रात भर की शीतल के साथ जमकर मस्ती करने के बाद शुभम थका हुआ नजर आ रहा था उसकी आंखों में नींद भरी हुई थी,,,, लेकिन चेहरे पर थकान बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही थी क्योंकि अपने घर आने से पहले ही वह एक बार और शीतल की जमकर चुदाई करके आया था,,,,
लेकिन अपने घर के दरवाजे के सामने पहुंचते ही उसके चेहरे के भाव बदलने लगे क्योंकि अब उसे अपनी मां की नजरों का सामना करना था जिसमें उसके लिए विश्वास ममता प्यार और साथ ही हवस भी भरी हुई थी,,,, जोकि शुभम ने बेशक शीतल के साथ बांट कर आ रहा था और यही निर्मला बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,,
Sheetal safaai karte huye

शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां की नजरों का सामना कैसे कर पाएगा क्या कहेगा जबकि उसकी मां को जानती है कि रात भर वह शीतल के साथ क्या कर रहा था वह कैसे कह पाएगा कि तुम्हारे विश्वास को तोड़ते हुए वह रातभर शीतल की चुदाई करके आया है,,,, और यही मर्दों की खासियत और सबसे बड़ी कमी भी होती है घर में चाहे कितनी भी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका क्यों ना हो मौका मिलते हैं दूसरी औरतों के पीछे लार टपकाते हुए उसके पीछे चल ही देते हैं,,,,
शुभम अपने घर के दरवाजे के सामने खड़ा था दरवाजे की घंटी बजाने की हिम्मत उसकी नहीं हो रही थी आखिरकार वह अपना मन मजबूत करके घर की घंटी बजाने की सोच ही लिया क्योंकि कितने दिन वह अपनी मां से नजरें बचाता फिर आएगा आखिरकार थक हारकर तो वापस उसे यही आना था,,,, वह भी अपने मन में अपनी युक्ति के बारे में सोचने लगा कि अपने मां से क्या कहना है आखिरकार वाह जो होगा देखा जाएगा ऐसा सोचकर डोर बेल बजा ही दिया,,, निर्मला कुर्सी पर बैठकर शुभम के आने का इंतजार कर रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे और बार बार उन पलों को याद करके उसके बदन में क्रोध की भावना जागृत हो जाती थी वह बार-बार अपने मन में ख्याल आ रही थी कि रात को शुभम शीतल के साथ क्या-क्या किया होगा,,,, उसके अंगों से खेला होगा,, उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाया होगा उसे मुंह में लेकर पिया होगा,,, उसके लाल-लाल होठों का रसपान किया होगा और तो और उसकी टांगों के बीच बैठकर उसकी बुर का भी स्वाद चखा होगा,,, अगर चखना नहीं चाहा होगा तो शीतल भला कैसे इस अ प्रीतम सुख से वंचित अरे भाई होगी वह खुद ही दबाव देकर उसे अपनी बुर चाटने के लिए कही होगी,,,, क्योंकि जब मैं क्लास में उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूस सकती है तो उससे से अपनी बुर भी चटवा सकती है,,, और शुभम एक बेटा बाद में एक मर्द पहने हैं और भला एक मर्द एक औरत की खूबसूरत अंगों से खेले बिना कैसे रह सकता है,,,, और तब जब एक औरत खुद यही चाहती हो,,,
निर्मला जी सब सोच सोच कर एकदम बेहाल हुए जा रही थी क्योंकि उसे अब लगने लगा था कि जिस मोटे तगड़े लंड पर उसे नाज होता था अब वह नाज शीतल को लगने लगेगा जिस मोटे तगड़े लंड पर उसका पूरा अधिकार था अब वह अधिकार शीतल के साथ बट गया था,,,, जिस तरह का एहसास चरम सुख तृप्ति वह महसूस कर दिया रही थी अब वही शीतल भी महसूस करेगी ना जाने क्यों निर्मला को शीतल अपनी सौतन जैसी लगने लगी,,,,,
निर्मला कुर्सी पर बैठे यही सब सोच रही थी कि डोर बेल की आवाज सुनते ही उसकी तंद्रा भंग हुई वह समझ गई कि दरवाजे पर शुभम ही है लेकिन उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके मन में यही ख्याल आ रहे थे कि वह शुभम का सामना कैसे कर पाएगी और ऐसे हालात में जबकि वह रात भर किसी दूसरी औरत के साथ रंगरेलियां मना कर घर वापस आया था,,,,,, औरतों के लिए वह पल और भी ज्यादा दूभर हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उसका चाहने वाला उसका हमदर्द उसका साथ ही किसी गैर औरत के साथ संभोग सुख भोग करा रहा है,,,, तब हालात कुछ और होते माहौल कुछ और होता जब निर्मला कोई है बिल्कुल भी पता नहीं होता कि शुभम उसकी सहेली शीतल के साथ चुदाई का सुख भोग करा रहा है लेकिन यहां तो निर्मला सब कुछ जानती थी,,,
Nirmala

खेर शुभम उसका बेटा था आखिरकार कब तक उसके लिए घर के दरवाजे बंद रहते हैं वह कुर्सी से उठ खड़ी हुई और जाकर दरवाजा खोल दे दरवाजे पर सुबह में था उस पर नजर पड़ते ही ना जाने क्यों निर्मला शर्म से पानी पानी होने लगी बस उनसे नजरें भी नहीं मिला पा रही थी वह दूसरी तरफ नजर फेर कर वापस घूम गई और यही हाल शुभम का भी था शुभम भी अपनी मां से नजर नहीं मिला पा रहा था दरवाजा खुलते ही वह अपनी मां की तरह नहीं बल्कि इधर उधर देख रहा था,,,, आखिरकार वह कमरे में प्रवेश करके खुद ही दरवाजा लॉक कर दिया,,,, जब सुभम दरवाजा बंद कर रहा था तो निर्मला यही सोच रही थी कि काश उस दिन इसी तरह से वह दरवाजा बंद कर देता तो आज उसे यह दिल ना देखना पड़ता,,,, वह सीधा कर वापस कुर्सी पर बैठ गई लेकिन शुभम की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी,,,, शुभम को समझते देर नहीं लगी कि घर का माहौल पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है और उस माहौल को उसे ही ठीक करना था,,,
क्या हुआ ना तुम मुझसे नाराज होना,,,,( शुभम अपनी मां के पीछे खड़े होकर उसके गले में बाहें डाल कर बोला,,,।)
जा उस शीतल के पास,,,,( इतना कहते हुए शुभम कहां तक नहीं गले में से निकाल कर उसे दूर करते हुए बोली,, अपनी मां का गुस्सा और उसका रवैया देखकर सुबह समझ गया था कि गोल गोल घुमाने से कोई फायदा नहीं है अगर उसकी मां नहीं जानती थी कि वो रात भर कहां था क्या कर रहा था तब यह बात का बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता लेकिन यहां तो उसकी मां सब कुछ जानती थी,,,, वह भी ऊससे दो कदम की दूरी पर कुर्सी को डाइनिंग टेबल की तरफ से अपनी तरफ खींच कर वहीं बैठ गया,,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी छाई रही निर्मला गुस्से में थे वह फर्श को अपने पैर के अंगूठे से खरोच ते हुए उसी को गुस्से से देख रही थी,,,,, शुभम गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,,।
मम्मी में शीतल के पास जाना नहीं चाहता था,,,,( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला नजरें उठाकर उसे घूरते हुए एक बार देखी और और वापस नीचे देखने लगी,,, मानो उसकी इस बात पर मन ही मन में हंस रही हो और क्रोधित हो रही,,, हो,,,,)
मुझे मालूम है तुम्हें मेरी बात का विश्वास नहीं होगा लेकिन मैं सच कह रहा हूं,,,, तुम जबसे मुझे उसके इर्द गिर्द घूमने से रोकी हो तब से मैं उसके बारे में सोचना भी बंद कर दिया था,,,,
मैं कैसे विश्वास कर लूं शुभम तू रात भर उसके साथ था और जब मैं 9:00 बजे तुझे बुलाने उधर गई तो भी तु वही था,,,
मुझे इस बात की बिल्कुल भी खबर नहीं है मम्मी,,, मैं अभी अभी सो कर उठा हूं और वह भी शीतल ने जगाया तो,,, और सीधा उठकर ईधर ही आ रहा हूं,,,,
तू कुछ भी कहे शुभम लेकिन तेरे मन में मेरे लिए जरा भी इज्जत होती तो रात को ही वापस आ जाता तु सारी रात उसके पास था,,, पता नहीं रात भर क्या क्या हुआ होगा मुझे तो सोचकर ही गुस्सा आता है,,,
( शुभम निर्मला के अंतर्मन को अच्छी तरह से समझ रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके प्रति उसका मां का लगाव किस तरह का है वह भी जानता था कि वह उसे किसी से भी बांटना नहीं चाहती,,,, वह अपनी मां की तरफ देखा और कुछ सोच कर बोला,,,,।)
मैं खुद से वहां जाने के लिए तैयार नहीं हुआ था मम्मी मुझे तुम ही बोली थी वहां जाने के लिए और मैं तो हैरान था कि तुम मुझे वहां जाने के लिए किस लिए कह रही हो,,,
( शिवम की यह बात सुनकर निर्मला खामोश हो गई क्योंकि इस बात का जवाब वह देना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसे मालूम हो कि दोनों का वीडियो शीतल के पास है,,,।)
मैं तो यही समझ रहा था मम्मी के शीतल मैडम का सालगिरह है वहां पर और भी मेहमान होंगे लेकिन जब पहुंचा तो वहां कोई नहीं था,,,,, शीतल ही इस बात का खुलासा करते हुए कही कि यहां पर वह किसी को जानती नहीं इसलिए मुझे ही वहां बुलाई है वैसे तो मम्मी हम सबको उन्होंने बुलाया था ना,,,, लेकिन आपको और पापा को तो दूसरी पार्टी में जाना था इसलिए मुझे वहां भेज दी,,,, अगर तुम्हें इसी तरह से गुस्सा दिखाना था मेरा वहां जाने से एतराज था तो वह मुझे क्यों भेजी,,,, मुझे भी अपने साथ ले गई होती कहती होती कि आज नहीं आ पाएंगे,,,,,
( निर्मला अपने बेटे की एक-एक कही बात को सुनते जा रही थी और उसकी बात में छिपी सच्चाई को भी समझ रही थी लेकिन उसके दूसरे पहलू को शायद शुभम ठीक से समझ नहीं पाया था इसलिए सब कह रहा था,,,,।)
पार्टी खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद तू घर पर आ सकता था तु आया क्यों नहीं,,,,,
( निर्मला को जो कुछ भी हुआ उसमें शीतल के साथ-साथ शुभम की भी गलती साफ नजर आ रही थी क्योंकि वह सोच रही थी कि अगर वो चाहता तो घर पर वापस आ सकता था शीतल उसके साथ जबरदस्ती करने वाली नहीं थी,,, लेकिन ऐसा शुभम ने नहीं किया इसलिए निर्मला गुस्से में थी,,।)
मैं वहां रुकने के इरादे से बिल्कुल भी नहीं गया था मम्मी,,, मैं तो खाना खाने के तुरंत बाद वहां से चलता बना लेकिन,,,,( इतना कहकर शुभम खामोश हो गया,,,,)
लेकिन क्या,,,,
मुझे तो कहते भी शर्म आ रही है मम्मी,,,
क्या कहते शर्म आ रही है मुझे बता,,,,( निर्मला की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह जानना चाहती थी कि क्या हुआ था शुभम अपनी बात को बढ़ा चढ़ा कर बता रहा था वह ऐसा सीन क्रिएट करना चाहता था जिसमें उसकी गलती रत्ती भर भी नजर नहीं आती सारा का सारा दोष वह शीतल के सर पर मढना चाहता था,,, इसलिए वह बोला,,,)
मैं जैसे ही दरवाजे की तरफ जाने लगा शीतल मेरे रास्ते में आ गई और अपने हाथ को मेरे रास्ते का रोड़ा बना कर खड़ी हो गई,,,, ऐसा करते हुए उसके साड़ी का पल्लू उसकी छातियों से नीचे गिर गया,,, लेकिन वह ऐसा जानबूझकर की थी मम्मी,,,,
( निर्मला अपने बेटे की यह बात सुनकर और ज्यादा उत्सुक होने लगी कि इसके बाद क्या हुआ था वह बोली,,,।)
फिर क्या कि उस कुल्टा ने,,,,,,
मम्मी ने उसकी हालत देखकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया,,,, एक मर्द होने के नाते मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था जिस तरह का नजारा मेरी आंखों के सामने था उसे देख कर मैं अपनी नजर नहीं हट आ पाता लेकिन एक बेटा होने के नाते मुझसे यह देखा नहीं क्या मम्मी सच कहूं तो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और मेरा यह प्यार में किसी से बांटना नहीं चाहता इसलिए मैं दूसरी तरफ नजर कर दिया तो शीतल ने खुद ही मुझे ऊकसाते हुए अपनी तरफ देखने के लिए मजबूर करने लगी,,,, वह बोली,,,
यहां देखो शुभम इतना खूबसूरत नजारा छोड़कर तुम इधर-उधर कहां भटक रहे हो,,,, और मम्मी मैं उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखा तो हैरान रह गया क्योंकि उसने अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दी थी,,,, मैं फिर भी अपनी नजर को दूसरी तरफ हटा लिया,,,, हमसे आकर लिपट गई मुझे चूमने चाटने लगी,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की तरफ देख रहा था वह उसके हाव-भाव को देखना चाहता था जो कि उसकी बातें सुनकर निर्मला के हाव-भाव बदल रहे थे वह काफी गुस्से में नजर आ रही थी,,, शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
मम्मी मैं उसे ऐसा करने से रोक रहा था मैं उसे अपने आप से दूर करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह बार-बार
मुझसे चिपक जा रही थी मुझे चुमने की कोशिश कर रही थी और मुझे और ज्यादा उकसाते हुए मेरी आंखों के सामने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी,,,, मम्मी मैं एकदम हैरान हो गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,
तू तो खुश हो गया होगा,,,,!
मम्मी तुम तो मुझे अभी भी गलत समझ रही हो,,,, अगर उस दिन कलास में आकर तुम मुझे शीतल के साथ रंगे हाथ पकड़ कर खरी-खोटी ना सुनाई होती तो शायद मैं एक बार देखने की गलती कर भी सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं किया मेरी तरफ से दूर जाने लगा लेकिन वह बार-बार मेरे करीब आ जा रही थी,,,,( इतना कहते हुए शुभम कुर्सी पर से खड़ा हो गया और दूसरी तरफ मुंह करके चहल कदमी करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।) इतनी करीब कि उसकी दोनों चूचियां मेरी छाती से टकरा रही थी मैं बार-बार उसे अलग करने की कोशिश कर दे रहा था लेकिन वह बार-बार मुझे पकड़ ले रही थी,,,,
फिर क्या किया तूने,,,,?
मैं एक बार फिर कोशिश करके दरवाजे तक पहुंच गया लेकिन शीतल दौड़ कर मुझे वहां भी अपनी बाहों में जकड़ ली,,,,, मुझे गुस्सा आ गया और मैं जोर से झटका दिया जिससे शीतल जाकर नीचे जमीन पर गिर गई,,,,, लेकिन मम्मी में उसके गिरने की भी परवाह नहीं किया और दरवाजा खोलने वाला था कि वह मुझे पीछे से आवाज देकर रोक ली,,,,, और गुस्से में टेबल पर रखा हुआ अपना पर सूट आई और उसमें से मोबाइल निकाल कर मेरे पास आ गई और उसमें से एक वीडियो दिखाने लगी,,,,
( इतना सुनते ही निर्मला एकदम सन्न से रह गई क्योंकि निर्मला ने शीतल को इस राज को राज रखने के लिए कही थी और शीतल ने भी हामी भरी थी लेकिन यहां मामला कुछ और हो गया था निर्मला मन ही मन में सोचने लगी कि इसका मतलब शुभम को भी पता चल गया उस वीडियो के बारे में,,,, निर्मला कुछ बोली नहीं लेकिन उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी शुभम अपनी बात को जारी रखते हुए बोला,,,।) मैं तो वीडियो देखकर एकदम हैरान रह गया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वीडियो में जो कुछ भी हो रहा है वह सच है,,,( शुभम ए हैरानी से अपनी मां की तरफ देखते हुए,,,) लेकिन मम्मी तो कुछ भी नहीं देख रहा था वह सच था वीडियो में नए और तुमको और वह वीडियो अभी हाल का ही था जिसमें तुम मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी,,,,( शुभम शांत होता हुआ) वीडियो को देखने के बाद में सब कुछ समझ गया मैं समझ गया कि तुम ना चाहते हुए भी मुझे उसके घर किस लिए भेजी हो,,, मैं सब समझ गया मम्मी यह तुम्हारी सबसे बड़ी मजबूरी थी लेकिन फिर भी मैं उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हुआ तो वह मुझे वीडियो को वायरल करने की धमकी दे दी वह मुझे साफ शब्दों में धमकी देते हुए बोली कि तुम और तुम्हारी मां दोनों एकदम बदनाम हो जाओगे किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं हो जाओगे मैं एकदम से डर गया वह अपनी कहीं बात को सच कर सकती थी उसके हाथ में पूरा सपोर्ट था अगर वह वीडियो ना होता तो मैं उसके गाल पर थप्पड़ लगाकर वापस आ जाता लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया,,, मैं अपने परिवार को बदनाम होता नहीं देख सकता था इसलिए मजबूरन वह जो बोली मुझे करना पड़ा,,,,।
मैं सुबह में जब तुझे बुलाने गई थी तुझे मालूम था,,,( शीतल रोते हुए बोली
हां मम्मी मुझे मालूम था कि तुम मुझे बुलाने आई हो लेकिन मैं मजबूर था शीतल ने मुझे रुकने के लिए कही थी क्योंकि उसका एक बार और मन कर रहा था,,,, ( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला जोर-जोर सीसकने लगी,,,,)
तो क्या तुम दोनों सारी रात सच में जागते रहे हो,,,?( निर्मला खुद ही सवाल का जवाब जानते थे लेकिन फिर भी अपने बेटे के मुंह से सुनना चाहती थी उसे अब जलन सी महसूस हो रही थी,,,।)
हमने कुछ नहीं मुझे सारी रात सोने नहीं दी ना खुश सोई ना सोने दी वह बहुत प्यासी औरत है मम्मी,,,, रात भर कभी मेरे ऊपर चढ़ी रही तो कभी मुझे अपने ऊपर चढ़ा ली,,,
( शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर जलन के मारे निर्मला के कान फटे जा रहे थे वह कुछ बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी सिर्फ रोए जा रही थी,,,, फिर अपने आंसू पोंछते हुए बोली,,,)
वह कुलटा औरत इतनी नीचे निकलेगी मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी इस वीडियो के चलते में मजबूर हो गई वरना मैं उसे तुझे हाथ भी लगाने नहीं देती,,,, इस वीडियो के जरिए मुझे ना जाने अभी कौन-कौन से दिन देखने पड़ेंगे,,,
अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा मम्मी,,,,
क्यों ,,,,,?(निर्मला अपने आंसुओं को पोछते हुए शुभम की तरफ देखते हुए बोली)
क्योंकि मैंने चला कि से उसके मोबाइल से हम दोनों की वीडियो को डिलीट कर दिया हूं,,,।( शुभम के मुंह से इतना निकला भर था कि वह खुशी से एकदम पागल सी होते हुए बोली।)
क्या कह रहा है शुभम,,,?
हां मम्मी,,, मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं मैंने उसके मोबाइल में से हम दोनों का वीडियो डिलीट कर दिया हूं,,, लेकिन हो सकता है कि वह वीडियो की कॉपी कर ली हो,,,, लेकिन तुम चिंता मत करो हमें वह हमें कभी भी अपने-अपने नहीं कर पाएगी अगली बार मैं अपने मोबाइल से हम दोनों का इस तरह का फोटो या वीडियो ले लूंगा कि वह जिंदगी भर अपना मुंह बंद रखेगी,,,, यह कहकर वह अपनी मां को दिलासा तो दे रहा था लेकिन अपने लिए रास्ता भी बना ले रहा था वह नहीं चाहता था कि एक बार पक्के तौर पर उसकी मां को यह मालूम हो जाए की शीतल के पास वीडियो नहीं है तो वह उसके पास कभी भी नहीं भेजेगी और शुभम यह नहीं चाहता था क्योंकि आज की जबरदस्त चुदाई के बाद शीतल की मदमस्त जवानी की हर एक अदा को देखकर शुभम पूरी तरह से पागल हो गया था,,, निर्मला भी अपने बेटे की बात सुनकर कुछ हद तक राहत महसूस कर रही थी,,,, दोनों अभी बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर दोनों की नजर दरवाजे पर गई,,,
अभी कौन आ गया,,,,,( निर्मला के मुंह से निकला।)
रुको मम्मी मैं जा कर देखता हूं,,,,,( इतना कहकर वहां जाकर दरवाजा खुला दरवाजा खोलते ही सामने शीतल नजर आए शीतल शुभम को देखते ही मुस्कुराने लगी और बिना कुछ बोले घर में आ गई,,,, शीतल को देखते ही निर्मला क्रोध से भर गई लेकिन किसी तरह से अपने क्रोध पर काबू किए हुए थी,,,।
लेकिन अपने घर के दरवाजे के सामने पहुंचते ही उसके चेहरे के भाव बदलने लगे क्योंकि अब उसे अपनी मां की नजरों का सामना करना था जिसमें उसके लिए विश्वास ममता प्यार और साथ ही हवस भी भरी हुई थी,,,, जोकि शुभम ने बेशक शीतल के साथ बांट कर आ रहा था और यही निर्मला बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,,
Sheetal safaai karte huye

शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां की नजरों का सामना कैसे कर पाएगा क्या कहेगा जबकि उसकी मां को जानती है कि रात भर वह शीतल के साथ क्या कर रहा था वह कैसे कह पाएगा कि तुम्हारे विश्वास को तोड़ते हुए वह रातभर शीतल की चुदाई करके आया है,,,, और यही मर्दों की खासियत और सबसे बड़ी कमी भी होती है घर में चाहे कितनी भी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका क्यों ना हो मौका मिलते हैं दूसरी औरतों के पीछे लार टपकाते हुए उसके पीछे चल ही देते हैं,,,,
शुभम अपने घर के दरवाजे के सामने खड़ा था दरवाजे की घंटी बजाने की हिम्मत उसकी नहीं हो रही थी आखिरकार वह अपना मन मजबूत करके घर की घंटी बजाने की सोच ही लिया क्योंकि कितने दिन वह अपनी मां से नजरें बचाता फिर आएगा आखिरकार थक हारकर तो वापस उसे यही आना था,,,, वह भी अपने मन में अपनी युक्ति के बारे में सोचने लगा कि अपने मां से क्या कहना है आखिरकार वाह जो होगा देखा जाएगा ऐसा सोचकर डोर बेल बजा ही दिया,,, निर्मला कुर्सी पर बैठकर शुभम के आने का इंतजार कर रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे और बार बार उन पलों को याद करके उसके बदन में क्रोध की भावना जागृत हो जाती थी वह बार-बार अपने मन में ख्याल आ रही थी कि रात को शुभम शीतल के साथ क्या-क्या किया होगा,,,, उसके अंगों से खेला होगा,, उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाया होगा उसे मुंह में लेकर पिया होगा,,, उसके लाल-लाल होठों का रसपान किया होगा और तो और उसकी टांगों के बीच बैठकर उसकी बुर का भी स्वाद चखा होगा,,, अगर चखना नहीं चाहा होगा तो शीतल भला कैसे इस अ प्रीतम सुख से वंचित अरे भाई होगी वह खुद ही दबाव देकर उसे अपनी बुर चाटने के लिए कही होगी,,,, क्योंकि जब मैं क्लास में उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूस सकती है तो उससे से अपनी बुर भी चटवा सकती है,,, और शुभम एक बेटा बाद में एक मर्द पहने हैं और भला एक मर्द एक औरत की खूबसूरत अंगों से खेले बिना कैसे रह सकता है,,,, और तब जब एक औरत खुद यही चाहती हो,,,
निर्मला जी सब सोच सोच कर एकदम बेहाल हुए जा रही थी क्योंकि उसे अब लगने लगा था कि जिस मोटे तगड़े लंड पर उसे नाज होता था अब वह नाज शीतल को लगने लगेगा जिस मोटे तगड़े लंड पर उसका पूरा अधिकार था अब वह अधिकार शीतल के साथ बट गया था,,,, जिस तरह का एहसास चरम सुख तृप्ति वह महसूस कर दिया रही थी अब वही शीतल भी महसूस करेगी ना जाने क्यों निर्मला को शीतल अपनी सौतन जैसी लगने लगी,,,,,
निर्मला कुर्सी पर बैठे यही सब सोच रही थी कि डोर बेल की आवाज सुनते ही उसकी तंद्रा भंग हुई वह समझ गई कि दरवाजे पर शुभम ही है लेकिन उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके मन में यही ख्याल आ रहे थे कि वह शुभम का सामना कैसे कर पाएगी और ऐसे हालात में जबकि वह रात भर किसी दूसरी औरत के साथ रंगरेलियां मना कर घर वापस आया था,,,,,, औरतों के लिए वह पल और भी ज्यादा दूभर हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उसका चाहने वाला उसका हमदर्द उसका साथ ही किसी गैर औरत के साथ संभोग सुख भोग करा रहा है,,,, तब हालात कुछ और होते माहौल कुछ और होता जब निर्मला कोई है बिल्कुल भी पता नहीं होता कि शुभम उसकी सहेली शीतल के साथ चुदाई का सुख भोग करा रहा है लेकिन यहां तो निर्मला सब कुछ जानती थी,,,
Nirmala

खेर शुभम उसका बेटा था आखिरकार कब तक उसके लिए घर के दरवाजे बंद रहते हैं वह कुर्सी से उठ खड़ी हुई और जाकर दरवाजा खोल दे दरवाजे पर सुबह में था उस पर नजर पड़ते ही ना जाने क्यों निर्मला शर्म से पानी पानी होने लगी बस उनसे नजरें भी नहीं मिला पा रही थी वह दूसरी तरफ नजर फेर कर वापस घूम गई और यही हाल शुभम का भी था शुभम भी अपनी मां से नजर नहीं मिला पा रहा था दरवाजा खुलते ही वह अपनी मां की तरह नहीं बल्कि इधर उधर देख रहा था,,,, आखिरकार वह कमरे में प्रवेश करके खुद ही दरवाजा लॉक कर दिया,,,, जब सुभम दरवाजा बंद कर रहा था तो निर्मला यही सोच रही थी कि काश उस दिन इसी तरह से वह दरवाजा बंद कर देता तो आज उसे यह दिल ना देखना पड़ता,,,, वह सीधा कर वापस कुर्सी पर बैठ गई लेकिन शुभम की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी,,,, शुभम को समझते देर नहीं लगी कि घर का माहौल पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है और उस माहौल को उसे ही ठीक करना था,,,
क्या हुआ ना तुम मुझसे नाराज होना,,,,( शुभम अपनी मां के पीछे खड़े होकर उसके गले में बाहें डाल कर बोला,,,।)
जा उस शीतल के पास,,,,( इतना कहते हुए शुभम कहां तक नहीं गले में से निकाल कर उसे दूर करते हुए बोली,, अपनी मां का गुस्सा और उसका रवैया देखकर सुबह समझ गया था कि गोल गोल घुमाने से कोई फायदा नहीं है अगर उसकी मां नहीं जानती थी कि वो रात भर कहां था क्या कर रहा था तब यह बात का बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता लेकिन यहां तो उसकी मां सब कुछ जानती थी,,,, वह भी ऊससे दो कदम की दूरी पर कुर्सी को डाइनिंग टेबल की तरफ से अपनी तरफ खींच कर वहीं बैठ गया,,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी छाई रही निर्मला गुस्से में थे वह फर्श को अपने पैर के अंगूठे से खरोच ते हुए उसी को गुस्से से देख रही थी,,,,, शुभम गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,,।
मम्मी में शीतल के पास जाना नहीं चाहता था,,,,( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला नजरें उठाकर उसे घूरते हुए एक बार देखी और और वापस नीचे देखने लगी,,, मानो उसकी इस बात पर मन ही मन में हंस रही हो और क्रोधित हो रही,,, हो,,,,)
मुझे मालूम है तुम्हें मेरी बात का विश्वास नहीं होगा लेकिन मैं सच कह रहा हूं,,,, तुम जबसे मुझे उसके इर्द गिर्द घूमने से रोकी हो तब से मैं उसके बारे में सोचना भी बंद कर दिया था,,,,
मैं कैसे विश्वास कर लूं शुभम तू रात भर उसके साथ था और जब मैं 9:00 बजे तुझे बुलाने उधर गई तो भी तु वही था,,,
मुझे इस बात की बिल्कुल भी खबर नहीं है मम्मी,,, मैं अभी अभी सो कर उठा हूं और वह भी शीतल ने जगाया तो,,, और सीधा उठकर ईधर ही आ रहा हूं,,,,
तू कुछ भी कहे शुभम लेकिन तेरे मन में मेरे लिए जरा भी इज्जत होती तो रात को ही वापस आ जाता तु सारी रात उसके पास था,,, पता नहीं रात भर क्या क्या हुआ होगा मुझे तो सोचकर ही गुस्सा आता है,,,
( शुभम निर्मला के अंतर्मन को अच्छी तरह से समझ रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके प्रति उसका मां का लगाव किस तरह का है वह भी जानता था कि वह उसे किसी से भी बांटना नहीं चाहती,,,, वह अपनी मां की तरफ देखा और कुछ सोच कर बोला,,,,।)
मैं खुद से वहां जाने के लिए तैयार नहीं हुआ था मम्मी मुझे तुम ही बोली थी वहां जाने के लिए और मैं तो हैरान था कि तुम मुझे वहां जाने के लिए किस लिए कह रही हो,,,
( शिवम की यह बात सुनकर निर्मला खामोश हो गई क्योंकि इस बात का जवाब वह देना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसे मालूम हो कि दोनों का वीडियो शीतल के पास है,,,।)
मैं तो यही समझ रहा था मम्मी के शीतल मैडम का सालगिरह है वहां पर और भी मेहमान होंगे लेकिन जब पहुंचा तो वहां कोई नहीं था,,,,, शीतल ही इस बात का खुलासा करते हुए कही कि यहां पर वह किसी को जानती नहीं इसलिए मुझे ही वहां बुलाई है वैसे तो मम्मी हम सबको उन्होंने बुलाया था ना,,,, लेकिन आपको और पापा को तो दूसरी पार्टी में जाना था इसलिए मुझे वहां भेज दी,,,, अगर तुम्हें इसी तरह से गुस्सा दिखाना था मेरा वहां जाने से एतराज था तो वह मुझे क्यों भेजी,,,, मुझे भी अपने साथ ले गई होती कहती होती कि आज नहीं आ पाएंगे,,,,,
( निर्मला अपने बेटे की एक-एक कही बात को सुनते जा रही थी और उसकी बात में छिपी सच्चाई को भी समझ रही थी लेकिन उसके दूसरे पहलू को शायद शुभम ठीक से समझ नहीं पाया था इसलिए सब कह रहा था,,,,।)
पार्टी खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद तू घर पर आ सकता था तु आया क्यों नहीं,,,,,
( निर्मला को जो कुछ भी हुआ उसमें शीतल के साथ-साथ शुभम की भी गलती साफ नजर आ रही थी क्योंकि वह सोच रही थी कि अगर वो चाहता तो घर पर वापस आ सकता था शीतल उसके साथ जबरदस्ती करने वाली नहीं थी,,, लेकिन ऐसा शुभम ने नहीं किया इसलिए निर्मला गुस्से में थी,,।)
मैं वहां रुकने के इरादे से बिल्कुल भी नहीं गया था मम्मी,,, मैं तो खाना खाने के तुरंत बाद वहां से चलता बना लेकिन,,,,( इतना कहकर शुभम खामोश हो गया,,,,)
लेकिन क्या,,,,
मुझे तो कहते भी शर्म आ रही है मम्मी,,,
क्या कहते शर्म आ रही है मुझे बता,,,,( निर्मला की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह जानना चाहती थी कि क्या हुआ था शुभम अपनी बात को बढ़ा चढ़ा कर बता रहा था वह ऐसा सीन क्रिएट करना चाहता था जिसमें उसकी गलती रत्ती भर भी नजर नहीं आती सारा का सारा दोष वह शीतल के सर पर मढना चाहता था,,, इसलिए वह बोला,,,)
मैं जैसे ही दरवाजे की तरफ जाने लगा शीतल मेरे रास्ते में आ गई और अपने हाथ को मेरे रास्ते का रोड़ा बना कर खड़ी हो गई,,,, ऐसा करते हुए उसके साड़ी का पल्लू उसकी छातियों से नीचे गिर गया,,, लेकिन वह ऐसा जानबूझकर की थी मम्मी,,,,
( निर्मला अपने बेटे की यह बात सुनकर और ज्यादा उत्सुक होने लगी कि इसके बाद क्या हुआ था वह बोली,,,।)
फिर क्या कि उस कुल्टा ने,,,,,,
मम्मी ने उसकी हालत देखकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया,,,, एक मर्द होने के नाते मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था जिस तरह का नजारा मेरी आंखों के सामने था उसे देख कर मैं अपनी नजर नहीं हट आ पाता लेकिन एक बेटा होने के नाते मुझसे यह देखा नहीं क्या मम्मी सच कहूं तो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और मेरा यह प्यार में किसी से बांटना नहीं चाहता इसलिए मैं दूसरी तरफ नजर कर दिया तो शीतल ने खुद ही मुझे ऊकसाते हुए अपनी तरफ देखने के लिए मजबूर करने लगी,,,, वह बोली,,,
यहां देखो शुभम इतना खूबसूरत नजारा छोड़कर तुम इधर-उधर कहां भटक रहे हो,,,, और मम्मी मैं उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखा तो हैरान रह गया क्योंकि उसने अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दी थी,,,, मैं फिर भी अपनी नजर को दूसरी तरफ हटा लिया,,,, हमसे आकर लिपट गई मुझे चूमने चाटने लगी,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की तरफ देख रहा था वह उसके हाव-भाव को देखना चाहता था जो कि उसकी बातें सुनकर निर्मला के हाव-भाव बदल रहे थे वह काफी गुस्से में नजर आ रही थी,,, शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
मम्मी मैं उसे ऐसा करने से रोक रहा था मैं उसे अपने आप से दूर करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह बार-बार
मुझसे चिपक जा रही थी मुझे चुमने की कोशिश कर रही थी और मुझे और ज्यादा उकसाते हुए मेरी आंखों के सामने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी,,,, मम्मी मैं एकदम हैरान हो गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,
तू तो खुश हो गया होगा,,,,!
मम्मी तुम तो मुझे अभी भी गलत समझ रही हो,,,, अगर उस दिन कलास में आकर तुम मुझे शीतल के साथ रंगे हाथ पकड़ कर खरी-खोटी ना सुनाई होती तो शायद मैं एक बार देखने की गलती कर भी सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं किया मेरी तरफ से दूर जाने लगा लेकिन वह बार-बार मेरे करीब आ जा रही थी,,,,( इतना कहते हुए शुभम कुर्सी पर से खड़ा हो गया और दूसरी तरफ मुंह करके चहल कदमी करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।) इतनी करीब कि उसकी दोनों चूचियां मेरी छाती से टकरा रही थी मैं बार-बार उसे अलग करने की कोशिश कर दे रहा था लेकिन वह बार-बार मुझे पकड़ ले रही थी,,,,
फिर क्या किया तूने,,,,?
मैं एक बार फिर कोशिश करके दरवाजे तक पहुंच गया लेकिन शीतल दौड़ कर मुझे वहां भी अपनी बाहों में जकड़ ली,,,,, मुझे गुस्सा आ गया और मैं जोर से झटका दिया जिससे शीतल जाकर नीचे जमीन पर गिर गई,,,,, लेकिन मम्मी में उसके गिरने की भी परवाह नहीं किया और दरवाजा खोलने वाला था कि वह मुझे पीछे से आवाज देकर रोक ली,,,,, और गुस्से में टेबल पर रखा हुआ अपना पर सूट आई और उसमें से मोबाइल निकाल कर मेरे पास आ गई और उसमें से एक वीडियो दिखाने लगी,,,,
( इतना सुनते ही निर्मला एकदम सन्न से रह गई क्योंकि निर्मला ने शीतल को इस राज को राज रखने के लिए कही थी और शीतल ने भी हामी भरी थी लेकिन यहां मामला कुछ और हो गया था निर्मला मन ही मन में सोचने लगी कि इसका मतलब शुभम को भी पता चल गया उस वीडियो के बारे में,,,, निर्मला कुछ बोली नहीं लेकिन उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी शुभम अपनी बात को जारी रखते हुए बोला,,,।) मैं तो वीडियो देखकर एकदम हैरान रह गया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वीडियो में जो कुछ भी हो रहा है वह सच है,,,( शुभम ए हैरानी से अपनी मां की तरफ देखते हुए,,,) लेकिन मम्मी तो कुछ भी नहीं देख रहा था वह सच था वीडियो में नए और तुमको और वह वीडियो अभी हाल का ही था जिसमें तुम मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी,,,,( शुभम शांत होता हुआ) वीडियो को देखने के बाद में सब कुछ समझ गया मैं समझ गया कि तुम ना चाहते हुए भी मुझे उसके घर किस लिए भेजी हो,,, मैं सब समझ गया मम्मी यह तुम्हारी सबसे बड़ी मजबूरी थी लेकिन फिर भी मैं उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हुआ तो वह मुझे वीडियो को वायरल करने की धमकी दे दी वह मुझे साफ शब्दों में धमकी देते हुए बोली कि तुम और तुम्हारी मां दोनों एकदम बदनाम हो जाओगे किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं हो जाओगे मैं एकदम से डर गया वह अपनी कहीं बात को सच कर सकती थी उसके हाथ में पूरा सपोर्ट था अगर वह वीडियो ना होता तो मैं उसके गाल पर थप्पड़ लगाकर वापस आ जाता लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया,,, मैं अपने परिवार को बदनाम होता नहीं देख सकता था इसलिए मजबूरन वह जो बोली मुझे करना पड़ा,,,,।
मैं सुबह में जब तुझे बुलाने गई थी तुझे मालूम था,,,( शीतल रोते हुए बोली
हां मम्मी मुझे मालूम था कि तुम मुझे बुलाने आई हो लेकिन मैं मजबूर था शीतल ने मुझे रुकने के लिए कही थी क्योंकि उसका एक बार और मन कर रहा था,,,, ( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला जोर-जोर सीसकने लगी,,,,)
तो क्या तुम दोनों सारी रात सच में जागते रहे हो,,,?( निर्मला खुद ही सवाल का जवाब जानते थे लेकिन फिर भी अपने बेटे के मुंह से सुनना चाहती थी उसे अब जलन सी महसूस हो रही थी,,,।)
हमने कुछ नहीं मुझे सारी रात सोने नहीं दी ना खुश सोई ना सोने दी वह बहुत प्यासी औरत है मम्मी,,,, रात भर कभी मेरे ऊपर चढ़ी रही तो कभी मुझे अपने ऊपर चढ़ा ली,,,
( शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर जलन के मारे निर्मला के कान फटे जा रहे थे वह कुछ बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी सिर्फ रोए जा रही थी,,,, फिर अपने आंसू पोंछते हुए बोली,,,)
वह कुलटा औरत इतनी नीचे निकलेगी मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी इस वीडियो के चलते में मजबूर हो गई वरना मैं उसे तुझे हाथ भी लगाने नहीं देती,,,, इस वीडियो के जरिए मुझे ना जाने अभी कौन-कौन से दिन देखने पड़ेंगे,,,
अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा मम्मी,,,,
क्यों ,,,,,?(निर्मला अपने आंसुओं को पोछते हुए शुभम की तरफ देखते हुए बोली)
क्योंकि मैंने चला कि से उसके मोबाइल से हम दोनों की वीडियो को डिलीट कर दिया हूं,,,।( शुभम के मुंह से इतना निकला भर था कि वह खुशी से एकदम पागल सी होते हुए बोली।)
क्या कह रहा है शुभम,,,?
हां मम्मी,,, मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं मैंने उसके मोबाइल में से हम दोनों का वीडियो डिलीट कर दिया हूं,,, लेकिन हो सकता है कि वह वीडियो की कॉपी कर ली हो,,,, लेकिन तुम चिंता मत करो हमें वह हमें कभी भी अपने-अपने नहीं कर पाएगी अगली बार मैं अपने मोबाइल से हम दोनों का इस तरह का फोटो या वीडियो ले लूंगा कि वह जिंदगी भर अपना मुंह बंद रखेगी,,,, यह कहकर वह अपनी मां को दिलासा तो दे रहा था लेकिन अपने लिए रास्ता भी बना ले रहा था वह नहीं चाहता था कि एक बार पक्के तौर पर उसकी मां को यह मालूम हो जाए की शीतल के पास वीडियो नहीं है तो वह उसके पास कभी भी नहीं भेजेगी और शुभम यह नहीं चाहता था क्योंकि आज की जबरदस्त चुदाई के बाद शीतल की मदमस्त जवानी की हर एक अदा को देखकर शुभम पूरी तरह से पागल हो गया था,,, निर्मला भी अपने बेटे की बात सुनकर कुछ हद तक राहत महसूस कर रही थी,,,, दोनों अभी बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर दोनों की नजर दरवाजे पर गई,,,
अभी कौन आ गया,,,,,( निर्मला के मुंह से निकला।)
रुको मम्मी मैं जा कर देखता हूं,,,,,( इतना कहकर वहां जाकर दरवाजा खुला दरवाजा खोलते ही सामने शीतल नजर आए शीतल शुभम को देखते ही मुस्कुराने लगी और बिना कुछ बोले घर में आ गई,,,, शीतल को देखते ही निर्मला क्रोध से भर गई लेकिन किसी तरह से अपने क्रोध पर काबू किए हुए थी,,,।




























