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Thriller बेकसूर

“राज जी, सच कहूँ तो मैं उस समय गहरे नशे में थी । आप गलत मत समझिए, पर मैं कभी-कभार ड्रग्स लेती हूँ । परसो रात को एक रेव पार्टी थी, जिसमें मैंने कुछ ज्यादा ही ड्रग्स ले ली थी, जिसकी वजह से मैं कल दोपहर देर तक सोती रही । पुलिस के आने तक मैं ड्रग्स के नशे की हालत में ही थी ।”

“ओह्ह... !” मैंने कहा ।

“राज जी, मैं कभी-कभी ड्रग्स लेती हूँ, इसका ये मतलब नहीं कि मैं ड्रग्स सप्लाई भी करती हूँ । मुझे गलत इल्जाम में फँसाया गया है ।” कहते-कहते वह रो पड़ी ।

“हम्म, कोई ना । तुम ये बताओ, कौन-कौन था तुम्हारे साथ पार्टी में ?”

“सभी थे । मेरी रूममेट्स, मेरा एक्सबॉयफ्रेंड, उदय, श्री... ।”

“श्री भी थी ?” मैंने आश्चर्य से पूछा ।

“हाँ ।”

“अच्छा, तुम गिरफ्तार हुई, तुम्हारा कोई फ़्रेंड मिलने नहीं आया तुमसे ?”

“आए थे । अभी 1 घंटा पहले राजीव, अंजलि और संध्या तीनों मिलकर गए थे ।”

“उदय भट्ट नहीं आए ?”

“नहीं राज जी ! शायद उनको पता नहीं होगा कि मैं गिरफ्तार हुई हूँ ।”

‘साल, पूरी दुनिया को पता है, बस उसे ही नहीं पता ।’

“तुम्हें अपने किसी फ्रेंड पर शक है ?”

“नहीं ।”

“ऐसे नहीं, थोड़ा-सा सोचकर बताओ । इनमें से तुम्हें कौन फँसाने की साजिश रच सकता है ? ये तो कन्फ़र्म है कि वह तुम्हारे इन्हीं फ़्रेंड्स में से कोई है ।”

“अब राज जी, वह मुझे नहीं पता । मैं इतना जानती हूँ कि मैं बेकसूर हूँ बस । वैसे आपने बताया था ना कि श्री ने कल दोपहर को किसी को मेरे फ्लैट में घुसते हुए देखा था । आप उससे पूछिए । हो सकता है मेरे कमरे में ड्रग्स उसी ने रखी हों ।”

“वो तो खैर मैं पूछूँगा ही । फिर भी तुम भी तो थोड़ी मदद करो ।”

“आपका मुलाक़ात का टाइम खत्म हो गया है ।” तभी दरवाजा खोलते हुए कॉन्स्टेबल अंदर आया ।

“बस 2 मिनट ।” मैंने उस कॉन्स्टेबल से कहा और डॉली से बोला, “ तुम बिलकुल भी चिंता मत करो । मैं तुम्हारे बताए वकील से मिलकर बात करता हूँ । और जैसा कि तुमने कहा, वह एक अच्छा वकील है तो उम्मीद है कल ही तुम्हें जमानत मिल जाए ।”

“थैंक यू राज जी ।”

“अच्छा डॉली, तुम्हारे फ्रेंडस के मोबाइल नंबर देना । आज संडे है तो उम्मीद है उनसे मुलाक़ात हो जाए । कल से तो वह शायद ऑफिस चले जाएँगे तो बात नहीं हो पाएगी, इसलिए आज ही बात कर लेता हूँ । शायद उनसे बात करने पर ऐसा कुछ हाथ आए जो तुम्हारे वकील को तुम्हें जमानत दिलाने में हेल्प कर सके ।”

“राज जी, नंबर तो याद नहीं है । आप बाहर इंस्पेक्टर से मिलकर मेरे सामान में से मेरा मोबाइल है उसे ले लीजिये । उसमें सबका नंबर सेव है । आप इंस्पेक्टर से मेरे 2 क्रेडिट कार्ड भी ले लीजिएगा । उनका पिन 0009 है । आपको वकील की फीस भी देनी है और दूसरे खर्चे भी आप कर रहे हैं । वह मुझे पता नहीं था कि कल आपको रेस्टोरेन्ट में श्री के ऊपर खर्च करना पड़ जाएगा, नहीं तो मैं कल ही आपको दे देती ।”

“वो कोई बात नहीं । वैसे भी वहाँ खाना तो मैंने भी खाया था ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“फिर भी मुझे अच्छा नहीं लगेगा कि मेरी वजह से आपका खर्चा हो रहा है । आगे भी ना जाने कितना खर्च होगा ?”

“ठीक है, मैं क्रेडिट कार्ड ले लेता हूँ । बाय ।” कहता हुआ मैं वहाँ से निकल आया ।

☐☐☐

मैं अपनी बिल्डिंग की लिफ्ट में था । पुलिस स्टेशन से निकलने से पहले मैं इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी से डॉली के क्रेडिट कार्ड और उसका मोबाइल फोन लेकर आया था । क्रेडिट कार्ड और मोबाइल देने से पहले उसने डॉली से उसके बारे में पूछा था । पुलिस स्टेशन से निकलते ही मैंने सबसे पहले डॉली की फ्रेंड अंजलि को फोन मिलाया । मालूम हुआ कि वह राजीव के साथ पीवीआर में मूवी देखने गई हुई थी और मूवी से फ्री होकर वह मिलने के लिए फोन करेगी ।

‘साला, फ्रेंड पुलिस की गिरफ्त में है और ये बॉयफ्रेंड के साथ मजे ले रही है । कैसी लड़की थी अंजलि और कैसा था उसका फ्रेंड राजीव ?’ अपनी बिल्डिंग की लिफ्ट से निकलते हुए भी मेरा दिमाग यहीं सोच रहा था । लिफ्ट से निकलकर मैं अपने फ्लैट में जा रहा था कि मुझे डॉली के फ्लैट का मेन गेट खुला नजर आया ।

‘जरूर ये संध्या होगी, अंजलि तो मूवी गई हुई है । चलो, आज की शुरुआत इसी से करते हैं ।’ सोचते हुए मैं उसके फ्लैट की तरफ गया । दरवाजा खुला हुआ था, पर फिलहाल उस पर पर्दा लगा हुआ था । मैंने थोड़ा पर्दा हटाकर देखा । सामने हॉल में पीछे की तरफ डाइनिंग टेबल नजर आई, पर किसी के दर्शन नहीं हुए । मैं पर्दा हटाकर अंदर जाने ही वाला था, फिर मैंने अपना इरादा बदल दिया ।

‘यार, अभी तेरे को इस घर की चाबी हासिल नहीं हुई है । शरीफ बच्चे की तरह डोरबेल बजाकर अंदर जा ।” सोचते हुए मैंने डोरबेल बजा दी । थोड़ी देर बाद एक लड़की ने दरवाजा खोला ।

“यस । किससे मिलना है ?” उसने मुझसे सवाल किया । लगा जैसे भैंस भर्राई हो ।

मैंने एक नजर उस पर दौड़ाई । वह डॉली की ही उम्र की, मगर गेहुँए रंग की, थोड़े छोटे कद की, बहुत ही मोटी लड़की थी जो दिखने में कोई खास नहीं थी । आँखों पर उसने मोटे फ्रेम का चश्मा लगा रहा था । घर में रहने के बावजूद उसने बहुत ज्यादा मेकअप कर रखा था और अपने आपको खूबसूरत दिखाने की नाकाम कोशिश कर रही थी ।

‘ये भैंस जैसी लड़की संध्या ही है ।’ मन ही मन सोचते हुए मैंने जवाब दिया, “जी मेरा नाम राज है । मैं आपका पड़ोसी हूँ । वह दो फ्लैट छोड़कर मेरा फ्लैट है ।”

“तो मैं क्या करूँ ?” उसने कहा ।

‘साली ! बड़ी खड़ूस है ।’

“जी, मैं आपकी फ्रेंड डॉली का फ्रेंड हूँ ।”

“डॉली का फ्रेंड !” उसके चेहरे पर आश्चर्य के भाव थे ।

“क्यों, लगता नहीं हूँ क्या ?” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“नहीं-नहीं, ऐसी बात नहीं है । बस पहले कभी आपको उसके साथ नहीं देखा ।” कहते हुए इस बार वह भी मुसकुराई ।

“कैसे देखेंगी ? अभी हाल ही में मेरी और उसकी दोस्ती हुई है ।”

“ओह्ह... ।”

“आप सारी पूछताछ यहीं गेट पर ही करेंगी ?”

“ओह्ह सॉरी ! प्लीज, कम इन... ।” कहते हुए उसने गेट खोल दिया । मैं अंदर गया । कॉलोनी के सभी टावर में बने हुए फ्लैट एक ही शेप के थे, चाहे जिस भी फ्लोर पर जाए । अंदर घुसते ही एक बड़ा-सा हॉल, हॉल से लगते हुए लेफ्ट में एक छोटा कमरा, फिर कॉमन बाथरूम । उससे लगती हुई रसोई, सामने की तरफ बालकनी थी, जिस पर इस समय पर्दा लगा हुआ था । हॉल के दायी तरफ मास्टर बेडरूम और उसके बगल में दूसरा कमरा । बस अंदर का इंटीरियर सबने अपने हिसाब से कर रखा था । मास्टर बेडरूम में घुसते ही नजर आ गया था जिसके डोर पर सील लगी हुई थी । हॉल काफी बड़ा था जिसके एक कोने में कुछ जिम का सामान भी रखा हुआ था, जिसमें एक ट्रेडमिल भी थी ।

“बैठिए ।” उसने सोफ़े की तरफ इशारा करते हुए कहा ।

“वो मास्टर बेडरूम... वो डॉली का ही है ।” मैंने बैठते हुए पूछा ।

“हाँ, उसी का है ।” कहते हुए उसके चेहरे पर थोड़े गुस्से के भाव आए, पर तुरंत ही वह वापस नॉर्मल हो गई ।

“आपका रूम कौन-सा है ?”

“ये सामने वाला ।” उसने बाई तरफ वाले छोटे रूम की तरफ इशारा करते हुए कहा, जिसका दरवाजा खुला हुआ था । बाहर से कमरे के अंदर जितनी नजर जा सकती थी, उतना मैंने उसका नजारा किया । वह एक साफ़-सुथरा और सजा हुआ कमरा लग रहा था ।

“ये बगल वाला कमरा शायद आपकी फ्रेंड अंजलि का है ?” मैंने पूछा ।

“हाँ ! वह अभी बाहर गई हुई है ।”

“ओके... !” कहकर मैं थोड़ी देर के लिए रुका और फिर अपनी बात आगे बढ़ाई, “बुरा ना माने तो एक बात पूछ सकता हूँ ?”

“जी, पूछिये ।”

“डॉली के रूम की तरफ इशारा करते समय आप थोड़ी देर के लिए गुस्सा हो गई थीं । क्या मैं गलत कह रहा हूँ ?”

“नहीं ! आप सही कह रहे हैं ।”

“पर मैं आपके गुस्से का कारण नहीं समझ पाया । आखिर आपको गुस्सा क्यों आया था ?”

“क्यों नहीं आएगा गुस्सा ? जी तो इतना चाहा था कि उसे जान से मार दूँ । हर कोई चाहता है कि मास्टर बेडरूम उसको मिले, बड़े रूम पर उसका हक हो । वह मेरे बाद इस फ्लैट में आई थी, फिर भी उसने बड़े रूम पर कब्जा जमा लिया, जबकि उसे मैं लेना चाहती थी ।”

“मैं समझा नहीं ।”

“पहले उस रूम में हमारी कोई और रूम मेट थी । मैं और अंजलि अभी वाले रूम में ही थे । जब पुरानी वाली रूममेट जाने वाली थी तो मेरी उससे बात हो गई थी कि वह अपना रूम मुझे देकर जाएगी । हमने मकान मालिक को भी बोल दिया था । पर ना जाने क्यों वह और मकान मालिक ने बाद में वह रूम उस डॉली को दे दिया ।”

“तो इसमें कौन-सी बड़ी बात है ? आप रूम दूसरी जगह भी तो किराये पर ले सकती थी ।” मैंने पूछा ।

“आप सही कह रहे हैं । पर इस सोसाइटी में फ्लैट मिलना और उसमें भी एक रूम मिलना बहुत ही मुश्किल है । एक फ्लैट खाली होता नहीं है उससे पहले ही वह बुक हो जाता है । यहाँ से ऑफिस जाना भी बहुत आसान पड़ता है । आसपास मॉल भी है । कहीं और फ्लैट लेने पर वह सुविधाएँ नहीं मिल पाती, जो यहाँ मिलती हैं ।”

‘कह तो ये ठीक रही है । मुझे भी फ्लैट मिलने में बहुत मुश्किल पेश आई थी और जितना एचआरए मुझे मिल रहा था, उससे डबल रकम मुझे यहाँ किराये के रूप में देनी पड़ रही थी, इसके बावजूद मैं वहाँ रह रहा था ।’

“हम्म, मैं समझ सकता हूँ । पर अगर वह बड़े रूम में रह रही है तो जाहिर-सी बात है वह किराया भी ज्यादा दे रही होगी ।” प्रत्यक्ष में मैंने कहा ।

“2000 ही तो ज्यादा दे रही है । कौन-सा एहसान कर रही है ? बाकी सब कामों में तो बराबर खर्चा होता है ना । सफाई का, बिजली का, मैनटेनेंस का ।”

“हम्म, वह तो है ।” मैंने कहा ।

“वैसे आप बुरा ना माने तो अब मैं आपसे एक सवाल पूछूँ ?” उसने कहा ।

“क्या ?” मैं हड़बड़ाया ।

“आप ये सब तो पूछने के लिए आए नहीं होंगे । आपको काम क्या है, वह बताए ?”

“जी, आपको को पता ही है कि आपकी फ्रेंड को पुलिस ने गिरफ्तार किया है । उसी सिलसिले में आपसे कुछ जानकारी चाहिए थी ।”

“आपको जानकारी चाहिए, पर क्यों ?”

“वेल, वह अपने आपको बेकसूर बता रही है और पुलिस उसकी बात पर बिलकुल भी विश्वास नहीं कर रही है, तो बस मैं उसको बेकसूर साबित करने की थोड़ी कोशिश कर रहा हूँ ।”

“क्या आप उसके वकील है ?”

“अरे, नहीं-नहीं... ।”

“तो फिर जरूर डिटेक्टिव होंगे, जैसे फिल्मों में दिखाते हैं । जो एक खूबसूरत लड़की को बचाने निकला है ।” उसने मज़ाक उड़ाते हुए कहा ।

“जी, आपने सही कहा । मैं एक डिटेक्टिव ही हूँ ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“क्या ?” उसका चेहरा हक्का-बक्का था ।

‘साला, ऐसे तो कोई सीरियस ही नहीं लेता जब तक अपने आपको शो ऑफ ना करो ।’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “जी, आपको कोई शक है क्या ? अब ये मत बोलना कि आपने तो फिल्मों में 6 फीट लंबे कसरती बदन वाले, सड़कों पर अंधाधुंध बाइक चलाने वाले, 5050 गुंडों से एक साथ भिड़ जाने वाले डिटेक्टिव देखे हैं । वह सब फिल्मों में ही होता है । असली ज़िंदगी में डिटेक्टिव मेरे जैसा ही होता है । नॉर्मल दिखने वाला, जो इधर-उधर खोजबीन करके ही सबूत तलाश करता है ।”

“ओह्ह... ।” उसने एक गहरी साँस लेकर कहा ।

“जी ।” मैं मुस्कुराया ।

“तो आप उसको मुजरिम साबित होने से बचाने के लिए निकले हैं ?”

“जी, कोशिश तो पूरी रहेगी और मैं ऐसा कर भी पाऊँगा । अगर आप थोड़ा-सा सहयोग करे तो... ।” बोलते समय मैंने अपना हाव-भाव और विश्वास वैसा ही कर रखा था जैसा कि विक्रांत का होता है ।

“कहिए, मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ इसमें ?”

“पहले तो आप ये बताए, आपको तो अपनी सहेली की बेगुनाही पर यकीन है ना ।”

“कह नहीं सकती ।”

“कह नहीं सकती, मतलब ?”

“मतलब ये कि वह गुनहगार भी हो सकती है और बेकसूर भी ।”

“मतलब आप कहना चाहती है कि वह ड्रग्स सप्लाई के धंधे में है ?”

“मैंने है नहीं कहा, मैंने कहा हो भी सकती है ?”

“मतलब आपको पूरी तरह से उसकी बेगुनाही पर यकीन नहीं है । क्या आपको उसे देखकर ऐसा लगता है कि वह ड्रग्स सप्लाई कर सकती है ?”

“अब किसी के चेहरे पर थोड़े ही लिखा होता है कि वह क्या है ?”

“पर वह तो आपके साथ इतने समय से यहीं एक छत के नीचे रह रही है, फिर भी आप उस पर संदेह कर रही हैं ।”

“एक छत के नीचे रहते हैं, पर 24 घंटे साथ नहीं रहते । अब बाकी समय में वह क्या करती है, मैं कैसे कह सकती हूँ ?”

“पर वह तो एक आईटी कंपनी में अच्छे-खासे पैकेज पर काम करती है । उसके परिवार में उसका कोई और है भी नहीं, फिर उसे क्या जरूरत है ये सब करने की ?”

“ज्यादा पैसा किसे अच्छा नहीं लगता मिस्टर । और सुना है ड्रग्स के पैसे में तो अच्छी-खासी कमाई होती है ।”

“कभी तुमने उसके पास ड्रग्स देखी है ?”

“कई बार देखी है ।”

“इतनी ज्यादा, जितनी कल उसके पास बरामद हुई है ?”

“नहीं, इतनी ज्यादा तो नहीं ।”

“तो कितनी देखी ?”

“कभी 1 पुड़ी, कभी 2 पुड़ी ।”

“इतनी तो उसके पास इसलिए होती होगी क्योंकि वह ड्रग्स लेती है और इस बात को उसने स्वीकार भी किया है । वैसे इतनी ड्रग्स तो आपके पास भी रहती होगी मिस संध्या ।”

“क्या मतलब है आपका ?”

“मतलब ये कि ड्रग्स का सेवन तो आप भी करती हैं मिस संध्या ।”

“ये आपको किसने कहा ?” वह थोड़ा गुस्से में बोली ।

“मिस संध्या, ये जानना कौन-सी बड़ी बात है ? ये तो डॉली ने बताया मुझे । मानता हूँ ड्रग्स लेना बुरी बात है, पर ये उतना बड़ा गुनाह नहीं है, जितना की ड्रग्स सप्लाई करना और जिस इल्जाम में आपकी फ्रेंड गिरफ्तार है । उसने ही बताया कि वह कभी-कभी ड्रग्स लेती है और आप भी लेती हैं । आप भी परसो उस पार्टी में ड्रग्स ले रही थीं जिसमें डॉली ने ली थी । जाहिर-सी बात है, ड्रग्स की 12 पुड़िया तो आपके पास भी मिल जाएगी, अभी भी... ।” मैं उसके चेहरे के भावों को पढ़ता हुआ आगे बोला, “इसका मतलब ये तो नहीं कि आप भी ड्रग्स सप्लाई करती हैं ?”

“हाँ, शायद आप ठीक कह रहे हैं । पर ये तो आपको भी पता है, उसके रूम से ड्रग्स की 12 पुड़ी नहीं बल्कि पूरी 100 पुड़िया बरामद हुई हैं जो एक ड्रग्स यूज करने वाले के पास नहीं होती है ।”

“हाँ, ये पता है । पर डॉली का कहना है कि वह उसकी नहीं है, उसे फँसाया गया है ।”

“पर ऐसा भला कौन करेगा ?”

“करने को तो कोई भी कर सकता है । आप भी ?”

“मैं ! मेरे पास इतनी ड्रग्स कहाँ से आएगी ?”

“वहीं से, जहाँ से डॉली के पास आई होगी ।”

“क्या मतलब है आपका ?”

“मतलब ये मिस संध्या कि जिस प्रकार आपके हिसाब से डॉली ड्रग्स की 100 पुड़ियों का इंतजाम कर सकती है तो मेरे हिसाब से ये इंतजाम तो आप भी कर सकती हैं ।”

“वॉट नॉनसेन्स । मैं एक अच्छे खानदान की अच्छी जॉब करने वाली लड़की हूँ । मुझे पैसों के लिए ड्रग्स सप्लाई करने की कोई जरूरत नहीं है ।”

“आप ठीक कह रही है । आपको पैसों के लिए ड्रग्स सप्लाई करने की कोई जरूरत नहीं है । पर पहली बात आपकी यहीं बात डॉली पर भी लागू होती है । वह अभी सिर्फ 22 साल की है और 22 लाख का उसका सैलरी पैकेज है, यानी 2 लाख रुपए महीने में कुछ ही कम है । और उसके परिवार में उसके अलावा कोई और भी नहीं है । इतने पैसों में वह अकेली फुल ऐश कर सकती है । फिर उसे पैसों के लिए ड्रग्स सप्लाई जैसे खतरनाक काम को हाथ में लेने की क्या जरूरत है ? और दूसरी बात अभी थोड़ी देर पहले आपने ही कहा था कि ज्यादा पैसा किसे अच्छा नहीं लगता ?”

“कह तो आप सही रहे हैं । पर उसे फँसाने की कोशिश कौन कर सकता है ? आखिर किसी से उसकी क्या दुश्मनी है ?”

“कोई भी कर सकता है । आप भी ?”

“मैं ? मैं भला ऐसा क्यों करूँगी ?”

“क्यों, थोड़ी देर पहले तो आपने खुद ही तो कहा था कि आपको उस पर इतना गुस्सा आया था कि उसे जान से मार दूँ ।”

“वो तो मैंने यूँ ही गुस्से में बोल दिया था, पर इसका मतलब ये तो नहीं कि मैं ऐसा करूँगी । भला इतनी छोटी-सी बात के लिए भी कोई इतना बड़ा कदम उठाता है ।”

“छोटी-सी बात ! मैडम, लोग तो इससे भी छोटी बात के लिये कत्ल तक कर देते हैं । न्यूज नहीं पढ़ती क्या आप ? लोग 10 रुपए जैसी हक़ीर-सी रकम के बदले एक-दूसरे की जान ले लेते हैं । एक बार एक आदमी ने अपने दोस्त को मज़ाक में कुत्ता बोल दिया था, उस बात का बदला उसने अपने दोस्त को कुत्ते की मौत मार के लिया । सड़क पर गाड़ी छू जाने पर, गाली देने पर जैसी कई तुच्छ बातों पर जान लेना कोई बड़ी बात नहीं है । आपका गुस्सा तो इनसे कहीं बड़ी बात पर था ।”

“ओह्ह शटअप ! मैंने ऐसा कुछ नहीं किया ।”

“कल दोपहर को आप कहाँ थीं जब पुलिस ने डॉली को गिरफ्तार किया था ।”

“कल दोपहर मैं शॉपिंग के लिए हाइपर सिटी गई थी ।”

“कितने बजे ?”

“मैं लगभग 11 बजे यहाँ से गई थी और 22.30 बजे आई थी ।”

“शॉपिंग के लिए इतना टाइम लगता है क्या ? हाइपर सिटी ज्यादा दूर भी नहीं है । महीने भर की शॉपिंग में भी 1 घंटे से ज्यादा समय तो नहीं लगता ।”

“मिस्टर, जब कोई मॉल जाता है तो सिर्फ शॉपिंग के लिए ही नहीं जाता । वह वहाँ घूमता भी है, विंडो शॉपिंग भी करता है, आइसक्रीम भी खाता है, जूस भी पीता है । कहने को वह शॉपिंग के अलावा 10 दूसरे काम भी करता है, जिसमें टाइम लगता है ।”

“अच्छा, पर मिस संध्या ये सब दोपहर में कौन करता है ? आई मीन, अभी मई चल रहा है, भयंकर धूप और गर्मी में शॉपिंग, वह भी 34 घंटे तक, कुछ अजीब नहीं है ।”

“मिस्टर, लगता है आप मंगल गृह से आए हैं, जो इतना भी नहीं जानते कि मॉल में एसी चलता है जिसमें आपको नाममात्र की भी गर्मी का एहसास नहीं होता । आप सीधा बोलो ना कि आप डॉली को फँसाने के मामले में इनडाइरैक्ट मुझ पर शक कर रहे हैं । आपकी जानकारी के लिए बता दूँ, मैं हर महीने के पहले शनिवार को दोपहर के टाइम ही अपनी शॉपिंग करती हूँ । इसलिए मेरी बात सुनो और समझो । मैंने पहले भी बताया था और अब भी बता रही हूँ कि मैंने उसको फँसाने का काम नहीं किया और ना ही मुझे ऐसी कोई जरूरत थी ।”

“चलो, मान लेता हूँ, आपने ऐसा कुछ नहीं किया । पर क्या आप बता सकती हैं, ऐसा कौन कर सकता है ?”

“मैं कुछ कह नहीं सकती ।”

“माना आप कुछ कह नहीं सकती, फिर भी अपने दिमाग पर ज़ोर डालकर कुछ तो बताइये । उसकी किसी से दुश्मनी हो और उसने इस काम को अंजाम दिया हो ।”

“ये तो डॉली ही बता सकती है कि उसके किसके साथ दुश्मनी है ?”

“डॉली के हिसाब से उसका कोई दुश्मन नहीं है । वैसे कई बार इंसान को खुद को भी पता नहीं होता कि उसका दुश्मन कौन है ? वैसे जिसको ये पता नहीं होता उसका दुश्मन कौन है, उसका दुश्मन अक्सर उसका कोई दोस्त ही निकलता है । तो डॉली के केस में भी शायद ऐसा ही हो ।”

“आप अभी भी अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे । खाली-पीली घूम-फिर कर फिर से मुझ पर इल्जाम लगा रहे हैं ।”

“अरे, नहीं-नहीं । आपने ऐसा क्यों सोचा ? आप अकेली ही तो डॉली की फ्रेंड नहीं हैं ना । उसके और भी फ्रेंड हैं आपकी तरह ।”

“तो आप कहना चाहते हैं कि उसको फँसाने में उसके किसी फ्रेंड का हाथ है ।”

“हो सकता है ।”

“पर मुझे नहीं लगता उसके किसी फ्रेंड ने ऐसा किया होगा ।”

“हो सकता है किया हो । आप ये बताइये, उसकी कभी किसी फ्रेंड से या किसी और से कभी कोई लड़ाई हुई हो ।”

“नहीं, मेरी जानकारी में तो कोई नहीं है ।”

“हम्म ।” कहता हुआ मैं सोच में डूब गया । फिर थोड़ी देर बाद मैंने अपनी बात आगे बढ़ाई, “अच्छा, परसो रात को आप भी थी ना पार्टी में ?”

“हाँ !”

“ये पार्टी कहाँ पर हुई थी ?”

“डॉली ने नहीं बताया ?”

“मैं उससे पूछना भूल गया । आप बता दीजिये, क्या फर्क पड़ता है ?”

“पंजागुट्टा में रात के मुसाफिर नाम से बार कम रेस्टोरेन्ट है, वहीं पर हुई थी ।”

रात के मुसाफिर बार का नाम मैंने सुन रखा था । मेरे ऑफिस में से 23 नौजवान कलीग अक्सर वहाँ लेट नाइट डिस्को जाते थे । पर ये खबर मेरे लिए बिलकुल नई थी कि वहाँ पर रेव पार्टी भी होती है, जहाँ पर ड्रग्स भी सप्लाई की जाती थी ।

“वहाँ ऐसी पार्टी रोज होती है क्या ?”

“अब ये मुझे नहीं पता, क्योंकि मैं हर पार्टी का हिस्सा नहीं होती ।”

“तो क्या डॉली होती है ?”

“वो भी मुझे नहीं पता । वैसे हम साथ ही हर पार्टी में जाते हैं, पर कभी-कभी मेरी नाइट शिफ्ट होती है, तब वह उस समय जाती है या नहीं, इसका मुझे नहीं पता ।”

“अच्छा, तुम महीने में कितनी बार अटेण्ड करती हो पार्टी ?”

“कभी-कभी । मुश्किल से 12 बार, पिछले 6 महीनों में ऐसा मौका एक बार ही आया है जब मैं 3 बार गई हूँ ।”

“तो महीने में 12 बार ड्रग्स लेने से तुम्हारा काम चल जाता है क्या ? मैंने तो सुना है कि जो एक बार ड्रग्स ले लेता है, उसे ड्रग्स रोज चाहिए होता है ।”

“रोज तो नहीं चाहिए होता । मैं हफ्ते में 3 बार लेती हूँ । बहुत महंगा आता है, एक डोज़ 2000 रुपए की होती है । अब रोज नशे के लिए 2000 रुपए खर्च करना बहुत ही मुश्किल है । हाँ, जिसको पूरी तरह से लत लग जाती है, उन्हें रोज चाहिए होता है । अब वह लोग रईस लोग होते हैं, जो 1 क्या 24 खुराक रोज खरीदने की क्षमता रखते हैं ।”
 
‘क्या पता डॉली को फँसाने के लिए एक साथ स्टॉक ले लिया हो ?’ मन ही मन सोचते हुए पूछा, “पार्टी में तुम महीने में एक-दो बार जाती हो, फिर हफ्ते में 3 बार ड्रग्स कहाँ से आती है तुम्हारे पास ? क्या वहाँ से महीने भर के लिए तुम्हें स्टॉक मिल जाता है क्या ?”

“महीने भर का तो नहीं मिलता । ड्रग्स सप्लाई देने वाला 34 खुराक से कभी ज्यादा नहीं देता ।”

‘इस हिसाब से तो साला, ये साली कई सालों से प्लान कर रही होगी ?’

“अच्छा, फिर तुम्हें ये कहाँ से और कैसे मिलती है ?

“तुम क्यों पूछ रहे हो ? क्या तुम्हें भी चाहिए क्या ?”

“अरे, नहीं-नहीं... मुझे नहीं चाहिए ?”

“फिर क्यों पूछ रहे हैं ?”

“बस यूँ ही डॉली को बेकसूर साबित करने के लिए कोई सुराग मिल जाए इसलिए ।”

“पर मैं तुम्हें इस तरह ये सब नहीं बता सकती । ये मेरे लिए खतरनाक हो सकता है ।”

“क्यों ?”

“क्योंकि हमें वार्निंग मिली हुई है कि हमें ड्रग्स कहाँ से मिलती है, ये बात किसी को भी बताई तो ना सिर्फ हमें हमारी खुराक नहीं मिलेगी बल्कि जान से भी हाथ धोना पड़ेगा ।”

“तुम चिंता मत करो, मैं ये बात किसी से भी शेयर नहीं करूँगा । क्योंकि इसमें मेरी जान भी तो जुड़ी हुई है ।”

“पर फिर भी... ।”

“अच्छा, छोड़ो । ये बताओ, ये झुमके तुमने कहाँ से लिए ? ऐसा लगता है ऐसे मैंने पहले भी कहीं देखे हैं ।” मैंने बात बदलते हुए पूछा ।

“ये जरूर आपने डॉली के कानों में देखे होंगे । ऐसे ही सेम झुमके अंजलि के पास भी हैं । ये हम तीनों रूममेट्स ने एक साथ चार मीनार के बाजार से लिए थे ।”

“हम्म, बड़े सुंदर लग रहे हैं तुम्हारे कानों में ।” मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा ।

“थैंक यू ।” वह मुस्कुराई ।

‘सिर्फ झुमके सुंदर है, तू फिर भी चुड़ैल लग रही है ।’

“तुम लोगों की अगली पार्टी कब है ?” मैंने फिर बात बदलते हुए पूछा ।

“अभी तो कुछ भी पता नहीं है । इस शुक्रवार-शनिवार को भी हो सकती है या फिर अगले हफ्ते या फिर उसके भी अगले हफ्ते ।”

“क्या सिर्फ शुक्रवार-शनिवार को ही पार्टी होती है क्या ?”

“नहीं, ऐसा तो नहीं है । पर चूंकि वीकेंड में ज़्यादातर छुट्टी होती है तो ऐसी पार्टियाँ अक्सर शुक्रवार-शनिवार को ही होती है ।”

“अच्छा ।”

“क्या आप मुझे एक बार वहाँ ले जा सकती है ?”

“कहाँ ? पार्टी में ?”

“नहीं-नहीं, पार्टी में नहीं । पार्टी तो पता नहीं कब होगी, जबकि मेरे पास इतना टाइम नहीं है । मुझे उस होटल में जाना है, जहाँ पार्टी होती है ।”

“होटल में तो आप कभी भी जा सकते हैं, उसमें कोई मनाही थोड़े ही ना है ।”

“आप समझी नहीं । मुझे होटल में नहीं, होटल के उस खास हिस्से में जाना है जहाँ ड्रग्स मिलती है । क्या आप मुझे वहाँ ले जा सकती है ?”

“पागल हुए हो क्या ? मुझे मरवाने का इरादा है ?”

“क्यों ? क्या हुआ ?”

“मैं ऐसे ही किसी को भी वहाँ लेकर गई तो मेरे लिए मुसीबत हो सकती है । तुम डिटेक्टिव हो, वहाँ जाकर जरूर डॉली के बारे में पूछताछ करोगे । अगर ऐसा हुआ तो वह लोग या तो मुझे मार डालेंगे या फिर मुझे ड्रग्स देना बंद कर देंगे । ये मत सोचना, तुम बच जाओगे । तुम भी मारे जाओगे ।”

उसकी बात सुनकर एक पल के लिए मेरे दिमाग ने मुझसे कहा, ‘राज, ये काम वास्तव में खतरनाक हो सकता है । उसकी मदद करना तो दूर की बात है, खामखाह तेरी जान को लाले पड़ सकते हैं ।’

पर अगले ही पल दिल से दूसरी आवाज आई, “भला ऐसे कैसे भी कोई किसी को मार सकता है क्या ? देश में कानून नाम की भी कोई चीज है । कुछ नहीं होगा तुझे । तू ये सोच, अगर तू सफल हो गया तो इस फ्लैट की चाबी तेरे पास भी हो सकती है और डॉली जैसी जवान और खूबसूरत लड़की तेरी भी बाँहों में आ सकती है ।”

“क्या सोचने लग गए आप ?” तभी संध्या ने मुझसे कहा । उसकी आवाज सुनकर मैं अपने ख्यालों से बाहर आता हुआ बोला, “कुछ नहीं । बस आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ ।”

“धन्यवाद ! वह किस लिए ?”

“कम से कम आपने उस जगह के बारे में तो बताया जहाँ से आपको ड्रग्स मिलती है ।”

“ओह्ह माय गॉड ! ये मैंने क्या किया ! देखिये, आप प्रॉमिस करिए, ये बात किसी को भी नहीं बताएँगे, वरना... ।” ये कहते हुए उसके शरीर ने जैसे झुरझुरी ली ।

“आप चिंता मत कीजिये, मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगा । पर आप एक बार मुझे वहाँ पर ले चलिये । देखिये, डरिए मत । मैं सिर्फ वहाँ जाना चाहता हूँ और कुछ नहीं । यकीन मानिए, मैं वहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं पूछूँगा जो आपके लिए मुसीबत बने । अगर आप पर कोई मुसीबत आएगी तो वह मुसीबत मुझ पर भी तो आएगी ना ? फिर भला मैं अपनी जान क्यों जोखिम में डालूँगा ?”

मेरी बात सुनकर वह सोचने लग गई । आखिरकार वह बोली, “ठीक है, मैं तुम्हें वहाँ पर ले चलती हूँ, पर मेरी 2 शर्तें हैं ।”

“क्या ?”

“एक तो तुम वहाँ पर कोई ऐसी पूछताछ नहीं करोगे जो मेरे लिए मुसीबत खड़ी कर दे ।”

“ओके डन । और दूसरी ?” मैंने पूछा ।

“मेरी एक हफ्ते की ड्रग्स की खुराक तुम खरीदकर दोगे ।”

“कितनी ?”

“ज्यादा नहीं है सिर्फ 3 पुड़िया चाहिए । उतना ही मिलता है । 6 हजार में आ जाएगी ।”

‘साला, कल 4 हजार का बेफालतू का चुना लग गया था और अब ये फिर से 6 हजार का फटका । इस लड़की के चक्कर में कहीं तू कंगाल ना हो जाए राज । इतने पैसे एक अंजान लड़की की वजह से बिना मतलब के खर्च हो रहे हैं ।’ हालांकि मैं डॉली के क्रेडिट कार्ड लेकर आया था, पर इन खर्चो के लिए उसके कार्ड यूज करूँ, ये मुझे गवारा नहीं था ।

“क्या सोचने लग गए आप ? इतने तो आप अपनी फीस में से आराम से एडजस्ट कर लोगे ।”

‘हाँ साली ! मुझे तो बहुत फीस दी है तेरी सहेली ने ।’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “ठीक है । कब चल सकती हो ?”

“आज रात ।”

“कितने बजे ?”

“नौ बजे, डिनर टाइम पर ।”

“डिनर !”

“हाँ ! क्यों, रात को डिनर नहीं करते क्या ? चिंता मत करो वहाँ डिनर का ज्यादा खर्च नहीं आएगा । तीन-चार हजार रुपए में दोनों का काम हो जाएगा । अब तुम इतना तो और कर ही सकते हो ।”

‘लो अब फिर से डिनर और उसका बिल । शायद मैं शक्ल से ही इतना अहमक दिखता हूँ । जो भी मिलता है मूढ़ने की फिराक में पड़ जाता है । साला, गरीब की जोरू, गाँव भर की भौजाई ।’

“ठीक है, 9 बजे मैं तुम्हें होटल में मिलता हूँ ।”

“क्यों, तुम कहीं और से आओगे क्या ? तुम्हारा फोन नंबर मुझे दो । मैं तुम्हें फोन करूँगी । मुझे यहीं से 8.30 बजे ले चलना । मेरा कैब का खर्चा भी बच जाएगा ।”

“ठीक है, मैं तुम्हें 8 बजे पिक कर लूँगा ।” कहते हुए मैंने अपना मोबाइल नंबर उसे दिया ।

“8 बजे ! इतनी जल्दी क्या करोगे जाकर ?”

“सिर्फ डिनर ही थोड़े करना है । अब जब मेरे इतने पैसे खर्च हो रहे हैं तो कम से कम मैं वहाँ पर थोड़ी-बहुत जानकारी भी तो लूँगा जो मेरी इस केस में थोड़ी-सी हेल्प करे और डॉली को बेकसूर साबित करने में काम आए । ना-ना, चिंता मत करो । मैं ऐसा कुछ नहीं पूछूँगा जिससे कुछ गड़बड़ हो और तुम किसी मुसीबत में पड़ जाओ ।”

“पर... ।”

“देखो, मुझे वह जगह देखने का शौक तो है नहीं । ना ही मुझे ये शौक है कि वहाँ जाकर एक अंजान लड़की पर बिना फालतू डिनर पर खर्चा करूँ और उसके लिए अय्याशी का सामान लाकर दूँ । मैं वहाँ सिर्फ इसलिए जाना चाहता हूँ ताकि वहाँ कुछ ऐसा पता कर सकूँ जो इस केस में मेरी मदद कर सके । अब ये बात तो तुम भी समझ सकती हो कि मैं अगर तुम पर कुछ पैसे खर्च कर रहा हूँ तो मुझे उसका कुछ हासिल हो ।”

वह थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली, “ठीक है, पर अगर मुझ पर जरा भी आँच आई तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा ।”

“कुछ नहीं होगा यार, इतना भी मत डरो । जब पार्टीज़ में ड्रग्स लेती हो तब डर नहीं लगता कि पुलिस ने कभी पार्टी में छापा मारा और तुम्हें गिरफ्तार कर लिया तो तुम्हारे दोस्तों, परिवार में तुम्हारी क्या इज्ज़त रह जाएगी ।”

“तुम्हें क्या लगता है, इन पार्टिज के बारे में पुलिस को या प्रशासन को पता नहीं होगा । उल्टा पुलिस इन पार्टिज में सुरक्षा देती है । इसलिए मुझे पुलिस से डर नहीं लगता, बल्कि उन लोगों से डर लगता है । अगर कहीं पर जरा भी कुछ गड़बड़ हो गई तो लाश का भी पता नहीं चलने देंगे वह लोग । तुम्हें बेशक अपनी जान की फिक्र ना हो, पर मुझे अपनी जान की फिक्र है, बहुत फिक्र है ।”

‘साली, फिर से डरा रही है ।’ सोचते हुए मेरे शरीर में झुरझुरी-सी हुई ।

“देखो, तुम्हें क्या लगता है मुझे अपनी ज़िंदगी से प्यार नहीं है । मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा जिससे तुम पर जरा भी आँच आए क्योंकि तुम पर आँच आएगी तो वह आँच मुझ पर आएगी ।” कहते हुए मैं थोड़ी देर के लिए रुका । फिर आगे कहा, “देखो, अगर तुम मुझे वहाँ ले जा सकती हो तो मैंने तुम्हें अपना मोबाइल नंबर दिया ही है । मुझे शाम को 7.30 बजे तक फोन करके बता देना ।” कहते हुए मैं सोफ़े से उठ गया ।

“मैं 8 बजे फोन करती हूँ ।” उसने कहा ।

‘साली ने पानी के लिए भी नहीं पूछा । घर आए मेहमान से कोई ऐसा बर्ताव करता है क्या ?’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “ओके मिस, अब मैं चलता हूँ ।”

“सॉरी, वह मैं आपको चाय के लिए भी नहीं पूछ पाई । डॉली की गिरफ्तारी की वजह से आज काम वाली बाई भी नहीं आई तो सारे बर्तन गंदे पड़े हैं ।” जैसे वह मेरे मन की बात को समझ गई थी ।

“कोई बात नहीं । अगर आपने हाँ कह दिया तो आज रात का डिनर हम साथ करेंगे । नमस्ते ।” मैंने कहा और उसके फ्लैट से बाहर निकल आया ।

☐☐☐
 
उसके फ्लैट से निकलकर मैं अपने फ्लैट में आया और सीधा रसोई में घुस गया ।

‘साला, आज तो चाय भी नसीब नहीं हुई ।’ सोचते हुए मैं चाय बनाने में जुट गया ।

‘अब जाकर किससे मिलूँ ? उसकी सहेली और बॉयफ्रेंड तो अभी मूवी देखने गए हैं । वह 6 बजे फोन करेगी, तब ही उनसे मिल पाऊँगा । आज संडे है तो शाम को जिम भी बंद रहता है तो जिम ट्रेनर उदय भट्ट से भी नहीं मिल पाऊँगा ।” चाय पीते हुए मैं अब तक इस केस में हुए घटनाक्रम और जिन लोगों से मैं मिला उनसे हुई बातचीत पर विचार करने लगा ।

‘ये तो मानना पड़ेगा कि डॉली को फँसाने वाला इनमें से ही कोई एक है जिसके पास उसके फ्लैट की चाबी है या फिर जो फ्लैट के अंदर ही रहता है । अभी तक मैंने सिर्फ रामनाथन स्वामी और संध्या से पूछताछ की है और इन दोनों में से तो मेरा ज्यादा डाउट संध्या पर ही है । ये लड़की कल दोपहर को शॉपिंग गई थी । दोपहर में शॉपिंग की भला क्या तुक है ? क्या ये डॉली को फँसाने का काम कर सकती है ? ड्रग्स खरीदने के लिए इसके पास पैसों की कोई कमी नहीं है । हफ्ते में ड्रग्स की खुराक लेती है, पर जरूरी है क्या कि खरीदती भी 3 ही होगी । ये मैं मान सकता हूँ कि ड्रग्स बेचने वाला कभी भी 100 दिन की खुराक एक साथ नहीं दे सकता, पर हफ्ते-दस दिन की खुराक तो दे ही सकता है । हो सकता है ये हफ्ते में 7 दिन की खुराक खरीदती हो और 4 बचा लेती हो । इस तरह से 56 महीने में डॉली को फँसाने लायक तो जमा कर ही सकती है । तरीका लंबा ही सही, पर कारगर है । इस तरह से उस पर कोई शक भी नहीं कर पाएगा । पर ये उसको क्यों फँसाना चाहेगी ? आखिर इसके पीछे मकसद क्या हो सकता है ? मनपसंद कमरा नहीं मिला, इसलिए फँसाया है, ये वजह तो समझ में नहीं आ रही । भला इतनी-सी बात के लिए कोई भी इतना लंबा-चौड़ा प्लान क्यों बनाएगा ? दूसरी वजह ये हो सकती है कि ये अपने लुक को लेकर इंफीरियरिटी कॉम्प्लेक्स से ग्रसित हो, आखिर ये ठहरी एक आम दिखने वाली नेक्स्ट डोर टाइप लड़की जिसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है । जबकि इसके मुक़ाबले डॉली बहुत ब्यूटीफूल और सेक्सी, लाखों में एक लड़की, जिस पर जान न्योछावर करने वालों की कोई कमी नहीं । शायद इसलिए जलन के मारे इसने ऐसा किया हो । पर ऐसे तो अंजलि भी बहुत सुंदर है और उसका भी बॉयफ्रेंड है, फिर इसने डॉली को ही क्यों फँसाया होगा ? ये रीज़न भी नहीं हो सकता डॉली को फँसाने का । कम से कम मुझे नहीं लगता कि इसने ही उसे फँसाया होगा । तो फिर उसको फँसाने वाला कौन हो सकता है ?’ मैं सोचने लगा था, “वो तो कोई भी हो सकता है । अभी तूने कितनों से पूछताछ की है ? सिर्फ एक ये लड़की और दूसरा वह खड़ूस बुड्ढा । अभी तो डॉली की दूसरी सहेली बाकी है, उसका एक्स-बॉयफ्रेंड बाकी है और वह जिम ट्रेनर बाकी है । वैसे ज्यादा चान्स तो उसकी सहेली और एक्स-बॉयफ्रेंड के लग रहे हैं । उनकी फ्रेंड हिरासत में है और वह दोनों मूवी देखने गए हुए हैं । भला ऐसा भी कोई करता है ? एक बार मूवी देखकर वापस आ जाए तो उनसे बात करता हूँ ।’ सोचते-सोचते मैं वही सोफ़े पर पसर गया था और मुझे झपकी आ गई । मेरी नींद खुली मोबाइल के लगातार बजती हुई घंटी से । देखा तो पाया वाइफ़ का फोन था । मैंने पहले टाइम देखा, 6.15 बज चुके थे फिर मैंने कॉल उठाया ।

“हैलो, क्या कर रहे थे ?”

“कुछ नहीं यार, यूँ ही सोफ़े पर आराम कर रहा था । कब आँख लग गई, पता भी नहीं चला ।”

“आँख नींद में ही लगी थी ना, किसी और से तो नजरे नहीं मिला रहे थे ?”

“अरे नहीं यार, मेरी ऐसी किस्मत कहाँ ।”

“क्या कहा ?”

“कुछ नहीं, कुछ नहीं ।”

“पतिदेव ! ध्यान रखना, मैं तुम पर भरोसा करती हूँ । जिस दिन मेरा भरोसा टूटा, उस दिन तुम्हारी हड्डियाँ भी साथ में टूटेगी ।”

“क्या यार, तुम भी ना । बिना फालतू शक कर रही हो । अगर इतना ही शक कर रही हो तो आ जाओ वापस ।” मैं चिढ़कर बोला ।

“अरे पतिदेव, आप तो नाराज हो गए । मैं तो मज़ाक कर रही थी । अच्छा, चाय पी ली थी ?”

“हाँ यार, 5 बजे ली थी । अब तो ऑफिस जाऊँगा, 8 बजे खाना खाना है ।”

“ओके । तो अब बाकी टाइम, टाइम पास के लिए क्या करोगे ? वही मेरी सौतनों के साथ ?”

“और क्या करूँगा । बस एक यही तो सहारा है मेरे अकेलेपन का ।” तभी मोबाइल पर दूसरी कॉल आने लगी । देखा तो पाया अंजलि का कॉल था । शायद वह मूवी से फ्री हो गई थी ।

“जानती हूँ, जानती हूँ । अच्छा, मैं फोन रखती हूँ । रात के खाने की तैयारी करनी है ।”

“ओके, ठीक है ।”

“ओके, बाय जानू !”

“बाय स्वीटहार्ट !” कहकर मैंने जल्दी से फोन काटा और अंजलि को वापस फोन मिलाया ।

“हैलो ।”

“हैलो राज जी, मैं अंजलि बोल रही हूँ । मैं और राजीव अभी मूवी से फ्री हो गए हैं । अगर आप हमसे मिलना चाहते हैं तो अभी 8 बजे तक हम फॉरम मॉल में हैं । आप आकर मिल सकते हैं ।” कहकर उसने फोन काट दिया ।

उसके फोन काटते ही मैं फटाफट सोफ़े से उठा और तुरंत तैयार होने लग गया । 15 मिनट के अंदर मैं फॉरम मॉल के अंदर था । फॉरम मॉल मेरी कॉलोनी से 2 किलोमीटर की दूरी पर था । मॉल नया खुला था, पर लोकप्रियता के मामले में उसने आसपास के 5 किलोमीटर के एरिया में पहले से स्थित सभी माल्स को पीछे छोड़ दिया था । शाम के समय वहाँ बहुत भीड़ रहती थी और वीकेंड्स में तो पाँव रखने की जगह भी नहीं मिलती थी ।

मॉल पहुँचकर मैंने अंजलि को फोन मिलाया तो पता चला वह मॉल के टॉप फ्लोर पर स्थित फूड कोर्ट के केएफ़सी ब्लॉक में थी । मैं वहाँ पहुँचा और फिर से फोन मिलाया । फोन रिंग जाने लगी । मैंने देखा एक लड़की मेरी तरफ हाथ हिला रही थी जो कि अंजलि थी । मैं उनके पास गया ।

“अंजलि, राजीव ?” मैंने पूछा ।

“या ।”

“हैलो, माइसेल्फ राज ।” मैंने अपना हाथ राजीव की तरफ बढ़ाते हुए कहा ।

“या, वी नो देट ।” उसने हाथ मिलाया ।

“तो बोलिए, आपको क्या बात करनी है ?” अंजलि ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा ।

“यहाँ तो बहुत भीड़ है ।” मैंने अंजलि का बढ़ा हुआ हाथ अपने हाथों में थामते हुए कहा ।

“तो ?”

“क्या हम कहीं और नहीं चल सकते, जहाँ पर आराम से बात कर सके ।”

“ठीक है, पर पहले मेरा हाथ तो छोड़िए ।”

“ऊप्स सॉरी ।” मैंने उसका हाथ छोड़ते हुए कहा । मुझे ध्यान ही नहीं रहा था कि अभी तक उसका हाथ मेरे हाथों में ही है ।

“चलिये, वह सामने दिलरुबा बार है, वहाँ चलते हैं । अभी 7 भी नहीं बजे है, तो उम्मीद है वहाँ पर भीड़ नहीं होगी और हम आराम से बात कर सकते हैं ।”

“ओके, ठीक है ।”

हम बार में गए । जैसा कि अंजलि ने कहा था, वहाँ अभी भीड़ ना के बराबर थी । नॉर्मली बार जैसी जगह रात को 8 बजे के बाद ही आबाद होती है । हम एक कॉर्नर की सीट पर जाकर बैठ गए ।

“हाँ जी, अब बोलिए । आपको क्या बात करनी है ?” बैठते ही अंजलि ने सवाल किया ।

‘लगता है साला लड़का एकदम सूतिया है । जब से मिले हैं सिर्फ लड़की ही बोली जा रही है ।’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “जी, जैसा कि आपको फोन पर कहा था, मेरा नाम राज है और मैं डॉली का फ्रेंड हूँ और उसी के बारे में आपसे बात करनी थी ।”

“पर आप तो शायद हमारे पड़ोस में ही रहते हैं और मैंने तो कभी आपको डॉली के साथ नहीं देखा ।”

“जी, आपने सही कहा । मैं आपका पड़ोसी ही हूँ और रही बात डॉली से दोस्ती की, तो वह बस अभी-अभी हुई है ।”

“अभी-अभी !” उसने चौंकते हुए कहा ।

“जी, अभी-अभी... ।” मैं मुस्कुराया ।

“पर... ।” अभी वह और कुछ कहने जा ही रही थी कि तभी वहाँ ऑर्डर लेने के लिए वेटर आ गया ।

“आप भी कुछ लेंगे ?” उसने मुझसे पूछा ।

‘साली, ऐसे कौन पूछता है लेने के लिए । आप क्या लेंगे कि आप भी कुछ लेंगे ?’

“जी नहीं, दरअसल अभी मुझे ऑफिस जाना है तो... ।”

“फिर भी, कुछ तो ।”

“जी, आप इतनी जिद कर रही है तो फिर एक कोल्डड्रिंक बोल दीजिये ।”

“ओके । 2 मीडियम वोदका विथ सोडा और साब के लिए स्प्राइट ।”

वेटर ऑर्डर लेकर चला गया ।

“हाँ, तो आप डॉली के दोस्त है ?” वेटर के जाने के बाद अंजलि ने मुझसे पूछा ।

“जी, अभी थोड़ी देर पहले भी बताया था । क्यों, आपको कोई शक है क्या ?” मैं मुस्कुरा उठा ।

“जी, शक तो है । क्योंकि थोड़ी देर पहले ही मैंने भी आपको बताया था कि आप हमारे पड़ोसी हैं और जहाँ तक मुझे पता है कि आप शादीशुदा भी हैं ।”

“तो क्या एक शादीशुदा आदमी किसी सिंगल लड़की का फ्रेंड नहीं हो सकता ?”

“अरे नहीं, हो सकता है ! पर वह फ्रेंड कभी तो कहीं तो मिला हो । किसी पार्टी में, किसी मॉल में ।”

“लगता है आप भूल गई कि मैंने ये भी कहा था कि मैं और डॉली हाल-फिलहाल ही दोस्त बने हैं और अभी हमें कहीं साथ जाने का मौका नहीं मिल पाया ।”

“चलो, मान लिया कि आप डॉली के दोस्त हैं । पर आप ये सब तो बताने के लिए हमसे मिलने से रहे । क्यों, सही कहा ना मैंने ?”

“जी, बिलकुल । दरअसल ये तो आप जानती हैं कि डॉली को पुलिस ने गिरफ्तार किया है ।”

“हाँ, पता है ।”

“और ये भी जानती हैं कि क्यों किया है ?”

“जी ! पर ये सब बातें हमें बताने से क्या फायदा ?”

“तो डॉली का कहना है कि उसने कुछ नहीं किया और वह बेकसूर है । बस इसलिए मैं उसे बेकसूर साबित करने के लिए निकला हूँ ।”

“आप ! पर ये काम तो पुलिस का है ।”

“जी, सही कहा आपने । ये काम पुलिस का ही है । पर चूंकि पुलिस को उसकी बेगुनाही का कोई यकीन नहीं है, इसलिए ये काम मैं करने के लिए निकला हूँ ।”

“आप उसके वकील है ?”

“जी, सही पहचाना आपने ।”

“ओह्ह, आप वकील है ! मुझे तो लगता था आप किसी आई टी कंपनी में काम करते हैं ।”

“अंजलि जी, मुंबई में आई टी कंपनी के अलावा और काम करने वाले लोग भी रहते हैं ।”

“जी रहते तो है, पर अभी आपने कहा कि आपको ऑफिस जाना है तो उससे मैंने अभी भी यही समझा कि आप अपनी कंपनी में नाइट शिफ्ट जा रहे होंगे । वैसे भी रात को वकील का ऑफिस खुलने की क्या तुक है ?”

“कल डॉली की जमानत के लिए अप्लाई करना है तो बस उसी सिलसिले में थोड़ी-सी कागजी कार्यवाही पूरी करनी है, जिसके लिए मैं ऑफिस जा रहा था ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा । आखिर इतने नॉवेल पढ़ने और मूवीज देखना कब काम आएगा ?

“ओह्ह ।” उसने गहरी साँस लेकर कहा, “एनीवे, छोड़िए ये सब । ये बताइये, आप हमसे क्या चाहते हैं ?”

मैं कुछ कहता, तभी वहाँ वेटर ऑर्डर लेकर आया । उसने उन दोनों के वोदका के पैग बनाए और स्प्राइट की बोटल खोलकर मेरे सामने रख दी । स्नेक्स कंपलिमेंटरी आइटम था ।

‘साला, ऑफिस नहीं जाना होता तो मैं भी दारू के मजे ले रहा होता । पहली बार तो फ्री में मिलने वाली थी ।

“हाँ, तो हम कहाँ थे ?” स्प्राइट का एक घूंट लेते हुए मैंने कहा ।

“जी, डॉली के केस में आप हमसे क्या चाहते हैं ?”

“जी, मुझे डॉली को बेकसूर साबित करना है और इसके लिए मुझे आपकी हेल्प चाहिए । आपकी भी मिस्टर राजीव ।” मैंने राजीव से कहा ।

“जी, जरूर... ।” इतनी देर से हम दोनों की बातें सुन रहे राजीव ने हड़बड़ाकर कहा ।

“लगता है आप कम बोलते हैं या फिर अंजलि जी आपको बोलने का मौका नहीं देती ?”

मेरी बात सुनकर एक पल के लिए उसके चेहरे पर गुस्से की एक हल्की-सी रेखा आई, पर अगले ही पल वह खिसियाये-सा हँसते हुए बोला , “जी, ऐसी तो कोई बात नहीं है । आप इतनी देर से अंजलि से ही सबकुछ पूछे जा रहे थे तो मैंने बीच में बोलना सही नहीं समझा ।”

“चलिये, कोई बात नहीं । अब आपसे बात शुरू करते हैं ।”

“पूछिये, क्या पूछना चाहते हैं ?”

“सबसे पहले तो ये बताइये, आपको अपनी फ्रेंड डॉली की बेगुनाही का यकीन है या नहीं ?”

“जी, मुझे यकीन है वह निर्दोष है ।” इससे पहले कि वह कुछ जवाब देता, अंजलि ने जवाब दिया ।

“और आपको राजीव जी ?”

“जी, मुझे भी ।” वह हड़बड़ा उठा ।

“क्या मुझे भी ?”

“मुझे भी यकीन है कि वह बेकसूर है ।”

“देट्स गुड । अगर आप दोनों को लगता है कि वह बेकसूर है तो इसका मतलब है उसे जरूर किसी ने फँसाया है ।”

“मतलब ?”

“मतलब ये कि फिर जो ड्रग्स उसके रूम से बरामद हुई है, वह जरूर किसी और ने उसे फँसाने के लिए वहाँ पर रखी होगी । क्यों राजीव जी, सही कहा ना मैंने ?”

“जी, अब लगता तो है ऐसा ही है ।”

“अच्छा, जब ऐसा लगता है तो ये बताओ, ऐसा कौन कर सकता है ?”

“क्या कौन कर सकता है ?”

“उसके फ्लैट में ड्रग्स कौन रख सकता है ?”

“कौन रख सकता है ?” उसने उसी अंदाज में मेरी बात को दोहराया ।

“भाई मेरे ! हर बार मेरी ही बात को क्यों दोहरा रहे हो ? मैं पूछा रहा हूँ कि डॉली के रूम में ड्रग्स कौन रख सकता है ?”

“अब ये हमें क्या पता मिस्टर राज ! राज, यहीं नाम बताया था ना आपने ?” अंजलि ने बीच में जवाब दिया ।

“जी, यहीं नाम बताया था । एनीवे, आपको ये तो नहीं पता कि वह ड्रग्स किसने रखी, पर मेरी इस बात से तो सहमत होगी कि ड्रग्स वहाँ पर वहीं व्यक्ति रख सकता है, जिसको उसके रूम तक चुपचाप जाने की सुविधा हासिल हो । आई मीन, जिसके पास आपके फ्लैट की चाबी हो । और मेरी जानकारी के हिसाब से ये सुविधा सबसे ज्यादा आपको हासिल है । आपको… ।” मैंने आपको शब्द पर ज़ोर देकर कहा ।

“तो उससे क्या ? मेरे अलावा फ्लैट में संध्या भी रहती है और इसके अलावा डॉली ने फ्लैट की चाबी कुछ अन्य लोगों को भी दे रखी है ।”

“जानता हूँ । डॉली ने फ्लैट की चाबी रामनाथन जी और उदय भट्ट को भी दी हुई है । इसके अलावा चाबी तो आपके पास भी है मिस्टर राजीव ।”

“जी, है तो सही ।” राजीव के बजाय डॉली ने ही जवाब दिया ।

“कमाल है, मैं राजीव से सवाल कर रहा हूँ और जवाब आप दे रही है ।”

“आपको कोई प्रॉब्लम है मेरे जवाब देने से ?” उसने पूछा ।

“नहीं-नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं ।” मैंने हड़बड़ाकर कहा । फिर आगे मुस्कराते हुए बोला, “ये तो वह लोग है जिनको डॉली ने फ्लैट की चाबी दी है । आपने भी किसी को फ्लैट की चाबी दी है मिस अंजलि ?”

“नहीं, मैं अंजलि जैसी नहीं हूँ ।”

“अंजलि जैसी नहीं हूँ, मतलब क्या है आपका ?”

“कुछ नहीं । आप ये बताओ, ये सब बातें हमसे करने का मतलब क्या है ? क्या आप हम पर शक कर रहे हैं ?”

“शक तो खैर मैं उन सभी लोगों पर कर रहा हूँ जिसके पास भी फ्लैट की चाबी है ।”

“पर मिस्टर, सिर्फ फ्लैट की चाबी से ही क्या हासिल होता है ? उस चाबी के अलावा उसके रूम की भी चाभी होनी चाहिए ।”

“क्यों, उसकी क्या जरूरत है ?”

“आप वकील हो क्या ?”

“क्यों, क्या हुआ ?”

“हुआ ये मिस्टर कि फ्लैट की चाबी से कोई भी आदमी सिर्फ हॉल तक ही अपनी पहुँच बना सकता है । किसी भी कमरे में जाने के लिए उस कमरे की चाबी भी होनी चाहिए । जैसे मेरे कमरे में किसी को जाना हो तो उसके पास हमारे फ्लैट की चाबी के अलावा मेरे कमरे की भी चाभी होनी चाहिए ।”

“चलो, मान ली आपकी बात कि आपके रूम में जाने के लिए आपके रूम की चाभी होनी चाहिए । अब मुझे ये बताओ कि अगर आप अपने रूम में पहले से ही हो तो क्या हमेशा अपना रूम अंदर से लॉक रखती हो और किसी को अंदर आने के लिए चाभी की जरूरत पड़ेगी ।”

“नहीं, ऐसा तो नहीं है ।” वह हड़बड़ाकर बोली ।

“तो फिर कैसा है ?”

“नॉर्मली जब मैं रूम में होती हूँ तो अपना रूम अंदर से खुला ही रखती हूँ ।”

“सो देयर यू आर ।”

“पर मिस्टर, रात को सोते समय और बाथ लेते समय मैं रूम अंदर से बंद करती हूँ ।”

“उससे क्या फर्क पड़ता है ? डॉली भी उस समय फ्लैट के अंदर अपने रूम में ही थी और उसका रूम अंदर से लॉक नहीं था ।”

“आपको कैसे पता, उसका रूम अंदर से लॉक था या नहीं ? क्या डॉली ने इसके बारे में बताया ।”

“नहीं, पर इतना कॉमन सेंस लगाया जा सकता है कि उसका रूम अंदर से खुला था, इसलिए किसी को वह ड्रग्स रखने का मौका मिला और उसने उसको फँसाया ।”

“पर वह कौन हो सकता है और उसे कैसे पता चला कि डॉली का रूम अंदर से खुला होगा ?”

“वो कोई भी हो सकता है । आप भी हो सकती हैं और मिस्टर राजीव भी हो सकते हैं । ना-ना, बीच में मत बोलिए । मैं सिर्फ अपनी एक राय बता रहा हूँ । बाकी वह वास्तव में कौन है ये जाँच का विषय है और वह मैं कर रहा हूँ । और इसके लिए ही मैं आपसे यहाँ कुछ सवाल पूछने के लिए मौजूद हूँ ।”

“इतना कुछ तो पूछ चुके और भी कुछ पूछना बाकी है ?”

“अभी तो पूछना शुरू ही किया है मिस ।”

“ओके पूछो, क्या पूछना चाहते हो ?”

“कल दोपहर को आप लोग कहाँ थे ?”

“कल दोपहर भी हम लोग मूवी देखने यहीं पीवीआर में आए थे ।”

“कल भी आप लोग मूवी... ?”

“क्यों, आपको कोई एतराज है ?”

“नहीं-नहीं, बिलकुल नहीं । और राजीव जी, आप कहाँ थे कल दोपहर ?”

राजीव ने चौंककर मेरी तरफ देखा ।

“लगता है, आपने मेरी बार पूरी तरह से सुनी नहीं । मैंने ये कहा था कि कल भी हम लोग, आई रिपीट हम लोग मीन्स हम दोनों मूवी देखने आए थे ।” राजीव के बजाय अंजलि ने ही जवाब दिया ।

“ओह्ह हाँ । अच्छा तो कल दोपहर आप पूरे टाइम सिनेमा हॉल में ही मूवी देख रहे थे । दोनों साथ ही थे ।”

“नहीं, पूरे टाइम तो नहीं । ब्रेक में जब बाथरूम गए थे, तब अलग होना पड़ा था ।” अंजलि ने व्यंग्य से कहा ।

“हाहाहा ।” मैं हँस पड़ा ।

“लगता है, आप हम लोगों पर शक कर रहे हैं कि डॉली को हम लोगों ने ही फँसाया है, तभी उल्टे सीधे सवाल कर रहे हैं ।”

“शक करना तो मेरा काम है अंजलि जी ।”

“चलिये, मान लिया । अब ये बताइये, हमें डॉली को फँसाने से क्या फायदा ? मेरी उससे क्या दुश्मनी है ?”

“दुश्मनी तो है, आखिर तुमसे पहले राजीव उसका बॉयफ्रेंड था और अब वह तुम्हारा है ।”

“तुम वास्तव में वकील ही हो ना ?”

“हाँ । क्यों, अब क्या हो गया ?”

“हुआ ये कि अगर ये वजह होती डॉली से मेरी दुश्मनी की, तो फिर डॉली को मुझसे बदला लेना चाहिए था, मुझे डॉली से नहीं । समझे ।”

“ओह्ह हाँ, ये तो आप सही बोल रही है । एनीवे, मैंने सिर्फ एक बात कही है । आपके बदला लेने की कोई दूसरी वजह भी हो सकती है ।”

“क्या वजह हो सकती है ?”

“वो तो खैर मुझे अभी क्या पता ।”

“तो जब पता चले तब कुछ बोलना । बिना फालतू अभी मूड खराब मत करो ।”

“अच्छा राजीव जी, आपने डॉली से ब्रेकअप क्यों किया ? इसका जवाब आप ही देंगे या ये भी अंजलि ही बताएँगी ?” कहते हुए मैं मुस्कुराया ।

“जी ।” वह हड़बड़ाया फिर अंजलि की तरफ देखकर बोला, “मैंने उससे ब्रेकअप नहीं किया बल्कि उसने मुझसे ब्रेकअप किया था ।” यह सुनकर अंजलि की आँखों में ऐसे भाव आए जैसे वह राजीव को बताने से मना कर रही हो, पर वह मेरी निगाहों से बच ना सके थे ।

“क्यों ?

“क्योंकि वह पिछले कई दिनों से उदय में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट ले रही थी, जो मुझे पसंद नहीं था ।”

“उदय ! वही जिम वाला ?”

“हाँ, वही ।”

“फिर क्या हुआ ?”

“फिर धीरे-धीरे वह मुझसे दूर रहने लगी थी और एक दिन इस बात को लेकर हममें झगड़ा भी हुआ था तो गुस्से में उसने मुझे ये बोलकर कि उसे अब मेरी कोई जरूरत नहीं है, मेरी दी हुई अंगूठी वापस लौटा दी, जो मैंने उसे प्रपोज करते हुए दी थी । तब से वह पूरी तरह से उदय के साथ ही सेट हो गई थी ।”

“तब आपको गुस्सा तो बहुत आया होगा ।”

“तुम कुछ नहीं बोलोगे राजीव !”

“हाँ, आया तो था ।”

“फिर तुमने क्या किया ?”

“कुछ भी तो नहीं । मैं उसका कुछ भी तो नहीं कर सकता था । उससे बहुत प्यार करता था ।”
 
“फिर... ।”

“उसके बाद मैंने राजीव को प्रपोज किया था । तब से राजीव मेरे ही साथ है ।” अंजलि ने जवाब दिया ।

“हाँ ! अगर अंजलि का साथ नहीं मिला होता तो पता नहीं मैं क्या कर जाता ।”

“अच्छा, मतलब अब तुम्हारे दिल में डॉली को लेकर कोई बुरा विचार नहीं है ।”

“नहीं है, अब मैं उसके बारे में सोचता भी नहीं हूँ ।”

“पर परसो पार्टी में तो तुम डॉली के साथ डांस कर रहे थे ।”

“अब प्यार खत्म हुआ है इसका ये मतलब नहीं कि हम दोस्त भी नहीं है । और दोस्तों में ये सब तो चलता है ।”

“अच्छा, तुम भी ड्रग्स लेते हो क्या ?”

“पहले लेता था, अब नहीं लेता । 3 महीने तक सेंटर रहा था । अंजलि ने उस दौरान मेरी मदद की थी ड्रग्स से उबरने में ।”

“और तुम अंजलि ।”

“नहीं ।”

“कभी नहीं ली ?”

“12 बार ली है बस, पर जब कभी रेगुलर ड्रग्स लेने वालों की हालत देखती हूँ तो तौबा कर ली ।”

“परसो पार्टी में किस-किस ने ड्रग्स ली थी ।”

“नशा तो हर कोई कर रहा था, अब ड्रग्स किस-किस ने ली थी, ये कहना मुश्किल है ।”

“कौन-कौन था पार्टी में ?”

“पार्टी में तो लगभग 100 से ऊपर लोग थे ।”

“मेरा मतलब है, तुम लोगों का करीबी । खासतौर पर डॉली का ।”

“एक तो उदय ही था । और हम तीन रूममेट्स और हाँ, श्री भी थी ।”

“श्री ! वह अपने ब्लॉक प्रतिनिधि की बेटी ?”

“हाँ, वही ।”

“उसने भी ड्रग्स ली थी क्या ?”

“अब ये पता नहीं है ।”

“और कोई जरूरी बात जो आप बताना चाहे ।” मैंने मोबाइल निकाला और टाइम देखते हुए कहा । 7:30 हो रहे थे और मुझे 8 बजे संध्या के साथ रात के मुसाफिर होटल में जाना था ।

“आपको कुछ और पूछना हो ?”

“आपके कान में एक ही झुमका नजर आ रहा है । दूसरा कहाँ गया ?”

“मेरे झुमके थोड़े ढीले हैं । एक खुल गया था तो उसे पर्स में रख लिया था ।” वह अपने पर्स से झुमका निकालते हुए बोली, “हर बार सोचती हूँ कि इन्हें ठीक करवा लूँ, पर टाइम ही नहीं मिलता ।”

“टाइम तो बहुत है आपके पास, बस रोज मूवी ना देखो तो ।”

“मेरे रोज मूवी देखने से आपको कोई प्रॉब्लम है क्या ?”

“जी नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं है । अच्छा, मैं चलता हूँ । अगर मुझे फिर जरूरत महसूस हुई तो आपसे फिर कॉन्टैक्ट करूँगा । जाते-जाते एक बात फिर से पूछना चाहूँगा ।”

“क्या ?”

“कल आप दोनों पूरे समय एक साथ ही थे ना मूवी देखते टाइम ?”

“हम पर शक करना बंद करो । अगर आप वास्तव में वकील हैं तो आपको समझना चाहिए कि डॉली को फँसाने के लिए ड्रग्स वही रख सकता है, जिसके पास फ्लैट के साथ-साथ उसके रूम की भी चाभी हो । दूसरा जिसके पास कोई तगड़ा मोटिव हो । मेरे पास उसके रूम की चाभी नहीं है, ना ही हमारे पास कोई मोटिव है । फिर जरूरी नहीं कि किसी ने ड्रग्स कल ही उसके कमरे में रखी हो । वह परसो भी रख सकता है, 2 दिन पहले भी ।”

“जी, आपने शायद सही कहा । नमस्ते ।” मैंने कहा और उन्हें छोड़कर वापस रवाना हो गया ।

☐☐☐
 
रात के 8.30 बज चुके थे और मैं अपने फ्लैट में बड़ी ही बेसब्री से संध्या के फोन का इंतजार कर रहा था । मैंने जीन्स और टीशर्ट पहन रखी थी । इसी बीच मेरी वाइफ़ का फोन आया था और उसे मैंने यही बताया था कि मैं ऑफिस में पहुँच चुका हूँ । 9 बजे ऑफिस में कैंटीन बंद हो जानी थी ।

‘आखिर कितना इंतजार करूँ । 8 बजे के लिए कहा था और अब 8.30 बज रहे हैं । चलो, शायद उसका फोन अब नहीं आने का ।’ सोचते हुए मैंने अपना लैपटॉप बैग उठाया और ऑफिस जाने के लिए निकलने लगा । जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो पाया सामने संध्या खड़ी थी ।

“आप कहीं जा रहे हैं ?” उसने मेरे कंधे पर लैपटॉप बैग देखा तो पूछा ।

“हाँ, वह ऑफिस जा रहा था ।” मेरे मुँह से निकला ।

“ऑफिस ? आप तो एक डिटेक्टिव है ना ?”

‘उफ़्फ़, ये मैं क्या कहने जा रहा था ।’ सोचते हुए मैंने बात को संभालते हुए कहा, “क्यों मैडम ? क्या डिटेक्टिव रोड पर काम करते हैं ? वह सदा फील्ड वर्क ही करते हैं क्या ? उनका खुद का भी ऑफिस होता है मोहतरमा ।”

“हो सकता है, पर नाइट में !”

“हाँ ! डॉली के केस के कुछ कागजात ऑफिस में ही रह गए थे, उनको स्टडी करना था ।”

“पर आज तो आप मेरे साथ रात के मुसाफिर में चलने वाले थे ?”

“चलने वाला तो था, पर आपका फोन नहीं आया तो मुझे लगा शायद आप कहीं और व्यस्त होगी, इसलिए मैं ऑफिस के लिए तैयार हो गया था ।”

“ओह्ह, वह क्या है कि मैंने बहुत सोचा, बहुत सोचा, फिर सोचा कि आपको फोन करने की बजाय सीधा आपके फ्लैट में ही आ जाती हूँ ।” कहते हुए वह मुस्कराई ।

“तो आप मुझे वहाँ ले जा रही हैं ?”

“तो और मैं यहाँ आई किस लिए हूँ ?”

“ओह्ह, ठीक है ! चलिये, फिर लेट हो रहे हैं ।” मैंने मोबाइल में समय देखते हुए कहा ।

“आपको कहीं और भी जाना है क्या जो लेट हो रहे हैं ?”

“अभी आपको बताया तो था कि ऑफिस भी जाना है जो पंजागुट्टा के बिलकुल विपरीत तरफ है ।”

“कहाँ पर है ?”

“लिंगमपल्ली । अब चलिये, क्या सारी बातें यहीं पर करने का इरादा है ?”

“ओके ! ठीक है, चलो ।”

☐☐☐

“आप अपना लैपटॉप बैग आगे टाँग सकते हैं ?” अभी हमें कॉलोनी से बाइक पर सवार होकर पंजागुट्टा की तरफ रवाना हुए 23 मिनट ही हुए थे कि संध्या एकदम से बोल उठी । हम दोनों मेरी बाइक पर क्रॉस लेग बैठे हुए थे और मेरे कंधे पर लटका लैपटॉप बैग हम दोनों के मध्य में था ।

“क्यों क्या हुआ ?”

“ये आपका बैग मुझे बहुत चुभ रहा है ।”

“ओके, ठीक है ।” कहते हुए मैंने अपनी बाइक साइड में रोकी और अपने बैग को आगे की तरफ कर लिया । मैंने बाइक स्टार्ट की । इस बार वह मेरे पीछे इस तरह से चिपककर बैठी कि मैं त्राहिमाम-त्राहिमाम करने लगा था । उसके बिहेव से लग रहा था कि कोई बॉयफ्रेंड नहीं होने की वजह से वह अपने शरीर की आग को इसी तरह रगड़कर शांत करने की कोशिश कर रही थी । आज वह आई भी अपनी नजर में बहुत बन-ठन के थी । जितनी टाइट नीली जीन्स पहन रखी थी, उतना ही खुला उसने नीले रंग का टॉप पहन रखा था, जो उसके शरीर पर ऐसा लग रहा था जैसे किसी भैंस के चारों ओर नीला कपड़ा लपेट दिया हो ।

‘ये भी वजह हो सकती है डॉली से इसके खार खाये होने की । जहाँ डॉली बहुत सुंदर थी और उसके आगे-पीछे घूमने वालों की कोई कमी नहीं थी, वहीं पर इसको अपना बनाने वाला शायद ही कोई होगा । हो सकता है इसलिए जलन के मारे इसी ने डॉली को फँसाया हो ।’ मैं बाइक चलाते हुए सोच रहा था । अगर कोई और वक़्त होता तो शायद मैं उसकी तरफ देखना भी पसंद नहीं करता, पर एक परीजादा चेहरे को पाने के ख्वाब में मैं उसे बर्दाश्त कर रहा था । रविवार होने की वजह से सड़कों पर वह ट्रैफिक नहीं था जो अनुमान मुंबई में अन्य दिनों में देखने को मिलता था इसलिए उसके टॉर्चर से मुक्त होने में मुझे सिर्फ 10 मिनट लगे थे । 10 मिनट में हम पंजागुट्टा में रात के मुसाफिर रेस्टोरेन्ट के सामने थे ।

बाइक पार्क करने के बाद मैं और संध्या रेस्टोरेन्ट के अंदर गए ।

“अब ?”

“उस तरफ ।” उसने एक दरवाजे की तरफ इशारा किया और चल पड़ी । मैंने उसका अनुसरण किया । दरवाजे पर एक सूट-बूट पहने हुए आदमी खड़ा था, जिसे देखकर ये कहना मुश्किल था कि वह कोई दरबान है या कोई और ।

“जन्नत फॉर हेवन ।” दरवाजे पर पहुँचकर उसने कहा ।

“वेट ।” उसने अपना मोबाइल निकाला और कुछ देखने लगा । कुछ समय बाद उसने मेरी तरफ इशारा करते हुए पूछा, “ही ?”

“जन्नत का साथी ।” संध्या ने जवाब दिया ।

उसने दरवाजा खोला और अंदर जाने की तरफ इशारा किया, “जाइए ।”

अंदर लगभग 10 फूट की एक गैलरी थी जो 0 वाट के 45 लाल-लाल बल्ब से रोशन थी । वह रोशनी इतनी ही थी कि बड़ी मुश्किल से कुछ दिखाई दे रहा था ।

हम लोग गैलरी के अंत तक पहुँचे । आगे दीवार थी और रास्ता बंद था । संध्या ने ना जाने दीवार में क्या किया कि दीवार एक तरफ हटने लगी ।

“यहाँ हर कोई नहीं जा सकता । सिर्फ वहीं जा सकता है जो यहाँ का रेगुलर विजिटर हो ।”

“हम्म, समझा ।” मैंने कहा । हमने अंदर प्रवेश किया । अंदर एक रेस्टोरेन्ट कम बार था जो इस समय लगभग आधा भरा हुआ था ।

“तुम तो बोल रही थी पार्टी कभी-कभी होती है, फिर इतने लोग ?”

“तुम्हें ये पार्टी नजर आ रही है क्या ? ये लोग सिर्फ खाना खा रहे हैं या ड्रिंक कर रहे हैं । अभी यहाँ पर सिर्फ खाना और शराब मिलती है । ड्रग्स सिर्फ कस्टमर को विशेष काउंटर पर मिलती है । जबकि पार्टी में हर कोई ड्रग्स के नशे में चूर होता है ।”

“रेगुलर खाने और शराब के लिए भी इतनी सिक्योरिटी से आना पड़ता है क्या ?”

“मैंने कहा कि ड्रग्स भी उपलब्ध है, वह विशेष काउंटर पर मिलती है जो बाहर ले जाने के लिए होती है । पर यहाँ डाइनिंग हॉल में पार्टी के अलावा ड्रग्स लेना मना है ।”

“अच्छा, समझा ।”

“परसो पार्टी यहीं हुई थी ?”

“हाँ ।”

“उस दिन स्टाफ में से कौन-कौन था यहाँ पर ?”

“क्यों, तुम्हें अपनी पूछताछ करनी है क्या ? कुछ ऐसा मत करना कि मैं बिना फालतू मुसीबत में पड़ जाऊँ ।”

“चिंता मत करो, सिर्फ पार्टी के बारे में पूछूँगा ताकि डॉली को बेकसूर साबित करने के लिए कुछ मिल जाए ।”

“ठीक है, पूछ लेना । पर पहले कुछ खा तो लो । आओ, उधर चलकर बैठते हैं ।” कहते हुए उसने एक तरफ इशारा किया । हम वहाँ पहुँचे । वहाँ दीवार से लगकर थोड़ी-थोड़ी दूर पर सोफ़े रखे हुए थे और उनके आगे डाइनिंग टेबल रखी हुई थी । डाइनिंग टेबल के सिर्फ एक तरफ दीवार से लगता हुआ सोफा रखा हुआ था । वहाँ पर रोशनी ना के बराबर थी, सिर्फ डाइनिंग टेबल पर केंडलस जल रही थी । उस जगह को देखकर यहीं लग रहा था कि वह खासतौर पर सिर्फ जोड़ों के लिए ही बनी थी ।

“यहाँ पर लोग केंडल लाइट डिनर के लिए आते हैं जो बहुत मशहूर है ।” उसने मुस्कराते हुए कहा ।

“हम्म, देखकर तो यहीं लग रहा है ।”

“आओ बैठो ।” कहते हुए वह कोने वाले सोफ़े पर बैठ गई । मैं उसके पास बैठा ।

“बोलो, क्या लोगे ?” उसने अपनी आवाज को मादक बनाने की नाकाम कोशिश करते हुए मेरे ऊपर लगभग झुकते हुए कहा । झुकने से उसके उभार साफ नजर आ रहे थे ।

“तुम मुझे यहाँ लेकर आई हो, तुम ऑर्डर करो ।” मैंने उससे दूर होने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा ।

“ओके ।” कहते हुए उसने वेटर को आवाज लगाई, “वेटर ।”

लगभग 1 मिनट के बाद वेटर आया, उसने ऑर्डर लिया और चला गया ।

“अब ?” उसने पूछा ।

“अब बताओ, परसो स्टाफ में से यहाँ कौन-कौन था ?”

“तुम्हें बस यहीं पूछना है, और कुछ नहीं ?” उसने मेरी जांघ पर अपना हाथ रखते हुए एक बार फिर से मादक स्वर में कहा ।

“अभी नहीं यार, अभी मुझे थोड़ी जल्दी है । अभी मुझे रात को ऑफिस भी जाना है, फिर कल सुबह डॉली की बेल के लिए अदालत में अर्जी भी लगानी है और कोशिश करनी है कि उसे कल की कल ही बेल मिल जाए ।” मैंने उसका हाथ हटाते हुए कहा ।

“ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी ।” मोमबत्ती की हल्की रोशनी में उसके चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी ।

‘साली ! अगर डॉली की बेगुनाही के सबूत इकट्ठे करने के लिए तेरी हेल्प की जरूरत नहीं पड़ती तो मैं तेरे पास बैठना भी पसंद नहीं करता ।’ मन ही मन सोचते हुए मैंने उसे मस्का मारते हुए कहा, “हाँ यार, वरना ऐसी मलाई को कौन खाना नहीं चाहेगा ?”

“अच्छा, ये बात है । तो वादा करो अगले वीकेंड तुम मेरे साथ डिनर पर चलोगे । तुम्हारी वह ट्रीट मेरी तरफ से होगी ।” उसने कहा ।

“डन । अब बताओ, परसो यहाँ स्टाफ में से कौन-कौन था ?”

“ये यहाँ का परमानेंट स्टाफ है । आज जो लोग हैं, लगभग सभी लोग उस दिन भी थे ।”

“ओके ठीक है, खाना आने में तो 1015 मिनट लगेंगे, तब तक मैं थोड़ी-सी पूछताछ कर लेता हूँ ।” कहते हुए मैं उठ खड़ा हुआ और उस तरफ चल पड़ा, जहाँ पर शराब का काउंटर था ।

“सुनो ।” मैंने वहाँ सबसे एकांत में खड़े बार टेंडर से कहा ।

“यस सर, हाऊ केन आई हेल्प यू ?” उस बार टेंडर ने पूछा ।

“कुछ नहीं यार, बस तुमसे थोड़ी-सी इन्फॉर्मेशन चाहिए थी ?”

“कैसी इन्फॉर्मेशन सर ?”

“वही परसों रात की पार्टी के बारे में ।”

“कौन-सी पार्टी सर ?” मेरी बात सुनते ही वह जैसे सावधान हो गया था । उसकी आवाज का बदलाव मैंने साफ महसूस किया । वह जानता था कि मैं वहाँ पहली बार आया था ।

“वही पार्टी, जो परसो रात को यहाँ पर हुई थी ।”

“सर ! आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है । परसो तो यहाँ कोई पार्टी नहीं हुई सर ।”

“तुम शायद परसों आए नहीं होंगे ।”

“नहीं सर, पिछले 15 दिनों से मैंने एक भी छुट्टी नहीं ली है ।”

“अच्छा प्यारे ।”

“यस सर । आपको जरूर कोई गलतफहमी हुई है ।”

“अभी भी मुझे कोई गलतफहमी हुई है क्या ?” मैंने 2000 का नया गुलाबी नोट अपने पर्स से निकालते हुए मुस्कुराकर कहा । आखिर फिल्मों में, नॉवेल्स में यही तो होता है, जासूस बार में पैसे देकर वेटर से अपनी मनचाही जानकारी पलों में हासिल कर लेता है ।

“एक मिनट सर ।” उसने भी मुस्कराते हुए धीरे से वह नोट लिया और फिर अपनी पॉकेट में रखा । यह देखकर मैं फिर से मुस्कुराने लगा, ‘नोट के पाँव नहीं होते हैं, फिर भी हर जगह चल जाता है ।’ पर अगले ही पल मेरी मुस्कुराहट गायब हो गई जब मैंने उसके चेहरे के भाव बदलते हुए देखे । उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा और फिर अंदर की तरफ चल दिया । उसके जाते ही मैं समझ गया था कि अब क्या होने वाला है । मेरी आँखों के आगे जासूसी फिल्मों के वह सीन आने लगे जिसमें फिल्म का हीरो, विलेन के अड्डे पर जाता है और फिर विलेन का चमचा अपने बॉस को इन्फॉर्मेशन देने के लिए अंदर जाता है । और फिर बॉस अपनी पूरी टोली के साथ बाहर आता है और हीरो को मारने लग जाता है । चूंकि वह फिल्म होती है और वह फिल्म का हीरो, इसलिए वह बड़े आराम से बॉस के चमचों की ठुकाई करने के बाद उसकी भी ठुकाई शुरू कर देता है । पर मैं ठहरा 38 साल का एक आम आदमी, जिससे लड़ाई करना तो दूर, ऐसी मुसीबत में ढंग से दौड़ना भी नहीं आता था । मुझे इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी की चेतावनी अपने कानों में गूँजती महसूस हुई । मुझे अपनी आँखों के सामने अपनी मौत नाचती नजर आ रही थी ।

‘ऐसे थोड़े ही ना कोई भी किसी को मार देता है । आखिर कानून भी कोई चीज होती है ।’ मैंने अपने आपको झूठी तसल्ली देते हुए समझाया, “कुछ नहीं होगा तुझे । टेंशन मत ले ।’ सोचते हुए मैंने अपना मोबाइल निकाला और जल्दी से अपने एक दोस्त को मैसेज टाइप किया, “I am at Raat ke Musafir Cafe right now.” और सेंड का बटन दबा दिया ।

“भेज दिया मैसेज ?” तभी मेरे कानों में एक नई आवाज गूँज उठी । मैंने नजरें उठाकर देखा तो पाया मेरे सामने एक लगभग 4042 साल का सूट-बूट पहने आदमी खड़ा था, जो शक्ल से बड़ा ही शरीफ नजर आ रहा था । उसके पीछे ब्लैक हाफ बाजू की टाइट टी-शर्ट और ब्लैक ही जीन्स में 2 आदमी खड़े थे जो कि शायद उसके बॉडीगार्ड थे । उनके चेहरे पर बड़े ही खतरनाक भाव थे ।

“जी, आपने मुझसे कुछ कहा ?” उसे देखकर मेरे मुँह से इतना ही निकला ।

“सर ! यही वह आदमी है जिसने मुझे 2000 का नोट दिया था ।” उन तीनों के पीछे खड़े उस वेटर ने कहा जिसको कि मैंने 2000 का कड़क नोट खिसकाया था । उसके चेहरे पर बड़ी ही कुटिल मुस्कान थी ।

‘साला, गद्दार !’

“भाई, मैंने पूछा कि भेज दिया ना मैसेज अपने किसी दोस्त को कि तुम अभी यहाँ पर हो और तुम्हें कुछ हो जाए तो सीधा पुलिस के पास जाकर ये मैसेज दिखा दे ।”

“ऐसा कुछ नहीं है । मैंने सिर्फ ये लिखकर भेजा है कि मैं अभी यहाँ हूँ, बाकी कुछ नहीं ।”

“मतलब तो एक ही है । वैसे यार, लगता है तुम्हें अपने दोस्त से प्यार नहीं है ?”

“मतलब, मैं समझा नहीं ?”

“मतलब ये कि अपने साथ-साथ अब अपने दोस्त की भी जान खतरे में डाल दी ना तुमने ?” कहते हुए वह मुस्कुराया, फिर अपनी बात आगे बढ़ाते हुए पूछा, “तुम्हें पहले तो कभी यहाँ नहीं देखा । बताओ, तुम्हें यहाँ पर कौन लेकर आया है ?”

“मैं वो... ।” अभी मैं आगे कुछ कहता तभी वहाँ ब्लैक टीशर्ट और जीन्स में एक आदमी आया । शायद ब्लैक टीशर्ट और जीन्स वहाँ के सेक्युरिटीज गार्ड्स की यूनिफ़ॉर्म थी । वेटर जानी-पहचानी झक सफ़ेद यूनिवर्सल ड्रेस में थे । संध्या उस गार्ड के साथ थी । वह बड़ी घबराई हुई लग रही थी । उसके चेहरे पर जैसे मौत का आतंक था ।
 
“सर, ये इसके साथ यहाँ पर आया है ।” उस गार्ड ने कहा।

“ये... ऐसा लग रहा है कि इसको कहीं पर देखा है ?”

“सर, ये उसी ग्रुप की मेम्बर है जिसकी परसो रात यहाँ पर पार्टी हुई थी । और इसकी वजह से परसो रात पार्टी में थोड़ी देर के लिए हंगामा हो गया था ।”

“ओह्ह, हाँ ! याद आया । क्यों, तुम्हें हर बार जबरदस्ती पंगे लेने का शौक है क्या ? अपनी जिंदगी से प्यार नहीं है क्या ? उस दिन फालतू का हंगामा खड़ा कर दिया और आज इस जासूस को यहाँ पर ले आई । साली, सेक्स का ऐसा बुखार है तो अपने जैसा ढूँढ ले कोई, हर जगह मुँह मारती फिरती है ।” पहली बार वह क्रूर स्वर में बोला । उसकी आवाज मेरे अंदर तक उतर गई थी ।

“नहीं सर, इसमें इसकी कोई गलती नहीं है । परसो रात पार्टी वाली के लिए डॉली ने मुझे भी इनवाइट किया था, पर एक जरूरी काम की वजह से मैं आ नहीं पाया था । बस मैंने तो इसे ये पार्टी वाली जगह दिखाने के लिए बोला था । इसको जरा भी अंदाजा नहीं था कि मैं यहाँ पर आकर ऐसी कोई पूछताछ करूँगा । और मैं कोई जासूस-वासूस नहीं हूँ सर ।” फिर भी संध्या के बोलने से पहले ही मैंने डरते हुए बीच में कहा ।

“तो फिर कौन है तू और पार्टी के बारे में क्यों पूछताछ कर रहा था ? और ये डॉली कौन है ?”

“सर, मेरा नाम राज है और मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करता हूँ । डॉली इस संध्या की रूममेट है और मैं इनके पड़ोस में ही रहता हूँ । डॉली को कल पुलिस ने ड्रग्स सप्लाई के इल्जाम में गिरफ्तार किया था और उसी को बेकसूर साबित करने के लिए मैं थोड़ी कोशिश कर रहा हूँ ।” कहते हुए मैंने उसे अपनी अभी तक की सारी जाँच-पड़ताल के लिए बारे में बताया । पर ये बात छुपा ली थी कि मैंने पूछताछ में अपने आपको जासूस या वकील बताया था । मेरी बात सुनकर संध्या भी चौंक उठी थी ।

“ओह्ह, तो एक सॉफ्टवेर इंजीनियर एक लड़की को बचाने के लिए जासूसी करने निकला है । हाहाहा... ।” कहते हुए उसने एक जोरदार ठहाका लगाया, “क्या सोचकर ये काम कर रहे हो यार ? ये नहीं सोचा कि ये काम खतरनाक हो सकता है । वह ड्रग्स सप्लाई के इल्जाम में गिरफ्तार है तो उसके तार अंत-पंत किसी ना किसी ड्रग्स माफिया से जुड़े होंगे, मेरे जैसे... ।” कहते हुए वह रुका, मुस्कराया और आगे बोला, “क्या समझे, मेरे जैसे खतरनाक ड्रग्स माफिया से जुड़े होंगे, जिससे ही उसको फँसाने वाले को ड्रग्स हासिल हुई होगी । क्या अपनी ज़िंदगी से बिलकुल भी प्यार नहीं है ?”

‘साला, अपने आपको ड्रग्स माफिया तो ऐसे कह रहा है जैसे कि कोई इज्ज़त का काम है ।’ मैंने मन ही मन कहा ।

“नहीं सर, अपनी ज़िंदगी से किसे प्यार नहीं होता ? मुझे भी है ।” मैंने थोड़ा डरते हुए ही कहा ।

“फिर काहे को ऐसा खतरनाक काम हाथ में ले लिया ? क्या हासिल होगा तुझे उस लड़की को, हाँ क्या नाम बोला था, डॉली, उसे बचा के ? क्या वह बहुत खूबसूरत है ?” कहते हुए उसने एक बार मेरी तरफ देखा, “हाँ, तेरे चेहरे के भाव देखकर ऐसा लग रहा है कि खूबसूरत है । अब समझ में आया, तू उसे क्यों बचाने के लिए निकला है ? उसके साथ सोने के लिए ना ? तूने सोचा होगा कि अगर तेरी हेल्प से वह बच जाएगी तो तेरे साथ बिस्तर में सोने के लिए आराम से आ जाएगी । साले ! बीवी को गए जुम्मा-जुम्मा 24 दिन नहीं हुए और सेक्स की भूख तेरे को भी लग गई । साला, क्या टाइम आ गया है ? लोगों को अपनी जान से ज्यादा सेक्स प्यारा हो गया है ।” कहते हुए वह कुछ देर रुका, फिर मुस्कराते हुए उसने आगे कहा, “चल दिया तेरे को चान्स । तेरे को उस पार्टी से रिलेटेड, उस लड़की से रिलेटेड यहाँ से जो भी इन्फॉर्मेशन चाहिए, वह मिलेगी । देखते हैं, तू कैसे उसको बचाता है ? पर हाँ, ध्यान रखना । तेरी इस जासूसी में कहीं पर भी इस जगह का नाम नहीं आना चाहिए । वह क्या हैं ना कि वैसे तो पुलिस को ऊपर से नीचे तक उसका हिस्सा पहुँच जाता है, पर दूसरे इलाके के पुलिस वाले को पता चलना धंधे के लिए ठीक नहीं है । वैसे तो वह भी कोई बड़ी प्रॉब्लम की बात नहीं है । हर पुलिस स्टेशन में हफ्ता बंधा हुआ है, पर कहीं पर कोई ऐसा पुलिस वाला निकल जाए जिसको ईमानदारी का कीड़ा काटा हुआ है, तो थोड़ा-बहुत तो नुकसान हो ही जाता है, जो कि मैं बिलकुल नहीं चाहता । क्या समझा ?” उसने मेरी तरफ मुस्कराते हुए कहा, पर मेरे चेहरे से डर गायब नहीं हुआ था ।

“क्या यार, मैं मुस्कुराकर बात कर रहा हूँ और तू है कि अभी भी घबरा रहा है । घबरा मत । मेरा पक्का वाला प्रॉमिस है, तेरा यहाँ पर बाल भी बांका नहीं होगा ।” उसने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । फिर उसने उस वेटर को संबोधित किया जिसको मैंने 2000 का नोट दिया था, “देख, तूने इन साब से 2000 रुपए लिए थे तो अब तेरा फर्ज बनता है कि ये तुझसे जो कुछ भी पूछे उसका सच-सच जवाब दे । समझ गया ना ?”

“जी सर ।” उस वेटर ने सिर झुकाकर कहा ।

“और अगर ये तुम्हें कुछ भी बताने से मना करे तो तुम सीधा मेरे पास चले आना । कोई भी तुम्हें मेरे पास ले आएगा । मेरा नाम बशीर अहमद है ।” उसने मुझसे कहा और फिर संध्या की तरफ मुड़ा और अपने दाँत चबाते हुए बड़े ही गुस्से में बोला, “और तू ध्यान से सुन ले । अबकी बार तो इसकी वजह से तेरे को माफ करता हूँ । अगर आगे से ऐसी कोई भी गलती हुई तो फिर इस जगह को भूल जाना, तेरी किसी भी जरूरत के लिए यहाँ आने की कोई जरूरत नहीं है । और तू जानती है, ये तेरे लिए मौत से भी बड़ी सजा होगी । समझ गई ?” कहते हुए उसके चेहरे पर जो खतरनाक भाव थे, उससे संध्या तो बुरी तरह से घबरा ही गई थी । मैं भी डर के मारे अंदर तक काँप उठा था । बशीर अहमद और उसके आदमी वहाँ से चले गए थे और हमारे पास पीछे छोड़ गए थे उसी वेटर को । थोड़ी देर तक वहाँ पर खामोशी छाई रही । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अपनी बात कहाँ से और कैसे शुरू करूँ । आखिरकार उसी वेटर ने कहा, “सर ! पूछिये, क्या पूछना चाहते हैं आप ?”

“क्या पूछूँ यार, तूने तो आज मुझे मरवाने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी थी । बिना मुझे कोई हिंट दिये कि तू मेरे साथ गेम खेलने वाला है, मुझसे बड़े आराम से 2000 का नोट भी ले लिया और अंदर जाकर सबकुछ उगल भी दिया ।”

“सर, वह तो मेरा काम था । अगर मैं वैसा नहीं करता और आपसे नोट लेकर आपको कुछ भी बताता, तो फिर मेरे मर जाने में कोई कसर नहीं रहती । खैर, अब तो बॉस ने भी बोल दिया है कि आप जो भी पूछोगे, मैं आपको उस बारे में बता दूँ । तो पूछिये, आप क्या पूछना चाहते हैं ?”

“अब तो कोई गड़बड़ नहीं करोगे ना ?”

“अब कैसी गड़बड़ सर ? अब तो बॉस का हुकुम है तो गड़बड़ का तो सवाल ही नहीं है ।”

“अच्छा ।” मैंने कहा फिर संध्या से बोला, “तुम खाना खा लो, मैं पूछताछ करके आता हूँ ।”

“अब मेरा कुछ भी खाने का मन नहीं है । मुझे डर भी लग रहा है । मैं यहीं तुम्हारे साथ रहूँगी ।” उसने घबराकर कहा ।

“देखो, डरने की कोई जरूरत नहीं है । मैं बस थोड़ी ही देर में वहाँ आ जाऊँगा । ऐसा करो, तुम कोई ड्रिंक मँगा लो, टूडे आई विल पे फॉर यू एव्रिथिंग ।”

“उसकी कोई जरूरत नहीं है ।” उसने उदास स्वर में कहा और वापस डाइनिंग टेबल की ओर चल पड़ी ।

“अब मुझे सबसे पहले तो ये बताओ, उस दिन संध्या ने, इस लड़की ने सेक्स के बुखार वाला ऐसा क्या हंगामा किया था, जिसका अभी तुम्हारे बॉस ने जिक्र किया था और गुस्सा हो गया था ।”

“अच्छा वो, इसलिए तुमने उसको यहाँ से भेज दिया ।”

“यार, ज्यादा दिमाग मत चला और जितना पूछा है उतना बता दे ।”

“वो परसो रात पार्टी में इस लड़की ने बहुत ज्यादा नशा कर लिया था । इसे बिलकुल भी होश नहीं था तो नशे की हालत में इसने हमारे एक साथी को जबरदस्ती पकड़ लिया था और फिर उसको इतनी ज़ोर से किस किया था कि बेचारे के होंठों से खून आने लगा था । वह तो उसको जबरदस्ती खींच के अलग किया, वरना तो इस लड़की का मूड तो उसका बलात्कार करने का था ।”

“अच्छा, ऐसा क्या ?”

“हाँ, उस दिन तो पार्टी का सत्यानाश हो जाना था । बड़ी मुश्किल से इसे ले जाकर एक कमरे में बंद किया था, तब सबकुछ शांत हुआ था ।”

“पर ऐसा क्यों किया इसने ?”

“अब सर, आप तो जानते ही हैं, ऐसी पार्टियों में नॉर्मली लोग जोड़े में ही आते हैं । और जो नहीं आते वह पार्टी में ही एक-दूसरे के साथ हो जाते हैं । इसके साथ वाली लगभग सब लड़कियों के साथ तो उनके स्मार्ट बॉयफ्रेंड थे, पर ये अकेली थी । हालांकि इसको भी किसी सांड जैसे दिखने वाले ने अपने साथ डांस के लिए प्रपोज किया था, पर इसे तो कोई स्मार्ट खूबसूरत बंदा चाहिए था । इसने कई मेहमानों को प्रपोज भी किया था । पर आप इसे देख ही रहे हैं, भला इसे कौन घास डालना पसंद करता । इसलिए कोई इसके साथ नहीं आया । फिर इसने हमारे साथी को पटाने की कोशिश की, उसे पैसों का भी लालच दिया, पर वह नहीं माना तो इसने उसे जबरदस्ती हासिल करने की कोशिश की । पर सर आप बुरा ना माने तो एक बात कहूँ ।”

“हाँ, बोलो ।”

“आप इसके साथ यहाँ कैसे आ गए ? क्या वाकई आपको अपनी बीवी के बिना सेक्स की इतनी ज्यादा तड़प हो रही है कि इसके साथ ही... । आप इतने स्मार्ट हो, आप किसी और को भी पटा सकते थे या फिर बाहर पैसे देकर, पर इसके साथ... ?” कहते हुए उसने मुँह बनाया ।

“तेरे को इस बात से कोई मतलब है क्या ? वैसे भी मैं इसके साथ इस जगह आया था, जहाँ पर मैं शायद अकेला नहीं आ सकता था । दूसरा मुझे डॉली को बेकसूर साबित करने के लिए इसकी हेल्प चाहिए थी, इसलिए मुझे इस काली-मोटी भैंस की मदद लेनी पड़ी । समझ गया ?”

“जी सर, समझ गया ।”

“अच्छा तो अब ये बता, उस दिन डॉली के साथ कौन-कौन था ? कौन उसके साथ ज्यादा टाइम बिता रहा था ? किसके साथ उसने ड्रग्स ली थी ? वह किसके साथ नशा कर रही थी ।”

“अब सर, अब मैं सबके नाम तो नहीं जानता, फिर कैसे बता सकता हूँ कि वह किसके साथ ज्यादा लगी हुई थी ?”

“मतलब तू डॉली को तो अच्छी तरह से जानता है ।”

“अब सर, जानता ही हूँ । आखिर उस ग्रुप में सबसे सेक्सी लड़की वहीं तो थी । मेरी ही क्या लगभग हर दूसरे आदमी की नजरे उसके ही बदन पर थी । साला, क्या सेक्सी बदन था, मेरा बस चलता तो... ।”

‘जल्दी ही वह सेक्सी बदन मेरे बिस्तर पर होगा ।’ सोचते हुए मैंने अपना मोबाइल निकाला और डॉली के मोबाइल से हासिल हुई फोटोज को दिखाते हुए उस वेटर से पूछा, “अब उसके बदन के बारे में सोचना बंद कर यार और इन फोटोज को देखकर बता कि इनमें से कौन उसके साथ ज्यादा चिपका हुआ था ।”

“सर, एक तो ये था ।” उसने एक फोटो की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इसके साथ उसने बहुत देर तक डांस किया था और दो-तीन बार इसने डॉली मैडम को वोदका ड्रिंक भी लाकर दी थी ।” वह राजीव था ।

“पर इसके साथ तो इसकी गर्लफ्रेंड भी होगी ।”

“हाँ सर, इसके साथ इसकी गर्लफ्रेंड भी थी । वैसे तो ये अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ही था, पर ऐसी पार्टीज़ में तो ये सब चलता रहता है ।”

“ये थी इसकी गर्लफ्रेंड ?” मैंने अंजलि की फोटो उसे दिखाते हुए कहा ।

“यस सर, यही थी ।”

“अच्छा, इसके अलावा भी डॉली को किसी और ने ड्रिंक लाकर दी थी क्या ?”

“हाँ सर, डॉली जी का भी तो बॉयफ्रेंड उनके साथ था । उन्होंने भी ड्रिंक लाकर दी थी ।”

“वो यही होगा ?” मैंने एक फोटो की तरफ इशारा करते हुए कहा जो उसमें डॉली के साथ था ।”

“हाँ सर, यही था ।”

वह दिखने में एक बॉडी बिल्डर टाइप का था ।

‘ये जरूर उदय होगा ।’ मैंने मन ही मन सोचते हुए कहा ।

“और किसी ने डॉली को कुछ दिया था क्या ?”

“हाँ सर, एक लड़की ने भी डॉली को एक ड्रिंक लाकर दिया था ।”

“वॉट ?”

“हाँ सर ?”

“कौन थी वह ? संध्या ?”

“नहीं सर, इसे तो जान गया था । वह कोई और थी । हालांकि वह भी रंग में एक सांवली-सी लड़की थी, पर उसका फ़िगर फिर भी अच्छा था ।”

‘श्री ।’ मेरे दिमाग में एक नाम कौंधा । मैंने फटाफट डॉली के मोबाइल से ट्रान्सफर किए फोटो देखे । उसमें एक फोटो में श्री भी थी । मैंने वह फोटो उसे दिखाते हुए कहा, “ये थी क्या वह ?”

“हाँ सर, यही थी । और सर इसने डॉली जी को वह ड्रिंक लेने के लिए बहुत ज्यादा फोर्स किया था ।”

“ओह्ह ।” मैं सोचने लग गया था, “अच्छा, डॉली ने सिर्फ ड्रिंक ही ली क्या ? उसने ड्रग्स नहीं ली ?”

“अब सर, इसका मुझे ज्ञान नहीं है ।”

“अच्छा । वैसे पार्टी में ड्रग्स तो सप्लाई थी ना ?”

“सर, ये पार्टी ही ड्रग्स के लिए होती है ।”

“अच्छा, यहाँ ड्रग्स कहाँ मिलेगी ?”

“ये बात तो आप बॉस से ही पूछो ?” उसने मुस्कराते हुए कहा ।

“अच्छा, जाते-जाते एक लास्ट सवाल । क्या पार्टी में डॉली को बहुत ज्यादा नशा हो गया था ?”

“सर, नशा तो सबको ही बहुत हुआ था ।”

“सबकी नहीं, डॉली के बारे में बताओ ।”

“हाँ सर, हुआ तो था । रात को उनसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था ।”

“फिर वह गई कैसे यहाँ से ?”

“उसके दोस्तों के साथ ही गई थी । वह सब एक साथ ही बड़ी गाड़ी में ड्राइवर के साथ आए थे ।”

“टाइम क्या हुआ था उस समय ?”

“सुबह के लगभग 5 बज रहे थे ?”

“अच्छा ।”

“आपको और कुछ पूछना है सर । आपके 2000 के चक्कर में मेरी बहुत सारी टिप मारी जा रही है ।”
 
“नहीं प्यारे, इतना ही बहुत है । तुम्हारी इस सहायता के लिए बहुत-बहुत थैंक्स ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा । मैं वापस से डाइनिंग टेबल की तरफ चल पड़ा । चलते-चलते मेरे दिमाग में बहुत से सवाल उमड़ रहे थे ।

‘श्री आखिर डॉली को ड्रिंक लेने के लिए इतना फोर्स क्यों कर रही थी ? कहीं उसी ने तो ड्रिंक में ऐसा कुछ तो नहीं मिला दिया, जिसकी वजह से उसे बहुत ज्यादा नशा हो गया हो, जिससे उसे दूसरे दिन कुछ भी होश नहीं रहा हो । पर श्री ऐसा क्यों करेगी ? श्री उसे इस तरह से क्यों फँसाना चाहेगी । मुझे लगता है, जरूर उसने इस काम में किसी की मदद की होगी । उसका रोल सिर्फ उसे नशे वाली ड्रिंक देना था ताकि दोपहर में डॉली के रूम में वह ड्रग्स रख सके । अब वह या तो उदय होगा या फिर राजीव । ओह्ह नो, कहीं ऐसा तो नहीं, वह कोई दूसरा उसका बाप हो । जरूर ये काम इन दोनों बाप-बेटी ने ही किया है । पर ऐसा क्यों किया होगा ? आखिर इन सबके पीछे उनका क्या मोटिव होगा ? मुझे उस मोटिव का पता लगाना ही होगा ।”

“तुमने अभी तक खाना शुरू नहीं किया । सॉरी, मेरी वजह से तुम्हारा खाना ठंडा हो गया ।” डाइनिंग सोफ़े पर बैठते हुए मैंने संध्या से कहा ।

“कोई बात नहीं ।” मोमबत्ती की लाइट रोशनी में मैंने देखा कि ये कहते हुए उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे । थोड़ी देर तक वहाँ खामोशी छाई रही । आखिर मैंने कहा, “क्या बात है, तुम बहुत अपसेट लग रही हो ?”

उसने कोई जवाब नहीं दिया ।

मैंने फिर पूछा, “अरे, बोलो यार ! क्या हुआ ?”

“तुम्हें नहीं पता, क्या हुआ ?” कहते हुए उसकी आँखों से आँसुओं की धार बह निकली । उसकी आवाज थोड़ी लड़खड़ा रही थी । मैंने देखा उसके आगे वोदका का गिलास पड़ा हुआ है जो कि थोड़ा भरा हुआ था । उसकी आवाज से लग रहा था, जैसे मेरे आने तक वह ऑलरेडी 23 पैग चढ़ा चुकी थी ।

मैं उसका दुख समझ सकता था ।

“तुम ही बताओ, अगर मैं सुंदर नहीं हूँ तो इसमें मेरी गलती है क्या ?” नशे में उसकी आवाज फिर से लड़खड़ाई ।

“किसने कहा तुम सुंदर नहीं हो ?”

“झूठ मत बोलो यार । कितनी ही बार तो लोगों से अपने बारे में सुन चुकी हूँ, काली-मोटी भैंस । अब मेरा रंग काला है तो मैं इसमें क्या करूँ ? क्या मैंने भगवान से माँगा था कि मुझे काला पैदा करे ? और इस मोटापे का कोई मेरा कसूर है ? बचपन में बहुत स्लिम थी । एक बार बीमार हो गई तो दवाइयों के साइड इफैक्ट की वजह से मेरा वेट बढ़ने लगा, उसके बाद से ये हाल हो गया । अब हर किसी को गोरी-स्लिम लड़की चाहिए । कोई भी मेरी तरफ देखना पसंद नहीं करता । तुम्हें भी तो डॉली ही चाहिए थी । उसी को बेकसूर साबित करने के लिए तो तुम मुझ काली-मोटी भैंस का सहारा ले रहे हो । अगर मेरी जरूरत नहीं होती तो तुम भी मेरी तरफ देखना पसंद नहीं करते ।” कहते हुए वह हाँफने लगी थी ।

‘जरूर इसने मेरी और उस वेटर की बातें सुन ली थी ।’

“यार, मेरा ऐसा कहने का कोई इरादा नहीं था । वह तो उस वेटर से जानकारी निकालने के लिए मुझे बोलना पड़ा था । अगर मेरी वजह से तुम्हें दुख पहुँचा हो तो आई एम रियली वेरी सॉरी ।”

“सॉरी की कोई जरूरत नहीं है । इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है । वह साली कुतिया डॉली, वह है ही इतनी सुंदर कि हर कोई उसे चाहने लगता है । उसने तो ही मुझे सबसे ज्यादा टॉर्चर किया है । अच्छा हुआ साली को पुलिस ने पकड़ लिया । उसे बचाने के लिए निकले हो ना तुम, पर देख लेना, तुम उसे बचा नहीं पाओगे । बहुत बुरी तरह से फँसी पड़ी है वह । उसकी बेगुनाही का कोई भी सबूत नहीं है । पुलिस ने उसके रूम से ड्रग्स बरामद की है ।”

‘ये इतनी श्योर कैसे है ? कहीं इसने ही तो उसे नहीं फँसाया । उससे बेइंतहा नफरत भी करती है ये । किसी को फँसाने के लिए नफरत से बड़ा मोटिव तो हो ही नहीं सकता ।’

“तुम इतना गुस्सा मत करो यार । माना, मेरा मकसद डॉली को बचाना है पर इसके लिए मैं तुम्हारा दिल बिलकुल नहीं दुखाना चाहता था ।”

“जाओ यार, क्यों झूठ बोलते हो ? माना, मैं सुंदर नहीं हूँ, पर इसका ये मतलब भी नहीं कि मुझमें दिमाग की भी कमी है । तुम सिर्फ मेरा इस्तेमाल कर रहे थे और कुछ नहीं ।”

“देखो, मैंने तुम्हें कभी ये नहीं बोला कि मुझे तुमसे दोस्ती करनी है या फिर कुछ और । मैंने तुम्हें यहाँ लाने के लिए बोला था और बदले में तुम्हारे लिए 3 दिन की तुम्हारी ड्रग्स की खुराक खरीदने की बात हुई थी और वह मैं तुम्हें दिला रहा हूँ । अब तुमने अपने दिल में मुझे लेकर कुछ और खयालात रखे हुए हैं तो इसमें मेरी क्या गलती है ? बोलो ।”

“नहीं, तुम्हारी कोई गलती नहीं है । आई एम सॉरी, मैं ही कुछ ज्यादा बहक गई थी ।”

“माना, तुम शरीर से सुंदर नहीं हो, पर शरीर से सुंदर होना ही काफी नहीं है । तुम भी तो अपने जैसे लड़कों से दूर रहती हो तो बताओ, कोई हैंडसम लड़का भी तो तुम्हारे जैसे विचार रखता होगा । वह भी किसी सुंदर लड़की को ही अपनाना चाहता होगा । इसलिए भगवान के लिए अपने दिल से मेरे लिए अगर कोई बुरे विचार आए हो तो निकाल दो, समझी ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“ठीक है, निकाल दिये ।” वह भी मुस्कराई । मुस्कराते हुए वह मोमबत्ती की रोशनी में और भी भयानक लग रही थी ।

“नाऊ । नो हार्ड फीलिंग्स ?”

“यस, नो हार्ड फीलिंग्स ।”

“अब डॉली के लिए भी अपने दिल से नफरत निकाल दो ।”

“नहीं, उसे तो मैं माफ नहीं कर सकती ।”

“मेरे लिए उसे माफ कर दो ।”

“तुम्हारे लिए !”

“हाँ, मेरे लिए ।”

“तुम बोल रहे तो ठीक है ।”

“दैट्स लाइक अ गुड गर्ल ।” कहते हुए मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये । उसको मनाने का मुझे यहीं तरीका नजर आया था ।

वह एक पल के लिए चौंक गई, पर अगले ही पल वह अपने होंठों को ज़ोर-ज़ोर से मेरे होंठों पर फिराने लगी । उसके हाथ मेरी जांघों पर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ जाने लगे थे । मेरा दम घुटने लग गया था । मैंने धीरे से उसे दूर किया और बोला, “सॉरी, मैं अपने आपको रोक नहीं पाया था ।”

‘कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है राज । डॉली जैसी हूर को पाना है तो इसे गले लगाना ही होगा ।’

“इट्स ओके । ये तो मैं चाहती थी । चाहती तो मैं और भी थी पर... ।”

‘साली को किस क्या किया, ये तो मुझे कच्चा चबाने के मूड में आ गई ।’

“आई एम गेटिंग लेट यार । अभी मुझे अपने ऑफिस भी जाना है ।”

“ओह्ह, हाँ । पर कौन से ऑफिस ? अपनी आईटी कंपनी में ?”

“यहाँ से चलते हैं, फिर बताता हूँ ।” कहते हुए मैंने वह खाना शुरू किया जो ऑलरेडी बहुत ठंडा हो चुका था । डॉली ने साथ दिया ।

☐☐☐

“हाँ, अब बोलो ।” संध्या ने मुझसे पूछा । वह इस बार मुझसे पूरी तरह से चिपककर बैठी हुई थी । मैंने भी इस बार अपने लैपटॉप बैग को आगे की तरफ पहले ही रख दिया था । चलने से पहले मैंने उसे उसकी तीन दिन की ड्रग्स की खुराक के लिए 6000 रुपए दिये थे । हालांकि उसने काफी मना किया था फिर भी मैं नहीं माना था । डिनर और ड्रिंक्स का बिल जो कि लगभग 5000 रुपए का बना था, वह उसी ने पे किया था । उससे मुझे लग गया था कि ड्रग्स के लिए पैसे माँगना उसका सिर्फ एक बहाना था और वह मुझे अपने साथ डेट पर लेकर अपने दिल के अरमान पूरा करना चाहती थी ।

“क्या बोलूँ ?”

“तुम अपने ऑफिस जा रहे हो, हाईटेक सिटी, अपनी आईटी कंपनी में ?”

“तुमसे किसने कहा कि मैं आईटी कंपनी में जॉब करता हूँ ?”

“अभी वहाँ होटल के अंदर तुमने ही तो बोला था ।”

“वो तो मैंने झूठ बोला था ।”

“झूठ बोला था !”

“हाँ । अगर मैं वहाँ सच बोलता कि मैं कोई सॉफ्टवेर इंजीनियर नहीं, बल्कि जासूस हूँ तो जिस हिसाब के वहाँ हालात हो गए थे, उस हिसाब से क्या मैं वहाँ से जिंदा वापस आ सकता था ? और फिर वहाँ तुम्हारी भी तो जान को खतरा हो गया था, इसलिए मैंने ये झूठ बोला था ।”

“थैंक्स, मेरी भी जान तुम्हारी ही वजह से बच सकी थी । अगर तुमने वहाँ जाने और पूछताछ करने का इल्जाम खुद पर नहीं लिया होता तो बॉस मुझे... ।” कहते हुए एक झुरझुरी-सी ली ।

“एक जासूस को थोड़ी-बहुत साइक्लॉजी भी आनी चाहिए । बस इसलिए मैंने वह झूठ बोला और चल गया । उसके बाद खुद उसने घमंड में आकर अपने आदमी को मुझे उस पार्टी के बारे में सबकुछ बताने के लिए बोल दिया ।”

“तो क्या बताया उसने, मेरी उस वाहियात हरकत के अलावा ।”

“क्यों, उसके आगे नहीं सुना था क्या ?”

“उसके बाद मेरी सुनने की हिम्मत भी थी क्या ? काली-मोटी भैंस । तुमने ही बोला था ना मुझे ?”

“उसके लिए मैं पहले ही सॉरी बोल चुका हूँ यार । वह सिर्फ उसको अपने शीशे में उतारने के लिए बोला था ।”

“ओके । तो अब बताओ, उसने क्या-क्या बताया ?”

“तुम क्यों जानना चाहती हो उस बारे में ?”

“बस, जाने की उत्सुकता है । आखिर डॉली को फँसाने के लिए शुरुआत उसी पार्टी से हुई होगी ।”

“ये तो तुम सही कह रही हो । उस पार्टी में ही उसको बहुत ज्यादा नशा करवाया गया था, जिससे कि अगले दिन भी देर तक उसका नशा ना टूटे । और इस दौरान कोई उसके रूम में जाकर ड्रग्स रख दे और फिर पुलिस को फोन कर दे । पुलिस उसे ड्रग्स सप्लाई के इल्जाम में गिरफ्तार करे ले और फिर 510 साल के लिए वह जेल चली जाए । उसका काम खत्म ।”

“पर ये साजिश किसने रची होगी ? कुछ पता चला तुम्हें ?”

“अभी तो कह नहीं सकता यार ! मेरा शक तो अभी उन सभी लोगों पर है जिसके पास भी तुम्हारे फ्लैट की चाबी है ।”

“पर फ्लैट की चाबी होने से ही क्या फर्क पड़ता है ? डॉली को फँसाने के लिए उसके पास उसके रूम की भी चाबी होनी चाहिए । आखिर बिना चाभी के कोई उसके रूम में कैसे घुस सकता है ?”

“ये बात तुम सही कह रही हो । पर वह भी कोई बड़ी बात नहीं है । उसके रूम की डुप्लिकेट चाबी बनाना क्या इतना मुश्किल काम है ?”

“मुश्किल काम नहीं है, पर इतना आसान काम भी नहीं है । अब मेरे रूम की चाबी मेरे पास ही रहती है और वह मैंने किसी को भी नहीं दी । अब बिना मेरी जानकारी में आए कोई कैसे मेरे रूम की डुप्लिकेट चाबी बनवा सकता है ?”

“तुम तीनों हर वक़्त तो साथ रहती नहीं हो, ना ही हर वक़्त फ्लैट में मौजूद रहती हो । अब डॉली की गैरमौजूदगी में या तुम तीनों की गैरमौजूदगी में जिसके पास फ्लैट की चाबी हो वह फ्लैट में घुसे तो उसके लिए कमरे की डुप्लिकेट चाबी बनवाना क्या मुश्किल है ?”

“तुम कैसे जासूस हो यार, जो इतना भी नहीं समझ सकते । ये काम बहुत मुश्किल है । क्योंकि जिसके पास भी फ्लैट की चाबी है वह कोई की-मेकर नहीं है । और तुम्हें इतना तो पता ही होगा कि किसी बाहर वाले की-मेकर की अगर सोसाइटी में एंट्री होती है तो उसका मेन गेट पर रिकॉर्ड रखा जाता है । वह किस बिल्डिंग में, किसके फ्लैट में जा रहा है । फिर उस फ्लैट में रहने वालों को फोन करके पूछा जाता है कि वह सही बोल रहा है या नहीं । तब उसकी सोसाइटी में एंट्री होती है । उसके बाद उस बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड द्वारा भी रजिस्टर में सेम एंट्री होती है ।”

“तुम सही कह रही हो, ये मुझे भी पता है । पर जब फँसाने वाला ही सोसाइटी के अंदर फ्लैट में रहता है तो की-मेकर का अंदर आना क्या मुश्किल है ? और मेरे शक के दायरे में फिलहाल वही लोग हैं ।”

“इसका मतलब है, मैं भी तुम्हारे शक के दायरे में हूँ । तुम अभी भी मुझ पर शक कर रहे हो ?”

“सच कहूँ तो हाँ, कर रहा हूँ । पर अगर तुम मेरी कसम खाओ और सच-सच बताओ, तुमने तो कुछ नहीं किया डॉली को फँसाने के लिए तो मैं मान जाऊँगा कि तुमने कुछ नहीं किया ।”

“नहीं यार, मैंने कुछ भी नहीं किया । तुम भी ये बात जानते हो कि मैं तो खुद परसो रात को बुरी तरह से नशे में चूर थी । भला मैं उसे नशे में करने के लिए क्या इंतजाम कर सकती थी ?”

‘मैंने तो सोचा था कि मेरी कसम खाएगी, पर साली ने बात को घुमाकर अपनी बात कह दी ।’

“ये तो तुम सही बोल रही हो ।” प्रत्यक्ष में मैंने कहा ।

“तो तुम्हें यकीन हुआ ना कि मैंने डॉली को नहीं फँसाया है ।”

“हम्म, मुझे यकीन है, तुमने कुछ नहीं किया ।”

“थैंक्स डियर ।”

“लो, अपनी कॉलोनी भी आ गई । यहाँ से अंदर तक तो तुम अकेली जा ही सकती हो ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“यस ।”

“ओके बाय ।”

“अब कब मिलोगे ?”

‘तेरे से मिलकर क्या मुझे हलाल होना है ?’

“बहुत जल्द, प्रोमिस । नाऊ बाय ।”

“बाय ।”

मैं अपने ऑफिस पहुँचा । आज ऑफिस आने में थोड़ा लेट हो गया था, जिसका कि अब मुझे अपने मैनेजर से रेक्टीफिकेशन करवाना था ।

☐☐☐
 
“तुमने जिम की मैम्बरशिप ले रखी है क्या ?”

“नहीं सर ।”

“तो फिर मुझसे क्यों मिलना चाहते हो ? क्या जिम जॉइन करने से पहले ही टिप्स लेना चाह रहे हो ?”

“नहीं सर ! मुझे आपसे कुछ और काम था ?”

“कुछ और काम ? क्या काम है ?”

“कुछ पर्सनल काम था ।”

“ऐसा क्या पर्सनल काम है ?”

“मुझे आपसे डॉली शर्मा के बारे में बात करनी है ।”

“डॉली के बारे में ! क्या ? रुको, एक मिनट मेरे साथ आओ ।” कहते हुए वह उस चेस्ट फ्लाई मशीन से उठा, जिस पर वह एक्सरसाइज़ कर रहा था । मैं इस समय सोसाइटी में बने हुए मुख्य जिम में जिम ट्रेनर उदय भट्ट के साथ था, जो उस समय चेस्ट फ्लाई मशीन पर एक्सरसाइज़ कर रहा था । कर क्या रहा था, अपनी बॉडी बिल्डिंग वाली बॉडी दिखाकर साला मुझे चिड़ा रहा था । मैं उसके सामने अपने थोड़े से निकले हुए पेट को अंदर करने की नाकाम-सी कोशिश कर रहा था । वह वहाँ से उठकर जिम के अंत में बने हुए एक छोटे से रूम की तरफ चलने लगा । मैंने उसका अनुसरण किया ।

सुबह ऑफिस से निकलकर मैं अपने फ्लैट में जाने की बजाय सीधा सोसाइटी के मेन जिम में पहुँचा था, जहाँ पर उदय भट्ट मुख्य इंस्ट्रक्टर था ।

उदय भट्ट 2526 साल का बॉडी बिल्डर नौजवान था, जिसे देखकर ऐसा लगता था कि उसने बॉडी बनाने में वाकई बहुत मेहनत की है । यह वह बॉडी थी जिसे बनाने के मैं कभी सपने देखा करता था । बॉडी बनाने के लिए मैंने भी कभी जिम जॉइन कर लिया था । पर जिम में जाकर पता चला कि उसके लिए बहुत समय देना पड़ता है, बहुत मेहनत करनी पड़ती है जो मेरे बस से बाहर था । फिर बाद में करियर बनाने के चक्कर में सबकुछ कहीं पीछे छूट गया था ।

अंदर पहुँचकर वह वहाँ रखी हुई एक आराम कुर्सी पर ढेर हो गया । उसने मुझे वही साइड में रखी हुई कुर्सी पर बैठने का इशारा किया ।

“हाँ, अब बोलो । क्या बात करना चाहते हो ?”

मैं थोड़ी देर चुप रहा । मैं बात शुरू करने का सूत्र सोच रहा था ।

“मिस्टर, तुम्हारा जो भी नाम है जल्दी करो । तुम जानते हो, ये मेरी लोगों को ट्रेनिंग देने का टाइम है । अगर सोसाइटी के मैनेजर को पता चल गया कि मैं ड्यूटी टाइम में फ्री गॉसिप करता रहता हूँ तो मेरी नौकरी पर आँच आ सकती है ।”

“मैं समझ सकता हूँ ।”

“तो फिर शुरू करो, क्या कहना चाहते हो ?

“ओके ! आप डॉली शर्मा को जानते ही हैं ।”

“हाँ, जानता हूँ । क्यों ?” उसने बड़े रूखे स्वर में कहा ।

“फिर तो ये भी जानते होंगे कि उसको पुलिस ने गिरफ्तार किया हुआ है ।”

“हाँ, तो मैं क्या करूँ ।” उसका जवाब सुनकर मैं हड़बड़ाया ।

“आपको उसकी परवाह नहीं है ?”

“उसकी परवाह ! वह किस लिए ?”

“अरे ! आखिर आप उसके दोस्त हो और एक दोस्त को दूसरे दोस्त की परवाह तो होती ही है ।”

“ये आपको किसने कहा कि मैं उसका दोस्त हूँ ?”

“उसी ने ।”

“उसने किसने ? डॉली ने ?”

“हाँ ।”

“उसने झूठ बोला है ।”

“मतलब आप उसके फ्रेंड नहीं हैं ?”

“नहीं ।”

“तो फिर क्या हैं ?”

“मैं सिर्फ उसका जिम का ट्रेनर हूँ । उसके शरीर को मेंटेन रखने के लिए टिप्स देता हूँ ।”

“ऐसा ट्रेनर जो उसको पर्सनली ट्रेनिंग देता है । यहाँ जिम में ही नहीं, बल्कि उसके फ्लैट में जाकर भी उसे ट्रेनिंग देता है ।” मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

“तो क्या हुआ ? मुझे इस काम के लिए फीस मिलती है, इसलिए मैं करता हूँ ।” उसने बड़ी ढिठाई से कहा ।

“हुआ तो कुछ नहीं प्यारे ! पर मेरे भाई, जिम ट्रेनर को भला कौन अपने फ्लैट की चाबी देता है ? और कौन-सा जिम ट्रेनर जब चाहे अपने क्लाईंट के फ्लैट में घुस जाता है, वह भी किसी भी टाइम ?” मैंने अपनी बात का प्रभाव देखने के लिए उसके चेहरे पर नजर गड़ाते हुए कहा । वह थोड़ा-सा हड़बड़ाया और नजरे चुराने लगा ।

“तो क्या हुआ ? कभी-कभी वह अपनी पर्सनल जिम के लिए कुछ सामान मँगाती रहती है, जिसे देने के लिए जब भी मुझे टाइम मिलता है, मैं उसके फ्लैट में चला जाता हूँ ।” उसने फिर भी हिम्मत करके बड़ी ही ढिठाई से फिर जवाब दिया ।

“अच्छा ! ना केवल किसी भी टाइम, बल्कि उसकी अनुपस्थिति में भी ? या फिर जब वह अपने पूरे होश-हवास में ना हो ।” मैंने श्री की बातों से कि उसने कल दोपहर किसी को डॉली के फ्लैट में घुसते हुए देखा है, अंदाजा लगते हुए हवा में तीर छोड़ा ।

“ये आपको किसने कहा ?”

“किसी ने भी कहा हो । पर ये सच है ना कि तुम उसकी अनुपस्थिति में घर जाते हो ।”

“हाँ, जाता हूँ ।”

“तो बताओ, अब तुम उसके जिम ट्रेनर से ज्यादा हो या नहीं ।”

“हम्म, मान लिया कि मैं उसका जिम ट्रेनर से कुछ ज्यादा हूँ । उसका दोस्त हूँ, तो क्या ?”

“तो भाई, कैसे दोस्त हो ? तुम्हारी दोस्त को पुलिस ने गिरफ्तार किया और तुम्हें उसकी जरा भी परवाह नहीं है ।”

“मेरे परवाह करने से क्या हो जाएगा ? अब उसने जुर्म किया है तो उसकी सजा तो उसे मिलेगी ही ।”

“तो तुम ये मानते हो कि उसने गुनाह किया है ।”

“मेरे मानने या ना मानने से क्या होता है ? पुलिस किसी को बिना जुर्म के थोड़े ही ना गिरफ्तार करेगी ।”

“पर डॉली का कहना है कि उसे किसी ने फँसाया है ।”

“वो तो हर मुजरिम अपने आपको बचाने के लिए यही कहता है । इसमें नया क्या है ?”

“यार, तुम उसके कैसे दोस्त हो ! तुम तो उसे पुलिस और अदालत से भी पहले मुजरिम मान चुके हो । क्या तुम्हें अपने दोस्त पर बिलकुल भी विश्वास नहीं है ?”

“मेरा फिर वही जवाब है, मेरे विश्वास करने से क्या हो जाएगा ?”

“तुम्हारी बातों से ऐसा लग रहा है कि तुम्हें उसकी गिरफ्तारी का कोई अफसोस नहीं है, बल्कि खुशी हो रही है ।” मैंने अपने शब्दों पर ज़ोर देकर कहा ।

मेरी बात सुनकर वह हड़बड़ाया । फिर बोला, “नहीं-नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है । भला अपने दोस्त की गिरफ्तारी पर कौन खुश हो सकता है ?”

“फिर भी तुम उसके गिरफ्तार होने के बाद एक बार भी मिलने नहीं गए । क्यों ?”

“मैं जाना तो चाहता था, पर मुझे बिलकुल भी टाइम नहीं मिल पाया । सुबह और शाम को मैं जिम आता हूँ । आज दोपहर जाऊँगा उससे मिलने के लिए ।”

“अच्छा । तुम्हें ये तो पता है ना कि डॉली को पुलिस ने किस जुर्म में गिरफ्तार किया है ।”

“हाँ, पता है । ड्रग्स सप्लाई के जुर्म में ।”

“अब तुम उसके दोस्त हो तो ये बताओ कि तुम्हें ये क्यों लगता है, वह ड्रग्स सप्लाई जैसा काम करती है ?”

मेरा सवाल सुनकर वह हड़बड़ाया, फिर बोला, “ये मैंने कब कहा कि वह ड्रग्स सप्लाई करती है ?”

“भाई मेरे ! अभी थोड़ी देर पहले ही तुमने कहा था कि पुलिस किसी को बिना जुर्म के गिरफ्तार नहीं करती है । और डॉली के खुद को बेकसूर बोलने पर और ये कहने पर कि उसे किसी ने फँसाया है, तुमने ही कहा था कि वह तो हर मुजरिम अपने आपको बचाने के लिए यही कहता है ।”

“वो तो मैंने ऐसे ही कह दिया था ?”

“वाह यार, तुम तो बड़े अच्छे दोस्त हो ! अपने दोस्त के लिए बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देते हो । कुछ ऐसा भी जिसमें उसको नुकसान हो जाए ।”

“सॉरी ।” उसके चेहरे पर खेद के भाव प्रकट हुए ।

“अच्छा चलो, अब बिना सोचे नहीं बल्कि सोचकर बताओ, क्या तुम्हें डॉली गुनहगार लगती है ।”

“नहीं सर ।”

“इसका मतलब तुम मानते हो कि वह सच कह रही है कि किसी ने उसे फँसाया है ?”

“अब सर, आपकी बातों से ऐसा लगता तो है ।”

“तो प्यारे, अब ये सोचकर बताओ कि ऐसा कौन कर सकता है ?”

“कौन कर सकता है ?”

“वहीं तो पूछ रहा है । बताओ, ऐसा कौन कर सकता है ?”

“अब ये मुझे क्या पता ?”

“उसकी किसी से कोई दुश्मनी है क्या ?”

“अब इसका जवाब मैं कैसे दे सकता हूँ भला । ये तो डॉली ही बता सकती है ।”

“हम्म, पर कई बार इंसान को खुद को पता नहीं होता कि उसका दुश्मन कौन है, पर उसके दोस्तों को पता होता है । क्योंकि कई बार दोस्त में ही छुपा हुआ दुश्मन होता है ।”

“ये तो आपने सही कहा सर ।”

“तुम भी हो सकते हो ?”

“क्या !”

“तुम भी उसके छुपे हुए दुश्मन हो सकते हो, आखिर तुम भी तो उसके दोस्त होने का दावा करते हो और वह भी ऐसा दोस्त, जो उसको मुजरिम की निगाहों से देखता है ।”

“सर, उसके लिए मैं पहले ही सॉरी बोल चुका हूँ । मैं उसका दुश्मन नहीं दोस्त ही हूँ ।”

“चलो मान लिया, तुम उसके दोस्त हो । अब ये बताओ, शुक्रवार रात की पार्टी में तुमने डॉली को ड्रग्स क्यों दी थी ?”

“आपको किसने कहा कि मैंने उसे ड्रग्स दी थी ?”

“ओह्ह सॉरी, ड्रग्स नहीं पर ड्रिंक तो दिया था ना ।”

“हाँ, वह दिया था । और इसमें क्या गलत है ? वह मेरी फ्रेंड है तो फ्रेंड के लिए ड्रिंक बनाना कोई शर्म की बात थोड़े ही ना है ।”

“सिर्फ फ्रेंड है या गर्लफ्रेंड ?”

“सिर्फ फ्रेंड । हाँ, मैंने उसे प्रपोज जरूर किया था, पर उसने मना कर दिया था ।”

“पर मुझे तो पता लगा है तुम उसे डेट कर रहे हो ।”

“मैं उसके साथ सिर्फ एक बार डेट पर गया था, उसके बाद नहीं गया ।”

“क्यों ?”

“कहा ना, उसने मेरा प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया था ।’

“पर क्यों यार ? तुम इतने हैंडसम हो, बॉडी बिल्डर हो, फिर क्यों मना कर दिया ?”

“ये बात तो तुम्हें डॉली से पूछनी चाहिए ।”

“जरूर पूछूँगा । अब ये बताओ, तुमने पार्टी में उसकी ड्रिंक में गहरे नशे की दवा क्यों मिलाई थी ?”

“तुमसे किसने कहा कि मैंने ऐसा कुछ किया था ।”

“है मेरे पास कोई इसका गवाह ।”

“तो फिर उसी गवाह से जाकर पूछ लो, मैंने ऐसा क्यों किया था ।”

“वो तो खैर तुम ही बता सकते हो ।”

“मैं तो मना कर रहा हूँ कि मैंने ऐसा कुछ किया था । हाँ, डॉली के लिए ड्रिंक जरूर लाकर दी थी । वह तो उसे राजीव और श्री ने भी ऑफर की थी । हो सकता है, उन दोनों में से किसी ने उसकी ड्रिंक में कुछ मिलाया हो । पर मैंने ऐसा कुछ नहीं किया ।”

“चलो, मान लिया । अब ये बताओ, परसो शनिवार दोपहर 12 से 2 बजे तक तुम कहाँ थे ?”

“कैंटीन में लंच करने के बाद मैं यहीं इसी रूम में आराम कर रहा था ।”

“तुम डॉली के रूम में नहीं गए ?”

“नहीं ।”

“तुम झूठ बोल रहे हो । कल दोपहर तुम डॉली के रूम में गए थे ।”

“आप मज़ाक कर रहे हैं ।”

“पर मेरे पास इस बार वाकई ऐसा एक गवाह है जिसने तुम्हें कल दोपहर 1 बजे डॉली के फ्लैट में घुसते हुए देखा था ।” मैंने इस बार उसकी आँखों में आँखें डालते हुए पूरे विश्वास से कहा ।

“आपका गवाह झूठ बोल रहा है । मैं डॉली के फ्लैट में 1 बजे नहीं, बल्कि डेढ़ बजे... ।” कहते हुए वह एकदम से रुका ।

मेरे होंठों पर मुस्कान उभरी ।

“तो कल दोपहर तुम उसके फ्लैट में गए थे ।”

“हाँ, गया था । पर यकीन मानो, उसे ड्रग्स के केस में फँसाने में मैंने कुछ नहीं किया है ।”

“फिर तुम क्यों गए थे ?”

“ये मैं नहीं बता सकता ।”

“बेटा, पुलिस जब पूछताछ करेगी तब भी यही जवाब दोगे क्या ?”

“पुलिस जब पूछताछ करेगी, तब की तब देखी जाएगी । वैसे भी पुलिस मुझसे पूछताछ कर चुकी है । बाई द वे, तुम कौन हो यार और मुझसे ये सवाल क्यों कर रहे हो ?”

“बड़ी देर से याद आई मुझसे ये बातें पूछना ।” मैं फिर से मुस्कुराया ।

“अरे यार, कौन हो ?” उसने फिर पूछा ।

“मैं एक डिटेक्टिव हूँ । डॉली ने अपने को बेकसूर साबित करने का काम मुझे सौंपा है ।”

“डिटेक्टिव ! लगते हो नहीं हो ।”

“क्यों, डिटेक्टिव के सिर पर क्या सींग होते हैं, जिनसे तुम उन्हें पहचानते हो ?”

“नहीं, ऐसा तो नहीं है । अच्छा, पर अब तुम अपनी पूछताछ बंद करो और जाओ यहाँ से । मैं तुम्हें अब कुछ नहीं बताने वाला ।”

“ठीक है प्यारे, अभी तो मैं जा रहा हूँ । मैं फिर आऊँगा और फिर पूछूँगा ।”

मुझे नींद आ रही थी और सोकर मुझे दोपहर को जल्दी उठना भी था ताकि डॉली के लिए वकील के पास जा सकूँ ।

“देखेंगे ।”

“देख लेना ।” कहते हुए मैं वहाँ से उठ गया । और अपने फ्लैट की ओर चल पड़ा ।

☐☐☐
 
मैंने आज सिर्फ 4 घंटे की नींद ली थी । दोपहर के 2 बजे से पहले मैं उठकर, नहा-धोकर और बीवी से, अपनी बीवी से बात करके, चाय नाश्ता करके, अपने हर काम से फ्री होकर पंजागुट्टा रोड नंबर 5 पर स्थित वकील एस॰ रामानुजन के ऑफिस के अंदर खड़ा था । ना जाने मुझे क्यों इस बात की जल्दी हो रही थी कि डॉली को पुलिस स्टेशन से जल्दी से जल्दी बाहर निकालना है । आज डॉली को पुलिस कोर्ट में पेश करने वाली थी और उसका रिमांड हासिल करने वाली थी, जो पुलिस को आसानी से हासिल हो जानी थी । एक तो डॉली के खिलाफ उनके पास पुख्ता सबूत थे । ऊपर से वह इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी उसे शुरू से ही मुजरिम मानकर बैठा हुआ था । फिर डॉली का अभी कोई वकील भी नहीं था जो उसका केस लड़ सके ।

पंजागुट्टा पहुँचकर मुझे पता चला कि उस वकील का ऑफिस होटल रात के मुसाफिर के पीछे वाली रोड पर ही था, यानी कि रोड नंबर 4 पर होटल था और रोड नंबर 5 पर वकील का ऑफिस था ।

‘क्या अजीब संयोग है ।’ मैंने मन ही मन सोचा ।

गेट के अंदर घुसते ही सामने एक फ्रंट डेस्क था, जिसके पीछे एक सुंदर-सी महिला कुर्सी पर बैठी हुई अपने हाथ की अंगुलियों में लगी हुई नेल पॉलिश को निहारे जा रही थी ।

“एक्सक्यूजमी मिस ?” मैंने धीरे से कहा ।

उसने अपनी नजरे ऊपर की, अपने होंठों पर व्यावसायिक मुस्कराहट लाकर पूछा, “जी कहिए, मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ ?”

“मुझे मिस्टर रामानुजन जी से मिलना है ।”

“आपकी अपॉइंटमेंट है ?”

वकील से मिलने के लिए भी अपॉइंटमेंट चाहिए होती थी, मुझे नहीं पता था । मैं तो सोचता था कि वकील लोग हर वक़्त अपने ग्राहक का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं । उनकी राहों में अपनी पलकें बिछाये रहते हैं । पर मैं गलत था ।

“जी, अपॉइंटमेंट तो नहीं है ।”

“तो फिर आप उनसे नहीं मिल सकते । वैसे आपको क्या काम है ?”

“जी, उनको एक केस सौंपना चाहता था ।”

“फिर आप उनके असिस्टेंट वेंकट राघवन से मिल लीजिये । वह आपको केबिन नंबर 2 में मिल जाएँगे ।”

“जी, पर मुझे रामानुजन जी से ही मिलना है और किसी से नहीं ।” डॉली को पुलिस स्टेशन में कॉन्स्टेबल ने रामानुजन से मिलने की सलाह दी थी, इसलिए मैंने उनसे ही मिलने के लिए ज़ोर दिया ।

“सॉरी सर, उनसे तो बिना अपॉइंटमेंट के कोई नहीं मिल सकता ।”

“आप एक बार उनसे कहिए तो सही, बहुत जरूरी केस है ।”

“अगर इतना ही जरूरी केस है तो आप वेंकट जी से मिल लीजिये । अगर वह चाहेंगे तो केस सर को ट्रान्सफर कर देंगे ।”

“जी नहीं । मुझे सिर्फ रामानुजन जी से ही मिलना है । आप एक बार उन्हें इन्फॉर्म तो करिए । हो सकता है, वह मिलना पसंद करें और आप फालतू में ही मना किए जा रही हो ।”

मेरी बात सुनकर उसने आग्नेय नेत्रों से मेरी तरफ देखा । वह गुस्से में मुझे कुछ कहने जा रही थी कि पता नहीं क्या सोचकर रुक गई । फिर उसने अपने सामने रखा टेलीफ़ोन लिया और एक नंबर डायल किया ।

“सर, यहाँ एक आदमी खड़ा है और वह आपसे मिलने की जिद कर रहा है ।”

उधर से कुछ कहा गया ।

“नहीं सर, वह कुछ नहीं बता रहा । मैंने उन्हें वेंकट जी से मिलने की सलाह दी थी, पर वह है कि सिर्फ आपसे ही मिलने पर अड़ा हुआ है ।”

उधर से फिर कुछ कहा गया ।

“ओके सर, ठीक है । मैं उसे अंदर भेजती हूँ ।” कहते हुए उसने फोन रख दिया ।

“जाइए । लगता है आज सर का मूड अच्छा है जो उन्होंने आपको अंदर बुला लिया, वरना बिना किसी अपॉइंटमेंट के उनसे मिलना असंभव है ।”

“आप अगर नेल पॉलिश के बजाय अपने काम पर अच्छी तरह से ध्यान दे और रटा-रटाया जवाब ना दे तो कुछ भी असंभव नहीं है मिस... ।” मैंने अपना वाक्य अधूरा छोड़ा । विक्रांत को पढ़कर थोड़ी-बहुत स्मार्ट टॉक मैं भी सीख गया था ।

“आप जाइए, उधर से लास्ट वाला कैबिन है ।” उसने थोड़े गुस्से में कहा ।

“उफ़्फ़, आप तो बड़े गुस्से वाली हो । एनिवे, वापस आकर आपसे मिलता हूँ ।” मुस्कराते हुए मैंने कहा और उसके बताये हुए कैबिन की तरफ चल पड़ा ।

“मे आई कम इन ।” मैंने कैबिन का दरवाजा थोड़ा खोलते हुए पूछा ।

“यस, यू कैन ।”

मैं अंदर गया । मैंने सरसरी नजरों से कमरे का मुआयना किया । उसका वह कमरा बड़ा ही शानदार था । कमरे के पीछे वाली दीवार पर बूक सेल्फ़्स बनी हुई थी, जिनमे मेरे हिसाब से शायद आई पी सी, लॉं और संविधान संबंधित मोटी-मोटी किताबें रखी हुई थीं । कमरे के बीचोबीच एक बड़ी-सी टेबल जिस पर बहुत सारी फाइलें रखी हुए थी । उस टेबल के पीछे एक शानदार चेयर पर वकील रामानुजन बैठा हुआ था । वह कोई 50 साल का आदमी था, जिसके चेहरे से ही बुद्धिमत्ता के साथ-साथ गर्व की अनुभूति झलक रही थी । जरूर अपने फील्ड में वह एक बड़ा और कामयाब नाम था । कमरे के एक तरफ साइड में एक बड़ा-सा सोफ़ासेट रखा हुआ था, जिसे देखकर मेरे मन में सिर्फ एक ही ख्याल आया कि जरूर वह उस रिसेप्शनिस्ट को लेकर उस पर गुलाटियाँ मारता होगा ।

“सिट डाऊन मिस्टर ।”

“थैंक्स सर ।” मैंने एक विजिटिंग चेयर पर बैठते हुए कहा ।

“नाउ टेल मी मिस्टर... ।” उसने अपना वाक्य अधूरा छोड़ा ।

“सर, मेरा नाम राज है ।”

“हाँ तो मिस्टर राज, टेल मी, वॉट केन आई डू फॉर यू ?”

“सर, मैं एक बहुत ही जरूरी केस लेकर आपके पास आया हूँ ।”

“कहो, ऐसा कौन-सा जरूरी केस है जो तुम सीधा मुझे ही बताना चाहते थे, किसी और को नहीं ?”

“सर, आपने कल का अखबार तो पढ़ा ही होगा ?”

“मिस्टर राज, तुम बेकार की बातों के बजाए सीधा मुद्दे की बात करो । यू नो, मेरा एक-एक सेकंड बहुत कीमती है ।”

“सॉरी सर ! मेरी एक फ्रेंड को पुलिस ने ड्रग्स सप्लाई के इल्जाम में गिरफ्तार किया है और मैं चाहता हूँ कि आप उसे बेकसूर साबित करे और जल्दी से जल्दी कोर्ट से उनकी रिहाई का इंतजाम करे ।” कहते हुए मैंने उन्हें डॉली के बारे में पूरी बात बताई । साथ ही अपनी अभी तक की जाँच-पड़ताल के बारे में भी बताया ।

“तुमने तो काफी कुछ पहले ही कर लिया मिस्टर राज । ठीक है, मैं कल ही डॉली की जमानत का इंतजाम करता हूँ ।”

“पर सर, उसे तो आज कोर्ट में पेश होना था और पुलिस ने तो उसका रिमांड हासिल कर भी लिया होगा ।”

“सो वॉट ? तुम उसे बेकसूर मानते हो ना ?”

“जी सर, मेरी नजरों में तो वह बेकसूर है ।”

“गुड ! अगर तुम उसे बेकसूर मानते हो फिर कोई प्रॉब्लम नहीं है । वैसे भी तुम्हारी जाँच-पड़ताल से ये भी साफ होता है कि उसे किसी ने फँसाया है, इसलिए कल उसकी जमानत में कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी । तुम बिलकुल भी टेंशन मत लो ।”

“थैंक यू सर । आपकी फीस कितनी है ?” मैंने पूछा । हालांकि मैंने उसके रुतबे और ऑफिस के रखरखाव से अंदाजा लगा लिया था कि उसकी रोज की फीस लाखों में ना सही तो 4050 हजार तो आराम से होगी । क्या डॉली इतनी फीस दे पाएगी ? जरूर दे पाएगी । आखिर महीने की सैलरी 2 लाख रुपए है, अगर अपने आपको बेकसूर साबित करने में 24 लाख रुपए खर्च भी हो जाए तो क्या चिंता की बात थी ?

“फीस की तुम चिंता मत करो । अदालत से उसकी जमानत करवाने के बाद ले लूँगा ।”

मैंने तो सुन रखा था, वकील अपनी पूरी फीस एडवांस में लेता था ।

“फिर भी सर, आप कुछ एडवांस तो लेंगे ही ।”

“हाँ, वह तो है । तुम बाहर रिसेप्शनिस्ट के पास फिलहाल के लिए 1 लाख रुपया जमा करवा दो ।”

“ओके सर, ठीक है । थैंक्स फॉर यूअर कॉर्पोरेशन ।” कहते हुए मैं उठ खड़ा हुआ । मेरे पास डॉली के दिये हुए 3 क्रेडिट कार्ड थे और हर एक कार्ड की क्रेडिट लिमिट 2 लाख रुपए थी । मुझे 1 लाख रुपए एडवांस देने में कोई प्रॉब्लम नहीं आने वाली थी ।

“लगता है आपको इस नेल पॉलिश से बहुत प्यार है जो तब से इसे ही निहारे जा रही हैं । जरूर आपके बॉयफ्रेंड ने आपको गिफ्ट किया होगा ।” मैंने बाहर आकर उस रिसेप्शनिस्ट को कहा, जो अभी भी अपनी उसी नेल पॉलिश को निहारे जा रही थी ।

“वॉट ? क्या कहा आपने ?”

“लगता है आपको सुनाई कम देता है । एनिवे, मेरी बात छोड़िए और ये क्रेडिट कार्ड लीजिये । मेरे केस का एक लाख रुपए एडवांस जमा कर लीजिये ।” मैंने डॉली से हासिल हुआ एक कार्ड उसे देते हुए कहा ।

एडवांस जमा कर मैं वकील के ऑफिस से बाहर आया, अपनी बाइक उठाई और अपने फ्लैट की ओर चल पड़ा । वकील के ऑफिस से मैं आधे घंटे में फ्री हो गया था । अभी 3 भी नहीं बजे थे तो डॉली से मिलने पुलिस स्टेशन जाने का कोई फायदा नहीं था । हो सकता था, वह अभी कोर्ट से वापस नहीं आई हो ।

☐☐☐

अपने फ्लैट में आकर मैंने कपड़े चेंज किए और सोफ़े पर पसर गया । लेटे-लेटे मैं डॉली के केस के बारे में सोचने लगा ।

‘परसों उदय दोपहर के 1.30 बजे डॉली के फ्लैट में गया था और श्री के मुताबिक उसने 1 बजे किसी को डॉली के फ्लैट में जाते हुए देखा था । अगर श्री सच बोल रही है तो मेरे हिसाब से वह राजीव ही होना चाहिए । राजीव और अंजलि का कहना है कि वह उस समय सिनेमा हॉल में मूवी देख रहे थे । इसका मतलब अंजलि भी झूठ बोल रही है । डॉली को फँसाने की साजिश जरूर राजीव और अंजलि ने मिलकर की होगी । उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा, अगर जाँच की जाए तो वजह भी जरूर सामने आ जाएगी । पर पहले मुझे श्री से कन्फ़र्म कर लेना चाहिए कि क्या उसने राजीव को ही डॉली के फ्लैट में जाते और निकलते हुए देखा था ? मुझे श्री को फोन करना चाहिए अब तो डॉली ने भी बोल दिया है उसे पैसे देने के लिए ।’ सोचते हुए मैंने श्री का मोबाइल नंबर डायल किया ।

“हैलो ।”

“हैलो श्री, आई एम राज ।”

“राज, वह डॉली के फ्रेंड ?”

“हाँ, वही । श्री मैंने डॉली से बात कर ली है । वह तुम्हें 50 हजार रुपए देने के लिए तैयार है । तुम मुझे उस आदमी का नाम बता दो, जिसे तुमने डॉली के फ्लैट में घुसते हुए देखा था ।”

“आप अभी कहाँ हो ?”

“अपने फ्लैट में ।”

“ओके, ठीक है । तुम 50 हजार रुपए तैयार रखो, मैं 10 मिनट में तुम्हारे फ्लैट में आ रही हूँ ।” कहते हुए उसने कॉल कट कर दिया ।

मैं फिर से सोच-विचार में डूब गया । कॉलबेल की आवाज से मेरी तंद्रा भंग हुई । मैंने उठकर दरवाजा खोला, बाहर श्री खड़ी थी ।

“आओ ।”

वह अंदर आई और सीधा बीच वाले सोफ़े पर बैठ गई । मैंने भी पीछे से दरवाजा बंद किया और साइड वाले सोफ़े पर आकर बैठ गया ।

“हाँ तो अब बताओ, तुमने किसको देखा था डॉली के फ्लैट में आते-जाते हुए ।”

“पहले 50 हजार ।”

“ओके ।” कहते हुए मैंने अपना पर्स निकाला और उसमें से डॉली का दिया हुआ क्रेडिट कार्ड निकाला ।

“ये क्या है ?”

“क्रेडिट कार्ड ।”

“इसका मैं क्या करूँ ? मुझे तो 50 हजार रुपए कैश चाहिए था ।”

“तुम्हारा अकाउंट नंबर बताओ, मैं उसमें पैसे ट्रान्सफर कर देता हूँ ।”

“क्रेडिट कार्ड से ! कैसे ?”

“ओह्ह, सॉरी ।” मुझे ध्यान आया कि क्रेडिट कार्ड से मैं उसे पैसे नहीं दे सकता था ।

‘तो क्या फिर अपने अकाउंट से इसके अकाउंट में पैसे ट्रान्सफर करूँ ? पर फिर वह डॉली से कैसे वापस लूँगा ? चलो मान लो, मेरी वजह से अगर डॉली इस ड्रग्स वाले मामले से आजाद हो भी गई, पुलिस स्टेशन से बाहर भी आ गई तब मुझे तो शर्म आएगी उससे ये पैसे माँगते हुए । उसके क्रेडिट कार्ड से खर्च करना अलग बात है, पर ऐसे पैसे देना; साला, ये तो लफड़ा हो रहा है । क्रेडिट कार्ड से खर्च... । हम्म, ये सही रहेगा । मैं अपनी एलआईसी का पेमेंट क्रेडिट कार्ड से कर देता हूँ ।’ मैं मन ही मन सोचने लगा था ।

“क्या सोचने लग गए राज जी ? अगर आपके पास देने के लिए पैसे नहीं है तो मैं जा रही हूँ ।” उसने उठने का उपक्रम किया ।

“मैं आपको अपने अकाउंट का चेक दे देता हूँ ।”

“मुझे चेक नहीं, कैश चाहिए ।”

“देखो, इतना कैश आजकल कौन अपने पास रखता है ? तुम अपना गूगल तेज नंबर बताओ । मैं अपने अकाउंट से अभी तुम्हारे अकाउंट में 20000 रुपए ट्रान्सफर कर देता हूँ । इसकी लिमिट इतनी ही है । बाकी के 30 हजार का मैं तुम्हें चेक दे देता हूँ । बोलो, मंजूर है ?”

“हम्म, ठीक है । मेरे इसी मोबाइल नंबर पर ट्रान्सफर कर दीजिये ।”

“ओके ।” कहते हुए मैंने अपने मोबाइल पर गूगल तेज एप्लिकेशन ओपन की और उसके बताए मोबाइल नंबर से उसके अकाउंट में 20000 रुपए ट्रान्सफर कर दिये ।

“चेक कर लो, तुम्हारे मोबाइल पर मैसेज आ गया होगा ।” मैंने कहा ।

“हाँ, आ गया है ।”

“तो फिर अब तुम मुझे उस आदमी के बारे में बताओ जिसको तुमने कल दोपहर 1 बजे डॉली के फ्लैट में जाते और बाहर निकलते हुए देखा था ।”

“वो राजीव था ।”

“आर यू श्योर, वह राजीव ही था ?”

“100% श्योर ।”

“पर ऐसा कैसे हो सकता है ?”

“क्यों नहीं हो सकता ?”

“क्योंकि 12 बजे से 3 बजे तक राजीव पीवीआर में मूवी देख रहा था । और वहाँ वह अकेला नहीं था बल्कि अंजलि भी उसके साथ थी ।”

“आपको किसने बताया ?”

“मैंने उनसे पूछताछ की थी कि कल वह दोपहर में कहाँ थे ।”

“वो झूठ बोल रहा है ।”

“पर अंजलि भी उसके साथ थी ।”

“वो भी राजीव को बचाने के लिए झूठ बोल रही है । झूठ क्या, वह राजीव के साथ डॉली को फँसाने की साजिश में शामिल है । हो सकता है, वह दोनों शनिवार को दोपहर वाला शो देखने के लिए पीवीआर में गए होंगे । पर राजीव वहाँ से मूवी के दौरान बीच में निकल गया होगा और फिर डॉली के फँसाने के लिए उसके फ्लैट में जाकर ड्रग्स रखकर आया होगा । मैंने देखा था, जाते समय उसके हाथ में एक बैग था जो भरा हुआ लग रहा था, जबकि बाहर आते समय वह खाली था ।”

“तब तुम कहाँ थी ?”

“तुम्हें बताया तो था, तब मैं हमारे फ्लैट में थी ।”

“फ्लैट में कहाँ थी ?”

“मैं मास्टर बेडरूम में थी । मेरे रूम का एसी खराब हो रखा था, उसकी रिपेयरिंग का काम चालू था तो मैं मेरी मॉम को वहाँ छोड़कर थोड़ी देर के लिए मास्टर बेडरूम में चली गई थी ।”

“फिर ?”

“मैंने देखा कि मिस्टर राजीव चाबी से डॉली के फ्लैट का दरवाजा खोल रहे हैं । उनके कंधे पर एक बैग था । मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि मैं जानती थी वह अंजलि का बॉयफ्रेंड था और अक्सर उसके फ्लैट में आता-जाता रहता था । उससे पहले वह डॉली का भी बॉयफ्रेंड रह चुका था ।”

“वो बाहर कितनी देर बाद आया ।”

“टाइम का तो अंदाजा नहीं है, पर लगभग 810 मिनट बाद वह बाहर आ गया था । बाहर आते समय वह पसीने से भीगा हुआ था, हाँफ रहा था और घबराया हुआ लग रहा था । मुझे आश्चर्य तो हुआ था कि वह इस हालत में कैसे और क्यों है ? वह इतनी जल्दी बाहर कैसे आ गया और उसका बैग खाली क्यों लग रहा है ? पर तब मैंने उस बात को इग्नोर कर दिया था । मैं तो उस बात को भूल भी चुकी थी, पर जब तुम परसो शाम को मेरे पापा से मिलने आए और तुमने बताया कि डॉली बेकसूर है । किसी ने उन्हें फँसाने की कोशिश है, और वह वहीं कर सकता है जिसके पास फ्लैट की चाबी हो, तब मेरे दिमाग में एकदम से राजीव के नाम की घंटी बज उठी । वही शनिवार को दोपहर चोरों की तरह डॉली के फ्लैट में गया था । हो ना हो उसी ने डॉली को फँसाने की कोशिश की है ।”

“और अंजलि उसे बचाने के कोशिश कर रही है । उसका कहना है कि वह और राजीव तो दोपहर में पीवीआर में मूवी देख रहे थे । मीन्स वह भी राजीव के साथ उस साजिश में शामिल है ।” मैंने उसकी बात में आगे जोड़ा ।

“बिलकुल ये उन दोनों की ही साजिश है ।”

“पर वह दोनों भला ऐसा क्यों करेंगे ? उन दोनों की डॉली से क्या दुश्मनी है ?”

“एक वजह तो है ।”

“क्या ?”

“राजीव पहले डॉली का बॉयफ्रेंड था, बाद में दोनों में ब्रेकअप हो गया था । फिर राजीव ने अंजलि से फ्रेंडशिप कर ली थी ।”

“ये तो मुझे पता है । डॉली ने बताया था कि उन दोनों ने ब्रेकअप अपनी मर्जी से किया था ।’

“फिर डॉली की लाइफ में उदय ने एंट्री ली थी ।”

“पर उदय का कहना है कि वह डॉली के साथ सिर्फ एक बार ही डेट पर गया था । उसने डॉली को प्रपोज तो किया था, पर डॉली ने मना कर दिया था ।”

“मुझे मालूम है, डॉली ने उदय को क्यों मना किया था ?”

“क्यों किया था ?”

“क्योंकि डॉली वापस से राजीव को हासिल करना चाहती थी । पर राजीव अब अंजलि को छोड़कर वापस डॉली के पास नहीं आना चाहता था । उस दिन शुक्रवार पार्टी में भी डॉली जबरदस्ती राजीव के साथ डांस करने की कोशिश कर रही थी ।”

“शुक्रवार को तुम भी पार्टी में थी ना ?”

“हाँ, थी । और उस पार्टी में ही क्यों, डॉली पहले भी कई बार राजीव को वापस पाने की कोशिश कर चुकी थी, पर राजीव ने हमेशा मना कर दिया था ।”

“पर डॉली ने मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताया ।”

“अब वह क्या बताएगी, सारी गलती उसकी ही थी । उसने ही राजीव को पहले छोड़ा था ।”

“अच्छा ।”

“राजीव उसकी हरकतों से पूरी तरह से इरिटेट हो चुका था । शायद इसलिए उसने अंजलि के साथ मिलकर डॉली को अपने रास्ते से दूर करने का फैसला किया ।”

“पर अगर ऐसा था तो ये कोशिश तो डॉली को करनी चाहिए थी, अंजलि को राजीव से दूर करने के लिए ।”

“पर राजीव तो डॉली के पास आना ही नहीं चाहता था । शायद इसलिए राजीव ने इसे अंजाम दिया । उसने अंजलि के साथ मूवी का प्लान बनाया । मूवी शुरू होते ही वह सिनेमा हॉल से निकल आया और वह ड्रग्स के बैग के साथ डॉली के फ्लैट में गया । उसके पास फ्लैट की चाबी पहले से ही थी । फिर वह डॉली के कमरे में गया, वहाँ उसने ड्रग्स डॉली के यहाँ रखी और खाली बैग के साथ बाहर आ गया । फिर उसने बाहर जाकर पुलिस को डॉली के फ्लैट में ड्रग्स के बारे में बताया होगा और फिर बड़े आराम से जाकर अंजलि के साथ मूवी देखने लगा । अब डॉली बड़े आराम से उसके रास्ते से हट चुकी है ।”

“हम्म, शायद तुम सही कह रही हो । एक मिनट… ।” तभी मैं कुछ सोचकर एकदम से उछल पड़ा था ।

“क्या कहा तुमने ? राजीव मूवी के बीच में से कॉलोनी में आया, एक बैग में ड्रग्स लेकर डॉली के फ्लैट में घुसा और फिर ड्रग्स डॉली के रूम में रखकर खाली बैग लेकर बाहर निकला और पुलिस को ड्रग्स के बारे में बताकर चुपचाप वापस सिनेमा हॉल चला गया ।”

“हाँ, क्यों क्या हुआ ?”

“तुम झूठ बोल रही हो ।” मैं उत्तेजना से चिल्लाकर बोला ।

“नहीं तो, पर तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो ?” वह सकपका गई थी ।

“तुम्हें पता है, डॉली के बैग से पुलिस ने कितनी ड्रग्स बरामद की थी ?”

“हाँ, पता है ! उससे क्या फर्क पड़ता है ?”

“फर्क तो पड़ता है मिस श्री देवी, क्योंकि डॉली के फ्लैट से 11 ग्राम के 100 पैकेट ड्रग्स बरामद हुए थे । यानी कि 100 ग्राम ड्रग्स । मिस संध्या, ये कोई इतनी मात्रा नहीं होती, जिसको बाहर देखने भर ये पता चल जाये कि कमरे में जाते समय कोई बैग भरा हुआ था और कमरे से बाहर आते समय वह बैग खाली था ।”

“हाँ, फिर तो मुझसे बैग के खाली और भरे होने के बारे में जरूर गलतफहमी हो गई होगी । पर मैंने वाकई में राजीव को डॉली के फ्लैट में जाते हुए देखा था ।”

“मैं जानता हूँ मिस श्री देवी कि तुमने डॉली के फ्लैट में किसी को जाते हुए और बाहर आते हुए देखा था, पर... ।” मैंने अपना वाक्य जानबूझकर अधूरा छोड़ा ।

“पर क्या ?”

“पर वह राजीव नहीं कोई और था ।”

“और कौन ?”

“ये तो तुम बताओ, वह और कौन था ?”

“वो और कोई नहीं था, राजीव ही था ।”

“चलो, तुम मुझे मत बताओ वह कौन था, क्योंकि मैं जानता हूँ वह कोई और कौन है ?”

“कौन है ?” उसके मुँह से निकला ।

“तुम्हारे पिताजी मिस्टर रामनाथन । वह गए थे कल दोपहर 1 बजे डॉली के फ्लैट में एक बैग के साथ ।”

“नहीं, ये झूठ है ।’

“यही सच है मिस श्री देवी । और तुम ये बात अच्छी तरह से जानती हो, क्योंकि तुम भी अपने पिता की इस साजिश में शामिल हो ।”

“नहीं, ऐसा नहीं है ।”

“अगर ऐसा नहीं तो फिर बताओ, शनिवार दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक तुम्हारे पापा कहाँ थे ?

“वो... बैंक गए थे ।

“कौन से बैंक गए थे ? कितने बजे गए थे ?”

“एसबीआई, यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई ब्रांच सुबह 10 बजे !”

“किस लिए ?”

“चेक डिपॉज़िट करने के लिए ।”

“और वापस कब आए थे ?”

“22.30 बजे ।”

“चेक डिपॉजिट में इतना टाइम लगता है क्या ?”

“उनको और भी काम था ।”

“क्या ?”

“अब ये मुझे कैसे पता होगा ? हर काम वह मुझे बताकर थोड़े ही ना करते हैं ।”

“पर मुझे पता है, वह 1 बजे डॉली के फ्लैट में घुसे थे और उन्होंने ही ड्रग्स उसके कमरे में उसे फँसाने के लिए रखी थी । चूंकि वह अपने साथ एक बैग लेकर गए थे और तुम्हें वह ही याद रहा, इसलिए तुमने बोल दिया कि राजीव बैग लेकर डॉली के फ्लैट में गया था और ड्रग्स रखकर खाली बैग के साथ बाहर आ गया । पर तुम ये बात बोलते समय ये भूल गई या तुम्हें अंदाजा नहीं था कि डॉली के फ्लैट में ड्रग्स कितनी रखी है ।”

“अगर मैं अपने पापा के प्लान में उनके साथ शामिल थी तो मुझे पता क्यों नहीं होगा कि कितनी ड्रग्स थी ।”

“ओके । तुम्हें पता थी, पर तुम फिर ये बात बेध्यानी में बोल गई कि राजीव का बैग डॉली के फ्लैट में जाते समय भरा हुआ लग रहा था और बाहर आते समय खाली लग रहा था ।”

“तुम... तुम्हारे पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मेरे पापा, डॉली के फ्लैट में गए थे ।”

“चलो, इस बहाने कम से कम तुमने ये तो माना कि तुम्हारे पापा, डॉली के फ्लैट में गए थे ।” कहते हुए मैं मुस्कुराने लगा ।

“वो मैं... ।” वह हड़बड़ाई ।

“अब हकलाने का कोई फायदा नहीं है मिस । तुमने शुक्रवार रात ही डॉली के पैग में ऐसी कोई दवाई मिलाई थी जिससे कि वह कम से कम 810 घंटे तक सोती रही ।”

“नहीं, ये झूठ है । मैंने उसके पैग में ऐसी कोई दवाई नहीं मिलाई ।”

“फिर तुम पार्टी में वह वोदका का पैग पीने के लिए डॉली को बार-बार क्यों फोर्स कर रही थी ?”

“मैंने सिर्फ एक बार डॉली को पैग बनाकर दिया था और वह उसने पिया भी नहीं था ।”

“क्यों ?”

“क्योंकि वह बोल रही थी कि उसने पहले ही बहुत ज्यादा पी ली है तो उसने मेरा पैग साइड में रख दिया था । उसके बाद मैंने उसे पीने के लिए कहा भी नहीं था ।”

“तुमने डॉली को पैग बनाकर क्यों दिया था ?”

“ग्रुप में हम साथ बैठे थे । उसका गिलास खाली हो गया था तो राजीव ने मुझे डॉली के लिए पैग बनाकर लाने के लिए बोला था ।”

“पर तुम्हें ही क्यों बनाकर लाने के लिए बोला था ? पैग तो वेटर भी लाकर दे सकता था ।”

“क्योंकि उस समय हम तीनों ही साथ थे और जहाँ तक मुझे लगता है, राजीव को डॉली से अकेले में कोई बात करनी थी तो उसने पैग लाने के बहाने मुझे वहाँ से भेजा था । उसने मुझे इशारा भी किया था कि मैं आराम से 45 मिनट बाद वापस आऊँ ।”

“अच्छा, हो सकता है ऐसा हुआ हो । पर सुबह 5 बजे जब तुम लोग पार्टी से वापस आए तो तुम इस बात से तो अच्छी तरह से वाकिफ थी कि डॉली पूरी तरह से नशे में बेहोश है और जल्दी ही होश में आने वाली नहीं थी । तुम इतनी सुबह पार्टी से आई थी, इस बात से तुम्हारे पापा भी वाकिफ थे । तुमसे तुम्हारे पापा को पता चला होगा कि डॉली हद से ज्यादा अपने होश खो चुकी है । इस बात का तुम्हारे पापा ने फायदा उठाया और दोपहर 1 बजे वह डॉली के फ्लैट में गए । वहाँ उन्होंने उसके कमरे में ड्रग्स रखी और बाहर वापस आ गए । तुमने राजीव को नहीं, बल्कि तुम्हारे पापा को देखा था डॉली के फ्लैट में आते-जाते हुए । बोलो, ये सच है या नहीं ।”

“पर मेरे पापा भला ऐसा क्यों करेंगे ? वह भला डॉली को ऐसे क्यों फँसाएँगे ? उनको ऐसा करने से आखिर क्या मिलेगा ?”

“अब ये बात तो तुम्हारे पापा बताएँगे । मैं तुम्हारे पापा से मिलना चाहता हूँ, अभी ।” मैंने ‘अभी’ पर ज़ोर डालते हुए कहा, “बताओ, वह कहाँ मिलेंगे ? घर पर ?”

“मुझे नहीं पता ।”

“उनका मोबाइल नंबर दो या वह भी तुम्हें नहीं पता ।”

उसने मोबाइल नंबर बताया । मैंने उसके बताए नंबर पर फोन किया । पता चला, मिस्टर रामनाथन अभी घर पर ही थे और वह मुझसे मिलने के लिए तैयार थे जो कि मेरी उम्मीद के बिलकुल विपरीत था ।

“तो मिस श्री देवी, मैं तुम्हारे पापा से मिलने तुम्हारे घर ही जा रहा हूँ । आ रही हो ?”

“तुम जाओ ।”

“ओके । और हाँ, मैं तुम्हारे अकाउंट से 20 हजार तो वापस नहीं ले सकता, पर ये 30 हजार रुपए का चेक मैं वापस ले रहा हूँ । तुमने अपने पापा को बचाने के लिए मुझे एक गलत नाम बताया । अब तो मुझे लग रहा है कि पैसों की डिमांड भी तुमने इसलिए की थी ताकि मुझे तुम्हारी बात पर भरोसा हो जाए और मैं तुम्हारे पापा पर कोई शक नहीं कर सकूँ । क्यों, सही है ना ?”

“ऐसा कुछ भी नहीं है । मैंने जो भी कहा है, वह सच ही कहा है । बल्कि अब मुझे लग रहा है कि ये 30 हजार का चेक वापस लेने के लिए ही तुम मुझ पर और मेरे पापा पर डॉली के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगा रहे हो ।”

“माइ डियर ! अगर तुम्हें ऐसा लग रहा है तो चलो मेरे साथ तुम्हारे पापा के पास । अगर मैं इस बात को साबित नहीं कर पाया और तुम्हारे पापा ने इस बात के लिए मना कर दिया कि वह शनिवार को दोपहर 1 बजे के करीब डॉली के फ्लैट में गए थे तो बदले में मैं तुम्हें 30 हजार का नहीं, बल्कि 50 हजार का चेक दूँगा । बोलो, मंजूर है ।”

वह खामोश रही ।
 
“तुम्हारी खामोशी इस बात का इकरार है कि कल दोपहर 1 बजे जिस आदमी को तुमने डॉली के फ्लैट में जाते और वहाँ से निकलते हुए देखा था वह राजीव नहीं, बल्कि तुम्हारे पापा थे । अब मैं तुम्हारे पापा के पास जा रहा हूँ । सो प्लीज, अब अगर आप यहाँ से उठने की और बाहर जाने की मेहरबानी करेंगी तो मैं फ्लैट में लॉक लगा लूँ ।”

वह सोफ़े से उठी और फ्लैट से बाहर निकल गई । उसने जाने के बाद मैं भी तुरंत उठा और अपने कपड़े बदलकर फ्लैट को लॉक लगाकर हमारी बिल्डिंग के प्रतिनिधि रामनाथन से मिलने उनके फ्लैट में गया ।

☐☐☐

“आइये बैठिए ।” रामनाथन ने मेरा स्वागत किया ।

“धन्यवाद सर, जो आपने मुझसे मिलना कबूल किया । वरना मुझे तो लग रहा था कि पिछली बार की मुलाक़ात से आप मुझसे खफा हो गए हो और फिर नहीं मिलोगे ।”

“भाई, खफा होने वाली तो कोई बात ही नहीं थी ।”

“अगर नहीं थी तो फिर आपने उस मुलाक़ात की शिकायत इंस्पेक्टर शिवा रेड्डी से क्यों की थी ?”

“अरे, शिकायत नहीं की थी भाई ! वह मुझसे पूछने आए थे कि मैं शनिवार दोपहर को कहाँ पर था ? मैंने उनसे इतना ही पूछा था कि ये डॉली को कोई फँसा सकता है और फँसाने वाला वहीं होगा जिसके पास उसके फ्लैट की चाबी है; यह थ्योरी आपको राज ने बताई है ना । तो आप हर उस शख्स से पूछताछ करने आ गए जिसके पास चाबी है ।”

“अच्छा ! मैंने तो सुना था कि आप मुझ पर मानहानि का मुकदमा करने वाले थे ।”

“अरे, वह तो थोड़ा-बहुत गुस्सा आ गया था, इसलिए मेरे मुँह से निकल गया था ।”

“चलिये, कोई बात नहीं । अब तो अगर मैं आपसे कुछ पूछताछ करूँ तब तो मानहानि की धमकी नहीं देंगे ना ।”

“अरे सर, आप भी ! चलिये पूछिये, आपको क्या पूछना है ?”

“वही जो पहले पूछा था । आप बताइये, आप शनिवार दोपहर उसके फ्लैट में गए थे या नहीं ।”

“अरे नहीं भाई, नहीं गया था ।”

“तो फिर उस समय आप कहाँ थे ?”

“भाई, ये मैंने उस दिन भी बताया था ।”

“नहीं सर, उस दिन तो मैंने ये सवाल आपसे पूछा ही नहीं था ।”

“अच्छा, नहीं पूछा था ! मुझे तो याद है, शायद पूछा था । खैर, मैं उस दिन चेक जमा कराने के लिए एसबीआई बैंक की यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई ब्रांच में गया था ।”

“पर चेक जमा कराने के लिए आप सारा दिन तो बैंक में रहे नहीं होंगे ।”

“हाँ, वह तो है ।”

“फिर बताइये, बैंक में चेक जमा करवाने के बाद आप कहाँ गए थे ?”

“उसके बाद... हाँ, याद आया । बैंक से निकलते-निकलते 12 से ज्यादा बज गए थे । उसके बाद गर्मी बहुत तेज थी तो मैं वहीं गच्चीबोली में कोल्ड ड्रिंक्स पीने के लिए कूल कैफे गया था ।”

‘साले, किसे पागल बना रहा है ? एसी गाड़ी में भला किसी को गर्मी लगती है ?’ मन ही मन सोचते हुए मैंने कहा, “वहाँ भी आप पूरे टाइम तो रहे नहीं होंगे ।”

“नहीं । मैंने करीब 4050 मिनट वहीं पर गुजारे थे । इतने में 1 बज गया था । फिर वहाँ से निकला और घर पहुँचा, तब तक शायद 2 बज चुके थे ।”

‘वाह ! कोल्ड ड्रिंक पीने में इतना टाइम !’

“आपको 1520 मिनट का सफर तय करने में 1 घंटा लग गया ?”

“अरे भाई, अब मैं जवान तो रहा नहीं, जो गाड़ी को एरोप्लेन बनाकर दौड़ाता हूँ । अब मैं एक रिटायरमेंट बुड्ढा हूँ, गाड़ी धीरे ही चलाता हूँ । और हाँ, याद आया । कॉलोनी के अंदर प्रवेश लेने से पहले गाड़ी एक चाय की थड़ी पर भी रोकी थी, जहाँ मैंने 1015 मिनट स्मोकिंग भी की थी । वह क्या हैं ना, मेरी बेटी को मेरा स्मोकिंग करना पसंद नहीं है । हाहाहा... ।” अंदर रसोई से चाय की ट्रे लेकर आती हुई श्री को देखकर उसने हँसते हुए कहा ।

श्री ने चाय और बिस्किट की ट्रे वहाँ टेबल पर रखी और वापस अंदर चली गई ।

‘वाह बेटी, खुद हर वक़्त तो दारू-सिगरेट और ड्रग्स के नशे में रहती है और बाप का सिगरेट पीना पसंद नहीं है । और लगता है पिछली बार बेटी का झुकना बाप ने देख लिया था, जो इस बार चाय हाथों में देने के बजाय टेबल पर रखकर चली गई ।’

“अच्छा ।”

“हाँ ! लीजिये, चाय पीजिए ।” उसने चाय का एक कप मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा ।

“अच्छा, अब मैं एक बात कहूँ तो आप गुस्से में मत आइएगा ।” मैंने चाय का सिप लेते हुए कहा ।

“बोलो, क्या कहना चाहते हो ?”

“आप झूठ बोल रहे हैं कि आप दोपहर 2 बजे कॉलोनी में अपने घर वापस आए थे ।”

“आप ऐसा कैसे कह सकते हैं ?’

“क्योंकि मेरे पास एक गवाह है, जिसने आपको 1 बजे डॉली के फ्लैट में जाते और फिर बाहर निकलते हुए देखा है ।”

“तुम ब्लफ़ मार रहे हो । तुम्हारे पास ऐसा कोई गवाह नहीं है ।”

“मैं ब्लफ़ नहीं मार रहा । मेरे पास वाकई ऐसा गवाह है, जिसने आपको देखा था ।”

“फिर तुम्हारा गवाह झूठ बोल रहा है ।”

“मेरा गवाह झूठ नहीं बोल सकता ।”

“क्यों तुम्हारा गवाह क्या सत्यवादी राजा हरीशचन्द्र है ?”

“नहीं, पर आप भी उस गवाह को अच्छी तरह से जानते हैं । उसको झूठ बोलने की कोई जरूरत ही नहीं है ।”

“ऐसा कौन-सा गवाह है जिसे मैं भी जानता हूँ ।”

“वो आपकी ही बेटी श्री है । श्रीकुट्टी ।”

“तुम झूठ बोल रहे हो । उसने मुझे नहीं बल्कि राजीव को डॉली के फ्लैट से... ।” कहते हुए उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी ।

“आपको ये बात कैसे पता है ?”

उसने कोई जवाब नहीं दिया ।

“श्री ने बताया ? अगर बताया तो कब बताया ? अभी या पहले ? अगर पहले ही ये बात उसने आपको बता दी थी तो फिर ये बात आपने पुलिस से क्यों छुपाई, वह भी मेरे द्वारा ये बताने पर कि डॉली को किसी ने फँसाया है ? पर आप ये बात पुलिस को कैसे बताते, क्योंकि राजीव तो उस समय पीवीआर में मूवी देख रहा था । इसका मतलब है श्री झूठ बोल रही है । अब वह झूठ क्यों बोल रही है ? क्योंकि उसने किसी और को नहीं बल्कि आपको डॉली के फ्लैट में जाते हुए, फिर बाहर निकलते हुए देखा था । क्यों मिस्टर रामनाथन, मैं सही बोल रहा हूँ ना ?”

वह खामोश रहा ।

“आपकी खामोशी बता रही है कि मैं जो भी कह रहा हूँ सच कह रहा हूँ । डॉली को फँसाने की सारी साजिश आपने और आपकी बेटी दोनों ने मिलकर की है । उस दिन जब मैं आपसे मिलने आया और आपको बताया कि डॉली को ड्रग्स के केस में फँसाया गया है और उसको फँसाने वाला कोई जानकार ही है, जिसके पास उसके फ्लैट की चाबी है तो आप घबरा गए । आपको लगा कि आप जल्दी ही पुलिस की गिरफ्त में आ जाएँगे, इसलिए जैसे ही मैं आपके फ्लैट से निकला तो आपने मेरे पीछे-पीछे अपनी बेटी को भी भेज दिया । उसे आपने ये सीखा कर भेजा था कि वह जाकर मुझे ये बोले कि उसने किसी को दोपहर के 1 बजे डॉली के फ्लैट में जाते हुए और फिर वहाँ से बाहर निकलते हुए देखा था । पर आपने भी ये बात डायरेक्ट बताने के लिए नहीं, किस्तों में बताने के लिए कहा, ताकि मैं पूरी तरह से उस पर विश्वास करने लगूँ । उसने मेरे फ्लैट में आकर मुझसे कहा कि डॉली के मामले में वह मेरी मदद कर सकती है । बड़ी ही चालाकी से उसने शाम का अपना डिनर मेरी तरफ से बोला ।”

“मेरी बात सुनो नौजवान ।”

“पहले आप मेरी पूरी बात सुनिए सर । रात को डिनर के दौरान उसने कुछ भी बताने से पहले मुझसे पैसे की डिमांड की और ये बोला कि मैं इस बारे में डॉली से बात करूँ कि वह उसे 50 हजार रुपए दे दे । ताकि मुझे उस पर विश्वास हो जाए कि वह सच बोल रही है । जाते-जाते उसने मुझे हिंट दिया कि उसने किसी को डॉली से फ्लैट में जाते हुए और बाहर आते हुए देखा था । फिर आज जब मैंने उसे 20 हजार रुपए नकद और 30 हजार का चेक दिया तो उसने नाम इस तरह से बताया कि मुझे सच में विश्वास हो जाए कि वह राजीव ही है जिसने डॉली को फँसाने की कोशिश की है ।”

“अगर तुम्हारी बात खत्म हो गई हो तो मैं अब कुछ कहूँ ।”

“कहिए, आप क्या कहना चाहते हैं ?”

“ये सच है कि मैं कल दोपहर 1 बजे डॉली के फ्लैट में गया था और ये भी सच है कि श्री ने वहाँ मुझे ही देखा था । पर ये झूठ है कि मैंने उसे फँसाने के लिए उसके रूम में ड्रग्स रखी थी । मैं उसके फ्लैट में किसी और वजह से गया था और 57 मिनट बाद ही वापस आ गया था ।”

“57 मिनट तो बहुत होती है किसी के कमरे में जाकर ड्रग्स रखने के लिए । पर अगर आप वहाँ ड्रग्स रखने के लिए नहीं गए तो फिर किस वजह से गए थे ?”

“वो वजह मैं तुम्हें अभी नहीं बता सकता । पर मेरा यकीन करो, ये काम मैंने नहीं किया है । और रही बात श्री की तो वह इसमें दूर-दूर तक शामिल नहीं है । उसे मालूम ही नहीं था कि मैं डॉली के फ्लैट में जाने वाला हूँ । श्री ने मुझसे पूछा भी था कि मैं वहाँ क्यों गया था, लेकिन वह वजह मैं उसे भी नहीं बता सकता था । बाकी उसने तुमसे आकर जो भी कहा था, वह मेरे कहने पर नहीं बल्कि अपने आप अपनी समझ के अनुसार कहा था । शायद उसे लगा था कि मैं डॉली के फ्लैट में गया था तो उसके रूम में ड्रग्स मैंने रखी थी । अगर मुझे मालूम होता कि वह परसो शनिवार को तुम्हारे यहाँ से जाने के बाद तुमसे मिलकर ऐसा कुछ बताने वाली है तो मैं उसे तुम्हारे पास कभी जाने ही नहीं देता ।”

“अच्छा !” मैं व्यंग्य से बोला ।

“बरखुरदार ! मुझे मालूम है, तुम मुझ पर विश्वास नहीं कर रहे हो, पर यकीन मानो, यही सच है ।”

“और कुछ कहना है आपको ?”

“एक बात और है कहने की । सोच रहा हूँ, मैं तुमसे कहूँ या नहीं ।”

“क्यों, कहने में क्या प्रॉब्लम है ?”

“क्योंकि कहने का कोई फायदा नहीं है । मुझे पता है, तुम मुझ पर विश्वास नहीं करोगे ।”

“कहने में कुछ नुकसान भी तो नहीं है । कह दीजिये जो भी कहना है ।”

“जब मैं डॉली के फ्लैट से बाहर आया था और तुम्हारे फ्लैट की बगल वाली सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था तो मैंने लिफ्ट की तरफ किसी को जाते हुए देखा था ।”

“तो क्या हुआ ? वह तो अपनी बिल्डिंग में रहने वाला कोई भी हो सकता है ।”

“अगर ऐसा होता तो मैं तुम्हें ये बात क्यों बताता ? वह मुझे राजीव लगा था । और राजीव इस बिल्डिंग में सिर्फ डॉली के फ्लैट में ही आता-जाता है ।”

“आप झूठ बोल रहे हैं ।”

“मैंने कहा था ना, तुम मुझ पर विश्वास नहीं करोगे । क्योंकि तुम्हारे हिसाब से तो राजीव, अंजलि के साथ पीवीआर में मूवी देख रहा था ।

“हाँ ।”

“पर वह झूठ बोल रहा है । अंजलि भी उसे बचाने के लिए झूठ बोल रही है ।”

“हाँ, बस आप ही सच बोल रहे हैं ।”

“हाँ, मैं सच बोल रहा हूँ । ये मत भूलो कि मैं ये भी स्वीकार कर रहा हूँ कि मैं डॉली के फ्लैट में गया था ।”

“पर ये बात क्या आप पुलिस को बता सकते हैं कि आप डॉली के फ्लैट में गए थे ?”

“नहीं ! पर तुम डॉली को बेकसूर साबित करने के लिए निकले हो और अगर राजीव, डॉली को फँसाने वाला साबित हो जाता है तो मैं उसके फ्लैट में गया था या नहीं, ये बात बेमानी है । बोलो, है कि नहीं ।”

“आप सही कह रहे हैं, पर राजीव को गुनहगार साबित करने वाला एक भी पॉइंट नहीं है, सिवाय आपके इस झूठ के कि आपने उसे शनिवार दोपहर बिल्डिंग में जाते हुए देखा था । उसमें भी आप श्योर नहीं है कि वह वास्तव में राजीव ही था । वह कोई और भी हो सकता है ।” मैं सोचते हुए बोला, “इस बिल्डिंग के किसी फ्लैट का निवासी भी । ऊपर से आप ये भी नहीं बता रहे कि आप डॉली के फ्लैट में क्यों गए थे ?”

वह सोचने लगा । थोड़ी देर बाद वह बोला, “अगर मैं यह बता देता हूँ कि मैं डॉली के फ्लैट में क्यों गया था, तब तो तुम मुझे अपने शक के दायरे से बाहर करोगे ?”

“आपकी बात सुने बिना कह नहीं सकता ।”

“ठीक है, सुनो । पर ध्यान रहे, ये बात सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच रहनी चाहिए । मेरी बेटी को या किसी और को पता नहीं चलनी चाहिए ।” उसने अपनी आवाज को इतना धीरे करके कहा, जिसे मैं बड़ी मुश्किल से सुन पाया था । मैंने सहमति से सिर हिलाया ।

“ओके, तो सुनो । तुम्हारी ये सो कॉल्ड शरीफ और बेकसूर डॉली, हो सकता है ड्रग्स सप्लाई के मामले में निर्दोष हो, पर फिर भी, वह इतनी मासूम नहीं है जितनी अपने आपको बताती है ।”

“आप कहना क्या चाहते हैं ?”

“शी इज अ ब्लैक मेलर । वह मुझे ब्लैक मेल कर रही थी ।”

“वॉट !” मैं ये सुनकर शॉक में चिल्ला उठा था ।

“धीरे मिस्टर ! थोड़ा-सा धीरे बोलो । मेरी बेटी सुन लेगी । मैं इसलिए अभी तुम्हें कुछ नहीं बताने वाला था ।”

“सॉरी । पर आपने बात ही ऐसी कही थी कि मैं शॉक हो गया था । पर क्या आप सच कह रहे हैं ?”

“हाँ । मुझे झूठ बोलने से क्या हासिल होगा ? मैं पिछले 6 महीने से हर महीने उसे ब्लैक मेल के रूप में 20 हजार रुपए दे रहा था । मैं हर महीने के ब्लैक मेल के इस सिलसिले से तंग आ गया था, इसलिए मैंने उससे बात की थी और एकमुश्त रकम माँगने के लिए बोला था । हमारी बात 8 लाख में खत्म हुई थी । मैं बैंक से वहीं 8 लाख रुपए लेकर आया था और एक बैग में रखकर डॉली के फ्लैट में गया था । उसके फ्लैट का लॉक तो मैंने उससे हासिल हुई चाबी से खोल लिया था, पर डॉली के कमरे में नहीं जा पाया था । उसका कमरा या तो अंदर से बंद था या फिर वह कमरे में नहीं थी । पर कमरे में ना होने की कोई वजह नहीं थी, क्योंकि मेरी और उसकी मुलाक़ात का वही वक़्त हमने फिक्स किया था । मैंने उसे बहुत आवाज दी । उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया, पर उसने दरवाजा नहीं खोला । वह वाकई शायद गहरे नशे में थी । मेरे पास उसके रूम की चाबी नहीं थी, इसलिए मैं अंदर नहीं जा सकता था । आखिरकार 57 मिनट की कोशिश के बाद थक-हारकर मैं उसके फ्लैट से बाहर निकला, दरवाजा लॉक किया और वापस आ गया ।”

“पर ब्लैक मेल करने की कुछ बुनियाद होती है, वजह होती है । उसके पीछे ऐसा कुछ काला कारनामा होता है जिसकी वजह से कोई किसी को ब्लैक मेल करता है । आपने ऐसा क्या किया था, जो वह आपको ब्लैक मेल कर रही थी ?” मैंने सोचते हुए पूछा ।

“काला कारनामा नहीं, एक गलती थी जो मुझसे अनजाने में हो गयी थी ।”

“क्या ?”

“मेरे पास उसके फ्लैट की चाबी थी । चाबी कैसे आई, ये तुमको पता ही है । वह कई बार मुझसे हँस-हँसकर बातें करती थी । अपना फ़िगर शो करती थी । यूं कहो, लाइन देती थी । आज से 6 महीने पहले एक बार वह मुझे लिफ्ट में मिली थी । उसकी बातों से मुझे लगा कि वह अभी फ्लैट में अकेली है और मुझे अंदर आने के लिए इनवाइट कर रही है । मेरी मति मारी गई थी जो मैं उसके फ्लैट का ताला खोलकर अंदर चला गया । फ्लैट का दरवाजा अंदर से बंद किया । मैंने देखा, उसके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था । मैं अंदर गया तो पाया वह बाथरूम से बाहर निकल रही थी । उसने अपने बदन पर सिर्फ एक टॉवल लपेटा हुआ था । मुझे लगा था कि वह ये सब मुझे जानबूझकर दिखा रही है । मैं उसके पास चला गया और उसको अपनी बाँहों में भरने की कोशिश की । उसे पता नहीं क्या हुआ, उसने मुझे धक्का मारकर दूर किया और भला-बुरा कहने लगी । मुझे लगा, उसे समझने में गलती हो गई तो मैं माफी माँगकर जल्दी से उसके फ्लैट से बाहर आ गया । 24 दिन शांत रहे, फिर एक दिन उसने मुझे मिलने के लिए अपने फ्लैट में बुलाया । मैं गया पर सावधानी के तौर पर इस बार मैंने फ्लैट का मुख्य दरवाजा खुला ही रखा । पर मेरी सारी सावधानी उस समय धरी की धरी रह गई, जब उसने अपने मोबाइल पर उस दिन की घटना का वीडियो दिखाया । मेरे तो होश ही उड़ गए थे । मैं उसके हाथ-पैर जोड़ने लगा और वीडियो डिलीट करने के लिए कहा, तब उसने अपने असली रंग दिखाये । उसने मुझसे हर महीने 20 हजार रुपए देने के लिए कहा और ये धमकी दी कि अगर किसी महीने रकम नहीं पहुँची तो वह वीडियो लेकर पुलिस के पास चली जाएगी । तब से मजबूरन मैं हर महीने उसे 20 हजार रुपए दे रहा हूँ ।”

‘ओह्ह माइ गॉड ! डॉली इतनी खतरनाक लड़की है ! कहीं इसलिए तो वह मुझे भी तो लाइन नहीं दे रही थी । कहीं मेरे साथ भी तो... । नहीं-नहीं । यार, वह ऐसी तो नहीं लगती है ।’

“क्या सोचने लग गए तुम ? लगता है तुम्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं है ।”

“नहीं, ऐसी बात नहीं है । पर मुझे एक बात बताइये, आपको ऐसा क्यों लगा कि वह आपको लाइन दे रही थी । आप एक 60 साल के रिटायर्ड बुड्ढे... आई मीन आदमी और वह 22 साला एक नौजवान लड़की, फिर भी वह आपको लाइन देगी, ये बात कुछ हजम नहीं हुई ।”

“अब तुम मानो या ना मानो, पर ये सच है ।”

“अच्छा, ठीक है । फिलहाल तो मैं आप पर विश्वास कर लेता हूँ, पर आप मेरे शक के दायरे से बाहर नहीं निकले हैं । मैं इस ब्लैकमेलिंग के बारे में पहले डॉली से बात करूँगा ।”

“डॉली से बात !” उसने चौंककर कहा, “मैंने तुमसे पहले ही कहा था ना तुम ये बात किसी को नहीं बताओगे ।”

“आपने पुलिस को बताने के लिए मना किया था । वह फिलहाल मैं नहीं बताऊँगा ।”

“फिलहाल से क्या मतलब है तुम्हारा ?”

“फिलहाल का मतलब फिलहाल होता है । नमस्ते ।” कहते हुए मैं उठ खड़ा हुआ ।

पीछे वह कुछ बुदबुदाने लगा, पर क्या ये मैं सुन नहीं सका था ।

☐☐☐
 
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