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Thriller तबाही

" दोनों शादी करना चाहते हैं । "

" आपकी इच्छा के विरुद्ध ? "

" मुझे तो बडी खुशी होगी , अगर यह शादी हो जाए

" क्यों ? "

" जवान कुंवारी बेटी मां - बाप की इज्जत होती है शादी हो जाए तो वह पति की इज्जत बन जाएगी ... मेरी चिन्ता दूर हो जाएगी । "

" यह तो है । "

" वैसे भी शकीला की मां दूसरे धर्म की थी - आजकल देश को इन्टरकास्ट शादियों की जरूरत है ... यह जात - पात के झगड़े और अलगाववाद तभी समाप्त होगा ... सब एक सभ्यता , एक कल्चर में मिल जाएं । "

' आप ठीक कहते हैं । "

" मेरे कई कट्टरपंथी दोस्तों ने मेरे बेटे की शादी पर आपत्ति जाहिर की तो मुझे गुस्सा आ गया ... मैंने उनसे कहा , तुम यहां क्यों रह रहे हो ? अरब चले जाओ , दुबई , तुर्की , ईरान , पाकिस्तान कहीं भी चले जाओ ... वे लोग मुझे काफिर कहते हैं और मुझसे मिलना - जुलना बंद कर दिया । "

" संजय के बारे में कुछ मालूम है ? "

" एक खूबसूरत पढ़ा - लिखा स्मार्ट खुले विचारों का नौजवान है - मगर उसकी आंखों से लगता है कि वह कोई गलत काम कर रहा है । "

" शकीला कल से गायब है ? "

" हां । "

" क्या वह संजय के साथ गई थी ? "

" कहती तो है कि मैं अकेली आती - जाती हूं , लेकिन मुझे विश्वास है कि वह रास्ते में कहीं से पिकअप कर लेता है , लौटते हुए ड्रॉप कर जाता है । "

" और इस समय वह संजय के साथ है ? "

" शायद हो सकता है दोनों ने शादी कर ली हो शकीला जानती है कि मैं संजय को पसंद नहीं करता ... मगर मैं यह पसंद नहीं करता कि वह शकीला को किसी ऐसे- वैसे धंधे में शामिल करे जिससे बदनामी होती है । "

" क्या संजय और शकीला एक जगह काम करते हैं ? ' '

' ' हो सकता है , उसे संजय ने नौकरी दिलाई हो । ' '

" संजय के घर - बार का भी कुछ पता है ? ' '



" नहीं ... मगर तुम सरकारी ऑफिसर उन दोनों के बारे में क्यों छानबीन कर रहे हो ? ' '

' असल छानबीन मैं संजय के बारे ही में कर रहा था ... शकीला चूंकि संजय के साथ देखी गई थी इसलिए शकीला से उसके बारे में उससे मिलना जरूरी हो गया था । "

" संजय की तलाश क्या किसी बड़े अपराध के सम्बन्ध में हो रही है ? ' '

" जी हां । '

" किस अपराध में ? ' '

" आपने ऑनरेबल ज्वाला प्रसाद की खबर तो सुनी होगी ? "

कर्नल आफरीदी उछल पड़ा और चौंककर बोला " हां सुनी है । "

" सन्देह है कि उस साजिश में संजय भी शामिल हो

। "

कर्नल ने बेचैनी से पहलू बदलकर पूछा- ' ' हर सन्देह का कोई कारण भी होता है ? क्या कारण है ? ' '

" संजय के . सी . फाइनेंस में काम करता है और शकीला भी उसी फर्म में है । ' '

गॉड ! ' '

" संजय हीरो बनना चाहता था ... के . सी . ने एक फाइनेंसर के द्वारा उसे किसी प्रोड्यूसर से चांस दिलाने का वचन दे दिया था ... दूसरी ओर कालीचरण बड़े - बड़े धनवानों से इलैक्शन लड़ने के लिए बड़े नेताओं को फाइनेंस दिलवाता है । इस सम्बन्ध में संजय को कई बार ज्वाला प्रसाद जी के यहां भी आना - जाना पड़ा था और आखिरी बार शाम तक वह ज्वाला प्रसाद जी के यहां देखा गया था ... और वह अब गायब है - वहां उसके जाने का प्रमाण भी मिला है । ' '

कर्नल आफरीदी की आंखें आश्चर्य से फटी हुई थीं - उसने सरदाना को घूरकर कहा- " क्या शकीला भी वहां जाती थी ? ' '

" जी नहीं । "

' ' फिर शकीला की तलाश क्यों ? "

" इसलिए कि शायद शकीला को उसके भगौड़ा हो जाने की जानकारी हो सकती है । "

" लेकिन संजय ज्वाला प्रसाद जी का खून क्यों करने लगा ? ' '

" इसका सही जवाब तो संजय ही दे सकता है । ' '

कर्नल ने बेचैनी से फिर पहलू बदला और बोला " मेरी पोती इतनी बड़ी साजिश में शामिल हो सकती है ? नहीं ... नहीं ... हर्गिज नहीं । ' '

' ' मैंने तो आपसे नहीं कहा कि शकीला इस साजिश में शामिल है । ' '

" तुम कहो न कहो ... मगर तुम्हारा मतलब यही है

। "

इतने में टेलीफोन की घंटी बजी और कर्नल आफरीदी ऐसे उछल पड़ा जैसे बम फट गया हो - उसने घबराकर पूछा- " क्या हुआ ? ' '

सरदाना ने फोन की तरफ इशारा किया- ' ' आपका फोन है । "

कर्नल ने रिसीवर उठाकर इस तरह से चीखकर कहा जैसे सुनने वाला बहरा हो

II

" हैलो ... I ' '

दूसरी ओर से आवाज आई - ' ' कर्नल ! आवाज खराब हो जाएगी । ' '



' ' क ... क ... क्या मतलब ?

" मैं बहरा नहीं हूं । "

' ' कौन हो तुम ? "

' काला चोर । "

" व्हाट ! यह क्या बला है । ' '



" आपके पास सी . बी . आई . ऑफिसर विजय सरदाना बैठे हैं ? "

' ' हां , बैठे हैं - मगर क्या हुआ ? "

" जरा उन्हें फोन दीजिए । "

.

" क्यों ? ' '

" मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं । ' '

कर्नल ने फोन सरदाना की ओर बढ़ाते हुए कहा " वह कोई काला चोर आपसे बात करना चाहता है । ' '
 
विजय सरदाना ने रिसीवर कान से लगाकर कहा " हैलो ! ' '

" कौन ? सरदाना साहब ? ' '

" स्पीकिंग ! "

" मैं संजय हूं ... आप मेरी तलाश में घूम रहे हैं । ' '

" सेंट - परसेंट । "

" बेकार है । ' '

' ' वह तो हम फैसला करेंगे ... तुम कहां हो ? "

ठहाके की आवाज आई और कहा गया- ' ' आपको फैसला करने का मौका मिलेगा - तब ना । ' '

' ' देखो संजय ! इस तरह तुम अपना अपराध बढ़ा रहे हो । '

" मेरा अपराध कम ही कब है । '

" यानी तुम्हीं ने ज्वाला प्रसाद का खून किया है ? ' '

' ' जी हां । "

" तुम्हारे साथ शकीला भी थी । "

" बेशक । ' '



' वह कहां है ? ' '

' ' जहां है ... वह मेरे खिलाफ गवाह बनकर नहीं आ सकती । "

' ' नहीं ... ! ' '



" उसकी लाश अब तक कछुवे और मछलियां खा चुके होंगे । "

' ' संजय ! शायद तुम पागल हो चुके हो । "

" यही समझ लो । "

" देखो ! हम समझते हैं कि तुमने इतना बड़ा कदम किसी निजी दुश्मनी के कारण नहीं उठाया होगा ... फिर तुम्हारी और ज्वाला प्रसाद की दुश्मनी ही क्या हो सकती है - जरूर किसी ने तुम्हें यह काम करने पर मजबूर किया है - तुम अब भी वायदा माफ गवाह बन सकते हो ।

संजय ने ठहाका लगाया और बोला- ' ' मैं इस लालच में फांसी का फंदा अपने गले में नहीं डालूंगा । "

' ' संजय ... ! ' '

" ओ . के .... बाय - बाय । "

दूसरी ओर से डिस्कनेक्ट हो गया । उसी समय सरदाना ने एक्सचेंज से सम्पर्क करके मालूम किया कि इस नम्बर पर कहां से कॉल आई थी तो पता चला कि कॉल किसी मोबाइल फोन से की गई थी जो मालूम नहीं हो सकता ।

सरदाना ने रिसीवर रख दिया - इस बीच कर्नल आफरीदी उसे ध्यान से देख रहा था जैसे विजय सरदाना उसके विरुद्ध कोई साजिश गढ़ रहा हो - उसने थूक निगलकर कहा - ' ' माफी चाहता हूं , आपका वक्त खराब किया । '

कर्नल उठता हुआ बोला- " उसने शकीला के बारे में भी कुछ बताया कि नहीं ? ' '

" नहीं ... उसकी कोई खबर मिली तो मैं आपको सूचना दूंगा । ' ' और फिर विजय सरदाना बाहर चला गया ... कर्नल दरवाजे पर खड़ा उसे मोड़ पर मुड़ता देखता रहा ।

विजय सरदाना ने मोड़ से आगे बढ़कर अपनी ब्रांच से मोबाइल पर सम्पर्क करके एक सादा लिबास वाले को कर्नल आफरीदी के फ्लैट की निगरानी का आदेश दिया और टैक्सी पकड़कर चल पड़ा ।
 
विजय सरदाना की टैक्सी रुक गई । किराया चुकाकर वह कॉटेज के फाटक में दाखिल हो गया । यह छोटे - से बंगले जैसे कॉटेज था जिसकी पोर्च में एक कार भी खड़ी थी ... मारुतिजेन । सरदाना ने घंटी बजाई ... अंदर से दरवाजा खुलने में देर लगी - फिर दरवाजा खुला तो एक बच्ची की आवाज आई

" अभी अंदर मत आना । ' ' दरवाजे के पास से स्टूल सरकने की आवाज आई और एक सुन्दर , गोरी - सी छ : -सात वर्ष की बच्ची ने दरवाजा खोला , वह एक फ्राक पहने खड़ी कह रही थी - ' ' हैलो अंकल । ' '

" हैलो बेबी । "

' ' आपको किससे मिलना है ? ' '

" बेटी ... पहले अपना इन्ट्रोडक्शन तो दे दें । ' ' ' ' मेरा नाम गीता है ... प्यार से मुझे सब गीती कहते

इतने में एक औरत की आवाज आई- " कौन है गीती ? "

औरत सामने आ गई । एक शरीफ सूरत घरेलू औरत , उम्र लगभग चालीस पैंतालीस । लिबास से विधवा मालूम होती थी - उसने सरदाना को ध्यान से

देखकर कहा

" कहिए ... किससे मिलना है ? ' '

' जी - मिस्टर संजय से । ' '

' ' संजय तो कल से कहीं गया है । ' '

' ' कहां गए हैं ? ' '

" कुछ बताकर नहीं गया - अंदर आ जाइए । "

सरदाना अंदर दाखिल हो गया - उसे एक सोफे पर बिठाकर औरत ने गीती से कहा- ' ' जा ! सोनू से कह , पानी लाए । '

गीती चली गई तो औरत ने सरदाना से कहा " आपके यहां काम करता है संजय । "

" जी नहीं ... मैं संजय के साथ काम करता हूं । ' '

" ओहो - मगर वह क्या काम करता है ? उसने कभी बताया नहीं । "

" हम लोग एक फाइनेंसर के यहां काम करते हैं ... फाइनेंसर ने जिसको रुपया दिया होता है , उस रकम की किस्तें वसूल करते हैं । ' '

" तो इसमें छुपाने की क्या बात थी ? ' '

" संजय ने न जाने आपको क्यों नहीं बताया ? "

इतने में लगभग दस बरस की एक लड़की ने पूछा " अंकल ! आप ठंडा पिएंगे या गरम ? ' '

.

" नहीं बेबी ... कुछ नहीं । "

औरत ने उससे कहा- " रेणु से कहो , चाय बनाकर ले आए । ' ' सोनू चली गई तो औरत ने विजय सरदाना से पूछा- " क्या इस काम के लिए रातों को भी गायब रहना पड़ता है ? "

" दरअसल हमारी कम्पनी फिल्मों को भी फाइनेंस करती है ... हमें उनकी शूटिंगें देखनी पड़ती है । संजय ने यह छुपाया क्यों ? "

' शायद इसलिए कि वह फिल्म वालों को घर बुलाना पसंद न करता हो । '



।'क्यों ? "

" उनकी ऊपर तले की पांच बहनें हैं । ' '

" ओह ! ' '

" उसके पिता का अभी कुछ बरस पहले ही देहांत हुआ है - मैं भी बहुत बीमार हो गई थी - सारी जिम्मेदारियां उस बेचारे पर आ पड़ी , मुझे तो शक होने लगा था कि वह कोई गलत धंधा न करने लगा हो । ' '



" नहीं - ऐसा कुछ नहीं । " ' ' मां के दिल में तो बुरे विचार आते ही हैं । ' '

' ' यह तो स्वाभाविक बात है । ' '

' ' अब पता नहीं - कल से कहां गायब है । "

" फोन भी नहीं किया ? ' '

' ' नहीं - क्या तुम्हें भी नहीं मालूम ? ' '

" कभी - कभी हम दोनों को बॉस की ओर से अलग - अलग काम भी मिल जाते हैं ... दो - तीन दिन तक अपने दिए काम में लगे रहते हैं । "

इतने में रेणु चाय लेकर आ गई - वह एक अति सुन्दर लड़की थी जिसकी आंखों में बिजलियां - सी तड़पती महसूस होती थीं और वह अपनी खूबसूरती का जादू जानती भी थी ... उम्र पच्चीस - छब्बीस की

होगी ।

विजय सरदाना ने उस पर एक उचटती नजर डाली थी - उसने चाय की ट्रे रख दी -चाय के साथ कुछ स्नैक्स भी थे । औरत ने सरदाना से कहा- ' ' बेटे ! चाय पियो । "

" आपने यह क्यों कष्ट किया मांजी ? ' '

' ' संजय होता तो क्या तुम्हें इस तरह जाने देता ? ' '

अचानक रेणु ने सरदाना से कहा- ' ' आपको भैया का कुछ पता नहीं ? ' '

" संयोग की बात है - वरना मुझे संजय के प्रोग्रामों की खबर होती है । ' '

इतने में किसी ने डोरबेल बजाई और औरत ने रेणु

से कहा

' ' देख तो बेटी । ' '

रेणु ने दरवाजा खोला और एक नौजवान दो ऐंकल - शूज लिए खड़ा था । वह रेणु से बोला- " दीदी ! यह संजय भैया के जूते हैं ... मैं कल पहनने के लिए ले गया था , एक फंक्शन में जाना था - मगर मेरा पांव - सात नम्बर का है और संजय भैया का आठ नम्बर का इसलिए जूते रखे ही रह गए । ' '

सरदाना चौंक पड़ा - ' आठ नम्बर का पांव । ' उसने सोचा- ' मगर ज्वाला प्रसाद के बाथरूम में जो तले का निशान मिला है ... वह नौ नम्बर का है ' - इस बीच रेणु दरवाजा बंद कर चुकी थी - वह जूते लेकर अंदर चली गई ।

औरत फिर सरदाना से बातें करने लगी जो चाय पी रहा था- ' ' समझ में नहीं आता ... ये बच्चे अपने बड़ों की परेशानी का ख्याल क्यों नहीं रखते । संजय जानता है कि मैं उसके लिए कितनी परेशान हो जाती हूं । '

' जरूर कोई मजबूरी रही होगी - नौकरी फिर नौकरी होती है ... मालिक के हुक्म को किसी तरह टाला नहीं जा सकता । हां , उसने फोन तो करना चाहिए था ... यह जरूर उसकी लापरवाही है । ' '
 
अचानक ही सरदाना की आंखें राहदारी से अंदर की ओर उठ गई ... उसने बड़ी मुश्किल से अपने चौंकने के भाव को दबाया , क्योंकि रेणु उसे किसी इशारे से कुछ कह रही थी ... वह अंदर वाले कमरे के दरवाजे में थी । चंद ही सैकेंड में सरदाना की समझ में आ गया कि रेणु क्या कहना चाहती है । उसने चाय का आखिरी छूट लिया और जोर से बोला- ' ' अच्छा मांजी मैं चलता हूं - गजेबो में मेरा एक दोस्त इंतजार कर रहा होगा - जरूरी काम है । ' '

' अच्छा बेटा ... अरे हां , तुम्हास नाम ! "

" जी ... विजय ... विजय सरदाना ! "

" विजय बेटा ... संजय जैसे ही लौटे ... उससे कहना कम से कम घर फोन तो कर ले ... मैं बहुत परेशान हूं

" आप सन्तोष रखिए ... मैं उससे कह दूंगा कि वह इस बात का ख्याल रखे कि घर वाले परेशान न हों । "

फिर वह बाहर निकल आया ...

..रेणु क्या कहना चाह रही है ... वह क्यों मिलना चाहती है ? यह सोचता हुआ वह नीचे उतरकर बिल्डिंग से निकल आया ।

वह गजेबो में पहुंचा ही था कि मैनेजर ने जोर से कहा- ' ' यहां कोई मिस्टर सरदाना हैं ? ' '

सरदाना चौंक पड़ा और काउंटर पर आकर बोला ' ' फरमाइए - मैं ही हूं विजय सरदाना । "

" आपके लिए फोन कॉल है । "

सरदाना ने रिसीवर लेकर कहा- ' ' हैलो ! ' '

दूसरी ओर से जनाना आवाज आई- ' ' विजय जी ... मैं रेणु हूं । आप गजेबो ही में हैं न । मैं चंद मिनट में निकल पाऊंगी ... मम्मी से बहाना करना पड़ता है । थोड़ी देर भी लग जाए तो जाइए मत ... मुझे आपसे बहुत जरूरी काम है । "

' ' मैं इन्तजार करूंगा । "

" थैक्यू ! ' ' और दूसरी ओर से डिस्कनेक्ट हो गया । विजय ने एक केबिन में आकर डिब्बे की चिल्ड बीयर का आर्डर भी दिया , जिसके साथ फिंगर चिप्स भी आ गए । विजय धीरे - धीरे सिप करता हुआ सोचने लगा ... उसके मस्तिष्क मे रेणु को जूते वापस करने वाले व्यक्ति की बातें गूंज रही थीं - ' यह जूता आठ नम्बर का है जो संजय के पांव का नम्बर था और ज्वाला प्रसाद के बाथरूम में टब के बाहर नीचे जो तले का निशान मिला था वह नौ नम्बर का था ... और ज्वाला प्रसाद के कातिल के ऐकल - शूज का नम्बर नौ ही था । मतलब ज्वाला प्रसाद का कातिल संजय नहीं हो सकता - फिर संजय क्यों छुपा बैठा है ? फिर संजय ने कर्नल आफरीदी के घर उसे फोन ही क्यों किया ? '

' मगर क्या वह फोन करने वाला सचमुच संजय था ? अगर संजय ही था तो वे लोग लगातार मेरी निगरानी कर रहे हैं जो ज्वाला प्रसाद के खून के असल जिम्मेदार हैं

' मगर संजय के जूते का नम्बर ? '

' अगर वे लोग मेरी निगरानी कर रहे हैं तो उन्हें यह भी मालूम हो गया होगा कि मैं गजेबो में हूं ... और अभी रेणु मुझसे मिलने आएगी तो हे लोग मुझको देख लेंगे । '

' मगर रेणु मुझसे क्या बात करना चाहती है ? '

सरदाना धीरे - धीरे सिप करता रहा और हालात की कड़ियां जोड़ता - तोड़ता रहा - उसने सोचा- ' हो सकता है संजय ने जान - बूझकर 9 नम्बर का जूता इस्तेमाल किया हो और उसके तले का निशान छोड़ा हो ताकि छानबीन करने वालों को धोखा दे सके ... सिर्फ एक ही प्वाइंट बचाव के लिए काफी होता है । '

' मगर इतनी बारीकी से किसी साजिश के पहलुओं पर विचार करके उन पर अमल करना भी किसी बहुत बड़े और समझदार अपराधी का काम है - इसका मतलब है कि संजय की पीठ पर कोई बहुत ही खतरनाक साजिशी दिमाग काम कर रहा है - क्या वह कालीचरण है ? '

सरदाना के मस्तिष्क में झनझनाहट - सी होने लगी क्योंकि कालीचरण पर सन्देह करने का कारण नहीं था - निस्संदेह वह अरबपति था , मगर ऐसे ही धनवान जल्दी बिक जाते हैं ... धन कमाते जाने की लालसा , एक मेनिया । वैसे भी कालीचरण का जाल बेतरह फैला हुआ है - फाइनेंस ब्रोकर के नाते उसके सम्बन्ध हर प्रकार के लोगों से हैं - और कभी - कभी धनवानों की लॉबी सत्ताधारी पार्टी के विरुद्ध हो जाती है ।



वह इन्हीं विचारों में खोया था कि केबिन का पर्दा हटा और खुशबुओं का झोंका - सा आया , सरदाना का दिमाग झंकृत हो गया ।

रेणु अंदर आई थी ... उसने ढीली लेडीज जीन्स पहन रखी थी - ऊंची टी शर्ट , काले बंद जूते ... इस हुलिए में वह बहुत आकर्षक और सुन्दर लग रही थी ... खासी सैक्स अपील थी कि सरदाना जैसे मजबूत कैरेक्टर का दिल भी धड़के बगैर नहीं रह सका - मगर वह स्थिर और शांत रहा ।

' ' मैं आप ही का इन्तजार कर रहा था । ' '

रेणु ने होंठों पर आकर्षक मुस्कान लाकर कहा " मुझे खेद है देरी का ! वास्तव में मुझे पड़ोस के फ्लैट में जाकर तैयार होना पड़ा । मम्मी समझती हैं , मैं सहेली के साथ स्टडी कर रही हूं । ' '



विजय ने पूछा " क्या पीना पसंद करेंगी । कोल्ड या कॉफी । "

.

" कोल्ड कॉफी । ' '

विजय ने वेटर को बुलाकर कोल्ड कॉफी का ऑर्डर दिया । वेटर रेणु को घूरता हुआ वापस चला गया । यह बात विजय ने खासतौर से महसूस की , लेकिन चेहरे से कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं होने दी । उसने रेणु की ओर देखकर कहा

" आप मुझसे कोई खास बात करना चाहती थीं । "

' ' जी हां ... मां के सामने नहीं कर सकती थी । ' '

' ' बोलिए । "

' ' भइया के फोन मेरी सहेली के फ्लैट में आते हैं

" ओहो ! इस बार सरदाना चौंककर सीधा बैठ गया - ' " और यह बात आपकी मम्मी को नहीं मालूम । ' '

' ' नहीं । "

" तो संजय कहां है ? क्यों कल से गायब है ? ' '

' इन सवालों का जवाब इस बात पर निर्भर है कि मैं आपके ऊपर कितना भरोसा कर सकती हूं । ' '

' ' इसके लिए मुझे क्या करना होगा ? "

" क्या आप सचमुच भैया के कुलीग हैं ? ' '

' ' इसमें सन्देह का कारण ? ' '

" दरअसल , मैं अपनी पांचों बहनों में सबसे बड़ी हूं ... छब्बीस बरस उम्र है मेरी इसलिए मैं और भैया दोस्तों की तरह रहते हैं लेकिन भैया ने कभी विजय सरदाना नाम के किसी दोस्त का जिक्र भी नहीं किया । "

। "

इतने में वेटर फिर अंदर आया - कोल्ड कॉफी रखकर उसने दोनों को बारी - बारी घूरा और बोला " और कुछ चाहिए साहब ? "

' ' हां ... चाहिए । ' ' सरदाना ने आराम से कहा ' ' यहां बैठ जाओ । "

।'जी ...। "

' ' मेरे पास बैठो । ' '

' ' ज ... ज ... जी ... ! ' '

अचानक सरदाना के हाथ में रिवाल्वर नजर आया जिसे देखकर रेणु भी डर गई , क्योंकि सरदाना का चेहरा एकदम बदल गया था ... दूसरी तरफ वेटर का चेहरा सफेद पड़ गया था ।

' ' म ... म ... मैं ... ! "

सरदाना ने गुर्राकर कहां- ' ' बैठ जाओ । "

वेटर बैठ गया - मगर उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं । विजय ने उसकी कनपटी पर रिवाल्वर रखकर गुर्राकर कहा- ' ' बे - आवाज रिवाल्वर है - अगर कनपटी पर गोली मार दी जाए तो बाहर किसी को खबर भी नहीं होगी । "

' न ... न ... नहीं साहब ! ' '

.

" तुम कितने समय से यहां नौकरी कर रहे हो ? "

' ' द ... द ... दस साल से । ' '

" तुम्हें किसने यहां मेरी निगरानी पर लगाया है ? ' '

' ' क ... क ... किसी ने नहीं । ' '

" ठीक है ... I ' ' विजय ने रेणु से कहा- ' तुम बाहर जाओ - मैं इसे गोली मारकर अभी आता हूं । ' '

वेटर गिड़गिड़ाया- “ नहीं ... नहीं ... साहब ... मैं ... मैं ... ब ... ब ... बाल - बच्चों वाला हूं । "

" यह बात तुमने निगरानी की जिम्मेदारी लेते समय नहीं सोची थी । "

' स ... स ... साहब , मैं ... लालच में आ गया था । "

' ' कितनी रकम मिली थी ? ' '

' ' पूरे एक हजार रुपए । "

" काम क्या था ?

" आप दोनों की बातें सुनूं ... जितनी भी समझ में आएं , उन्हें बता दूं ... बस इसके सिवा और कुछ नहीं

। "

" किसने इस काम पर लगाया था ? ' '

' ' बाहर खुले में बैठे हैं ... चाय के साथ फिंगर चिप्स ले रहे हैं । "

" हुलिया ? ' '

वेटर ने हुलिया बताया और विजय ने जेब से पांच - पांच सौ के तीन नोट निकालकर वेटर को दिए

और बोला- " यह रकम उनकी दी हुई रकम से ज्यादा है - इसके अलावा तुम्हारी जान भी बख्शी जा रही है । ' '

' ' म ... म ... मगर मुझे ... क ... क ... क्या करना है ? ' '

" उन्हें गलत रास्ते पर लगाना है । ' '

" हुक्म कीजिए । "

' ' उन्हें बताना - जो लड़की अभी आई है , उसका मुझसे कोई चक्कर है - और अब हम दोनों जुहू जा रहे हैं । सी - व्यू में कमरा लेकर कुछ घंटे साथ - साथ गुजारेंगे । "

' ' जी साहब ! ' '

वेटर उठने लगा तो विजय ने गुर्राकर कहा- ' ' और सुना , अगर बाल - बच्चों को अनाथ नहीं बनाना चाहते तो तुम्हें यही कहना है जो मैंने कहा है । '

" ठ ... ठ ... ठीक है ... साहब ! आप सन्तोष रखिए फिर वेटर चला गया ... रेणु के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं । विजय ने रिवाल्वर जेब में रखते हुए मुस्कराकर कहा- ' ' आप तो बहुत डर गई ? "

।।

' ' अ ... अ ... आप ... !

" संजय के पास कभी रिवाल्वर देखा है ? ' '

' ' न ... न ... नहीं । "

' ' मगर होगा जरूर ... हमें रखना पड़ता है । ' '

' ' क्यों ? "

" जरूरत ... जैसे इस समय पड़ गई । "

सरदाना ने बीयर का डिब्बा खाली करते हुए कहा ' ' कॉफी खत्म कीजिए ... हम लोग जुहू चलेंगे । "

" ज ... ज ... जुहू ... ! "

विजय ने मुस्कराकर कहा ... सिर्फ अपने निगरानी को धोखा देने के लिए ... आप कुछ और मत समझिए | "
 
जब रेणु अपनी कॉफी पी चुकी तो विजय ने बिल मंगवाया तो वही वेटर लेकर आया ... उसका चेहरा अभी तक उतरा हुआ था - विजय ने बिल की रकम और टिप देकर पूछा- ' ' कह दिया । "

" ज ... ज ... जी साहब ! ' '

' ' थै क्यू ! मैंने तुम्हारा चेहरा नजरों में भर लिया है ... किसी भी गड़बड़ी और धोखे की सूरत में तुम्हारे बाल - बच्चे अनाथ हो जाएंगे । ' '

" ज ... ज ... जी साहब ! ' '

फिर वे दोनों भी उठ गए । विजय ने देखा , जिस हुलिए के आदमी के बारे में वेटर ने कहा था , वह भी उठ गया था । विजय और रेणु बाहर आए और एक टैक्सी में सवार हो गए ।

कुछ देर बाद टैक्सी सड़क पर दौड़ रही थी , लेकिन वेटर के बताए हुलिए वाला आदमी पीछा नहीं कर रहा था । विजय ने दो बार मुड़कर देखा तो रेणु बेचैनी से पहलू बदलकर पूछा- ' ' आ रहा है पीछे ? ' '

' ' नहीं । "

-

' इसका क्या मतलब हुआ ? "

' ' मैं खुद हैरान हूं । ' ' वि ने कहा और ड्राइवर से बोला- " उधर बायीं गली में टैक्सी मोड़ लेना । "

टैक्सी गली में मुड़ गई - एक सुनसान जगह पर विजय ने कहा- ' ' बस यहीं रोक दो । ' '

।।

टैक्सी रुक गई - दूसरे ही क्षण विजय की एक जोरदार हत्थी टैक्सी ड्राइवर की गर्दन पर पड़ी और वह एक ओर लुढ़क गया । रेणु उछल पड़ी - उसने कांपती आवाज में कहा- " यह ... क ... क ... क्या कर रहे हैं आप ? "

" ड्यूटी बदल गई थी । "

' ' नहीं : .. I ' '

" आप चाहें तो लौट जाइए - हम लोग फिर मिल सकते हैं । "

" और आप ... ! ' '

' ' मुझे इससे मालूम करना है कि यह मेरी निगरानी किसके हुक्म पर और किस कारण कर रहा है ? ' '

।।

' आप ... क ... क ... कौन हैं ? "

" विजय सरदाना । "

' ' म ... म ... मैं नहीं मान सकती । ' '

' क्यों ? "

" आपकी तरह संजय भैया कुछ नहीं करते । ' '

' ' मैं फिर बात करूंगा संजय के बारे में । ' '

' ' आप मुझे बता दीजिए कि आप कौन हैं तो मैं आपके ऊपर भरोसा करने को तैयार हूं । ' '

विजय सरदाना ने चुपचाप अपना आई कार्ड निकालकर रेणु की ओर बढ़ा दिया । रेणु ने उसका कार्ड देखा तो वह उछल पड़ी ।

" सुपरिन्टेंडेंट सी . बी . आई . ! ' '

विजय ने कार्ड वापस ले लिया और बोला- “ यह राज केवल आपको बता रहा हूं ... अपनी मम्मी को मत बताइएगा । मैं आदरणीय ज्वाला प्रसाद जी के खून की साजिश की तहकीकात कर रहा हूं ... यह जिम्मेदारी स्टेट को सेन्ट्रल की ओर से मिली है । ' ' रेणु का चेहरा और भी सफेद पड़ गया - उसने कहा

" त ... त ... तो क्या आपको विश्वास है कि संजय भैया ही ने यह अपराध किया है ? ' '

विजय ने उसे ध्यान से देखकर कहा - ' ' इसका मतलब है , आपको संजय ने सब कुछ बता दिया है । "

" जी हां । ' '



" क्या आप मुझे यही बताना चाहती थी ? ' '

" जी हां । "



" कहां छुपा है संजय ? "

" उन्होंने मुझे भी नहीं बताया । ' '

" शकीला जिन्दा है या मर गई । ' '

' ' वह तो संजय भैया के साथ है । ' '

" आपके यहां आने से पहले मुझे भी संजय का फोन आया था । "

।।

' अच्छा ... ! "

" वह कह रहा था कि उसने शकीला को मार डाला है और वह पुलिस के हाथों इसलिए नहीं पड़ना चाहता कि वह फांसी नहीं चढ़ना चाहता । ' '

' यह गलत है ... संजय भैया शकीला को मार ही नहीं सकते इसलिए कि वह शकीला से बहुत प्यार करते हैं और वह दोनों शादी करने का इरादा भी रखते हैं । ' '

' मगर इस तरह भगोड़ा बनकर क्या वह सजा से बच सकेगा ? "

' ' इसीलिए तो मैं आपसे मिलना चाहती थी ? ' '

" क्या मतलब ? ' '

' ' संजय भैया ने मुझे पूरी डिटेल फोन पर बताई थी - वह कानून और सजा से बहुत भयभीत हैं ... और उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं अपने किसी भरोसे के मर्द दोस्त के साथ मिलकर असलियत का पता लगाने की पूरी - पूरी कोशिश करता रहूं । " ' ' और आपने इसके लिए मुझे चुना है ? ' '

" जी हां - मैं समझी थी कि आप सचमुच भैया के कुलीग हैं और हो सकता है कभी ऐसा मौका ही न आया हो कि वह आपका जिक्र मुझसे करें । ' '

" अब आप मेरे ऊपर पूरा भरोसा करती हैं ? ' '

' ' जी , सेंट - परसेंट । "

" तो फिर आपको जो कुछ भी संजय ने बताया है , वह विस्तार से बताइए । ' '

।।

' शायद आपको कालीचरण के कारोबार का पूरा

ज्ञान न हो ? "

' ' मुझे सब कुछ मालूम है । '

" उस रात शकीला ज्वाला प्रसाद जी के पास भेजी गई थी । "

' ' संजय के साथ ? "

" जी हां - मगर रास्ते में संजय की जगह किसी और ने ले ली थी - संजय भैया ने समझा कि शायद यह कालीचरण की किसी स्कीम का हिस्सा होगा ... शकीला भी इसी धोखे में रही थी । "

" ओहो ... ! "

रेणु ने पूरे विस्तार से बताकर कहा

' शकीला के सामने ज्वाला प्रसाद जी का खून किया गया और वापसी में वह रहस्यमयी मूंछों वाला कातिल उतर गया - उसकी जगह संजय भैया ने ले ली ... जब शकीला ने संजय भैया को बताया कि असल बात क्या है तो वह शकीला के साथ कहीं भगोड़े होकर छुप गए । '

' ' शकीला कैसे जिन्दा रह गई ? ' '

' कातिल शकीला को मुर्दा समझकर वैने में छोड़कर चला गया था ... लेकिन शकीला के अंदर जान बाकी थी ... भैया ने उसे माउथ - टू - माउथ ऑक्सीजन पहुंचाकर बचा लिया था । "

" हूं , तो मूंछों वाले ने अपना अपराध संजय के सिर थोपने की कोशिश की थी , क्योंकि कोई भी विश्वास नहीं करता कि रास्ते में मूंछों वाले ने संजय की जगह ले ली थी । "

" ये तो स्पष्ट है । "

" तब तो संजय ने भगोड़ा होकर अपने आपको छुपाकर अक्लमंदी का सबूत दिया है । साथ में उसने शकीला को भी बचा लिया वरना उसे तो मार डाला ही गया था ... जिन्दा देखी जाती तो फिर मार डाली जाती , क्योंकि वही एकमात्र गवाह है जो संयज को निर्दोष सिद्ध कर सकती है । "

' ' निस्संदेह । ' '

" तुम्हें बिल्कुल मालूम नहीं संजय कहां छुपा बैठा है ? ' '

' ' जी नहीं ... वह फोन पर इसलिए नहीं बताता कि लाइन ट्रेस न की जा रही हो ... किसी को मालूम न हो

जाए । ' '

" संजय का सन्देह किस पर है ? ' '

।'कालीचरण पर । ' '

' आप संजय भैया को बचाएंगे ना ? ' '

' ' वह निर्दोष है इसलिए उसे बचाना ही है । "

' ' कैसे ? "

" इन्वेस्टीगेशन के बीच ज्वाला प्रसाद के बाथरूम में , जहां बाथ टब में उनकी लाश मिली है - वहां जूते के तले का एक निशान मिला है ... वह 9 नम्बर के जूते का

.

' ओहो ! "

" और संजय आठ नम्बर का जूता पहनता है ... यह बात मुझे संयोग से उस समय मालूम हुई जब संजय का कोई पडोसी उसके जूते लौटाने आपके घर आया

था । "

.

" थेंक्स गॉड ! "



' मगर जब तक संजय से मेरी मुलाकात न हो जाए , मैं शायद ही उसके लिए कुछ कर सकूँगा । "

' अबकी बार भैया का फोन आया तो मैं बात करूंगी



' आप वापस जाना चाहेंगी ? ' '
 
" नही ! संजय भैया को निर्दीष सिद्ध करने में मैं आपको असिस्ट करना चाहूंगी - मैंने डैडी के जीवन में बहुत ऊंचे सपने देखे थे ... छोटी उम्र ही में गर्ल गाइड में भी एन . सी . सी . ज्वायन कर ली ... मैंने बी . एस - सी , किया है ... कम्प्यूटर का कोर्स भी किया है । जूडो - कराटे , किंग - फू भी सीखे हैं ... मैं छ : आदमियों से अकेली मुकाबला कर सकती हूं । "

' ' नाइस । ' '



" मेरी मम्मी पुराने विचारों की हैं , लेकिन भैया ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है , वह चाहते हैं कि मैं जो चाहती हूं , बनूं । "

' ' आपके डैडी क्या करते थे ? ' '

" वह एक सैनिक पत्रिका के सम्पादक थे , मगर वास्तव में आर्मी इंटेलीजेंस में थे - वी . आई . पी . के लिए उचित सिक्योरिटी का प्रबंध उनकी मुख्य जिम्मेदारी थी । ' '

विजय सरदाना ने चौंककर पूछा- " क्या नाम था आपके डैडी का ? ' '

' ' ऋषिराज चौहान । '

' व्हाट ! ' ' विजय सरदाना उछल पड़ा- ' ' वह आपके डैडी थे ? "

' ' जी हां ... आप जानते हैं उन्हें ? ' '

" मैं आर्मी इंटेलीजेंस मे बड़े समय तक उनके नीचे काम करता रहा हूं । '

' ' ओ गॉड ! ' '

.

" लेकिन वह अचानक गायब क्यों हो गए ? ' '

" डैडी को ऑफिस से लौटते समय किडनैप कर लिया गया था ... फिर एक - एक करके उनके शरीर के टुकड़े पार्सल करके हमारे घर भेजे जाते थे , जिन्हें हमने मम्मी को नहीं दिखाया - उन्हें यही बताया कि वह एक दुर्घटना का शिकार हो गए हैं । '



' ' मगर क्यों ? '



" वह बताते नहीं थे ... मगर अंदाजा है कि उन पर दबाव पड़ रहा था कि वह एक बड़े नेता के खून की साजिश में मदद करें ... कई करोड़ डालर की ऑफर थी

" यह कैसे पता चला ? '

"

" डैडी कोडवडर्स में डायरी लिखते थे जिन्हें मैं थोड़ा - बहुत डी - कोड कर लिया करती । ' '

' ओहो ! "

" मुझे खुशी है कि आपका साथ मिल गया ... अब मैं आसानी से भैया को फंसाने की कोशिश करने वालों को पकड़वा सकती हूं - शायद वे ही लोग डैडी के खून के जिम्मेदार हों । "

" हो सकता है । "

" अच्छा , अब आप इस जगह बैठिए , मैं ड्राइविंग सीट सम्भालता हूं । '

" कहां ले जाएंगे आप इसे ? "

" देखती रहिए । "

विजय अगली सीट पर आ गया ... उसने टैक्सी ड्राइवर को दूसरी ओर सरका दिया था जो अभी तक बेहोश था । ' '

" यह होश में आ गया तो ? "

" दो घंटे से पहले होश में नहीं आएगा । ' '

फिर टैक्सी सड़क पर दौड़ने लगी ।

/////////////////////////////////
 
सूरज डूब चुका था - सागर तल पर तारे पिघली हुई चांदी के समान लग रहे थे । हवा के तेज झोंकों से लहरें नृत्य कर रही थीं ... लहरों का शोर अपने संगीत के ढोल - ढमक्के में मस्त था ।

जुहू बीच से आगे अंधेरे में रेणु विजय के साथ थी । ड्राइवर अब भी बेहोश था ... उसके दोनों हाथ और दोनों पांव मिलाकर पीछे बांध दिए गए थे ।

रेणू ने कहा- " कब तक होश आएगा इसे ? " विज ने घड़ी देखते हुए कहा- " आने ही वाला होगा

। ' '

फिर अचानक ड्राइवर के होंठों से कराहें निकलीं और विजय ने उठते हुए कहा- ' ' आ गया होश । ' '

ड्राइवर ने आंखें खोली और पहलू बदलने की कोशिश की तो अपनी जगह से हिल भी नहीं पाया । साथ ही दर्द का एहसास होने से और भी कराहटें निकलीं ।

विजय ने उसके पास बैठकर उसकी आंखों पर टॉर्च की तेज रोशनी डालते हुए कहा- ' ' अब क्या हाल है ? "

' ' ख ... ख ... खोल दो मुझे । ' '

" जल्दी क्या है - खोल देंगे । ' '

' ' क ... क ... कौन हो तुम ? ' '

" जिसे तुम टैक्सी में लेकर चले थे । ' '

" क्यों मेरी दुर्गत बना रहे हैं ... साहब ? " ' ' गजेबो से नीली जैकेट जीन्स वाले ने हम दोनों को तुम्हारे चार्ज में दे दिया था न ? ' '

" क ... क ... कौन नीली जैकेट जीन्स वाला ? ' '

विजय ने थोड़ी - सी रेत उठाकर उसके मुंह में डाल दी और वह बिलबिलाकर थू - थू करने लगा । विजय ने बड़े कड़े स्वर में कहा

' अगर नाक बंद कर ली तो कम से कम एक किलो रेट पेट में उतारनी पड़ जाएगी । ' '

" नहीं ... नहीं ... ! "

" ऊपर से चार बोतल समुद्र का पानी । ' '

" नहीं ... नहीं ... ! "

' वह कौन था ? "

' ' म ... म ... मुझे नहीं मालूम । '



" तुम किसके लिए काम कर रहे हो ? "

' ' क ... क ... किसी के लिए नहीं । ' '

विजय ने रेणु से कहा- " जरा पानी की बोतल देना

। ' '

रेणु ने पानी की बोतल दे दी , जिसमें समुद्र का पानी था - विजय ने बोतल ड्राइवर के मुंह से लगा दी तो उसने पानी थूकने की कोशिश की ... विजय ने उसकी नाक बंद कर दी और पानी गले से उतर गया । "

।।

' अरे ! मर गया । "

' ' अभी कहां मरे हो ... धीरे - धीरे मरोगे । ' '



" नहीं ... नहीं ... मुझे छोड़ दो । "

" तुम लोग किसके हुक्म पर मेरी निगरानी कर रहे हो ? ' '

' ' म ... म ... मैं नहीं जानता , वह कौन है ? ' '

।।

" और कौन जानता है ? "

" विशनु । "

' ' यह कौन है ? ' '

' ' वही नीली जीन्स जैकेट वाला । ' '

" विशनु किसके लिए काम करता है ? ' '

' ' म ... म ... मुझे नहीं मालूम साहब । ' '

।।

" और तुम उसका हर हुक्म मानते हो ? ' ' " साहब ! मुझे सौ रुपए रोज मुफ्त में मिलते हैं । "



" तुम क्या करते हो ? "

' ' मेरा प्रोफेशनल टैक्सी ड्राइविंग का लाइसेंस कार में रखा है ... आप सारे कागजात देख सकते हैं ... बांद्रा के गैरेज की टैक्सी है । "

" रहते कहां हो ? "

" बहरामपुर में । "

" नाम क्या है ? ' '

" अब्दुल करीम । '

" विशनु को कैसे जानते हो ? ' '

' पहले वह भी टैक्सी चलाता था ... और बहरामपुर में रहता था । "

" फिर ... ? ' '

" फिर अचानक वह बहरामपुर से चला गया और एक दिन एक कीमती मोटर साइकिल ले आया ... उसके नक्शे ही बदले हुए थे ... मेरे पूछने पर उसने बताया कि अब वह पन्द्रह - बीस हजार रुपए महीना कमाता है ... और अगर मैं उस जैसा बनना चाहता हूं तो मैं पहले उसके लिए काम करूंगा ... इस तरह वह भी पहले किसी के लिए काम करता था । ' '

' ' क्या काम था तुम्हारा ? ' '

" कुछ खास घरेलू , पर्दादार , मिडिल क्लास या ऊंचे वर्ग की लड़कियों को निश्चित स्थानों से बड़े - बड़े बंगलों में पहुंचाना और निश्चित समय पर ही वापस पहुंचाना । ' '



" इस काम के सिर्फ सौ रुपए । "

" साहब ! काम हफ्ते में एक - दो बार - होता है , लेकिन सौ रुपये हर रोज बंधे हुए मिल जाते हैं । ' '

" किसी लड़की को देखा है ? ' '

' ' जी नहीं । "

।।

' आज तुम्हें विशनु ने मेरे पीछे क्यों लगाया था ? "

" विशनु ने कहा था ' ' - उसने रेणु की ओर इशारा करके कहा- “ यह अपने ग्रुप की है , आप विरोधी ग्रुप के हैं और इन्हें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ? ' '

' ' फिर ? " ' ' मेरा काम था कि आप दोनों को टैक्सी में सवार कराके ले जाऊं - जहां आप लोग रहें , मै विशनु को खबर कर दू

" किन नम्बरों पर ? "

अब्दुल करीम ने नम्बर बताए - विजय ने कहा " तुमने अब तक जितना बताया , उसमें सच कितना है और झूठ कितना । "

" साहब ! आप फोन करके मेरी विशनु से बात करा दें - आपको मेरी सच्चाई का विश्वास हो जाएगा । ' '

' अगर विश्वास न आया तो ... ? "

" मुझे वही सजा दीजिए जो आपका मन चाहे । "

" विशनु कहां रहता है ? "

" टर्नर रोड़ पर । "

' ' टर्नर रोड़ तो बहुत बड़ा है । ' '

" वह सेंट सीरियल रोड़ पर आर्च - वे नाम की एक बिल्डिंग के एक फ्लैट में रहता है । ' '

' ' फ्लैट नम्बर और माला ? ' '

' ' मुझे नहीं मालूम - कभी उसके साथ नहीं गया । "

' अच्छा ठीक है - बात करो । ' '
 
विजय ने करीम के बताए नम्बरों के बटन दबाकर रिसीवर करीम के कान के पास कर दिया । ' आवाज आई - ' ' हां , बोलो करीम । ' '

करीम ने किसी ऐसी भाषा में कुछ कहा जो समझ में नहीं आई । विजय ने झट फोन कट कर दिया । करीम ने ठहाका लगाकर कहा

.

' अब कुछ नहीं हो सकता । "

" बास्टर्ड ! "

' ' मैंने बताया है कि तुम मुझे धोखे से ले आए हो ... और तुम्हें पता चल गया है कि तुम्हारी निगरानी हो रही है । ' '

विजय कुछ नहीं बोला । करीम ने फिर कहा- " पांच मिनट में वे लोग यहां पहुंच जाएंगे ... और तुम यहां से किसी तरह जिन्दा वापस नहीं जा सकोगे । "

" तुम भी तो जिन्दा नहीं रहोगे । "

विजय ने उसके मुंह में एक बड़ा पत्थर लूंसकर ऊपर से रूमाल बांध दिया और उसे उठाकर चट्टान पर चढ़ गया ... फिर करीम बिलबिलाता ही रह गया और विजय ने उसे उठाकर नीचे फेंक दिया - उसे मालूम था कि इस जगह खतरनाक कछुवे और मछलियां रहती हैं

-

रेणु कसकर आंखे भींचकर झुरझुरी - सी लेकर रह गई थी । जब विजय वापस आया तो रेणु ने धड़कते

दिल से पूछा

" क्या वह मर गया होगा ? ' '

' ' ऐसे बेगैरत बदमाश देर से ही मरते हैं । ' '

' ' आपको ऐसा करते हुए जरा - सा भी डर या दहशत का एहसास नहीं हुआ ? ' '

' ' किस बात का एहसास - उसका सम्बन्ध एक खतरनाक गिरोह से था , जिसके हाथों न जाने कितने घर , जीवन बर्बाद हुए होंगे - कितने खून उसके हाथों हुए

होंगे । "

।।

' और वह गिरोह कालीचरण का है । ' '

" आओ चलें ... देखेंगे , यह ग्रुप किसका है । अभी मुझे विशनु को जल्दी से चैक करना है । ' '

" क्या विशनु करीम की मदद के लिए यहां नहीं

आएगा ? "

" बकवास ! ऐसे लोग बेकार होते हुए मुहरों को पिटवा देते है । वह जानता था कि करीम अब बचने वाला नहीं ... क्योंकि विशनु मेरी असलियत जानता होगा - सिर्फ बचने की कोशिश के लिए उसने कहा था कि विशनु उसे बचाने आएगा ।

वे लोग सड़क पर आ गए - टैक्सी खड़ी थी , लेकिन विजय ने उस तरफ देखा भी नहीं ।



रेणु ने कहा - ' ' इस टैक्सी का क्या होगा ? ' '

' गश्ती पुलिस उठाकर ले जाएगी । ' '

" और हम लोग । ' '

" कोई दूसरी सवारी मिल जाएगी हमें । " और थोड़ा ही आगे जाने पर उन्हें एक खाली टैक्सी मिल गई ।

बांद्रा पहुंचकर विजय ने टैक्सी छोड़ दी और रेणु से बोला - ' ' अब तुम घर जाओ ... तुम्हारी मम्मी परेशान होंगी । "

' ' और आप ? "

" मुझे विशनु की खबर लेनी है । ' '



" तब तो मैं भी साथ रहूंगी । ' " रेणु ! तुम्हें अपनी मां का ख्याल नहीं ? ' '

" मैं जिस सहेली के बहाने निकली हूं - मम्मी उस पर बहुत भरोसा करती हैं और सहेली ऐसे हालात में सब कुछ सम्भाल लेती है । "

" मगर , क्या यह बात अच्छी है ? ' '

.

' बुरी क्या है ? मैं मम्मी की तरह गए युग की औरत नहीं बनना चाहती ... मैंने आपको बताया था कि मेरे कुछ अपने सपने थे ... मैं अपने आपको एक मॉडर्न लड़की के रूप में ढाल रही थी ... मेरे डैडी मेरी प्रेरणा थे ... उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया । ' '

विजय चुप रह गया । वे लोग ऐसे सर्कल पर थे जहां से पांच रास्ते बंटते हैं ... वह विजय के साथ टर्नर रोड़ पर मुड़ गई ... रातें के लगभग दस बजे होंग - अब मुम्बई की रौनक जागनी शुरू हुई थी । उन्होंने सेंट सीरियल रोड़ तक रास्ता पैदल तय किया ... दायीं और मुड़कर एक बंगला छोड़कर दूसरी बिल्डिंग आर्च - वे थी ... सफेद चमचमाती हुई बिल्डिंग जिसमें कई माले तक फ्लैट थे ।

वे लोग फाटक से बहुत दूर नहीं थे कि फाटक से एक कार निकली जिसके सड़क की तरफ मुड़ने पर उन दोनों पर रोशनी पड़ी और कार की ब्रेकें अचानक चिरमिराई ।

दोनों चौंककर उधर देखने लगे और कार के अंदर से एक औरत की सुरीली आवाज सुनाई दी

' ' हाय , मिस्टर सरदाना ! ' '

और सरदाना कार की ओर बढ़ता हुआ बोला - ' ' हाय , मिसिज सरोज बाली ! "

" आइए ! ' ' अगला दरवाजा खुल गया तो सरदाना ने झुककर कहा - ' ' मैं अकेला नहीं हूं । ' '

" वह तो मैं देख ही रही हूं - मगर मेरी गाड़ी में काफी जगह है ... कहां जाना है आपको ? ' '

" हम लोग तो आर्च - वे तक ही आए थे । "

" मेरे पास ! इतने बरसों बाद मेरी याद कैसे आ गई ? ' '

' ' आपके पास नहीं - एक आदमी की तलाश थी । ' '

' ओहो - तो किसी अपराधी की तलाश थी । ' '



" अपराधी कैसे समझ लिया ? ' '



' आपको भला किसी शरीफ आदमी की तलाश कैसे हो सकती है - आइए ... अंदर बैठ जाइए ... शायद मैं आपकी कोई मदद कर सकूँ । "

सरदाना ने पिछली सीट का दरवाजा खोलकर पहले रेणु को बिठाया , फिर खुद भी अगली सीट पर बैठ गया - गाड़ी चल पड़ी तो सरदाना ने पीछे इशारा करके कहा- ' ' मेरी साथी ... मिस रेणु । ' '

" मिस रेणु खन्ना ... शायद यही इनका पूरा नाम है

। '

' आप इन्हें जानती हैं ? ' '

सरोज धीरे से हंसकर बोली - ' ' मैं के.सी. कम्पनी से सम्बध नहीं रखती । "

" लेकिन आप ... ! "

" संजय खन्ना..उसका मेरा काफी साथ रहा है । '

।।

' ओहो ! "

" आपको तो मालूम ही है , मैं कालीचरण द्वारा हीरोइन बनी हूं - पिछले बरस तक सड़कों पर घूमने वाली लड़की आज आर्च - वे के शानदार फ्लैट में रहती है । ' ' फिर हल्की सांस लेकर उसने कहा- ' ' एनी वे , आज आपको किसकी तलाश है ? ' '

।।

' अगर गलत नहीं बताया गया तो उसका नाम विशनु है । "

सरोज ने चौंककर कहा- ' ' विशनु महाजन ! ' '

' ' मुझे पूरा नाम नहीं मालूम । "

सरोज ने हुलिया बताकर कहा- " नीली जाकेट , जीन्स उसका खास लिबास है । ' '

.

" जी हां ... वही । "



" आपको उसकी तलाश क्यों है ? ' '

' ' वक्त आने पर मालूम हो जाएगा ... क्या वह इसी बिल्डिंग में रहता है ? "

" तीसरे माले

पर ,

आठवे फ्लैट में ... लेकिन उसके दरवाजे पर विशनु महाजन की नेम प्लेट नही लगी हुई । "

" फिर ? "

' ' के.सी. काम्बोज की नेम प्लेट है

' ' क्या शेयर करता है ? "

' ' नहीं - उसने फ्लैट नाम बदलकर लिया हुआ है - अभी एक बरस में ही टैक्सी ड्राइवर से आर्च - वे के फ्लैट का मालिक बन बैठा है - उसके पास कार भी हैं - मारुति एट हंड्रेड । "

' ' उसकी उन्नति का राज तो आप जानती होंगी । "

" जिसकी पीठ पर कालीचरण हाथ रख दे , वह अपने आप राजा बन जाता है । कालीचरण आजकल तो कुंदन हो रहा है । ' '

" तो वह कालीचरण के लिए धंधा करता है ? ' '

' ' स्पष्ट है - एक साल तक टैक्सी ड्राइवर रहा था ... मेरे जैसी लड़कियों को लाना , ले जाना ... अब चूंकि कालीचरण का कॉन्फीडेंट बन चुका है इसलिए उन्नति हो गई । "

' ' बहुत खूब ... कितना बड़ा बिजनेस है ... और लोग बेरोजगारी का रोना रोते हैं - भूखों मरते हैं । "

" मगर क्या आप उसकी तलाश में इसलिए हैं कि वह एक दलाल है या कोई और बात है ? "
 
विजय ने हंसकर कहा- ' ' दलाल आजकल कौन नहीं है ? पहले यह शब्द बहुत गंदा लगता था , मगर अब उजले सफेदपोशों ने इस धंधे में आकर किसकी शान बढ़ा दी है- वैसे भी हम किसके दलालों को पकड़ें - इनकी पहुंच तो मिनिस्टरों तक है । ' '

सरोज ने हंसकर कहा

" एनी वे ... मैं नहीं पूछूगी कि आपको विशनु की तलाश क्यों है - मेरा ख्याल है , इस समय वह फ्लैट में ही होगा - आमतौर पर वह दस से ग्यारह बजे तक फ्लैट में होता है । ' '

" अच्छा , आपको शूटिंग में जाना होगा । ' ' ' ' नहीं - एक नई फिल्म का मुहूर्त अटेंड करना है । " ' मदद के लिए शुक्रिया । "



और दोनों कार से उतरकर आए ... सरोज ने हाथ हिलाया और कार चली गई । सरदाना ने रेणु से कहा - ' ' अफसोस होता है - अच्छे - खासे शरीफ आदमी की पत्नी अचानक चहारदीवारी छोड़कर सड़क पर आ गई , हीरोइन बनने के शौक में । '

' ' अच्छा ! किसकी पत्नी है ? ' '

" यह शकीला की दूसरी मां है । ' रेणु आश्चर्य से उछल पड़ी- “ यह क्या कह रहे हैं आप ? ' '

" है ना आश्चर्य की बात । इसने शकीला के बाप से शादी की थी उसकी दौलत के लिए - लेकिन वह अपनी पहली पत्नी के साथ खत्म हो गए ... ससुर ने इसे निकाल दिया ... यह बहुत सुन्दर थी ... अब और भी खूबसूरत हो गई है - शुरू ही से हीरोइन बनने का शौक

था ।

कुछ अरसा सड़कों पर घूमना पड़ा - एक बार सी - व्यू होटल में किसी के साथ सो रही थी ... वहां ऐंटी करप्शन फोर्स की रेड़ - हुई वहां से नंगे भागना पड़ा - संयोग से मेरी गाड़ी सामने थी ... उसमें छुप गई । ' '

आपने गिरफ्तार नहीं कराया ? ' '

" क्या फर्क पड़ता एक औरत की गिरफ्तारी से - मुम्बई में जाने कितनी औरतें ऐसा ही करती हैं - सी - व्यू से कमीशन नहीं पहुंचा होगा इसलिए वहां पर रेड कर दी गई । "

' ' फिर क्या हुआ ? ' '

' ' मैंने बचाकर ठिकाने पर पहुंचा दिया - कपड़ो का भी प्रबंध कर दिया , तभी से मेरी पहचान हो गई थी । ' '

' ' चलो , इस बहाने विशनु के बारे में कुछ मालूम

हुआ । "

' ' हां ! मगर यह खबर आश्चर्यजनक है कि विशनु दस बजे से ग्यारह बजे रात तक किसका इन्तजार अपने फ्लैट में करता है ? ' '

' अब यह विशनु खुद ही बताएगा । ' '

फिर वे लोग बिल्डिंग में घुसते चले गए ... चौकीदार ने इसलिए नहीं टोका कि उन्होंने अजनबियों की तरह उससे कोई सवाल नहीं किया था ।
 
तीसरे माले तक वे लोग लिफ्ट से चढ़े - ऊपर पहुंचकर आठवें फ्लैट के सामने रुक गए । रेणु ने कहा- ' ' उसने हम दोनों को गजेबो में देखा है । ' '

' ' मालूम है । "

" फिर क्या इस तरह दरवाजा खुलवाना उचित होगा ? "

' ' मैं उचित साधन ही प्रयोग करता हूं । ' '

उसने पहले जेब से एक ऐसा शीशा निकाला जो उल्टे को सीधा करके दिखाता है ... मैजिक आई पर शीशा लगाकर उसने एक आंख लगाकर अंदर का

दृश्य देखा ।

अंदर विशनु मौजूद था , मगर इस तरह सन्तुष्ट जैसे उसे विश्वास हो कि करीम उसके बारे में किसी को कुछ नहीं बता सका होगा - उसके सामने बोतल रखी हुई थी और गिलास भरा हुआ था जिससे वह बूंट भर रहा था । पास ही एक मोबाइल फोन रखा था ।

इससे पहले कि विजय कोई कार्यवाही शुरू करता , मोबाइल का बजर बोल उठा और विशनु ने यूंट भरकर गिलास रखा और मोबाइल उठाकर कान से लगा लिया - वह बड़े आराम से किसी से बात कर रहा था - कुछ देर बाद फोन बंद करके उसने गिलास से एक चूंट भरा और अंदर के कमरे में चला गया..विजय ने जल्दी से मुड़ी हुई नोक वाला औजार निकाला और उसे ताले के छेद में ... डालकर घुमाया ... चंद ही सैकेण्ड में दरवाजा खुल गया - विजय ने होंठों पर उंगली रखकर रेणु को चुप रहने का इशारा किया और फिर रेणु का हाथ पकड़कर अंदर दाखिल हो गया ... दरवाजा बिना जरा भी आवाज किए उसी तरह बंद कर दिया । फिर वे दोनों चुपचाप सोफे के पीछे बैठ गए - अब विजय के हाथ में रिवाल्वर भी था । कुछ देर बाद विशनु बाहर आ गया - उसने मोबाइल उठाकर नम्बर मिलाकर कान से लगा लिया

" हैलो ! ' ' दूसरी और से आवाज आई । " सुप्रीमो ! "

' ' स्पीकिंग ।।

' करीम के घर की निगरानी जारी है ... विजय सरदाना ने करीम के घर का पता टैक्सी में रखे कागजात से लगा लिया होगा और वह किसी भी समय वहां पहुंच सकता है । "



' उसका इन्तजाम क्या है ? ' '

' ' वहां से बचकर नहीं जाना चाहिए । ' '

' ' यह काम तो तुम्हें गजेबो ही में ही कर देना चाहिए था । "

" सर ! पहले मुझे सिर्फ उसकी निगरानी का हुक्म मिला था ... वरना अब तक उसका नामो - निशान तक न होता । "



" वह एक जबरदस्त खतरनाक ऑफिसर है । पहले वह शकीला के बाप तक पहुंचा और फिर संजय के घर तक । "

' ' इससे क्या फर्क पड़ता है सर ! दुनिया तो यही जानती है कि संजय ज्वाला प्रसाद का खूनी है इसलिए वह रूपोश हो गया है । "

' ' गधे हो तुम । "

' यस सर ! ' '



" तुम विजय सरदाना को अच्छी तरह जानते होते तो ऐसी मूर्खता भरी बात जबान पर भी न लाते । "

" सर ... ! "

" संजय असल कातिल नहीं है , शकीला को मार डाला गया है - उसकी लाश संजय खन्ना ने कहां छुपाई होगी , पता नहीं ... लेकिन संजय भगोड़ा हो गया है । "

' ' यस सर ! ' '

' ' विजय सरदाना को शकीला और संजय के बारे में के . सी . कम्पनी से मालूम हो गया होगा । ' '

" निस्संदेह । '

' ' मगर उसका संजय के घर पहुंचना खतरनाक है

.

" क्यों सर ? "

" विजय सरदाना बहुत बारीकियों पर नजर रखता है ... और हो सकता है , संजय ने अपने घर से सम्पर्क रखा हो । "

" फिर ? "

' ' संजय ने बताया होगा कि वह ज्वाला प्रसाद का कातिल नहीं है ... अगर विजय सरदाना के कानों तक यह बात पहुंच गई होगी तो गजब हो जाएगा , क्योंकि अगर वह संजय से मिल लिया तो संजय उसे असल कातिल का हुलिया बता देगा तो गजब हो जाएगा ।

और विजय सरदाना के लिए कातिल को ढूंढना मुश्किल नहीं होगा । "

" फिर मैं क्या करू सर ! "

" विजय सरदाना की मौत हम लोगों की जिन्दगी के लिए बहुत जरूरी है ... वरना याद रखो , वह हम सबकी डुबो देगा । "

" सर आप सन्तोष रखें - विजय सरदाना कल शाम से पहले मर जाएगा । "

" इतना आसान मत समझो ... वह कोई शर्बत का सामने रखा गिलास नहीं जिसे उठाकर मुंह लगाओ और खाली कर दो । ' '

' ' जी सर ! ' '

' ' बहरहाल , मैं तुम्हारी जबान से विजय सरदाना की मौत की खबर जरूर सुनना चाहूंगा । ' '

" आपकी यह इच्छा अवश्य पूरी होगी , सर । " " ओ . के . दैट्स ऑल । " विशनु ने बटन दबाकर हैंडपीस रख दिया , लेकिन इस बार उसकी आंखों से चिन्ता झलक रही थी ... और माथे पर सिलवटें उभर आई थीं ।

उसने गिलास उठाकर एक चूंट भरा और विजय सरदाना चुपचाप उठ गया ... उसने रेणु को वहीं रुकने का इशारा किया - फिर वह बिल्कुल अचानक विशनु के सामने आकर बैठ गया ।

एकाएक ऐसा लगा जैसे विशनु पत्थर का हो गया हो । उसका चेहरा सफेद पड़ गया और गिलास मुंह के पास ही रह गया था । विजय सरदाना के हाथ में रिवाल्वर था जिसका निशाना विशनु की तरफ था । उसने बड़े आराम से कहा

" पियो ... पियो ... अभी गिलास में काफी है । ' '

अचानक ही विशनु ने गिलास की बची व्हिस्की विजय के चेहरे पर उछाल दी , मगर विजय बड़े आराम से बच गया । उसने फिर सीधा होकर मुस्कराकर विशनु की आंखों में देखते हुए कहा

' ' कोई बात नहीं - बच्चों के लिए कभी - कभी शरारत करना उनकी सेहत के लिए जरूरी है । ' '

" त ... त ... तुम ... ! "

' ' मैंने सोचा , करीम के घर जाने की बजाए सीधा तुम्हीं से मुलाकात कर लूं । "

" त ... त ... तो ... करीम ... ! "

"

" वहां है , जहां से कभी कोई वापस नहीं आता । ' ' म ... म ....

..मुझे मारकर क्या तुम जिन्दा रह सकोगे ? "

' ' मेरे जीने - मरने की चिन्ता छोड़ो - मैं तो हमेशा जान हथेली पर लिए फिरता हूं । ' '

विशनु का चेहरा इस तरह पीला पड़ा हुआ था जैसे उसे अपनी मौत का विश्वास हो गया हो । विजय ने मुस्कराकर कहा

' ' तुम शाम को तो इतने भयभीत नहीं थे - जब एक वेटर को एक हजार रुपए में खरीदकर तुमने मेरी और रेणु की बातचीत के बारे में मालूम करना चाहा था । ' '

विशनु होठों पर जबान फिराकर रह गया । विजय सरदाना ने फिर कहा

' ' वास्तव में किसी के भी दिल पर यूं भी या तो मुहब्बत हुकूमत करती है या डर ... और शाम को तुम मुझसे भयभीत नहीं थे - क्यों ? ' '

' ' ज ... ज ... जी ... ! "

।।

" और मेरी ओर से यह डर तुम्हारे दिल में खुद तुम्हारे सुप्रीमो ही ने डाला है - क्यों ? ' '

' ' म ... म ... मैं ... ! "

' ' मगर डरो मत ... मैं ऑफिसर जरूर हूं ... बेरहमी पर मुझे तभी उतरना पड़ता है जब मुझे सामने वाले के जवाब सन्तोषजनक मालूम न हो रहे हों - समझे ? ' '

" जी ! "



" जैसे करीम ने अगर कोड शब्दो में तुम्हें पैगाम देने की भूल न की होती तो वह जिन्दा होता । ' '

" क्या ... व ... व ... वह .. सचमुच मर गया ? "

" मजबूरी है । तुम समझ रहे थे , मैं उसे जबान खुलवाने के लिए इन्वेस्टीगेशन रूम में ले जाऊंगा और वह किसी न किसी तरह आजाद हो जाएगा , लेकिन यह तुम्हारा भ्रम है ... मैं आदमी को देखकर समझ लेता हूं कि वह इन्वेस्टीगेशन रूम में जबान खोलेगा या नहीं ... अगर नहीं खोलने वाला हुआ तो फिर उसकी जिन्दगी भी बेकार समझता हूं , क्योंकि जिन्दा रहने पर उसके अपराधों का सिलसिला जारी रहेगा । "

" ज ... ज ... जी ... ! ' '

" जानते हो - तुम्हारे बारे में मेरी क्या राय है ? "

" क ... क ... क्या ? ' '

.

" तुम करीम की तरह मामूली टैक्सी ड्राइवर नहीं रहे ... तुमने जीवन का ऐशो - आराम पास से अनुभव किया है इसलिए तुम्हारी नजरों में जिन्दगी का महत्व होगा और तुम जिन्दा रहना चाहोगे । क्यों ? "

" ज ... ज ... जी ...

! ' '

" तो फिर एक अच्छे आदमी की तरह मेरे सवालों के सच्चे और पूरे जवाब दो । '

' ' जी ... ! ' '

" तुम मेरी निगरानी कब से कर रहे हो ? ' '

" जब

यह केस आपको सौंपा गया है । ' '

विजय ने हल्की सांस ली और बोला- " इसका मतलब है , महकमे से भी खबरें लीक आउट हो जाती । '

" ज ... ज ... जी ... ! ' '



' स्पष्ट है , तुम्हें उस ऑफिसर का नाम नहीं मालूम होगा जिस द्वारा यह राज लीक आउट हुआ ? ' '

' ' न ... न ... नहीं ... ! "

' ' तो तुम शुरू से ही मेरी निगरानी करते रहे हो । ' '

' ' मैंने पहले निगरानी कराई थी । ' '

" किससे ? "

' करीम जैसे मेरे दर्जनों मातहत हैं । ' '



" फिर तुमने कब से निगरानी शुरू की ? ' ' " आज जब मुझे खबर मिली कि आप कर्नल आफरीदी से मुलाकात करने गए । ' '

" लेकिन इस केस में शकीला का बहुत महत्व है

' ' व ... व ... वह ज्वाला प्रसाद के खून की एकमात्र गवाह है । "

' ' जो जानती है कि असल कातिल संजय नहीं । ' '

" जी हां ! ' '

' ' तो क्या उन लोगों को शक है कि शकीला जिन्दा नहीं ? "
 
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