शुभम कहते दोनों हाथ में लड्डू था वह बहुत खुश और उत्तेजित नजर आ रहा था रुचि के कहे अनुसार वह एकदम नंगा होकर कुर्सी पर बैठा हुआ था,,,, उसके लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था रुचि को अपनी गांड मटका के जाते हुए देख कर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी,,, शुभम को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि बिना कपड़ों में रुचि एकदम क़यामत लग रही थी उसका गोरा रंग और उसके खूबसूरत अंग को देखकर उसके मुंह के साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,
जो कि अभी भी पूरी औकात में था अगर रुचि ने उसे अंतिम क्षण में रोका ना होता तो अब तक उसका पूरा लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,
थोड़ी ही देर में रूचि संपूर्ण नग्नावस्था में रसोई घर में से खाना लेकर आ गई और उसे डाइनिंग टेबल पर रख कर परोसने लगी,, शुभम परोसे गए स्वादिष्ट भोजन को तो कम लेकिन रूची के खूबसूरत बदन पर लटके हुए उसके दोनों दशहरी आम को देख रहा था जो कि अभी पूरी तरह से पके भी नहीं थे,, रुचि की चूची का भूगोल संपूर्ण रूप से एकदम व्यवस्थित था सुगठित शरीर के हिसाब से एकदम सुडोल एकदम गोलाकार स्थिति में और वह भी तनी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी को ललकार रही हो कि हिम्मत हो तो इसे छू कर दिखाओ,,,,
दोनों ने खाना खाना शुरु कर दिया था पनीर की सब्जी के साथ नरम नरम पूरी साथ में मीठी खीर जो कि यह सब शुभम को बहुत ही स्वादिष्ट लगती थी,, दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे,,, दोनों एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हुए स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे,,, लेकिन शुभम भाई यूं ही स्वादिष्ट भोजन का आनंद बड़े चाव से दे रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान नरम गरम पूरी से ज्यादा रुचि गोलाकार चुचियो पर थी,,,
क्यों शुभम खाना अच्छा तो बना है ना,,,
Shubham k samne Ruchi kapde utarti huyi

हां हां भाभी क्यों नहीं आपके हाथों से खाना अच्छा ही बनेगा लेकिन सही कहु तो भाभी इस समय मेरा खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा है ,,,,,
ऐसा क्यों ,,,,,,?
मेरी आंखों के सामने ईतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी बैठी हो तो उसे देखकर कहीं किसी का मन खाने में लगेगा,,,,
तो कहां लगेगा,,,,
तुम्हारी गोल-गोल चुचियों में तुम्हारे नंगे बदन में तुम्हारे गोरे-गोरे मदमस्त कर देने वाली गांड पे और तुम्हारी रसीली बुर में,,,,
ससससहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू,,,,,
जिसे तुम गंदा कह रही हो भाभी ,,, मेरे लिए तो अमृतवाणी है,,,,
बातें बहुत बनाता है तू,,,,, चल खाने का मजा ले ले इसके बाद तो तुझे इसका भी मजा मिल ही जाएगा (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए,,,)
क्या करूं भाभी मन को तो मना लूं लेकिन यह साला नहीं मानता ना (अपने हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए)
क्या अभी तक वो शांत नहीं हुआ,,, अभी तक खड़ा है क्या,,,?
हां भाभी ईतनी आसानी से यह शांत होने वाला नहीं है,,,,
मैं जानती हूं कैसे शांत होगा जब तक यह मेरी बुर में जाएगा नहीं तब तक शांत नहीं होने वाला,,,,
लगता तो ऐसा ही है भाभी जल्दी से मेरे पर ऊपकार कर दो और इसे अपनी बुर में ले लो,,,,
Ruchi Shubham ko uttejit karti huyi

अरे थोड़ा तो सब्र किया कर आज की रात तुझे जी भर के प्यार करना है थोड़ा सब्र करेगा तभी तो सब्र का फल मीठा होगा,,,,
तुम कह रही हो तो शांत हु वरना अब तक ईसी डायनिंग टेबल पर पटक कर तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,
हहहह,,,, औरत के साथ कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए सारा मजा किरकिरा हो जाता है औरत अगर अपनी मर्जी से देखना तभी उसकी लेने में आनंद ही आनंद आता है ,,,,(रुचि यह बात मुस्कुरा कर बोली।)
मे ये बात अच्छी तरह से जानता हूं भाभी तभी तो शांत हूं वरना आप जैसी खूबसूरत औरत और वह भी आंखों के सामने नंगी हो तो भला कौन मर्द अपने आपको रोक पाएगा,,,,,
तेरे में इतना सब्र है तभी तो औरत को तू मस्त कर देता है वरना अभी तक ना जाने कब से तेरा पानी निकल गया होता है और तू बिस्तर पर लंबा लेट गया होता,,,
( इस तरह की बातों के साथ दोनों ने अपना खाना समाप्त कर लिया दोनों इस तरह की गरमा गरम बातें करके एक दूसरे को काफी गर्म कर चुके थे शुभम तो पहले से ही अपने खड़े लंड को लेकर परेशान था उसका लंड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था वह बार-बार उसे बैठाने के लिए उसे पकड़कर नीचे कर देता लेकिन वह फिर से अपना मुंह उठाकर ऊपर हो जाता है ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि की बुर को देखने की कोशिश कर रहा हो,,, दोनों के बदन में सुरूर चढ़ चुका था शुभम जब खाकर कुर्सी पर से खड़ा हुआ तो उसके खड़े होने के साथ ही उसका मोटा खड़ा लैंड लहराने लगा और सीधा डायनिंग टेबल पर ऐसे बीछ गया मानो उसे आराम से उस पर रखा गया है जिसे देखते हैं उसकी मर्दाना ताकत के अधीन होकर रुचि की बुर से मदन रस की दो बूंद नीचे जमीन पर चु गई,,, जो कि रुचि की तरफ से इशारा था कि अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,, रुची अभी भी कुर्सी पर बैठी हुई थी और सुभम उसकी तरफ देखते हुए अपने लंड को डायनिंग टेबल पर पटकते हुए बोला,,,
अब कुछ होगा भाभी कि नहीं,,,,,
( शुभम की हरकत देखकर रुचि पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसके मुख से उसके मोटे तगड़े करने को देख कर ही गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,)
ससससहहहह,,,,,आहहहहह,, अब तो बहुत कुछ होगा मेरे राजा,,,,,, मैं अपने कमरे में जा रही हूं लेकिन तू 15 मिनट बाद आना ,,,,,
लेकिन क्यों भाभी मुझसे रहा नहीं जा रहा है ,,,,,
तभी तो कह रही हूं 15 मिनट बाद आना तुझे सरप्राइस देना है ,,,,,।
सरप्राइस कैसा सरप्राइस ,,,,,
अगर अभी बता दूंगी तो सरप्राइज का मतलब क्या रह जाएगा,,, इसलिए जैसा मैं कहती हूं वैसा ही कर,,,,( इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठ कर खड़ी हो गई और मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगी शुभम वही डाइनिंग टेबल की करीब खड़ा रुचि की मदमस्त अदाओं को देखकर मस्त हुआ जा रहा था जैसे जैसे रुचि सीढ़ियों पर अपने पैर रखने की वजह से उसकी गोल गोल गांड अद्भुत लचक के साथ इधर-उधर मटक रही थी जिसे देखकर शुभम का हौसला कमजोर होता नजर आ रहा था उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं रुचि के सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते उसका पानी ना निकल जाए,,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को संभाल ले गया और उसकी आंखों के सामने अपनी मादक अदाओं का जाल बिछाते हुए रुचि अपने कमरे में चली गई यह उसके लिए एक अद्भुत एहसास था पूरे घर में हर एक कोने में संपूर्ण रूप से नंगी होकर घूमना यह अनुभव उसके लिए पहला था जिसमें उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था जैसे-जैसे वह सीढ़ियों पर चढ़ रही थी उसे मालूम था कि उसकी गोलाकार गांड पर शुभम की नजर होगी और इस बात का एहसास ही उसे उत्तेजित किए जा रहा था,,,। कमरे में पहुंचते-पहुंचते रुचि काफी गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस की धार चु रही थी,,,,
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे शुभम की दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह बार-बार अपने लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए अपने समय को व्यतीत करने की कोशिश कर रहा था और देखते-देखते तकरीबन 20 मिनट गुजर गए अब उससे रहा नहीं जा रहा था वह भी उसी तरह से नंगा ही सीढ़ियां चढ़ने लगा,,,
अब वह कमरे के बाहर खड़ा था अब तक उसे इतना तो पता ही चल गया था कि रुचि का कमरा कौन सा है,, दरवाजा बंद था लेकिन लोग बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि अंदर की रोशनी बाहर तक आ रही थी इससे साफ जाहिर था कि रुचि कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ रखी थी शुभम की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से बढ़ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ना जाने कैसा सरप्राइस रोजी देने वाली है,,, क्योंकि यहां आने के बाद सब कुछ उसके लिए सरप्राइस ही था,,, क्योंकि कपड़े उतार कर एकदम नंगा रहने का आईडिया भी उसी का था जिसमें उन दोनों को काफी आनंद की अनुभूति हुई थी,,, अब क्या होने वाला है कमरे में कैसा सरप्राइस है इस बारे में शुभम को बिल्कुल भी पता नहीं था और इसी बारे में सोच सोच कर परेशान हुआ जा रहा था और साथ ही उत्तेजित भी क्योंकि इतना तो जानता था कि जो कुछ भी होगा उसके फायदे का ही होगा इसलिए वह धड़कते दिल के साथ दरवाजे पर हाथ रख कर उसे अंदर की तरफ हल्के से ठेलने लगा और दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया,,, पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था,,,
तभी शुभम की नजर बिस्तर पर गई और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई वह दंग रह गया,,,
जो कि अभी भी पूरी औकात में था अगर रुचि ने उसे अंतिम क्षण में रोका ना होता तो अब तक उसका पूरा लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,
थोड़ी ही देर में रूचि संपूर्ण नग्नावस्था में रसोई घर में से खाना लेकर आ गई और उसे डाइनिंग टेबल पर रख कर परोसने लगी,, शुभम परोसे गए स्वादिष्ट भोजन को तो कम लेकिन रूची के खूबसूरत बदन पर लटके हुए उसके दोनों दशहरी आम को देख रहा था जो कि अभी पूरी तरह से पके भी नहीं थे,, रुचि की चूची का भूगोल संपूर्ण रूप से एकदम व्यवस्थित था सुगठित शरीर के हिसाब से एकदम सुडोल एकदम गोलाकार स्थिति में और वह भी तनी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी को ललकार रही हो कि हिम्मत हो तो इसे छू कर दिखाओ,,,,
दोनों ने खाना खाना शुरु कर दिया था पनीर की सब्जी के साथ नरम नरम पूरी साथ में मीठी खीर जो कि यह सब शुभम को बहुत ही स्वादिष्ट लगती थी,, दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे,,, दोनों एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हुए स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे,,, लेकिन शुभम भाई यूं ही स्वादिष्ट भोजन का आनंद बड़े चाव से दे रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान नरम गरम पूरी से ज्यादा रुचि गोलाकार चुचियो पर थी,,,
क्यों शुभम खाना अच्छा तो बना है ना,,,
Shubham k samne Ruchi kapde utarti huyi

हां हां भाभी क्यों नहीं आपके हाथों से खाना अच्छा ही बनेगा लेकिन सही कहु तो भाभी इस समय मेरा खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा है ,,,,,
ऐसा क्यों ,,,,,,?
मेरी आंखों के सामने ईतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी बैठी हो तो उसे देखकर कहीं किसी का मन खाने में लगेगा,,,,
तो कहां लगेगा,,,,
तुम्हारी गोल-गोल चुचियों में तुम्हारे नंगे बदन में तुम्हारे गोरे-गोरे मदमस्त कर देने वाली गांड पे और तुम्हारी रसीली बुर में,,,,
ससससहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू,,,,,
जिसे तुम गंदा कह रही हो भाभी ,,, मेरे लिए तो अमृतवाणी है,,,,
बातें बहुत बनाता है तू,,,,, चल खाने का मजा ले ले इसके बाद तो तुझे इसका भी मजा मिल ही जाएगा (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए,,,)
क्या करूं भाभी मन को तो मना लूं लेकिन यह साला नहीं मानता ना (अपने हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए)
क्या अभी तक वो शांत नहीं हुआ,,, अभी तक खड़ा है क्या,,,?
हां भाभी ईतनी आसानी से यह शांत होने वाला नहीं है,,,,
मैं जानती हूं कैसे शांत होगा जब तक यह मेरी बुर में जाएगा नहीं तब तक शांत नहीं होने वाला,,,,
लगता तो ऐसा ही है भाभी जल्दी से मेरे पर ऊपकार कर दो और इसे अपनी बुर में ले लो,,,,
Ruchi Shubham ko uttejit karti huyi

अरे थोड़ा तो सब्र किया कर आज की रात तुझे जी भर के प्यार करना है थोड़ा सब्र करेगा तभी तो सब्र का फल मीठा होगा,,,,
तुम कह रही हो तो शांत हु वरना अब तक ईसी डायनिंग टेबल पर पटक कर तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,
हहहह,,,, औरत के साथ कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए सारा मजा किरकिरा हो जाता है औरत अगर अपनी मर्जी से देखना तभी उसकी लेने में आनंद ही आनंद आता है ,,,,(रुचि यह बात मुस्कुरा कर बोली।)
मे ये बात अच्छी तरह से जानता हूं भाभी तभी तो शांत हूं वरना आप जैसी खूबसूरत औरत और वह भी आंखों के सामने नंगी हो तो भला कौन मर्द अपने आपको रोक पाएगा,,,,,
तेरे में इतना सब्र है तभी तो औरत को तू मस्त कर देता है वरना अभी तक ना जाने कब से तेरा पानी निकल गया होता है और तू बिस्तर पर लंबा लेट गया होता,,,
( इस तरह की बातों के साथ दोनों ने अपना खाना समाप्त कर लिया दोनों इस तरह की गरमा गरम बातें करके एक दूसरे को काफी गर्म कर चुके थे शुभम तो पहले से ही अपने खड़े लंड को लेकर परेशान था उसका लंड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था वह बार-बार उसे बैठाने के लिए उसे पकड़कर नीचे कर देता लेकिन वह फिर से अपना मुंह उठाकर ऊपर हो जाता है ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि की बुर को देखने की कोशिश कर रहा हो,,, दोनों के बदन में सुरूर चढ़ चुका था शुभम जब खाकर कुर्सी पर से खड़ा हुआ तो उसके खड़े होने के साथ ही उसका मोटा खड़ा लैंड लहराने लगा और सीधा डायनिंग टेबल पर ऐसे बीछ गया मानो उसे आराम से उस पर रखा गया है जिसे देखते हैं उसकी मर्दाना ताकत के अधीन होकर रुचि की बुर से मदन रस की दो बूंद नीचे जमीन पर चु गई,,, जो कि रुचि की तरफ से इशारा था कि अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,, रुची अभी भी कुर्सी पर बैठी हुई थी और सुभम उसकी तरफ देखते हुए अपने लंड को डायनिंग टेबल पर पटकते हुए बोला,,,
अब कुछ होगा भाभी कि नहीं,,,,,
( शुभम की हरकत देखकर रुचि पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसके मुख से उसके मोटे तगड़े करने को देख कर ही गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,)
ससससहहहह,,,,,आहहहहह,, अब तो बहुत कुछ होगा मेरे राजा,,,,,, मैं अपने कमरे में जा रही हूं लेकिन तू 15 मिनट बाद आना ,,,,,
लेकिन क्यों भाभी मुझसे रहा नहीं जा रहा है ,,,,,
तभी तो कह रही हूं 15 मिनट बाद आना तुझे सरप्राइस देना है ,,,,,।
सरप्राइस कैसा सरप्राइस ,,,,,
अगर अभी बता दूंगी तो सरप्राइज का मतलब क्या रह जाएगा,,, इसलिए जैसा मैं कहती हूं वैसा ही कर,,,,( इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठ कर खड़ी हो गई और मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगी शुभम वही डाइनिंग टेबल की करीब खड़ा रुचि की मदमस्त अदाओं को देखकर मस्त हुआ जा रहा था जैसे जैसे रुचि सीढ़ियों पर अपने पैर रखने की वजह से उसकी गोल गोल गांड अद्भुत लचक के साथ इधर-उधर मटक रही थी जिसे देखकर शुभम का हौसला कमजोर होता नजर आ रहा था उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं रुचि के सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते उसका पानी ना निकल जाए,,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को संभाल ले गया और उसकी आंखों के सामने अपनी मादक अदाओं का जाल बिछाते हुए रुचि अपने कमरे में चली गई यह उसके लिए एक अद्भुत एहसास था पूरे घर में हर एक कोने में संपूर्ण रूप से नंगी होकर घूमना यह अनुभव उसके लिए पहला था जिसमें उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था जैसे-जैसे वह सीढ़ियों पर चढ़ रही थी उसे मालूम था कि उसकी गोलाकार गांड पर शुभम की नजर होगी और इस बात का एहसास ही उसे उत्तेजित किए जा रहा था,,,। कमरे में पहुंचते-पहुंचते रुचि काफी गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस की धार चु रही थी,,,,
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे शुभम की दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह बार-बार अपने लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए अपने समय को व्यतीत करने की कोशिश कर रहा था और देखते-देखते तकरीबन 20 मिनट गुजर गए अब उससे रहा नहीं जा रहा था वह भी उसी तरह से नंगा ही सीढ़ियां चढ़ने लगा,,,
अब वह कमरे के बाहर खड़ा था अब तक उसे इतना तो पता ही चल गया था कि रुचि का कमरा कौन सा है,, दरवाजा बंद था लेकिन लोग बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि अंदर की रोशनी बाहर तक आ रही थी इससे साफ जाहिर था कि रुचि कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ रखी थी शुभम की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से बढ़ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ना जाने कैसा सरप्राइस रोजी देने वाली है,,, क्योंकि यहां आने के बाद सब कुछ उसके लिए सरप्राइस ही था,,, क्योंकि कपड़े उतार कर एकदम नंगा रहने का आईडिया भी उसी का था जिसमें उन दोनों को काफी आनंद की अनुभूति हुई थी,,, अब क्या होने वाला है कमरे में कैसा सरप्राइस है इस बारे में शुभम को बिल्कुल भी पता नहीं था और इसी बारे में सोच सोच कर परेशान हुआ जा रहा था और साथ ही उत्तेजित भी क्योंकि इतना तो जानता था कि जो कुछ भी होगा उसके फायदे का ही होगा इसलिए वह धड़कते दिल के साथ दरवाजे पर हाथ रख कर उसे अंदर की तरफ हल्के से ठेलने लगा और दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया,,, पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था,,,
तभी शुभम की नजर बिस्तर पर गई और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई वह दंग रह गया,,,

















































