सरला चाची के भराव दार बदन और उसकी बहू रुचि के खूबसूरत चेहरे को देखकर शुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था बार बार उसकी आंखों के सामने सरला चाची की बड़ी-बड़ी मटकती गांड नजर आ रही थी। अब तक के अपने सेक्स जीवन के सफर को देखते हुए उसे इतना तो ज्ञान हो ही गया था कि हर औरत अंदर से प्यासी होती है उसके अंदर मोटे तगड़े लंड से चोदने का सपना हमेशा बना होता है बस उसे जगाना होता है और यही काम अब सरला के साथ उसे करना था।
लेकिन इस समय उसे एक रसीली बुर की आवश्यकता थी जिसके लिए वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था इसलिए वह किचन की तरफ जाने लगा उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां किचन में खाना बना रही होगी और घर में उन दोनों के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था माहौल और मौका सब कुछ शुभम के पक्ष में था। वैसे कई औरतों के साथ संभोग सुख पाने के बाद उसे इतना तो यकीन था कि वह दुनिया के किसी भी औरत के साथ संभोग कर ले लेकिन जो मजा उसे उसकी मां के साथ संभोग करने में आता था वैसा मजा किसी और औरत के साथ कभी नहीं मिला। और वैसे भी उसकी नजरों में उसकी ही नजरों में क्या निर्मला को जानने वाला हर कोई व्यक्ति की नजर में निर्मला बेहद खूबसूरत और हसीन औरत थी क्योंकि इस उम्र में भी उसके बदन की बनावट और अंगों का ढांचा एकदम जवान और कसा हुआ था जितना कसा हुआ बदन उसका वस्त्रों में लगता था उससे भी कहीं ज्यादा चुस्त उसका बदन नग्न अवस्था में लगता है और उन्हीं कसाव भरे अंगो के साथ खेल खेल कर शुभम जवान मर्द हो चुका था।
अगले ही पल सुभम किचन के बाहर खड़े होकर दीवार से अपना कंधा टेक कर अंदर के नजारे को देख रहा था। किचन के अंदर का नजारा पूरी तरह से कामुकता से भरा हुआ था...। उसकी मां रोटियां बेल रही थी... गर्मी का असर कुछ ज्यादा ही था जिसकी वजह से वह अपनी साड़ी को उतार कर हैंगर में टांग दी थी और इस समय उसके बदन पर मात्र ब्लाउज और पेटीकोट ही था ब्लाउज भी ऐसा की पीछे की उसकी चिकनी पीठ पूरी तरह से नंगी नजर आ रही थी बस उसके ऊपर पतली सी डोरी बनी हुई थी जिससे उसके पूरे ब्लाउज का हिस्सा टिका हुआ था और उस पतली सी रस्सी के वजह से ही निर्मला की मदमस्त दोनों जवानियां छलकने से बची हुई थी अगर जरा सी भी डोरी ढीली हो जाए तो देखते ही देखते निर्मला की दोनों जवानियां किसी भरे हुए पेमाने की तरह छलक जाए... निर्मला ने अपनी पेटीकोट को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठाकर उसे कमर पर खुश रखी थी जिससे नीचे से उसकी दोनों चिकनी मोटी टांगे पिंडलियों से नंगी थी उसकी मजबूत गोरी गोरी पिंडलियों देखकर शुभम का दिल बहक रहा था।
शुभम के पैंट में तंबू बना हुआ था दिल तो कर रहा था कि अभी किचन में घुस जाए और पेटीकोट उठाकर खड़े लंड को उसकी बुर में पेल कर चुदाई करना शुरू कर दें लेकिन उसकी आंखों के सामने जो अद्भुत और किसी चित्रकार की चित्रकारी की तरह नजर आने वाले दृश्य से वह अपना मन बहला रहा था। इसलिए वह वही खड़े होकर कुछ देर तक अपनी मां की मदमस्त जवानी का रसपान अपनी आंखों से कर रहा था
निर्मला रोटी बेलने के लिए जैसे जैसे अपने हाथों को आगे पीछे करके बैलेंस घुमा रही थी उसकी वजह से उसके बदन में एक अद्भुत तरंग नुमा लहर पैदा हो रही थी जिसकी वजह से उसके कमर के नीचे वाले भाग में उसकी मदमस्त नितंबों में एक अजीब सी थीरकन हो रही थी मानो की किसी बड़े बड़े दो गुब्बारों में पानी भरकर उसे हिलाया जा रहा हो। निर्मला की गांड की धड़कन शुभम के दिन पर छुरियां चला रही थी।
अपनी मां के भजन की पीछे की खूबसूरती को देखकर शुभम अपने आपसे ही बातें करते हुए बोला इसलिए कहता हूं कि मेरी मां से खूबसूरत इस दुनिया में कोई दूसरी औरत नहीं है भले ही मेरा मन इधर उधर की औरतों में भटक जाए लेकिन आखिरकार जो सुकून मुझे अपनी मां के साथ मिलता है वैसा सुकून मुझे किसी औरत के साथ नहीं मिलता।
अपनी मां के मदमस्त बदन को देखकर शुभम पैंट के ऊपर से अपने लंड को सहला ना शुरू कर दिया जो कि पैंट में तंबू बनाए हुए था । निर्मला इन सबसे बेखबर रोटियां बनाने में व्यस्त थे उसे तो इसका आभास तक नहीं हुआ था कि उसके पीछे उसका बेटा खड़े होकर उसके मदमस्त यौवन का रसपान अपनी आंखों से कर रहा है। निर्मला इस समय पीछे से एक अद्भुत मुरत की तरह लग रही थी। जैसे कि खजुराहो की कलाकृति हो वैसे भी निर्मला का पिछवाड़ा कुछ ज्यादा ही आकर्षक था और पेटीकोट कशी होने के नाते उसका हर एक काटा उसका हर एक उपांग साफ साफ नजर आ रहा था शुभम तो यह देखकर एकदम उत्तेजित हो गया था उससे रहा नहीं जा रहा था पहले से ही सरला और उसकी बहू ने जिस तरह से उसके तन बदन में उत्तेजना की आग लगाई थी उसे बुझाना बहुत जरूरी था।
अपनी मां की मदमस्त भराव दार जवानी को देखकर शुभम के लिए अपने आप पर काबू पाना अब मुमकिन नहीं था इसलिए वह किचन में घुस गया और पीछे से जाकर अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया यू एकाएक अपने आप को किसी के बाहों में भरा हुआ देखकर वह एकदम से चौंक गई हालांकि उसे मालूम था कि ऐसी हरकत शुभम के सिवा कोई नहीं कर सकता लेकिन फिर भी वो डर गई थी। और ऊपर से तुरंत वह अपनी गांड के बीचोबीच ठोस अंग की चुभन महसूस करने लगी लेकिन शुभम कुछ बोल पाता इससे पहले ही उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसे इस तरह से पीछे से अपनी बाहों में भरने वाला उसका बेटा नहीं है तो वह मन ही मन मुस्कुराने लगी।
शुभम उत्तेजना बस अपनी दोनों हथेली में अपनी मां की बड़ी-बड़ी चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से पकड़कर दबाते हुए बोला।
वह मम्मी तुम ब्लाउज और पेटीकोट में कितनी खूबसूरत और सेक्सी लग रही हो और वैसे सच कहूं तो अगर तुम इसे उतारकर नंगी होकर खाना बनाती तो अभी कोई हर्ज नहीं था वैसे भी घर में मेरे और तुम्हारे सिवा कोई नहीं है।
धत कैसी बातें कर रहा है मैं नंगी होकर खाना नहीं बनाती। (निर्मला उसी तरह से तवे पर रोटियां सेकते हुए बोली।)
तुम सिर्फ नंगी होकर चुदवाती हो खाना नहीं बना सकती। (शुभम अपनी कमर को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर दबाते हुए और धीरे-धीरे ब्लाउज के बटन खोलते हुए बोला।)
तुझे क्या हो गया है शुभम जरा भी सब्र नहीं होता।
सब्र कैसे होगा मेरी रानी जब मेरी आंखों के सामने एक बेहद खूबसूरत औरत केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी होकर अपनी बड़ी बड़ी गांड ( एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी मां की गांड दबाते हुए) खिलाते हुए खाना बना रही हो तो बना मेरे जैसा लड़का बेसब्र क्यों ना हो।
चल अच्छा बातें मत बना और अपना यह (एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर पैंट के ऊपर से ही अपने बेटे के खड़े लंड़ को पकड़ते हुए) इसे पीछे कर मेरी गांड में चुभ रहा है।
अच्छा गांड में चुभ रहा है और जब अपनी बुर में लेती हो तब नहीं चुभता।
तब तो बहुत मजा आता है। (तवे पर फूल रही रोटी को हाथ से गोल-गोल घुमाते हुए बोली।)
देख रही हो मम्मी जैसे तवे पर गर्म होकर रोटी फूलती है वैसे ही तुम जब गर्म होती हो तो तुम्हारी भूल भूल जाती है ऐसा लगता है कि जैसे गरम गरम रोटी हो।
बातें बहुत बनाने आता है तुझे अगर तुझे मेरी बुर भी गरम गरम रोटी लगती है तो खा जाया कर।
सच कहूं तो तुम्हारी बुर को खा जाने का बहुत मन करता है लेकिन उस में लंड डालने का भी बहुत मन करता है अगर उसे खा जाऊंगा तो लंड किस में डालूंगा।
(शुभम की ऐसी गंदी गंदी बातें सुनकर निर्मला को मज़ा आ रहा था और वह अपने बेटे की इस बात पर हंसते हुए बोली।)
चल अब तो बहुत बड़ा हो गया है और इस तरह की गंदी गंदी बातें करने लगा है अब तो मुझे खाना बना दे दे वरना रात को खाने के लिए कुछ नहीं रहेगा।
चलेगा मम्मी खाने के लिए कुछ नहीं रहेगा तो पेलने के लिए तुम्हारी ( पेटीकोट के ऊपर से ही अपनी मां की बुर दबाते हुए )यह तो है ना इसी से पेट भर लूंगा....
आहहहहहहहह..... क्या कर रहा है।(शुभम के द्वारा इस तरह से बुर दबाने की वजह से निर्मला के मुंह से सिसकारी की आवाज छूट गई हालांकि उसकी हरकतों की वजह से निर्मला भी काफी गर्म हो चुकी थी।)
वही कर रहा हूं जो एक खूबसूरत औरत के साथ करना चाहिए।
आज बहुत ज्यादा उतावला हो गया है तू खाना तो बना लेने दे।
नहीं मुझसे रहा नहीं जा रहा है।(शुभम काफी उत्तेजित हो गया था और बातों ही बातों में उसने अपनी मां की ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए थे और राहत वाली बात यह थी कि आज निर्मला ने ब्लाउज के अंदर अपनी ब्रा नहीं पहनी थी पसीने की वजह से वह काफी चिपचिपी हो गई थी जिसे पकड़ कर दबाने में शुभम को काफी आनंद की अनुभूति हो रही थी।शुभम अपनी मां की गर्दन को चुमते हुए जोर-जोर से चूची को दबाना शुरू कर दिया जिसका असर निर्मला के बदन पर भी काफी हद तक मादकता का एहसास दिला रहा था।
ससससज्हहहहहहह आहहहहहहहह.... शुभम यह क्या कर रहा है कुछ तो सब्र कर मुझे खाना बना लेने दे।(निर्मला ऊपरी मन से अपनी बेटी को रुकने के लिए कह रही थी...जबकि अंदर से वह यही चाहती थी कि उसका बेटा बिना रुके अपना काम करते रहें क्योंकि शुभम की हरकतों ने उसकी लहसुन में भी आग लगाना शुरू कर दिया था जिसमें से मधुर रस बह रहा था।)
तुम खाना बनाती रहो मम्मी तुम्हें रोका किसने है मुझे अपना काम करने दो और इतना कहते हुए शुभम दोनों हाथों से अपनी मां की पेटीकोट पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगा और अगले ही पल वो अपनी मां की पेटीकोट को कमर तक उठा दिया था।.....अपनी मां की नंगी गोरी गोरी बड़ी गांड देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई उसे इस बात की खुशी थी कि आज उसकी मां ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी इसलिए वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर चपत लगाते हुए बोला।
वाह मम्मी आज तो ऐसा लग रहा है कि तुम पहले से ही तैयारी करके रखी हो तभी तो देखो आज तुमने चड्डी भी नहीं पहनी हो अपनी गांड एकदम नंगी रखी हो शायद मेरे लिए ही।
ऐसा कुछ नहीं है आज गर्मी ज्यादा थी इसलिए मैं ना तो ब्रा पहनी हूं और ना ही चड्डी समझ गया ना तू (निर्मला जानबूझकर इतराते हुए बोली।)
कुछ भी हो मुझे तो खजाना मिल गया है।
खजाना तभी हाथ लगता है जब पहरेदार की रजामंदी हो मेरी रजामंदी है इसलिए तू खजाने तक आराम से पहुंच जाता है। (इतना कहते हुए निर्मला तवे पर फूली हुई रोटी को उठाकर बर्तन में रखने लगी तब तक शुभम अपनी पेंट घुटनों तक सरकार कर अपने मोटी खड़े लंड को हाथ में लेकर ही लाना शुरू कर दिया था जो कि इस समय काफी तगड़ा और कठोर नजर आ रहा था।निर्मला को भी इस बात का एहसास हो गया था कि अब सुभम क्या करने वाला है इसलिए वह पीछे नजर करके अपने बेटे के खड़े लंड को देखने लगी जिस पर नजर पड़ते ही उत्तेजना के मारे उसकी बुर कचोरी की तरह फूलने पीचकने लगी। शुभम एक हाथ में अपने लंड को पकड़ कर अपने लिए जगह बना रहा था जिसका साथ देते हुए निर्मला हल्के से नीचे की तरफ झुकी और अपनी गांड को ऊपर उठा दी जिससे उसकी बुर की गुलाबी छेद शुभम की आंखों के सामने साफ-साफ नजर आने लगी।
शुभम को अपनी मंजिल साफ नजर आने लगी बस अपनी गाड़ी को आगे बढ़ाना था और बा अपने लंड को एक हाथ में पकड़ कर उसके गर्म सुपाड़े को अपनी मां की बुर की गुलाबी छेद पर रख दिया जिससे निर्मला के बदन में आग लग गई वह सिहर उठी उसकी गुलाबी बुर भी जैसे लंड को अंदर लेने के लिए मचल रही हो इस तरह से सिकुड़ रही थी।
देखते ही देखते शुभम धीरे-धीरे करके अपने लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में उतार दिया।
कुछ ही सेकंड में शुभम का मोटा तगड़ा लैंड निर्मला की गुलाबी पुर की गहराई में खो गया और शुभम की जांग निर्मला की जांघों से सट गई शुभम ने अपनी लंड को पूरी तरह से अपनी मां की बुर में उतार दिया था और दोनों का बदन आपस में इतना सड़ गया था कि दोनों के बीच से हवा भी गुजर नहीं रही थी।
यही पोजीशन इसी अवस्था में रोहन को चुदाई करना बेहद पसंद था वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर को थामकर हल्के हल्के धक्के लगाने लगा और निर्मला भी अपने बदन की गर्मी दिखाते हुए अपने बेटे के हर धक्के के साथ गर्म सिसकारी छोड़ रही थी। एक बार फिर से सारे जग से अनजान मां बेटे दोनों अपने रिश्तो की मर्यादा भूल कर एक दूसरे में समाने के भरपूर प्रयास में लगे हुए थे शुभम हल्के धक्कों से शुरू करते हुए धक्कों की रफ़्तार बढ़ाने लगा। रसोई घर में जहां निर्मला खाना बना रही थी अब वहां चुदाई का खेल शुरू हो गया था। एक अद्भुत नजारा रसोई घर में नजर आ रहा था निर्मला किचन के फ्लोर पर झुकी हुई थी और शुभम अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाए हुए उसकी रसीली बुर में लंड पेल रहा था और साथ ही एक हाथ आगे बढ़ा कर उसके बड़े बड़े दूध को दबा रहा था निर्मला मस्त हुए जा रहे थे उसके मुंह से सिसकारी की आवाज लगातार पूरे रसोईघर में गूंज रही थी हालांकि इस मादक भरी सिसकारी को सुनने वाला शुभम के सिवा वहां कोई नहीं था और यही तो दोनों चाहते ही थे कि घर में केवल उन्हीं दो रहे ताकि वह जब चाहे तब चुदाई का सुख भोग सकें।
अशोक अपने काम में व्यस्त था और उसके पीठ पीछे उसका ही बेटा उसकी बीवी को चोद कर मस्त कर रहा था। शुभम के कमर की रफ्तार बढ़ने लगी वह तेज झटकों के साथ अपनी मां की चुदाई कर रहा था और उसके हर धक्के के साथ निर्मला की बड़ी बड़ी गांड पानी से भरे हुए गुब्बारे की तरह लहर जा रही थी। दोनों की सांसो की गति तेज चल रही थी। शुभम अपनी मां की बुर में लंड डालते हुए एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी मां की एक टांग को घुटनों से पकड़ कर ऊपर उठाते हुए बोला।
वैसे मम्मी आज तुम बना कर रही हो।
कद्दू की सब्जी। (शुभम के तेज धक्कों की वजह से निर्मला के मुख से हर एक शब्द सीहरते हुए निकले।)
कद्दू की सब्जी मम्मी तुम जानती हो कि मुझे कद्दू की सब्जी बिल्कुल भी नहीं पसंद है।
मैं अच्छी तरह जानती हूं बेटा लेकिन तू ही तो कह रहा था कि पहले खाने को कुछ ना हो चोदने के लिए बुर तो मिलेगी ना तु इसी से पेट भर लेना। .....
चलेगा मम्मी मैं तो कह रहा हूं कि खाने को भले कुछ ना हो बस चोदने के लिए बुर चाहिए। चोद कर ही पेट भर जाता है ।(इतना कहते हुए और जोर जोर से धक्के लगाने लगा कद्दू की सब्जी का नाम सुनकर शुभम को सरला चाची की बात याद आ गई क्योंकि वह झूठ बोला था कि उसे कद्दू की सब्जी बहुत पसंद है वह किसी बहाने से सरला के घर में प्रवेश करना चाहता था। जबकि उसे कद्दू की सब्जी बिल्कुल भी पसंद नहीं थी।)
मेरे बेटे पर चिंता मत कर तेरे लिए मैंने सूजी का हलवा बनाकर रखी हूं। तू मेरा इतना ख्याल रखता है तो इतना तो मैं तेरा ख्याल रख ही सकती हूं।
(शुभम जिस टांग को पकड़ कर थोड़ा सा उठाए हुआ था निर्मला उसी काम को थोड़ा सा और उठाकर उसे किचन पर रख दी ताकि और ज्यादा आराम से शुभंकर लंड उसकी बुर में अंदर बाहर हो सके।)
क्या बात कर रही है मम्मी तुम सच कह रही हो आज तो मजा आ जाएगा। (शुभम को इस तरह से खुश होता देखकर वह भी मुस्कुराने लगी और खुशी और उत्तेजना का मिलाजुला असर शुभम के धक्के पर पड़ने लगा वह जोर जोर से धक्के लगाते हुए अपनी मां को चोदने लगा। निर्मला अपने बेटे के हर धक्के का मजा लेते हुए जोर जोर से सिसकारी की आवाज निकाल रही थी। और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ गए। शुभम झड़ने के साथ ही अपनी मां के ऊपर एक दम से पसर गया। कुछ देर तक निर्मला भी उसी तरह से झुकी रही।
जब थोड़ी देर बाद निर्मला की सांसे शांत हुई तो वह शुभम को पीछे की तरफ धक्का देते हुए बोली।
अब हटे गा भी कि ऐसे ही मेरे ऊपर पड़े रहेगा चल हट मुझे खाना बनाने दे बहुत देर हो गई है।
(शुभम अपनी मां के ऊपर से हटा और पेंट पहनने लगा निर्मला भी अपनी पेटीकोट को व्यवस्थित करके ब्लाउज के बटन लगाने लगी। इसी तरह से एकाएक हुई चुदाई में निर्मला को काफी मजा आता था इसलिए उसके चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास साफ नजर आ रहा था वह वापस खाना बनाने लगी और शुभम अपने कमरे में चला गया।
रात को अपने बिस्तर पर सरला शुभम की कही बातें याद कर करके करवट बदल रही थी यह उसके साथ पहली बार हुआ था कि कोई जवान लड़का उसकी खूबसूरती की तारीफ किया था जिससे वह गदगद हुए जा रही थी। कुछ घंटों पहले वह शुभम के ऊपर एकदम शक कर दी थी कि वह खुद अपनी मां को चोदता है और इस बात को लेकर हुआ है उसे से काफी नाराज भी थी लेकिन आज बाजार में जिस तरह से उसने थैला उठाकर उसकी मदद किया था और बातों ही बातों में उसकी खूबसूरती उसके बदन की तारीफ किया था उसे सुनकर सरला के तो जैसे होश उड़ गए थे वह सपनों की दुनिया में खोने लगी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि शुभम जैसा जवान लड़का उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा है। वह बार-बार बिस्तर पर करवट बदल रही थी सरला को अपनी टांगों के बीच हलचल सी महसूस होने लगी और इसी तरह की हलचल उसे उस दिन महसूस हुई थी जब वह निर्मला के घर पर शीशे की दीवार से अंदर का दृश्य देखी थी जहां पर खड़ी होकर निर्मला एकदम नग्न अवस्था में अपनी बुर के साथ खेल रही थी उस दृश्य को याद करके सरला का इमान भी गड़बड़ाने लगा।
उसके मन में तुरंत यह ख्याल आया कि निर्मला की उम्र में और उसकी उम्र में कुछ ज्यादा फर्क नहीं था केवल तीन चार साल का ही फर्क था । हां थोड़ा यह बात था कि वह निर्मला से शरीर में कुछ ज्यादा भारी थी और वह भी ज्यादा नहीं बल्कि बदन का हर हिस्सा कसा हुआ ही था और वह यह भी बात जानती थी कि निर्मला उससे ज्यादा ही खूबसूरत है लेकिन वह भी किसी से कम नहीं थी इसलिए वह अपने बदन की तुलना निर्मला के बदन से करने हेतु बिस्तर पर से होती और आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई वह इधर-उधर घूमकर आईने में अपने अक्स को देखने लगी। उसे अपने बदन पर अपने चेहरे पर उम्र का प्रभाव ज्यादा नहीं लग रहा था उसका चेहरा गोल मटोल एकदम गोरा हॉट एकदम लाल-लाल थे और हर तरह से आकर्षक चेहरा था रही बात बाकी के इसे की तो वह अपने कंधे पर से साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा कर अपनी छातियों को देखने लगी जो कि ब्लाउज के अंदर काफी आकर्षक लग रहे थे और ऊपर का एक बटन खुला होने की वजह से दोनों के बीच की लकीर किसी नहर की तरह नजर आ रही थी।उससे अभी भी रहा नहीं किया तो वह आईने में देखते हुए अपने हाथों से अपने ब्लाउज के बटन खोल कर अपने दोनों चुचियों को आजाद कर दी वह ब्रा नहीं पहनती थी जिसकी वजह से उसकी चुचियों में हल्का सा लटक पना गया था जिसे वो खुद अपने हाथों से ऊपर की तरफ उठाते हुए बोली की
यह मेरी ही गलती है अगर मैं हमेशा ब्रा पहनती तो आज भी मेरी चूचियां एकदम टाइट रहती। वह मन में निश्चय कर ली कि आगे से वह हमेशा ब्रा पहनेगी।
Sarlaa ki badi badi chuchiya

वह अपनी नजर नीचे की तरफ ले गई तो उसे अपने पेट को देखकर अपने आप ही इस बात का ख्याल आ गया कि अगर थोड़ा सा मेहनत की होती तो उसका पेट और आकर्षक लगता जो कि उस दिन चिकना दूधिया रंग का था। वह अपने हाथों से अपने पेट को सहलाने लगी।
सरना अपने पेट को चलाते हुए आईने में अपने आप को देख रही थी जो कि सांस लेने की वजह से उसकी भारी-भरकम चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर उसके मन में कुछ-कुछ हो रहा था और उससे रहा नहीं गया और वह अपने एक हाथ से अपनी चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर दी यह शुभम की कही बातों का ही असर था कि आज वह इस कदर अपने आपको आईने में अर्धनग्न अवस्था में देख रही थी। सरला को अपनी ही हरकत पर मजा आ रहा था उसे अपने मन में यह सवाल उठ रहा था कि जरूर उसके बदन में कुछ बात होगी तभी तो शुभम जैसा जवान लड़का उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था। इसलिए अपने आप को जांचने के उद्देश्य से वह कमर से पति अपनी साड़ी को खोलकर नीचे फर्श पर गिरा दी अब हुआ आईने के सामने केवल पेटीकोट में खड़ी थी जिसकी डोरी उसकी नाजुक नाजुक उंगलियों में थी और उसे खींचकर अगले ही पल पेटीकोट को भी नीचे गिरा दी।
आईने में अपने आप को एकदम नंगी देखकर वह शरमा गई पहली बार वह अपने आप को नंगी देख रही थी और वह भी खुद ही अपने हाथों से ही अपने आप को नंगी की थी।
अपने पति के देहांत के बाद वह अपने आप को कभी भी नग्न अवस्था में नहीं देखी थी वह नहाती भी थी तो कपड़े पहने हुए ही होते थे लेकिन आज पहली बार वह आईने के सामने अपने आप को पूरी तरह से निर्वस्त्र करके आईने के सामने नंगी खड़ी थी।
वह आदम कद आईने में अपने आप को देख रही थी उसके बदन की बनावट और खूबसूरती देखकर उसे पहली बार ऐसा लग रहा था कि वह भी किसी से कम नहीं है। वह ना चाहते हुए भी अपने दोनों हाथों से अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों को पकड़ कर दबाने लगी उसे निर्मला की हरकत याद आ रही थी और उसकी हरकत को याद करके आईने में अपनी टांगों के बीच के उस पतली दरार की तरफ नजर घुमाई तो वहां पर उसे ढेर सारा झांटों का झुरमुट देखने को मिला। उसे देखकर वह एक हाथ नीचे की तरफ ले गई और अपने झांटो के रेशमी बालों में उंगली फिराते हुए मन ही मन बोली की बालों वाली ही उसके पति को पसंद थी इसलिए वह जल्दी साफ नहीं करती थी।
अपने बुर के बाल में उंगली घुमाते हुए उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिस की बूंदे उसकी उंगली को भिगो रही थी। वह मस्त होने लगी और निर्मला वाला दृश्य याद करके वह अपने आप ही अपनी बुर को मसल ना शुरू कर दी जैसे कि निर्मला कर रही थी और देखते ही देखते वह शुभम की बातों के असर में और निर्मला की हरकत की वजह से अपनी बुर के अंदर अपनी एक उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी जिसमें उसे मजा आने लगा बरसों से सूखी पड़ी बुर में सावन भादो बरसने लगा। सूखी पड़ी बंजर जमीन में पानी की बौछार पड़ने लगी उसका बदन करेगा तो हमें लगा थोड़ी ही देर में उसकी सांसों की गति तेज होने लगी अपनी बुर को उंगली से ही चोदने में उसे मजा आने लगा हालांकि इस तरह की हरकत उसने अभी तक बिल्कुल भी नहीं की थी। लेकिन आज वह मजबूर थी एक छोकरे ने उसे अपनी जवानी के दिन याद दिला दिए थे।
उत्तेजना बस और बदन में आनंद की लहर उठता हुआ देखकर उसकी उंगली रोक नहीं रही थी और वह जोर-जोर से अपनी एक उंगली को बुर में डालकर अंदर बाहर कर रही थी उसे मज़ा आने लगा था आईने में अपने आप को देख कर वह मस्त हुए जा रही थी वह हल्के से अपनी दोनों काम को थोड़ा सा और फैला दी जिससे उंगली डालने में उसे आसानी हो।
आज पहली बार बार इस तरह से बहक गई थी और जोर जोर से अपनी बुर में उंगली पर रही थी थोड़ी ही देर में उसकी बुर से भलभलख कर नमकीन रस बहने लगा।
वह आनंद के सागर में गोते लगा रही थी उसे मजा आ गया था और वह अपने ऊपर दी सांसों को व्यवस्थित करने के लिए बिस्तर पर आकर बैठ गई।
थोड़ी ही देर में उसे ऐसा महसूस होने लगा कि तूफान गुजर चुका है वह काफी शांत हो चुकी थी लेकिन एक अद्भुत अहसास से गुजर चुकी थी जिसका एहसास उसके चेहरे पर संतुष्टि का प्रभाव छोड़ गया था वह मस्त हो चुकी थी।
वह नंगी ही बिस्तर पर लेट गई और कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला।