S
StoryPublisher
Guest
मैंने अपना रुमाल उसकी और बढ़ाया। उसने मेरा रुमाल लेने की बजाय अपने पर्स से अपना रुमाल निकाला और अपनी गीली आँखों को पोंछा।
"मैंने सुना है कि रिंकी भी उसे समझाती थी,रिंकी की बातों का उसपर क्या असर होता था?"
"रिंकी को मेरी बहुत फ़िक्र रहती थी,वो चाहती थी की मै उससे ब्रेकअप करके अभी अपनी स्टडी पर ध्यान दूँ, उसने कई बार जय को ड्रग्स लेने के लिए लताड़ा भी था"
"कहीं ऐसा तो नहीं की रिंकी का तुम्हारे और उसके बीच में दखलंदाजी करना उसे पसंद न आया हो और उसने रिंकी को रास्ते से हटा दिया हो?
ये सुनकर रिंकी मेरी और अवाक नजरो से देखने लगी।
"ये क्या बोल रहे है सर आप? जय ऐसा कभी नहीं कर सकता"
"बुरा मत मानना!लेकिन एक नशे का आदि इंसान गुस्से में कुछ भी कर सकता है?"
"क्या जय और रिंकी के बीच में तुम्हे लेकर कोई कहासुनी या कोई लड़ाई झगडा कभी हुआ था" मैंने डॉली से पुछा।
"नहीं मेरी जानकारी में या मेरे सामने ऐसी लड़ाई झगड़े वाली तो कोई बात कभी सामने नहीं आई,हां जब कभी रिंकी उसे समझाने की कोशिश करती थी तो वो गुस्सा जरूर हो जाता था! लेकिन वो गुस्सा वो मुझ पर उतरता था! और रिंकी से दोस्ती खत्म करने को बोलता था"
"बिलकुल सच बोल रही हो" मैंने डॉली के चेहरे को पढ़ने की कोशिश की।
"बिलकुल सच बोल रही हूँ सर! आपकी कसम" ये बोलकर डॉली शरारत से मुस्करा दी। कॉलेज से लेकर अब तक पहली बार डॉली के चेहरे पर पहली बार मुस्कान आई थी।
"ठीक है मुझे लगता है कि तुम मेरी कसम झूठी नहीं खाओगी? ये बोलकर मै भी हल्का सा मुस्कराया।
"सर लोगो को ये प्यार व्यार क्यों हो जाता है,और अगर हो भी जाता है तो ये इंसान की जिंदगी को इतना बदल क्यों देता है"अचानक से डॉली गंभीर हो गयी थी।
"प्यार से ही ये संसार चलता है डॉली, अगर प्यार न हो तो ये संसार भी नहीं रहेगा। मैंने भी दार्शनिको वाले अंदाज में डॉली को जवाब दिया।
"मुझे बताओगे की जय को सुधारने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? "
"मेरा प्रेम के विषय में अनुभव बिलकुल जीरो है! मेरे दिल की घण्टी तो हर हसीन लड़की को देखकर बज उठती है और मुझे उस पल ऐसा लगता है कि जो लड़की इस समय मेरे सामने खड़ी है मुझे उससे प्यार हो गया है और इस तरह मुझे हर रोज लगभग 20-25 लड़कियो से तो प्यार हो ही जाता है और फिर वो सारी हसीनाएं मुझे सपनो में परेशान करती है" मैं डॉली की बातों को अनसुना करके प्यार की अपनी ही फ़िलॉसफ़ी बता रहा था।
मेरी बात सुनकर डॉली खिलखिला पड़ी।
"इसे प्यार नहीं फ़्लर्ट करना बोलते है सर"
" चाहे जो भी बोलते हो मेरे लिए तो यही प्यार है,और मै इससे आगे कभी बढ़ता भी नहीं हूँ,क्योकि मेरे लिए हर हसींन लड़की एक सुंदर प्रतिमा के सामान है और सुंदरता का कोई भी पुजारी कभी अपनी प्रतिमा को खंडित नहीं करता" आज मेरे अंदर का दार्शनिक रह रह कर बाहर आ रहा था।
"सर मैंने आपसे पुछा था कि मुझे जय को सुधारने के लिए क्या करना चाहिए"
"थोड़े दिनों के लिए अपना बॉयफ्रेंड बदल लो, फिर तेल देखो और तेल की धार देखो, अगर वो तुम्हारे पास आये तो बोल देना, या तो ड्रग छोडो या फिर मुझे"
"लगता है आप मेरा भी मर्डर करवाना चाहते हो,जय तो मुझे जान से ही मार डालेगा ?
"जैसे रिंकी को मार डाला वैसे ही तुम्हे भी मार डालेगा क्या? मैंने अचानक अपनी टोन बदल कर डॉली की आँखों में झाँका।
एक पल को मेरी बात सुनकर डॉली बिलकुल सहम गयी फिर अचानक बोली।
"सर गाडी रोको, मेरा घर आ गया है"
मैंने फ़ौरन गाडी रोकी और डॉली बिना कुछ बोले गाडी का दरवाजा खोल कर बिना मेरी तरफ देखे सीधा चली गई। मैंने शायद डॉली की किसी दुखती रग को दबा दिया था? मैंने अपनी गर्दन को हल्का सा झटका दिया और अपनी गाड़ी को वापस कमला नगर थाने की और दौड़ा दिया,जहाँ मुझे इंस्पेक्टर रंगीला से मिलना था।
लगभग एक घण्टे के बाद मै कमला नगर थाने में इंस्पेक्टर शर्मा के सामने बैठा था। मैंने सबसे पहले उन्हें राजेश के बारे में बताया। राजेश की बात सुनकर इंस्पेक्टर शर्मा की आँखे चमक गयी।
" मुझे लगता है कि इस केस में राजेश सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है" इंस्पेक्टर रंगीला बोले।
" लेकिन सर ?हम एकदम से इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते है कि राजेश ही रिंकी का क़त्ल करके फरार हुआ है,क्योकि अगर वो फरार होता तो वो रिंकी के क़त्ल के बाद रूबीना का फ़ोन नहीं उठाता?"मैंने रंगीला जी के सामने अपना तर्क रखा।
"वो तो इसलिए भी उठा लिया होगा की शायद वो जानना चाहता हो की कॉलेज में इस वक़्त क्या चल रहा है?
"नहीं सर ! ये सब कुछ इतना सीधा नहीं हैं ! जितना हम सोच रहे है? सबसे पहले तो हमें राजेश को खोजना चाहिए,कही ऐसा न हो की डॉली और राजेश दोनों ही किसी साजिश का शिकार हो गए हो? क्योकि उस दिन के बाद से राजेश का फ़ोन भी बंद आ रहा है" मैंने रंगीला जी के आगे आशंका जाहिर की।
"ठीक है मै राजेश का मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस करवाता हूँ , और उसकी कॉल हिस्ट्री भी चेक करवाता हूँ!इंस्पेक्टर रंगीला शायद मामले की गम्भीरता को समझ चुके थे।
"थैंक्यू राज,आपने इस ब्लाइंड केस में एक महत्वपूर्ण लीड हमे दी है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरा आभार जताते हुए कहा।
"सर अभी तो बहुत कुछ बाकी है इस केस में शायद थोड़ा सा वक़्त लगे इस केस को सुलझाने में लेकिन सुलझा लेगें सर" मैंने विश्वास पूर्वक कहा।
"सर एक बात और कॉलेज में एक ड्रग गैंग भी काम कर रहा है,और कोई वसीम भाई करके उस कॉलेज में ये धंधा चला रहा है,एक बार उसे भी धर लो सर !शायद इस केस में कुछ मदद मिल जाए? मैंने रंगीला जी को बोला।
"ठीक है मै कल ही शादी वर्दी में एक टीम कॉलेज में तैनात कर देता हूँ,जो इस वसीम को धर लेगी,लेकिन उसका इस केस से क्या वास्ता ?रंगीला जी ने मेरी और सवालिया निगाहों से देखा।
फिर मेरी मजबूरी बन गयी रिंकी डॉली और जय की पूरी कहानी इंस्पेक्टर रंगीला को सुनाने की। पूरी कहानी सुनने के बाद इंसेक्टर रंगीला गहरी सोच में डूब गए।
"सर हमे इस केस को और इन बच्चो को बहुत सावधानी से हैंडल करना होगा! इनके साथ सख्ती से नहीं प्यार से बातो बातो में सब कुछ पता करवाना है, मै इसी कोशिश में लगा हुआ हूँ,ये भी इस क़त्ल में एक एंगल हो सकता है" मैंने एक तरीके से रंगीला जी को बच्चो के साथ पुलिसिया तरीको से परहेज रखने को बोला।
"हम्म राज! मै भी समझता हूँ! तुम फ़िक्र मत करो तुम अपने तरीको से काम करो! मै अपने तरीको से इन पर नजर रखता हूँ!किसी को भी परेशान नही करेगे" मुझे रंगीला जी ने आश्वासन दिया।
अब मैंने इंस्पेक्टर साहब से विदा ली और अब अपनी गाड़ी को शास्त्री नगर की और दौड़ा दी,जहाँ अब उमेश थपलियाल के रिश्तेदारों को टटोलना था।
मै कोई 20 मिनट के बाद शास्त्री नगर में रिंकी के घर पहुंचा। उमेश जी मुझे घर के बाहर ही मिल गए। मुझे देखकर वो मेरे पास आ गए।
"जी कुछ पता लगा" उमेश जी की बेकरारी मै समझ सकता था।
"पता तो बहुत कुछ लगा है,लेकिन अभी मै उसका खुलासा नही कर सकता आपसे" मैंने उमेश जी को बोला।
"मुझे आपके भतीजे अनुज से कुछ बात करनी है,वो कहाँ मिलेगा अभी" मैंने उमेश जी से पुछा।
"जी वो अंदर ही है! बुलाऊ क्या उसे? उमेश जी ने मुझ से पुछा।
"यहाँ नही उसे ऊपर छत पर ही भेजिए, मै अभी उससे अकेले में बात करना चाहता हूँ" मैंने उमेश जी को बोला।
"ठीक है पहले मै आपको ऊपर छोड़, आता हूँ,फिर मै अनुज को ऊपर भेज देता हूँ" उमेश जी ने मुझे बोला।
मै उमेश जी के साथ ऊपर छत की और जाने लगा,उमेश जी मुझे छत पर छोड़कर अनुज को बुलाने नीचे चले गए। थोड़ी देर में चाय की ट्रे के साथ अनुज ऊपर आया। मेरे ख्याल से चाय के बहाने से उमेश जी ने अनुज को ऊपर भेजा था।
"क्या नाम है आपका" मैंने चाय का मग हाथ में लेते हुए कहा।
"जी अनुज" अनुज ने मुझे इतना ही बोला।
"क्या करते हो" मैंने बात करने के लिए थोड़ी भूमिका बांधनी चाही।
"जी अभी तो गांव में ही खेती का काम देखता हूँ,और एक छोटी सी दुकान भी है वहां" अनुज ने मुझे बताया।
"खेती और दूकान से गुजर बसर हो जाता है" मैंने अनुज को टटोलना चाहा।
"जी बस हो ही जाता है" अनुज ने बुझे से स्वर में कहा।
" महरोली कैसी लगती है तुम्हे" मैंने अनुज से पुछा।
"कभी यहाँ बसने का ख्याल नहीं आया की जब तुम्हारा आधा परिवार यहाँ महरोली में रहता है तो तुम भी आकर यहाँ रहो" मैंने अनुज के अरमानो को जानना चाहा।
"मन तो बहुत करता है लेकिन गांव में भी तो हमारा परिवार है उनका भी तो ख्याल रखना है" सुनिल ने कहा।
"अच्छा अब रिंकी तो रही नहीं फिर अब यहाँ तुम्हारे ताऊ और ताई का ख्याल कौन रखेगा?" मै असली बात पर आते हुए बोला।
"पता नहीं अभी मुझे?जैसे घर के बड़े चाहेंगे,वैसा ही होगा" अनुज ने समझदारी भरा जवाब दिया।
"अच्छा उस दिन रिंकी के कॉलेज का वो डांस प्रोग्राम कैसा लगा? जिस दिन रिंकी के साथ ये हादसा हुआ था" मैंने अचानक से अपना ब्रह्मास्त्र सुनिल के ऊपर चलाया।
"जी अच्छा.....???? बोलकर अनुज की जुबान मुंह में ही अटक गयी।
"क्या हुआ ? बोलते बोलते रुक क्यों गए,अच्छा नही था क्या वो प्रोग्राम ? मैंने अनुज की आँखों में अपनी आँखे डालकर पुछा।
"जी वो....वो...आप क्या पूछ रहे है मै समझा नहीं" अनुज अब कुछ सम्हलते हुए बोला।
"मैंने तो हिंदी में ही पुछा है,फिर भी समझ नहीं आया तुम्हे" अब मै अनुज को अपने सवालो के जाल में उलझा लेना चाहता था।
"मै कैसे जाऊँगा रिंकी के कॉलेज में, मै तो उस दिन गांव में था" अनुज ने साफ़ साफ़ झूठ बोला।
"देखो बेटा,अगर सच सच बताओगे तो शायद मै तुम्हे बचा लू,नही तो अगर मैंने तुम्हे सच बताया तो बहुत बुरे फसोगे" मैंने चेतावनी भरे अंदाज में अनुज को कहा।
"मै सच ही बोल रहा हूँ,मै उस दिन गांव में ही था" अनुज अभी भी सच नहीं बोल रहा था।
"मतलब तुम सच अपने मुंह से नहीं बताओगे,पुलिस स्टेशन पहुंच कर थर्ड डिग्री के इस्तेमाल के बाद ही बताओगे" मैने अब अनुज को डराना चाहा।
"मै सच बोल रहा हूँ सर,मै रिंकी के कॉलेज में नहीं गया था उस दिन" अनुज अभी भी अपनी बात पर अडिग था।
"रिंकी को क्यों मारा तुमने? सच सच बोलो? नहीं तो तुम्हे पता नहीं अगले कुछ पलों में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है? मैंने अब उससे सीधा सवाल किया।
"आप क्यों मुझ पर झूठा इल्जाम लगा रहे हो? मै क्यों मारूँगा अपनी ही बहन को?वो तो मुझ से सबसे ज्यादा प्यार करती थी" अनुज ने बोला।
"मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि तुम उस दिन रिंकी के कॉलेज में थे!जबकि तुम उस दिन यहाँ रिंकी के घर पर नहीं आये थे!फिर उसके कॉलेज क्या करने गए थे? मै इतनी आसानी से अनुज का पीछा नही छोड़ सकता था।
" मै सच बोल रहा हूँ सर मै उस दिन महरोली में ही नहीं था,चाहे तो मेरे पापा से पूछ लो,फिर मै कैसे रिंकी के कॉलेज पहुंच जाऊँगा?" अनुज या तो कोई मंझा हुआ खिलाड़ी था या वो सच में सच ही बोल रहा था,मुझे तो अब डॉली के दावे पर भी संदेह होने लगा था।
"ठीक है बरखुरदार!अभी के लिए तो मै तुम्हारी बात मान लेता हूँ,लेकिन बिना पुलिस की परमिशन के महरोली छोड़कर मत जाना" मै पुलिसिया अंदाज में उसे चेतावनी देकर नीचे की और चल दिया। वो बन्दा बस अवाक भाव से खड़े खड़े मुझे जाते हुए देखता रहा।
मै अभी डॉली से एक बार और इसकी शिनाख्त करवा लेना चाहता था,क्योकि उस दिन वो भी अपनी स्टेज परफॉर्मेन्स को लेकर बिजी थी, कही उसे कोई ग़लतफहमी हो गयी हो?
मै शास्त्री नगर से सीधा अपने घर पहुंचा और खाना खाकर खुद को बिस्तर के हवाले कर दिया। लेकिन मुझे क्या खबर थी की अगली सुबह इतनी बुरी खबर लेकर आएगी?
डॉली अपने कमरे में पंखे से लटकी पाई गई थी।
**********************
"मैंने सुना है कि रिंकी भी उसे समझाती थी,रिंकी की बातों का उसपर क्या असर होता था?"
"रिंकी को मेरी बहुत फ़िक्र रहती थी,वो चाहती थी की मै उससे ब्रेकअप करके अभी अपनी स्टडी पर ध्यान दूँ, उसने कई बार जय को ड्रग्स लेने के लिए लताड़ा भी था"
"कहीं ऐसा तो नहीं की रिंकी का तुम्हारे और उसके बीच में दखलंदाजी करना उसे पसंद न आया हो और उसने रिंकी को रास्ते से हटा दिया हो?
ये सुनकर रिंकी मेरी और अवाक नजरो से देखने लगी।
"ये क्या बोल रहे है सर आप? जय ऐसा कभी नहीं कर सकता"
"बुरा मत मानना!लेकिन एक नशे का आदि इंसान गुस्से में कुछ भी कर सकता है?"
"क्या जय और रिंकी के बीच में तुम्हे लेकर कोई कहासुनी या कोई लड़ाई झगडा कभी हुआ था" मैंने डॉली से पुछा।
"नहीं मेरी जानकारी में या मेरे सामने ऐसी लड़ाई झगड़े वाली तो कोई बात कभी सामने नहीं आई,हां जब कभी रिंकी उसे समझाने की कोशिश करती थी तो वो गुस्सा जरूर हो जाता था! लेकिन वो गुस्सा वो मुझ पर उतरता था! और रिंकी से दोस्ती खत्म करने को बोलता था"
"बिलकुल सच बोल रही हो" मैंने डॉली के चेहरे को पढ़ने की कोशिश की।
"बिलकुल सच बोल रही हूँ सर! आपकी कसम" ये बोलकर डॉली शरारत से मुस्करा दी। कॉलेज से लेकर अब तक पहली बार डॉली के चेहरे पर पहली बार मुस्कान आई थी।
"ठीक है मुझे लगता है कि तुम मेरी कसम झूठी नहीं खाओगी? ये बोलकर मै भी हल्का सा मुस्कराया।
"सर लोगो को ये प्यार व्यार क्यों हो जाता है,और अगर हो भी जाता है तो ये इंसान की जिंदगी को इतना बदल क्यों देता है"अचानक से डॉली गंभीर हो गयी थी।
"प्यार से ही ये संसार चलता है डॉली, अगर प्यार न हो तो ये संसार भी नहीं रहेगा। मैंने भी दार्शनिको वाले अंदाज में डॉली को जवाब दिया।
"मुझे बताओगे की जय को सुधारने के लिए मुझे क्या करना चाहिए? "
"मेरा प्रेम के विषय में अनुभव बिलकुल जीरो है! मेरे दिल की घण्टी तो हर हसीन लड़की को देखकर बज उठती है और मुझे उस पल ऐसा लगता है कि जो लड़की इस समय मेरे सामने खड़ी है मुझे उससे प्यार हो गया है और इस तरह मुझे हर रोज लगभग 20-25 लड़कियो से तो प्यार हो ही जाता है और फिर वो सारी हसीनाएं मुझे सपनो में परेशान करती है" मैं डॉली की बातों को अनसुना करके प्यार की अपनी ही फ़िलॉसफ़ी बता रहा था।
मेरी बात सुनकर डॉली खिलखिला पड़ी।
"इसे प्यार नहीं फ़्लर्ट करना बोलते है सर"
" चाहे जो भी बोलते हो मेरे लिए तो यही प्यार है,और मै इससे आगे कभी बढ़ता भी नहीं हूँ,क्योकि मेरे लिए हर हसींन लड़की एक सुंदर प्रतिमा के सामान है और सुंदरता का कोई भी पुजारी कभी अपनी प्रतिमा को खंडित नहीं करता" आज मेरे अंदर का दार्शनिक रह रह कर बाहर आ रहा था।
"सर मैंने आपसे पुछा था कि मुझे जय को सुधारने के लिए क्या करना चाहिए"
"थोड़े दिनों के लिए अपना बॉयफ्रेंड बदल लो, फिर तेल देखो और तेल की धार देखो, अगर वो तुम्हारे पास आये तो बोल देना, या तो ड्रग छोडो या फिर मुझे"
"लगता है आप मेरा भी मर्डर करवाना चाहते हो,जय तो मुझे जान से ही मार डालेगा ?
"जैसे रिंकी को मार डाला वैसे ही तुम्हे भी मार डालेगा क्या? मैंने अचानक अपनी टोन बदल कर डॉली की आँखों में झाँका।
एक पल को मेरी बात सुनकर डॉली बिलकुल सहम गयी फिर अचानक बोली।
"सर गाडी रोको, मेरा घर आ गया है"
मैंने फ़ौरन गाडी रोकी और डॉली बिना कुछ बोले गाडी का दरवाजा खोल कर बिना मेरी तरफ देखे सीधा चली गई। मैंने शायद डॉली की किसी दुखती रग को दबा दिया था? मैंने अपनी गर्दन को हल्का सा झटका दिया और अपनी गाड़ी को वापस कमला नगर थाने की और दौड़ा दिया,जहाँ मुझे इंस्पेक्टर रंगीला से मिलना था।
लगभग एक घण्टे के बाद मै कमला नगर थाने में इंस्पेक्टर शर्मा के सामने बैठा था। मैंने सबसे पहले उन्हें राजेश के बारे में बताया। राजेश की बात सुनकर इंस्पेक्टर शर्मा की आँखे चमक गयी।
" मुझे लगता है कि इस केस में राजेश सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है" इंस्पेक्टर रंगीला बोले।
" लेकिन सर ?हम एकदम से इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते है कि राजेश ही रिंकी का क़त्ल करके फरार हुआ है,क्योकि अगर वो फरार होता तो वो रिंकी के क़त्ल के बाद रूबीना का फ़ोन नहीं उठाता?"मैंने रंगीला जी के सामने अपना तर्क रखा।
"वो तो इसलिए भी उठा लिया होगा की शायद वो जानना चाहता हो की कॉलेज में इस वक़्त क्या चल रहा है?
"नहीं सर ! ये सब कुछ इतना सीधा नहीं हैं ! जितना हम सोच रहे है? सबसे पहले तो हमें राजेश को खोजना चाहिए,कही ऐसा न हो की डॉली और राजेश दोनों ही किसी साजिश का शिकार हो गए हो? क्योकि उस दिन के बाद से राजेश का फ़ोन भी बंद आ रहा है" मैंने रंगीला जी के आगे आशंका जाहिर की।
"ठीक है मै राजेश का मोबाइल नंबर की लोकेशन ट्रेस करवाता हूँ , और उसकी कॉल हिस्ट्री भी चेक करवाता हूँ!इंस्पेक्टर रंगीला शायद मामले की गम्भीरता को समझ चुके थे।
"थैंक्यू राज,आपने इस ब्लाइंड केस में एक महत्वपूर्ण लीड हमे दी है" इंस्पेक्टर रंगीला ने मेरा आभार जताते हुए कहा।
"सर अभी तो बहुत कुछ बाकी है इस केस में शायद थोड़ा सा वक़्त लगे इस केस को सुलझाने में लेकिन सुलझा लेगें सर" मैंने विश्वास पूर्वक कहा।
"सर एक बात और कॉलेज में एक ड्रग गैंग भी काम कर रहा है,और कोई वसीम भाई करके उस कॉलेज में ये धंधा चला रहा है,एक बार उसे भी धर लो सर !शायद इस केस में कुछ मदद मिल जाए? मैंने रंगीला जी को बोला।
"ठीक है मै कल ही शादी वर्दी में एक टीम कॉलेज में तैनात कर देता हूँ,जो इस वसीम को धर लेगी,लेकिन उसका इस केस से क्या वास्ता ?रंगीला जी ने मेरी और सवालिया निगाहों से देखा।
फिर मेरी मजबूरी बन गयी रिंकी डॉली और जय की पूरी कहानी इंस्पेक्टर रंगीला को सुनाने की। पूरी कहानी सुनने के बाद इंसेक्टर रंगीला गहरी सोच में डूब गए।
"सर हमे इस केस को और इन बच्चो को बहुत सावधानी से हैंडल करना होगा! इनके साथ सख्ती से नहीं प्यार से बातो बातो में सब कुछ पता करवाना है, मै इसी कोशिश में लगा हुआ हूँ,ये भी इस क़त्ल में एक एंगल हो सकता है" मैंने एक तरीके से रंगीला जी को बच्चो के साथ पुलिसिया तरीको से परहेज रखने को बोला।
"हम्म राज! मै भी समझता हूँ! तुम फ़िक्र मत करो तुम अपने तरीको से काम करो! मै अपने तरीको से इन पर नजर रखता हूँ!किसी को भी परेशान नही करेगे" मुझे रंगीला जी ने आश्वासन दिया।
अब मैंने इंस्पेक्टर साहब से विदा ली और अब अपनी गाड़ी को शास्त्री नगर की और दौड़ा दी,जहाँ अब उमेश थपलियाल के रिश्तेदारों को टटोलना था।
मै कोई 20 मिनट के बाद शास्त्री नगर में रिंकी के घर पहुंचा। उमेश जी मुझे घर के बाहर ही मिल गए। मुझे देखकर वो मेरे पास आ गए।
"जी कुछ पता लगा" उमेश जी की बेकरारी मै समझ सकता था।
"पता तो बहुत कुछ लगा है,लेकिन अभी मै उसका खुलासा नही कर सकता आपसे" मैंने उमेश जी को बोला।
"मुझे आपके भतीजे अनुज से कुछ बात करनी है,वो कहाँ मिलेगा अभी" मैंने उमेश जी से पुछा।
"जी वो अंदर ही है! बुलाऊ क्या उसे? उमेश जी ने मुझ से पुछा।
"यहाँ नही उसे ऊपर छत पर ही भेजिए, मै अभी उससे अकेले में बात करना चाहता हूँ" मैंने उमेश जी को बोला।
"ठीक है पहले मै आपको ऊपर छोड़, आता हूँ,फिर मै अनुज को ऊपर भेज देता हूँ" उमेश जी ने मुझे बोला।
मै उमेश जी के साथ ऊपर छत की और जाने लगा,उमेश जी मुझे छत पर छोड़कर अनुज को बुलाने नीचे चले गए। थोड़ी देर में चाय की ट्रे के साथ अनुज ऊपर आया। मेरे ख्याल से चाय के बहाने से उमेश जी ने अनुज को ऊपर भेजा था।
"क्या नाम है आपका" मैंने चाय का मग हाथ में लेते हुए कहा।
"जी अनुज" अनुज ने मुझे इतना ही बोला।
"क्या करते हो" मैंने बात करने के लिए थोड़ी भूमिका बांधनी चाही।
"जी अभी तो गांव में ही खेती का काम देखता हूँ,और एक छोटी सी दुकान भी है वहां" अनुज ने मुझे बताया।
"खेती और दूकान से गुजर बसर हो जाता है" मैंने अनुज को टटोलना चाहा।
"जी बस हो ही जाता है" अनुज ने बुझे से स्वर में कहा।
" महरोली कैसी लगती है तुम्हे" मैंने अनुज से पुछा।
"कभी यहाँ बसने का ख्याल नहीं आया की जब तुम्हारा आधा परिवार यहाँ महरोली में रहता है तो तुम भी आकर यहाँ रहो" मैंने अनुज के अरमानो को जानना चाहा।
"मन तो बहुत करता है लेकिन गांव में भी तो हमारा परिवार है उनका भी तो ख्याल रखना है" सुनिल ने कहा।
"अच्छा अब रिंकी तो रही नहीं फिर अब यहाँ तुम्हारे ताऊ और ताई का ख्याल कौन रखेगा?" मै असली बात पर आते हुए बोला।
"पता नहीं अभी मुझे?जैसे घर के बड़े चाहेंगे,वैसा ही होगा" अनुज ने समझदारी भरा जवाब दिया।
"अच्छा उस दिन रिंकी के कॉलेज का वो डांस प्रोग्राम कैसा लगा? जिस दिन रिंकी के साथ ये हादसा हुआ था" मैंने अचानक से अपना ब्रह्मास्त्र सुनिल के ऊपर चलाया।
"जी अच्छा.....???? बोलकर अनुज की जुबान मुंह में ही अटक गयी।
"क्या हुआ ? बोलते बोलते रुक क्यों गए,अच्छा नही था क्या वो प्रोग्राम ? मैंने अनुज की आँखों में अपनी आँखे डालकर पुछा।
"जी वो....वो...आप क्या पूछ रहे है मै समझा नहीं" अनुज अब कुछ सम्हलते हुए बोला।
"मैंने तो हिंदी में ही पुछा है,फिर भी समझ नहीं आया तुम्हे" अब मै अनुज को अपने सवालो के जाल में उलझा लेना चाहता था।
"मै कैसे जाऊँगा रिंकी के कॉलेज में, मै तो उस दिन गांव में था" अनुज ने साफ़ साफ़ झूठ बोला।
"देखो बेटा,अगर सच सच बताओगे तो शायद मै तुम्हे बचा लू,नही तो अगर मैंने तुम्हे सच बताया तो बहुत बुरे फसोगे" मैंने चेतावनी भरे अंदाज में अनुज को कहा।
"मै सच ही बोल रहा हूँ,मै उस दिन गांव में ही था" अनुज अभी भी सच नहीं बोल रहा था।
"मतलब तुम सच अपने मुंह से नहीं बताओगे,पुलिस स्टेशन पहुंच कर थर्ड डिग्री के इस्तेमाल के बाद ही बताओगे" मैने अब अनुज को डराना चाहा।
"मै सच बोल रहा हूँ सर,मै रिंकी के कॉलेज में नहीं गया था उस दिन" अनुज अभी भी अपनी बात पर अडिग था।
"रिंकी को क्यों मारा तुमने? सच सच बोलो? नहीं तो तुम्हे पता नहीं अगले कुछ पलों में तुम्हारे साथ क्या होने वाला है? मैंने अब उससे सीधा सवाल किया।
"आप क्यों मुझ पर झूठा इल्जाम लगा रहे हो? मै क्यों मारूँगा अपनी ही बहन को?वो तो मुझ से सबसे ज्यादा प्यार करती थी" अनुज ने बोला।
"मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि तुम उस दिन रिंकी के कॉलेज में थे!जबकि तुम उस दिन यहाँ रिंकी के घर पर नहीं आये थे!फिर उसके कॉलेज क्या करने गए थे? मै इतनी आसानी से अनुज का पीछा नही छोड़ सकता था।
" मै सच बोल रहा हूँ सर मै उस दिन महरोली में ही नहीं था,चाहे तो मेरे पापा से पूछ लो,फिर मै कैसे रिंकी के कॉलेज पहुंच जाऊँगा?" अनुज या तो कोई मंझा हुआ खिलाड़ी था या वो सच में सच ही बोल रहा था,मुझे तो अब डॉली के दावे पर भी संदेह होने लगा था।
"ठीक है बरखुरदार!अभी के लिए तो मै तुम्हारी बात मान लेता हूँ,लेकिन बिना पुलिस की परमिशन के महरोली छोड़कर मत जाना" मै पुलिसिया अंदाज में उसे चेतावनी देकर नीचे की और चल दिया। वो बन्दा बस अवाक भाव से खड़े खड़े मुझे जाते हुए देखता रहा।
मै अभी डॉली से एक बार और इसकी शिनाख्त करवा लेना चाहता था,क्योकि उस दिन वो भी अपनी स्टेज परफॉर्मेन्स को लेकर बिजी थी, कही उसे कोई ग़लतफहमी हो गयी हो?
मै शास्त्री नगर से सीधा अपने घर पहुंचा और खाना खाकर खुद को बिस्तर के हवाले कर दिया। लेकिन मुझे क्या खबर थी की अगली सुबह इतनी बुरी खबर लेकर आएगी?
डॉली अपने कमरे में पंखे से लटकी पाई गई थी।
**********************