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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

रात भर की शीतल के साथ जमकर मस्ती करने के बाद शुभम थका हुआ नजर आ रहा था उसकी आंखों में नींद भरी हुई थी,,,, लेकिन चेहरे पर थकान बिल्कुल भी नजर नहीं आ रही थी क्योंकि अपने घर आने से पहले ही वह एक बार और शीतल की जमकर चुदाई करके आया था,,,,
लेकिन अपने घर के दरवाजे के सामने पहुंचते ही उसके चेहरे के भाव बदलने लगे क्योंकि अब उसे अपनी मां की नजरों का सामना करना था जिसमें उसके लिए विश्वास ममता प्यार और साथ ही हवस भी भरी हुई थी,,,, जोकि शुभम ने बेशक शीतल के साथ बांट कर आ रहा था और यही निर्मला बिल्कुल भी नहीं चाहती थी,,,,

Sheetal safaai karte huye

शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां की नजरों का सामना कैसे कर पाएगा क्या कहेगा जबकि उसकी मां को जानती है कि रात भर वह शीतल के साथ क्या कर रहा था वह कैसे कह पाएगा कि तुम्हारे विश्वास को तोड़ते हुए वह रातभर शीतल की चुदाई करके आया है,,,, और यही मर्दों की खासियत और सबसे बड़ी कमी भी होती है घर में चाहे कितनी भी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका क्यों ना हो मौका मिलते हैं दूसरी औरतों के पीछे लार टपकाते हुए उसके पीछे चल ही देते हैं,,,,

शुभम अपने घर के दरवाजे के सामने खड़ा था दरवाजे की घंटी बजाने की हिम्मत उसकी नहीं हो रही थी आखिरकार वह अपना मन मजबूत करके घर की घंटी बजाने की सोच ही लिया क्योंकि कितने दिन वह अपनी मां से नजरें बचाता फिर आएगा आखिरकार थक हारकर तो वापस उसे यही आना था,,,, वह भी अपने मन में अपनी युक्ति के बारे में सोचने लगा कि अपने मां से क्या कहना है आखिरकार वाह जो होगा देखा जाएगा ऐसा सोचकर डोर बेल बजा ही दिया,,, निर्मला कुर्सी पर बैठकर शुभम के आने का इंतजार कर रही थी उसके मन में ढेर सारे सवाल चल रहे थे और बार बार उन पलों को याद करके उसके बदन में क्रोध की भावना जागृत हो जाती थी वह बार-बार अपने मन में ख्याल आ रही थी कि रात को शुभम शीतल के साथ क्या-क्या किया होगा,,,, उसके अंगों से खेला होगा,, उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाया होगा उसे मुंह में लेकर पिया होगा,,, उसके लाल-लाल होठों का रसपान किया होगा और तो और उसकी टांगों के बीच बैठकर उसकी बुर का भी स्वाद चखा होगा,,, अगर चखना नहीं चाहा होगा तो शीतल भला कैसे इस अ प्रीतम सुख से वंचित अरे भाई होगी वह खुद ही दबाव देकर उसे अपनी बुर चाटने के लिए कही होगी,,,, क्योंकि जब मैं क्लास में उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूस सकती है तो उससे से अपनी बुर भी चटवा सकती है,,, और शुभम एक बेटा बाद में एक मर्द पहने हैं और भला एक मर्द एक औरत की खूबसूरत अंगों से खेले बिना कैसे रह सकता है,,,, और तब जब एक औरत खुद यही चाहती हो,,,
निर्मला जी सब सोच सोच कर एकदम बेहाल हुए जा रही थी क्योंकि उसे अब लगने लगा था कि जिस मोटे तगड़े लंड पर उसे नाज होता था अब वह नाज शीतल को लगने लगेगा जिस मोटे तगड़े लंड पर उसका पूरा अधिकार था अब वह अधिकार शीतल के साथ बट गया था,,,, जिस तरह का एहसास चरम सुख तृप्ति वह महसूस कर दिया रही थी अब वही शीतल भी महसूस करेगी ना जाने क्यों निर्मला को शीतल अपनी सौतन जैसी लगने लगी,,,,,
निर्मला कुर्सी पर बैठे यही सब सोच रही थी कि डोर बेल की आवाज सुनते ही उसकी तंद्रा भंग हुई वह समझ गई कि दरवाजे पर शुभम ही है लेकिन उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके मन में यही ख्याल आ रहे थे कि वह शुभम का सामना कैसे कर पाएगी और ऐसे हालात में जबकि वह रात भर किसी दूसरी औरत के साथ रंगरेलियां मना कर घर वापस आया था,,,,,, औरतों के लिए वह पल और भी ज्यादा दूभर हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उसका चाहने वाला उसका हमदर्द उसका साथ ही किसी गैर औरत के साथ संभोग सुख भोग करा रहा है,,,, तब हालात कुछ और होते माहौल कुछ और होता जब निर्मला कोई है बिल्कुल भी पता नहीं होता कि शुभम उसकी सहेली शीतल के साथ चुदाई का सुख भोग करा रहा है लेकिन यहां तो निर्मला सब कुछ जानती थी,,,
Nirmala


खेर शुभम उसका बेटा था आखिरकार कब तक उसके लिए घर के दरवाजे बंद रहते हैं वह कुर्सी से उठ खड़ी हुई और जाकर दरवाजा खोल दे दरवाजे पर सुबह में था उस पर नजर पड़ते ही ना जाने क्यों निर्मला शर्म से पानी पानी होने लगी बस उनसे नजरें भी नहीं मिला पा रही थी वह दूसरी तरफ नजर फेर कर वापस घूम गई और यही हाल शुभम का भी था शुभम भी अपनी मां से नजर नहीं मिला पा रहा था दरवाजा खुलते ही वह अपनी मां की तरह नहीं बल्कि इधर उधर देख रहा था,,,, आखिरकार वह कमरे में प्रवेश करके खुद ही दरवाजा लॉक कर दिया,,,, जब सुभम दरवाजा बंद कर रहा था तो निर्मला यही सोच रही थी कि काश उस दिन इसी तरह से वह दरवाजा बंद कर देता तो आज उसे यह दिल ना देखना पड़ता,,,, वह सीधा कर वापस कुर्सी पर बैठ गई लेकिन शुभम की तरफ बिल्कुल भी नहीं देख रही थी,,,, शुभम को समझते देर नहीं लगी कि घर का माहौल पूरी तरह से बिगड़ा हुआ है और उस माहौल को उसे ही ठीक करना था,,,

क्या हुआ ना तुम मुझसे नाराज होना,,,,( शुभम अपनी मां के पीछे खड़े होकर उसके गले में बाहें डाल कर बोला,,,।)

जा उस शीतल के पास,,,,( इतना कहते हुए शुभम कहां तक नहीं गले में से निकाल कर उसे दूर करते हुए बोली,, अपनी मां का गुस्सा और उसका रवैया देखकर सुबह समझ गया था कि गोल गोल घुमाने से कोई फायदा नहीं है अगर उसकी मां नहीं जानती थी कि वो रात भर कहां था क्या कर रहा था तब यह बात का बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता लेकिन यहां तो उसकी मां सब कुछ जानती थी,,,, वह भी ऊससे दो कदम की दूरी पर कुर्सी को डाइनिंग टेबल की तरफ से अपनी तरफ खींच कर वहीं बैठ गया,,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक खामोशी छाई रही निर्मला गुस्से में थे वह फर्श को अपने पैर के अंगूठे से खरोच ते हुए उसी को गुस्से से देख रही थी,,,,, शुभम गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,,।

मम्मी में शीतल के पास जाना नहीं चाहता था,,,,( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला नजरें उठाकर उसे घूरते हुए एक बार देखी और और वापस नीचे देखने लगी,,, मानो उसकी इस बात पर मन ही मन में हंस रही हो और क्रोधित हो रही,,, हो,,,,)
मुझे मालूम है तुम्हें मेरी बात का विश्वास नहीं होगा लेकिन मैं सच कह रहा हूं,,,, तुम जबसे मुझे उसके इर्द गिर्द घूमने से रोकी हो तब से मैं उसके बारे में सोचना भी बंद कर दिया था,,,,

मैं कैसे विश्वास कर लूं शुभम तू रात भर उसके साथ था और जब मैं 9:00 बजे तुझे बुलाने उधर गई तो भी तु वही था,,,

मुझे इस बात की बिल्कुल भी खबर नहीं है मम्मी,,, मैं अभी अभी सो कर उठा हूं और वह भी शीतल ने जगाया तो,,, और सीधा उठकर ईधर ही आ रहा हूं,,,,

तू कुछ भी कहे शुभम लेकिन तेरे मन में मेरे लिए जरा भी इज्जत होती तो रात को ही वापस आ जाता तु सारी रात उसके पास था,,, पता नहीं रात भर क्या क्या हुआ होगा मुझे तो सोचकर ही गुस्सा आता है,,,
( शुभम निर्मला के अंतर्मन को अच्छी तरह से समझ रहा था वह अच्छी तरह से जानता था कि उसके प्रति उसका मां का लगाव किस तरह का है वह भी जानता था कि वह उसे किसी से भी बांटना नहीं चाहती,,,, वह अपनी मां की तरफ देखा और कुछ सोच कर बोला,,,,।)

मैं खुद से वहां जाने के लिए तैयार नहीं हुआ था मम्मी मुझे तुम ही बोली थी वहां जाने के लिए और मैं तो हैरान था कि तुम मुझे वहां जाने के लिए किस लिए कह रही हो,,,
( शिवम की यह बात सुनकर निर्मला खामोश हो गई क्योंकि इस बात का जवाब वह देना नहीं चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि उसे मालूम हो कि दोनों का वीडियो शीतल के पास है,,,।)

मैं तो यही समझ रहा था मम्मी के शीतल मैडम का सालगिरह है वहां पर और भी मेहमान होंगे लेकिन जब पहुंचा तो वहां कोई नहीं था,,,,, शीतल ही इस बात का खुलासा करते हुए कही कि यहां पर वह किसी को जानती नहीं इसलिए मुझे ही वहां बुलाई है वैसे तो मम्मी हम सबको उन्होंने बुलाया था ना,,,, लेकिन आपको और पापा को तो दूसरी पार्टी में जाना था इसलिए मुझे वहां भेज दी,,,, अगर तुम्हें इसी तरह से गुस्सा दिखाना था मेरा वहां जाने से एतराज था तो वह मुझे क्यों भेजी,,,, मुझे भी अपने साथ ले गई होती कहती होती कि आज नहीं आ पाएंगे,,,,,
( निर्मला अपने बेटे की एक-एक कही बात को सुनते जा रही थी और उसकी बात में छिपी सच्चाई को भी समझ रही थी लेकिन उसके दूसरे पहलू को शायद शुभम ठीक से समझ नहीं पाया था इसलिए सब कह रहा था,,,,।)

पार्टी खत्म होने के बाद खाना खाने के बाद तू घर पर आ सकता था तु आया क्यों नहीं,,,,,
( निर्मला को जो कुछ भी हुआ उसमें शीतल के साथ-साथ शुभम की भी गलती साफ नजर आ रही थी क्योंकि वह सोच रही थी कि अगर वो चाहता तो घर पर वापस आ सकता था शीतल उसके साथ जबरदस्ती करने वाली नहीं थी,,, लेकिन ऐसा शुभम ने नहीं किया इसलिए निर्मला गुस्से में थी,,।)

मैं वहां रुकने के इरादे से बिल्कुल भी नहीं गया था मम्मी,,, मैं तो खाना खाने के तुरंत बाद वहां से चलता बना लेकिन,,,,( इतना कहकर शुभम खामोश हो गया,,,,)

लेकिन क्या,,,,

मुझे तो कहते भी शर्म आ रही है मम्मी,,,

क्या कहते शर्म आ रही है मुझे बता,,,,( निर्मला की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी वह जानना चाहती थी कि क्या हुआ था शुभम अपनी बात को बढ़ा चढ़ा कर बता रहा था वह ऐसा सीन क्रिएट करना चाहता था जिसमें उसकी गलती रत्ती भर भी नजर नहीं आती सारा का सारा दोष वह शीतल के सर पर मढना चाहता था,,, इसलिए वह बोला,,,)

मैं जैसे ही दरवाजे की तरफ जाने लगा शीतल मेरे रास्ते में आ गई और अपने हाथ को मेरे रास्ते का रोड़ा बना कर खड़ी हो गई,,,, ऐसा करते हुए उसके साड़ी का पल्लू उसकी छातियों से नीचे गिर गया,,, लेकिन वह ऐसा जानबूझकर की थी मम्मी,,,,
( निर्मला अपने बेटे की यह बात सुनकर और ज्यादा उत्सुक होने लगी कि इसके बाद क्या हुआ था वह बोली,,,।)

फिर क्या कि उस कुल्टा ने,,,,,,

मम्मी ने उसकी हालत देखकर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा लिया,,,, एक मर्द होने के नाते मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था जिस तरह का नजारा मेरी आंखों के सामने था उसे देख कर मैं अपनी नजर नहीं हट आ पाता लेकिन एक बेटा होने के नाते मुझसे यह देखा नहीं क्या मम्मी सच कहूं तो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और मेरा यह प्यार में किसी से बांटना नहीं चाहता इसलिए मैं दूसरी तरफ नजर कर दिया तो शीतल ने खुद ही मुझे ऊकसाते हुए अपनी तरफ देखने के लिए मजबूर करने लगी,,,, वह बोली,,,

यहां देखो शुभम इतना खूबसूरत नजारा छोड़कर तुम इधर-उधर कहां भटक रहे हो,,,, और मम्मी मैं उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखा तो हैरान रह गया क्योंकि उसने अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दी थी,,,, मैं फिर भी अपनी नजर को दूसरी तरफ हटा लिया,,,, हमसे आकर लिपट गई मुझे चूमने चाटने लगी,,,,( इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की तरफ देख रहा था वह उसके हाव-भाव को देखना चाहता था जो कि उसकी बातें सुनकर निर्मला के हाव-भाव बदल रहे थे वह काफी गुस्से में नजर आ रही थी,,, शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)
मम्मी मैं उसे ऐसा करने से रोक रहा था मैं उसे अपने आप से दूर करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह बार-बार
मुझसे चिपक जा रही थी मुझे चुमने की कोशिश कर रही थी और मुझे और ज्यादा उकसाते हुए मेरी आंखों के सामने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी,,,, मम्मी मैं एकदम हैरान हो गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,

तू तो खुश हो गया होगा,,,,!

मम्मी तुम तो मुझे अभी भी गलत समझ रही हो,,,, अगर उस दिन कलास में आकर तुम मुझे शीतल के साथ रंगे हाथ पकड़ कर खरी-खोटी ना सुनाई होती तो शायद मैं एक बार देखने की गलती कर भी सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं किया मेरी तरफ से दूर जाने लगा लेकिन वह बार-बार मेरे करीब आ जा रही थी,,,,( इतना कहते हुए शुभम कुर्सी पर से खड़ा हो गया और दूसरी तरफ मुंह करके चहल कदमी करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।) इतनी करीब कि उसकी दोनों चूचियां मेरी छाती से टकरा रही थी मैं बार-बार उसे अलग करने की कोशिश कर दे रहा था लेकिन वह बार-बार मुझे पकड़ ले रही थी,,,,

फिर क्या किया तूने,,,,?

मैं एक बार फिर कोशिश करके दरवाजे तक पहुंच गया लेकिन शीतल दौड़ कर मुझे वहां भी अपनी बाहों में जकड़ ली,,,,, मुझे गुस्सा आ गया और मैं जोर से झटका दिया जिससे शीतल जाकर नीचे जमीन पर गिर गई,,,,, लेकिन मम्मी में उसके गिरने की भी परवाह नहीं किया और दरवाजा खोलने वाला था कि वह मुझे पीछे से आवाज देकर रोक ली,,,,, और गुस्से में टेबल पर रखा हुआ अपना पर सूट आई और उसमें से मोबाइल निकाल कर मेरे पास आ गई और उसमें से एक वीडियो दिखाने लगी,,,,
( इतना सुनते ही निर्मला एकदम सन्न से रह गई क्योंकि निर्मला ने शीतल को इस राज को राज रखने के लिए कही थी और शीतल ने भी हामी भरी थी लेकिन यहां मामला कुछ और हो गया था निर्मला मन ही मन में सोचने लगी कि इसका मतलब शुभम को भी पता चल गया उस वीडियो के बारे में,,,, निर्मला कुछ बोली नहीं लेकिन उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी शुभम अपनी बात को जारी रखते हुए बोला,,,।) मैं तो वीडियो देखकर एकदम हैरान रह गया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वीडियो में जो कुछ भी हो रहा है वह सच है,,,( शुभम ए हैरानी से अपनी मां की तरफ देखते हुए,,,) लेकिन मम्मी तो कुछ भी नहीं देख रहा था वह सच था वीडियो में नए और तुमको और वह वीडियो अभी हाल का ही था जिसमें तुम मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी,,,,( शुभम शांत होता हुआ) वीडियो को देखने के बाद में सब कुछ समझ गया मैं समझ गया कि तुम ना चाहते हुए भी मुझे उसके घर किस लिए भेजी हो,,, मैं सब समझ गया मम्मी यह तुम्हारी सबसे बड़ी मजबूरी थी लेकिन फिर भी मैं उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हुआ तो वह मुझे वीडियो को वायरल करने की धमकी दे दी वह मुझे साफ शब्दों में धमकी देते हुए बोली कि तुम और तुम्हारी मां दोनों एकदम बदनाम हो जाओगे किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं हो जाओगे मैं एकदम से डर गया वह अपनी कहीं बात को सच कर सकती थी उसके हाथ में पूरा सपोर्ट था अगर वह वीडियो ना होता तो मैं उसके गाल पर थप्पड़ लगाकर वापस आ जाता लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया,,, मैं अपने परिवार को बदनाम होता नहीं देख सकता था इसलिए मजबूरन वह जो बोली मुझे करना पड़ा,,,,।

मैं सुबह में जब तुझे बुलाने गई थी तुझे मालूम था,,,( शीतल रोते हुए बोली
हां मम्मी मुझे मालूम था कि तुम मुझे बुलाने आई हो लेकिन मैं मजबूर था शीतल ने मुझे रुकने के लिए कही थी क्योंकि उसका एक बार और मन कर रहा था,,,, ( शुभम की यह बात सुनकर निर्मला जोर-जोर सीसकने लगी,,,,)

तो क्या तुम दोनों सारी रात सच में जागते रहे हो,,,?( निर्मला खुद ही सवाल का जवाब जानते थे लेकिन फिर भी अपने बेटे के मुंह से सुनना चाहती थी उसे अब जलन सी महसूस हो रही थी,,,।)

हमने कुछ नहीं मुझे सारी रात सोने नहीं दी ना खुश सोई ना सोने दी वह बहुत प्यासी औरत है मम्मी,,,, रात भर कभी मेरे ऊपर चढ़ी रही तो कभी मुझे अपने ऊपर चढ़ा ली,,,
( शुभम के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर जलन के मारे निर्मला के कान फटे जा रहे थे वह कुछ बोल सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी सिर्फ रोए जा रही थी,,,, फिर अपने आंसू पोंछते हुए बोली,,,)

वह कुलटा औरत इतनी नीचे निकलेगी मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी इस वीडियो के चलते में मजबूर हो गई वरना मैं उसे तुझे हाथ भी लगाने नहीं देती,,,, इस वीडियो के जरिए मुझे ना जाने अभी कौन-कौन से दिन देखने पड़ेंगे,,,

अब ऐसा कुछ भी नहीं होगा मम्मी,,,,

क्यों ,,,,,?(निर्मला अपने आंसुओं को पोछते हुए शुभम की तरफ देखते हुए बोली)

क्योंकि मैंने चला कि से उसके मोबाइल से हम दोनों की वीडियो को डिलीट कर दिया हूं,,,।( शुभम के मुंह से इतना निकला भर था कि वह खुशी से एकदम पागल सी होते हुए बोली।)

क्या कह रहा है शुभम,,,?

हां मम्मी,,, मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं मैंने उसके मोबाइल में से हम दोनों का वीडियो डिलीट कर दिया हूं,,, लेकिन हो सकता है कि वह वीडियो की कॉपी कर ली हो,,,, लेकिन तुम चिंता मत करो हमें वह हमें कभी भी अपने-अपने नहीं कर पाएगी अगली बार मैं अपने मोबाइल से हम दोनों का इस तरह का फोटो या वीडियो ले लूंगा कि वह जिंदगी भर अपना मुंह बंद रखेगी,,,, यह कहकर वह अपनी मां को दिलासा तो दे रहा था लेकिन अपने लिए रास्ता भी बना ले रहा था वह नहीं चाहता था कि एक बार पक्के तौर पर उसकी मां को यह मालूम हो जाए की शीतल के पास वीडियो नहीं है तो वह उसके पास कभी भी नहीं भेजेगी और शुभम यह नहीं चाहता था क्योंकि आज की जबरदस्त चुदाई के बाद शीतल की मदमस्त जवानी की हर एक अदा को देखकर शुभम पूरी तरह से पागल हो गया था,,, निर्मला भी अपने बेटे की बात सुनकर कुछ हद तक राहत महसूस कर रही थी,,,, दोनों अभी बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर दोनों की नजर दरवाजे पर गई,,,

अभी कौन आ गया,,,,,( निर्मला के मुंह से निकला।)

रुको मम्मी मैं जा कर देखता हूं,,,,,( इतना कहकर वहां जाकर दरवाजा खुला दरवाजा खोलते ही सामने शीतल नजर आए शीतल शुभम को देखते ही मुस्कुराने लगी और बिना कुछ बोले घर में आ गई,,,, शीतल को देखते ही निर्मला क्रोध से भर गई लेकिन किसी तरह से अपने क्रोध पर काबू किए हुए थी,,,।
 
शीतल को अपनी आंखों के सामने देखते हैं निर्मला की आंखों में क्रोध तैरने लगा,,, वह क्रोध से भर चुकी थी जी मैं तो आ रहा था कि उसे गाली देकर वह घर से निकाल दे लेकिन ऐसा कर सकने में वह असमर्थ थे और शीतल थी कि इसके विपरीत अपने होठों पर का बुक मुस्कान बिखेरते हुए कभी शुभम की तरफ तो कभी निर्मला की तरफ देख ले रही थी,,,, शीतल के होठों पर विजई मुस्कान छाई हुई थी तो दूसरी तरफ निर्मला के अंतर्मन में गम के काले बादल छाए हुए थे जिसे वह अपनी जान से ज्यादा चाहती थी उसके ऊपर अपना तन मन सब कुछ न्योछावर कर चुकी थी जो कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि शुभम उसको छोड़ कर किसी गैर औरत के साथ शारीरिक संबंध बनाएगा हालात कुछ इस तरह बदलेगी उसे खुद अपने हाथों से दूसरी औरत के कमरे में भेजना पड़ा,,,, अपने घर में खड़ी शीतल उसे सौतन की तरह लग रही थी,,, जो अपने कामरूप के जाल में उसके पति को खींचती लेकर चली जा रही थी,,,, निर्मला के लिए उसका बेटा शुभम उसके पति के ही तरह था क्योंकि जो काम उसका पति अशोक नहीं कर सका वह शुभम करता आ रहा था,,,, सुख में दुख में हंसी या गम में या फिर शारीरिक भूख मिटाने में हर तरह से शुभम उसका बराबर का साथ देता आ रहा था,,,


शीतल को देखते ही निर्मला की आंखों के सामने वह सब पल कल्पनातीत होने लगते जो पल उसने कल रात को अपने कमरे में अपने बिस्तर पर बिताई होगी,,,, निर्मला के कल्पना में वो सब दृश्य ताजा होते ही नजर आ रहे थे जो शीतल के बिस्तर पर दर्शाया गया होगा,,, इस समय शीतल निर्मला की तरफ पीठ करके शुभम को देख रही थी और निर्मला उसे नीचे से ऊपर की तरफ देख रही थी जो कि वह यही सोच रही थी कि निर्मला बिना साड़ी के बिना कपड़ों के एकदम नंगी उसके बेटे के साथ रंगरेलियां मनाई होगी उसकी बड़ी बड़ी गांड को शुभम अपने हाथों में लेकर जोर-जोर से दबाया होगा क्योंकि इसी तरह से तो वह उसे भी आनंद की सीमा पार कराता था व जरूर उसकी नंगी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके निप्पल को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसा होगा,,, उसके नंगे बदन से खेला होगा क्योंकि निर्मला यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि शीतल काफी कामों और सेक्सी औरत है जो कि उसको देखने से ही पता चलता है खूबसूरत गोरी चिट्टी होने के साथ-साथ प्यासी भी है जोकि कल रात भर उसके बेटे के साथ जाकर अपनी प्यास बुझाई होगी,,,, यह सब सोचकर निर्मला का मन घृणा से भरा जा रहा था,,, कमरे में पूरी तरह से शांति छाई हुई थी शुभम भी खामोश था शीतल को देखकर उसकी आंखों के सामने रात वाले सारे दृश्य ताजा होते नजर आ रहे थे अगर इस समय उसकी मां उपस्थित ना होती तो एक बार फिर से वो रात वाले सारे दृश्य को दोहरा दिया होता,,,, एक तरह से रात भर शीतल की जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी शुभम का मन शीतल से भरा नहीं था,,,,



शीतल ही शांति को भंग करते हुए बोली,,,,

देखो निर्मला तुम मेरी सहेली नहीं बल्कि मेरी बहन जैसी हो यह बात भी अच्छी तरह से जानती हूं कि कल रात जो कुछ भी हुआ उससे तुम्हें दुख जरूर पहुंचा होगा,,,,

शुभम तुम अपने कमरे में जाओ,,,( शीतल किस तरह की बातें सुनकर निर्मला शुभम को बोली लेकिन तभी शीतल शुभम को रोकते हुए बोली,,,।)

नहीं शुभम तुम यहीं रुको,,,, अब हम तीनों में ऐसा कुछ भी नहीं बचा जिसे छुपाया जा सके,,,

शीतल वह अभी बच्चा है उसे अपने कमरे में जाने दो जो कुछ भी कहना है मुझसे कहो,,,,

तुम्हारा शुभम अब बच्चा नहीं रहा,,, निर्मला,,, यह हकीकत है और यह तुम भी जानती हो बस उसे बच्चा समझ कर अपने आप को धोखा दे रही हो,,,,

एक मां के लिए उसका बेटा हमेशा बच्चा ही रहता है,,,

हां लेकिन तब तक जब तक कि वह अपनी मर्दाना ताकत से अपनी ही मां की शारीरिक भूख को ना मिटाएं,,,, और तुम्हारा बेटा इतना बड़ा हो गया है कि तुम्हारी प्यासी जवानी को अपने लंड की ताकत से पिघला सकता है पिघला क्या सकता है पिंघलाता आ रहा है,,,,

लेकिन शीतल मुझे तुमसे यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी तुम मेरी सबसे पक्की सहेली थी सहेली क्या थी मेरी बहन जैसी थी,,,


और मुझे भी नहीं बोला तुम से ही बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी मेरी कहीं गई बातें तो सिर्फ मजाक में ही थी लेकिन तुमने तो सब कुछ सच कर दिखाया अपनी शारीरिक भूख अपने ही बेटे से मिटाई,,,,( शीतल की आवाज सुनते ही वह शर्म के मारे अपनी नजरें नीचे झुका ली,,,) चलो कोई बात नहीं एक औरत होने के नाते मैं अच्छी तरह से एक औरत की व्यथा समझ सकती हूं,,,, जब अपने पति से किसी भी प्रकार की अपेक्षा ना रह जाए उससे कोई प्यार या शारीरिक सुख ना मिल पाए तो औरत के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता,,,, देखो निर्मला मैं तुम्हारा दुख अच्छी तरह से समझती हूं क्योंकि जो तुम पर बीत रही थी वह मुझ पर भी बीत रही है,,,, मुझे तो कल किस बात से खुशी है किधर मना तुमने कोई ऐसा वैसा कदम नहीं उठाया जिससे तुम्हारी और तुम्हारे परिवार की बदनामी हो,,,( इस बार शीतल की बात सुनकर निर्मला मन में कुछ अजीब सा महसूस होने लगा शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानती हो और मैं भी कि जब औरत प्यासी हो उसकी शारीरिक जरूरतें पूरी ना हो रही हो तो वह बाहर कदम निकालती है और बाहर इधर उधर मुंह मारने लगती है ऐसे में उसकी बदनामी होने के चांस बढ़ जाते हैं,,,, तुम ही जरा सोचो निर्मला,,, तुम अपनी शारीरिक भूख को अगर अपने पति से नहीं मिटा पा रही हो और ऐसे में किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंध बना लेती हो और वह गैर मर्द चाहे जो भी हो सकता है वह तुम्हारा स्टूडेंट भी हो सकता है तुम्हारे साथ काम कर रहा है कोई टीचर ही हो सकता है प्रिंसिपल या राह चलता कोई भी आवारा लड़का आदमी सोचो तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बनाकर उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला है उनको तो बल्कि मजा ही मजा है लेकिन तुम्हारे साथ मजा करने के बाद अगर वह यह बात किसी और को बताते हैं तो सोचो कितनी बदनामी होती है और तुम्हारे पीछे कुछ कम लोग नहीं पड़े हैं आते जाते सड़कों पर स्कूल में विद्यार्थी से लेकर टीचर तक लार टपका ए तुम्हारे आगे पीछे घूमते हैं,,, अपनी प्यास बुझाने के लिए तुम्हारा एक इशारा काफी है,,,, मेरे लिए भी यही सब बातें हैं तुम्हारे बेटे के साथ शारीरिक संबंध बना बना कर ने किसी के लड़के से किसी गैर मर्द से शारीरिक संबंध बना सकती थी लेकिन क्या मिलता है कुछ देर का सारे सुख तो मिल जाता लेकिन क्या वह इंसान जिसके साथ हम शारीरिक संबंध बनाते हैं वह हमराज बना रहता ऐसा कभी नहीं होता वह हमें ब्लैकमेल कर सकता था या कभी हमेशा गलत संगत में पड़ जाएगी अपनी गलती का पछतावा करने के लिए भी कुछ ना बचे अपनी मजबूरी में एक के बाद एक के बाद एक के बाद ना जाने कितनों के साथ बिस्तर गर्म करना पड़े,,, और अंत में सिर्फ बदनामी ही बदनामी,,,,

तुमने अपनी बेटी के साथ शारीरिक संबंध बनाकर कोई गलत काम नहीं किया है निर्मला एक बेटा होने से पहले वह एक मर्द है और एक मां होने के पहले तुम एक औरत हो जिनकी अपनी जरूरतें हैं,,,( शीतल की बातें सुनकर निर्मला पूरी तरह से खामोश हो चुकी थी रोज इस तरह से ध्यान लगाकर शीतल की बात सुन रही थी शीतल और भी खुलकर बात करना चाह रही थी इसलिए वह आगे की बात को खुले शब्दों में कहते हुए बोली,,,।) देखो निर्मला लंड और बुर की कोई जात पात कोई व्याख्या नहीं होती,,,( लंड और बुर शब्द शीतल के मुंह से सुनते ही निर्मला शुभम की तरफ इशारा करके उसे रोकने के लिए बोली तो शीतल शुभम की उपस्थिति में किसी भी प्रकार का एतराज ना जताते हुए बोली) कोई बात नहीं नहीं मिला तुम्हारे बेटे के लिए लंड और बुर शब्द कोई नया नहीं है,,, इसके सामने शर्माने की जरूरत नहीं है,,,, लंड और बुर किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी में नहीं मानते बुर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस में घुसने वाला लंड उसके पति का है उसके प्रेमी का या किसी गैर मर्द का या फिर उसके खुद के बेटे का उसे तो बस मजा चाहिए जोकि लंड की गर्माहट भरी रगड़ से अपनी बुर की अंदरूनी ज्वाला को पिघला सके,,, और लंड भी घुसने से पहले बुर से यह नहीं पूछता कि यह बुर किसकी है,,,, उसकी बीवी की या उसकी प्रेमिका की या उसकी बहन की या उसकी मां की उसे तो बस घुसने से मतलब होता है और बुर में घुसकर कसी हुई बुर की गर्म दीवारों का आनंद लेते हुए अपने आप को बुर की बाहों में पूरी तरह से पिघलाने से मतलब होता है,,,
( शीतल की गरमा गरम बातें सुनकर निर्मला के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी और यह हलचल इसलिए थी कि इस तरह की बातें करते समय उसका बेटा भी वहीं मौजूद था,,,, लेकिन जिस तरह की शर्मिंदगी का अहसास निर्मला को हो रहा था उस तरह की शर्मिंदगी का अहसास शुभम को बिल्कुल भी नहीं हो रहा था बल्कि वह तो शीतल की बातों को बड़े चाव से सुन रहा था,,,,।)

लेकिन शीतल जो कुछ भी हो रहा है वह बिल्कुल गलत हो रहा है,,,।

कुछ गलत नहीं हो रहा निर्मला सब कुछ सही हो रहा है तुम्हें शुभम की जरूरत है तुम अब तक अपने बेटे से अपनी जरूरतें पूरी करती आ रही हो सबको चारदीवारी में बंद है तुम एकदम सुरक्षित हो लेकिन यह बात भी अच्छी तरह से जान लोगी जो जरूरत तुम शुभम से पूरी कर दिया रही हो शायद भगवान ने उसका थोड़ा बहुत हिस्सा मुझे भी दे रखा है,,,, भगवान ने तुम्हारे जरिए अपनी जरूरत है पूरी करने में मुझे भी तुम्हारा सहभागी बनाया है तभी तो उस दिन तुम्हारे घर का दरवाजा नहीं बल्कि मेरे किस्मत का दरवाजा खुला था अगर ऐसा ना होता तो उस दिन तुम्हारे घर का दरवाजा खुला ही ना होता लेकिन यह सब कुछ भगवान की इच्छा से हो रहा है,,,,,

नहीं नहीं शीतल यह मुझे मंजूर नहीं है मैं अपने बेटे को किसी और से बांटना नहीं चाहती,,,,,,

लेकिन तुम तो अपने बेटे को मुझ से बांट चुकी हो,,,,

लेकिन अब नहीं क्योंकि मैं मजबूत ही तुम्हारे पास हम दोनों का वीडियो था जिसे मेरे बेटे ने डिलीट कर दिया है,,,,।
( यह बात सुनते ही सीतल थोड़ा सा घबरा गई क्योंकि वही वीडियो एक जरिया था जिसकी बदौलत अगर ना मानने पर वह निर्मला के बेटे के साथ अपनी मनमानी कर सकती थी,,,, लेकिन अगर सच में वीडियो ना होने पर निर्मला अपने बेटे को दोबारा उसके पास नहीं भेजेगी इससे तो वह फिर से प्यासी की प्यासी रह जाएगी लेकिन शीतल का दिमाग बड़ी तेजी से चल रहा था,,, वह अपने चेहरे पर चिंता की शिकन लाए बिना ही एकदम सहज भाव से बोली,,,।)

मैं अच्छी तरह से जानती हूं निर्मला कि तुम बदनाम ना हो जाओ इसलिए तुम्हारे बेटे ने बड़ी चालाकी से मेरे मोबाइल में से तुम दोनों का वीडियो डिलीट कर दिया था लेकिन यह बात हुई मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि एक बार वीडियो डिलीट हो जाने पर मैं तुम्हारे बेटे के साथ वह सब नहीं कर सकती हूं जैसा कि रात भर की हूं इसलिए तो मैं इस वीडियो का कॉपी करके अपने लैपटॉप में बड़ी ईफाजत से संभाल कर रखी हु,,,।
( इतना सुनते ही निर्मला के चेहरे पर एक बार फिर से हवाइयां उड़ने लगी वह शुभम की तरफ आश्चर्य से देखने लगी और मन में सोचने लगी कि जैसा शुभम कह रहा था उसकी शंका सही निकली,,,, शीतल की बात सुनते ही निराश होकर निर्मला धम्म से कुर्सी पर बैठ गई,,, निर्मला को इस तरह से निराश होता देखकर शीतल के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,,,। वह समझ गई कि निर्मला फिर उसके जाल में बराबर की फंस चुकी है इसलिए वह भी पास में पड़ी कुर्सी को निर्मला के करीब खींच कर उस पर आसन जमाते हुए बोली,,,।)

देखो निर्मला घबराने की कोई जरूरत नहीं है,,, तुम खामखा मुझ से घबरा भी रही हो और मेरे आगे शर्मा भी नहीं है मैं भी तुम्हारे बेटे के साथ वही कर चुकी हूं जो तुम अपने बेटे के करती आ रही हो,,,, लेकिन मुझे देखो तुम्हारे बेटे से रातभर चुदवाने के बाद भी मेरी आंखों में जरा भी शर्म या हिचक नहीं है,,, क्यों,,,,?

क्योंकि यह मेरी जरूरत है मेरे बदन की जरूरत है मेरी आत्मा की जरूरत है मेरे प्यासे तन बदन मेरी जिंदगी की जरूरत है एक औरत को मर्द से जिस तरह की अपेक्षा होती है ,,,, उसी तरह की अपेक्षा मुझे तुमसे और तुम्हारे बेटे से हैं जो कि तुमने मेरी बात मानते हुए अपने बेटे को मेरे पास भेज कर मेरी अपेक्षा पर खरी उतरी हो,,,,
( निर्मला नजर नीचे झुकाए शीतल की हर एक बात को सुनती चली जा रही थी,,, लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

देखो शीतल अब तक तुम मां बेटे ही राजदार थे लेकिन अब से मैं भी राजदार हो गई हूं हम तीनों एक-दूसरे के राज को राज ही रखेंगे हमराज बन कर,,, मेरा विश्वास करो क्योंकि यह बात बाहर निकलने पर तुम्हारी जितनी बदनामी होगी मेरी भी उतनी ही बदनामी होगी,,,, और भला इस बात को हम तीनों में से बाहर कौन ले जाएगा तुम तो कभी बताने वाली नहीं हो,,, की तुम अपने बेटे से ही चुदवाती हो यह राज तो तुम अपने सीने में दफन कर चुकी हो और तुम्हारा बेटा अब बच्चा नहीं रहा बड़ा हो गया है इतना मासूम नहीं है कि अपने दोस्तों में अपनी बड़ाई हांकते फिरे कि वह अपनी मां की चुदाई करता है या किसी और की चुदाई करता है और रही बात मेरी तो यह राज तुमसे ज्यादा मेरे लिए राज रहना जरूरी है और वैसे भी एक बार फिर से मेरी जिंदगी में उमंग छाई है सच कहूं तो निर्मला तुम्हारे बेटे की वजह से मुझे फिर से जिंदगी जीने की राह मिल गई है वरना मैं भी उदास हो गई थी अपनी जिंदगी से अपने दुख से,,,।
( शीतल इतना कहकर खामोश हो गई पूरे कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया निर्मला और शुभम के हाव भाव को देखकर लग रहा था कि वह दोनों ने उसकी बात को गहराई से लिया है शीतल को लगने लगा कि सब कुछ सही हो रहा है इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

निर्मला अब मे जो कहने जा रही हूं बड़े ध्यान से सुनना,,, इसमें हम तीनों की भलाई और बहुत मजा ही मजा है,,,।
( अभी भी निर्मला नजरे नीचे झुकाए बैठे हुए थी,,,)
निर्मला क्यों ना अब हमेशा करें कि इसमें हम जिंदगी का मजा एकदम खुलकर कर लूट सकते हैं क्यों ना हम तीनों ऐसा करें जो काम तुम और तुम्हारा बेटा कमरे में एक बिस्तर पर करते हैं वही काम हम तीनों मिलकर एक ही बिस्तर पर करो मैं तुम और तुम्हारा बेटा तीनों एकदम नंगे एक ही बिस्तर पर सोचो कितना मजा आएगा,,,,( शीतल अपनी मन की बात निर्मला से बड़े ही चटकारा लेकर बोल रही थी लेकिन शीतल की यह बात सुनते ही निर्मला एकदम हैरान हो गई और सन्न से नजर ऊपर करके शीतल को आश्चर्य से देखने लगी,,,।)
 
शीतल के मन की बात सुनते ही निर्मला आश्चर्य से शीतल की तरफ देखने लगी उसी पल भर के लिए यकीन ही नहीं हुआ कि जो शीतल कह रही है वह वास्तविकता उसके मुंह से ही निकली बात है लेकिन यह सच था कि कोई कल्पना नहीं थी और कोई सपना नहीं था शीतल ने अपने मन की बात निर्मला को बताई थी,,,



तूम पागल हो गई हो शीतल,,, तुम्हें पता भी है कि तुम क्या कह रही हो तू शुभम अपने कमरे में जा,,,,

शुभम कहीं नहीं जाएगा शुभम यही बैठेगा क्योंकि जो मैं बता रही हूं उसका हीरो ही शुभम है,,,..

( शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह वहां बैठे या वहां से चला जाए क्योंकि उसकी मां चाहती थी कि वह वहां से उठकर चला जाए क्योंकि बात ही कुछ ऐसी हो रही थी लेकिन यह एक मां का सोचना था कि उसका बेटा वहां से उठकर चले जाए,,, क्योंकि समय शीतल से जो शख्स बात कर रही थी वह औरत नहीं बल्कि एक मौत ही अगर एक औरत के नजरिए से देखती तो शीतल की बात का उसे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता लेकिन शुभम वहां से उठकर जाना नहीं चाहता था वह शीतल के खुले पन का पूरी तरह से कायल हो चुका था,,, शीतल प्यासी औरत है यह बात तो अच्छी तरह से जानता था लेकिन इतनी ज्यादा खुली औरत होगी आज उसे पता चल रहा था क्योंकि वह उसकी मां से सीधे-सीधे एक ही बिस्तर पर उसके बेटे को लेकर उसकी मां के साथ चुदाई का खेल खेलना चाहती थी,,, जिसके लिए निर्मला तैयार नहीं थी,,,।)

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देखो निर्मला समझने की कोशिश क्यों नहीं करती अब हम तीनो में कोई भी बात छुपी नहीं है तो क्यों ना हम एक दूसरे के राजदार बनकर कर जिंदगी का मजा लुटे क्योंकि हम तीनों क्या करते हैं यह बात किसी को कानों कान तक नहीं खबर पड़ेगी,,,,

लेकिन शीतल मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं वह मेरा बेटा है मैंने उसे तुम्हारे पास भेजी इतना बहुत है अब मैं तुम्हारे साथ मिलकर अपने बेटे की नुमाइश एक ही बिस्तर पर नहीं करना चाहती,,, बस बहुत हो गया तुम्हें लंड की प्यास थी मेरे बेटे से चुदवाना था सो तुम उससे चुदवाली और एक बार नहीं कई बार,,,, लेकिन अब मैं इससे ज्यादा आगे नहीं बढ़ने दूंगी यह बात यहीं पर खत्म होती है,,,,

देखो निर्मला( मुस्कुराते हुए )तुम मुझे कुछ भी कहो मेरे बारे में कुछ भी समझो लेकिन मैं अब तुम्हारी एक भी बात का बुरा नहीं मानूंगी क्योंकि तुम्हारा एहसान मुझ पर बहुत बड़ा है तुम धन्य हो जो शुभम जैसे लड़के को जन्म दि हो,,,, यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानती हो कि एक औरत को क्या चाहिए रहता है,,, पेट है तो भूख भी लगती है जिस्म है तो जरूरत भी पैदा होती है,,,, जिस राह पर तुम चल रही हो उसी राह पर अब मैं चल रही हूं हम दोनों की मंजिल एक ही है,,,, और हम दोनों का हमराही भी एक हैं,,,, मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगी निर्मला मैं बस इतना कहूंगा कि मेरी बात ठंडे दिमाग से सोच कर उस पर विचार करके मान जाओ वरना मैं अब बहुत आगे निकल चुकी हूं तुम्हारे बेटे की पूरी तरह से गुलाम हो चुकी हूं (शुभम की तरफ देखते हुए) और तुम्हारे बेटे के साथ संभोग करने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं अगर तुम ठीक से नहीं मानोगी तो तुम दोनों का वीडियो मेरे पास है,,,,, अब मैं चलती हूं ठीक से तुम दोनों मां-बेटे बैठकर आपस में फैसला करके मुझे जरूर बताना और उम्मीद करती हूं कि तुम दोनों का फैसला मेरे हक में होगा,,,



इतना कहकर शीतल निर्मला के घर से बाहर निकल गई बहुत दोनों उसे घर से बाहर जाता हुआ देखते रहे शुभम तो शीतल का पूरी तरह से दीवाना हो चुका था क्योंकि जिस बेशर्मी से उसने बिना डरे अपने मन की बात कही थी उसे से वह शीतल की तरह पूरी तरह से आकर्षित हो चुका था खास करके उसकी एक ही बिस्तर पर तीनों मिलकर आनंद लेने वाली बात पर भी तो वह एकदम बाग बाग हो चुका था,,, अगर सब कुछ सही हुआ तो एक ही बिस्तर पर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत और दुनिया की सबसे सेक्सी कामुक औरत शीतल के साथ चुदाई का भरपूर आनंद लेगा शुभम,,,, शुभम को यकीन था कि शीतल ने जिस तरह से वीडियो वाली बात कह कर एक तरह से उसकी मां को धमकी दी है उसकी मां जरूर मान जाएगी और उसका सपना भी सच हो जाएगा,,, शुभम की तो कल्पना का घोड़ा बड़ी तेजी से भागने भी लगा उसकी आंखों के सामने कमरे के अंदर एक ही बिस्तर पर उसकी मदमस्त जवानी से भरपूर मां और शीतल दोनों एकदम नंगी होकर उसके जिस्म से खेल रहे थे,,,, कल्पना ही इतना उन्मादक था कि देखते-देखते शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,,।


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कमरे में दोनों के बीच पूरी तरह से खामोशी छाई हुई थी शुभम कुछ बोलना नहीं चाह रहा था वह तो सिर्फ अपनी मां के द्वारा लिए गए फैसले के बारे में सोच रहा था जो कि अभी वह अपने ही मन में सोच रही थी,,,,, कुछ देर और सोचने के बाद निर्मला बोली,,,।

जैसा तू कह रहा था वैसा ही हुआ वह उस वीडियो की कॉपी रखी हुई है,,,

मम्मी हम लोग के पास उसकी बात मानने के सिवा कोई रास्ता नहीं है,,,।

हां तू तो मानेगा ही तुझे तो मजा ही मजा है,,, एक साथ दो दो औरत की चुदाई जो करने को मिलेगी,,,,

मम्मी तुम गलत समझ रही हो,,,, तुम्हें बात अच्छी तरह से जानती हो कि जब तक सीकर के पास हम दोनों की वीडियो है तब तक हम दोनों उसके हाथों की कठपुतली है जैसा वह नचाएगी वैसा ही हम दोनों को नाचना होगा,,,


( अपने बेटे की बात सुनकर निर्मला कुछ देर तक सोचने पर मजबूर हो गई क्योंकि जो कुछ भी शुभम कह रहा था उसमें शत प्रतिशत सच्चाई थी शीतल के पास उन दोनों की वीडियो जो कि नहीं थी फिर भी वह झूठ बोलकर निर्मला को धमकी देकर गई थी जिस पर निर्मला विचार करने पर विवश हो चुकी थी ना चाहते हुए भी उसे इस बात को मानना पड़ा कि जो कुछ भी शीतल कह रही है उसे मानने में ही भलाई है फिर भी वह दबे मन से अपनी बेटे से बोली,,,)

लेकिन शुभम उसकी हर बात शायद मान भी लूं लेकिन एक साथ तीन लोग एक ही बिस्तर पर एकदम नंगे मुझे बड़ा अजीब लग रहा है,,,

अजीब कैसे लग रहा है मम्मी,,, भूल गई मामा की लड़की मैं और तुम तीनों एक साथ एक ही बिस्तर पर पहले भी तीन लोगों का मजा ले चुके हैं,,,, और तुम देखी नहीं थी चुदाई करवानी की ललक मामा की लड़की में इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि वह तुम्हारे सामने ही अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर मेरे लंड का मजा ले रही थी वह भी तुमसे बिना शर्माए,,,,,,,( शुभम की यह बात सुनकर ही निर्मला की आंखों के सामने वह दृश्य तैरने लगे जब वह सच में गांव गई हुई थी और वहां पर चोरी-छिपे शुभम के मामा की लड़की ने उन दोनों की गरमा गरम चुदाई को अपनी आंखों से देख ली थी और उन्हें रंगे हाथ पकड़ ली थी लेकिन किसी तरह से उन दोनों की गरमा गरम चुदाई की गर्मी वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और वह खुद उन दोनों ने शामिल होकर चुदाई का मजा लेने लगी यह बात बिल्कुल सस्ती की पहली बार निर्मला और शुभम दोनों एक साथ तीन-तीन जन का मजा ले रहे थे और इस खेल में उन तीनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हुई थी,,,, जैसा गांव में हुआ था ठीक वैसा ही निर्मला को इधर अपने ही घर में रंगे हाथ पकड़े जाने पर शीतल एक बार फिर से तीन जनों की चुदाई का खेल खेलने के लिए कह रही थी निर्मला का एक मन प्रसन्ना भी था तो दूसरे उसे घबराहट भी हो रही थी,,,

तेरी बात सब सच है शुभम लेकिन फिर भी बड़ा अजीब लग रहा है शीतल मेरे बचपन की सहेली हैं मेरे बारे में , उसने आज तक सब कुछ अच्छा ही सोचती आई है मैं उसकी नजर में वह संस्कारी और मर्यादा से भरी हुई औरत हूं,,, तुम सोचो मैं उसके सामने कैसे अपने कपड़े उतार कर लेंगे हो जाओगी और कैसे उसकी आंखों के सामने तुम्हारी मम्मी को अपनी बुर में लेकर चुदाई का मजा लुंगी,,,

मम्मी ये शायद आप भूल रही हैं कि वह अपनी आंखों से ही हम दोनों की गरमा गरम चुदाई को देख चुकी हैं,,,, और हम दोनों की कामलीला देखने के बाद ही वह अपनी लीला शुरू की है अब उसकी नजर में तुम कोई मर्यादा सील चरित्रवान संस्कारी औरत नहीं रह गई हो,,,, इसलिए मैं कह रहा हूं सब कुछ भूलकर जैसा वह कह रही हैं वैसा ही हम तीनों मिलकर जिंदगी का मजा ले,,,,,

लेकिन सुभम,,,

अब कुछ मत कहो मम्मी यह मत बोलो कि हम दोनों की वीडियो उसके पास है और जब तक उसकी मोबाइल से हम अपनी कामलीला के सबूत को मिटा नहीं देती तब तक हमें वैसा ही करना होगा जैसा वह चाहती है और तुम चिंता बिल्कुल मत करो मैं ऐसा कुछ करूंगा कि वह खुद मेरी जाल में फंस जाएगी और खुद ब खुद उसे अपने मोबाइल में से हम दोनों की चुदाई वाला वीडियो डिलीट करना होगा,,,

क्या सच में शुभम में ऐसा हो पाएगा,,,,



क्यों नहीं मम्मी सब कुछ हो पाएगा मामा की लड़की ने आज तक किसी को बताई कि तुम मेरे से चुदवाती हो,,,, नहीं ना,,,,, क्योंकि वह खुद मेरे लंड का मजा ले चुकी है मुझसे छोटू आ चुकी है हम दोनों का राज बोलेगी तो उसे भी को डर है कि उसका भी राज खुल जाएगा इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बस सब कुछ भूल कर जिंदगी का मजा लो,,,,,,,
( शुभम की बातें सुनकर निर्मला का भी मन बहकने लगा शीतल की कही गई बातों से उसे वह पल याद आने लगा था जब वह अपने ही भाई की लड़की के साथ मिलकर अपने बेटे से चुदाई का जबरदस्त खेल खेली थी और उस खेल खेलने में उसे इतना आनंद आया था कि आज तक उस पल
को याद करके उसके बदन में गनगनाहट होने लगती है,,, उस समय गूंज रही पूरे कमरे में उसकी और उसके भाई की लड़की की गर्म सिसकारिर्यों की आवाज अब तक उसके जेहन में गूंजती रहती है,,, कुर्सी पर बैठे हुए कुछ देर तक निर्मला उसी पल को याद करके उन यादों में खोने लगे तो शुभम उसकी तंद्रा भंग करते हुए बोला,,,।)

मम्मी शीतल को फोन करके कह दो कि तुम तैयार हो,,,,

नहीं-नहीं शुभम तू ही उसे फोन करके कह दे मुझसे यह नहीं कहा जाएगा ना जाने क्यों शर्म महसूस होती है ,,,,

अच्छा तो शर्म आ रही है देखना जब हम तीनों एक कमरे में होंगे बिना कपड़ों के तब तुम ही खुद उसकी आंखों के सामने अपनी बड़ी बड़ी गांड को मेरे लंड के ऊपर रखकर जोर-जोर से उठक बैठक करोगी,,,,

तब की तब देखी जाएगी,,,,,

ठीक है मम्मी मैं फोन करके शीतल को बता देता हूं,,,,

इतना कहकर शुभम उसे फोन करने के लिए अपने कमरे में जाने ही वाला था कि उसे आवाज देकर रोकते हुए हैं निर्मला बोली,,,,

अच्छा रहने दे मैं ही फोन फोन पर उसे बता दूंगी,,,,

क्यों अब शर्म नहीं आएगी,,,

शर्म करके अब कोई फायदा नहीं है मेरी आंखों के सामने वह बेशर्म होकर तुझे पाने के लिए अपनी सारी हदें पार कर दे रही है तो क्या मैं तुझे अपना बना कर रखने के लिए इतना भी नहीं कर सकती,,,,( अपनी मां की है बातें सुनकर शुभम एक टक अपनी मां को देखने लगा शुभम को अपनी मां की आंखों में शीतल को लेकर जलन साफ नज़र आ रही थी,,,, सुबह में अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां कभी नहीं चाहती थी कि उसका लड़का किसी और औरत के साथ शारीरिक संबंध बनाए जो सुख उसे देता है वही सुख किसी गैर औरत को दें,,, लेकिन अब वह मजबूर हो चुकी थी अपने ही बेटे को किसी गैर औरत के साथ बांटने के लिए,,,, चाहे कुछ भी हो शुभम के तो दोनों हाथों में लड्डू था जिसका मजा हुआ धीरे-धीरे लेना चाहता था औरतों के साथ संबंध के मामले में शुभम की किस्मत काफी तेज नजर आ रही थी,,,, उसके साथ कुछ ऐसा हो जाता था कि औरतें खुद ब खुद उसकी झोली में आकर गिर जाती थी,,, शुभम मुस्कुराता हुआ फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया,,,, निर्मला जो कुछ देर पहले अपने बेटे को किसी को औरत के साथ देख कर जल भुन रही थी अब वह काफी उत्सुक थी आने वाले समय के लिए शीतल के द्वारा उन तीनों को मिलकर एक साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने की ऑफर को सुनकर अब निर्मला के मन में भी लालसा जगने रखी थी हालांकि वह पहले भी अपने भाई की लड़की के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ चुदाई का आनंद ले चुकी थी जिसमें वह काफी आनंदित होकर चरमोत्कर्ष को प्राप्त की थी अब एक बार फिर से अपनी हम उम्र शीतल के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ चुदाई का खेल खेलने के लिए उत्सुक हुए जा रहे थे देखना चाह रही थी कि दो उम्र दराज कसी जवानी की मालकीन औरतों के साथ शुभम ठीक से अपनी मर्दाना ताकत का जोर दिखा पाता है कि नहीं,,,,, यह सोचकर ही निर्मला की पेंट गीली होती हुई महसूस होने लगी और अपनी गीली हो रही पेंटी के बारे में सोच कर वह मन ही मन सोचने लगी कि औरतों की जिस्मानी प्यास भी क्या चीज है कुछ देर पहले जो किसी गैर औरत के बारे में सोच कर ही उसे गोदारा था अब उसी के साथ मिलकर अपने बेटे के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने के लिए उसका मन उतावला हुआ जा रहा था,,,, इतनी बात मन में सोच कर वह शीतल को फोन लगा दी,,,।
सीता नहाने की तैयारी कर रही थी वह बाथरूम में एकदम नंगी होकर सावर चालू करने की जा रही थी कि मोबाइल की घंटी बज उठी थी और वह उसी तरह से एकदम नंगी होकर बाथरुम से बाहर आई और अपने मोबाइल स्क्रीन पर निर्मला का नाम देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई,,, वह फोन रिसीव करके बोली,,,,

बोलो मेरी जान तो क्या फैसला ली हो,,,,

मैं तुम्हारी बात पर बहुत विचार करने के बाद फैसला रही हूं कि जो तुम कह रही हो वैसा ही होगा,,,,।

वाह मेरी जान यह कहकर तुमने तो मुझे खुश कर दि हो,,
तुम जानती हो मैं बाथरूम में नहाने की तैयारी कर रही थी एकदम कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर क्योंकि कल तुम्हारे बेटे ने रात भर मुझे ऐसा परेशान किया है कि मेरा बदन अभी तक दर्द कर रहा है जगह-जगह उसके काटने का निशान बना हुआ है और तो और तुम्हारे बेटे का लंड इतना मोटा तगड़ा था कि उसने मेरी बुर में डालकर ऐसी चुदाई किया है कि मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूं ,,,,,।

तो यह सब तुम मुझे जलाने के लिए सुना रही हो,,,

नहीं नहीं मेरी जान मैं तो सिर्फ यह बताना चाह रही हूं कि हम दोनों को बहुत ही ज्यादा मजा आने वाला हूं क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारा बेटा अपने मोटे तगड़े लंड से हम दोनों की बुर का रस निचोड़ कर रख देगा,,,,,
( शीतल के मुंह से अपने बेटे की मर्दाना ताकत की तारीफ सुनकर वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी,,)

लेकिन यह होगा कैसे मेरा मतलब है कहां पर होगा,,, मेरे घर में तो अगर मेरे पति को पता चल गया तो सब बर्बाद हो जाएगा,,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं थोड़ी देर में तुम्हारे घर पर आती हूं और सब प्लान बताते हैं अब मैं नहाने जा रही हूं तुम्हें शायद पता नहीं मैं अपने घर में एकदम नंगी होकर घूम रही हु,,,

क्या एकदम नंगी होकर,,,,

हां मेरी जान एकदम नंगी होकर क्या करूं तुम्हारे बेटे ने रातभर मेरी चुदाई करके मस्त कर दिया है अभी तक उसके लंड की मोटाई मुझे अपनी बुर के अंदर महसूस हो रही हैं,, मैं तो एकदम पागल हो गई हूं,,,,, अच्छा मैं फोन रखती हूं मैं नहा कर तुम्हारे घर आती हूं,,,( इतना कहकर शीतल फोन काट दी और सीधा बाथरूम में घुस गई उधर शीतल की बात सुनकर निर्मला के बदन में खुमारी छाने लगी थी,,, उसकी बुर से नमकीन पानी रिस रहा था शीतल ने जिस तरह से उसे रात भर की गरमा गरम बातें टोन में बोलकर बताई थी उससे निर्मला की बुर में खुजली होने लगी थी,,,,
वह सीधा अपने बेटे के कमरे में पहुंच गई जहां पर वह नहा कर फ्रेश होकर पीठ के बल लेटा हुआ था लेकिन शीतल की मदमस्त गर्म जवानी और आने वाले पल में एक साथ सीतल और उसकी मां की लेने की कल्पना में खोया हुआ होने की वजह से उसके पैजामे में तंबू बना हुआ था,,, विमला अपनी बेटे के कमरे में पहुंचकर अपने बेटे के पजामे की तरफ नजर दौड़ाई तो पजामें में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था,,, जिसे देखकर निर्मला के मुंह में पानी आ गया,,,

क्यों रे मादरचोद शीतल रंडी के बारे में सोच कर तेरा खड़ा हुआ है ना,,,,

नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है यह तो बस ऐसे ही,,,

भोसड़ी वाले मैं अच्छी तरह से तुझे जान गई हूं तू एक नंबर का माधरचोद है,,,, साले रंडी की औलाद नई बुर देखा नहीं की लार टपकाता हुआ पीछे पीछे दौड़ने लगा,,,,,

यह क्या कह रही हो मम्मी,,,,( निर्मला एकदम गुस्से में थी इसलिए शुभम अपनी मां की बातें सुनकर घबरा रहा था क्योंकि इस तरह की बातें सिर्फ चुदाई करते समय करती थी जो कि इतनी गंदी भी नहीं करती थी लेकिन आज वह कुछ और मूड में थी आज शीतल को लेकर शायद उन्हें जलन हो रही थी यही सब शुभम के मन में अपनी मां की बातें सुन कर चल रहा था,,, कि तभी एक झटके से निर्मला अपने बेटे के पजामे को पकड़ कर उसे खींचकर घुटनों तक कर दी,,, अगले ही पल सुभम का मोटा तगड़ा लंड अपनी औकात में आ कर छत की तरह मुंह उठाए खड़ा था,,, निर्मला अपने बेटे के खड़े लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,,

भोसड़ी वाले मादरचोद शीतल की याद में इतना मस्त हुआ है कि रात भर उसको चोदने के बाद अभी भी तेरा लंड खड़ा है मादरचोद मेरी बुर से तेरा मन भर गया क्या,,,,,

नहीं नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है ऐसा भला हो सकता है क्या,,,

भोसड़ी के ऐसा ही हुआ है,,,( ऐसा कहते हुए निर्मला घुटनों के सहारे बिस्तर पर चढ़ गई और घुटनों के सहारे आगे बढ़ते हुए देखते ही देखते अपने बेटे की कमर के इर्द-गिर्द अपने दोनों घुटने दिखाकर अपने लिए एकदम पोजिशन बना ली,,,)
मादरचोद रंडी की औलाद मेरी जवानी तुझे कम पड़ने लगी ना,,,, मादरचोद शीतल का दीवाना हो गया है तू शीतल चाहे जो भी हो लेकिन मेरी बुर के नीचे है,,,, उसकी जवानी मेरे झांठ के बाल के बराबर भी नहीं है,,,,

यह तुम्हें क्या हो गया है मम्मी कैसी कैसी बातें कर रही हो,,,

चुप भोंसड़ी के मादरचोद,,,, भोसड़ी चोदी का औलाद मुझे सिखाता हैं,,,,
( शीतल के प्रति निर्मला के मुंह से उसके लिए जलन की भावना निकल रही थी,,, लेकिन फिर भी निर्मला एकदम उत्तेजक मुद्रा में नजर आ रही थी जिस तरह से वह शुभम के ऊपर बैठी हुई थी शुभम का मोटा तगड़ा घंटे बार-बार उसकी चिकनी जांघों से टकरा जा रहा था,,, जिससे शुभम के बदन में आग लग जा रही थी वह खुद अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर उसे चोदना चाहता था लेकिन जिस तरह से वह गुस्से में थी उसे देखकर बहुत डर रहा था,,,)

साले मादरचोद शीतल का दीवाना है मैंने भोसड़ी के शीतल के ऊपर तो मैं मुत दुं तो वह बह जाए,,,,।( इतना कहते हुए शीतल धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,।)

साले हरामजादे मेरी बुर से ज्यादा गर्मी क्या उसकी बुर में है,,, देखना आज अपनी बुर में तेरा लंड डालकर कैसे उसे पिघलाती हुंं( इतना कहने के साथ ही निर्मला अपनी साड़ी कमर तक उठाती कमर के नीचे को पूरी तरह से नंगी हो गई को देखते-देखते अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी गुलाबी बुर के अंदर डालना शुरू कर दी और अगले ही पल अपनी भारी भरकम गांड को धीरे-धीरे उसके लंड पर रखकर उसे अंदर गटकना शुरू कर दी,,,,

भोसड़ी के मादरचोद रंडी की औलाद क्या मुझसे ज्यादा मजा आता है उसमें,,,,, देख आज मैं तुझे ऐसा मजा दूंगी कि तू पागल हो जाएगा,,,, मादरचोद,,,,
( अपनी मां का यह रूप देख कर शुभम पूरी तरह से घबराया हुआ तो था ही लेकिन अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव भी कर रहा था उसका पूरा बदन पसीना पसीना हो गया था देखते ही देखते निर्मला अपनी भारी भरकम गांड को धीरे-धीरे नीचे की तरफ करते हुए शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में उतार ली,,,,, और उसके ऊपर जोर जोर से कूदना शुरू कर दी साथ में गंदी गंदी गालियों से उसका जोश बढ़ाते जा रही थी,,,।)

भोसड़ी के मादरचोद एक औरत को चोदते चोदते तेरा मन भर गया तो दूसरी औरत को चोदना शुरू कर दिया,,, यह मत भूल मादरचोद तुझे मैंने ही तैयार की है अगर मैं तुझे तैयार कर सकती हूं तो तुझे मिटा भी सकती हूं,,,, भोसड़ी के मादरचोद आखिर तू एक मार दे यह साबित कर दिया साला एक से मन भर गया तो दूसरी पर फिदा हो गया,,,,
( ऐसा कहते हुए निर्मला जोर-जोर से अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,, निर्मला पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी साथ ही अपनी मां का यह रूप देखकर शुभम भी पागल हुआ जा रहा था रह रहे कर नीचे से मौका देखकर शुभम भी ऊपर की तरफ कमर ऊछाल दे रहा था,,, लेकिन निर्मला शुभम के ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुकी थी वह अपनी दोनों हथेलियों को सुभम के सीने पर रखकर जोर-जोर से अपने बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,,, शुभम लाचार होकर अपनी मां के नीचे लेटा हुआ था,,,, कुछ देर तक ऐसा नहीं चलता रहा निर्मला अपने बेटे को जरा भी मौका नहीं दे रही थी कुछ करने के लिए आज वह अपने बेटे से खेलना चाहती थी लेकिन कुछ देर बाद वह झड़ने के बेहद करीब पहुंच गई उसकी सांसे तेज चलने लगी तो मौका देखकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की कमर को थामकर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठाया,,, और अपनी ताकत दिखाते हुए ऐसा पलटी मारा कि अगले ही पल उसकी मां चित्त होकर पीठ के बल लेट गई और शुभम उसके ऊपर सवार हो गया उसकी टांगों के बीच,,, लेकिन ऐसा करने में शुभम ने अपने लंड को अपनी मां की बुर से एक पल के लिए भी अलग नहीं किया,,,,। आप शुभम अपनी मां के ऊपर था,,,

साली हरामजादी मादरचोद रंडी जितनी बार कहां हो कि मैं तेरे सिवा किसी और औरत को चोदकर इतना मजा नहीं लेता हूं जितना कि तेरे से लेता हूं,,, तेरी बुर जितना मुझे मजा देती है उतना किसी की बुर से नहीं आता,,,
साली भोंसड़ी बहुत लंड लेने का शौक है ना तुझे,,, मादरचोद अब ले,,,

इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी कमर को जोर-जोर से चलाना शुरु कर दिया अब निर्मला अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई से एकदम मस्त होने लगी,,, उसके मुंह से गालियां की जगह गर्म सिसकारियां पूरे कमरे में गुंज रही थी,,,,
देखते ही देखते एक बार फिर से निर्मला के साथ-साथ शुभम भी झड़ने लगा निर्मला एकदम मस्त हो चुकी थी उसे अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई देखकर समझ में आ गया कि आप जो खेल शीतल को लेकर खेला जाएगा उसमें बहुत मजा आने वाला है,,,, शुभम रह-रहकर हल्के हल्के धक्के लगा रहा था,,,, निर्मला चरम सुख को पाकर गहरी गहरी सांसे ले ही रही थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी निर्मला समझ गई किसी शीतल आ चुकी है इसलिए मैं बिस्तर से उठ कर अपने कपड़े दुरुस्त करके दरवाजा खोलने चली गई,,,।
 
भोसड़ी के मादरचोद रंडी की औलाद क्या मुझसे ज्यादा मजा आता है उसमें,,,,, देख आज मैं तुझे ऐसा मजा दूंगी कि तू पागल हो जाएगा,,,, मादरचोद,,,,
( अपनी मां का यह रूप देख कर शुभम पूरी तरह से घबराया हुआ तो था ही लेकिन अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव भी कर रहा था उसका पूरा बदन पसीना पसीना हो गया था देखते ही देखते निर्मला अपनी भारी भरकम गांड को धीरे-धीरे नीचे की तरफ करते हुए शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में उतार ली,,,,, और उसके ऊपर जोर जोर से कूदना शुरू कर दी साथ में गंदी गंदी गालियों से उसका जोश बढ़ाते जा रही थी,,,।)

भोसड़ी के मादरचोद एक औरत को चोदते चोदते तेरा मन भर गया तो दूसरी औरत को चोदना शुरू कर दिया,,, यह मत भूल मादरचोद तुझे मैंने ही तैयार की है अगर मैं तुझे तैयार कर सकती हूं तो तुझे मिटा भी सकती हूं,,,, भोसड़ी के मादरचोद आखिर तू एक मार दे यह साबित कर दिया साला एक से मन भर गया तो दूसरी पर फिदा हो गया,,,,
( ऐसा कहते हुए निर्मला जोर-जोर से अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,, निर्मला पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी साथ ही अपनी मां का यह रूप देखकर शुभम भी पागल हुआ जा रहा था रह रहे कर नीचे से मौका देखकर शुभम भी ऊपर की तरफ कमर ऊछाल दे रहा था,,, लेकिन निर्मला शुभम के ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुकी थी वह अपनी दोनों हथेलियों को सुभम के सीने पर रखकर जोर-जोर से अपने बड़ी बड़ी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटक रही थी,,,,, शुभम लाचार होकर अपनी मां के नीचे लेटा हुआ था,,,, कुछ देर तक ऐसा नहीं चलता रहा निर्मला अपने बेटे को जरा भी मौका नहीं दे रही थी कुछ करने के लिए आज वह अपने बेटे से खेलना चाहती थी लेकिन कुछ देर बाद वह झड़ने के बेहद करीब पहुंच गई उसकी सांसे तेज चलने लगी तो मौका देखकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की कमर को थामकर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठाया,,, और अपनी ताकत दिखाते हुए ऐसा पलटी मारा कि अगले ही पल उसकी मां चित्त होकर पीठ के बल लेट गई और शुभम उसके ऊपर सवार हो गया उसकी टांगों के बीच,,, लेकिन ऐसा करने में शुभम ने अपने लंड को अपनी मां की बुर से एक पल के लिए भी अलग नहीं किया,,,,। आप शुभम अपनी मां के ऊपर था,,,

साली हरामजादी मादरचोद रंडी जितनी बार कहां हो कि मैं तेरे सिवा किसी और औरत को चोदकर इतना मजा नहीं लेता हूं जितना कि तेरे से लेता हूं,,, तेरी बुर जितना मुझे मजा देती है उतना किसी की बुर से नहीं आता,,,
साली भोंसड़ी बहुत लंड लेने का शौक है ना तुझे,,, मादरचोद अब ले,,,

इतना कहने के साथ ही शुभम अपनी कमर को जोर-जोर से चलाना शुरु कर दिया अब निर्मला अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई से एकदम मस्त होने लगी,,, उसके मुंह से गालियां की जगह गर्म सिसकारियां पूरे कमरे में गुंज रही थी,
 
निर्मला जैसे ही दरवाजा खोली सामने शीतल खड़ी थी जो कि मुस्कुरा रही थी,,,, यह मुस्कुराहट उसके विजय की थी,,, जो कि वह निर्मला के ऊपर पा चुकी थी,,,
निर्मला पर मुस्कुराकर शीतल का स्वागत की और उसके अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दी थोड़ी देर बाद शुभम भी सीढ़ियां उतरते हुए साथ में अपने शर्ट की बटन को बंद करते हुए नीचे उतरने लगा,,,,शुभम के ऊपर नजर पड़ते ही उसकी हालत को देखकर सीतल को समझते देर नहीं लगी कि उसके पीठ पीछे उसके जाते ही निर्मला अपने बेटे के लंड के ऊपर चढ़ गई,,

क्या निर्मला तुम दोनों मां बेटे से इतना भी नहीं रहा गया थोड़ा तो इंतजार कर लेती,,, ऐसा लग रहा था कि मुझे यहां बुलाने का फैसला तुमने अपनी बुर में अपने बेटे के लंड को लेते हुए ही की हो,,,
Nirmala ki madmast badi badi chuchiya

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नहीं नहीं सीतल ऐसी कोई बात नहीं है यह तो अभी अभी नहा कर आया है,,,,,

देखो निर्मला आप मुझसे छुपाने की कोई जरूरत नहीं है मैं सब कुछ समझती हुंं ,,,,अब तो हम तीनों को एक दूसरे का राज दार बनकर रहना है ,,,,आपस में तो हम खुलकर रह ही सकते हैं,,,
(शीतल की बात सुनकर निर्मला समझ गई कि अब सीकर से कुछ भी छुपा पाना मुश्किल है वैसे भी कुछ देर पहले उसके बाल बंधे हुए थे और अब पूरी तरह से खुले हुए थे और बिखरे हुए भी,,, यह देख कर कोई भी अनुभवी औरत बता सकती है कि कुछ देर पहले उस औरत ने क्या कर के आई है,,, इसी से शीतल की समझ गई थी और शुभम जिस तरह से अपनी शर्ट के बटन को बंद करते हुए सीढ़ियां नीचे उतर रहा था उसे देखते ही वह पक्के तौर पर समझ गई थी कि उसके चाहिए देना चुदाई का अद्भुत खेल खेल रहे थे। इसलिए निर्मला बोली।)

हां तुम ठीक समझ रही हो तुम्हारी गर्म बातों ने मुझे भी गर्म कर दिया था,,


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मेरी गर्म बातों ने नहीं तुम्हारे बेटे का लंड इतना दमदार है कि उसे देखते ही औरत पागल हो जाती है उसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,पर तुम तो ना जाने कितनी बार अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा कर अपनी बुर की गहराई नपवा चुकी हो तुम्हारी यह हालत होगी यह तो निश्चित ही है,,में खुद ही रात भर तुम्हारे बेटे से चुदने के बाद भी मेरी इच्छा बार-बार हो रही है कि तुम्हारे बेटे के लंड के ऊपर चढ जाऊ।

तुम दोनों मिलकर लगता हैं मेरी जान ले लोगी,,,,

नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा तेरी जान हम दोनों के लिए बहुत कीमती है,,,

मेरी जान किमती है कि मेरा लंड,,,,

तुझमे जान रहेगी तभी ना तेरे लंड में जान आएगी,,,
(शीतल की बातें सुन कर तीनो हंसने लगे,,, धीरे-धीरे तीनों आपस में खुलने लगे थे,,,, निर्मला शीतल की तरफ कुर्सी आगे बढ़ाकर उसे बैठने के लिए बोली,,,।)


मैं तुम्हारी बात से सहमत हूं शीतल,,,यह मैं पक्के तौर पर तो नहीं कह सकती कि इस तरह से करने पर हम तीनों को मजा आएगा कि नहीं आएगा लेकिन फिर भी जैसा तुम कह रही हो एक बार इसका अनुभव ले लेना चाहिए,,,
(निर्मला जानबूझकर शीतल से झूठ बोल रही थी कि उसका यह पहला अनुभव है जबकि वह तीन जनों के साथ में मिलकर चुदाई का खेल पहले भी खेल चुकी थी जिसमें उसे आनंद ही आनंद आया था.,,, जबकि यह शीतल के लिए पहला अनुभव था और वह काफी उत्साहित और उतावली भी थी,,,)

तुमने सही फैसला ली हो निर्मला,,, तुम्हारे बेटे के जरिए मैं भी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हूं,, मुझे तो अभी से अनुभव हो रहा है कि आगे बहुत मजा आने वाला है,,


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लेकिन सीतल मुझे डर लगता है कि अगर इस बारे में किसी और को पता लग गया तो क्या होगा,,

कैसे पता चलेगा मेरी जान यह बात में तुम और तुम्हारा बेटा हम तीनों के सीवा चौथा जान ही नहीं सकता,,, चारदीवारी में बंद कमरे के अंदर हम तीनों दुनिया की नजरों से छुपके छुपाते क्या गुल खिला रहे है किसी को क्या पता चलने वाला है।(यह सब कहते हुए सीतल काफी उत्साहित नजर आ रही थी,,,, निर्मला का भी रोमांच बढ़ता जा रहा था,, सब कुछ तय होता जा रहा था लेकिन यह सब होगा कहां यह भी निश्चित नहीं था इसलिए निर्मला अपनी बात रखते हुए बोली,,,।)

शीतल जिस तरह का अनुभव हम तीनों मिलकर लेना चाहते हैं उसके लिए काफी समय चाहिए एक ऐसी जगह चाहिए जहां पर हम तीनों के सिवा तीसरा कोई आता जाता ना हो,, मेरे घर में यह संभव नहीं है इसके पापा वैसे तो इतनी जल्दी नहीं आती लेकिन उनका कोई न कि नहीं है कभी भी आ सकते हैं और ऐसे में अगर हम तीनों मुड में आ गए और इसके पापा आ गए तो सब काम बिगड़ जाएगा,,
और तुम्हारे वहां भी यह नहीं हो सकता क्योंकि हम दोनों के तुम्हारे घर रहेंगे तो इसके पापा कभी भी घर पर आकर हम दोनों को ढूंढने लगेगे।,,,,(शीतल निर्मला की बातों को बड़े गौर से सुन रही थी और मन ही मन मुस्कुरा रही थी निर्मला की पूरी बात सुनने के बाद वह मुस्कुराते हुए बोली ।)

तुम पागल हो गई हो निर्मला ,,, जिस तरह का खेल हम तीनों को खेलना है उसके लिए ना मेरा घर ना तुम्हारा घर बिल्कुल भी ठीक नहीं है।,,,

तो,,,,(निर्मला और शुभम एक साथ आश्चर्य से बोले)

तो यह कि इस काम के लिए हमें इस शहर से बाहर जाना होगा,,,

क्या पागल वाली बात कर रही हो शीतल,,, यह काम करने के लिए अपने शहर से बाहर जाएंगे,,,

क्यों लोग हनीमून पर नहीं जाते हैं क्या,,,?

हनीमून,,,,!(निर्मला आश्चर्य से बोली,,, शीतल की बात सुनकर उसके बदन में गुदगुदी हो रही थी ।)

हां हनीमून हम तीनों के लिए यह एक हनीमुन ही होगा,,,

तुम पागल हो रही हो शीतल,,,यहां पर हम तीनों में से किसी की शादी नहीं हुई है जो हनीमून पर जाएंगे,,,

तुम एकदम नादान हो निर्मला बस ना जाने कैसे हिम्मत करके अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा ली हो बस,,, अरे हनीमून पर जाते किसलिए चुदाई करने के लिए ना और हम तीनों के लिए जा रहे हैं चुदाई करने तो एक तरह से ये हम तीनों का यह हनीमून ही हुआ,,,, और हम तीनों को शिमला जाना होगा,,,(सीतल लेकिन फटाक से बोल पड़ी,,,)

शिमला,,,, नहीं-नहीं शीतल,,, यहां कौन संभालेगा,,,,

गर्मियों की छुट्टी पड़ चुकी है और वैसे भी तुम गर्मियों की छुट्टी में गांव में तो जाती ही हो,,, तो इस बार शिमला चलते हैं,,,,, मेरी बात मानो निर्मला वहां बहुत मजा आएगा। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ ठंडी ठंडी में हम तीनों की गर्म जवानी,,,ऊहहहहहह,,, बहुत मजा आएगा,,,( ऐसा कहते हुए शीतल एकदम से गनगनाने लगी.. मानव सच में उसके ऊपर बर्फ गिर रही हो,,, शीतल की बात सुनकर निर्मला भी सोचने पर मजबूर हो गई उसे भी शिमला घूमने जाना था लेकिन कब जाना था यह निश्चित नहीं कर पाई थी आज यीशु एकाएक शीतल के कहने पर उसके मन की अभिलाषा एक बार फिर से जागरूक हो गई,,,, शुभम तो काफी खुश और उत्साहित नजर आ रहा था शीतल की गरम बातों से वो एकदम से गर्म हो चुका था उसके पजामे में उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था,,, वह तो सच में अपनी मां और शीतल के साथ हनीमून मनाने के लिए मचलने लगा था।निर्मला थोड़ा उदास लग रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह शिमला जहां पाएगी या नहीं इसलिए वह अपने मन की शंका को शीतल से बताते हुए बोली,,,।)



लेकिन शीतल कहीं इसके पापा जाने नहीं दिए तो,,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा स्कूल की छुट्टी तो पड ही गई है,,, तुम उन्हें समझाओ गी तो वह समझ जाएंगे,,,

चलो ठीक है मैं उन्हें समझा लूंगी लेकिन जाना कब है और कैसे,,,,?

2 दिन बाद तुम्हारी ही गाड़ी से,,,,

2 दिन बाद बहुत जल्दी नहीं है,,

अरे मेरी जान मैं तो इतनी जल्दी में हूं कि तुम्हारी आंखों के सामने अभी तुम्हारे बेटे के लंड को अपनी बुर में डलवा कर चुदवा सकती हुं,,,,, यकीन ना आए तो देख लो अभी तुम्हारे बेटे का लंड खड़ा होगा,,,,,,

इसकी कोई जरूरत नहीं है मैं खुद ही दिखा देता हूं,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम एकदम बेशर्म बनता हुआ कुर्सी पर से खड़ा हो गया, और उसके पर जाने पर बना अच्छा खासा तंबू नजर आने लगा जिसे देखते ही निर्मला के साथ-साथ शीतल की भी बुर कुलबुलाने लगी,,,,। और यह देखकर तीनों हंसने लगे,,। आखिरकार तीनों ने मिलकर फैसला कर लिया कि 2 दिन बाद उन्हें शिमला के लिए निकलना है जिसके लिए शुभम शीतल और निर्मला तीनों शाम को है वहां जाने के लिए कपड़े खरीदने के लिए मॉल चले गए और वहां पर अपनी अपनी पसंद के कपड़े के साथ साथ रात को पहनने के लिए बेहद खूबसूरत और सेक्सी गाउन भी खरीद ली,,, निर्मला अपने पति अशोक से वहां जाने की इजाजत ले ली थी,,, वहां पर तीनों 10 दिन के लिए जा रहे थे,,,,।
 
तैयारी हो चुकी थी नए सफर के लिए,,, शुभम काफी उत्साहित था इस नए अनुभव के लिए और निर्मला के दिल की धड़कन सोच कर ही जोरों से धड़क रही थी कि जब एक साथ तीनों मिलेंगे तो क्या होगा,,,, और शीतल तो व्याकुल थी जल्द से जल्द शिमला पहुंचने के लिए वहां की ठंडी वादियों में तीनों की गरम जिस्म एक नया अध्याय लिखेंगे,,, तकरीबन 16 से 18 घंटे का रास्ता तय करना था शिमला पहुंचने के लिए इसलिए तीनों बड़े सवेरे ही घर से निकल गए,,,
निर्मला ने पीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उसका गोरा बदन बेहद मनमोहक लग रहा था,,, निर्मला का कसा हुआ गदराया बदन पीली साड़ी में निखर कर सामने आ रहा था,, तैयार होते समय ही सुभम की नजर अपनी मां पर पड़ी थी और उसे देखते ही शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था अगर थोड़ा और समय मिलता तो शायद शुभम तैयार होते होते ही अपनी मां की चुदाई कर दिया होता,,


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शीतल साड़ी की जगह लाल रंग का सूट पहनी हुई थी,,, जिसमें उसका भरावदार बदन काफी हद तक उसके लाल रंग की कसे हुए सूट में और ज्यादा कस गया था,,, कसी हुई ड्रेस होने के कारण शीतल के नितंबों का उभार कुछ ज्यादा ही बड़ा और गोल गोल तरबूज की तरह लग रहा था जिस पर नजर पड़ते हैं शुभम के लंड ने हल्की सी अंगड़ाई ली थी,,,

स्टेरिंग पर निर्मला बैठी हुई थी गाड़ी उसे ही चलानी थी और पीछे शीतल शुभम को कहां बैठना है,,, इसका फैसला हुआ खुद नहीं ले पा रहा था,,, वह कार के बाहर खड़ा था तो शीतल ही उसे अपने पास बैठने के लिए पीछे बुला ली,,, शीतल कि ईस बात पर निर्मला को थोड़ा गुस्सा जरूर आया था लेकिन ना जाने क्यों अब उसे ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी,,
गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी,,, शिमला में रहने का इंतजाम बहुत ही चौकस था,,, शीतल के बचपन की सहेली का बंगला वहा था जो कि आज कल न्यूयॉर्क में थी और शीतल जब भी मौका मिलता था तो वह शिमला घूमने निकल जाती थी,,, इसलिए वहां पर घूमने का अनुभव वहां के स्थानों का ज्ञान शीतल को अच्छी तरह से था इसलिए किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी,,,

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मुख्य सड़क पर निर्मला बड़े आराम से गाड़ी चला रही थी,,, वह बातों का दौर शुरू करते हुए बोली।

मेरा शुरू से ही सपना था शिमला घूमने का,,,

क्या कह रही हो निर्मला,,, क्या सच में तुम अभी तक शिमला नहीं गई हो,,,,?

हां मैं सच कह रही हूं मैं कभी शिमला नहीं कही लेकिन वहां जाने का बहुत मन करता है खास करके जब मेरी शादी हुई थी,,,

मतलब कि हनीमून मनाने के लिए,,,(बीच में तपाक से शुभम बोल पड़ा,, अब ऊसमें जरा भी शर्म बाकी नहीं रह गई थी,और इसमें ऐसा लग रहा था कि निर्मला को भी सुभम की बात सुनकर किसी भी प्रकार की दिक्कत महसूस नहीं हुई,,,,)

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लगता है शुभम तुम्हारी मां बर्फ की पहाड़ियों पर नंगी होकर तुम्हारे पापा से चुदवाना चाहती थी,,,

क्या बकवास कर रही हो सीता थोड़ा तो शर्म करो,,,

निर्मला क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि अब हम तीनों को आपस में किसी भी प्रकार की शर्म करनी चाहिए,,, शुभम अब हम दोनों के लिए हमारा प्रेमी हमारा पति सब कुछ है।
(शीतल की बातें निर्मला को अंदर ही अंदर अच्छी भी लग रही थी,, लेकिन एक मां होने के नाते वह जानबूझकर ऊपर से शीतल की इस तरह की बातों से नाराज होने का दिखावा कर रही थी।) और सच कहूं तो निर्मला जो सपना तुमने अपने शादी के बाद जवानी के दिनों में देखी थी उसे पूरा करने का समय अब आ गया है,,,, मैं तुमसे पहले भी कह चुकी हूं कि हम तीनों अब अपनी हनीमून पर ही जा रहे हैं,,,

शीतल तुम्हारी यह सब बातें,,,, अब मैं क्या कहूं तुम सच में एकदम बेशर्म हो गई हो,,,



बेशर्म बनने में जो मजा है मेरी जान वह सीधी-सादी बनकर रहने में बिल्कुल भी नहीं है,,, तुम ही सोचो अगर तुम सीधी-सादी होती तो अब तक अपनी नीरस जिंदगी को घसीट घसीट कर आगे बढ़ा रही होती,,, बेशर्म बनने के बाद ही तुम्हें अपने बेटे का लंड प्राप्त हुआ है,,,,,
(अपनी मां और शीतल कि इस तरह की गंदी बातें सुनकर शुभम के तन बदन में आग लग रही थी एक तो कार के अंदर दुनिया की सबसे खूबसूरत दोनों औरतें उनका मादक बदन और ऊपर से उन दोनों के बदन में से आ रही लेडीज परफ्यूम की मादक खुशबू यह सब मिलाकर शुभम की हालत खराब किए हुए थे,,, जींस में शुभम का लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था,,, जिसे वह बार-बार अपने हाथ से बैठाने की नाकाम कोशिश कर रहा था।)

देखो शीतल,, जब इंसान का पेट नहीं भरता तो ही वह बाहर पेट भरने के लिए निकलता है,,, साला मेरा पति अगर लायक होता तो मुझे इस तरह के दिन देखने ही नहीं पड़ते,,,।

मेरी भी तो यही तकलीफ है निर्मला,,, तुम्हारा तो चलो फिर भी घर में जुगाड़ हो गया मेरा क्या मेरे पति का तो खड़ा भी नहीं होता तुम तो शादी के कुछ साल तक अपने पति से चुदाई का मजा भी लेकर गईं लेकिन मेरे नसीब में तो यह भी नहीं था,,
(अपन दोनों औरतों की बातें सुन रहा था और मस्त हुआ जा रहा था उसे सब समझ में आ रहा था कि यह दोनों औरतें वास्तव में बहुत ही प्यासी है जिसमें से वह एक की तो प्यास बुझाता आ रहा था,,, अब दूसरे की भी प्यास बुझाने की जिम्मेदारी उसी पर थी,,, बार-बार सीकर निर्मला से बातें करते हुए अपनी गांड उठाकर सीट पर से खड़ी होकर अगली सीट पर अपने दोनों हाथ की कोहनी देखकर निर्मला से बात करने लगती थी जिससे शुभम को शीतल की भारी-भरकम गांड एकदम साफ नजर आ रही थी,,,,, सीतल ने सलवार इतनी टाइट पहन रखी थी कि उसकी मद मस्त गोल-गोल गांड का पूरा भूगोल कपड़े पहने होने के बावजूद भी नजर आ रहा था,,, तुम दोनों की गरम बातें और उसमें शीतल का भरे हुए जिस्म की भड़कती हुई जवानी उसे बेचैन कर रही थी,,, वह अगली सीट पर टेका लेकर अपनी गांड को गोल-गोल इधर-उधर हिला रही थी,,, जो कि वह जानबूझकर शुभम को अपनी गांड का जलवा दिखा कर बेचैन कर रही थी,,, और शुभम से भी रहा नहीं जा रहा था वह आगे के मिरर कांच मैं पूरी तरह से तसल्ली कर लेने के बाद अपना हाथ उठाकर सीधे सीतल की गांड पर रख दिया,,,,,

शीतल की बड़ी बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखते ही शुभम के तन बदन में एक अद्भुत एहसास डोल गया,,, शुभम को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे वह ढेर सारी नरम नरम रुई पर अपना हाथ रख दिया हो,,, ना चाहते हुए भी सीकर की मदमस्त नितंबों पर हाथ रखते हैं आश्चर्यजनक अद्भुत अहसास से भर जाने की वजह से शुभम का मुंह खुला का खुला रह गया,, उसकी मां की उपस्थिति में वह गरम सिसकारी भी नहीं ले सका,, बड़ी मुश्किल से वह अपनी सिसकारी को अपने अंदर ही दबाए हुए था,,, यही हाल शीतल का भी था बार-बार इस तरह से अपनी सीट पर से गांड उठाकर उठ जाना,,, और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहराते हुए शुभम की आंखों के सामने हीलाना,,, यह सब वह सुभम को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही कर रही थी,,,, और शुभम की तरफ आकर्षित हो भी चुका था आखिरकार औरतों की बड़ी बड़ी गांड ही तो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी।
मुख्य हाईवे पर कार अपनी गति में भागती चली जा रही थी जैसे-जैसे दिन बीतता जा रहा था वैसे वैसे हाईवे पर वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही थी,,, शुभम अपनी मां से नजरें बचाकर जोर-जोर से जितना हो सकता था इतना शीतल की गांड का हिस्सा अपनी हथेली में भर-भर कर जोर जोर से दबाने का आनंद लूट रहा था,,, शीतल को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह जानबूझकर निर्मला को अपनी बातों में उलझाए हुए थी,,, और अपनी गांड उठाकर अगली सीट पर टेका देकर खडी थी,,, सुभम की हरकत की वजह से शीतल की पेंटी गीली होने लगी, थी,,,,,,, उत्तेजना के मारे शीतल के गाल लाल हो चुके थे,,।
 
कार के अंदर का माहौल गर्म होने लगा था शुभम अपनी मां की नजरों से बचकर अपनी हथेलियों से शीतल की गोलाकार नितंबों के संपूर्ण भूगोल को अपने हाथों से खंगाल रहा था,, सलवार के कपड़े की पतली परत भर थी जो की नितंबों और हथेलियों के बीच में पर्दे का काम कर रही थी बाकी सब कुछ हथेलियों से टटोलने से ही नितंबों की संपूर्ण गाथा स्पर्श करने मात्र से ही पढ़ी जा रही थी। शुभम पहले से ही शीतल के संपूर्ण नंगे बदन का जायजा अपनी नजरों के साथ-साथ अपने हथेलियों से स्पर्श करके और अपने लंड से उसके बदन की गहराई में उतर कर शीतल के खूबसूरत बदन की स्थिति से वाकिफ हो चुका था।,,


कार अपनी रफ्तार से हाईवे पर भागी चली जा रही थी और शीतल हंस हंस के निर्मला से बातों का दौर जारी रखी थी, निर्मला को रत्ती भर भी एहसास नहीं हो रहा था कि उसकी पीठ पीछे सीट पर उसका बेटा शीतल के भराव दार गोलाकार भारी भरकम गांड से खेल रहा है,,,। शीतल की हालत खराब होने लगी थी उसे अब जाकर एहसास हुआ कि सलवार पहन कर नहीं आना चाहिए था अगर आज वह साड़ी पहनी होती तो शिमला पहुंचने से पहले ही जुगाड़ लगाकर उसकी मां की उपस्थिति में ही किसी भी तरह से साड़ी उठाकर शुभम के लंड को अपनी बुर में ले लेती,,,। उसे अपनी गलती पर पछतावा हो रहा था।

निर्मला तुम इतने अच्छे से गाड़ी चला लेती हो ये आज मुझे पता चल रहा है,,,।



गाड़ी तो तुम भी चला लेती हो ना शीतल,,,

हां हां चला तो लेती हूं लेकिन इस तरह से हाईवे पर चलाने का मुझे बिल्कुल भी अनुभव नहीं,,, है,,।

इसमें अनुभव की क्या जरूरत है जिस तरह से गाड़ी चलाई जाती है उसी तरह से चलाना होता है बस निगाह अपनी सड़क पर रहनी चाहिए,,,,।

हां सो तो है,,,,।
(शीतल नीर्मला से बातों का दौर जारी रखे हुए थी और उसकी पीठ के पीछे ही अपनी बड़ी बड़ी गांड को गोल गोल घुमाते हुए उसके ही बेटे से अपने नितंब मर्दन का आनंद ले रही थी,,,शुभम काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसके बदन में शीतल के गर्म जवानी का खून ऊबल रहा था,,,शीतल की बड़ी बड़ी गांड से खेलने से वह इतना ज्यादा कामोतेजना का अनुभव कर रहा था कि उसकी इच्छा तो हो रही थी कि कार के अंदर ही अपनी मां की आंखों के सामने ही शीतल की फूली हुई कचोरी जैसी बुर में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई कर दे।,,,शीतल निर्मला से बातें कर रही थी और शुभम एक हाथ से शीतल की गांड को जोर-जोर से दबाते हुए अपने बीच वाली उंगली को सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड की दरार के बीचों बीच उसकी बुर में डालने की कोशिश करने लगा,,, उंगली डालने के प्रयास में शुभम को इतना तो पता चल ही गया कि शीतल की बुर गीली हो चुकी है,,, और क्या एहसास ही शुभम को और ज्यादा उत्तेजित करने लगा। वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर मां की उपस्थिति ना होती तो अब तक वह सीतल को अपने नीचे ले लिया होता,,,, लेकिन मजबूर था वह अपनी मां के सामने शीतल को ज्यादा अहमियत नहीं देना चाहता था,,,


दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलने के लिए आतुर थे। शुभम तो फिर भी अपनी मां से नजरें बचाकर शीतल की गोल-गोल जवानी से खेल रहा था लेकिन शीतल के मन में आग लगी हुई थी वो जानती थी कि ईस समय सुभम का लंड पुरी औकात में आ चुका होगा,,, इसलिए वह शुभम के लंड को अपनी आंखों से देखने के लिए उसे छूने के लिए उसे अपने हाथों में भरकर हीलाने के लिए आतुर हुए जा रही थी। तकरीबन 1 घंटे तक शीतल उसी तरह से अपनी गांड उठाकर सामने की सीट पर कोहनी टीका कर निर्मला से बातें करती रही और शुभम के द्वारा नितंब मर्दन का आनंद लेती रही,,,,,

सीट पर बैठ जाओ शीतल थक जाओगी कब से इसी तरह से बातें कर रही हो,,,,

क्या करूं निर्मला शिमला पहुंचने की इतनी जल्दी पड़ी है कि मुझसे रहा नहीं जा रहा,, है,,,(शीतल हड़बड़ाते हुए बोली,,,)

इस तरह से गांड उठाकर खड़ी रहोगी तो पहुंच तो नहीं जाएगी ना,,,,,।

तुम समझ नहीं रही हो निर्मला मेरे अंदर शिमला पहुंचने की इतनी जल्दी मची हुई है कि पूछो मत।

तुम्हें शिमला पहुंचने की जल्दी नहीं बल्कि मेरे बेटे के लंड को अपनी बुर मे लेने की जल्दी पड़ी है ,,,,

जैसा तुम समझो नर्मदा,,, और तुम जैसा कह रही हो वैसा ही है,,एक बार तुम्हारे बेटे का लंड को अपनी बुर में लेने के बाद मेरी बुर में इस तरह की खुजली मची हुई है कि जब तक तुम्हारे बेटे का लंड मेरी बुर में दुबारा नहीं जाएगा तब तक यह खुजली मिटने वाली नहीं है,,,,,(शीतल एकदम से गर्म आह भरते हुए बोली,,, दोनों की बातें सुनकर शुभम का बुरा हाल था वह लगातार शीतल की गांड से खेल रहा था और जिस तरह से उसकी मां ने एकदम रंडियों की तरह शीतल को उसका लंड अपनी बुर में लेने के लिए बोली यह बात उसके कानों में पड़ते ही वह पूरी तरह से मदहोश होने लगा उससे रहा नहीं गया और वह आपने पेंट की चैन को अपनी मां की नजर बचाकर खोलकर अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया,,, शुभम थोड़ा सा अपनी सीट से आगे की तरफ सरक कर आ गया था ताकि उसकी मां को मिरर मैं उसकी परछाईं ना दिखाई दे,,,,शीतल की नजर जैसे ही शुभम के मोटे तगड़े लंड पर पड़ी उसकी बुर ऊतेजना के मारे कुल बुलाने लगी,,,, उससे रहा नहीं गया और वह अपनी सीट पर बैठ गई,,,, गाड़ी अपनी रफ्तार से हाईवे पर आगे बढ़ती चली जा रही थी हाईवे पर वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही थी हाईवे के किनारे छोटे-छोटे बाजार नजर आ रहे थे और उन में लोगों की भीड़ उमड़ रही थी यह सब को लगातार पीछे छोड़ते हुए निर्मला की कार आगे बढ़ती चली जा रही थी,,।
चिकन बड़े आराम से अपनी कार को चला रही थी अबे पर आती जाती गाड़ियों की आवाज और होर्न शोर-शराबे से पूरा माहौल गूंज रहा था,,, और ऐसे में शुभम और शीतल किसी और ही दुनिया में मस्त थे,,, सीतल अपनी सीट पर बैठी हुई थी,, निर्मला अपनी पीठ के पीछे सीट पर क्या हो रहा है इस बात से अनजान गाड़ी चलाने में मस्त थी सीकर के करीब बैठा सुभम अपने पेंट की चैन खोलकर अपने टनटनाते हुए लंड को बाहर निकालकर उसे एक हाथ से मुठिया रहा था,,,पर यह देखकर शीतल के तन बदन में जो आग लग रही थी उस को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह निर्मला से नजरें बचाकर धीरे-धीरे अपने हाथ को सीटसे रगडते हुए शुभम की टांगों के बीच बढ़ रही थी जैसे-जैसे उसका हाथ आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,, शीतल की आंखों में सुभम के लंड को देखकर मदहोशी छाई हुई थी,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, शुभम अच्छी तरह से जानता हूं आगे पर वाहनों की कतार लगी हुई थी जिस रफ्तार से गाड़ियां आ जा रही थी उसे देखते हुए उसकी मां का ध्यान पीछे जाने वाला नहीं है,,, लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से एहतियात बरत रहा था वह कभी अपनी मां को तो कभी अपने लंड को और कभी शीतल की तरफ देख ले रहा था,,, उत्तेजना के मारे शीतल का गला सूख रहा था,,,, और अगले ही पल सीकर अपनी हथेली में शुभम के मोटे तगड़े लंड को भर ही ली,,,जैसे ही शीतल के हाथ में शुभम का मोटा तगड़ा लंड आया वैसे ही मानो सीतल की सांसे अटक गई,,, वह एकदम सनन रह गई,,,शीतल की हालत खराब हुए जा रही थी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि सुभम के लंड में एक अद्भुत एहसास और आकर्षण बसा हुआ है जब भी वह शुभम के लंड को अपने हाथ में लेती है तो एक अलग ही एहसास होता है निरंतर उसके आकार में बढ़ोतरी का एहसास होने लगता है जो कि इस समय शीतल को सुभम के लंड का आकार और मोटाई कुछ ज्यादा ही लग रही थी,,,। वह जोर-जोर से शुभम के लंड को हिलाना शुरू कर दी,,,,
आहहहहह,,, बहुत ही धीमी स्वर में शुभम कि सीसकारी की आवाज निकल गई,,,
कार की पिछली सीट पर मदहोशी का आलम अपनी चरम सीमा पर था,,, किसी दूसरे से यह नजारा देखे जा पाना असंभव था क्योंकि निर्मला के कार का शीशा ब्लैक था जिसमें से अंदर से तो बाहर का सब कुछ देखा जा सकता था लेकिन बाहर से अंदर का कुछ भी नहीं देखा जा सकता था,, इसलिए शीतल और शुभम को सिर्फ निर्मला की तरफ से चिंता थी बाकी बेफिक्र थे दोनों,,,।

शीतल की नरम नरम कलाई में शुभम कै लंड की गर्माहट सीतल के पूरे वजूद को पिघला रही थी,,, शीतल का मन ललच रहा था शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने के लिए। सीतल के मुंह में पानी आ रहा था साथ ही उसकी बुर में भी पानी का सैलाब उठ रहा था। शीतल के नरम नरम हथेलियोंयों का स्पर्श पाकर शुभम कै लंड में और ज्यादा जोश आ गया था,,।

शीतल अपने आप को रोक नहीं पाई और पहले जानबूझकर अपना रुमाल सीट के नीचे गिरा दी और उसे ढूंढने की वजह बना कर तुरंत शुभम की टांगों के बीच झुकी और उसकी मोटे तगड़े लंड को एक झटके में अपने पूरे मुंह में लेकर उसे चूसने लगी।,,,,,ससससहहहहह,,, अद्भुत अहसास से दोनों एकदम से भर गए। शुभम अपनी उत्तेजना को दबा नहीं पाया और उत्तेजना के मारे अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठा दिया,,,तकरीबन 5 या 7 सेकंड है शीतल शुभम के लंड को अपने मुंह में ले सकती और वापस से निकाल कर अपनी सीट पर बैठ गई,,, शुभम को शीतल से इस तरह की उम्मीद और हरकत की अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था इसलिए शीतल की इस हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश हो गया रक्त का प्रवाह उसके लंड की नसों में तीव्र गति से होने लगा,, एक तो शीतल की यह गर्मजोशी और मदहोशी से भरी हुईयह कामुक हरकत और ऊपर से उसका जोर जोर से लंड को हिलाना शुभम से बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,,। निर्मला को इस बात का अहसास तक नहीं था कि पिछली सीट पर दोनों मिलकर इस तरह की हरकत कर रहे होंगे और इसी का फायदा उठाते हुए शीतल एक बार और नीचे झुकी और शुभम के लंड को मुंह में लेकर पूरा गले तक उतार कर सात आठ सेकंड तक फिर से चूसने लगी,,,,, शुभम शीतल के जीभ की गर्माहट को सह नहीं पाया और जैसे ही सीतल शुभम के लंड को मुंह में से बाहर निकालि वैसे ही तुरंत शुभम कै लंड से गर्म लावा बाहर निकलने लगा,, जिसे शीतल ने अपनी रुमाल से ढक कर उसके लंड से निकला हर एक बूंद को रुमाल में ले ली,, और शुभम कैलेंडर को अच्छी तरह से रुमाल से साफ करके धीरे से कार का कांच नीचे करके उसे बाहर हाईवे पर फेंक दे,,,
शुभम काफी खुश था इस सफर का पहला चरण ऐसा लग रहा था मानो उन दोनों ने पार कर लिया था। दोनों के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास साफ झलक रहा था।
 
तीनों का यह शिमला का सफर बेहद रोमांचक और कामोत्तेजना से भरा हुआ था जिसकी शुरुआत से शीतल ने शुभम के लंड का पानी निकाल कर कर चुकी थी,,,।
गाड़ी अपनी रफ्तार से हाईवे पर भागी चली जा रही थी घंटो बीत चुके थे निर्मला को गाड़ी चलाते,,, इसलिए एक ही सीट पर बैठे बैठे उसकी गांड में दर्द होने लगा था,,,। दोपहर के 2:00 बज रहे थे अब तीनों को भुख भी कसके लगी हुई थी,,,।
Sheetal or Shubham


निर्मला एक अच्छी सी होटल देखकर वहीं रुको खाना खा लेते हैं,,,,। ( शुभम की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए शीतल बोली,,,। और शीतल के यह मुस्कुराहट निर्मला ने शीशे में देख ली शुभम भी उसको देख कर मुस्कुरा रहा था जो देखकर निर्मला पूरी तरह से जल भुन गई,,, उसे लगने लगा कि अगर वह कुछ ऐसा वैसा नहीं करेगी तो शुभम शीतल की तरफ पूरी तरह से आकर्षित हो जाएगा वैसे भी दोनों के बीच में सब कुछ हो चुका था,,,,, एक तरह से निर्मला को शीतल से जलन होने लगी थी और उसे अपनी बेटे पर गुस्सा भी आ रहा था,,,, उसे क्या करना चाहिए कि उसका बेटा एक बार फिर से पूरी तरह से उसका हो जाए इसी बारे में सोच रही थी कि तभी उसे सामने एक अच्छी सी होटल दिखाई दी और वह तुरंत उस होटल के सामने कार को खड़ी कर दी,,,।


शुभम के साथ साथ निर्मला और शीतल कार से उतर गए और देखने वाले की नजरें शीतल और निर्मला पर चिपकी की चिपकी रह गई,,, दोनों बला की खूबसूरत थी गदराया जिस्म और बड़ी-बड़ी चूचियां और बाहर को निकले हुए सुडोल नितंब कुल मिलाकर पूरी तरह से दोनों काम देवी लग रही थी जिसके आकर्षण में वहां के जितने भी मर्द थे उनकी नजरें उन पर जमी हुई थी,,,, होटल में प्रवेश करते ही होटल का पूरा स्टाफ शीतल और निर्मला के इर्द-गिर्द घूमने लगा,,,। तीनों एक टेबल पर बैठकर टेबल पर पड़े जग में से ठंडा पानी निकाल कर पीने लगे तभी एक वेटर उनके टेबल के करीब आया और खाने का आर्डर लेने लगा निर्मला ने खाने का आर्डर दे दी तो शीतल उस वेटर से चेंजिंग रूम के बारे में पूछने लगी,,, वेटर ने शीतल को चेंजिंग रूम के बारे में दिशानिर्देश कर दिया और चला गया तो निर्मला उससे बोली,,,।

तुम ड्रेसिंग रूम का क्या करोगी,,,,?

यार निर्मला बहुत दिनों बाद में यह ड्रेस पहनी हूं क्योंकि बहुत कसी हुई है मुझको बिल्कुल भी कंफर्टेबल नहीं लग रहा है इसलिए मैं सोचती हूं कि जाकर साड़ी पहन लुं,।

हां मुझे भी यही लग रहा है मैं भी यही देखकर सोच रही हूं कि इतनी कसे हुए ड्रेस में तुम कैसे कंफर्टेबल महसूस कर रही हो,,,।

अच्छा तुम दोनों बैठो मैं गाड़ी में से अपनी साड़ी लेकर आती हूं,,,,।( और इतना कहकर शीतल होटल के बाहर गाड़ी की तरफ चली गई,,, शीतल के जाते ही निर्मला गुस्से में शीतल से बोली,,,।)

क्यों रे तुझे शीतल अब बहुत ज्यादा अच्छी लगने लगी है तुझे नई बुर चोदने को क्या मिल गई तू तो मुझे भूल ही गया,,,

क्या कह रही हो मम्मी कैसी बातें कर रही हो,,,।

कैसी बातें कर रही हो नहीं तू मुझे सच सच बता,,, तुझे मैं अच्छी लगती हूं या शीतल,,,,

तुम अच्छी लगती हो मम्मी तुम्हारे सामने उसकी खूबसूरती कोई मायने नहीं रखती,,,।


तो तू उससे हंस हंस के क्यों बातें कर रहा था,,,।

क्या मम्मी तुम भी बच्चों जैसी बातें कर रही हो वह जैसा कह रही है वैसा हमें करना पड़ेगा जब तक कि हम शिमला पहुंचकर उसका भी वीडियो ना बना ले जैसा कि वह हम दोनों का बनाई है तब जाकर हमें उससे छुटकारा मिलेगा,,,।

( शुभम की बात सुनकर निर्मला सोच में पड़ गई क्योंकि जो कुछ भी शुभम कह रहा था उसमें सच्चाई थी लेकिन क्या करती है एक औरत होने के नाते वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे का दिल किसी और औरत पर आए जो कि ऐसा हो भी चुका था निर्मला अपने मन में सोच रही थी कि उसे कुछ ऐसा करना पड़ेगा कि जैसे शुभम एक बार फिर से उसका पूरी तरह से दीवाना हो जाए क्योंकि मर्दों का भरोसा उसे बिल्कुल भी नहीं था जहां चिकनी बुर देखते हैं वही फिसल जाते हैं इस समय उसका बेटा शीतल की दोनों टांगों के बीच फिसल रहा था,,, इसलिए निर्मला इस सफर के दौरान कुछ ऐसा करने की मन में सोच रही थी कि शुभम एक बार फिर से उसकी मदमस्त जवानी का पूरी तरह से कायल हो जाए,,,। शुभम की बात सुनकर वह बोली,,,।)

तू जो कह रहा है मैं जानती हूं वह सच है लेकिन एक औरत होने के नाते मैं नहीं चाहती कि तो किसी दूसरी औरत के पास जाए और उसका दीवाना हो जाए,,,।

क्या बात कर रही है मम्मी मैं खुद उसके पास गया था कि वह आपने मुझे उसके पास भेजी थी,,,, जैसे तैसे करके इस परिस्थिति से हम दोनों को निकलना होगा मैं तो कह रहा हूं कि अभी जैसा चल रहा है वैसा चलने दो उसकी बात मानने में ही भलाई है और मम्मी क्यों ना सब कुछ भूल कर कुछ दिनों के लिए इन सब का मजा लो वैसे भी शीतल मैडम ठीक ही कहती है कि जिंदगी में पूरा मजा लेना चाहिए फिर पता नहीं वह मौका मिले या ना मिले वैसे भी मैं जिंदगी भर आपका ही रहने वाला हूं उस शीतल का नहीं,,,।

( अपने बेटे की बातें सुनकर निर्मला को भी लगने लगा था कि जिस परिस्थिति सेवर कुछ और रही है उसी पर स्थिति में अपने आप को ढाल लेना चाहिए वरना दुख और चिंता के सिवा उसे कुछ नहीं मिलेगा,,,, ।)



चल ठीक है जैसा तू कहता है मैं भी वैसा ही करूंगी मैं भी तो इस नए अनुभव का मजा लेकर देखूं,,,।

पहले भी तो तुमने इस तरह से मजा ले चुकी हो,,,।

हां वह तो है पर वो तो जवान हो रही लड़की थी और यहां तो एक मेरी ही उम्र की औरत है देखते हैं कौन किस पर भारी पड़ता है,,,।
निर्मला यह सब कह ही रही थी कि तभी बैटर खाना लेकर आ गया,,,, और टेबल पर खाना रखकर कुछ और के बारे में पूछ कर वहां से चला गया,,,, तब तक शीतल गाड़ी में से अपनी साड़ी निकाल कर होटल में चेंजिंग रूम में जा चुकी थी,,,। होटल का एक कर्मचारी शीतल की हरकतों पर बारीकी से नजर रखा हुआ था वह अच्छी तरह से जानता था कि सीकर चेंजिंग रूम में अपने कपड़े बदलने जा रही है और वह सलवार सूट पहनी हुई है और चेंजिंग रूम में जाकर वह अपने सारे कपड़े उतार कर साड़ी पहने की जिसका मतलब साफ था कि वह चेंजींग रूम में पूरी तरह से नंगी हो जाएगी,,,, यह ख्याल उसके मन में आते ही हो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और वह शीतल पर ही नजर रखे हुए था जैसे ही वह चेंजिंग रूम में कपड़े बदलने के लिए गई वैसे ही वह तुरंत दरवाजे पर आकर की होल से अंदर का नजारा देखने लगा,,,,। होटल के उस कर्मचारी का यह रोज का काम था जब भी कोई खूबसूरत औरत है होटल के अंदर अपने कपड़े बदलने के लिए जाती थी तो वह चोरी छुपे उस दरवाजे के पास आकर की होल में से झांककर अंदर का नजारा देखकर मस्त हो जाता था,,,। कर्मचारी की हॉल में से अंदर का नजारा देखकर मस्त हुवे जा रहा था,,,।
जिंदगी में पहली बार वह होटल का कर्मचारी इतनी गोरी खूबसूरत गदर आई बदन वाली औरत को नंगी होते हुए देख रहा था चेंजिंग रूम में शीतल को इस बात का आभास तक नहीं था कि उसे की होल से कोई झांक रहा है,,, वह तो अपनी मस्ती में अपनी सरकार अपने कुर्ती को पल भर में उतार कर अपने बदन से अलग कर दी,,, कसी हुई सलवार सूट के साथ-साथ वह अपनी दोनों बड़ी बड़ी चूचियों को बराबर नाप में रखने के लिए चुचियों से कम साइज की ब्रा पहनी हुई थी जो की पूरी तरह से फंसी हुई थी इसलिए वह अपनी ब्रा को भी उतार दी,,,, होटल का कर्मचारी शीतल की बड़ी बड़ी चूचियों को देखते ही एकदम पागल हो गया और नजरें बचाकर वह अपने पेंट की चैन खोलकर अपना लंड बाहर निकाल दिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया। उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि अब उसे उम्मीद थी कि वह अपनी पेंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाएगी तो उसे खूबसूरत नजारा देखने को मिल जाएगा और उसकी सोच सही साबित हुई देखते ही देखते इसी तरह अपनी पेंटिंग को भी उतार फेंकी वह होटल का कर्मचारी तो एकदम पागल हो गया वैसे भी इस सफर को शुरू करने से पहले शीतल ने अपनी दूर के हल्के हल्के बालों पर वीट क्रीम लगाकर पूरी तरह से चिकनी कर ली थी जिंदगी में पहली बार वह उधर का कर्मचारी किसी औरत की खूबसूरत एकदम चिकनी बुर को देख रहा था गुलाबी गुलाबी पत्तियों को देखकर उससे रहा नहीं गया और जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,। कार में शुभम के साथ जो हरकत उसने की थी उसके असर रूपी मधुर रस अभी भी उसकी बुर्के गुलाबी पत्तियों पर मोतियों के बूंद बन कर चिपके हुए थे जिसे वह अपनी पेंटी से ही साफ करने लगी और यह हरकत उस कर्मचारी के लिए बेहद मादकता से भरा हुआ था,,,,। बहुत खुश नजर आ रहा था शायद जिंदगी में पहली बार उसने इस होटल में इस तरह का नजारा देखा था आज उसका दिन बन गया था वह मदहोश होकर अपनी आंखों को उस की होल से सटाया हुआ था,,,।
कार में से लाई हुई ब्रा और पेंटी को शीतल पहनने लगी,,,
दूसरी तरफ निर्मला और शुभम शीतल का इंतजार कर रहे थे और शुभम को जोरो की पिशाब लगी हुई थी इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

मम्मी तुम 2 मिनट इंतजार करो मैं बाथरूम में जाकर आता हूं,,,,
( इतना कहकर वह वहां से निकल गया बाथरूम का रास्ता सी चेंजिंग रूम से होकर जाता था और वहां पर कोई आता जाता नहीं था,,, सुबह शाम वहां पर चहल पहल रहती थी और दोपहर में तो भूले भटके ही कोई वहां आ जाता था,,,। जैसे ही वह चेंजिंग रूप के थोड़ा सा करीब पहुंचा तो उसे वह होटल का कर्मचारी उसी दरवाजे के पास बैठा हुआ मिला जोकि चेंजिंग रूम की की होल से अंदर का नजारा देख रहा था शुभम को समझते देर नहीं लगी कि उस रूम में शीतल अपने कपड़े बदल रही है और वह उसी को देख रहा है,,,। शुभम को एकदम से गुस्सा आ गया और वह सीधा जाकर उस होटल के कर्मचारी को उसके गिरेबान पकड़कर खड़ा किया,,,। वह एकदम से घबरा गया,,,।

यह क्या कर रहा था तू तो इस तरह से औरतों को कपड़े बदलता हुआ देखता है,,,।
( शुभम की कही बात रूम के अंदर कपड़े बदल रही शीतल सुन ली वो एकदम से घबरा गई,,, शीतल अंदर अपने कपड़े बदल चुकी थी वह जब तक बाहर आती तब तक शुभम गुस्से में उस कर्मचारी को दो-तीन थप्पड़ लगा चुका था,,,
आवाज सुनकर तुरंत होटल का मैनेजर दौड़ता हुआ वहां आ गया तब तक कपड़े बदलकर शीतल रूम से बाहर आ चुकी थी,,,,,,, बाहर आते ही उसकी नजर शुभम पर पड़ी जो कि कर्मचारी को उसके गिरेबान से पकड़े हुए था और उसकी आंखों के सामने दो चार थप्पड़ और लगा दिया,,,।
मैनेजर को शुभम ने सारी बातें बताई शीतल तो हैरान थी कि उसे संपूर्ण रूप से नंगी होते हुए उस होटल के कर्मचारी ने देख लिया था व शर्मिंदा हो गई थी होटल का मैनेजर भी अपनी कर्मचारी की हरकत से पूरी तरह से शर्मिंदा हो चुका था वह उसे डांट कर वहां से भगा दिया,,,। भगा क्या दिया तत्काल उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया और शुभम और शीतल दोनों से माफी मांगते हुए बोला,,,।

देखो मैं काफी शर्मिंदा हूं मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं आप लोगों से कैसे माफी मांगो हमारी होटल के रेपुटेशन का सवाल है यह बात आप किस होटल से बाहर जाकर किसी को मत बताइएगा,,,, जो कुछ भी आपके साथ हुआ उसकी भरपाई तो शायद मैं नहीं कर सकता लेकिन इस होटल से थोड़ा बहुत संतुष्ट होकर जाओ इसकी मैं पूरी कोशिश करूंगा इसलिए इस होटल का जितना भी बिल आपका बनता है हम आपसे कुछ भी नहीं लेंगे,,,,, देखिए मैं फिर से आप दोनों से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं प्लीज यह बात किसी को मत बताइएगा,,,।

आप इतना कह रहे हैं तो हम आपकी बात मान लेते हैं लेकिन जो कुछ भी उसने हरकत किया है वह बहुत ही शर्मिंदा करने वाली हरकत है,,,।

मैं जानता हूं मैडम इसीलिए तो हाथ जोड़कर माफी मांग रहा हूं प्लीज,,,

चलिए कोई बात नहीं हम आपको माफ कर देते हैं लेकिन आइंदा से इसका ख्याल रखिएगा कि ऐसी गलती दोबारा ना होने पाए क्योंकि हम तो माफ कर दे रहे हैं शायद दूसरा कोई माफ ना कर पाए,,,

इतना कहकर शीतल और शुभम दोनों वापस टेबल पर आ गए और उस बात की जिक्र बिल्कुल भी नहीं मिला से नहीं किए,,,, तीनों बैठकर एकदम भरपेट खाना खाकर एकदम संतुष्ट हो गए,,,, निर्मला को इस बात की भनक बिल्कुल भी ना लगे इसलिए वह पैसे चुकाने के बहाने काउंटर तक कई ताकि निर्मला को यह न लगे कि वह मुफ्त में खाना खिला रहा था,,,, इन सब के दौरान निर्मला यही बात सोच रही थी कि ऐसा क्या किया जाए कि जिससे शुभम एक बार फिर से उसके ऊपर पूरी तरह से लड्डू हो जाए और देखकर शीतल एकदम जल भुन जाए क्योंकि यह बात तो अच्छी तरह से निर्मला के साथ-साथ शीतल भी जानती थी कि खूबसूरती और बदन की बनावट में निर्मला के आगे वह बिल्कुल भी फीकी पड़ती थी लेकिन शीतल अपने खुले पर और दिखावे क्या करसन में पूरी तरह से उसके बेटे शुभम को फसाए हुए थी,,,,
होटल से निकलते निकलते 4:00 बज चुका था धीरे-धीरे शाम ढलने लगी थी,,,। पीली रंग की साड़ी में वाकई में शीतल हुस्न की परी लग रही थी गदराया बदन और भी ज्यादा खिला हुआ था,,,, शीतल को देखकर उसकी मदमस्त जवानी ना जाने क्यों निर्मला की आंखों में खटक ने लगी अच्छी तरह से समझ रही थी कि जब पीली साड़ी में शीतल उसे अच्छी लग रही थी तो उसके बेटे को भला क्यों ना अच्छी लगती,,,,। यही सोचकर निर्मला अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी और इस कोशिश को जारी रखते हुए वह बार-बार शुभम की आंखों के सामने अपने हाथ से अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से खुजला रही थी,,,, उसके बार-बार ऐसा करने पर शुभम का ध्यान उसी के ऊपर जा रहा था और जिस तरह से वह अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से खुशी आ रही थी यह देख कर कर शुभम की जवानी का पारा चढ़ने लगा था,,,।

यार ये खुजली बिना बहुत परेशान कर रही है,,,,।( निर्मला जानबूझकर अपने मन में बुदबुदाते हुए बोली,,,)

क्या हुआ मम्मी कोई परेशानी है क्या,,,,।

हारे ना जाने क्यों मेरी बुर में खुजली हो रही है,,,,।
( निर्मला जानबूझकर दोनों की उपस्थिति में एकदम खुले शब्दों में बोली और यह सुनकर शीतल के भी कान खड़े हो गए,,,। वह मुस्कुराते हुए बोली।)

मेरी जान बुर की खुजली केवल लंड से ही बुझती है हाथ से खुजाने से नहीं,,,
( शीतल की बात को अनसुना करते हुए निर्मला एकदम बेशर्म की तरह कार के अंदर ही अपनी साड़ी को धीरे धीरे ऊपर उठाते हुए एकदम कमर तक लादी,,,। उत्तेजना के मारे शुभम का गला सूखने लगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि शीतल की उपस्थिति में उसकी मां इस तरह की हरकत इतनी जल्दी नहीं कर सकती उसे माहौल में पूरी तरह से खुलने में थोड़ा वक्त लगता है लेकिन यहां तो उसकी उपस्थिति में वह अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी,,, शुभम कुछ और समझ पाता इससे पहले ही वह थोड़ा सा अपनी गांड को पर उठाकर अपनी लाल रंग की पेंटिंग को निकालना शुरू कर दी और देखते ही देखते वह उसे अपने पैरों से बाहर निकाल कर बगल की सीट पर रख दी,,, शुभम एकदम पागल हुआ जा रहा था ना जाने क्यों उसे कार के अंदर अपनी मां का एक नया रूप देखने को मिल रहा था निर्मला की हरकत को शीतल कांच में बराबर देख रही थी और वह भी हैरान थी क्योंकि उसे भी इस बात का अंदाजा बिल्कुल भी नहीं था कि उसकी उपस्थिति में इतनी जल्दी निर्मला अपने आप को सहज बना लेगी वह भी शीशे में निर्मला की हरकत को बराबर देखी थी कि वह कैसे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और अपने गांव उठाकर अपनी पेंटिंग को बाहर निकाल दी थी,,,। अपनी पेंटिंग को बगैर किसी एक पर रखते हुए वह अपनी दोनों टांगे को हल्की से फैला दी,,, और अपनी बीच वाली उंगली को अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर रगड़ ते हुए बोली

शुभम जरा देख तो कहीं चींटी तो नहीं काट रही है बहुत खुजली हो रही है,,,।

लाओ मम्मी देखूं तो,,,,( शुभम अपनी मम्मी की कामुक हरकत को देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, और इस माता-पिता भरे दृश्य को देखकर उसके लंड के खड़े होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा,,, शुभम पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां की गुलाबी बुर नजर आ रही थी,,, वह अपने चेहरे को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच लेकर गया और वह भी अपनी आंखों से अपनी मां की गुलाबी बुर को देख ही रहा था कि,,,, निर्मला अपना एक हाथ उसके सर पर रख कर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच दबाते हुए बोली,,,।)

देखता ही रहेगा कि इसका इलाज भी करेगा,,,
( अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर शुभम समझ गया कि उसे क्या करना है इसलिए वह तुरंत अपने होठों को अपनी मां की गुलाबी बुर पर सटा कर अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,आहहहहहहह,,,, जैसे ही शुभम अपनी जीभ को उसकी बुर से सटाया वैसे ही निर्मला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,, गरम सिसकारी की आवाज को शीशे में नजर आ रहे बेहद काम उत्तेजना से भरे हुए नजारे को देख कर शीतल के तन बदन में आग लग गई उसे साफ नजर आ रहा था कि शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच झुका हुआ है जिसका मतलब साफ था कि वह उसकी बुर को चाट रहा था,,,, देखते ही देखते शुभम अपनी जीभ को जहां तक हो सकता था वहां तक अपनी मां की बुर में डाल कर चाटना शुरू कर दिया और पूरे कार में निर्मला की गरम सिसकारियां की आवाज गूंजने लगी,,,,।

आहहहहह,,,,, ऐसे ही मेरे राजा ऐसे ही बस उसी जगह पर अपनी जीभ डाल कर चाट वही खुजली हो रही है,,,,

मम्मी मुझे नहीं लगता कि जीभ से तुम्हारी बुर की खुजली जाने वाली है मुझे तो लगता है कि तुम्हारी बुर में लंड डालना पड़ेगा तभी जाकर तुम्हारी बुर की खुजली मिटेगी,,,,

तो देर किस बात की है मेरे राजा खड़ा कर और डाल दे अपना लंड,,,,

मेरी रानी तेरी पर देखकर ही मेरा लैंड खड़ा हो गया था इसे खड़ी करने की जरूरत नहीं है बस अब तो अपनी गुलाबी बुर इस पर सटाकर चढ जा मेरे ऊपर और समा जा मेरे अंदर,,,,

( शीतल तो हैरान थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके कान जो सुन रहे हैं वह सच है या सपना है उसकी आंखें जो देख रही थी वह तो उसे एकदम साफ दिखाई दे रहा था लेकिन कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मां बेटे इस तरह से खुलकर इतनी गंदी बातें करते होंगे उनकी इस तरह की गंदी बातें सुनकर उसकी पेंटी उसे गिली होती हुई महसूस हो रही थी,,, दोनों की बातें सुनकर वह इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी कि अगर वह कार ना चला रही होती तो वह खुद उसके लंड पर चढ़ जाती है,,,,। निर्मला पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी,,, अच्छी तरह से जानती थी कि इस समय उसे अपनी बेटी के मोटे तगड़े लंड की बेहद जरूरत है,,,। इसलिए तुरंत वह अपने बेटे के मुंह को अपनी बुर के ऊपर से हठाई,
शुभम समझ गया था कि अब उसे क्या करना है वह तुरंत एकदम सीधे बैठ कर अपने पेंट का बटन खोल कर उसे तुरंत अपने घुटनों से नीचे कर दिया उसका लंड पूरी तरह से खाना था जो कि शीतल को आईने में साफ नजर आ रहा था,,,, निर्मला शीतल की आंखों के सामने एकदम बेशर्मी दिखाते हुए सीधे अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपने बेटे के गोद में बैठते हुए अपनी बड़ी बड़ी गांड के गुलाबी छेद को उसके लंड पर रखने लगी और देखते ही देखते हैं शुभम का लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई में खो गया,,, शीतल को शीशे में निर्मला की बड़ी-बड़ी गांड साफ नजर आ रही थी,,,, कार हाईवे पर अपनी रफ्तार में भागी चली जा रही थी शाम ढल रही थी हाईवे पर ट्राफिक बढ़ती जा रही थी लेकिन काले रंग के शीशे होने की वजह से निर्मला को बिल्कुल भी परवाह नहीं थी उसमें कामोत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिखा रही थी,,, देखते ही देखते शीतल की आंखों के सामने निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को उछाल उछाल कर अपने बेटे के लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, शुभम भी पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर जोर जोर से चपत लगाते हुए नीचे से अपनी कमर उछाल रहा था,,, कार में चुदाई करने का यह दोनों का दूसरा मौका था जिसमें दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उत्तेजना के मारे से इधर से कार चला ही नहीं जा रही थी लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपना ध्यान स्टेरिंग पर लगाए हुए थी,,,।

गीली बुर के अंदर शुभम का मोटा लंड जा रहा था जिससे उसमें से चप्प-चप्प की आवाज शीतल को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,,, दोनों पागलों की तरह चुदाई का आनंद ले रहे थे पहली बार इतने करीब से शीतल निर्मला की बड़ी-बड़ी एकदम गोरी गांड देखकर एकदम मचल उठी थी,,,।
दोनों एक दूसरे पर अपना अपना जोड़ दिखा रहे थे ना तो सुबह में कम था और ना ही निर्मला दोनों एक दूसरे को पछाड़ ने में लगे हुए थे,,,।

शीतल हैरान थी तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी काटने के बाद दोनों अपनी मंजिल पर हाफते हुए पहुंचे थे,,,।
 
कार के पीछे की सीट पर एक मां बेटे की धमाचौकड़ी मचा रही गरमा-गरम दृश्य देखकर शीतल पूरी तरह से चुद वासी हो चुकी थी,,,,। निर्मला के घर में खिड़की से देखा गया दृश्य के बीच की दूरी कुछ ज्यादा ही थी लेकिन यहां तो वह अपनी बेहद करीब जिंदगी में पहली बार एक मां बेटे की चुदाई का गरमा गरम दृश्य देख रही थी ,,,, शीतल को अब जाकर पता चला था कि निर्मला की जवानी में कितनी आग है वरना वह तो उसे सीधी-सादी ही समझती थी लेकिन आज अपनी आंखों से दूसरी बार जब अपने ही बेटे के लैंड पर जोर जोर से अपनी गांड को पटक ते हुए देखी तो उसके होश उड़ गए,,,, उसके पूरे बदन में जवानी की आग सुलगने लगी,,, उसे अपनी पेंटी गीली होती हुई महसूस हो रही थी और साथ ही अपनी बुर के अंदर से चीटियां रहते हुए महसूस हो रहा था,,, अगर वह इस समय गाड़ी ना चला रही होती तो कब से कूदकर निर्मला को धक्का देकर खुद अपनी बड़ी बड़ी गांड के गुलाबी छेद को शुभम को लंड पर रखकर उसे अपने अंदर ले ली होती,,,।

जहां एक तरफ हाईवे पर ट्राफिक के बीच में चलते हुए निर्मला मौके का फायदा उठाते हुए बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए अपनी ही सहेली शीतल की आंखों के सामने अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी गुलाबी बुरका गुलाबी छेद रखकर जिस तरह से कूदकर अपनी जवानी की आग बुझाई थी,,, वहीं दूसरी तरफ शीतल पूरी तरह से अतृप्ती का एहसास लिए जवानी की आग में सुलग रही थी,,, अब तो उसे जल्द से जल्द शिमला पहुंचना था,,, जहां पर पहुंचकर वह अपने अपने सारे अरमान पूरे करने का ख्वाब देख रही थी,,,। आखिरकार वहां पर भी आ गया जब तीनों रात के करीब 1:30 बजे शिमला पहुंच गए,,,।

कार के अंदर से ही रास्ते में ही दोनों मां-बेटे शिमला का नजारा देखकर मंत्रमुग्ध हो गए शीतल के लिए नई बात नहीं थी वह आए दिन शिमला घूमने आया करती थी लेकिन शुभम और निर्मला के लिए यह पहली बाहर ही था जब वह लोग सिर्फ घूमने आए थे,,,। मौसम काफी ठंडा हो चुका था इसलिए अपने घर तक पहुंचने से पहले निर्मला बैग में से एक गर्म साल निकाल कर खुद और शुभम को ओढ़ा ली,, और बैग में से एक गर्म कोर्ट निकालकर निर्मला ने शीतल को थमा दी जो कि शीतल कुछ देर के लिए साइड में कार खड़ी करके उसे पहन ली ताकि ठंडी ना लगे लेकिन फिर भी बर्फ गिरी हुई थी इसलिए ठंडी होने महसूस हो रही थी,,,। शुभम काफी खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो गया था कि ऐसे ठंडे मौसम में दो दो गर्म जवानी से भरपूर औरत के साथ खेलने में उसे बहुत मजा आने वाला था,,। शीतल ने एक बंगले के आगे अपनी कार खड़ी कर दी,,,। यह एक बेहद पॉश एरिया था जहां पर थोड़ी थोड़ी दूरी पर बंगले बने हुए थे और हर बंगले के आगे महंगी कार चमचमा रही थी,,,। यह देखकर निर्मला अंदाजा लगा ली थी कि शीतल की सहेली काफी अमीर है,,।
उत्सुकता की वजह से निर्मला और शुभम दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था रात के तकरीबन 1:30 बज रहे थे इसलिए पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था और हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जो कि यह नजारा देखकर निर्मला और शुभम पूरी तरह से मोहित हो चुके थे,,,।

Shubham ka tantanaya lund


शीतल कार से निकलकर अपने बैग में से बंगले की चाबी निकालकर गेट खोलने लगी,,, शीतल और उसकी सहेली में काफी गहन दोस्ती थी जिसकी वजह से उसकी सहेली बंगले की चाबी सीतल को शोपी हुई थी,,, ताकि शीतल का जब भी मन करे वह यहां पर आकर घूम सके और इस बंगले में रह सके,,,,। शीतल कार को बंद करके वह कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई कार के बाहर आते ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि बाहर कुछ ज्यादा ही ठंड थी,,,, और वहां बंगले का गेट खोलते हुए शुभम से कार में से बैग निकालने के लिए बोल चुकी थी,,,।

शुभम और निर्मला दोनों भी कार मे से बाहर आ चुके थे,,
बंगले का गेट खुल चुका था और शुभम पीछे की डिक्की खोल कर उसमें से एक बाहर निकाल रहा था,,,। निर्मला को ठंडी का अहसास हो रहा था वह साल को बराबर से अपने बदन पर लपेट ते हुए इधर उधर अपनी नजरें दौड़ा कर पुरे एरिया का मुआयना कर रही थी,,। इस सोसाइटी के बंगले को देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गई थी बहुत ही बेहद मनमोहक नजारा था हल्की हल्की बर्फ गिर रही थी जोकि अब तक उसने फिल्मों में ही देखी थी,,,।
निर्मला गेट के बाहर ही खड़ी होकर इधर उधर का नजारा देख रही थी चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था लेकिन स्ट्रीट लाइटें जगमग आ रही थी और साथ ही दूर-दूर के बंगलों में से पीली रंग की रोशनी नजर आ रही थी जो कि यह दृश्य बेहद सुहावना लग रहा था,,,। शुभम दोनों हाथ में देख लिए शीतल के करीब खड़ा था जो कि बंगले का दरवाजा खोल रही थी वही खड़े-खड़े शुभम गेट के बाहर कार के पास खड़ी अपनी मां की तरफ देखा तो गरम साल में अपने खूबसूरत बदन को समेटे हुए वह बेहद खूबसूरत और कामुक लग रही थी खास करके जिस तरह से वह अपने बदन को उसे साल के अंदर समेटे हुए थे उसकी भारी-भरकम नितंब कसी हुई साड़ी में बेहद लुभावनी लग रही थी जिसे देखते ही शुभम के लंड में हरकत होना शुरू हो गया था,,,। बंगले का मुख्य दरवाजा खुलते ही शीतल शुभम से अपनी मां को बुलाने के लिए बोली,,,। शुभम वहीं पर बैग रखकर तुरंत अपनी मां के पास गया,,, और बोला,,,।

चलो अंदर चलो मम्मी यहां क्या कर रही हो ठंड लग जाएगी,,,।

हममममम,,,,,( इतना कहकर वो भी शुभम के साथ बंगले में प्रवेश कर गई,,,, अंदर प्रवेश करते ही शीतल स्विच दबाकर पूरे बंगले को लाइट से जगमगा दी,,, बंगले के अंदर का नजारा देखकर शुभम और निर्मला दोनों हैरान रह गए बंगले में रखी गई एक एक चीज बेहद कीमती और साफ-सुथरी लग रही थी बंद बंगले में इतनी साफ-सुथरी वस्तुओं को देखकर निर्मला बोली,,,।)

शीतल यह बंगला बंद रहता है लेकिन अंदर रखी गई एक एक वस्तु कितनी साफ है,,,।

हां निर्मला यहां पर घर का नौकर सुबह शाम घर की सफाई कर के चला जाता है तभी इतनी साफ-सुथरी हर एक वस्तु लग रही है,,,।

चलो शिमला घूमने का मेरा सपना तो इसी बहाने पूरा हुआ,,
( निर्मला चैन की सांस लेते हुए कुर्सी पर बैठते हुए बोली,,।)

शिमला घूमने का भी और हमारा यहां पर आने का मकसद भी,,,।
शीतल भी गहरी सांस लेते हुए बोली,,,

तीनों सफर से एकदम थक चुके थे इसलिए एक ही बेड पर तीनों सो गए,,।
 
दसुबह नींद खुली तो शुभम अपने आप को शीतल के बदन से चिपका हुआ पाया दोनों सामने की तरफ मुंह करके सोए हुए थे और शुभम उसे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था साथ ही शीतल के नितंबों का संपूर्ण घेराव शुभम के अग्रभाग से संपूर्ण रुप से सटा हुआ था ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों संभोगनिय मुद्रा में सो रहे हो,,,।

Gahri nind me so rahi Sheetal

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शुभम की नींद खुल चुकी थी लेकिन अभी भी शीतल और उसकी मां गहरी नींद में सोए हुए थे शायद देर तक कार चलाने की वजह से दोनों पूरी तरह से थक चुके थे शुभम का भी उठने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि शिमला के ठंडे मौसम में शीतल की मदमस्त जवानी की गर्मी का केंद्र बिंदु जो उसके अग्रभाग से सटा हुआ था,,,, उसका मन कर रहा था कि जिंदगी भर इसी तरह से उसकी मदमस्त गांड से अपना लंड सटाए सोए रहे,,,,। वह उसी तरह से अपना नजर घुमाकर अपनी मां की तरफ देखा तो वह दूसरी तरफ मुंह करके निश्चिंत होकर सोई हुई थी लेकिन इस तरह से सोने में उसकी साड़ी घुटनों से ऊपर तक चढ़ी हुई थी जिससे उसकी नंगी गोरी गोरी पिंडलिया नजर आ रही थी,,। सुबह का इतना मदमस्त नजारा देखकर धीरे-धीरे उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया था।,,,

Sheetal ki gol gol gaand dekhkar Shubham uttejit ho gaya

शुभम उत्तेजित हुआ जा रहा था अनजाने में ही वह शीतल के खूबसूरत बदन से चिपक गया था और अपने लंड को शीतल की मदमस्त गांड से सटा हुआ आते ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,,, इस अवसर का वह पूरी तरह से लाभ लेना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे अपनी कमर को हल्के हल्के आगे पीछे करते हुए हिलाने लगा,,,। एक तरह से वह शीतल को चोद रहा था,,, भले ही उसका लंड उसके पैंट के अंदर था और शीतल के नितंबों पर साड़ी का पर्दा लगा हुआ था लेकिन फिर भी ऐसा करने में शुभम को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन वह ऐसा करते हुए बार-बार पीछे की तरफ नजर करके अपनी मां को देख ले रहा था कि कहीं उसकी मां ना जाग जाए लेकिन वह जिस तरह से गहरी सांसें ले रही थी उसे पक्का यकीन हो गया था कि वह गहरी नींद में सो रही है,,,।

शुभम का लंड पूरी तरह से लोहे के रोड की तरह खड़ा हो चुका था और पेंट के अंदर तंबू बनाए हुए सीधे अपनी ठोकर को शीतल की गांड पर दे रहा था,, शिमला की मस्ती भरी ठंडी सुबह मैं शुभम अपने आपको बेहद गरम महसूस करने लगा था जिसका कारण केवल शीतल का खूबसूरत बदन और उसका उन्नत उभार लिए हुए मदमस्त नितंब,,,
अपनी नरम नरम गांड पर कोई कठोर चीज की चुभन महसूस होते ही सीतल की नींद खुल गई,,,, वह आधी नींद में ही थी इसलिए वह आश्चर्य से उस कठोर चीज के बारे में जानने के लिए अपने हाथ को उसी तरह से लेटे हुए हैं पीछे की तरफ लाकर जब उसे अपने हाथ में पकड़ी तो वह दंग रह गई उसे तुरंत एहसास हो गया कि वह कठोर चीज कोई और नहीं शुभम का लंड है और यह अहसास होते ही,, उसका तन बदन उत्तेजना से कांप गया,,,, शुभम को भी अब शीतल के जागने का पता चल गया था वह जान गया था कि उसकी हरकत की वजह से उसकी नींद खुल गई है और वह इसलिए अपने हाथ को आगे की तरफ लाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाना शुरू कर दिया वैसे भी सुबह के समय औरत और मर्द दोनों काफी उत्तेजित रहते हैं और ऐसे में जरा सा कामुक हरकत दोनों को चुदाई के लिए मजबूर कर देता है और यही हाल इस समय शीतल और शुभम का हो रहा था,,, जिस तरह से शीतल शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन को अपनी नरम नरम गांड पर महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी,,,
Sheetal ki chudai

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नितंबों पर कठोर चुभन और स्तन मर्दन की वजह से वह मदहोश होने लगी उसका मन शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने के लिए मचलने लगा,,,। शुभम भी पागल हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से शीतल की चुचियों को दबाते हुए एक करके उसके बटन को खोलना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसकी दोनों चूचियां उसके ब्लाउज की कैद से आजाद हो गई,,,,, शुभम की कामुक हरकतों की वजह से शीतल के तन बदन में आग लगी हुई थी उसके मुख से गर्म शिसकारियों की आवाज फूटने को तड़प रही थी वह बड़ी मुश्किल से अपनी सिसकारियो को मुंह के अंदर ही दबाए हुए थी,,,, दोनों के ऊपर मदहोशी पूरी तरह से सवार हो चुकी थी,,,,

गजब का नजारा बना हुआ था शिमला के गुलाबी मौसम में सुबह के समय बंगले के एक कमरे में एक ही बेड पर मां बेटे और शीतल अपनी थकान मिटाने के लिए लेते हुए थे लेकिन,,, शुभम और शीतल दोनों की नींद उड़ चुकी थी निर्मला अभी भी गहरी नींद में सो रही थी इस बात से अनजान कि जिस बिस्तर पर वह सोई हुई है उसे बिस्तर पर उसका बेटा उसकी सहेली के खूबसूरत बदन से खेल रहा है,,

शुभम पागलों की तरह अपनी कमर हिलाते हुए शीतल की चूचियां जोर जोर से दबा रहा था और शीतल अपनी गरम सिसकारियों को बार बार मुंह से ना निकल जाए इसलिए अपने मुंह को अपने हाथ से दबा दे रही थी,,,, लेकिन अब हालात बिगड़ने लगे थे शीतल के सब्र का इम्तिहान खत्म होता नजर आ रहा था,,, क्योंकि शुभम की कामुक हरकतें बढ़ती जा रही थी,,, फौजी साहब इसे शीतल की चूचियों को दबा रहा था वही हाथ नीचे की तरफ ले जाकर जहां पर साड़ियों को इकट्ठा करके उन्हें फोल्ड करके पेट के नीचे उसकी गांठ को दबाया जाता है उसी स्थान से अपने हाथ को उसकी साड़ी के अंदर सरकाने लगा और शीतल भी शुभम की इस हरकत को अच्छी तरह से समझ गई थी वह जानती थी कि आप सुबह क्या करना चाहता है इसलिए अपने पेट को हल्का सा सांस अंदर की तरफ खींच कर अपने पेट को दबा दी जिससे उसकी हथेली बड़े आराम से उसकी साड़ी के अंदर चली जाए और ऐसा ही हुआ शुभम बड़े आराम से अपनी हथेली को उसकी पेटीकोट से होता हुआ उसकी साड़ी के अंदर अपनी हथेली को पहुंचा दिया और अपनी अंगुलियों से डरते हो अपनी उंगलियों को पेंटी के अंदर डालकर तुरंत उसके फूली हुई कचोरी को अपनी हथेली में दबा लिया इस बार शीतल से रहा नहीं गया और उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज निकल गई,,,,।



ससससहहहह,,,आहहहहहहह,,,, शुभम,,,,,,

सससससस,,,, बिल्कुल भी आवाज मत करो वरना मम्मी जाग जाएगी,,,,,

लेकिन तेरी हरकतें मुझे मदहोश कर रही है ना चाहते हुए भी मेरे मुंह से आवाज निकल जा रही है,,,,

अपनी गरमा गरम आवाज को संभालो और मजा लो,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम अपनी बीच वाली उंगली को तुरंत उसके नरम नरम रसीली बुर के अंदर डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,,, और लगातार अपनी कमर को हिलाते हुए उसके नितंबों पर अपने लंड की ठोकर लगाने लगा,, उत्तेजना के मारे शीतल का पूरा शरीर कांपने लगा था शिमला में उसे इतना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव होगा वह ऐसा कभी सोची नहीं थी लेकिन अपने तन बदन में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव करके उसे समझ में आ गया था क्या शिमला का यह ट्रिप वह जिंदगी भर याद रखने वाली है,,,,, शीतल अपने आप हमें बिल्कुल नहीं थी वह मदहोशी के सागर में डूबती चली जा रही थी अब उसे अपनी बुर के अंदर शुभम का मोटा तगड़ा लंड महसूस करना था कि वह उसके लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाना चाहती थी क्योंकि जिस तरह के सफर मैं शुभम उसको लेकर जा रहा था उसकी मंजिल यहीं थी,,,।

जिस तरह से शुभम अपनी कमर हिलाता हुआ अपने मोटे तगड़े नंद की चुभन उसके नितंबों पर चुभा रहा था,,, उस चुभन को वह अपनी पुर के अंदर महसूस करने के लिए तड़प रही थी इसलिए अपने हाथों की कोहनी का सहारा लेकर वह अपनी गर्दन ऊपर उठाकर निर्मला की तरफ देखी जो कि वह दूसरी तरफ मुंह करके बेसुध होकर सो रही थी शीतल ने तुरंत कंबल को पूरी तरह से अपने ऊपर और शुभम के ऊपर डाल दी ताकि निर्मला की नींद खुलने पर उसे इस बात का पता तक ना चले कि उसके बगल में चुदाई चल रही है,, जिस तरह से निर्मला से नजरें बचाकर शीतल शुभम और उसके ऊपर कंबल डालकर अपने आप को छुपाने की कोशिश कर रही थी,,,, शुभम समझ गया कि शीतल अब चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार है,,,, शुभम आप इतना सोच ही रहा था कि शीतल अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा कर तुरंत कमर तक चढ़ा ली और अपनी पेंटी को उतारने लगी यह देख कर उसकी सहायता करते हुए शुभम भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पेंटी निकलवाने में उसकी मदद करने लगा और देखते ही देखते कमर के नीचे शीतल पूरी तरह से नंगी हो गए शुभम भी अपनी पेंट को खोलकर उसे घुटनों तक सरका दिया,,,
अब शुभम के लिए एकदम आसानी हो गई थी शीतल शुभम के पारा को चेक करने के लिए अपने हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके थर्मामीटर को पकड़ ली जो कि बेहद गर्म था उसकी गर्मी को अपनी हथेली में मैसेज करते हुए उसके तन बदन में आग लग गई शुभम अब देर करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं समझ रहा था वह अपने लंड को उसकी बुर में डालने से पहले एक बार जोर से उसकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़ कर अपनी हथेली से दबाने लगा और अपने खड़े लंड को उसके गांड की दरार में इधर-उधर घुमाना शुरू कर दिया,,,, शीतल समझ गए कि वह लंड को इधर-उधर दरार में घुमा कर क्या ढूंढ रहा है वह उसके गुलाबी छेद को ढूंढ रहा था और इसलिए शीतल अपनी टांग को घुटनों के बल मोड़ कर थोड़ा सा अपनी टांग को आगे कर ली जिससे उसका गुलाबी छेद एकदम बाहर को नजर आने लगा है लेकिन शुभम अपने हाथों की उंगलियों से उसकी गुलाबी बुर के छेद को टटोलकर अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को उस पर टिका दिया,,, और देखते ही देखते अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलते हुए अपने लंड को शीतल की बुर के अंदर घुसाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम का पूरा समूचा लंड शीतल की रसीली बुर के अंदर समा गया,,,।

सफर खत्म हो चुका था राही को उसकी मंजिल मिल चुकी थी और मंजिल मिलने की खुशी क्या होती है इस वक्त बिस्तर पर बिछी हुई चादर पर पड़ रही सिलवटें बयां रही थी,,,,, शुभम की कमर आगे पीछे अपनी लय में हुई जा रही थी,,, शुभम बड़े आराम से शीतल को चोद रहा था उत्तेजना और मदहोशी का नशा दोनों के सर के ऊपर इस कदर सवार हो चुका था कि उसे इस बात का भी आभास नहीं था कि उसे बिस्तर पर निर्मला लेटी हुई है,,,, लेकिन इस तरह से चोरी छुपे एक ही बिस्तर पर अपनी मां की उपस्थिति में शीतल की चुदाई करने में उसे कुछ ज्यादा ही मजा और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था,,,

शुभम पागलों की तरह उसके पूरे बदन पर अपना हाथ फेर रहा था,,,। कभी उसकी चूचियों को दबाता तो कभी उसके चिकनी पेट को अपनी हथेली में दबोच लेता तो कभी केले के तने के समान मोटी मोटी जांघों को दबा देता,,,, शीतल को अपनी बुर के अंदर ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहे का रोड डाल दिया हो,,,, लेकिन बेहद रोमांचक उत्तेजना का अनुभव रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था इस तरह से शुभम से चुदवाने में,,,

तकरीबन 15 मिनट की होले होले की चुदाई के बाद दोनों झड़ गए,,,, और कुछ देर तक है यु ही लेटे रहे,,,

जब उन दोनों को यह एहसास हुआ कि निर्मला उठने वाली है तो वह लोग तुरंत अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके एक दूसरे से थोड़ी दूरी बना कर आंख बंद करके जानबूझकर लेट गए ताकि निर्मला को यह न लगे कि यह दोनों पहले से ही जाग रहे हैं,,,
 
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