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गुप्तगू... बहन के साथ भाग-3

Neelkamal626

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नमस्ते दोस्तों मै नील, आपने गुप्तगू भाग -2 पढा ही होगा तो चलो बढते है आगे....

मै दिशा को उठाकर मेरे बेडरूम मे लेकर गया और फिर शुरु हुआ वासना का खेल... दिशा घोडी बनी हुई थी। उसकी बडी गांड उपर उठी हुई थी और विशाल चुथडों को फाडकर मैने दिशा के गांड के होल पर हमला बोल दिया था। मै मेरी बहन की गांड का छेद जीभ से चाट रहा था। मैने दिशा के गांड मे जीभ डालना चाही और कमाल हो गया। जीभ इतनी आसानी से अंदर चली गई जैसे किसी खुली रींग मे उंगली। मै तो आश्चर्य चकीत हो गया। ऐसा कैसे हो सकता है। कल रात को ही मैने इसकी चुत का उद्घाटन किया है, इतनी टाईट चुत है, खून भी काफी सारा बह गया था। और गांड का होल इतना लूज की बडा सा खिरा भी आराम से चला जाए? मेरी जिभ तो दिशा की गांड मे पूरी की पूरी घुस रही थी। अंदर से टट्टी की खुशबू भी आ रही थी। मै चाटना बंद नही किया। मुझे तो इतना मजा आ रहा था की मैने ये भी नही पुछा की गांड कहां मरवाई हो? ये बाद मे भी पुछ सकते है।

कुछ देर चाटने के बाद मैने लंड को निकालकर दिशा के मूंह मे डाला, दिशा लंड को मूंह मे लेकर अच्छे से चुसने लगी। कुछ देर चुसने के बाद वो खुद ही मेरे सामने गांड उठाकर घोडी बनी और मुझे ईशारा किया, डालने का। मैने लंड को उसकी गांड मे उतारना शुरु किया। दिशा को कोई तकलिफ तो नही हुई मगर लौडा थोडा टाईट ही गया , क्योंकी मेरा लौडा चौढाई मे बहुत ही मोटा है, और आठ इंच लंबा भी है। शायद इतना मोटा नही लिया होगा दिशा ने अपनी गांड मे पहले कभी। फिर भी , पूरा अंदर दबाने के बार उसके मूंह से उम्म्म्म्म्म् ऐसी तेज आवाज निकलने लगी। लेकिन इस बार मैने उसपर कोई रहम नही दिखाया। और धक्के ऐसे मारने लगा जैसे जानबूझकर कोई रंडी को चोदता है।

दिशा भी हर धक्के के साथ उम्म् उम्म् करने लगी। मैने दिशा के मम्मे पकड कर चुदाई की रफ्तार फूल कर ली। करीब बीस मिनट तक लगातार दिशा की गांड मे , मेरे मुसल जैसे लंड की ठोकरे मारता रहा और हम दोनों एकसाथ हई स्खलित होकर बेड पर लेट गए। दस मिनट तक उसकी गांड मे लंड रखकर गांड पर ही लेटा रहा।

फिर हम दोनों एकसाथ बाथरूम मे गए, और नहाकर ब्रेकफास्ट किया, मैने दिशा को पुछा...

नील: दिशा मै कुछ पुछूंगा तो सच सच बताओगी?

दिशा: पुछो भैय्या..

नील: तुमने पिछे से कितनी बार मरवाया? कब ? और किसके साथ?

एकसाथ इतने सवाल और वो भी इस तरह के, दिशा पहले तो चौंक गई , लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए बोली...

दिशा: भैया इस चिज के लिए मै आपसे माफी मांगती हूं, पुणे मे काॅलेज मे मेरा एक बाॅयफ्रेंड था। उसके साथ मै फिसल गई थी, पर मैने आपके लिए आगे से कुवारी रखी है। ऋषी नाम है उसका, ऋषी के लाख प्रयासों के बावजूद मै आगे से उसे टच तक नही करने दिया , सिर्फ आपके लिए...

नील: क्या तुम्हे यकिन था की मै तुम्हारे साथ ये करूंगा?

दिशा: हां जब से आपने मुझे नंगी देखा था , आपकी नजर को मै बार बार पहचानती थी, मुझे खा जाने वाली नजर से तो देखते रहते आप... मुझे पता था एक दिन जरूर मुझे आपके निचे आना पडेगा और तब मै शरमींदा नही होना चाहती थी। इसलिए मैने आगे से उसको करने नही दिया, पर पिछे से रोका भी नही...

तभी मै सोच रहां था की इसके मम्मे और गांड इतनी बडी कैसे हो गई!!

दिशा: लेकिन भैया, अब से मै सिर्फ तुम्हारी हूं। आज के बाद मेरी जिंदगी में एक ही मर्द रहेगा और वो हो सिर्फ़ तुम। मै कसम खाती हुं, तुम चाहे जितनी भी औरतों के संपर्क मे आओ, मगर मै तो सिर्फ तुम्हारी ही होकर रहुंगी, मै कोई शादी भी नही करने वाली। मै हमेशा तुम्हारे साथ रहुंगी, तुम्हारा साया बनकर।

नील: तो फिर आज और अभी मै तुम्हे अपने पास लाउंगा....

और मै दिशा के बेडरूम मे जाकर उसके कपडे, सामान मेरे बेडरूम मे लेकर आया , दिशा सब देखती रह गयी, कुछ नही बोली। चुपचाप सामान को सेट करती रही। उस दिन मै ऑफिस मे भी नही गया, हम अपना रूम सेट करते रहे। सुनंदा ने भी हमारी हेल्प की। वो भी सोचती रही की ये क्या हो रहा है? पर बोली कुछ नही। सुनंदा गौर से देख रही थी... भाई-बहन एक ही बेडरूम मे कैसे शिफ्ट हो सकते है!!! और जब पुरा पंधरा रूम का बंगला खाली पडा हो!!! उसने दिशा से चुपचाप पुछ भी लिया, और दिशा ने भी कुछ बताया उसे। क्या बताया उसी को पता....

जब से दिशा मेरे साथ शिफ्ट हुई, मैने उसको बुरी तरहा चोदना शुरू किया था। दिन मे, रात मे, बाथरूम मे जब भी मौका मिले मै दिशा को दनादन चोदता था। दिशा ने बाहर जाना बंद कर दिया था। वो हमेशा मेरे इंतजार मे रहती। जैसे मै कही से आता वो चुदाई के लिए रेडी होती और मेरे अगल बगल घुमकर मुझे सेड्युस करती रहती। वो अब खाना भी नही परोसती थी। खाना परोसने का काम सुनंदा को करना पड रहा था। हम दोनो बेडरूम मे ही खाते पिते और उधर ही शुरू हो जाते।

मेरा बिझनेस बढ रहा था, वर्कर्स भी अब बढ रहे थे, और मेरे ऑफिस का दायरा भी काफी बढ गया था। मैने अपने कॅबिन मे सब सुविधाए बनवाई थी। अब तो मेरा ऑफिस मे भी मन लग रहा था। एक दिन की बात है, मै खाने का टिफिन भूल गया था। तो दिशा ने फोन करके बताया की मै टिफिन लेकर आ रही हूं। मुझे भी आज कोई काम नही था, तो मैने हां कह दियां।

थोडी देर मे ही दिशा ने दरवाजा खटकटाया...
दिशा: मे आय कम इन सर?

मैने देखा तो दिशा दरवाजे पर खडी थी... क्या लग रही थी!!! साडी पहने!!! बहुत ही सेक्सी... मै बस देखता ही रह गया।

दिशा: अंदर आने के लिए भी कहोगे या फिर इधर ही खडे रखोगे?
कितना ताकते हो? अच्छा है की मै तुम्हारे साथ ही हूं ... नही तो क्या करते मुझे देखकर? पता नही... अब तो छुट्टियां भी खतम होने वाली है मेरी... फिर किसे तकते रहोगे?

नील: अरे जानू अंदर आओ जल्दी, पता नही मुझे क्या हो जाता है ? साडी पे तो कहर ढा रही हो तुम...

वो अंदर तो आ गई पर अंदर आते वक्त दरवाजा बंद करके कुंडी लगा कर आ गई। और आके सिधा मेरी गोद मे बैठ गई। मेरे गले मे बाहों का हार डालकर मेरे ओठों पर किस किया और बोली आज तुम्हारे लिए एक सरप्राईज है... मैने कहां क्या? तो बोली आंखें बंद कर लो। मैने आंखें बंद करी... तकरीबन तिस-चालीस सेकंद के बाद.... दिशा ने मेरे मूंह मे दो उंगलीया डाली और ... मूंह मे घुमाने लगी... उसकी उंगली से अजिब टेस्ट आ रहा था... पहले पहले मुझे कुछ समझ मे नही आया, परंतू थोडी देर बाद मुझे ऐसा लगा की टेस्ट जाना पहचाना है। थोडा सा कडवा माठा खारा ...... फिर थोडी देर मे हल्की हल्की टट्टी की खुशबू आने लगी....फिर मै समझा की दिशा ने क्या हरकत करी!!!! मेरा लौडा ऐसा तन गया जैसे दिवार मे भी होल कर दे...

दिशा ने अपनी गांड मे खुब अंदर तक उंगलीया करी और फिर मेरे मुंह में डाली थी। दिशा की इस बचकानी हरकत से पहले तो मुझे गुस्सा आया था , पर तुरंत बाद मेरे लंड मे इतना जादा तनाव आया की मेरा सारा गुस्सा वासना और प्यार मे बदल गया। अब मुझे वो चिज चखनी है जहां से ये मुश्क निकली है... और वो भी अभी के अभी।


मैने दिशा की साडी मे हात डाला और जंघाओं से सरकाते हुए उपर की तरफ बडे बडे नितंबों पर लेकर गया। दिशा ने अंदर से पॅंन्टी नही पहनी थी। आह् क्या मुलायम और बडे है...चुथड... फिर मैने दोनों नितंबों के बिच की दरार मे उंगली ले जाकर गंतंव्य स्थान को ढूंडने लगा। चुथडों की दरार मे , उपर से निचे तक उंगली घुमाते हुए मुझे बिच मे एक जगह गड्डेनुमा और गीली जगह पर मेरी उंगली रूक गई। मैने उंगली को थोडा अंदर दबाया तो, उंगली धिरे धिरे अंदर चली गई। क्या एहसास था। क्या बताऊंगा दोस्तों....


फिर दिशा ने मेरा हात अपने हांतों से खिंचकर बाहर निकाला। मुझे निचे फर्श पर चित लिटाया, और मेरे सिर के दोनों तरफ पैर रखकर खडी हो गई। मुझे निचे से पुरा व्ह्यु आ रहा था। उसकी गोरी गोरी , मोटी टांगे, चुत , छोटी छोटी काली झांटे... सब दिख रहा था। दिशा फिर धिरेसे मेरे मुंह पर गांड का होल टिकाकर बैठ गई, और हल्के-हल्के रगडने लगी। मेरे लिए यह एक्सपरीयंन्स बिलकुल नया था। मै दिशा की गुदद्वार को चाटने लगा। और मैने धिरे से जीभ को उसकी गुदा मे प्रवेश कराया।


कितना एक्साईट था मै दोस्तों, क्या बताऊं... अंदर तक जीभ डाली मैने। वैसे तो इस चिज को मै अब तक गंदा मानता था, वही आज मुझे मजा दिला रही थी। मुझे जो टेस्ट मूंह मे आ रही थी, कमाल की लग रही थी। दिशा की गांड का होल चौडा था, इसलिए जीभ आसानी से घुसती थी।

काफी देर तक दिशा मेरे मूंह पर गांड रखकर बैठ थी। मैने जीभ उसके होल मे घुसा रखा था। उस दौरान गांड‌ से कुछ माल भी मेरे मूंह मे आ गया था। अजीब टेस्ट था। लेकिन सेक्स के नशे मे मुझे वो चिज बहुत अच्छी लग रही थी। काफी देर तक दिशा ऐसे ही बैठी रही। फिर दिशा उठकर खडी हो गई और मेरे पॅंन्ट के बटन खोलकर पॅंन्ट को निचे खिसका‌ दिया, और लंड को मूंह मे लेकर‌ चुसने लगी। चुस चुस कर लंड को गीला करने के बाद दिशाने साडी को कमर से उपर तक उठाया और मुझे ईशारे से सोफे की तरफ आने का ईशारा किया। फिर सोफे पर घुटने रखकर घोडी बन गई और गांड को हिलाने लगी। मै उठकर उसकी चौडी गांड के पस जाकर एक बार सुंघा... फिर जीभ से थोडासा होल को चाटने के बाद अपना हतियार उसकी गांड के होल पर फिट किया और जोर लगाया। लौडा धिरे धिरे करते पुरा दिशा की गांड मे घुस गया।

अब मै धक्के मारना शुरु किया। नका धक ... पेलने लगा। दिशा अपने मूंह से आह् आह् की आवाजे निकालने लगी। मै चोदते हुए दिशा की गर्दन पर चुमना शुरु कर दिया। जिससे दिशा और जादा गरम हो गई। उसने अपनी गांड को राउंड घुमाना शुरु किया। दिशा के गांड घुमाने की वजह से मै और जादा एक्साईट हो गया। फिर मै दिशा की पिठ पर झुककर पूरा वजन दिशा के उपर डाला और उसके मम्मों को पकड कर दबाने लगा। उपर से दिशा की गांड मे जोर जोर से धक्के लगाने लगा। जैसे कोई रंडी को चोदता है। पंधरा बिस मिनट मे मैने पूरा जोश दिशा की गांड मे उतार दिया। वो भी शांत हो गई।

फिर थोडी देर हम दोनों ने रेस्ट किया। फिर हमने कपडे ठिक किए। बाथरूम मे फ्रेश हो गए , दिशा ने मेरा किस करके घर की तरफ चली गई। तब से दिशाका अगर दिन मे कभी भी मूड बन जाता है तो वो ऑफिस मे आकर मेरे सए चुत और गांड मरवाती है। कभी मूंह पर गांड रखकर बैठ जाएगी तो कमी चुत। बहुत जादा सेक्सी है मेरी बहना। ऐसी बहन हो तो फिर शादी करने की क्या जरुरत है। हम घर मे भी पती-पत्नी की तरह ही रहते है।


इसी तरह दो महिने कब गुजर गए पता भी नही चला। फिर दिशा अगली पढाई के लिए आय आय एम बैंगलोर चली गई। और मै फिर अकेला रह गया। अगली कहानी मे बताऊंगा कैसे सुनंदा को चोदा।
तो दोस्तों कैसी रही कहानी , कमेंन्टस् करके जरूर बताईएगा।
 
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