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Guest
, फिर बोला-
''वैसे देखा जाए तो ये एक लाख डॉलर आप लोगों के लिये
'ईजी मनी
' ही साबित होगा। बस
, तीन दिन इस मकान में बिताने हैं
, जिसे दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में से एक माना जाता है
, फिर रकम आप लोगों के एकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगी। इट्स सिम्पल एज दैट!
"
''कई बार
"-राज बोला-
''हद से ज्यादा सिम्पल दिखने वाली चीज उतनी ही ज्यादा मुश्किल साबित होती है।
"
डोंगरा ने राज की ओर देखा
, फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई-
''मिस्टर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर! आपके लिये ही मुश्किल होगा क्योंकि आपके लिये तो भूत-प्रेतों पर विश्वास करना लाजिमी है। आपका तो प्रोफेशन ही है।
"
''आप नहीं करते भूत-प्रेतों पर विश्वास
?"-राज शांत स्वर में बोला।
''बिल्कुल नहीं करता। घोस्ट्स डोंट एग्जिस्ट्स
"
''ये तो एक फिल्म का नाम है।
"-अनुराग ने चुटकी बजाई-
''मैंने देखी है।
"
''अगर घोस्ट्स एग्जिस्ट नहीं करते
"-राज बोला-
''तो आप ही बताइयेे इस मकान को दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में शामिल करने की क्या वजह है
?"
''मार्केटिंग।
"
''क्या
?"
''बाजार में कोई चीज बेचनी हो
, और उसके लिए ग्राहक न हो
, तो बेस बनाना पड़ता है
, ग्राहक तैयार करने पड़ते हैं। और जब हद से ज्यादा चालाक लोग ये काम करते हैं तो इतने शातिर ढंग से करते हैं कि जिस चीज को कोई खरीदने वाला नहीं था
, उसके पीछे लोग पागल होने लगते हैं। उसका नाम ले-लेकर चिल्लाने लगते हैं। खुद ही उस चीज का ऐसा हौव्वा खड़ा करने लगते हैं कि लोग भागे-भागे उसे लेने आते हैं और न मिल पाए तो मातम मनाने लगते हैं जैसे उनका पता नहीं कितना बड़ा नुकसान हो गया हो।
"
''यहां कौन सी चीज बिक रही है और कौन सी चीज के पीछे लोगों को पागल किया जा रहा है
, स्पष्ट करने की कृपा करेंगें
?"
''भूत-प्रेत। भूत-प्रेत का जबर्दस्त मार्केट तैयार किया गया है पूरी दुनिया में। जबकि ये ऐसी चीज है
, जिससे बच्चे ही डरते हैं। भूत-प्रेत की कपोल-कल्पना पर आज पूरी दुनिया में खरबों रूपये का कारोबार होता है। फिल्मों की कतार लगी है
, किताबें लिखी जा रही हैं
, टीवी पर शोज आ रहे हैं
, थीम पार्क बन रहे हैं-जैसा कि इस मकान को भी बनाया जाने वाला है-और भी पता नहीं क्या-क्या हो रहा है
? मैं भूत-प्रेत पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता और मेरे हिसाब से कोई भी शख्स जिसका दिमागी तवाजन हिला हुआ नहीं होगा
, ऐसी चीज पर विश्वास नहीं करता होगा
, जो होती ही नहीं है। जिसका कोई अस्तित्त्व ही नहीं है।
"
''तो आपके हिसाब से ये मकान सिर्फ इसलिए दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में शामिल है क्योंकि इसकी मार्केटिंग की गई है
? ऐसा भ्रामक प्रचार-प्रसार किया गया है कि ये मकान भुतहा है
? जबकि ये है ही नहीं
?"
''ये पूरी तरह सच नहीं है।
"-डोंगरा के स्वर में हिचकिचाहट के भाव आ गये।
''फिर सच क्या है
?"
''इस घर का एक लम्बा इतिहास है।
"
''कैसा इतिहास
?"
''बुरी घटनाओं का। भयानक डरावनी घटनाएं। हालांकि मैं उन घटनाओं के बारे में ज्यादा नहीं जानता लेकिन मैंने सुन रखा है कि इस मकान में जो भी रहा
, उसके साथ कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हुईं
, जिसके चलते उन्हें ये जगह छोड़कर जाना पड़ा। हालांकि कुछ तो इतने खुशकिस्मत भी नहीं थे। इस मकान के कई पिछले मालिकों की यहां रहते हुए रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो चुकी है। इस तरह की घटनाएं ही इस घर को भूत बंगले के रूप में प्रचारित होने का एक बड़ा कारण रहीं हैं।
"
''कौन-सी घटनाएं
?"-अनुराग दिलचस्पी लेते हुए बोला-
''कुछ बताइये तो सही
?"
''मैं जरूर बताता।
"-डोंगरा खेदपूर्ण स्वर में बोला-
''लेकिन हॉरर कहानियों में मेरा कभी इंट्रेस्ट नहीं रहा। इसलिए शायद मैं आपको उस ढंग से न बता सकूं
, जिस ढंग से आपको इस घर के भूतग्रस्त होने पर पूरा विश्वास हो जाए। जैसे इस घर में पहले रहने वाले लोगों की किसी घटना-दुर्घटना में मृत्यु
, हत्या वगैरह। मेरी नजर से देखेंगें तो वो घटनाएं दशकों पहले हुई ऐसी अपराधिक घटनाएं ही थीं
, जिनका अपराधी संयोग से पकड़ा नहीं जा सका और लोगों ने उन घटनाओं का कारण भूत-प्रेत को मान लिया। और जहां तक मेरा मानना है भूत-प्रेत से सम्बन्धित कही जाने वाली लगभग सभी घटनाओं के साथ ऐसा ही होता है। कई सालों से तो ये घर खाली ही पड़ा है। इसके भूतग्रस्त होने के कारण लोगों में इसका खौफ इतना ज्यादा है कि कोई यहां रहने की सोच भी नहीं सकता। इसके अलावा ये पास के गांव से थोड़ा आउटसाइड के इलाके में भी पड़ जाता है तो ये भी एक मुख्य वजह है कि कोई यहां नहीं रहना चाहता। लेकिन मैं फिर कहना चाहूंगा कि यहां अगर कुछ दशक पहले किसी का खून हो गया था तो इसका ये मतलब नहीं कि उससे मकान ही हॉन्टेड हो गया। अब इतना लम्बा अरसा बीतने के बाद इस बात को लेकर किसी मकान से डरने की कोई वजह नहीं बनती कि वहां कोई हत्या या हत्याएं हुईं थीं। आखिर हर मकान में कभी न कभी
, कोई न कोई मौत तो हुई होती है। इसका मतलब ये तो नहीं कि हर मकान भुतहा हो जाता है।
"
''शुक्र है
"-राज बोला-
''कि आपने ये नहीं कहा कि हर मकान में कभी न कभी
, कोई न कोई हत्या तो हुई होती है।
"
डोंगरा ने नाराजगी के भाव के साथ राज की ओर देखा।
अनुराग मकान की ओर पलटा और उसकी सीध में दोनों हाथ कमर पर रखकर खड़ा हो गया। उसने उस भुतहा माने जाने वाले मकान पर भरपूर नजर डाली
, फिर एक-एक शब्द पर जोर देते हुए बोला-
''ये मकान तो बहुत ही ज्यादा बदनाम है।
"
''आप कब से यहां केयरटेकर हैं
?"-डॉली ने डोंगरा से पूछा।
''करीब साल भर से। लेकिन मैं दूसरी बार ही यहां आया हूं।
"
''अरे!
"
''ऑनलाइन केयरटेकिंग करता होगा।
"-प्रीति धीमे से बुदबुदाई
, जो कि पास खड़े होने के कारण केवल डॉली को ही सुनाई दिया।
''हां। दरअसल
, कंपनी के निर्देश पर ही मैं यहां आता था। शहर में मेरा मेन बिजनेस दूसरा है। पहली बार मैं यहां तब आया था
, जब कंपनी वालों ने शुरू-शुरू में इस मकान को खरीदा था और मुझे बतौर केयरटेकर नियुक्त किया था। मुझे कहते हुए अजीब लग रहा है लेकिन उस समय इस मकान में कदम रखते हुए मुझे काफी अजीब लगा था। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता लेकिन कुछ तो अजीब था। उस समय मेरी जल्दी से जल्दी यहां से दूर चले जाने की तीव्र इच्छा होने लगी थी। और मुझे स्वीकार करते हुए कोई संकोच नहीं है कि मैं थोड़ा डर भी गया था। लेकिन यहां से लौटने के बाद मुझे इस बात को याद करके काफी हंसी आती थी और शर्मिंदगी भी महसूस होती थी। आखिर एक मकान से डरने की क्या वजह हो सकती है
? शायद यहां जंगल में सूनेपन के माहौल का मेरे दिमाग पर असर हो गया था। मैंने उसी समय सोच लिया था कि दोबारा यहां आऊंगा तो किसी तरह का वहम नहीं पालूंगा। लेकिन मुझे उतने अरसे में दोबारा यहां आने का मौका अब मिला है। कंपनी वालों की ओर से निर्देश था कि जब वो कहें
, तभी मुझे यहां आना है।
"
''ऐसा क्यों
?"-राज बोला।
''ये तो अब कंपनी वाले ही बता सकते हैं। शायद उन्हें यहां अनावश्यक दखल पसंद न हो। या
"-उसने मकान पर नजर मारी-
''वे यहां कुछ करते रहें हों।
"
''इतनी बड़ी प्रॉपर्टी खरीदी और उसे साल भर के लिए यूं ही छोड़ दिया
?"-प्रीति मकान की ओर देखते हुए बोली।
''वैसे केयरटेकर होने के नाते
"-जय मकान की खिड़कियों पर जमी धूल की ओर देखता हुआ बोला-
''आपका फर्ज नहीं बनता था कि इस मकान की थोड़ी झाड़-पोंछ करवा देते
, जिससे ये इंसानों के रहने लायक बन जाता
?"
डोंगरा के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
''डोंट वरी।
"-वो सांत्वना देने वाले ढंग से बोला-
''अंदर मकान को व्यवस्थित किया गया है। यहां जो एक और शख्स आने वाला है-जो कि हमारा होस्ट होगा
, मतलब कंपनी का प्रतिनिधि-वो यहां एक-दो दिन पहले ही आकर पूरी व्यवस्था कर गया है। राशन वगैरह भी किचन में मिल जायेगा। हम लोगों को यहां तीन दिन बिताने में कोई दिक्कत नहीं होगी। बाहर से बस झाड़-पोंछ इसलिए नहीं करवाई गई है क्योंकि ऐसा करने पर मकान का हॉरर लुक चला जाता।
"
''ये तो आप गलत कह रहे हैं।
"-डॉली गहरी नजरों से मकान को देखते हुए बोली-
''इस मकान को तो सोने में भी जड़वा दो
, तब भी इसका हॉरर लुक नहीं जाने वाला।
"
डोंगरा हंसा।
''वो कंपनी वाले इस मकान को हॉरर फनहाउस बनाना चाहते हैं न
?"-जय बोला।
''हां। वो लोग तो यहां हॉन्टेड थीम पार्क बनाने का काम शुरू भी करने वाले थे। लेकिन इसी बीच लॉकडाउन भी लग गया
, जिसके चलते वे काम शुरू नहीं कर पाए। लेकिन कंपनी वालों का दिमाग भी कम खुन्दकी नहीं है। आखिर इतनी अजीब कंपनी के मालिक हैं।
"
''अजीब तो है।
"-अनुराग ने स्वीकार किया।
''अजीब से याद आया।
"-कहकर डोंगरा ने अपनी कार से एक लोहे का पुराना सा दिखने वाला संदूक
निकाला।
''ये क्या है
?"-जय बोला।
''इस 'आइसोलेशन इवेंट' का एक छोटा-सा ट्रेडीशन।
"
''कैसा ट्रेडीशन
?"
''आप सब अपने मोबाइल ऑफ करके मुझे सौंप दें
, जिससे मैं उन्हें अपनी कार की डिक्की रखकर लॉक कर सकूं। अब ये डिक्की तीन दिन बाद ही खुलेगी और तभी आपको आपके मोबाइल वापस मिल सकेंगें। एक भुतहा मकान में तीन दिन बिताने की इस चुनौती को पूरा करने के दौरान आपके पास बाहरी दुनिया से सम्पर्क करने का कोई जरिया नहीं होगा।
"
''वैसे देखा जाए तो ये एक लाख डॉलर आप लोगों के लिये
'ईजी मनी
' ही साबित होगा। बस
, तीन दिन इस मकान में बिताने हैं
, जिसे दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में से एक माना जाता है
, फिर रकम आप लोगों के एकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगी। इट्स सिम्पल एज दैट!
"
''कई बार
"-राज बोला-
''हद से ज्यादा सिम्पल दिखने वाली चीज उतनी ही ज्यादा मुश्किल साबित होती है।
"
डोंगरा ने राज की ओर देखा
, फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई-
''मिस्टर पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर! आपके लिये ही मुश्किल होगा क्योंकि आपके लिये तो भूत-प्रेतों पर विश्वास करना लाजिमी है। आपका तो प्रोफेशन ही है।
"
''आप नहीं करते भूत-प्रेतों पर विश्वास
?"-राज शांत स्वर में बोला।
''बिल्कुल नहीं करता। घोस्ट्स डोंट एग्जिस्ट्स
"
''ये तो एक फिल्म का नाम है।
"-अनुराग ने चुटकी बजाई-
''मैंने देखी है।
"
''अगर घोस्ट्स एग्जिस्ट नहीं करते
"-राज बोला-
''तो आप ही बताइयेे इस मकान को दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में शामिल करने की क्या वजह है
?"
''मार्केटिंग।
"
''क्या
?"
''बाजार में कोई चीज बेचनी हो
, और उसके लिए ग्राहक न हो
, तो बेस बनाना पड़ता है
, ग्राहक तैयार करने पड़ते हैं। और जब हद से ज्यादा चालाक लोग ये काम करते हैं तो इतने शातिर ढंग से करते हैं कि जिस चीज को कोई खरीदने वाला नहीं था
, उसके पीछे लोग पागल होने लगते हैं। उसका नाम ले-लेकर चिल्लाने लगते हैं। खुद ही उस चीज का ऐसा हौव्वा खड़ा करने लगते हैं कि लोग भागे-भागे उसे लेने आते हैं और न मिल पाए तो मातम मनाने लगते हैं जैसे उनका पता नहीं कितना बड़ा नुकसान हो गया हो।
"
''यहां कौन सी चीज बिक रही है और कौन सी चीज के पीछे लोगों को पागल किया जा रहा है
, स्पष्ट करने की कृपा करेंगें
?"
''भूत-प्रेत। भूत-प्रेत का जबर्दस्त मार्केट तैयार किया गया है पूरी दुनिया में। जबकि ये ऐसी चीज है
, जिससे बच्चे ही डरते हैं। भूत-प्रेत की कपोल-कल्पना पर आज पूरी दुनिया में खरबों रूपये का कारोबार होता है। फिल्मों की कतार लगी है
, किताबें लिखी जा रही हैं
, टीवी पर शोज आ रहे हैं
, थीम पार्क बन रहे हैं-जैसा कि इस मकान को भी बनाया जाने वाला है-और भी पता नहीं क्या-क्या हो रहा है
? मैं भूत-प्रेत पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता और मेरे हिसाब से कोई भी शख्स जिसका दिमागी तवाजन हिला हुआ नहीं होगा
, ऐसी चीज पर विश्वास नहीं करता होगा
, जो होती ही नहीं है। जिसका कोई अस्तित्त्व ही नहीं है।
"
''तो आपके हिसाब से ये मकान सिर्फ इसलिए दुनिया की दस सबसे भुतहा जगहों में शामिल है क्योंकि इसकी मार्केटिंग की गई है
? ऐसा भ्रामक प्रचार-प्रसार किया गया है कि ये मकान भुतहा है
? जबकि ये है ही नहीं
?"
''ये पूरी तरह सच नहीं है।
"-डोंगरा के स्वर में हिचकिचाहट के भाव आ गये।
''फिर सच क्या है
?"
''इस घर का एक लम्बा इतिहास है।
"
''कैसा इतिहास
?"
''बुरी घटनाओं का। भयानक डरावनी घटनाएं। हालांकि मैं उन घटनाओं के बारे में ज्यादा नहीं जानता लेकिन मैंने सुन रखा है कि इस मकान में जो भी रहा
, उसके साथ कुछ न कुछ ऐसी घटनाएं हुईं
, जिसके चलते उन्हें ये जगह छोड़कर जाना पड़ा। हालांकि कुछ तो इतने खुशकिस्मत भी नहीं थे। इस मकान के कई पिछले मालिकों की यहां रहते हुए रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो चुकी है। इस तरह की घटनाएं ही इस घर को भूत बंगले के रूप में प्रचारित होने का एक बड़ा कारण रहीं हैं।
"
''कौन-सी घटनाएं
?"-अनुराग दिलचस्पी लेते हुए बोला-
''कुछ बताइये तो सही
?"
''मैं जरूर बताता।
"-डोंगरा खेदपूर्ण स्वर में बोला-
''लेकिन हॉरर कहानियों में मेरा कभी इंट्रेस्ट नहीं रहा। इसलिए शायद मैं आपको उस ढंग से न बता सकूं
, जिस ढंग से आपको इस घर के भूतग्रस्त होने पर पूरा विश्वास हो जाए। जैसे इस घर में पहले रहने वाले लोगों की किसी घटना-दुर्घटना में मृत्यु
, हत्या वगैरह। मेरी नजर से देखेंगें तो वो घटनाएं दशकों पहले हुई ऐसी अपराधिक घटनाएं ही थीं
, जिनका अपराधी संयोग से पकड़ा नहीं जा सका और लोगों ने उन घटनाओं का कारण भूत-प्रेत को मान लिया। और जहां तक मेरा मानना है भूत-प्रेत से सम्बन्धित कही जाने वाली लगभग सभी घटनाओं के साथ ऐसा ही होता है। कई सालों से तो ये घर खाली ही पड़ा है। इसके भूतग्रस्त होने के कारण लोगों में इसका खौफ इतना ज्यादा है कि कोई यहां रहने की सोच भी नहीं सकता। इसके अलावा ये पास के गांव से थोड़ा आउटसाइड के इलाके में भी पड़ जाता है तो ये भी एक मुख्य वजह है कि कोई यहां नहीं रहना चाहता। लेकिन मैं फिर कहना चाहूंगा कि यहां अगर कुछ दशक पहले किसी का खून हो गया था तो इसका ये मतलब नहीं कि उससे मकान ही हॉन्टेड हो गया। अब इतना लम्बा अरसा बीतने के बाद इस बात को लेकर किसी मकान से डरने की कोई वजह नहीं बनती कि वहां कोई हत्या या हत्याएं हुईं थीं। आखिर हर मकान में कभी न कभी
, कोई न कोई मौत तो हुई होती है। इसका मतलब ये तो नहीं कि हर मकान भुतहा हो जाता है।
"
''शुक्र है
"-राज बोला-
''कि आपने ये नहीं कहा कि हर मकान में कभी न कभी
, कोई न कोई हत्या तो हुई होती है।
"
डोंगरा ने नाराजगी के भाव के साथ राज की ओर देखा।
अनुराग मकान की ओर पलटा और उसकी सीध में दोनों हाथ कमर पर रखकर खड़ा हो गया। उसने उस भुतहा माने जाने वाले मकान पर भरपूर नजर डाली
, फिर एक-एक शब्द पर जोर देते हुए बोला-
''ये मकान तो बहुत ही ज्यादा बदनाम है।
"
''आप कब से यहां केयरटेकर हैं
?"-डॉली ने डोंगरा से पूछा।
''करीब साल भर से। लेकिन मैं दूसरी बार ही यहां आया हूं।
"
''अरे!
"
''ऑनलाइन केयरटेकिंग करता होगा।
"-प्रीति धीमे से बुदबुदाई
, जो कि पास खड़े होने के कारण केवल डॉली को ही सुनाई दिया।
''हां। दरअसल
, कंपनी के निर्देश पर ही मैं यहां आता था। शहर में मेरा मेन बिजनेस दूसरा है। पहली बार मैं यहां तब आया था
, जब कंपनी वालों ने शुरू-शुरू में इस मकान को खरीदा था और मुझे बतौर केयरटेकर नियुक्त किया था। मुझे कहते हुए अजीब लग रहा है लेकिन उस समय इस मकान में कदम रखते हुए मुझे काफी अजीब लगा था। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता लेकिन कुछ तो अजीब था। उस समय मेरी जल्दी से जल्दी यहां से दूर चले जाने की तीव्र इच्छा होने लगी थी। और मुझे स्वीकार करते हुए कोई संकोच नहीं है कि मैं थोड़ा डर भी गया था। लेकिन यहां से लौटने के बाद मुझे इस बात को याद करके काफी हंसी आती थी और शर्मिंदगी भी महसूस होती थी। आखिर एक मकान से डरने की क्या वजह हो सकती है
? शायद यहां जंगल में सूनेपन के माहौल का मेरे दिमाग पर असर हो गया था। मैंने उसी समय सोच लिया था कि दोबारा यहां आऊंगा तो किसी तरह का वहम नहीं पालूंगा। लेकिन मुझे उतने अरसे में दोबारा यहां आने का मौका अब मिला है। कंपनी वालों की ओर से निर्देश था कि जब वो कहें
, तभी मुझे यहां आना है।
"
''ऐसा क्यों
?"-राज बोला।
''ये तो अब कंपनी वाले ही बता सकते हैं। शायद उन्हें यहां अनावश्यक दखल पसंद न हो। या
"-उसने मकान पर नजर मारी-
''वे यहां कुछ करते रहें हों।
"
''इतनी बड़ी प्रॉपर्टी खरीदी और उसे साल भर के लिए यूं ही छोड़ दिया
?"-प्रीति मकान की ओर देखते हुए बोली।
''वैसे केयरटेकर होने के नाते
"-जय मकान की खिड़कियों पर जमी धूल की ओर देखता हुआ बोला-
''आपका फर्ज नहीं बनता था कि इस मकान की थोड़ी झाड़-पोंछ करवा देते
, जिससे ये इंसानों के रहने लायक बन जाता
?"
डोंगरा के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
''डोंट वरी।
"-वो सांत्वना देने वाले ढंग से बोला-
''अंदर मकान को व्यवस्थित किया गया है। यहां जो एक और शख्स आने वाला है-जो कि हमारा होस्ट होगा
, मतलब कंपनी का प्रतिनिधि-वो यहां एक-दो दिन पहले ही आकर पूरी व्यवस्था कर गया है। राशन वगैरह भी किचन में मिल जायेगा। हम लोगों को यहां तीन दिन बिताने में कोई दिक्कत नहीं होगी। बाहर से बस झाड़-पोंछ इसलिए नहीं करवाई गई है क्योंकि ऐसा करने पर मकान का हॉरर लुक चला जाता।
"
''ये तो आप गलत कह रहे हैं।
"-डॉली गहरी नजरों से मकान को देखते हुए बोली-
''इस मकान को तो सोने में भी जड़वा दो
, तब भी इसका हॉरर लुक नहीं जाने वाला।
"
डोंगरा हंसा।
''वो कंपनी वाले इस मकान को हॉरर फनहाउस बनाना चाहते हैं न
?"-जय बोला।
''हां। वो लोग तो यहां हॉन्टेड थीम पार्क बनाने का काम शुरू भी करने वाले थे। लेकिन इसी बीच लॉकडाउन भी लग गया
, जिसके चलते वे काम शुरू नहीं कर पाए। लेकिन कंपनी वालों का दिमाग भी कम खुन्दकी नहीं है। आखिर इतनी अजीब कंपनी के मालिक हैं।
"
''अजीब तो है।
"-अनुराग ने स्वीकार किया।
''अजीब से याद आया।
"-कहकर डोंगरा ने अपनी कार से एक लोहे का पुराना सा दिखने वाला संदूक
निकाला।
''ये क्या है
?"-जय बोला।
''इस 'आइसोलेशन इवेंट' का एक छोटा-सा ट्रेडीशन।
"
''कैसा ट्रेडीशन
?"
''आप सब अपने मोबाइल ऑफ करके मुझे सौंप दें
, जिससे मैं उन्हें अपनी कार की डिक्की रखकर लॉक कर सकूं। अब ये डिक्की तीन दिन बाद ही खुलेगी और तभी आपको आपके मोबाइल वापस मिल सकेंगें। एक भुतहा मकान में तीन दिन बिताने की इस चुनौती को पूरा करने के दौरान आपके पास बाहरी दुनिया से सम्पर्क करने का कोई जरिया नहीं होगा।
"