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प्रीति ने और ताकत लगाकर कैन को खींचा। इस बार कैन बाहर निकल आई।
प्रीति ने राहत की सांस ली। उसने कैन को हिलाकर देखा। पेट्रोल से भरी कैन भारी हो रही थी।
प्रीति के चेहरे पर संतोष की झलक थी।
तभी अचानक कार का दरवाजा भड़ाक की आवाज के साथ बंद हो गया।
प्रीति बुरी तरह चौंकी। उसने पलटकर देखा।
कार का दरवाजा अंदर से बंद हो चुका था।
कैसे...?
तभी उसे महसूस हुआ कि वो कार में अकेली नहीं थी।
ड्राइविंग सीट पर कोई बैठा था।
प्रीति ने डरते-डरते ड्राइविंग सीट की ओर देखा।
वहां वही पम्प अटेंडेंट बैठा था
, जिसकी तस्वीर उसने स्टोर रूम मे मिली उस किताब में मिली अखबार की कटिंग में देखी थी।
जिसके बारे में राज और डॉली ने भी उन्हें बताया था।
प्रीति सीट पर जैसे चिपककर रह गई। उसकी एक झलक ने ही उसके सारे मसामों ने पसीना उगल दिया।
नहीं...नहीं...।
वो कार से निकलकर भाग जाना चाहती थी लेकिन उसे अपने अंदर एक उंगली हिलाने जितनी ताकत नहीं लग रही थी।
तभी उसका ध्यान पैरों के पास हो रही हलचल पर गया।
कैन नीचे गिरी हुई थी और उसका ढक्कन भी खुल गया था
, जिससे पेट्रोल की मोटी धार निकलकर कार के फर्श को भिगो रही थी।
वो जैसे जड़वत-सी होकर कैन से बहते पेट्रोल को देखती रह गई।
देखते ही देखते उसके पैर एडिय़ों तक पेट्रोल में डूबने लगे।
कितना पेट्रोल था उस कैन में ?
प्रीति ने डरते-डरते सामने ड्राइविंग सीट पर बैठे उस पम्प अटेडेंट की ओर देखा।
उसके होंठों पर एक भयानक मुस्कान थी और हाथ में एक जलता हुआ लाइटर!
उसने लाइटर पिछली सीट वाले हिस्से की ओर उछाल दिया।
कार के अंदर का हिस्सा आग की लपटों में घिर गया।
प्रीति की चीखें रात के भयावह सन्नाटे को चीरती चली गईं।
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प्रीति ने राहत की सांस ली। उसने कैन को हिलाकर देखा। पेट्रोल से भरी कैन भारी हो रही थी।
प्रीति के चेहरे पर संतोष की झलक थी।
तभी अचानक कार का दरवाजा भड़ाक की आवाज के साथ बंद हो गया।
प्रीति बुरी तरह चौंकी। उसने पलटकर देखा।
कार का दरवाजा अंदर से बंद हो चुका था।
कैसे...?
तभी उसे महसूस हुआ कि वो कार में अकेली नहीं थी।
ड्राइविंग सीट पर कोई बैठा था।
प्रीति ने डरते-डरते ड्राइविंग सीट की ओर देखा।
वहां वही पम्प अटेंडेंट बैठा था
, जिसकी तस्वीर उसने स्टोर रूम मे मिली उस किताब में मिली अखबार की कटिंग में देखी थी।
जिसके बारे में राज और डॉली ने भी उन्हें बताया था।
प्रीति सीट पर जैसे चिपककर रह गई। उसकी एक झलक ने ही उसके सारे मसामों ने पसीना उगल दिया।
नहीं...नहीं...।
वो कार से निकलकर भाग जाना चाहती थी लेकिन उसे अपने अंदर एक उंगली हिलाने जितनी ताकत नहीं लग रही थी।
तभी उसका ध्यान पैरों के पास हो रही हलचल पर गया।
कैन नीचे गिरी हुई थी और उसका ढक्कन भी खुल गया था
, जिससे पेट्रोल की मोटी धार निकलकर कार के फर्श को भिगो रही थी।
वो जैसे जड़वत-सी होकर कैन से बहते पेट्रोल को देखती रह गई।
देखते ही देखते उसके पैर एडिय़ों तक पेट्रोल में डूबने लगे।
कितना पेट्रोल था उस कैन में ?
प्रीति ने डरते-डरते सामने ड्राइविंग सीट पर बैठे उस पम्प अटेडेंट की ओर देखा।
उसके होंठों पर एक भयानक मुस्कान थी और हाथ में एक जलता हुआ लाइटर!
उसने लाइटर पिछली सीट वाले हिस्से की ओर उछाल दिया।
कार के अंदर का हिस्सा आग की लपटों में घिर गया।
प्रीति की चीखें रात के भयावह सन्नाटे को चीरती चली गईं।
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