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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

थोड़ी ही देर बाद वाहनों की आवाजाही उनकी होरन की आवाज सुनकर निर्मला की आंख खुल गई,,,, शिमला की मखमली ठंडी में यह उसकी पहली सुबह थी,,,। आंख खुलते ही उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह शिमला में है,,। वह अंगड़ाई लेते हुए बिस्तर पर से उठी और नीचे पैर लटका कर बिस्तर पर ही बैठी रही,,,। बिस्तर के ठीक सामने खिड़की पर शीशे चढ़े हुए थे जिसमें से हल्की हल्की बर्फ गिरती हुई नजर आ रही थी बहुत ही बेहद खूबसूरत नजारा था निर्मला खिड़की के करीब जाने से पहले एक नजर बिस्तर पर डाली तो देखी की शुभम और शीतल दोनों के शुद्ध होकर सो रहे थे दोनों के बीच अच्छी खासी दूरी बनी हुई थी जिसे देखा कर निर्मला को राहत महसूस हुई वह बिस्तर पर से उठी और सीधे खिड़की के करीब जाकर खड़ी हो गई बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जिससे पेड़ पर बर्फ की परत जमा हो गई थी अब तक शिमला को उसने फिल्मों में और चित्रकारी के सीनरी में देखते आई थी लेकिन आज पहली बार वहां अपनी आंखों से शिमला को देख रही थी जो कि उसकी सोचने की अपेक्षा और भी ज्यादा खूबसूरत था,,। निर्मला की नजर दूर दूर तक जा रही थी दूसरे बंगलों के गेट धीरे-धीरे खुलना शुरू हो गए थे,,, यहां पर उसे कोई नहीं पहचानता था कोई नहीं जानता था ना तो किसी को उस से मतलब था वह खिड़की पर खड़ी खड़ी है सोचने लगी कि वह यहां क्या करने आई है एक तरह का अपने ही बेटे के साथ हनीमून मनाने आई है जिसकी से भागी उसकी सबसे अच्छी सहेली शीतल थी,,,। वह दोनों मिलकर एक साथ शुभम से चुदवाने के लिए शहर से इतनी दूर शिमला आए थे,,, यहां पर शुभम और निर्मला को कोई नहीं जानता था हो सकता था कि सीतल को यहां के लोग जानते हो क्योंकि वह यहां पहले भी आ चुकी है लेकिन निर्मला के लिए यह अद्भुत अनुभव था अपने आपको वह पूरी तरह से तैयार कर रही थी कि जब वह एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर अपने बेटे के साथ अपनी सबसे अच्छी सहेली की आंखों के सामने खुद के और अपनी सहेली की बुर में अपने ही बेटे के लंड को अंदर बाहर होता हुआ देखेगी,,,। वह मन में यही सोच रही थी कि कितना मजा आएगा जब एक ही बिस्तर पर तीनों संपूर्ण रूप से एकदम नंगे होकर जवानी का मजा लूटेंगे,,,,। निर्मला को अपने बेटे की मर्दानगी पर पूरा विश्वास था वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम अकेला उन दोनों का मदन रस निचोड़ कर रख देगा,,,। निर्मला आने वाले पल के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी वह अपने अंदर से शर्मो हया और झिझक को पूरी तरह से निकाल देना चाहती थी,,,, अपने मन में सोचने लगी थी कि अब शर्म करके कोई फायदा नहीं है जब ओखली में सर दे ही दिया है तो मुसल से कूटने का डर कैसा,,, वाले वाले पल का पूरी तरह से मजा लेना चाहती थी वह भी काफी समय बाद एक साथ तीन तीन लोगों के साथ मजा लेना चाहती थी वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी कि उसका बेटा शीतल की जवानी को कैसे अपनी मोटे तगड़े लंड से पानी पानी करता है,,,। यह सब सोचकर ही निर्मला की पेंट गीली होने लगी थी उसकी बुर अपने बेटे के लंड को लेने के लिए बिल बिलाने लगी थी,,,,
Nirmala ki panty utarta Shubham


खिड़की से बाहर का तरोताजा कर देने वाला नजारा उसके तन बदन में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा था उसकी सोच को बदल रहा था या यूं कह लो कि शिमला में आकर वह अपने आप को पूरी तरह से बदल देना चाहती थी क्योंकि यहां पर किसी के द्वारा देखे जाने का डर उसे बिल्कुल भी नहीं था यह शहर अनजान था यहां के लोग अनजान थे वह खुद इस शहर के लिए अनजान थी ऐसे में अपने अनजाने पंखा वह पूरा फायदा उठाना चाहती थी,,,। दीवार पर टंगी घड़ी में 7:00 का अलार्म बजने लगा उसका बदन थका हुआ था वह नहाना चाहती थी,,,,। लेकिन बाथरूम में जाने से पहले वह शुभम और शीतल को भी उठा देना चाहती थी,,। इसलिए वह आगे बढ़कर शुभम और शीतल दोनों को उठाने लगी और वह दोनों नींद में होने का बहाना करते हुए आलस मरोड़ कर उठ कर बैठ गए,,,।

गुड मॉर्निंग मम्मी,,,

गुड मॉर्निंग निर्मला ,,,(शीतल भी एकदम जैसे नींद में हो इस तरह से बोली,,, जवाब में निर्मला मुस्कुरा दी,,,,)

तुम दोनों बैठे हो मैं नहा कर फ्रेश होने जा रही हूं,,,।( इतना कहकर निर्मला बाथरूम की तरफ जाने को हुई थी तभी शीतल उसे आवाज देकर रोकते हुए बोली,,।)

अरे अरे अकेले,,,,

तो,,,, अकेले ही नहाऊंगी ना,,,,( निर्मला आश्चर्य से बोली,,।)
Nirmala or Shubham


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तुम एकदम पागल हो निर्मला हम यहां क्या करने आए हैं,,,, मस्ती,,,,, वो सब करने जो हम वहां अपने घर पर रहकर नहीं कर सकते,,,

ठीक ठीक बोलो शीतल मैं तुम्हारी बात समझ नहीं पा रही हूं,,,।

पर इसमें समझने का क्या है मैं यह चाहती हूं कि तुम अकेले बाथरूम में नहीं बल्कि हम तीनों बाथरूम में चलकर नहाएंगे एक साथ और वह भी बिना कपड़े एकदम नंगे होकर सोचो कितना मजा आएगा,,,( इतना कहकर शीतल चुप हो गई उसके चेहरे पर उत्सुकता की चमक साफ नजर आ रही थी वह शुभम और निर्मला की तरफ देखने लगी निर्मला सीता की बात सुनकर एकदम से चौक गई लेकिन उसकी यह बात उसे अच्छी लगी थी इसलिए वह जवाब में केवल मुस्कुरा दी,,,, और निर्मला के होंठों पर आई मुस्कुराहट देखकर शीतल खुश होते हुए बोली,,,।)
Shubham


लेट्स एंजॉय,,,,,
( इतना कहने के साथ वह भी बिस्तर से नीचे उतर गई शीतल का सुझाव सुनकर शुभम काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था,,, और देखते ही देखते एक एक करके तीनों बाथरूम में घुस के बाथरूम का दरवाजा बंद करने की कोई आवश्यकता उन्हें जान नहीं पड़ रही थी लेकिन फिर भी निर्मला ने दरवाजा बंद कर दी,,, बड़ा ही बेहतरीन और आलीशान बाथरूम था काफी बड़ा था इसमें व तीनों बड़े आराम से नहाने के लिए आ गए थे,,,, )

मम्मी शिमला में ठंडे पानी से नहाएंगे तो तबीयत नहीं खराब हो जाएगी,,,।

अरे मेरे राजा ठंडे पानी से नहीं नहाना है इस सावर में से गर्म पानी भी आता है,,,,। और वैसे भी हम दोनों की गर्म जवानी तुम्हें ठंडा होने नहीं देगी बल्कि तुम्हें पिघला देगी,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल अपनी बड़ी बड़ी छातियों पर से साड़ी का पल्लू हटाकर अपनी कमर से साड़ी खोलने लगी,,,, शीतल की भारी-भरकम जातियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आने लगा और शीतल को इस तरह से अपने और अपने बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारते हुए देखकर निर्मला शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी लेकिन उसे अच्छा लग रहा था देखते ही देखते शीतल उन दोनों की आंखों के सामने अपनी साड़ी उतार कर बाथरूम में नीचे फर्श पर फेंक दी और निर्मला को बोली,,,।
Nirmala apne bete ko mast karti huyi


शर्मा क्यों रही हो मेरी छम्मक छल्लो मजा करने आई हो मजा करो और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो जाओ,,,,( यह कहते हुए शीतल अपनी ब्लाउज के बटन खोलने लगी,,, बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर शुभम के तन बदन में आग लग रही थी और यही हाल निर्मला का भी हो रहा था शीतल की बेशर्मी को देखकर वह भी बेशर्म करना चाहती थी इसलिए वह ब्लाउज के बटन खोल पाती इससे पहले वह भी अपनी साड़ी का पल्लू अपनी मदमस्त चूचियों पर से हटा कर उसे अपनी कमर से खोलना शुरू कर दी,,,, शुभम की आंखों के सामने दो-दो गदराई जवानी अपने-अपने वस्त्र उतारकर नंगी होने जा रही थी। एक जवान लड़के को और क्या चाहिए था,,,, उसकी तो दसों उंगलियां घी में थी,,, किस्मत से उसे उम्मीद से दुगना मिल रहा था,,, शुभम के तन बदन में जवानी की लहर हो रही थी बाथरूम के अंदर एक साथ दो दो औरतें अपने कपड़े उतार कर नंगी हो रही थी निर्मला अपनी साड़ी उतार कर फर्श पर फेंक चुकी थी और शीतल अपनी ब्लाउज के बटन खोल कर अपने ब्लाउज को अपनी गोरी चिकनी बाहों में से निकालकर उन्हें ब्लाउज की कैद से आजाद कर चुकी थी,,,। लेकिन अभी भी शीतल के गोरे बदन पर उसकी चुचियों के के संपूर्ण वजूद को उसके काले रंग की ब्रा में समेटे हुए थे उसी से शीतल अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उन चूचियों के आजाद नामा पर अपनी स्वीकृति का मोहर लगा रही थी देखते ही देखते अपनी नाजुक होली हो का सहारा देकर वह अपनी ब्रा की हुक को भी खोल दी और जैसे ही उसकी ब्रा का हुक खुला,,, वैसे ही तुरंत उसके शौख चंचल लिए हुए चूचियां चहकते हुए पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराने लगी,,,। और उन्हें लहराते हुए चूचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी के साथ-साथ उसके मजबूत लंड ने अपना सर उठाकर उसकी जवानी को सलामी भर दिया,,, शायद यह शीतल के लिए पहला वक्त था जब वह एक औरत और उसके बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतार कर नंगी हो रही थी,,,, लेकिन निर्मला के लिए यह दूसरी बार वह पहली बार भी इसी तरह से अपने भाई की ही जवान लड़की की आंखों के सामने अपने बेटे की मौजूदगी में अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर अपने बेटे से चुदाई का आनंद ली थी,,, और अपनी आंखों से अपने बेटे के द्वारा अपने भाई की बेटी को चुदते हुए देखी थी,,,,।


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बाथरूम में तीनों बेहद उत्सुकता से भरे हुए थे उत्तेजना पल पल उन तीनों के बदन में अपना असर भर रही थी,,। शिमला की गुलाबी ठंडी बाथरूम में निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलना शुरू कर दी थी,,,।
निर्मला भी शीतल की गोल गोल सूचियों को देखकर एकदम गरम हो गई वह नहीं चाहती थी कि उसकी मद मस्त जवानी शीतल की जवानी के आगे फीकी पड़ जाए,,, इसलिए वह भी धीरे-धीरे अपने ब्लाउज के बटन खोल कर शीतल की आंखों के सामने अपने ब्लाउज को उतार फेंकी,,। शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि शीतल की गोल-गोल सुंदर चुचियों की अपेक्षा उसकी मां की चूचियां बेहद खूबसूरत और गोलाई लिए हुए हैं,,, कुछ नहीं धड़कते दिल से अपनी मां की चूचियों को वस्त्र विहीन होता हुआ देख रहा था,,, शीतल के भी हाथ पेटिकोट की डोरी को खोलते खोलते वही थम गए थे वह भी निर्मला की चूचियों को देखना चाहती थी,,,। और निर्मला भी अपनी कामुक अदा के साथ अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोल दी,,,, शुभम अपनी आंखों से देख रहा था कि उसकी मां की ब्रा में लबालब उसकी दोनों जवानी भरी हुई थी और ब्रा के हुक के खुलते ही दोनों जवानी छलक कर बाहर आ गई,,,,।
पानी भरे गुब्बारों की तरह जैसे ही छलक कर निर्मला की चूचियां बाहर को आई शुभम से रहा नहीं गया और वह आगे बढ़कर अपनी मां की मदमस्त जवानी को इज्जत बख्श ते हुए उसके दोनों गुब्बारों को अपने हाथों में थाम लिया और उन्हें दबाना शुरू कर दिया,,,,।

आहहहहहहह,,,, शुभम धीरे से,,,,,( उत्तेजना में आकर शुभम ने इतनी जोर से अपनी मां की चुचियों को दबाया था कि उसके मुंह से कराहने की आवाज फूट पड़ी थी,,,, लेकिन शीतल की उपस्थिति में उसे अपने बेटे के द्वारा इस तरह से चूची दबाना बेहद आनंद मय लग रहा था,,, शुभम एकदम मदहोश हो गया था वह दोनों हाथों से अपनी मां की चूची को दबा रहा था,,,। यह देखकर शीतल के तन बदन में आग लगने लगी और वह तुरंत अपनी पेटीकोट की डोरी को खोल कर आगे बढ़ गई और पीछे से शुभम को अपनी बाहों में कस ली हालांकि अभी भी वह पूरी तरह से निर्वस्त्र नहीं हुई थी उसके तन बदन पर अभी भी काले रंग की चड्डी थी।



ओहहहहहह,,,,,, शुभम मेरे राजा,,,( शीतल पागलों की तरह शुभम के गर्दन को चूमते हुए गरम सिसकारी ले रही थी और शुभम अपनी मां की दोनों चुचियों में व्यस्त था निर्मला मदहोशी के आलम में खोती चली जा रही थी,,,। शुभम उसकी चुचियों को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दिया था और निर्मला उत्तेजित होते हुए अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने पेटीकोट की डोरी को खोल रही थी और शीतल उसके गर्दन को चूमते हुए नीचे से उसकी टीशर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाकर उसके टी-शर्ट को निकाल रही थी,,,। देखते ही देखते व शुभम के बदन पर से उसकी टीशर्ट निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दी,,, और अगले ही पल वाला शुभम की चिकनी पीठ पर अपने लाल-लाल होठों को ऊपर से नीचे तक घिसने लगी,,, सीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी,,, वह अपनी उन्मादकता शुभम की नंगी चिकनी पीठ पर उतार रही थी,,, और शुभम अपनी मां की मदमस्त पानी भरे गुब्बारों जैसे चूचियों को दबा दबा कर उन्हें मुंह में लेकर उन्हें चूस चूस कर एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया था,,, लगातार निर्मला के मुख से सिसकारी की आवाज पूरे बाथरूम में गुंज रही थी,,, देखते ही देखते पेटिकोट की डोरी खुलते ही निर्मला की पेटी कोट सरररर से उसके पैरों में गिर गई,,,, बाथरूम में तीनों इस समय अर्धनग्न अवस्था में थे शीतल निर्मला की तो मत मस्त चूचियां अपनी चमक से पूरे बाथरूम को चमका रही थी लेकिन अभी भी तीनों के बदन पर उनके वस्त्र उनके नंगे पन को ढके हुए थे जिसकी शुरुआत शीतल अपने हाथों से अपनी काली रंग की पैंटी को उतार कर नंगी होने का सबूत पेश करने लगी देखते ही देखते शीतल अपने हाथों से अपनी काली रंग की पैंटी उतार कर एकदम नंगी हो गई,,,, लेकिन अपनी मां की लाल रंग की पेंटिं को उतारकर यह सौभाग्य शुभम खुद प्राप्त करना चाहता था इसलिए वह खुद अपने हाथों से अपनी मां की लाल रंग की चड्डी को उतारकर उसे नंगी कर दिया,,,।,,,,
अब शीतल निर्मला दोनों संपूर्ण रूप से एकदम नंगी हो गई थी लेकिन अभी भी शुभम के बदन पर वस्त्र था,,, शीतल और निर्मला दोनों की मदमस्त जवानी छलक रही थी,,,। तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी लेकिन तीनों आंखों के इशारों से ही काम चला रहे थे,,। लेकिन तभी वार्तालाप की शुरुआत करते हुए शीतल बोली,,।

हम दोनों तो नंगी हो गई लेकिन तुम अभी भी कपड़े पहने हो,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल शुभम की तरफ आगे बढ़ी है और उसके होठों पर अपने लाल लाल होठ रखकर उसके फोटो को चूसना शुरु कर दी,,, यह देखकर निर्मला भी अपने बेटे के पीछे आ गई और अपने नंगे बदन को उसके बदन से सटाकर उसके गर्दन को चूमना शुरु कर दी दो-दो नंगी औरतों के बीच अपने आपको पाकर शुभम इस समय दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान बना हुआ था,,,
शुभम का मोटा तगड़ा लंड तंबू की शक्ल में आकर इस समय शीतल की टांगों के बीच उसकी बोर्ड पर ठोकर मार रहा था,,, और उसके तंबू के ठोकर को अपनी बुर के मुख्य द्वार पर महसूस करके शीतल पानी पानी हुए जा रही थी,,।
जल्द से जल्द शीतल अपनी आंखों से शुभम के खड़े लंड को देखना चाहती थी उसके दीदार करना चाहती थी इसलिए वह तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गई,, अभी भी निर्मला शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके गर्दन को चूम रही थी,, और अपनी बड़ी परी चूचियों को उसकी नंगी पीठ पर रगड़ रही थी जिससे शुभम को बहुत मजा आ रहा था,,, घुटनों के बल बैठी सीतल बड़े गौर से शुभम के पेंट में बने तंबू को देख रही थी,,,,, और शुभम भी उत्सुकता भरी निगाहों से शीतल की तरफ देख रहा था,,, शीतल से रहा नहीं गया और वह अपनी प्यासी नजरों से पेंट में बने तंबू को देखते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर पेंट की बटन को खोलना शुरू कर दी,,,, निर्मला भी अपने बेटे के बदन से खेलते हुए शीतल की हरकत को मादकता भरी निगाहों से देख रही थी अब उसे बिल्कुल भी झिझक नहीं हो रही थी और ना ही किसी भी तरह का शीतल से इतराज हो रहा था वह भी हर पल का मजा लेना चाहती थी,,

देखते ही देखते अपनी नाजुक उंगलियों का सहारा देकर शीतल शुभम के पेंट की बटन को खोल दी और उसकी चेन की जीप को खोलते हुए तुरंत उसके पेंट को नीचे घुटनों तक खींच दी,,,। लेकिन अभी भी निर्मला के साथ-साथ शीतल की उत्सुकता बनी हुई थी क्योंकि अभी भी शुभम का मोटा तगड़ा लंड अंडरवियर के अंदर अपने वजूद को छिपाए हुए था,,, जिसे इस बार निर्मला पीछे से अपने दोनों हाथों से उसके अंदर बीयर पकड़कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,,,
आहहहहह,,,,, अपनी मां की इस हरकत की वजह से उन्मादकता मैं शुभम के मुंह से आह निकल गई,,,, और देखते ही देखते पीछे से उसकी मां उसके अंडर वियर को नीचे घुटनों तक ला दी,,,, अंडरवियर के कैद से आजाद होते ही शुभम का मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा शीतल फटी आंखों से शुभम के मोटे तगड़े लंड का दीदार कर रही थी,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता चला जा रहा था निर्मला को इस बात का अहसास अच्छी तरह से था कि उसके बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखकर शीतल के मन में क्या चल रहा है,,,, निर्मला पूरी तरह से खुल चुकी थी शिमला में आकर व एक-एक पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी इसलिए अपने एक हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर शीतल के मुख के बेहद करीब उसे ऊपर नीचे करके लहराते हुए शीतल से बोली,,,।

क्यों शीतल रानी मेरे बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसोगी नहीं,,,,
( अपनी मां की बात सुनकर शुभम के साथ-साथ शीतल भी पूरी तरह से चौक गई क्योंकि उन दोनों को उम्मीद नहीं थी कि निर्मला खुद अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को उसे मुंह में लेकर चूसने के लिए कहेगी,,।)
 
बाथरूम में गर्मी का पारा लगातार नीचे गिरता चला जा रहा था उम्मीद से कई गुना ज्यादा गरम नजारा बाथरूम के अंदर तीनों के द्वारा दर्शाया जा रहा था बेहद उत्तेजक और अलौकिक नजारा इस समय बाथरूम में बना हुआ था शीतल घुटनों के बल बैठी हुई थी और निर्मला अपने बेटे के ठीक पीछे खड़े होकर अपने एक हाथ में उसका लंड लेकर उसे ऊपर नीचे हिलाते हुए शीतल को ललचा रही थी,,,। ना तो शुभम को और ना ही शीतल को इस बात की उम्मीद थी कि निर्मला खुद अपने हाथ में अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे चूसने के लिए बोलेगी,,, निर्मला के मुंह से इतना सुनते ही वह अपने आप को रोक नहीं पाए और अपने लाल-लाल होठों को आगे बढ़ा कर सीधा शुभम के लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,,, एक मां के लिए यह बेहद उत्तेजना आत्मक दृश्य था जब उसकी आंखों के सामने उसकी हमउम्र खूबसूरत सहेली एकदम नग्न अवस्था में घुटनों के बल बैठ कर उसकी आंखों के सामने उसके बेटे के लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह और वह भी बिना किसी शर्म के चूस रही थी,,, शीतल मजे लेकर शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने ही थी शुभम तो साथ में आसमान में उड़ रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो भी उसके साथ हो रहा है वह सच है या कल्पना,,,, वह तो बस आनंद की सीमा को पार कर चुका था आनंद की परिभाषा को अपने अंदर जी रहा था,,, निर्मला भी एकदम मदहोश हो चुकी थी क्योंकि जिस तरह से शीतल उसके बेटे के लंड को बाहर बार अपने गले तक उतारकर उसे चूसने का आनंद लूट रही थी निर्मला से भी रहा नहीं जा रहा था वह उत्तेजित होते हुए बार-बार अपने बेटे की पीठ पर अपनी दोनों चुचियों को रखते हुए अपनी एक हथेली से अपने बेटे के नितंब को नोच ले रही थी और उसे ऐसा करने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।
Bathroom me nahate huye


शुभम अपनी आंखों को बंद करके इस असीम पल का आनंद ले रहा था शिमला में आना उसके लिए मानो स्वर्ग में आने के बराबर हो गया था जिसमें वह एक राजा की तरह दो-दो अप्सराओं और वह भी एक दम नंगी उनका आनंद लूट रहा था,,, शुभम भी मदहोश होता हुआ अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी मां के नंगे खूबसूरत बदन पर अपनी हथेली फिराता हुआ जगह-जगह पर उसके बदन को दबोच ले रहा था,,,,, जिससे निर्मला के मुंह से कराहने की आवाज फूट पड़ रही थी। और निर्मला उत्तेजना बस बार-बार शीतल के मुंह में से अपनी बेटी के लंड को बाहर खींचकर उसे उसके चेहरे पर पटकने लगती थी जिससे शीतल को तो चोट लगती थी लेकिन उस चोट में भी उसका अलग मजा उसे मिल रहा था
निर्मला पागल हुए जा रही थी वह बार-बार इसी तरह की हरकत करते हुए अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को उसके गोरे गोरे गाल पर रगड़ रही थी,,,,, जिससे मारे उत्तेजना के शीतल सीहर उठ रही थी,,,, तीनों को अपने अपने तरीके से बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,। शिमला के बर्फीले मौसम में बाथरूम में इस समय तीनों एकदम नंगे होकर एक दूसरे की छलकती जवानी को दोनों हाथों से लूट रहे थे उन्हें ठंडे पन का जरा भी एहसास नहीं हो रहा था क्योंकि बाथरूम के बाहर का पारा जितना ठंडा था उससे ज्यादा गर्म बाथरूम के अंदर का पारा होता जा रहा था क्योंकि दो दो औरतों की गर्म जवानी के आगे मौसम के ठंडापन एकदम फीका पड़ता नजर आ रहा था,,,। जी भर के शीतल शुभम के लंड को चूस रही थी,,,। अब इस खेल में निर्मला को पूरी तरह से आनंद आने लगा था वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि जितना वह अपने शर्म को त्यागे की उतना अधिक आनंद उसकी ओर खींचता चला आएगा,,, और ऐसा ही हो रहा था तभी तो इस समय बाथरूम में तीनों निर्वस्त्र होकर एक दूसरे की जवानी को अपने अपने हिसाब से लूट रहे थे शुभम का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह खड़ा था और शीतल के नरम नरम गुलाबी होठों के बीच अपनी जगह बनाते हुए शीतल के गले तक पहुंच रहा था,,,।



निर्मला इस खेल को और भी ज्यादा उत्तेजक बनाना चाहती थी इसलिए अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ाकर साबर का नोट घुमा दी और सावर में से गर्म पानी की बौछार नीचे गिरने लगी,,,, लेकिन इससे तीनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत पेश नहीं आई बल्कि उन तीनों को और ज्यादा मजा आने लगा,,,।

ले चूस शीतल रानी मेरे बेटे के लंड को पूरा मुंह में लेकर चूसने जिंदगी में तूने ऐसा मोटा तगड़ा लंड नहीं देखी होगी,,, क्या मस्त लंड चूसती है तू शीतल तूने तो मुझे एकदम मस्त कर दी,,,।आहहहहहहह,,,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला अपने बेटे के लैंड को सीधा के मुंह में से एक बार फिर से बाहर निकाल कर उसके चेहरे पर उसके मोटे तगड़े लंड को पटकने लगी,,,,,।) बहुत मजा आएगा जब मेरी आंखों के सामने मेरे बेटे का लंड तेरी गुलाबी बुर के अंदर घुसेगा देखना मेरे बेटे का लंड तेरी बुर का भोसड़ा बना देगा कितना मजा आएगा शीतल रानी,,,,,,आहहहहरहहह,,,,
( इतना कहते हुए दिल मेरा एक बार फिर से अपने हाथ से ही अपने बेटे का लंड पकड़ कर शीतल के मुंह में डालते हुए बोली,,,) ले चूस मेरी जान अच्छे से चूस,,, ताकि यह तेरी बुर में जाकर तुझे एकदम मस्त कर सके,,,,,

Shubhsm ka mooh me lete huye

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( और एक बार फिर से शीतल शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी शुभम तो अपनी मां की गंदी बातों को सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया था वह हल्के हल्के अपनी कमर को आगे पीछे कर के सीतल के मुंह को चोदना शुरु कर दिया था,,,, इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि अपने दोनों हाथों में अपनी मां का चेहरा पकड़ कर उसे अपने करीब लाता हुआ उसके लाल लाल होंठों को अपने होंठों में दबा कर चूसना शुरू कर दिया,,,, तीनों एकदम आनंद से भरे जा रहे थे सावर में इसे झड़ रहे गर्म पानी का फावारा उन तीनों के गर्म बदन को और ज्यादा गर्मी प्रदान कर रहा था,,,। तीनों पानी में पूरी तरह से गीले हो चुके थे,,,। थोड़ी देर बाद शुभम अपने होठों को अपनी मां के लाल लाल होठों से अलग करते हुए बोला,,,,।



तू भी मेरा लंड चूस मम्मी बहुत मजा आएगा जब एक साथ तुम दोनों मेरे लंड को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूसोगी,,,,

( इतना सुनते ही निर्मला भी तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और शीतल के मुंह में से अपने बेटे के लंड को निकालकर अपनी मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी अब इस खेल में और ज्यादा मजा आने लगा था,,, निर्मला पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को चूस रही थी और उसे शुभम के लंड को चूसते हुए शीतल बड़े गौर से देख रही थी निर्मला के खूबसूरत नंगे बदन को देखकर शीतल के बदन में कुछ-कुछ हो रहा था उससे रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर निर्मला के दोनों दशहरी आम को अपने हाथों में थाम ली,,,,। और से जोर-जोर से लगाना शुरु कर दी शीतल की इस हरकत से निर्मला के तन बदन में आग लग गई उसे मज़ा आने लगा एक अद्भुत अहसास उसके तन बदन को झकझोरने लगा,,,, पहली बार किसी औरत के हाथ में वह अपनी दोनों चुचियों को महसूस कर रही थी और उसे मजा भी आ रहा था क्योंकि शीतल उसे जोर जोर से दबा रही थी शीतल के लिए भी यह पहला मौका था जब वह किसी औरत के अंग को अपने हाथ में लेकर उससे खेल रही थी उसे रहा नहीं गया और वह इससे भी ज्यादा आनंद पाने की अपेक्षा के चलते अपना मुंह आगे बढ़ाकर निर्मला की चूची को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,।


आहहहहहहह,,,,( मुंह में शुभम का मोटा तगड़ा लंड ठुंसा होने की वजह से निर्मला के मुंह से घुटी घुटी से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,, उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि शीतल ने इस तरह की हरकत करेगी हालांकि इस तरह का आनंद व पहले भी अपने भाई की बेटी के साथ ले चुकी थी लेकिन आज पहली बार था कि वह अपनी हमउम्र शीतल के साथ इस तरह का मजा ले रही थी शीतल को निर्मला की चुचियों को दबाने और उसे मुंह में लेकर चूसने में बहुत मजा आ रहा था सावर में भीगते हुए तीनों एकदम मस्त हुए जा रहे थे,,, शुभम पागलों की तरह अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए अपनी मां के मुंह को ही चोद रहा था,,,।

शीतल को बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस पल का आनंद किस तरह से उठाएं वह कभी निर्मला की चुचियों से खेलने लगती तो कभी उसके निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरु कर देती तो कभी शुभम के लंड को निर्मला के मुंह से निकालकर अपने मुंह में लेकर चूसना शुरु कर देती,,,,, तीनों को बहुत मजा आ रहा था शीतल और निर्मला दोनों मस्त हुए जा रहे थे,,,। निर्मला के लिए शुभम का इतनी देर तक ठहरे रहना कोई ताज्जुब की बात नहीं थी लेकिन शीतल के लिए यह हैरान कर देने वाली बात थी कि दो दो औरतों का मजा लेने के बावजूद भी शुभम का लंड अभी तक पानी नहीं फेंका था,,, पर यही देख कर शीतल की बुर में मीठा मीठा दर्द होने लगा,,,, उससे अपनी बुर का दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए वह खड़ी हो गई और शुभम से बोलि,,,

Sheetal ki madmast chuchiya shower me

शुभम अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझ पर अपनी कृपा कर दे अपना लंड मेरी बुर में डाल दें,,,।( और इतना कहते हुए शीतल बाथरूम में दीवार पकड़ कर अपनी मदमस्त बड़ी बड़ी गांड को शुभम के आगे परोस दी और अपनी नजर घुमा कर शुभम की हरकत को देखने लगी कि अब वो क्या करता है,,,। शीतल की बातों से लेकर शुभम अपनी मां की तरफ देखने लगा इशारों ही इशारों में अपनी मां से इजाजत लेना चाहता था और उसकी मां खुश होते हुए बोली,,,।

आगे बढ़ो बेटा और शीतल की मदमस्त जवानी रूपी बुर में अपने लंड का झंडा गाड़ दो,,,,,

अपनी मां की तरफ से इजाजत पाते ही शुभम शीतल की तरफ आगे बढ़ा जो की दीवार था में हसरत भरी निगाहों से उसे ही देख रही थी और उसके झूलते हुए लंड को शुभम शीतल के करीब जाकर उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर दो-चार चपत लगा दिया,,,,,

आहहहह,,, शुभम,,,,
Nirmla nahate huye


चिंता मत करो मेरी रानी मैं तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रखोगी,,,,( और इतना कहते हुए शुभम अपने हिसाब से शीतल की बड़ी बड़ी गांड को एडजस्ट करने लगा और दोनों हाथों से उसकी गांड की फांकों को फैला कर उसके गुलाबी छेद को अच्छी तरह से देखने लगा,,, शुभम को शीतल की गुलाबी पूरा एकदम साफ नजर आ रही थी और वह बिना एक पल गांव आए अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद पर टीका कर हल्के से धक्का लगाया,,,, बुर पहले से ही पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए आराम से गप्प ककके अंदर घुस गया,,, देखते ही देखते शुभम शीतल की चुदाई करना शुरू कर दिया अपनी आंखों के सामने जिंदगी में दूसरी बार निर्मला अपने बेटे को किसी और को चोदते हुए देख रही थी लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी आंखों से एक-एक पल बड़ी बारीकी से नजर आ रहा था,,।


निर्मला को यह नजारा देखने में बहुत ज्यादा आनंद आ रहा था कि उसके बेटे का लंड शीतल की बुर के अंदर बाहर हो रहा था,,,, शीतल अपनी दोनों टांगों को फैला कर शुभम से चुदवा रही थी,,,। निर्मला भी मदहोश हुए जा रही थी शीतल के द्वारा अपनी चूची को हाथ में लेने से जिस तरह की झनझनाहट उसे अपने तन बदन में महसूस हुई थी उसी के चलते निर्मला अपने घुटनों के बल बैठ कर शीतल की दोनों टांगों के बीच में आ गई और अपने बेटे के लंड को उसकी बुर से अंदर बाहर होता हुआ देखते हुए एकदम उत्तेजित अवस्था में अपनी जीभ बाहर निकाल कर शीतल की बुर को चाटना शुरू कर दी,,, शीतल को निर्मला की तरफ से इस तरह की हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी इसलिए वह निर्मला की इस हरकत पर पूरी तरह से काम विभोर हो गई,,,, शुभम भी एकदम मस्त हो गया और वह जोर-जोर से अपने लंड को शीतल की बुर में पेलने लगा क्योंकि वह जब जब शीतल की बुर को अपनी जीभ से चाट रही थी तब तक शुभम का लंड भी स्पर्श हो जा रहा था,,।
अत्यधिक उत्तेजना को शीतल बर्दाश्त नहीं कर पाए और जल्द ही झड़ गई लेकिन शुभम अभी भी बरकरार था उसका लंड पूरी तरह से लोहे का रोड बन चुका था जो कि पानी निकलने के बाद ही ढीला होने वाला था,,,, इसलिए वह झट से शीतल की बुर से अपना लंड बाहर खींच लिया और अपनी मां की बाहों को पकड़कर उसे खड़ा करते हुए उसके गुलाबी होठों को चूसने लगा और उसके होठों को चूसते चूसते वह उसे दीवार से टिका कर उसे धीरे-धीरे अपनी गोद में उठाना शुरू कर दिया,,, और देखते ही देखते शीतल की आंखों के सामने ही वह अपनी मर्दाना जो से भरा हुआ था कर दिखाते हुए अपनी मां की भारी-भरकम शरीर को अपने गोद में उठाकर उसे दीवार से टीका दिया और अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़ा को अपनी मां की गुलाबी छेद में डालकर उसे चोदना शुरु कर दिया,,, जबरदस्त गरमा गरम माहौल बन चुका था शीतल को छोड़कर उसका पानी निकाल चुका था लेकिन अभी भी उसका मर्दाना जोश पानी से लबालब भरा हुआ था इसलिए वह अपनी गर्मी शांत करने के लिए अपनी मां को गोद में उठाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,, शीतल हैरान थी उसके जोश और ताकत को देखकर और निर्मला मदहोश हुए जा रही थी शीतल की आंखों के सामने एकदम नंगी होकर चुदवाने में,,, उसे और ज्यादा मजा आ रहा था शुभम की कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी उस में जरा भी थकान महसूस नहीं हो रही थी,,, सावर से निकलता गर्म पानी तीनों के बदन को भिगो रहा था,,, तकरीबन 15 मिनट तक शुभम अपनी मां को गोद में उठाए हुए उसकी चुदाई करता रहा उसकी गुलाबी बुर में अपने लंड को पेलता रहा,,,, तब जाकर पहले निर्मला और फिर शुभम का पानी निकला,,,।
तीनों एकदम तृप्त हो चुके थे शिमला में आकर यह उनका पहला कदम था एक साथ संभोग की पराकाष्ठा को प्राप्त करने का,,,, इसके बाद वह तीनों नहा कर बाथरूम से बाहर आ गए और अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गए तब तक घर की नौकरानी आ चुकी थी और घर के बाहर खड़े होकर डोरबेल बजा रही थी,,,।
 
तीनों निपट कर बाथरुम से बाहर आकर जैसे ही तैयार हो गए वैसे ही डोर बेल बजने लगी थी। शीतल समझ गई कि नौकरानी आई है इसलिए वह खुद दरवाजा खोलने के लिए आगे बढ़ी,,, दरवाजा खोलो तो सामने नौकरानी खड़ी थी जो कि शीतल को पहचानती थी और शीतल को देखते ही उसे नमस्ते की,,, जवाब में शीतल भी मुस्कुराते हुए उसे नमस्ते की यह शीतल की सादगी थी,,,। नौकरानी घर में आ गई और सामने नजर पड़ते ही निर्मला और शुभम दोनों को नमस्ते की जवाब में वह लोग भी मुस्कुराते हुए नमस्ते कर दिए,,,। नौकरानी मन ही मन बहुत खुश हुई क्योंकि जिस तरह से शीतल निर्मला और शुभम ने उसका अभिवादन किए थे उस तरह से कोई भी नौकरानी को इतनी इज्जत नहीं बख्शता था,,।

मेम साहब आप लोगों से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई क्योंकि आप लोग बेहद पढ़े लिखे और संस्कारी मालूम पड़ते हैं तभी तो मुझे सी नौकरानी को मुस्कुराते हुए नमस्कार किया वरना हम लोगों को तो कोन मुंह लगाता है,,।

अरे ऐसी कोई बात नहीं है आखिरकार तुम भी तो एक औरत हो और एक औरत की इज्जत करना तो हम सब का फर्ज है क्योंकि मैं भी एक औरत हूं अगर मैं किसी की इज्जत नहीं करूंगी तो भला मेरी इज्जत कौन करेगा,,,।

( निर्मला की बात सुनते ही नौकरानी बहुत खुश हुई,,,।)

वैसे तुम्हारा नाम क्या है,,,।( निर्मला नौकरानी से बोली।)

शांति मेरा नाम शांति है,,,।

दिखने में तो तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,

लेकिन पढ़ी-लिखी नहीं हूं ना मेम साहब इसके लिए यह सब काम करना पड़ता है,,,।

सही है अगर पढ़े लिख ली होती तो जिंदगी में तुम्हें बहुत काम आता,,,।

मां बाप की हैसियत नहीं थी पढ़ाने की दो वक्त का खाना खिला देते थे वही बहुत था,,,,,।

चलो कोई बात नहीं जिंदगी में यह सब तो होता ही रहता है,,,। लेकिन तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,।
( निर्मला के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर वह बहुत खुश हूई,, और वह खुश होते हुए बोली,,।)

अच्छा मैम सब खाना में बोलिए क्या बनाना है,,,?

तुम सिर्फ गरमा गरम कॉफी बना दो खाना हम बाहर खा लेंगे,,,,( शीतल कुर्सी पर बैठते हुए बोली।)

ठीक है मैम साहब में कॉफी बना देती हू और घर की सफाई कर देती हूं,,,,।
( इतना कहकर वह किचन में चली गई,,। और निर्मला शीतल के साथ-साथ शुभम भी उसे किचन में जाते हुए देखता रह गया,,, क्योंकि उस नौकरानी को देखकर शुभम भी हैरान रह गया था क्योंकि वह बहुत खूबसूरत है बस थोड़ा सा रंग दबा हुआ था बाकी बदन का हर एक अंग जवानी से भरा हुआ उबाल मार रहा था,,, तकरीबन 30 32 साल की होगी और भरा हुआ बदन गदराया जिस्म अपनी अलग कहानी कह रहा था जब से मैं पुरानी घर में दाखिल हुई थी तब से शुभम की नजर उसके ऊपर ही थी,,, अनुभवी आंखों से शुभम शांति की खूबसूरत बदन के हर एक हिस्से का नाप ले चुका था,,,। अच्छी तरह से समझ रहा था कि शांति के बदन का हर एक अंग किस तरह का दिखता होगा वह मन में कल्पना करके शांति के वस्त्रों के अंदर तक अपनी कल्पना ओ की नजर दौड़ा चुका था,,,, उसकी चुचियों से लेकर उसके चिकने पेट के बीचो बीच की गहरी नाभि के साथ-साथ वह केले के सामान चिकने जांघों के बीच स्थित उसकी बुर की पतली दरार के बारे में पूरी तरह से अवलोकन कर चुका था,,,,। मर्दों की फितरत क्या होती है इस समय शुभम के मन में जो कुछ भी चल रहा है उसी से पता चल जाता है कि दोनों खूबसूरत औरत पास में होने के बावजूद भी वह नौकरानी को भोगने की इच्छा मन में पाल रहा था,,,।

निर्मला और शीतल दोनों आपस में बातें करने लगे और शुभम का मन रसोई घर में कॉफी बना रही शांति के ऊपर फिसलने लगा था इसलिए वह पानी पीने का बहाना करके रसोई घर में चला गया,,,। जहां पर शांति अपने गर्म कपड़े को निकाल कर उसे टेबल पर रख कर अपनी साड़ी को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा कर अपनी कमर में खोंसे हुए थी,,, जिससे उसकी गोरी गोरी मांसल चिकनी पिंडलिया साफ नजर आ रही थी,,,,। शुभम को किचन में आता हुआ देखकर शांति बोली,,।

क्या चाहिए छोटे बाबू,,।

छोटे बाबू नहीं शुभम नाम है मेरा,,,,

लेकिन छोटे बाबू जी आप बड़े लोग हैं आपका नाम नहीं ले सकती,,,,,।

लेकिन तुम मुझे छोटे बाबू कहकर बुलाओगी तो मैं बुरा मान जाऊंगा,,,,

और मैं तुम्हें नाम से बुलाऊंगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,,,

इसका मतलब साफ है कि तुम मुझे छोटे बाबू कहकर ही बुलाओगी,,,,।

जी हां,,,,( इतना कहकर वो हंसने लगी,,,, और साथ में शुभम भी हंसने लगा,,,।,,, और हंसते हुए ठीक उसके पीछे से गुजरते वह वह तिरछी नजरों से नौकरानी के संपूर्ण बदन पर अपनी प्यासी नजरों की छाप छोड़ते हुए गया,,,, फ्रिज खोल कर पानी की बोतल निकाला और गटागट पीना शुरू कर दिया लेकिन इस दौरान भी वह अपनी नजरों से नौकरानी के बदन को निहारता रहा,,, जो कि नौकरानी कॉफी बनाने में व्यस्त थी लेकिन एक अनजान लड़के के सामने अपने आप को असहज महसूस कर रही थी इसलिए पीछे नजर घुमाकर शुभम की तरफ देख ले रहे थे और शुभम भी उसी को देख रहा था इसलिए दोनों की नजरें आपस में टकरा जा रही थी और नौकरानी एकदम से शर्मिंदा होकर शर्म के मारे अपनी नजरों को फेर ले रही थी उसके लिए यह समय बेहद असहज और अजीब सा था जिसका वह सामना करने में असमर्थ महसूस कर रही थी क्योंकि पहली बार इस तरह से कोई अनजान लड़का उसको घूर रहा था,,,। शुभम की नजर बार-बार नौकरानी के भारी भरकम पिछवाड़े पर चली जा रही थी जो कि हमेशा से शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी रही है,,,। और अपनी उम्र के 30 32 साल गुजार चुकी नौकरानी की आंखें अनुभवी थी वह इतना तो समझ ही जा रही थी कि शुभम उसके बदन के कौन से हिस्से को घूर कर देख रहा है यह अहसास होते ही की वह अनजान लड़का उसकी भारी-भरकम गांड को देख रहा है तो यह एहसास उसको अंदर तक उत्तेजित कर जा रहा था,,,। अनजान जवान नजरों को अपने कपड़ों के अंदर तक धंसता हुआ महसूस कर के वह पूरी तरह से उत्तेजना के मारे गनगना जा रही थी,,, शुभम जानबूझकर पानी का बोतल मुंह में लगाए उसी तरह से खड़े होकर नौकरानी के बदन के संपूर्ण भूगोल को अपनी नजरों से निहार रहा था,,,,। काफी देर से किचन के अंदर खामोशी छाई हुई थी और असहज होते हुए नौकरानी ही इस खामोशी को तोड़ते हुए बोली,,,।

वैसे छोटे बाबू यहां पर घूमने के लिए आए हो या कुछ काम है,,,।

घूमने के लिए ही आए हैं सुना है कि शिमला धरती का स्वर्ग है इसलिए यहां घूमने का मन बहुत कर रहा था,,,।

तुमने ठीक ही सुना है छोटे बाबू शिमला सबसे खूबसूरत शहर है,,,।

तुम तो यही की रहने वाली हो तो तुम्हें अच्छी तरह से मालूम होगा कि कौन सी जगह घूमने लायक है,,,।

वैसे तो छोटे बाबू इस मौसम में यहां पर सब जगह घूमने लायक है क्योंकि अभी बर्फ बारी जोरों की नहीं है इसलिए इस मौसम में पूरा शिमला बहुत खूबसूरत लगता है,,,।



( शुभम को नौकरानी का संपूर्ण वजूद बेहद आकर्षक लग रहा था वह अपने आप को उसके करीब जाने से रोक नहीं पाया और कदम बढ़ाता हुआ पानी पीते हुए उसके बेहद करीब पहुंच गया ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया,,,। और धीरे से बोला,,,।)

तुम साथ चलोगी हम लोगों को शिमला घुमाने,,,

( एक अनजान लड़के को अपने बेहद करीब पाकर वो एकदम से घबरा गई और उसके हाथ से चम्मच छूट कर नीचे गिर गई जिसे वह हड़बड़ाहट में उठाने के लिए नीचे झुक गई,,,, और जैसे ही नीचे वह झुकी ठीक उसके पीछे शुभम खड़ा था जो कि नौकरानी के भारी-भरकम पिछवाड़े को देखकर काफी उत्तेजित हो गया था और उसके पेंट में उत्तेजना के कारण तंबू सा बन गया था,,, चम्मच उठाने के लिए नौकरानी के झुकते ही उसके नितंबों का संपूर्ण घेराव सीधे जाकर शुभम के पेंट के अग्रभाग से स्पर्श हो गया,,,, नौकरानी से यह अनजाने में ही हुआ था उसकी बड़ी-बड़ी गांड ठीक चिकन के पेंट में बने तंबू से टकरा गई और यह मौका शुभम अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए जैसे ही उसके झुकने के कारण उसका भारी-भरकम गांड उसके लंड से टकराया उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद नौकरानी कि मानसर चिकनी कमर पर आ गए और शुभम इस अफरातफरी में इस मौके का लाभ उठाते हुए उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और जानबूझकर अपने पेंट में बने तंबू को आगे की तरफ खेलते हुए उसके नितंबों से एकदम से सटा दिया ऐसा करने से शुभम के पेंट में बने तंबू सीधे-सीधे नौकरानी की गांड के बीचो बीच उसकी मखमली बुर के द्वार पर टकरा गया,,,,, और चम्मच उठाते हुए नौकरानी को जैसे ही ले एहसास हुआ कि उसकी गांड के बीचो बीच कोई नुकीली सी चीज टकराई है वह एकदम से सकते में आ गई,,,, उसे समझते देर नहीं लगी कि वह नुकीली चीज क्या है क्योंकि जिस तरह से शुभम ने उसकी दोनों हाथों से कमर को थाम रखा था वह समझ गई कि उसकी गांड के बीचो-बीच टकराने वाली चीज कुछ और नहीं बल्कि उसका लंड है उसका पूरा वजूद गनगना गया,,,, उसका दिल धक से कर गया,,,, क्योंकि शुभम के लंड की ठोकर उसे अपनी बुर के मुख्य द्वार पर बेहद अच्छे से महसूस हुई थी,,,, ना जाने किस एहसास से नौकरानी भर चुकी थी कि दो 4 सेकंड तक वह चम्मच को नीचे जमीन पर ही पकड़ी रह गई,,,, और जब उसे शर्मिंदगी का अहसास हुआ तब तक देर हो चुकी थी वह चम्मच को उठाकर खड़ी होने लगी और शुभम भी तब तक अपना काम कर चुका था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि औरतों की कमजोरी क्या होती है और उसने उस नोकरानी की भी कमजोरी को पलभर में ही भाप लिया था,,,। शुभम को इतना एहसास तो हो गया था कि उसके लंड की ठोकर नौकरानी के कौन से अंग पर बराबर जाकर बैठा है,,,,। इसलिए वह भी नौकरानी को उठने में मदद करता हुआ बोला,,,।

सॉरी मैं माफी चाहता हूं अनजाने में ही हो गया,,,,( नौकरानी कुछ और बोल पाती इससे पहले ही शुभम एकदम से बात बदलते हुए बोला,,,।) तो क्या सोची हो तुमने चलोगी हम लोगों को शिमला घुमाने,,,,,

नहीं नहीं छोटे बाबू मैं नहीं जा पाऊंगी मुझे दिन भर बहुत काम रहता है और वैसे भी शीतल मैडम है वह अच्छी तरह से शिमला घूमी हुई है वह घुमा देंगी,,,,।
( नौकरानी शर्म के मारे शुभम से नज़रें नहीं मिला पा रही थी क्योंकि जो कुछ भी हुआ था वह बेहद शर्मनाक था लेकिन नौकरानी के संपूर्ण वजूद को हिला गया था,,, क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि जब पेंट में होने के बावजूद भी शुभम का लंड उसकी बुर के बीचो-बीच ठोकर मार रहा था तो अगर वह पेंट के बाहर आ जाएगा तो एकदम से गदर मचा देगा और इस अहसास से वह पूरी तरह से भर चुकी थी,,,,। शर्मसार भी में जा रही थी और काफी अपने अंदर उत्तेजना का संचार भी होता हुआ महसूस कर रही थी पलभर में ही उसे अपनी पेंटी गीली होती हुई महसूस होने लगी थी,,,, किचन में आए शुभम को काफी देर हो चुकी थी इसलिए वह ज्यादा देर तक खड़ा रहना मुनासिब नहीं समझा इसलिए पानी की बोतल को वापस फ्रीज में रखता हुआ बोला,,,।

वैसे कुछ भी हो तुम बहुत अच्छी हो,,,,, और बेहद खूबसूरत भी ,,,,,(इतना कहने के साथ अभी वह किचन से बाहर निकल गया नौकरानी शुभम को जाते हुए देखती रह गई क्योंकि किसे अच्छा नहीं लगता है 1 जवान लड़के के मुंह से इस उम्र के दौर पर अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना,,, नौकरानी बेहद प्रसन्न होते हुए तीन कप में कॉफ़ी उड़ेलने लगी,,,, और कॉफी को ट्रेन में लेकर किचन से बाहर आ गए जहां पर तीनों अपनी-अपनी जगह पर बैठकर गप्पे लड़ा रहे थे,,,, शुभम उस नौकरानी को बड़े गौर से देख रहा था,,,। नौकरानी सितारों निर्मला दोनों को कॉफी थमा कर कॉफी का ट्रे लेकर शुभम की तरफ बढ़ी,,,, वह मुस्कुराते हुए शुभम को कॉफी का कब पकड़ा नहीं लगे तो शुभम हाथ आगे बढ़ाकर कॉफी के कप को अपने हाथों में थाम लिया लेकिन जानबूझकर अपनी उंगलियों का स्पर्श उसकी नाजुक नाजुक उंगली ऊपर कराने लगा,, एक बार फिर से नौकरानी के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई,,, लेकिन तभी कॉफी पकड़ा ते हुए शर्म के मारे जब उसकी नजर से उनके चेहरे पर पड़ी तो उसकी नजरों के सिधान को देखकर वह पूरी तरह से छह गई और अपनी नजर नीची करके जब अपनी चूचियों की तरफ देखी तो ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ था जिसकी वजह से और झुकने की वजह से,,, उसकी आधी से ज्यादा चूचियां ब्लाउज में से नजर आ रही थी यह पल उस नौकरानी के लिए बेहद शर्मनाक था लेकिन शुभम के लिए तो यही एक मौका था वह नजर भर कर नौकरानी की गोरी गोरी बड़ी बड़ी चूचियों को घूर रहा था,,, और शुभम की प्यासी नजरों का सामना करते हुए मैं पुरानी पूरी तरह से अपने तन बदन में उत्तेजना का अनुभव कर रही थी और वह जल्दी से इस नजारे पर पर्दा डालते हुए खड़ी हो गई,,,। और जल्दी से शर्मा कर वापस किचन में चली गई,,, और शुभम गरमा गरम कॉफी की चुस्की लेते हुए अपनी मां और शीतल की बातों को सुनने लगा,,,, शीतल घूमने जाने का प्लान बना रही थी और बाहर ही खाना खाने का प्लान भी बन चुका था,,,,।

थोड़ी ही देर में नौकरानी ने झूठे कब को ले जा कर के उसे अच्छे से साफ करके और किचन के साथ-साथ पूरे घर में झाड़ू मारकर जाने के लिए तैयार हो गई,,,,।

शाम को आना है मैम साहब,,,,।

हां शांति शाम को थोड़ा जल्दी आ जाना और हम लोगों के लिए खाना भी बना देना हम लोग बाहर से कब लौटेंगे यह कोई तय नहीं है,,,।

ठीक है मैम साहब मैं आ जाऊंगी अब मैं जाती हूं,,,। ( इतना क्या करवा शुभम की तरफ देखने लगी जो कि खिड़की के करीब खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था और नौकरानी घर से बाहर चली गई लेकिन गेट तक पहुंचते-पहुंचते हुआ है दो-तीन बार पीछे मुड़कर शुभम की तरफ देख ले रही थी और शुभम भी जवाब मैं उसे देख कर मुस्कुरा रहा था,,,, अभी तक नौकरानी बस उसे देख रही थी लेकिन गेट के बाहर निकल कर वहां एक बार फिर से शुभम की तरफ देखी और मुस्कुरा दी,,, और वह वहां से चली गई उसकी मुस्कुराहट का मतलब शुभम अच्छी तरह से समझ गया था उसके लिए उसकी मुस्कुराहट ग्रीन सिगनल थी उसकी तरफ आगे बढ़ने के लिए,,,,। जिंदगी में पहली बार शुभम का झुकाव किसी नौकरानी की तरफ हुआ था इतनी उच्च स्तर की जबरदस्त बदन की मालकिन निर्मला और शीतल की खूबसूरती मैं पूरी तरह से अपने आप को लुभाने के बाद वह शिमला में आकर नौकरानी के गरमा गरम पिछवाड़े का दीवाना हो गया था,,,, शिमला के ठंडे मौसम में वह नौकरानी का दूध पीकर गर्म होना चाहता था,,,। जो कि अब ऐसा लग रहा था कि उसके लिए असंभव नहीं था इन सबसे बेखबर निर्मला और शीतल अपने ही मस्ती में बातों में लगे हुए थे उन्हें तो इस बात का आभास तक नहीं था कि किचन के अंदर नौकरानी और उसके बेटे के बीच क्या गुल खिल चुका था,,,,

लेकिन शुभम तो भंवरा था जिनका काम ही है खूबसूरत फूलों पर बैठकर उनका रस निचोड़ना,,,, इसलिए तो नौकरानी हुई तो क्या हुआ उसके पास भी वही सब अंग है जो कि निर्मला और शीतल के पास है नौकरानी की टांगों के बीच में भी उसे उतनी ही गर्मी महसूस होगी जितना कि शुभम को अपनी मां की टांगों के बीच महसूस होती है नौकरानी की चूचियां भी उसे उतना ही लाजवाब और उच्च स्तर का आनंद देंगे जितना के शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां और निर्मला के दशहरी आम देते हैं,,,, मौका आने पर नौकरानी भी अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी कसी हुई रसीली बुर को शुभम के सामने परोस दे कि जैसा कि निर्मला और शीतल दोनों अपनी टांगे खोल कर उसे अपने अंदर समा जाने के लिए आमंत्रित करते हैं,,,,। हर धक्के के साथ नौकरानी के मुंह से भी गरम सिसकारी की आवाज फुट पड़ेगी जैसा कि उसकी मां के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल जाती है,,,, आखिरकार नौकरानी भी तो एक औरत ही थी,,,। शुभम को उसके साथ मजे करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी और मौका मिलने पर वह उसके साथ जरूर संभोग रत हो जाएगा ऐसा हुआ मन में ठान लिया था,,,,।

तीनों तैयार हो चुके थे एक नए सफर के लिए शिमला की ठंडी सड़कों पर घूमने के लिए शीतल अच्छी तरह से शिमला की सड़कों से वाकिफ थे इसलिए पूरा कमान शीतल को ही सौंप दिया गया था शीतल भी स्टेरिंग संभालते हुए निर्मला और शुभम दोनों का कार के अंदर स्वागत की और दोनों निकल पड़े शिमला की सड़कों पर घूमने के लिए,,,।
 
शीतल स्टेरिंग संभाल चुकी थी,,,। शिमला की सड़कों से वह अच्छी तरह से वाकिफ थी इसलिए कहां जाना है उसे अच्छी तरह से पता था,,, निर्मला और उसका बेटा शुभम पीछे सीट पर बैठ गए,,, हल्की आसमानी रंग की साड़ी में निर्मला आसमान से उतरी हुई कोई परी लग रही थी जिसका गोरापन आसमानी साड़ी में और भी ज्यादा खील रहा था,,, और ऊपर से अपनी चुचियों के साइज के विरुद्ध वह ब्रा के साथ-साथ ब्लाउज की पहनी हुई थी जोकि उसकी मदमस्त गोलाकार चुचियों पर एकदम से कसी हुई थी दोनों फड़ फडाते हुए कबूतर ब्लाउज के कैद से आजाद होने के लिए पूरी कोशिश कर रहे थे,,, बार-बार शुभम का ध्यान अपनी मां की मदमस्त चूचियों पर चली जा रही थी जो कि,, ब्लाउज का ऊपरी बटन कुछ ज्यादा ही नीचे था और इसकी वजह से निर्मला की छुट्टियों के बीच की गहरी खाई बेहद लंबी और कुछ ज्यादा ही गहरी नजर आ रही थी जिस पर किसी की भी नजर पड़े तो वह अपने होश खो दे और यही शुभम के साथ हो रहा था,,, आगे जालीदार काली साड़ी में शीतल गाड़ी चला रहे थे जो कि एकदम गोरे बदन होने की वजह से काली साड़ी उसके खूबसूरत बदन पर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी शीतल भी एकदम क़यामत लग रही थी छोटी बाही का ब्लाउज पहनकर एकदम हुस्न की मल्लिका लग रही थी,,,।
दोनों के बदन से उठ रही मादक खुशबू पूरे कार में फैली हुई थी जिसकी वजह से शुभम के तन बदन में आग लगी हुई थी बहुत जल्द से जल्द दोनों के हुस्न के समुंदर में अपने आप को डुबोना चाहता था,,,,

शीतल सामने सड़क पर नजर रखे हुए थी और निर्मला कार के शीशे से बाहर का नजारा देख रही थी,,, और शुभम अपनी मां की मदद से जवानी में खोया हुआ था वह एक हाथ धीरे से अपनी मां की जान पर रखकर हल्के हल्के उसे साड़ी के ऊपर से ही सहला रहा था जिससे बाहर के नजारे का लुफ्त उठाते हुए अपने बेटे की हथेली की गर्मी को महसूस करके निर्मला को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।

शीतल मैं बहुत खुश हूं कि तुम्हारी वजह से आज मुझे शिमला घूमने को मिल रहा है मैं जिस तरह से शिमला के बारे में कल्पना करती आ रही थी उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत सिमला है,,,। यहां की सड़कें यहां के लोग यहां के घर यहां की होटल सब A1 है।

मुझे मालूम था कि शिमला तुम्हें भी अच्छा लगेगा इसीलिए तो मैं तुम्हें यहां लेकर आई हूं और शुभम तुम्हें कैसा लग रहा है शिमला,,,।

पूछो मत मुझे तो ऐसा लग रहा है कि मैं स्वर्ग में घूम रहा हूं सच शिमला कितना खूबसूरत होगा मैं भी कभी सपने में नहीं सोचा था,,,।
( तीनों बातें करने में मशगूल थे और शुभम बातों के साथ-साथ अपनी मां की जांघों से भी खेल रहा था जो कि धीरे-धीरे करके वह अपनी मां की साड़ी को जांघो तक उठा दिया था और उसकी नंगी चिकनी गोरी जांघों से खेल कर एकदम मस्त हुआ जा रहा था,,,,। अपनी मां की जांघों से खेलता हुआ शुभम खिड़की से बाहर भी झांक रहा था और बाहर विदेशी सैलानियों को देखकर अपने अंदर और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि वे लोग इतने छोटे छोटे कपड़े पहन कर इतनी ठंडी में भी बड़े आराम से घूम रहे थे,, उनके बदन पर छोटे-छोटे स्कर्ट उनकी मदमस्त गांड को ठीक से ढक भी नहीं पा रहे थे,,,। विदेशी सैलानियों को देखकर उनके बदन की गर्मी और ज्यादा बढ़ती जा रही थी। वह मन ही मन सोच रहा था कि काश उसकी मां भी इस तरह के कपड़े पहनती तो कितना मजा आता,,,। छोटे छोटे स्कर्ट में उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लगती,,,। यही सब कल्पना करके सुभम एकदम मस्त हुआ जा रहा था,,,। साथ ही धीरे-धीरे उसका हाथ जांघों के और ऊपर तक पहुंच रहा था और जैसे-जैसे शुभम का हाथ ऊपर की तरफ जा रहा था वैसे वैसे निर्मला के दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,, साथ में वह शीतल से बातें भी यह जा रही थी ताकि शीतल को बिल्कुल भी शक ना हो की उसके पीठ पीछे क्या हो रहा है,,,। निर्मला अपने बेटे की उंगलियों का जादू अच्छी तरह से जानती थी,, उसे इस बात का अनुभव अच्छी तरह से था कि उसका बेटा औरतों को किस तरह से कब कैसे और कहां संतुष्ट करना है या उसे अच्छी तरह से मालूम था तभी तो इस समय वह उसकी उंगलियों से उसकी जांघों के बीच खेलना शुरू कर दिया था,,, निर्मला बड़ी मुश्किल से अपनी सांसो को नियंत्रण में किए हुए थी,,,, शुभम की भी हालत खराब हुए जा रही थी क्योंकि पैंट के अंदर उसका लंड पूरी तरह से नियंत्रण के बाहर हुआ जा रहा था,,,। निर्मला की भी यही हालत थी क्योंकि वह धीरे से अपनी उंगली को उसकी पेंटी के अंदर सरका कर उसकी बुर की मखमली त्वचा से खेलना शुरू कर दिया था,,,, निर्मला के सब्र का बांध टूटता चला जा रहा था वह मन में यही सोचने लगी कि कल शीतल की आंखों के सामने एकदम बिंदास होकर जब कार में अपने बेटे के लंड पर चढ़कर चुदवाई तो उसे शर्म नहीं आ रही थी तो इस समय वह क्यों शर्म कर रही है,,,,। यही सोचकर वह शुभम की तरफ देखकर उसे आंख मारी,,, तब तक उत्तेजना बस शुभम अपनी बीच वाली मोदी को अपनी मां की बुर के द्वार के अंदर प्रवेश कर आ चुका था,,,,।

आहहहहहहह,,,,( हल्के से निर्मला के मुख्य में से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,।)

शीतल यह ठंडा मौसम हसीन वादियां देखकर मेरा मन बिल्कुल भी काबू में नहीं है मेरा मन कर रहा है कि मैं आज खुल कर,,,,,,

खुलकर क्या,,,,,,?( शीतल आश्चर्य के साथ बोली)

मेरा मन कर रहा है कि इस ठंडे मौसम में आज मैं खुलकर एकदम से,,,,,( इतना कहकर वह खामोश होकर मुस्कुराने लगी तो शीतल फिर से उससे बोली,,,।)

अब बोलेगी भी क्या करना चाहती है या पहेलियां बुझाती रहेगी,,,,।

यार मेरा दिल कर रहा है कि आज एकदम बेशर्म हो जाऊ,,।

यार इसमें बोलने की क्या जरूरत है अपनी बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है तो बेशर्म ही तो है,,,।

हां हूं,,,, अब इसमें मुझे कोई शर्म महसूस नहीं होती क्योंकि अपने बेटे का लंड लेकिन किसी और को तो नहीं लेती,,, तू साली रंडी बेशर्म हे जो मेरे बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है,,,।

मुझे भी शर्म नहीं आती निर्मला रानी तभी तो तुम दोनों को लेकर नहीं जहां शिमला में आई है ताकि एकदम बेशर्म होकर तेरे बेटे से तेरी आंखों के सामने उसके लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा सकुं।,,,,,आहहहहह,,, कितना मजा आता है जब तेरा बेटा अपना मोटा और लंबा लंड बुर में डालकर जोर जोर से धक्के लगाता है,,,,।
( अपनी मां और शीतल की गंदी गंदी बातें सुनकर शुभम पर तन बदन में आग लगे जा रही थी वह पूरी तरह से चुद वासा हो गया था वह अपनी उंगली को जोर-जोर से अपनी मां की बुर में पेल रहा था,,,,, निर्मला और शीतल दोनों को भी इस तरह की गंदी बातें और वह भी शुभम के सामने करने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी शीतल बड़े आराम से गाड़ी चला रही थी और इस तरह की बातों का लुफ्त ले रही थी,,। निर्मला के मन में क्या चल रहा है यह तो सुबह नहीं जानता था लेकिन दोनों की गरम बातें सुनकर वह पूरी तरह से गरमा चुका था,,,। वह अपनी मां की बुर में उंगली पेलते हुए यही सोच रहा था कि जब यह दोनों इतनी बेशर्म हो सकती है तो मुझे तो लाए ही इन दोनों ने यहां पर चुदवाने के लिए है तो भला मैं उस काम से पीछे क्यों हटु इसलिए वह हिम्मत दिखाते हुए बोला,,,।)

तुम दोनों की गरमा गरम बातें सुनकर मेरी हालत खराब हो गई मुझसे रहा नहीं जा रहा है तुम दोनों ने मेरा लंड खड़ा कर दिए हो,,,( इतना कहकर वह अपनी सीट पर से थोड़ा सा उठकर अपने पेंट की बटन खोल कर उसे नीचे सरकाने लगा,,, शीतल गाड़ी चलाते हुए रह-रहकर पीछे की तरफ नजर करके देख ले रही थी और जब से नहीं है देखी की शुभम अपनी पैंट उतार रहा है तो यह देखकर वह बोली,,।)

अरे तू करने क्या वाला है,,,?

मैं मम्मी को चोदने जा रहा हूं मेरा लंड मुझे पागल किए हुए हैं,,, (इतना कहते हुए वह अपनी पेंट को घुटनों तक उतार दिया और अपनी खड़े लंड को हाथ में लेकर हिलाते हुए)
और जब तक यह मम्मी की बुर में नहीं जाएगा तब तक शांत होने वाला नहीं है,,,। बस मम्मी अब थोड़ा सा अपना टांग फैला लो बाकी मैं सब संभाल लूंगा,,,,( निर्मला को समझ पाती इससे पहले ही शुभम पूरी तरह से अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर नीचे की तरफ हाथ ले गया और उसकी बड़ी बड़ी गांड अपनी हथेलियों में पकड़ कर उसे खींचकर थोड़ा सा कार की सीट के किनारे तक ले आया,,,, शीतल बार-बार पीछे की तरफ नजर करके यह सब देख ले रही थी,,। शुभम की हरकत देखकर पूरी तरह से मदहोश होने लगी क्योंकि सुबह की तरफ से इस तरह की हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद शीतल को नहीं थी वह आश्चर्य से दांतो तले उंगली दबा ली थी,,,, वह आश्चर्य से अभी यह सब देख रही थी कि कब तक शुभम अपने दोनों हाथों का सहारा लेकर अपनी मां की लाल रंग की पैंटी को उसकी मदमस्त चिकनी मोटी मोटी जांघों से नीचे की तरफ खींच कर उसे कमर के नीचे एकदम से नंगी कर दिया,,,।
यह गरमा गरम नजारा देखकर शीतल की बुर फुदकने लगी,,,,, एक पल की भी देरी किए बिना ही शुभम अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आकर अपना मोटा लंड अपनी मां की गीली बुर के अंदर उतार दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,,,,

आहहहहहहह,, बेहद अद्भुत और काम उत्तेजना से भरपूर अतुल्य नजारा था ऐसा नजारा दुर्लभ था देख पाना शीतल के तन बदन में आग लग जा रही थी वह कार की स्पीड उंगली करके बड़े आराम से कार को चला रही थी क्योंकि जिस तरह का दृश्य उसकी पीठ के पीछे चल रहा था वह दृश्य उसे कामोत्तेजना से भर दिया था उसने कार चलाने में उसका ध्यान नहीं लग पा रहा था,,,। शुभम की हिलती हुई कमर पर एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर उसके नितंबों को सहलाते हुए शीतल बोली,,।

पक्का मादरचोद है रे तू,,,, तू तो एकदम बेशर्म हो गया है,,,

शीतल रानी अगर बेशर्म नहीं होता तो इस तरह से अपनी मां को नहीं चोदता,,,( शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिलाता हुआ हांफते हुए बोला,,,,)

और जोर-जोर से पेल अपनी मां को बहुत गर्मी है इसकी बुर में,,,।

थोड़ी ही देर में शिमला की सड़कों पर दौड़ती हुई कार में गर्म सिसकारीर्यों की आवाज गूंजने लगी,,,, लेकिन यह आवाज कार के बाहर तक नहीं जा रही थी,,,। थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत हो गया शुभम और निर्मला दोनों अपने कपड़े दुरुस्त करके आराम से बैठ गए,,,,

थोड़ी ही देर में शीतल उन्हें स्केटिंग स्पोर्ट पर ले कर गई,,, वहां लोगों को बहुत मजा आया हालांकि उन तीनों में से किसी में स्केटिंग नहीं किया,,, शुभम की नजर इधर भी विदेशी सैलानियों पर थी उनके छोटे छोटे कपड़े में उनका कसा हुआ बदन उसे बहुत खूबसूरत लग रहा था,,, शीतल शुभम को उन विदेशी सैलानियों को देखते हुए देख ली तो वह शुभम से बोली,,।

क्या देख रहे हो शुभम,,,।

मैं यही देख रहा हूं कि यह विदेशी पर्यटक छोटे छोटे कपड़ों में कितनी खूबसूरत लगती हैं मैं यही चाहता हूं कि यहां पर तुम दोनों भी इसी तरह के छोटे-छोटे कपड़े पहनो कसम से बहुत मजा आएगा,,,।
( शुभम की यह बात सुनते ही निर्मला शर्म के मारे बोली,,।)

नहीं नहीं मुझसे यह बिल्कुल भी नहीं होगा मुझे इन छोटे कपड़ों में बहुत शर्म आएगी,,,।

साली एकदम नंगी होकर के अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लेती है तब शर्म नहीं आती छोटे छोटे कपड़े पहनने में शर्म आएगी,,( शीतल निर्मला को टोन मारते हुए बोली,,।)

नहीं शीतल तू कुछ भी कह लेकिन छोटे कपड़ों में अच्छा नहीं लगेगा,,,।

तू घबरा क्यों रही है निर्मला और क्यों अच्छा नहीं लगेगा तू इतनी खूबसूरत है इतनी खूबसूरत बदन की मालकिन है,,। बहुत अच्छा लगेगा देखना हम दोनों जब छोटे छोटे स्कर्ट पहनकर शुभम के सामने आएंगे ना तो उसके मुंह से लार टपकने लगेगी,,,,।

शीतल,,,,,( इतना कहकर निर्मला शीतल की तरफ देखने लगी,,,।)

मान जाना यार यहां शिमला में हम लोगों को कौन पहचानने वाला है,,,, जब इतना कुछ ट्राई कर रहे हैं तो छोटे कपड़े ट्राई करने में क्या जाता है,,,।

चल तू कहती है तो यह भी ट्राई कर लेते हैं,,,।
( निर्मला के मुंह से इतना सुनकर शीतल और शुभम दोनों मुस्कुराने लगे निर्मला भी छोटे कपड़े में अपने आपको देखना चाहती थी कि वह कैसी लगती है,,,। दिन ढल रहा था शाम होने वाली थी शीतल उन दोनों को एक अच्छे से रेस्टोरा में लेकर गई,, वहां पर नाश्ता करने के बाद तीनों एक अच्छे से मॉल में गए जहां पर शीतल और निर्मला के लिए छोटे-छोटे ड्रेस और स्कर्ट लेना था,,,। निर्मला को तो शर्म आ रही थी शीतल हीं अपने लिए और निर्मला के लिए अच्छे-अच्छे छोटे-छोटे ड्रेस पसंद करके पैक करवा ली,,, शुभम तो उंड्रेस को देखकर कल्पना कर रहा था कि उन छोटे-छोटे ड्रेस में उसकी मां और शीतल कैसी लगेंगी यह सोचकर ही ऊसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, शाम ढल चुकी थी तीनों घर आ चुके थे और नौकरानी उन लोगों के लिए खाना बना चुकी थी,,,।)
 
शुभम शीतल और निर्मला तीनों घर के अंदर कुर्सी पर बैठकर बातें कर रहे थे अंधेरा छाने लगा था,,, वातावरण में ठंडी का प्रमाण बढ़ता जा रहा था,,,, निर्मला और शीतल आपस में बातें कर रहे थे और शुभम की नजरें नौकरानी को ढूंढ रही थी जो कि अभी भी किचन में थी,,,। शुभम अभी नौकरानी के बारे में सोच ही रहा था कि नौकरानी किचन से बाहर आकर बोली,,।

मेम साहब मैंने खाना बना कर तैयार करती हूं अब मैं घर जा रही हूं,,,।

ठीक है जाओ,,,( निर्मला से बातें करते हुए नौकरानी की तरफ देख कर शीतल बोली,,, और शीतल से इजाजत लेकर वह घर से बाहर जाते समय निकले और शुभम के ऊपर डाली तो शुभम भी उसे देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकराई और नौकरानी के होठों पर मुस्कुराहट आ गई यह देखकर शुभम भी मुस्कुरा दिया,, नौकरानी दरवाजा खोल कर घर से बाहर जाने लगी और शुभम से रहा नहीं जा रहा था वह भी कुर्सी पर से उठ गया और दरवाजे की तरफ जाने लगा तो निर्मला बोली,,,)

तुम कहां जा रहे हो शुभम,,,।

कहीं नहीं मम्मी बस ऐसे ही बाहर का नजारा देखने जा रहा हूं,,,

बाहर ठंड ज्यादा है,,,।

तो क्या हुआ गरम कपड़ा तो पहना हूं ना बस 10 15 मिनट में आ जाऊंगा,,,,

ठीक है लेकिन ज्यादा दूर तक मत जाना,,,( निर्मला बोलती इससे पहले ही शीतल उसे चाहने की छूट दे दी,,, यह शीतल के तरफ से यह जताने की कोशिश थी कि शुभम पर भी उसका हक है,,, शीतल की बात सुनकर निर्मला कुछ नहीं बोली और शुभम घर से बाहर चला गया,,,। घर से बाहर निकलते ही वह गेट खोल कर सड़क की तरफ देखा तो नौकरानी कुछ दूरी पर नजर आई जो कि अपने घर की तरफ जा रही थी शुभम लगभग दौड़ता हुआ उसके करीब गया तो वह शुभम को अपने पास आता हुआ देखकर मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

मेरे पीछे पीछे क्या करने आए हो छोटे बाबू,,,।

कुछ नहीं बस तुमसे बातें करने का मन कर रहा था तो आ गया,,,,

मैं जितनो से भी मिली हूं तुम सबसे अलग हो,,,

ऐसा क्यों,,,,?( शुभम उसके कदमों के साथ कदम मिलाता हुआ सड़क पर चलते हुए बोला,,,।)

मैं ठहरी अनपढ़ गवार नौकरानी दूसरों के घर का काम करने वाली पर यहां पर सब देख रहे हो एक से बढ़कर एक अमीर लोग हैं जो कि मुझे इतना तो मुंह नहीं लगाते और ना ही मेरे पीछे-पीछे इस तरह से भागे चले आते हैं तुम्हारी बात कुछ और है तुम बहुत अच्छे लड़के हो,,,,
( शुभम तो नौकरानी के खूबसूरत चेहरे को देखता ही जा रहा था उसके खूबसूरत चेहरे को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह नौकरानी है,,,।)

तुम भी बहुत अच्छी हो तुमसे बातें करना मुझे अच्छा लगता है इसलिए मैं तुम्हारे पीछे पीछे भागा चला आया,,,।

लेकिन अब घर लौट जाओ कोई तुम्हें मेरे साथ देखेगा तो क्या सोचेगा,,,

कोई कुछ भी सोचे मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं तो वही करता हूं जो मेरे दिल में आता है,,,।
( धीरे-धीरे सड़क पर चलते हुए शुभम और वह नौकरानी ऐसी जगह पहुंच गए जहां पर सड़कों के दोनों किनारे पर घने घने पेड़ लगे हुए थे जिसके छांव में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था,,, और सारी सड़कें सुनसान थे बस दूर दूर स्ट्रीट लैंप जल रहा था और घने पेड़ होने की वजह से उसका उजाला नीचे सड़क पर नहीं पहुंच पा रहा था शुभम को यही मौका और यही जगह उचित लग रही थी,,,, शुभम की बात सुनकर नौकरानी बोली,,,,)

और तुम्हारे दिल में क्या आता है,,,।
( नौकरानी का भी दिल जोरों से धड़क रहा था दिन में जो हरकत शुभम ने उसके साथ किया था उसकी कसक अभी तक उसके बदन में कामुकता और उत्तेजना की सुईया चुभा रही रही थी एक नौजवान लड़के को इस तरह के एकांत में अपने साथ चलते हुए पाकर उसको भी कुछ-कुछ हो रहा था और नौकरानी के इस सवाल पर शुभम को जैसे एक मौका सा मिल गया और वह,,, नौकरानी का हाथ पकड़ कर तुरंत सड़क के किनारे घने पेड़ के पीछे ले गया,,,।)

अरे अरे छोटे बाबू यह क्या कर रहे हो कहां ले जा रहे हो मुझे,,,,( वह इतना कहती तब तक शुभम उसे एक बहुत ही घने मोटे पेड़ के पीछे ले गया जहां पर पूरी तरह से अंधेरा था,,, नौकरानी का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि जिस तरह से हुआ उसका हाथ पकड़कर पेड़ के पीछे की तरफ लाया था उसे देखते हुए नौकरानी के मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसे ऐसा लग रहा था कि जो काम उसने,,, कभी नहीं कि शायद आज वह अपने आप को रोक नहीं पाएंगी,,, शुभम नौकरानी को पेड़ के पीछे ले जाकर उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेलियों में भरते हुए कुछ सेकेंड तक उसके चेहरे की तरफ देखते हूए बोला,,।)

तुम जाना चाहती हो कि मेरे दिल में क्या आ रहा है,,,,
( शुभम के होंठ नौकरानी के होठों के इतने करीब थे कि नौकरानी शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उत्तेजना के मारे उसके पांव में कंपन हो रहा था और शुभम भी शायद उसकी तरफ से कुछ भी सुनना नहीं चाहता था और देखते ही देखते अपने हॉट को उसके दहकते होठ पर रखकर उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया,,,,, पल भर में ही नौकरानी भी उसका साथ देने लगी और शुभम अच्छी तरह से जानता था कि औरत की जिसमें से कैसे खेलना है वह उसके होठों को चूमता हुआ तुरंत अपनी हथेली को उसकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया,,,, हालांकि वह गर्म कपड़े पहने हुए थी लेकिन उसके बटन नहीं लगाई थी जिससे उसके ब्लाउज तक पहुंचने में शुभम को कोई भी दिक्कत नहीं हुई,,,।

आहहहहह,,, छोटे बाबू यह क्या कर रहे हो कोई देख लेगा,,,( शुभम के द्वारा अपनी गोल-गोल बड़ी चूचियों को दबाए जाने की वजह से नौकरानी के मुंह से दर्द भरी कराह की आवाज निकल गई थी,,,।)

यहां कोई नहीं आएगा इतनी देर से तो देख रहा हूं पूरी सड़क सुनसान है,,,,( इतना कहते हुए शुभम एक हाथ से उसकी चूची को दबाते हुए दूसरे हाथ से अपने पेंट की चैन खोलने लगा और देखते ही देखते अपने खड़े लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया अंधेरा होने की वजह से नौकरानी की नजर अब तक उसके लंड पर नहीं गई थी,,, इसलिए शुभम उसका हाथ पकड़ कर सीधे अपने लंड पर रख दिया जैसे ही नौकरानी की हथेली में,,, शुभम का मोटा तगड़ा लंड आया उसकी मोटाई और गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करके नौकरानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करते ही पूरी तरह से चौक गई और वह तुरंत अपना हाथ पीछे खींच ली,,,,। यह देखकर शुभम धीरे से उसके कान में बोला,,,।)

क्या हुआ शांति हाथ क्यों हटा ली अच्छा नहीं लगा क्या,,?

छोटे बाबू तुम्हारा बहुत मोटा है,,,।

तभी तो मजा आएगा शांति और तभी तुम्हारी उफान मारती जवानी का पानी तुम्हें तृप्त कर देगा,,,।
( नौकरानी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वास्तव में उसने जिंदगी में पहली बार इतने मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में ली थी और उस लंड को अपने हाथ में लेते ही समझ गई थी कि उसकी बुर के छेद की अपेक्षा शुभम का लंड की चुदाई मोटा था जिसे लेने में उसे दिक्कत आ सकती थी,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तैयार कर चुकी थी क्योंकि शुभम की कामुक हरकतों ने उसके तन बदन में आग लगा दी थी,,,। शुभम पागलों की तरह उसकी होठों को चूसते हुए उसकी चूची से खेल रहा था और इस बार नौकरानी खुद ही अपना हाथ आगे बढ़ाकर शुभंकर लंड को अपनी हथेली में दबा ली,,,। जैसे ही नौकरानी ने शुभम के लंड को अपनी हथेली में ली उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,।)

ससहहहह ,,,, छोटे बाबू,,,,
( शुभम पूरी तरह से चुदवासा हो चुका था,,, उससे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था और वैसे भी काफी समय हो गया था उसे घर से बाहर निकले इसलिए वह आनन-फानन में शांति के दोनों कंधों को पकड़कर उसे पेड़ की तरफ घुमा दिया,,,, अब शांति की गांड शुभम की तरफ थी शांति भी अब अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी शुभम से चुदवाने के लिए,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख ना ले क्योंकि यह सब कुछ आनन-फानन में हो रहा था,,, शुभम भी गहरी गहरी सांसे ले रहा था,,,। जिंदगी में पहली बार शुभम भी इस तरह से एकाएक किसी गैर औरत की चुदाई करने जा रहा था जो कि सब कुछ जल्दबाजी नहीं होता चला जा रहा था इसलिए शुभम भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था वह धीरे-धीरे शांति की साड़ी को ऊपर की तरफ करने लगा,,,,

शांति बिल्कुल भी ऐतराज नहीं चला रही थी पहली बार में ही वह किसी गैर जवान लड़के को अपना सब कुछ समर्पित करने जा रही थी और वह भी अपनी मर्जी से लेकिन इस मर्जी में शुभम की कामुक हरकतें शामिल थे जिसकी वजह से वह भी बस हो चुकी थी अपना तन उसे सौंपने के लिए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था सांसो की गति तेज होती जा रही थी पूरे बदन में कसमसाहट भरी हुई थी और देखते ही देखते शुभम ने शांति की साड़ी को पूरी तरह से कमर तक उठा दिया,,,, शुभम की आंखों के सामने आसमानी रंग की चड्डी में लिपटी हुई नौकरानी की मदमस्त गोरी गोरी गांड नजर आने लगी यह देख कर शुभम की आंखों में कामुकता भर गई वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और एक झटके में नौकरानी की चड्डी पकड़कर नीचे घुटनों तक कर दिया,,,, शुभम ने जैसे ही नौकरानी की चड्डी को घुटनों तक खींच कर कर दिया यह एहसास नौकरानी को पूरी तरह से मदहोशी के समंदर में डुबोने लगा उसकी बुरा अपने आप पानी फेंकने लगी,,,, क्योंकि नौकरानी के सामने शुभम की उम्र काफी कम थी और उसकी कामुक हरकतें संपूर्ण रुप से एक रंगीन किस्म के आदमी की तरह थी जिसकी वजह से नौकरानी शुभम की हरकतों से पूरी तरह से अपने आप को शुभम के सामने ध्वस्त होता हुआ महसूस कर रही थी,,, नौकरानी अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी जो कुछ भी कर रहा था शुभम कर रहा था,,,। नौकरानी की बड़ी-बड़ी तरबूज ऐसी गांड देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया और वह दो-चार चपत उसकी गांड पर लगा दिया,,,।

आहहहहहहह,,, क्या कर रहे हो छोटे बाबू,,,,?

कुछ नहीं मेरी रानी मेरी यह सबसे बड़ी कमजोरी है बड़ी बड़ी गांड पहली बार जब तुम्हें देखा तो तुमसे पहले मेरी नजर तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पर पड़ी थी जिसे देखते ही मेरे मुंह में पानी आ गया था,,, तुम बहुत खूबसूरत हो मेरी जान (इतना कहते हुए शुभम दोनों हाथों में उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगा,,, किसी ने पहली बार नौकरानी के लिए रानी शब्द का प्रयोग किया था इस संबोधन से नौकरानी पूरी तरह से गदगद हो गई शुभम की हरकतों और उसकी बात करने के अंदाज से वह पूरी तरह से उसकी कायल हो गई,,,। शुभम अब नौकरानी को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया था इसलिए ढेर सारा थूक अपनी हथेली पर लेकर वह उस थुक को नौकरानी की बुर पर लगाना शुरू कर दिया ताकि चिकनाहट पाकर उसका मोटा लंड उसकी बुर में आराम से चला जाए,,, नौकरानी का पूरा बदन कसमसा रहा था क्योंकि उसे मालूम था कि अब शुभम क्या करने वाला है देखते ही देखते शुभम एक हाथ से उसकी बड़ी बड़ी गांड के फांक को फैलाते हुए अपने लंड के सुपारी को जैसे ही नौकरानी ने अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस की,,, उसका पूरा बदन एकदम से गनगना गया,,,,,, और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

आहहहहहहह,,,,, छोटे बाबू,,,।

( शुभम भी नई बुर पाकर एक दम मस्त हो चुका था जल्द से जल्द वह अपने लंड को उसकी बुर में उतारकर चोदना चाहता था,,,, लेकिन नहीं पुर को इतनी आसानी से चोद पाना शायद उसके नसीब में नहीं था क्योंकि तभी सामने से सड़क से कार की हेडलाइट चमकने लगी जिसकी रोशनी सीधे पेड़ के ऊपर पड रही थी,,, और एकाएक गाड़ी की लाइट पड़ने से नौकरानी पूरी तरह से घबरा गई क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे इस हाल में देख ले वह तुरंत अपनी साड़ी पकड़ कर नीचे की तरफ करते हुए,,,, पेड़ की दूसरी तरफ से लगभग भागने लगी,,, घुटनों में फंसी हुई पेंटी भी ऊपर सरकाने का उसके पास समय नहीं था वह दूसरी तरफ से सड़क पर उतर जाना चाहती थी गाड़ी चली गई थी और शुभम उसे पीछे से आवाज देते हुए बोला,,,।

अरे गाड़ी चली गई है आ जाओ,,,।

( लेकिन शुभम की बात को अनसुना करके नौकरानी थोड़ी दूर जाकर वापस अपनी पेंटी को पहन ली और सड़क की दूसरी तरफ उतर कर अपने घर की तरफ चल दी शुभम अपना हाथ मलता रह गया अभी भी उसका लंड पेंट के बाहर झूल रहा था मानो अफसोस जता रहा हो,,,, शुभम को उस कार वाले पर बहुत गुस्सा आया वह मन ही मन उसे गाली देता हुआ वापस अपने लंड को पेंट में डालकर अपने घर की तरफ चल दिया,,,। घर पर पहुंचा तो,,, निर्मला उसे देख कर बोली,,,।)

कितनी देर लगा दिया कहां चला गया था तू,,,।

कुछ नहीं मम्मी बस ठंडक का मजा ले रहा था इतनी ठंडी में यहां सड़कों पर घूमना भी बहुत अच्छा लगता है,,,,।
( शुभम की बात सुनकर शीतल बोली)

तुम दोनों बातें करो तब तक में ऐसी चीज लेकर आती हूं जो तुम्हारे बदन में गर्मी भर देगा,,,

अरे ऐसी कौन सी चीज है,,,,( निर्मला आश्चर्य से बोली,,)

थोड़ा इंतजार तो करो,,,,( इतना कहकर शीतल किचन में चली गई,,, और थोड़ी देर बाद जब लौटी तो एक ट्रे में तीन गिलास और थैले में तीन बीयर की बोतल थी जिसे देखते ही शुभम के साथ-साथ निर्मला भी पूरी तरह से चौक गई,,,)

यह क्या है शीतल,,?( निर्मला आश्चर्य से बोली)

शिमला के ठंडे माहौल में गर्माहट देने का रामबाण इलाज,,,

यह शराब,,,,( शुभम भी-बीच में आश्चर्य से बोल पड़ा,,।)

शराब नहीं है मेरे राजा यह बीयर है यह एक तरह से हम तीनों के लिए दवा का काम करेगा क्योंकि जो काम हम तीनों करने वाले हैं उसके लिए हमें पूरी तरह से नशे में खो जाना है और वैसे इससे नशा नहीं होता बस शरीर में गर्माहट आ जाती है,,,,( शीतल टेबल पर बीयर की बोतल और ट्रे रख दी पर खुद कुर्सी पर बैठ गई,,,।)

फिर भी शीतल यह शराब है इसे मैं और मेरा बेटा नहीं पी सकते,,,

निर्मला रानी तो क्या मैं शराबी दिखती हूं लेकिन यहां शिमला के ठंड में यह पीना बेहद जरूरी है यहां सब लोग पीते हैं,,, से शरीर में गर्मी आ जाती है ठंड से बचने का यही एक उपाय है,,,

लेकिन तुम दोनों हो ना मेरे लिए ठंडी का जुगाड़,,,( शुभम चुटकी लेता हुआ बोला,,,। शुभम की यह बात सुनकर शीतल मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

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हम दोनों तो है ही राजा तेरे लिए लेकिन थोड़ा नशा होना भी जरूरी है,,,, क्या यार सीतल शिमला में आकर नाटक कर रही है कहां हमें हमेशा पीना है जब तक सिमला में तब तक इसका भी मजा ले लेते हैं,,,,। क्या बोलते हो शुभम,,,?

Shubham k lund se khelti Sheetal


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हां तुम सच कह रही हो शिमला में आकर मुझे तो यह पीने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन मम्मी से पूछे बिना उनकी इजाजत के बिना मैं इसे हाथ नहीं लगा सकता,,,।

वाह रे मार्त भक्ति,,,, एक तरफ अपनी मां के कपड़े उतार कर उसके चोदने में बिल्कुल भी देर नहीं करते और बीयर पीने में अपनी मां की इजाजत मांग रहे हो,,,,, क्या यार निर्मला एक बार ट्राई तो करो मजा ना आए तो कल से मत पीना,,,,।

चल तू कहती है तो मैं भी आज इसे ट्राई कर लेती हूं लेकिन अगर नशा हो गया तो तुम दोनों संभाल लेना,,,

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर मेरी छम्मक छल्लो कुछ नहीं होगा,,,, शुभम तो किचन में जाकर थोड़ी काजू के टुकड़े लेते आना तब और ज्यादा मजा आएगा,,,,।

( शीतल की बात सुनते ही शुभम किचन की तरफ चला गया शुभम को किचन में जाते ही निर्मला बोली,,,।)
Sheetal or Shubham


क्या यार शीतल यह सब करना जरूरी था,,,।

जरूरी था मेरी जान तू सोच अगर तेरा बेटा तेरे सामने मुझे चोदने में शर्म आने लगा या तू शर्माने लगी तो सारा मजा किरकिरा हो जाएगा,,, लेकिन बियर का सुरूर जब बदन पर चढ़ेगा तो सारी शर्मा है आप शरीर के बाहर जाती रहेगी तब देखना जुदाई ठुकाई में कितना मजा आता है,,,,

( शीतल निर्मला से यह कह रही थी कि शुभम किचन से काजू के टुकड़े लेकर बाहर आ गया,,,। तीनों टेबल के इर्द-गिर्द बैठ गई और शीतल खुद अपने हाथ से दोनों को एक एक बियर की बोतल खोल कर दे दी,,,, शुभम और निर्मला के लिए उन दोनों का पहला मौका था जब वह लोग जिंदगी में पहली बार शराब को हाथ लगा रहे थे,,,। शीतल भी कभी बियर को हाथ नहीं लगा दी थी लेकिन शिमला में आकर उसकी भी आदत पड़ गई थी क्योंकि कहीं जुगाड़ था उसके लिए ठंडी से रक्षण के लिए,,,, बीयर की बोतल निर्मला ने जैसे मुंह से लगाए एक घूंट मुंह में जाते हैी उसे बहुत कड़वा लगने लगा,,,,, वो तुरंत बीयर की बोतल अपने मुंह से हटा दी और बोली,,,।)
Sheestl ki jawani se khelta shubhsm


नहीं शीतल यह मुझसे बिल्कुल भी नहीं होगा,,,,।

अरे मेरी जान ऐसे नहीं थोड़ा काजू खा ले और धीरे-धीरे उसे भी बहुत मजा आएगा,,,,( इतना कहकर शीतल ट्रे में से काजू का टुकड़ा उठाकर निर्मला को थमाने लगी,,, शीतल के बताए अनुसार निर्मला थोड़ा काजू खा कर एक एक घूंट बीयर पीने लगी धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा और यही हाल है शुभम का भी हुआ उसे भी पहले तो इसका स्वाद बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा लेकिन धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा देखते ही देखते तीनों ने अपनी बीयर की बोतल खत्म कर दी,,, निर्मला और शुभम दोनों को हल्का हल्का नशा सा होने लगा था क्योंकि रह रहे कर उन्हें सबकुछ घूमता हुआ महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी सब कुछ कंट्रोल में था,,,,। शुभम अगर बियर ना भी पीता तो उसके बदन में वैसे भी शांति कीमत मस्त जवानी की गर्माहट अभी भी बरकरार थी वह नौकरानी की जवानी की गर्मी से ही शीतल और अपनी मां की बदन की गर्मी को पिघला देता,,, लेकिन शिमला आए थे तो शायद बियर भी जरूरी थी,,,, तीनों को मजा आ रहा था हल्का हल्का नशा तीनों को छाया हुआ था,,, शीतल पहले से नौकरानी को फोन करके बता दी थी कि डिनर में क्या बनाना है,,,, नौकरानी डिनर में फ्राई फिश बनाई थी,,,,

तीनों ने बड़े मजे से मछली का स्वाद लिया,,, शरीर में पूरी तरह से गर्माहट छा गई थी,,,,। डिनर टेबल पर ही शुभम अपनी मां और शीतल से बोला,,,।

मैं चाहता हूं कि जो कपड़े तुम दोनों ने मॉल में से खरीदे हो इस समय पहनकर मुझे दिखाओ मैं भी तो देखूं छोटे छोटे कपड़ों में तुम दोनों कितनी कयामत लगती हो,,,,
( शुभम की बात सुनते ही निर्मला मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

तेरी बात मान कर ही तो छोटे-छोटे कपड़े खरीदे हैं तुझे पहनकर जरूर दिखाएंगे,, मेरे राजा,,,,( निर्मला जिस तरह से मुस्कुराते हुए यह बात बोली थी शीतल समझ गई थी कि बीयर अपना काम कर रही है,,,। )
चल शीतल हम दोनों एक साथ अपने कपड़े बदल कर आते हैं,,,,( इतना कह कर शीतल और निर्मला दोनों एक कमरे में चले गए,,, शुभम ही बैठा रहा कुर्सी पर बैठकर अपने दोनों टांगों को एकदम सीधा फैलाते हुए उत्तेजना बस अपनी मां और शीतल के साथ-साथ उस नौकरानी के बारे में सोचता हुआ जो कि कुछ देर पहले ही उससे चुदते चुदते रह गई थी,,, दिनों के बारे में सोचता हुआ शुभम अपने पेंट के ऊपर से अपने लंड को मुट्ठी में भरकर सहलाने लगा,,,, वह कुर्सी पर से उठा और खिड़की के पास चला गया खिड़की का पर्दा हटा कर बाहर की तरफ देखा तो बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी बेहद खूबसूरत नजारा था,,, यह नजारा देखकर उसका मन एकदम प्रसन्न हो गया,,,, उसे आने वाले पल का बेसब्री से इंतजार था वह अपनी मां और शीतल को दोनों को छोटे छोटे कपड़ों में देखना चाहता था,,, और नौकरानी की अधूरी चुदाई की सारी कसर अपनी मां और शीतल पर उतारना चाहता था,,,,,।


कमरे में जाकर शीतल और निर्मला एक दूसरे से हंस-हंसकर बातें करते हुए अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई और जो कपड़े मॉल में से खरीद के लाए थे दोनों ने अपने बदन पर डाल ली,,, कमरे से बाहर आने से पहले वह दोनों आदम कद आईने में अपनी अपनी छवि देख कर मुस्कुराने लगे क्योंकि वाकई में वह दोनों कयामत लग रही थी,,,। शिमला की ठंडी का अब उन पर बिल्कुल भी असर नहीं हो रहा था जवानी की गर्मी और बीयर का हल्का नशा उन दोनों के बदन में गर्मी का संचार भर रहा था,,, वह दोनों मुस्कुराते हुए कमरे से बाहर आए और जैसे ही शुभम की नजर उन दोनों पर पड़ी उसके तो होश उड़ गए जवानी के जोश से वह पूरी तरह से भर गया अपनी मां और शीतल दोनों की गदराई जवानी को छोटे कपड़ों में देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,,।
 
शीतल के उफान मारती जवानी और अपनी मां की मदमस्त दूधिया बदन को छोटे से ड्रेस में देख कर शुभम पूरी तरह से मदहोश होने लगा,,, उसने तो सिर्फ कल्पना किया था कि छोटे कपड़े में उसकी मां और शीतल किस तरह के लगेंगे लेकिन आंखों के सामने जो दृश्य था वह कल्पना से भी परे था,,, कल्पना से भी कहीं ज्यादा खूबसूरत और उन्मादक,,,
अपनी मां और शीतल की मदमस्त जवानी देखकर शुभम कि आंखें चोंधिया गई थी,,,, छोटे-छोटे ड्रेस में अपनी मां की गोरी चिकनी मोटी मोटी जांघों को देखकर पलभर में ही शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,, शीतल कि उनमादकता,, छोटे कपड़ों में और ज्यादा बढ़ती जा रही थी बियर का सुरूर शीतल और निर्मला के साथ-साथ शुभम के तन बदन में भी बढ़ती जा रही थी,,,
शुभम की आंखों में दोनों की जवानी को पी जाने वाली खुमारी छाने लगी थी,,, दोनों दरवाजे पर खड़ी थी और शुभम खिड़की के करीब खड़ा था बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी ऐसे में वातावरण में ठंड का बढ़ जाना लाजमी था लेकिन बियर का असर कहो या शीतल और निर्मला कि गदराई जवानी की गर्मी ,,,,, घर के अंदर का तापमान गर्म होता जा रहा था तभी तो शिमला की ठंडी में भी दोनों छोटे कपड़ों में बिल्कुल सहज नजर आ रहे थे,,,,
शीतल निर्मला एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुराए और शुभम की तरफ देखते हुए दोनों एक साथ बोली,.

हम दोनों कैसी लग रही है छोटे कपड़ों में,,,

कसम से तुम दोनों एकदम माल लग रहे हो मैं तो कभी सोचा भी नहीं था कि छोटे कपड़ों में तुम दोनों इतनी खूबसूरत और सेक्सी लगोगी,,,,

क्या तुम सच कह रहा है या हम दोनों का मन रखने के लिए बोल रहा है,,,( निर्मला शुभम से बोली।)

मेरी बात का अगर तुम दोनों को विश्वास नहीं है तो एक बार सड़क पर निकल जाओ इतनी बर्फ बारी में भी पूरा मोहल्ला तुम दोनों के पीछे पीछे आएगा,,,
( सुबह की बात सुनकर शीतल और निर्मला दोनों हंसने लगे,,,)

तो आज की रात हम दोनों की जवानी तेरे नाम,,,

मैं बेकरार हूं तुम दोनों की जवानी को अपने लंड से पीने के लिए,,,,( इतना कहते हुए शुभम उन दोनों के करीब आ गया और दोनों को अपने एक-एक हाथों में पकड़ कर कभी निर्मला के गालों को तो कभी शीतल के गालों को अपने होठों की गर्मी देने लगा,,,,, शुभम के चुंबन से दोनों का उन्माद बढ़ने लगा था देखते ही देखते हल्की-हल्की चुंबन जबरदस्त किस में बदलने लगी,,, शुभम अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होंठों में भर कर उसे चूसना शुरू कर दिया,,,, शीतल की गर्म सांसे पलभर में ही कमरे को और ज्यादा गर्मी देने लगी,,, वह भी शुभम की गर्दन पर अपनी लाल-लाल होठों का निशान छोड़ते हुए उसे चूमने लगी और साथ ही अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही उसकी खड़े लंड को जोर जोर से दबाने लगी,,,,,।
शुभम के बाएं हाथ में शीतल तो दाएं हाथ में निर्मला थी,,, शुभम को अपनी किस्मत पर गर्व हो रहा था शायद ही ऐसी किसी की किस्मत होगी जिसके दोनों हाथों में हाई क्लास की जबरदस्त खूबसूरत औरतें हो और किस्मत तो शुभम की कुछ ज्यादा ही जोर मार रही थी क्योंकि दोनों पेशे से टीचर थी पर उनमें से एक उसकी खुद की बात है जिसकी मदहोश कर देने वाली जवानी देख कर ना जाने कितनों का पानी निकल जाता था,,,, ऐसी खूबसूरत औरत से वह खुद उसे अपनी बाहों में लेकर खेल रहा था,,,, शुभम अपनी मां के होठों को चूमता हुआ दाएं हाथ से उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबा रहा था और बाएं हाथ से शीतल की चूची से खेल रहा था एक साथ उसके दोनों हाथों में अलग-अलग किस्म के पके हुए आम थे जिनका रस बेहद अतुल्य और स्वादिष्ट था,,, और ऐसा मधुर रस पीना किस्मत वालों के नसीब में ही होता है,,,,, शुभम अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां के लाल लाल होठों में एक अजीब किस्म का नशा मिलता था,,, जिसे पीकर उसे ताकत मिलती थी,,, वह ताकत शुभम पूरी तरह से अपनी मां की चुदाई में खर्च कर देता था,,,, कुछ देर तक अपनी मां के लाल लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम दूसरी तरफ तड़प रही शीतल के देखते होठों पर अपने होंठ रख कर उसे पीना शुरू कर दिया,,,, तीनों बीयर और जवानी के नशे में पूरी तरह से लिप्त हो चुके थे जिन्हें शिमला की ठंडी बेअसर लग रही थी,,, वैसे सच्चाई यही थी कि शिमला की ठंड बेहद जालिम थी खास करके बाहर से आने वाले लोगों के लिए,,,, लेकिन यह भी सच था कि बियर और मदहोश जवानी का चादर ओढ़े शीतल और निर्मला के तन बदन में से गर्मी फूट रही थी जो कि पूरे कमरे के वातावरण को अपनी गर्माहट बख्श रहा था,,,, तभी तो तीनों एकदम मस्त होकर एक दूसरे की जवानी में पूरी तरह से अपने आप को डुबोने लगे थे,,,

ओहहहह,,,, शुभम मेरे राजा तेरे बिना यह जिंदगी और जवानी दोनों अधूरी है,,,( निर्मला अपनी गोरे-गोरे गाल को अपने बेटे के गाल पर रगड़ ते हुए बोली,,,,। और शीतल अपने मद भरे होठों का स्वाद शुभम को चखा रही थी,,,, निर्मला के तन बदन में मदहोशी कुछ ज्यादा ही छाई हुई थी,,, वह अपने बेटे के गाल पर अपने गोरे गोरे गाल को रगड़ ते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के पेंट की बटन को खोल रही थी,,,,, उसमें बना तंबू निर्मला के होश उड़ा रहा था वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा दोनों की बुर की हालत खराब कर देगा,,,, देखते ही देखते निर्मला खुद अपने हाथों से अपने बेटे की पेंट की बटन को खोल कर उसकी चैन खोलने लगी और एक हाथ से उसके लंड को पेंट से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी लेकिन शुभम का लंड को ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिसकी वजह से वह इतनी आसानी से पेंट से बाहर आने से इंकार कर दे रहा था,,,, तो निर्मला से रहा नहीं गया और वह नीचे अपने घुटनों के बल बैठ कर अपने बेटे की पेंट को और नीचे की तरफ खींचने लगी देखते ही देखते शुभम की पेंट उसके पैरों में गिर गई निर्मला अपने घुटनों के बल बैठी हुई थी और शीतल शुभम के होठों को चूसते हुए अपनी नजरों को नीचे करके निर्मला की हरकत को देख रही थी,,,, शुभम अपने पीछे रखे हुए टेबल का सहारा लेकर आराम से खड़ा था,,,,, निर्मला और शुभम के लंड के बीच अभी भी उसका अंडरवियर बाधा बना हुआ था लेकिन निर्मला के तन बदन में इस कदर खुमारी छाई हुई थी कि अपने बेटे के अंडरवियर को उतारने का भी समय उसके पास नहीं था इसलिए वह अंडरवियर के आगे वाले खुले भाग में से अपने बेटे के लंड को बाहर निकालकर उसके पूरे वजूद को अपनी प्यासी आंखों से देखने लगी,,,,
शीतल के तन बदन में यह देखकर आग लग रही थी कि एक बार किस तरह से अपने ही बेटे के लंड से प्यासी औरत की तरह खेल रही है,,, इस तरह के नजारे के बारे में शीतल कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह के दृश्य को वह अपनी आंखों से देख पाएगी लेकिन उसकी आंखों के सामने सब कुछ हकीकत होता जा रहा था मां बेटे के बीच के संबंध को लेकर वह केवल कल्पना ही करती थी लेकिन शुभम और निर्मला ने उसकी कल्पना को संपूर्ण रूप से साकार कर दिया था वरना वह जिंदगी में इतने पवित्र रिश्तो के बीच में इस तरह की कामुकता और उन्मादकता नहीं देख पाती,,,, एक तरह से शीतल उन दोनों मां बेटी की शुक्रगुजार थे जो कि उन दोनों से ही उसे अपनी जिंदगी में रंगीनता नजर आ रही थी जिंदगी जीने की चाह नजर आ रही थी वरना वह भी कल्पना की दुनिया में अपने आप को पूरी तरह से डूबो ले गई थी,,,।
अगर उसे शुभम ना मिला होता तो शायद उसकी जिंदगी में इस पल जो हो रहा है वह कभी नहीं हो पाता वह सिर्फ सपने और कल्पना में ही इस तरह के दृश्य को जी पाती,,, तभी तो वह भगवान को पूरी तरह से शुक्रगुजार मानती है कि अच्छा ही हुआ था कि उस दिन खड़ी दुपहरी में उसे निर्मला के घर भेज दिए थे और वह अपनी आंखों से मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को अपनी आंखों से तार तार होता है वह देख ली थी और वही नजारे की वजह से ही आज उसे यह खूबसूरत मदहोश कर देने वाली जिंदगी जीने का मौका मिल रहा था,,,,

आहहहहहहह,,,,, क्या बात है तेरा लंड तो आज कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है,,,,( निर्मला अपने बेटे के लंड को जड़ से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए बोली,,,।)

तुझे छोटे कपड़ों में और तेरी मदमस्त जवानी देख कर मेरा लंड भी बहुत खुश हो गया है मम्मी,, इसलिए खुशी के मारे कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो गया है और देखना जब यह तेरी बुर में जाएगा ना तुझे जन्नत के मजे लेगा,,,,,

( दोनों मां बेटों की कामुकता भरी बातें सुनकर शीतल मदहोश हो रही थी वह भी अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के लंड को पकड़ते हुए बोली,,,।)

अपनी मां की बुर में ही अपना रस पूरा मत निकाल देना मैं भी तुम्हारे लंड की प्यासी हूं,,,,।

मेरी जान तुम दोनों का ही ख्याल रखने के लिए तो मैं यहां तुम दोनों के साथ आया हूं,,,( शुभम शीतल के होठों को चूमता हुआ बोला,,,। तीनों अपने-अपने तरीके से आनंद ले रहे थे शुभम टेबल से अपने नितंबों को सटाकर खड़ा था,,,। शीतल बार-बार कभी उसके गाल को तो कभी उसको होठों को चूम रही थी और एक हाथ से उसके लंड को पकड़ कर हिला रही थी और शुभम की मां नीचे घुटनों के बल बैठी हुई थी वह अपनी बेटे के लंड को जड़ से पकड़ कर ऊपर नीचे करके उसके संपूर्ण भूगोल को अपनी आंखों से देख रही थी शुभम के मन में यह चल रहा था कि उसकी मां उसके लंड को मुंह में लेकर उसे लॉलीपॉप की तरह यूज कर उसे मस्त कर दें और शायद यही ख्याल निर्मला के मन में भी था लेकिन वह कुछ देर तक अपने बेटे के लैंड से खेलना चाहती थी वैसे भी कोई जल्दबाजी नहीं थी शिमला में यही करने के लिए तो तीनों आए थे इसलिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी निर्मला नहीं कर रही थी,,,। निर्मला भी कभी सपने में नहीं सोची थी कि वह किसी गैर औरत के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ चुदाई का खेल खेलेगी वह कभी नहीं सोची थी कि वह जिंदगी में इतनी बेशर्म हो जाएगी कि किसी दूसरी औरत की आंखों के सामने अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिलाएगी उसे चूसेगी अपनी बुर में लेगी,,,, लेकिन उसका यह ना सोचना आज पूरी तरह से हकीकत होकर उसकी आंखों के सामने था,,,।

शिमला में निर्मला को किसी भी प्रकार का डर नहीं था किसी के द्वारा पकड़े जाने का भय बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि शिमला में उसे और उसके बेटे के साथ साथ शीतल को भी शायद कोई नहीं जानता था,,, वह इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थी कि अगर इस तरह का कार्य करते हुए अगर किसी ने उन तीनों को देख भी लिया तो उनका कुछ बीगडने वाला नहीं था,,,,,।

तभी तो तीनों निश्चिंत होकर जवानी का मजा लूट रहे थे शीतल को अपनी हथेली में सुगंध का लंड कुछ ज्यादा मोटा लग रहा था और इस बात का एहसास उसे उसकी बुर को फुदकने के लिए मजबूर कर दिया था,,,,, शुभम के लंड को पकड़ते ही सीतल को इस बात का एहसास हो गया था कि आज की रात शुभम उसकी जवानी को पूरी तरह से निचोड़ डालेगा,,,, निर्मला अपने घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे के लंड से खेलते हुए उसे चूसने की प्यास को बढ़ा दी जा रही थी और उसे रहा नहीं गया और वह अपने प्यार से होठों को आगे की तरफ लाकर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अपने होठों पर रगड़ने लगी,,,,,।

आहहहहहहह,,, कितनी गर्मी है रे तेरे लंड में,,,,

मेरे लंड से ज्यादा गर्मी तो तेरी बुर में होगी मेरी रानी,,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपना एक हाथ अपनी मां के सर पर रख कर उसे हल्का सा दबाव देते हुए अपने लंड की तरफ खींचने लगा जो कि यह इशारा था उसकी मां को कि शुभम भी चाहता है कि वह उसके लंड को मुंह में लेकर चूसे,,, शुभम की हरकत और अधीरता को देखकर निर्मला भी अपना धैर्य खो बैठी और तुरंत अपने बेटे के मोटे सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,
मदहोशी के आलम में शुभम की आंखें बंद होने लगी शीतल अपनी आंखों से एक मां को उसके ही बेटे के लंड को चूसते हुए देख रही थी जो कि यह दृश्य देखकर वह पूरी तरह से कामोतेजीत हो गई,,, उसका भी दिल करने लगा कि वह भी शुभम के लंड को मुंह में लेकर चूसे,,, इसलिए वह भी नीचे अपने घुटनों के बल बैठने जा ही रही थी कि तभी,,, बाहर से सड़क पर गुजर रही गाड़ी का होरन की आवाज सुनकर शीतल की नजर दरवाजे की तरफ गई तो देखी की खिड़की के सारे पर्दे खुले हुए हैं,,,। वह तुरंत खड़ी होते हुए बोली,,,।

क्या यार पर्दे तो लगा लिए होते फिर वही गलती कर रहे हो,,,
( शीतल की बातें सुनकर निर्मला भी चौक गई और तुरंत अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकालकर खिड़की की तरफ देखने लगी तो वाकई में खिड़की पूरी तरह से खुली हुई थी बाहर का नजारा एकदम साफ नजर आ रहा था,,, वह भी खड़ी हो गई,,,। वह भी खिड़की की तरफ जाने लगी तब तक शीतल खिड़की गलत पहुंच चुकी थी और वह पर्दे लगाते हुए बोली,,,।)
अगर कोई देख लेगा तो वह भी भागीदारी मांगने के लिए अंदर आ जाएगा,,,।

तो क्या हुआ शीतल रानी हम दोनों उसे भी अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लेंगे,,,
( निर्मला की बात सुनकर शीतल हंसते हुए बोली,,,।)

हां वह तो मालूम ही है तेरी गर्म जवानी किसी को भी पिघलाने के लिए काफी है,,,,। अब चल यहां,, नहीं बेडरूम में चलते हैं वही जाकर मजा करेंगे,,,,।
( शीतल इतना कहकर सीढ़ियां चढ़ने लगी,,,, और निर्मला अपने बेटे की तरफ देखी तो अभी भी शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा था और वह अपनी पेंट को अपनी टांगों में से निकाल कर नीचे से एकदम नंगा हो गया था,,, यह देखकर निर्मला मुस्कुराते हुए अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ लिया और उसका सहारा लेते हुए आगे-आगे सीढ़ियां चढ़ने लगी और शुभम अपनी मां के हाथ में लंड थमाए हुए उसके पीछे पीछे चलने लगा,,,,।
 
निर्मला अपनी कामुकता भरी हरकत की वजह से एकदम रंडी पन के एहसास से भरी जा रही थी क्योंकि इस समय वह अपने बेटे के लंड को किसी स्टिक की तरह पकड़ कर सीढ़ियां चल रही थी और शुभम को भी अपनी मां की इस हरकत पर पूरी तरह से उत्तेजना की आगोश में शमाता हुआ महसूस कर रहा था शीतल बार-बार पीछे की तरफ नजरें करके सीढ़ियां चढ़ते हुए मां बेटों की हरकत को देख रही थी और मन ही मन खुश भी हो रही थी छोटे-छोटे ड्रेस में शीतल और निर्मला सीढ़ियां चढ़ते हुए बेहद खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी शुभम तो अपनी प्यासी नजरों से दोनों की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करके धन्य हो रहा था,,,।
इस समय तीनों को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे किसी पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही हो बेहद अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा था,,,। सामान्य जीवन में एक औरत और आदमी के लिए शायद ही यह दृश्य देखने को मिले, लगभग इस तरह का दृश्य सामान्य जीवन में एकदम दुर्लभ ही था,, एक जवान लड़के के हाथों में दो दो गदराई जवानी अंगड़ाई ले रही हो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है शुभम की किस्मत वाकई में बड़ी तेज थी क्योंकि जब से जवान होना शुरू हुआ था तब से लेकर अब तक वह ना जाने कितनी रसीली बुर का स्वाद ले चुका था और तो और जवान गदराई औरत अपने आप ही उसकी झोली में आकर गिर जाती थी,,,,

निर्मला अपने बेटे के लंड को पकड़कर सीढ़ियां चढ़ते हुए उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

आज देखना है कि हम दोनों की गरम जवानी का रस तू अपने मोटे लंड से नीचोड़ता है या हम दोनों की रसीली बुर तेरे लंड के छक्के छुड़ा देगी,,,

मुझ को चैलेंज मत करना मम्मी मुझे अपने मोटे लंड पर पूरा विश्वास है एक बार जब तुम दोनों की बुर में घुसेगा ना तो तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देगा,,,,

यह तो वक्त ही बताएगा मेरे राजा (शीतल शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोली)

मुझे भी उस वक्त का बेसब्री से इंतजार है (ऐसा कहते हुए शुभम अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर से चपत लगाते हुए) तुम दोनों रंडियों की बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरी हालत खराब हो रही है मुझसे रहा नहीं जा रहा है जल्दी चलो बेडरूम में,,,,।

मादरचोद इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरी रात पड़ी है (निर्मला भी अपने बेटे को गंदी गाली देते हुए बोली।)

रात तो पूरी पड़ी है भोंसड़ी की लेकिन तेरे भोसड़े ने मेरे लंड की हालत खराब कर दी है इसलिए कह रहा हूं चल जल्दी से बेडरूम में मुझे अपने लंड को तेरी बुर में डालकर चोदना है,,,,।

निर्मला तेरा बेटा तो एकदम से उतावला हो गया भोसड़ी का पता नहीं पूरी रात टिक पाएगा कि नहीं,,,,

साली रंडी तुम दोनों को एक साथ चोदुगा ना फिर भी रात कम पड़ जाएगी तुम दोनों ही थक कर सो जाओगे लेकिन मेरा लंड वैसा का वैसा टन टन आकर खड़ा रहेगा,,,,

देखना कहीं ऐसा ना हो जाए कि जो गरजता है बरसता नहीं नहीं तो तू ही थक कर बिस्तर पर पड़ा रहेगा और हम दोनों तेरे लंड को खड़ा करने में पूरी रात गवा देंगे,,,।

तेरी बुर में कुछ ज्यादा ही आग लगी है साली तेरी बुर को सबसे पहले ठंडा करूंगा,,,।

( तीनों के ऊपर मत मस्त जवानी और बियर का सुरूर छाया हुआ था जिसकी वजह से तीनों एक दूसरे को गंदी गंदी गालियां देते हुए बातें कर रहे थे और इस तरह की बातें करने में उन्हें बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह तीनों इस तरह की बातें करके काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहे थे देखते ही देखते कमरा दिया गया शीतल कमरा खोल कर उन दोनों का स्वागत की निर्मला अभी भी अपने बेटे का लंड को पकड़ कर लगभग खींचते हुए कमरे में ले गई,,,।

धीरे से मादरचोद कहीं टूट गया ना तो दोनों अपनी बुर मसलते रह जाना,,,,

तेरी टूटे हुए लंड से भी चुदने में मजा आएगा,,,,( आंख मारते हुए निर्मला अपने बेटे से बोली तो शुभम अपनी मां का हाथ पकड़कर अपनी तरफ एकदम से खींचकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और बोला,,,।)

साली मादरचोद तेरी जवानी कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही है (और इतना कहते हुए शुभम तुरंत अपने होंठ को अपनी मां के होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया.... निर्मला भी अपनी बेटी के लंड को पकड़े पकड़े काफी गरमा गई थी वह भी कसके अपनी बाहों में अपने बेटे को भरते हुए उसका साथ देने लगी शुभम का लंड उसकी जांघों के बीच रगड़ खा रहा था जिससे निर्मला को अद्भुत सुख का अनुभव हो रहा था,,,। शीतल भी कहां पीछे रहने वाली थी वह अपने हाथों से ही अपने छोटे से ड्रेस को निकाल फेंकी देश के अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसकी नंगी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह इधर-उधर हिलने डुलने लगी,, पर वह तुरंत शुभम के पीछे उसकी पीठ से चिपक गई शुभम को शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां का एहसास उसका स्पर्श अपनी पीठ पर होते ही वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगा शीतल जानबूझकर अपनी चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी हालांकि यह एहसास शुभम को थोड़ा कम लग रहा था इसलिए वह अपने हाथ से अपनी शर्ट के बटन खोलने लगा और देखते ही देखते वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया उसकी नंगी पीठ पर अपनी नंगी चूचियों को रगड़ कर शीतल बेहद उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, निर्मला अपने बेटे के होठों का रस पीते हुए विकास नीचे की तरफ ले जाकर उसके लंड को पकड़ लिया और अपनी टांगों के बीच अपनी बुर वाली जगह पर उसके लंड के सुपाड़े को रगड़ना शुरू कर दी,,,,

आहहहहह,,, सुभम,,,,, ऊफफफ,,,,,,

अंदर लेने का मन कर रहा है ना मम्मी,,,

हारे बहुत मन कर रहा है कि तेरा लंड मेरी बुर की गहराई में अंदर तक जाकर छू जाए,,,,,,

ऐसा ही होगा मम्मी,,,,( ऐसा कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के छोटे से ड्रेस पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा और उसकी मां अपने बेटे का साथ देते हुए अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दी शुभम ने तुरंत अपनी मां के छोटे से ड्रेस को निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, निर्मला ब्रा पेंटी दोनों पहनी हुई थी,,, लेकिन इतनी जल्दी सुबह मैं अपनी मां के बदन पर से उसकी आखरी वस्त्र को उतारना नहीं चाहता था इसलिए वह अपनी मां को एक बार फिर से अपनी बाहों में लेकर उसे चूमने लगा,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से निर्मला की सिसकारी छूट रही थी और शीतल अपनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथ में लेकर उसे शुभम की नंगी पीठ पर रगड़ रही थी शीतल संपूर्ण रूप से एकदम नंगी थी,,, छोटे से ड्रेस के अंदर उसने पैंटी भी नहीं पहनी हुई थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि बेडरूम में चल कर उसे उतारना ही है इसलिए पहले से ही वह पैंटी को उतार फेंकी थी,,,

बेडरूम का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, बेडरूम के अंदर की खिड़कियों के पर्दे लगे हुए नहीं थे लेकिन खिड़की के शीशे बंद थे,,,, लेकिन ऊंचाई पर होने की वजह से किसी से देखे जाने का डर बिल्कुल भी नहीं था इसलिए तीनों निश्चिंत थे,,,, बेडरूम के बीचो बीच किंग साइज का बेड लगा हुआ था जिस पर तीनों आराम से सो सकते थे और जिस दिन आए थे वह तीनों इसी बेड पर सोए भी थे,,,

ओहह,,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझसे प्यार करें मुझे अपनी बाहों में ले ले मेरे रस निचोड़ दे औहहह शुभम,,,, मेरे राजा,,,,।

ऐसा ही होगा मेरी रानी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो आज की रात में तुझे ऐसा सुख दूंगा तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी मां के कंधों को पकड़कर इतनी जोर से दूसरी तरफ घुमाया की पलभर में ही निर्मला की पीठ शुभम की तरफ हो गई लेकिन निर्मला गिरते-गिरते बची थी तब तक शुभम उसे अपनी बाहों में लेकर अपने बदन से सदा लिया था,,,, पर ऐसा करने की वजह से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड शुभम के लंड से एकदम से टकरा गई थी,,,, और सुबह में उत्तेजित होता हुआ तुरंत अपनी दोनों हथेलियों को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी जनों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम से सट गई और शुभम का लंड उसकी गांड की बीच की दरार से छटक ते हुए सीधा नीचे की तरफ आ गया जहां से उसका सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होने लगी,,,,

ओहहहह, मां,,,,,,,( शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की बुर से स्पर्श होते ही निर्मला के मुख से आह निकल गई,,,। शुभम पागलों की तरह ब्रा के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, मीठे-मीठे दर्द के कारण निर्मला का पूरा बदन कसमसा रहा था और वह हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी,,,, दोनों मां बेटों की कामुक हरकतों को देखकर शीतल भी पूरी तरह से मस्ती में आ गई थी,,, और वह शुभम के पीछे ही धीरे-धीरे उसके पीठ को चूमते हुए नीचे की तरफ बैठने लगी शीतल की आंखों के सामने शुभम की गांड थी और से देखते हैं शीतल अपने होठों को उसकी गांड पर रखकर चूमना शुरु कर दी यह शुभम के लिए पहला मौका था जब कोई औरत उसके नितंबों को अपने होठों से चूम रही थी,,, जिसकी वजह से शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और अपनी पूरी उत्तेजना अपनी मां की बड़ी-बड़ी सूचियों पर उतारने लगा,,,, शीतल अपने होठों से अपना कमाल दिखा रही थी और शुभम अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उस का रस निकालने में लगा था लगातार दर्द के मारे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी निकल रही थी और शुभम उसकी नंगी पीठ को चूमते हुए अपने दांतो से उसकी ब्रा की पट्टी को पकड़ कर खींच दिया,,,, देखते ही देखते निर्मला के ब्रा का हुक खुल गया और उसकी खरबूजे जैसी भरपूर चूचियां बुरा की कैद से आजाद हो गई ब्रा जैसे ही उनकी चुचियों पर से ढीली हुई शुभम एक पल भी गंवाए बिना अपनी मां की ब्रा को उसकी गोरी गोरी बाहों में से निकाल फेंका और उसकी नंगी चूचियों को दशहरी आम की तरह अपने हाथों में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और लगातार अपने लंड की ठोकर उसके नितंबों के बीचो-बीच मार रहा था,,,
शीतल पागलों की तरह अपने दोनों हाथों में शुभम की गांड को पकड़कर दबाने के साथ-साथ उसके ऊपर अपने होठों का चुंबन छोड़ रही थी,,,, शीतल मदहोश होते हुए उसके नितंबों को हथेली में दबोच ते हुए अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले गई तो तुरंत उसके हाथ में शुभम का टनटनाता हुआ लंड आ गया,,, फिर क्या था शीतल को तो जैसे मुंह मांगी मुराद मिल गई,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह किसी पॉर्न मूवी का सीन दोहराते हुए शुभम को इशारों में ही अपनी दोनों टांगों को फैलाने के लिए खुली और शुभम भी अपने दोनों टांगों को फैला लिया और देखते ही देखते शीतल उसकी दोनों टांगों के बीच से निकलते हुए बैठे-बैठे ही शुभम के लंड से खेलते हुए उसे अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,,

आहहहहहहह,,,, गजब अद्भुत अतुल्य बेहद मादकता से भरा नजारा कमरे के बीचो बीच दर्शाया जा रहा था अगर कोई इस नजारे को देख ले तो उसे यही लगे कि पोर्न मूवी की शूटिंग चल रही है,,,,। शीतल और निर्मला दोनों किसी से कम नहीं थी दोनों अपने बेटे पर पूरी तरह से छाने की कोशिश कर रही थी,,, शीतल के सर के ऊपर ही निर्मला की बड़ी बड़ी गांड थी और शीतल अपनी लालच को रोक नहीं पाई और अपना दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके दोनों हाथों से निर्मला की बड़ी-बड़ी गांव को पकड़ ली जो कि लाल रंग की पैंटी में लिपटी हुई थी,,,, शीतल का इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड का दबाना निर्मला को बेहद आनंदित कर जा रहा था,,,। निर्मला दोनों तरफ से मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी,,,। शीतल रह-रहकर शुभम के पूरे समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ सेकंड तक उसे अपने मुंह में लेकर वापस ऊगल दे रही थी,,,,
शुभम भी आनंद के सागर में गोते लगा रहा था उसके दोनों हाथों में उसकी मां की दशहरी आम थी जिसे दबा दबा कर आनंद की परिभाषा को इशारों में ही प्रकाशित कर रहा था और नीचे से अपनी कमर को हिलाता हुआ शीतल के मुंह को चोद कर संभोग सुख की तृप्ति का एहसास शीतल को दिला रहा था,,,, लगभग लगभग 3 नंगी हो चुके थे केवल शीतल के बदन पर ही मात्र छोटी सी पेंटी लिपटी हुई थी,,, तीनों को इस समय शिमला की कातिल ठंडी का अहसास तक नहीं हो रहा था वह तीनों वातावरण के विरुद्ध अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे वातावरण की कातिल ठंडी निर्मला और शीतल की गर्म जवानी के आगे पिघलती हुई नजर आ रही थी,,,,

लगातार निर्मला के मुख्य कर्म से इस कार्यों की आवाज फूट रही थी जो कि पूरे कमरे को मादकता का एहसास दिला रही थी साथ ही शीतल का इस तरह से पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूसना नहले पर दहला साबित हो रहा था,,,, उसके दोनों हाथों में निर्मला की भारी-भरकम नितंबों का भार था जिसे वह अपनी हथेली में संभाले हुए दबा रही थी,,,

कैसा लग रहा है मम्मी,,,

बहुत मजा आ रहा है बेटा ऐसा लग रहा है स्वर्ग का सुख मिल रहा है सच शीतल नहीं आना कर हम दोनों को स्वर्ग का अनुभव करा दी बहुत मजा आ रहा है ऐसे ही दबाते रे,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,

और तुझे कैसा लग रहा है शीतल रानी,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी कमर आगे पीछे करके शीतल के मुंह को चोद रहा था शीतल अगर बोलना भी चाहे तो भी नहीं बोल सकती थी लेकिन यह बात शुभम भी अच्छी तरह से जानता था कि भले वह बोले या ना बोले उसे भी जन्नत का मजा मिल रहा था,,,।

मजा तीनों को आ रहा था शिमला में आकर शीतल और निर्मला के अंदर का रंडी पन बाहर आ रहा था, तभी तो शुभम की दोनों टांगों के बीच में आकर शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड को लॉलीपॉप की तरह अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली से दबा दबा कर उसे लाल टमाटर की तरह कर दी थी,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां के दशहरी आम को दबा रहा था काफी देर तक दबाने की वजह से निर्मला की गोरी गोरी चुचीयां एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई थी,,,, और उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी फूट रही थी,,,, शीतल के तन बदन में होते हैं ना इतना ज्यादा जोर मार रहा था कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसकी बुर में चीटियां रेंग रही थी वह एक हाथ से निर्मला की बड़ी बड़ी गांड को दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी और साथ ही अपने मुंह में शुभम के मुंसल को लेकर उस का आनंद उठा रही थी,,,, शीतल से रहा नहीं गया तो वह दोनों हाथों का सहारा लेकर निर्मला के बदन से उसका आखिरी वस्त्र उसकी चड्डी भी उतारने लगी जिसमें निर्मला पूरा सहयोग दे रही थी देखते ही देखते शीतल नहीं मिला की चड्डी उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगी कर दी,,,,
निर्मला की गांड पूरी तरह से नंगी होने के साथ ही,,, शीतल निर्मला की दोनों जांघों को पकड़ कर उसे फैलाने का इशारा की निर्मला भी उसका इशारा समझते हुए हल्के से अपनी दोनों टांगों को फैला दी जिससे टांगों के बीच की वह पतली दरार शीतल को एकदम साफ नजर आने लगी,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी जिंदगी में उसने जो अब तक नहीं की थी उसे करने का इरादा वह अपने मन में बना ली थी इसलिए शुभम के लंड को मुंह में डालकर चूसते हुए ही शीतल अपना एक हाथ निर्मला की दोनों टांगों के बीच ले जाकर हल्के से उसकी बीच की दरार को स्पर्श करने लगी शीतल की उंगली को अपनी बुर के पर महसूस करते ही शीतल पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था किसी पर क्या करने वाली है और यही कश्मकश में शीतल अपनी बीच वाली उंगली को निर्मला की बुर में प्रवेश करा दी निर्मला की बुर पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी जिसकी वजह से शीतल को अपनी उंगली डालने में जरा भी दिक्कत पेश नहीं आई लगभग लगभग शीतल ने अपनी आधी उंगली सीतल की बुर में डाल दी थी,,,,, और आधी उंगली बुर के अंदर जाते हैं निर्मला के मुंह से आह निकल गई और मुंह से आह निकलने के साथ ही निर्मला खुद अपने दोनों हाथों को शुभम के हाथों पर रखकर जोर से अपनी चूची को दबा दी,,,, यह निर्मला की तरफ से अपने तन बदन में हो रही हलचल को दबाने की कोशिश थी लेकिन जवानी की आग बुझने की जगह और ज्यादा भड़क जाती है और यही शीतल और निर्मला दोनों के साथ हो रहा था शीतल अपनी आधी ओवली निर्मला की बुर में डालकर भी संतुष्ट नहीं हुई तो अपनी दूसरी उंगली को उसकी बुर में डाल दी,,,,

आहहहहहहह,,, रे रंडी क्या कर रही है भोसड़ा चोदी,,,,आहहहहह,,, उंगली से ही मेरी बुर चोदने का इरादा है क्या तेरा,,,,?

साली कुत्तिया मेरा बस चले तो मैं खुद तेरी बुर में घुस जाऊं कितनी लाजवाब बुर है तेरी, तभी तो तेरा बेटा तेरे पीछे लट्टू बन कर घूमता है,,,, ना तू अपनी टांग खोल कर अपने बेटे को अपने बुर दिखाई होती और नआ यह दिन देखने को होता,,,,( शीतल शुभम के लड़के को अपने मुंह में से निकाल कर अपने दोनों उंगली को निर्मला की बुर में पेलते हुए बोली,,,, और मुंह में से लंड बाहर आते ही शुभम अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके सुपारी को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की गहरी गहराई में ऊपर से नीचे तक रगड़ना शुरु कर दिया,,,,।

आहहहहहहह,,,,आहहहहह,,,,, शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है अपने लंड को मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,,( निर्मला मदहोश होते हुए गरम सिसकारी लेकर अपने बेटे से बोली,,,, निर्मला की बातें सुनकर इसी तरह से रहा नहीं गया और वह शुभम के लड्डू को पकड़कर निर्मला की बुर पर उसके गर्म सुपाड़े को रखकर,, शुभम को बोली,,,।)

डाल दे शुभम अपनी मां की बुर में पूरा लंड,,,,
( निर्मला तो अपनी बेटे के लंड के सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करते ही पूरी तरह से सुलग उठी,,, वह जल्द से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर के अंदर गहराई में महसूस करना चाहती थी लेकिन शीतल की बात सुनकर और उसकी हरकत को देखते हुए शुभम बोला,,,।)

इतनी जल्दी नहीं डालूंगा मेरी रानी तेरी बुर में अभी तो तेरे बदन से खेलना है,,, चल आजा बिस्तर पर,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी दोनों भुजाओं में अपनी मां की मांसल कमर को दबोच ते हुए उसे अपनी गोद में उठा लिया और नरम नरम बिस्तर पर ले जाकर पटक दिया,,,

आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम,,,,,( निर्मला अपने आप को संभालते हुए बोली और शुभम की ताकत को देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, निर्मला पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी दोनों चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह इधर-उधर लहरा रहे थे जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,, शुभम को साफ नजर आ रहा था कि इस तन मर्दन के कारण उसकी मां की दोनों चूचियां टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,,, शुभम मन में यह सोच कर मुस्कुरा रहा था कि वह काफी देर से अपनी मां की चूचियों पर मेहनत कर रहा था जिसका फल उसे मिल रहा था,,,,। तीनों संपूर्ण रुप से एकदम नंगे थे,,,, शीतल शुभम के करीब खड़ी थी,,, पर वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए निर्मला के नंगे बदन को देख रही थी,,,। शीतल को गहरी सांसे लेते हुए देखकर शुभम अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल का हांथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा,,, और उसे अपनी बांहों में भरते हुए उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को हाथ में लेकर दबाते हुए अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, इस दृश्य को देखकर निर्मला के मन में किसी भी प्रकार का एतराज नहीं था क्योंकि शिमला में आकर उसके सोचने का ढंग भी बदल चुका था वह भी पूरी तरह से मजे लेने के मूड में थी और इस बात से खुश थी कि उसके बेटे की वजह से उसकी सहेली को चुदाई का भरपूर सुख मिल रहा है जिसके लिए वह बरसों से तड़प रही थी,,,। तभी तो अपने बेटे को इस तरह से शीतल के खूबसूरत बदन से खेलते हुए देख कर उसे खुशी मिल रही थी और उत्तेजना के मारे शीतल अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर शुभम के लंड को पकड़ कर हिलाने लगी और यह देखकर निर्मला अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसलने लगी,,,, कुछ देर तक सीता के लाल-लाल होठों का रसपान करने के बाद शुभम अपना हाथ शीतल की दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी बुर को स्पर्श करते हुए बोला,,,,,

अब देखना मैं अपनी मां को कैसे तृप्त करता हूं कैसे इसकी जवानी की आग बुझाता हूं,,,,।
( इतना कहने के साथ ही शुभम बिस्तर पर अपनी मां की तरफ आगे बढ़ा और देखते ही देखते उसकी दोनों टांगों को फैलाते हुए बोला,,,।)

अपनी टांगों को तो खोल दो मेरी रानी फिर देख यह तेरा राजा बेटा क्या करता है,,,,,।
( निर्मला पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी उत्तेजना के मारे उसका गला सूख रहा था और अपने बेटे की बात सुनते हुए वह भी हल्के से और ज्यादा अपनी दोनों टांगों को फैला दी देखते ही देखते उसकी बुर की गुलाबी आंखें हल्का सा मुंह खोलकर शुभम का स्वागत करने लगी,,,, शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की बुर तवे पर फूल रही रोटी की तरह लग रही थी,,,, और जैसे रोटी खाने की भूख एक भूखे इंसान में होती है उसी तरह से शुभम के अंदर भी अपनी मां की बुर में पूरी तरह से समय पर अपनी भूख मिटाने की भूख और ज्यादा बढ़ती जा रही थी इसलिए देखते ही देखते अपने घुटनों के बल आगे बढ़ा और अपनी मां की कमर पकड़कर,,, अपने प्यार से होठों को अपनी मां की कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,, देखते ही देखते निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारियो का सैलाब फुट पड़ा वह जोर-जोर से सिसकारी लेने लगी,,,,।

आहहहहहहह,,,आहहहहहहह,ऊईईईईईई मां,,,, ऊफफफ,,, मैं मर जाऊंगी औहहहहह शुभम यह क्या कर रहा है,,,,आहहहहहहह,( इस तरह की गरम सिसकारियां लेते हुए निर्मला अपना सर तकिए पर इधर-उधर पटक रही थी,,,, या देखकर शीतल की उत्तेजना बढ़ने लगी उसकी बुर फूलने की चटनी लगी और वह भी बिस्तर पर चढ़ गई,,, और देखते ही देखते निर्मला के सर के इर्द-गिर्द अपना घुटना टीका कर अपनी गुलाबी बुर को निर्मला के होठों के करीब ले गई,,,,, शीतल की हरकत को देखकर निर्मला अच्छी तरह से समझ गई कि उसे क्या करना है वह भी दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके शीतल की कमर को थाम ली और उसके गुलाबी बुर के गुलाबी पत्तियों पर अपने होंठ रख कर उसे चाटना शुरू कर दी,,,,,

मादकता भरा यह दृश्य केवल पोर्न मूवी में ही देखा जा सकता था लेकिन शिमला के इस बंगले में निर्मला अपने बेटे के साथ मिलकर शीतल के साथ जवानी और संभोग का अद्भुत खेल खेल रही थी जिसे देखकर शायद पोर्न मूवी की एक्ट्रेस भी शर्मा जाए क्योंकि उन्हें तो बार बार रीटेक करना पड़ता है लेकिन इन दोनों को बिल्कुल भी रिटेक करना नहीं पड़ रहा था,,, दोनों अपने अपने तरीके से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे,,, तीनों का यहां शिमला घूमने आना लगभग लगभग सफल होता नजर आ रहा था क्योंकि इस तरह का सुख उन तीनों ने अभी तक नहीं भोगा था इस तरह के दृश्य को तादृश्य करने की कल्पना में भी कभी नहीं सोचे थे,,,,

शुभम चप चप करके अपनी मां की कचोरी जैसी फूली हुई बुर को चाटने में लगा हुआ था,,, और निर्मला गरम सिसकारी लेते हुए शीतल की बुर को चाट रही थी बुर चाटने में कितना अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है निर्मला को इस समय बराबर पता चल रहा था तभी तो उसका बेटा दिन रात अपनी मां की बुर चाटने में लगा रहता था,,,,। कुछ देर तक शुभम अपनी मां की बुर की सेवा करने में जुटा रहा इसके बाद वह अपना मुंह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच में से बाहर निकाल लिया और अपने लंड को हिलाते हुए आगे की तरफ बढ़ने लगा जहां पर शीतल घुटनों के बल बैठकर शुभम की मां को अपनी बुर चटाने में लगी हुई थी,,,,।

तुम हट जाओ सीतल रानी इसे मैं देखता हूं,, ऐसा कहते हुए शुभम घुटनों के बल आगे बढ़ते हुए अपनी मां के चेहरे के करीब पहुंच गया वह अपनी मां की दोनों चुचियों के इर्द-गिर्द अपना घुटना रखकर अपने लंड को हिलाते हुए अपने लंड को अपनी मां के खूबसूरत चेहरे पर पटकने लगा,,,

आहहहहहहह,,,,, धीरे से शुभम लगता है,,,।

जब तक मुंह में नहीं लेगी तब तक अपने लंड को ऐसे ही पटक ते रहूंगा,,,,,( इतना सुनते ही निर्मला अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपने मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी,,, और जैसे ही निर्मला ने अपने बेटे के लैंड को पूरा मुंह में लेकर चूसना शुरू करी,वेसे ही तुरंत शुभम के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी ,,,,।)

आहहहहह,, मां,,,,,,,,( इतना कहते हुए एकदम मस्ती के सागर में डूबते हुए वह अपनी आंखों को मुंद दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह स्वर्ग में घूम रहा हो,,,, अपनी मां के मुंह में लंड डालकर शुभम को जिस तरह का एहसास हो रहा था उसके चेहरे से शीतल को साफ पता चल रहा था शीतल को अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि शुभम को कितना ज्यादा मजा आ रहा है अपनी मां के मुंह में लंड डालकर,,, इसलिए वह बिस्तर पर खड़ी हो गई,,, और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को शुभम के होठों से लगा दी शुभम आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही शीतल की गरमा गरम बुर को अपने होठों पर महसूस किया वैसे ही उसकी आंख खुल गई और अपनी नजरों को ऊपर करके शीतल की तरफ देखा और शीतल भी उसकी तरफ देखें दोनों की नजरें आपस में टकराई,,, पल भर में ही दोनों के तन बदन में मदहोशी अपना असर कर गई और शुभम अपने पैसे होठों के बीच से अपनी जीभ निकालकर शीतल की बुर को चाटना शुरू कर दिया,,, शुभम कटोरी में भरी खीर की तरह शीतल की बुर को चाट रहा था और उसमें से निकल रहा मदन रस अपनी जीत के सहारे अपने गले के नीचे उतार रहा था नमकीन स्वाद से भरा हुआ शीतल की बुर का मदन रस शुभम को इस समय अमृत के समान लग रहा था जिसकी एक बूंद भी व नीचे नहीं गिरने देना चाह रहा था,,, गजब का नजारा बिस्तर पर बना हुआ था इतनी गर्माहट भरे दृश्य से पूरा कमरा गरमा चुका था,,,। केवल बिस्तर पर का नजारा अगर कोई अपनी आंखों से देख ले तो उसे यकीन नहीं होगा कि यह नजारा शिमला की कातिल ठंडी का है क्योंकि तीनों संपूर्ण लगना अवस्था में एक दूसरे के अंगों से मजा ले रहे थे और ठंडी का अहसास तीनों को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था बल्कि घर से बाहर निकलते ही बिना गर्म कपड़ों के बदन में ठंडी प्रवेश कर जाने का डर सत प्रतिशत बना हुआ था लेकिन इन तीनों को शिमला की ठंडी बेअसर लग रही थी इसमें इन तीनों का बिल्कुल भी दोष नहीं था क्योंकि शीतल और निर्मला की दहेकती जवानी के आगे शिमला की ठंडी घुटने टेक दे रही थी,,,,।

निर्मला मदहोश होकर अपने बेटे के लंड को पूरा का पूरा गले तक उतार दे रही थी और शीतल शुभम के बालों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर हल्के हल्के अपनी कमर को उसके मुंह पर चला रही थी और शुभम पागलों की तरह जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी जीभ को शीतल की दूर में डालकर उसकी मलाई को चाटने में लगा हुआ था,,,, तीनों पूरी तरह से मदहोश हुए जा रहे थे तीनों की गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी साथ में शीतल और निर्मला के कलाइयों में रंग बिरंगी चूड़ियाो की खनक माहौल को पूरी तरह से मादकता से भर दे रही थी,,,

निर्मला से रहा नहीं जा रहा था उसकी बुर में आग लगी हुई थी जल्द से जल्द वह अपने बेटे का लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,इसलिए अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और लगभग हांफते हुए बोली,,,,

शुभम मेरे राजा अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है मुझसे मेरी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही है अब जल्द से जल्द तू अपने मोटे लंड को मेरी बुर में डाल दे,,,,,

(शुभम भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझ रहा था वहजानता था कि घंटों सेवा अपनी मां के खूबसूरत बदन से खेल रहा था ऐसे में उसकी मां का पूरी तरह से चुदवासी हो जाना लाजमी था,,,शुभम को भी अब महसूस हो रहा था कि उसके लंड को उसकी मां की बुर में जाना बेहद जरूरी है क्योंकि उसके लंड की भी हालत खराब होती जा रही थी और शीतल भी इसी पल का बेसब्री से इंतजार कर रही थी अपनी गुलाबी बुर चटवा चटवा कर उसमें भी लंड लेने की तड़प बढ़ती जा रही थी,,,।
अब शुभम भी पूरे मामले को अपने हाथ में ले लेना चाहता थावह अच्छी तरह से समझ गया था कि उसके घर के आगे शीतल और उसकी मां घुटने टेक दि थी,,,,इसलिए शुभम भी बिल्कुल भी देर न करते हुए अपनी मां की दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,।
 
शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में कमरे का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,,, शिमला में आकर उन तीनों की दूसरी रात थी और दूसरी रात से ही तीनों की सुहागरात की शुरुआत हो रही थी,,, सुहागरात इसलिए कि तीनों प्लान बनाकर शिमला में यही करने आए थे इसलिए एक तरह से इन तीनों का सुहागरात ही थी,,,। किंग साइज बेड पर शुभम शुभम की मां और सीतल तीनों संपूर्ण रूप से अपने वस्त्र का त्याग करके एकदम नग्न अवस्था में संभोग क्रिया की ओर अग्रसर हुए जा रहे थे,,,,
सर्वप्रथम शुभम संभोग की शुरुआत अपनी मां की चुदाई से करने जा रहा था इसलिए वह अपना संपूर्ण चार्ज अपनी मां की दोनों टांगों के बीच ले लिया था,,, निर्मला की भारी भरकम भराव दार,,, बड़ी बड़ी गांड की वजह से शुभम को अपनी मां की गांड के नीचे नरम नरम तकिया लगाने की कोई भी आवश्यकता जान नहीं पड़ रही थी,,,, बिना तकिया लगाए ही निर्मला की रसीली बुर शुभम के मस्त लंड के सिधान पर आ रही थी,,,, लेकिन फिर भी शुभम अपनी बाकी मदमस्त गांड के नीचे अपने दोनों हाथ को ले जाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेलियों में दबोचते हुए उसे अपनी तरफ खींच कर उसकी दोनों मोटी मोटी जांगो को अपनी जांघों पर चढ़ा दिया,,,,,
आहहहह,, बेहद आह्लादक दृश्य था,,, अपनी ही मां के साथ शुभम की कामुक हरकतों को देखकर शीतल की हालत खराब हुए जा रही थी,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी जिस अंदाज से वह अपनी मां को बिस्तर पर लिटा कर उसकी बड़ी-बड़ी जांघों,,,को अपनी जांघों पर उसके नितंबों को पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए चढ़ाया था उसकी यह ताकत देखकर उत्तेजना के मारे शीतल की बुर पानी छोड़ रही थी,,,, निर्मला के मुंह से एक शब्द भी नहीं पूछ रहे थे उत्तेजना के मारे उसके गाल एकदम लाल टमाटर की तरह हो गए थे वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए शुभम की तरफ देख रही थी जिसकी आंखों में उसकी जवानी की मदहोशी साफ झलक रही थी,,, अपने बेटे की आंखों में उभरते हुए वासना को देखकर निर्मला अच्छी तरह से समझ गई थी कि आज की रात भर उसकी बुर के नमकीन रस को अपने लंड से पूरी तरह से नीचोड़ लेगा,,,,, शुभम की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी इस समय शुभम अपनी मां के संपूर्ण नंगे वजूद को अपनी जांघों पर चढ़ाया हुआ था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की रसीली कचोरी की तरह खुली हुई पूरी नजर आ रही थी जिसमें से चटनी रूपी मदन रस बाहर निकल रहा था और उस रस को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,,। शुभम का लंड निर्मला की बुर की पतली दरार के ऊपर पूरी तरह से लेट कर शायद आराम कर रहा था,,, शुभम के मोटे तगड़े लंबे लंड के नीचे उसकी मां की बुर का संपूर्ण वजूद दबा हुआ था,,,,, निर्मला की पुर के ऊपर लेटे हुए सुमन के लंबे तगड़े लंड को देखकर शीतल शायद मन ही मन में अंदाजा लगा रही थी कि शुभम का लंड बुर में घुसने के बाद कहां तक जाता है जो कि निर्मला की नाभि तक लंड का सुपाड़ा पहुंच रहा था यह देखकर शीतल अंदर ही अंदर सिहर उठी,,,,
शुभम की आंखों में खुमारी साफ झलक रही थी वह अपनी हथेली से अपनी मां की चिकनी जांघों को सहला कर अपने अंदर उत्तेजना का सैलाब पैदा कर रहा था यह बिल्कुल ऐसा ही था जैसे कि गुब्बारा फुलाने से पहले अपने मुंह में ढेर सारी हवा भरना पड़ता है तब जाकर गुब्बारा का असली आकार नजर आता है ठीक उसी तरह से शुभम भी अपनी मां की चुदाई के पहले अपने अंदर पूरी तरह से उत्तेजना की चिंगारी को भड़का देना चाहता था इसीलिए वह अपनी मां की गोरी गोरी चिकनी चारों को हल्के हल्के सहलाते हुए उसे बीच-बीच में दबोच दे रहा था,,,, जिससे निर्मला की आह निकल जा रही थी,,, निर्मला से शुभम के लंड को अपनी बुर के ऊपर इस तरह से लेटना बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसका बदन पूरी तरह से कसमसा रहा था,,, हल्के हल्के उसकी कमर ऊपर की तरफ ऊठ बैठ रही थी,,,, यह देखकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चिकनी कमर को दोनों हथेलियों में दबाकर अपनी तरफ खींच लिया,,,,

आहहहहहहह ,,,,,, ऐसे ही तड़पा कर मेरे बदन में आग लगाता रहेगा या इसे बुझाएगा भी,,,,

बुझा दूंगा मेरी जान पहले तेरे बदन से खेल तो लेने दे,,, तू इतनी खूबसूरत है कि जितना भी तेरे बदन से खेलूं जी नहीं भरता,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर उसे अपनी मां की बुर पर पटकना शुरू कर दिया उसके लंड के मोटे छुपाने की चोट से अपनी गुलाबी बुर की पत्तियों पर साफ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से वह हल्के दर्द के मारे अपना सिर दूसरी तरफ घुमा ली और हल्की सी सिसकारी उसके मुंह से निकल गई,,,,।)

शुभम इतना मत तड़पा तेरी मां को देख तेरा लंड अंदर लेने के लिए कैसे तड़प रही है,,,,।

थोड़ा तड़पेगी तभी तो ज्यादा मजा लेगी,,,, देखना आज ऐसी चुदाई करूंगा कि जिंदगी भर याद रहेगा,,,,( इतना कहकर शुभम अपने मुंह से थूक निकाल कर अपने नंबर पर लगाने ही वाला था कि उसे रोकते हुए शीतल बोली,,,।)

अरे मेरे राजा जब मैं हूं तो अपने लंड पर थूक लगाने की क्या जरूरत है,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल शुभम की तरफ आगे बढ़ी और उसके लंड को अपने हाथ में लेकर अपने मुंह में डालकर से चूसना शुरू कर दी और अच्छे से अपने थुक से उसके लंड को एकदम भिगो डाली,,,, और फिर से शुभम के लंड को बाहर निकाल दी,,, और शुभम को आंखों से इशारा करते हुए उसके लंड को पकड़कर निर्मला की बुर की गुलाबी पतियों के बीच रख दी,,,।

अब डाल दे बड़े आराम से जाएगा,,,,,
( शीतल एकदम स्वच्छंद हो चुकी थी एकदम खुले मन की एकदम चंचल जोकि शुभम के लंड को अपने मुंह में डालकर उसे की ना करके निर्मला की बुर के लिए तैयार कर चुकी थी,,, शुभम भी अब एक पल की देरी करना नहीं चाहता था इसलिए धीरे-धीरे अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गुलाबी बुर की पत्तियों के बीच में धंसाना शुरू कर दिया,,, देखते ही देखते शुभम को मोटा तगड़ा सुपाड़ा निर्मला की गुलाबी बुर की पत्तियों को चीरता हुआ अंदर समा गया जैसे-जैसे लंड का सुपाड़ा निर्मला को अपनी बुर के अंदर घुसता हुआ महसूस हो रहा था वैसे वैसे उसे अपने चेहरे का हाव भाव बदलता हुआ महसूस हो रहा था,,,, मीठा मीठा दर्द का एहसास उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था,,, देखते ही देखते शुभम अपने समूचे लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में उतार दिया,,,, पर अपनी मां की कमर पकड़कर अपनी कमर को हल्के हल्के हिलाना शुरू कर दिया,,,, शीतल अपनी फटी आंखों से सुभम के मोटे तगड़े लंड को निर्मला की बुर के अंदर बाहर होता हुआ देख रही थी,,।
शुभम के मोटे तगड़े लंड को इतनी आराम से निर्मला की कसी हुई बुर में आता जाता देख कर शीतल की खुद की बुर फुदकने लगी,,,, शीतल इतनी फतेह अधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी कि वह खुद ही अपनी दोनों चुचियों को अपने हाथ से पकड़ कर दबाना शुरू कर दी,,,,
किंग साइज बेड के नरम नरम गद्दे पर घमासान मचा हुआ था,,,, शुभम एक लय में अपनी कमर को हिला रहा था,,,, शुभम का लंड जब निर्मला की बुर से बाहर आता तब शीतल को साफ तौर पर नजर आ रहा था कि निर्मला की मदन रस में शुभम का लंड पूरी तरह से नहाया हुआ था,,,। यह देखकर शीतल के मुंह में पानी आ रहा था,,, शुभम के हल्के हल्के धक्के के साथ भी निर्मला की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छातियों पर लहरा रही थी यह देख कर शीतल के मुंह में पानी आ गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर शीतल की चूचियां पकड़ ली और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दी,,,

आहहहहहहह,,, शीतल ऐसे ही दबा जोर जोर से दबा मुझे बहुत मजा आ रहा है प्लीज शीतल इसे मुंह में लेकर पी,,,आहहहहह,,, मेरे दुद्दू को पी जा,,,आहहहहह,,,,, शीतल मेरी जान बिल्कुल भी देर मत कर इसे मुंह से लगा ऐसा कहते हुए निर्मला खुद अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर शीतल की तरफ आगे बढ़ाने लगी,,, शीतल तो पहले से ही मदहोश हो रही थी निर्मला की तरफ से इस तरह की बेशर्मी भरी हरकत को देखकर और उत्तेजना से भर गई तभी उसके दिमाग में एक युक्ति सूझी और वह निर्मला के चिकने पेट पर अपने नितंबों को रखकर बैठ गई,,, पर उसकी चुचियों को जोर जोर से दबाना शुरू कर दी शुभम की जबरदस्त चुदाई और स्तन मर्दन के द्वारा निर्मला पूरी तरह से सातवें आसमान में उड़ने लगी,,,। शुभम मदहोश हुआ जा रहा था उसकी कमर की रफ्तार बढ़ती जा रही थी उसके ठीक आंखों के सामने सीजर अपनी बड़ी बड़ी गांड उसकी मां के पेट पर रख कर बैठी हुई थी और उसकी चूचियों को दबा रही थी,,,,,

ओ मेरी जान शीतल रानी,,,, क्या मस्त कमर है तेरी,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शीतल की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे अपनी हथेली में दबाना शुरू कर दिया,,,। औरत के गोरे गोरे बदन के हर एक हिस्से को अपनी हथेली में लेकर दबाने का भी अपना अलग मजा होता है यह बात शुभम अच्छी तरह से जानता था,,,, तभी तो शुभम की मजबूत हथेली में अपनी कमर को महसूस करते हैं शीतल के तन बदन में आग लग गई वह चाहती थी कि जिस तरह से शुभम उसकी मां की बुर में अपना लंड पेल रहा है उसी तरह से उसकी भी बुर में लंड पेले,,,, लेकिन शायद अभी अपनी बुर में शुभम के लंड को महसूस करने का समय बाकी था,,,,,,, शुभम भी शीतल और अपनी मां में से अपनी मां को ही अग्रिमता देते हुए सर्वप्रथम अपनी मां की ही बुर में लंड डालने का शुरुआत किया था क्योंकि हो सकता था कि अगर वासी पर की बुर में अपना लंड डालकर सबसे पहले की चुदाई करता है तो शायद निर्मला को बुरा लग सकता था,,,, लेकिन फिर भी मजा शीतल को भी बेहद आ रहा था कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी में इस तरह का मजा तभी ले पाएगी,,, और वह भी एक मां बेटे के साथ मिलकर,,,,

शीतल द्वारा स्तन मर्दन का कार्यक्रम जारी था,,, शुभम अपनी मां की बुर में लंड डालता हुआ हलकी हलकी चपत शीतल की गांड पर लगाना शुरू कर दिया शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी आंखों के सामने थी,,, शीतल की बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड को देखकर उसकी आंखों में नशा छा रहा था,,, और यह सारा नशा शुभम अपनी मां की बुर पर उतार रहा था वह लगातार अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था जिसमें से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,
शीतल की गांड पर चपत लगा लगा कर शुभम ने शीतल की गांड को एकदम लाल कर दिया था,,, शुभम जैसे जैसे उसकी गांड पर चपत लगा रहा था वैसे वैसे शीतल के तन बदन में मदहोशी बढ़ती जा रही थी,,,,

आहहहहह आहहहहहहह,,,,, शुभम,,,,,
( शीतल चपत लगाने के नीचे दर्द से कराह उठती थी लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम के द्वारा चपत लगाने पर उसे भी मजा आ रहा था,,,,)

हाय मेरी रंडी मां तेरी गुलाबी बुर में बहुत नशा है रे,,,, साली के बुर में जितना जोर जोर से लंड पेलो मन ही नहीं भरता ना मेरा ना इसका,,,, साली एक नंबर की छिनार है,,,आहहहहह,,,, पर मैं बहुत खुश हूं ऐसी मम्मी पाकर इसने अपनी जवानी लुटा दी मेरे प्यार में,,,,।( ऐसा कहते हुए मैं शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था,,,।)

साले मादरचोद अच्छा है कि तेरी जवानी की प्यास बुझा रही हूं वरना बाथरूम में बैठा बैठा मुठ मारता रहता,,,

सही कही मादरचोद मैं तो तेरा शुक्रगुजार हूं कि तूने अपनी गुलाबी बुर को मुझे सौंप दी,,,, नहीं तो सच में दूसरों की तरह मुझे भी अपने हाथ से लंड हीलाकर काम चलाना पड़ता,,,,।

ऐसी नौबत कभी नहीं आती मेरे राजा मैं थी ना तेरे लिए अपनी दोनों टांगें फैलाकर तुझे अपनी बुर के अंदर ले लेती,,,

तो अभी भी कौन सी देर हो गई है मेरी रानी फैला दी अपनी टांगों को और ले ले मुझे अपनी बुर के अंदर,,,आहहहहहहह,,,आहहहहरहहह,,,,

पहले अपनी मां की बुर में समा जा जो तेरी भी अपनी दोनों टांगें फैला है तेरा लंड़ अपनी बुर में ले रही है,,,।
( ऐसा कहते हुए शीतल जोर-जोर से निर्मला की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और दर्द से कराहने की आवाज निर्मला के मुंह से आने लगी,,,।)

तुम दोनों के भोंसड़े में घुसुंगा लेकिन बारी-बारी से,,, मेरी छम्मक छल्लो पहले अपनी बुर का रस मुझे पिला दे ,,,(ऐसा कहते हैं वह सुबह में अपने दोनों हाथ से उसके बड़ी-बड़ी ब्रांड को पकड़कर उठाने लगा शीतल झट से शुभम के इशारे को समझ गई और वह अपने हाथ की कोहनी के बल होकर अपनी गांड को एकदम हवा में उठा दी,,,, शीतल की कौन हवा में लहराते हुए ठीक शुभम के मुंह के सामने आ गई,,, अपने प्यासे होठों के ठीक सामने शीतल की मदमस्त गांड को देखकर शुभम का जोश बढ़ गया उसकी प्यास जाग गई और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर तुरंत शीतल की बड़ी बड़ी गांड को अपने हाथ में थाम लिया और अपने होठों को उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों पर रख कर चाटना शुरू कर दिया,,,,,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बुर में धक्के लगा रहा था और साथ ही शीतल की बुर को अपने होठों से चाट रहा था शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने दोनों हाथों में थाम कर दशहरी आम की तरह बारी-बारी से दोनों चुचियों को पीना शुरू कर दी,,,, शुभम की बलिष्ठ भुजाओं में शीतल और निर्मला खुद को पिघलता हुआ महसूस कर रहे थे,,,,, निर्मला भी अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ लाकर शीतल के झूलते हुए खरबूजे को अपने हाथ में पकड़ ली और उसे दबाना शुरू कर दी दोनों एक दूसरे की चूचियों को दबा कर मजा ले रही थी,,,, शुभम अपनी रफ्तार को बिल्कुल भी कम नहीं कर रहा था ऐसा लग रहा था कि अपनी मां की बुर को शिमला की रात की पहली चुदाई में ही भोसड़ा बना देगा,,,, जो भी हो निर्मल अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी,,,,

बंगले के बाहर बर्फ गिरना जारी था ऐसे में सोसाइटी के सभी लोग अपने अपने कमरे में हीटर जलाकर ठंडे मौसम में अपने कमरे को गर्म करने की पूरी कोशिश करते हुए नींद की आगोश में सो चुके थे लेकिन इस कमरे का दृश्य दूसरे कमरों से बिल्कुल भिन्न था इस कमरे में हीटर जी बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी क्योंकि,,,, शीतल और निर्मला की गर्म जवानी पूरे कमरे को गर्म करने में हीटर का काम कर रही थी,,, कड़कड़ाती ठंड में भी तीनों बिना वस्त्र के एकदम नंगे किंग साइज बेड पर जवानी का मजा लूट रहे थे बल्कि अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करते हुए शुभम के माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी,,,। अपनी मां की चुदाई का मजा लेते हुए बुर चटाई का आनंद भी ले रहा था,,,, शीतल मदहोश होते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ शुभम के चेहरे पर पटक रही थी जिसकाका आनंद लेते हुए शुभम भी जोर जोर से शीतल की गांड पर चपत लगा रहा था,,,,,आहहहहह आहररररहह ऊऊहहहहह ,,,ऊईईईई मां कि गर्म सिसकारियों के साथ-साथ शीतल और निर्मला के कलाइयों की चूड़ियों की खनक से पूरा कमरा मादकता से भरता चला जा रहा था,,,,।

सोसाइटी में हर घर के हर एक कमरे में कभी-कभार या तो फिर नए जोड़ें हो तो कुछ दिन के लिए रोज-रोज चुदाई का खेल तो चलता रहता है लेकिन किसी को कानों कान भनक तक नहीं थी कि इस घर में दो औरत और एक जवान लड़कए की चुदाई चल रही है,,, पर वह भी उनमें से एक मां बेटा हैं,,,,, तभी तो शीतल शिमला लेकर आई थी दोनों को मजे करने के लिए ताकि अगर कोई देख भी लें तो फिर भी कोई फिकर ना हो,,,,

अपनी मां की गुलाबी बुर की चुदाई और शीतल की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़े हुए उसकी बुर की चटाई शुभम के होश उड़ा रही थी एक साथ दोनों की बुर को चोदना चाहता था इसलिए बिना बोले ही वह शीतल की गांड को पकड़कर नीचे की तरफ जाने लगा शीतल को समझ में नहीं आया कि सुबह क्या करने वाला है बस वजह से जैसे उसकी गांड पर दबाव दे रहा था वैसे वैसे अपनी कमर को नीचे की तरफ ला रही थी,,,, शुभम ठीक अपने लंड की सामने शीतल की बुर को ले आया और अब थोड़ा सा तो उसकी बुर पर लगाकर अपने लिए जगह बनाने लगा हालांकि इस दौरान भी उसकी कमर चल रही थी और वह अपनी मां को चोद रहा था,,,, देखते ही देखते वह एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर अपनी मां की पुर से बाहर खींच लिया,,,, जैसे ही निर्मला को अपनी बुर में से लंड बाहर निकलता हुआ वह महसूस हुआ वह पागलों की तरह अपना सिर उठाकर शीतल की दोनों टांगों के बीच से अपने बेटे के लंड को देखने लगी,,, जोकि शुभम अपने लंड को शीतल की बुर पर एडजेस्ट कर रहा था,,,, शीतल गहरी सांसें लेते हुए उत्सुकता वस पीछे की तरफ सुभम की हरकत को देख रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, क्योंकि मैं समझ गई थी कि सुभम अब एक साथ दोनों की बुर को चोदना चाहता है,,,, देखते ही देखते शुभम अपना पूरा लंड शीतल की बुर में डाल दिया,,, शीतल को दर्द का अनुभव होने लगा क्योंकि उत्तेजना में ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया है,,, लेकिन थोड़ी ही देर में उसे मज़ा आने लगा,,,, शुभम शीतल को चोद रहा था और निर्मला शीतल की चूचियों को दबा रही थी दोनों को मजा आ रहा था नीचे से बिना कुछ बोले निर्मला अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाकर बार-बार शुभम को उसकी बुर में लंड डालने का इशारा कर रही थी जो कि शुभम भी अच्छी तरह से समझ रहा था और अपनी मां के इशारे का मान रखते हुए व शीतल की बुर में से अपना लंड निकाल कर अपनी मां की बुर में पेल दिया,,, अब वह एक साथ दो दो बुर्का मजा ले रहा था औरत को वह एक साथ दोनों तरफ से चोद रहा था अपनी मां को आगे से चोद रहा था और शीतल को पीछे से चोद रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था जिंदगी में पहली बार बार इस पोजीशन का भरपूर फायदा उठा रहा था,,,, जब जब वह अपनी मां की बुर में लंड डालकर उसे चोदता तब वह शीतल की बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर ऊपर की तरफ उठा देता और उसकी बुर को चाटना शुरू कर देता और उस दौरान लगातार अपनी मां की बुर में अपना लंड पेलता रहता,,, और जैसे ही अपनी मां की बुर में से लंड निकालता तो शीतल की गांड को पकड़कर नीचे की तरफ ले आता और उसकी बुर में लंड डाल देता,,,
पूरे कमरे में तीनों की गरम सिसकारियां गूंज रही थी लेकिन इसी सिसकारी को सुनने वाला कोई नहीं था क्योंकि कमरा चारों तरफ से बंद था और खिड़कियों पर शीशा लगा हुआ था जिससे आवाज बाहर जाने की गुंजाइश बिल्कुल भी नहीं थी,,,, तीनों की सांसे तेज चल रही थी तीनों चरम सुख के बेहद करीब हो गए थे,,,
शीतल की सांसे और तेज चलने लगी और उसके मुंह से गरम सिसकारी के साथ-साथ,,, गालियां निकलने लगी,,,।
मादरचोद भोसड़ी वाले और जोर जोर से धक्के लगा फाड़ दे मेरी बुर को मेरी बुर का भोसड़ा बना दे,,,,आहहहहहहह,, मेरे राजा क्या मस्त चोदता है रे तू और जोर जोर से चोद मेरा निकलने वाला है,,,।

तू बिल्कुल भी चिंता मत कर रंडी छिनाल,,, आज मैं अपने लंड से तेरी बुर को चोद चोद कर पानी पानी कर दूंगा,,, साली हरामजादी बहुत आनंद लेने का शौक है ना तेरा आज तेरा शौक पूरा कर दूंगा,,,

शुभम की गाली देते हुए जोर-जोर से अपने लंड को शीतल की बुर में डालने लगा और अगले हई भलभलाकर पानी छोड़ दी शीतल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी थी,,,, उसकी जवानी की आग शांत हो चुकी थी लेकिन शीतल की गर्म जवानी को बुझते हुए देखकर निर्मला की बुर में कुछ ज्यादा ही सोले भड़क रहे थे,,, वह बार-बार अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा दे रही थी शीतल को निपटाने के बाद,,, शुभम अपनी मां की कमर को थाम ता हुआ बोला,,,।

तू चिंता मत कर भोंसड़ी की आज तेरी बुर को भोसड़ा बना दूंगा,,,( इतना कहते हुए सुबह में एक बार फिर से अपनी मां की बुर में समा गया और उसकी कमर को थामे हुए उसको चोदना शुरू कर दिया,,, शुभम के धक्के इतनी जबरदस्त थी कि किंग साइज का बेड भी चरमरा रहा था,,, शीतल अभी भी उसी तरह से निर्मला के ऊपर छाई हुई थी उसकी दोनों चूचियों को दबा रही थी देखते ही देखते 15 20 धक्कों में ही निर्मला का पानी निकल गया और शुभम भी चरम सुख के बेहद करीब था उसका भी पानी निकलने वाला था वजह से ही उसे एहसास हुआ कि उसका पानी निकलने वाला है इस बार वह अपनी मां के अंदर अपना पानी ना डालते हुए लंड को बाहर निकाल लिया और अपने लंड का पानी शीतल के पिछवाड़े पर गिराना शुरू कर दिया,,,।

चुदाई की पहली पारी समाप्त हो चुकी थी रात के 12:00 बज रहे थे लेकिन अभी भी रात बाकी थी,,,।
 
पहली बारी समाप्त हो चुकी थी दूसरी इनिंग शुरू करने के लिए,,, तीनों को थोड़ी एनर्जी की जरूरत थी,,, तीनों एक ही बिस्तर पर निर्वस्त्र अवस्था में पड़े हुए थे तीनों अपने बदन की गर्मी को अपने-अपने नाजुक अंगों से बाहर निकाल फेंके थे,,,, शीतल के पिछवाड़े पर शुभम का माल गिरा हुआ था जिसे वह,,, पास में पड़ी पेंटी उठाकर साफ करने लगी अभी भी तीनों की गहरी गहरी सांसे चल रही थी,,, सांसो की गति के साथ निर्मला की बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी शीतल भी उसके बगल में लेट गई थी,,,, उसकी भी दोनों चूचियां सांसो की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी शुभम पलंग पर बैठे हुए नीचे पैर लटका कर गहरी गहरी सांसे लेता हुआ अपने लंड को देख रहा था जिसमें से अभी भी शीतल और उसकी मां का मदन रस चु रहा था,,,,।

औहहह मम्मी सच में मजा आ गया,,,, पहली बार एक साथ दो औरत को चोद कर इतना मजा आया है कि पूछो मत,,, ऊफफफ,,, अभी भी पूरे बदन में गनगनाहट हो रही है,,,आहहहह,,,, कितना मजा आ रहा था एक की बुर में डालकर फिर दूसरे की बुर में डालो,,, आंखों के सामने दो दो नंगी औरत किस्मत वालों को यह सब मिलता है दो दो बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गांड,,,, क्या किस्मत पाई है मैंने,,,।
( शुभम एकदम खुश होकर बोले जा रहा था और उसे खुश होता हुआ देखकर निर्मला के साथ-साथ शीतल भी प्रसन्न हो रही थी,,,, शीतल अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी हथेली को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर रखकर रगड़ते हुए बोली,,,,।)

हमें भी तो बहुत मजा आया शुभम मैं तो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि किसी मर्द के पास ऐसा लैंड भी होगा जो एक साथ दो दो औरतों की प्यास बुझाएगा,,, वरना यहां तो दो-दो नंगी औरत को देखते ही सामने वाले का पानी निकल जाए लेकिन तू तो पक्का मर्द है एक साथ मेरी ओर खुद की मां की बुर की प्यास मिटा दिया,,,, अच्छा एक बात बताना शुभम क्या तू अपने लंड की सरसों के तेल से मालिश करता है क्या,,,?

नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं है,,,( शुभम अपने लंड को पकड़ कर उसपे लगे दोनों औरतों के मदन रस की बूंदों को गिराने के लिए झटक ते हुए बोला,,,।)

कुदरती ताकत से भरपूर है मेरे बेटे का लंड,,,,,( निर्मला गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

सच में निर्मला तू किस्मत वाली है जो तुझे शुभम जैसा बेटा मिला,,,,

तो तू भी पैदा कर ले शुभम जैसा,,,।

इतने साल तो गुजर गए मां बनने की उम्मीद धुंधली होती जा रही है,,, अब नहीं लगता कि मैं कभी मां बन पाऊंगी,,,
( शीतल उदास होते हुए बोली लेकिन अभी भी वह अपनी गुलाबी बुर की पतियों को अपनी हथेली से मसल रही थी,,।)

भगवान की मर्जी के आगे किसका बस चलता है,,,( निर्मला शीतल को सांत्वना देते हुए बोली,,,, शुभम यह सब सुन रहा था लेकिन उनकी बातों का उस पर जरा भी फर्क नहीं पड़ रहा था,,,। दीवार पर टंगी घड़ी में 12:00 बज रहे थे,,,,,, बाहर पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था शुभम उसी तरह से बिस्तर पर से उठा और खिड़की के करीब पहुंच गया जहां से उसे बाहर का नजारा साफ नजर आ रहा था बाहर अभी भी बर्फ गिर रही थी,,,, बाहर गिर रही बर्फ को देखकर शुभम भी हैरान था कि बाहर कड़ाके की ठंडी पड़ रही थी लेकिन कमरे के अंदर वह और उसकी मां और शीतल बिना कपड़ों के एकदम नंगे बिस्तर पर लेटे हुए थे शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि वाकई में औरत के बदन की गर्मी बर्फ के पहाड़ को भी पिघला सकती है,,, वह मन ही मन खुश था इस बात से कि उसकी मां बहुत खूबसूरत और जवान बदल की मालकिन थी जिसका वह भरपूर मजे ले रहा था,,।

शुभम खिड़की पर खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था और शीतल और निर्मला शुभम की तरफ देख रहे थे शुभम का हट्टा कट्टा गठीला बदन दोनों को मनमोहक लगता था उसकी चौड़ी छाती मजबूत बाहें मोटी कसी हुई जांगे और उसके गोलाकार नितंब शीतल और निर्मला दोनों को भाता था,,,। और शुभम की सबसे ज्यादा खास चीज उसकी टांगों के बीच लटकता हुआ उसका धारदार खंजर जिसकी चोट जानलेवा तो नहीं लेकिन जिंदगी का असली सुख का मजा दे जाती थी,,,, और वही लटकता हुआ खंजर शीतल और निर्मला दोनों का पसंदीदा अंग था,,,। शिमला आकर तीनों में जबरदस्त बदलाव आया था,,,। निर्मला तो अपनी इस बदलाव से काफी खुश और संतुष्ट नजर आ रही थी वह मन ही मन सोच भी रहे थे कि जिंदगी का असली मजा तो इसी तरह से आता है,,,।

शीतल लगातार अपनी बुर को मसल रही थी,,, और बुर को मसलते मसलते उसे जोरों की पेशाब लग गई,,,, कमरे में भी बाथरूम की सुविधा उपलब्ध थी इसलिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं थी और इसलिए शीतल बिस्तर पर से उठी और नंगी ही बाथरूम की तरफ जाने लगी,,, निर्मला को नहीं मालूम था कि वह मुतने जा रही है इसलिए वह बोली,,,।

कहां जा रही है शीतल,,,?

मुतने जा रही हूं बड़े जोरों की आई है,,,, करना हो तो तू भी आजा,,,,( इतना कहकर शीतल बाथरूम में घुस गई और दरवाजा बंद कर ली,,,, शीतल के मुंह से मुतने वाली बात सुनकर शुभम के बदन में एक बार फिर से गर्मी छाने लगी,,, शीतल की बात का असर निर्मला पर भी हो रहा था वह भी अपनी दोनों टांगों के बीच अपना हाथ ले जा करके अपनी गुलाबी कचोरी को मसलने लगी,,, शुभम अपनी मां की हरकत को देख कर उसकी तरफ मुंह कर लिया और अपने नितंबों को खिड़की के दीवार से सटा दिया और बड़े आराम से अपनी मां की कामुकता भरी हरकत को देख रहा था,,, बाथरूम के अंदर शीतल के मन में खुराफात चल रही थी वह बाथरूम के अंदर ठीक दरवाजे के सामने बैठी हुई थी दरवाजे की तरफ गांड करके,,,, तभी उसके मन में खुराफात उठी और वह हाथ ऊपर की तरफ लाकर दरवाजे की कुंडी खोल कर दरवाजा खोल दी,,,, दरवाजा खोलने की आवाज के साथ ही शुभम और निर्मला दोनों की नजर बाथरूम में गई तो बाथरूम के अंदर का नजारा देखकर दोनों दंग रह गए,,,, शीतल उन दोनों की आंखों के सामने बैठकर पेशाब कर रही थी उसकी बड़ी बड़ी गांड ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और भी ज्यादा चमक रही थी,,,,

यह नजारा देखते ही शुभम के तन बदन में खलबली मचने लगी पल भर में ही ढीला हो रहा लंड टाइट होना शुरू हो गया,,,, शीतल की बड़ी बड़ी गांड और उसे पेशाब करते हुए देखकर निर्मला के टांगों के बीच सुरसुरी पैदा होने लगी,,,।
शुभम से रहा नहीं गया और वह बाथरूम की तरफ जाने लगा,,, इतना कुछ शीतल के साथ उसकी मां की आंखों के सामने हो जाने के बाद अब शुभम को नहीं लगता था कि कुछ भी करने के लिए उसकी मां की इजाजत नहीं पड़ेगी क्योंकि उसकी मां की भी सहमति शामिल थी,,,।

औरत को पेशाब करता हुआ देखना शुभम की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक थी अब तो कुछ नहीं ना जाने कितनी औरतों को इस तरह से अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब करते देख चुका है और ज्यादातर औरतें उसे खुद पेशाब करते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड का नजारा दिखाती थी उनमें से अब शीतल भी एक थी,,,,। शीतल कामुक नजरों से पेशाब करते हुए पीछे की तरफ देख रही थी,,,।
पर शीतल की आंखों के सामने ही शुभम भी बाथरूम में प्रवेश कर गया,,,, भला निर्मला कहां पीछे रहने वाली थी कामुकता भरे नजारे को देख कर उसके तन बदन में भी खलबली मची हुई थी उसे रानी क्या हुआ बिस्तर से उठ कर देखते ही देखते ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को मटकाते हुए बाथरूम के अंदर पहुंच गई,,,,।
आहहहहह अद्भुत अतुलनीय बेमिसाल जबरदस्त नजारा बाथरूम के अंदर बना हुआ था शीतल अभी भी बैठी हुई थी ठीक उसके बगल में निर्मला खड़ी थी और उन दोनों के सामने शुभम खड़ा था जिसका लंड अब दोनों मटकती गांड को देखकर खास करके शीतल को पेशाब करता हुआ देखकर एकदम खड़ा हो गया था,,,,।

तुम दोनों को भी पेशाब लग गई क्या,,,?

गांड खोलकर मुतोगी तो,, भला अपने आप पर कोन काबू कर पाएगा,,,, मुझसे तो रहा नहीं किया तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड और साथ में तुम्हारी बुर से निकल रही सीटी की आवाज सुनकर मैं पागल हो गया और तुम्हारे पीछे पीछे बाथरूम में आ गया शायद मम्मी भी तुम्हारी मदमस्त गांड देखकर अपने आप को संभाल नहीं पाई और इधर आ गई,,,( शुभम अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,।)

तू सच कह रहा है शुभम वैसे तो मुझे पेशाब नहीं लगी थी लेकिन शीतल को इस तरह से अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करते हुए देखकर मुझको भी प्रेशर आ गया,,,,

तो देर किस बात की है पेशाब करना शुरू करो,,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी खड़े लंड में से पेशाब की धार मारने लगा,,, लेकिन निर्मला के मन में कुछ और चल रहा था आज बैठकर पेशाब नहीं करना चाहती थी आज कुछ और करना चाहती थी उसे अपने बेटे के लंड में से पेशाब निकलता हुआ साफ नजर आ रहा था,,, यह देखकर निर्मला की बुर कुलबुलाने लगी,,,, शीतल का भी यही हाल था व नीचे बैठे हुए ही शुभम की तरफ देख रही थी जो कि अपने खड़े लंड को अपने हाथ में लेकर जोर-जोर से हिलाता हुआ पेशाब कर रहा था उसके झूलते हुए लंड को देखकर शीतल के घुटनों में कपकपी दौड़ गई,,,, पर उसे दर्द महसूस होने लगा तो वह खड़ी हो गई,,,।
निर्मला क्या करने वाली है यह दोनों को नहीं पता था निर्मला अपनी बेटे को पेशाब करते हुए और खास करके उसके हिलते हुए लंड को देखकर पूरी तरह से कामोत्तेजना से भर चुकी थी,,,, शुभम ठीक है अपनी मां के सामने खड़ा था निर्मला की आंखों के सामने उसके बेटे का लंड था जो कि ठीक उसकी बुर के सिधान पर था,,, निर्मला बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहती थी उसके अंदर भी बराबर का प्रेशर बना हुआ था और वह अपने बेटे की आंखों में झांकते हुए अपनी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से अमृतमयी पेशाब की धार अपने बेटे के लंड पर मारने लगी,,,,,आहहहहह गजब,,,,( अपने खड़े लंड पर अपनी मां के पेशाब की धार को महसूस करते ही शुभम के मुंह से एकाएक निकल गया वह पूरी तरह से तृप्त हो चुका था एक अद्भुत एहसास से उसका पूरा बदन कसमसा ने लगा था निर्मला के साथ-साथ शुभम के लिए भी यह पहला मौका था जब दोनों इस तरह की उत्तेजनात्मक स्थिति से गुजर रहे थे पहली बार शुभम अपने लंड के ऊपर किसी औरत के पेशाब की धार को गिरते हुए देख रहा था और वह भी अपनी ही मां की बुर से निकल रहे पेशाब की धार को यह नजारा देखकर शीतल के तन बदन में आग लग गई निर्मला अपने बेटे से चुदवाती है यह बात तो वह हजम कर ले गई थी लेकिन निर्मला कि इस तरह की कामुकता उससे बिल्कुल भी हजम नहीं हो रही थी वह तो पूरी तरह से मदहोश होने लगी शायद यह निर्मला पर बियर का और मदहोश जवानी का असर था जो कि वह इतनी ज्यादा खुल चुकी थी,,,, निर्मला की आंखों में खुमारी साफ नजर आ रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बीयर नहीं बल्कि चार बोतलों का नशा करके बैठी हो,,,, अपने बेटे की तरफ देखकर मदहोशी में वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,,, शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी शुभम अब अपने लंड को हिला नहीं रहा था बल्कि अपनी मां की बुर में से निकल रही पेशाब की धार ठीक उसके लंड पर ही गिरे इसलिए ठीक से अपने लंड को पकड़े हुए था,,,। निर्मला अपनी उत्तेजना को काबू में नहीं कर पा रही थी,, अपने दहकते होठों को अपने बेटे के प्यासे होंठों के करीब ले जाकर उसके होंठ को अपने होंठों में दबा कर चूसना शुरु कर दी,,,,

आहहहहह,,,, ऊफफफ,,,,, यह नजारे को देखकर शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी फूट रही थी वह अपनी बुर को मसलते हुए गोल गोल अपने नितंबों को घुमा रही थी,,, उसे भी रहा नहीं गया पेशाब कर चुकी थी लेकिन मां बेटे दोनों की कामुकता भरी हरकत को देख कर उसे भी प्रेशर आने लगा और वह भी अपने पेशाब की धार को शुभम के लंड पर मारने लगी दोनों के पेशाब की धार इतनी तेज थी कि शुभम का लंड ऊपर नीचे हिल जा रहा था लेकिन बेहद आनंद की अनुभूति भी उसे हो रही थी यह तीनों के लिए अद्भुत एक अविस्मरणीय एहसास की तरह,,,,। निर्मला जिस तरह से अपने बेटे के होंठों को चूस रही थी शुभम पूरी तरह से पागल हो गया उसके ऊपर मदहोशी जाने लगी और अब अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की नंगी चूची को पकड़कर दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह अपनी मां को अपनी बाहों में ले लिया हालांकि अभी भी दोनों के नाजुक अंगों में से पेशाब की धार फूट रही थी,,,, शुभम अपनी मां के लाल लाल होठों को चूसता हुआ अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड को मसलना शुरू कर दिया शुभम के तन बदन में इतनी ज्यादा उत्तेजना फैल गई थी कि अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,,
दोनों मां-बेटे की उत्तेजना को देखकर शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी वह खुद ही अपनी बुर को मसल रही थी,,, देखते ही देखते सुबह अपनी मां की गांड को मसलता हुआ उसे बाथरूम में दीवार के करीब ले जाकर दीवार से सटा दिया,,, शुभम अपने लिए पूरी तरह से पोजीशन बना लिया था,, वह अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़ कर दीवार से सट आए हुए हैं उसकी मोटी मोटी टांगों को अपनी कमर से लपेट लिया था,,,, एक बार फिर से शीतल शुभम की ताकत और उसकी तेजी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गई थी अभी भी सीतल शुभम की भरपूर मर्दाना ताकत को समझ नहीं पाई थी,,,।
शुभम पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में लंड डालने के लिए लेकिन अभी भी उसकी मां की बुर से पेशाब की धार निकल रही थी,,, शुभम पेशाब सहित अपनी मां की रसीली बुर में अपना लंड पेल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया,,, शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में वह अपनी मां की भरपूर चुदाई कर रहा था,,, निर्मला का संपूर्ण बदन खास करके उसकी बड़ी बड़ी गांड शुभम के दोनों हाथों के बीच झूल रही थी और शुभम के खुंटे का सहारा पाकर वह एकदम डटी हुई थी,,, शुभम का हर धक्का निर्मला को जन्नत की सैर करा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे शुभम उड़न खटोला बनकर अपनी मां को उस पर बिठाए हुए हवा में लेकर उड़ रहा हो,,,, दोनों की मजबूत मांसल जाएंगे जब एक दूसरे से टकराती थी तो उनमें से ऐसी मधुर मादक आवाज आती थी मानो कि कोई तबला वादक बहुत ही ताल में तबला बजा रहा हो,,,, शुभम की हर थाप पर निर्मला की आह निकल जा रही थी जो कि बेहद मधुर संगीत की तरह मादक लग रही थी शीतल पूरी तरह से हैरान थी शुभम की मजबूत भुजाओं की ताकत को देखकर शीतल अपनी आंखों से देख रही थी कि कैसे शुभम अपनी मजबूत भुजाओं में अपनी मां की भारी-भरकम शरीर को उठाए हुए खूटे की तरह उसकी बुर में लंड पेल रहा था,,,।
और उसे उठाने में शुभम को जरा भी दिक्कत नहीं आ रही थी यह देखकर शीतल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी बुर कुलबुलआने लगी,,,, एक अजीब सा एहसास शीतल को अपनी बुर के अंदर महसूस हो रहा था वह अपनी बुर की तरफ नजर झुका कर देखी तो एकदम कचोरी की तरह खुली हुई थी जो कि उत्तेजना के मारे फूल पीचक रही थी,,,।

धीरे-धीरे घड़ी अपनी धुरी में घूम रही थी एक बजने वाला था लेकिन तीनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,, उत्तेजना के मारे निर्मला का गला सूखता जा रहा था उसकी आहा के साथ उसके चेहरे की रंगत हर पल बदलती जा रही थी उत्तेजना के मारे उसका गोरा गाल सुर्ख लाल हो चुका था,,,,

और जोर जोर से चोद मादरचोद बड़ा दम है तेरे में भोसड़ी के और जोर-जोर से पेल मेरी बुर में अपना लंड,,,,

साली रंडी इतनी जोर जोर से चोद रहा हूं फिर भी तुझे कम पड़ रहा है रुक अभी बताता हूं,,,,।

इतना कहने के साथ ही शुभम जोर जोर से धक्के लगाने लगा इतनी जोर जोर की निर्मला की जांघों के मांस का घेराव पानी में फेंके गए कंकड़ की तरह पानी की तरह लहर मार रहा था,,, यह देखकर शीतल की हालत खराब हो रही थी जिस जोश के साथ शुभम अपनी मां को चोद रहा था और जिस शिद्दत से निर्मला अपने बेटे से चुदवाया ही थी यह देखकर शीतल के पसीने छूट जा रहे थे,,, वाकई में इस तरह का सीन उसने आज तक पोर्न मूवीस में भी नहीं देखी थी आज आंखों से पोर्न मूवी से भी जबरदस्त और बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारा देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,। वह शुभम की तरफ आगे बढ़ी है और उसके नितंबों पर हाथ रखकर उसे हल्के हल्के दबाते हुए बोली,,,।

तुम मां बेटे की चुदाई देखकर मेरी बुर में चीटियां रेंग रही है,,, शुभम मुझे भी अपनी बुर में तुम्हारा लंड लेना है मेरी बुर से पानी फेंक रहा है,,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल इतनी ज्यादा चुदवाती हो गई थी कि शुभम के ठीक पीछे अपने बदन को सटाकर उसके नितंबों के बीचो बीच अपनी समोसे जैसी फूली हुई बुर को उसके नितंबों से रगड़ना शुरु कर दी यह एहसास शीतल के साथ-साथ शुभम के लिए भी अद्भुत था उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर उसके नितंबों से रगड़ खा रही थी जिसका एहसास शुभम को बराबर हो रहा था,,,, और इस अद्भुत अहसास से भर कर वह अपनी मां की बुर में और जोर से लंड पहनने लगा देखते ही देखते निर्मला की सिसकारी की आवाज तेज हो गई और शुभम अपनी मां की बुर में लंड पेलता हुआ बोला,,,।

शीतल मादरचोद रंडी मेरी छिनार तेरा नंबर भी आएगा तेरी बुर में भी अपना लंड ऐसा पेलूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेगी,,, साली रंडी बस अपनी बुर को मेरी गांड से रगडते रहे मुझे गर्माहट दे,,,,,( इतना सुनते ही सीतल और भी उत्तेजना के साथ अपनी बुर को उसके नितंबों पर रगड़ने लगी,,,,,) आहहहह,,,आहहहहहहह,,,, शीतल मेरी जान तूने तो मुझे मस्त कर दिया रे बस,,, अपनी मां को निपटा दूं
तब तुझको भी रगडुंगा,,,,,

जल्दी से निपटा अपनी मां को मादरचोद मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,आहहहहह,,,आहहहहहह शुभम मेरे राजा मेरे सरताज बहुत मजा आ रहा है मुझे,,,,( ऐसा कहते हुए शीतल उत्तेजना के मारे जिस तरह से शुभम जोर जोर से अपनी कमर हिला था वह अपनी मां को चोद रहा था उसी तरह से शीतल भी अपनी कमर को आगे पीछे करके शुभम के नितंबों को चोदने लगी,,, निर्मला भी यह सब अपनी आंखों से देख रही थी उसे भी शीतल की हरकत बेहद ऊन्मादक लग रही थी,,,। निर्मला मदहोश हुए जा रही थी,,,
वह अपनी रसीली जीभ से अपने प्यासे तपते हुए होठों को चाट रही थी यह देखकर शुभम अपने होंठ अपनी मां के लाल लाल होंठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया और लगातार उसे चौदे जा रहा था,,, शीतल की सहेली जो कि इस समय अमेरिका में ही रहती थी वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि शीतल शिमला घूमने के बहाने उसके बंगले का उपयोग अपनी वासना बुझाने के लिए चुदाई का खेल खेलने के लिए करेगी,,,,।

ससहहहहह आहहहहहहह ,ऊमममममम, ऊफफफ,,,,ओहहहह, शुभम,,आहहहहहहह,आहहहहहहह,,

इस तरह की गरम सिसकारीयो से पूरा बाथरूम गूंज रहा था,,,

ओहहहह,,, मेरे राजा मेरा बेटा मेरा राजा बेटा मेरा होने वाला है मेरा पानी निकलने वाला है बेटा और जोर से पेल आहहहहहहह मेरा बेटा और जोर जोर से धक्के लगा,,,,

अपनी मां की गरम सिसकारियां की आवाज के साथ साथ उसकी बातें सुनकर शुभम समझ गया कि उसकी मां चढ़ने वाली है इसलिए वह बराबर से अपनी मां की दोनों टांगों को पकड़कर अपनी दोनों हथेली से उसकी कमर को दबोच लिया और बराबर दीवार से सटाकर और जोर जोर से धक्के लगाकर चोदना शुरू कर दिया शुभम के थक्के इतनी तेज थे की निर्मला से सहन नहीं हो रहा था लेकिन उसका हर एक तक का उसे स्वर्ग का सुख दे रहा था और देखते ही देखते निर्मला झड़ने लगी,,, और झड़ने के साथ ही उसकी बुर की मांसपेशियां शुभम के लंड को अपनी बुर के अंदर ही जकड़ने लगी,,,, जिस तरह से उसकी मां झड़ रही थी उसका एहसास शुभम को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था उसका लंड पूरी तरह से उसकी बुर की अंदरूनी दीवारों के बीच फंसा हुआ था लेकिन फिर भी शुभम की ताकत बुर में लंड को अंदर बाहर करने में सक्षम हो रही थी,,,। वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसका गला उत्तेजना के मारे सूख चुका था लेकिन फिर भी शुभम इतने ज्यादा उत्तेजित था कि अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर नहीं निकाल रहा था और उसी में पेले जा रहा था,,, और पीछे उसके नितंबों पर अपनी बुर रगड़ रही शीतल उस की चुदाई देखकर तड़प रही थी,,,,

बस करो सुबह कुछ मेरे लिए भी बचाओगे या तुम भी झड़ जाओगे,,,,

ले आजा रंडी तू भी नंबर लगाए खड़ी है,,,,( निर्मला अपने बेटे के हाथ में से अपनी टांग को निकालकर नीचे रखते हुए बोली,,,) तेरी बुर में बहुत आग लगी है,,,,।

बहुत लगी है तू तो अपनी आग बुझा ली,,,,( इतना कहने के साथ ही शीतल आगे की तरफ आने लगी और निर्मला हटकर दूसरी तरफ खड़ी हो गई उसकी सांसे अभी भी तेजी से गहरी गहरी चल रही थी जिसे दुरुस्त करते हुए फिर मिला दो कदम पीछे हट कर आराम से दीवार से पीठ सटा कर खड़ी हो गई,,,, उत्तेजना के मारे शुभम का लंड दिल की धड़कन की तरह धड़क रहा था उसमें से निर्मला का मधुर रस नीचे टपक रहा था,,,। शुभम निर्मला का हाथ पकड़कर उसे अपने आगे लेने लगा इस बार वह शीतल को अपनी भुजाओं के सहारे गोद में नहीं उठाया बल्कि उसका मुंह दीवार की तरफ करके उसकी बड़ी-बड़ी गांड को अपनी तरफ खींच लिया,,, और शीतल शुभम के हाथों का खिलौना बनते हुए जैसे जैसे वह उसके बदन को अपने हिसाब से झुकाता गया ठीक वैसे ही सीतल अपने बदन को उसके हिसाब से एडजस्ट करने लगी देखते ही देखते शीतल की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड शुभम की आंखों के सामने और शुभम के मोटे तगड़े लंड के सिधान पर आ गई,,,, सबसे खूबसूरत और मदमस्त बदन की मल्लिका निर्मला की चुदाई करने के बाद भी शुभम ज्यो का त्यों डटा हुआ था,,, उसके लंड में जरा भी ढीलापन नहीं आया था यही तो शुभम की खासियत थी,,,,। आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था और ऐसे में दोनों मां-बेटे और शीतल बाथरूम के अंदर जवानी का मजा लूट रहे थे शीतल तो अपनी किस्मत पर इतराने लगे थे क्योंकि वह कभी नहीं सोची थी कि उसकी जिंदगी में इतना अद्भुत सुख उसे से प्राप्त होगा,,,,।
शीतल पीछे की तरफ नजरें करके शुभम की हरकत को देख रही थी जो कि इस समय अपने लंड को खिलाता हुआ उसकी तरफ आगे बढ़ रहा था और देखते ही देखते उसकी गुलाबी पुर की गुलाब की पत्तियों के बीच रखकर अपने दोनों हाथ से उसकी भारी-भरकम नितंबों को पकड़कर अपनी कमर पर दबाव देता हुआ उसे आगे की तरफ फैलने लगा पहले से ही मलाई से गीली हो चुकी शीतल की बुर में लंड का स्वागत करने लगे और देखते ही देखते उसका स्वागत करते हुए उसे अपने शयन कक्ष के अंदर उतार ली,,, जहां पर ढेर सारी तपन और गर्मी महसूस हो रही थी और यही तो एक रास्ता था शिमला की कड़कड़ाती ठंडी से बचने के लिए,,,, शिमला की कड़कड़ाती ठंडी में एक यही एक ऐसी सुरंग की गुफा थी जिसके अंदर दुनिया भर का सुकून और शांति मिलती थी,,,। किसी कातिल ठंडी में जीवन को रक्षण मिलता था शुभम अपने मोटे तगड़े नंबर को शीतल की गर्माहट बड़ी सुरंग में डालकर अपनी जिंदगी को एक नया आयाम दे रहा था जिसमें शुभम को तो सुकून मिल रहा था लेकिन शीतल को भी तृप्ति का एहसास हो रहा था इस सुख के आगे औरतों को और मर्दों को दुनिया का हर सुख फीका लगता था और फिर क्या था अभी जिंदगी में औरत और मर्द को अगर संभोग सुख प्राप्त ना हो तो उसका जीवन व्यर्थ होता है,,,। और इस समय मां बेटे और शीतल तीनों अपने जीवन को सार्थक करते हुए चुदाई का भरपूर आनंद लूट रहे थे शुभम को औरतों की पीछे से चुदाई करने में बेहद आनंद की प्राप्ति होती थी और शायद औरत को भी इस पोजीशन में चुदवाने का परम आनंद महसूस होता था क्योंकि इस पोजीशन में लंड पूरी तरह से बुर की गहराई नाप लेती है,,,।

शुभम का लंड इस समय शीतल की दूर की गहराई नापते हुए उसके बच्चेदानी में चोट लगा रहा था जिससे शीतल का आनंद दोगुना हो जा रहा था,,, बच्चेदानी पर लंड का ठोकर लगना यह अद्भुत एहसास सीतलपुर शुभम से मिलने के बाद ही महसूस हो रहा था वरना इस बारे में वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह का सुख भी होता है औरत की जिंदगी में जो कि मर्दों पर ही आधारित रहता है वरना शीतल की बुर की चुदाई शुभम के लंड से आधा भी नहीं होगा,,, ऐसे अधूरी लंड से चुदाई कर भला शीतल अपनी जवानी को कैसे अपने काबू में रख पाते फिर भी बड़ी हिम्मत करके इतने साल तक शीतल अपनी जवानी को बरकरार रखे हुए थे उस पर दाग लगने नहीं दी थी लेकिन शुभम के आगे वह पूरी तरह से अपने दामन बिछा दी थी,,,।

शुभम का हर एक जबरदस्त धक्का शीतल को अद्भुत सुख से भर दे रहा था शीतल पीछे खड़ी दीवार से अपनी पीठ सताए हुए इस अद्भुत दृश्य का लुफ्त उठा रही थी उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं कर रहे थे क्योंकि शुभम इतना जबरदस्त सीकर की चुदाई कर रहा था कि निर्मला के पास बोलने लायक शब्द नहीं बचे थे ऐसा लग रहा था कि मानो बल्लेबाज क्रीज पर पूरी तरह से चमके और सामने वाली टीम के परखच्चे उड़ा रहा हो,,, हर बोल को अपने बल्ले से चौका छक्का लगा रहा हो,,, शीतल शुभम की इस अद्भुत पारी से पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी,,,, शीतल के पास बोलने के लिए एक भी शब्द नहीं बचे थे बस उसके मुंह से शब्द की जगह गर्म सिसकारी की आवाज फुट रही थी शुभम के धक्के इतनी तेज थे की शीतल की गांड एकदम लाल हो चुकी थी,,,, बड़ी शिद्दत से शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड शीतल की बुर की गहराई नाप कर बाहर आ रहा था,,, पर देखते ही देखते शीतल का भी काम तमाम हो गया शीतल के झड़ने के तुरंत बाद शुभम भी झड़ गया,,,,,

तीनों को मजा आ गया था तीनों तृप्त हो चुके थे एक बार फिर तीनों एक साथ पेशाब करके बाथरूम से बाहर आ गए शीतल तो बिस्तर पर पढ़ते ही एकदम चारों खाने चित हो गई निर्मला का भी यही हाल था लेकिन शुभम बिल्कुल भी थका नहीं था,,,। शीतल थोड़ी ही देर में गहरी नींद में सो गई बहुत पेट के बल सोई हुई थी जिससे उसकी बड़ी बड़ी गांड छत की तरफ उभरी हुई नजर आ रही थी,,,। निर्मला कि पूर्व में हल्का हल्का दर्द हो रहा था इसलिए वह अपनी दोनों टांगे फैलाकर नींद की आगोश में चली गई थोड़ी देर बाद शुभम बिस्तर पर से उठा और एक नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर डाला तो रात के 3:00 बज रहे थे,,,। शीतल की बड़ी बड़ी गांड देखकर शुभम के लंड में एक बार फिर से तनाव आने लगा,,,, एक बार फिर से अपनी मां के दोनों टांगों के बीच जगह बनाने लगा लेकिन उसकी मां उसे नींद में ही हटाते हुए बोली,,,।

सो जा सुभम मुझे नींद लग रही है,,,,

( शुभम बेमन से अपनी मां की बात को मानते हुए वह भी रजाई खींचकर तीनों पर ओढा दिया और अपना एक हाथ अपनी मां की दोनों टांगों के बीच मेंले जाकर अपनी मां की बुर सहलाते हुए नींद की आगोश में चला गया,,,, इसी तरह से शुभम शुभम की मां और शीतल तीनों रोज चुदाई का मजा लेते रहे,,, कब 1 सप्ताह बीत गया यह उन्हें भी पता नहीं चला इस बीच वह तीनों ने पूरा सिमला घूम लिया था,,, लेकिन इस बीच शुभम को एक भी मौका नहीं मिला था कि वह घर की नौकरानी शांति की बुर में अपना लंड डाल सकें शांति भी शुभम के लंड के लिए तड़प रही थी,,,,।)
 
तीनों शिमला में आकर संपूर्ण रुप से संतुष्टि का अहसास और एक नयापन महसूस कर रहे थे 1 सप्ताह के अंदर ही तीनों जिंदगी का असली मजा लूट चुके थे,,, शुभम अपनी जिंदगी से बेहद खुश नजर आ रहा था एक हाथ में लड्डू तो दूसरे हाथ में पेड़ा था,,, शुभम बारी-बारी से अपनी मां और शीतल दोनों की मदमस्त जवानी को अपने हाथों से लुट रहा था,,,।

ऐसे ही 1 दिन दोपहर के 2:00 बज रहे थे,,, शुभम काफी उत्साहित नजर आ रहा था क्योंकि उसकी पेंट में बवंडर उठ रहा था उसे घर से बाहर जाना था और शीतल और उसकी मां आराम कर रहे थे तीनों ड्राइंग रूम में ही थे सोफे पर एक तरफ निर्मला तो दूसरे सोफे पर शीतल लेटी हुई थी,,, शुभम बार-बार खिड़की से बाहर झांक रहा था बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी मौसम एकदम ठंडा और सुहावना नजर आ रहा था,,,। निर्मला अपने बेटे की कुतुहुलता को समझ नहीं पा रही थी,,, वह अपने बेटे से बोली,,,।

शुभम आराम कर ले बेटा रात को फिर जागकर मेहनत ही करनी है,,,।

आराम हराम है मम्मी,,,( शुभम खिड़की से बाहर झांकता हुआ बोला,,।)

क्या,,,,( निर्मला आश्चर्य जताते हुए बोली,,।)

मेरा मतलब है कि मम्मी यहां पर हम घूमने आए हैं और इसका से सोकर आराम करते रहे तो मतलब ही क्या रहेगा,,,

तो,,,( निर्मला फिर से आश्चर्य से बोली,,,)

तो क्या मम्मी मुझे घूमना है,,,।

बाहर हल्की हल्की बर्फ गिर रही है,,,।

तो क्या हुआ मम्मी मुझे कुछ नहीं होने वाला ऐसी ही हल्की हल्की बर्फ में तो घूमने का मजा आता है,,,।

तो यहां के रास्ते से अनजान है कहां घूमेगा,,,

मैं सब जानता हूं मम्मी बस एक-दो घंटे में लौट आऊंगा आखिरकार इधर आया हूं कि थोड़ा बहुत घूमने का मजा तो ले लूं,,,,

जाने दे यार यह बच्चा नहीं है,,, थोड़ी देर घूम कर चला आएगा,,,( शीतल सोफे पर आधी नींद में लेटे-लेटे ही बोली,)

ठीक है लेकिन जल्दी आ जाना और मोबाइल लेकर जाना,,,( निर्मला भी अपनी तरफ से इजाजत देते हुए बोली शुभम एकदम खुश नजर आ रहा था वह जल्दी से अपना मोबाइल लेकर अपने पेंट की जेब में डाल लिया और एक ओवरकोट पहन लिया और माथे पर है लगा लिया था की गिरती हुई बर्फ से थोड़ी रक्षण हो सके,,,।)

थैंक्यू मम्मी मैं जल्दी लौट आऊंगा,,,( इतना कहने के साथ ही वह बाहर निकल गया,,, शुभम काफी खुश नजर आ रहा था अपने घर के गेट से बाहर निकलकर वह जैसे ही सड़क पर आया वह अपनी जेब में से एक कागज की चीट निकाला और उस पर लिखे हुए पते को पढ़ने लगा,,, शांति उसे कागज की चीज चोरी से हम आते हुए बता दी थी कि लगभग लगभग 15 मिनट का रास्ता पैदल चलने से था,,,, और आज सुबह ही वह शुभम के हाथों में अपना पता लिखकर कागज की पर्ची थमा दी थी,,,, क्योंकि शांति के भी तन बदन में शुभम को अपने अंदर महसूस करने की तड़प जाग रही थी,,, जिस तरह से वह उसका हाथ पकड़कर बड़े से पेड़ के पीछे ले गया था और अपनी मनमानी करते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसे चोदने की पूरी तैयारी कर चुका था उसकी हिम्मत देखकर घर की नौकरानी शांति उस पर पूरी तरह से मेहरबान होने की ठान ली थी,,, शुभम की हिम्मत और मर्दाना ताकत से भरपूर उसके मजबूत अंग को देखकर उसे अपनी टांगों के बीच में सोच कर के वह पूरी तरह से शुभम के आगे अपने घुटने टेक दी थी,,, अगर कार की लाइट का फॉक्स उन दोनों पर उस रात ना पड़ा होता तो शांति उस दिन शुभम जैसे नौजवान लड़के के साथ संभोग सुख भोग चुकी होती,,, क्योंकि घर पर पहुंचने पर शुभम की हरकतों के बारे में सोचकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,, वह भी जल्द से जल्द शुभम से मिलकर अपने तन की प्यास बुझा ना चाहती थी और वह बंगले पर ही अपनी प्यास बुझाने के मूड में थी लेकिन शीतल निर्मला की मौजूदगी में ऐसा होना संभव बिल्कुल भी नहीं था,,, इसलिए थक हारकर वह ना चाहते हुए भी उसे अपने घर बुला रही थी क्योंकि आज के दिन उसके घर पर कोई नहीं था वह शाम तक अकेली ही थी,,, और अपने हाथ आए इस मौके का वह पूरी तरह से फायदा उठाना चाहती थी,,,
शुभम को उसके घर तक का रास्ता पैदल ही तय करना था वह बड़ा उत्सुक था जल्दी से जल्दी उसके घर पहुंचने के लिए वह शांति हकीकत राय मदमस्त जवानी को बेपर्दा होते हुए देखना चाहता था उसके गोलाकार नितंबों को अपने हाथों से सह लाना चाहता था,,,, वह अपनी मस्ती में गीत गुनगुनाता हुआ पैदल चला जा रहा था,,,, थोड़ी दूर जाना होगा कि तभी एक होटल से एक खूबसूरत जवान महिला अपने तन बदन को ठंडी से रक्षा करने के लिए पूरी तरह से गर्म कपड़ों से ढकी हुई थी,,,, मोटर से निकलकर शुभम के आगे आगे चलने लगी हाई हील का सैंडल पहने हुए थी जिसमें उसकी चाल बेहद मादक नजर आ रही थी,,, वह महिला उसके आगे चल रही थी इसलिए शुभम ने उसके चेहरे को नहीं देखा था लेकिन उसके बदन की बनावट और उसके नितंबों का घेराव देखकर पूरी तरह से उसके प्रति आकर्षित हो चुका था,,,, उन दोनों के बीच की दूरी तकरीबन पांच 7 मीटर की थी शुभम की अनुभवी आंखें उस महिला की खूबसूरत बदन के ढांचे का आंखों ही आंखों में नाप ले रहा था,,, वह महिला जींस पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसके नितंबों का कसाव जींस में कुछ ज्यादा ही कसा हुआ नजर आ रहा था और उसकी कसी हुई गांड देखकर शुभम का मन डोलने लगा था वह उसे ही घूरता हुआ चला जा रहा था,,,। तभी वह महिला आगे चलते चलते एक लग्जरियस कार के आगे रुक गई,,, और अपने पर्स में से गाड़ी की चाबी निकाल कर कार का दरवाजा खोलने लगी इतने से ही शुभम समझ गया था कि वह काफी पैसे वाली औरत है,,, इधर-उधर देखे बिना ही कार का दरवाजा खोल कर अंदर बैठ गई,,, लेकिन तभी कार के अंदर दाखिल होने से पहले ही उसके पर्स में से उसका छोटा सा बटुआ नीचे गिर गया था जिसके बारे में उसे पता नहीं चला और वह कार में बैठ गई और कार को स्टार्ट कर दिए शुभम यह सब देख रहा था वह जल्दी से दौड़ता हुआ कार के पास गया और बटुआ उठाकर,, कार में बैठी महिला को कार का शीशा खटखटा कर देने लगा पहले तो उस महिला को समझ में नहीं आया कि यह क्या कर रहा है कार स्टार्ट हो चुकी थी,,,, वह महिला उसे इशारे से ही हर जाने के लिए कह रही थी लेकिन शुभम उसका बटुआ उसे देना चाहता था इसलिए बार-बार उसके कार के शीशे को थपथपा रहा था,,,। शुभम की हरकतों से महिला को अच्छी नहीं लग रही थी वह उसे डांटना चाहती थी इसलिए अपना हाथ आगे बढ़ा करवा कार का शीशा खोलने लगी और शीशा खुलते ही बोली,,,।

पागल हो क्या इस तरह से किसी को परेशान किया जाता है तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत को इस तरह से परेशान करते हुए तुम्हारा मतलब क्या है इस तरह से कार का शीशा थपथपा रहे हो,,,।( कार में बैठी महिला बिना कुछ सोचे समझे शुभम की बात को सुने बिना ही एक सांस में सब कुछ भूल गए शुभम तो हैरान था उसकी बातें सुनकर वह एकटक उसे देखने लगा उस महिला की खूबसूरत चेहरे को देखकर वह दंग रह गया था बेहद खूबसूरत एकदम लाल टमाटर की तरह गोल चेहरा था उस महिला का जो कि शुभम को बिल्कुल चांद के टुकड़े की तरह लग रहा था वही तक उसे देख रहा था तो वह महिला बोली,,,।)

पागल है क्या तू किसी औरत को कभी देखा नहीं क्या जो इस तरह से घूर कर देख रहा है,,,
( शुभम को उस महिला की किसी भी बात का बुरा नहीं लग रहा था वह तो उसकी खूबसूरती के रस में पूरी तरह से नहा लेना चाहता था वह बस उसे घूरे जा रहा था और फिर हाथ में लिया हुआ बटवा उसकी तरफ आगे बढ़ाकर उसके बगल वाली सीट पर रखकर मुस्कुराता हुआ वहां से आगे बढ़ गया,,, वह महिला सीट पर रखिए बटुए को देखते ही एकदम से चौक गई क्योंकि वह बटुआ उसी का था वह जल्दी से बटुए की चैन खोलकर अंदर देखी तो सब कुछ बराबर था पटवा में तकरीबन ₹25000 रखा हुआ था क्योंकि बिल्कुल वैसे का वैसा ही था तुरंत ही उस महिला को अपनी गलती का एहसास हुआ वह कार का दरवाजा खोल कर इधर-उधर देखी तो शुभम उसे जाता हुआ नजर आया वह दौड़ कर उसके पास गई,,,।

मैं माफी चाहती हूं मैं बहुत शर्मिंदा हूं अपनी गलती के लिए (वह महिला दौड़ कराने की वजह से हांफते हुए बोली,,)
मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि तुम मेरा बटवा लौटाने के लिए कार का शीशा थपथपा रहे हो मुझे अपनी गलती पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है क्योंकि मैं यही समझ रही थी कि तुम कोई आवारा लड़के या भीख मांगने वाले हो,,,।

तो क्या मैं तुम्हें भीख मांगने वाला दिखता हूं,,,( शुभम उस महिला के सामने स्टाइल मारते हुए अपने दोनों हाथों को फैलाते हुए बोला,,,।)

नहीं नहीं बिल्कुल नहीं दिखते तो बिल्कुल भी नहीं हो और तुम्हारी शक्ल और तुम्हारे कपड़े देखकर तो यही लगता है कि तुम भी रईस खानदान से हो,,,, देखो मैं फिर शर्मिंदा हूं मिस्टर जो भी हो नाम तो मुझे तुम्हारा मालूम नहीं है,,,।

शुभम,,,, शुभम नाम है मेरा,,, और मैं शिमला घूमने के लिए आया हूं,,,,

अनमोल,,,, मेरा नाम अनमोल है,,,( वह महिला अपना हाथ आगे बढ़ाकर शुभम से हाथ मिलाने का इशारा करते हुए बोली,, शुभम भला उस महिला को स्पर्श करने का मौका कैसे यहां से जाने दे सकता था वह भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उस महिला से हाथ मिलाया और बोला,,,)

इस अनजान शहर में तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई,,

और मुझे भी तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुई इतनी खुशी कि मैं बता नहीं सकती कि आज के दौर में भी तुम्हारे जैसे ईमानदार लड़के हैं,,, तुम शायद जानते नहीं हो कि जो बटुआ तुम मुझे लौटाए हो उसमें ₹25000 था,,,( वह महिला मुस्कुराते हुए बोली,,।)

देखिए अनमोल जी,,, अब उसने ₹25000 था या कुछ और इससे मेरा कोई वास्ता नहीं है बस मैं तो अपना फर्ज निभा रहा था वह बटुआ आपका था तो आप तक पहुंचना बेहद जरूरी था और वैसे भी मेरे मम्मी पापा ने मुझे इस तरह के संस्कार नहीं दिए हैं कि मैं किसी की चीज या उनका रुपया पैसा ले लूं,,,
( वह महिला जो कि तकरीबन 32 35 साल की थी वह शुभम की बातें सुन कर मुस्कुरा रही थी शुभम की बातें उसे अच्छी लग रही थी और वह बोली,,।)

तुम्हारी ईमानदारी मुझे बहुत अच्छी लगी वैसे तुम भी बहुत अच्छे हो,,,, और हां,, जो होटल देख रहे हो ,,,(हाथ से इशारा करते हुए)

होटल अनमोल,,,( शुभम तपाक से बोल पड़ा।)

हां वही वह मेरा ही है कभी आना,,, खिदमत करने का मौका मुझे भी देना,,, तुम्हारी ईमानदारी देखकर दिल एकदम खुश हो गया है,,,।

ठीक है मिस अनमोल,,,,( शुभम जानबूझकर अनमोल के आगे मिस शब्द का प्रयोग किया था वह जानना चाहता था कि वह कुंवारी है या शादीशुदा वैसे तो उसकी उम्र के हिसाब से शादीशुदा ही होनी चाहिए लेकिन उसकी खूबसूरती देखकर सुबह को समझ नहीं आ रहा था और वैसे भी उसके माथे पर ना बिंदी थी ना माथे में सिंदूर इसलिए शुभम को समझ में नहीं आ रहा था,,, शुभम के मुंह से मिस शब्द सुनकर उस महिला के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई थी,,,) मैं जरूर तुम्हारी होटल में आऊंगा वैसे तुम्हारा नाम तुम्हारे माता-पिता ने एकदम सोच समझकर ही रखा है नाम जैसे ही तुम भी बेहद अनमोल हो,,,,।
( इतना कहकर शुभम वहां से चलता बना क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह की बातें वह करता था उसे सुनकर कोई भी औरत आफरीन हो जाती थी और वहीं अनमोल के साथ भी हुआ शुभम की बातें सुनकर उसे बहुत ही अच्छा लगा और वह उसे देखती ही रह गई जब तक कि शुभम आंखों से ओझल नहीं हो गया,,, थोड़ी ही देर में घर ढूंढने में मशक्कत करने के बाद शांति का घर उसे मिल ही गया,,, शांति घर के बाहर दरवाजे पर खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी ताकि शुभम कहीं नजर आ जाए तो वह उसे भुला सके लेकिन शुभम की नजर भी उसके ऊपर पढ़ चुकी थी दोनों की नजरें आपस में टकराई थी दोनों के चेहरे खिल उठे थे दोनों के होठों पर मुस्कान आ गई थी,,, अभी भी हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी शांति ओवरकोट और कर खड़ी थी वातावरण में ठंड का एहसास जबरदस्त था लेकिन दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए बेहद तड़प रहे थे,,,। जैसे-जैसे शुभम उसके करीब आता जा रहा था जैसे जैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और टांगों के बीच कंपन का एहसास उसके संपूर्ण बदन में खलबली मचा रहा था,,,,

मुझे आने में देर तो नहीं हुई,,,,( शुभम शांति के करीब पहुंचता हुआ बोला,,,।)

तुम्हारा इंतजार करते-करते ऐसा लग रहा था कि जैसे एक-एक पल सदियों की तरह गुजर रहा था,,,, अब मुझसे रहा नहीं जाता चलो जल्दी घर में,,, अंदर आओ,,,,( शांति इधर उधर नजर घुमाकर अपनी तसल्ली के लिए देखते हुए बोली ,,, शांति आगे आगे और शुभम पीछे पीछे कमरे में दाखिल हो गया,,,।)
 
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