रहा था।

इन्द्र धनुष के निकलते ही हवाएं रुक गई और शहनाज़ ने लालटेन को एक तरफ रख दिया और अपनी चादर को उठाकर अपने जिस्म पर लपेट लिया।

सौंदर्या खुशी से दौड़ती हुई अजय के गले लग गई और बोली:"

" भाई इन्द्र धनुष निकल गया इसका मतलब हमारी पूजा कामयाब हो रही हैं।

अजय ने सौंदर्या को अपनी बांहों में भर लिया और उसकी गांड़ पर दोनो हाथ टिका कर बोला:"

" हाँ मेरी प्यारी दीदी, अब तुम दोष मुक्त होकर दुल्हन बन जाओगी।

इतना कहकर उसने सौंदर्या की गांड़ को हल्का सा सहला दिया तो सौंदर्या मचल गई और फिर उससे छूटकर शहनाज़ के गले लग गई।

अजय:" अच्छा अब देर मत करो क्योंकि अभी कुछ और विधियां आज के लिए बाकी है। उन्हें पूरा करना होगा।

खुशी से झूमती हुई अलग हो गई और बोली:"

" हाँ भैया बताओ ना क्या करना होगा अब मुझे

अजय:" देखो आचार्य जी ने बताया था कि मैं बहुत ही शुभ योग में पैदा हुआ हूं। इसलिए मेरे सारे शरीर की छाया तुम्हारे शरीर पर पड़नी चाहिए। वैसे तो रात में पूरा अंधेरा है लेकिन अभी इन्द्र धनुष की रोशनी में छाया बन ही जाएगी। एक बार इन्द्र धनुष गायब हो गया तो फिर सब व्यर्थ चला जाएगा।

सौंदर्य:" ओह भाई जल्दी बताओ ना कैसे और क्या करना होगा ?

अजय:" तुम दोनो पूरी तरह से नंगी होकर लेट जाओ। मै सीधा खड़ा रहूंगा। पहले छाया शहनाज़ पर और फिर तुम पर भी पड़ेगी।

अजय की बात सुनकर दोनो शर्म से लाल हो गई। सौंदर्या का कहीं ज्यादा बुरा हाल था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी अजय फिर से बोल उठा :"

" शरमाओ मत दीदी आप, अगर शर्म के कारण इन्द्र धनुष गायब हो गया तो आप ज़िन्दगी भर मांगलिक ही रह जाएगी।

सौंदर्या तड़प उठी और उसने बेबस नजरो से शहनाज़ की तरफ देखा जो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई थी। शहनाज़ अजय के इशारे पर तेजी से आगे बढ़ी और उसने सौंदर्या के जिस्म से चादर को खींच कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और सौंदर्या ने शर्म के मारे अपने दोनो हाथ अपने चेहरे पर रख लिए। अजय ने पहली बार अपनी बहन की गोल गोल ठोस नारियल के आकार की चुचियों को देखा और उसकी आंखे चमक उठी।

शहनाज़ और सौंदर्या दोनो जमीन पर पड़ी हुई चादर पर लेट गई। अजय ने अपनी चादर को हटा दिया और नंगा हो गया। उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में लहरा उठा जिसे देखते ही सौंदर्या के मुंह से डर के मारे चींखं निकल पड़ी और उसकी आंखे फिर से बंद हो गई। लंड को देखते ही शहनाज़ की आंखे चमक उठी और उसने अजय को एक कामुक इशारा किया।

अजय अब ठीक शहनाज़ के सामने खड़ा हुआ था और उसके जिस्म की परछाईं शहनाज़ के ऊपर पड़ रही थी। अजय शहनाज़ की तरह देखते हुए बोला:"

" ऐसे ही मेरी आंखो में देखती रहना, तभी जाकर ये विधि सही से पूर्ण होगी।

शहनाज़ ऐसे ही उसकी तरफ देखती रही और देखते ही देखते अजय उसके करीब आ गया और उसका लन्ड की परछाई अब शहनाज़ के होंठो के सामने पड़ रही थी और शहनाज़ ने अपनी जीभ निकाल कर अजय को इशारा किया तो अजय बोला:"

" बस शहनाज़ अब तुम्हारी बारी खत्म, अब परछाई सौंदर्या के उपर पड़नी चाहिए। दीदी जल्दी से आंखे खोल दो।

सौंदर्या ने बड़ी मुश्किल से अपनी आंखे खोली और उसने अजय की आंखो से मिला दी। अजय के जिस्म की परछाईं उसके जिस्म पर पड़ रही थी और लंड की परछाई ठीक सौंदर्या की चूत पर पड़ रही थी। सौंदर्या का शर्म के मारे बुरा हाल हो गया था।

अजय:" बस दीदी हो गया, आपका जिस्म अब काफी हद तक मंगल के प्रभाव से मुक्त हो गया है। कल एक अंतिम दिन पूजा होगी। ढलते हुए इन्द्र धनुष की लालिमा आप पर कहीं बुरा असर ना कर दे इसलिए आप अपनी आंखे फिर से बंद कर लीजिए।

सौंदर्या ने जैसे ही आंखे बंद करी तो अजय ने शहनाज़ को स्माइल दी और शहनाज़ ने आगे बढ़कर उसके लंड को हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। देखते ही देखते उसने लंड को एक झटके के साथ मुंह में भर लिया और चूसने लगी।

इन्द्र धनुष कभी का छुप गया हो और शहनाज़ बेसब्री सी लंड चूसे जा रही थी। अजय और शहनाज़ दोनो पूरी तरह से सौंदर्या से बेखबर हो गए थे और लंड चूसने से निकलती हुई आवाज से सौंदर्या बेचैन हो रही थी क्योंकि उसने कई बार सेक्सी मूवी में इस तरह की आवाज सुनी थी लेकिन उसे यकीन नहीं हो पा रहा था कि क्या सच में शहनाज़ उसके भाई का लंड चूस रही है।

शहनाज़ पूरी जोर जोर से लंड चूस रही थी और अजय के मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसने शहनाज़ के मुंह में एक धक्का लगाया और उसके मुंह में वीर्य की पिचकारी मारते हुए जोर से सिसक पड़ा। सौंदर्या ने हिम्मत करके आंखे खोली तो उसे मानो यकीन नहीं हुआ। उसका भाई शहनाज़ की दोनो चूचियों को थामे हुए उसके मुंह में लंड से वीर्य की पिचकारी मार रहा था। अजय का लन्ड धीरे धीरे शहनाज़ के मुंह से बाहर निकल रहा था और सौंदर्या को यकीन नहीं हो रहा था कि इतना मोटा और तगड़ा लंड कैसे शहनाज़ के मुंह में घुस गया था।

जैसे ही शहनाज़ और अजय को होश आया तो उन्होंने सौंदर्या की तरफ देखा जिसकी आंखे फिर से बंद हो गई थी। अजय ने शहनाज़ के होंठो को चूम लिया और दोनो ने कपडे पहन लिए और शहनाज़ ने सौंदर्या को आवाज लगाई

" पूजा खत्म हो गई सौंदर्या, चलो जल्दी से अपने कपड़े पहन लो।

सौंदर्या में जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए और सभी वापिस कमरों की तरफ बढ़ गए। अंदर जाते ही फिर से सभी लोग गहरी नींद में चले गए।

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पूजा की विधि में दिखे इंद्र धनुष के प्रभाव का सौंदर्या के शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ रहा था और आते ही गहरी नींद में चली गई। अजय ने सोती हुई सौंदर्या को अपनी गोद में उठा लिया और दूसरे कमरे में बेड पर लिटा दिया और उसका माथा चूम कर वापिस शहनाज के पास आ गया। शहनाज भी थकी हुई थी और अजय ने कमरे में आते ही गेट को ठीक से बंद किया और शहनाज के उपर से चादर को हटा दिया जो कि करवट लेकर सोई हुई थी, शहनाज पूरी तरह से नंगी हो गई। अजय शहनाज के नंगे जिस्म को देखते ही जोश में आ गया और उसने ढेर सारा थूक अपने लंड पर लपेट लिया और शहनाज की चूत से अपने लंड को अड़ा दिया और एक जोरदार धक्का शाहनाज की चूत में जड़ दिया तो अजय का लन्ड एक बार फिर से उसकी कसी हुई चूत में घुसता चला गया और गहरी नींद में सो रही शहनाज इस अचानक हुए हमले से दर्द से तड़प उठी। जब तक उसे समझ आता अजय ने उसकी चूचियों को बेरहमी से मसलते हुए उसकी चूत पर फाड़ना शुरू कर दिया तो शहनाज दर्द से कराह उठी

" आह पागल हो गया है क्या ,!! सोते सोते ही घुसा दिया आह अम्मी, बता तो देता ज़ालिम।

अजय ने शहनाज की गर्दन को चाट लिया और तगड़े तगड़े धक्के लगाते हुए बोला:"

" आह मेरी जान, अच्छा नहीं लगा क्या ऐसे घुसाना ? हाय तेरी चूत कितनी टाइट है।

शहनाज तगड़े धक्कों से आगे को खिसकती हुई बेड के किनारे तक पहुंच गई थी और एक हाथ से अजय को थामते हुए सिसक उठी"

" आह कुछ कुछ अच्छा लगा, पर थोड़ा आराम से कर ना, नहीं तो नीचे गिर जाऊंगी।

अजय ने शहनाज को पकड़ कर बेड के बीच में खींच लिया और उसकी दोनो टांगो को मोड़ कर उसकी चूचियों से टिका दिए और उसकी आंखो में देखते हुए लंड को चूत पर टिका दिया और रगड़ने लगा तो शहनाज़ फिर से तड़प उठी और अपनी चूत को लंड पर उछाल दिया तो अजय ने एक जोरदार धक्का लगाया और लंड को फिर से अंदर घुसा दिया। शहनाज फिर से मस्ती से सिसक उठी और अजय ने उसे फिर से चोदना शुरू कर दिया। शहनाज अजय के नीचे पड़ी हुई जोर जोर से सिसकते हुए चुद रही थी।

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शहनाज से लंड की मार बर्दाश्त नही हुई और उसकी चूत की दीवारों में तूफान सा उठने लगा तो शहनाज़ बावली सी हो गईं और अजय को जोर जोर से से अपने उपर खींचने लगी मानो उसे पूरी तरह से अपने अंदर घुसा लेना चाहती हो। अजय ने शहनाज की बेकरारी समझते हुए अपने लंड के धक्के पूरी बेरहमी से लगाए तो शहनाज का धैर्य जवाब दे गया और उसकी चूत और मुंह दोनो एक साथ मस्ती से खुल गए

" आह अजय, मर गई मेरी चूत, सीईई आईआईआई चोद दिया तूने शहनाज को।

इतना कहकर शहनाज़ दीवानी सी हुई उसका मुंह चूमने लगी तो अजय ने एक झटके के साथ उसे उल्टी बेड पर पटक कर उसकी चूत में फिर से अपना लंड ठोक दिया और तेजी से चोदने लगा। शहनाज इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए दर्द से कराहती हुई आगे को सरकी

" आह पागल है क्या, ऐसे कौन प्यार करता है, मार डालेगा क्या मुझे तू

अजय ने उसके दोनो हाथ पकड़ कर फिर से अपने लंड पर खींच लिया और जोर जोर से चोदते हुए गुर्राया

" आह प्यार नही चुदाई करता ऐसे, आह शहनाज तेरी चूत क्या मस्त हैं, लंड से आज तक कोई मरी, सिर्फ चूत मरती हैं।

इतना कहकर अजय जोर से उसकी चूत को ठोकने लगा। शहनाज का पूरा जिस्म लंड के धक्कों से हिल रहा था और उसके मुंह से निकलती दर्द और मस्ती भरी सिसकारियां अजय को और मदहोश कर रही थी।

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अजय के लंड में भी तूफान सा उमड़ रहा था और शहनाज की चूत एक बार फिर से गीली हो गई जिससे धक्कों की स्पीड बढ़ गई थी और शहनाज अजय की आंखो में देखते हुए उसे तेज तेज चोदने का इशारा कर रही थी। अजय अपने लंड को बस सुपाड़े तक अंदर रहने देता और फिर से पूरा घुसा देता। शहनाज पागल सी हुई जोर जोर से सिसक रही थी और अजय तेज धक्के लगाने के लिए उसकी पीठ पर सवार होकर एक पागल सांड की तरह कस कस कर जोर जोर से पूरी बेरहमी से चोदने लगा तो शहनाज की चूत एक बार फिर से पिघल गई और वो एक बार फिर से जोर जोर से सिसकते हुए झड़ती चली गई जिससे उसकी चूत और चिकनी हो गईं और अजय को लगा जैसे उसके लंड में तूफान सा आ गया हैं तो उसने पूरे लंड को तेजी से बाहर निकाला और एक जोरदार धक्के के लिए जड़ तक उसकी चूत में घुसा दिया तो शहनाज जोर से दर्द से कराह उठी तो अजय ने उसके मुंह को अपने हाथ से बंद कर लिया और अगले की पल जोरदार धक्कों की बारिश शहनाज की चूत में करने लगा।

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अजय ने अपनी लंड को पूरा बाहर निकाला और अगले ही पल एक धक्का पूरी ताकत से उसकी चूत में जड़ दिया और उसका लंड शाहनाज की चूत की गहराई में उतर का वीर्य की बारिश करने लगा और अजय शाहनाज की कमरे पर गिरकर उसकी गर्दन को चूमने लगा। शहनाज उसके नीचे पड़ी हुई अपने उखड़ी सांसों को काबू कर रही थी और अजय उसकी गर्दन को चूम रहा था। अजय का लंड सिकुड़ कर शहनाज की चूत से बाहर निकल गया तो शहनाज ने अपने बदन की पूरी हिम्मत समेटकर उसे अचानक से धक्का दिया तो अजय बेड पर गिर गया और शहनाज ये देखकर मुस्कुरा उठी तो अजय ने हल्की नाराजगी जताते हुए उसकी चूचियों को जोर से उमेठ दिया तो शहनाज ने उसका लंड जोर से मुट्ठी से भींच दिया तो अजय के चेहरे दर्द के भाव उभर आए तो शहनाज ने उसके लंड को ढीला छोड़ दिया और बोली:

" तुम सुधर नहीं सकते क्या ? क्यों बिल्कुल जंगली की तरह प्यार करते हो? थोड़ा सा भी रहम नहीं दिखाते।

अजय के चेहरे पर स्माइल आ गई और शहनाज के गाल चूम कर बोला:"

" क्यों तुम्हे पसंद नही आता क्या मेरा ये जंगलीपन ? मजे तो बहुत करती करते हो तुम जोर जोर से सिसकियां लेकर !!

शहनाज ने अजय की चौड़ी छाती पर हाथ फिराया और बोली:"

" हाँ पसंद आता है लेकिन ये सही तरीका नहीं होता चुदाई का समझे तुम।

अजय ने शहनाज की गांड़ को हाथो में भर लिया और जोर से मसलते हुए बोला:"

" हाय मेरी जान शहनाज, जब तक औरत चींखें ना मारे तो चुदाई का क्या मतलब!!

शहनाज जोर से गांड़ दबाए जाने से फिर से दर्द से कराह उठी और बोली"

" आउच अजय, उफ्फ क्या करू तेरा, कैसे सुधारु तुझे? बस किसी तरह पूजा खत्म हो जाए तो मेरी चूत की जान बचे।

इतना बोलकर शहनाज मुस्कुरा उठी तो उसकी बात सुनकर अजय ने शहनाज के हाथो को पकड़ लिया और उसके उपर फिर से चढ़ गया और उसके माथे को चूम कर बोला:"

" आह शहनाज अब तो तू जिंदगी भर मेरा लंड तेरी चूत की पूजा करेगा।

शहनाज कुछ बोलती उससे पहले ही इतना कहकर अजय ने अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए और चूसने लगा। शहनाज चाह कर कुछ नहीं बोल पाई और फिर से अजय के साथ मदहोश होती चली गई। अजय का लन्ड फिर से पूरी तरह से खड़ा होकर उसकी चूत में घुसता चला गया और बेड पर फिर से एक जंग छिड़ गई जिसमे शहनाज हार कर भी जीत रही थी। अजय ने पूरी बेदर्दी से शाहनाज को पूरी रात चोदा और शहनाज का बुरा हाल हो गया। उसकी चूत बुरी तरह से फट गई थी और शहनाज का गोरा चिट्टा जिस्म अजय के दबाए मसले जाने से जगह जगह से लाल पड़ गया था। आखिकार रात भर हुई चुदाई के बाद दोनों दो गए।

सुबह करीब आठ बजे के आस पास सौंदर्या की आंखे खुली और तैयार होकर दोनो को उठा दिया तो दोनो न चाहते हैं भी उठ गए और नाश्ता करने लगे।

अजय:" दीदी बस आज आखिरी पूजा होगी और कल से आपकी जिंदगी की एक नई सुबह शुरू हो जाएगी।

सौंदर्या के चेहरे पर स्माइल फैल गई और बोली:" भाई ये सब तो आप और शहनाज के कारण ही हो रहा है। आप नही होते तो शायद मैं कभी ठीक नहीं हो सकती।

अजय:" मेरे नही बल्कि शाहनाज के कारण कहो दीदी, इन्होंने आप पर आने वाली मुश्किल को अपने उपर झेला हैं।

सौंदर्या:हाँ शाहनाज ये तो बात बिलकुल सच है, ये नही होती तो पता क्या होता।

शाहनाज दोनो की बाते सुन रही थी और बोली:"

" बस बहुत हो गई तारीफ, अब आज रात होने वाली पूजा पर ध्यान दो क्योंकि उसके बाद ही तुम दोष मुक्त हो पाओगी।

सौंदर्या:" हाँ आपकी बात ठीक हैं, भाई किस तरह की पूजा विधि होगी आज ?

अजय:" मंगल आज आपकी कुंडली से निकल जायेगा लेकिन खुशी खुशी तभी जायेगा जब आप से खुश हो जाए। मंगल को खुश करने के लिए आपको पहले मंगल यंत्र को शुद्ध करके पहनना होगा और उसके बाद बिलकुल एक दुल्हन की तरह खुद को तैयार करना होगा ताकि मंगल आपके रूप सौंदर्य पर मोहित हो सके। बाकी तो सब पूजा की विधियां होगी जो समय आने पर मैं आपसे खुद ही करा लूंगा। एक बात और आज शाहनाज पूजा में नही होगी।

शहनाज:" कोई बात नही मैं यहीं अपने कमरे में रहूंगी, मेरी कोई भी मदद चाहिए तो मैं काम आ जाऊंगी।

सौंदर्या:" मेरा दिल तो बहुत घबरा रहा हैं, बस किसी तरह से आज को पूजा सफल हो जाए।

अजय ने सौंदर्या का हाथ पकड़ लिया और उसे तसल्ली देते हुए बोला:"

" आप चिंता मत करो दीदी, सब कुछ आराम से हो जायेगा। मेरे होते हुए आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं।

शाहनाज:" और फिर मैं भी तो यहीं रहूंगी। कोई भी समय मेरी जरूरत हो तो आ जाऊंगी।

सौंदर्या के चेहरे पर स्माइल आ गई और सभी ने अपना खाना खत्म किया और उसके बाद सभी लोग रात की पूजा की तैयारी में जुट गए। शाम के करीब सात बज गए थे और सूरज ढल गया था। पूजा का मुहूर्त 10:15 मिनट था और जैसे जैसे समय करीब आता जा रहा था वैसे वैसे सौंदर्या बेचैन हो रही थी।

शहनाज ने मंगल यंत्र को गंगा जल से शुद्ध कर दिया था जो कि बेहद खूबसूरत होकर चमक रहा था। मंगल यंत्र लेकर सौंदर्या नहाने के लिए घुस गई और ही अपने बदन को पूरी तरह से शुद्ध किया और मंगल ग्रह को हाथ में लेते ही उसका बदन कांपने लगा। उसने धीरे से मंगल यंत्र को अपनी नाभि के उपर टिकाया और नीचे से अपनी जांघो के बीच से निकालते हुए अपनी पीठ पर ले गई और पीठ पर लपटेकर फिर से अपनी नाभि पर बांध दिया।
 
मंगल यंत्र एक बार फिर से सौंदर्या की चिकनी चूत पर बंध गया था लेकिन इस बार पहले के मुकाबले काफी टाइट बंधा था और घुंघरू कुछ ढीले हो गए जो इधर उधर हिल रहे थे और सौंदर्या को अजीब से गुदगुदी महसूस हो रही थी। सौंदर्या ने अपने जिस्म पर एक चादर लपेट ली और बाहर निकल गई। शाहनाज को देखते ही वो हल्की सी शर्मा ने और फिर शाहनाज और सौंदर्या दोनो ने मिलकर सौंदर्या का मेकअप शुरू कर दिया। करीब 09:40 मिनट तक सौंदर्या पूरी तरह से तैयार हो गई और खुद को शीशे में देख कर शरमा गई।

शहनाज:" बहुत खूबसूरत लग रही हो सौंदर्या, जल्दी ही तुम अब दोष मुक्त होकर दुल्हन बन जाओगी और इसके बाद तुम्हारी सुहागरात होगी।

सौंदर्या शर्मा गई और तभी अजय भी अंदर आ गया और सौंदर्या के रूप सौंदर्य की तारीफ किए बिना ना रह सका। सभी ने हल्का भोजन किया और उसके बाद अजय और सौंदर्या दोनो पूजा के लिए घाट की तरफ निकल गए जबकि शहनाज़ ना चाहते हैं हुए भी अपने कमरे में आ गई और सोचने लगी कि बस आज पूजा होने के बाद कल वो वापिस अपने बेटे के पास चली जायेगी। सोचते सोचते ही दिन भर की थकी होने और रात भर हुई चुदाई के कारण उसे नींद आ गई।

अजय और सौंदर्या दोनो घाट की तरफ बढ़ते चले जा रहे थे और सौंदर्या के चलने से मंगल यंत्र के घुंघरू उसकी चूत के आस पास रगड़ रहे थे जिससे सौंदर्या बेचैनी महसूस कर रही थी।

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अजय और सौंदर्या दोनो घाट की तरफ धीरे धीरे बढ़ रहे थे और आसमान में अभी चांद अपने पूरे शबाब पर था जिससे चारो और मनमोहक चांदनी फैली हुई थी। आसमान में बीच बीच में काले बादल उमड़ रहे थे जिनके सामने आ जाने से अंधेरा हो जाता और फिर उनके हटते ही पूरा घाट चांदनी से नहा पड़ता। दोनो के बीच अभी तक कोई बात नही हुई थी और अजय के मुकबले सौंदर्या थोड़ा धीमे चल रही थी क्योंकि उसके पेट पर बंधे हुए मंगल यंत्र के घुंघरू उसकी चूत के आस पास छू कर उसे ना चाहते हुए उत्तेजित कर रहे थे। सौंदर्या जानती थी कि आज उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली हैं क्योंकि आज पूजा का आखिरी दिन था और आज उसे इस मांगलिक दोष से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली थी।

दोनो भाई बहन घाट पर पहुंच गए और अजय के बताए अनुसार इस समय सौंदर्या के जिस्म पर सिर्फ एक लाल सुर्ख पवित्र साडी थी। सौंदर्या का पेट खुलकर अपनी छटा बिखेर रहा था और गहरी नाभि अपनी खूबसूरती दर्शा रही थी। सिर्फ पतली सी साड़ी में होने के कारण उसकी गोल गोल चुचियों का आकार साफ साफ महसूस हो रहा था और साडी के उपर से ही उसकी चूचियों का हल्का सा उभार भी साफ नजर आ रहा था।

अजय और सौंदर्या दोनो घाट पर ही बैठ गए और अजय उसे पूजा के बारे में समझाने लगा।

अजय:" दीदी आज की पूजा काफी महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि आज मंगल का सीधा सीधा प्रभाव आपके शरीर पर ही पड़ेगा क्योंकि नियमों के मुताबिक आज शाहनाज पूजा में शामिल नही हो सकती। इसलिए आपको ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी।

सौंदर्या के चेहरे पर चिंता की लकीरें थोड़ी देर के लिए उभरी लेकिन फिर वो सामान्य हो गई और अजय ने उसे आगे बताना शुरू किया

"मेरे उपर राहु का प्रभाव और सिर्फ राहु ही मंगल के प्रभाव को कम कर सकता है इसलिए सभी विधियों के दौरान आपको मेरी गोद में बैठना होगा ताकि मंगल आपके उपर ज्यादा प्रभाव ना डाल सके। उसके साथ ही आपको मेरे द्वारा बनाई गई सभी विधियां ध्यानपूर्वक करनी होगी। कुछ विधियां मैं आपको पूजा के दौरान ही बता दूंगा। सबसे पहले आप गंगा को जल अर्पित कीजिए और मंगल का ध्यान कीजिए।

सौंदर्या ने हां में सिर हिलाया और उठकर गंगा में की तरफ बढ़ गई। सौंदर्या के चलने से उसके कंधे पर से साडी सरक और सौंदर्या की पीठ पीछे से पूरी नंगी हो गई।

चांद की रोशनी में सौंदर्या की पीठ बेहद खूबसूरत लग रही थी और अजय उसे बिना पलके झुकाए देखता रहा। सौंदर्या ने बिना पीछे की तरफ देखे ही हाथ से अपनी साड़ी के पल्लू को उठाया और फिर से अपनी पीठ को ढकते हुए आगे बढ़ गई। अजय को अपनी बहन की नंगी पीठ की झलक मिलते ही अपने शरीर के अंदर उत्तेजना महसूस हुई और उसके दिमाग में सबसे पहले एक ही सवाल आया कि आगे से उसकी बहन की चूचियां पूरी नंगी हो गई होगी। काश इस समय उसकी बहन की पीठ नही बल्कि चेहरा उसकी तरफ होता तो कयामत ही आ जाती। सौंदर्या धीरे से गंगा के घाट पर गई और दोनो हाथो से जल अर्पित किया और उसके बाद मंगल का ध्यान करने लगी। सौंदर्या के जिस्म में अजीब का रोमाच उठ रहा था और फिर वो पलटी और वापिस अपने भाई की तरफ चल पड़ी।

जल्दबाजी में सौंदर्या से साडी का पल्लू पहले के मुकाबले थोड़ा सा नीचे बंध गया था जिस पर उसका ध्यान ही नही था और उसकी चूचियां के बीच की गहरी रेखा साफ नजर आ रही थी। अजय ने अपनी बहन की चुचियों के उभार को देखा आज फिर सामने की एक हवन कुंड जला दिया।

हवन कुंड के जलते ही सौंदर्या थोड़ी सी बेचैन नजर आई क्योंकि वो जानती थी अब जल्दी ही विधियां शुरू हो जाएगी और उसे अपने भाई की गोद में बैठना पड़ेगा। सौंदर्या की आंखों के आगे वो दृश्य तैर गया जब वो अपने भाई की गोद में ट्रैक्टर पर बैठी हुई थी और कैसे उसके भाई का लंड उसकी जांघो के बीच में घुसा हुआ था। ये सब सोचते ही सौंदर्या की सांसे तेज हो गई कि ये भगवान अब क्या होगा ? कहीं विधियां करते करते उसके भाई का लंड फिर से खड़ा हो जाता तो क्या होगा क्योंकि वो पूजा खत्म होने तक चाह कर भी उसकी गोद से नही उतर सकती थी।

अजय ने देसी घी के साथ कुछ और सामग्री को कुंड में डाल दिया और देखते ही देखते कुंड में तेजी से आग जलने लगी।

अजय:" दीदी कुंड में अब सारी सामग्री आपके हाथ से डाली जायेगी और रात के करीब एक बजे तक पूजा चलेगी। बस अगले तीन घंटे आपकी आने वाली जिंदगी के लिए बेहद महत्तवूर्ण साबित होंगे। अब शुभ मुहूर्त निकल रहा रहा है इसलिए आप देरी ना करे।

इतना कहकर अजय ने उसे अपनी गोद में बैठने का इशारा किया तो सौंदर्या का मुंह शर्म से लाल हो गया और वो धीरे धीरे आगे बढ़ी और अपने भाई की गोद में बैठ गई। उसकी पीठ अजय की छाती से मिल गई और अजय ने धीरे धीरे मंत्र पढ़ना शुरू किया और सौंदर्या धीरे धीरे उसके पीछे ही मंत्र दोहरा रही थी। अजय ने सामग्री को उसके हाथ में दिया और और सौंदर्या ने थोड़ा सा आगे झुकते हुए कुंड में सामग्री को डाल दिया और फिर से पीछे होती हुई अपने भाई की गोद में बैठ गई। लेकिन उसके पीछे हटने से उसकी साड़ी हल्की सी ढीली हुई और पल्लू उसके गोरे चिकने कंधे पर अटक गया जिससे उसके कंधे आधे से ज्यादा नंगे हो गए और अजय की नजरे अपने बहन के कंधो और गर्दन पर टिक गई। अजय उसके कंधो को देखते हुए मंत्र पढ़ने लगा और उस बार उसने फिर से सौंदर्या के हाथो में सामग्री देते हुए उसके हाथो को अपने हाथो मे लिया और बोला:"

" अब आपके हाथ मेरे हाथो मे रहते हुए ही कुंड में सामग्री अर्पण करेंगे।

अजय उसके हाथो को पकड़े हुए थोड़ा सा आगे झुका तो चौड़ी छाती का दबाव सौंदर्या की कमर पर पड़ा और वो खुद ही आगे झुकती चली गई और अजय ने उसके कान के पास अपनी गर्म सांसे छोड़ते हुए अपने मुंह को उसके कंधे पर टिका दिया और फिर उसके हाथो से कुंड में सामग्री डाल दी। इसके बाद दोनो फिर से पीछे की तरफ हो गए लेकिन इस पर बार साडी का पल्लू पूरी तरह से उसकी कंधो से नीचे सरक गया और उसके दोनो कंधे पूरी तरह से नंगे हो गए। अजय अपनी बहन के नंगे चिकने मांसल कंधो को देखते ही मदहोश हो गया और उसका मन किया कि अपने हाथो में थाम ले लेकिन पूजा में कोई विघ्न नही चाहता था इसलिए अपने आप पर संयम बनाए रखा और फिर से मंत्र पढ़ने लगा। रेशमी साड़ी को सौंदर्या ने अपने दोनो बगलो में दबाते हुए b बड़ी मुश्किल से संभाल रखा था वरना कब की वो उसकी छातियों से सरक गई होती। लेकिन सौंदर्या समझ गई थी कि हवन कुंड में बार बार सामग्री डालने के चलते उसके हाथ खुल रहे थे और वो बहुत ज्यादा देर तक साड़ी को संभाल नही पाएगी। हाय भगवान ऐसे मेरी दोनो चूचियां नंगी हो जाएगी मेरे भाई के सामने। लेकिन उस दिन भी तू उसके सामने नंगी हुई थी जब उसके जिस्म की परछाई तुझ पर पड़ रही थी। लेकिन उस दिन मैं उसकी गोद में भी नहीं बैठी हुई थी। सौंदर्या के मन में विचारो की उथल पुथल मची हुई थी और अजय मंत्र पढ़ता जा रहा था। अजय ने मंत्र खत्म किया और फिर से कुंड में सामग्री डालने के लिए आगे को झुका और सौंदर्या भी आगे झुक गई और अपने दोनो हाथ खोलकर सामग्री डाली जिससे साड़ी उसके कंधो पर से सरक गई और उसने बड़ी मुश्किल से उसे पकड़ने की कोशिश करी लेकिन तब तक साड़ी काफी नीचे सरक गई थी जिससे उसकी आधे से ज्यादा चूचियां नंगी हो गई और सौंदर्या का पूरा बदन कांप उठा। अजय के बार बार आगे पीछे होने से उसके जिस्म पर पड़ी चादर सरक गई थी जिससे उसकी चौड़ी मजबूत छाती पूरी तरह से नंगी हो गई थी। लेकिन सौंदर्या भी बार बार सामंग्री डालने के कारण थोड़ी आगे सरक गई थी जिससे उसे अभी तक अपने भाई की नंगी छाती का एहसास नही हुआ था। अजय मंत्र पढ़ते हुए धीरे धीरे उसके हाथो को सहला रहा था और सौंदर्या की सांसे बहुत तेजी से चल रही थी क्योंकि वो जानती थी कि इस बार जैसे ही वो सामग्री डालने के लिए आगे झुकेगी तो उसकी साड़ी उसकी गोद में गिर जायेगी और उसकी दोनो चूचिया पूरी तरह से नंगी। हो जाएगी। सौंदर्या ये सब सोचते हुए उत्तेजना से भरी हुई थी और मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना करते हुए एक बार उपर की तरफ देखा। अजय काफी देर तक मंत्र पढ़ता रहा और ऊपर आसमान में बीच चांद को काले बदलो ने घेर लिया और चारो तरफ अंधेरा छा गया। सौंदर्या ने राहत की सांस ली मानो भगवान ने उसकी प्रार्थना सुन ली थी।काफी देर से सामग्री ना डालने के कारण हवन कुंड की आग भी काफी धीमी पड़ गई थी जिससे सौंदर्या अच्छा महसूस कर रही थी।

तभी अजय ने मंत्र खत्म किए और सौंदर्य के हाथ में सामग्री देते हुए उसे कुंड में डालने का इशारा किया तो सौंदर्या जैसे ही आगे को झुकी साड़ी आजाद होकर पूरी तरह से उसकी गोद में आ गिरी और उसकी दोनो चूचिया पूरी तरह से नंगी हो गई और की चूत में हलचल सी मच गई। उत्तेजना के कारण सौंदर्या सामग्री नही डाल पा रही थी तो अजय उसकी मदद करने के लिए आगे को हुआ और उसकी नंगी छाती अपनी बहन की पीठ से मिल गई और जैसे ही दो नंगे बदन आपस में टकराए तो सौंदर्य के मुंह से आह निकल पड़ी। जैसे ही सामग्री कुंड में पड़ी तो आग तेज हो गई और चारो तरह हल्का सा प्रकाश हो गया जिससे सौंदर्या शर्म से पानी पानी हो गई। उसने पीछे हटने की कोशिश नही करी और ना ही अजय ने हटने का प्रयास किया। धीरे धीरे जैसे ही अग्नि धीमी हुई तो सौंदर्या ने राहत की सांस ली और पीछे को हुई तो उसकी चूचियां उपर को उछल पड़ी। उफ्फ उसकी नंगी चूचियां उछलने से अजय के हाथो से जा टकराई और दोनो बहन एक अनोखे अदभुत एहसास से भर उठे।

अजय ने पीछे होते हुए अपने हाथो का हल्का सा दबाव सौंदर्या पर दिया जिससे सौंदर्या ज्यादा पीछे हो गई और उसकी नंगी पीठ अभी तक अजय की छाती से चिपक हुई थी। अजय का मुंह अब सौंदर्या के कंधे पर टिका हुआ था और अजय मंत्र पढ़ते हुए हल्के से प्रकाश में अपनी बहन की गोल गोल चुचियों को हल्का हल्का देखते हुए उत्तेजित हो गया था जिससे उसके लंड में तनाव आ रहा था। सौंदर्या जानती थी कि उसका भाई उसकी चुचियों को घूर रहा होगा इसलिए उसकी चूत से रस टपकना शुरू हो गया था जिससे मंगल यंत्र के घुंघरू भीग कर इधर उधर फिसलते हुए उसकी चूत के होंठो को सहला रहे थे और सौंदर्या पूरी तरह से मदहोश होती जा रही थी। अजय ने फिर से सामग्री ली और आगे को होते हुए अपने टांगो को पूरा खोलते हुए कुंड में सामग्री डाल दी और आगे जलने से सौंदर्या फिर से पानी पानी हो गई। अजय की टांगे खुलने से सौंदर्या की रेशमी साड़ी और अजय की चादर दोनो एक साथ नीचे सरक गए। सामग्री डालने के बाद ही लालची अजय ने प्रकाश में उसकी चुचियों को देखने के लिए एक हाथ को सौंदर्या के पेट पर बांधते हुए उसे पीछे की तरफ खींच लिया और जैसे ही सौंदर्या झटके के साथ पीछे को हुई तो मंगल यंत्र का एक घुंघरू फिसल कर उसकी गीली चूत में घुस गया और सौंदर्या के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। अजय ने अपने मुंह को फिर से उसके कंधे पर रख दिया और पहली बार अपनी बहन की ठोस गोल गोल उन्नत चुचियों को देखने लगा। सौंदर्या की आंखे मदहोश में बंद हो गई और अजय ने जी भरकर अपनी बहन की चुचियों का जब तक दीदार किया जब तक कुंड की अग्नि धीमी नही हो गई। अंधेरा होते ही अजय ने फिर से मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए और इस बार उसने एक हाथ में सौंदर्या के दोनो हाथो को पकड़ रखा था। सौंदर्या की सांसे बहुत तेज गति से चल रही थी और और चूचियां तेजी से उछल रही थी।

अजय ने फिर से सामग्री ली और अंधेरे में अपने एक हाथ को ठीक सौंदर्या की छाती के सामने करते हुए आगे को झुका और जैसे ही सौंदर्या ने आगे को झुक कर सामग्री डाली तो उसकी एक चूची पूरी की पूरी उसके भाई की चौड़ी मजबूत हथेली में समा गई। सौंदर्या पूरी तरह से बेकाबू हो गई और अजय जान बूझकर सामग्री को धीरे धीरे डाल रहा था और अपने हथेली में बहुत हल्के दबाव के साथ उसकी गुदाज चूची को महसूस कर रहा था। सौंदर्या से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो अपनी जांघो को आपस में मसलने लगी जिससे मंगल यंत्र का एक और दूसरा घुंघरू उसकी चूत में घुस गया और सौंदर्या ने पूरी तरह से मदहोश होकर सिसकी लेते हुए अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया तो अजय ने उसकी चूची को हल्का सा उंगलियों से मसल दिया तो सौंदर्या पागल सी हो गई, उसके जिस्म में मस्ती भरी तरंगे उठ रही थी।

अजय पीछे की तरफ हुआ तो उसके साथ ही सौंदर्या भी पीछे होती चली गई। अजय ने अपने हाथ को उसकी चूची पर ही टिकाए रखा और दूसरे हाथ से अपनी चादर और सौंदर्या की साड़ी को मंत्र पढ़ते हुए उठा लिया और सौंदर्या के कान में धीरे से बोला:"

" आप अब आपकी साड़ी और अपनी चादर को कुंड में डाल देंगी और इसके साथ ही आपका जिस्म दोषमुक्त हो जायेगा। मंगल जाते समय आपके जिस्म पर प्रभाव दिखाएगा लेकिन मैं आपको कहीं नही जाने दूंगा।

सौंदर्या उसकी बात सुनते ही खुश हुई लेकिन अगले ही पल शर्मा गई क्योंकि वो जानती थी कि कपड़े कुंड में पड़ते ही चारो तरफ पूरी रोशनी फैल जायेगी जो घंटो तक फैली रहेगी।

अजय ने मंत्र पढ़े और सौंदर्या ने साड़ी और चादर को हाथ में पकड़ लिया। अजय ने जैसे ही इशारा किया तो सौंदर्या ने कपड़ो को कुंड में फेंक दिया और अजय ने जोर से सौंदर्या को अपनी बांहों में कस लिया। मंगल के प्रभाव के चलते सौंदर्या उससे छूटने का पूरा प्रयास कर रही थी लेकिन अजय ने उसे पूरी मजबूती से थामे रखा। जैसे जैसे कपड़े कपड़े जलते जा रहे थे सौंदर्या का जिस्म उछल उछल पड़ रहा था और अजय ने पूरी ताकत से उसे थामे रखा था।

कपड़े जल गए थे और चारो तरफ दिन की तरह उजाला हो गया। सौंदर्या भी अब ज्यादा नही उछल रही थी तो अजय ने राहत की सांस ली।

अजय:" बस सौंदर्या थोड़ी देर और फिर तुम हमेशा के लिए दोषमुक्त हो जाएगी। ये कपड़े नही जल रहे बल्कि मंगल का प्रभाव खत्म हो रहा है।

सौंदर्या काफी अच्छा महसूस कर रही थी और अजय ने फिर से मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए और धीरे धीरे सारी सामग्री कुंड में डालने लगा। अजय के दोनो हाथ सौंदर्या की चुचियों पर बंधे हुए थे और वो धीरे धीरे आगे होने के बहाने उन्हे सहला रहा था जिससे उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और सौंदर्या की चूत के आस पास मंगल यंत्र से टकरा रहा था जिससे घुंघरू आगे पीछे होकर सौंदर्या की चूत की दीवारों को रगड़ रहे थे। सौंदर्या मस्ती से भरी हुई मदहोश हो गई थी और अपने आपको पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया तो अजय ने अपनी जीभ से उसकी गर्दन को चाट लिया तो सौंदर्या ने आंखे बंद किए ही मदहोश होकर अपने हाथो को अजय के दोनो हाथो पर टिका दिया तो अजय मस्त होकर उसकी गर्दन को चाटते हुए उसकी चूचियों को थोड़ा जोर से मसलने लगा तो सौंदर्या उसकी गोद में बैठी बैठी उछलने लगी और अजय का लन्ड उसकी चूत पर जा लगा तो सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी और अजय के हाथो को जोर से अपनी छाती पर दबा दिया और सिसक उठी।

अजय ने उसकी चुचियों को ताकत से मसल दिया तो सौंदर्या के मुंह से हलकी दर्द भरी मस्ती भरी आह निकल पड़ी। अजय ने सौंदर्या के कान की लौ को जीभ से सहलते हुए कहा

" आह दीदी, अब मंगल यंत्र के खुलने का समय आ गया।

इतना कहकर अजय ने मंगल यंत्र को अपने एक हाथ में पकड़ लिया और उसके घुंघरू को पकड़ने के लिए आगे को झुका तो उसके हाथ सौंदर्या की चूत से छू गए।

सौंदर्या से बर्दाश्त नहीं हुआ और सिसकते हुए बोली:" आह खोल दो मंगल यंत्र, आह नही तो ये मेरी जान ले लेगा भाई।

तो सौंदर्या से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने पहली बार पहल करते अजय सेक्सी नजरो से अजय की आंखो में देखा। अजय के होंठ आगे बढ़े और सौंदर्य ने कांपते हुए अपनी आंखें बंद कर ली और अजय ने अपने होंठो को सौंदर्या के होंठो पर टिका दिया। दोनो भाई बहन ने एक दूसरे के होंठो को चूसना शुरू कर दिया और अजय नीचे उंगली से उसकी चूत के होंठो को सहलाने लगा।

अजय की जीभ सौंदर्या के मुंह में घुस गई और सौंदर्या ने बावली सी होकर अपनी चूत को उसकी हथेली में दबा दिया। दोनो एक दूसरे की जीभ चूस रहे थे।

एक लंबे किस के बाद दोनो के होंठ अलग हुए और अजय बोला:

" मंगल यंत्र को मुंह से ही खोलना पड़ेगा अब।

अजय ने सौंदर्या को वही घाट पर लिटा दिया और उसकी टांगो के बीच में झुक गया और दांतो से पकड़ कर मंगल यंत्र को खींचने लगा। लेकिन चूत में घुसे घुंघरू के कारण निकल नही रहा था तो अजय ने अपने होंठो को सौंदर्या की चूत पर टिका दिया और सौंदर्या जोर से सिसक उठी। जैसे ही अजय की जीभ उसकी चूत में अंदर दाखिल हुई तो सौंदर्या ने हाथ आगे बढाया और उसके लंड को थाम लिया और उसकी लंबाई मोटाई को महसूस करके कांप उठी। जैसे ही अजय ने अपनी जीभ से घुंघरू को बाहर की तरफ खींचा तो सौंदर्या की चूत की दीवारों रगड़ गई और सौंदर्या के मुंह से एक के बाद एक मस्ती भरी सिसकारियां निकल पड़ी और उसने अजय को अपने ऊपर खींच लिया। लंड सीधे जाकर मंगल यंत्र से टकराया और मंगल यंत्र टूट कर खुल गया और ने झुक कर उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया तो सौंदर्या नीचे से अपनी चूत को लंड पर उछालने लगी और अजय ने दोनो हाथो से उसके कंधे मजबूती से पकड़ कर उसकी चूत में पूरी ताकत से तगड़ा धक्का लगाया तो पूरा लंड सौंदर्या की चूत में घुस गया। सौंदर्या दर्द के मारे तड़प उठी और अजय ने उसकी चूची को चूसते हुए लंड को बाहर की तरफ खींचा और खून सौंदर्या की चूत से बह चला लेकिन अजय ने फिर से जोरदार धक्का लगाया तो सौंदर्या के मुंह से फिर से दर्द भरी आह निकल पड़ी। सौंदर्या तड़प रही थी और अजय उसकी चूचियों को चूसते हुए धक्के पर धक्का लगाए जा रहा था। धीरे धीरे सौंदर्य की टाइट चूत हल्की से खुल गई तो लंड थोड़ा आसानी से उसकी चूत में अंदर बाहर होने लगा और सौंदर्या के मुंह से अब दर्द के साथ मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगी और उसने अजय को अपनी ओर में कस किया और उसका हाथ चूमने लगी।

सौंदर्या को मस्ती में आते देखकर अजय को जोश आ गया और उसने तेजी से उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया तो सौंदर्या का मुंह मस्ती से खुल गया

" आह सीआई उफ्फ मम्मी, आह अजय हाय भाई आह दर्द होता हैं उफ्फ मम्मी।

सौंदर्या ने अजय की आंखो में देखते हुए उसके दोनो हाथो को अपनी चुचियों पर रख दिया और अजय अब पूरी ताकत से उसकी चुचियों को मसलते हुए तगड़े धक्के उसकी चूत में मारने लगा। सौंदर्या कभी सिसकती, कभी आन्हे भरती, मीठी मीठी आवाज में कोयल की तरह कूक रही थी

और अजय अपनी बहन की टाइट चूत में तेजी से लंड पेल रहा था। सौंदर्या का पूरा बदन कांपने लगा और उसने जोश में आकर अपनी गांड़ को उठाते हुए लंड को अपनी चूत में लेना शुरू कर दिया और जोर जोर से सिसक पड़ी

" आह भाई, कितना अच्छा लग रहा है, हाय मुझे क्या हो रहा हैं, उफ्फ मम्मी, हाय भाई।

अजय के धक्कों में भी तेजी आ गई और उसने पागल सा होकर तेज तेज तगड़े धक्के लगाने शुरू किए तभी सौंदर्या का जिस्म जोर जोर से कांपने लगा और उसकी चूत में तूफान सा उमड़ पड़ा और सौंदर्या ने अजय को पूरी जोर से कसते हुए ताकत से अपनी चूत को लंड पर उछाल दिया और अजय ने भी अपने लंड का एक आखिरी जोरदार धक्का अपनी बहन की चूत में जड़ दिया और इसके साथ ही उसका लंड सौंदर्या की बच्चेदानी से जा टकराया और दोनो बहन भाई के साथ सिसकते हुए झड़ते चले गए। दोनो पूरी ताकत से एक दूसरे से लिपट गए।

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सौंदर्या की चूत झड़ने के बाद मस्ती से उसकी आंखे बंद हो गई थी और अजय उसके उपर पड़ा हुआ था। दोनो भाई बहन अपनी एक पहली चुदाई को आंखे बंद करके महसूस कर रहे रहे थे।

सौंदर्या की चूत में वीर्य की बारिश करने के बाद अजय का लंड धीरे धीरे सिकुड़ कर बाहर की तरफ सरक रहा था और सौंदर्या इस अनोखे अदभुत एहसास से फिर से मस्त हो रही थी और उसने आंखे खोल कर एक बार फिर से अजय के होंठो को चूम लिया। अजय का लंड पूरी तरह से बेजान होकर उसकी चूत से बाहर निकल गया।

लंड बाहर निकलते ही अजय सौंदर्या के उपर से हटकर उसके साइड में आ गया और प्यार से उसके बालो में उंगली घुमाते हुए उसके चेहरे को देखने लगा तो सौंदर्या शर्मा गई और बोली:"

" ऐसे मत देखो ना भाई, मुझे शर्म आती है।

अजय:" अरे देख रहा था कि मेरी दीदी पूरी तरह से मंगल दोष से मुक्त होने के बाद पहले से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही है।

सौंदर्या उसकी बात सुनकर खुशी से मारे उछल पड़ी और उसका जोर जोर से मुंह चूमते हुए बोली

" क्या भाई सच में मेरे मांगलिक दोष का निवारण हो गया हैं ?

अजय: हाँ दीदी बस आपके बुरे दिन अब खत्म हो गए, अब आपके अच्छे दिन शुरू हो गए हैं।

सौंदर्या अपने भाई से लिपट गई और अजय ने भी उसे अपनी बाहों में समेट लिया।

सौंदर्या:" भाई क्यों न मां को हम अभी ये खुश खबरी दे।

अजय:" क्या पता दीदी मां सो गई होंगी। रात बहुत हो गई है।

सौंदर्या: अच्छा ठीक हैं तो कल फिर दिन में कॉल करेंगे। अच्छा भाई अब अंदर चलते हैं। बाहर मुझे ठंड लग रही है।

अजय ने नंगी सौंदर्या को गोद में उठा लिया और उसे लेकर कमरे की तरफ चल पड़ा। कमला दोनो की मा सोई नहीं थी बल्कि नंगी होकर बेड पर पड़ी हुई थी और शादाब उसके उपर चढ़ा हुआ उसकी गांड़ मार रहा था और कमला जोर जोर से सिसक रही थी।

अजय अपने भाई के बांहों में बांहे डाले हुए कमरे की तरफ चल पड़ी तो अजय को अपने हाथो पर चिपचिपा सा एहसास हुआ और अजय उसे बाथरूम के अंदर ले गया। सौंदर्या की दोनो जांघें खून से सनी हुई थी जिसे देखकर सौंदर्या डर सी गई तो अजय ने प्यार से उसका मुंह चूम लिया और बोला:"

" डरने की कोई बात नहीं दीदी, ये मंगल ग्रह आपका कुंवारापन अपने साथ ही ले गया।

सौंदर्या उसकी बात सुनकर शर्मा सी गई और मुंह नीचे करके बोली:"

" जाओ गंदे भाई, सब कुछ किया तुमने खुद हैं और दोष बेचारे मंगल को दे रहे हैं।

इतना कहकर सौंदर्या ने अपनी चूत को हाथ से छुआ तो उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी और उसकी उंगली खून से सन गई थी तो अजय ने उसकी उंगली को साफ किया और हल्के गुनगुने पानी पानी से उसकी चूत को धोने लगा। देखते ही देखते सौंदर्या की सिर्फ एक बार चुदी हुई चूत शीशे की तरफ साफ होकर चमकने लगी तो अजय ने उसकी चूत को सहला दिया और फिर अजय ने सौंदर्या को नहलाया और अपनी गोद में उठा कर फिर से बेड पर लेकर आ गया। अजय का लंड एक बार फिर से पूरी तरह से अकड़ कर लोहे की रोड जैसा बन गया था मानो जंगली शेर के मुंह खून लग गया था। हां खून ही तो लग गया था अजय के लंड पर आज सौंदर्या की चूत का जिससे लंड आज पूरा बवाल मचाए हुए था अजय के अंदर।

दोनो भाई बहन अपनी तक पूरी तरह से नंगे ही थे। सौंदर्या को शर्म आ रही थी क्योंकि वो अपने साथ के पूरी तरह से नंगी थी बस सिर्फ पर गीले बालों को ढकने के लिए एक तौलिया बांधे हुए थी इसलिए वो अपने कपड़े लेने के लिए अलमारी की तरफ बढ़ी और अजय प्यासी आंखो से उसे देख रहा था। जैसे ही सौंदर्या कपड़े निकालने के लिए झुकी तो उसकी चूत और गांड़ दोनो बाहर की तरफ खुल गए थे

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अजय ने पहली बार किसी औरत को इस पोजीशन में देखा और उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और वो तेजी से अपनी दीदी के पास पहुंच गया और पीछे से उसकी चूत और गांड़ के दोनो छेद एक साथ देखने लगा। सौंदर्या थोड़ी सी और अंदर की तरफ झुकी और उसकी सिर्फ एक बार चुदी हुई चूत के दोनो लाल सुर्ख होंठ हल्के से खुल गए और अजय का धैर्य जवाब दे गया। उसने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और आगे को झुकते हुए अपनी दीदी की कमर को पकड़ते हुए एक जोरदार धक्का उसकी चूत में जड़ दिया। सौंदर्या उससे पहले कि कुछ समझती लंड जोरदार आवाज के आवाज के साथ उसकी चूत में घुसता चला गया और सौंदर्या दर्द के मारे चिल्ला पड़ी

" आह हम्ममम सीआई आह मर गई आह्ह्ह्ह।

अजय उसकी दर्द भरी चींख सुनकर पूरे जोश में आ गया और बिना देर किए तेजी से उसकी चोद को चोदना शुरू कर दिया। सौंदर्या दर्द के मारे तड़प रही थी और अजय उसकी टाइट चूत की दीवारों को महसूस करके पगला सा गया था और जोर जोर से धक्के मारने लगा। सौंदर्या को हल्का हल्का अच्छा लगने लगा और उसने अपना हाथ अपनी चूचियों पर रख दिया तो अजय ने चूत में लंड घुसे घुसे ही उसे अपनी गोद में उठा लिया और बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़कर धक्के लगाने लगा तो सौंदर्या जोर जोर से सिसकियां लेते हुए मचलने लगी और उसकी चूत अपने भाई के तगड़े धक्के के आगे ज्यादा देर नहीं टिक सकी और उसने अजय को कसते हुए अपने रस की बुंदे उसके लंड पर टपका दी। अजय ने उसकी दोनो चुचियों को अपनी हथेलियों में कस लिया और जोर जोर से दबाने लगा सौंदर्या दर्द से कराहती हुई तड़प उठी और जोर लगाते हुए छूटने की कोशिश करते हुए साइड से हो गई तो अजय ने उसकी एक टांग को अपनी टांग के नीचे दबा दिया और एक हाथ को उसकी गर्दन में लपेट कर जोर जोर से धक्के मारने लगा। सौंदर्या की चूत अभी नई नई थी और उसकी चूत में दर्द हो रहा था और अजय को एहसास था कि थोड़ी देर चोदने के बाद सौंदर्या भी शहनाज की तरह उसकी दीवानी हो जायेगी इसलिए वो उसकी चूत को जोर जोर से कस कस कर मसलते हुए तेज तेज धक्के लगाने लगा।

सौंदर्या की चूत में लंड किसी हथौड़े की तरह लग रहा था और सौंदर्या दर्द के मारे जोर जोर से चिल्लाने लगी तो अजय ने उसका मुंह अपने हाथ से बंद कर दिया और पूरी ताकत से चोदने लगा तो सौंदर्या की आंखो मे आंसू आ गए और अजय से छूटने की कोशिश करने लगी। अजय उसकी एक चूची को हाथ से मसल रहा और और दूसरी को मुंह में जोर जोर से चूसते हुए उसकी चूत की धज्जियां उड़ा रहा था। सौंदर्या अपने भाई के इस वहशीपन को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाई और पूरी ताकत से उसे अपने ऊपर से धकेल दिया और तेजी से कमरे से बाहर की तरफ भागी लेकिन अजय ने उसे तेज से पकड़ लिया और उसे कमरे में पड़ी एक टेबल पर पटक दिया और उसकी टांगो को खोल कर फिर से लंड से लंड घुसा दिया तो सौंदर्या दर्द से दोहरी होती चली गई और चिल्ला उठी

" आह्ह्ह्ह्ह भाई, उफ्फ सीईईईआई नाहिई छोड़ दे मुझे , आह मर जाऊंगी मैं। आह दर्द हो रहा है बहुत तेजजज्ज।

अजय ने उसके दोनो कंधो को थाम लिया और आवारा सांड की तरह पूरी ताकत से धक्के लगाते हुए सिसका

" आआआह्हह मेरी दीदी, देख न कितना मजा आयेगा अभी तुझे, तेरा भाई कैसे चोदता हैं तुझे !! बस थोड़ी देर में तेरा दर्द गायब, हाय तेरी चूत मेरा लौड़ा कैसे कस रही हैं आआआह्हह्ह

सौंदर्या चूत में लंड घुसने से फिर से दर्द से कराह उठी और उससे छूटने की कोशिश करने लगी। हर धक्के पर उसे लग रहा था मानो अजय का लंड नही बल्कि खंजर उसकी चूत में घुस रहा है। सौंदर्या टेबल पर थी और उसकी दोनो टांगो को खोले हुए तेजी से उसे चोद रहा था और सौंदर्या का मुंह हर धक्के पर दर्द से खुल रहा था और अजय बिना उसकी परवाह किए हुए इसे अपनी मर्दानगी मानकर उसे और ज्यादा जोर से चोद रहा था।

सौंदर्या की चूत की दीवारों में आग सी लग गई थी और उसकी चूत से खून आने लगा जबकि अजय को लग रहा था कि उसकी दीदी की चूत फिर से गीली हो रही हैं और देखते ही देखते कुछ धक्के के बाद सौंदर्या जोर जोर से सिसकियां लेते हुए बेहोश सी हो गई तो और अजय के लंड में भी उबाल आया तो उसने लंड को बाहर निकाला और फिर से पूरी ताकत से सौंदर्या की चूत में घुसा दिया तो सौंदर्या मुंह फाड़कर दर्द से चिल्ला उठी और बेहोश होती चली गई। अजय ने उसकी चूत को अपने वीर्य से भर दिया और आंखे बंद किए उसके मुंह को चूमने लगा।

सौंदर्या की दर्द भरी चींख सुनकर शाहनाज तेजी से दौड़ती हुई आई और देखा कि सौंदर्या टेबल पर बेहोश पड़ी हुई हैं और अजय का लंड उसकी चूत से धीरे धीरे बाहर निकल रहा था, सौंदर्या की जांघें खून से सनी हुई थी। शाहनाज गुस्से से आगे बढ़ी और एक जोरदार थप्पड़ अजय के गाल पर जड़ दिया और तेजी से उसे सौंदर्या के उपर से हटा दिया और गुस्से से चिल्लाई

" अजय जानवर हो गया हैं क्या तू ? ये क्या कर दिया तूने अपनी बहन के साथ ?

अजय को काटो तो खून नहीं, अपने अपना सिर पकड़ लिया और सोचने लगा कि ये उसने क्या कर दिया। उसे अपने आप पर बड़ी शर्म आ रही थी और देखते ही देखते उसकी आंखो से आंसू निकल पड़े। शाहनाज ने गर्म पानी किया और अजय के लंड की मार से बिलकुल लाल सुर्ख होकर सूज जाने के कारण मोटी हो गई उसकी चूत को गर्म अपनी से झारने लगी ताकि सौंदर्या को थोड़ा आराम मिल सके। थोड़ी देर गर्म पानी से सिकाई करने के बाद उसने सौंदर्या के जिस्म को एक चादर से ढक दिया और उसके माथे को चूम लिया और उसके मुंह पर पानी के छींटे मारे तो सौंदर्या ने दर्द से कराहते हुए अपनी आंखों को खोल दिया और शाहनाज को देखते ही उसकी आंखो से आंसू निकल पड़े और शाहनाज की गोद में अपना सिर छुपाकर फफक फफक कर रो पड़ी। शाहनाज ने उसका हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी माथे को सहला कर तसल्ली देते हुए बोली:"

" रोते नही सौंदर्या, चुप हो जाओ, अपने आपको संभालो।

सौंदर्या भरे हुए गले से सिसकते हुए बोली:"

" मैं किसी को मुंह दिखाने के लायक नही रही, मेरे अपने ही भाई ने मेरे साथ ये क्या कर दिया।

शाहनाज:" बस सौंदर्या, ये सब शायद उससे तुम्हारी मांगलिक पूजा विधि के चलते हुआ होगा। गलती इंसान से ही होती हैं। भाई हैं वो तुम्हारा छोटा।

सौंदर्या जैसे ही उपर को उठने को हुई तो उसे अपनी जांघो के बीच में तेज दर्द का एहसास हुआ और फिर से दर्द से कराह उठी। शाहनाज ने उसे लेटे रहने का इशारा किया और बोली:"

" अजय अगर पूजा की सब विधियां ठीक से पूरी हो गई हो तो गाड़ी निकाल लाओ ताकि घर चल सके।

अजय का चेहरा आंसुओ से भरा हुआ था और सौंदर्या की बाते सुनकर उसके अंदर उसकी तरफ देखने की हिम्मत नही हो रही थी इसलिए वो बिना कुछ बाहर निकल गया और गाड़ी लेने चला गया।

सौंदर्या:" क्या मेरा इस हाल में घर जाना सही होगा ? घर में सबको क्या बोलूंगी मैं ?

शाहनाज:" उसकी चिंता तुम मुझ पर छोड़ दो। मैं सब कुछ संभाल लूंगी, वैसे भी पूजा खत्म होने के बाद यहां रुकने का कोई मतलब ही नहीं बनता।

इतना कहकर शाहनाज ने जल्दी से सारा सामान पैक किया और बाहर गाड़ी में ले जाकर रख दिया। उसके बाद उसे अजय को इशारा किया तो अजय अंदर आ गया और सौंदर्या की तरफ देखा तो उसने मुंह अपना मुंह गुस्से से दूसरी तरफ घुमा लिया।

अजय:" दीदी मुझसे गलती हो गई हैं, आप जो चाहे सजा देना लेकिन मैं आपको गाड़ी में बिठा देता हु।

इतना कहकर अजय आगे बढ़ा तो सौंदर्या किसी घायल नागिन की तरफ फुंफकार उठी

" हाथ भी मत लगाना मुझे, खुद चली जाऊंगी मैं। मर गई आज के बाद तेरे लिए मैं।

इतना कहकर वो धीरे धीरे लंगड़ाती हुई आगे बढ़ने लगी तो अजय ने हिम्मत करके उसका एक हाथ पकड़ लिया तो सौंदर्या ने गुस्से से उसके हाथ को दूर फेंक दिया और आगे बढ़ने लगी। अजय ने उम्मीद भरी नजरो से शाहनाज की तरफ देखा तो शहनाज ने उसे शांत ही रहने का इशारा किया और आगे बढ़कर सौंदर्या को सहारा देते हुए गाड़ी के अंदर ले आई।

अजय ने आगे बैठ कर गाड़ी को स्टार्ट किया और गाड़ी उनके घर की तरफ चल पड़ी। सौंदर्या शाहनाज की गोद में सिर रखकर सो गई और अजय अपने आप में खोया हुआ सा गाड़ी चलाने लगा।

...........................

गाड़ी अपने मंजिल की तरफ बढ़ रही थी और सुबह हो गई तो सभी को भूख लगने लगी तो अजय ने गाड़ी को एक ढाबे के बाहर रोक दिया और खाना लेने चला गया।जाने से पहले उसने शाहनाज को इशारा किया कि सौंदर्या को एक बार समझाए। शाहनाज ने इसे प्यार से आवाज लगाई तो सौंदर्या भी उठ गई थी लेकिन पूरी तरह से खामोश थी। अपने भाई को न पाकर उसने शाहनाज की तरफ देखा तो शहनाज बोली:"

" खाने के लिए कुछ लेने गया है। आता ही होगा।

सौंदर्या:" ना आए तो ही बेहतर हैं। मुझे उसकी शक्ल से भी नफरत हो गई है।

शाहनाज: ऐसा नहीं बोलते। सगा भाई हैं वो तुम्हारा।

सौंदर्या:" मेरा उससे कोई रिश्ता नहीं, मर गया है वो मेरे लिए।

शाहनाज:" सौंदर्या गलती इंसान से ही होती हैं और अजय भी तो इंसान ही है। देखो ना उसने तुम्हारे लिए इतना सब कुछ किया है और आज सिर्फ उसकी वजह से ही तुम्हे मंगला से मुक्ति मिली।

सौंदर्या:* बस बस इससे अच्छा तो मांगलिक ही ठीक थी। और आपका उसका इतना पक्ष इसलिए ले रही हो क्योंकि आप के उसके साथ गलत संबंध है।

शाहनाज को समझ नही आया कि क्या जवाब दे। थोड़ी देर के लिए खामोश रही और फिर बोली:"

" जो कुछ हुआ वो पूजा विधि और हालात के चलते हुआ। मैं तो अब हमेशा के लिए अपने बेटे के साथ फिर से अमेरिका चली जाऊंगी लेकिन तुम्हे अपने भाई के साथ जिंदगी भर साथ रहना होगा इसलिए कोई ऐसा कदम मत उठाना कि जिंदगी भर पछतावा हो तुम्हे।

इतना कहकर शहनाज़ चुप हो गई। अजय भी आ गया था और दोनो के लाख समझाने के बाद भी सौंदर्य ने खाना नही खाया तो उन दोनो में भी नही खाया और थोड़ी देर के बाद आखरिकर वो घर पहुंच ही गए।

अजय और शहनाज़ बुरी तरह से डर गए थे कि अगर सौंदर्या ने अपना मुंह खोल दिया तो क्या होगा। कमला दौड़ती हुई आई और सभी की आरती उतारने लगी। शादाब भी अपनी मां को देखकर बहुत खुश था। सौंदर्या बिलकुल खामोश थी तो कमला बोली कि इसे क्या हुआ ?

शाहनाज:" वो पूजा का असर हैं अभी शायद। कुछ दिन में ठीक हो जायेगी।

उसके बाद सभी लोगो ने खाना खाया और सौंदर्या को कमला ने खुद अपने हाथ से खाना खिलाया। धीरे धीरे रात गहराने लगी और जैसे ही 12 बजे तो कमला ने सौंदर्या, अजय और शहनाज़ तीनो को एक कमरे में इकट्ठा किया और बोली:"

" बेटा तुम्हारे जाने के बाद आचार्य जी ये खत देकर गए थे। बोल रहे थे कि अब मैं कभी वापिस नहीं आऊंगा। ये खत मांगलिक दोष से निवारण के बाद सौंदर्या ही अपने हाथो से पढ़ेगी। सिर्फ तुम तीनो को ही बस पता होगा कि इसमें क्या लिखा हैं। इसलिए मैं चलती हु।

तीनो एक दूसरे का मुंह देखने लगे और कमला बाहर निकल गई। सौंदर्या ने कांपते हाथो से खत को खोला और पढ़ने लगी

" प्यारी बेटी सौंदर्या। जब तुम ये खत पढ़ रही होगी तो मांगलिक दोष से पूरी तरह से मुक्त हो गई होगी। तुम्हारे इस दोष निवारण के लिए अजय और शहनाज़ का बहुत बड़ा योगदान हैं जिसे तुम अपनी जान देकर भी नही उतार पाओगी। वहां पर तुम तीनो के बीच जो भी संबंध बने वो सब मंगल प्रभाव के चलते बने ताकि तुम्हारी पूजा सफल न हो सके लेकिन फिर भी तुम कामयाब रहे तो इसके लिए अजय और शहनाज़ दोनो ही जिम्मेदार है। इस खत को पढ़ने के बाद इस कमरे से बाहर निकलते ही पूजा विधि में वहां जो भी हुआ तुम सब भूल जाओगे और तुम्हे चाह कर भी कुछ भी याद नही रहेगा। तुम्हे अपने भाई से बेहतर जीवन साथी कहीं नहीं मिल सकता इसलिए तुम्हारी उससे शादी होकर रहेगी। तुम्हारे मंगल दोष से मुक्त होते ही मुझे भी जीवन से मुक्ति मिल जाएगी क्योंकि तुम लोगो को जो राह मैने दिखाई वो धर्म संगत नहीं थी लेकिन कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था। सदा खुश रहना।

ये सब सुनकर तीनो की आंखे भर आई क्योंकि आचार्य जी अब इस दुनिया में नही रहे थे। तीनो ही एक दूसरे से लिपट कर रो रहे थे और माफी मांग रहे थे। आखिर कर वो कमरे से बाहर आ गए और सब कुछ एक सपने की तरह भूल गए।

अजय और सौंदर्या दोनो की शादी हो गई क्योंकि कमला ने खत को पढ़ने के बाद अपन सहमति दे दी थी। शादाब भी अपनी मां शाहनाज के साथ वापिस अपने घर की तरफ चल पड़ा।

समाप्त।
 
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