अम्मी का पूरा जिश्म उस वक़्त हल्का सा काँपने लगा था, जिससे मुझे ये समझने में जरा भी देर नहीं लगी कि अम्मी की फुद्दी अब किसी भी वक़्त पानी छोड़ने वाली है, और अम्मी अंकल के हर झटके पे- “आअह्ह... सफदर और तेज करो मेरीईई जान... मेरा होने वाला है ऊऊहह फाड़ डालो मेरी फुद्दी को... कुतिया बना डालो मुझे उनम्म्म ह... ऊऊओ... आऐईयईई... सफदर...” की एक तेज आवाज के साथ ही अम्मी का जिम एक बार जरा मचला और फिर ढीला पड़ गया।
अम्मी निढाल सी होकर मेरे ऊपर गिर सी गई कि तभी बूंद-बूंद मेरी अम्मी की फुद्दी से बहता पानी उनकी रानों पे बहने लगा, जिसे मैंने चाट के साफ कर दिया और नीचे से निकल गया।
अम्मी के नीचे से निकलते ही मैंने अम्मी को अपनी तरफ खींचा और सीधा लिटा दिया और अपना लण्ड घुसाकर अपनी अम्मी की चुदाई करने लगा। तब सफदर अंकल ने अपना लण्ड अम्मी के मुँह में घुसा दिया और बड़ी बेदर्दी से अपना लण्ड अम्मी के मुँह में अंदर-बाहर करने लगे।
उस वक़्त अम्मी की हालत बड़ी काबिल-ए-रहम लग रही थी क्योंकी एक तरफ तो मैं उनकी ताबड़तोड़ फुद्दी मार रहा था और दूसरी तरफ सफदर अंकल उनके मुँह में अपना लण्ड घुसाकर चुसवा रहे थे। जिससे अम्मी के मुँह से पूँ-घून गलप्प्प-गलप्प्प की आवाज निकल रही थी, जो मुझे भी चरम की तरफ ले जा रही थी।
लेकिन मेरे पानी छोड़ने से पहले ही सफदर अंकल के मुँह से सिसकियों की आवाज निकलने लगी जो किऊऊहह सलमा सालीईई चुस्स ले आअहह... मेरा निकलने वाला है ऊऊओह...” की आवाज निकली। और फिर सफदर अंकल के जिश्म को हल्का झटका सा लगा और उनका सारा पानी अम्मी के मुँह के अंदर और बाहर भर गया, जिसे अम्मी बड़े प्यार से अपनी जुबान निकालकर अंकल के लण्ड को चाट के साफ करने लगी
।
ये मंजर देखकर मेरी अपनी बर्दाश्त भी खतम हो गई और में भी 6-7 तेज झटकों के साथ ही- “ऊओहह... अम्मी मैं आया...” की आवाज के साथ अम्मी की फुद्दी में फारिघ् हो गया, और उनके ऊपर ही निढाल सा होकर गिर गया।
फारिघ्र होने के बाद कुछ देर तक तो मैं अम्मी के ऊपर ही लेटा रहा। फिर उठकर अम्मी की साइड पे होकर लेट गया, तो अम्मी साइड से एक कपड़ा उठाकर अपनी फुद्दी को साफ करके उठी और अपने कपड़े लेकर बाथरूम की तरफ चल दी।
अंकल ने कहा- “क्या हुआ सलमा बेगम, कहाँ चल दी?”
तो अम्मी ने कहा- “बाथरूम जा रही हूँ जरा साफ सफाई भी तो करनी है ना?”
अम्मी की बात सुनकर अंकल ने कहा- “क्यों यार क्या और इरादा नहीं है तुम्हारा?”
अम्मी ने कहा- “नहीं जनाब अब जो भी करना है कल दिन में करेंगे, वो भी तुम्हारे मकान पे यहाँ नहीं.."
अंकल- यार सलमा, क्यों मजा खराब कर रही हो? तुम्हें पता है ना मुझे कितनी उलझन होती है इस तरह?
अम्मी- जी पता है, लेकिन आप शायद भूल रहे हैं कि साथ वाले रूम में फरी और निदा भी सो रही हैं।