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सभी उस कब्र के पास पहुंचे। वो बाकी कब्रों से थोड़ी बड़ी थी।
उस कब्र का टूम्बस्टोन भी काफी बड़े आकार का था। उस पर पत्थर पर ही खोदकर लिखा गया था-
हेयर लाइज रॉबर्ट कीन
हू लिव्ड अपॉन ह्यूमन ब्लड
(यहां जेम्स कीन सोया हुआ है। जो इंसानी खून पर जीवित रहा।)
''ओ माई गॉड!
"-मोहिनी ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।
सिर्फ मोहिनी ही नहीं
, कब्र पर लिखी इबारत पढ़कर वहां उपस्थित हर शख्स स्तब्ध रह गया।
''शायद हमें यहां नहीं आना चाहिए था।
"-राज गम्भीर स्वर में बोला।
कोई कुछ नहीं बोला।
तभी बादलों की गडग़ड़ाहट ने सबका ध्यान आकृष्ट किया। सबकी नजरें ऊपर की ओर उठ गईं। यकायक आसमान में इतने घने काले बादल घिर आए थे कि दिन के समय ही रात जैसा अहसास होने लगा था।
वे सब लोग कब्रिस्तान से बाहर निकले और वापस उसी मकान की ओर बढ़ गए।
बारिश की हडबडी में किसी ने किसी ने कब्रिस्तान का गेट बंद करने की ओर ध्यान नहीं दिया।
कब्रिस्तान से वापस लौटते समय जब वे लोग पेड़ों के बीच से गुजर रहे थे तो डॉली एक जगह ठिठक गई।
उसे वहां रूकते देखकर डोंगरा भी ठिठक गया हालांकि बाकी लोग आगे थे इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया।
डॉली गौर से जमीन के उस हिस्से को देख रही थी।
वहां जमीन पर हर जगह घास थी लेकिन जमीन का वो हिस्सा घासविहीन था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था
, जैसे वहां हाल ही में खुदाई करके फिर मिट्टी पाट दी गई हो।
डॉली ने डोंगरा की ओर देखा।
डोंगरा के होंठों पर मुस्कान आ गई। उसने स्वीकृति में सिर हिलाया।
''ओह!
"-डॉली के मुंह से निकला।
''तीन दिन बाद।
"-कहकर डोंगरा उसे अपने पीछे आने का इशारा करते हुए बाकी लोगों के साथ हो लिया।
डॉली ने भी एक नजर जमीन के उस हिस्से पर डाली
, फिर तेजी से चलते हुए बाकी सबके साथ हो ली।
जब तक वे घर के अंदर पहुंचे
, तब तक बाहर जोरदार बारिश शुरू हो चुकी थी।
वे लोग बाहरी कमरे में ही एक साथ बैठे
, जिसे
'मीटिंग रूम
' का नाम दिया गया था।
उस समय उनके बीच चर्चा का हॉट टॉपिक उनकी हालिया खोज वो पुराना कब्रिस्तान ही था।
''इतनी वीरान जगह में कब्रिस्तान होना अजीब नहीं है
?"-प्रीति बोली।
''वो कब्रिस्तान अभी का नहीं है।
"-अनुराग बोला-
''काफी पुराना है। उस समय यहां लोग रहते होंगें। आसपास कोई बस्ती वगैरह होगी।
"
''लोग रहते थे
"-प्रीति अनुराग की ओर घूमी-
''तो चले क्यों गए
?"
''क्या पता क्यों चले गए
?"-अनुराग ने कंधे उचका दिए-
''होगी कोई वजह। मैंने यहां का इतिहास जानने का ठेका थोड़े ही ले रखा है।
"
''लेकिन उस कब्रिस्तान को ढूंढने का ठेका तो लिया था।
"-मोहिनी नाराजगी भरे स्वर में बोली।
''कम ऑन
, मोहिनी। छोटी सी बात का बतंगड़ मत बनाओ।
"
''क्या मतलब छोटी-सी बात
? जब हमसे साफ-साफ कहा गया था कि हमें जंगल में नहीं जाना है
, यहीं इसी मकान के दायरे में रहना है तो तुम्हें जंगल में जाने की क्या जरूरत थी
? न तुम वहां जाते और न हमें वहां कब्रिस्तान होने का पता चलता।
"
''तुम कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड हो रही हो। वो एक कब्रिस्तान ही तो है। वहां से कोई हमें खाने नहीं आ रहा है।
"
मोहिनी ने गुस्से में फिर कुछ कहने के लिए मुंह खोला लेकिन फिर सिर को इनकार में हिलाते हुए चुप ही रही।
''वैसे मुझसे पूछो तो
"-जय बोला-
''उस
'कॉफिन मैन
' के सामने तो वो कब्रिस्तान बिल्कुल भी अजीब नहीं है।
"
''ये तो बिल्कुल सही बात है।
"-अनुराग बोला-
''बहुत दिमाग खराब किया उसने कल रात। मन तो कर रहा था उसे सबक सिखा ही दूं...।
"
''तुम उसे सबक सिखाते
?"-मोहिनी उपहासपूर्ण स्वर में बोली-
''उसे ताबूत से निकलते देखकर सबसे पहले तो तुम्हारा चेहरा ही फक्क पड़ गया था।
"
''बकवास मत करो
"-अनुराग झुंझलाया-
''वो एकदम से जिस तरह वो ताबूत से बाहर निकला
, उससे मैं बस थोड़ा चौंक गया था।
"
''ही ही ही।
"
''और वैसे भी तुमसे ज्यादा ही लम्बा था वो।
"-प्रीति भी मोहिनी की साइड लेते हुए बोली।
''लम्बा होने से कुछ नहीं होता। वो ठण्डे-ठण्डे बात कर रहा था इसलिए बर्दाश्त कर गया। अगर हम लोगों को टच वगैरह करने की कोशिश करता तो उसकी दुर्गति कर देनी थी मैंने।
"
''वो तो हमारी सुरक्षा के बारे में ही बात कर रहा था।
"-राज सोचपूर्ण स्वर में बोला।
''क्या मतलब
?"-अनुराग ने चौंककर उसकी ओर देखा।
''उसने हमें यहीं रहने के लिए कहा था। जंगल में जाने से मना किया था।
"
''फिर वही बात। यार
, चले भी गए तो कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा
?"
राज ने जवाब में कुछ नहीं कहा। वो किसी सोच में डूबा लग रहा था।
''कब्रिस्तान में हमें जो बच्चे की हंसी सुनाई दी थी
"-जय राज से बोला-
''उसी के बारे में सोच रहे हो न
?"
''हां।
"-राज ने स्वीकृति में सिर हिलाया-
''पहले वो बच्चे का हंसना
, फिर एक बच्चे की कब्र का मिलना...।
"
''छोड़ो यार ये सब बातें!
"-अनुराग बोला-
''अब तो वापस लौट आए न। अब नहीं जाएंगें उस कब्रिस्तान में। ठीक है
?"
कोई कुछ नहीं बोला।
''केयरटेकर साहब दिखाई नहीं दे रहे।
"-अचानक अनुराग का ध्यान इस बात की ओर गया कि डोंगरा उनके साथ नहीं था।
''वो बाहर गए हैं।
"-मोहिनी बोली।
''अरे! मैंने ध्यान नहीं दिया।
"
तभी दरवाजे पर डोंगरा नजर आया। बारिश से बचने के लिए उसने एक हाथ में छतरी पकड़ रखी थी
, जिसके किनारों से पानी की बूंदें टपक रहीं थीं। दूसरे हाथ में उसने एक संदूक पकड़ा हुआ था।
''सन्दूक। सन्दूक। सन्दूक।
"-अनुराग ऐसे बोला
, जैसे कविता पढ़ रहा हो-
''आखिर कितने सन्दूक हैं आपके पास
?"
उस कब्र का टूम्बस्टोन भी काफी बड़े आकार का था। उस पर पत्थर पर ही खोदकर लिखा गया था-
हेयर लाइज रॉबर्ट कीन
हू लिव्ड अपॉन ह्यूमन ब्लड
(यहां जेम्स कीन सोया हुआ है। जो इंसानी खून पर जीवित रहा।)
''ओ माई गॉड!
"-मोहिनी ने अपने मुंह पर हाथ रख लिया।
सिर्फ मोहिनी ही नहीं
, कब्र पर लिखी इबारत पढ़कर वहां उपस्थित हर शख्स स्तब्ध रह गया।
''शायद हमें यहां नहीं आना चाहिए था।
"-राज गम्भीर स्वर में बोला।
कोई कुछ नहीं बोला।
तभी बादलों की गडग़ड़ाहट ने सबका ध्यान आकृष्ट किया। सबकी नजरें ऊपर की ओर उठ गईं। यकायक आसमान में इतने घने काले बादल घिर आए थे कि दिन के समय ही रात जैसा अहसास होने लगा था।
वे सब लोग कब्रिस्तान से बाहर निकले और वापस उसी मकान की ओर बढ़ गए।
बारिश की हडबडी में किसी ने किसी ने कब्रिस्तान का गेट बंद करने की ओर ध्यान नहीं दिया।
कब्रिस्तान से वापस लौटते समय जब वे लोग पेड़ों के बीच से गुजर रहे थे तो डॉली एक जगह ठिठक गई।
उसे वहां रूकते देखकर डोंगरा भी ठिठक गया हालांकि बाकी लोग आगे थे इसलिए किसी ने ध्यान नहीं दिया।
डॉली गौर से जमीन के उस हिस्से को देख रही थी।
वहां जमीन पर हर जगह घास थी लेकिन जमीन का वो हिस्सा घासविहीन था। उसे देखकर ऐसा लग रहा था
, जैसे वहां हाल ही में खुदाई करके फिर मिट्टी पाट दी गई हो।
डॉली ने डोंगरा की ओर देखा।
डोंगरा के होंठों पर मुस्कान आ गई। उसने स्वीकृति में सिर हिलाया।
''ओह!
"-डॉली के मुंह से निकला।
''तीन दिन बाद।
"-कहकर डोंगरा उसे अपने पीछे आने का इशारा करते हुए बाकी लोगों के साथ हो लिया।
डॉली ने भी एक नजर जमीन के उस हिस्से पर डाली
, फिर तेजी से चलते हुए बाकी सबके साथ हो ली।
जब तक वे घर के अंदर पहुंचे
, तब तक बाहर जोरदार बारिश शुरू हो चुकी थी।
वे लोग बाहरी कमरे में ही एक साथ बैठे
, जिसे
'मीटिंग रूम
' का नाम दिया गया था।
उस समय उनके बीच चर्चा का हॉट टॉपिक उनकी हालिया खोज वो पुराना कब्रिस्तान ही था।
''इतनी वीरान जगह में कब्रिस्तान होना अजीब नहीं है
?"-प्रीति बोली।
''वो कब्रिस्तान अभी का नहीं है।
"-अनुराग बोला-
''काफी पुराना है। उस समय यहां लोग रहते होंगें। आसपास कोई बस्ती वगैरह होगी।
"
''लोग रहते थे
"-प्रीति अनुराग की ओर घूमी-
''तो चले क्यों गए
?"
''क्या पता क्यों चले गए
?"-अनुराग ने कंधे उचका दिए-
''होगी कोई वजह। मैंने यहां का इतिहास जानने का ठेका थोड़े ही ले रखा है।
"
''लेकिन उस कब्रिस्तान को ढूंढने का ठेका तो लिया था।
"-मोहिनी नाराजगी भरे स्वर में बोली।
''कम ऑन
, मोहिनी। छोटी सी बात का बतंगड़ मत बनाओ।
"
''क्या मतलब छोटी-सी बात
? जब हमसे साफ-साफ कहा गया था कि हमें जंगल में नहीं जाना है
, यहीं इसी मकान के दायरे में रहना है तो तुम्हें जंगल में जाने की क्या जरूरत थी
? न तुम वहां जाते और न हमें वहां कब्रिस्तान होने का पता चलता।
"
''तुम कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड हो रही हो। वो एक कब्रिस्तान ही तो है। वहां से कोई हमें खाने नहीं आ रहा है।
"
मोहिनी ने गुस्से में फिर कुछ कहने के लिए मुंह खोला लेकिन फिर सिर को इनकार में हिलाते हुए चुप ही रही।
''वैसे मुझसे पूछो तो
"-जय बोला-
''उस
'कॉफिन मैन
' के सामने तो वो कब्रिस्तान बिल्कुल भी अजीब नहीं है।
"
''ये तो बिल्कुल सही बात है।
"-अनुराग बोला-
''बहुत दिमाग खराब किया उसने कल रात। मन तो कर रहा था उसे सबक सिखा ही दूं...।
"
''तुम उसे सबक सिखाते
?"-मोहिनी उपहासपूर्ण स्वर में बोली-
''उसे ताबूत से निकलते देखकर सबसे पहले तो तुम्हारा चेहरा ही फक्क पड़ गया था।
"
''बकवास मत करो
"-अनुराग झुंझलाया-
''वो एकदम से जिस तरह वो ताबूत से बाहर निकला
, उससे मैं बस थोड़ा चौंक गया था।
"
''ही ही ही।
"
''और वैसे भी तुमसे ज्यादा ही लम्बा था वो।
"-प्रीति भी मोहिनी की साइड लेते हुए बोली।
''लम्बा होने से कुछ नहीं होता। वो ठण्डे-ठण्डे बात कर रहा था इसलिए बर्दाश्त कर गया। अगर हम लोगों को टच वगैरह करने की कोशिश करता तो उसकी दुर्गति कर देनी थी मैंने।
"
''वो तो हमारी सुरक्षा के बारे में ही बात कर रहा था।
"-राज सोचपूर्ण स्वर में बोला।
''क्या मतलब
?"-अनुराग ने चौंककर उसकी ओर देखा।
''उसने हमें यहीं रहने के लिए कहा था। जंगल में जाने से मना किया था।
"
''फिर वही बात। यार
, चले भी गए तो कौन-सा पहाड़ टूट पड़ा
?"
राज ने जवाब में कुछ नहीं कहा। वो किसी सोच में डूबा लग रहा था।
''कब्रिस्तान में हमें जो बच्चे की हंसी सुनाई दी थी
"-जय राज से बोला-
''उसी के बारे में सोच रहे हो न
?"
''हां।
"-राज ने स्वीकृति में सिर हिलाया-
''पहले वो बच्चे का हंसना
, फिर एक बच्चे की कब्र का मिलना...।
"
''छोड़ो यार ये सब बातें!
"-अनुराग बोला-
''अब तो वापस लौट आए न। अब नहीं जाएंगें उस कब्रिस्तान में। ठीक है
?"
कोई कुछ नहीं बोला।
''केयरटेकर साहब दिखाई नहीं दे रहे।
"-अचानक अनुराग का ध्यान इस बात की ओर गया कि डोंगरा उनके साथ नहीं था।
''वो बाहर गए हैं।
"-मोहिनी बोली।
''अरे! मैंने ध्यान नहीं दिया।
"
तभी दरवाजे पर डोंगरा नजर आया। बारिश से बचने के लिए उसने एक हाथ में छतरी पकड़ रखी थी
, जिसके किनारों से पानी की बूंदें टपक रहीं थीं। दूसरे हाथ में उसने एक संदूक पकड़ा हुआ था।
''सन्दूक। सन्दूक। सन्दूक।
"-अनुराग ऐसे बोला
, जैसे कविता पढ़ रहा हो-
''आखिर कितने सन्दूक हैं आपके पास
?"