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गुप्तगू , बहन के साथ: भाग - 2

Neelkamal626

New Member
नमस्ते दोस्तों, मै नील और आप पढ रहे है गुप्तगू , भाग - 2


जैसे की आपने मेरी पिछली कहानी में पढ लिया की कैसे मै और मेरी छोटी बहन दिशा, एक सेक्सी किताब के जरीए आपस में गुप्तगू कर रहे थे | अब आगे बताऊंगा की हम अब वाटस् अप पर किस प्रकार से गुप्तगू करेंगे, तो पढते रहिए गुप्तगू...


मैने तुरंत मोबाईल मे वाटस् अप खोला, दिशा का नंबर निकाला, मेरा हात कांप रहा था, मुझे अभी भी डर था की, सही मे दिशा ही है , या फिर कोई और ? मैने कांपते हांतों से लिखना शुरू किया |

नील: हाय
थोडा वेट करने के बाद मेसेज आया...

दिशा: हाय भैया, बोलो...

नील: क्या कर रही हो...

दिशा: लेटी हूं, मन नही लग रहा...

नील: दिदी.. किताब लेकर जाओ, वो वाली, पढ लेना रात भर...

दिशा: किताब तो पढ लूंगी , पर रात भर सो नही पाऊंगी फिर...

नील: वो कैसे?

दिशा: आग लग जाएगी... फिर कैसे सो पाउ़गी?

नील: मै कुछ मदत कर सकता हुं तो, मुझे जरूर बताना....

दिशा: आपको ही तो पूरा काम करना है भैया... अब ... सिर्फ मदत करने से कुछ भी हल नही निकलने वाला...

नील: मै भी तो कब से तैयार हूं दिदी... बस एक बार बुलाओ तो सही

दिशा: मेरा बस चले तो आज - अभी बुला लेती तुमको, मगर कुछ दिक्कत आन पडी है...

नील : दिक्कत... कैसी?

दिशा: वही ... लडकीयों वाली प्रॉब्लम... चार-पाच दिनों तक नही बुला सकती ....

नील: अच्छा ओके ओके... ठिक है समज गया मै...

दिशा: भैया बहुत देर कर दी आपने?

नील : किस बात की देर दिदी?

दिशा: बात को यहां तक पहुचाने मे...

नील: मै तो तीन साल से तडप यहां हू, पर तुम ही भाव खाती थी...

दिशा: मै तो लडकी हूं , पर पहल तो मर्द ने करनी चाहीए ना भैया...

नील: पर मै तुम्हारा भाई हूं, मै ही तुम्हारे साथ कैसे ये सब कर सकता था?

दिशा: तो फिर अब कैसे तैयार हुए हो? अब भी मै तुम्हारी बहन ही हूं...

कुछ देर तक तो मै कुछ , टाईप नही कर पाया, सोचा अब क्या जवाब दू?

दिशा: बोलो भैया...
मै बताती हूं, तुम मर्द सब एक जैसे होते हो, चाहते सब हो पर एटिट्युड दिखाते नही थकते... मुझे चाहते थे तो फिर तब क्यों भागे थे, जब आपने मुझे नंगी देखा था, गलत हरकत करते हुए... क्यों नही पकडा आपने मुझे... कर देते शांत उसी समय... मै यही तो चाहती थी... आप मेरे साथ वो सब करे, जो पती अपनी पत्नी के साथ करता है... आपकोही तो मन मे सोच कर फील कर रही थी मै... पर आप तो भाग गए मुझे प्यासी छोडकर... तब से आजतक प्यासी ही हूं... अब जाकर काबू आए हो....

नील: चहता तो मै भी था , पर तब तुम छोटी थी, इसलिए मैने तुम्हे छोड दिया था तब, पर अब नही छोडूंगा,

दिशा: अब तो मै तुम्हारे लायक बडी हो चुकी हूं ना भैया?

नील: हां दिदी , अब तो तुम्हे जरूर चखुंगा...

दिदी: भैया चलो अब सो जाओ... कल बाते करते है...

नील: ओके गुड नाईट

दिशा: आय लव यू...

नील: आय लव यू दिशा...

फिर मोबाईल ऑफ् करके मै सोने की कोशिश करने लगा पर काफी देर बाद नींद आयी |

अब मुझे तो लग रहा था की कब ये चार दिन निकल जाएंगे... टाईम ही नही जाता था, सामने बस दिशा का खुबसुरत चेहरा और उसका लंबा शरीर, बडे बडे मम्मे और मोटी-चौडी सेक्सी गांड ही दाखाई देती थी | किसी काम में भी मन नही लग रहा था| अगले दिन मै किसी काम से पुणे चला गया दो दिन तक मै वही रहा , वापस आकर दिदी से मिला | मेरी झगडालू और कभी ना शरमाने वाली दिदी मुझे देखकर पहली बार शर्मा गई| उसको शर्माते देख मेरे दंड महाराज ने अपने आप एक झटका लिया और इतना तन गया की पैंट मे उभार दिखने लगा | दिदी की नजर पड गई, तो दिदी भी चौक गए शायद इतना बडा पहली बार देख रही है| मेरा हतियार आठ इंच लंबा और काफी मोटा भी है | दिदी का चेहरा लाल हो गया, आंखे मदहोश हो गई , गला सूख गया और चाल लडखडा गई| उसके चहरे के हावभाव बदल गए | वह हडबडा गई, बोली...

दिशा: आप तैयार हो जाइए , मै खाना लगाती हूं..

और वह भाग गई...
खाना खाते समय हम दोनों मे कोई बातचीत हुई नही, बस हम दोनो एकदुसरे से नजरे चुराते रहे | उस दिन रात मे भी हमारी कोई चॅट नही हुई | दुसरे दिन मै जरा जल्दी फैक्ट्री मे गया, दोपहर तक जरूरी काम खत्म करके मै फ्री हो गया ,पर एक बात मुझे सता रही थी, वो यह की, हम दोनों एकदुसरे को कैसे फेस करेंगे? हम दोनों जब सामने होते है तो , नर्वस हो जाते है | रात को कैसे रोमांस कर पाएंगे?
मैने दिशा को मैसेज किया

नील: क्या तुम तैयार हो?

थोडी देर बाद रिप्लाय आया

दिशा: हा ... पर कैसे होगा ये नही पता...

नील: मेरा भी यही हाल है...

दिशा: भैया रात को गैरह बजे आप आना... मै तैयार होकर सो जाऊंगी... मै कुछ नही बोलूंगी आप जो करना है करना भैया पर जरा आराम से..

नील: ओके.. आता हूं रात को.. बाय...

दिशा: बाय...

मै अब थोडा रिलॅक्स हुआ लेकिन, मेरा टाईम पास नही हुआ, रात गैरह बजे तक ऐसा लगा जैसे महिनों निकल गए | ठिक गैरह बजे मै दिदी के कमरे की तरफ बढा| दरवाजा धिरे से धकेला, खुला ही था, बेडरूम मे अंधेरा था | मै अंदर जाकर धिरे से दरवाजा बंद किया , और अंधेरे मे ही अंदाजे से दिशा की बेड की तरफ बढ गया | थोडी देर बाद मेरी नजरे अंधेरे मे सेट हो गई, और मै थोडा थोडा देख पा रहा था। दिशा एक तरफ करवट करके लेटी थी | मै कुछ भी नही बोला, धिरे से उसके पिछे जाकर लेट गया | अब तक मेरा हतियार टाईट हो चुका था | पिछे से दिशा की गांड बहुत बडी और विशाल लग रही थी। मेरे हात कांपने लग गए।

मै भी उसके पिछे से जाकर सट गया। दिशा थोडा सा हिली , मगर फिर स्थीर हो गई | मेरा शरीर भी कांप रहा था | मैने आजतक कभी सेक्स नही किया थ। मैने दिशा की गर्दन पर किस किया,तो दिशा ने थोडी हरकत की। फिर मैने धिरे से एक हाथ उसके आगे लेकर छाती पर रखा और हल्के से दबाने लगा। क्या मम्मे थे। काफी बडे बडे, इतने तो किसी मोटी औरत के भी नही होते। बहुत मजा आ रहा था। मै उसकी गर्दन पर ओठ रखकर तुम रहा था, और एक हाथ से मम्मों दबा रहा था। मेरा लौडा दिशा की गांड पर उपर से ही रगड खा रहा था। दिशा भी अब हरकत मे आ गई। उसने एक हात धिरे से मेरे लंड पर रखा और दबाने लगी। आज तक किसी ने भी मेरे दंड को ऐसे छुआ नही था, तो लंड और भी कडा हो गया, बिलकुल पत्थर की तरह। दिशा ने अपना चेहरा पिछे को किया और मेरे ओठों पर अपने ओठ रख दिए। मैने दिशा के नाजूक ओठोंपर कोई रहम नही दिखाया। जोर जोर से ओठ चुसने लगा। धिरे धिरे दिशा सिधी होकर लेट गयी, और मै उसके उपर चढ गया।
उसने मुझे कस कर पकडा हुआ था, मै दिशा के मांसल शरीर पर दबा हुआ था | धिरे धिरे मै निचे खिसक गया और दिशा की नाईटी उपर खिसकाई, दिशा ने कट साईज की पॅंन्टी पहन रखी थी | उसकी मोटी और मजबूत जांघे देखकर मेरे मुंह मे पाणी आ गया | मैने अपना चेहरा उसकी जांघों मे दबाया, मुझे उसकी चुत की खुशबू ने पागल बना दिया |
पॅंन्टी के उपर से ही मैने चुत पर किस किया और चुमने लगा , दिशा चुत को उठकर मेरे मूॅंह पर रगडने लगी, पॅंन्टी के उपर से ही चुत गरम लग रही थी, उसकी नंगी जांघे भी मेरी छाती को आग की तरह गरम लग रही थी |

मैने धिरे धिरे उसकी पॅंन्टी निचे को खिसकाई तो मुझे दिशा की चुत के दर्शन हो गए | गोरे रंग की मांसल, भरी हुई गद्दैदार चुत पर बाल साफ करके रखी थी। चुत से चिपचिपा पाणी निकल कर पँन्टी भीग गई थी। मैने पॅंन्टी को घुटनों तक किया और चुत के मूंह तक अपनी नाक को लेकर गया। चुत की खुशबू ने मेरे दिलों दिमाग को मदहोश कर दिया था। थोडी देर चुत को सूंघने के बाद मैने जीभ को बाहर निकालकर चुत के दाने को छुआ... दिशा सिहर गई और उसने कमर को उपर उठकर मेरे मूंह पर दबा दिया और दोनो हांतों से मेरे सिर को अपनी जांघों मे दबाया ,, गद्देदार और मांसल चुत के बाहरी हिस्से मे मेरी नाक और मुँह ऐसे दब गया की मुझे सांस नही आ रही थी, मै कसमसाया ऐसा लगा अभी सांस बंद हो जाएगी | थोडी देर मे उसने मुझे छोडा, मै उठकर बैठ गया।


अब मैने अपने पुरे कपडे निकालकर नंगा हो गया, और दिशा के उपर मुँह के पस जाकर लौडा उसके ओठोंपर रगडने लगा। दिशा मूंह को इधर उधर करने लगी, मैने जबरदस्ती उसके चेहरे को पकड कर लौडा मूंह मे धकेल दिया | पहले तो दिशा मूंह बनाकर मेरी तरफ देखने लगी पर दो-चार बार लंड आगे-पिछे होणेपर उसको अच्छा लगने लगा, फिर ओ अपने आप लंड चुसने लगी | दिशा मेरी कमर को पकड कर अपनी तरफ खिंचने लगी,और पुरा लौडा मूंह मे लेने की नाकाम कोशिश करने लगी पर अभी तक आधा भी लंड मूंह मे नही ले पाई थी।

लंड की जबरदस्त चुसाई कर रही थी दिशा, मेरे पुरे शरीर मे जबरदस्त मदहोशी छाई हुई थी। पांच-दस मिनिट के बाद मुझे ऐसा लगने लगा की अब मै दिशा के मूंह मे ही स्खलित हो जाऊंगा। मैने लंड को बाहर खिंचना चाहा पर दिशाने मेरी कमर को बहुत जादा कसकर पकड रखा था , वो बिलकुल भी ढिला नही छोड रही थी। थोडी बहुत कोशिश करने के बाद मै हार कर प्रयास छोड दिया। अब मुझे लगने लगा की मेरा तो जल्दी ही निकल जाएगा पर तब दिशा ने अचानक लौडा मूंह से बाहर खिंचा और हांफने लगी।

मैने जैसे तैसे अपने आप पर कंट्रोल कर दिया, कही विर्य ना बाहर निकले! मौका हात लगा है, अच्छी तरह से पेलूंगा अपनी सुंदर और सेक्सी छोटी बहन की बूर.... लंबी लंबी सांसे लेकर मैने खुद को और अपनी भावनाओंपर काबू पा लिया | निचे दिशा ने अपनी नाईटी और अंडर गारमेंट पुरे उतार फेंके और सिधी लेट गई | टांगों को खोलकर हवा मे उठाई और अपनी भाहे फैलाकर मेरी तरफ देखकर अपने निचले ओठों को दातों से काटकर बोली...

दिशा: आ जाओ भैया... जल्दी आगोश मे लेलो... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

नील: सब्र करो मेरी राणी.. . थोडी सांस लो.. अभी हमे बहुत लंबा आगे तक जाना है...

दिशा: मुझसे अब जादा आगे नही जाया जाएगा... बस जल्दी से तृप्ती देदो...

नील: मै लेकर जाऊंगा दिदी तुम्हे बहारों मे...

और मैने फिर से एक बार दिशा की उभरी हुई मांसल योनी पर जिभ लगाकर चाटने लगा, संकरे योनीमार्ग को थूक से लबालब कर दिया... दिशा के मूंह से आह् स्स् SSS ऐसी आवाज निकलने लगी... फिर मै दिशा की दोनों केले की तनी जैसे मांसल जांघाओं के बिच आया और अटॅक की पोझिशन मे आया | लंड को हाथ मे लेकर दिशा की गोरी और चिकनी गद्देदार योनी के संकरे छेद , जो की कभी खुल और कभी बंद हो रहा था, पर टच किया, दिशा ने अपनी मोटी-चौडी जंघाओं को पहले से ही पूरा खोलकर और उठाकर रखके मेरी हेल्प करी थी। मैने धिरे धिरे कमर को आगे किया, लंड दिशा की योनी मार्ग के द्वार पर फिट बैठा था। मामला जरा टाईट लग रहा था, मै वैसे ही रुका रहा फिर थोडा आगे को जोर लगाया, और थोडा सा अंदर घुस गया, पूरा टोपा ही गया था पर दिशा ने अपनी आंखें बंद करके दर्दभरा मूंह बनाया था मगर अभी तक डालने से मना तो नही किया था, पर मै ही थोडी देर रुक गया, थोडी देर बाद दिशा ने खुद ही निचे से उपर जोर लगाना शुरु किया | तो मैने भी उपर से मेरे शरीर का वजन उसके योनी पर छोड दिया | दिशा के मूंह से स्स्स्स्स्स्स्स््स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् ओह् मर् गईईईईईई य्य्य्य्या ऐसी आवाज आ गई और लौडा पूरा की पूरा चुत की दिवारों पर रगड खाकर खस्स्स्स् कर के दिशा की मदमस्त चुत मकी अंतिम छोर तक , गहराई मे पहुंच गया।

दिशा को काफी दर्द हो रहा था पर वो बोल कुछ नही रही थी। मैने उसी पोझिशन मे दिशा के ओठों पर अपने ओठ रखे और लिपलाॅक कर दिया। एक हात उसके मम्मे पर रखा और दषबाने लगा | काफी टाईट हो गए थे मम्मे, पत्थर की तरह। चुत की दिवारों ने लंड को कसकर पकडा था | लेकिन कुछ ही सेकंड मे चुत गीली होनी शुरू हो गई, मै समझ गया , अब दिशा का दर्द कम हो गया है और उसे मजा आने लगा है तो मैने लंड को हल्के से बाहर खिंचा और फिर से चुत मे दबाया | दिशा की सासकारी निकल गई... ओ य्य्या...
फिर मैने धिरे धिरे आगे-पिछे करना शुरू किया। चुत का कसाव काफी था लंड के उपर, पर चुत पाणी छोड रही थी , इसलिए लुब्रिकेशन अच्छा था, और लंड अंदर बाहर होने मे तकलीफ नही हो रही थी।
फिर मैने धिरे धिरे अपनी स्पीड बढाना शुरू किया। मेरे हर धक्के के साथ दिशा के मम्मे हवा मे ऐसे लहरा रहे थे जैसे भीम की गदा... कुरुक्षेत्र पर तांडव मचा रही हो। दिशा के मम्मे देखकर ऐसा लगता था जैसे कोई सेक्स की देवी इंद्र के दरबार से मेरे लिए गिफ्ट की हो। पतला शरीर होने के बाद भी मम्मों का साईज कमाल का था। उपर से मोटी मोटी जंघाए, फूली हुई योनी और देखने वाली चिज तो पिछे थी.... चुथड.... विशाल चुथड... क्या बात है...

मै मदहोश होकर चोदने लगा, अपनी ही छोटी बहन को, ऐसे... जैसे वो मेरी बहन नही, बीवी हो...मेरा स्पीड अब बढ चुका था, और दिशा भी चुदाई के समंदर मे मदहोश हो गई थी। मुझे दिशा अब थंडी की तरह लग रही थी। जैसे ब्ल्यू फिल्मों मे सनी लिओन होती है.... दिशा लगातार मुझे निचे खिंचकर चुम रही थी। प्यार जता रही थी। अपनी टांगों को मेरी कमर के ईर्दगीर्द लपेटकर अपनी योनी मे खिंच रही थी, मानो मूझे अपनी योनी मे समाना चाहती हो। फिर मैने जोर जोर से धक्के लगाने लगा। छपाक् छपाक् आवाज आने लगी। बहुत सेक्सी माहोल बन गया था। धक्के लगाते लगाते मैने दिशा के मम्मों को चुसना शुरू कर दिया। और थोडी ही देर मे कमाल हो गया। दिशा अकडने लगी। उसने मुझे इतनी जोर से कसकर पकडा की , मुझे अपने शरीर मे घुसाकर अपने मे समाना चाहती हो। दिशा की चुत से फव्वारे छुट गए। और कुछ देर शांत रहने के बाद मुझे उपर से हटाने लगी पर मै तब तक नही हटा जब तक मै अपना विर्य उसकी चुत की गहराई मे ना छोड दू। दस मिनट के बाद मैने लंड को बाहर खिंचा और साईड मे लेट गया।

फिर हम दोनों एकदुसरे को बाहों मे लेकर सुबह तक सो गए। सुबह जब मै उठा तो देखा दिशा बेड पर नही थी। और मेरे शरीर पर पुरे कपडे भी पहनाए थे। शायद दिशा ने पहनाए होंगे। मै उठकर अपने रूम मे चला गया। जब बाथरूम मे नहाने के लिए नंगा हुआ तो देखा मेरे लंडपर सुखा हुआ खुन था। पूरा लंड सना हुआ था खून से। मै नहाकर ब्रेक फास्ट के लिए गया। दिशा खुद ब्रेकफास्ट लेकर आयी। मुझे देखकर नजरे निचे करते हुए शरमाने लगी। मैने उसे देखकर अति सुंदर हो तुम... ऐसा ईशारे मे ही कहां तो नाक और मूंह को मोडकर मेरे आगे आकर बैठ गई। उसको देखकर फिर से मेरे लंड ने सलामी दे दी। मैने टेबल के निचे से उसके पैरोंपर पैर रखा, तो वो मेरा तरफ देखने लगी। और मुस्कुराते हुए कहने लगी...
दिशा: लगता है राजाजी का पेट भरा नही हे रात को...

नील: रात को तो भर गया था पर क्या करे खाना इतना अच्छा है की फिर से भूक लग गई।

दिशा: फिलहाल तो नास्ता कर लो, खाना खाने रात को ही आना पडेगा...

ऐसा बोलते ही मै उठा और दिशा को ग़द मे उठाकर सिधा अपने बेडरूम की तरफ बढ गया।

दिशा: क्या कर रहे हो भैया? कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा? सुनंदा भी घर मे सफाई कर रही है। बाकी नोकर भी है। छोडो मुझे

लेकिन मै कहां मानने वाला था! मै सिधा बेडरूम मे आकर उसको बेड पर पटका और उसके उपर भूके सेर की तरहां कुट पडा। उसके पजामे का नाडा खोलकर कमर से निचे नंगा कर दिया और दिशा की गांड पर हमला बोल दिया। मै उसकी गांड का छेद चाटने लगा। शायद उसे भी अच्छा लगने लगा था, वो घोडी बन गई और गांड को मेरे मूॅंह पर दबाने लग गई।

पर आगे क्या हुआ ये मै अगले भाग मे बताऊंगा। पढते रहिए गुप्तगू...
 
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