• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है complete

रात की खामोशी और अंधेरे में हम दोनो बेहन भाई की तेज तेज चलती साँसों की आवाज़ कमरे में गूँज कर कमरे में जिंदगी और दो जवान जिस्मों की मजूदगी का अहसास दिला रही थी.

“दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके”

कुछ देर के बाद सुल्तान भाई आहिस्ता से मेरी टाँगों के दरमियाँ से उठा और बिस्तर से उतर गया.

में अंधेरे में ठीक से देख नही पा रही थी. इस लिए मैने ये अंदाज़ा लगाया कि शायद वो बाहर बाथरूम में जाने लगा है.

मगर फिर कुछ की लम्हों बाद जब वो दुबारा आकर बिस्तर पर मेरे नज़दीक लेट गया.

भाई ने अंधेरे में मुझे अपनी तरफ खींचा तो में किसी “कटी पतंग” की तरह अपने भाई की बाहों में सिमटती चली गई.

भाई की छाती से लगते ही मुझ अंदाज़ा हो गया कि मेरा भाई अपने पूरे कपड़े उतार कर बिल्कुल नगा हो चुका है.

और भाई के नंगे जिस्म से छूते ही मेरे जिस्म में एक करेंट सा दौड़ गया.

सुल्तान भाई ने मुझ अपने नज़दीक करते हुए अंधेरे में ही मेरे चेहरे को अपने हाथों में थाम कर उपेर उठाया. और अपने खुरदरे होंठों को मेरे गर्म गर्म और नाज़ुक होंठों पर रख दिया. फिर अपनी ज़ुबान निकाल कर मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.

उफफफ्फ़, क्या मज़ा था, आज पहली बार मेरा भाई मुझ अपनी बीवी समझ कर मेरे रस भरे होंठों का मज़ा ले रहा था.

साथ ही साथ सुल्तान भाई ने मेरे हाथों को मेरे सर से उपर कर के मुझे मेरी कमीज़ और ब्रा के बोझ से भी आज़ाद कर दिया.

भाई ने अब मुझ अपनी बाँहों में ज़ोर से दबा कर मुझे अपने उपर लिटा लिया ऑर अपने हाथों से मेरे 38डी साइज़ के मोटे मम्मो को मसल्ने लगा तो में मज़े से मदहोश होने लगी.

उस ने अपना एक हाथ मेरी ऑलरेडी गीली ऑर चिकनी फुद्दी पर रख दिया ओर उसे मसलने लगा. उस की इस हेरकत से मेरी सिसकारी निकल गई.

साथ ही भाई ने अपने हाथ से मेरी कमर को पकड़ कर मेरे जिस्म को अपनी तरफ झुकाया.

इस स्टाइल में मेरे मम्मे मेरे भाई के मुँह के बिकलूल सामने चले आए.

भाई अपना मुँह खोल कर मेरे लाइट ब्राउन कलर के निपल्स को मूँह में ले कर किसी छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा.

कभी वो निपल्स पर ज़बान फेरता कभी निपल्स को अपने लिप्स से चूस्ता और कभी अपने दाँतों से आहिस्ता से उन पर “धंडी वेदता” (बाइट्स) करता.

भाई का इस तरफ मेरा मम्मो को सक करने से मेरा तो बुरा हाल हो गया था.साथ ही साथ उस के हाथ भी मेरी क़मर पर घूमते हुए हल्का हल्की मसाज कर रहे थे.

नीचे से भाई का गर्म और पत्थर की तरह सख़्त अकडा हुआ लंड मेरी टाँगों के बीच आ कर मेरी पानी से शराबोर चूत के दरवाज़े पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक दे कर मेरी फुद्दी के अंदर आने की इजाज़त तलब कर रहा था.

लगता था कि बेहन की चूत की गर्मी की पुकार को भाई के लंड ने भी सुन लिया था.

और एक अचाहे भाई की तरह भाई का लंड भी अपनी बेहन की चूत की गर्मी को ठंडा कर एक अच्छे फर्ज़ शनस बेहन चोद लंड होने का सबूत देने के लिए मचल रहा था.

जैसे “लंड ना हुआ,वॉटर कूलर हो गया”

जब कि उपर हम दोनो एक दूसरे के मुँह में मुँह डाल कर एक दूसरे की ज़बान को चूस रहे थे.

कुछ देर इसी तरह लेटे लेटे सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड पर अपने हाथ रख दिये और मेरी गान्ड को अपने हाथों में दबाते हुए मेरी टाँगे खोलने लुगा.

में समझ गई कि वो अब मेरी फुद्दी के अंदर अपना लंड डालना चाहता है. में थोड़ी सी उपर हुई और भाई का गर्म सख़्त और तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी फुद्दि के होंठों पर रगड़ा.

और फिर अपने आप को आहिस्ता आहिस्ता नीचे ले जाते हुए भाई के लंड को अपनी पानी छोड़ती गरम फुद्दी में दाखिल होने की इजाज़त दे दी.

मेरे भाई और मेरे शोहर गुल नवाज़ के लंड लंबाई और मोटाई मे तो तकरीबन एक ही जैसे थे. लेकिन मेरे भाई के लंड की टोपी गुल नवाज़ से थोड़ी मोटी थी.

इस लिए ज्यूँ ही सुल्तान भाई का लंड मेरी चूत के लबों से स्लिप हो कर मेरी टाँग फुद्दी के अंदर आया तो मुझ शादी शुदा होने का बावजूद थोड़े “मीठे दरद” का अहसास हुआ और बे इकतियार मेरे लबों से एक हल्की सी चीख निकल पड़ी.

“उफफफ्फ़ लगता है आज तो तुम ने अपनी चूत पर “फिटकरी” लगा कर इसे “तंग” किया हुआ है नुसरत”सुल्तान भाई ने नीचे से अपने लंड को एक ज़ोरदार झटके से मेरी चूत में डालते हुए कहा.

भाई के ज़ोरदार झटके से मेरे मम्मे उछाल कर भाई की छाती से टकराए और साथ ही हम दोनों के मुँह से सिसकारी निकल गई.

उफफफफफ्फ़ क्या मज़ा था. में अपने भाई के लंड के उपर बैठ कर तेज़ी से उपेर नीचे हो रही थी.जब कि भाई ने मेरे मम्मो को अपने मुँह में ले कर सक करना शुरू कर दिया था.

मेरे मम्मे भाई के मुँह में थे और मेरी गर्दन पर उस के हाथ फिर रहे थे. और वो मेरी भारी गान्ड को अपने हाथों में थाम कर धक्के लगा रहा था.

नीचे से सुल्तान भाई अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डालते और फिर उसी तेज़ी से उसे बाहर निकाल रहे थे.

अब मैं अपने मम्मे को भाई के मुँह से निकाल कर थोड़ी पीछे की तरफ हो कर अपने भाई की ज़ोरदार चुदाई का पूरा मज़ा लेने लगी.

भाई के लंड की मेरी चूत मे हर धक्के के साथ मेरे बड़े बड़े पोस्टन (मम्मे) मेरी छाती पर उच्छल रहे थे.

अचानक ही भाई की चुदाई की रफ़्तार तूफ़ानी हो गई और में अपने भाई के लंड के उपर किसी खिलोने की तरह हवा मे उछल रही थी.

ऐसी जबर्जस्त चुदाई का मज़ा मैने आज तक नही लिया था.

में तो अभी इस मज़े से ही बे हाल हो रही थी कि भाई ने यका युक मुझे खींच कर अपने लंड से उतरा और मेरा मुँह अपनी टाँगो की तरफ कर दिया.

इस स्टाइल में अपने भाई के उपर लेटने से अब मेरी चूत मेरे भाई के मुँह के उपर चली आई जब कि मेरा मुँह मेरे भाई की टाँगो की तरफ चला गया.

भाई ने मेरे नीचे लेट कर मेरी चूत को अपने मुँह में लिया और मेरी फुद्दी के अंदर अपनी गर्म और नर्म ज़बान डाल दी.

अहह ईईईईई ऊऊऊवाआआ करते हुए में अपने भाई की टाँगों की तरफ झुकती चली गई.जिस की वजह से उस का लंड मेरे मुँह के बिल्कुल करीब आ गया.

ज्यूँ ही मेरा मुँह भाई के लंड के करीब हुआ मुझे एक अजीब और तीखी सी गंदी किसम की बू भाई के लंड से आती हुई महसूस हुई. जो कि मुझ बहुत नागवार गुज़री और मैने अपना मुँह भाई के लंड से अलग करने की कॉसिश की.

“मेरे लौडे को अपने मुँह में डाल इसी तरह चूसो जिस तरह में तुम्हारी फुद्दी को चूस रहा हूँ नुसरत” भाई ने अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर उसे नीचे अपने लंड की तरफ झुकाते हुए कहा..

मैने तो आज तक अपने शोहर गुल नवाज़ का लंड कभी नही चूसा था. और आज मेरा अपना भाई मुझे अपनी बीवी समझ कर मुझे चुदाई के इस नये मज़े से “रोशनास” करवाने पर तुला हुआ था.

 
धन्यवाद दोस्तो अपडेट कल आएगा एक और नई कहानी के साथ
 
मुझ लगता था कि नुसरत मेरे भाई के साथ ये सब कुछ करती है. इस लिए अगर आज में नही करूँगी तो भाई शायद गुस्से में आ कर मुझे कुछ कहे.

या आज लंड ना चूसने की वजह पूछे तो फिर मुझे ना चाहते हुए भी “बोलने” पर मजबूर होना पड़ेगा. जिस की वजह से मेरा सारा राज़ खुल सकता था..

में सोचने लगी कि अब जब इतना कुछ हो चुका था तो “लंड चुसाइ “का “तजुर्बा” करने में भी कोई हर्ज नही है.

इस लिए मैने सुल्तान भाई की टाँगों के दरमियाँ अपना सर झुका कर अपना मुँह खोला और अपनी चूत के जूस से भरपूर अपने भाई के लंड का टोपा को मुँह में डाल लिया.

लंड को अपने मुँह में डालते ही पहले तो मुझे अजीब सी घिन होने लगी.जिस की वजह से मैने जल्दी से भाई के लौडे को अपने मुँह से बाहर निकाला ऑर थूकने लगी.

लेकिन दूसरी तरफ सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड को अपने हाथों से खोला और अपने मुँह को थोड़ा उपर कर मेरी गान्ड के सुराख पर ज़ोर से “थूका” और साथ ही अपनी ज़ुबान की नुकीली टिप को मेरी गान्ड के सुराख में डालकर मेरी “थूक” से भरपूर गान्ड को चाटने और चोदने लगा.

उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ भाई की इस हरकत ने तो मेरे तन बदन में एक नई आग लगा दी. वो क्या मज़ा ऑर लज़्जत थी कि में ब्यानकर सकती थी..

में खुद को कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश कर रही थी...लेकिन इतना मज़ा ऑर मज़े की शिद्दत इतनी ज़यादा थी कि मेरी बर्दास्त से बाहर हो गया.

फिर हर बात और बू से बे परवाह हो कर एक मैने जोश में फॉरन अपने भाई के लंड को अपने मुँह में ले लिया.

अब में जोश में इतनी गरम और मस्त हो गई कि भाई के लंड पर लगे अपनी चूत के पानी को भी अपनी ज़ुबान से चाट चाट कर पागलों की तरह सॉफ करने लगी.

सुल्तान भाई नीचे से एक दम उपर हुआ और भाई का लंड एक ही झटके में मेरे हलक के अंदर तक जा पहुँचा.

में तो आज अपने भाई के हाथों चुदाई की ये नई मंज़िलें पा कर हर रिश्ता भुला बैठी थी.

अब मेरे उपर बस एक जिन्सी जनून सवार हो गया. और इसी जुनून के हाथों मजबूर हो कर मैने भाई के लंड पर अपनी ज़ुबान फेरते फेरते भाई के टट्टों को मुँह में लिया और उन को एक एक कर के चूसने लगी.

भाई भी मेरी इस हरकत से जैसे पागल हो गया. वो मज़े से आआअहह की आवाज़ें निकाल रहा था...

में भी इसी तरह अपने भाई के लिए आज की ये रात एक यादगार बनाना चाहती थी. जिस तरह भाई मुझे सेक्स के नये तरीके सिखा कर मेरे लिए इस रात को यादगार बना रहा था.

ये ही सोचते हुए मैने भाई के टट्टो को छोड़ कर अपना मुँह थोड़ा मज़ीद नीचे की तरफ किया और भाई की गान्ड की “मोरी” पर अपनी ज़ुबान रख दी.

ज्यूँ ही मेरी ज़ुबान सुल्तान भाई की गान्ड के सुराख को टच हुई तो पहले तो भाई ने एक दम अपनी गान्ड को ज़ोर से जकड़ा जैसी उसे “गुदगुदी” हुई हो.

मगर दूसरे ही लम्हे जब मैने ज़ुबान भाई की गान्ड पर दुबारा फेरी तो मज़े के मारे भाई की ज़ुबान से सिसकयों का एक सेलाब उमड़ आया.

“लगता है तू तो मुझे आज मार ही डालेगी नुस्तू” भाई ने मज़े से सिसकियाँ बढ़ाते हुए कहा.

भाई अब तेज़ी से मेरी गान्ड के साथ साथ मेरी फुद्दी भी चाट रहा था और में उस का लंड,टट्टो और गान्ड को चूस रही थी. और हम दोनो की सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं.

इतनी देर में मेरी चूत से 2 बार पानी बह निकला तो भाई ने वो सारा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया.

मुझे डर था कि अगर में कुछ देर और भाई के लंड को चुसुन्गि तो भाई भी ज़रूर मेरे मुँह में ही फारिग हो जाएगा.

जब कि में अपने भाई का वीर्य अपने मुँह में नही बल्कि अपनी चूत के अंदर डलवाना चाहती थी.इस लिए थोड़ी देर बाद में भाई के उपर से उठ कर भाई के पास बिस्तर पर लेट गई.

भाई ने मुझे अपनी बाहों में लेकर गले से लगाया. हम दोनो ने लंड और फुद्दी के जूस और पानी से भरे अपने होंठ एक दूसरे के मुँह में डाले और में भाई के मुँह में उस के अपने लंड का जूस और वो मेरी चूत का पानी अपने होंठो से मेरे मुँह में मुन्तिकल करने लगा. साथ ही साथ भाई मेरे तने हुए मम्मो से भी खेलने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने बिस्तर से नीचे झुक कर अंधेरे में ही फर्श पर करीब ही पड़ी अपनी कमीज़ को टटोल टटोल कर तलाश किया और फिर अपनी कमीज़ की पॉकेट से कुछ निकाल कर बोला “ नुसरत देख में तेरे लिए शहर से “झांझर” (पायल) लाया हूँ”

इस के साथ ही अपनी लाई हुई झांझर को मेरी पाँव की पिंड्लीयो पर बाँधने लगा.

भाई का इस तरह मुझे झांझर का तोहफा देना ऐसे ही था जैसे सुहाग रात को कोई शोहर अपनी बीवी को मुँह दिखाई में तोहफा देता है.

लेकिन मेरे लिए ये मुँह दिखाई की नही बल्कि चूत चुदाई और गोद भराई की रसम और रात थी.

मुझे पायल पहनाने के बाद सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड के नीचे एक तकिया रखा और मुझे बिस्तर पर दुबारा लिटा दिया. तकिये की वजह से अब मेरी चूत थोड़ा और उपर हो गई थी.

भाई ने मेरी टाँगों को खोला और उसने मेरी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख लीं.

साथ ही भाई ने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के बीच रखा और एक ज़ोर दार धक्का मारा और अपना लंड मेरी चूत में जड तक डाल दिया.

भाई मेरे उपर झुक गया और मेरे होठों को अपने मुँह में ले कर मुझ तेज तेज चोदने लगा.

भाई का गर्म लंड मेरी फुद्दी के अंदर तक पहुँच रहा था. और भाई की तेज चुदाई की वजह से मेरी पानी छोड़ती चूत बे हाल हो कर शर्प शरप और थरप थरप की आवाज़ निकल रही थी. जब कि झटकों की वजह से मेरे मोटे मम्मे भी हिलने शुरू हो जाता

मैने मज़े से मदहोश हो कर अपने होंठ भाई की गर्दन पर रख दिये और इस के शोल्डर्स को चाटने ओर काटने लगी और अपनी फुददी को उस के झटको के साथ साथ टाइट और लूस करने लगी.

मेरे पैरो की पायल मेरे भाई के हर धक्के के साथ “छुन छुन” करती हुए बज रही थी.

पायल की आवाज़ से भाई को मज़ीद जोश आने लगा और वो मुझे तेज़ी के साथ चोदने लगा

सुल्तान भाई ने मेरे पैरों को पकड़ कर बहुत ही तेज़ी के साथ मेरी चुदाई करनी शुरू कर दी.

वो मेरी चूत में लंड को अंदर डालते वक़्त मेरे पैरों को दबा देते थे तो मेरी चूत और ऊपर उठ जाती थी और उस का लंड मेरी चूत की गहराई तक घुस जाता था.

“दूरी ना रहे क्यों आज इतने करीब आऊ

में तुम में समा जाऊ तुम मुझ में समा जाओ”

इस गाने के अल्फ़ाज़ की तरह हमारे जिस्म भी पूरी तरह एक दूसरे में समा रहे थे.

 
आअहह म्म्म्म मह क्या फीलिंग हो रही थी... में ब्यान नही कर सकती कि मुझे कितना मज़ा आ रहा था...

में भाई के लंड को अपनी बच्चेदानी के मुँह पर महसूस कर रही थी.

फिर वक़्त आ ही गया जिस का मुझे और मेरी फुद्दी को बहुत शिदत से इंतिज़ार था.और जिस की खातिर मुझ मजबूरन आज ये गुनाह भरा कदम उठाना पड़ रहा था.

उधर भाई के लंड से उस के वीर्य का बाँध टूटा. इधर मेरी चूत ने अपनी पानी छोड़ते हुए मेरी बच्चे दानी का मुँह खोल दिया.

और फिर मेरी “ट्यूब्स” में से गुज़र कर हम दोनो बहन भाई के बच्चा पैदा करने वाले “जर्रास्मुन” (स्पर्म्ज़) का मिलाप मेरी बच्चे दानी की गहराइयों में हो ही गया.

सुल्तान भाई ने अपने लंड के थिक जूस के “सेलाब” से मेरी चूत को भर दिया.

मेरा शोहर एक हफ्ते में कभी इतना वीर्य मेरी चूत में नही डालता था.जितना भाई ने एक ही रात में मेरी चूत में उंड़ेल दिया.

भाई थक कर मेरे जिस्म के उपर की गिर गया. लेकिन भाई का लंड अभी तक मेरी चूत में पूरा अंदर तक धुंस कर झटके पर झटके मार रहा था.

हम दोनो बहन भाई बिस्तर पर एक दूसरे के उपर नीचे बेसूध पड़े थे और हमारे जिस्म पसीने की वजह से चिप चिपा रहे थे.

कुछ लम्हे बाद सुल्तान भाई का लंड सुकड कर मेरी चूत से बाहर निकला.तो साथ ही भाई के लंड का पानी भी मेरी चूत से बह बह कर चूत से बाहर निकलने लगा.

भाई मेरे जिस्म से अलहदा हो कर मेरे बराबर ही बिस्तर पर गिर गया.

मेरे साथ लेटने के थोड़ी देर बाद ही भाई ने खर्राटे लेना शुरू कर दिए. जिन को सुनते ही में समझ गई कि भाई फारिग हो कर अब पूर सकून नींद के मज़े लेने लगा है.

मैने इस मोके को गनीमत जाना और अपनी सांसो को संभालती जल्दी से बिस्तर से उठी और अंधेरे में अपने कपड़े तलाश कर के पहन लिए.

कपड़े पहन कर कमरे की खिड़की से परदा हटा कर बाहर झाँका तो अंदाज़ा हुआ कि सुबह होने के करीब है.

में और नुसरत ने एक दूसरे के कमरों से निकल कर वापिस अपने अपने कमरे में जाने के लिए सुबह की अज़ान के टाइम का सेट किया हुआ था.

इस लिए में बे सबरी से अज़ान होने का इंतिज़ार करने लगी. कुछ देर बाद ज्यूँ ही अज़ान की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी तो मेरी जान में जान आई.

में दबे पावं चलती हुई कमरे से बाहर निकली तो नुसरत को कमरे के बाहर ही खड़ा पाया.

हमारी आँखे एक दूसरे से मिलीं तो हम दोनो के चेहरों पर एक मुस्करहट सी दौड़ गई. मगर बिना कुछ बात किए हम दोनो ने जल्दी से अपने अपने कमरे में कदम रखे और फिर दरवाज़ा बंद कर दिया.

अपने कमरे में आते ही मैने फॉरन अपने पावं से भाई की दी हुई झांझर (पायल) को उतार कर हाथ में थाम लिया. मेरा इरादा था कि में दिन को किसी टाइम इस झांझर को नुसरत के हवाले कर दूँगी.

अपने कमरे में छाई खामोशी देख कर मैने अंदाज़ा लगा लिया कि मेरा शोहर गुल नवाज़ भी मेरे भाई सुल्तान की तरह चुदाई के बाद सकून से सो रहा है.

मेरे कमरे में भी अंधेरा ही था.इस लिए में अहतियात से चलती हुई अपने बिस्तर पर आ कर अपने शोहर के बराबर लेट गई. और झांझर को अपने तकिये के नीचे रख दिया.

अपने बिस्तर पर लेटते ही मैने एक सकून भरा सांस लिया. आख़िर कार मैने रात के अंधेरे में वो काम सर अंजाम दे ही दिया था. जिस को पहली दफ़ा सोचते हुए भी में शरम से कांप गई थी.

में भाई के साथ अपनी जबर्जस्त चुदाई से बहुत थक चुकी थी. इस लिए जल्द ही मुझे नींद ने घैर लिया और में सो गई.

दूसरे दिन जब में सो कर उठी तो अपने बिस्तर को खाली पाया..मैने अपना तोलिया उठाया और बाहर बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई.

बाथरूम में कपड़े उतार कर जब मैने शीशे में अपना जिस्म देखा तो में हेरान रह गई.

मेरे बदन पर मेरे भाई की मस्त चुदाई के असरत और नामो निशान अभी तक बाकी थे.

मेरे मम्मो पर भाई के दाँतों के काटने के निशान बाकी थे. मेरे निपल्स भी मेरे भाई की भरपूर सकिंग से सूज गये थे.

जब के नीचे मेरी रानो पर जगह जगह दाँतों से काटनेके निशान अलग होने के अलावा भाई की जबर्जस्त चुदाई ने मेरी फुद्दी को भी थोड़ा सूजा दिया था.

और भाई के लंड का जूस जोकि मेरी चूत से बाहर निकल आया था. वो भी मेरी चूत और रानो पर जमा हुआ नज़र आ रहा था.

हाईईईईईईईईईईईई भाई की मेरे साथ उलफत का ये सबूत देख कर मेरी चूत फिर मचल ने लगी.

 
में ये बात खूब जानती थी. कि जो कुछ मेरे और भाई के बीच रात को हो चुका है वो अब कभी दुबारा नही होगा.

इस लिए अब में सिर्फ़ उस रात को याद कर के अपनी फुद्दी से खेलने के अलावा कुछ और करने से मजबूर थी. और इस लिए में अपनी फुद्दी में उगली डाल कर अपनी फुद्दी से खेलने लगी.

थोड़ी देर इस तरह अपने जिस्म से खुद लज़्जती करने के बाद मैने शवर लिया और फिर अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आ कर रसोई की तरफ चली आई.

रसोई की तरफ जाते हुए मेरा दिल धक धक कर रहा था. इस बात के बावजूद के रात को जो कुछ मेरे और भाई सुल्तान के दरमियाँ हुआ. वो रात की तन्हाई में हुआ था.

लेकिन इस के बावजूद नज़ाने क्यों मुझे अब अपने भाई का सामना करने में एक शर्म सी महसूस हो रही थी.

रोसोई में नुसरत अकेली बैठी नाश्ता बना रही थी. मुझ अंदाज़ा हो गया कि मेरा शोहर और भाई दोनो नाश्ता कर के अपने काम काज के सिलसिले में डेरे पर जा चुके हैं. ये बात जान कर मैने सकून का सांस लिया.

मुझ रसोई के अंदर आते देख कर नुसरत की तो खुशी से जैसे “आँखे” ही खिल गईं.

वो जल्दी से मेरी तरफ बढ़ी और बेताबी से पूछने लगी” क्यों बानो रानी फिर रात को अपने भाई से “ठुकवा” (चुदवा)लिया है ना”

मुझे नुसरत की बात सुन कर शरम तो बहुत आई मगर में सोच रही थी. कि अगर मैने अपनी भाई से रात को चुदवाया है तो क्या हुआ. मेरी तरह नुसरत भी तो अपने भाई से अपनी फुद्दी मरवा चुकी है.

इस लिए मैने सोचा कि पहले में इस को अपना और अपने भाई के दरमियाँ होने वाला सारा वाकीया सच सच बता दूँगी.

फिर उस से उस की और उस के भाई गुल नवाज़ की चुदाई का सारा किसा तफ़सील में नुसरत की ज़ुबान से सुन कर चस्के लूँगी.

ये ही सोचते हुए मैने नुसरत को अपनी तमाम दास्तान बयान कर दी.और साथ ही उस से अपने रात के सख़्त रवैये की माफी माँगते हुए उस के साथ देने का शुक्रिया भी अदा कर दिया.नुसरत मेरी सारी बात बहुत शौक और दिल चस्पी से सुनती रही.

“नुसरत अब तुम सूनाओ मेरे शोहर ने तुम्हे रात को तंग तो नही किया” मैने शरारती मुस्कुराहट में पूछा. में अभी उस को ये नही ज़ाहिर करना चाहती थी कि में उस के भाई गुल नवाज़ के साथ उस की चुदाई का सारा हाल खुद अपनी आँखो से देख चुकी थी.

“ सच पूछो तो रुखसाणा भाई गुल नवाज़ के साथ एक ही पलंग पर सोने के ख़याल ही से में बहुत डरी हुई थी.मगर भाई गुल नवाज़ तो कमरे में आते ही सो गया और शूकर है में अपने ही भाई के हाथों बे आबरू होने से बच गई” नुसरत मेरे मुँह पर ही झूट बोलते हुए रसोई से निकली और ये जा वो जा.

में उस के झूट को सुन कर उधर ही बुत बनी हेरान परेशान उसे जाता देखती रही.

अगर मैने खुद अपनी आँखों से उन की चुदाई का सारा मंज़र नामा ना देखा होता तो शायद में उस के झूठ पर यकीन कर लेती.

मगर मुझे ये बात समझ नही आई कि नुसरत क्यों अपनी और अपने भाई की चुदाई की बात मुझ से छुपा रही थी.

शायद वो इस बात से डर रही थी. कि कहीं में उस को ये ताना ना दूं कि जिस काम से वो मुझे मना कर रही थी. उस को वो खुद ही अपने भाई के साथ कर चुकी थी.

या फिर वो इस बात को राज़ में रख कर मुझे एक रंडी और अपने आप को सती सावित्री (इनोसेंट) साबित करना चाहती थी.

नुसरत के रसोई से जाने के बाद मैने नाश्ता किया और घर के काम काज में लग गई.

शाम को जब मेरा शोहर और भाई सुल्तान वापिस लोटे. तो उन की हालत से लग रहा था कि आज वो दोनो शराब पी कर नही आए थे.

ये बात मेरे लिए थोड़ी हेरान कन थी. क्यों कि शादी के बाद से अब तक वो दोनो तकरीबन हर शाम ही चुस्की लगा कर घर लोटे थे.

मैने रसोई में अपने शोहर गुल नवाज़ और भाई सुल्तान को खाना दिया.

खाना देते वक़्त में चुपके चुपके अपने भाई के चेहरे और जिस्म को देख रही थी.

भाई को देख कर मेरी नज़रों में रात वाला मंज़र दौड़ रहा था और नीचे मेरी चूत पानी पानी हो रही थी.

मैने इस से पहले लाखों दफ़ा अपने भाई को देखा था. मगर इस से पहले कभी मेरी हालत नही हुई थी.

खाने के बाद हम सब अपने अपने कमरों में चले गये. मेरी चूत बहुत गरम हो रही थी और उस को लंड की शिदत से तलब थी.

कमरे में जाते ही में अपने शोहर के लंड के उपर चढ़ गई. और उसी तरह अपने शोहर गुल नवाज़ से अपनी फुद्दी मरवाने लगी जिस तरह मेरे भाई ने काल रात मुझे अपने लौडे के उपर बैठा कर चोदा था.

आज मैने महसूस किया कि मेरी तरफ मेरा शोहर गुल नवाज़ भी एक नये जोश और वलवले से मुझे चोद रहा था.

दूसरी तरफ भाई सुल्तान कुछ काम के सिलसिले में अकेला ही शहर गया जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ घर में ही था.

सारा दिन में और नुसरत घर के काम काज में मसरूफ़ थीं. जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ बरामदे में कुर्सी पर बैठा हाथ की फन्खि से हवा ले रहा था.

काम काज के दौरान मैने नोट किया कि मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ से चोरी चोरी अपनी बहन नुसरत के जिस्म का बगौर जायज़ा लेने में मगन है.

पहले तो मैने इसे अपना वेहम समझा. मगर फिर जब नुसरत कपड़े धोने के लिए घर के सहन में आई तो में जान भूज कर अपने कमरे में चली आई.

ताकि ये देख सकूँ कि मेरा ख़याल सच है या फिर सिर्फ़ मेरा वेहम है.

में कमरे में जाते ही खिड़की के पर्दे के पीछे खड़ी हो गई और छुप कर बाहर देखने लगी.

बाहर सहन में नुसरत अपनी बड़ी गान्ड मटकाती इधर उधर घूम रही थी. और पीछे से मेरा शोहर बहुत गौर के साथ अपनी बहन की थिरकती गान्ड के नज़ारे लेने में मसरूफ़ था.

मेरा शक सच निकला कि गुल नवाज़ वाकई ही अपनी बहन के बदन से अपनी आँखों को सैंक रहा था.

में सोचने लगी कि शायद उस रात गुल नवाज़ को शक हो गया हो. कि बाथरूम में उस ने जिसे चोदा है वो उस की बीवी नही बल्कि बहन थी.

इसी लिए वो अब अपनी बहन के बदन को देख कर अपना शक दूर करना चाहता हो.या फिर वो वैसे ही आज गरम हो रहा था.

थोड़ी देर कमरे में गुज़ारने के बाद में बाहर निकली तो मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ बाहर आता देख कर उठ कर घर से बाहर चला गया.

में भी सब कुछ भूल कर फिर से घर के कामों मे जुट गई और इसी तरह ये दिन भी गुजर गया.

अगले दिन शाम को भाई सुल्तान और मेरा शोहर गुल नवाज़ रात का खाना खाने के बाद घर से बाहर दोस्तो से मिलने चले गये.

में उस वक़्त सहन में चारपाई पर बैठी उन को बाहर जाता देखती रही.

मुझे यकीन था कि आज फिर वो पी कर ही रात को देर से घर वापिस आएँगे. इस लिए में सोचने लगी कि अपने कमरे में जा कर सो जाऊं.

अभी में चारपाई से उठने का इरादा कर ही रही थी कि इतने में नुसरत मेरे पास आन बैठी.

 
Smoothdad wrote: ↑ 30 Nov 2017 14:43
शानदार अपडेट।

जारी रखे, आगे की प्रतीक्षा में
 
नुसरत को मेरे पास बैठे हुए थोड़ी देर हो गई मगर उस ने मुझ से कोई बात नही की. लेकिन उस के अंदाज़ से पता चल रहा था कि वो मुझ से कोई बात करना चाहती है मगर कर नही पा रही.

“नुसरत लगता है तुम किसी गहरी सोच में हो,मुझे बताओ क्या बात है” मुझ से जब रहा ना गया तो मैने आख़िर कार उस से पूछ ही लिया.

नुसरत: रुखसाना में तुम से ये पता करना चाहती हूँ कि एक रात अपने भाई सुल्तान के साथ गुज़ारने के बाद क्या तुम प्रेग्नेंट हुई हो या नही?”

में:नहीं अभी तक चेक नही करवाया और ना ही मेरे अभी पीरियड्स आए हैं, वैसे तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो नुसरत”

“वो असल मेन्ंणणन्” नुसरत कुछ कहते कहते खामोश हो गई.

में: वो क्या नुसरत?

नुसरत: वैसे तो मुझे पता है कि मेरे शोहर सुल्तान का “वीर्य” बहुत ताकतवर है और अक्सर एक दफ़ा में अपना काम दिखा देता है मगर्र्रर”

में: मगर क्या, नुसरत मुझे पहेलियाँ मत बुझाओ और खुल कर बात करो”

“वो में कहना ये चाह रही थी कि अगले दो तीन दिन बाद हमारे अम्मी अब्बू घर वापिस आ जाएँगे. और जैसा कि तुम जानती हो कि आज भी हमारे शोहर पी कर ही घर आएँगे तो अगर तुम चाहो तो एक रात दुबारा अपने भाई के साथ गुज़ार लो ताकि बच्चा होने में किसी किसम की कसर ना रहे” नुसरत ने झिझकते हुए धीमी आवाज़ में मुझे कहा.

“क्याआआआआआ” आज हेरान होने की शायद बारी मेरी थी.

नुसरत खामोश रही और उस ने मेरे “क्या” का कोई जवाब नही दिया. मुझे नुसरत की कुछ वक़्त पहले की कही हुई बात याद आ गई.

जब उस ने मुझ बताया था. कि उसे अपने शोहर सुल्तान के साथ कॉंडम लगे लंड की चुदाई का मज़ा नही आता. वो कॉंडम के बगैर चुदाई का मज़ा लेना चाहती है मगर मज़ीद बच्चे पैदा करने का ख़ौफ़ से ऐसा करने से महरूम है.

में समझ गई कि नुसरत को अपने भाई से एक दफ़ा चुदवा कर उस के लंड का चस्का लग गया है.

चस्का चस्का लगा है चस्का

बुरा है चस्का............................

क्यों कि गुल नवाज़ के साथ चुदाई में बच्चा होने का कोई डर ख़तरा नही था. इस लिए वो कॉंडम बगैर अपने भाई से दिल भर कर अपनी फुद्दी मरवा सकती थी.

“पिछली दफ़ा तो जल्दी सो जाने की वजह से गुल नवाज़ ने तुम्हे “तंग” नही किया मगर इस दफ़ा वो कुछ कर बैठा तो” मैने नुसरत को टटोलने के अंदाज़ में पूछा.

“तुम इस बात की फिकर मत करो में ऐसा कुछ नही होने दूँगी” नुसरत ने फॉरन जवाब दिया.

उस की अपने भाई से दुबारा चुदवाने की बेताबी को देख कर मेरे होंठों पर एक शैतानी मुस्कुराहट दौड़ गई.

मेरा दिल तो चाहा कि में नुसरत को बता ही दूं. कि में उस की और उस के भाई गुल नवाज़ की बाथरूम में होने वाली चुदाई को अपनी आँखों से देख चुकी हूँ. मगर फिर कुछ सोच कर खामोश हो गई.

“अगर तुम चाहती हो तो में एक रात और अपने भाई सुल्तान के साथ हम बिस्तरी कर लेती हूँ, लेकिन याद रखना कि अगर कुछ गड़बड हो गई तो सुल्तान और गुल नवाज़ हमें क़तल कर देंगे” मैने नुसरत को कहा.

ये हक़ीकत थी कि पकड़े जाने के ख़ौफ़ से इस दफ़ा नुसरत घबराई हुई थी.

“कुछ नही हो गा तुम फिकर मत करो” नुसरत ने मेरी रज़ा मंदी देख कर खुशी से मुझे तसल्ली देते हुए जवाब दिया.

फिर पहली रात की तरह हम दोनो एक दूसरे के कमरे में जा कर अंधेरे में बिस्तर पर लेट गईं.

मैने बिस्तर पर लेटने से पहले ही अपने कपड़े उतार दिए ताकि सुल्तान भाई बिस्तर पर आते साथ ही मुझ पर चढ़ दौड़े.

कुछ टाइम बाद सुल्तान भाई कमरे में दाखिल हुआ और आ कर मेरे साथ पलंग पर लेट गया.

में इस इंतिज़ार में थी कि कब मेरा भाई मुझे अपनी बाहों में ले कर अपना लंड मेरी फुद्दी में डाल दे.

मगर सुल्तान भाई के अंदाज़ से महसूस हो रहा था.कि वो आज फुद्दी मारने के मूड में नही था.

इस लिए वो मेरे साथ लिपटने की बजाय बिस्तर की दूसरी तरफ करवट बदल कर सोने की कॉसिश करने लगा.

भाई का ये रवईया देख कर मेरे अरमानो पर तो जैसे ओस पड़ने लगी.

मुझे लगने लगा कि आज मेरी पानी छोड़ती चूत को अपने भाई का लंड शायद नसीब ना हो.

अब सबर करने के अलावा क्या हो सकता था. इस लिए में भी अपनी फुद्दी को तसल्ली देती हुई अपनी आँखे बंद कर के सोने की तैयारी करने लगी.

अभी मेरी आँख पूरी तरह लगी भी नही थी. कि साथ वाले कमरे में से आती हुई हल्की सी सिसकियों और पलंग की थॅप थॅप के साथ दीवार से टकराने की आवाज़ ने एक दम मेरी आँख खोल दी.

ये आवाज़े सुन कर में फॉरन समझ गई कि दूसरे कमरे में मेरा शोहर गुल नवाज़ अपनी बहन नुसरत की फुद्दी पूरे ज़ोरो शॉरो से मारने में मशगूल है.

अभी में इन आवाज़ो को सुन कर मज़ीद गरम होना शुरू हुई थी. कि मेरे पीछे से मेरे भाई ने करवट बदल कर मेरे नंगे बदन को अपनी बाहों में भर लिया और बोला” अगर तुम्हारा भाई मेरी बहन को सोने नही दे रहा तो में क्यों उस की बहन को सकून से सोने दूं”

ज्यूँ ही सुल्तान भाई के हाथ मेरे नंगे बदन से टकराए वो अंधेरे ही में हैरान होते हुए बोला” ओह हो बहन तो बहन आज तो मेरी बेगम चुदवाने के लिए पहले से ही तैयारी कर के बैठी हुई है”

साथ ही भाई के अपने कपड़े उतारने की आवाज़ मेरे कान में पड़ी और कुछ देर बाद सुल्तान भाई मेरी टाँगें उठा कर साथ वाले कमरे से आती आवाज़ के साथ तान से तान मिला कर मुझे चोदने में मसरूफ़ हो गया.

उस रात भी मेरे भाई ने मुझ मुक्तिलफ स्टाइल में भरपूर तरीके से चोद चोद कर मेरी प्यासी चूत को अपने लंड के पानी से सराब किया और मेरी बच्चे दानी में अपना बीज बो दिया.

दूसरी सुबह फिर उसी तरह में और नुसरत अज़ान के वक़्त वापिस अपने अपने कमरों में चली आईं.

सुबह में देर तक सोती रही और जब सो कर उठी तो दोपहर का वक़्त हो रहा था.

मैने बिस्तर से उठते वक़्त अपने बालों की क्लिप को तलाश करने के लिए तकिये के नीचे हाथ मारा तो क्लिप के साथ साथ सुतलान भाई की दी हुई पायल भी मेरे हाथ लग गई. जो कि में नुसरत को देना भूल गई थी.

मैने सोचा कि में पायल को दुबारा तकिये के नीचे रखने की बजाय क्यों ना इस को पहन लूँ. और जब नुसरत मुझे मिले गी तो उस को उतार कर दे दूँगी.

ये ही सोच कर मैने वो पायल अपने पावं में बाँध ली और फिर अपने बलों में क्लिप लगाती कमरे से बाहर चली आई.

मैने कमरे से बाहर निकल कर देखा तो घर में कोई भी नही था.

गुल नवाज़ और सुल्तान भाई के बारे में तो मुझे यकीन था कि वो डेरे पर चले गये होंगे.

जब कि नुसरत के बारे में मुझे शक था कि वो भी शायद गुल नवाज़ और सुल्तान को लस्सी पानी देने के लिए डेरे पर गई हो गी.

मुझे भूक बहुत लगी हुई थी. इस लिए मैने नहाने से पहले चाय के साथ रस ली और फिर नहाने के लिए बाथरूम में जा घुसी.

नहाने के बाद मैने अपने जिस्म को पूरा खुसक भी ना किया और थोड़े गीले बदन पर ही अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर निकल आई.

जब में बाथरूम से बाहर निकली तो उस वक़्त मेरी कमीज़ मेरे गीले बदन से चिपके होने की वजह से मेरे गुदाज मम्मे मेरी कमीज़ में से बहुत ज़्यादा नज़र आ रहे थे.

जब कि बाथरूम के फर्श पर पानी पर खड़ा होने की वजह से मैने अपनी शलवार को थोड़ा उँचा कर के बाँधा हुआ था. जिस वजह से मेरी टाँगों की पिंदलियां और टखने नंगे हो रहे थे.

में अपने पावं में पड़ी पायल को” छन छन” की आवाज़ में छनकाती ज्यूँ ही बाहर निकली तो मेरी नज़र बाहर खड़े अपने भाई सुल्तान पर पड़ी.

सुल्तान एक बुत की तरह मेरे सामने जमा खड़ा था और एक हेरतजदा चेहरे के साथ उस की नज़रे मेरे पावं में पहनी हुई पायल पर जमी थीं.

सुल्तान भाई की नज़र अपने पावं में पड़ी पायल की तरफ़ जमी देख कर मेरे चेहरे का रंग ही उड़ गया.

अब हालत ये थी कि हम दोनो बहन भाई एक दूसरे के सामने दम ब खुद खड़े थे.

और सुल्तान भाई की नज़रे तेज़ी के साथ मेरे पावं से ले कर चेहरे तक जा कर मेरे पूरे जिस्म का मुयाइना कर रही थीं.

“ये”झांझर” (पायल) तुम्हारे पास कैसे आई” सुल्तान भाई ने सख़्त लहजे में मुझ से सवाल किया.

“ वो भाईईइ वूऊ” मैने हकलाते हुए जवाब दिया.

सही बात ये थी कि भाई के सवाल का मुझ से कोई जवाब नही बन पा रहा था.

मुझे यूँ हकलाते देख कर सुल्तान भाई जैसे सारा मामला बिना बताए ही समझ गये थे.

कि रात के अंधेरे में जिसे उस ने अपनी बीवी समझ कर तोहफे में पायल पहनाई थी. और फिर दिल भर कर उस की फुद्दी से लुफ्त अंदोज़ हुआ था .वो उस की बीवी नही बल्कि उस की अपनी सग़ी बहन निकली.

और शायद ये ही बात सोच सोच कर सुल्तान भाई का चेहरा गुस्से से लाल पीला हो रहा था.

इधर मेरी ये हालत थी. कि अपनी चोरी इस तरह पकड़े जाने पर में एक ज़िंदा लाश की तरह अपने भाई के सामने खड़ी थी.

और में ये सोच रही थी. कि काश मेरे पावं के नीचे से ज़मीन फट जाय और में उस में ज़िंदा दफ़न हो जाऊ.

इस से पहले कि सुल्तान भाई मज़ीद कुछ कहता या पूछता. मैने हिम्मत कर के अपने आप को संभाला और अपनी आधी नंगी होती हुई छातियों को अपने दुपट्टे से छुपाती अपने कमारे की तरफ भाग निकली.

कमरे में दाखिल हो कर मैने अपना दरवाज़ा बंद करने की कोशिस की मगर सुल्तान भाई ने बाहर से एक ज़ोरदार धक्का मार कर कमरे के दरवाज़े को खोल दिया.

में भाई के गुस्से से डर कर अपने बिस्तर पर जा बैठी और भाई से नज़रें चुरा का थर थर काँपने लगी.

 
Back
Top