पिंकी के मुँह से आहह निकल गयी उस दबाव को महसूस करके.
''आआआआहह साब...यहाँ तो सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा है...''
राजेश ने मुस्कुराते हुए उसके गले में बँधे हार को हाथो मे पकड़ा और बोला : "लगता है इस हार के भार की वजह से ये हो रहा है..इसे उतार दो.शायद ठीक महसूस हो..''
पिंकी ने बेमन से उसे उतार कर साइड में रख दिया..
राजेश घूमकर उसके पीछे आया और उसकी पीठ पर स्टेथोस्कोप लगा कर उसका मुआयना करने लगा..
पीठ पर बँधी डोरी तो खुल कर लटक चुकी थी इसलिए उसकी पूरी नंगी पीठ उसकी आँखो के सामने थी..
राजेश ने पूरी जाँच की और फिर अपने हाथ से उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसे थोड़ा सा दबाया.
एक बार फिर से एक मीठी सी सिसकारी निकल गयी पिंकी के मुँह से..
''आआआआआआआआआआआआआआआहह हाआँ साआब बहुत मीठा सा दर्द हो रहा है...ऐसे दबाने से आराम मिला है..''
राजेश : "ओह्ह मैं समझ गया..ऐसा ही एक केस मेरे हॉस्पिटल में आया था पहले भी...इसका बस एक ही इलाज है, तुम्हारे बदन की मालिश करनी पड़ेगी..''
पिंकी ने बिना सोचे समझे सिर्फ़ एक ही बात बोली : "तो कर दो ना साब.''
ये एक खुल्ला ऑफर था राजेश के लिए.
दोनो जानते थे की यही होने वाला है बाद में .
बस बेकार की बाते चोदने में लगे हुए थे इतनी देर से.
दरवाजे के पीछे छुपी रजनी भी पक सी गयी थी इतनी देर से वहां खड़े हुए..
पर अब वो मुस्कुरा रही थी क्योंकि असली एक्शन शुरू होने वाला था.
राजेश : "तो एक काम करो..ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ.''
पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके..
उसका बदन जल सा रहा था.
उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था.
पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ..
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था.
आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था.
अब असली तूफान आने वाला था कमरे में .
लॅंड का तूफान.
''आआआआहह साब...यहाँ तो सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा है...''
राजेश ने मुस्कुराते हुए उसके गले में बँधे हार को हाथो मे पकड़ा और बोला : "लगता है इस हार के भार की वजह से ये हो रहा है..इसे उतार दो.शायद ठीक महसूस हो..''
पिंकी ने बेमन से उसे उतार कर साइड में रख दिया..
राजेश घूमकर उसके पीछे आया और उसकी पीठ पर स्टेथोस्कोप लगा कर उसका मुआयना करने लगा..
पीठ पर बँधी डोरी तो खुल कर लटक चुकी थी इसलिए उसकी पूरी नंगी पीठ उसकी आँखो के सामने थी..
राजेश ने पूरी जाँच की और फिर अपने हाथ से उसकी पीठ पर दबाव बनाकर उसे थोड़ा सा दबाया.
एक बार फिर से एक मीठी सी सिसकारी निकल गयी पिंकी के मुँह से..
''आआआआआआआआआआआआआआआहह हाआँ साआब बहुत मीठा सा दर्द हो रहा है...ऐसे दबाने से आराम मिला है..''
राजेश : "ओह्ह मैं समझ गया..ऐसा ही एक केस मेरे हॉस्पिटल में आया था पहले भी...इसका बस एक ही इलाज है, तुम्हारे बदन की मालिश करनी पड़ेगी..''
पिंकी ने बिना सोचे समझे सिर्फ़ एक ही बात बोली : "तो कर दो ना साब.''
ये एक खुल्ला ऑफर था राजेश के लिए.
दोनो जानते थे की यही होने वाला है बाद में .
बस बेकार की बाते चोदने में लगे हुए थे इतनी देर से.
दरवाजे के पीछे छुपी रजनी भी पक सी गयी थी इतनी देर से वहां खड़े हुए..
पर अब वो मुस्कुरा रही थी क्योंकि असली एक्शन शुरू होने वाला था.
राजेश : "तो एक काम करो..ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ.''
पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके..
उसका बदन जल सा रहा था.
उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था.
पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ..
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था.
आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था.
अब असली तूफान आने वाला था कमरे में .
लॅंड का तूफान.






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