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।
' स्पष्टतया तो उसे मार ही डाला गया था - लेकिन एक फीसदी सन्देह है कि वह जिन्दा न हो । '
" जिन्दा होगी तो संजय के साथ होगी ? ' '
' ' जी हां । '
" अगर वह संजय के साथ होती तो संजय को छुपने की क्या जरूरत थी ? वह अदालत में हाजिर हो सकता था । ' '
' ' म ... म ... मैं ... इतनी बारीकियां नहीं समझता । "
" फिर जब में संजय के यहां गया ... ? ' '
" तब आप जिस टैक्सी में गए तो वह मेरे ही एक आदमी की थी । "
" ओहो ! ' '
" फिर उसने मुझे बताया कि आप संजय के घर से अकेले चले थे ... वह आपके साथ गजेबो तक आया ... पर उसने सुना कि आपको किसी ने फोन करके कहा है कि आप उसका गजेबो में इन्तजार करें । "
" और फिर तुम गजेबो में पहुंच गए ... और थोड़ी देर बाद तुमने रेणु को वहां आते देखा । "
' ' जी हाँ ! "
" और वेटर को हमारी निगरानी पर लगा दिया । ' '
" जी हां ... और वेटर ने मुझे बताया कि आप दोनों ऐश करने जुहू पर होटल सी - व्यू में जा रहे हैं । "
" तो तुमने हमारे साथ करीम को लगा दिया । "
।
" जी हां ! ' '
' ' करीम ने तुम्हें कोड में बताया कि मैंने तुम्हे डॉज दिया और करीम मेरे कब्जे में है । ' '
" जी हां ! '
" तुमने करीम को क्या आदेश दिया ? ' '
" उसकी नौबत ही नहीं आई - मुझे विश्वास था कि आप करीम को गिरफ्तार कर लेंगे - और बाद में उसे छुड़ा लिया जाएगा । "
" तुम्हारे सपने में भी नहीं होगा कि करीम आर्च - वे के तुम्हारे फ्लैट का पता बता चुका है । ' '
।
' ' जी हां ! "
विजय ने हल्की सांस ली और बोला
" अब यह फैसला करना तुम्हारा काम है कि तुम करीम के पास जाना पसन्द करते हो या सरकारी गवाह बनना । "
' ' म ... म ... मैं मरना नहीं चाहता । '
" तो फिर बताओ , तुम यह सब किसके लिए कर रहे हो ? "
।।
' आप शायद मेरी बात पर विश्वास नहीं करेंगे । ' '
" तुम बात करो ... मैं विश्वास करू या करू ... इसका फैसला करना तुम्हारा काम नहीं - मेरा अपना काम है
। "
' ' साहब ! मुझे तो खुद मालूम नहीं कि मैं किसके लिए काम कर रहा हूं । ' '
विजय सरदाना के होठों पर बहशियाना मुस्कराहट फैल गई ... उसने कहा
' ' मुझे मालूम था तुम्हारा यही जवाब होगा । ' ' ' ' मैंने कहा न कि आप मेरी बात का विश्वास नहीं करेंगे । "
' ' तुम कालीचरण के लिए काम करते थे । ' '
" जी हां - जब मैं टैक्सी में लड़कियों को उनके बताए ठिकाने पर पहुंचाया करता था । "
" फिर ? "
" फिर जब कालीचरण का भरोसा प्राप्त हो गया
तो उसने मुझे शहर की उन सारी टैक्सियों का इंचार्ज बना दिया जो उसके लिए लड़कियां इधर से उधर पहुंचाते थे - उनमें करीम भी था ... करीम को मैंने ही इस धंधे पर लगाया था - करीम जैसे कई और आदमियों को भी लगाया था । "
" इस काम में तुम्हे क्या मुआवजा मिलता है ? "
' इतना कि मैं सपने में नहीं सोच सकता था । हर लड़की द्वारा कालीचरण को मिलने वाली रकम का पांच परसेंट - इससे भी महीने में लगभग लाख तो हो ही जाता है । ' '
" तुम्हारे पास उन लड़कियों की लिस्ट होगी जो कालीचरण के धंधे में शामिल हैं । ' '
' ' जी हां ! "
.
" और कालिचरण के ग्राहकों की लिस्ट भी होगी
' ' जी हां ! "
' ' इनमें ज्वाला प्रसाद जैसे बड़े लोग लोगों की कमी नहीं होगी । "
" जी हां , सभी बड़े आदमी हैं , नेता , मिनिस्टर ,
ऑफिसर , पूंजीपति , प्रोड्यूसर , डायरेक्टर , वगैरा ... हीरो तक भी हैं । "
" तुम इन लड़कियों के साथ जिन रक्षकों को भेजते हो उनके नाम पते भी होंगे । "
" जी हां ! "
' ' संजय भी इन्हीं में एक था ? ' '
' ' जी नहीं साहब ! संजय का दर्जा मुझसे ऊंचा था - वह मुझसे भी किसी मामले में जवाब - तलब कर सकता था - कालीचरण की बजाए संजय को ही हिसाब - किताब देना - लेना पड़ता था । ' '
" ओहो ... ! "
' कालीचरण मुझसे बढकर संजय पर भरोसा करता है । "
।
' क्या कालीचरण ने शकीला को संजय के साथ भेजा था ? "
" साहब ! शकीला की जिम्मेदारी तो संजय ही के सिर पर रहती थी , क्योंकि शकीला न सिर्फ बहुत खूबसूरत थी , बल्कि उसका धंधा भी बहुत राज में रखना पड़ता था , क्योंकि संजय और शकीला एक - दूसरे से मुहब्बत करते थे । "
' ' तो रात जब शकीला को ज्वाला प्रसाद के यहां भेजा गया था तो संजय ही उसके साथ गया था । ' '
" तो फिर उसे छुपने के लिए भगोड़ा होने की क्या जरूरत थी ? "
।
" लगता है , जब वह अपनी जगह लौटा होगा तो उसे शकीला की लाश मिली होगी और वह रूपोश हो गया हो । '
' ' मतलब , शकीला को मार डाला गया । ' '
' ' जी हां ! "
" इसलिए कि उसने ज्वाला प्रसाद के असली कातिल को देख लिया था और उसके खिलाफ वही अकेली गवाह थी । "
।
' ' जी हां , साहब ! "
' ' क्या कालीचरण का हुक्म यही था ? ' '
।
" नहीं साहब ! कालीचरण तो शकीला की बहुत इज्जत करता था , इसीलिए वह संजय के सिवा किसी और पर भरोसा नहीं करता था । ' '
" तुम यह कहना चाहते हो कि कालीचरण का इस साजिश से कोई सम्बन्ध नहीं ? ' '
।
" जहां तक मेरा अनुमान और या जितना मुझे ज्ञान है । ' '
" तो फिर संजय की जगह लेने वाला कोई ऐसा आदमी ही हो सकता है जो कालीचरण के हर प्रोग्राम से पूरी तरह वाकिफ है । "
" जी हां ! "
' ' और उसे मालूम होगा कि शकीला एक रात ज्वाला प्रसाद के यहां जाएगी और संजय उसके साथ
जाएगा । "
" जी हां ! "
' ' संजय , क्या अपनी खुशी से किसी को अपनी जगह दे सकता था ? "
' ' जी नहीं । ' '
' फिर ? "
' ' संजय सिर्फ कालीचरण के हुक्म की पाबंदी करता है । "
' यानी ... संजय को कालीचरण का हुक्म मिला कि किसी खास जगह पर शकीला को छोड़कर वह उतर जाए और उसकी जगह कोई दूसरा आदमी ले लेगा ? "
" जी हां ! '
।।
' मगर हुक्म देने वाला कालीचरण नहीं था । ' '
' शायद । "
" और यह सब तुमने किया ? " विशनु का चेहरा एकदम काला पड़ गया । विजय सरदाना ने कहा
" कालीचरण के सारे आदेश - निर्देशों से संजय के अलावा सिर्फ तुम वाकिफ थे और कालीचरण संजय के बाद तुम्हीं पर भरोसा करता था । "
' ' जी हां ! "
" और तुमने उस भरोसे का अनुचित लाभ उठाया
' ' म ... म ...
मैं ! "
" कौन है वह जिसके इशारे पर तुम ज्वाला प्रसाद जी के खून की साजिश के साझेदार बने ? ' '
" म ... म ... मैं उसे नहीं जानता । "
विजय ने कड़े स्वर में कहा- ' ' शायद तुम भी करीम के पास जाना चाहते हो । '
" साहब , मुझसे कोई सौगंध ले लें ... मैं उसे नहीं जानता । "
' फिर भी तुम उसके लिए काम कर रहे हो ? ' ' ' ' मैं मजबूर हूं साहब । "
" कैसी मजबूरी ? ' '
' ' साहब ! मैं सामने से आने वाले पचास हमलावरों का मुकाबला कर सकता हूं , लेकिन अनदेखी मौत से हर कोई डरता है । ' '
।
' साफ - साफ बताओ । "
" बताता हूं साहब , अगर गला तर करने की इजाजत हो तो - मेरा गला बुरी तरह सूख गया है । ' '
' ' इजाजत है । "
विशनु ने एक पूरा गिलास भरा और एक लम्बा चूंट लेकर बोला - ' ' आप बिल्कुल नहीं पीते । ' '
विजय सरदाना ने रूखे स्वर में कहा- " सिर्फ काम की बात करो , फालतू की बातें नहीं । ' '
' ' म ... म ... माफ कर दें मुझे । ' '
' ' तुम बताने वाले थे कि तुम किसी अनदेखी मौत से डर गए थे । "
।
' ' साहब ! यह फ्लैट कालीचरण का ही है - मुझे यह फ्लैट और कार उन्होंने ही दी है । ' '
" जब मैं टैक्सी चलाता था तो बहुत छोटा - सा आदमी था ... सिर्फ आठ घंटे टैक्सी चलाने के बाद भी न मैं अपनी इच्छाएं पूरी कर पाता था और न अपनी पत्नी को सुखी रख सकता था । ' '
' ' तो तुम विवाहित भी हो ? '
' ' मेरी बेटी है साहब , आठ बरस की ... और मैं अपनी पत्नी और बेटी से बहुत प्यार करता हूं । ' '
" फिर ? "
' मैंने अपनी बेटी के उज्वल भविष्य और पत्नी को खुश रखने के लिए ही इस धंधे में कदम रखे थे ... मगर उन दोनों को इस चमक - दमक से दूर रखता हूं - वहां मेरी बेटी पढ़ रही है - मैं उन दोनों की इतनी रकम भेजता हूं कि वह आराम से रहती है । '
' फिर ? "
' ' कुछ दिन पहले अचानक मुझे ट्रंककॉल मिला कि मेरी बेटी एक एक्सीडेंट में मारी गई ... मैं पागल - सा हो गया ... कार लेकर दौड़ा - कोल्हापुर पहुंचा तो मेरी बेटी सही - सलामत थी - मैं उससे चिमटकर रो पड़ा । "
' ' फिर ? "
' ' मैंने सोचा , किसी ने यूंही बहका दिया होगा ... मैं वापस आ गया ... एक दिन मुझे अपनी पत्नी की फोटो जो पता नहीं कौन , कब और किस तरह इस फ्लैट में इसी मेज पर रख गया था ... जबकि इस फ्लैट की चाबी मेरे या कालीचरण ही के पास रहती है । "
' फिर ? ' '
' ' मुझे आश्चर्य हुआ ... फोटो में मेरी पत्नी मेरी बेटी को स्कूल पहुंचाकर बाहर निकल रही थी ... मैं परेशान था कि मुझे गुमनाम टेलीफोन मिला और कहा गया - विशनु तुम्हें पहले अपनी बेटी की मौत की झूठी खबर मिली जो सच भी हो सकती है ... आज अपनी पत्नी का फोटो मेज पर पाया होगा ... यानी हम जब , जो कुछ चाहें कर सकते हैं - तुम सात तालों में भी बंद कर दो , हम तुम्हारी पत्नी और बेटी तक पहुंच सकते हैं - तुम्हारी पत्नी को इतने आदमी एक साथ रेप कर सकते हैं वह चिल्ला - चिल्लाकर दम तोड़ दे - तुम्हारी बेटी बड़ी होकर वेश्या भी बन सकती है । "
.
' मतलब यह कि उस गुमनाम आदमी ने तुम्हें बुरी तरह भयभीत करके अपने जाल में फांस लिया है ? ' '
" जी हां ! "
' ' फिर उसने तुमसे कालीचरण के कामकाज और दैनिक दिनचर्या के बारे में पूछा ! "
।
" जी हां ! ' '
" और जिस दिन शकीला को ज्वाला प्रसाद जी के यहां भेजा गया था , उस दिन तुम्हें क्या निर्देश मिला था ? ' '
' उस दिन मुझे बताया गया था कि संजय की जगह रास्ते में कोई दूसरा ले लेगा । " ' ' क्या तुम्हें उसकी नीयत मालूम थी ? ' '
" नहीं - मुझे सन्देह था कि वह कुछ सीक्रेट डाक्यूमेंट्स उड़ाने का इरादा रखते होंगे । "
' ' मगर , क्या तुम्हें विश्वास था कि संजय अपनी जगह किसी को जाने देगा ? ' '
" मैंने उस गुमनाम आदमी से भी यही कहा था - उसने जवाब दिया था -- संजय कालीचरण का हुक्म नहीं टाल सकता । ' मैंने पूछा - कालीचरण ऐसा हुक्म देने ही क्यों लगा ? ' तब उसने खुद मुझे कालीचरण की आवाज बनाकर सम्बोधित किया ... तो मैं उछल पड़ा , क्योंकि वह आवाज सौ प्रतिशत कालीचरण ही की थी
। ' '
।
" तुम्हें उसके बदले क्या मिला ? ' ' ' ' पूरे दस लाख डालर जो एक विदेशी बैंक में मेरे नाम जमा करा दिए गए हैं । ' '
।
' उसका प्रमाण ? ' '
' ' मेरे पास है - मेरै बैंक के लॉकर में है । ' '
" तुम इतनी रकम का क्या करते ? ' '
' ' सर ! मैंने सोचा था कोई गरीब अनाथ लड़का जो शरीफ और रोशन दिमाग हो ... उसे अपना दामाद बनाऊंगा और अपनी बेटी के साथ विदेश भेज दूंगा ... बाद में मैं ख़ुद भी पत्नी के साथ विदेश में जा बनूंगा । "
" तुम्हें उस गुमनाम आदमी से और भी काम मिलने की आशा होगी । ' '
" जी हां - उसने कहा था , तुम हमारे लिए काम करोगे तो इस बार दुगुना मुआवजा दिया जाएगा ... दौलत के लालच के साथ मौत का डर भी था - उसने धमकी दी थी कि अगर राज खुल गया तो पहले मेरे खानदान का खात्मा कर दिया जाएगा ... फिर मुझे मार डाला जाएगा । "
" उसने इस काम के लिए तुम्हें क्यों चुना ? "
' शायद इसलिए कि मैं गरीबी की बहुत निचली गहराई से उठकर ऊपर आया था और उस गुमनाम आदमी के काम के लिए कालीचरण फाइनेंस कम्पनी से ज्यादा अच्छा कोई प्लेटफार्म नहीं हो सकता था । "
" और अब , जब तुम यह सब कुछ बता चुके हो ? " विशनु ने भर्राई आवाज में कहा - ' ' मैंने सब कुछ अपनी मौत के डर से बताया है , क्योंकि मैं पत्नी और बेटी के लिए जिन्दा रहना चाहता हूं | आपके बारे में मैं बहुत कुछ सुन चुका हूं ... मुझे भरोसा है कि आप मेरी बीवी और बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेंगे । "
' स्पष्टतया तो उसे मार ही डाला गया था - लेकिन एक फीसदी सन्देह है कि वह जिन्दा न हो । '
" जिन्दा होगी तो संजय के साथ होगी ? ' '
' ' जी हां । '
" अगर वह संजय के साथ होती तो संजय को छुपने की क्या जरूरत थी ? वह अदालत में हाजिर हो सकता था । ' '
' ' म ... म ... मैं ... इतनी बारीकियां नहीं समझता । "
" फिर जब में संजय के यहां गया ... ? ' '
" तब आप जिस टैक्सी में गए तो वह मेरे ही एक आदमी की थी । "
" ओहो ! ' '
" फिर उसने मुझे बताया कि आप संजय के घर से अकेले चले थे ... वह आपके साथ गजेबो तक आया ... पर उसने सुना कि आपको किसी ने फोन करके कहा है कि आप उसका गजेबो में इन्तजार करें । "
" और फिर तुम गजेबो में पहुंच गए ... और थोड़ी देर बाद तुमने रेणु को वहां आते देखा । "
' ' जी हाँ ! "
" और वेटर को हमारी निगरानी पर लगा दिया । ' '
" जी हां ... और वेटर ने मुझे बताया कि आप दोनों ऐश करने जुहू पर होटल सी - व्यू में जा रहे हैं । "
" तो तुमने हमारे साथ करीम को लगा दिया । "
।
" जी हां ! ' '
' ' करीम ने तुम्हें कोड में बताया कि मैंने तुम्हे डॉज दिया और करीम मेरे कब्जे में है । ' '
" जी हां ! '
" तुमने करीम को क्या आदेश दिया ? ' '
" उसकी नौबत ही नहीं आई - मुझे विश्वास था कि आप करीम को गिरफ्तार कर लेंगे - और बाद में उसे छुड़ा लिया जाएगा । "
" तुम्हारे सपने में भी नहीं होगा कि करीम आर्च - वे के तुम्हारे फ्लैट का पता बता चुका है । ' '
।
' ' जी हां ! "
विजय ने हल्की सांस ली और बोला
" अब यह फैसला करना तुम्हारा काम है कि तुम करीम के पास जाना पसन्द करते हो या सरकारी गवाह बनना । "
' ' म ... म ... मैं मरना नहीं चाहता । '
" तो फिर बताओ , तुम यह सब किसके लिए कर रहे हो ? "
।।
' आप शायद मेरी बात पर विश्वास नहीं करेंगे । ' '
" तुम बात करो ... मैं विश्वास करू या करू ... इसका फैसला करना तुम्हारा काम नहीं - मेरा अपना काम है
। "
' ' साहब ! मुझे तो खुद मालूम नहीं कि मैं किसके लिए काम कर रहा हूं । ' '
विजय सरदाना के होठों पर बहशियाना मुस्कराहट फैल गई ... उसने कहा
' ' मुझे मालूम था तुम्हारा यही जवाब होगा । ' ' ' ' मैंने कहा न कि आप मेरी बात का विश्वास नहीं करेंगे । "
' ' तुम कालीचरण के लिए काम करते थे । ' '
" जी हां - जब मैं टैक्सी में लड़कियों को उनके बताए ठिकाने पर पहुंचाया करता था । "
" फिर ? "
" फिर जब कालीचरण का भरोसा प्राप्त हो गया
तो उसने मुझे शहर की उन सारी टैक्सियों का इंचार्ज बना दिया जो उसके लिए लड़कियां इधर से उधर पहुंचाते थे - उनमें करीम भी था ... करीम को मैंने ही इस धंधे पर लगाया था - करीम जैसे कई और आदमियों को भी लगाया था । "
" इस काम में तुम्हे क्या मुआवजा मिलता है ? "
' इतना कि मैं सपने में नहीं सोच सकता था । हर लड़की द्वारा कालीचरण को मिलने वाली रकम का पांच परसेंट - इससे भी महीने में लगभग लाख तो हो ही जाता है । ' '
" तुम्हारे पास उन लड़कियों की लिस्ट होगी जो कालीचरण के धंधे में शामिल हैं । ' '
' ' जी हां ! "
.
" और कालिचरण के ग्राहकों की लिस्ट भी होगी
' ' जी हां ! "
' ' इनमें ज्वाला प्रसाद जैसे बड़े लोग लोगों की कमी नहीं होगी । "
" जी हां , सभी बड़े आदमी हैं , नेता , मिनिस्टर ,
ऑफिसर , पूंजीपति , प्रोड्यूसर , डायरेक्टर , वगैरा ... हीरो तक भी हैं । "
" तुम इन लड़कियों के साथ जिन रक्षकों को भेजते हो उनके नाम पते भी होंगे । "
" जी हां ! "
' ' संजय भी इन्हीं में एक था ? ' '
' ' जी नहीं साहब ! संजय का दर्जा मुझसे ऊंचा था - वह मुझसे भी किसी मामले में जवाब - तलब कर सकता था - कालीचरण की बजाए संजय को ही हिसाब - किताब देना - लेना पड़ता था । ' '
" ओहो ... ! "
' कालीचरण मुझसे बढकर संजय पर भरोसा करता है । "
।
' क्या कालीचरण ने शकीला को संजय के साथ भेजा था ? "
" साहब ! शकीला की जिम्मेदारी तो संजय ही के सिर पर रहती थी , क्योंकि शकीला न सिर्फ बहुत खूबसूरत थी , बल्कि उसका धंधा भी बहुत राज में रखना पड़ता था , क्योंकि संजय और शकीला एक - दूसरे से मुहब्बत करते थे । "
' ' तो रात जब शकीला को ज्वाला प्रसाद के यहां भेजा गया था तो संजय ही उसके साथ गया था । ' '
" तो फिर उसे छुपने के लिए भगोड़ा होने की क्या जरूरत थी ? "
।
" लगता है , जब वह अपनी जगह लौटा होगा तो उसे शकीला की लाश मिली होगी और वह रूपोश हो गया हो । '
' ' मतलब , शकीला को मार डाला गया । ' '
' ' जी हां ! "
" इसलिए कि उसने ज्वाला प्रसाद के असली कातिल को देख लिया था और उसके खिलाफ वही अकेली गवाह थी । "
।
' ' जी हां , साहब ! "
' ' क्या कालीचरण का हुक्म यही था ? ' '
।
" नहीं साहब ! कालीचरण तो शकीला की बहुत इज्जत करता था , इसीलिए वह संजय के सिवा किसी और पर भरोसा नहीं करता था । ' '
" तुम यह कहना चाहते हो कि कालीचरण का इस साजिश से कोई सम्बन्ध नहीं ? ' '
।
" जहां तक मेरा अनुमान और या जितना मुझे ज्ञान है । ' '
" तो फिर संजय की जगह लेने वाला कोई ऐसा आदमी ही हो सकता है जो कालीचरण के हर प्रोग्राम से पूरी तरह वाकिफ है । "
" जी हां ! "
' ' और उसे मालूम होगा कि शकीला एक रात ज्वाला प्रसाद के यहां जाएगी और संजय उसके साथ
जाएगा । "
" जी हां ! "
' ' संजय , क्या अपनी खुशी से किसी को अपनी जगह दे सकता था ? "
' ' जी नहीं । ' '
' फिर ? "
' ' संजय सिर्फ कालीचरण के हुक्म की पाबंदी करता है । "
' यानी ... संजय को कालीचरण का हुक्म मिला कि किसी खास जगह पर शकीला को छोड़कर वह उतर जाए और उसकी जगह कोई दूसरा आदमी ले लेगा ? "
" जी हां ! '
।।
' मगर हुक्म देने वाला कालीचरण नहीं था । ' '
' शायद । "
" और यह सब तुमने किया ? " विशनु का चेहरा एकदम काला पड़ गया । विजय सरदाना ने कहा
" कालीचरण के सारे आदेश - निर्देशों से संजय के अलावा सिर्फ तुम वाकिफ थे और कालीचरण संजय के बाद तुम्हीं पर भरोसा करता था । "
' ' जी हां ! "
" और तुमने उस भरोसे का अनुचित लाभ उठाया
' ' म ... म ...
मैं ! "
" कौन है वह जिसके इशारे पर तुम ज्वाला प्रसाद जी के खून की साजिश के साझेदार बने ? ' '
" म ... म ... मैं उसे नहीं जानता । "
विजय ने कड़े स्वर में कहा- ' ' शायद तुम भी करीम के पास जाना चाहते हो । '
" साहब , मुझसे कोई सौगंध ले लें ... मैं उसे नहीं जानता । "
' फिर भी तुम उसके लिए काम कर रहे हो ? ' ' ' ' मैं मजबूर हूं साहब । "
" कैसी मजबूरी ? ' '
' ' साहब ! मैं सामने से आने वाले पचास हमलावरों का मुकाबला कर सकता हूं , लेकिन अनदेखी मौत से हर कोई डरता है । ' '
।
' साफ - साफ बताओ । "
" बताता हूं साहब , अगर गला तर करने की इजाजत हो तो - मेरा गला बुरी तरह सूख गया है । ' '
' ' इजाजत है । "
विशनु ने एक पूरा गिलास भरा और एक लम्बा चूंट लेकर बोला - ' ' आप बिल्कुल नहीं पीते । ' '
विजय सरदाना ने रूखे स्वर में कहा- " सिर्फ काम की बात करो , फालतू की बातें नहीं । ' '
' ' म ... म ... माफ कर दें मुझे । ' '
' ' तुम बताने वाले थे कि तुम किसी अनदेखी मौत से डर गए थे । "
।
' ' साहब ! यह फ्लैट कालीचरण का ही है - मुझे यह फ्लैट और कार उन्होंने ही दी है । ' '
" जब मैं टैक्सी चलाता था तो बहुत छोटा - सा आदमी था ... सिर्फ आठ घंटे टैक्सी चलाने के बाद भी न मैं अपनी इच्छाएं पूरी कर पाता था और न अपनी पत्नी को सुखी रख सकता था । ' '
' ' तो तुम विवाहित भी हो ? '
' ' मेरी बेटी है साहब , आठ बरस की ... और मैं अपनी पत्नी और बेटी से बहुत प्यार करता हूं । ' '
" फिर ? "
' मैंने अपनी बेटी के उज्वल भविष्य और पत्नी को खुश रखने के लिए ही इस धंधे में कदम रखे थे ... मगर उन दोनों को इस चमक - दमक से दूर रखता हूं - वहां मेरी बेटी पढ़ रही है - मैं उन दोनों की इतनी रकम भेजता हूं कि वह आराम से रहती है । '
' फिर ? "
' ' कुछ दिन पहले अचानक मुझे ट्रंककॉल मिला कि मेरी बेटी एक एक्सीडेंट में मारी गई ... मैं पागल - सा हो गया ... कार लेकर दौड़ा - कोल्हापुर पहुंचा तो मेरी बेटी सही - सलामत थी - मैं उससे चिमटकर रो पड़ा । "
' ' फिर ? "
' ' मैंने सोचा , किसी ने यूंही बहका दिया होगा ... मैं वापस आ गया ... एक दिन मुझे अपनी पत्नी की फोटो जो पता नहीं कौन , कब और किस तरह इस फ्लैट में इसी मेज पर रख गया था ... जबकि इस फ्लैट की चाबी मेरे या कालीचरण ही के पास रहती है । "
' फिर ? ' '
' ' मुझे आश्चर्य हुआ ... फोटो में मेरी पत्नी मेरी बेटी को स्कूल पहुंचाकर बाहर निकल रही थी ... मैं परेशान था कि मुझे गुमनाम टेलीफोन मिला और कहा गया - विशनु तुम्हें पहले अपनी बेटी की मौत की झूठी खबर मिली जो सच भी हो सकती है ... आज अपनी पत्नी का फोटो मेज पर पाया होगा ... यानी हम जब , जो कुछ चाहें कर सकते हैं - तुम सात तालों में भी बंद कर दो , हम तुम्हारी पत्नी और बेटी तक पहुंच सकते हैं - तुम्हारी पत्नी को इतने आदमी एक साथ रेप कर सकते हैं वह चिल्ला - चिल्लाकर दम तोड़ दे - तुम्हारी बेटी बड़ी होकर वेश्या भी बन सकती है । "
.
' मतलब यह कि उस गुमनाम आदमी ने तुम्हें बुरी तरह भयभीत करके अपने जाल में फांस लिया है ? ' '
" जी हां ! "
' ' फिर उसने तुमसे कालीचरण के कामकाज और दैनिक दिनचर्या के बारे में पूछा ! "
।
" जी हां ! ' '
" और जिस दिन शकीला को ज्वाला प्रसाद जी के यहां भेजा गया था , उस दिन तुम्हें क्या निर्देश मिला था ? ' '
' उस दिन मुझे बताया गया था कि संजय की जगह रास्ते में कोई दूसरा ले लेगा । " ' ' क्या तुम्हें उसकी नीयत मालूम थी ? ' '
" नहीं - मुझे सन्देह था कि वह कुछ सीक्रेट डाक्यूमेंट्स उड़ाने का इरादा रखते होंगे । "
' ' मगर , क्या तुम्हें विश्वास था कि संजय अपनी जगह किसी को जाने देगा ? ' '
" मैंने उस गुमनाम आदमी से भी यही कहा था - उसने जवाब दिया था -- संजय कालीचरण का हुक्म नहीं टाल सकता । ' मैंने पूछा - कालीचरण ऐसा हुक्म देने ही क्यों लगा ? ' तब उसने खुद मुझे कालीचरण की आवाज बनाकर सम्बोधित किया ... तो मैं उछल पड़ा , क्योंकि वह आवाज सौ प्रतिशत कालीचरण ही की थी
। ' '
।
" तुम्हें उसके बदले क्या मिला ? ' ' ' ' पूरे दस लाख डालर जो एक विदेशी बैंक में मेरे नाम जमा करा दिए गए हैं । ' '
।
' उसका प्रमाण ? ' '
' ' मेरे पास है - मेरै बैंक के लॉकर में है । ' '
" तुम इतनी रकम का क्या करते ? ' '
' ' सर ! मैंने सोचा था कोई गरीब अनाथ लड़का जो शरीफ और रोशन दिमाग हो ... उसे अपना दामाद बनाऊंगा और अपनी बेटी के साथ विदेश भेज दूंगा ... बाद में मैं ख़ुद भी पत्नी के साथ विदेश में जा बनूंगा । "
" तुम्हें उस गुमनाम आदमी से और भी काम मिलने की आशा होगी । ' '
" जी हां - उसने कहा था , तुम हमारे लिए काम करोगे तो इस बार दुगुना मुआवजा दिया जाएगा ... दौलत के लालच के साथ मौत का डर भी था - उसने धमकी दी थी कि अगर राज खुल गया तो पहले मेरे खानदान का खात्मा कर दिया जाएगा ... फिर मुझे मार डाला जाएगा । "
" उसने इस काम के लिए तुम्हें क्यों चुना ? "
' शायद इसलिए कि मैं गरीबी की बहुत निचली गहराई से उठकर ऊपर आया था और उस गुमनाम आदमी के काम के लिए कालीचरण फाइनेंस कम्पनी से ज्यादा अच्छा कोई प्लेटफार्म नहीं हो सकता था । "
" और अब , जब तुम यह सब कुछ बता चुके हो ? " विशनु ने भर्राई आवाज में कहा - ' ' मैंने सब कुछ अपनी मौत के डर से बताया है , क्योंकि मैं पत्नी और बेटी के लिए जिन्दा रहना चाहता हूं | आपके बारे में मैं बहुत कुछ सुन चुका हूं ... मुझे भरोसा है कि आप मेरी बीवी और बेटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेंगे । "