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Thriller बेकसूर

“तुम मिस्टर रामनाथन को ब्लैक मेल कर रही थी ?”

“आपको किसने बताया ?”

“उन्होंने खुद बोला है । तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हो । तुम्हें पता ही है, मैं उसकी तलाश में था जिसने तुम्हें ड्रग्स केस में फँसाने की कोशिश की है । मेरी छानबीन से पता चला कि शनिवार दोपहर को 1 बजे मिस्टर रामनाथन जी तुम्हारे फ्लैट में गए थे ।” कहते हुए मैं एक पल के लिए रुका फिर आगे बोला, “पर वहाँ वह तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे कमरे में ड्रग्स रखने के लिए नहीं गए थे, बल्कि तुम्हारे साथ मुकर्रर हुई ब्लैकमेलिंग की फ़ाइनल किस्त, जो कि 8 लाख रुपए थी, वह देने के लिए गए थे । बोलो, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”

“नहीं, तुमने सही कहा ।”

“तो तुमने मुझसे ये बात क्यों छुपाई कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही हों । मैंने सोचा भी नहीं था कि तुम इस तरह से ऐसा काम भी करती हो ।”

“क्योंकि इसमें बताने जैसा कुछ नहीं था । वैसे भी मैंने नहीं सोचा था कि वह मुझे इस तरह से फँसाने की कोशिश करेंगे ।”

“तुम भूल रही हो कि तुम उन्हें ब्लैक मेल कर रही थी । तुमसे छुटकारा पाने के लिए उसने ऐसा किया होगा ।”

“पर इस तरह से भी वह मुझसे छुटकारा तो नहीं पा सकते थे ना । वैसे आपने एक बार भी ये नहीं सोचा होगा कि मैंने ऐसा क्यों किया था । मैं रामनाथन जी को ब्लैक मेल क्यों कर रही थी, कुछ बताया उन्होंने ?”

“हाँ ! बताया था । तुम अक्सर उन्हें लाइन देती थी और जब वह तुम्हारे जाल में फँसकर एक दिन तुम्हारे फ्लैट में गए, तुम बाथरूम से जानबूझकर उन्हें उकसाने के लिए सिर्फ एक तौलिए में बाहर निकली तो उन्होंने तुम्हारे साथ... ।” कहते हुए मैंने अपनी बात अधूरी छोड़ दी और आगे कहा, “तुमने उस घटना का वीडियो बनाया और फिर वीडियो को पुलिस में देने की धमकी देकर तुम हर महीने उनसे 20 हजार देने की माँग की । तब से ये ब्लैकमेलिंग का सिलसिला चल रहा था, जिसको खत्म करने के लिए तुमने एकमुश्त 8 लाख रुपए की माँग की थी ।”

“अगर आप बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछ सकती हूँ ?” उसने कहा ।

“हाँ, पूछो ।”

“आप मर्दों को ऐसा क्यों लगता है कि लड़की अगर छोटे कपड़े पहनती है, आप लोगों से हँस-हँसकर बात करती है, तो आप लोगों को लाइन दे रही है ? बोलो ।”

‘मैंने ऐसा कब कहा ?” मैं उसके इस सवाल से हड़बड़ा गया था ।

“क्यों ? अभी थोड़ी देर पहले तो आपने ही कहा ना कि मैं उन्हें लाइन देती थी और इस तरह से मैंने उन्हें अपने जाल में फाँस लिया ।”

“मैं...” मैं फिर हड़बड़ाया, फिर बात को संभालते हुए कहा, “ये मैंने नहीं, उसने कहा था ।”

“मुझे पता है सर, आप मेरे बारे में ऐसा नहीं सोचते ।”

‘तुझे क्या पता, मैं क्या सोचता हूँ ?’

“उन्होंने आपको ये तो बताया कि मैं उन्हें लाइन देती थी, पर ये नहीं बताया कि मैं उन्हें अंकल कहती हूँ । और शायद उनको पता नहीं हो तो बता देना कि अंकल उन्हें कहते हैं जो बाप की उम्र का होता है । मैं मिनी ड्रेस पहनती हूँ, उनसे हाय-हैलो करती हूँ, इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं उन्हें लाइन देती हूँ । उनकी बेटी जो मेरी ही हमउम्र है, वह भी तो ऐसे ही कपड़े पहनती है । सबसे हँस-हँस कर बात करती है । इसका मतलब ये तो नहीं कि वह भी सबको लाइन देती फिरती है ।” वह गुस्से में बोली ।

“तुम ठीक कह रही हो ।”

“आपको उन्होंने ये तो बताया कि हम एक दिन लिफ्ट में मिले थे । मैंने उनसे हँसकर बात की थी और अपने घर आने का निमंत्रण दिया था । पर मुझे ये नहीं मालूम था कि वह बुड्ढा ठरकी थोड़ी देर बाद ही फ्लैट में आ जाएगा, वरना मैं उस समय नहाने के लिए नहीं जाती । और देखो, अंदर आने के लिए उसने कोई बेल नहीं बजाई, बल्कि उसने फ्लैट की उस चाबी का गलत इस्तेमाल किया जो मैंने उन्हें किसी आपातकालीन स्थिति के लिए दी थी । बिना कोई आवाज किए वह मेरे कमरे में घुस गया । मैं बाथरूम से निकली ही थी कि मेरे कुछ समझने से पहले ही वह मुझ पर टूट पड़े थे । मेरे विरोध करने पर और ये बोलने पर कि मैं चिल्ला पड़ूँगी, तब कहीं जाकर उन्होंने मुझे छोड़ा था । और वह सब रिकॉर्ड हुआ उस कैमरे में जो मैंने सेफ़्टी के लिए अपने रूम में लगाकर रखा हुआ था ।” कहते हुए वह रुकी फिर उसने आगे कहा, “फिर भी मैंने उनको कुछ नहीं बोला और माफ कर दिया था, इसलिए उनकी हिम्मत और भी बढ़ गई थी । दो दिन बाद उन्होंने फिर से मेरे साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी । वह मुझसे मिलने मेरे फ्लैट में आए थे । उस समय भी मैं अकेली थी । मुझे लगा कि वह मुझसे उस दिन के लिए माफी माँगने आए है, पर उन्होंने तो मेरा हाथ पकड़ लिया था और फिर से जबरदस्ती करने लग गए । तब कहीं जाकर मैंने उनको धमकी दी थी, अगर उन्होंने फिर कभी मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो मैं उस दिन का रिकॉर्डेड वीडियो पुलिस को सौंप दूँगी । मेरी बात सुनकर उनके होश उड़ गए थे और मेरे बिना कुछ कहे, खुद आगे आकर उन्होंने मुझे 20 हजार रुपए दिये थे । तब मुझे उनसे बचने का यही आइडिया आया कि मैं हर महीने उनसे पैसे माँगती रहूँ, आखिर फ्री के पैसे किसको बुरे लगते हैं ?”

‘साला, बुड्ढा ठरकी ।’

“ओह्ह, तो ये बात थी ।”

“हम्म । राज जी, मैं आज के जमाने की लड़की हूँ, पर इसका मतलब ये नहीं है कि एक 60 साल के बुड्ढे के साथ इश्क़ लड़ाने चल पड़ूँ । अगर कोई जवान लड़का भी है, तो इसका भी ये मतलब नहीं कि वह मेरी मर्जी के बिना मुझे छूने की हिम्मत कर सके । बोलिए राज जी, मैंने कुछ गलत कहा क्या ?”

“हम्म, तुम बिलकुल सही बोल रही हो । ये तुम्हारी खुद की मर्जी है, तुम्हें किसके साथ रहना है, किसके साथ नहीं ।”

“अच्छा राज जी ! आप ये सब छोड़िए और ये बताइये कि आपने वकील से बात की क्या ? कोर्ट ने पुलिस को मेरा 10 दिन का रिमांड दिया है । मैं इतने दिन तक यहाँ नहीं रह सकती ।”

“हाँ, मैंने वकील से बात की है । उसका कहना है कि वह कल आपको जमानत दिला देंगे । उनको इस बात पर पूरा यकीन है कि आपको किसी ने फँसाया है ।”

“थैंक यू राज जी । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । बिना किसी जान-पहचान के आप मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हैं । जबकि मेरे दोस्त इस समय भी अपना टाइम एंजॉय कर रहे हैं । कोई शॉपिंग कर रहा है, तो कोई मूवी जा रहा है ।” वह दुखी होते हुए बोली ।

“इतना अपसेट होने की जरूरत नहीं है डॉली ! मुसीबत में ही दोस्तों की पहचान होती है ।”

“आप सही कह रहे हैं ।” कहते हुए उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को थाम लिया । उसके हाथों का स्पर्श होते ही मेरे हाथों में जैसे करंट दौड़ गया था ।

“मैं कल तक उसका पता लगा लूँगा, जिसने तुम्हें फँसाने की कोशिश की है । तुम बिलकुल भी चिंता मत करो ।” मैंने उसके हाथों को प्यार से सहलाते हुए कहा । भला मैं ऐसा सुनहरा मौका कैसे छोड़ सकता था ?

“अच्छा सुनो ! अब मैं जो पूछूँ, उसका सही-सही जवाब देना । ये मुझे तुम्हें फँसाने वाले को ढूँढने में जल्दी मदद करेगा ।” फिर मैंने उससे कहा ।

“पूछिये, आप क्या पूछना चाहते हैं ?

“जैसे रामनाथन के बारे में तुमने मुझसे छुपाया था; ऐसा किसी और के बारे में तो नहीं है ना, जो तुम मुझसे छुपा रही हो ।”

“नहीं यार, क्या तुम मुझे प्रोफेशनल ब्लैक मेलर समझ रहे हो ?”

‘सीधा ‘यार’ पर !’

“अरे, नहीं-नहीं ! तुम मुझे गलत समझ रही हो । मेरा कहने का ये मतलब नहीं था । चलो, मैं अपना सवाल दूसरे तरीके से पूछता हूँ । क्या कोई और ऐसा है जिसके साथ तुमने कभी जाने अनजाने में गलत कहा हो या किया हो ।”

“एक मिनट ।” वह थोड़ा सोचते हुए बोली, “एक बार मैं उदय के साथ डेट पर गई थी और वहाँ उसने मुझे प्रपोज किया था ।”

“हाँ, ये बात मुझे उदय ने बताई थी । तुमने उसे मना कर दिया था और फिर तुम कभी डेट पर नहीं गए ।”

“बस उसने इतना ही बताया था क्या ?”

“हाँ, क्यों कुछ और भी हुआ था क्या ?”

“हुआ तो था ।”

“क्या ?”

“उसने डेट पर मुझे प्रपोज किया था और मैंने उसे एक बार तो हाँ बोल दिया था, फिर हम डांस करने लगे । पर डांस के दौरान वह बार-बार अपने हाथ मेरे बदन पर इधर-उधर फिराने लगा । शुरू में मुझे लगा, वह ये सब अनजाने में कर रहा है । पर बाद में वह मेरे अंगों पर ज़ोर से दबाव डालने लगा । मैं बहुत ज्यादा अनकम्फ़र्ट फील कर रही थी । फिर जब उसने मेरे यहाँ... ।” उसने अपने सीने की ओर इशारा करते हुए कहा, “छूने की कोशिश की तो मैंने उसे धक्का दे दिया और उस पर चिल्ला पड़ी थी । सब लोग हमें ही देख रहे थे । फिर मैं वहाँ से चली आई थी । दूसरे दिन वह मेरे फ्लैट में आया और मुझसे कहने लगा कि मेरी जैसी सैकड़ों लड़कियाँ उसके आगे-पीछे डोलती है । और भी बहुत कुछ उल्टा-सीधा बोल रहा था । मैंने उसे गुस्से में बाहर निकलने के लिए कहा, जो उस समय अंदर आ रही अंजलि और संध्या ने भी सुना था । उसने मुझे देख लेने की धमकी दी थी । पर धीरे-धीरे सब शांत हो गया था और हम फिर से दोस्त बन गए थे ।”

“ये कब की बात है ?”

“इस बात को 56 महीने हो गए होंगे ।”

“अच्छा, फिर तो हो सकता है, उदय ने ही तुम्हें फँसाने के लिए तुम्हारे रूम में ड्रग्स रखी हो । तुमने तो हो सकता है सबकुछ भुला दिया हो, पर वह अपना अपमान नहीं भुला पाया हो ।”

“हो सकता है । पर उसके व्यवहार से मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो ऐसा कर सकता है ।”

“हम्म, उससे शाम को फिर पूछताछ करूँगा । तुम्हें और कुछ कहना है ।”

“एक बात और भी है ।”

“क्या ?”

“पर पता नहीं तुम वह सुनकर मेरे बारे में क्या सोचोगे ?”

‘आप से ‘यार’ और ‘तुम’ पर... मामला सेट है ।’

“अरे, तुम बोलो तो सही ।”

“माना मैं आज की मॉडर्न लड़की हूँ और मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन पहले किसका बॉयफ्रेंड था । मुझे इस बात से भी कोई एतराज नहीं कि कोई शादी से पहले संबंध बनाता है । पर मैं किसी से संबंध बनाऊँगी तो मेरी मर्जी से बनाऊँगी । कोई मेरी मर्जी के खिलाफ छूए तो मुझसे सहन नहीं होता ।” कहते हुए वह साँस लेने के लिए रुकी ।

‘मैं तो छू सकता हूँ ना तुम्हें ?’

“बिलकुल सही कहा तुमने, पर इसमें मेरे सोचने वाली क्या बात है ।”

“बात ये है कि राजीव से ब्रेकअप के बाद जब मेरे साथ ऐसे इंसिडेंट हुए कि लोग मेरी मर्जी के बिना मुझे छू रहे हैं तो उस समय मुझे राजीव की बहुत याद आई । उसने कभी भी मेरी मर्जी के बिना मुझे नहीं छूआ था । हमेशा मेरी केयर की थी । तो फिर मैंने उससे वापस से फ्रेंडशिप करनी चाही तो मैंने उसे प्रपोज किया था । राजीव ने सोचने के लिए टाइम माँगा । मुझे लगा था, वह मान जाएगा । क्योंकि मुझसे ब्रेकअप के बाद वह बहुत समय तक अपसेट रहा था । पर ना जाने कैसे ये बात अंजलि को पता चल गई और उसने मुझे राजीव से दूर रहने के लिए कहा । राजीव ने भी अंजलि की बातों में आकर मुझे मना कर दिया था । मैंने फिर भी राजीव को प्रपोज किया तो अंजलि ने भी गुस्से में मुझे देख लेने की धमकी दी थी ।”

“हम्म ! फिर तो जरूर अंजलि और राजीव ने मिलकर ही तुम्हें फँसाया हो सकता है । मैं इस एंगल से भी जाँच करूँगा । अच्छा, तुमने पुलिस को उदय और अंजलि की धमकी के बारे में बताया या नहीं ।” रामनाथन के बारे में मैंने इसलिए नहीं पूछा, क्योंकि वह ब्लैक मेल की बात नहीं बता सकती थी ।

“बताया था, पर वह इंस्पेक्टर तो मेरे सख्त खिलाफ जान पड़ता है । मेरी कुछ भी बात सुनने को तैयार ही नहीं है ।”

“अच्छा !” कहकर मैं सोच में डूब गया ।

“ओके, ठीक है । मैं बात करता हूँ उससे अभी ।” मैं सामने से आते हवलदार को देखते हुए खड़ा हो गया था ।

“अपना ख्याल रखना ।” वह भी खड़ी हो गई ।

“तुम भी ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा और मुलाक़ात कक्ष से बाहर आ गया ।
 
“सर, लगता है आप तो डॉली के सख्त खिलाफ जान पड़ते हैं ।” मैं इस समय इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी के सामने बैठा हुआ था ।

“क्यों भाई, क्या हो गया ?”

“और नहीं तो क्या । आप तो उसकी किसी बात को खातिर में ही नहीं ला रहे हैं ।”

“अरे, कैसे नहीं लाया भाई ! शनिवार को उसने कहा था कि उसे फँसाया गया है । तुमने भी यही राग अलापा था । तो मैंने उन सबसे पूछताछ की थी जिसके बारे में उसने बताया था । मेरी उस पूछताछ से यही नतीजा निकला है कि वह लड़की झूठ बोल रही है । उसे किसी ने नहीं फँसाया ।”

“सर, शनिवार को उसने सिर्फ यह बताया था कि फ्लैट की चाबी किस-किस के पास है ? उससे सिर्फ ये पता लगा था कि किस-किसको उसके फ्लैट में जाने की सुविधा हासिल है ? पर आज उसने ये बताया कि उसे कौन फँसा सकता है ? उसका किस-किसके साथ पंगा हुआ है ?”

“यार ! इतने बड़े जासूस बने फिरते हो, फिर भी तुम ये तक पता नहीं लगा पा रहे कि वह लड़की अपने आपको बचाने के लिए झूठ बोल रही है ।”

“सर, मैं जासूस नहीं हूँ ।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “ना ही मुझे जासूसी आती है । मैं तो सिर्फ उसके बताए तथ्यों और दूसरों से की गई पूछताछ को जोड़-तोड़कर कोई नतीजा निकालने की कोशिश कर रहा हूँ । वैसे हो सकता है, वह अपने आपको बचाने के लिए झूठ बोल रही हो । पर ये बात भी उतनी ही सच है कि उसे फँसाया गया है । क्योंकि शनिवार को दोपहर 11.30 बजे तक फ्लैट की चाबी का इस्तेमाल करके उस फ्लैट में जाने वालों में कम से कम 3 लोग शामिल है ।”

“तुम्हें कैसे पता ?”

मैंने उसे संध्या, उदय और रामनाथन से हुई बातों के बारे में बताया । पर मैंने ये छुपा लिया था कि डॉली, रामनाथन को ब्लैक मेल कर रही थी । मेरी बात सुनकर वह सीरियस हुआ ।

“ठीक, मैं इन लोगों से पूछताछ करता हूँ ।”

“उम्मीद है, वह आप जल्दी ही करेंगे ।” कहते हुए मैं उठ खड़ा हुआ । मेरे मोबाइल की बेल बजने लगी थी । देखा तो मेरी पत्नी का फोन था । फोन पर बात करते-करते मैं पुलिस स्टेशन के गेट से बाहर आने लगा, तभी अचानक कोई मुझसे आ टकराया ।

“सॉरी ।” उसने कहा और आगे बढ़ गया । मैंने एक नजर उस पर डाली और फिर वापस से फोन में व्यस्त हो गया ।

☐☐☐

रात के 8.30 बज रहे थे । मैं ऑफिस से डिनर करके फ्री होकर ऑफिस के ही कम्पाउण्ड में टहल रहा था, तभी मेरा मोबाइल फोन बज उठा, नंबर अंजान था ।

मैंने फोन उठाया ।

“हैलो ।”

“सर, मैं राजीव बोल रहा हूँ ।”

“कौन राजीव ? ओह्ह, राजीव ! तुम... । अरे भाई, बोलो कैसे फोन किया ?”

“सर, मुझे आपसे बात करनी है, अर्जेंट ।” उसकी आवाज में घबराहट मैंने साफ महसूस की ।

“अभी तो मैं ऑफिस हूँ यार, कल बात करते हैं ।”

“आपका ऑफिस कहाँ है सर, मैं अभी वहाँ आ जाता हूँ । सर, कल तक बहुत देर हो जाएगी ।” उसने कहा ।

“अरे नहीं यार, तुम अभी ऑफिस में मत आना ।” मैंने जल्दी से कहा । आखिर मैं उसे अपने ऑफिस का एड्रैस कैसे दे सकता था ? कैसे उसे बता सकता था कि मैं एक वकील नहीं हूँ, बल्कि एक आई टी कंपनी में काम करता हूँ ।

“सर, फिर कहीं बाहर मिल लीजिये । ऐसा करिए, आप मेरे फ्लैट में आ जाइए ।”

“अरे नहीं यार, मैं अभी नहीं आ सकता । ऑफिस में बहुत जरूरी काम है । वह डॉली को आज बेल नहीं दिला पाया तो कुछ डॉक्यूमेंट स्टडी करने हैं । वैसे मुझे पता चला है कि तुम भी शनिवार को दोपहर 1 से 2 बजे के बीच डॉली के फ्लैट में गए थे । ये सच है या नहीं ?”

“सर, मुझे उसी सिलसिले में आपसे बात करनी है ।”

“तुम ऐसे ही बोलो, मैं सुन रहा हूँ ।”

“सर, ये सच है कि मैं शनिवार दोपहर को उसके फ्लैट में गया था ।”

“इसका मतलब तुम सिनेमा हॉल से बीच में निकले और उसके फ्लैट में गए थे । मतलब तुमने ही उसके फ्लैट में ड्रग्स छुपाई थी ।”

“नहीं सर, मैंने नहीं छुपाई । ये मेरा काम नहीं है ।”

“फिर किसका काम है ?”

“सर, वह बहुत खतरनाक है । सर वो... ।” उधर से कुछ कहा गया पर आवाज साफ नहीं थी ।

“राजीव, ज़ोर से बोलो । तुम्हारी आवाज साफ नहीं आ रही है । बोलो राजीव ।”

“सर, मैं आपको आधे घंटे बाद फोन करता हूँ ।” उधर से आवाज आई, फिर फोन कट गया ।

‘कौन डॉली को फँसा सकता है ? आखिर राजीव किसका नाम ले रहा था ? वह जरूर रामनाथन या उदय होगा । वह दोनों भी डॉली के फ्लैट में उसी समय गए थे । पर उदय 1.30 बजे गया था और रामनाथन जी 1 बजे गए थे । राजीव इन दोनों के बीच में यानी लगभग 1.15 बजे वह गया होगा । अब अगर रामनाथन ने राजीव को देखा था तो राजीव ने भी रामनाथन को देखा होगा । इसका पता रामनाथन को नहीं चला होगा । हो सकता है राजीव ने डॉली के फ्लेट से वापस लौटते समय उदय को भी देखा हो। इसका मतलब रामनाथन या उदय इन दोनों में से किसी एक के बारे में राजीव बताने वाला था। पर ये भी हो सकता है कि राजीव अपने आपको बचाने के लिए कोई चाल चल रहा हो । पर कहीं राजीव उसका नाम तो नहीं ले रहा था, ये वह वो तो नहीं है ।” एक नाम मेरे दिमाग में जोरों से कौंधा, “चलो, पहले उसका फोन तो आने दो, फिर आगे के बारे में सोचता हूँ ।” मैं उसके कॉल का इंतजार करने लगा ।

आधा घंटा बीत गया पर उसका कॉल नहीं आया । मैं अपने काम में व्यस्त हो गया था । एक घंटे बाद मुझे कुछ ध्यान आया और मैंने उदय को फोन लगाया । हालांकि रात के 10 बज चुके थे, पर मुझे उम्मीद थी कि वह अभी जाग रहा होगा । आखिर आज के समय में महानगरों में कौन इतनी जल्दी सोता है ?

मेरा सोचना सही था । उसने एक ही कॉल में फोन उठा लिया था ।

“हैलो, इतनी देर क्यों लगाई फोन करने में ?” उधर से आवाज आई ।

“हैलो ! मिस्टर उदय ।” मैंने कहा । लगता था उसको किसी और के फोन का इंतजार था ।

“कौन बोल रहा है ?” उधर से संशय भरी आवाज आई ।

“मैं राज बोल रहा हूँ । वही जो सुबह आपसे जिम में मिला था ।”

“हाँ, याद आया । माफ कीजिये मिस्टर राज, मैं अभी थोड़ा बिजी हूँ । आप प्लीज बाद में कॉल करिएगा ।”

“एक मिनट उदय, प्लीज फोन मत काटना । मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है । मैं आपके सिर्फ 2 मिनट लूँगा ।”

“ठीक है, जल्दी पूछो । क्या पूछना है ?”

दो मिनट बात करके मैंने फोन काट दिया । राजीव ने जिस नंबर से मुझे फोन किया था मैंने मैंने उस नंबर पर कॉल लगाई पर वो नंबर नोट रीचेबल आ रहा था। वैसे अब मेरे सामने सबकुछ आईने की तरह साफ था । मुझे पता चल चुका था कि डॉली शर्मा के रूम में ड्रग्स रखकर फँसाने वाला कौन था । मुझे अब बस सुबह का इंतजार था, जब मैं इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी को उसका नाम बताने वाला था ।

☐☐☐

सुबह ऑफिस से मैं ठीक 6 बजे ही निकल गया था । मैं जल्दी से घर जाकर थोड़ा आराम करके पुलिस स्टेशन जाने वाला था । नॉर्मली मैं बाइक 40 की स्पीड से चलाने वाला, यातायात नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति हूँ, पर आज मेरी बाइक की स्पीड 80 से कम नहीं थी । मैं हाइटेक सिटी फ्लाईओवर से उतरा ही था कि तभी मेरी नजरे लगभग 4050 मीटर आगे खड़े मुंबई ट्रैफिक पुलिस की सफ़ेद ड्रेस पहने 4 लोगों पर पड़ी, जो मुझे रुकने का इशारा कर रहे थे ।

‘आज सुबह इतनी जल्दी ट्रैफिक पुलिस वाले यहाँ क्या कर रहे हैं ? सोचते हुए मैंने बाइक को ब्रेक लगाकर बाइक उनके सामने रोकी । उनकी बाइक्स पर साइबराबाद पुलिस लिखा हुआ था । मुंबई के हाइटेक सिटी, कूटकपल्ली, निजामपेट, लिंगमपल्ली, चंदा नगर का एरिया मिलाकर साइबराबाद कहलाता था ।

“यस सर ?”

“पहले बाइक से नीचे उतरो ।”

मैं बाइक से उतरा, हेलमेट उतारा और बाइक की टंकी पर रख दिया ।

“लाइसेन्स ?” एक ने कहा ।

मैंने पर्स निकाला और उसमें से लाइसेन्स निकालकर उसे दिया ।

“आरसी और इन्शुरेंस ?” लाइसेन्स पर नजर दौड़ाए बिना उसने आगे कहा ।

मैं पर्स से इन्शुरेंस और आरसी निकालने लगा । मेरी नजरे एक पल के लिए सामने खड़े उस ट्रैफिक इंस्पेक्टर पर पड़ी जो अपने साथी को कुछ इशारा कर रहा था । मेरी नजरों से वह इशारा बच ना सका । मुझे लगा, जरूर कुछ गड़बड़ है । तभी मेरी नजरें अपनी बाइक के मिरर पर पड़ी तो मैं सब समझ गया । मैंने तुरंत टंकी पर रखा हुआ हेलमेट उठाया और पीछे से आकर मेरे सिर पर स्टिक से हमला करने को तत्पर उसके साथी पर घुमाकर दे मारा । हेलमेट के लगते ही वह दूर जा गिरा । उसके तीसरे साथी ने ना जाने कहाँ से चाकू निकाला और मेरी तरफ लपका । मैंने हेलमेट को खींचकर उस पर दे मारा । वह वहीं पर गिर पड़ा । पर तब तक उसके चौथे साथी ने स्टिक घुमा दी थी जो मेरी बाजू पर आ लगी । दर्द के मारे मैं चीख पड़ा । उसने फिर से स्टिक घुमाई, पर मेरी खुशकिस्मती से वह मेरी पीठ पर लगे हुए लैपटॉप बैग पर जा लगी । चोट के धक्के से मैं नीचे जा गिरा था । मेरी हथेलियाँ और घुटने छलनी हो गए थे ।

‘बेटा, गया तेरा लैपटॉप । अब ऑफिस में क्या जवाब देगा ?’ मुझे खुद से ज्यादा लैपटॉप की चिंता थी, आखिर उसकी कीमत 2 लाख रुपए जो थी ।

तभी दूर से पुलिस सायरन की आवाज सुनाई दी । साइबराबाद पुलिस की जीप उसी तरफ चली आ रही थी ।

“इसे छोड़ो और जल्दी यहाँ से भागो ।” जिसने मुझे रोका था, वह बाइक स्टार्ट करते हुए चिल्लाया । एक उसके पीछे बैठा, बाकी दोनों दूसरी बाइक पर । पुलिस जीप के आने से पहले वो लोग वहाँ से जा चुके थे । पुलिस जीप उनके पीछे जाने के बजाय मेरे पास आकर रुकी । शायद उनको भी पता था कि वह लोग उनको पकड़ नहीं पाएँगे ।

“आर यू आल राइट मिस्टर ?” जीप की ड्राइविंग सीट के बगल से उतरते हुए सब-इंस्पेक्टर मुरगन स्वामी ने कहा । नाम उसकी नेमप्लेट पर लिखा हुआ था ।

“ठीक तो नहीं हूँ । बहुत दर्द हो रहा है ।” मैंने अपने कंधे को पकड़ते हुए हिन्दी में जवाब दिया, ताकि कहीं वह आगे कुछ तेलुगू में ना पूछ ले ।

“आपके तो हाथ भी बहुत तेज छिले हुए हैं । हॉस्पिटल लेकर चलना होगा । गाड़ी में बैठो । अयप्पा, तुम इनकी बाइक लेकर आओ ।” उसने अपने एक साथी से कहा ।

मैं जीप में बैठ गया ।

“कौन थे वह लोग ?”

“पता नहीं सर, शायद लुटेरे थे और मुझे लूटना चाहते थे ।”

“नहीं, वह लूटेरे नहीं हो सकते । इस तरह ट्रैफिक पुलिस की ड्रेस में आज तक लूटने की घटना नहीं हुई । वह जरूर कोई और थे और खासतौर पर तुम्हारे लिए ही आए थे । तुम बताओ, तुम्हारी किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं है ?”

उसकी बात सुनकर मैं अंदर तक काँप गया । मेरे कानों में इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी की वार्निंग फिर से गूँज उठी थी कि डॉली की हेल्प के चक्कर में मेरी जान को खतरा हो सकता था । पर मुझ पर ये हमला ड्रग्स डीलर द्वारा नहीं हो सकता था, क्योंकि रविवार रात को होटल रात के मुसाफिर में ड्रग्स डीलर बशीर अहमद ने मुझसे वादा किया था कि वह मुझे कुछ नहीं कहेगा । इसका मतलब ये हमला जरूर डॉली को फँसाने वाले ने करवाया है । उसको ये डर होगा कि अब वह एक्सपोज हो जाएगा । इसका मतलब वह ये भी जानता है कि मैं कोई जासूस या वकील नहीं, बल्कि एक सॉफ्टवेर इंजीनियर हूँ और कहाँ काम करता हूँ । मेरी शिफ्ट कब खत्म होती है और मैं ऑफिस से कब निकलता हूँ । पर ये बात तो मैंने किसी को भी नहीं बताई, फिर उसने कैसे पता लगाया होगा ?

“मैं इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी से मिलना चाहता हूँ ।” मैंने उसकी बात का जवाब दिये बिना कहा ।

“यू मीन सब-इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ?”

“हाँ, वही !” कहते हुए मैं अपने कंधे को पकड़ते हुए दर्द से कराह उठा ।

“पहले हॉस्पिटल चलो और अपने कंधे का एक्सरे करवाओ । क्या पता कंधा सही-सलामत है या नहीं । वैसे भी वह पुलिस स्टेशन 9 बजे आएगा ।” उसने कहा । मैं खामोश हो गया ।

☐☐☐

दोपहर के 3 बज रहे थे । मैं इस समय डॉली शर्मा के फ्लैट में मौजूद था । मेरे साथ फ्लैट में खुद डॉली शर्मा, उसकी सहेली अंजलि और संध्या, हमारे ब्लॉक के प्रतिनिधि मिस्टर रामनाथन और उनकी बेटी श्रीकुट्टी, जिम इंस्ट्रटर मिस्टर उदय भट्ट और कुटटपल्ली पुलिस स्टेशन से सब-इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी भी मौजूद थे । डॉली शर्मा को जमानत मिल चुकी थी ।

सुबह मुझ पर हमला होने के बाद हॉस्पिटल में मैंने अपने कंधे का एक्सरे करवाया था । भगवान की कृपा से मेरा कंधा सही-सलामत था । सिर्फ नीचे गिरने की वजह से हाथ की हथेलियाँ थोड़ी-बहुत छील गई थी, जिस पर डॉक्टर ने दवाई लगा दी थी । पर मेरा 2 लाख रुपए के लैपटॉप की स्क्रीन टूट गई थी । स्क्रीन के अलावा कुछ और भी खराब हुआ था या नहीं, ये उसको चलाकर देखने के बाद ही पता चलना था ।

“हवालात से रिहाई मुबारक हो मिस डॉली ।” शिवा रेड्डी ने कहा ।

“थैंक यू सर ।”

“थैंक यू मुझे नहीं, मिस्टर राज को बोलिए । सिर्फ इनकी मेहनत की वजह से ही आप इतनी जल्दी आजाद हो पाई है । सिर्फ इन्होंने आपकी बेगुनाही पर विश्वास किया । सिर्फ इन्होंने ही इस बात पर ज़ोर दिया कि आपको ड्रग्स केस में फँसाया गया है और फँसाने वाला कोई आपका जानकार ही हो सकता है, जिसके पास आपके फ्लैट की चाबी हो ।” शिवा रेड्डी मेरी तरफ देखते हुए बोला ।

“इनका तो मैं हमेशा ही एहसानमंद रहूँगी । अगर ये नहीं होते तो मैं आज अभी भी हवालात में ही कैद रहती । जब मैं मुसीबत थी तब मेरे दोस्त... ।” कहते हुए उसने एक नजर अंजलि, संध्या और उदय पर दौड़ाई, “अपनी-अपनी दुनिया में मस्त थे । कोई मूवी जा रहा था तो कोई होटल में पार्टी कर रहा था ।”

“ऐसा नहीं है डॉली जी । आपके दोस्तों ने आपकी रिहाई के लिए बहुत हेल्प की थी । संध्या के बताए ही मैं जान पाया कि आपको ड्रिंक में नशे की दवाई किसने दी थी, जिसकी वजह से आप देर तक सोती रही । उदय और श्री की वजह से ही मैं ये जान पाया कि कौन-कौन आपके फ्लैट में आया था ? और फिर अंत में अंजलि ने भी पुलिस को सच बता दिया जिसकी वजह से असली मुजरिम का पता चल सका ।”

“शायद तुम सही कह रहे हो । पर मुझे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि राजीव मुझे पुलिस में फँसाने के लिए कोई चाल भी चल सकता है । मैंने तो उसे हमेशा अपना दोस्त ही समझा था । माना उसे दुबारा हासिल करने के लिए मैंने उसे दुबारा प्रपोज किया था । उसने मना कर दिया था और शायद ये मेरी गलती थी जो मैं उसे बार-बार प्रपोज कर रही थी । एक पार्टी में उस पर बुरी तरह से चिल्ला पड़ी थी । सबके सामने उसकी इन्सल्ट की थी । पर मुझे नहीं मालूम था कि वह इतनी-सी बात के लिए और मुझसे छुटकारा पाने के लिए इस तरह से कदम उठाएगा ।”

“आप सही कह रही हैं डॉली जी ! मुझे नहीं लगता कि राजीव ने आपको सिर्फ इसलिए ड्रग्स के केस में फँसा दिया कि आप उसे बार-बार प्रपोज कर रही थी । इस काम के लिए 20 लाख जैसी बड़ी रकम भला कोई क्यों खर्च करेगा ? शायद वजह कोई और है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं ।” मैंने कहा ।

“राज जी, बाज लोग जो कर जाए वह कम है । इतने लोगों के बीच हुए अपमान को राजीव शायद भूल नहीं पाया होगा । फिर उसके बाद भी डॉली उसे बार-बार अपनी और आकर्षित करने में लगी हुई थी । इस वजह से अंजलि ने भी राजीव को बार-बार बोला कि वह डॉली को अपने मुँह ही नहीं लगाए । इसलिए वह दिमागी तौर पर बहुत परेशान था और डॉली से छुटकारा पाने का ये तरीका इस्तेमाल किया ।” इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ने कहा ।

“पर प्लान तो वाकई शानदार बनाया था उसने डॉली को ड्रग्स के केस में फँसाने का ।” रामनाथन ने कहा ।

“प्लान तो वाकई जबर्दस्त था ।” शिवा रेड्डी ने कहा, “वो जानता था कि संध्या महीने के पहले शनिवार को दोपहर के 12 बजे हमेशा घर की शॉपिंग के लिए हाइपर मार्ट जाती है, जहाँ से वह 3 बजे से पहले वापस नहीं आती । इसलिए शुक्रवार रात पार्टी में पहले तो उसने डॉली को खूब शराब पिलाई, फिर शनिवार को सुबह 4 बजे निकलते हुए भी उसने डॉली को पानी में दवाई मिलायी, जिससे 12 घंटे से पहले उसकी नींद ना खुले । किसी को उस पर शक नहीं हो, इसलिए पहले से ही उसने अंजलि के साथ पीवीआर में दोपहर के शो की टिकिट करवा कर रखी थी । फिर जब 1 बजने वाला था तो अंजलि से ऑफिस के जरूरी काम का बहाना करके वह सिनेमा हॉल से निकला और डॉली के फ्लैट में आ गया । उसने 1 से 2 का टाइम इसलिए चुना था, क्योंकि उस समय बिल्डिंग का सिक्योरिटी गार्ड लंच करने चला जाता है । सिक्योरिटी कैमरे भी अभी सिर्फ लिफ्ट में ही लगे हुए हैं, इसलिए उसने लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का रास्ता चुना । पर ये उसकी बदकिस्मती थी कि पहले तो सीढ़ियों से चढ़ते हुए वह रामनाथन जी की नजरों में और वापस उतरते समय मिस्टर उदय की नजरों में आ गया । वह दोनों ही डॉली से मिलने गए थे । उनके पास फ्लैट की चाबी तो थी, पर डॉली के कमरे की चाबी नहीं थी । थोड़ी देर इन लोगों ने डॉली को आवाज लगाई, पर ये गहरी नींद में होने के कारण सुन नहीं पाई । ये दोनों तो वापस लौट आए, पर राजीव के पास उसके कमरे की चाबी भी थी । वह बड़ी आसानी से डॉली के कमरे में गया, उसके बैग में ड्रग्स रखी और वापस आ गया । श्री ने उसे अपने फ्लैट से देखा । कॉलोनी से बाहर आकर उसने सबसे पहले पुलिस को एक जाली सिम से फोन किया और डॉली के फ्लैट में रखी ड्रग्स के बारे में बताया । फिर उस टेंशन की वजह से राजीव सर्कल पर सिगरेट पीने के लिए रुका था, जहाँ पर वह हाइपर सिटी से शॉपिंग करके लौटती हुई संध्या की नजरों में भी आ गया था और फिर अंत में...।” कहते हुए वह रुका और अंजलि की ओर इशारा करते हुए बोला, “अंजलि ने भी माना कि राजीव 1 बजे से पहले मूवी के बीच में से ऑफिस के काम का बहाना मारकर निकल गया था और 2 बजे वापस आया था । वापस आते समय वह घबराया हुआ था । पूछने पर उसने यही बोला कि ऑफिस के काम में गड़बड़ हो गई थी, जिसकी वजह से फ़ॉरेन का प्रोजेक्ट निकल सकता था ।”

“फिर तुमने पुलिस से पहले झूठ क्यों कहा कि राजीव शनिवार को पूरे समय तुम्हारे साथ था ?” उदय ने पूछा ।

“क्योंकि उस समय मुझे मालूम नहीं था कि राजीव सिनेमा हॉल से निकलकर यहाँ डॉली के फ्लैट में आया होगा । इसलिए शुरुआती पूछताछ में मैंने यही बोला था कि राजीव मेरे साथ ही था । बाद में उस बयान पर टिके रहना मेरी मजबूरी बन गई थी, कहीं पुलिस भी मुझे राजीव के साथ डॉली को फँसाने की साजिश में शामिल ना समझ ले । दूसरा मैं राजीव से प्यार भी करती हूँ, इसलिए नहीं चाहती थी उस पर कोई आँच भी आए । बाद में जब मुझे इंस्पेक्टर ने कहा कि उदय और मिस्टर रामनाथन ने गवाही दी है कि उन्होंने राजीव को बिल्डिंग की सीढ़ियों पर देखा था और श्री ने उसे फ्लैट में आते-जाते हुए देखा था तब मुझे ज्यादा झूठ बोलना सही नहीं लगा । पर जो भी हो, ये सब उसने मेरे लिए ही किया, क्योंकि वह मुझे छोड़कर डॉली के साथ नहीं जाना चाहता था ।” कहते हुए वह सुबक पड़ी ।

“कुछ भी कहो, पर राजीव हमारा अच्छा दोस्त है । मुझे उसके लिए बहुत बुरा लग रहा है ।” संध्या ने कहा ।

“जो जैसा करता है, उसे उसका फल तो भुगतना ही पड़ता है संध्या जी !” शिवा रेड्डी ने कहा ।

मैं इतनी देर से खामोश उनकी बातें सुन रहा था । मैंने कुछ सोचकर कहा, “पर सर, मुझे एक बात अभी तक समझ में नहीं आ रही है ।”

“क्या ?”

“राजीव ने कल रात को मुझे फोन किया था । उसने ये स्वीकार किया कि वह डॉली के फ्लैट में गया जरूर था, पर उसने ड्रग्स नहीं रखी है । साथ ही वह बोल रहा था कि वह ये भी जानता है कि वह ड्रग्स डॉली के रूम में किसने रखी है और वह जो भी है वह बहुत खतरनाक है । मेरे नाम पूछने पर उसने कुछ बताया था, पर आवाज साफ नहीं आ रही थी । बस यही सुनाई दिया कि वह थोड़ी देर बाद फोन करेगा । मैंने उसके फोन का आधे घंटे तक इंतजार किया था, पर उसका फोन नहीं आया। बाद में जब मैंने उस नंबर पर कॉल किया तो वो नोट रीचेबल आ रहा था ।”

“अरे राज जी, वह सिर्फ अपने आपको बचाने के लिए झूठ बोल रहा था । वह जानता था कि आप डॉली को बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं । उसको ये पता चल गया होगा कि आप उसके बारे में जान चुके हो कि वह शनिवार को दोपहर डॉली के फ्लैट में गया था । इसलिए खुद को बचाने के लिए उसने आपसे झूठ बोला था । ताकि वह खुद से आपका शक हटाकर किसी और की तरफ मोड़ सके ।”

“पर नाम तो उसने लिया ही नहीं सर, और फिर मुझ पर सुबह किसी ने हमला भी किया था, वह कौन थे ?”

“वही तो, यही उसकी चाल थी । उसने किसी का नाम नहीं लिया, क्योंकि ऐसा कोई था ही नहीं । आप सिर्फ उसके बारे में सोचते रहो । फिर सुबह उसने ही किराये के गुंडों से आपको मरवाने के लिए भेजा होगा, ताकि अगर आप मर गए तो आपकी जाँच अधूरी रह जाए । वह तो आपने अभी सूझबूझ से अपने आपको बचाया और फिर उसी समय गश्ती पुलिस की गाड़ी भी पहुँच गई, जिसकी वजह से आपकी जान बच गई । आपको घायल देखकर ही रामनाथन जी, संध्या और उदय ने स्वीकार किया था कि उन्होंने राजीव को बिल्डिंग में आते-जाते हुए देखा था । फिर इनकी गवाही से अंजलि भी इस बात से मुकर नहीं सकी कि राजीव सिनेमा हॉल के बीच में से निकला था ।” शिवा रेड्डी ने कहा ।
 
शिवा रेड्डी ने कह तो दिया था, पर ना जाने क्यों मैं उसकी इस थ्योरी से सहमत नहीं हो पा रहा था । कोई तो ऐसी बात थी जो बार-बार मेरे दिमाग में घंटी बजाने की कोशिश कर रही थी । डॉली के प्रपोजल को उसने स्वीकार नहीं किया तो डॉली ने सबके सामने उसे भला-बुरा कहा, सिर्फ इसी वजह से उसने इतने पैसे खर्च करके डॉली को फँसाने की साजिश रची थी । यही बात मुझे हजम नहीं हो पा रही थी ।

“क्या सोचने लग गए राज जी ?”

“नहीं सर, कुछ नहीं । बस ऐसे ही ।” मैंने कहा ।

“तो फिर खुश होइए, आखिर आपकी कोशिशों से ही आज डॉली हवालात से बाहर है । आपका जासूसी ज्ञान आज आपके काम आया है । आपको तो आज पार्टी करनी चाहिए ।” कहते हुए वह डॉली की तरफ मुड़ा और बोला, “क्यों डॉली जी, सही कहा ना मैंने ?”

“जी, आपने सही कहा । पर 3 दिन तक हवालात में रहने की वजह से मेरी हालत खराब हो रही है तो मैं आज पूरा टाइम आराम करूँगी । राज की पार्टी इस वीकेंड पक्की । उसमें आपको भी आना होगा इंस्पेक्टर साहब ।”

“हाँ, क्यों नहीं भाई ! आखिर मुफ्त की पार्टी को कौन छोड़ता है ?” कहते हुए वह हँस पड़ा । सबने उसकी हँसी में साथ दिया ।

“सर, क्या राजीव पकड़ा गया ?” इतनी देर से खामोश बैठे उदय ने पूछा ।

“नहीं, अभी तक तो नहीं । पर आखिर हमसे कब तक बचेगा वह ? हमारी टीम उसको तलाश कर रही है । आज नहीं तो कल वह पकड़ा ही जाएगा । ओके, अब आप लोग एंजॉय करो, मैं चलता हूँ ।” कहते हुए इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी सोफ़े से उठ खड़ा हुआ ।

“थैंक यू सर, आते रहिएगा ।” डॉली ने कहा ।

“पहली बार किसी को देख रहा हूँ जो एक पुलिस वाले को बोल रहा है कि आते रहिएगा ।” कहते हुए वह हँस पड़ा ।

“आई मीन, एक पुलिस वाले की तरह नहीं, एक दोस्त की तरह ।” डॉली मुस्कुराई ।

“जी जरूर, बाय सभी को ।” कहकर वह चला गया ।

‘साली, हर किसी को दोस्त बोलकर आमंत्रण देती है, पर जिसकी वजह से आज अपनी मुसीबत से बाहर है, उसे कुछ नहीं । सच है, हर लड़की फरेबी होती है ।’

“आई एम सॉरी डॉली, मुझे नहीं मालूम था कि राजीव तुम्हारे खिलाफ इतनी बड़ी साजिश करेगा ।” अंजलि ने डॉली से कहा ।

“इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है अंजलि । गलती तो सरासर मेरी है । राजीव से एक बार ब्रेकअप होने और फिर उसका तुम्हारे साथ पैचअप होने के बाद उसको दुबारा प्रपोज करने का कोई मतलब नहीं था । पर मैं भी क्या करती ? शुरू में तो मैंने उसके बारे में ज्यादा नहीं सोचा था और किसी अन्य के साथ रिलेशन भी बना लिया था, पर वह साथ ज्यादा नहीं चल पाया । तब मैं दुबारा से राजीव के बारे में सोचने लगी और उसे प्रपोज किया, जिसको उसने मना कर दिया । मैं ये बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसे पाने की जिद में उसे और तुम्हें कई बार भला-बुरा कह दिया । पर मुझे नहीं मालूम था कि बात इतनी ज्यादा बिगड़ जाएगी और राजीव... ।” कहते हुए वह उदास हो गई थी ।

“गलती हम सबकी है । हमें मिल-बैठकर मामला सुलझा लेना चाहिए था ।” अंजलि ने कहा ।

“तुम सही कह रही हो ।”

“अच्छा, अब राजीव का क्या होगा ?” अंजलि ने पूछा ।

“मेरे हिसाब से उसे ड्रग्स रखने और डॉली के खिलाफ साजिश रचने के जुर्म में कम से कम 810 साल की सजा तो जरूर होगी ।” रामनाथन ने कहा ।

“नहीं, मैं उसके खिलाफ कोई केस नहीं करूँगी । फिर तो उसे इतनी सजा नहीं होगी ना ?” डॉली ने तुरंत कहा ।

“पता नहीं, पर फिर भी मेरे हिसाब से 57 साल की सजा तो जरूर होगी । आखिर ड्रग्स रखना भी बहुत बड़ा क्राइम है ।” रामनाथन ने कहा । सबने अपना सिर हिलाया ।

“मुझे सच में राजीव के लिए बहुत बुरा लग रहा है । कितना अच्छा लड़का था ।” संध्या ने एक आह भर के कहा ।

“खैर, अब उसके लिए सोचने से क्या फायदा ? उसने जैसा किया वह वैसा भुगतेगा ।” उदय बोला ।

“उदय, सही कहा तुमने । उसे अपने किए की सजा तो मिलेगी ही ।” श्री ने पहली बार अपना मुँह खोला ।

“प्यार में ब्रेकअप-पैचअप, झगड़े होना आम बात है । उसमें कई बार गुस्से में उल्टा-सीधा बोल भी दिया जाता है, पर इसका मतलब ये नहीं कि कोई इतना बड़ा कदम उठा ले ।” रामनाथन ने कहा ।

“जो होना था, वह हो गया, पर तुम अपना दिल छोटा मत करो डॉली ।” अंजलि ने भी कहा ।

कैसे लोग थे वह ? थोड़ी देर पहले राजीव के लिए हमदर्दी जता रहे थे और अगले ही पल उसके खिलाफ भी हो गए थे ।

“अच्छा डॉली, हम चलते हैं । तुम आराम करो ।” कहते हुए रामनाथन उठ गए । उसके साथ ही श्री भी उठ खड़ी हुई ।

“मैं भी चलता हूँ डॉली । अपना ख्याल रखना ।” उदय भी उठ खड़ा हुआ था ।

“आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद ।” डॉली ने कहा ।

वह लोग चले गए ।

‘साले, सब जा रहे हैं । मुझे भी चलना पड़ेगा ।’ सोचते हुए मैं भी सोफ़े से उठ गया और कहा, “अच्छा डॉली जी, मैं भी निकलता हूँ ।”

“मैं आपका किस मुँह से शुक्रिया अदा करूँ राज जी । अगर आप नहीं होते तो पता नहीं मेरा क्या होता ? मैं तो शायद कभी भी अपने आपको बेकसूर साबित नहीं कर पाती और उस जुर्म में मुझे जेल जाना होता जो मैंने कभी किया ही नहीं ।”

‘अपने फ्लैट की चाबी देकर शुक्रिया अदा कर दो ।’ मन ही मन सोचते हुए मैं बोला, “ऐसा नहीं है डॉली जी । चाँद के ऊपर थोड़ी देर अगर बादल छा जाते हैं, इसका मतलब ये तो नहीं कि वह उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं ? जब आपने कुछ किया ही नहीं था तो फिर आपको सजा कैसे हो सकती थी ? एनीवे, ये लीजिये आपके क्रेडिट कार्ड और मुझे इजाजत दीजिये ।” मैंने पर्स से उसके दिये हुए क्रेडिट कार्ड निकालकर उसे देते हुए कहा ।

“आपका जो भी खर्चा हुआ है, वह मुझे बता दीजिये ।”

“जरूर । अभी आप थकी हुई हैं, आराम कीजिये । हम कल बात करते हैं ।” मैंने कहा ।

“ठीक है राज जी । मैं आपसे कल मिलती हूँ ।”

‘साली, एक बात तो गले लगा ले ।’

“ओके ठीक है, बाय ।” मैंने कहा और उसके फ्लैट से बाहर निकल गया ।
 
शाम के 7.30 बज रहे थे और मैं अपने लिए खाना बना रहा था । मंगलवार और बुधवार को मेरा वीकली ऑफ रहता है, जिसकी वजह से ऑफिस में खा नहीं सकता था और मुझे घर पर ही खाना बनाना होता था ।

‘साला, उसके लिए इतना कुछ किया और बदले में मिला क्या, एहसान वाले घिसे-पिटे शब्द । अबे, उसकी वजह से आज तेरी जान जा सकती थी राज । मरते-मरते बचा है तू । और इसके बदले में ये सुनना कि मैं किस तरह से आपका शुक्रिया अदा करूँ ? ये नहीं कि मुझे किसी होटल में पार्टी के लिए लेकर जाती और फिर पार्टी के बाद होटल के रूम में और फिर उसका खूबसूरत बदन सारी रात मेरी बाँहों में... ।’ सोचते हुए उसका बदन मेरी आँखों के सामने नाचने लग गया । मैं उसके सपनों में खो गया । तभी मुझे कुछ जलने की बू आई । मैं चौंका और फटाफट सब्जी संभाली, पर तब तक वह जल चुकी थी ।

‘साला, ये तो जल गई । अब क्या बनाऊँ ।’ दुबारा से सब्जी काटने और बनाने की मेरी हिम्मत नहीं थी ।

‘साला, इस लड़की के चक्कर में आज तो ढंग का खाना भी नसीब नहीं होगा । अब दूध ही गरम कर लेता हूँ । लगता है आज दूध ब्रैड से ही काम चलाना पड़ेगा ।’ उस सब्जी को डस्टबीन में डालते हुए मैं बड़बड़ाया ।

मैं फ्रिज से दूध निकाल ही रहा था कि तभी मेरे मोबाइल की घंटी बज उठी ।

‘अब किसका फोन है ? कहीं डॉली का तो नहीं ।’ सोचते हुए मैं अपने दिल में बड़े अरमान लेकर टेबल की ओर गया, जहाँ मेरा मोबाइल रखा हुआ था । मोबाइल पर नंबर देखते ही मेरी उम्मीदों पर जैसे तुषारापात हो गया था । फोन मेरी पत्नी का था ।

“तुम ठीक तो हो ना ।” उसने बेसब्री से पूछा ।

“यार, आज सुबह से तुम ये बात कई बार पूछ चुकी हो और मैं तुम्हें हर बात बताता रहा हूँ कि मुझे कुछ नहीं हुआ है । मैं बिलकुल ठीक हूँ । पर तुम हो कि बार-बार एक ही बात पूछे जा रही हो ।”

“मैं क्या करूँ ? आज सुबह से कई बार मेरे मन में आपके लिए कई बुरे-बुरे ख्याल आ रहे हैं ।”

“तुम भारतीय औरतें कितनी भी पढ़ लो, पर ले देकर वहीं घिसे-पिटे पुराने खयालात । अरे यार, मैं बिलकुल ठीक हूँ । हाँ, पर अगर एक बार और तुमने मेरा हाल पूछा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा ।”

“अरे, नाराज मत होओ । ठीक ,है अब नहीं पूछूँगी । अच्छा ये बताओ, खाना खा लिया क्या ?”

“नहीं, अभी बना रहा हूँ ।”

“अच्छा, ठीक है बना लो और खा लो । सुबह से आपके बारे में सोचते-सोचते मेरे सिर में दर्द हो रहा है । मैं दवाई लेकर आज जल्दी सोने जाऊँगी ।”

“तुम ज्यादा मत सोचो और आराम करो । बाय, गुड नाइट ।” कहते हुए मैंने फोन काट दिया ।

‘उफ़्फ़, ये बीवी भी कितना पकाती है ! सारा मूड खराब कर दिया । अब दूध बाद में गरम करूँगा ।’ सोचते हुए मैं सोफ़े पर आकर लेट गया । लेटे-लेटे मैं डॉली के केस के बारे में सोचने लगा था ।

‘क्या सच में राजीव ने उसे फँसाया है ? मुझे नहीं लगता राजीव ने ये सब किया है । वह एक दब्बू किस्म का इंसान लगता है । मैं जब उससे पूछताछ कर रहा था तब भी उस समय उसकी जबान अंजलि के सामने ही नहीं खुल पा रही थी । फिर भला वह इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकता है ? कल रात को उसकी बातों से लग रहा था कि वह उसे जानता था जिसने डॉली के फ्लैट में ड्रग्स छुपाई है । वह कह रहा था कि वह बहुत खतरनाक है । पर इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी के मुताबिक मुझे फोन करना सिर्फ उसकी एक चाल थी । पर इसमें भला उसकी क्या चाल हो सकती है ? सिर्फ उसके कहने से मैं थोड़े ही उसे बेकसूर मान सकता था । वैसे ही उसे मुझ पर हमला करवा के क्या हासिल होता ? क्या वाकई वह हमला मुझे मार डालने के लिए था ? अगर ऐसा था तो... ।” सोचते हुए मैंने झुरझुरी-सी ली ।

ना जाने क्यों मेरा मन राजीव को अपराधी मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था, पर अगले ही पल मेरे दूसरे मन ने कहा, ‘पर अगर वह अपराधी नहीं है तो फिर छुप क्यों रहा है ? क्यों वह पुलिस के सामने आकर असलियत बयान नहीं कर देता ? ये दब्बू किस्म के लोग इसी तरह के होते हैं । सामने नहीं बोल पाते तो अपनी खुन्नस इसी तरह से निकालते हैं । शायद उसने भी डॉली के खिलाफ अपनी खुन्नस इसी तरह से निकाली होगी । डॉली... । डॉली के बारे में सोचते ही मेरे मन में दूसरे खयालात आने लगे, ‘साली ने मेरा एहसान तो माना ही नहीं । अगर एहसान माना होता तो इस समय उसे मेरी बाँहों में होना चाहिए था ।’ मैं उसके बारे में सोच ही रहा था कि तभी मेरे फ्लैट की घंटी बज उठी ।

‘8 बजने वाले हैं, इस समय कौन आ गया ?’ वाल क्लॉक में टाइम देखते हुए मैं उठा और दरवाजा खोला । सामने डॉली शर्मा खड़ी थी । मैंने उसे देखा तो देखते ही रह गया । मैं अगर भुला नहीं था तो वह वही ड्रेस पहनकर आई थी, जिसमें मैंने उसे पहली बार देखा था । वही पिंक कलर की टाइट टी-शर्ट जिसमें उसके बदन का एक-एक उभार साफ नजर आ रहा था । वही मिनी स्कर्ट, जिसमें उसकी जांघों का काफी हिस्सा साफ-साफ नुमाया हो रहा था । टी-शर्ट और स्कर्ट के बीच में वहीं गैप, जिससे उसके पेट और कमर का काफी भाग नजर आ रहा था । मैं उसके रूप में खो-सा गया था ।

“क्या मैं अंदर आ सकती हूँ राज जी ?” उसने पूछा । उसकी आवाज सुनकर मैं जैसे नींद से जागा ।

“आइये ।” कहते हुए मैंने उसे रास्ता दिया । उसके अंदर आने पर मैंने दरवाजा बंद कर दिया । दरवाजा बंद करके मैंने अपनी स्थिति पर गौर किया तो जल्दी से वहीं सोफ़े पर पड़ी हुई टी-शर्ट उठाकर पहनी । खाना बनाते समय मैं सिर्फ बनियान और बरमुडे में ही था । मेरी इस हरकत पर वह हँस पड़ी । मैं झेंप गया ।

“सॉरी, वह अकेला हूँ तो खाना बना रहा था, इसलिए मैं ऐसे इस हाल में... ।”

“मैं समझ सकती हूँ राज जी । अकेले मर्द को खाना बनाने में कितनी तकलीफ होती है । पर आज आपको ये तकलीफ करने की कोई जरूरत नहीं है ।”

“मतलब, मैं समझा नहीं ?”

“मतलब ये राज जी कि आज का आपका डिनर मेरी तरफ से ।”

“ओह्ह, समझा ! मतलब आप पार्टी दे रही हैं ।”

“जी, सही समझे । पर कहीं बाहर नहीं, यहीं आपके घर में ।”

“मतलब ?”

“मतलब ये कि पार्टी का सामान मैं साथ लाई हूँ ।” उसने अपने हाथ में पकड़े हुए बैग की तरफ इशारा करते हुए कहा ।”

“ओह्ह ! आप खाना पैक करवाके लाई हो ? मैंने एक लंबी साँस लेकर कहा ।

“ओह्ह, आप सिर्फ खाने को पार्टी बोलते हैं ? मैंने सोचा, आप ड्रिंक करते होंगे ?” उसने कहा ।

“अरे नहीं, ऐसी बात नहीं है ।” मैंने जल्दी से कहा ।

“इसका मतलब करते हैं तो कहीं मंगलवार और शनिवार वाले तो नहीं है ना आप ?” उसने फिर कहा ।

“ऐसी भी कोई बात नहीं है । मेरे लिए हर दिन एक समान है ।”

“वेरी गुड ।” उसने मुस्कराते हुए कहा, “पर ये बताइये, क्या सारी बातें खड़े-खड़े ही करने का इरादा है क्या ? मुझे इतनी देर हो गई आए हुए और आपने बैठने के लिए भी नहीं कहा ।”

“ओह्ह सॉरी । प्लीज बैठिए ।” मैंने सोफ़े की तरह इशारा करते हुए कहा ।

उसने बैग में से सिरोक की बोतल निकालकर टेबल पर रख दी । साथ में 34 पैकेट निकालकर रख दिये ।

“राज जी, आप 2 गिलास और प्लेट्स ला दीजिये प्लीज ।”

मैं रसोई से समान ले आया ।

“आपके पास कोल्ड ड्रिंक तो होगी ही । प्लीज, वह भी ले आइये ।”

मैं उठा और फ्रिज से कोल्ड ड्रिंक भी लेकर आ गया । उसने बोतल खोली और पैग बनाने लगी ।

‘पक्की पियक्कड़ है ।’

“आपने कुछ कहा राज जी ।”

“नहीं, बस ब्रांड देख रहा था । वह मैं नॉर्मली व्हिस्की लेता हूँ तो ।”

“ओह्ह, सॉरी ! मुझे मालूम नहीं था कि आप वोदका नहीं लेते हैं ।”

“ऐसी कोई बात नहीं है, पार्टी आप दे रही है तो आपके हिसाब से कोई भी चलेगी ।”

“अरे, तो क्या हुआ ! मेहमान की भी पसंद होनी चाहिए । अगर आपको वोदका से प्रॉब्लम है तो कुछ और ऑर्डर कर देते हैं । अभी आधे घंटे में आ जाएगी ।”

‘साला, अपने ही घर में मेहमान बना दिया ।’

“अरे ! मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, ये भी चलेगी । चलेगी क्या, दौड़ेगी । आप तो पैग बनाइए ।”

“ये सिरोक वोदका है, मेरी फेवरेट ।” कहते हुए उसने एक पैग मेरी तरफ बढ़ाया ।

“चीयर्स ! आपकी रिहाई के लिए ।” मैंने कहा ।

“चीयर्स !” उसने कहा और एक सिप लेकर बोली, “मेरी रिहाई सिर्फ आपकी बदौलत है ।”

“अब ये बात बार-बार बोलकर आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं ।”

“अरे नहीं राज जी, ऐसी कोई बात नहीं । मैं तो दिल से आपकी शुक्रगुजार हूँ ।”

“आपका शुक्रिया मैंने कबूल किया । अब इस टॉपिक को विराम दीजिये ।”

“ओके राज जी, जैसा आपका हुकुम ।” कहते हुए वह मेरे आगे झुकी और जैसे मुझे जन्नत के दर्शन हो गए थे ।

“और बताइये राज जी, कुछ अपने बारे में । आप कहाँ से हो ?”

“आपको बताया था, लगता है आप भूल गई । मैं दिल्ली से हूँ ।”

“ओह्ह, दिल्ली से ! हाँ, याद आया । वहीं से ना, जहाँ से विक्रांत गोखले है, जो डिटेक्टिव है । आप भी किसी डिटेक्टिव से कम नहीं है राज जी ।”

“आपको वाकई याद है, थैंक यू ।”

बातें करते-करते टाइम का पता नहीं चल रहा था । बोतल खत्म हो चुकी थी ।

“और बताइये, अकेले कैसे वक़्त गुजरता है आपका ? वाइफ़ की याद नहीं आती आपको ?”

“आती है, पर क्या करूँ । साल में एक बार गर्मियों की छुट्टियों में ऐसे ही अकेले रहना पड़ता है ।”

“आपकी वाइफ़ बिलकुल पागल है, जो इतने अच्छे पति को छोड़कर चली जाती है । अगर मैं आपकी पत्नी होती तो आपको कभी भी अकेला नहीं छोड़ती ।” शायद उसे नशा होने लगा था । वैसे नशा तो मुझ पर भी हावी होने लगा था ।

“डॉली जी, बुरा ना माने तो आपसे एक बात कहूँ ।”

“बोलिए राज जी ।”

“आप बहुत सेक्सी हैं ।”

“आप झूठ बोल रहे हैं ।”

“नहीं, सच डॉली जी ।”

“अगर ये सच है तो फिर ये जी-जी, आप-आप क्या बोल रहे हैं ? डॉली कहिए । तुम कहिए ।”

“आप भी तो राज जी बोल रही हो ।”

“ओके, सॉरी राज । अब ठीक है ।”

“ठीक है डॉली ।” मैं मुस्कराया ।

“क्या कहा, किस मी ? ओके ।” कहते हुए उसने गिलास टेबल पर रखा, अपनी सीट से उठी और मेरी गोदी में बैठकर अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये । मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे होंठों पर तपते अंगारे रख दिये हो । वह होंठों को अपने होंठों से काटने लगी थी । मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया । मैं लड़खड़ाते हुए उसे लेकर खड़ा हुआ और अपने बेडरूम की तरफ ले जाने लगा । हमने खाने का ऑर्डर नहीं किया था, पर अब खाना किस कमबख्त को खाना था ?

☐☐☐

अपने बिस्तर में मैं बेसुध सोया पड़ा था कि मोबाइल की घंटी बजने लगी । मैंने आँखें बंद किए ही मोबाइल उठाने के लिए इधर-उधर हाथ मारा । मेरा हाथ मेरे बगल में सोई हुई डॉली पर जा पड़ा ।

‘ये कौन सो रहा है मेरे साथ । बीवी तो दिल्ली है ।’ सोचते हुए मैंने लाइट का स्विच ऑन किया और अधखुली आँखों से उसे देखा, ‘डॉली ! मेरे साथ, मेरे बिस्तर में ! ये कब आई ?’ मैं सोचने लगा । दिमाग पर ज़ोर दिया तो रात की घटना याद आ गई ।

‘चलो, फ्लैट की चाबी नहीं मिली तो क्या हुआ, खुद फ्लैट वाली ही मिल गई ।’ सोचते ही मेरे होंठों पर खुद ब खुद मुस्कान आ गई ।

मोबाइल फोन फिर बजने लगा था । मैं उठा और फोन उठाने हॉल की तरफ चल पड़ा । वह वहीं टेबल पर रखा हुआ था । मैंने फोन उठाया, देखा तो अंजान नंबर था । मैंने टाइम देखा, सुबह के 5.30 बज रहे थे ।

‘इतनी सुबह-सुबह कौन फोन कर रहा है ?’ सोचते हुए मैंने फोन पर आ रहे रिसिव को स्वाइप किया । फोन पर उधर से जो कहा गया, उसे सुनकर जैसे मेरी नींद ही उड़ गई थी । मैं तुरंत बेडरूम की और भागा और डॉली को जगाते हुए बड़ी ही बेसब्री से बोलने लगा, “डॉली उठो, जल्दी उठो ।”

“क्या हुआ यार, सोने दो ना ।” नींद में कहते हुए उसने करवट ली ।

“यार, जल्दी उठो । बहुत बड़ी इमरजेंसी है ।”

“ऐसा क्या हुआ यार ?” उठने की जहमत उसने फिर भी नहीं की थी ।

मैंने उसे फोन पर हुई सारी बात बताई । सुनकर वह भी चौंक गई और तुरंत बिस्तर से बाहर आ गई । मैं फटाफट बाथरूम में घुसा और हाथ-मुँह धोने लगा । डॉली ने भी अपना हुलिया ठीक किया ।

15 मिनट बाद हम हमारी कॉलोनी के ब्लॉक 19 की बिल्डिंग के नीचे पहुँचे, जहाँ पर पहले पुलिस और लोगों का जमावड़ा था । हमारे साथ-साथ ही वहाँ पर हमारे ब्लॉक 7 के प्रतिनिधि मिस्टर रामनाथन और उनकी बेटी श्री, डॉली की फ़्रेंड्स अंजलि और संध्या भी पहुँच गए थे ।

ब्लॉक 19 हमारी कॉलोनी के एक कोने वाली बिल्डिंग थी, जिसके दूसरी तरफ झाड़ियों और पेड़-पौधों से भरा हुआ एक मैदान था ।

“आ गए तुम लोग !” हम लोगों को देखते ही इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ने कहा ।

“यस सर ! पर आपने हम लोगों को इतनी सुबह-सुबह बुलाया है, आखिर ऐसी क्या अर्जेंट बात है ?” रामनाथन ने पूछा ।

“आप लोगों के साथ मिस्टर उदय नहीं आए, क्यों ?” शिवा रेड्डी ने उसकी बात का जवाब दिये बिना दुबारा पूछा ।

“वो इसलिए कि मिस्टर उदय हमारी कॉलोनी में नहीं रहते ।” रामनाथन ने बेसब्र होते हुए जवाब दिया ।

“सर, आप ये बताइये आपने हमें किस लिए बुलाया है ?” मैंने पूछा । फोन पर शिवा रेड्डी ने बस जल्दी से आने के लिए कहा था ।

“आओ ।” उसने इशारा किया और बिल्डिंग की पार्किंग की तरफ ले गया । वहाँ एक ब्लैक कलर की होंडा सिविक के पास कुछ पुलिस वाले खड़े थे । साथ ही साथ फोरेंसिक विभाग के लोग भी थे जो वहाँ से निशान उठा रहे थे ।

“ये तो राजीव की कार है ।” डॉली ने कहा ।

“हाँ, ये राजीव की ही कार है । अभी थोड़ी देर वेट करो । फोरेंसिक वाले अपना काम कर ले, फिर उसके पास लेकर चलता हूँ ।”

“उसके पास मतलब ? राजीव ठीक तो है ना सर ?” अंजलि घबराकर बोल उठी ।

“उसकी लाश मिली है कार में । उसने सुसाइड किया है ।” शिवा रेड्डी ने कहा ।

“वॉट !” सब एक साथ चौंककर बोल उठे । वही अंजलि ज़ोर से चिल्ला पड़ी, “नहीं !”

“हाँ ! सुबह 5 बजे के करीब वॉचमैन को कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई दी थी । उसने देखा तो पाया वे कार के पास भौंक रहे थे । जब उसने पास आकर देखा तो पाया कार के अंदर धुआँ भरा हुआ है और उस धुएँ में उसे एक डैडबॉडी नजर आई । उसने तुरंत सिक्योरिटी इंचार्ज को बताया और उसने फोन करके हमें बुलाया । हमने चेक किया तो पाया कि कार के सारे दरवाजे बंद थे और अंदर राजीव की बॉडी थी । कार की जाँच करने पर पता चला, एग्जास्ट पाइप को एक छोटे पाइप की सहायता से अंदर की तरफ मोड़कर ब्लॉक किया हुआ था । कार में शायद कार्बन मोनोऑक्साइड भरने की वजह से वह खत्म हो गया और एक मीठी मौत को गले लगा लिया । पुलिस से बचने के लिए इसने आत्महत्या की है ।”

“पर सर, आप ये कैसे कह सकते हैं कि ये आत्महत्या है ? ये मर्डर भी तो हो सकता है । किसी और ने एग्जास्ट पाइप को पाइप लगाकर ब्लॉक किया हो ?” मैंने पूछा ।

“नहीं, मर्डर की संभावना काफी कम है । अगर ये मर्डर होता तो यहाँ हलचल जरूर हुई होती और उस हलचल को वॉचमैन ने जरूर नोटिस किया होता ।”

‘वॉचमेन कैसी ड्यूटी निभाते हैं ! साला, एक पुलिस वाला होकर भी नहीं जानता ।’

“हो सकता है वॉचमैन उस समय वॉशरूम गया हो या फिर उसका ध्यान कहीं और हो ।” मैंने जल्दी से कहा ।

“अभी मेरी बात खत्म नहीं हुई यार । मैंने इस एंगल से भी सोचा था । अगर ऐसा होता तो इसने संघर्ष भी किया होता, पर संघर्ष का एक भी निशान यहाँ नजर नहीं आ रहा है ।”

उसकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया, ‘आत्महत्या करने के लिए भला ऐसा तरीका कौन इस्तेमाल करता है ? आत्महत्या ही करनी होती तो जहर खा लेता, किसी रेल ट्रक के नीचे आ जाता । इतनी ऊँची बिल्डिंग है, इससे कूद जाता । पर कार के एग्जास्ट पाइप को ब्लॉक करके कार ऑन करना और फिर उसके धुएँ से मरने की सोचना, मामला जम नहीं रहा है ।’

“क्या हो गया जासूस महोदय, क्या सोचने लग गए ? अरे, ज्यादा मत सोचो । मुझे मालूम था, तुम अपना दिमाग जरूर लगाओगे, इसलिए मैंने तुम्हें एक बात नहीं बताई, जो अब बता रहा हूँ । रात को 2 बजे वॉचमैन पार्किंग का एक राउंड लगाकर गया था, तब तक राजीव जिंदा था और अपनी कार में बैठा हुआ शराब पी रहा था । वॉचमेन ने जब उसे देखा तो राजीव से पूछा भी था, पर उसने उसे डाँटकर भगा दिया था और धमकी भरे शब्दों में कहा था कि दुबारा अगर वह यहाँ पर आया तो उसके लिए अच्छा नहीं होगा । शायद वह शुरू से ही सुसाइड करने के लिए ही यहाँ पर आया था । बियर की 5 खाली बोतलें भी बरामद हुई हैं, जिसमें से एक से उसने एग्जास्ट पाइप को बंद करने की कोशिश की थी, जिसकी वजह से वह टूट गई थी ।”

“पर सुसाइड करने के लिए वह यहाँ इस बिल्डिंग की पार्किंग में ही क्यों आया ?”

“क्योंकि वह इसी बिल्डिंग में रहता है । दसवें माले के फ्लैट नंबर 1003 में । हमारा एक आदमी इसके फ्लैट में इसका इंतजार कर रहा था । पर शायद इसे एहसास हो गया था कि पुलिस उसके फ्लैट में है और वह उससे बच नहीं पाएगा । इसलिए मारे शर्मिंदगी के इसने सुसाइड कर लिया ।”
 
“वो यहाँ से भाग भी तो सकता था ।”

“हो सकता है भागने के लिए ही निकला हो, पर हिम्मत नहीं हुई हो ।”

पता नहीं क्यों मैं उसकी इस थ्योरी से सहमत नहीं हो पा रहा था ।

“पर वह इतनी देर तक कहाँ छुपा हुआ था ?”

“उसके जस्ट पड़ोस के फ्लैट में, जो पूछताछ से मालूम पड़ा है कि उसके किसी दोस्त का है, जो अभी विदेश गया हुआ है ।”

“ओह्ह !” मैंने एक गहरी साँस ली, फिर पूछा, “क्या मैं एक नजर कार पर डाल सकता हूँ ?”

“एक मिनट ।” शिवा रेड्डी ने कहा और अपनी टीम के पास गया । मैंने उसको फॉलो किया । वह कह रहा था, “पनि अंतापूर्ति अय्यिंदा ?”

“यस सर ।” किसी ने कहा ।

“एमी मिगल लेदु कदा ।”

“नो सर ।”

“ओके... तुम देख सकते हो ।” उसने मुझसे कहा । मैंने कार पर एक नजर दौड़ाई । राजीव की लाश आगे ड्राइविंग सीट पर थी ।

“वो बियर आगे की सीट पर बैठकर पी रहा था या पीछे की सीट पर ?”

“दोनों जगह ।”

“मतलब ?”

“मतलब हमें बियर की 1 बोतल आगे की सीट पर पड़ी हुई मिली थी और 3 पीछे की सीट पर, इसका मतलब उसने दोनों जगह बियर पी थी ।”

“कुछ अजीब नहीं है ये ?”

“अजीब तो कुछ भी नहीं । कोई 2 जगह पीने पर पाबंदी थोड़े ही ना है ।”

“वॉचमैन ने जब उसे देखा था, वह कहाँ पर पी रहा था ?”

“आगे की सीट पर ।”

“क्या ऐसा नहीं हो सकता कि वॉचमैन के जाने के बाद कोई राजीव से मिलने आया हो और उसके साथ पीछे की सीट पर बैठकर उसने बियर पी हो ।”

“और कौन ?”

“शायद कातिल ।”

“तुम इसे कत्ल मान रहे हो ?”

“लग तो रहा है ।”

“तुम पूरे पागल हो । अगर कोई आया होता तो वॉचमैन ने भी उसे देखा तो होता ।”

“कोई जरूरी नहीं है । वॉचमैन को तो पहले ही राजीव ने डाँटकर भगा दिया था । वह तो इस तरफ झाँका भी नहीं होगा ।”

‘और फिर यह वह समय होता है जब नाइट शिफ्ट वाले लोग थोड़ी देर आराम करने को अपना हक समझते हैं । नाइट शिफ्ट में काम करते हुए इस बात का तो मुझे भी पता चल गया था ।’

“आपने फ़्रिंगर प्रिंट्स तो लिए ही होंगे ।”

“हाँ, लिए है । गाड़ी से बहुत से फिंगर प्रिंट्स मिले हैं, पर सिर्फ राजीव के फिंगरप्रिंट ही साफ आए हैं । इसका मतलब है कभी उसके साथ कई लोग गाड़ी में बैठे होंगे, पर रात को नहीं ।”

“आपने बियर की बोतल से भी फिंगर प्रिंट्स लिए हैं ?”

“हाँ, लिए है ।”

“और वह जो टूटी हुई बोतल थी, उससे ?”

“उससे भी लिए ही होंगे ।”

“होंगे से क्या मतलब है आपका ? आप श्योर नहीं है क्या ?”

“एक मिनट रुको ।” कहते हुए उसने फिंगर प्रिंट लेने वाले से पूछा,

“क्या तुमने उस बोतल से फिंगर प्रिंट्स लिए हैं ?”

“यस सर, पर उस पर किसी के कोई भी निशान नहीं मिले हैं ।”

“वॉट ? तुम सही कह रहे हो ?”

“यस सर ।”

“देखा सर । अगर राजीव ने आत्महत्या की होती और उस बोतल से बियर पी होती और उससे एग्जास्ट पाइप को बंद करने की कोशिश की होती तो उस पर राजीव की अंगुलियों के निशान जरूर होने चाहिए थे । पर उस पर कोई निशान नहीं है । इसका मतलब जिसने भी उस बोतल को छूआ है, उसने या तो अपने हाथों पर दस्ताने पहने थे या फिर उससे फिंगर प्रिंट्स मिटा दिये, जिसकी वजह से उस पर कोई निशान नहीं आए हैं । यहीं पर उसने गलती कर दी । उसने राजीव की हत्या को आत्महत्या साबित करने की कोशिश करने से पहले बोतल पर राजीव की अंगुलियों के निशान जरूर ले लेने चाहिए थे ।”

“तुम सही कह रहे हो । यह एक हत्या है ।”

“सर, मुझे उम्मीद है आपने अभी तक कार की तलाशी भी नहीं ली होगी, अभी सिर्फ फिंगर प्रिंट्स और फुट प्रिंट्स लिए होंगे ।”

“हाँ, वह काम अभी खत्म हुआ है । मैं कार की तलाशी लेने का आदेश देने ही वाला था ।” वह झेंपता हुआ बोला ।

‘तेरे को तो ये ख्याल भी नहीं आया होगा ?’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “सर, तो इंतजार किस बात का है ? आदेश दीजिये ।”

उसने अपनी टीम को तलाशी लेने का आदेश दिया । एक आदमी आगे की सीट पर और एक पीछे की सीट पर तलाशी लेने लगा । तभी पीछे की सीट की तलाशी लेता हुआ आदमी चिल्लाया, “सर, यहाँ कुछ मिला है ।’

“क्या है ?”

उसने दिखाया । वह एक कान का ईयररिंग था । मैं उसे देखकर चौंक गया । मैं उस ईयररिंग को अच्छी तरह से पहचानता था । वह उसी ईयररिंग के जोड़े का एक हिस्सा था जो डॉली और उसकी सहेलियों के पास था ।

“ये जरूर हत्यारे का है ?”

“सर ! हत्यारे का नहीं, हत्यारिन का । ये एक लड़की का है ।”

“अरे यार, ये तो मुझे पता है । पर है किसका ?”

“मैं जानता हूँ, ये किसका है । आइये, उधर चलते हैं ।” कहते हुए मैं उधर चल पड़ा, जहाँ पर डॉली और दूसरे लोग खड़े हुए थे । मैंने डॉली, अंजलि और संध्या की तरफ नजर दौड़ाई । जैसा कि मेरा अंदाजा था अंजलि के कानों से ईयररिंग्स गायब थे । बाकी डॉली और संध्या दोनों के कानों पर ईयररिंग्स शोभा दे रहे थे ।

“मिस अंजलि ?” मैंने कहा ।

“यस ।”

“आपके ईयररिंग्स नजर नहीं आ रहे हैं । वह कहाँ पर है ?”

“वो आपको तो पता ही है, मेरे बहुत ढीले हैं तो गिर जाते हैं, इसलिए उन्हें अपने बैग में रखा हुआ है ।”

“जरा दिखाएँगी ?”

“एक मिनट ।” कहते हुए उसने अपने हाथ में पकड़े हुए बैग को खंगालना शुरू किया । थोड़ी देर बाद वह बोली, “शायद दूसरे बैग में है, जो घर पर है ।”

“चलिये, आपके फ्लैट में चलकर देख लेते हैं ।” इस बार इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ने कहा । वह भी समझ गया था कि मैं क्या कहना चाह रहा था ।

“ठीक है, चलिये ।”

वह अपनी स्कूटी की तरफ जाने लगी, तभी शिवा रेड्डी ने कहा, “आप हमारे साथ चलिये ।”

“आखिर ये हो क्या रहा है सर ?” रामनाथन ने पूछा ।

“कुछ नहीं, बस आप लोग यही पर रुकिए । हम थोड़ी देर में वापस आते हैं ।” कहते हुए उसने अपनी टीम को कुछ निर्देश दिये और पुलिस जीप में जाकर ड्राइवर सीट की बगल वाली सीट पर बैठा । पीछे उसके एक हवलदार के साथ मैं और अंजलि भी बैठ गए । साथ में एक लेडी कॉन्स्टेबल भी थी ।

दो मिनट के अंदर हम बिल्डिंग नंबर 5 के अंजलि के फ्लैट में उसके कमरे में थे ।

“जाइए, बैग लाइये ।”

उसने टेबल पर रखा हुआ अपना एक बैग उठाया और उसमें देखने लगी । उसमें नहीं मिला । वह परेशान हो उठी । फिर उसने अलमारी खोली और उसमें से बैग्स निकालकर देखने लगी । वह एक के बाद एक बैग निकालकर उन्हें चेक करने लग गई ।

“ये औरतें, इतने बैग्स का क्या करती हैं ?” इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ने मुझसे पूछा ।

“पता नहीं सर, मैं भी अपनी बीवी से पूछ-पूछकर थक गया, पर कभी जवाब नहीं मिला ।”

वह मुस्कुराया फिर उसने अंजलि से पूछा, “कितना टाइम लगेगा मैडम ?”

“पता नहीं, मिल नहीं रहे हैं । यही इसी बैग में रखे थे ।” वह परेशान होकर बोली ।

“वो बैग में होंगे तो मिलेंगे ना मैडम ।”

“क्या मतलब ?”

“मतलब ये कि आपका एक ईयररिंग हमारे पास है ।” उसने अपने हवलदार को इशारा किया । हवलदार ने एक पैकेट में रखा हुआ ईयररिंग दिखाया ।

“ये... ।”

“देख लीजिये । ये आपका ही है ना ।”

“मेरा ही है । पर ये आपको कहाँ से मिला ?”

“वहीं, जहाँ आप इसे भूल गई थीं ।”

“मतलब ।”

“अब आप इतनी भी भोली नहीं है जो इसका मतलब ना समझ सके । फिर भी नहीं समझ रही हैं तो मैं आपको बता दूँ कि ये हमें राजीव की गाड़ी में मिला है । जहाँ आप आज सुबह उसका मर्डर करके इसे भूल आई थी ।”

“नहीं... ।” वह एकदम चिल्लाकर बोल उठी ।

“आपके नहीं बोलने से क्या होता है । आपने बड़ी ही चालाकी से राजीव का मर्डर किया और उसे आत्महत्या साबित करने की कोशिश की । पर आपकी ये कोशिश सफल नहीं रही । ये इयररिंग गाड़ी में उस समय गिरा होगा जब वॉचमैन की नजरों में आने से बचने के लिए आप पीछे की सीट पर पूरी तरह से छिप गई होंगी । आपने पहले उसे खूब बियर पिलाई और जब वह मदहोश हो गया तो कार के एग्जास्ट पाइप को पाइप से जोड़कर अंदर की तरफ मोड़कर गाड़ी चला दी, जिसके धुएँ में वह अपनी जान गँवा बैठा ।”

“पर मैं भला राजीव को क्यों मारूँगी ? मैं तो उससे प्यार करती थी ।”

“वो तो आप बताएगी कि आपने राजीव को क्यों मारा ?”

“मैं बताता हूँ कि अंजलि ने राजीव का खून क्यों किया होगा ?” मैंने बीच में कहा ।

“क्यों ?”

“क्योंकि मेरे हिसाब से डॉली को ड्रग्स के केस में फँसाने के काम में अंजलि और राजीव दोनों शामिल थे । ये प्लान इन दोनों का साझा प्लान था । प्लान के तहत ही ये दोनों मूवी देखने गए, जहाँ से राजीव बीच में निकला, डॉली के फ्लैट में उसके कमरे में गया और ड्रग्स रखकर वापस आ गया । अगर किसी वजह से ये राज खुल जाता कि डॉली निर्दोष है और उसे किसी ने फँसाया है तो राजीव और अंजलि दोनों एक-दूसरे के गवाह थे कि ये तो उस समय मूवी देख रहे थे । पर संध्या, उदय और रामनाथन जी की वजह से राजीव का राज, राज ना रह सका । ये बात अंजलि को पता चली तो उसे समझ आ गया था कि अब उसका बचना मुश्किल है और राजीव के साथ-साथ उसे भी सजा होनी तय है । राजीव को इसने कहीं छुपने की सलाह दी होगी ताकि मौका देखकर उसे मार सके । मुझे कल रात को जब राजीव का फोन आया था तब उसने कहा था, वह बहुत खतरनाक है । तब मुझे समझ जाना चाहिए था कि वह अंजलि के बारे में ही बात कर रहा होगा । जब मैं इन दोनों से पूछताछ के लिए मिला था तब भी राजीव डरा डरा-सा था और राजीव से पूछे गए अधिकतर सवालों के भी यही जवाब दे रही थी । तब भी मुझे कुछ खटक तो रहा था पर क्या, वह अब पता चला है ।”

“रुको-रुको-रूको, तुम गलत कह रहे हो ।” बीच में ही अंजलि बोल उठी ।

“मैंने सब सही कहा है अंजलि । अब तुम बच नहीं सकती ।”

“मेरी बात सुनो । ये सच है कि मैं जानती थी कि राजीव शनिवार दोपहर को यहाँ पर आया था । और ये भी सच है कि ये हम दोनों की ही मिली-भगत थी । पर वह यहाँ पर डॉली के रूम में ड्रग्स रखने के लिए नहीं आया था ।”

“फिर किस लिए आया था ?” शिवा रेड्डी ने कहा ।

“उसे खत्म करने के लिए । उसे जान से मार देने के लिए ?” वह अपने दाँत चबाते हुए बोली ।

“वॉट ?” हम दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया ।

“हाँ ! मैं सच कह रही हूँ । वह यहाँ पर डॉली को मारने आया था ।”

“तो फिर मारा क्यों नहीं ?” मैंने पूछा ।

“क्योंकि वह उसके रूम का लॉक नहीं खोल पाया था ।”

“क्यों ?”

“पता नहीं । जबकि शनिवार सुबह 6 बजे डॉली को उसके रूम में छोड़ते समय राजीव ने गेट भी इस तरह से बंद किया था कि उसका लॉक ना लग जाए । पर शायद बेध्यानी में उसने ध्यान नहीं दिया और गेट को पूरा बंद कर दिया होगा, जिससे वह ऑटोलॉक हो गया । जब वह वापस आया था बहुत घबराया हुआ था । बोल रहा था, पता नहीं लॉक कैसे बंद था । उसके पास लॉक की चाबी भी थी, पर घबराहट के मारे उससे लॉक नहीं खुल पाया था ।”

“ओह्ह” । मैंने साँस लेकर कहा ।

“तुम झूठ बोल रही हो । अपने आपको राजीव की हत्या की सजा से बचाने के लिए झूठ बोल रही हो । राजीव तुम्हारी इस बात की पुष्टि करने नहीं आ सकता । इसलिए तुम सोच रही हो, राजीव की हत्या के जुर्म से होने वाली कड़ी सजा बच जाओगी और सिर्फ डॉली के खिलाफ साजिश रचने की सजा में जेल जाना पड़ेगा ।” शिवा रेड्डी ने कहा ।

“मैं झूठ नहीं बोल रही । मेरा यकीन करो । अच्छा राज जी, कम से कम आप तो मेरी बात सुनो और एक बात का जवाब दो ।”

“क्या ?”

“इस ईयररिंग का दूसरा जोड़ा कहाँ है ? वह मिला क्या आपको ?”

“वो तो नहीं मिला, पर... ।” मैंने कहा ।

“वो नहीं मिला, कोई बड़ी बात नहीं है । हो सकता है, वहीं तलाशी लेने पर मिल जाए । वैसे भी आपने कहा था कि वह बहुत ढीले हैं । हो सकता है, दूसरा भी कहीं गिर गया हो और आपको पता भी नहीं चला हो । जैसे ये वाला वहाँ कार में गिर गया था और आपको पता भी नहीं चला ।” मेरी बात को काटते हुए शिवा रेड्डी ने कहा । उसने फिर महिला कॉन्स्टेबल को आवाज दी, “श्रवन्ती, इसको हथकड़ियाँ पहनाओ और पुलिस जीप में लेकर चलो ।”

“मैं निर्दोष हूँ । मैं बेकसूर हूँ । मेरा यकीन करो ।” अंजलि ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी थी, पर महिला कॉन्स्टेबल पर कोई फर्क नहीं पड़ा । उसने अंजलि को हथकड़ियाँ पहनाई और उसे लेकर चलने लगी ।

“अब तुम उसकी बेगुनाही का आलाप सुनकर उसे बेकसूर साबित करने मत निकल चलना जासूस महोदय ।” शिवा रेड्डी ने हँसते हुए मुझसे कहा ।

“अरे नहीं, सर । मैं तो बस यूँ ही ।” मैं झेंप गया था ।
 
अंजलि की गिरफ्तारी की खबर सुनकर सब चौंक गए थे । डॉली को बिलकुल भी यकीन नहीं हुआ था कि वह राजीव के साथ उसको फँसाने में शामिल थी और खुद को बचाने के लिए उसने राजीव का खून कर दिया था । सब अपने-अपने घरों को लौट गए थे । मैं भी अपने फ्लैट में आ गया था । आज बुधवार था और ऑफिस से आज भी मेरा वीकली ऑफ था । मैं अपने सोफ़े पर लेटा हुआ डॉली के केस के बारे और अपने नॉवेल प्रेम के बारे में सोच रहा था । जिस बात को लेकर मेरी बीवी हमेशा ताना मारा करती थी, आज उन्हीं नॉवेल को पढ़-पढ़कर मैं डॉली को बेकसूर साबित कर पाया था । मेरा पढ़ना सार्थक सिद्ध हुआ था । मैं केस के बारे में सोच-सोचकर खुशी से फूलकर कुप्पा हुआ जा रहा था । जिस केस में पुलिस शुरू से डॉली शर्मा को गुनहगार मान रही थी, मैंने उसे अपनी मेहनत से साबित किया कि ‘वो बेकसूर थी’ और असली साजिशकर्ता को बेनकाब किया । इसका इनाम भी मुझे कल रात मिल चुका था जब डॉली जैसा खूबसूरत बदन मेरे बिस्तर में पूरी रात मेरी बाँहों में था । रात की बात याद आते ही जैसे मेरे तन-बदन में आग लग गई थी । अगर वह अभी मेरे सामने होती तो उसे कच्चा चबा गया होता । तभी मोबाइल की घंटी से मेरा ध्यान भंग हुआ । देखा तो पाया बीवी का फोन था ।

‘उफ़्फ़, इसको भी अभी आना था ।’ डॉली के हसीन सपनों से बाहर आने पर झुंझलाहट हुई ।

“हैलो ।” मैंने फोन उठाकर कहा ।

“क्या कर रहे हो पतिदेव ?” उसने पूछा ।

“कुछ नहीं, सोफ़े पर लेटा हुआ हूँ । आज भी छुट्टी है ना ।”

“पता है मुझे, इसलिये तो फोन किया है ।”

“क्या मतलब ?”

“मतलब ये पतिदेव कि कल भी आपकी छुट्टी थी । अब कल तो आप रात को ऑफिस से आए थे, इसलिए कुछ कहा नहीं । पर आज तो घर की सफाई कर देना ।”

“अरे, कर दूँगा यार । इतनी भी क्या जल्दी है ?”

“क्या पतिदेव ! हफ्ते में एक दिन सफाई करने में इतना ज़ोर आता है । और जो मैं रोज सफाई करती हूँ, उसका क्या ?”

“हाँ, तो तुम्हें कितनी बार कहा तो है कि कोई काम वाली बाई लगा लो ।”

“हाँ, ताकि तुम उस पर लाइन मार सको । क्यों ?”

“क्या यार, क्यों सुबह-सुबह मजे ले रही हो ?”

“अच्छा नहीं लेती, पर सफाई जरूर कर लेना । मैं नहीं चाहती कि मेरा पति गंदे घर में रहे ।”

“ठीक है यार, कर लूँगा । अब तो बंद करो ये बात ।”

“ठीक है । अच्छा, बिट्टू शैतानी कर रहा है । मैं उसे चुप कराती हूँ । तब तक तुम सफाई कर लो । बाय ।”

“ठीक है, बाय !” कहते हुए मैंने फोन काट दिया ।

‘उफ़्फ़, ये सफाई भी करनी है आज ।’ सोचते हुए मैं सोफ़े से उठा और हॉल के दरवाजे के पास पड़ी हुई झाड़ू उठाई और पहले बेडरूम की ओर चल पड़ा । मैं बेडरूम में झाड़ू निकालने लगा । बेड के सिरहाने के नीचे पाये के पास से जब मैंने झाड़ू निकाली तो कोई चीज दूर जा गिरी । मैंने जब उसे देखा तो चौंक गया । मैंने उसे उठाया । वह वैसा ही ईयररिंग था जैसा राजीव की लाश के पास मिला था ।

‘तो क्या ये अंजलि का दूसरा वाला ईयररिंग है, पर ये यहाँ पर कैसे आया ? कहीं ये… ।’ आगे की बात सोचते ही मेरे आँखों के आगे अंधेरा छाने लग गया था । मेरे पैर लड़खड़ाने लग गए थे । मैं खुद को संभाल नहीं पाया और तुरंत बेडरूम से निकलकर बाहर आकर सोफ़े पर ढेर हो गया ।

‘ये... ये ईयररिंग डॉली का है । ये जरूर रात में किसी टाइम यहाँ पर गिर गया होगा और डॉली का ध्यान नहीं गया होगा । पर डॉली ने अपने दोनों कानों में ईयररिंग पहन रखे थे । ऐसा कैसे हो सकता था ?’ मैं सोचने लगा था । इस बात का जो मतलब मुझे समझ आ रहा था, वह बहुत खतरनाक था । राजीव की हत्या अंजलि ने नहीं बल्कि डॉली ने की थी । उसका एक ईयररिंग रात को मेरे बेड के पास गिर गया होगा और दूसरा राजीव की गाड़ी में गिर गया होगा । हत्या करके जब वह वापस आई होगी तो उसको एहसास हुआ होगा कि उसके ईयररिंग उसके कानों में नहीं है । उसने बड़ी ही सफाई से रात को अंजलि के कमरे में जाकर उसके बैग से ईयररिंग निकाल लिए और खुद पहन लिए । दोनों ईयररिंग एक जैसे थे, इसलिए किसी को शक भी नहीं हुआ और राजीव की हत्या के इल्जाम में बेचारी अंजलि फँस गई । अंजलि सच बोल रही थी कि राजीव, डॉली की हत्या करने के लिए उसके रूम में गया था, ना कि उसको फँसाने के लिए ड्रग्स रखने । वह ड्रग्स डॉली की ही थी । मैं ही बेवकूफ था जो उसकी गुहार सुनकर उसे बेकसूर मान रहा था । राजीव या फिर किसी को भी ड्रग्स रखकर डॉली को फँसाना ही होता तो वह उसी दिन क्यों करता ? वह तो कभी भी कर सकता था । आखिर उसके पास उसके फ्लैट और रूम दोनों की चाबी थी । जब कभी डॉली ऑफिस गई हुई होती वह उस समय भी उसके फ्लैट में घुसकर बड़े आराम से ड्रग्स रख सकता था । डॉली ने बड़ी ही आसानी से मुझे बेवकूफ बनाया था । उसने मुझसे मदद की गुहार क्या लगाई, मैं उसे बेकसूर मानकर बचाने निकल पड़ा था । सोचा था, नॉवेल की तरह हीरो से मदद माँगने वाली लड़की मासूम होती है, पर ये बात सोचते हुए मैं भूल गया था कि वह मात्र एक नॉवेल है, काल्पनिक कहानी है, जिसे लेखक अपनी मर्जी से चाहे जैसे लिख सकता है । पर असली जिंदगी में ऐसा होना बहुत मुश्किल है । असली ज़िंदगी में कौन क्या है, कैसे कहा जा सकता था ? मेरे सामने कई मौके आए थे, जब डॉली की असलियत मेरे सामने जाहिर हो जानी थी । मैंने उसको अमित जी के बताए हुए वकील के बारे में बताया तो उसने उसे बड़ी आसानी से जनरल नोटरी पब्लिक बताकर कहा कि उसका केस एक क्रिमिनल लॉयर ही लड़ सकता है । बाकायदा उसने ये बोलकर कि कॉन्स्टेबल से उसे ये बात पता चली है, मुझे मुंबई के बेस्ट क्रिमिनल लॉयर का एड्रैस भी दे दिया । कमाल की बात ये थी कि उसका ऑफिस भी उस जगह के पास ही था, जहाँ से ड्रग्स सप्लाई होती है । उस वकील को शायद पहले से ही मालूम था, तभी तो फीस की भी उसे कोई चिंता नहीं थी । आज के जमाने में वकील फीस पहले लेता है, बाकी बातें बाद में करता है । वह रामनाथन जी को ब्लैकमेल कर रही थी, क्योंकि उन्होंने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी । पर वह कोशिश कहाँ पर की थी, उसके खुद के रूम में, जहाँ लगे हुए सिक्योरिटी कैमरे में वह सब घटना रिकॉर्ड हुई थी । मेरे दिमाग में उसी समय ये बात आ जानी चाहिए थी कि अगर उसके कमरे में सिक्योरिटी कैमरा था तो उसने ड्रग्स प्लांट करने वाले की भी रिकॉर्डिंग हो जानी थी । ये बात मुझे सूझ भी जानी थी, पर शायद उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था, इसलिए एक तो उसने बात को वहीं पर पलट दी थी । दूसरा उसने अपने जिस्म को इस तरह से दिखाया था कि मेरी नजरे सिर्फ और सिर्फ उसके बदन पर ही घूम रही थी । डॉली एक खूबसूरत बला थी । एक ऐसी बला जिसने मुझे पागल बना दिया था । उसने कहा कि उसने पार्टी में ड्रग्स ली थी, जबकि मैंने जिससे भी पूछा था उसने यही बताया कि उसने सिर्फ ड्रिंक ली थी ।

अब मुझे लग रहा था कि जाल राजीव और अंजलि ने नहीं बुना, बल्कि डॉली ने मेरे लिए बिछाया था । मेरी एक बेवकूफी की वजह से बेचारा राजीव जान से मारा गया और बेचारी अंजलि, राजीव की हत्या के इल्जाम में जा फँसी थी । अब मुझे अपने ऊपर हमला करने वाले के बारे में भी याद आ रहा था । उन हमला करने वालों में से एक व्यक्ति को मैंने रात के मुसाफिर होटल के बॉडीगार्ड्स में देखा था और वह व्यक्ति था जो पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते समय मुझसे टकराया था । जरूर वह डॉली से मिलने जा रहा था ।

‘क्या मुझे जाकर इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी को ये सच बताना चाहिए ?’ मैंने अपने आपसे पूछा । मैं कुछ निर्णय ले पाता, इससे पहले फ्लैट का दरवाजा खुलने की आवाज आई । उसके साथ आई एक मधुर आवाज, “मिस्टर राज, क्या मैं अंदर आ सकती हूँ ?” दरवाजा ना जाने कैसे खुला रह गया था ।

मैंने देखा, वह डॉली थी । मैं उसे देखकर चौंक गया था ।

“क्या मुझे याद कर... ।” उसने कहना चाहा पर तभी मेरे हाथ में अपना ईयररिंग देखकर वह चौंक गई, “ये... !”

“ये तुम्हारा ईयररिंग है ना डॉली ?”

“हाँ, ये मेरा है । पर तुम्हारे पास कैसे आया ?”

“ये मुझे बेडरूम में बिस्तर के नीचे मिला था । पर एक बात बताओ, अगर ये तुम्हारा ईयररिंग है तो फिर जो तुमने पहन रखे हैं, वह किसके है ?”

मेरी बात सुनकर वह खामोश हो गई ।

“बोलो, जवाब दो । ये जो तुमने ईयररिंग पहन रखे हैं, ये अंजलि के है ना ? राजीव का खून तुमने किया है, बोलो ?” मैं थोड़ा गुस्से में हो गया था ।

“तुमने सही बोला, राजीव का खून मैंने ही किया है ।” कहते हुए वह मुस्कुराई । फिर आगे बोली, “पर जो राजीव की लाश के पास ईयररिंग मिला है, वह अंजलि का ही है ।”

“मतलब ?”

“जासूस तो बड़े बने फिरते हो, फिर भी इतना-सा समझ नहीं पा रहे । राजीव का खून मैंने किया था और उसके इल्जाम में अंजलि को फँसाने के लिए वह ईयररिंग मैंने ही कार में जानबूझकर छोड़े थे । आखिर उस पर उसकी उँगलियों के निशान जो थे । मैं तो उसका दूसरा ईयररिंग भी वहीं कार से थोड़ा दूर छोड़ देती, पर उसी समय मुझे अहसास हुआ कि मेरे कान से भी एक ईयररिंग गायब है । मुझे नहीं मालूम था, वह मैंने कहाँ गिराया था, इसलिए उसका वह ईयररिंग मैंने अपने कानों में पहन लिया था ।”

“अगर तुम्हारा ये ईयररिंग यहाँ के बजाय वहीं कार में गिरा होता तो । इस पर भी तो तुम्हारी उँगलियों के निशान है ।”

“तो मैं कह देती कि अंजलि ने मुझे फँसाने के लिए ऐसा ये सब किया है । वैसे भी कल रात को तुम्हारे पास आने से पहले मैंने उसको और संध्या को पार्टी के लिए दारू की बोतल देकर आई थी और आने से पहले मैंने उसमें नींद की गोलियाँ मिला दी थी । अरे, वहीं नींद की गोलियाँ जो मैंने तुम्हारी ड्रिंक में भी मिला दी थी, जब तुम कोल्ड ड्रिंक लेने गए थे । तुम्हारे साथ मैंने बहुत कम पी थी और अपने पूरे होश में थी । तुम्हारे सो जाने के बाद मैं रात को 11 बजे अपने फ्लैट में गई । अंजलि के मोबाइल से राजीव को मैसेज करके 2 बजे फ्लैट के नीचे बुलाया जो कि उसी बिल्डिंग में पड़ोस के फ्लैट में छुपा हुआ था । वह पहले से नशे में था । अंजलि की जगह मुझे देखकर वह चौंक गया था । पर मैंने उसे कहा कि मैं उससे अब भी प्यार करती हूँ और मुझे मालूम है कि मुझे फँसाने के लिए तुम्हें अंजलि ने फोर्स किया था । वह भी भावुक हो उठा था और मेरे साथ रोने लग गया था । उसी समय वहाँ पर बिल्डिंग का सिक्योरिटी गार्ड आया था, जिसे राजीव ने डाँटकर भगा दिया था । बाद में वह पीछे की सीट पर मेरे से लिपट गया । मैंने उसे बाकी बोतल की बियर भी पिला दी । उसे बिलकुल भी होश नहीं रहा । मैंने ही एक बोतल से सारे निशान मिटाये और उसे कार के एग्जास्ट पाइप में फँसाने की जानबूझकर कोशिश की, जिससे वह टूट जाये । उस टूटी हुई बोतल को मैंने वहीं नीचे रख दिया और एक छोटे पाइप को एग्जास्ट पाइप में फँसाकर अंदर की तरफ मोड़ दिया । उस पर मैंने राजीव के फिंगर प्रिंट्स लिए, ताकि पहली नजर में वह आत्महत्या नजर आए । फिर मैंने गाड़ी चालू करके गाड़ी को बंद कर दिया और राजीव अपनी ही कार की गैस से मर गया । कोई भी काबिल ऑफिसर ताड़ जाता कि किसी ने राजीव की हत्या करके उसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की है । पर इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी ने जब हम लोगों को बुलाया और बताया कि राजीव ने आत्महत्या की है तो मुझे मेरा प्लान फ़ेल होता हुआ नजर आया । पर पता नहीं बाद में उसने कैसे जाना कि वह आत्महत्या नहीं, हत्या है ।”

“वो मैंने उसे बताया था । आत्महत्या का ये तरीका मुझे थोड़ा अजीब लगा था कि पहले कोई बोतल को एग्जास्ट पाइप में फँसाने की कोशिश करे और फिर उससे काम नहीं बने तो उसी समय ऐसा पाइप भी मिल जाए जो एग्जास्ट पाइप में फिट आ जाये । मैंने बियर की बोतल से फिंगरप्रिंट लेने के लिए कहा, पर जब उससे कोई भी फिंगरप्रिंट नहीं मिले तो फिर कार की तलाशी लेने के लिए बोला । तलाशी के दौरान मिले ईयररिंग्स को देखकर मैं ये समझ गया था कि वह अंजलि के थे । और जब उसके पास उसके ईयररिंग्स नहीं मिले तो इंस्पेक्टर के साथ-साथ मुझे भी यहीं लगा था कि उसी ने राजीव का खून किया है ।”

“और यही तो मैं चाहती थी ।” कहते हुए उसके चेहरे पर कुटिल मुस्कान उभर आई ।

“पर तुमने ऐसा क्यों किया ? आखिर राजीव और अंजलि ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुमने उनके लिए इतना खतरनाक खेल रचा ?”

“क्या बिगाड़ा था ! जानना चाहते हो तो सुनो । उस दिन राजीव मेरे रूम में ड्रग्स रखने के लिए नहीं आया था । आखिर वह ड्रग्स तो मेरी ही थी, वह वहाँ पर मुझे जान से मारने आया था । पर वह दरवाजा नहीं खोल पाया था । ना जाने किस भावना के वशीभूत होकर मैंने 10 दिन पहले ही अपने रूम का लॉक चेंज करवा लिया था, नहीं तो पुलिस मुझे गिरफ्तार करने के बजाय मेरी लाश को उठाने के लिए आई होती । अब तुम सोचोगे कि मुझे कैसे पता चला कि वह मुझे मारने आया था ? इसका पता मुझे कल ही चला जब शाम को तुम लोगों के जाने के बाद मैं अपने रूम में आराम करने गई थी । पर मुझे नींद नहीं आ रही थी । मैं ये सोच रही थी कि आखिर राजीव मेरे रूम में क्यों आया था । मुझे लगा, शायद वह वापस से मुझसे पेचअप करने के लिए आया हो । मैंने उसे फोन मिलाया, पर उसका फोन नहीं लगा । फिर मैं इस बात से बहुत ज्यादा परेशान हो गई कि राजीव मेरी वजह से मुझे फँसाने के इल्जाम में गिरफ्तार हो सकता है जो कि झूठ था, क्योंकि ड्रग्स तो आखिर मेरी ही थी । मैं उसकी रिहाई की बात करने के लिए ही अंजलि के रूम में जा रही थी, पर दरवाजे पर ही मुझे अंजलि के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी । वह फोन पर राजीव से बात कर रही थी । उनकी बातों से ही मुझे पता चला कि उन दोनों ने मुझे मारने का प्लान बनाया था और वह फ्लॉप हो गया था । उन्होंने तो इस बात से संतोष कर लिया था कि मैं मारी नहीं गई तो क्या हुआ, ड्रग्स के केस में मुझे 57 साल की सजा आराम से हो जाएगी और इस तरह से मैं उनकी ज़िंदगी से दूर हो जाऊँगी । पर उनका ये प्लान फ्लॉप हो गया और तुम्हारी वजह से मैं बहुत जल्दी हवालात से बाहर आ गई थी । इसी वजह से अंजलि, राजीव पर चिल्ला रही थी कि वह भी जल्दी ही पुलिस की निगाह में आ जाएगी । बस मैंने उसी समय उन दोनों को सजा देने का फैसला कर लिया था । इसलिए मैंने प्लान बनाकर राजीव का कत्ल किया और उसके इल्जाम में अंजलि को पुलिस से गिरफ्तार करवा दिया ।”

“ये... ये तुमने सही नहीं किया डॉली । मैंने तुम्हारी मदद एक अच्छी शरीफ लड़की समझकर की थी और तुमने मुझे भी धोखा दिया । एक मासूम आज मेरी वजह से मारा गया और दूसरा उसके कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार है ।”

“मिस्टर राज, तुमने मेरी मदद एक मासूम और शरीफ लड़की समझ कर की थी या फिर एक सेक्सी, बला की खूबसूरत अकेली लड़की समझकर । क्या मैं समझती नहीं कि तुमने मेरी मदद इसलिए की थी ताकि उसके बदले मेरे जिस्म को हासिल कर सको । ये मत भूलो कि कल रात को तुम्हारे साथ बिस्तर में सोकर मैंने उस मदद का एहसान पहले ही उतार दिया है । बड़े आए मदद करने वाले । तुम सारे मर्द होते ही ऐसे हो, बिलकुल एक जैसे । लड़की के जिस्म को अपने नीचे रौंदने के लिए हर पल तैयार रहते हो । मेरा चाचा, जिसने मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया, उसने भी मेरे साथ यही तो करने की कोशिश की । जब मैं 16 साल की हुई तो उसने मेरे साथ बलात्कार करने की कोशिश की । किसी तरह से मैं उससे बच पाई थी । अपनी चाची को बताया तो उसने मुझे चुप रहने के लिए कहा । फिर क्या था मैंने अपने चाचा को मार दिया और उसके इल्जाम में चाची को फँसा दिया । जब आईआईटी कर रही थी तो मुझे एक लड़के से प्यार हुआ । पर उसने मुझे ड्रग्स का शिकार बनाया, उस दौरान अपनी ड्रग्स की खुराक के लिए मैं ना जाने कितने लड़कों के बिस्तर की शोभा बनी थी । किसी तरह 6 महीने ड्रग्स नियंत्रण केंद्र में रहकर अपना इलाज करवाया और ड्रग्स से मुक्ति पाई । अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाया और मेहनत करके यहाँ मुंबई की आईटी कंपनी में जॉब हासिल की । पर एक रात को रात के मुसाफिर होटल की पार्टी में मेरा फिर ड्रग्स से सामना हुआ । मैं कॉलेज में ड्रग्स की वजह से हुए अपने हालत से वाकिफ थी इसलिए दूर रही । वहाँ मेरी मुलाक़ात बशीर अहमद से हुई जो मेरी खूबसूरती पर फिदा हो गया था । उसने मुझे अपने साथ काम करने का ऑफर दिया जो मैंने स्वीकार कर लिया । उसके सदके मैं ड्रग्स सप्लाई करने लग गई थी । जितना मेरा पूरे साल का पैकेज था, उतना तो मैं 12 महीने में कमाने लग गई थी । फिर राजीव मेरी ज़िंदगी में आया । वह बहुत अच्छा लड़का था, उसने कभी भी मेरी मर्जी के बिना मुझे हाथ लगाने की कोशिश नहीं की । पर एक बार गुस्से में मैंने उससे ब्रेकअप कर लिया था । बाद में मेरी दोस्ती उदय से हुई, पर वह भी सिर्फ मेरे जिस्म को ही अपना बनाना चाहता था और वह रामनाथन, जिसे मैं अंकल बोलती थी, जिसने एक बार मेरी मदद क्या कर दी, वह भी मुझे अपनी संपत्ति समझ बैठा, जबकि मैं उसकी बेटी की उम्र की हूँ ।” कहते हुए उसका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा था । मैं उसे देखता रह गया । थोड़ी देर हम दोनों के बीच शांति छाई रही ।

“अब तुम क्या करोगे ?” उस शांति को भंग करते हुए उसने मुझसे पूछा ।

“क्या करूँगा, मतलब ?”

“मतलब ये कि क्या तुम अब पुलिस के पास ये बताने जाओगे कि राजीव का कत्ल मैंने किया है ।”

“तुम जानती हो, मैं ऐसा चाहकर भी नहीं कर सकता ।”

“इसी में तुम्हारी भलाई है मिस्टर राज । अगर तुमने ऐसा कुछ भी करने की कोशिश की तो मैं भूल जाऊँगी कि तुमने मेरी मदद की थी । राजीव की तरह तुम्हें भी ऊपर पहुँचा दूँगी ।”

“क्यों मुझे मरवाने में तुमने कोई कसर बाकी छोड़ी थी क्या ?”

“तुम्हें कब मरवाना चाहा मैंने ? ओह्ह, तो तुम्हें सूझ गया वह हमला तुम पर मैंने करवाया था । तुम बेवकूफ हो, अगर तुम्हें मरवाना ही होता तो क्या तुम बच पाते ? वह चार थे फिर भी तुम्हें कोई घातक चोट पहुँचा पाये क्या ? अब ये मत बोलना कि तुमने बड़ी ही बहादुरी से उनका सामना किया था । उन्होंने तुम पर हमला ही इसलिए किया था ताकि तुम उनके वार से आसानी से बचा सको । वरना तो उनका एक वार ही काफी था तुम्हारे लिए । वह हमला तुम पर इसलिए करवाया ताकि तुम्हें लगे की साजिशकर्ता ने तुम्हें अपने तक पहुँचने से रोकने के लिए ये सब किया है और तुम्हें इस बात का शक ना हो कि वह ड्रग्स मेरी ही है, क्योंकि मुझसे 12 बार बेवकूफी हो गई थी और मुझे लगने लगा था कि कहीं तुम्हें मुझ पर शक ना हो जाए ।”

उसकी बात सुनकर मैं खामोश ही रहा ।

“राजीव के कत्ल का मुझे भी अफसोस है, पर जब वह मेरी हत्या करने के लिए इतनी आसानी से तैयार हो गया तो फिर मैं क्यों नहीं होती । अंजलि का भी यहीं अंजाम होना है । मुझे फँसाने और राजीव के कत्ल के इल्जाम में उम्र कैद । वैसे एक बात कहूँ राज जी ।”

“क्या ?”

“आपमें दिमाग तो बहुत है । अब कहीं यह सोचकर अंजलि की मदद करने मत चले जाना कि उसे भी बेकसूर साबित कर दोगे और इस बहाने उसे भी अपनी बाँहों में भर लोगे और फिर बिस्तर में ले जाकर... ।” कहते हुए वह हँस दी । मैं सकपका गया था ।

“अच्छा, चलती हूँ । तुम्हारे साथ बिताई हुई रात हमेशा याद रहेगी । बाय ।” कहकर वो तो चली गई पर जाते-जाते वह मुझे एक ऐसे भंवर में छोड़ गई थी, जहाँ से निकलने का मुझे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था ।

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