• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

बहन का दर्द Complete

S

StoryPublisher

Guest
बहन का दर्द

फ्रेंड्स अभी एक छोटी सी कहानी स्टार्ट कर रहा हूँ फिर समय के हिसाब से कोई लंबी सी कहानी पोस्ट करूँगा मित्रो ये कहानी माँ बेटा बहन भाई पर आधारित रहेगी जो आपको ज़रूर पसंद आएगी
 
रवि आज कोई 5 साल बाद अपने गाओं वापस आया था....

वो आर्मी मैं है...कारगिल की जंग ख़तम हुई है... सारे देश मैं देश के जवानों के लिए एक जोश था....

उसने अपने घर मैं किसी को भी अपने आने की सूचना नहीं दी थी वो एक सर्प्राइज़ देना चाहता था.....

वो जैसे ही स्टेशन पर पहुँचा उसे लगा जैसे सारा कस्बा उसके स्वागत के लिए उमड़ पड़ा हो......

स्टेशन पर डीएम , एसएसपी , एमएलए और सभी गणमान्य नागरिक उसके स्वागत के लिए खड़े हुए थे..... उस पर ढेरों मालाए डाल दी..

तभी उस की नज़र भीड़ मैं एक बला की सुंदर लड़की पर गयी...वो उसे देख कर मंद-मंद मुस्कुरा रही थी.....

जब सब की मालाए डल गयी तो वो धीरे से रवि के पास आई और उसने भी रवि के गले मे माला डाल दी....

बगल मे खड़े कॉलेज के प्रिन्सिपल साब ने बताया क़ी ये हमारे यहाँ मेद्स की टीचर हैं.... दोनो की आखें टकराई...

और एक दूसरे को विश किया.... फिर सब लोग उसे कॉलेज के ग्राउंड मे ले गये जहाँ हज़ारों की भीड़ उसे देखने आई हुई थी...

सारी भीड़ आर.पी. सिंग जिंदाबाद- जंदबाद जिंदाबाद के नारे लगा रही थी.....कॉलेज के प्रांगण में उसका फिर स्वागत हुआ...

फिर सब लोगो की भाषण बाजी शुरू हुई....रवि को 10 लाख का स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से चेक मिला बहादुरी के लिए....

असल में रवि को जंग मे वीरता के लिए शौर्य चक्र मिला है.....इसके अलावा उसे ... पास के थर्मल पवर प्लांट के चीफ की तरफ से भी 10 लाख का चेक मिला.... केंद्र सरकार से 20 लाख का चेक मिला, उसे तमाम इनाम मिले....

जब सारा कार्य क्रम ख़तम हो गया.....और सब लोग स्नॅक्स लेने लगे ...उसने एक बात नोटीस की...वो लड़की बराबर उसे देख रही थी.... और उसकी झील की जैसी प्यारी आखों मैं एक अजब सी चमक थी..... दोनो की नज़रें फिर एक दूसरे से टकराई.... और वो झेंप गयी और उसने नज़रें दूसरी तरफ फेर ली.... रवि ने अपनी प्लेट में कुछ स्नॅक्स लिए और वो उस लड़की की तरफ चला गया....

 
हेलो..... वो दूसरी तरफ मुहँ कर के खड़ी हुई थी.... रवि की आवाज़ सुन कर जैसे वो नींद से उठी हो ... ओह... हाई हेलो ...कैसे हैं आप...

असल मैं वो रवि के और दूसरों के सामने एक दम से नर्वस सी हो गयी.....

रवि: मैं ठीक हूँ... आप कैसी हैं...

वो: जी मैं भी ठीक हूँ....

रवि: यहाँ कब से पढ़ा रही हैं आप...

वो: अभी जाय्न किया है... 3-4 महीने हुए हैं.....

दोनो बातों में मशगूल हो गये..... रवि भीइ आर्मी में रह कर बहुत हॅंडसम हो गया था.....इस समय उसने आखों पर रेबन का सनग्लास लगा रखा था...और आर्मी की ड्रेस में वो गजब का स्मार्ट लग रहा था....

रवि: कहाँ रहती हैं आप....

वो: जी रामगढ़ में.....

रवि: चौंकते हुए... रामगढ़ अरे वो तो मेरा भी गाँव है....

तभी किसी ने उसे पीछे से आवाज़ लगाई रवि साब.... वो उधर मुड़ा और इशारे से बोला ... कमिंग....

रवि: अब चलना होगा....

वो : जी ठीक हैं....

रवि : पर अपना तो एक ही गाँव हैं... मिलते हैं वहीं...

उसके मुहँ से बार-बस निकल गया हो जैसे ....

कब....!

रवि : आज शाम को ...गंगा के किनारे.... ठीक 6 बजे...

वो: शरमाते हुई.... जी ठीक है....

रवि जाने को मुड़ा और फिर उस लड़की की तरफ मुड़ा... और बोला....आप बहुत सुंदर हैं..!

उस को लगा जैसे उस पर ढेरों पानी डाल दिया हो..... वो शरम से लाल हो गयी.....

और रवि मूड कर लोगो से मिलने लगा... सब उस से हाथ मिलाना चाहते थे.....

कुछ देर में उसने सब से चलने की आग्या माँगी... और वो अपने गाओं के लिए निकल पड़ा.......

 
घर के आगे टॅक्सी के रुकते ही... उसने अपने घर को देखा.. गाओं भी बहुत बदल चुका था.... बहुत डेवेलपमेंट हो गया था गाओं में....

घर में अंदर आते ही उसने देखा .. माँ सामने ही बैठी हुई थी.... माँ तो रवि को देखते ही पागल सी हो गयी...

बेटा... अरे कितना बड़ा हो गया है.... माँ ने तुरंत अपनी आखों का काजल निकाल के उसे लगा दिया.... कहीं नज़र ना लग जाए...

माँ की आखें ख़ुसी से डब-डबा रहीं थी.......

तभी रवि ने पूछा माँ दीदी कहाँ है...

अभी -अभी निकली है.... शायद किसी सहेली के घर होगी....

तभी रवि की नज़र रिस्ट वॉच पर गयी.... ओह माइ गॉड.... 6 बज गये..... उसे याद आया उसे उस लड़की से भी मिलने जाना था...

जो उसको कॉलेज में मिली थी...

क्या हुआ... ऐसा क्या हो गया.... माँ बोली...

अरे नहीं माँ मैं अभी आता हूँ.... दीदी आए तो उन्हें मत बताना मैं आया हूँ ...मैं उन्हे सर्प्राइज़ दूँगा.....

कहाँ जा रहा है...

दोस्त से मिलने रवि बोला.. और दौड़ता हुआ..... नदी की तरफ भाग निकला....

रवि मन ही मन सोच रहा था.... पता नहीं वो आएगी या नहीं आएगी.... वो अपने आप को कोस रहा था उसने उसका नाम भी नहीं पूछा.. नहीं तो कम से कम वो उसे ढूँढ ही लेता... ..उधेड़ बुन मे...वो गंगा के किनारे पहुँच गया....

बड़ा ही शानदार और भव्य द्रश्य था गंगा किनारे का... सामने सूरज डूबने को था..... सारी नदी.... सूरज की लालिमा से लाल हो रही थी..... चारों तरफ पन्छियो की गूँज से वातावरण बड़ा स्वर्णमय हो रहा था.... तभी उसने चारों तरफ देखा.... उसे दूर एक साया.... खड़ा दिखाई दिया..... सूरज के बीचो बीच..... वो उस साए की तरफ बढ़ चला ...

शायद ये वोही थी..... उसका मुहँ सूरज की तरफ था.... रवि की तरफ उसकी पीठ थी..... क्या गजब था वो सीन ....

रवि उसके करीब पहुँचा........ उसने चोली घाघरा पहना हुआ था..... चोली केवल एक डोरी से बँधी हुई थी.... पीछे से उसकी पीठ ऐसे लग रही थी जैसे... दमकता हुआ.... कुंदन (गोल्ड)..... चारों तरफ पत्थर थे... और आस पास घनी झाड़ियाँ थी.... वो घुटने-घुटने पानी में थी....

रवि उसके पास गया..... सुनिए.... रवि की आवाज़ सुन कर वो मूडी...... क्या दमकता रूप था उसका...बॅकग्राउंड मे.... सूरज... नीचे गंगा नदी का पानी...चारों तरफ कल-कल करती...पन्छियो की आवाज़ें , पानी की आवाज़ें.......

वो जल्तरंग सी बोली... आ गये आप....

हां.... रवि पसीने से सारॉबार था....

सुना हैं आर्मी वाले टाइम के बड़े पंक्चुयल होते हैं....

रवि ने अपनी घड़ी देखी ...6.15 हो रहे थे.... सॉरी...वो मैं घर गया & यू कॅंट बिलिव मैं सीधा भागते हुए आ रहा हूँ....

उसने देखा रवि पूरा पसीने से सरॉबार है.... अरे लगता है दौड़ते हुए आ रहे है....

हां एंड कॅन यू बिलिव ..आज मैं रेकॉर्ड टाइम में यहाँ आ गया हूँ... मैं आर्मी मे स्प्रिंटर भी हूँ.....

वो हंसते हुई चलो अच्छा है इसी बहाने आपने अपना रेकॉर्ड बना लिया.....

रवि ने अब गौर से उसे देखा... क्या गजब का रूप दिया था भगवान ने उस लड़की को...... रंग गोरा.... सुराहीदार गर्दन....उभार..चुचियाँ.... शायद रवि ने इतनी बड़ी पहाड़ियाँ कारगिल में भी नहीं देखी थी...... गजब कड़क चूचक थे... और पिछवाड़ा ... हाई..... इतने चौड़े- चौड़े चूतड़..... जिन्हे शास्त्रों में..... गजगमिनी कहते थे.... वो रूप था उसका.....

वो: क्या देख रहे हो....?

रवि शरमाता हुआ...अरे कुछ नहीं....बस ऐसे ही.....

वो: ऐसे क्या...?

रवि थोड़ा संभलते हुई.....ये देख रहा हूँ....कि ये परी ज़मीन पर कहाँ से आ गयी.......

अपनी तारीफ़ सुन कर मुस्करा गयी वो...और बोली .... आते ही फ्लर्ट चालू.....

रवि: नहीं फ्लर्ट नहीं... सच कहा रहा हूँ.... कसम से...

तभी किसी पत्थर पर पैर रखने से उसका बॅलेन्स बिगड़ गया....और वो गिरने लगी और उसने... रवि की बाहें पकड़ ली.....

रवि ने भी तुरंत उसे सहारा दिया.... और अपनी मजबूत बाहों में भर लिया...... और उसे पकड़े-पकड़े ही एक पत्थर से सट के दोनो खड़े हो गये....... रवि ने अभी भी उसे कंधे के पास से पकड़ के रखा था...

उसने रवि की तरफ मुँह किया और बोली... बोलो क्यों बुलाया था....

मैने बुलाया था ?

...और नहीं तो क्या...वो थोड़ा नाराज़ होते हुए बोली....

रवि ने सोचा कहीं ये सच में नाराज़ नहीं हो जाए..... बोला अरे हम एक ही गाओं के हैं और मैने सोचा.... मिलते हैं....

जैसे लड़कियों में होता है.... नखरे ज़रूर करती हैं....

वो बोली ठीक है मिल लिए ना ...अब मैं चलूं.....

अरे नहीं रवि चोन्कते हुए...उसे लगा जैसे दुनिया ही ख़तम हो जाएगी अगर ये चली गयी तो....

इतनी जल्दी क्या है....

जल्दी है ..माँ इंतेज़ार कर रही होगी.... अंधेरा भी हो रहा है.....

ओके ओके रवि बोला... उसे लगा जैसे ये सच में कहीं चली ही नहीं जाए.....

 
वो हड़बड़ाता हुआ.. बोला और काफ़ी नर्वस भी था....... यू आर माइ ड्रीम गर्ल..... आइ एम इन लव वित यू ....

और वो जो भी बोल रहा था वो दिल से ही बोल रहा था.... असल में उसे उस से सच्चा प्यार हो गया था....

और आगे भी बोलता चला गया.... मैं अपनी ज़िंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहता हूँ....

आर्मी में फ्रंट पर दुश्मनो के छक्के छुड़ाने वाला ये जवान...आज प्यार के फ्रंट पर धराशाही हो रहा था......

क्या तुम भी ?....... प्लीज़ ना मत बोलना.... नहीं तो मैं शायद..वो कुछ आगे बोलता उस ने अपना हाथ रवि के मुहँ पर रख दिया....

दोनो एक दूसरे को एक-टक देख रहे थे..... प्यार में डूबा ये युवा जोड़ा...दोनो की आखे आँसुए से भरी हुई थी.....

उधर सूरज भी रुक-रुक कर डूब रहा था....वो भी इस प्रेमी जोड़े के रोमॅंटिक दृश्य को देखना चाहता हो जैसे.........

तुम मुझे छोड़ कर तो नहीं चले जाओगे..... उसने आसुओं से डब-डबाती आखों से पूछा.....

नही कभी नहीं....... तुम बोलो तो मैं कल तुम्हारे घर तुम्हारा हाथ मागने आता हूँ.....!

दोनो भाव विभोर हो कर एक दूसरे के आलिंगन में बँध जाते हैं...... हम कभी जुदा नहीं होगें.... चाहे कुछ भी हो जाए...

हां हम कभी जुदा नहीं होंगें.....

रवि ने अपने कान से एक रिंग निकाली और घुटनो के बल बैठ कर उसे उसकी उंगली में पहना दिया...... लड़की तो जैसे हिल गयी.....अंदर से....

फिर तो दोनो ने एक पॅशनेट हग किया एक दूसरे को....

उसकी कठोर चूचियाँ रवि के सीने से कुचल रहीं थी...... रवि उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था.... तभी दोनो के होठ मिले और एक प्यार भरा..... स्मूचिंग किस शुरू हुआ..... रवि ने उसकी जीभ अपने मुँह में ले ली.... और दोनो एक दूसरे का लावा पीने लगे..... ना जाने कितनी देर वो एक दूजे की बाहों में रहे.....

दोनो के साथ ये शायद पहली बार हो रहा था इस लिए दोनो बहुत भावुक थे.......

रवि उसके हाथ को चूमते हुए... मेरे को छोड़ कर तो नहीं चली जाओगी......

उसने रवि माथा चूम लिया ... कभी नहीं मेरी जान.....पर अब मुझे चलना होगा... देखो कितना अंधेरा हो गया है......

रवि का मन नहीं था पर उसे तो जाना ही था....

वो जाने को जैसे ही मूडी रवि ने फिर उसका हाथ पकड़ के अपनी ओर खींच लिया...... एक बार फिर दोनो का शरीर एक दूसरे से टकराया.....इस बार उसका पिछवाड़ा रवि से टकराया....

रवि ने उसे पीछे से ही पकड़ लिया.... और उसकी पीठ पर एक जोरदार चुंबन जड़ दिया... लौंडिया सिहर गयी....

ओह.... छोड़ो प्लीज़ देर हो रही है......माँ चिंता कर रही होगी....पर रवि की मजबूत बाहों में उसे अपार सुख और आनंद मिल रहा था....

रवि ने अपने गाल उसके गालों से रगड़ते हुए..... एक प्यारा सा चुंबन उसके गाल पर दे दिया..... हाई... लौंडिया का बुरा हाल हो रहा था.......अचानक रवि ने आगे से उसे फिर अपने से बिल्कुल सटा लिया...उसका लौडा पूरे ताव पर था... लौंडिया के चौड़े- चौड़े चुतड़ों की दरार में... जबरन ठोक दिया..... घाघरे के उपर से भीइ उसे असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी.....और अपने दोनो हाथ उसके पेट पर रखते हुए उसने एक ज़ोर से झटका मारा.... उसके पूरे फूले हुई लंड का आनंद उसे दे दिया....

फिर अचानक जो हुआ.... उसकी कल्पना दोनो ने आज के लिए तो नहीं सोची थी.....

 
फिर अचानक जो हुआ.... उसकी कल्पना दोनो ने आज के लिए तो नहीं सोची थी.....

पता नहीं रवि में कहाँ से इतनी हिम्मत आ गयी......... और उसने अपना हाथ पेट से उठा कर लौंडिया के ज़ोबन पर डाल दिया............ उसकी दोनो जबरात चुचियाँ.....अपने हाथ में भर ली उसके मोटे -मोटे कड़क चूचकों को ज़ोर से मसल दिया..... एक -एक चूचक इतना बड़ा था क़ी वो रवि के दोनो हाथों में नहीं आ रहा था......

लौंडिया की सिटी बजने लगी.....और उसकी चूत का बाँध टूट गया और खड़े-खड़े ही झड गयी.................

रवि 10 मिनिट तक..... उसके जोबन से खेलता रहा....

तभी उसे होश आया.... और उसे लगा..... अगर इसे और लिफ्ट दी तो यहीं.... पर चूत का चित्तोड़गढ़ बना देगा...

चलो छोड़ो....और अपने को रवि से छुड़ाती हुई... अपने बालों को ठीक करती हुई..... रवि को धक्का दिया और जीभ चिड़ाते हुए भाग गयी.....

रवि पीछे से चिल्लाते हुए ... अरे अपना नाम तो बताती जा.....

खुद पता कर लो......

कब मिलोगि.....

कल यहीं पर.....और वो जंगल की चंचल हिरानी की तरह... कुलाचे मारती हुई ..... ना जाने अंधेरे में कहाँ गायब हो गयी.....

रवि ....के मन एक खुशी के भाव थे..... वो मुस्काता हुआ... डूबते सूरज को देखता रहता है और फिर अपने गाओं की तरफ मूड जाता है.....

घर पहुँच कर वो माँ से पूछता है.... माँ ...दीदी आ गयी क्या ?

कहाँ चला गया था तू..कब से दोनो की राह देख रहीं हूँ.....

तो क्या दीदी अभी तक नहीं आई.....

नहीं अभी-अभी आई है.... माँ ने आवाज़ लगाई.....

अलका देख कौन आया है..... अंदर से आवाज़ आई आती हूँ माँ.....

रवि: माँ तुमने बताया तो नहीं मैं आ रहा हूँ....

नहीं...माँ बोली....

तभी रवि को पैरो की आहट सुनाई दी..... और वो अंधेरे में दीवार की ऑट में छुप जाता है..

कौन आया है....?

तू पहचान माँ बोली....

तभी रवि ... हूओ..... कह कर डराता हुआ..... दीदीईईए........कह कर ज़ोर से चिल्लायाअ................

वो एक दम से घबरा गयी....... पर जब उसने दीदी कहा तो रवि कहते हुए ...उस साए में खड़े रवि के गले से लग गयी....

दोनो एक दूसरे को देख भी नहीं... पाए...... अरे कितना बड़ा हो गया है तू....

रवि ने भी अपनी बेहन को अपनी बाहों में ले कर झूला दिया.....

2 मिनिट तक दोनो एक दूसरे से कसे रहे....

वैसे भी तो सालों बाद मिल रहे थे..

दोनो की आखों में आसू थे....रवि के डराने के कारण उसकी दिल अभी भी जोरों से धड़क रहा था.....

और उसकी मांसल चुचियाँ..... बरबस हिल रहीं थी.....

रवि की मजबूत पकड़ से वो सिहर गयी....

थोड़ी देर में दोनो अलग हुए....और दोनो ने एक दूसरे को देखा.... आखों में आसू की वजह से सब धुंधला- धुंधला दिख रहा था....

दोनो ने आसू पोंछे....और एक दूसरे को देखा...और दोनो का मुहँ खुला का खुला रहा गया.....और धीरे से वो रवि से अलग हो गयी.....

विस्मय की रेखा..... रवि के चेहरे पर खिंच गयी.....

और यही हाल अलका का था.....

माँ ने दोनो को ऐसे देखा तो वो सोच में पड़ गयी.... क्या हुआ तुम दोनो खुश नहीं हुए....

नहीं माँ ऐसा नहीं है..... बहुत दिनो बाद मिल रहे हैं... इस लिए.....

पर विधि की विडंबना तो देखो......

आप लोग सोच रहे होंगें... क्या हुआ जो रवि और अलका को वो इतना चोंक गये...एक दूसरे को देख कर....

असल में अल्को वोही लड़की थी जो उसे कॉलेज में मिली थी और जो उसकी आज ही प्रेमिका बनी थी....

 
रवि ने अपना समान उठाया...और उपर वाले रूम की तरफ चल दिया......

वो अपने बेड पर लेटा हुआ था तभी ...अलका आई और बोली चाइ....

रवि जैसे किसी गहरी नींद में से उठा हो.... हां.... क्या.....

चाइ ,अलका बोली ...

हां...ये कहते हुए उसने चाइ अपने हाथ में ले ली....

दोनो चुप थे और कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था.....

अलका थोड़ी देर वहीं खड़ी रही.... ना तो उसके लब खुले और ना ही रवि के.....

खाना खा के रवि थोड़ी देर माँ से इधर उधर की बात करता रहा.... माँ को तो बस अलका की शादी की चिंता थी..

वो हर बार यही बात दोहरा रही थी...देख जवान बेहन है घर मे कोई लड़का देख ....और इस के हाथ पीले कर दे....

हां माँ करता हूँ कुछ...

माँ: ये तो मंगली भी है... मंगली लड़की के लिए जल्दी लड़का भी नहीं मिलता....

रवि माँ को केवल सुन रहा था...फिर उठा और बोला माँ मैं सोने जा रहा हूँ....

और 1स्ट फ्लोर पर बने अपने रूम की तरफ चल दिया.....

आखों में नींद तो कोसो दूर थी..... और यही हाल अलका का था....

रात ना जाने कितनी देर दोनो करवटें बदलते रहे और.. और आखरी पहर पर आख लगी....

सुबह रवि जल्दी उठ कर जॉगिंग करने निकल गया.... और लौट के आया तो माँ और अलका आँगन में बैठी हुई थी....

उसने चाइ पी और ...फिर माँ से गुफ्त-गु करने लगा..... अलका केवल सुन रही थी....

दोनो कनखियों से एक दूसरे को देख लेते थे..... पर बात चीत कुछ नहीं हुई....

रवि ने घर मे एक बुलेट मोटर साइकल देखी .... अरे माँ ये मोटर साइकल किस की है....

बेटा ये बिरजू मामा की है ....

बिरजू मामा.... कहाँ हैं वो आजकल.... बेटा वो अपने गाओं में हैं और यहाँ भी आते जाते रहते हैं.....

वो ही सब काम संभालते हैं यहाँ का.....

ओके रवि बोला.... आप सब सोच रहे होंगें कौन हैं ये बिरजू मामा.....

अब थोड़ा हम आपको बताते हैं...... रवि की माँ रति जो कि अभी कोई 42 साल की होगी.... गाओं में जल्दी शादी हो जाती है....

शादी के बाद उसे पता चला कि उसका पति नामर्द है...पर था बड़ा ज़मींदार...... ये बात १९७०' की है.....

आपको अब ..थोड़ा फ्लश बॅक में चलना होगा.....

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 
Back
Top