• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

बहन का दर्द Complete



उधर रवि अलका को आज दिल से चख कर आया था और वह बहुत ही खुस लग रहा था, रात के दो बज चुके थे लेकिन दोनो मे से किसी को नींद आने का नाम ही नही ले रही थी, अलका अपने मन मे सोचती हुई, अगर मैं रवि को आइ लव यू कह दूं तो रवि मेरे साथ क्या करेगा, क्या वह मुझे सच मुच पूरी नंगी करके मेरे बदन को चूमेगा, रवि के जब होंठ चूसने से

ही मुझे ऐसा लगता है कि मैं आसमान मे उड़ रही हूँ तो जब वह मुझे पूरी नंगी करके चूमेगा तो फिर मेरा क्या होगा,

ऐसा करने पर कितना अच्छा लगता होगा, पर मैं रवि से कैसे कहूँ की मैं अब उसके बिना जी नही सकती और अपनी सारी जिंदगी उसकी बाँहो मे गुज़ार देना चाहती हूँ, पर अगर रवि ने मेरा हाथ सारी जिंदगी के लिए नही थामा तो मैं तो जीते जी मर जाउन्गी, इन्ही सब बातों को सोचती हुई अलका सो जाती है,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

उधर नीचे ... रति और बिरजू सुबह की चुदाई का पहला राउंड पूरा कर चुके थे और.... दोनो बातें कर रहे थे....

रति : भैया मुझे लगता है ..रवि और अलका के बीच मैं कुछ चल रहा है....

बिरजू: थोड़ा चोन्कते हुए.... तेरे को कैसे पता चला....

रति : उनकी मान हूँ आखों की चमक दिख जाती है....

बिरजू , रति की चुचिओ को मसल्ते हुए.... तू ज़्यादा चिंता मत कर.... बच्चे तो वो हमारे ही हैं... देख लेंगे....

रति: कहीं जवानी के जोश मैं कुछ उल्टा सीधा नहीं कर ले....

बिरजू : क्या करेंगे...? .ज़्यादा से ज़्यादा चुदाई कर लेगे..हँसते हुए जैसे हम ने की थी ..तू ज़्यादा फिक्र मत किया कर...मैं देख लूँगा....

हम भी तो भाई बेहन हैं..... बिरजू रति की चुचिओ को मसल्ते हुए.....वो हमारी ही औलाद हैं.... संभाल लेंगे.... उन्हे...

तुम ने उसे गौर से नहीं देखा कैसा निखार आ रहा है.... चुचियाँ और चौड़े-चौड़े चूतड़..... सब पूरे शबाब पर हैं.....हां देखे हैं....

रति : आश्चर्य से बिरजू को देखते हुए..... अपनी बेटी को ऐसे देखते हो शरम नहीं आती ....

बिरजू : अरे पगली तू तो ज़रा ज़रा सी बात पर शक़ करती हो.... नज़र तो रखनी पड़ती है अपने बच्चों पर.....

रति : तो क्या सोचा.....?

बिरजू: कुछ बातें समय पर छोड़ दिया कर..... और एक गहरी साँस ली....

रति: चलो भैया खेत पर कितने काम पड़े हैं... मजदूर आ गये होंगें....

बिरजू : हां मैं तो बातों मैं भूल ही गया......

रति : अलका को आवाज़ देते हुए.... सुन मैं और तेरे मामा खेत पर जा रहें हैं...आज कटाई चल रही है खेतों मैं...तुम दोनो नाश्ता कर के कॉलेज के लिए निकल जाना...

अलका : माँ थोड़ा रुकना मैं नहाने जा रही हूँ और ये कुम्भकरण अभी तक सो के नहीं उठा....

रति- ठीक है मैं नीचे वेट कर रही हूँ.....

अलका की आवाज़ से रवि की नींद खुलती है...और ये सुन कर कि दीदी नहाने जा रही है वो सोचता है क्यों ना सुबह की शुरुआत दीदी के चूमने से करे.....

वो उठा कर सीधे अलका के रूम मे जाता है... वो रूम मैं नहीं थी... वो समझ जाता है क़ी दीदी बाथरूम मैं है...

वो बाथरूम के दरवाजी पर जाता है और और छेद से देखता है अलका अपने कपड़े उतार रही थी ...उसका लॉडा तन तना जाता है...

वो दरवाजे को नॉक करता है.... अलका कॉन ..

रवि-मैं हूँ दीदी रवि बोलता है...

अलका-क्या है... और मन ही मन मुस्करा देती है.... रवि को सुन कर ...

रवि=वो दीदी कुछ काम था...

अलका: क्या काम है...

रवि: ज़रा दरवाजा तो खोलो....

अलका: नहीं खोलती तू जा मैं नहा कर नीचे आती हूँ...

रवि: कुछ ज़रूरी बात है सुनो ना ज़रा....

अलका: मुझे पता है क्या ज़रूरी बात ....

अलका ने जब तक अपने कपड़े उतार दिए थे और शीसे मैं अपने को निहार रही थी वो केवल ब्रा पेंटी मे थी.....शीशे मैं अपनी नथ देख कर वो सोचती है साले ने क्या गिफ्ट दी है...... बहुत प्यार करता है ना मुझको..... और मन ही मन मुस्काती है....

बाहर रवि दरवाजा पीट रहा था.....

अलका दरवाजा खोलते हुए.... केवल अपनी गर्दन निकाल कर क्या है....?

रवि वो दीदी एक मॉर्निंग क़िस्सी चाहिए थी.....

रवि-नहीं देनी इतना कह कर वो दरवाजा बंद करती है लेकिन रवि दरवाजे मैं अपना पैर अड़ा देता है....

रवि: माँग थोड़े ही रहा हूँ लेने आया हूँ.... और इतना कहा कर रवि बाथरूम के अंदर आ जाता है.....

अलका-बाहर निकल बदमाश ...अलका उसे मारने लगती है ....पर वो कहाँ मान-ने वाला था....वो अलका को अपनी बाहों मे ले लेता है....और अलका के गुलाबी लॉली पोप जैसे गालों को चूसने लगता है........और तुरंत ब्रा मैं क़ैद उसके मोटे दूध पर टूट पड़ता है..... और ज़ोरों से मसल देता है..... लौंडिया चुहुक उठती है......और मन ही मन सोचती है कमिने का प्यार कितना वाय्लेंट है.....चल छोड़ मुझे .....और रवि को लगता है जैसे हलवाई की दुकान मे लूट मची हो.... वो तो आज अलका को मसल मसल के सारा सुख लेना चाहता था.....

रवि के नंगे हाथों से चुचियाँ मिसलवाने से अलका के चू-चक खड़े हो जाते हैं.....

.

रवि अलका की ब्रा उपर चढ़ा देता है.... और उसके कड़क चूचकों को अपने मुहँ मैं भर लेता है.......और दाँतों से काट -काट कर उन्हे दुलार्टा है.....ओह रवि बहुत दर्द हो रहा है....प्लीज़ दांतो से मत काट...... खून निकल आएगा....

 
रवि अपनी दीदी की आखों मे देखता है.....उसे उस मे प्यार ही प्यार दिखता है.... और आखें मिलने से अलका शरमा जाती है.....

हाआआऐययईई..............कितनी सेक्शकशकशकष्यययययययययययययययी लगती हो दीदी जब तुम शरमाती हो..... और इतना कह कर रवि उसके होठों को अपने होंठो से मिला देता है.......और एक गहरी स्मूचिंग किस करने लगता है अलका भी अपना मुहँ खोल देती है....और दोनो एक दूसरे की जीभ चूसने लगते हैं..... और रवि अलका के कड़क चुचकों को ज़बार हाथों से मसलता रहता है.... दोनो चूचक लाल-लाल हो जाते हैं....

तभी नीचे से रति आवाज़ लगती है कितनी देर लगाएगी नीचे आने मे....अलका ओ अलका....

अलका जल्दी से अलग होने की कोशिश करती है....पर हाइ..... ये क्या और उसके मुहँ से एक चीख निकल जाती है............

माआआआआआआआआआआआआआआआआआ.........................उसके चीख से पूरा घर गूँज जाता है......

रति घबरा के उपर की तरफ भागती है.....

असल मैं अलका की नथ का मोती स्मूछिंग किस के समय रवि के बालों से उलझ जाता है....और उसे बहुत दर्द होता है....

दोनो एक दूसरे को छूटने को कोशिश करते हैं पर ....बाल नथ से पूरी तरह घूतम गुथा हो जाते हैं......

इस लिए रवि भी उसी मुद्रा मे खड़ा रहता है...दोनो की समझ मे नहीं आता क्या करें.... और उसकी नाक मे भी बहुत दर्द होता है......

तभी रति दौड़ती हुई.... अलका के रूम मे आती है....अलका को रूम में ना पा कर...उसका ध्यान बाथरूम की तरफ जात है ...और सोचती है कहीन्न ...लड़की फिसल तो नहीं गयी.....

वो दौड़ कर बाथरूम का दरवाजा खोलती है....और देखती है..

रति की आँखे..... फटी की फटी रह जाती है...वो नज़ारा देख कर......

दोनो एक दूसरे से चिपके खड़े हुए थे..और अलका ब्रा पेंटी मैं थी.... और उसकी चुचियाँ खुली हुई थी....

रति की कुछ समझ मे नहीं आता और सोचती है ...कि क्या चल रहा है....और ये दोनो मेरे सामने भी ऐसे क्यों खड़े हुए हैं...

रति दोनो के बीच मे आती है.... अलका का चेहरा उसके बालों से ढका हुआ था...वो उसके बालों को हटा ती है....

अलका तो जैसे शरम से घड़ी जा रही थी.....

क्या हुआ...रति थोड़ा गुस्से मे....

अलका इशारे से दिखाती है..... कि रवि के बाल उसकी नथ से फस गये हैं.....

तब जा कर रति को सारा माजरा समझ मे आता है.....

वो बाहर आकर कैंची ढूंड कर लाती है.....और रवि के बाल काटती है...... और दोनो एक दूसरे से अलग होते हैं ...अलका जल्दी से अपनी चूचिओ को ब्रा मे करती है और तौलिया ओढ़ लेती है......उसकी नाक इस खींचा तानी मे लाल हो कर सूज जाती है.....

रति: क्या चल रहा था यहाँ ? आज उसने दोनो को रंगे हाथों पकड़ा था और उसका शक़ यकीन मे बदल जाता है.....

दोनो चुप-चाप खड़े रहते हैं ... किसी के पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं था........

रति दोनो का चेहरा देखती है...और फिर मुस्कराती हुई गाना गुन-गुनाने लगती है...

मुझे तो तेरी नथ लग गयी -लग गयी..... लत ये ग़लत लग गयी..... मुझे तो तेरी नथ लग गयी लग गयी....

अलका का शरम से बुरा हाल था......और वो दौड़ कर बाथरूम में चली जाती है......रवि भी सर झुकाए... अपने रूम मे चला जाता है....उसकी समझ मे नहीं आता इस स्तथि मे वो क्या बोले ...पर माँ के मुस्कराने से वो थोड़ा रिलीफ महसूश करता है.......

थोड़ी देर मे रवि और अलका तैयार हो जाते हैं पर दोनो की नीचे जा कर माँ को सामना करने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी ...जो बात अब तक उन दोनो के बीच मे थी अब वो माँ को भी पता चल गयी थी,,,और माँ ये बात मामा को भी बता देगीं....इसी उधेड़ बुन मे दोनो बातें कर रहे थे...

अलका: तुझे भी रवि ज़रा सा सबर नहीं है...

रवि: मैने क्या किया....

अलका: देख माँ को सब पता चल गया

रवि: पता चल गया तो चले ...और ये पता तो चलना ही थी....मैं कोई चुपके -चुपके तुम्हे चोदना नहीं चाहता मैं तो तुम्हे अपनी दुल्हनिया बना ना चाहता हूँ.....

अलका: चुप बेशरम हर समय एक ही बात ... बेशर्मी की हद होती है....

रवि : अलका को चूमते हुए.....चलो नीचे चलो .... माँ वेट कर रही होगी.....

अलका : तू पहले जा...मैं आती हूँ.....

रवि तैयार होकर नीचे आता है

माँ , मामा कहाँ हैं....

रति-खेत पर गये हैं.... वहाँ आज कटाई चल रही है.....रति मुस्काती हुई बोलती है...... और यहाँ .....?

रवि: और यहाँ क्या हंसते हुए माँ से पूछता है...?

रति: और यहाँ चुदाई चल रही है...!

रवि ने पहली बार माँ के मुहँ से ये शब्द सुना था.....

रवि-नहीं माँ ऐसा कुछ नहीं है जैसा आप सोच रही है ... और माँ के गले मे बाहें डाल देता है....

रति चल छोड़ मुझे ....रति किचिन की तरफ चली जाती है........

रवि किचिन मे आ जाता है ... और फिर रति के पीछे से आ जाता है....

मेरी अच्छी मेरी प्याली प्याली माँ......

रति: आज माँ पर बड़ा प्यार आ रहा है.....

रवि: ओह माँ तुम नहीं जानती तुम कितनी प्याली हो इतना कहा कर रवि रति को पीछे से पकड़ लेता है....

रवि के ज़बरात लंड का अहसास रति को अपनी गान्ड मे होता है...... सही मे रति की गान्ड उसकी बेहन से ज़्यादा फूली हुई है.... इसी अहसास से रवि का लंड फिर झटके मारता है...और रति की गान्ड हिलने लगती है.....

रति: ज़्यादा मस्का मत लगा......बोल क्या चाहिए...

रवि: आज मैं जो मागुँगा वो आप दे दोगि.....

 
रवि: आज मैं जो मागुँगा वो आप दे दोगि.....

रति: बोल तो सही....मैं भी तो जानू तेरे मन मे क्या है....

रवि: पहले वादा करो....

रति: चल वादा.... रहा..

रवि: ठीक है माँ मेरा एक वरदान आप पर उधार रहा...मैं जब चाहूं उसे ले लंग

.....

तभी अलका नीचे आ जाती है.....

रति: मुस्कराते हुए....आओ मेरी बन्नो रानी बड़ी निखरी निखरी दिख रही हो.....हाई मेरी बन्नो की नाक को क्या हो गया कितनी लाल पड़ी है !

अलका शरम से गढ़ी जा रही थी..... असल मे उसकी नाक रवि के बालों मे नाथ फस्ने के कारण खिच गयी थी इस लिए सूज के लाल हो गयी थी.....और उसकी आखें भी लाल हो रही थी पर फिर भी लौंडिया गजब की सेक्शकशकशकष्यययययययययी लग रही थी... उसने खुले गले का गुलाबी सलवार सूट डाला हुआ था....

रवि: माँ क्यों दीदी को चिढ़ा रही हो ....

रति: रवि को मारते हुए..... तू मुझे सिखाएगा.....!

माँ दोनो को गले लगा लेती है.....मेरे बच्चे....... तीनो बहुत भावुक हो जाते हैं....

सब साथ मे नाश्ता करते हैं....

ब्रेकफास्ट के बाद रति बोलती है... अच्छा बच्चो मैं फार्म पर जा रही हूँ.....और आज सारी फसल कटी हुई फार्म पर रखी हुई है... तो मैं और मामा रात मे खेत पर ही रहेंगे.....

रवि-ठीक हैं माँ........

रति दोनो को प्यार करती है और रवि की तरफ मुहँ करके , ध्यान रखना मेरी गुड़िया काअ...यू नॉटी......

अब हाल मे रवि और अलका थे....

अलका- ऐसे क्या देख रहा है...नालयक....

रवि: आज क्या लग रही हो ...सही मैं ये नथ आप पर बड़ी सेक्शययययी लग रही है....

अलका : ज़्यादा हीरो मत बन नहीं तो पिटेगा.... अब जल्दी चल ...तेरी वजह से कितनी प्राब्लम हो गयी....

रवि- अरे दीदी अभी से अभी तो कॉलेज मे टाइम है,

अलका- रवि आज हम कॉलेज नही जा रहे है,

रवि- मगर क्यो

अलका- क्योकि आज मैने तेरे साथ दिन भर घूमने का प्लान बनाया है,

रवि- कुछ सोचने लगता है और, अपने मन मई, आज ये दीदी को क्या हो गया है..

अलका- अब तू क्या सोचने लगा

रवि- ठीक है दीदी घूमने चलते हैं

रवि- मगर चलना कहाँ है

अलका- आज तेरी जहाँ मर्ज़ी हो मुझे ले चल

रवि- कुछ सोचता हुआ, अच्छा दीदी तुम्हारा कुछ शॉपिंग करने का मूड है या एंजाय

अलका- शॉपिंग नही हम लोग एंजाय ही करते है ना,

रवि- तो दीदी भीड़-भाड़ वाले प्लेस पर एंजाय करोगी या शांत प्लेस पर,

अलका- शांत प्लेस पर क्या एंजाय करने के लिए होगा,

रवि- अरे दीदी शांत प्लेस पर जब तुम मेरी बाँहो मे होगी तो कोई देखने वाला नही होगा ना

अलका- रवि की पीठ पर मारते हुए, तो तेरा एंजाय का मतलब यह था,

रवि- तो और क्या मतलब होता है एंजाय का\

अलका- अरे पागल कहीं खाएगे-पिएगे, घूमेंगे-फिरेंगे और क्या

रवि- दीदी ऐसे बोर कामो मे मुझे बिल्कुल मज़ा नही आता है

अलका- तो फिर तुझे कौन से काम मे मज़ा आता है,

रवि- कहीं एकांत जगह हो जहाँ आपकी प्रेमिका आपकी बाँहो मे सिमटी हो और आप उसे प्यार से चूमते हुए उसके उलझे

बालो की लातों को संवार रहे हो, इस तरह के एंजाय मे मज़ा आता है दीदी,

अलका- तो बेटे उसके लिए कम से कम एक प्रेमिका होना चाहिए और तेरे पास तो है ही नही, फिर तू कहाँ से इस तरह का एंजाय कर लेगा,

रवि- क्या बात करती हो दीदी तुम हो ना मेरी प्रेमिका

अलका- मूह बना कर बड़ा आया प्रेमिका बनाने वाला, अब चल जहाँ चलना हो,

रवि अपनी बाइक स्टार्ट करके बाइक चलाता हुआ, दीदी सबसे पहले तो मैं तुमको एक गरमा-गरम कॉफी पिलवाता हूँ फिर

देखते है कि हम कहाँ जा सकते है, अलका अपने भाई रवि से चिपक कर बैठी हुई थी, कुछ देर बाद रवि सहर के एक केफे हाउस के सामने अपनी बाइक रोक देता है और अलका उतर जाती है और दोनो बैठ जाते है, रवि कॉफी ऑर्डर कर देता है और फिर मुस्कुरा कर अलका को देखने लगता है,

अलका- मुस्कुरा कर ऐसे क्या देख रहा है,

 
रवि- तुम्हारी खूबसूरती और ये प्यारी नथ....

अलका- मुस्कुरा कर, क्या मेरी नथ बहुत खूबसूरत है

रवि- नही

अलका- अपनी हँसी अपने चेहरे से गायब करती हुई, क्यो

रवि- तुम बहुत खूबसूरत हो कि नही यह मैं नही जानता लेकिन मुझे तुम दुनिया मे सबसे ज़्यादा खूबसूरत लगती हो,

अलका- अपने चेहरे पर फिर से मुस्कुराहट लाती हुई, रवि तुझे लड़किया पटाने के अच्छे आइडिया आते है,

रवि- फिर भी लड़किया पटती कहाँ है

अलका- उसमे भी तेरी ही ग़लती है

रवि- वो कैसे

अलका- हो सकता है कोई लड़की तुझे दिलो जान से चाहती हो और शरमाती हो, पर तू आगे बढ़ता ही नही होगा तो वह तुझसे कैसे पटेगी,

रवि- अलका को घूर कर देखते हुए, हाँ तुमने यह तो सही कहा है कि मैं ज़्यादा आगे नही बढ़ पता हूँ इसलिए लड़किया

ज़्यादा नखरा दिखाने लगती है और मुझसे नही फँसती है, लेकिन फिर मैं भी ज़्यादा भाव खाने वाली लड़कियो को ज़्यादा दिन तक वेट नही करता, और वैसे भी दीदी तुमने एक कहावत तो सुनी ही होगी

अलका- कौन सी कहावत

रवि- यही कि लड़कियो और बसों के पीछे ज़्यादा नही भागना चाहिए क्यो की एक जाती है तो दूसरी आ जाती है,

अलका- रवि तेरी थिंकिंग बहुत खराब है ऐसे तो तू मेरी जिंदगी बर्बाद कर देगा

रवि- दीदी मैं तुम्हारी बात थोड़े ही कर रहा हूँ

अलका- उसकी बात सुन कर एक दम झेप जाती है और उसे अपनी ग़लती का एहसास होता है, मेरा मतलब है कि तेरी इस तरह की सोच तो किसी भी लड़की की जिंदगी बर्बाद कर सकती है ना,

रवि- अलका की आँखो मे देखता हुआ, दीदी मैं जिस लड़की को चाहता हूँ, उसकी जिंदगी बर्बाद नही आबाद करना चाहता हूँ

बस वह लड़की एक बार हिम्मत करके मेरा साथ देने को तैयार हो जाए,

अलका- अपनी नज़रे रवि से हटाकर उपर की ओर देखती हुई मुस्कुरा कर, कौन है वो लड़की,

रवि- अलका को घूर कर देखते हुए, क्यो तुम नही जानती उसे

अलका- रवि से अपनी नज़रे इधर उधर करके, मुझे क्या पता तु कहाँ-कहाँ अपनी चाहत का इज़हार करता फिरता है,

रवि- दीदी तुमसे बेहतर मुझे कौन जान सकता है, और मुझसे बेहतर तुम्हे कौन जान सकता है, और मुझे तो लगता है

कि हम दोनो एक ही रह पार चलने वाले मुसाफिर है तभी तो हमारी सोच भी इतनी मिलती है,

तभी उनकी कॉफी आ जाती है और दोनो कॉफी पीते हुए एक दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगते है, कॉफी पीने के बाद

रवि- दीदी

अलका- हूँ

रवि- दीदी किसी सुनसान जगह पर चले जहाँ मैं और तुम हो और कोई ना दिखाई दे, यहाँ भीड़-भाड़ मई मज़ा नही आता है

हँ शांति से बात भी नही कर पाते है,

अलका- पर रवि ऐसी सुनसान जगह पर मुझे डर लगता है,

रवि- दीदी मैं हू ना तुम्हारे साथ फिर डरने की क्या बात है

अलका- रवि मुझे ऐसी सुनसान जगहों से नही तुझसे ही डर लगता है ना जाने वहाँ ले जाकर मेरे साथ क्या करेगा

रवि- तुम्हे क्या लगता है मैं तुम्हारे साथ क्या करना चाहता हू

अलका- मुस्कुरा कर मैं सब जानती हूँ तेरी नीयत को,

रवि- क्या जानती हो

अलका- यही कि तू मुझे..

रवि- हा..हा बोलो..बोलो

अलका- मुझे नही मालूम

रवि- अच्छा मत बताओ और जल्दी बोलो कहाँ चलना है,

अलका- रवि एक कम करते है हमारी सबसे अच्छी जगह कॉलेज का पार्क ही है चल वही चल कर बैठेंगे

 
रवि अलका की बात सुन कर मन ही मन, दीदी तुम कितना तड़प रही हो मेरी बाँहो मे आने के लिए, अब वो दिन दूर नही है जब तुम मेरी बाँहो मे सिमटी हुई मुझे चूम-चूम कर आइ लव यू रवि, आइ लव यू रवि, का जप करती नज़र आओगी

अलका- अब क्या सोचने लगा

रवि- कुछ नही

और अलका को बैठा कर सीधे पार्क मे पहुच गया, दोनो अपनी बेंच पर जाकर बैठ जाते है

रवि- हाँ दीदी अब बोलो

अलका- क्या

रवि- वही जिसके लिए तुम मुझे यहाँ ले कर आई हो

अलका- मुस्कुराते हुए मैं तो सिर्फ़ यहाँ टाइम पास के लिए आई हूँ

रवि- दीदी तुम अपने टाइम पास के चक्कर मई मेरा वक़्त बर्बाद करती हो

अलका- अपनी आँखे दिखाते हुए, अच्छा मेरे साथ रहने पर तेरा वक़्त बर्बाद होता है,

रवि- अच्छा नही होता पर इतनी दूर क्यो बैठी हो मेरे करीब आकर ब्सिती ना

अलका- क्यो, करीब क्यो आउ

रवि- दीदी करीब नही आओगी तो माब् तुम्हारी नथ को किस कैसे करूँगा

अलका- क्यो तू मुझे यहाँ किस करने लाया है, और खबरदार मेरे वहाँ बहुत दर्द है सो प्ल्स केर्फुल...हां

रवि- दीदी आओ ना

अलका- नही मैं यही ठीक हूँ

रवि- तुम आती हो कि मैं उठ कर आउ

अलका- रवि तू भी ना बस एक ही चीज़ के पीछे लगा रहता है

रवि- क्यो तुम नही चाहती कि मैं तुम्हे अपनी बाँहो मे भर कर तुम्हारे इन रसीले होंठो और इस सेक्सी नथ को किस करू,

अलका: एक नथ क्या दिलवा दी... मैं वहाँ किस करूँ....अपनी मूह से मुस्कुराहट को छुपा कर नही,

रवि- अच्छा ठीक है तो नही करता बैठी रहो वही दूर

अलका- मुस्कु कर, गुस्सा तो इतनी जल्दी तेरी नाक पर आकर बैठता है कि कुछ कह नही सकते,

रवि- अपना मूह फूला कर तुम्हे तड़पाने के अलावा आता क्या है,

अलका- मुस्कुराते हुए, रवि एक बात कहूँ तू गुस्से मे बिल्कुल अच्छा नही लगता

रवि- दीदी प्लीज़ आ जाओ ना

अलका- रवि को आँखे दिखाते हुए, रवि हर वक़्त एक ही बात

रवि- दीदी मैं कल से तुम्हे चूमने के लिए तरस रहा हूँ प्लीज़ आ जाओ

अलका- अपना सर झुका कर सीरीयस होते हुए नही रवि मुझे यह सब अच्छा नही लगता

रवि- दीदी यही बात एक बार तुम मेरी आँखो मे आँखे डाल कर कह सकती हो

अलका- रवि क्या हम ये सब ठीक कर रहे है

रवि- पहले करने तो दो फिर कहना ठीक किया कि नही

अलका- मुझे नही आना तेरे पास

रवि- तो ठीक है मैं ही आ जाता हूँ

और रवि उठ कर अलका के पास उससे चिपक कर बैठ जाता है अलका अपने दोनो हाथों को अपनी जाँघो के बीच दबाए

अपनी नज़रे नीचे किए रहती है और रवि जब उसके पास बैठ जाता है तो अलका की साँसे हल्के-हल्के तेज होने लगती है और

उसके दूध के निप्पल अपने आप बिना रवि के द्वारा कुछ किए हुए ही खड़े होने लगते है और उसकी चूत मे एक अजीब

सा तनाव महसूस होने लगता है, रवि अलका के पास बैठ कर उसके झुके हुए चेहरे को देखने लगता है अलका की नाक के नथ का मोती थर-थराने लगता है और अलका ना चाहते हुए भी अपनी नज़रो को नीचे झुकाए हुए रवि को नीचे देखते हुए भी देखने की कोशिश करने लगती है,

 
रवि अपनी गरम साँसे अलका के कानो के पास छोड़ता है और अलका के जिस्म के रोए खड़े होने लगते है, रवि धीरे से

अपने होंठो को अलका की गर्दन पर रख देता है और उसकी गर्म साँसे अलका को पागल करने लगती है, रवि के होंठ अलका

के गले पर धीरे-धीरे हरकत करने लगते है, और अलका अपनी आँखे बंद कर लेती है, रवि अपने हाथो से अलका की

बाँहो को पकड़ कर अपने सीने से लगा लेता है और अलका एक मूर्ति की तरह उसके उपर टिक जाती है, रवि जैसे ही अपने

हाथों को अलका की तनी हुई मोटी चुचियो पर लगाता है अलका रवि से कस कर चिपक जाती है और फिर रवि अलका को अपने बदन से पूरी तरह चिपका कर उसकी पीठ सहलाने लगता है, अलका रवि के सीने से चिपकी हुई गहरी-गहरी साँसे लेने लगती है और रवि अलका के गालो को अपने होंठो से सहलाने लगता है, रवि अलका के होंठो को अपने होंठो मे भर कर

उसका रस जैसे ही पीना शुरू करता है अलका अपने आप को रोक नही पाती है और रवि के होंठो को बेतहाशा चूमने लगती

है, रवि अलका के मोटे-मोटे दूध को पकड़ कर कस कर दबाता है और अलका का बदन एंथने लग जाता है और वह

रवि को कस कर अपने सीने से भींच लेती है और रवि अलका के दूध मे अपना मूह भर कर उसके सीने से चिपक जाता

है,

रवि- दीदी तुम मुझसे इस तरह क्यो चिपकी हुई हो,

रवि की बात सुन कर जैसे अलका को होश आता है और वह एक दम से रवि से अलग हो जाती है और उसका चेहरा शर्म से गुलाबी हो जाता है, रवि अलका को देख कर मुस्कुराता हुआ,

रवि- दीदी मुझे लगता है कि अब तुम रात भर सो नही पाती होगी,

अलका- रवि को मुस्कुरा कर देखती हुई, क्यो

रवि- क्यो कि जब जागती होगी तो मेरे बिना चैन नही आता होगा और जब सो जाती होगी तो मेरे सपने तुम्हे बेचैन करने

लगते होंगे,

अलका- तुझे क्या पता मुझे नींद आती है कि नही

रवि- ये तो तुम्हारी आँखे खुद बया कर रही है जिन्हे देख कर कोई भी कह सकता है कि तुम रात को ठीक से सोती नही हो

अलका- क्यो क्या हुआ है मेरी आँखो को,

रवि- दीदी सच बताओ तुम ऐसा क्यो कर रही हो

अलका- रवि को आँखे फाड़ कर देखती हुई, क्यो क्या कर रही हूँ मैं

रवि- दीदी अगर तुम्हे मेरे बिना नींद नही आती है तो आज से मैं रोज तुम्हारे उपर चढ़ कर, मेरा मतलब है

तुमहरे साथ सोउंगा,

अलका - मुस्कुरा कर उसकी कोई ज़रूरत नही है, मैं जानती हूँ तू मेरे साथ रात को क्यो सोना चाहता है,

रवि- मुस्कुरा कर, हाँ तो बताओ क्यो सोना चाहता हूँ,

अलका- शरमाते हुए, मुझे नही मालूम

रवि- दीदी मैं बताऊ

अलका- रवि को आँखे दिखा कर, कोई ज़रूरत नही है

रवि- नही दीदी मैं बता ही देता हूँ

अलका- अपने कानो को अपने दोनो हाथो से बंद करते हुए, अब तू बकता रह जो बकना है मुझे कुछ सुनाई नही देगा

 
Back
Top