• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

रंगीला लाला और ठरकी सेवक

शंकर ने प्यार से उसके होंठों को चूमा और उसकी चुचियों को मसल्ते हुए कहा – पता नही मुझे क्या हो जाता है, जब भी लंड चूत के मुँह पर पहुँचता है, फिर सबर नही होता मुझसे…!

सुप्रिया ने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा – कोई बात नही, अब थोड़ा आराम आराम से शुरू करो… आहह… कितना कस गया है…, बाहर भी नही खिंच रहा…!

शंकर – हां मेरी जान, पता नही इतने दिनो बाद भी तुम्हारी चूत मेरे लंड को बुरी तरह से जकड लेती है.., बहुत मज़ा आता है मुझे तुम्हें चोदने में…

तो फिर चोदो मेरे राजा… मेरे शंकर…, फाड़ दो अपनी रानी की चूत को, बना लो उसे अपनी रांड़…, आअहह… ऐसे ही ..

उन दोनो की चुदाई का लाइव शो देख कर श्याम की हालत बद से बदतर होती जा रही थी, उसे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नही हो पा रहा था,

किसी गुड़िया जैसी दिखने वाली उसकी पत्नी, शंकर जैसे बलिष्ठ आदमी के सॉट जैसे लंड को इतनी बुरी तरह से कैसे झेल पा रही है…

यही नही वो उसे और ज़ोर्से पेलने के लिए उकसाती भी जा रही थी…, श्याम को अपनी गान्ड में खुजली बढ़ती हुई लगने लगी, और वो अपनी उंगलियों को तेज़ी से अपनी गान्ड में अंदर बाहर करने लगा…!

अंदर सुप्रिया एक बार झड चुकी थी, लेकिन शंकर के धक्कों में कोई कमी नही आई.., फिर सुप्रिया ने कहा –

अब में उपर आती हूँ राजा, ऐसे थक गयी, तो शंकर ने खुद लेटकर उसे अपनी उपर बिठा लिया.., वो अपनी गान्ड रख कर शंकर के लंड पर बैठ गयी..,

धीरे-धीरे कूदने से शंकर का मज़ा खराब हो रहा था, सो उसने उसकी गान्ड के नीचे अपने हाथ लगाकर उसे हवा में टाँग लिए, और खुद नीचे से कमर उचका-उचककर उसे तेज़ी से चोदने लगा….!

धक्कों की गति के आगे सुप्रिया बिल-बिला उठी, वो आअहह…उउउहह…सस्सिईइ…आआयईी.. जैसे शब्द अपने मुँह से निकाल कर उसके उपर झुक गयी, और शंकर के होंठों को चूस्ते हुए चुदाई का भरपूर आनंद उठाने लगी…,

करीब आधे घंटे की दमदार चुदाई के बाद शंकर ने अपना कुलाबा खोला और सुप्रिया की ओखली को लबालब भर दिया.

वो उसके उपर पड़ी बुरी तरह से हाँफ रही थी…,

वो दोनो ही एक दूसरे की बाहों में लिपटे आँखें बंद करके कुछ पलों पहले आए तूफान के बाद की शांति को महसूस कर रहे थे, लंड अभी भी चूत में ही था..

तभी सुप्रिया को अपनी पीठ पर श्याम के हाथ का स्पर्श हुआ…! वो कुन्मूनाकर बोली, सोने दो ना श्याम, छेड़ो मत, जाकर दूसरे रूम में सो जाओ…!

श्याम – मे तो तुम दोनो को ग्रीट करने आया था, क्या दमदार सेक्स किया है तुम दोनो ने, वाकाई शंकर एक अच्छा पार्ट्नर है…,

सुप्रिया ने ऐसे ही लेटे हुए कहा – ठीक है अब जाओ यहाँ से साला गान्डु कहीं का खुद से कुछ हो नही पाता है,..

उसको नाराज़ होते देख कर श्याम की हवा सरक गयी, वो चुपचाप वहाँ से दूसरे रूम में सोने चला गया……….!

दूसरी सुवह ब्रेक फास्ट के बाद प्रिया वहाँ आ गई, श्याम और उसके डेडी दोनो अपने शो रूम पर चले गये थे…

उनका शहर में सराफ़ा का बहुत बड़ा शो रूम था, और पास ही एक आभूषण बनाने की फॅक्टरी भी खुद की ही थी….!

प्रिया ने आते ही शंकर के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा – और हीरो, नयी जगह पर रात कैसी गुज़री, ठीक से नींद आई या नही…!

शंकर ने मुस्करा कर हां में अपनी गर्दन हिलाई, प्रिया आगे बोली – तो चलो मेरे साथ, आज मे तुम्हें शहर घुमाती हूँ, साथ ही कुछ अच्छे से कपड़े भी ले लेंगे, तू चलेगी सुप्रिया…?

सुप्रिया रात भर चुदने के बाद और सुवह टाइम पर उठने की वजह से कुछ थकि-थकि सी लग रही थी, सो उसने जाने से मना कर दिया..,

उसके मना करने के बाद प्रिया शंकर को अपने साथ शहर घुमाने चल दी…!

वो खुद कार ड्राइव कर रही थी, उसने ड्राइवर को भी अपने साथ नही लिया, शंकर को बगल की सीट पर बिठा कर उसने वहाँ से गाड़ी आगे बढ़ा दी,

शंकर की नज़र गाड़ी ड्राइव करती प्रिया पर जमी हुई थी, शादी के इतने सालों के बाद भी प्रिया बहुत खूबसूरत लगती थी.., कोई भी ये नही कह सकता था कि वो एक बच्ची की माँ भी हो सकती है..,

पिंक सेटेन सिल्क सारी में उसका 34-30-36 का मादक दूध जैसा गोरा बदन मुर्दे में भी जान डालने की कुब्बत रखता था..,

गाड़ी ड्राइव करते हुए जब उसने शंकर की तरफ देखा, और उसे उसीको घूरते देख कर उसके चेहरे पर स्माइल आ गई, वो सामने देखते हुए बोली-

ऐसे क्या देख रहे हो शंकर…?\

शनकर – मे देख रहा था, कि गाओं में पली-बढ़ी एक साधारण सी लड़की शहर में आकर क्या फ़र्राटे से गाड़ी चलाती है…! ये कब सीखी आपने..?

प्रिया सोखि से बोली – तुम्हें सीखनी है..?

शंकर – आपको चलाते देखकर मेरी भी इच्छा हुई, लेकिन मे सीख कर करूँगा भी क्या, कोन्सि मेरे पास गाड़ी आने वाली है जिसे चलाउंगा…!

प्रिया – समय बदलते देर नही लगती शंकर, क्या मेने कभी सोचा था कि एक दिन मे अपनी खुद की गाड़ी चलाउंगी, वो तो शहर में शादी हो गयी इसलिए सीखनी पड़ी…!

खैर सीखनी हो तो बताना मे सिखा दूँगी तुम्हें, फिलहाल सबसे पहले तो हम लोग किसी बड़े से कपड़े के शोरुम चलते हैं, सबसे पहला काम तुम्हारा ये हुलिया चेंज करना है…!

शंकर – क्यों, मेरे हुलिए में क्या खराबी है..?

प्रिया ने उसकी बात का कोई जबाब नही दिया, बस मुस्कराते हुए गाड़ी ड्राइव करती रही, फिर कुछ देर बाद उसने एक रेडीमेंट गारमेंट के बड़े से शोरुम के आयेज जाकर अपनी गाड़ी रोक दी….!

प्रिया उसका हाथ पकड़ कर शॉपिंग सेंटर के अंदर ले गयी और एक ऐसे काउंटर पर जाकर खड़ा कर दिया, जहाँ बड़े-बड़े घरों के कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के कपड़े पहनते हैं…!

उसने अपनी पसंद के 5-6 ड्रेस शंकर के साइज़ के सेलेक्ट किए और उसको थामकर सेल्समन से पुछा – चेंजिंग रूम किधर है…

उसने एक तरफ को इशारा किया, वो उसे लेकर चेंजिंग रूम की तरफ बढ़ गयी…!

शंकर बेचारा क़िस्सी कट्पुतली की तरह उसके इशारों पर नाच रहा था, प्रिया उस’से उमर में लगभग 7-8 साल बड़ी थी इसलिए वो उसकी बहुत इज़्ज़त करता था…!

चेंजिंग रूम में जाकर उसने शंकर को कहा – ये अपने जोकरों वाले कपड़े उतरो, और इन कपड़ों को एक एक करके पहन कर देखो, बड़े छोटे तो नही हैं…!

शंकर किसी महान चूतिया इंसान की तरह उसके चेहरे को देखने लगा, उसे यूँ देखते हुए पाकर वो घुड़क कर बोली – ऐसे क्यों देख रहे हो मुझे, जल्दी से उतारो…!

शंकर – व.वो..वउूओ… मे..मतलब वो.. आपके सामने कैसे…?

प्रिया मुस्कराते हुए बोली – क्यों अंडरवेर नही पहनते हो क्या..? चलो भी, अब ज़्यादा नखरे नही, वरना मे तुम्हारे ये कपड़े फाड़ दूँगी हां…!

प्रिया ने ये बात ऐसे अधिकार भरे शब्दों में कही, की शंकर के हाथ स्वतः ही अपनी कमीज़ के बटनों पर चलने लगे…!

ये पॅंट भी.., शर्ट उतारने के बाद उसे रुकता देख प्रिया ने कड़क आवाज़ में कहा…, मरता क्या ना करता, बेचारे को उतारना ही पड़ा…!

अगले पल में वो मात्र अंडरवेर में था.., प्रिया की नज़र उसके गतीले बदन से चिपकी रह गयी, इतनी कम उम्र में क्या सजीला और कसा हुआ बदन था शंकर का,

 
उसके चौड़े चक्ले सीने पर अभी रौन्ये आना शुरू हो रहे थे, एक दम सपाट पेट जिसपर कसरत के कारण एबेस बने हुए थे, पतली सी कमर, मोटी लेकिन कसी हुई जांघें, बाजुओं के मसल्स की मछलिया,

ऐसे सजीले गोरे-चिट्टे नौजवान को इस हालत में देखकर तो इंद्रालोक की अप्सराए भी उसके कदमों में आ गिरें, प्रिया तो फिर भी पृथ्वी लोक की एक साधारण नारी थी…!

वो उसकी तरफ किसी चुंबक की तरह खिचती चली गयी, और उसके चौड़े सीने पर अपने मुलायम मक्खमली हाथों से सहलाते हुए बोली –

आअहह….क्या सुंदर स्वरूप हैं तुम्हारा शंकर, कोई भी औरत इसे देखकर अपने आप पर कंट्रोल नही कर पाएगी… ये कहकर उसने उसके सीने पर अपने लाल सुर्ख लाली लगे हुए होंठ रख दिए…!

शंकर का पूरा शरीर किसी बिजली के तेज झटके की तरह झन-झना गया, वो पीछे हट’ते हुए बोला – दीदी, ये आप क्या कर रहीं हैं..? मे आपका…..

वो अपना वाक्य पूरा नही कर पाया, उससे पहले प्रिया ने अपनी उंगली उसके होंठों पर टिका दी…!

उसके बदन से लिपट कर बोली – मेरी नज़र में अब तुम पहले वाले शंकर नही हो, एक बार मुझे अपनी मजबूत बाहों में कस लो शंकर,

तुम्हारे बदन की गर्मी से मे पिघल रही हूँ, मुझे संभाल लो प्लीज़…!

शंकर ने उसके कंधे पकड़ कर अपने से अलग करने की कोशिश की लेकिन वो उससे किसी जोंक की तरह चिपक गयी, फिर भी वो कोशिश करते हुए बोला –

दीदी प्लीज़ ऐसा मत करिए, मे आपकी बहुत इज़्ज़त करता हूँ, आपके साथ वो नही कर सकता जो आप चाहती हैं…!

वो उसके बदन से चिपके हुए ही बोली – क्यों मे तुम्हें अच्छी नही लगती…?

एक भरपूर जवान और खूबसूरत औरत इस तरह किसी नये जवान लौन्डे से चिपक जाए, वो बेचारा कितनी देर तक अपने आप पर कंट्रोल कर पाएगा,

शंकर भी उसके मादक बदन की महक से अपने आप पर कंट्रोल करने में असहज महसूस करने लगा, उसका लंड अंडरवेर के अंदर सिर उठाने लगा,

जिसका एहसास प्रिया ने अपने पेट पर किया क्योंकि वो हाइट में शंकर के मुक़ाबले बहुत छोटी थी…, भले ही वो हील्स वाले संडले पहने थी…!

वो उस’से और चिपकती हुई बोली – बताओ शंकर मे तुम्हें अच्छी नही लगती..? ये कहकर वो उसकी तरफ देखने लगी…!

शंकर उसकी आँखों में देख कर बोला – आप तो बहुत सुंदर हैं किसी परी की तरह लेकिन दीदी….

उसकी बात बीच में ही काटकर वो बोली – लेकिन वेकीन छोड़ो, मुझे अपनी बाहों में भरकर मुझे प्यार करो शंकर…

आख़िरकार शंकर को हथियार डालने ही पड़े और उसके हाथ उसकी कमर पर कस गये…, उसके मुलायम मखमली पीछे को उभरे हुए कुल्हों पर कसते ही प्रिया तड़प उठी….!

आअहह…शंकर…, कराह भरते हुए उसने उचक कर उसके होंठों को चूम लिया…, उसके लंड के उभार को अपनी कमर के नीचे फील करके वो गन-गना उठी..!

शंकर का समर्पण जान वो मन ही मन खुश हो गयी, और उस’से अलग होकर बोली

– अब जल्दी से ये कपड़े ट्राइ करके देखो, हमें देर हो रही है, बहुत सारे काम हैं आज…!

15-20 मिनिट के बाद प्रिया की गाड़ी फिर से सड़कों पर दौड़ रही थी, लेकिन अब उसकी बगल में जो शंकर बैठा था, वो पहले वाला शंकर नही था,

वो इन नये मॉडर्न कपड़ों में वेदप्रकाश शर्मा के नोबल का कॅरक्टर विकास जैसा दिखाई दे रहा था.., बोले तो सिलसिला का अमिताभ बच्चन…!

उसके चेहरे पर अपने नये रूप को लेकर जो खुशी थी वो साफ-साफ दिखाई दे रही थी, वहीं प्रिया बीच-बीच में उसे ऐसी चाहत भरी नज़रों से देखती,

मानो मौका लगते ही वो उसे चट कर जाएगी..! उसके चेहरे की खुशी इस समय देखने लायक थी.., उसे किसी जगह पहुँचने की बहुत जल्दी थी, इसलिए उसकी गाड़ी की स्पीड इस समय काफ़ी तेज थी…!

अगले 15-20 मिनिट में उसकी गाड़ी एक शानदार 5 स्टार होटेल के पोर्च में खड़ी थी, वो फ़ौरन गाड़ी से नीचे आई,

उसको देखते ही, मेन गेट पर खड़ा दरबान लपक कर उसके पास आया और अदब से झुक कर उसका अभिवादन किया, उसने अपने सिर को हल्का सा झटका देकर उसका अभिवादन स्वीकार करते हुए बोली – गाड़ी पार्क करवाओ…

फिर उसने उसके जबाब का भी इंतेज़ार नही किया, और शंकर का हाथ थामकर वो उसे अंदर ले गयी…!

सामने एक बड़े से शानदार काउंटर के पीछे बैठी एक निहायत खूबसूरत लड़की जो इस समय एक कसी हुई वाइट शर्ट जिसका एक बटन खुला हुआ था,

जिसमें से उसकी कसे हुए दूधिया उभारों के बीच की घाटी अपनी छटा बिखेर रही थी…

नीचे बेहद कसी हुई पर्पल कलर की स्कर्ट जो सिर्फ़ उसकी आधी जांघों तक ही आ रही थी, कसे हुए सुडौल कूल्हे मानो उस स्कर्ट को फाड़कर निकलने ही वाले हों…,

एकटक शंकर की नज़र उसकी खूबसूरती में अटक गयी, जिसे ताडकर प्रिया मुस्कुरा उठी, तभी वो लड़की अपनी जगह से खड़ी होती हुई सिर को झुका कर बोली – गुड मॉर्निंग मॅम, वेलकम सर..

प्रिया ने भी अपना सिर झटक कर मुस्कराते हुए कहा – मॉर्निंग लीना हाउ आर यू..?

लीना उसी सादगी के साथ बोली – आइ आम फाइन माँ थॅंक यू, ये कहते हुए उसने तिर्छि नज़र शंकर पर डाली…,

वो भी उसकी पर्सनलटी से प्रभावित हुए बिना नही रह पाई…, इस’से पहले की वो कुछ और बोले, तभी वहाँ दौड़ते हुए होटेल का मॅनेजर आया,

वो प्रिया के सामने अपने दोनो हाथ आगे बाँध कर खड़ा हो गया, प्रिया ने उसे कहा – मिस्टर. वाड्रा, हमारा रूम तैयार करवाओ,

कुछ देर हमें यहाँ रुकना है तबतक हम एक राउंड लेकर आते हैं, आओ शंकर…!

अपना नाम पुकारे जाने पर शंकर की तंद्रा भंग हुई, वरना वो अब तक प्रिया के यहाँ रुआब को देख कर, लोगों के उसके प्रति आदर को देखकर अपने आप को बहुत बौना सा महसूस कर रहा था…!

वो फ़ौरन उसके पीछे हो लिया, 30 मिनिट वो होटेल का राउंड लेती रही, उसके बाद वो जिस कमरे में एंटर हुई, उसे देख कर शंकर की आँखें फटी की फटी रह गयी...

वो तो अभी तक श्याम और सुप्रिया के रूम को ही सबसे खूबसूरत कमरा मान रहा था, लेकिन ये… रूम कहना ग़लत होगा, ये तो किसी राजमहल का एक हिस्सा नज़र आ रहा था…!

वो किनकर्तव्याबिमुड सा उसे चारों तरफ घूम-घूमकर उसे देख रहा था, तभी प्रिया ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोली –

क्या देख रहे हो शंकर प्यारे, ये रूम ही नही समुचा होटेल ही मेरा अपना है,

शंकर ने चोन्क्ते हुए कहा – क्या, सच में दीदी ये सब आपका अपना है…?

प्रिया उसके बेहद नज़दीक जाकर लगभग उसके साथ सॅटकर खड़ी हो गयी, उसने थोड़ा उचक कर शंकर के होंठों को चूम लिया, और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोली –

ये तो मेरी प्रॉपर्टी का एक छोटा सा हिस्सा है शंकर लेकिन जबसे तुमने मेरी जान बचाई है, उस दिन तुम्हारी मर्दानगी देखकर मुझे अब किसी चीज़ में इंटेरेस्ट नही रहा…!

बस हर पल तुम्हें अपनी बाहों में लेने के ख्वाब देखती रहती हूँ, मुझे अपनी मजबूत बाहों में लेकर मसल दो शंकर, तुम्हारे एक पल के प्यार के लिए ऐसे 10 होटेल कुर्बान मेरी जान…!

शंकर ने उसके कंधों पर अपने हाथ रखकर उसे अपने से अलग किया, उसके आगे हाथ जोड़कर बोला –

मे बहुत छोटे घर का बच्चा हूँ दीदी, आपके पिताजी के यहाँ एक अदना सा नौकर हूँ, मेरे लिए आपके प्रति ऐसे ख़याल अपने मन में लाना भी पाप है…

आपने मुझे यहाँ लाकर जो इज़्ज़त दी, इतने अच्छे-अच्छे कपड़े दिलवाए उसके लिए मे आपका दिल से अभारी हूँ, अब आप प्लीज़ मुझे सुप्रिया दीदी के यहाँ छोड़ दीजिए…!

प्रिया ने उसके जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए और उसकी आँखों में झाँकते हुए बोली – नौकर होगे तुम मेरे पिता के, मेरे लिए तो तुम मेरे ड्रीम हीरो हो शंकर…

अगर तुम यहाँ से मुझे बिना प्यार किए चले गये तो मे यहीं अपनी जान दे दूँगी..,

इतना कहकर उसने झटके से सेंटर टेबल पर रखे एक चाकू को उठा लिया और उसे अपनी कलाई पर रख लिया………….!

उसकी इस हरकत को देख कर शंकर के तिर्पान काँप गये, उसने फ़ौरन उसके हाथ से वो चाकू झपट कर दूर फेंक दिया, और उसे अपनी बाहों में भरकर अपने सीने से लगाते हुए बोला….

ये क्या अनर्थ करने जा रही थी आप, अगर इस ग़रीब का प्यार आपको खुशी दे सकता है तो हाज़िर हूँ आपके सामने जो करना है कर लीजिए मेरे साथ, उफ्फ तक नही करूँगा…!

प्रिया उसके सीने से लगकर सुबक्ते हुए बोली – मे तुम्हारी मजबूरी नही प्यार पाना चाहती हूँ शंकर, अगर तुम्हारी अंतरात्मा नही चाहती तो जाने दो, मे अपने सपनों का गला घोंट लूँगी…

मान लूँगी, जो मेने अतीत में अपने व्यवहार से लोगों को दुख पहुँचाए हैं, उनकी ये सज़ा मिली है मुझे…, मे तुम्हारे प्यार के लायक ही नही हूँ…!

शंकर ने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा – आख़िर आप मेरे साथ ऐसा क्यों करना चाहती हैं…?

आपको पता नही है, मेरे दिल में हमेशा से आपके लिए एक बड़ी बेहन का दर्जा रहा है, अब आप ही बताइए मे वो सब आपके साथ कैसे कर सकता हूँ..?

मे तो नादान हूँ, अभी बच्चा ही हूँ, आप तो समझदार हो, मुझसे उम्र बहुत बड़ी हो, फिर्भी ये ज़िद कर रही हो…!

प्रिया उसकी बातों को गौर से सुनती रही, फिर जब उसकी बात ख़तम हुई तो वो बोली – वेल ! तुम मुझे अपनी माँ समान बड़ी बेहन मानते हो, लेकिन अपनी बड़ी बेहन को दुखी छोड़कर चले जाना चाहते हो…

 
शंकर – किसी महारानी जैसी जिंदगी है आपकी, भला आपको क्या दुख हो सकता है..?

प्रिया – हर चीज़ जो दिखती है, ज़रूरी तो नही वो सच ही हो, माना कि धन दौलत की मेरे लिए कोई कमी नही है, लेकिन एक औरत का सच्चा सुख होता है उसके पति का भरपूर प्यार, उसकी संतान..

शंकर – लेकिन ये दोनो तो आपके पास है ही, फिर क्या दुख है आपको…?

प्रिया – मे फिर कहती हूँ शंकर, दुनिया जितनी रंगीन दिखती है, वैसी है नही… खैर तुम मेरे दुखों को छोड़ो, तुम जाना चाहते हो तो जाओ यहाँ से मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो…

इतना कहते कहते उसका गला रुंध गया, और वो उस’से अलग होकर पीठ फेर्कर खड़ी हो गयी…!

शंकर को लगा, कुछ तो वो ग़लत समझ रहा है, शायद प्रिया अपना सच बताना नही चाहती है की उसको किस तरह के गमों ने घेर रखा है…!

बहुत देर तक वो अपने अंतर्द्वंद में फँसा रहा, फिर उसने एक निर्णय ले ही लिया, वो उसे ये खुशी देगा जिसे वो पाना चाहती है, भले ही वो अपना सच बताए या नही…!

ये तय करके उसने प्रिया की तरफ देखा जो अभी भी मुँह फेर्कर शायद सूबक रही थी.., साटन सिल्क सारी में लिपटा उसका बदन पीछे से किसी संगेमरमर की मूरत जैसा अब उसे अपनी तरफ खींचने लगा था…

प्रिया के 36 के उभरे हुए नितंब उस सारी में बड़े ही कामुक लग रहे थे, दो बड़े-बड़े कलश जैसे उभार देखकर शंकर का लंड खड़ा होने लगा…

वो दो कदम उसकी तरफ बढ़ा और उसने पीछे से उसको अपनी बाहों में भर लिया…

उसके गले पर अपने होंठ रखकर उसे किस करके बोला – मुझे माफ़ करदो प्रिया दीदी, मेने आपको रुलाया, आपको दुखी किया…!

अब मे वही करूँगा जैसा आप चाहती हैं.., ये कहकर उसने उसे अपनी तरफ पलटा लिया और उसके होंठों पर अपने दहक्ते होंठ रख दिए…!

उसके गद्देदार चुतड़ों को मसल्ते हुए बोला – मुझे यकीन नही आ रहा, मेरे सामने वोही हिटलर दीदी खड़ी है जो हवेली में नौकरों को इंसान ही नही समझती थी…!

प्रिया तड़प कर उसे लिपटाते हुए बोली – आअहह…शंकर…अब वही हिटलरनी तुम्हारी दासी है, इसे अपने प्यार से नहला दो मेरे भाई...!

उसकी तड़प देखकर शंकर के चेहरे पर मुस्कान आ गई, उसने उसे अपनी बाहों में उठा लिया, और लाकर सूयीट में मौजूद शानदार बेड पर पटक दिया,

उसके सारी के पल्लू को अलग करके वो उसके गोल-सुडौल 34 के उभारों को मसल्ने लगा, प्रिया की सिसकियाँ फ़िज़ा में गूंजने लगी…!

कसे हुए ब्लाउस में क़ैद उसके दूधिया उभर शंकर के हाथों मसले जाने पर कबूतरों की तरह ब्लाउस की क़ैद से निकलने के लिए फड़फड़ने लेगे, एक मिनिट में ही शंकर ने सारे बटन खोल डाले…

प्रिया ने शंकर के पॅंट के उभार को अपनी हथेली से मसल्ते हुए उसके होंठों पर टूट पड़ी, शंकर उसके ब्रा में क़ैद कबूतरों की चोंच पकड़ कर मरोड़ने लगा…

आअहह….सस्स्सिईइ….शंकरररर….मेरे राजा…ज़ोर्से मत खीँचो…उउऊयईीई.. माआ….मारीी….क्या करते हो…प्लीज़ मान जाओ नाअ….,

ऐसी मादक सिसकियाँ लेते हुए प्रिया ने शंकर के पॅंट की जीप खोलकर उसके मस्त खड़े हो चुके लंड को अंडरवेर के उपर से ही मसल दिया…!

धीरे-धीरे, एक-एक करके उन दोनो के कपड़े बदन छोड़ने लगे, अब प्रिया मात्र अपनी पैंटी में पड़ी, किसी जलबीन मछली की तरह तड़प रही थी,

शंकर के हाथों और जीभ की हरकतों ने उसे बुरी तरह तड़पने पर मजबूर कर दिया, और उसने शंकर को पलग पर लिटा कर उसके एक मात्र बचे हुए अंडरवेर को भी निकाल फेंका…!

जैसे ही प्रिया की नज़र शंकर के गोरे चिट 7.5” लंबे, खूँटे जैसे लंड पर पड़ी, उसकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया.., वो किसी भूखी बिल्ली की तरह उसके लंड पर झपट पड़ी…!

शंकर ने अपना हाथ लंबा करके उसकी कमर को अपने मुँह की तरफ घुमा लिया, और उसकी पैंटी को खिसका कर उसके मोटे-मोटे चुतड़ों में अपनी जीभ डाल दी..

अब वो दोनो 69 की पोज़िशन में एक दूसरे के अंगों को चूसे जा रहे थे.., एक दूसरे का पानी निकालने की कोशिश में जुटे थे…!

लेकिन शंकर ठहरा पक्का खिलाड़ी, अपनी माँ के द्वारा सिखाए गुणों की वजह से अपने आप पर कंट्रोल रखने की उसकी क्षमता के आगे प्रिया जैसी प्यासी औरत कहाँ ठहरने वाली थी…!

वो 5 मिनिट में ही अपना कामरस छोड़ बैठी, और उसके मुँह पर अपनी चूत दबाकर हाँफने लगी…!

अब शंकर ने उसे पलटकर अपने उपर से नीचे लिया, और उसकी चूत को हथेली से सहला कर अपने गरम दहक्ते सुपाडे को उसकी चूत के मुँह पर रखकर दबा दिया…

उसका पूरा सुपाडा उसकी चूत के छेद में फिट हो गया, चूत इस समय इतनी गरम हो रही थी कि शंकर के लंड का सुपाडा पिघलता सा महसूस हुआ…!

आअहह…दीदी, आपकी चूत कितनी गरम है…ये कहते हुए उसने एक जबरदस्त धक्का अपनी कमर में दे मारा….

आआईयईई…….म्म्माआ….माररर..दलाअ… रीइ.., इतना मोटा लंड उसने पहली बार लिया था, सो प्रिया के मुँह से एक जोरदार कराह उबल पड़ी, शंकर का लंड उसकी चूत में तीन-चौथाई तक समा चुका था…!

आअहह…शंकर…बहुत बड़ा है तुम्हारा.., थोड़ा आराम से कर ना यार, मेरी चूत को चीर डाला..इसने.., उउफ़फ्फ़…

शंकर ने उसके होंठों को चूमते हुए कहा – जीजा जी का इतना बड़ा नही है…?

प्रिया –उउन्न्ह…, बहुत कम है इससे.., ये कहकर उसने शर्म से अपना मुँह उसके सीने में छुपा लिया, और अपनी कमर को और अंदर लेने के लिए उचका दिया…!

शंकर ने भी फाइनल स्ट्रोक मारकर पूरा लंड उसकी कसी हुई चूत में फिट कर दिया…!

 
आअहह…शंकर…ये तो मेरी बच्चेदानी के अंदर घुस गया रे…, अब धीरे-धीरे चोद मेरे रजाअ… उउफ़फ्फ़…बड़ा मज़ा आरहा है, हाए.. आज खुली है मेरी चूत तेरे मूसल से…

कूट दे मेरी ओखली.., शंकर उसकी ऐसी गँवारू बातें सुनकर जोश में आ गया, और उसने उसकी ओखली को कूटना शुरू कर दिया..,

चुदाई का दौर जब एक बार शुरू हुआ तो लगातार तीन घंटे तक चला, इस दौरान प्रिया ना जाने कितनी बार झड़ी, शंकर भी तीन बार अपना लंड खाली कर चुका था.., जब प्रिया की टंकी पूरी खाली हो गयी,

उसकी चूत आख़िरी बार शंकर के नये नवेले लंड का पानी पीकर फड़फड़ाने लगी, तब प्रिया ने कहा – अब बस कर मेरे चोदु राजा, तू तो पूरा चुदाई का मास्टर हो गया है इस छोटी सी उमर में.. कहाँ से सीखा ये सब…?

उसने उसकी चुचियाँ जो अब लाल हो चुकी थी मसल-मसलकर उन्हें ज़ोर्से मसल्ते हुए बोला – ये सब आपकी जैसी मास्टरनियों की वजह से ही सीख गया हूँ…!

प्रिया ने चोन्क्ते हुए कहा – मेरी जैसी मतलब…?

शंकर फ़ौरन सम्भल गया और बोला – अरे कुछ नही बस ऐसे ही, आपको मज़ा तो आया कि नही…!

प्रिया उसके मूसल को पकड़ कर बोली – मज़े की क्या बात करता है यार, इतनी चुदाई मेरी अब तक के जीवन में कभी नही हुई.., अब तो मेरा पूरा बदन टूटने लगा है,

कुछ देर आराम करती हूँ, फिर घर चलेंगे, ये कहकर वो दोनो एक दूसरे की बाहों में लिपट कर सो गये…!

सुप्रिया ने शंकर को एक महीने तक अपने पास ही रखा, इस एक महीने वो रात को सुप्रिया को चोदता, और दिन में किसी भी वक़्त प्रिया आकर उसे अपने होटेल ले जाती या फिर अपने घर बुलवा लेती…!

शंकर दोनो बहनों को चोद-चोद कर बड़ा ही खुश था यहाँ, उसकी तो पाँचों उंगली घी में और सिर कढ़ाई में सॉरी लंड चुतो में था…!

इस एक महीने के दौरान, प्रिया और सुप्रिया ने मिलकर शंकर को ड्राइविंग भी सिखा दी, उसे विदा करते वक़्त दोनो बहनों की आँखें नम थी…!

प्रिया ने शंकर को गिफ्ट के तौर पर एक ओपन बॉडी जीप भेंट की, जिसे वो लेना तो नही चाहता था, लेकिन उसने बहुत ज़िद की तो उसे लेनी ही पड़ी, और उसीसे वो अपने गाओं वापस आया…!

धूल उड़ाती हुई नयी चमचमाती जीप देखकर लोग देखने की उत्सुकता लिए हवेली पर पहुँचे,

जब नये मॉडर्न कपड़ों में सन ग्लासस लगाए नयी हेर स्टाइल में शंकर गाड़ी से निकला तो सबकी आँखें चुन्धिया गयी, वो किसी फिल्मी हीरो जैसा लग रहा था,

हवेली में जहाँ रंगीली, सुषमा, सलौनी, यहाँ तक कि लाला जी उसे देख कर बहुत खुश हुए वहीं सेठानी की झान्टे सुलग उठी, और वो अपनी आदत से मजबूर तानों की बरसात करने लगी…!

क्यों रे मुए, तेरे तो हाव-भाव ही बदल गये शहर जाकर, और ये इतनी बड़ी गाड़ी चलाना भी सीख ली, ये किसकी उड़ा लाया…?

शंकर ने खुश होकर कहा – प्रिया दीदी ने भेंट की है मालकिन…!

सेठानी – हाए राम ! ये लड़की भी बिल्कुल पागल है, बताओ, इतनी महँगी गाड़ी भी भला कोई भेंट करता है, चल इसे एक जगह खड़ी कर्दे,

खबरदार अगर फिर से इसे हाथ लगाया तो.., प्रिया आएगी उसे वापस कर देंगे…!

लाला जी को सेठानी की बात सुनकर गुस्सा आ गया, वो उसे डाँटते हुए बोले – तुम्हारा दिमाग़ तो सही है ना, प्रिया ने अपनी जान बचाने की एवज में उसे ये भेंट दी है, तुम कॉन होती हो उसे रोकने वाली…

खबरदार अगर कभी आगे से शंकर को कुछ भी कहा तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.., फिर वो शंकर से बोले – ये अच्छा किया की तूने जीप चलाना भी सीख लिया, शाबास…

अब अपने सारे कारोबार पर अच्छे से नज़र रख पाएगा, अपना बेटा तो नालयक फालतू में शराब पीकर तेल फूंकता रहता है…!

लाला जी की डाँट सुनकर सेठानी भुन्भुनाती हुई पैर पटक कर हवेली के अंदर चली गयी..,

कुछ देर लाला जी शंकर के कंधे पर हाथ रखकर उस’से अपनी बेटियों की राज़ी खुशी लेते रहे, फिर जब वो भी अपनी गद्दी की तरफ चले गये, तब रंगीली उसे अपने साथ लेकर अपने घर चली गयी…!

सलौनी अपने भाई के इस नये रूप को देख-देख कर फूली नही समा रही थी, उसका बस चलता तो वो उसके गले में झूल जाती, लेकिन अपनी माँ के सामने वो ये नही कर पा रही थी…

फिर शंकर ने अपनी माँ, बेहन, पिता और दादा-दादी के लिए शहर से लाए हुए उपहार, कपड़े उसे दिए…, उसने अपने बेटे को अपने कलेजे से लगा लिया..,

इसी मौके का फ़ायदा लेकर सलौनी भी उसके गले में झूल गयी और अपने भाई के गालों को चूम लिया…!

भाई बेहन के प्रेम को देखकर रंगीली के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी…!

वो मन ही मन भगवान को धन्यवाद देने लगी, बस ऐसे ही मेरे बेटे को कामयाबी देते रहना प्रभु.., मेरे बच्चे हमेशा यूँही खुश रहें…!

कुछ देर अपनी माँ और बेहन के साथ बैठकर शंकर खेतों की तरफ निकल गया, गाओं में जो भी उसको देखता, बस देखता ही रह जाता, चाहे वो मर्द हो या कोई औरत..

वो अपनी मस्ती में झूमता हुआ खेतों पर पहुँचा, अपने बापू से मिला,

अपने बेटे को देखकर गर्व से उसका सीना चौड़ा हो गया, वहीं दूसरे मजदूर उसके भाग्य को कोसने लगे…!

कुछ देर देखभाल करके वो अपने बापू के साथ घर लौट आया…!

रंगीली ने शाम का खाना खिला-पिलाकर रामू को अपने घर सोने के लिए भेज दिया, ये कहकर की कभी-कभार वो अपने बूढ़े माँ-बापू की भी देखभाल कर लिया करे…!

उसे आज एक महीने से उपर हो गया था अपने बेटे के साथ समय बिताए हुए, सो आज वो पूरी तैयारी में थी शंकर से अपने अरमानों को पूरा करने की…!

रात हुई, शंकर को उसने दूसरे कमरे में सोने भेज दिया और खुद अपनी बेटी को लेकर दूसरे कमरे में सो गयी…!

जब उसे पूरा विश्वास हो गया कि अब उसकी बेटी भरपूर नींद में आ चुकी है, वो चुपचाप उसकी बगल से उठी, और शंकर के कमरे में जा पहुँची…

शंकर भी नींद में जा चुका था, वो कुछ देर खड़ी अपने बेटे की सुंदरता में खोई रही, फिर धीरे से उसके बगल में जाकर लेट गयी..!

कुछ देर वो उसके पूरे बदन पर हाथ फेरती रही, फिर उसका चेहरा अपनी तरफ करके उसने अपने तपते होंठ उसके होंठों पर टिका दिए….!

 
सोते हुए शंकर को जब अपने होंठों पर कुछ गीला-गीला सा एहसास हुआ तो उसकी नींद खुल गयी,

माँ को अपने पास सोते देख कर उसने उसे कस कर अपने बदन से सटा लिया………..!

बेटे से चिपकते ही रंगीली दीवानावर उसके चेहरे को चूमने लगी, शंकर की एक टाँग अपने उपर रखकर उसने अपनी मुनिया को उसके लंड से सटा दिया…!

शंकर का लंड अपनी माँ की चूत की खुश्बू सूंघते ही नींद से जाग उठा…!

उसका एहसास होते ही रंगीली ने उसे मुट्ठी में भरते हुए कहा – इतने दिन क्या-क्या किया वहाँ शहर में…? इसको कुछ खुराक मिली कि नही..?

शंकर अपनी माँ की चुचियों को सहलाते हुए बोला – मत पूछ माँ, तेरे बेटे के लिए वहाँ स्वर्ग था, दो दो अप्सरायें हर समय सेवा में हाज़िर रहती थी…!

रंगीली उसके लंड को सहलाते हुए बोली – क्या..? दोनो ही..,

सुप्रिया का तो पता है मुझे… लेकिन प्रिया हिटलरनी कैसे चक्कर में आ गई.. वो तो साली कितनी कड़क मिज़ाज है…, आदमी को आदमी नही समझती!

शंकर ने अपनी माँ के होंठों को चूमा फिर उसके चोली के बटन खोलते हुए बोला – उसी ने तो मेरा क्या जबरदस्त स्वागत किया माँ, किसी राजकुमार की तरह रखा, तेरे बेटे का हुलिया ही बदल दिया उन्होने..,

फिर शंकर ने प्रिया के साथ जो-जो हुआ वो सब ज्यों का त्यों बता दिया.., रंगीली ने उसके पाजामे को नीचे खिसका दिया,

उसके अंडरवेर में हाथ डालकर उसके मूसल हो चुके लंड को आगे-पीछे करते हुए बोली – इसलिए उन परियों की चुदाई में अपनी माँ को भी भूल गया…

तेरे बिना ये एक महीना मेने कैसे निकाला है, मे तुझे बता नही सकती..,

शंकर ने उसकी नंगी चुचियों को मसलते हुए कहा – सच कहूँ माँ, जितना मज़ा मुझे तेरे साथ आता है उतना मज़ा मुझे किसी और के साथ नही आया..,

तू सचमुच आनंद का सागर है, जितना गहरे उतरने की कोशिश करूँ, और उतरने का मन करता है..,

ये कहते कहते उसने उसके लहंगे का नाडा भी खोल दिया, और उसे नीचे खिसका कर अपनी उंगली अपनी माँ की गान्ड की दरार में घूमने लगा…!

रंगीली ने उसका लंड बाहर निकल लिया, उसे पकड़कर अपनी गीली चूत की फांकों के उपर घूमाते हुए सिसक कर बोली -…

सस्स्सिईइ…आअहह…. शंकरा.. तेरा ये लंड ही इतना प्यारा है, हर कोई चूत खोलकर लेट जाए.., पर ये बता उन दोनो में से मज़ा कोन्सि ज़्यादा देती है…!

शंकर अपने लंड को माँ की चूत में दबाते हुए बोला – आअहह…माँ, कितनी गर्मी है तेरे अंदर..,

प्रिया दीदी बहुत रसीली औरत है, हर समय उसकी चूत गीली ही मिली मुझे…! बहुत मज़ा आया उसे चोदने में…!

रंगीली से अब और सबर नही हो पा रहा था, सो उसने शंकर की कमर में हाथ डालकर उसे अपने उपर ले लिया, और खुद सीधी लेट कर अपनी टाँगें खोल दी…!

रंगीली से अब और सबर नही हो पा रहा था, सो उसने शंकर की कमर में हाथ डालकर उसे अपने उपर ले लिया, और खुद सीधी लेट कर अपनी टाँगें खोल दी…!

सस्सिईइ…आआहह…अब पूरा डाल दे मेरे लाल.., वैसे वो साली हिटलरनी दिखती भी मस्त है रे, सुप्रिया तो अभी भी बच्ची जैसी ही लगती है…!

शंकर ने पूरा का पूरा लंड अपनी माँ की चूत में उतार दिया, और धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए बोला…!

लेकिन माँ मेरी एक बात समझ में नही आई, प्रिया एक बच्ची की माँ भी है, उसका पति भी देखने से तो लगता है, उसे भरपूर प्यार देता होगा, फिर उसने मुझे क्यों पटाया..?

आअहह…सस्सिईइ…छोड़ ना उसे, तू अपनी माँ को चोद, निकाल मेरी गर्मी, एक महीने से भरी पड़ी है…,

आहह…तेरे बाप का लंड वहाँ तक नही पहुँचता…, और तेज.. हां, हाए.. अब आया मज़ा.. फाद्दद्ड….उऊयईीई….म्माआ….गाइिईई….र्रिि…

उपर से शंकर के धक्के, नीचे से रंगीली अपनी कमर उचका देती, दोनो की मस्त ट्यूनिंग सेट हो चुकी थी..,

ताबड-तोड़ चुदाई से रंगीली की चूत पानी छोड़ बैठी, उसकी एडीया शंकर की गान्ड पर कस गयी, और वो अपनी कमर उठाकर उसके लंड से जोंक की तरह चिपक गयी…

लेकिन शंकर अभी इंटर्वल तक भी नही पहुँचा था, सो वो उसे मसोसता ही जा रहा था उसने अपने धक्कों में कोई रियायत नही आने दी…!

रंगीली कुछ ठंडी पड़ गयी, उसके चूतड़ पर चपत लगाकर बोली – मेरे घोड़े.., थोड़ा रुक…, मेरी चूत चाट कर फिर से गरम कर…, फिर मे तुझे चोदुन्गि…!

कुछ देर दोनो माँ-बेटे एक दूसरे के उपर लिपटे एक दूसरे के अंगों को चूस्ते चाट’ते रहे, जब रंगीली फिर से गरम हो गयी तो वो अपनी गदराई हुई गान्ड लेकर अपने बेटे के लंड पर बैठ गयी…!

रंगीली उपर से उठक-बैठक करने लगी और शंकर नीचे से अपनी कमर उचका कर मस्ती में चूर अपनी माँ की ओखली की कुटाई करने लगा…

इसी तरह दोनो माँ-बेटे एक दूसरे के साथ देर रात तक मस्ती करते रहे, एक दूसरे की प्यास बुझाते रहे.., इस बात से बेख़बर कि उन दोनो की इस रासलीला का कोई तीसरा भी मज़ा ले रहा है…!

जब रंगीली पूरी तरह संतुष्ट हो गयी, तो अपने बेटे के लंड को चूमकर बोली – कल सुषमा से भी मिल लेना, बेचारी बहुत याद करती है तुझे..,

अब वो एक दो महीने और मज़े ले सकती है तेरे इस मूसल के, फिर तो बंद करना पड़ेगा…, इतना कहकर वो अपनी बेटी के पास चली गयी, और शंकर अपनी माँ को चोदने की खुमारी में चूर नींद में डूब गया…!

दूसरे दिन नहा-धोकर रंगीली और उसकी बेटी ने शंकर के लाए हुए नये-नये कपड़े पहने, सारी में रंगीली का अप्सरा जैसा रूप और ज़्यादा निखर गया था…

उसे देखते ही सेठानी की झान्टे सुलग गयी, लेकिन लाला जी की कल की डाँट ने उसने चुप रहने पर मजबूर करके रखा था…!

लाला जी तो रंगीली को देखकर कंट्रोल ही नही कर पाए, और अपनी बैठक में ले जाकर उन्होने रंगीली का रस्पान भी कर लिया…!

ज़्यादा वो कुछ इसलिए नही कर पाए, क्योंकि लाजो किसी मधुमक्खी की तरह हर समय उनके आस-पास ही मंडराती रहती थी…!

लाजो ने भी रंगीली के इस रूप की तारीफ की, फिर असल मुद्दे पर आते हुए बोली – काकी, आपके उस नुस्खे से तो अब मेरी उसमें पानी भी नही आता है..,

ससुरजी भी बोल रहे थे कि तुम्हारी चूत गीली क्यों नही होती, लंड सूखा सा ही लगता रहता है…, चुदाई में भी मज़ा नही आरहा…!

रंगीली – वो नुस्ख़ा तो मेरे मायके की एक बहुत ही होशियार औरत ने बताया था, जिसे औरतों के बारे में बहुत जानकारी है..,

 
ये हो सकता है वो नुस्ख़ा हर किसी को फ़ायदा नही पहुँचाता हो…!

लाजो – तो अब मे क्या करूँ..? कुछ और उपाय बताइए ना, बस एक बार शंकर भैया से करवाने दो.., शायद कुछ बात बन जाए, अब तो वो अच्छे-ख़ासे जवान हो गये हैं…!

रंगीली – कैसी बातें करती हो बहू.., भला कोई माँ अपने बेटे से ये कहे कि तू इसको चोद दे…!

लाजो – आप बस उनको थोड़ा सा इशारा करदो, मेरी बात सुनने के लिए, वाकी सब मे देख लूँगी…!

रंगीली – बात तो वो सबसे ही करता है, इसमें मेरे कहने की क्या बात है..? क्या वो तुमसे बात नही करता..?

लाजो – नही वो, मेरी बात मानने के लिए कहो ना.., वो तो दूर-दूर ही भागते हैं…!

रंगीली – तुमने एक-दो बार उसके साथ ज़ोर जबदस्ती की है ना, इसलिए उसे डर लगता है तुमसे, कहीं किसी को पता चल गया, तो वो तो बेचारा जाएगा ना काम से..,

कल्लू भैया उसके हाथ-पैर तुडवा देंगे…, ना बाबा ना, तुम खुद ही कोशिश करो कुछ और…!

लाजो – और क्या कोशिश करूँ.., मेरी तो कुछ समझ में नही आ रहा..?

रंगीली – मे क्या बताऊ.., थोड़ा हवेली से बाहर निकलना शुरू करो, दुनिया बहुत बड़ी है…, कोई ना कोई हल निकल ही जाएगा…!

ऐसी ही कुछ पट्टी पढ़ाकर वो अपने काम में लग गयी.., इधर लाजो उलझन में खड़ी सोचने लगी, कि करे तो क्या करे…!

ससुर के लौडे से तो अब कुछ होने से रहा, लगता है अब कुछ और ही सोचना पड़ेगा.., इस रंगीली के तो भाव बढ़े हुए हैं, लगता है अब हवेली से बाहर निकालना ही पड़ेगा..,

ये सोचकर उसने अपने मायके जाने का प्लान बनाया, जहाँ उसके कुछ पुराने यार थे, जो शायद उसकी चूत को फिर से हरा कर सकें…!

लेकिन वो वहाँ पहले ही बदनाम हो चुकी है, अब अगर किसी ने देख लिया, तो बात हवेली तक आ सकती है.., नही.. नही..वहाँ ठीक नही है.. तो फिर…,

यहीं इसी गाओं में किसी को देखती हूँ..ऐसा पक्का इरादा करके वो अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी…!

उसने वहीं हवेली में काम करने वाली एक नयी नौकरानी मुन्नी को पकड़ा जो उसी गाओं की लड़की थी, और उसे लेकर वो गाओं घूमने निकल पड़ी…!

रामू का बड़ा भाई भोला, कम अकल ज़रूर था, लेकिन देखने में रामू से अच्छा लगता था, शरीर से भी उस’से 21 ही था, मस्त मालांद मजबूत कद काठी…अपने जानवरों के साथ पड़ा रहता था…!

ऐसे लोग शारीरिक कद से अक्सर मजबूत ही मिलेंगे, बिना कुछ सोच विचार के बस मेहनत करने में जुटे रहते हैं…

अब घर में चार पैसे बढ़ने से उनके ख़ान-पान में भी सुधार आ गया था, गे भैंसॉं के दूध दही का खाना मिलने लगा था, जो अब तक दूधिया के यहाँ जा रहा था…

इस समय वो अपने शरीर पर मात्र एक लूँगी पहने अपने बाडे में काम कर रहा था, जब लाजो मुन्नी के साथ घूमते हुए वहाँ पहुँची…!

मुन्नी ने बताया कि ये रंगीली काकी के जानवरों का बाडा है, तो उत्सुकता बस लाजो वहाँ खड़ी होकर देखने लगी, तभी उसकी नज़र मात्र एक लूँगी में काम कर रहे भोला पर पड़ी…!

लाजो ने उससे उसके बारे में पुछा, तो मुन्नी ने कहा – ये शंकर के ताऊ हैं, रामू काका से बड़े,

बेचारे कम अकल हैं इसलिए गे भैंसॉं के काम में ही लगे रहते हैं, शादी भी नही हुई इनकी…!

तभी भोला की नज़र भी उन दोनो पर पड़ी, उसने नादानी से हँसते हुए कहा – अरे..मुनिया .. ये कॉन है..? तेरी कोई रिश्तेवाली हैं..?

मुन्नी – अरे नही काका, ये तो अपने सेठ जी की छोटी बहू हैं..,

लाजो भोला के मेहनती शरीर को ही देखे जा रही थी, उसने उसके लूँगी के पीछे सोए हुए हिलते लंड का भी जायज़ा ले लिया,

उसने देखते ही भाँप लिया, कि लूँगी के पीछे छुपा ये हथियार कम दमदार नही है…!

38-40 साल के इस मुस्टंडे के लंड में बहुत दम होगी, ज़्यादा चला भी नही होगा.., उपर से कम अकल है, थोड़ी सी कोशिश करने पर ये उसके काम आ सकता है..

अपने इन्ही ख़यालों में खोई लाजो बाडे के अंदर चली गयी, और भोला से बोली – भोला जी, तुम अपने भाई के साथ क्यों नही रहते…,

वो वहाँ हवेली में मौज करते हैं, और तुम यहाँ तबेले में गे भैंसॉं के गोबर में सिर खपाते रहते हो…!

भोला ने सहज स्वाभाव से कहा – मुझे नही करनी किसी की गुलामी, मेरा अपना खेत खलियान है, फिर क्यों क्यों जाउ तुम्हारा काम करने…!

रामू और रंगीली ही बहुत हैं सेठ जी की ताबेदारी करने…!

लाजो को उसकी नादानी भरी अकड़ पसंद आई, लेकिन मुन्नी के कारण उसने भोला से ज़्यादा बातें नही की और वो वहाँ से चली आई…!

उसी रात जब सारी हवेली नींद में थी, सुषमा के कमरे में शंकर से लिपटी वो अपने बीते महीने की प्यास बुझने में लगी थी..,

दोनो मादरजात एक दूसरे की बाहों में पड़े थे…!

सुषमा का 4 महीने का गर्भ अब दिखने लगा था, वो शंकर के चौड़े सीने पर सहलाते हुए बोली – तो खूब मज़े किए होंगे तुमने सुप्रिया के साथ…!

शंकर ने उसकी गान्ड की दरार में उंगली घूमाते हुए कहा – हन, उसका परिवार बहुत अच्छा है, दोनो के ही परिवारों ने मुझे बहुत सम्मान दिया…

सुषमा ने अपनी एक टाँग उसके उपर चढ़ा ली, जिससे उसकी गान्ड जो अब पहले से थोड़ी भारी हो गयी थी की दरार थोड़ी ज़्यादा खुल गयी,

शंकर की उंगली अब उसकी गान्ड के छेद के आस-पास मंडरा रही थी…, इस वजह से सुषमा की चूत में सुरसुरी सी बढ़ गयी,

उसने उसके मूसल जैसे कड़क लंड के सुपाडे को अपनी गरम फांकों के बीच फँसाकर उपर नीचे घूमाते हुए कहा

तुम हो ही सम्मान के हक़दार, ये कहकर उसने उसके लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट किया और शंकर की गान्ड के पीछे हाथ लगाकर उसे अपनी ओर खींचा..!

गरम सुपाडा उसकी दहक्ति चूत में घुस गया… सुषमा सिसक उठी…

सस्सिईइ…आअहह… थोड़ा और अंदर करो..ना, जब शंकर ने उसे और अंदर कर दिया, तो वो वहीं उसे रुकने का इशारा करके बोली –

अब तुम यहीं अपने पास वाले कॉलेज में अड्मिशन ले लो, आगे की पढ़ाई ज़रूरी है इस कारोबार को संभालने के लिए…!

 
शंकर उसकी एक चुचि को चूसने में व्यस्त था, जब उसने सुषमा के ये शब्द सुने, तो उसे मुँह से निकालकर उसकी घुंडी को उंगली से सहलाते हुए बोला –

क्यों भाभी मे क्यों..? मालिक हैं, आप हैं, फिर मे तो उपरी देखभाल कर ही रहा हूँ ना…!

तुम बुद्धू के बुद्धू ही रहोगे, चलो अब मुझे एक बाद जमकर चोद दो, फिर बताती हूँ क्या करना है, ये कहकर सुषमा सीधी लेट गयी,

और शंकर ने उसकी टाँगें चौड़ी करके अपना मूसल उसकी रस से सराबोर चूत में डाल दिया…!

पूरा लंड अंदर जाते ही, उसकी चूत की पंखुड़ियों ने उसके उपर पकड़ बना ली, शंकर को लगा जैसे वो उसके लंड को किस कर रही हों…, मज़े से उसकी आहह निकल गयी…

आअहह….सस्सिईईई…भाभी, ये क्या है..? आज आपकी चूत ऐसे क्यों कर रही है, जैसे मेरे लंड को चूम रही हो…!

सुषमा ने अपने पैरों की केँची से उसे जकड़ते हुए कहा – हां मुझे भी ऐसा लग रहा है.., सच में कुछ अलग ही मज़ा है, हैं ना…, कुछ देर यौंही रहो.. बड़ा मज़ा आरहा है…

फिर वो दोनो एक दूसरे से किस करने में जुट गये, शंकर उसकी चुचियों को भी मसल रहा था, जिनमें अब पहले से ज़्यादा गुदाजपन आ गया था…!

कुछ देर रुककर उसने अपनी कमर चलाना शुरू किया, ज़्यादा तगड़े धक्के लगाने को सुषमा ने उसे मना किया था,

कुछ देर बाद उसने करवट से लिटा दिया, और खुद ने पीछे से उसकी चूत में लंड डालकर चोदने लगा…

जब उसकी मोटी मोटी, कसरती जांघें सुषमा की गद्देदार गान्ड से टकराती, तो अजीब किस्म की आवाज़ आने लगती..,

आधे घंटे की दमदार लेकिन प्यार भरी चुदाई के बाद दोनो की अपना-अपना पानी छोड़कर कर शांत पड़ गये.., सुषमा एक बार फिर पलटकर उसके दामन में समा गयी…!

उसे देखकर लगता था, जैसे वो उसीके लिए बनी हो, शंकर को वो बेइंतहाँ मुँबबत करने लगी थी, वो उसे शरीर की पूर्ति से उपर देखने लगी थी…!

उसने मन ही मन कुछ फ़ैसला ले लिया था, उसी के चलते उसने शंकर को आगे पढ़ने के लिए कहा, जिससे वो आगे चलकर अपने कारोबार की चाबी उसके हाथ में दे सके…!

उसने उसके होंठों पर एक प्यारा सा चुंबन किया, और उसके बदन को सहलाते हुए बोली – तुम्हारा आगे पढ़ना ज़रूरी हो गया है, वैसे भी तुम तो पढ़ना ही चाहते थे ना…!

शंकर – लेकिन भाभी, मालिक नही चाहते की मे आगे पढ़ुँ…!

सुषमा – वो तुम्हें यहाँ से बाहर भेजने के खिलाफ थे, यहीं रहकर अपने लोकल कॉलेज से जो भी डिग्री मिलती है ले लो.., वाकी मे पिताजी से बात कर लूँगी..

शंकर – लेकिन अब तो समय निकल गया अड्मिशन का…!

सुषमा – कोई समय नही निकला है, तुम कल ही जाओ, मे एक लेटर दे दूँगी प्रिन्सिपल के नाम, तुम्हारा अड्मिशन हो जाएगा…!

शंकर उसकी बात सुनकर बहुत खुश हुआ, उसने उसे ज़ोर्से अपने शरीर के साथ चिपका लिया…!

सुषमा को लगा, वो उसे पिचका ही देगा सो फ़ौरन बोली – ज़ोर्से नही मेरे राजा.., मेरी दम निकालोगे क्या…!

शंकर ने झट से उसे अपनी पकड़ से आज़ाद किया और बोला – ऊहह…सॉरी भाभी, मे कुछ ज़्यादा ही खुश हो गया, फिर उसके होंठों को चूमते हुए बोला – थॅंक यू, आपने मेरी पढ़ने की इच्छा पूरी करदी…!

सुषमा – कोरी थॅंक्स से काम नही चलेगा राजाजी, अपनी जान को खुश करो, ये कहकर उसने उसके लंड को अपने मुँह में भर लिया और उसे लॉलीपोप की तरह चूसने लगी…!

शंकर ने भी उसे अपने उपर खींचकर उसकी चूत को अपने मुँह पर रखवाया, और वो दोनो एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे…!

दोनो ने एक दूसरे का रसस्वादन करने के बाद, सुषमा उसके लंड पर बैठकर कूदने लगी…,

उसने जी भरकर एक महीने की कसर निकाली, और फिर हान्फ्ते हुए वो दोनो एक दूसरे की बाहों में सिमट गये..

वो किसी मासूम बच्ची की तरह उसके बलिष्ठ शरीर पर पड़ी सकुन के पलों में डूब गयी,

कुछ देर रुक कर शंकर ने उसके बदन को अपने उपर से हटाया, वो नींद में जा चुकी थी, सो वो चुपचाप उसके पास से उठा और अपने घर आकर सो गया…!

अगले दिन दोपहर के समय, जब ज़्यादातर लोग अपने घरों में थे, लाजो अपनी चूत की परेशानी दूर करने निकल पड़ी,

हल्का सा घूँघट निकाले वो सीधी भोला के घेर में जा पहुँची…

भोला इस समय खा-पीकर भूसे वाले कोठे में चैन की नींद ले रहा था..,

लाजो ने चुपके से कोठे का पुराना सा दरवाजा अंदर से बंद किया, सांकॅल चढ़ाकर वो उसके नज़दीक पहुँची और झाटोले जैसी चारपाई पर जाकर उसके बगल में बैठ गयी,

इस समय भी उसके बदन पर मात्र एक लूँगी ही थी, जो आगे से बँधी थी, बस उसके दोनो पल्लों को हटाना था और कोई भी उसके सोए हुए नाग देवता के दर्शन प्राप्त कर सकता था…!

कुछ देर वो दम साधे उसे देखती रही, भोला मस्त नींद में डूबा हुआ था, ना कोई चिंता, ना कोई फिकर बस पेट भर खाना मिल गया तो नींद तो आनी ही थी…!

कच्चा मिट्टी का बना हुआ कोठा, बाहर की इतनी गर्मी के बबजूद भी अंदर ठंडा था….

कुछ देर अपना साहस बटोरकर एक लंबी साँस खींची और उसने चुपके से उसकी लूँगी के पाट अलग-अलग कर दिए…!

भोला का सोया हुआ नाग इस समय भी किसी दामुंहे साँप जैसा टाँगों के बीच पड़ा हुआ था, जिसका आगे का मुँह थोड़ा सा खुला था, जिसमें से उसके मूतने वाली धारी दिख रही थी…!

खेली खाई लाजो ने सोए हुए नाग को देख कर ही ये अंदाज़ा लगा लिया कि ये पूरा खड़ा होने के बाद किस रूप में होगा, ये कल्पना करते हुए उसका हाथ उसके नाग के फन पर चला गया…!

वो उसे हौले-हौले से सहलाने लगी, हाथ की गर्मी पाकर ठंडा पड़ा भोला का नाग धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाने लगा…!

लाजो ने उसे अपने हाथ में लेकर उसके पेलरों से उसे उपर उठा लिया, और दूसरे हाथ से उसे सहलाते हुए वो उसके बढ़ते आकर को बड़ी तन्मयता से निहारने लगी…!

अभी वो आधा ही खड़ा हो पाया था उसी से उसका आकर इतना बड़ा हो गया कि उसके आगे अपने ससुर का लंड उसे छोटा लगने लगा…!

ये देखकर उसकी आँखों की चमक बढ़ गयी, वो सोचने लगी कि पूरा खड़ा होने के बाद तो ये उसकी चूत की गहरियों में जाकर भी पानी निकल सकता है…!

इसी कल्पना में खोई लाजो को पता भी नही चला कब उसने उसे अपने मुँह में ले लिया और उसे मुँह में लेकर अंदर बाहर करने लगी…!

अपने लंड पर गीलापन महसूस करके भोला की नींद खुल गयी, उसने अपना सिर उठाकर देखा, लेकिन लाजो का सिर नीचे होने के कारण वो उसे पहचान नही पाया..!

अभी वो हाथ बढ़ाकर उसे अपने लंड से अलग करने ही वाला था, कि तभी लाजो ने उसे अपने मुँह से बाहर निकाला, कारण था भोला के नाग का पुर जोश में आजाना,

अब वो अपना फन फैलाए पूरी मस्ती में आ चुका था….

 
वो इतना मोटा हो गया था कि लाजो को उसे मुँह में लेना भारी पड़ने लगा था,

उसने जैसे ही उसे बाहर निकाला, वो किसी अजगर की तरह सीधा तन्कर खड़ा हो गया…, काला भुजंग सोट जैसा 9” लंबे और 3” मोटे भोला के लंड को देखकर लाजो की घिग्घी बँध गयी….!

अभी वो उसे हाथ में लेकर देख ही रही थी कि तभी भोला की आवाज़ सुनकर चोंक पड़ी… कॉन है री तू…? मेरे लंड को क्यों चूस रही है साली छिनाल…?

लाजो ने पलटकर भोला की तरफ़ देखा.., उसे पहचानते ही वो बोल पड़ा…, अरे लाला की बहू तू भी लंड की भूखी है….?

लाजो उसके डंडे को हाथ में पकड़े हुए ही बोली – अरे भोलाजी जाग गये तुम..? मे देखने आई थी कि देखूं तो सही अकेले-अकेले क्या करते रहते हो..,

तुम्हें सोते देखा, लेकिन तुम्हारा ये नाग लूँगी से मुँह चमका रहा था, सो देखने लगी कि ये सोट जैसा क्या छुपा रखा है तुमने इसमें…!

और अभी तुमने क्या कहा, मे भी मतलब और भी हैं क्या इसका मज़ा लेने वाली…?

भोला ने उसकी गान्ड को मसल्ते हुए कहा – बहुत हैं इस गाओं में, तू उन्हें छोड़ तुझे पसंद आया ये…?

लाजो – हां, पसंद तो आया, पर किसी को बताओगे तो नही.., जैसे अभी औरों के बारे में कहा वैसे…!

भोला - चल नही बताउन्गा, अब खड़ा किया है, तो इसे ठंडा भी कर, बैठ इसके उपर..,

अंधे को क्या चाहिए, दो आँखें… सो लाजो ने झटपट अपनी सारी कमर तक चढ़ाई, और उसके अजगर का मुँह पकड़ कर अपनी सुरंग के मुँह पर रखकर बैठती चली गयी…!

आनन-फानन में वो बैठ तो गयी, लेकिन जैसे-जैसे वो अंदर सरकता जा रहा था, लाजो का मुँह खुला का खुला रह गया, उसकी आँखें चौड़ी होने लगी…

वो बीच रास्ते में ही रुक गयी, क्यों की उसे लगा, जैसे किसी ने उसकी चूत में अपना हाथ ही डाल दिया हो…!

भोला ने उसके ब्लाउस में क़ैद मोटी-मोटी चुचियों को पकड़ लिया, और उन्हें ज़ोर्से मसल्ते हुए बोला – रुक क्यों गयी री…, अंदर कर ना भोसड़ी की….!

लाजो हान्फ्ते हुए बोली – आअहह…उउउफ़फ्फ़…नही ले सकती पूरा…हाईए.. रामम्म…कितना मोटा है ये तो….मेरी चूत पूरी चिर गयी…..

तो इतने को ही अंदर बाहर कर ना कुतिया, यूँ बैठी क्यों है साली.., जल्दी चला अपनी गान्ड..ये कहकर भोला ने एक जोरदार चाँटा उसकी नंगी गान्ड पर चटका दिया…

लाजो ने धीरे से अपनी गान्ड उपर की, लंड बाहर आते ही उसने राहत की साँस ली, लेकिन चूत खाली-खाली सी उसे अच्छी नही लगी, सो फिर से बैठने लगी…!

आधे लंड को ही लेकर वो धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करने लगी, उतने से ही उसकी चूत की सारी नसें ढीली पड़ गयी, और उसकी चूत गीली होने लगी…!

उसकी आँखें बंद होने लगी, और उसने अपने ब्लाउस के सारे बटन खोल दिए, फिर ब्रा के हुक्स खोलकर अपनी चुचियों को नंगा कर दिया…!

उसकी नंगी थिरकति हुई मोटी-मोटी, गोरी-गोरी चुचियों को देखकर भोला उनपर टूट पड़ा, और अपने दोनो हाथों में लेकेर ज़ोर-ज़ोर्से मीँजने लगा…!

मोटे लंड की रगड़ और चुचियों की मीन्जायि से लाजो की चूत पानी छोड़ने लगी.., आज बहुत दिनो के बाद उसकी चूत गीली हुई थी, जिसकी वजह से उसे बहुत मज़ा आ रहा था…

लेकिन भोला का इतने से काम नही चल पा रहा था, उसे तो तूफ़ानी चुदाई करने की लत थी, सो उसने झटके से उसके बगल में हाथ डाला, और उसे नीचे ज़मीन पर पटक दिया…

वो तो अच्छा था नीचे भूसा पड़ा था सो लाजो को कोई चोट नही आई, नीचे पटकते ही वो भी उसके उपर सवार हो गया, और अपना 9” लंबा 3” मोटा खूँटा एक ही झटके से उसकी चूत में पेल दिया…!

आआईयईई….माइय्य्ाआआ…..माररर…गायईीई…रीइ… पूरा खूँटा जाते ही लाजो बुरी तरह से गाय की तरह रंभाने लगी…, भोला ने उसके मुँह पर हाथ रखकर दबा दिया और धक्के मारते हुए बोला…

साली पूरे गाओं को इकट्ठा करेगी क्या..? गान्ड में दम नही था तो आई क्यों मेरा लंड लेने…!

आअहह…तो अपने खूँटे को आराम से नही डाल सकते थे जंगली कहीं के…, मेरी चूत को फाड़ डाला.., लाजो कराहते हुए बोली..

भोला ने धक्कों की बरसात जारी रखते हुए कहा – यहाँ चूत फडवाने ही आती हैं सभी…, अब तेरी चूत में आग लगी थी तभी तो तू आई यहाँ.., अब क्यों डकरा रही है…!

10-15 बार की कुटाई ने ही लाजो की चूत का पानी निकलवा दिया, अब उसमें से फुच्च-फुच्च जैसी आवाज़ें आने लगी थी…,

उसने कतार नज़रों से भोला की तरफ देखा, शायद वो अपने धक्कों को विराम दे दे, लेकिन वो तो अपनी धुन में खोया हुआ, हुउन्ण…हुउन्न्ं..की आवाज़ें निकालता हुआ मानो किसी कुल्हाड़ी से लकड़ी काट रहा हो दे दनादन धक्के मारे जा रहा था…!

लाजो को उसके धक्कों ने पूरी तरह हिला डाला था…

एक बार झड़ने के बाद थोड़ी ही देर में वो फिर से गरम हो गयी, अब वो भी नीचे से अपनी गान्ड उचका-उचका कर उसके मूसल की मार झेल रही थी…!

सस्सिईइ…आआहह….फाड़ भोला मेरी चूत फाड़ दे मदर्चोद… मेरे चोदु राजा…, बना दे इसका भोसड़ा…, आज तुमने मेरी चूत की सारी गर्मी निकाल दी…हहाअययईए… क्या मस्त मूसल जैसा लंड है तुम्हारा….!

उसकी कामुक बातों से भोला और जोश से भर गया, और वो तूफ़ानी गति से उसकी चूत की कुटाई करने लगा…!

लाजो की चूत अब झरना बन चुकी थी, उसमें से लगातार पानी निकल रहा था…, इतने दिनो की सुखी पड़ी नदी फिर से बहने लगी थी…

आख़िरकार 20-25 मिनिट की दमदार चुदाई के बाद भोला ने एक लंबी सी हुंकार भरते हुए उसकी चूत में अपना ट्यूब वेल खोल दिया…

लाजो की चूत भोला के पानी से लबालब भर गयी, भोला उसकी चुचियों में मुँह देकर हाँफने लगा…!

फिर जब उसने अपना मूसल उसकी ओखली से बाहर खींचा, फलल..फलल करके ढेर सारा दोनो का पानी बाहर निकल पड़ा…,

भोला ने उसकी गान्ड मसलकर कहा – क्यों रानी कैसा लगा मेरा लंड तुझे….

लाजो ने उसके सूखे खुर-दुरे होंठों को चूम लिया, जो शायद पहली बार किसी ने चूमा होगा उन्हें, और बोली – बहुत मज़ा आया, सच में कमाल की चुदाई करते हो भोला राजा…!

अब में चलती हूँ, कल फिर आउन्गि… ठीक है, मिलोगे ना…!

भोला मासूमियत के साथ बोला – मिल तो जाउन्गा, पर खाली हाथ मत आना, जलेबी लेकर आना, चुदाई के बाद बहुत भूख लगती है मुझे…!

लाजो उसके ढीले पड़ चुके लंड को चूमकर बोली – जलेबी की क्या बात करते हो भोला जी, भरपेट राबड़ी खिलाउंगी तुम्हें…, कहो तो आज रात को ही आ जाऊ…?

भोला ने उसकी चुचि को मसल दिया, वो आऔच करके रह गयी, भोला हँसते हुए बोला – तेरी मर्ज़ी.., लेकिन राबड़ी लाना मत भूलना…,

लाजो ने खुशी-खुशी हामी भर दी, और अपनी गान्ड मटकाती हुई वहाँ से चली गयी…!

भोला से जमकर चुदने के बाद लाजो की चाल ही बदल चुकी थी, उसका मूसल जैसा लंड अपनी चूत में लेकर उसकी टाँगें चौड़ी हो गयी,

भरी दोपहरी में जहाँ पूरा गाओं छान्व की तलाश में ज़्यादातर या तो अपने अपने घरों में आराम कर रहा था या अपने अपने काम की जगह पर ही किसी घने पेड़ की छाँव तलाश करके दोपहरी बिता रहा था…!

 
वहीं लाजो उसी दोपहरी में घूँघट में अपना चेहरा छुपाए टांगे फैलाकर हवेली की तरह चली जा रही थी..,

भले ही उसकी चूत में इस समय दर्द था, लेकिन चेहरे पर पीड़ा के स्थान पर एक अपार सुकून दिखाई दे रहा था, जो एक मुस्टंडे के 9” के हथियार ने उसकी टोटकों और नुस्खों के कारण सुख चुकी चूत को फिर से हरा-भरा कर दिया था…!

इस समय चलते हुए भी उसकी चूत रिस-रिस कर उसकी कच्ची को गीला कर रही थी, जिसमें से उसकी खुद के चूतरस के साथ साथ भोला की मलाई भी मथ-मथ कर निकल रही थी…!

जब ज़्यादा गीलापन महसूस होने लगता तो वो इधर-उधर नज़र मारकर अपने पेटीकोत समेत पैंटी को मसलकर कम करने लग जाती…!

उपर से गर्मी इतनी ज़्यादा थी, जिससे उसके अंदर का पसीना भी उसके बदन को चिप-चिपाये हुए था, जैसे तैसे करके वो अपने घर पहुँच ही गयी…!

अपने कमरे में घुसते ही किसी सौतन की तरह उसने सारे कपड़े उतार फेंके, और नंगी ही अपनी गान्ड मटकाती हुई गुसलखाने में घुस गयी…!

उसने बड़े से बर्तन में ठंडा-ठंडा पानी निकाला और धीरे-धीरे अपने बदन पर डालते हुए नहाने लगी…!

अपने बदन को मलते मलते जब उसका हाथ अपनी चूत पर गया, तब उसे एहसास हुआ कि उसकी मुनिया ने क्या-क्या ज़ुल्म सहे हैं आज, उसके होंठ कुछ ज़्यादा ही सूजे सूजे से लगे,

जहाँ कुछ घंटों पहले तक उसकी फाँकें कसी-कसी सी थी, वहीं वो अब एकदम धुनि हुई रूई जैसी मुलायम हो गयी थी…!

फांकों को सहलाते हुए उसकी आखें बंद हो गयी, और भोला का कोबरा उसकी आँखों के सामने झूमता महसूस होने लगा,

उसे वो पल याद आने लगे जब भोला का घोड़ा पछाड़ कड़ियल विषधर पहली बार उसकी मुनिया के मुँह को फैलाता हुआ अंदर तक उसकी बच्चे दानी के मुँह तक जा पहुँचा था…!

उन पलों को याद करते ही उसके मुँह से एक मादक सिसकारी निकल पड़ी.. सस्स्सिईईई… आअहह रे मेरे भोले बालम….उउफ़फ्फ़ क्या मस्त लंड है रे तेरा…

उउऊयईी..माआ…बोलते हुए उसने अपनी तीन उंगलियाँ एक साथ अपनी चूत में पेल दी…!

लेकिन जैसे ही उसे हाल ही फटी चूत का दर्द महसूस हुआ उसने उन्हें फ़ौरन बाहर निकाल लिया और उपर से ही उसकी फांकों को मसल्ने लगी…!

उसे अब आने वाली रात का बेसब्री से इंतेजर था, जब वो भोला के फनियल नाग को अपनी चूत में डाल कर रबड़ी का स्वाद ले रही होगी…!

नहा धोकर वो बिस्तर पर लेट गयी, और भोला के लंड को अपनी प्यासी आँखों में बसाए सो गयी…!

शाम को उसने मुन्नी को भेजकर चुप-चाप से आधा किलो ताज़ा-ताज़ा रबड़ी बाज़ार से मंगवा ली, मुन्नी के पुच्छने पर उसने बहाना बना दिया कि आज वो उनके (कल्लू) के साथ बैठकर इसका स्वाद लेना चाहती है…!

अब उसे रात का इंतेज़ार था, जब सभी अपने-अपने बिस्तरों में जाकर सो चुके होंगे और वो अपने नये प्रेमी भोला के झूले में झूलने जाए…!

और वो समय भी आ पहुँचा जब चारों तरफ सन्नाटा पसर गया, वो दबे पाँव हवेली के बड़े से दरवाजे के एक पल्ले में बनी एक छोटी सी खिड़की से बाहर निकल गयी पर जाते जाते उसे बाहर से बंद करना नही भूली…!

उधर भोला भर पेट खाना खाने के बाद अपने घेर में जानवरों के बीच खुले आसमान के नीचे खर्राटे ले रहा था…!

लाजो ने अंधेरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई, जब पूरी तरह आस्वस्त हो गयी की कोई उसे देखने वाला नही है, तो चुपके से घेर का मुख्या द्वार धकेल कर वो अंदर गयी और जल्दी से उसे अंदर से बंद कर दिया…!

भोला अपनी खाट पर बिना बिछबन के ही खर्राटे मार रहा था, जिसे देखकर लाजो का चेहरा खिल उठा,

राबड़ी का डिब्बा उसने खाट के सिरहाने ज़मीन पर रख दिया और वो खुद उसकी खाट की पाटी पर बैठकर उसे बिना जगाए उसने उसके सोए हुए नाग को लूँगी से बाहर निकाला और अपनी हथेली में दबाकर सहलाने लगी…!

इस समय वो किसी मरे हुए चूहे जैसा लग रहा था, लेकिन जैसे ही उसकी हथेली की गर्मी मिली, उसमें जान पड़ने लगी, देखते ही देखते वो उसकी मुट्ठी में अपना आकार लेने लगा और किसी रब्बर के पाइप जैसा हो गया…!

उसके बढ़ते आकार को देखकर लाजो की वासना भी उसी अनुपात में बढ़ने लगी, वो अब उसे तेज-तेज हिलाने लगी.., जैसे ही वो थोड़ा कड़क सा हुआ, उसने उसे फ़ौरन अपनी जीभ से चाट लिया…!

उसके पेलरों को सहलाते हुए वो उसे अपनी जीभ से पूरी लंबाई तक चाटने लगी, अब वो अपनी फुल फॉर्म में आ चुका था, फिर जैसे ही उसने उसे अपने मुँह में लिया…!

भोला ने अपनी कमर उचका कर अपने मूसल को उसके गले तक पहुँचा दिया…!

लाजो ने झट से उसे अपने मुँह से बाहर निकाला और उसकी तरफ देख कर बोली – बड़े चालू हो भोला राजा…, जागे पड़े थे तो बताया क्यों नही..?

भोला ने उसे अपने उपर खीच लिया और उसके गाल काट’ते हुए बोला – बताकर मे तेरा मज़ा खराब नही करना चाहता था.., चल अब चूस इसे…!

लाजो – ऐसे नही, आज की रात में तुम्हारे साथ यादगार रात बनाना चाहती हूँ, चलो कोठे में चलकर बिस्तर ज़मीन पर लगा लो, वहीं मज़े करेंगे…!

भोला उसकी चुचियों दबाते हुए खाट से उठकर बोला – चल जैसी तेरी मर्ज़ी, देखता हूँ, कैसे मज़े करवाती है, लेकिन उससे पहले ये बता, तू मेरे लिए क्या लाई है..?

लाजो – वहीं जाकर बताउन्गी, पहले चलो तो सही…!

कोठे में जाकर भोला ने ज़मीन पर एक फटा पुराना सा बिछबन डाल दिया, दोनो आमने सामने उसपर बैठ गये…,

लाजो ने अपने पल्लू से रबड़ी का डिब्बा निकाला, जिसे देखते ही भोला ने उसके हाथ से झपट लिया, एक डिब्बी की रोशनी में जब उसने उसे खोलकर देखा तो उसकी बान्छे खिल उठी…!

जैसे ही उसने उसे ख़ान एके लिए हाथ बढ़ाया, लाजो ने उसकी कलाई पकड़ ली, भोला ने उसकी तरफ ताज्जुब भरी नज़रों से देखा तो वो मुस्कुराते हुए बोली …

ऐसे तो हर कोई ख़ाता है, आज मे तुम्हें कुछ अलग तरारीक़े से खिलाउन्गी मेरे भोले राजा.., ये कहकर उसने अपनी सारी और ब्लाउस निकाल दिए, ब्रा के हुक खोलते हुए बोली…

आज ये पूरी रबड़ी तुम्हारे लिए है, लेकिन इसे मेरे बदन पर डालकर उसे चाट-चाट कर खाओ, फिर देखो कितना स्वाद बढ़ जाता है इसका…!

भोला – क्या सच कह रही है तू, ये और ज़्यादा स्वादिष्ट हो जाएगी.., उसकी बात पर लाजो ने मुस्करा कर अपनी गर्दन हां में हिला दी…!

 
Back
Top