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Thriller तबाही

विजय को काली कार बिल्डिंग के बाहर ही रुक गई , क्योंकि बिल्डिंग के कम्पाउंड में विजिटर्स की कारों का दाखिला मना था । कार में विजय के साथ सिर्फ शकीला थी । विजय ने कार का बटन दबाकर उसे लॉक किया - फिर दोनों बिल्डिंग में दाखिल हो गए ... इस वक्त शकीला आजाद फिर रही थी जैसे कभी भी वह छीपी न हो ... वैसे भी रात के लगभग ग्यारह बजे थे ।

लिफ्ट से दोनों ऊपर आए , विजय एक ओर हट गया । शकीला ने कॉलबैल का बटन दबाया , चंद क्षण बाद ही दरवाजा खुल गया ... विजय आड़ ही में रहा , शकीला के होंठों से कंपकंपाती आवाज निकली " दादाजी ! "

।।

' शक्कू ... मेरी लाड़ली । "

शकीला अंदर घुसकर कर्नल आफरीदी के कंधे से लगकर सिसक - सिसककर रो पड़ी । कर्नल आफरीदी ने उसकी पीठ थपकी और भर्राई आवाज में बोले ' ' मेरी जान तो आधी रह गई थी तुम्हारे बगैर । "

" जी ! मैं भी आपके लिए बहुत बेचैन थी । ' ' कर्नल आफरीदी ने उसके आंसू पोछे और बोले ' मेरी पोती को किडनैप करने का साहस किसने किया था ? मुझे बताओ - मैं उसे गोली मार दूंगा । ' '

शकीला ने सुधे गले से कहा- ' ' दादाजी ! आपको तो मालूम ही है कि मैं के . सी . फाइनेंस में पार्ट टाइम काम रही थी । "

कर्नल आफरीदी चौंक पड़े- ' ' क्या तुम के . सी . फाइनेंस में काम कर रही थीं ? "

" जी हां । '



" मगर तुम्हें वहां किसने पहुंचाया था ? ' '

' ' मेरी एक क्लासमेट है , सरोज जो सुखद भी वहां मॉडलिंग करती है । ' '

कर्नल आफरीदी उछल पड़े- " क्या सरोज ? ' '

शकीला ने आंसू पोंछकर भर्राई आवाज मैं कहा " हां दादाजी ! उसी ने मुझे वहां मकड़ी के जाल में फंसाया था । "

कर्नल आफरीदी उसे घूरकर बोले - फिर क्या हुआ था ? मुझे सच - सच और साफ - साफ बताओ । ' '

' ' दादाजी ! ' ' कहते - कहते शकीला फिर रोने लगी ।

कर्नल आफरीदी ने उसका कंधा हिलाकर गुस्से से कहा- ' ' साफ - साफ बताओ ... मैं सबको मार डालूंगा

। "

" मैं ... मैं ... सीधा - सादा , साफ - सुथरा पार्टटाइम जॉब करती थी मगर ...

' ' मगर क्या ? जल्दी बोलो । ' '

' ' मगर वहां पर ड्यूटी मैनेजरे एक खुर्राट - सा आदमी है जिसका नाम है जहूर राजा । ' '

" उसने क्या किया ? "

' ' उसने ... उसने ... धोखे से ... एक दिन मुझे कोई नशा पिला दिया । "

" फिर ? "

' बस ... मैं अपने होश में नहीं थी ... उसने मुझे विशनु के नाम के आदमी के साथ कर दिया जो मुझे एक बहुत बड़े आदमी के यहां ले गया । ' '

' ' फिर ? "

" फिर ... फिर वही हुआ जो एक बेबस लड़की के साथ होता है । ' ' कहते - कहते शकीला कर्नल के कंधे से लगकर सिसक - सिसककर रो पड़ी ।

कर्नल आफरीदी उसे अलग करके सीधा खड़ा हो गया - उसकी आंखों से शोले निकल रहे थे ... गुर्राकर बोला

वह धीरे से

" मगर विशनु तो मर चुका है ... तू उसका नाम बता दे जिसके पास तुझे विशनु लेकर गया था । "

' ' वो ... वह ... एक समुद्री जहाज पर था । "

' ' क्या ? ' '

' ' हां , दादाजी ... गोरा , लम्बा , सेहतमंद मगर विदेशी है - शायद अरब देश का ... मैं उसी के जहाज पर कैद थी

' ' नहीं ... ! "

' ' और दादाजी , अगर संजय वहीं आस - पास मछेरे के भेष में न होता तो मैं शायद वहां से कभी निकल न पाती ? "

' ' संजय क्या कर रहा था वहां ? ' '

' उसके ऊपर ज्वाला प्रसाद के खून का इल्जाम है

' वह पुलिस से बचने के लिए छुपा फिरता है ... बाहर चारों तारफ नाकाबंदी है इसलिए कहीं जा नहीं सकता ... मछेरा बनकर किश्ती में रह रहा है । ' '

' ' फिर ... ? ' '

" एक दिन मुझे डैक पर आने का मौका मिल गया ... तब मैं अकेली थी और मैंने यह सोचकर छलांग लगा दी कि मर गई तो मर गई अगर बच गई और साहिल पर पहुंच गई तो आपके पास पहुंच जाऊंगी । "

' ' फिर ... ? ' '

' ' संजय की किश्ती पास ही थी ... मैंने छपाक - छपाक की आवाज सुनी और झांककर देखा ... संजय ने मुझे ऊपर चढ़ा लिया - मैं एक रात एक दिन उसी किश्ती में छुपी रही । आज रात के अंधेरे उसने में मुझे बिल्डिंग तक पहुंचा दिया । "

' ' जहाज पर तुझसे क्या सलूक हुआ ? ' '

शकीला ने रोते हुए कहा- ' ' मुझे शर्म आती है कहते हुए - जाबर ने मेरी इज्जत लूटी ... और फिर वह हरामजादा जहूर राजा जाने किस - किसको भेजा करता था ... ज्यादातर नेता लोग होते थे । ' '

' ' उनके नाम ? "

शकीला ने इस तरह गिन - गिनकर उन लोगों के नाम बताए जिनके घरों में धमाके हुए थे और जो संजय ने उसे रटा दिए थे । "

' बस ठीक है - अब तुम आराम करो । "



' दादाजी ! "

" जो कुछ हुआ उसमें तुम्हारा कोई कसूर नहीं - तुम पहले की ही तरह रहो । "

' ' दादाजी ... ! " वह फिर रो पड़ी ।

कर्नल आफरीदी ने उसे सांत्वना देते हुए फिर कहा " तुम आराम करो बेटी ... मैं सबको देख लूंगा । '

शकीला धीरे - धीरे आंसू पोंछती हुई बैडरूम की तरफ आ गई ।

कर्नल आफरीदी कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा ... उसके भीतर का तूफान चेहरे से झलक रहा था - फिर थोड़ी देर बाद उसने एक ट्रांसमीटिंग सैट संभाला जिससे टेलीफोन या मोबाइल या वायरलैस पर सम्पर्क किया जा सकता था ।
 
कुछ देर बाद वह उन्हीं पांचों आदमियों को फोन कर रहा था जिनके नाम उसे शकीला ने बताए थे - हर आदमी से उसने एक ही बात कही

' ' एक बहुत जरूरी मीटिंग करनी है ... अगर बदनामी और गिरफ्तारी से बचना चाहते हो तो दो और तीन बजे के बीच शाहीन पर पहुंच जाओ । ' '

फिर उसने सैट बंद कर दिया और ड्रेसिंग रूम में जाकर बाहर जाने की तैयारी करने लगा - इस समय वह कुबड़ा नजर नहीं आ रहा था ... लम्बे कद का , सेहत वाला , मूछों वाला बूढ़ा नजर आ रहा था ।

अब वह फ्लैट से निकला , सीधा नीचे आया । उसे सीधा चलते देखकर विजय ने गहरी सांस ली - क्योंकि वह समझ चुका था कि कर्नल आफरीदी कुबड़ा नहीं है



कर्नल आफरीदी एक लिफ्ट से नीचे आया और विजय दूसरी लिफ्ट से नीचे आया । कर्नल आफरीदी की कार बिल्डिंग से निकल रही थी और विजय की कार उसका पीछा कर रही थी । कर्नल आफरीदी मड के पास के साहिल पर पहुंचकर कार से उतर आया ... विजय भी पहले ही थोड़ा पीछे उतर चुका था

इससे पहले कि कर्नल आफरीदी अपना मोबाइल प्रयोग करता , उसे अचानक विजय ने ललकारा " ठहरो कर्नल ! "

कर्नल आफरीदी रुक गया , लेकिन न वह ठिठका , न उसके चेहरे से हैरानी झलकी - अब उसका चेहरा सपाट था ... विजय हाथ में रिवाल्वर लिए हुए उसके पास पहुंच गया और बोला

" अपने आपको कानून के हवाले कर दो कर्नल । ' '

कर्नल आफरीदी ने सन्तोष से कहा- ' ' मैं पहचान गया - तुम सुपरिन्टेंडेंट विजय सरदाना हो न - जो ज्वाला प्रसाद के खून की छानबीन कर रहा है ? ' '



' ' हां कर्नल । ' '

' ' और शकीला के मामले में मुझसे मिल भी चुके हो । ' '

.

" मुझे मालूम है , आज संजय शकीला को लेकर आया था । संजय गिरफ्तार हो गया है , अब तुम्हारी बारी है । ' '

' ' मेरे बारे में संजय ने तो तुम्हें कुछ नहीं बताया होगा । "

,

" तुम्हारे बारे में जहूर राजा ने बताया था जो मेरी इन्वेस्टीगेशन के दौरान के . सी . फाइनेंस कम्पनी से फरार हो गया था ... मगर बाद में मैंने उसे गिरफ्तार कर लिया था । ' '

' ' क्या तुम उसे मेरे हवाले कर सकते हो ?

.

' क्यों ? ' '

" उसने जो कुछ मेरी पोती शकीला के साथ किया है ... उसके बदले में उसके लिए मौत की सजा भी कम

विजय ने व्यंग्य से कहा - " अपने घर में आग लगती है तब आदमी को उसकी तपिश और जलन का एहसास होता है । के . सी . फाइनेंस में दर्जनों लड़कियां जहूर राजा के अंडर धंधा करती थीं , क्या वह शकीला की तरह नहीं थीं ... और जहूर राजा तुम्हारा मातहत था । "

' ' मैं जानता हूं विजय सरदाना , अपने घर ही में आग लगने पर आदमी को तपिश और जलन की एहसास होती है ... मगर जो दूसरी लड़कियां इस पेशे में लगी थीं ... उन्हें मैंने नहीं लगाया था । ' '

" तुम्हारे मातहत ने उसी मकसद को पूरा करने के लिए ही तो लगाया था जिस मकसद के लिए तुम यह काम कर रहे हो । '

' ' मैं जानता हूं । ' '

" तुम एक हिन्दुस्तानी होकर अपने मुल्क को दूसरों के हाथों में बेच रहे थे - इसे ही गद्दारी या देशद्रोहिता कहते हैं । "

' ' इस अपराध के अपराधी तो देश मैं बहुत मिल जाएंगे सुपर सरदाना ... मैं न भारत का दुश्मन हूं न पड़ोसी मुल्क का दोस्त ... मैंने तो अंग्रेजी फौज में काम किया था और मुझे ओ . बी . ई . की मेम्बरशिप मिल गई थी । "

' ' यह भी तो देश से गद्दारी है । ' '

' ' हां , शायद है - इसकी सजा मुझे अपनी पोती के रूप में मिली है - मैं अपने सारे गुनाहों का बदला चुकाने जा रहा हूं । "





" तुम्हारे गुनाहों का बदला यही है कि तुम अपने आपको कानून के हवाले कर दो । "

" ठीक है ... मैं अपने आपको कानून के हवाले करता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि आप अपने विभाग में एक एक्टिव और न बिकने वाले ऑफिसर हैं जो ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहा है ... यही वतन की हिफाजत है । ' '

उसने अपना रिवाल्वर विजय की तरफ उछाल दिया जिसे विजय ने लपक लिया और बोला- " और कोई हथियार ? ' '

' ' तुम बेधड़क पास आकर मेरी तलाशी ले सकते हो । "

' ' मगर तुम मेरे ऊपर मेहरबान क्यों हो ? ' '

' ' इसलिए कि मैं जानता हूं कि मेरे बाद मेरी पोती शकीला और संजय की हिफाजत तुम ही कर सकोगे ... मुझसे वायदा करो । '

" मैं वचन देता हूं । "

" तो फिर आज मैं उन लोगों को तुम्हारे सुपुर्द कर देता हूं जिन लोगों ने इस मुल्क को भिखारी बनाने में कोई कसर न छोड़ी थी , वह भी सिर्फ कुर्सियों के

लालच में ।।

" तो क्या ...

? ' '

" वह लोग दो - तीन बजे एक खास प्वाइंट पर पहुंच जाएंगे ... वहां जाबर भी है जो संजय की जगह ज्वाला प्रसाद का कातिल है । ' '

" मेरे पास उसके खिलाफ खासे ठोस सबूत मौजूद

" तो फिर चलो मेरे साथ । ' '

' ' मगर किस तरह ? "

.

" लड़के ! मैं इस उम्र में भी बगैर थके पचास मील तक तैरकर समुद्र पार कर सकता हूं । ' '

" मगर मैं तुम्हें इस कष्ट से बचा लूंगा - मेरे साथ आओ । "

कुछ देर बाद विजय अपनी कार उसके पास लाया

-

कर्नल ने कहा- ' ' यह कार पानी में दौड़ेगी ? ' '

" आप बैठे तो सही । ' ' दोनों कार में बैठ गए । विजय ने इंजन स्टार्ट किया और कार पानी में उतरकर तल के नीचे सब - मैरीन की तरफ तैरने लगी - कर्मल ने कहा- ' ' बहुत खूब ! ' '

विजय कुछ नहीं बोला तो कर्नल ने कहा- ' ' मगर तुम इस तरह शाहीन के अंदर नहीं जा सकोगे । ' '

!

" परवाह मत कीजिए ए - आप कहिएगा कि तैरकर आया हूं यहां तक और ऊपर पहुंच जाना । "

' और तुम ? ' '

' ' मैं किसी न किसी तरह ऊपर पहुंच ही जाऊंगा

' ' और फोर्स ? "

' ' मैं अपने विभाग को सिग्नल दे चुका हूं । ' '

कुछ देर बाद कार एक जगह रुक गई और ऊपर आ गई ... कर्नल पानी में कूद गया । विजय दरवाजा बंद करके कार को फिर नीचे ले गया ।
 
कार को एक ऐंकर के साथ बांधने के बाद , विजय एंकर द्वारा ऊपर पहुंच गया ... डैक पर इस समय पहरा नहीं था , इसलिए विजय को कोई परेशानी नहीं हुई ।

एक कमरे में उसने कर्नल आफरीदी , जाबर और उन पांचों मद्दारों को देखा । पता नहीं कर्नल के दिल में क्या था , वह उन लीगों को खुद शराब पिलाए जा रहा था ।

विजय का दिल धड़क रहा था ... उसने जहाज की तलाशी लेनी शुरू कर दी - जल्दी ही वह वहां पहुंच गया , जहां जहाज के तहखाने में हथियारों और गोला - बारूद का ढेर था ... आर . डी . एक्स . की बेशुमार मुहरबन्द पेटियां भी थीं ।

विजय ने संतोष की सांस ली - उसने अपनी चमड़े की जैकेट से एक रिमोट का बम निकाला और बारूद पर रख दिया ... फिर वह वापस चल पड़ा । ऊपर आकर उसने ऐंकर द्वारा नीचे का रास्ता पूरा किया और अपनी कार में पहुंच गया ।

कुछ देर बाद उसकी कार पानी के नीचे दौड़ती हुई सुनसान किनारे की तरफ जा रही थी । किनारे पर पहुंचकर सब - मैरीन से फिर जमीन पर चलने वाली कार बन गई थी । विजय ने अपनी जेब से लांग रेंज का रिमोट निकाला और उसका बटन दबा दिया ... फिर जैसे कान फाड़ देने वाला धमाका हुआ ... और विजय कार में फुल स्पीड से वापस दौड़ पड़ा ।

जब कार सड़क पर पहुंची तो शाहीन के जलते हुए टुकड़े कार तक पहुंच रहे थे ... सड़क पर ट्रैफिक रुक गया था ... और कोहराम मच गया था ... लग रहा था यह सिलसिला खत्म नहीं होगा । विजय आराम से बीच में से कार निकालता हुआ चला आया ।

आई . जी . की आंखे आश्चर्य से उबल पड़ी ... उसने कुछ रोष से जल्दी से पूछा- ' ' यह तुमने क्या किया विजय ? ' '

' ' सर ... इसके सिवा और कोई चारा भी तो नहीं था

' ' पागल हो गए हो तुम । ' '

' ' मेरी तरह अगर हर अफसर पागल हो जाए तो यह धरती वतन - फरोशों से पाक हो जाए । आप खुद ही सोचिए , मैं क्या करता ? क्या आप उन पांचों को सजा दिलवा सकते थे ? जाबर को उसका मुल्क मुकद्दमा चलाने के लिए मांग लेता ... हमारी सरकार मजबूर हो जाती इसलिए कि जाबर की सरकार हमारे देश की दोस्त है - कर्नल आफरीदी या तो स्वयं मर जाता या उन लोगों को मार देता और एक बड़ी ताकत उसे छोड़ने के लिए हमारे देश पर दबाव डालती और हमें उसको छोड़ने पर मजबूर होना पड़ता । ' '

आई . जी . के होंठ हिलते रह गए ... विजय अपने खेल पर सन्तुष्ट नजर आ रहा था ।

!! समाप्त !!
 
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