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Hindi XXX kahani चीरहरण

Update 22

शाम के पांच बज चुके थे होटल की छत पर गौतम सुमन का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. सुमन भी छत पर आने के लिए निकल चुकी थी गौतम यह सोच रहा था कि वह आज अपनी मां से अपने प्यार का इजहार कर देगा और उसे अपनी दुल्हन बनाने का प्रस्ताव रखेगा. गौतम यह जानता था कि जो वह करने जा रहा है इसमें उसे सफलता नहीं मिलने वाली है लेकिन वह फिर भी एक बार सुमन को अपने प्यार का इजहार करके मानना चाहता था और चाहता था कि सुमन उसे अपने प्रेमी के रूप में अपना ले.. अब तक जो सुमन और गौतम के बीच में हो रहा था वह केवल सुमन के मातृत्व प्रेम के कारण हो रहा था जिसमें वह गौतम को अपना बेटा मानकर सब कुछ कर रही थी भले इसमें उसे आनंद और काम संतुस्टी की प्रति हो रही थी लेकिन वह अब तक गौतम को अपने प्रेमी के रूप में स्वीकृत नहीं कर पाई थी ना ही उसे यह अधिकार दिया था कि गौतम उसके पूरे शरीर पर अधिकार जताये..


सुमन का नारीत्व और काम इच्छा उफान पर थी जिसे वो गौतम के साथ शांत कर लेती थी मगर इस अधूरी शांति से गौतम और सुमन दोनों ही काम के शिखर पर पहुंच कर उस अद्भुत और अतुल्य सुख से वंचित ही रहे जिसे पाना दोनों के मन में लंबित था. सुमन अपने मन की आखिरी दीवार को नहीं गिराना चाहती थी. सुमन चाहती थी कि गौतम की हर इच्छा और हर मनोकामना पूरी हो लेकिन वह खुद इसके लिए अपनी चुत की कुर्बानी देने को तैयार नहीं थी. सुमन अब यही चाहती थी कि जैसे गौतम और सुमन के बीच एक रिश्ता कायम हो चुका है वह इस तरह कायम रहे और अब सुमन ना तो इससे आगे बढ़ना चाहती थी और ना ही इससे पीछे हटाना चाहती थी.


गौतम ने भी अपने मन में ये तय कर लिया था कि वह सुमन को किसी भी शर्त पर अपना बना कर रहेगा और उसके लिए वह आज पहली-पहल कर देगा. भले इसमें उसे सफलता मिले या वह असफल रहे. गौतम अब मन ही मन सुमन को पाने की चाहत में जलने लगा था और उसे आप सुमन को भोगने की इच्छा पूरी उफान ले चुकी थी. मगर वह इस बात से भली-भांति परिचित था की सुमन को भोगना और उसे पाना इतना आसान नहीं होगा और जो दीवार सुमन ने अपने मन में उसके और खुद के बीच में बना रखी है उसे गिराना भी आसान नहीं होगा. दोनों के बदनों के मिलन के बीच सुमन ने अपने मन में उसके औऱ गौतम के रिस्ते को रोड़ा बना लिया था जिसे दूर करना आसान नहीं था. मगर गौतम ने ये तय कर लिया था जो किसी भी तरह से उसके मन से इस दीवार को गिरा कर रहेगा और उसे अपना बना कर रहेगा इसके लिए भले ही उसे कुछ भी करना पड़े. गौतम और सुमन के बीच सब कुछ हो रहा था मगर बाकी था वही सबसे जरूरी था और वहीं गौतम करना चाहता था मन ही मन सुमन भी ऐसा ही चाहती थी मगर उसने अपने मन में रिश्ते की दीवार को बीच में खड़ा कर दिया था जिसे वह नहीं गिराना चाहती थी.


सुमन अकेली चुपके चुपके सीडीओ से होती हुई छत के दरवाजे तक आ पहुंची.. सुमन के मन में अजीब अजीब ख्याल आ रहे थे और अजीब सवाल वह अपने आप से पूछ रही थी जिसके जवाब खुद ही अपने आप को देती हुई वह छत के दरवाजे पर खड़ी हुई थी गौतम भी सुमन के इंतजार में छत के कोने में खाली पड़ी की जगह पर खड़ा हुआ सुमन का इंतजार कर रहा था उसके मन में भी कई बातें चल रही थी जिसे वह सोचकर सही और गलत तय करने में लगा हुआ था. गौतम ने सुमन को छत के दरवाजे पर खड़ा हुआ देख लिया और सुमन की नजर भी गौतम से मिल गई. गौतम ने सुमन को इशारे से अपने पास आने के लिए कहा औऱ सुमन गौतम के पास धीरे धीरे कदमो से चली आई..


गौतम ने उसी नज़र से अपनी माँ के बदन को ऊपर से नीचे तक देखा जिस तरह वो बाकी लड़कियों औऱ औरतों को ताड़ता था. सुमन इस नज़र को अच्छे से समझ गई थी मगर काम के भाव से भारी हुई सुमन को इस नज़र का बुरा कतई नहीं लगा.. गौतम ने सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे अपने सीने से लगाकर बाहों में भर लिया औऱ फिर अपने होंठों से सुमन के होंठ मिलाकर जंग शुरू कर दी.. इस जंग में दोनों ही एक दूसरे को हराने के लिए भर्षक प्रयास कर रहे थे और एक दूसरे के लबों को चूमते हुए खींच कर काटते हुए ऐसे चुम रहे थे जैसे उनके बीच ये प्यार का पहला चुम्बन हो..

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गौतम ने चुम्बन के दौरान एक जोरदार थप्पड़ सुमन की गांड पर मारा औऱ फिर उसकी गांड को जोर से मसलते हुए इतना तेज़ दबाया की सुमन चुम्बन तोड़कर सिसक उठी औऱ गौतम को शिकायत की नज़र से देखते हुए बोली..

सुमन - आराम से ग़ुगु.. माँ को दर्द होता है ना.

गौतम - ग़ुगु नहीं सुमन.. गौतम.. मुझे गौतम कहकर पुकारो.. मैं अब आपके इन गुलाबी होंठों से अपना नाम सुनना चाहता हूँ..

सुमन हैरानी से - तू क्या कह रहा है ग़ुगु औऱ मुझे नाम से क्यों बुला रहा है.. मैं तेरी माँ हूँ.. तू भूल गया है क्या?

गौतम - मुझे सब याद है सुमन.. (अपना हाथ सुमन की चुत पर रखते हुए) आपने 20 साल पहले मुझे अपनी इसी चुत से निकाला था.. आपने इन 20 सालों में जितना मुझे प्यार किया है उतना शायद कोई औऱ कभी ना कर पाए.. मेरी ख़ुशी के लिए आप मेरे सामने नंगी तक हो गई.. मेरी हर ज़िद पूरी की मगर अब सुमन.. मैं आपको खुश रखना चाहता हूँ.. प्यार करना चाहता हूँ.. मैं चाहता हूँ आप मुझे नाम से बुलाओ.. हर शाम घर पर मेरा इंतज़ार करो औऱ जब मैं काम से वापस आउ तो आप मुझसे लिपटकर अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दो.. मुझे गौतम ज़ी कहकर बुलाओ.. बिलकुल जैसे आप पापा को बुलाती थी..

सुमन - तू पागल हो गया है क्या गौतम? ये सब क्या बकवास कर रहा है.. तू अच्छी तरह जानता है मैं तेरे साथ ये सब नहीं कर सकती.. माँ हूँ मैं तेरी औऱ तू मेरा ग़ुगु.. समझा?

गौतम - आप सब करोगी सुमन.. मुझे यक़ीन है मेरी मोहब्बत आपको ये सब करने पर मजबूर कर देगी.. आप मुझे अपने दिल में वही जगह दोगी जो जगह तुमने पापा की दी थी..

सुमन गौतम के सामने घुटनो पर बैठकर उसकी पेंट खोलते हुए - तू ये मुझे चिढ़ाने के लिए बोल रहा है ना? पर मैं नहीं चिढ़ने वाली समझा? मैं अभी तुझे चूसकर ठंडा कर देती हूँ फिर तेरा सारा भुत उतर जाएगा औऱ तू फिर से मुझे सुमन नहीं माँ कहकर बुलायेगा..

गौतम कंडोम देते हुए - लो सुमन.. बिना कंडोम तुम्हे उल्टी हो जायेगी..

सुमन कंडोम लेकर फेंक देती है औऱ गौतम का लंड हाथ में पकड़कर उससे कहती है - उल्टी होती है तो हो जाए.. तुझे बिना कंडोम के अच्छा लगता है मैं उसी तरह तुझे खुश कर देती हूँ..

ये कहकर सुमन गौतम के लंड को मुंह में भरकर चूसने लगी औऱ गौतम सुमन को प्यार से देखता हुआ उसके सर पर हाथ फेरने लगा..

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गौतम - जानती हो सुमन जब आप सुबह नाच रही तब मेरा दिल आपको देखकर क्या कह रहा था मुझसे? मेरा दिल कह रहा था कि मैं आपको अपनी दुल्हन बना लू.. औऱ जो सुख पापा आपको सालों से नहीं दे पाये वो सुख मैं आपको हर रात दू.. सुबह तो मैंने अपनी खुली आँखों से हमारे बच्चों तक के नाम सोच लिए थे.. लड़का हुआ तो निखिल लड़की हुई तो निकिता..

सुमन लंड को पूरी मेहनत औऱ काम कला के साथ चूस रही थी मगर गौतम कि बात सुनकर वो बोली..

सुमन मुंह से लोडा निकालकर - गौतम तूने अब एक औऱ शब्द अपने मुंह से निकाला तो अच्छा नहीं होगा.. मैं तेरी माँ हूँ और माँ ही रहूंगी.. मुझे अपनी दुल्हन बनाने का ख्याल अपने दिल औऱ दिमाग से निकाल दे..

गौतम - मैं आप से प्यार करता हूँ सुमन..

सुमन - जितना तू मुझसे करता है उससे कहीं ज्यादा प्यार मैं तुझसे करती हूँ बेटू..

गौतम - सुमन मैं आपको अपनी माँ नहीं अपनी दुल्हन की तरह प्यार करता हूँ..

सुमन - ये ज़िद छोड़ दे ग़ुगु.. ये मुमकिन नहीं है.. मैं तुझे कभी भी वो सब नहीं दे सकती..

ये कहकर सुमन गौतम के लंड को वापस मुंह में भर लेती है औऱ चूसने लगती है

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मगर अब गौतम सुमन के मुंह से अपना लंड निकाल लेता है औऱ अपनी पेंट पहनने लगता है लेकिन सुमन गौतम के हाथ पकड़ कर उसे पेंट पहनने से रोक देती है औऱ कहती है.

सुमन - गौतम ये ज़िद छोड़ दे.. मैंने तेरी हर बात मानी है मगर ये बात मैं नहीं मान सकती.. तू चाहता है मैं अपनी ही नज़रो में गिर जाऊ? कभी खुदसे आँख भी ना मिला पाउ? कैसी जिद पर तू अड़ गया है गौतम.. तू चाहता है तो मैं आज से तुझे तेरे नाम से बुलाऊंगी.. तेरे मुंह से माँ की जगह सुमन भी सुन लुंगी.. मगर ये ज़िद छोड़ दे मेरे शहजादे..

गौतम सुमन से अपने हाथ छुड़वाकर अपनी पेंट पहन लेता है औऱ छत की रेलिंग के पास जाकर सुमन से कहता है..

गौतम - आप नीचे जाओ माँ.. मुझे अब आपसे कुछ नहीं चाहिए.. शादी एन्जॉय करो..

सुमन अपने घुटनो पर से पैरो पर खड़ी हो जाती है औऱ गौतम के पास आकर अपने ब्लाउज में सिगरेट का पैकेट निकालकर एक सिगरेट गौतम के होंठों पर लगा देती है औऱ लाइटर से जलाते हुए कहती है..

सुमन - मुझे माफ़ कर दे गौतम मैं तेरी ये इच्छा पूरी नहीं कर सकती.. तू चाहे तो मुझे अभी नंगा कर दे मैं उफ़ तक नहीं करुगी मगर मेरे शहजादे अपनी माँ को इस तरह जलील मत कर..

गौतम सिगरेट का एक लम्बा कश लेकर अपनी माँ के मुंह पर धुआँ छोड़ते हुए - माफ़ तो आप मुझे कर दो माँ.. मैं हमारे रिस्ते को भूल गया था.. पर अब आप भरोसा रखो मैं आपसे इस बारे में कुछ नहीं कहने वाला...

सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के लंड पर पेंट के ऊपर से हाथ रखते हुए - चल गौतम.. मैं अपने छोटे ग़ुगु को थोड़ा प्यार कर लेती हूँ.. नीचे ना सही ऊपर से तो मैं तेरी हर ख्वाहिश पूरी कर सकती हूँ..

गौतम सिगरेट का कश लेकर सुमन का हाथ लंड पर से हटाते हुए - रहने दो माँ.. छोटा ग़ुगु सो चूका है.. आप जाओ नीचे..

सुमन गौतम के हाथ से सिगरेट लेकर कश लेती है औऱ गौतम के लंड को इस बार जोर से हाथों में पकड़कर मसलते हुए गौतम से कहती है..

सुमन - छोटे ग़ुगु को नींद से जगाना औऱ खड़ा करना मुझे अच्छे से आता है.. तू फ़िक्र मतकर मैं छोटे ग़ुगु को खुश करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगाउंगी..

सुमन कहते हुए अपने घुटनों पर बैठ जाती है गौतम की पेंट उतारने लगती है लेकिन गौतम सुमन के हाथों से अपनी पेंट छुड़वाते हुए उसे कहते हैं..

गौतम - मन नहीं माँ.. रहने दो..

सुमन गुस्से से - मैं अच्छी तरह जानती हूँ तेरा मन क्यों नहीं है? तू मुझसे नाराज़ है ना.. मैंने तेरी ज़िद पूरी नहीं की इसलिए? तूने अगर अपनी ज़िद नहीं छोडी तो मैं यही से नीचे कूद कर अपनी जान दे दूंगी..


ये कहते हुए सुमन छत की रेलिंग की तरफ बढ़ती है और उससे पार करने की कोशिश करने लगती है मगर पीछे से गौतम उसका हाथ पकड़ कर सुमन को अपनी तरफ खींच लेता है और एक जोरदार थप्पड़ सुमन के गाल पर मरता हुआ उसे अपनी बाहों में भर लेता है औऱ सुमन से कहता है..

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गौतम - अगली बार मरने की बात भी की, तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझी आप?

सुमन थप्पड़ खाकर भी मुस्कुरा पडती है औऱ गौतम के होंठों को चुमकर कहती है - अपनी माँ के गाल पर इतना जोर से थप्पड़ मारना जरुरी था?

गौतम अपनी माँ सुमन को बाहों में भरके छत पर बने फालतू सामान से भरे कमरे की तरफ उठाकर ले जाते हुए - अभी तो सिर्फ एक ही पड़ा है अगली बार ऐसा कुछ किया ना आपने तो बहुत पिटोगी आप..

इतना कहते हुए गौतम सुमन को कमरे में एक चारपाई पर बैठा देता है औऱ सुमन का पल्लू हटाकर उसकी ब्लाउज के सारे बटन खोलकर ब्रा ऊपर सरकातें हुए सुमन के कबूतर आजाद कर देता है औऱ फिर अपनी पेंट खोलकर लंड को लहराते हुए सुमन के मुंह में घुसा देता है औऱ सुमन भी मुस्कुराते हुए गौतम के लंड को बिना कंडोम लगाए चूसने लगती है औऱ लंड चूसते हुए गौतम को देखने लगती है..

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गौतम अपनी माँ के इस रूप से उत्तेजित औऱ कामुकता के शिखर पर जा चूका था उसे झड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा औऱ उसने सारा वीर्य सुमन के मुंह में भरके उसे अपना वीर्यपान करवा दिया औऱ सुमन न चाहते हुए भी गौतम को खुश करने के लिए उसका वीर्य पी गई...

गौतम झड़ने के बाद सुमन के बगल में बैठ जाता औऱ औऱ गले में हाथ डाल कर सुमन की एक चूची पकड़कर मसलते हुए कहता है..

गौतम - काश आप मेरी माँ नहीं बीवी होती सुमन.. मैं आपको बिस्तर से उठने ही नहीं देता..

सुमन हसते हुए गौतम का लंड साफ करती हुई - ये नहीं होने वाला बच्चू.. तेरे नसीब मेरे ऊपर का छेद है नीचे का नहीं.. चल अब जाती हूँ..

वरना तू फिर से शुरू हो जाएगा..

सुमन जैसे ही उठने लगती है गौतम सुमन को अपनी गोद में बैठा लेता है औऱ कहता है - थोड़ी देर बैठो ना माँ मेरे साथ.. नीचे जाकर क्या करोगी.. कितनी भीड़ औऱ शोर है नीचे..

सुमन - शादी में भीड़ औऱ शोरगुल तो होता ही है.. जब तेरी शादी होगी तब भी इतना ही ऐसे ही भीड़ औऱ शोर होगा..

गौतम - नहीं होगा माँ.. मेरी शादी में सिर्फ दो लोग ही रहेंगे.. एक मैं औऱ दूसरी आप.. हमारी शादी ख़ास होगी..

सुमन - गौतम देख तू वापस वही बात मत शुरू कर देना.. मैं तुझे अपना फैसला बता चुकी हूँ..

गौतम - मैं तो मज़ाक़ कर रहा था मेरी प्यारी सी सेक्सी सुमन..

सुमन सिगरेट सुलगाते हुए - रूपा का फोन आया था कह रही थी तेरा फ़ोन बंद है..

गौतम - हाँ अब इतने चाहने वाले है मेरे.. किस किस से बात करता तो सोच कुछ बंद ही कर देता हूँ..

सुमन सिगरेट का कश लेकर सिगरेट गौतम को देती हुई - एक बार बात कर ले बेचारी बहुत परवाह करती है तेरी..

गौतम कश लेकर - पता है माँ.. वापस जाकर रूपा मम्मी के साथ ही रहेंगे हम दोनों..

सुमन - मम्मी? माँ सिर्फ मैं हूँ तेरी औऱ कोई नहीं.. समझा?

गौतम - आप माँ हो रूपा मम्मी औऱ माधुरी छोटी माँ.. मैंन छोटी माँ को सब बता दिया..

सुमन - फिर क्या कहा उसने?

गौतम - पहले तो कुछ नहीं बोली मगर फिर थोड़ा डांटने लगी औऱ बोली आपसे बात करनी है उसे..

सुमन - बात करवा ना फिर..

गौतम - वापस चलकर बात कर लेना माँ सीधा घर चले जाएंगे उनके..

सुमन - उनका घर कैसे हुआ? तेरे पापा ने लिया है घर.. हमारा भी हक़ है उसपर.. मैं तो जाकर उससे यही बात करुँगी औऱ तेरे पापा से भी यही बात कहूँगी..

गौतम - पर हम खुश है ना वहा भी..

सुमन - खुश? उस शुरू होते ही ख़त्म होने वाली जगह में रहकर खुश है तू? मैं खुश नहीं हूँ.. मेरा हक़ कोई औऱ चुड़ैल नहीं खा सकती..

गौतम सिगरेट सुमन को देते हुए - गुस्से में कितनी प्यारी लगती हो माँ..

सुमन कश लेकर - तेरा भी हक़ है उस घर पर.. हम वापस जाकर रूपा नहीं माधुरी के साथ रहेंगे.. देखती हूँ वो कैसे रोकती है हमें..

गौतम - वो क्यों रोकने लगी माँ.. वो तो शायद यही चाहती है औऱ इसीलिए आपसे बात भी करना चाहती है.. वैसे मेरे लिए भी अच्छा है.. आप तो अपनी चुत को छुपा के रखो.. छोटी माँ तो मुझे अच्छे से प्यार करेंगी उस घर में..

सुमन गुस्से में - चुत के चककर में अपनी माँ की सौतन से प्यार करेगा तू..

गौतम मुस्कुराते हुए - सौतन होगी आपकी मेरी तो छोटी माँ है.. कैसे भी चोदू बुरा नहीं मानती उल्टा बराबर का साथ देती है..

सुमन उदासी से - देख रही हूँ उस डायन ने मेरा पति तो छीन ही लिया है मेरा बेटा भी मुझसे छीन रही है..

गौतम सुमन की उंगलियों में सुलगती सिगरेट को अपनी उंगलियों में लेकर सुमन के होंठों पर सिगरेट लगाते हुए - ऐसा नहीं है मेरी सेक्सी सुमन.. आपसे मुझे कोई नहीं छीन सकता..

सुमन सिगरेट का कश लेकर गौतम को देखते हुए - भाभी का बहुत बुरा हाल किया है तूने.. बेटी की शादी में चलने ठीक से लायक नहीं छोड़ा..

गौतम - कुछ सीखो अपनी भाभी से माँ.. आप आगे के लिए मना कर रही हो मामी तो आगे पीछे दोनों तरफ ले गई थी मेरा..

सुमन चौंकते हुए - तूने भाभी की गांड..

गौतम हस्ते हुए - हाँ.. मारी है मैंने आपकी प्यारी भाभी की गांड..

सुमन - भाभी ने मना नहीं किया? बहुत दर्द हुआ होगा उनको तो..

गौतम - मना तो किया पर.. बदले में गांड मारना तो जायज था.. सुबह यहां आने के बाद भी एक बार औऱ मरवाई थी मामी ने..

सुमन - तभी ये हाल है भाभी का.. तुझे शर्म नहीं आई.. इतना सब करते हुए...

गौतम मुस्कुराते हुए - भाभी तो फिर भी चल पा रही है माँ..एक बार आप हाँ कर दो फिर देखना आपको तो चलने लायक भी नहीं छोडूंगा.. वैसे माँ मुझे तो इस शादी में कई चुत मिल जायेगी.. आप कहो तो आपकी इस चुत के लिए लोड़ो का बंदोबस्त करू?

सुमन हसते हुए - अपनी माँ का दल्ला बनेगा तू.. बेशर्म..

गौतम - जब आप मेरी ख़ुशी के लिए ये सब कर सकती हो तो में क्यों नहीं कर सकता.. मुझसे नहीं चुदना तो किसी औऱ से चुदलो.. मैं बुरा नहीं मानुगा..

सुमन जोर से हँस्ती हुई - अब नीचे जाने दे वरना तू मुझे सच में किसीसे चुदवा देगा..

गौतम सुमन के दोनों चुचे अपने हाथों में पकड़कर मसलते हुए - आपके जैसी खूबसूरत औरत बिना चुदे अपने दिन बिताये ये तो बहुत गलत बात है माँ..

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सुमन - कितना जोर से दबाता है तू गौतम मेरे बोबो को.. अब तो सारे ब्लाउज औऱ ब्रा भी टाइट हो गई है.. लगता है तूने दबा दबा के मेरे बोबो का साइज बढ़ा दिया है.. अब नए ब्रा औऱ ब्लाउज बनवाने पड़ेगे.. बाबाजी से तेरी शिकायत करनी पड़ेगी.. छोड़ अब..

ये कहकर सुमन नीचे चली जाती है औऱ गौतम छत पर ही ठहलने लगता है फिर कुछ देर बाद वो भी नीचे आ जाता है..

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फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे?
सो रहा था..
इतनी देर तक सो रहे थे? ऐसा क्या कर रहे थे रातभर?
अरे यार.. बताया था ना कल फंक्शन था यहां.. इतना शोर गुल था नींद ही नहीं आई.. सुबह 4 बजे सोया था..
तो बताना चाहिए था ना मुझे.. मैं अपनी बाहों में भरके सुला लेती तुम्हे..
ओह हो.. फिर अगर मैंने तेरे बदन को इधर उधर से पकड़कर छू लिया होता औऱ तेरे साथ जोर जबरदस्ती करने की कोशिश की होती, तब तू क्या करती?
तब मैं तुम्हे चुम लेती औऱ कहती कि अगर तुमने मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की तो मैं तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर लुंगी.. औऱ फिर तुम्हारी इज़्ज़त लुटकर अपनी हवस मिटा लेती..
अच्छा ज़ी.. 4 दिनों में ही इतनी मोहब्बत हो गई मुझसे?
एक बार मिलने तो आओ मुझसे तुम.. फिर बताउंगी ये कबाड़ी वाले की बेटी कितनी मोहब्बत करती है तुमसे..
2-3 दिन की औऱ बात है रेशमा.. फिर देखना तेरा ये आशिक कैसे तेरी चुत की खुजली मिटाता है..
मुझसे तो रहा ही नहीं जा रहा तेरे बिना मेरे कुत्ते.. मन कर रहा है इस फ़ोन में घुसके तेरे पास आ जाऊ औऱ तुझे अपने गले से लगा लू..
अच्छा ये चैटिंग छोड़ वीडियो कॉल कर ना रेशमा.. देखना है तुझे..
एक मिनट.. हाँ.. कॉल कर रही हूँ..
गौतम वीडियो कॉल उठाके - आज तो बहुत प्यारी लग रही हो..
रेशमा हस्ते हुए - कुछ पहन तो लो.. कैसे नंगे होके बैठे हो..
गौतम केमेरा में अपना रेशमा को लंड दिखाकर - देखो ना ये बेचारा तुमसे मिलने की आस में कैसे खड़ा है.. बोलता है जब तक तुझसे नहीं मिलेगा तब तक नहीं बैठेगा..
रेशमा अपनी कुर्ती उतारकर अपने चूचियाँ मसलते हुए - गौतम इससे कहो कि ये खड़ा हुआ ही अच्छा लगता है.. जब हमारी मुलाक़ात होगी तब अगर ये बैठ गया तो बहुत मार खायेगा मुझसे..
गौतम - रेशमा तुम तो कह रही थी असलम बात तक नहीं करता तुमसे फिर तुम्हारे चुचे इतने कैसे बड़े होते जा रहे है? कोई औऱ तो इनपर मेहनत नहीं कर रहा ना?
रेशमा - कमीने फ़ोन पर बड़े लग रहे होंगे तुझे.. तीन साल से ब्रा का साइज वही है..
गौतम - फ़िक्र मत कर मेरी फुलझड़ी.. बहुत जल्दी तेरी चूची औऱ चुत्तड़ का साइज बढ़ने वाला है..
रेशमा अपनी चुत में ऊँगली करती हुई - गौतम देखो ना.. कैसे ये कमीनी तुम्हे देखकर गीली हो गई है.. लगता है तुमसे दुरी इसे भी बर्दाश्त नहीं है..
गौतम - तो तुम ही क्यों नहीं आ जाती मुझसे मिलने यहां? परसो की शादी है.. औऱ कोनसा तू दूर रहती है.. दो घंटे का ही तो सफर है..
रेशमा - पर आउ किसके साथ? क्या कहूँगी असलम से?
गौतम - बोल देना तेरी सहेली की शादी है.. कार्ड मैं तुझे व्हाट्सप्प कर देता हूँ..
रेशमा - ठीक है मैं बात करके देखती हूँ असलम से.. वैसे उम्मीद तो बहुत कम वो मेरी बात मानेगा..
गौतम - वैसे रेशमा.. एक बात बताऊ.. मैंने आदिल के फ़ोन से तेरे नंबर नहीं लिए थे.. आदिल ने खुद मुझे तेरे नम्बर दिए थे..
रेशमा चुत में ऊँगली करती हुई - क्यों दिए थे उसने तुझे मेरे नंबर?
गौतम - ताकि मैं तेरी चुत की खुजली को मिटा सकूँ..
रेशमा झड़ने लगती है फिर संभलकर कहती है - तूने अब तक हमारे बीच जो हुआ वो आदिल को तो नहीं बताया ना..
गौतम - अभी तक हुआ ही क्या है हमारे बीच.. जो मैं किसी को बताऊंगा.. पहले कुछ हो तो जाए..
रेशमा मुस्कुराते हुए - होने के बाद भी अगर तुमने किसी से कुछ कहा तो बहुत मार खाओगे देखना..
गौतम - अच्छा अब रखता हूँ.. नहाना है मुझे..
रेशमा - आई लव यू मेरे कुत्ते..
गौतम - आई लव यू मेरी कुत्तिया.. फ़ोन कट हो जाता है..

गौतम नहाने लगता है और नहा कर जब बाहर आता है तो उसे अपने सामने खड़ी हुई आरती कप मैं चाय लिए दिखती है जो गौतम को सिर्फ टावल में देखकर अपनी आँखे सेकती हुई बार-बार गौतम को ऊपर से नीचे तक देख कर अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए उसे आंखों से अश्लील इशारे कर रही थी जिसे गौतम अच्छे से समझ रहा था और आरती के मन की दशा भी उसे अब अच्छे से समझ आ रही थी...

गौतम में नाराज होने का नाटक करते हुए आरती से चाय का कप नहीं लिया और अपने गीले बाल सुखाने लगा.. आरती ने चाय का कप टेबल पर रखते हुए गौतम के हाथ से तोलिया ले लिया और उसे बेड पर बिठाते हुए अपने हाथ से उसके बाल सुखाने लगी.. गौतम को आरती से इस तरह की कोई उम्मीद नहीं थी मगर जिस तरह से आरती उसके सर के बाल जो गीले थे उन को तौलिये से सुखा रही थी.. गौतम जान रहा था कि आरती पूरी तरह से गौतम के ऊपर लट्टू है और गौतम से आकर्षित है.. आरती बहाने बहाने से गौतम के बदन को छू रही थी और गौतम आरती से बचते हुए ऐसा दिखा रहा था जैसे वह आरती से दूर जाना चाहता हो मगर आरती उसे अपने से दूर नहीं करना चाहती थी..

आरती - क्या बात है देवर ज़ी? गले औऱ सीने पर इतने निशान.. लगता है कई बिल्लीओ ने आपका ये हाल किया है..
गौतम आरती से तौलिया लेकर - रहने दो भाभी मैं सूखा लूंगा अपने बाल..
आरती - अरे अरे.. नहीं बताना तो मत बताओ.. देवर ज़ी.. पर ऐसे क्या करते हो.. अपनी भाभी को कम से कम इतना तो करने दो..
यह कहते हुए आरती गौतम के बेहद करीब आ जाती है और उसके होठों से अपने होंठ लगभग लगाते हुए उसके बाल साफ करने लगती है मगर गौतम अपना चेहरा मोड़ते हुए आरती से मुंह फेर लेता है औऱ आरती से कहता है.
गौतम - भईया याद कर रहे होंगे आपको भाभी.. अब रहने दो.. मैं कर लूंगा..
आरती उदासी से - तुम्हारे भईया ही तो याद नहीं करते मुझे.. देवर ज़ी.. वो तो बस दूकान ही सँभालते है मुझे सँभालने के लिए उनके पास ना तो वक़्त है ना उनमे इतनी ताकत..
गौतम बाल बनाते हुए - तभी मेरे पीछे पड़ी हो आप.. पर ये ख्याल छोड़ दो भाभी.. मैं नहीं पटने वाला..
आरती अपना पल्लू गिराकर गौतम के करीब आते हुए - अरे देवर ज़ी.. पटाना अभी शुरू ही कहा किया है मैंने आपको.. शादी का माहौल है.. सबकी इच्छा पूरी हो रही है.. मेरी मुराद भी पूरी हो जाए तो आपका क्या बिगड़ जाएगा.. इतनी बुरी भी नहीं है आपकी भाभी.. आपके गले औऱ सीने पर कुछ निशान छोड़ने का हक़ तो आपकी इस भाभी का भी है..

ये कहते हुए आरती ने गौतम की कमर पर बंधे हुए तोलिया को अपनी उंगली के दबाव से एकदम से झटके से खोल दिया और गौतम को इसका अंदाजा भी नहीं था. गौतम ने अभी तौलिये के नीचे अंडरवियर नहीं पहना था जिससे तोलिया हटाने पर वह पूरी तरह अपनी प्राकृतिक अवस्था में आ गया और आरती के सामने उसका विशालकाय हथियार लहराते हुए झूलने लगा.. गौतम का हथियार देखकर आरती के जैसे रोंगटे खड़े हो गए और वह कामुकता से भर्ती हुई सन रह गई उसने आज से पहले इस तरह की कोई चीज नहीं देखी थी आरती अश्लील फिल्में देखने की शौकीन थी और अक्सर वह फिल्मों में इस तरह के लंड देखती थी मगर आज उसने हकीकत में ऐसा कुछ देख लिया था और उसे देखकर उसकी आंखें खुली की खुली रह गई थी और वह हैरत से गौतम को देख रही थी.

गौतम का आरती से ऐसा कुछ करने की उम्मीद नहीं थी मगर आरती ने जब ऐसा कुछ कर दिया तो उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करें वह पहले तो एक दो पल के लिए भूत बना हुआ खड़ा रहा मगर फिर अपने तोड़ने को फर्ष से उठाकर वापस अपनी कमर पर बांध लिया और आरती पर गुस्सा होते हुए चिल्लाते हुए कहा..
गौतम - भाभी पागल हो क्या? ये क्या हरकत है?
आरती तो जैसे अभी तक गौतम के हथियार में ही खोई हुई थी उसे तौलिये के ऊपर से भी गौतम के हथियार की हल्की झलक मिल रही थी जो अभी तक सोया हुआ था.. आरती के कानों में गौतम की आवाज पड़ी ही नहीं और वह बस गौतम के लंड पर अपनी नजर डालें खड़ी हुई सिर्फ गौतम के लंड की ओर देख रही थी, गौतम ने आरती को ऐसा करते हुए देखा तो फिर से चिल्लाकर उसका कंधा पकड़कर झकझोरते हुए कहा..
गौतम - भाभी... भाभी...
आरती - देवर ज़ी.. आपका इतना बड़ा..
गौतम शरमाते हुए - भाभी आप जाओ यहां से..
आरती वापस अपने हाथ से गोतम का तौलिया खींचने लगती है मगर इस बार गौतम आरती का हाथ पकड़ लेता है..
गोतम - भाभी पागल हो गई हो क्या आप.. क्या कर रही हो..
आरती उत्सुकता से - देवर ज़ी बस एक बार वापस देख लेने दीजिये.. मैं चली जाउंगी..
गौतम - दरवाजा खुला हुआ है भाभी, कोई देख लेगा आप जाओ यहाँ से..
आरती - कोई नहीं देखेगा ग़ुगु.. मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ..

आरती दरवाजा बंद करने के लिए मुड़ जाती है और दरवाजा बंद करने लगती है आरती के दरवाजा बंद करते ही बाहर हाल में डीजे की आवाज बजनी शुरू हो जाती है जिसमें आज शादी का महिला संगीत था.. डीजे पर पहला गाना बजते ही होटल में चारों तरफ शोर गुल मच जाता है जिसमें हर किसी को एक दूसरे की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी हर कोई एक दूसरे से जोर से कहकर बात कर रहा था और एक दूसरे को इशारों से अपनी बात समझ रहा था इसका फायदा उठाकर आरती ने दरवाजा बंद कर वापस गौतम के पास आ गई और उसका तोलिया खींचने की नीयत से अपना हाथ बढ़ा दिया..
गौतम हाथ पकड़ते हुए - भाभी क्या मज़ाक है.. जाओ आप यहां से..
आरती अपना हाथ छुड़ाकर अपनी साडी उतारते हुए - देवर ज़ी आज तो चाहे कयामत आ जाए.. मैं यहां से नहीं जाने वाली..
आरती जब अपनी साड़ी उतार रही होती है गौतम की नजर आरती के ब्लाउज में चली जाती है जहां दो मस्त-मस्त मौसम कड़क होकर सामने की तरफ तनी हुई थी और उनको देखने से लगता था कि उन पर अब तक किसी के हाथ नहीं पड़े हैं और ना ही आरती ने इन पर किसी और को हुकूमत करने का आदेश ही दिया था..
गौतम का सोया हुआ लैंड धीरे-धीरे उठने लगता है और वह आरती को अपने कपड़े उतारते हुए देखने लगता है आरती साड़ी के बाद अपना ब्लाउज और फिर पेटिकोट उतार कर ब्रा औऱ पेंटी में आ जाती है और फिर गौतम की ओर बढ़ने लगती है.. इस बार गौतम ने आरती से बिना किसी शर्म और लिहाज़ के मिलने का निश्चय कर लिया था और वह अपनी और आती हुई आरती को कामुक नजरों से देखने लगा था..

गौतम ने अपनी और आती हुई आरती को देखते हुए अपना तोलिया अपने हाथों से ही हटाकर साइड में रखे सोफे पर फेंक दिया और आरती की कमर में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचते हुए उठाकर एक साथ बिस्तर पर पटक दिया... वहां से गौतम आरती के ऊपर चढ़ा और उसे छूने लगा.. आरती भी गौतम के इस व्यवहार से हक्की बक्की रह गई और चौंकते हुए वह गौतम को चूमने लगी और उसकी आंखों में देखी हुई अपनी आंखों के इशारों से उसे पूछने लगी कि एकदम से उसे यह क्या हुआ है मगर गौतम ने उसकी आंखों के इशारे का कोई प्रति उत्तर नहीं दिया और चुपचाप आरती के होठों का स्वाद लेने लगा दोनों के होंठ आपस में इस तरह मिल रहे थे जैसे दो बिछड़े हुए दोस्त लिपटकर एक साथ मिल जाते हैं दोनों के बीच होठों की जंग जुबानी हो चुकी थी गौतम और आरती ने एक दूसरे की जीभ को अपने-अपने मुंह से निकाल कर एक दूसरे की जीभ से लड़ाना और मिलना चालू कर दिया था..

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आरती को जो सुख अपने पति चेतन से नहीं मिल पाया था वह गौतम से पा लेना चाहती थी और किसी नियत से गौतम को चूम रही थी..

चुंबन के दौरान गौतम ने आरती की ब्रा निकाल कर फेंक दी जिससे उसके नुकीले सूचक गौतम के सीने पर चुभने लगे और इसमें गौतम को एक अजीब और मीठा अहसास होने लगा, उसकी कामुकता और ऊपर उठने लगी और हवाओं में तैरने लगी..

गौतम चुम्बन तोड़कर आरती से कहा - भाभी एक बार फिर सोच लो.. कल दीदी की शादी है औऱ एक बार मेरे साथ ये सब करने के बाद आप कुछ दिन ठीक से चल भी नहीं पाओगी.
आरती - मुझे फर्क नहीं पड़ता देवर ज़ी.. आप बस मुझे ऐसा रगड़ के रख दो कि मैं तृप्त हो जाऊ..
गौतम - जैसा आप चाहो भाभी..
गौतम इतना कह कर आरती कि छाती की तरफ आ जाता है और उसकी छतिया पर खड़े हुए चूचक अपने मुंह में लेकर चूसने लगता है और अपने हाथों से उन्हें मसलने और दबाने लगता है जिससे आरती के मनोभावों में कामुकता कि हवा में घूमती महक की तरह उठकर फैलने लगती है और तैरने लगती है जिससे आसपास का वातावरण काममई हो जाता है..

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आरती गौतम का चेहरा पकडे हुए उसे अपनी छाती के उभार का मज़ा देने लगती है.. आरती के कड़क उठे हुए और तीर की तरह चुभने वाले चुचक गौतम अपने मुंह में लेकर इस तरह चूस रहा था जैसे वह बच्चे बचपन में अपनी माँ की चूची पकड़ के उनमे से दूध चूसते हैं...

आरती सीस्कारियां लेते हुए गौतम के चेहरे को पकड़े हुए उसके बालों में हाथ फिराती हुई उसे अपनी छाती का पूरा मजा दे रही थी और वह चाहती थी कि गौतम उसकी छाती से भरपूर मजे लेकर उसपर लट्टू हो जाए, उससे खेले जिससे उसकी ब्रा का साइज औऱ उसकी मादकता दोनों बढ़ जाए..

गौतम आरती के चुचे से खेलते हुए एक हाथ से उसकी पेंटिंग नीचे सरकार कर उतार देता है और फिर उसकी टांगों के बीच में आ जाता है और उसकी टांगें खोलकर उसकी जांघों की जोड़ पर अपना हाथ रखकर आरती की चुत को मसलने लगता है जिससे आरती अब खुलकर सिसकने औऱ आहे भरने लगती है..

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आरती की चुत से गौतम के हाथ लगाते ही पानी निकलने लगा था औऱ वो झड़ गई थी मगर फिर गौतम ने अपने लंड पर थूककर अपने लंड को आरती की चुत में घुसने के लिए सेट कर दिया औऱ धक्का देने लगा..

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आरती को चेतन ने सुहागरात से लेकर अब तक एक बार भी तृप्त नहीं किया था ना ही उसके साथ अच्छे से संभोग किया था जिससे आरती काम की अग्नि में जल रही थी और उसने शादी के इतने सालों तक अपनी चुत को घर में रखें गाजर मूली बैंगन यहां तक की बेलन से भी ठंडा किया था इसलिए उसकी चुत खुल तो चुकी थी मगर चुदी नहीं थी..

गौतम का लोहे की तरह मजबूत औऱ ठोस लंड अपनी पूरी औकात में खड़ा होकर आरती की चुत में घुसने लगा था औऱ आरती की सिस्कारिया अब उसकी चिंखो में बदलने लगी थी मगर यहां उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था.. ऊपर से उसकी आवाज नीचे बज रहे dj के शोर में इस तरह खो गई थी जैसे भुंसे के ढेर में सुई खो जाती है.

गौतम ने आरती पर रहम करते हुए अपना हथियार धीरे-धीरे उसकी गुफा में गुस्सा आया था मगर अब आधा हथियार अंदर जाने के बाद गौतम को आरती की शक्ल देखने में मजा आने लगा..
आरती की सूरत इस तरह की थी जैसे कोई बिन पानी मछली की होती है आरती की शक्ल देखते हुए गौतम को उसकी कही हुई हर बात याद आने लगी कि किस तरह से आरती कुछ दिनों से गौतम का दिल दुखाने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी हालांकि आरती उन बातों को मीन नहीं करती थी ना ही उसने वह बात जानबूझकर कही थी..

उसका मकसद सिर्फ गौतम का दिल दुखाना था जिसमें वह कामयाब भी नहीं हो पाई थी मगर गौतम को आप सब याद आ रहा था और वह आरती के चेहरे पर उभरते इस भाव को देखकर सुकून महसूस कर रहा था कि अब आरती का सारा घमंड और सारी अकड़ चकनाचूर हो चुकी है..
गौतम - क्या हुआ भाभी अभी तो आधा ही अंदर गया है औऱ आप तड़पने लगी..
आरती सिसकते हुए - देवर ज़ी मैं कोई रांड थोड़ी हूँ जो इतना बड़ा लोडा एक बार में ले जाउंगी..
गौतम - चिंता क्यों करती हो भाभी.. मैं हूँ ना आपका देवर.. आपको अपने लंड से चोदकर पक्का रांड बना दूंगा..
आरती - ग़ुगु धीरे धीरे करना.. अब दर्द भी होने लगा है..
गौतम - ऐसा लगता है तीन साल में चेतन भईया ने आपको हाथ तक नहीं लगाया.. बिलकुल नाजुक हो आप तो.. देखो सील टूट गई आपकी...
आरती - उसे तो सिर्फ खाना औऱ सोना है.. साला सो किलो का ढ़ोल है.. दूकान पर बैठने के अलावा कुछ नहीं आता..
गौतम - ये बात तो है भाभी.. चेतन आप जैसी हसीन नाजुक औऱ प्यारी लड़की के लायक़ नहीं है..
आरती धीरे धीरे अपनी गांड उठाकर चुदवाते हुए - तो देवर ज़ी.. आप क्यों नहीं बना लेटे मुझे अपना.. ले चलो अपनी भाभी को भगा के.. मैं मना थोड़ी करुँगी..
गौतम धीरे धीरे आधे लंड से चोदते हुए - रहने दो भाभी.. ये ऐश औऱ आराम छोड़कर जाना आपके बस की बात नहीं है..
आरती - ऐसा नहीं है देवर ज़ी.. मैं तो आपके साथ फुटपाथ पर भी रह लुंगी. बस आप अपने इस लंड से मेरी चुत की सर्विस टाइम से करते रहना..
गौतम एक जोरदार धक्का मारके आरती की चुत में अब पूरा लंड घुसा देता है औऱ आरती चिल्लाते हुए गौतम से लिपटकर सिसकियाँ लेने लगती है..

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गौतम - भाभी दर्द तो नहीं हुआ ना..
आरती - देवर ज़ी आपने तो आज असली में सील तोड़ दी..
गौतम मिशनरी पोज़ में आरती की चुदाई करता है और फिर आरती को अपने आगे घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करने लगता है..

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आरती खुलकर गौतम के साथ अपनी हवस बुझा रही थी उसे अब किसी की फिक्र नहीं थी आरती खुल के गौतम को अपना चुकी थी और उसके साथ मजाक मस्तियां करते हुए कामसुख भोग रही थी..

गौतम ने घोड़ी के बाद आरती को अपनी गोद में उठा लिया औऱ उठा उठा के चोदने लगा..

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आरती ने गौतम का बराबर साथ दिया औऱ चुदाई लीला में गौतम को भी पूरा मज़ा मिलरहा था.. आरती बार बार गौतम के होंठों को चूमकर उससे अपने प्यार का इज़हार कर रही थी औऱ चुदाई के चरम पर पहुंचकर झड़ चुकी थी.. इस चुदाई में कई बार चुत से झड़ने के बाद आरती ने गौतम को अपनी चुत में घुसा कर लंड पर दबाब बनाते हुए गौतम को भी अपने अंदर अपना पानी निकालने पर मजबूर कर दिया औऱ दोनोंअपनी इस चुदाई के महासंगम के महामिलन से तृप्त होकर एक दूसरे की बाहों में लेट गए थे..
आरती - देवर ज़ी.. आप तो बहुत बुरे हो..
गौतम - क्यों भाभी.. मज़ा नहीं आया आपको?
आरती - प्यार से प्यार करने को कहा था मैंने औऱ आपने.. एक झटके में अपना ये अजगर मेरी बिल में घुसा दिया.. देखो कितनी फ़ैल गई है मेरी चुत..
गौतम - भाभी ऐसी फैली हुई चुत तो हमारे प्यार की निशानी है..
आरती मुस्कुराते हुए - बड़े आये प्यार की निशानी देने वाले.. मैं जानती हूँ तुमने मेरी बातों का बदला लिया है मुझसे..
गौतम - भाभी आपसे बदला? आप किस बात का बदला लूंगा मैं? मैं जानता था कि आप बस मेरा दिल दुखाने के लिए ही बोल रही थी जो आपने बोला.. मैं तो आपसे कभी नाराज़ था ही नहीं..
आरती मुस्कुराते हुए - अच्छा देवर ज़ी.. अब जाने दीजिये.. मौका मिलते ही वापस प्यार झरने आउंगी आपसे.
गौतम - जैसा आप चाहो भाभी.. आपका देवर हमेशा आपकी सेवा के लिए तरयार रहेगा...
आरती बेड से खड़े होते ही लड़खड़ा जाती है हसते हुए गौतम को देखती है..
गौतम सिगरेट सुलगाते हुए - मैंने तो पहले ही कहा था भाभी.. चुदने के बाद ठीक से चल भी नहीं पाओगी..
आरती लड़खड़ाकर दो कदम चलती है उसके मन में वापस चुदने की तलब थी मगर जुबान से इस बात को कहना आरती के बस में अब नहीं था वो कमरे के दरवाजे पर रूकते हुए मुस्कुराते हुए गौतम से कहती है - देवर ज़ी मुझे मेरे रूम तक छोड़ दोगे?
गौतम सिगरेट का एक कश लेकर आरती से कहता है - ये भी तो आपका रूम है भाभी यही आराम कर लो.. शाम तक तो वैसे भी कोई नहीं है पूछने वाला..
आरती लड़खड़ाती हुई वापस बेड के करीब आ जाती है जहाँ गौतम आरती का हाथ पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लेता है औऱ आरती गौतम के ऊँगली में सुलगती सिगरेट लेकर एक लम्बा सा कश भरती है औऱ फिर सिगरेट बुझाकार गौतम को फिर से चूमने लगता है..

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Update 23


माँ बहुत मन कर रहा है चलो ना मेरे साथ..
अभी नहीं गौतम.. अभी बहुत सारा काम पड़ा हुआ है भाभी कीहालत तो तूने खराब ही कर दी.. अब मुझे ही उनका सारा काम करना पड़ रहा है, शाम को बारात भी आने वाली है.. मुझे ऋतू के पास ही रहना होगा आज..
माँ मैं ज्यादा टाइम नहीं लगाऊंगा, आओ ना..
गौतम समझा कर ना.. अभी मेरे पास वक्त नहीं है उन सब चीजों के लिए.. तू बाथरूम जाकर अपना हीला क्यों नहीं लेता.. सिर्फ आज आज की बात है..
सुमन अगर तुम मेरे साथ नहीं चलोगे तो मैं तुम्हारी मां चोद दूंगा..
सुमन हसते हुए - जा चोद दे मेरे शहजादे मेरी माँ को.. पर आज मुझे माफ़ कर..
गौतम - ठीक है फिर बाद में आप मत कहना कि ये तूने क्या किया..
सुमन गौतम की बात को मज़ाक़ में लेटे हुए - नहीं कहूँगी.. अब काम करने दे.. सारा सामान इधर उधर है.. बहुत टाइम लगेगा ये सब समेटने में..
गौतम सुमन के रूम से बाहर आ जाता है औऱ नीचे सामान रखकर वापस आ रही गायत्री को अपनी गोद में उठा कर ऊपर सीढ़ियों की तरफ चल देता है..


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गायत्री - क्या कर रहा है ग़ुगु.. नीचे उतार मुझे..
गौतम - कुछ नहीं नानी.. बस सोच रहा हूँ आपकी जवानी का पानी पी लूँ..
गायत्री - बेशर्म कोई देख लेगा.. कहा ले जा रहा है मुझे?
गौतम - कहीं नहीं नानी.. बस अपने कमरे में ले जा रहा हूँ.. औऱ सब तो नीचे नाच गाने में बिजी है आपको औऱ मुझे देखने वाला कोई है ही नहीं यहां..
गायत्री - इतनी जवान औऱ खूबसूरत लड़कियों को छोड़कर तू मेरे पीछे ही क्यों पड़ा है ग़ुगु.. मुझ बुढ़िया में तुझे क्या दिख गया...
गौतम गायत्री को बिस्तर पर पटकते हुए - आपको बुढ़िया होने में औऱ पचीस साल लगेंगे नानी.. अभी तो आपकी जवानी बहुत बाकी है..
गायत्री - दरवाजा तो बंद कर दे ग़ुगु..
गौतम अपनी शर्त उतारते हुए - छोडो ना नानी.. वैसे भी कौन आने वाला है यहां.
गायत्री उठकर दरवाजा बंद करते हुए - किसीने देख लिया तो कोई तुझे कुछ नहीं कहेगा.. सब मुझे ही दोषी समझेंगे.. इस उम्र में अपनी नाती से नाजायज सम्बन्ध बना रही हूँ..
गौतम गायत्री की साडी निकालते हुए - नानी क्या बार बार अपनी उम्र को याद जर रही हो आप.. अभी देखना कैसे कुंवारी लड़कियों की तरह चीख निकलवाता हूँ आपके मुंह से मैं..
गायत्री अपने ब्लाउज के बटन खोलकर - अब क्या मुझे पूरा नंगा करेगा ग़ुगु? ऐसे ही घाघरा उठा के कर ले ना जो तुझे करना है..
गौतम - ऐसे ही करना होता तो किसी रंडी के साथ कर लेता नानी.. आपको अपने बिस्तर पर क्यों लाता? जब आपके औऱ मेरे ऊपर से नीचे तक अंग से अंग मिलेंगे तब ही तो हमारा मिलन यादगार रहेगा..
गायत्री - मिलन यादगार बनाने के चक्कर में अपनी नानी को ज्यादा दर्द मत दे देना..
गौतम गायत्री के बदन पर से आखिरी कपड़ा उतारते हुए - फ़िक्र मत करो नानी.. इतनी प्यार से करूँगा कि प्यार भी शर्मा जाएगा..
गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम को अपनी तरफ खींचकर - ग़ुगु.. चूमेगा नहीं अपनी नानी को..

गौतम गायत्री के सफ़ेद हो चुके बाल पकड़कर - बिना चुम्माचाटी चुदाई की शुरूआत कैसे होगी नानी.. आपके इन रसीले होंठों के जाम पिए बगैर मुझे चुदाई का नशा भी नहीं चढने वाला.. अब जल्दी से अपने होंठो को मेरे होंठों के हवाले कर दो नानी.. औऱ मुझे अपने मुंह का मीठा मीठा रस पीला दो..
गायत्री मुस्कुराते हुए गौतम को बेड पर पीठ के बल लेटाते हुए उसके सीने पर अपनी छाती टिका कर अपने होंठ गौतम के होंठों के करीब लाकर कहती है..
गायत्री - पिले ग़ुगु.. अपनी नानी के मुंह का सारा रस पिले बेटा.. कब से मैं विधवा की तरह बस घर के एक कोने में पड़ी हूँ.. सबने बस मुझे अकेला छोड़ दिया है..पर ग़ुगु तूने अपनी नानी को अकेला नहीं छोड़ा..
गौतम प्यार से गायत्री के होंठों ओर अपने होंठ रखकर उसके होंठों का एक चुम्मा लेकर गायत्री की चूची पकड़कर कहता है..
गौतम - आज भी आपके चुचक कितने कड़क औऱ नुकिले है नानी.. आपके दोनों चुचक मेरे सीने में ऐसे चुभ रहे है जैसे किसीने चाकू चुभा रखा हो.. आपकी पतली कमर औऱ ये फूली हुई गांड.. माँ कसम.. किसी भी लंड को खड़ा करने के लिए काफी है..
गायत्री गौतम के होंठ अपनी उंगलियों से पकड़कर - तू भी कहा पीछे है मेरे छोटे से बच्चे.. सिर्फ बीस बरस का है औऱ अपनी प्यारी बातों औऱ भोली सूरत से अपनी साठ बरस की नानी को नंगा होकर चुदवाने पर मजबूर कर दिया.. सच कहती हूँ ग़ुगु.. अब तो मैं खुद तुझसे चुदवा चाहती हूँ बेटा..
गौतम मुस्कुराते हुए - प्यार औऱ चुदाई में उम्र नहीं देखी जाती नानी.. वो गाना है ना.. ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन.. जब प्यार करें कोई तो देखे केवल मन..
गायत्री हसते हुए - मेरा ग़ुगु तो बहुत समझदार हो गया.. चल अब अपनी नानी से प्यार भी करेगा या ऐसे ही मुझे अपनी बाहों में नंगा रखने का इरादा है सारा दिन..
गौतम - लगता है आपको बहुत जल्दी है नानी.. कहीं जाने का इरादा है?
गायत्री - नहीं मेरे प्यारे बच्चे.. मैं तो बस थोड़ी सी फ़िक्र में हूँ कि कोई आ ना जाए..
गौतम - आ जाए तो आ जाने दो नानी.. आप क्यों फ़िक्र करती हो, जो भी आएगा मैं उसे वापस भेज दूंगा.. लेकिन जल्दबाज़ी के चक्कर में मैं आपके जैसी रसमलाई को आधा अधूरा नहीं चखना चाहता..
गायत्री मुस्कुराते हुए - रसमलाई तो तू है मेरे छोटे से बच्चे.. मन कर रहा है अभी तुझे खा जाऊ..
गौतम गायत्री के होंठों से होंठ लगाते हुए - तो खा जाओ ना नानी.. किसने रोका है आपको..

गायत्री और गौतम का चुंबन शुरू हो चुका था और दोनों एक दूसरे को प्यार से बहुत प्यार से चूम रहे थे और एक दूसरे के होठों को इतना कसके अपने होंठों में दबा दबा के चूस रहे थे जैसे दोनों इस चुम्बन के लिए सदियों से बेताब थे.. गायत्री औऱ गौतम के मुंह की लार आपस में मिल रही थी औऱ दोनों एकदूसरे की लार पी लेना चाहते हुए.. गौतम ने अपने मुंह की जीभ गायत्री के मुंह में उतार दी थी जिसे गायत्री की जीभ ने प्रतिउत्तर देते हुए अपनी जीभ से मिला लिया था औऱ दोनों की जीभ आपस में पहलवानो की तरह कुश्ती खेलने लगी थी.. आज गायत्री की कामुकता गौतम के ऊपर भरी थी.. गायत्री अपने दोनों हाथों से गौतम के मुंह को पकड़ कर इस तरह से चूम रही थी जैसे वह गौतम को ये बता देना चाहती हो कि वो गौतम से कितना प्यार करती है.. लम्बे समय तक चुम्बन यूँ ही चलता रहता है..

गौतम चुम्बन तोड़कर - आह्ह... नानी.. आहिस्ता.. चूमते हुए दांतो से कितना काटती हो आप..
गायत्री - क्या हुआ ग़ुगु? ज्यादा तेज़ काट लिया तेरे होंठो को मैंने? माफ़ करना मुझे बेटा..
गौतम - नानी मैं तो माफ़ कर दूंगा पर अगर माँ ने मेरे होंठों ओर आपके काटने के निशान देख लिए तो वो माफ़ नहीं करेंगी आपको..
गायत्री गौतम के होंठ सहलाते हुए - अब नहीं काटूंगी ग़ुगु.. मैं थोड़ा बहक गई थी बेटा..
गौतम वापस गायत्री के होंठों को चूमने लगता है औऱ इस बार गायत्री बहुत आराम से औऱ बिना दांतो से होंठों को काटे चुम रही थी.. गौतम भी प्यार से गायत्री को चूमकर उसके बदन पर उभार औऱ उतार चढ़ाव को अच्छे से महसूस करते हुए अपने दोनों हाथों से तलाश रहा था..
गौतम गायत्री के चुचे पकड़ के दबाते हुए कड़क हो चुके चुचक मसलकर गायत्री से चुम्बन तोड़कर बोला..
गौतम - नानी 36 की ब्रा पहनती हो ना..
गायत्री - नहीं लल्ला.. 34 की ब्रा आती है मुझे..
गौतम - पर नानी आपके ये चुचे तो बहुत मोटे है.. देख कर लगता है 36-38 की ब्रा आती होगी..
गायत्री मुस्कुराते हुए - लल्ला तू अगर मेरे चुचो ओर मेहनत करेगा तो तेरी नानी 36 तो क्या 40 की भी ब्रा पहन लेगी..
गौतम गायत्री के चुचे पर उभर कर खड़े चुचक को मुंह में डालकर चूसते हुए - आप जितनी बोलो मैं उतनी मेहनत करूंगा नानी..
गायत्री - आहहह.. लल्ला.. तू अपने होंठ मेरे ऊपर लगाए या नीचे.. बदन में पूरी मादकता भर जाती है बेटा.. चूस अपनी नानी के चुचे लल्ला.. सोलहा सतरह साल हो गए किसी ने इन पर ध्यान नहीं दिया.. तू अच्छे से पकड़ कर मसल दे मेरी छाती के दोनों कबूतरों को मेरे बच्चे.. चूस लल्ला..
गौतम बारी बारी से गायत्री के दोनों चुचे अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसलता हुआ औऱ चूसता हुआ - मानना पड़ेगा नानी.. आपके आम लटक चुके है मगर अब भी बहुत रसीले है..


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गायत्री गौतम के ऊपर आकर - लल्ला अब अपनी नानी को भी अपने चुचे चुसवा दे.. कितना चौड़ा औऱ गठिला सीना है तेरा.. औऱ तेरे ये निप्पल्स तो कितने गुलाबी है.. इन्हे देखते ही मेरे मुंह में पानी आ रहा है..
गौतम - आओ ना नानी.. आप भी अपनी इच्छा पूरी कर लो..
गायत्री - लल्ला इनपर तो मैं दाँत लगाने वाली हूँ.. तूने मेरी चूचियों पर इतनी लव बाईट दी है अब मेरी बारी..
गायत्री ये कहते हुए गौतम के सीने पर निप्पल्स को अपने मुंह में भरके चूसने औऱ चाटने लगती है..
गौतम गायत्री की जुल्फ संवारते हुए उसे अपनी मरदाना चूची चुसवाता हुआ कहता है - आराम से चूस लो नानी मेरी चूची.. मेरा दूध ख़त्म नहीं होने वाला.. लो ये वाली भी चुसो..
गायत्री दांतो से निप्पल्स खींचते हुए - लल्ला थोड़ा काट लू ना.. तुझे दर्द तो नहीं होगा..
गौतम - आपकी ख़ुशी के लिए हर दर्द को सह जाऊँगा नानी.. आपको जितना काटना है काट लो.. मेरे सीने पर कुछ निशान आपके भी तो होने चाहिए..
गायत्री - मैं तुझसे यही पूछने वाली थी लल्ला.. इतने निशान किसने दिए तुझे?
गौतम - नानी इनमे से कुछ आपकी बहु के दिए हुए है औऱ कुछ आपकी बहु की बहु के..
गायत्री - हाय लल्ला तूने कोमल औऱ आरती के साथ..
गौतम - मैंने कुछ नहीं किया नानी.. उन दोनों ने ही मेरे साथ जबरदस्ती की थी..
गायत्री - तेरे साथ जबरदस्ती की थी तो तूने रोका नहीं उनको..
गौतम - अब कोई औरत किसी मर्द से चुदना चाहे तो मर्द मना थोड़ी करेगा नानी..
गायत्री - तभी दोनों की एक सी चाल है..
गौतम - सही कहा नानी.. उनके पैरों में मोच नहीं लगी, उनकी चुत में मेरे लंड की चोट लगी है.. देखना कुछ महीनों में दोनों का साथ में पेट फुलेगा..
गायत्री हसते हुए नीचे जाकर गौतम का लंड मसलते हुए - लल्ला इस रफ़्तार से तू सबको अपने नीचे लेगा तो कुछ दिनों में सब तेरी रखैल बनकर रह जायेगी.
गौतम लोडा गायत्री के मुंह में देते हुए - ऐसा हुआ तो अच्छा ही होगा नानी.. कम से कम मैं खुलकर तो आप सबकी चुदाई कर पाऊंगा.. हर बार किसीके आने का या किसके देख लेने का डर लगा रहता है..
गायत्री लोडा चूसते हुए - लल्ला जरा पानी दे गला सुख रहा है..
गौतम गायत्री के बाल पकड़कर - कमाल करती हो नानी.. हैंडपम्प मुंह में है औऱ पानी माँग रही हो.. थोड़ी मेहनत करो इसी में से पानी आ जाएगा..
गायत्री लंड चूसते हुए मुस्कुरा कर - अपनी नानी को सुसु पीलायेगा तू ग़ुगु?
गौतम - आपको नहीं पसंद तो लो ये पानी पी लो..
गायत्री पानी लेकर साइड में रख देती है गौतम से कहती है - अब तो तेरा सुसु पीकर ही प्यास बुझेगी मेरे बच्चे..
गायत्री ये कहकर जोर जोर से गौतम का लंड चुस्ती है औऱ कुछ देर बाद गौतम गायत्री के मुंह में पेशाब करने लगता है जिसे गायत्री गंगाजल मानकर पी जाती है..
गायत्री - अब तो तू खुश है ना लल्ला.. अपनी नानी को अपना सुसु पिलाकर...
गौतम गायत्री के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर खींच लेता औऱ फिर पलटकर गायत्री को अपने नीचे ले लेता है औऱ उसकी चुत पर थूक लगाकर गायत्री से कहता है..
गौतम - ख़ुशी तो नानी मुझे तब मिलेगी जब मैं आपकी इस चुत से अपने लंड की लड़ाई करवा कर आपकी चुत को हरा दूंगा..
गायत्री गौतम को अपनी तरफ खींचती हुई उसका लंड पकड़ कर अपनी चुत पर सेट करके - तो फिर जल्दी से शुरू कर दे ये लड़ाई लल्ला.. हरा दे अपनी नानी की चुत को.. बना दे मेरी चुत का भोसड़ा ग़ुगु..
गौतम झटका मारते हुए - तो संभालो नानी.. पहले की तरह रोने ना लग जाता.. ये कहते हुए कि मैं नहीं ले पाउंगी मुझे माफ़ कर दे.. आज तो मैं आपको हर हाल में चोद के रहूँगा..
गायत्री - तब से अब तक कई बार गाजर मूली औऱ खिरो से अपने सिकुड़ चुके चुत के छेद को खोल चुकी हूँ लल्ला.. तू दबा के चोद मुझे.. इस dj कि आवाज में मैं चिंखु तो भी किसीको कुछ सुनाई नहीं देने वाला..
पहले झटके में लंड आधा चुत में चला गया औऱ गायत्री सिसकती हुई आह भरने लगी..
गौतम - क्या हुआ नानी पहले झटके में ही सिसकने लगी आप तो..
गायत्री - तू चोद ना लल्ला... चोदते हुए मुझ बुढ़िया को छेड क्यों रहा है?
गौतम धीरे धीरे झटके मारता हुआ - चुदाई का असली मज़ा सिर्फ चोदने में नहीं आता नानी.. चुदाई में थोड़ी छेड-छाड़ भी जरुरी है..
गायत्री - आह्ह.. लल्ला तू तो सच में कामदेव का अवतार है.. चुदने में इतना सुकून तो मुझे जवानी में भी नहीं मिला.. तू भी मज़ा आ रहा है ना ग़ुगु..
गौतम - नानी गाडी 1st औऱ 2ंnd गियर में चले तो गाडी को ही मज़ा आता है.. ड्राइवर को तो गाडी 4th या 5th गियर में चलाने में मज़ा आता है.. आप सुकून से मज़ा लेलो.. मेरा मज़ा उसके बाद शुरू होगा..
गायत्री - लल्ला डाल दे आगे के गियर बेटा.. तेरी गाडी तैयार है टॉप स्पीड में चलने के लिए..
गौतम झटको कि स्पीड पूरी बढ़ाकर अपना लगभग पूरा लोडा गायत्री की चुत में डालकर उसे चोदने लगता है औऱ कहता है - अब शुरू होगी ना असली चुदाई नानी..
गायत्री गौतम के फुल स्पीड से चोदने पर जोर से चिल्लाते हुए - आहहह... लल्ला.. आहहह.. हाय दइया.. मर गई रे... अह्ह्ह्ह.. ओ माँ.. मर गई मैं आज तो.. आहहह.... लल्ला.. झटका जरा हल्का रख.. आहहह... ग़ुगु.. स्पीड धीरे कर बेटा वरना गाडी की माँ चुद जायेगी.. आहहह..
गौतम चोदने की रफ़्तार जरा सी धीरे करता है औऱ चोदते हुए गायत्री से कहता है - अब तो मुझे भी ये लगता है नानी.. गाडी पुरानी हो चुकी है.. थोड़ा देर तेज़ चलाते ही शोर करने औऱ रुकने लगती है..
गायत्री - लल्ला ये गाडी 16-17 साल से बंद पड़ी थी इतने सालों बाद पहली बार में ही स्टार्ट हो गयी वो देख ना तू.. एक दो बार लल्ला धीरे चला ले इस गाडी को.. सर्विस होने के बाद तू चाहे गाडी को हवाई जहाज की तरह उड़ा देना मैं मना नहीं करुँगी..
गौतम - ठीक है नानी.. इस बार कम से कम गाडी में गियर तो डला.. पिछली बार तो वो भी नहीं डला था..
गायत्री - आह्ह.. लल्ला.. अच्छे से चला इस गाडी.. जल्दबाजी या हड़बड़ी में कहीं एक्सीडेंट मत कर देना..
गौतम - फ़िक्र मत करो नानी बहुत एक्सपीरियंस ड्राइवर हूँ.. गाडी को करोच तक नहीं आने दूंगा..
गायत्री - लल्ला गाडी चलाने में मज़ा तो आ रहा है ना तुझे?
गौतम झटके मारते हुए - हाँ नानी.. बस एक बार गाडी स्पीड में चलाने लायक हो जाए फिर मज़ा दुगुना हो जाएगा..
गायत्री - वो भी जल्दी हो जाएगा लल्ला..
गौतम - नानी एक बात सच बताओगी.. आज तक जितने भी मर्दो से चुदी हो मुझसे ज्यादा मज़ा दिया है किसने?
गायत्री - नहीं मेरे बच्चे.. तू तो सबसे ज्यादा ख़ास है मेरे लिए... तू जितना सुकून औऱ सुख दे रहा है उतना तो आज तक नहीं मिल पाया मुझे..

गायत्री औऱ गौतम का सम्भोग किसी योग की तरह खींचता ही जा रहा था.. दोनों धीरे धीरे चुदाई करते औऱ बीच में रुक कर बातें करने लगते औऱ फिर से चुदाई शुरू कर देते.. दोनों की चुत लंड की लड़ाई होते होते दोपहर हो चुकी थी.. गौतम का लंड गायत्री की चुत में था औऱ गायत्री अपनी जीभ बाहर निकालकर गौतम की जीभ से अपनी जीभ लड़ा रही थी औऱ गौतम धीरे धीरे से गायत्री को चोद रहा था..
गौतम - नानी..
गायत्री - हाँ लल्ला..
गौतम - अंदर निकाल दूँ..
गायत्री - निकाल दे लल्ला.. अब इस उम्र में मैं कोनसा माँ बन जाउंगी..
गौतम अपना वीर्य गायत्री की चुत में भर देता है..
गायत्री - तूने तो मुझे काम तृप्ति का सुख दे दिया मेरे बच्चे.. मैं तो पूरी तरह से तृप्त हो गई..
गौतम गायत्री के ऊपर से हटकर बगल में लेट जाता है.. औऱ गायत्री लचक खाते हुए उठकर अपने कपडे पहनने लगती है..
गौतम - सिगरेट पिओगी नानी..
गायत्री - नहीं लल्ला.. मुझे सिगरेट पीना नहीं आता..
गौतम लोडा मसलता हुआ - पर मेरा ये सिगार तो बहुत अच्छे से पीती हो आप..
गायत्री हसते हुए - अब तेरे सिगर की बात ही अलग है.. ग़ुगु.. देखते ही मुंह में पानी आ जाता है..
गौतम - चुत में नहीं आता?
गायत्री मुस्कुराकर साडी पहनते हुए - वहा भी आता है..
गौतम अपना फ़ोन उठाकर गायत्री के पास आ जाता है औऱ गायत्री को बाहों में लेकर उसकी चूची दबाते हुए नंगा ही गायत्री के साथ कुछ सेल्फी लेता है फिर गायत्री अपनी साडी ठीक करके गौतम के रूम से लड़खड़ाती हुई चली जाती है औऱ गौतम वापस बेड पर लेटकर सो जाता है..

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गौतम की जब आँख खुली शाम के 7 बज चुके थे.. और उसे बाहर के शोर से पता चल गया था कि सभी लोग कितने उत्साहित है और बारात की स्वागत की तैयारी में लगे हैं.. गौतम उठकर नहाने चला गया और काफी देर तक बाथरुम में ही बैठा रहा.. उसकी आंखों में आप भी हल्की सी नींद बाकी थी जिसे वह खोल रहा था.. सुमन गौतम के कमरे में आए तो उसने देखा कि गौतम कमरे में कहीं नहीं था और बाथरूम का दरवाजा बंद था.. सुमन ने बाथरूम का दरवाजा बजाते हुए गौतम को आवाज लगाइ और कहा..
सुमन - ग़ुगु.. अभी तक तैयार नहीं हुआ तू बच्चा.. सब लोन की तरफ जा रहे है.. मैं भी वही जा रही हूँ.. तू भी जल्दी तरयार होकर नीचे लोन में आ जाना बेटा..
सुमन इतना कह कर मुड़ी ही थी की गौतम ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर सुमन का हाथ पकड़ते हुए उसे अपनी और खींच लिया और सुमन को बाथरूम के अंदर खींचकर बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया..
सुमन - क्या कर रहा है ग़ुगु.. तू अभी नहाया भी नहीं.. सब लोन में जा चुके है औऱ तू अभी तक ऐसे ही है..
गौतम - इस साडी में बहुत खूबसूरत लग रही हो माँ..
सुमन - मेरी तारीफ़ बाद में कर लेना पहले नहा ले.. औऱ तैयार हो जा.. सब लोग लोन में जा चुके है.. एक हम दोनों ही यहां बाकी है..
गौतम - कोई बात नहीं माँ.. तुम तो जानती हो मुझे तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता.. पांच मिनट दो मैं नहा के तैयार हो जाता हूँ.. तब तक आप एक सुट्टा मार लो..
सुमन मुस्कुराते हुए - चल ठीक है.. मैं तेरा सूट निकाल देती हूँ..
गौतम - ठीक है माँ..
गौतम नहाने लगता है और सुमन उसका सूट निकालकर बेड पर रख देती है और फिर एक सिगरेट जलाकर पिने लगती है.. गौतम 2-4 मिनट के अंदर ही नहा कर बाहर आ जाता है औऱ पूरा नंगा अपनी माँ सुमन के सामने खड़ा होकर तौलिये से अपना गिला बदन पोंछने लगता है.. सुमन सिगरेट के कश लेती हुई अपने सामने नंगे खड़े अपने बेटे के गठिले औऱ मसक्युलर बदन को निहारते हुए गौतम से कहती है..
सुमन - आज दिनभर क्या कर रहा था तू?
गौतम - तुम्हारी माँ चोद रहा था..
सुमन हस्ते हुए - सपनो में..
गौतम फ़ोन में उसकी औऱ गायत्री की चुदाई के बाद ली गई सेल्फी सुमन को दिखाकर - हक़ीक़त में.. लो खुद देख लो..
सुमन फोटोज देखकर गुस्से में सिगरेट फेंकती हुई गौतम से बोली - हरामजादे मैं समझी तू मज़ाक़ कर रहा है मेरे साथ मगर तू तो.. तुझे बिलकुल शर्म नहीं आई अपनी नानी के साथ ये सब करते हुए? अरे अपनी औऱ नानी की उम्र तो देख लेता..
गौतम सूट पहनते हुए - जब उनको शर्म नहीं है तो मैं शर्म क्यों करू? वैसे भी चुदाई में बदन देखे जाते है माँ.. उम्र को कौन पूछता है..
सुमन गुस्से में - तूने अपनी नानी के साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं की ना?
गौतम - मैं किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करता माँ.. नानी तो खुद भरी हुई बैठी थी.. चुदने के बाद बोली.. बेटा तूने तो मुझे तृप्त कर दिया.. चाहो तो फ़ोन पर पूछ लो..
सुमन का गुस्सा काफूर हो गया औऱ वो गौतम की शर्ट के बटन बंद करते हुए बोली - वैसे नानी झेल गई तेरे इस शैतान को? मुझे तो यकीन ही नहीं होता.. पता नहीं कैसे डाला होगा तूने..
गौतम सुमन को बेड पर गिराते हुए उसकी साडी उठाकर - इसमें क्या बड़ी बात है माँ.. लो अभी तुम्हारे अंदर भी डालके बता देता हूँ.. कैसे नानी के अंदर डाला था..
सुमन हसते हुए - छोड़ मुझे.. बेशर्म कहीं का..
गौतम - इसमें शर्म की क्या बात माँ?
सुमन - अच्छा अब अपना ये ब्लेजर पहन औऱ बाल कंघी कर ले.. मैं तबतक तुझे ठंडा कर देती हूँ..
ये कहकर सुमन अपने घुटनों पर बैठने लगी और गौतम के लोडे को पकड़कर मुंह में लेने लगी मगर गौतम ने सुमन को रोक दिया..
गौतम - रहने दो माँ.. ये तो आज किसी ना किसी का शिकार करके ही ठंडा होगा..
सुमन उठते हुए - इतने शिकार करके मन नहीं भरा तेरा जो अब भी शिकार करना है..
गीतम सुमन को बाहों में भरके - मेरा असली शिकार तो तुम हो माँ.. जब तक तुम तैयार नहीं होती तब तक ये सिलसिला चलता ही रहेगा..
सुमन - मतलब तू मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा..
गौतम - इस जन्म में तो मुमकिन नहीं है माँ..
सुमन - मैं भी देखती हूँ तू कब तक मेरे पीछे पड़ा रहता है..
गौतम - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी.. वैसे में अपनी ज़िद्दी नहीं छोड़ने वाला.. अब चलो..
सुमन - एक सेकंड.. तू इतना प्यार लग रहा है कहीं किसी की नज़र ना लग जाए तुझे.. काला टिका लगा देती हूँ..
गौतम सुमन का हठ पकड़कर - कान के पीछे क्यों माँ.. काला टिका लगाना है तो मेरे लंड ओर लगाओ..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के लंड पर काला टिका लगा देती है औऱ गौतम भी सुमन को पकड़कर कहता है - प्यारी तो आप भी बहुत लग रही हो माँ.. एक काला टिका तो आपको भी लगाना पड़ेगा.. गौतम ने सुमन की साड़ी उठाकर उसकी चुत पर काला टिका लगा दिया.. फिर दोनों वेडिंग लोन की तरफ आ गए जहा सुमन कोमल औऱ आरती के पास चली गई औऱ गौतम लोन में घूमने लगा..

बारात अपने नियत समय पर 7:30 बजे पहुंच चुकी थी लोग हंसते गाते हुए नाच गाना कर रहे थे और स्टेज पर रितु और उसके होने वाले पति राहुल दोनों अगल-बगल एक साथ बैठे हुए थे..

गौतम लोन में टहलता हुआ घूम था था की उसकी नज़र एक बेहद हसीन औऱ खूबसूरत लड़की पर पड़ गई जिसे देखकर वो बस उस लड़की को देखता ही रह गया.. गौतम एक तक बस उस लड़की को देख रहा था की किसी लड़के ने पीछे से गौतम को उस लड़की को देखते देखा तो वो गौतम से बोल पड़ा..
लड़का - मत देखे.. नहीं पटेगी..
गौतम पीछे उस लड़के को मुड़कर देखते हुए बोला - कैसे नहीं पटेगी.. क्या फिगर है बहनचोद.. इसको जरूर पटाऊंगा आज.. औऱ इसी होटल के रूम में लेजाकर पेलुँगा..
लड़का कॉफी का सीप लेकर - कोशिश करके देख ले.. अगर पट जाए तो..
गौतम - लगी हज़ार की..
लड़का - दो हज़ार की लगी..
गौतम - अभी नम्बर लेकर आता हूँ..
लड़का कॉफ़ी पीते हुए - बेस्ट ऑफ़ लक..

गौतम उस लड़की के करीब आ जाता है औऱ बहाने से उस लड़की पर गिरता हुआ कहता है..
गौतम - सॉरी.. वो नीचे पैरों सीढ़िया आ गई थी.. दिखा नहीं.. आपको लगी तो नहीं ना.. आप ठीक है..
लड़की अपने ऊपर से गौतम को उठाकर खुद उठते हुए - देखकर भी नहीं चल सकते क्या?
गौतम नीचे से लड़की का पर्स उठाकर देते हुए - सॉरी..
लड़की पर्स लेकर बिना कुछ कहे जाने लगती है..
गौतम पीछे से - आप बारात में आई है ना..
लड़की मुड़कर एक नज़र गौतम को देखते हुए - ज़ी..
लड़की वापस जाने लगती है कि गौतम वापस कहता है - मैं लड़की का भाई हूँ.. गौतम नाम है मेरा.. आप?
लड़की इस बार अपनी जगह ठहरकर गौतम को ऊपर से नीचे तक देखने लग जाती है औऱ गौतम के नजदीक आकर कहती है - मेरा नाम सिमरन है.. दूल्हा मेरा दूर का भाई लगता है.. औऱ कुछ?
गौतम हक्कलाते हुए - ज़ी वो.. आप डांस करेंगी मेरे साथ? सब किसी ना किसी के साथ डांस कर रहे है तो सोचा आपसे पूछ लू..
सिमरन - शुक्रिया लेकिन मुझे नाचना बिलकुल पसंद नहीं..
गौतम - खाना खा सकते है साथ में..
सिमरन - मुझे भूख नहीं है..
गौतम - साथ थोड़ा घूम सकते है?
सिमरन - मेरे पैरों में दर्द है.. औऱ कुछ बोलना है?
गौतम थोड़ा ठहर कर - दारु भी पी सकते है अगर बोलो तो..
सिमरन गौतम कि बात सुनकर हलकी सी मुस्कुरा पडती है लेकिन फिर उसी अंदाज़ में कहती है - फिलट कर रहे हो मेरे साथ..
गौतम मुस्कुराते हुए - ज़ी कोशिश कर रहा हूँ करने की..
सिमरन - नाम क्या बताया था तुमने अपना..
गौतम - गौतम...
सिमरन - गौतम.. पुराना नाम है तुमपर सूट नहीं करता..
गौतम - तो क्या नाम सूट करता है आप बताओगी..
सिमरन - ठरकी, लौंडियाबाज़, दिलफेंक टाइप कुछ..
गौतम - नहीं बात करना चाहती तो सीधा भी बोल सकती हो.. इतना सब फालतू बोलने की क्या जरुरत है.. इतनी भी कोई हूर की परी नहीं हो समझी..
सिमरन मुस्कुराते हुए - बुरा लगा मेरे बाबू को.. अब फल्ट नहीं करोगे?
गौतम गुस्से में - कोई कालाकलूटा, भुण्डे सी शकल का गांड मारेगा ना तब याद करना मुझे..

ये कहते हुए गौतम वहा से चला जाता है औऱ सिमरन गौतम को देखते हुए मुस्कुराने लगती है फिर स्टेज की औऱ चली जाती है.. गौतम वापस उसी जगह आ जाता है जहा वो लड़का खड़ा था..
गौतम लड़के को शर्त के पैसे देते हुए - तू कैसे जानता था वो नहीं पटेगी..
लड़का पैसे लेकर - बहन है मेरी..
गौतम हैरानी से - क्या..
लड़का - इतना क्यों चौंक रहा है..
गौतम - सॉरी यार.. वो कुछ गलत बोल दिया तेरी बहन के बारे में..
लड़का - छोड़.. यहां सब सूखा ही है क्या.. दारू का कोई इंतज़ाम नहीं है..
गौतम - सब इंतज़ाम है बस रास्ते पता होने चाहिए मंज़िल के.. कौनसा ब्रांड चाहिए बता.. सारा स्टॉक है..
लड़का - मुझे तो कुछ भी चलेगा.. वो कहावत है ना.. बिस्तर में लड़की औऱ टेबल पर दारु.. जैसी भी मिले ले लेनी चाहिए..
गौतम - अरे वाह.. लगता है तू भी अपनी किस्म का आदमी है.. चल..
गौतम औऱ लड़का लोन में पीछे की तरफ जाने लगते है कि रास्ते में सिमरन मिल जाती है जो लड़के से कहती है - मनोज भईया ये आपका दोस्त है?
मनोज गौतम को देखकर - हां सिम्मी.. पर क्यों पूछ रही है.. तू जानती है इसे?
सिम्मी - हाँ.. अभी अभी अपना दिल लेके आया था मेरे पास..
मनोज - फिर तूने क्या किया दिल का..
सिम्मी - करना क्या था.. तोड़ के टुकड़े टुकड़े कर दिए..
मनोज गौतम को देखकर - बेचारा..
गौतम मनोज से - बात ख़त्म हो जाए तो पीछे आ जाना..
सिम्मी - क्या है पीछे..
गौतम - तुझे बताना जरुरी नहीं है..
मनोज - अब छोडो भी यार ये आपस की नाराज़गी.. सिम्मी पीछे शराब की व्यवस्था है.. मैं जा रहा हूँ गौतम के साथ..
सिम्मी - मैं भी चलती हूँ भईया.. वैसे भी यहां बोर हो रही हूँ..
मनोज - ठीक है.. पर पहले मेरे दोस्त को सॉरी तो बोल दे.. बेचारे का मूंड खराब कर दिया तूने..
गौतम - मेरा कोई मूंड खराब नहीं है.. छोडो उस बात को अब...
सिम्मी - भईया इसे बताया नहीं आपने..
मनोज - तू ही बता दे..
गौतम - क्या बताना है..
सिम्मी - कुछ नहीं.. छोडो.. वैसे एक बात तो कहनी पड़ेगी.. हैंडसम तो बहुत हो तुम..
गौतम सिम्मी की बात को अनसुना करके मनोज से - इधर से ऊपर.. गौतम मनोज औऱ सिमरन को लेकर अपने रूम में आ जाता है..
गौतम अलमीरा खोलकर - देख ले भाई क्या लेना है..
मनोज अलमीरा में देखकर - क्या बात है इतना सब?
गौतम - हाँ सुबह शराब की जितनी बोतल आई थी मैंने उनमे से 3-4 अपने पास रख ली.. तुम्हे जो पसंद है निकाल लो..
मनोज - सिम्मी कोनसी?
सिम्मी गौतम को देखकर - भईया आपको जो पसंद है वो ले जाओ.. मुझे गौतम से कुछ पर्सनल बात करनी है..
गौतम रूखेपन से - क्या पर्सनल बात करनी है?
सिम्मी गौतम के करीब जाकर - वो अभी पता चल जाएगा..
गौतम ने कलाई का ढाका लाल देखा तो सब समझा गया औऱ मनोज की तरह देखने लगा..
मनोज - ठीक जैसा तु कहे.. मेरे दोस्त को ज़्यदा परेशान मत करना..
सिम्मी - आप चिंता मत करो.. टूटे हुए दिल को जोड़ना मुझे अच्छे से आता है..
मनोज चला जाता है औऱ सिम्मी कमरे का दरवाजा बंद करके - अच्छा तो गौतम ज़ी अब बताइये.. कितना पसंद करते है आप मुझे?
गौतम - तुम दोनों भाई बहन मिलके कोई प्रेँक वरेंक तो नहीं कर रहे हो ना मेरे साथ?
सिम्मी अपना दुप्पटा निकालकर - तुझे क्या लगता है?
गौतम अपना कोट उतारते हुए - अगर परेंक हुआ तो भी तू नहीं बचेगी मुझसे..
सिम्मी अपनी कुर्ती उतारते हुए - बचना भी कौन चाहता है तेरे जैसे रसगुल्ले से..
गौतम अपनी शर्ट उतारकार सिम्मी को अपनी बाहों में भर लेता है औऱ उसके होंठों को चूमने लगता है फिर झटके से उसकी ब्रा उतारकार नीचे फेंक देता है औऱ सिम्मी को उठाकर बिस्तर में लाते हुए अपने नीचे लेता कर चूमने लगता है..
गौतम - कितना नाटक कर रही थी बहन की लोड़ी.. अब कैसे नीचे लेटी हुई है.. हाय... कितने टाइट औऱ सर्क्स बूब्स है तेरे.. मन करता है कहा जाऊ साली तुझे..
सिम्मी - तो किसने रोका है तुझे.. खा जा ना.. आ..
सिम्मी गौतम के होंठों को चूमने लगती है औऱ गौतम चूमते हुए सिम्मी के बूब्स दबाने लगता है..
गौतम चुम्मा तोड़कर सीधा सिमरन के बूब्स पर हमला कर देता है औऱ किसी प्यासे की तरह सिमरन के निप्पल्स मुंह में भरके चूसने औऱ चाटने लगता है.. सिमरन काम की नदी में बहने लगी थी उसने गौतम को पकड़कर अच्छे से अपने बूब्स चुसवाना शुरू कर दिया औऱ गौतम से बोलने लगी..
सिम्मी - चुसो गौतम.. खा जाओ मेरे बूब्स को आज.. कितने प्यारे हो तुम.. चुसो.. काट लो दांतो से दोनों बूब्स को..
गौतम - आह्ह... साली जितनी खूबसूरत है तू उतनी ही जंगली भी.. शकल से अभी भी छोटी लगती है.. तू नाबालिक तो नहीं है ना..
सिम्मी - 19 साल की हूँ मेरे रसगुल्ले.. अब तो सरकार भी चुदने औऱ चोदने की इज़ाज़त दे चुकी है मुझे..
गौतम सिमरन के दोनों बूब्स अपने हाथों में लेकर जोर से मसलने लगता है औऱ कहता है - बहुत हसीन है यार तू.. Gf बन जा मेरी.. बाद में शादी भी कर लेंगे..
सिमरन हसते हुए गौतम को पलट कर उसके ऊपर आ जाती है औऱ फिर रखा kiss करके बोलती है - सोच ले मेरे रसगुल्ले... बाद में मुकरने नहीं दूंगी.. मुझे छोड़ के गया तो जान ले लुंगी..
गौतम - तुझ जैसी को कौन छोडके जाएगा मेरी लैला.. तुझे तो दिल में बसा कर औऱ लंड से लगा कर रखूँगा..
सिम्मी धीरे धोरे नीचे जाकर गौतम की पेंट खोलती है औऱ उसकी चड्डी नीचे सरकाने लगती है - तो फिर अब तू मेरा बॉयफ्रेंड औऱ मैं तेरी गर्लफ्रेंड.. रसगुल्ले अगर तू इस बात से मुकरा तो बहुत बुरा होगा..
चड्डी नीचे करके - ये क्या है.. रसगुल्ले तू?
गौतम - क्या हुआ डर गई मेरी गर्लफ्रेंड? अपने बॉयफ्रेंड का लोडा देखकर ही डर गई.. जब अंदर जाएगा तब क्या होगा..
सिमरन मुस्कुराते हुए - तू तो बहुत छुपा रुस्तम है. शकल बिलकुल बच्चों जैसी मासूम औऱ लोडा ऐसा कि ताबही मचा दे..
गौतम लंड हिलाते हुए - वैसे एक बात समझ नहीं आई..
सिम्मी - क्या?
गौतम - हर भाई अपनी बहन की रक्षा करता है उसे चुदने से बचाता है औऱ एक तेरा भाई है.. तुझे चुदने के लिए मेरे पास छोड़ गया..
सिमरन हसते हुए - तुझे तो खुश होना चाहिए.. पर लगता है आसानी से मिली हुई चीज की परवाह नहीं है तुझे?
गौतम लोडा सिमरन के मुंह की तरफ करता हुआ - परवाह तो बहुत है मेरी रसमलाई.. पर मुझे जाताना नहीं आता..
सिम्मी लोडे को होंठो से चूमते हुए - कमीने पहली मुलाक़ात में क्या क्या करवा लेगा मुझसे...
गौतम - ले लो ना यार क्यों नखरे कर रही हो.
सिमरन गौतम को केमेरा ऑन करके अपना फ़ोन देते हुए - ले रही हूँ कमीने.. सिम्मी ये बोलकर गौतम के लंड को धीरे धीरे चूसने लगती है औऱ फिर अपने चूसने की रफ़्तार बढ़ाने लगती है..
गौतम सिमरन का blowjob वीडियो बनाने लगता है औऱ बोलता है - उफ्फ्फ्फ़ सिम्मी... आई लव यू यार.. तू तो सच में कमाल की है.. आहहह...
सिमरन गौतम का लोडा औऱ लोडे के नीचे दोनों टट्टे चूसते औऱ चाटते हुए कैमरे में देखकर कहती है - आई लव यू टू मेरे रसगुल्ले... औऱ फिर लोडा हिलाते हुए टट्टे चूसते हुए गौतम को देखती है..
गौतम सिमरन के बाल पकड़कर - निकलने वाला है मेरी जान...
सिम्मी लोडा मुंह में लेकर जोर जोर से चूसते हुए गौतम का सारा माल अपने मुंह में झड़वा लेती है औऱ उसके वीर्य की एक एक बून्द गले के नीचे उतार लेती है औऱ लोडे को अच्छे से चूसकर साफ कर देती है..
गौतम बिस्तर पर पीठ के बल शांत होकर तेज़ तेज़ साँसे लेता हुआ सिमरन को देखता है जो बिस्तर से उठकर बेड के पास पड़ी सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए एक दो कश लेकर गौतम के सामने खड़ी हो जाती है औऱ कहती है..
सिमरन - मज़ा आया मेरे रसगुल्ले को?
गौतम - सच में यार.. तू वाकई कमाल है.. अब जल्दी से चुत भी देदे... औऱ मुझे अपना गुलाम बना ले...
सिमरन सिगरेट का कश लेकर - इतनी भी क्या जल्दी है मेरे रसगुल्ले... मेरी एक शर्त है..
गौतम - क्या?
सिमरन - मुझे अलग तरह से सेक्स करना है तुम्हारे साथ.. तुम्हे बाँधकार..
गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा.. बड़ी fantasy है तेरी.. लेकिन ठीक है अब अपनी गर्लफ्रेंड की fantasy पूरी नहीं करूँगा तो किसकी करूँगा..
सिमरन सिगरेट का एक लम्बा कश लेकर सिगरेट गौतम को दे देती है औऱ अपने दुपट्टे से होतम को पेट के बल लेटा कर उसके दोनों हाथ बाँध देती है..
गौतम - उल्टा क्यों किया है तूने सिम्मी..
सिम्मी - तू चुप रह मेरे रसगुल्ले.. अब कुछ मत बोल..
सिमरन औऱ कपडे लेकर गौतम के दोनों पैरों को भी बाँध देती है औऱ फिर अपना फ़ोन एक जगह रखकर कैमरा चालु कर देती है औऱ फिर अपनी सलवार भी नीचे सरका देती है..
गोतम सिगरेट के कश लगाते हुए सामने देख रहा था औऱ पीछे से सिमरन उसकी गांड पकड़ के गौतम की गांड के छेद को अपने मुंह से चाटने लगती है..
गौतम - आहहह... सिम्मी तू तो बिलकुल गन्दा वाला सेक्स करती है यार.. गांड के छेद को क्यों चाट रही है..
सिमरन गौतम के गांड के छेद को चाट कर उसपर थूक देती है औऱ गौतम को जवाब देती है - ताकि तुझे ज्यादा दर्द ना हो मेरे रसगुल्ले...
गौतम ये सुनकर आश्चर्य में पड़ जाता है सिम्मी से बोलता है - मतलब?
सिमरन गौतम से सिगरेट लेकर आखिरी के एक दो कश लेती है औऱ फिर सिगरेट बुझाकार गौतम के पीछे आकर कहती है - अभी पता चल जाएगा मेरे रसगुल्ले..
ये कहकर सिम्मी एक डिलडो हाथ में लेकर गौतम की गांड के छेद पर रखकर गौतम की गांड में घुसाने लगती है..
गौतम को कुछ अजीब लगता है औऱ वो पीछे मुड़कर देखता है तो उसे सिमरन के हाथ में डिलडो दिखाई देता है जिसे वो पहनकर गौतम की गांड में घुसा रही थी..


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गौतम - सिम्मी तू...
सिमरन झटका देकर गौतम की गांड में अपना लंड ड़ालते हुए - हाँ मेरे रसगुल्ले मैं मरवाने से पहले तेरी मारना चाहती हूँ.. औऱ आज तेरी इस सेक्सी गांड का उद्घाटन करने वाली हूँ..
गौतम - तेरी माँ चोद दूंगा साली.. खोल मुझे.. बहन की लोड़ी.. छोड़ मेरी गांड को..
गौतम झटपटा रहा था मगर सिमरन ने गौतम के बाल पकड़कर पीछे से एक जोरदार झटका देकर डिलडो गौतम की गांड में घुसा दिया जिससे गौतम की चिंख निकल गयी..


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सिमरन धीरे धीरे गौतम की गांड मारती हुई - माफ कर देना मेरे रसगुल्ले..
गौतम गुस्से में - साली एक बार हाथ खुलने दे.. फिर बताऊंगा तुझे.. तुझे इतना मारूंगा ना याद रखेगी तू..
सिमरन - मेरे रसगुल्ले.. प्यार करता है ना तू तो मुझसे.. शादी करने वाला है.. अपनी गर्लफ्रेंड पर हाथ उठाएगा तू..
गौतम - बहन की लोड़ी रांड.. साली छोड़ मुझे..
सिमरन - बस मेरे रसगुल्ले.. औऱ कुछ देर.. बहुत मज़ा आ रहा है.. फिर तू अपना सारा गुस्सा मेरी चुत को चोदके निकाल देना..
सिमरन दोनों हाथों से गौतम के कंधे पकड़के डिलडो से गौतम की गांड मारे जा रही थी..
गौतम - तेरी माँ को चोदू रंडी.. इस डिलडो से कितना चोदेगी मुझे?
सिमरन - मेरी मारनी है तो पहले मरवा ले रसगुल्ले... बोल.. आह्ह... आहहह...
गौतम - साली तू औऱ तेरा भाई दोनों पीटेंगे मेरे हाथों से आज...
सिमरन - बोल मेरे रसगुल्ले.. अब पता चला कितना दर्द होता है चुदने में?
गौतम - खोल साली मेरे हाथ...
सिमरन गौतम को एक जबरदस्ती वाला kiss करती है औऱ फिर आई लव यू बोलकर उसके हाथ खोल देती है..
गोतम हाथ पैर खुलते हुए सिमरन को एक थप्पड़ मारके अपने कपडे पहनते हुए कमरे से बाहर चला जाता है..
सिमरन - रसगुल्ले मेरी बात तो सुन.. अरे कहाँ जा रहा है...
गौतम जाते हुए - हट साली..

सिमरन भी कपडे पहन कर अपना फ़ोन उठाती है औऱ उसने दोनों वीडियो सेव करके कमरे से बाहर आ जाती है..
 
Update 24

गौतम को आता देखकर मनोज मुस्कुराते हुए उसे आवाज देकर बुलाता है - गौतम...
गौतम मनोज को देखकर उसकी तरफ आता है औऱ एक थप्पड़ उसके गाल पर मारकर बोलता है - बहन के लंड.. तेरी पागल वागल है क्या?
मनोज थप्पड़ खाकर भी हसने लगता है औऱ कहता है - लगता है लेने की जगह देकर आ रहा है..
गौतम मनोज के हाथों से पेग लेकर एक घूंट में खींच जाता है..
मनोज - अरे धीरे धीरे एक बार में ख़त्म कर जाएगा क्या? औऱ गुस्सा क्यों कर रहा है? इतनी खूबसूरत लड़की से गांड मरवाई है तुझे तो खुश होना चाहिए.. औऱ कोनसा असली लंड से मरवाई है.. नकली होगा..
गौतम - तेरी माँ चोद दूंगा.. माँ के लोडे अब औऱ कुछ बोला तो.. साले नवाबो वाले शोक नहीं है मेरे.. असली हो या नकली मुझे मरना पसंद है मरवाना नहीं..
पीछे से सिमरन आती हुई - बात तो ऐसे कर रहे हो जैसे मरवाने के बाद तुम्हारी गांड किसी काम की ही नहीं रही हो.. इतना जोर का थप्पड़ मारके आये हो देखो मेरे गाल पर उंगलियां छप गई तुम्हारी..
गौतम - तुम दोनों भाई बहन ना मुझसे दूर रहना.. समझें? ये कहते हुए गौतम वहा से चला जाता है..

गौतम यहां से सीधा वेडिंग हॉल में आ जाता है औऱ एक टेबल पर बैठी हुई सुमन के करीब आकर बैठ जाता है जहा सुमन वेटर से दो गिलास जूस लेकर एक गौतम के सामने रख देती है औऱ एक खुद पीते हुए गौतम से पूछती है..
सुमन - क्या हुआशहजादे मुंह क्यों लटकाया हुआ है?
गौतम जूस पीते हुए - कुछ नहीं.. बस मूंड थोड़ा खराब है..
सुमन - क्यों किसी ने कुछ कहा है क्या?
गौतम - नहीं माँ.. बस ऐसे ही..
सुमन - तो थोड़ा मुस्कुरा ना ग़ुगु.. चल मुस्कुरा दे अब. इतने प्यारे चेहरे पर उदासी अच्छी नहीं लगती..
सिमरन आते हुए - वही तो मैं भी समझा रही थी आंटी.. मगर गौतम समझने को ही तैयार नहीं है..
ये कहते हुए सिमरन गोतम के बगल में आकर बैठ जाती है..
सुमन - तुम?
सिमरन - आंटी मैं गौतम की गर्लफ्रेंड.. मतलब फ़्रेंड हूँ..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर - गर्लफ्रेंड.. ओ हो.. लगता है लड़ाई हो गई है दोनों गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड में..
सिमरन - लड़ाई कहाँ आंटी.. यही मुझे सता रहा है.. देखो कितना जोर का थप्पड़ मार दिया इसने मुझे...
सुमन सिमरन का गाल देखकर - ग़ुगु? तूने हाथ उठाया इसपर? मैंने ये सिखाया है तुझे? कितनी फूल सी प्यारी बच्ची है..
सिमरन - देखो ना आंटी.. छोटी सी बात पर थप्पड़ मार दिया इसने.. औऱ फिर भी मुंह फुला के बैठा है..
गोतम गुस्से से सिमरन को देखता हुआ - तुझे कहा था ना दूर रहना.. क्यों आ गई पीछे पीछे?
सिमरन रोने का नाटक करते हुए - आंटी इसने शादी का वादा किया है मुझे गर्लफ्रेंड बनाया है अब मुझे छोड़ने की बात कर रहा है..
सुमन - अरे तुम दोनों में जो हुआ है मुझे उससे दूर रखो.. अपना मसला खुद हल करो.. मुझे छोड़ दो.. गौतम अब हाथ नहीं उठाना इस बच्ची पर...
सिमरन - सिमरन.. आंटी.. सिमरन नाम है मेरा..
सुमन - हाँ.. सिमरन पर हाथ मत उठाना औऱ प्यार से बात करना..

सुमन ये कहते हुए आरती के पास चली जाती है औऱ सिमरन गोतम को मुस्कुराते हुए देखकर कहती है - देखो चुपचाप मेरे साथ चलो औऱ जो काम तुमने अधूरा छोड़ा है उसे पूरा करो वरना..
गौतम - वरना क्या?
सिमरन फ़ोन निकालकर - वरना पुरे शहर में तुमको फेमस कर दूंगी.. कहो तो नेट पर वायरल कर दू तेरा मेरा mms?
गौतम गुस्से में - तू बहन की लोड़ी.. मरेगी मेरे हाथ से.. डिलीट कर उसे..
सिमरन - पहले बोल आई लव यू..
गौतम - लव यू.. अब डिलीट कर उन वीडियो को..
सिमरन - चलो मेरे साथ..
गौतम - कहाँ?
सिमरन - वही यहां से मुझे अकेला छोड़ के आ गए थे..
गौतम - देख मुझे अब तेरेमे इंट्रेस्ट नहीं है..
सिमरन - मुझे तो तुम पसंद हो.. औऱ मैं अब तुम्हारा पीछा तो किसी हाल में नहीं छोड़ने वाली.. अब चलो वरना मेरा पागलपन तुम नहीं जानते.. मुझे अपनी बिलकुल परवाह नहीं है..
गौतम - अब वहां जाकर क्या करना है? तुमने मार तो ली मेरी गांड अपने उस नकली लोडे से.. अब क्या साडी पहन लु तेरे सामने?
सिमरन - मैंने नकली से मार ली तो तुम असली से मार लो मेरी? बदला ले लो..
गौतम - मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है समझी.. अब ये वीडियो डिलीट करो..
सिमरन गुस्से में - अगर 15 मिनट में तुम उसी जगह वापस नहीं आये तो मैं ये वीडियो वायरल कर दूंगी.. समझा?

ये कहकर सिमरन चली जाती है..गौतम को सिमरन पर गुस्सा आ रहा था जिस तरह से सिमरन ने धोके से नकली लंड लगाकर गौतम कि गांड का स्वाद लिया था वो गौतम को पसंद नहीं आया था जिसे उसने खुले तौर पर सिमरन से बयाँ कर दिया था.. मगर mms के वायरल होने का डर उसे वापस सिमरन के पास खींच ले गया औऱ गौतम वापस होटल के रूम में जाकर दरवाजा लगाते हुए सिमरन से गुस्से में बोला..
गौतम - देख सिम्मी चुपचाप सीधी तरह वीडियो डिलीट कर वरना अच्छा नहीं होगा.. तू मुझे भी नहीं जानती ठीक से..
सिमरन गौतम को गले लगाकर बेड पर गिराती हुई - कर दूंगी डिलीट.. पर इतनी भी क्या जल्दी है.. पहले थोड़ा प्यार तो कर लो मुझसे..
गौतम - मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं है तुम्हारे अंदर.. समझी..
सिमरन - इंट्रेस्ट नहीं था तो मेरे पास क्यों आये थे तुम? तब तो बहाने बहाने से बात करने की कोशिश कर रहे थे.. अब जब मैं बाहों में हूँ तो इस तरह मुंह फेर रहे हो.. ये तो बहुत दिल दुःखाने वाली बात है गौतम.. क्या मुझे प्यार करने का हक़ नहीं है? तुम कितनी प्यार से बात कर रहे थे.. मेरे होंठों से लेकर चुचो तक सब तुम्हे पसंद आ रहा था.. मेरा फिगर पसंद है ना तुम्हे? फिर क्यों मुझसे इस तरह रूखेपन से बात कर रहे हो..
गौतम - सिम्मी.. तू जो बोलोगी मैं वो सब कर लूंगा तुम्हारे साथ.. पर पहले वो वीडियो डिलीट करो..
सिमरन - इतनी पागल तो मैं भी नहीं हूँ.. वीडियो डिलीट कर दूंगी तो तूम मेरे बाहों से निकलकर कहा गायब हो जाओगे मुझे पता भी नहीं चलेगा.. उस वीडियो के कारण ही तुम यहां मेरे साथ हो.. डिलीट करते ही नहीं रहोगे..
गौतम - ऐसा नहीं है.. मुझ पर भरोसा कर.. देख मुझे तू पसंद है पर तूने धोके से नकली लंड लगाकर मेरी मारी है ना.. मेरी मर्दानगी को बुरा लगा है..
सिमरन - ओ हो बड़े आये मर्द.. इतने प्यारे औऱ क्यूट हो.. बिलकुल मेरे टाइप के.. देखो आज तक मैं डर डर के जीती आई हूँ किसी को करीब नहीं आने दिया... भईया से ही अपने दिल की बातें करती आई हूँ.. औऱ उन्होंने ही मुझे संभाला है.. तुम मुझे पहली नज़र में पसंद आ गए हो.. मेरे रसगुल्ले मैं अपने इस दिल को कैसे समझाऊ जो तुझे देखकर इतना जोर से धड़ककर उछल रहा है जैसे अभी बाहर आकर तुमसे अपना हाल कह देगा.. मेरे प्यार को मत ठुकराओ गौतम.. मुझे अपना बना लो.. मैं तुम्हारी हर बात मानुँगी.. जो तुम बोलोगे वही करुंगी बस मेरे दिल को ऐसे मत तोड़ो..
गौतम - मेरे हाथ पैर बाँध कर अपनी नकली लंड से मेरी गांड मारने के बाद अब ये इमोशनल ड्रामा करते हुए तुम्हे शर्म नहीं आती? पक्की ड्रामेबाज़ है तू.. अब जल्दी बता तू क्या चाहती है मुझे वापस नीचे लोन में जाना है औऱ शादी एन्जॉय करना है..
सिमरन - तुम बताओ तुम्हे क्या करना है.. मेरे होंठों से बदला लोगे या चुचो से खेलोगे? Blowjob दूँ या मेरे रसगुल्ले को मेरी चुत चाहिए?
गौतम मुस्कुराते हुए - सिम्मी सच कहु तो मैं पहली नज़र में तेरे प्यार में ही पड़ गया.. पर क्या करू.. मर्द हूँ.. औऱ मर्द को मरवाने का शोक नहीं रहता.. अपने अलवा किसी औऱ का लंड चाहे नकली क्यूना हो देखकर मुंह से सिर्फ गाली नकलती है.. तूने जो मेरे साथ वो बहुत गलत था..
सिमरन गौतम को चूमते हुए - तो उसका बदला भी तो लोगे तुम अभी.. अपने इतने मोटे लंड से मेरी चुत मारोगे.. पता नहीं क्या हाल होगा मेरी चुत का.. मुझे तो बहुत दर्द दोगे तुम.. मैं कैसे सह पाउंगी वो सोचा है तुमने.. होंठों से होंठ मिलाकर चूमने जितना आसान थोड़ी है चूत मराना.. मेरी तो छोटी सी थी तुम्हे तो पता भी नहीं चला होगा.. पर मेरा क्या होगा..
गौतम सिम्मी की सलवार कुर्ती उतारते हुए - ये तो पहले सोचना चाहिए था.. वैसे फिगर सच बहुत सेक्सी है तेरा.. तू तो गई साली आज..
सिमरन मुस्कुराते हुए - मुझे तो लगा था तुम मानोगे ही नहीं.. पर थोड़ा सा इमोशनल होकर दो मीठी बात क्या की.. तुम तो मोम की तरह पिघल गए.. जितना सुन्दर चेहरा है उतना ही सुन्दर दिल भी है तुम्हारा मेरे रसगुल्ले.. तुम किसी को रोते हुए नहीं देख सकते ना..
गौतम सिम्मी के बूब्स मसलकर दबाते हुए - गलत.. मुझे तो तुम्हारे जैसी खूबसूरत कालिया बिस्तर में रोते हुए देखना बहुत पसंद है.. थोड़ी देर बाद तुम भी रोने लगोगी..

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सिमरन मुस्कुराते हुए गौतम का सर चूमकर - ऐसे रोने के लिए तो कब से तरस रही हूँ मेरे रसगुल्ले.. हमेशा सोचती थी कौन होगा जो मुझे अपना बनाएगा.. तुम्हारे लिए तो मैं ख़ुशी खुशी अपनी चुत को क्या जान भी कुर्बान कर दू.. कुछ देर की मुलाक़ात ने मेरे दिल में तुम्हारी वो जगह बना दी है जो सालों के बाद भी लोग नहीं बना पाते.. मेरी लाइफ के पहले मर्द हो तुम.. औऱ अब लगता है आखिरी भी..
गौतम चुचे मसलकर अब चुचे पर अपना मुंह लगा देता है औऱ सिम्मी के तने चुचो पर खड़े हुए चुचक चूसते हुए कहता है - बातों की तो जादूगरनी है तू.. जितनी प्यारी शकल है उतनी प्यारी बातें भी करती है.. पर मुझसे ज्यादा लगाव मत कर लेना.. मैं आवारा हवा का झोका हूँ.. पल दो पल के लिए ठहरता हूँ..
सिमरन मुस्कुराते हुए गौतम का सर अपने हाथों में पकड़ कर उसे अपने चुचे चुसवाती हुई कहती है - तुम चिंता मत करो गौतम.. मैं कभी तुमपर कोई दबाब नहीं बनाउंगी.. म मैं तुम्हे हर तरह से संतुष्ट कर सकती हूँ.. औऱ जोर जबरदस्ती से तुम्हे हासिल करके भी तुमसे दूर ही रह जाउंगी.. इसलिए बस तुमसे थोड़ा सा प्यार चाहती हूँ औऱ कुछ नहीं.. आह्ह.. रसगुल्ले.. आराम से.. आहहह... दांतो से तो मत काट मेरे निप्पल्स को.. कितना जोर से चूसता है तू.. बचपन में आंटी को तो बहुत दर्द होता होगा तुझे दूध पिलाने में.. दांतो से बहुत तेज़ काटता होगा तू तो उनके निप्पल्स को बचपन में..
गौतम मुस्कुराते हुए - मैं तो अब भी बहुत तेज़ काटता हूँ औऱ वो मुझे अब भी प्यार से अपना दूध पिलती है.. मगर तेरी तरह हल्का सा दाँत लगने पर आह्ह.. उह्ह्ह.. नहीं करती..
सिमरन गौतम के बालों में हाथ फेरती हुई - अब आज पहली बार कोई मर्द मेरे चुचो को चूस रहा है, वो भी दांतो से खींचते हुए काट कर.. मुंह से आह्ह तो निकलेगी ही.. औऱ आंटी आज भी तुम्हे अपना दूध पीलाती है? सच में?
गौतम सिम्मी के कूल्हे पकडकर मसलते हुए - शर्त लगाती हो?
सिमरन - मुझे नहीं लगानी शर्त वर्त.. जितने प्यारे तुम हो ना.. तुम्हे तो कोई भी अपना दूध पीला सकता है..
गौतम सिमरन की आँखों में देखकर - सिम्मी..
सिमरन - हम्म्म...
गौतम - मुझे हमारे लिए सच में बुरा लग रहा है.. अब बहुत बुरा हाल होने वाला है तेरा.. ऊपर से नीचे तक पारियों जैसा हुस्न आज लूटने वाला है..
सिमरन गौतम के निचले होंठ को अपने दांतो से खींचकर चूमती हुई - हमारा मिलन पूरा है मेरे रसगुल्ले.. मैंने जब भी ऊपर वाले से दुआ की, तब यही माँगा कि मुझे एक प्यारा सा लड़का अपना ले.. मैं जैसी हूँ वैसी ही मुझे अपनी बना ले औऱ कभी मेरा साथ नहीं छोड़े.. औऱ देखो आज मुझे तुम मिल गए.. 19 साल की मैं हूँ औऱ तुम भी मुझे 18-19 साल के ही लगते हो..
गौतम - तुमसे एक साल बड़ा हूँ मैं.. पुरे बीस साल का..
सिमरन - हरकतो औऱ चेहरे से तो बिलकुल भी नहीं लगते..
गौतम - अच्छा औऱ कोई ख्वाहिश है? बता दो आज तुम्हारी सब ख्वाहिस पूरी होने वाली है...
सिमरन कुछ सोचकर - तुम सच में करोगे मेरी ख्वाहिश पूरी?
गौतम - 100 परसेंट..
सिमरन - सोच लो बाद में मुकर तो नहीं जाओगे? बहाने बनाने लगो कहीं.. ये नहीं कर सकता.. मुझसे नहीं होगा? मर्द जात हो.. कहीं तुम्हरा ego हर्ट हो जाये..
गौतम मुस्कुराते हुए - चुत चटवानी है?
सिमरन हैरत हुए - तुम्हे कैसे पता?
गौतम - तुम्हारी आँखों से..
सिमरन - तो बोलो.. चाटोगे?
गौतम सिम्मी के नीचे जांघो के जोड़ आते हुए - इसे तो चाट चाट के कहा जाऊंगा मेरी चाशनी..
सिमरन - गौतम सिगरेट दो ना एक..
गौतम सिम्मी की चुत सहलाते हुए - मैं जेब में थोड़ी लेके घूमता हूँ.. वहा पीछे बेड के बगल की ड्रावर में होगी..
सिमरन सिगरेट निकालकर सुलगती है औऱ एक लम्बा कश मारकर धुआँ छोड़ते हुए गौतम से कहती है - अगर मन नहीं है तो छोड़ दे रसगुल्ले.. मत कर.. मैं जबरदस्ती नहीं करुँगी.. मैं नहीं चाहती तुम बिना मन के कुछ भी मेरे साथ करो..
गौतम सिमरन की चुत का दाना चूमकर उसको मुंह में लेते हुए - ड्रामा बंद कर साली.. बस मुंह में मत झड़ना..
सिमरन मुस्कुराते हुए सिगरेट का कश लेकर - काश तू सच में जिंदगी भर के लिए मेरा हो जाए रसगुल्ले..
गौतम चुत चूसता हुआ - ताकि तू हर रात नकली लंड से मेरी गांड मार सके..
सिमरन हसते हुए - तो क्या हुआ.. प्यार से मारूंगी.. औऱ बदले में तुम्हारा इतना बड़ा भी तो झेलूंगी हर रात.. तुम्हे जैसी बीवी चाहिए बिलकुल वैसी बनकर दिखाउंगी..
गौतम - रहने दो.. तेरा निकलने वाला हो तो बता देना..
सिमरन सिगरेट के कश लेती हुई गौतम का सर अपनी चुत पर दबाती हुई - आह्ह गौतम.. मज़ा आ रहा है.. तुम्हारी जगह मैं होती तो शर्म से पानी पानी हो जाती.. तुम तो कैसे बेशर्म होकर चूस रहे हो..
गौतम - मर्द हूँ साली.. शर्माना मेरा काम नहीं..
सिमरन सिगरेट का कश लेकर धुआँ गौतम के ऊपर छोड़ती हुई - आह्ह गुतम.. तुम तो पुरे बेशर्म हो.. मेरे मुंह में अपना लंड दिया था तब कैसे बोल रहे थे.. ऐसे नहीं ऐसे चुसो.. ये करो.. वो करो.. औऱ ना जाने क्या क्या.. मेरी चाट रहे हो तो अच्छे से चाटो.. (गौतम के जीभ चुत में घुसाते हुए) चुसो चुपचाप..आहहह... रसगुल्ले... ऐसे.. अहह.. अहह..
सिमरन सिगरेट के कश लेते हुए अपनी चुत गौतम के मुंह में पूरी तरह घुसा कर उसे चूसा रही थी औऱ कामुक निगाहो से गौतम का चेहरा देखकर मन ही मन उसके प्यार में डूबती जा रही थी.. कुछ ही देर के बाद सिमरन झड़ने लगी तो गौतम ने चुत से मुंह से निकाल दिया मगर फिर भी सिमरन की चुत से निकली एक दो धार तो गौतम के मुंह में गिर ही गई थी जिसे गौतम थूकता हुआ टेबल पर से पानी की बोतल उठाकर कुल्ला करने लगा..

गौतम - साली तुझे कहा था ना.. निकलने वाला हो तो बोल देना..
सिमरन - तुमने अपना माल निकालने से पहले बोला था जो मुझसे उम्मीद रखते हो. मेरे तो मुंह में पूरा माल गिरा दिया औऱ गले से नीचे भी उतार दिया.. तब तो तुम बड़े खुश हो रहे थे. अब क्या हुआ? मुझे तो अपना माल पीलाया था तुमने..
गौतम सिम्मी को देखकर अपनी पेंट नीचे करके लंड निकालकर हिलाते हुए - मेरा माल तो साली तू अब भी वापस पीयेगी... ये कहते हुए गौतम सिमरन के बाल पकड़कर उसके मुंह में अपना लोडा घुसा देता है.. औऱ उसे अपना लंड चूसाने लगता है..

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सिमरन - आह्ह आराम से ना.. गौतम.. आराम से.. आह्ह..गुगुगुगुगुगुगु...
सिम्मी गौतम के लंड को मुंह में लेकर चुस्ती हुई गौतम को देखती है औऱ गौतम सिमरन को देखकर बोलता है..
गौतम - बहुत बोलना आ रहा था ना तुझे.. अब बोल.. मुझसे चुत चूसाएगी साली... अब खुद चूस.. बहन की लोड़ी.. मुंह में निकालेगी.. अब ले ना मुंह में पूरा.. क्या हुआ? आ नहीं रहा क्या मेरा लोडा मुंह में? साली ये मर्द का लंड है तेरी जैसी कमसिन कली के मुंह में नहीं आयगा.. तू मुझे चुत चटवाएगी साली.. अब लंड चूस.. तुम लड़कियों का यही काम है
.. हमारा काम तुम्हे अपना लंड चुसवाना है.. समझी? मैंने इमोशनल होकर थोड़ा सा चूस क्या लिया खुदको तुरम खा समझने लग गई तू तो.. मेरे मुंह में निकालेगी बहन की लोड़ी.. चूस.. ले मुंह में..
सिमरन - ले तो रही हूँ जितना मुंह में आ रहा है.. तुम तो जबरदस्ती करने पर उतारू हो गए.. मुझे ज्यादा मर्द बनके दिखाओगे ना तो दांतो से लंड पर ऐसा काट के खाऊंग्गी की याद रखोगे..
गौतम सिम्मी को पलटकर बेड पर झुकाते हुए - जबरदस्ती की कहा है मेरी फुलझड़ी.. जबरदस्ती तो अब होगी..
ये कहकर गौतम सिम्मी की चुत पर थूक देता है औऱ हाथों से सिमरन की चुत के छेद पर थूक लगाने लागता है..
सिमरन सिर मोड़कर गौतम को देखते हुए - मेरा पहली बार है रसगुल्ले.. मुझे ख़ुशी है की मेरी पसंद का कोई लड़का मेरे साथ ये सब कर रहा है..
गौतम सिम्मी की कमर पकड़कर उसकी चुत के छेद पर अपना लंड सेट करके दबाब बनाते हुए - पहली बार शायद थोड़ा दर्द होगा सिम्मी.. संभाल लेना..
सिमरन मुस्कुराते हुए - इस दर्द के लिए तो कब से इंतजार कर रही थी.. मेरी चिंता मत करो गौतम तुम अपनी मर्ज़ी से मेरे बदन का मज़ा लो.. मैं तुम्हे हर तरह से खुश कर देना चाहती हूँ..

गौतम सिम्मी की बात सुनकर अपना लोडा उसकी चुत में घुसा देता है जिससे उसके लंड का टोपा लंड के थोड़े से हिस्से के साथ सिमरन की चुत में घुस जाता है औऱ सिमरन की पहली दर्द औऱ काम से मिश्रित चिंख निकल जाती है मगर बाहर लोन में चलते dj की आवाज में सिम्मी की चिंख दब चुकी थी..
गौतम कुछदेर स्थिर रहकर धीरे धीरे अपना लंड सिमरन की चुत में धकेलने लगता है औऱ कड़ी मेहनत औऱ मशक्कत के बाद अपना आधे से थोड़ा सा ज्यादा लंड सिमरन की चुत में डाल देता है.. सिम्मी की चुत से हल्का सा खून आकर गौतम को उसके कुंवारे पन का प्रमाण देता है.. सिमरन गौतम के लंड को झेल गई थी उसकी चुत में होता दर्द औऱ गौतम को सुख देने की प्रबल इच्छा उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी..
गौतम भी सिमरन का पूरा ख़याल रखते हुए उसकी चुत का उद्घाटन करने मे लगा हुआ था.. गौतम ने बहुत धीरे धीरे सिमरन की चुत को अपने लंड से खोल दिया था औऱ अब धीरे धीरे बिस्तर उल्टी पड़ी हुई सिमरन को पीछे से चोदने में लगा हुआ था..

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सिमरन की काममय सिस्कारीया पुरे कमरे में सुनाई दे रही थी मगर कमरे से बाहर dj की आवाज में वो सिस्करीया कहीं दब रही थी..
गौतम ने सिमरन को घोड़ी बनाके पीछे से उसके दोनों बूब्स पकड़ कर सिमरन की चुत मारना शुरू कर दिया औऱ सिमरन अब काम शक्ति से परिचित होकर आँख बंद किये सिसकियाँ ले रही थी औऱ गौतम से चुदवा रही थी.. सिमरन को इस मिलन में अदभुद सुख मिल रहा था..
गौतम ने बूब्स छोड़कर सिमरन के बाल पकड़ लिए औऱ जोरदार 5-6 धक्के मारे जिससे गौतम का सारा लंड सिमरन की चुत में घुस गया औऱ सिमरन के गले से जोरदार चिंख निकल गई जो कमरे बाहर dj की आवाज में कहीं खो गई.. सिमरन को अपनी चुत के गोदाम बनने की खुशखबरी मिल चुकी थी जिसे वो जोर जोर से चिल्लाती हुई सबको बताना चाहती थी मगर वहा सिमरन को सुनने वाला कोई था ही नहीं..

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गौतम - उफ्फ्फ.. सिम्मी.. मान गए यार.. क्या चुत है तेरी.. मज़ा आ रहा है तेरी चुत मारने में..
सिमरन हलकी सी रोती हुई - कमीने एक दम से क्या हो गया तुझे.. धीरे कर ना.. औऱ मज़ा आएगा ही ना.. सील जो तोड़ दी तूने आज मेरी..
गौतम - सिम्मी बहुत प्यारी है यार तू सच में.. पहली बार ऐसा हुआ है चोदने के कुछ देर में ही मेरा झड़ने का मन हो रहा है..
सिमरन - मुंह में झाड़ना मेरे रसगुल्ले.. मुझे तेरा रस पिना है..
गौतम जोर के झटके मारके चुत चोदते हुए - पीला दूंगा यार.. उफ्फ्फ कयामत है तू तो..
सिमरन सिसकियाँ लेते हुए - गौतम आराम से बहुत दर्द हो रहा है मुझे.. आह्ह.. धीरे..
गौतम लगातार तेज़ तेज़ चोदते हुए - थोड़ा सा दर्द नहीं सह सकती तू अपने रसगुल्ले के लिए?
सिमरन चिल्लाते हुए - गौतम आराम से यार..
गौतम - धीरे ही चोद रहा हूँ.. अभी तो टॉप गियर डाला ही नहीं..
सिमरन - तुम तो बहुत दर्द देते हो गौतम.. मेरी जान निकाल दोगे..
गौतम हल्का धीरे होते हुए - सिमरन बहुत मस्त चुत है तुम्हारी मन करता है पूरी रात चोदता रहु..
सिमरन - तू कुछ भी कर मेरे रसगुले तुझे सब आजादी है.. बस मुझे औऱ ज्यादा दर्द मत दे.. पहला मिलन इतना भी यादगार मत बना की याद करते ही गंद में दर्द होने लगे..

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गौतम चुत मारते हुए - आई लव यू सिमरन.. तेरे मेरे पहले का कोई नाता जरुर है..
सिमरन - पहले का तो पता नहीं रसगुल्ले.. पर अब आगे जरूर हमारा रिश्ता होगा.. प्यार का रिश्ता.. आह्ह..
गौतम गांड मारना बंद करके लोडा सिमरन के मुंह की तरफ करके - होने वाला है सिम्मी.. आजा लेले मेरा लंड मुंह में..

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सिमरन लोडा मुंह में लेकर चूसने लगती है औऱ कुछ पलों में गौतम सिमरन के मुंह में झड़ जाता है जिसे सिमरन पी जाती है औऱ गौतम को गले से लगाकर kiss करते हुए कहती है..
सिमरन - तू दिल में बस गया रसगुल्ले... सच्ची मोहब्बत हो गई तुझसे..
गौतम सिमरन के होंठों को चूमकर - चल अब शादी भी इंजॉय कर लेते है थोड़ा.. 9.30 बजने वाले है..
सिमरन - तुम जाओ.. मुझे थोड़ा समय लगेगा आने में..
गौतम - ठीक है तुम्हारी मर्ज़ी.. पर जल्दी आना.. औऱ वीडियो डिलीट कर देना..
सिमरन - वो तो कब का कर दिया चाहो तो फ़ोन देख लो..
गौतम सिमरन का बोबा पकड़ कर चूसते हुए - सच में डिलीट कर दिया ना? साली तेरी माँ चोद दूंगा अगर झूठ बोला तो तूने?

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सिमरन गौतम के होंठ चूमकर - मुझे चोद कर मन नहीं भरा जो अब मेरी माँ भी चोदनी है तुम्हे.. वीडियो सच में डिलीट कर दिए मैंने.. मैं अपनी मोहब्बत को बदनाम थोड़ी कर सकती हूँ...
गौतम - चोदने लायक हुई तो तेरी माँ भी चोद दूंगा.. मुझे तो सब पसंद है.. मिल्फ ज्यादा पसंद है..
सिमरन हस्ती हुई - अब कपडे पहन लो .. तुमको ऐसे देखकर मेरा मूंड वापस बन रहा है.. जा मैं आती हूँ..
गौतम अपने कपडे पहनकर लोन की तरफ निकल जाता है औऱ सिम्मी अपने आपको ठीक करके बदन में आ चुकी लचक को काबू करने लगती है...

*********

मनोज - क्या हुआ भाई? मज़ा नहीं आया क्या मेरी बहन के साथ?
गौतम - साले तेरी बहन है या मिया खलीफा? कितनी वहशी है..
मनोज - उसकी गलती नहीं है भाई.. तू है ही इतना चिकना वो भी क्या करें? वैसे कैसी लगी ये बता?
गौतम - तू नहीं जानता कैसी है वो?
मनोज - भाई बहन है मेरी.. हमारे बीच सिर्फ अच्छी दोस्ती है.. ऐसा वैसा कुछ नहीं.. मैंने आज तक उसे छुआ तक नहीं..
गौतम - लगता है सिर्फ बेलन से ही काम चलाया है उसने आज तक..
मनोज - पूरा मोहल्ला आगे पीछे घूमता है सिम्मी के.. पर किसी को भाव तक नहीं देती..
गौतम - देगी कैसे डरती होगी कोई नकली लंड गांड मरवाने से मना ना कर दे...पर आज चुत में जन्नत मिल गई मुझे तो.. ऊपर से इतना सेक्सी फिगर है घोड़ी बनाने के बाद तो नशा ही हो गया था मुझे..
मनोज - जरुरत से ज्यादा तो नहीं पेला ना तूने? अभी तो बेचारी 19 साल की फूल सी बच्ची है..
गौतम - भाई तेरी फूल सी बहन को अच्छे से खिला दिया मैंने.. मेरे साथ जबरदस्ती कर रही थी.. मैंने थोड़ी सी की तो अकल आ गई उसे..
मनोज - पर है कहाँ वो? साथ क्यों नहीं आई..
गौतम - ठीक से चला जाएगा तब साथ आयगी ना.. अब तो चाल में लचक आ गई उसके.. देख वो आ रही.. कैसे बलखाते हुए आ रही है..
मनोज - अरे बहनचोद तूने तो रगड़ दिया लगता है.. मम्मी पापा देख लेंगे तो बहुत सुनाएंगे इसे..
गौतम - कुछ भी बोल देना यार.. क्या परेशान हो रहा है..

सिम्मी आकर अपने भाई के सामने गौतम को kiss कर लेती है औऱ प्यार से कहती है - चल रसगुल्ले... खाना खाते है साथ में.. भईया आप भी चलो..
मनोज - अभी रहने दे.. बहुत भीड़ है खाने पर.. थोड़ी कम हो जाए फिर चलते है खाने.. तब तक एक एक पेग औऱ ले लेते है.. चल.. स्टेज के पीछे खाली जगह वहा चलते है..
गौतम - वहां मत जा.. रांडे चुद रही है वहा पर...
मनोज - अरे कोई नहीं था अभी तो..
गौतम - भाई तब रांडे नाच रही थी.. अब नाच गाना ख़त्म हो गया तो सारी रंडिया स्टेज के पीछे खाली जगह में मेहमानो के लोडे खा रही है.. सब घराती बराती मिलकर चोद रहे है.. भईया के दोस्त औऱ अंकल के यार लोग सब मिलके पेल रहे है.. रंडियो को घोड़ी बनाकर..
मनोज - तूने नहीं चोदी रांड?
गौतम सिम्मी के गले में हाथ डालकर उसकी चूची मसलते हुए - तेरी बहन चोद रहा था ना.. औऱ मुझे रंडी चोदने का ज्यादा शोक भी नहीं है.. कोई घरेलु मिल जाए तो बात अलग है..
मनोज - तू तो मेरी बहन की ले रहा है मैं किसकी लू यार..
सिम्मी - सच में.. रसगुल्ले.. मेरे भाई के लिए भी कुछ कर ना.. बेचारा अपने हाथों से काम चलाता है..
गौतम फ़ोन निकालते हुए - करता हूँ तेरी व्यवस्था..
सिम्मी मुस्कुराते हुए अपनी चूची पर से गौतम का हाथ हटा कर - भईया के सामने मत कर..
गौतम - शर्मा क्यों रही है मेरी जान... साला है मेरा.. इसके सामने तेरे चुचे दबाउ या गांड मारु.. ये कुछ नहीं बोलने वाला..

गौतम फ़ोन पर - हेलो.. चेतन भईया?
चेतन - हाँ ग़ुगु..
गौतम - भईया वो एक बात करनी थी आपसे..
चेतन - हाँ बोल ग़ुगु.. क्या बात है..
गौतम - भईया नचाने वाली औरते आई है ना..
चेतन - हाँ..
गौतम - भईया उनमे से जो नीली साडी में थी ना.. उससे मिलना है...
चेतन - नहीं ग़ुगु.. बुआ या माँ-पापा को पता लगा तो बहुत सुनाएगे मुझे.. वो सब रंडिया है तू अभी बच्चा है इन सब से दूर रह..
गौतम - भईया सब एन्जॉय कर रहे है मुझे छोड़कर.. औऱ पता कैसे चलेगा.. आप थोड़ी बताओगे.. ना मैं बताने वाला.. प्लीज भईया.. बहुत मन हो रहा है..
चेतन - अच्छा ठीक है नीली साडी वाली तो अंकल ज़ी के साथ है कोई दूसरी भेज रहा हूँ तेरे रूम में.. जल्दी से काम करके वापस लोन में आ जाना.. किसी को पता ना चले..
गौतम - ठीक है भाईया.. जैसा आप कहो..
चेतन - औऱ कंडोम याद से लगा लेना.. ये सब रंडिया है रोज़ किसी ना किसी से चुदवाती है.. चल रखता हूँ..

गौतम - ले साले.. तेरा जुगाड़ भी करवा दिया.. जा मेरे रूम में वहा आ जायेगी तेरे लिए कोई ना कोई रांड..
मनोज - तू भी चल ना..
गौतम सिमरन को देखकर - नहीं मैं यही ठीक हूँ तू जा..
सिम्मी - भईया वापस जाना है जरा जल्दी आना.. पापा का फ़ोन आया था बुला रहे थे..
मनोज - ठीक है..

मनोज गौतम के रूम में चला जाता है औऱ वहा कुछ देर बाद एक रांड आ जाती है मनोज औऱ उस रांड में कुछ देर चुदाई होती है फिर 15-20 बाद मनोज वापस लोन में आ जाता है औऱ सिम्मी को लेके वापस जाने लगता है..
गौतम - सिम्मी आज रात मेरे पास नहीं रुक सकती? मन नहीं कर रहा तुझे अपने दूर करने का..
सिमरन - मन तो मेरा भी नहीं है रसगुल्ले तुझसे दूर जाने का.. पर क्या करू.. पापा बहुत स्ट्रिक्ट है नहीं मानेगे मुझे छोड़ने के लिए.. मैं फ़ोन करुँगी..
गौतम - अपना ख्याल रखना सिम्मी..
सिमरन गौतम को चूमते हुए - तुम भी अपना ख्याल रखना रसगुल्ले..
मनोज दोनों का चुम्बन देखकर - अरे यहां मैं भी हूँ कुछ तो शर्म करो.. यही सब करना है अकेले में कहीं जाकर कर लो..
सिम्मी चुम्बन तोड़कर - चूमने दो ना भईया.. बड़ी मुरादो के बाद तो मुझे मेरा रसगुल्ला मिला है.. मन तो कर रहा है इसे भी अपने साथ ले जाऊ..
मनोज - पापा का फ़ोन आ रहा है सिम्मी चल..
गौतम मनोज से - साले इसका ख्याल रखना.. ये मेरी है..
मनोज - उसकी चिंता मत कर भाई.. बस मेरी बहन से जल्दी मिलने आना.. बेचारी बहुत अकेले रही है.. अब इसे प्यारकी जरुरत है..
सिमरन वापस गौतम को चूमते हुए - बाए मेरे रसगुले.. इंतजार करूंगी तुम्हारा.. जल्दी मिलने आना..
गौतम - बाय जान..
मनोज गौतम से गले मिलता हुआ - चल भाई.. चलता हूँ..
गौतम - अपनी बहन का ख्याल रखना यार.. बहुत प्यारी है..
मनोज सिमरन को साथ लेकर पार्किंग की तरफ चला जाता है औऱ एक वाइट कार में अपने माँ पापा के साथ बैठ जाता है.. कार वहा से चली जाती है गौतम मुस्कुराते हुए कार को जाते हुए देखता रहता है..
 
Update 25


बुआ बहुत अच्छा नाचती हो आप तो.. देखो कैसे सारे मर्द आपको देखकर कुत्ते की तरह जीभ बाहर निकाल रहे है..
आरती ने नाचकर अभी अभी बगल वाली कुर्सी पर बैठी सुमन से कहा तो सुमन खिलखिलाती हुई हसने लगी औऱ आस पास खड़े मर्दो को देखने लगी जो उसी के ऊपर नज़र गड़ाये खड़े थे..
सुमन अच्छे से समझ रही थी मर्दो की नज़र उसके बदन पर कहा कहा पड़ रही है औऱ वो सब क्यों इतने हवस भारी नज़रो से उसे देख रहे है..
रात के दस बज चुके थे औऱ सुमन को अब तक कई milflover लड़को औऱ उसकी हम उम्र आदमियों ने नंबर देने की कोशिश की थी मगर सुमन ने एक भी आदमी को भाव नहीं दिया औऱ अपनी मस्ती में मस्त होकर शादी का पूरा मज़ा लेती रही..
सुमन - निकालने दो जीभ बाहर.. कोनसा जीभ बाहर निकालने से खाने को हड्डी मिल जायेगी इन कुत्तो को..
आरती औऱ सुमन इस बात पर जोर से हँसने लगती है..
आरती - मानना पड़ेगा बुआ.. पुरानी शराब हो.. हम नई नई जवान औरतों से ज्यादा नशा देती हो.. मुझसे ज्यादा तो सब आपको ही देख रहे है.
सुमन - चुप कर अब तू.. चल अब बहुत नाच गाना हो गया कुछ खा लेते है बहुत भूक लगने लगी है मुझे तो..
आरती - बुआ आप खाओ खाना मुझे तो अभी इन मर्दो का पानी भी निजालवाना है.. आज तो बहुत लोगों ने आपके औऱ मेरे नाम से पानी निकाला होगा..
सुमन हस्ती हुई - कितना बेशर्म हो गई है तू.. औऱ इस लंगड़ी चाल से कब तक नाचेगी? चल अब मैं तो जाती हूँ बहुत नाच लिया..
कोमल आते हुए - सुमन ग़ुगु को कहीं देखा तूने?
सुमन - क्यों भाभी क्या हुआ?
कोमल - सुमन पंडित ज़ी ने फेरो के लिए जो सामान मंगवाया था वो तो घर ही रह गया है.. तू ग़ुगु को बोल ना जाकर ले आये फ़ोन भी नहीं उठा रहा वो..
सुमन - यही कहीं होगा.. भाभी मैं देखती हूँ..
कोमल - जल्दी देख सुमन.. आज का ही शुभ समय है.. पूर्णिमा का दिन है.. अगर 12 बजे के बाद फेरे पड़े तो अशुभ घड़ी शुरू हो जायेगी..
सुमन - आज पूर्णिमा है?
कोमल - हाँ.. लेकिन तू इतनी फ़िक्र में क्यों है?
सुमन - कुछ नहीं भाभी.. मैं ग़ुगु के साथ घर जाती हूँ औऱ सामान लेकर आती हूँ..
कोमल - लो सुमन चाबी.. जल्दी आना..
सुमन - चिंता मत करो भाभी अभी समय है..

सुमन कोमल से चाबी लेकर लोन में गौतम को ढूंढने लगती है.. औऱ कुछ देर बाद गौतम सुमन को अकेला कहीं बैठा हुआ अपने फ़ोन में किसी से चैटिंग करते हुए दिखाई देता है..
सुमन - ग़ुगु चल.. घर चलना है..
गौतम - क्यों?
सुमन - चल ना रास्ते में बताती हूँ..
गौतम उठकर सुमन के साथ पार्किंग की तरफ जाते हुए - क्या हुआ माँ.. सब ठीक है ना इतनी जल्दी में क्यों हो..
सुमन - अरे वो भाभी कुछ सामान भूल गई है घर पर.. वही लेकर आना है.. फेरो के लिए पंडित ज़ी को जरुरत है उसकी..
गौतम - ये बात है क्या.. मुझे लगा आज मैं लकी होने वाला हूँ.. आप शायद मान गई हो..
सुमन हसते हुए - ग़ुगु तू.. हर दम वही सब सोचता रहता है?
गौतम - अब आपके जैसी खूबसूरत माँ हो तो औऱ क्या सोचूंगा.. मैं भी देख रहा था कैसे लोग आपको नाचते हुए देख रहे थे.. कई लोगों ने तो नंबर भी दिये है..
सुमन - वो सब मैंने नहीं लिए.. मुझे किसी में दिलचस्पी नहीं है.. तू जल्दी से गाडी चला औऱ घर चल.. एक औऱ काम है तुझसे..
गौतम - औऱ वो क्या है..
सुमन - अकेले में बताऊंगी..
गौतम - यहां पार्किंग में कौन है बता दो...
सुमन - नहीं.. तू चल..
गौतम गाडी स्टार्ट करके घर की तरफ मोड़ लेता है रात के सुनसान रास्ते औऱ खाली सडक से घर पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता...
सुमन का दरवाजा खोलकर अंदर आ जाती है गौतम भी उसके पीछे पीछे अंदर आकर घर का दरवाजा लगा देता है औऱ सुमन से कहता है..
गौतम - अब तो बता दो दूसरा कम क्या है..
सुमन मुस्कुराते हुए - थोड़ा सब्र कर शहजादे.. इतनी बेसब्री अच्छी नहीं पहले सामान देख लेती हूँ कहा रखा है भाभी ने..
गौतम - अपने रूम में रखा होगा..
सुमन - नहीं ग़ुगु सारा सामान भाभी ने इसी रूम में रखा था..
गौतम - रुको मैं फ़ोन करके पूछता हूँ..
सुमन - हाँ ये ठीक रहेगा.. पूछो कहा रखा है सामान..
गौतम फ़ोन पर - हेलो मामी.. सामान कहा है रखा है जो आप छोड़ गए थे?
सुमन - अरे बेटा.. गलती हो गई.. तेरे मामा वो सामान ले तो आये पर अपनी गाडी की डिक्की से निकाला ही नहीं.. सामान यही गाडी में है.. मैंने तेरे मामा को कहकर मंगवा लिया.. तुम्हे बिना काम ही घर जाना पड़ा..
गौतम - कोई बात नहीं मामी.. फ़ोन कट जाता है..

फ़ोन स्पीकर पर था सुमन भी सारी बातें सुन रही थी..
सुमन - भाभी भी ना.. ऐसा नहीं कि पहले भईया से पूछ ले.. फालतू ही यहां आये..
गौतम सुमन को बाहों मे भरते हुए - फ़ालतू क्यों माँ.. हम यहां खुलकर रोमांस कर सकते है.. अब बताओ औऱ क्या काम था मुझसे..
सुमन - पहले छोड़.. मुझे कुछ काम है..
गौतम सुमन को छोड़ते हुए - लो छोड़ दिया...
सुमन मुस्कुराते हुए - अपने कमरे में जाके बैठ मैं पांच मिनट में आती हूँ..
गौतम - जल्दी आना माँ.. वरना मैं आ जाऊँगा..
सुमन गौतम की बात पर हसते हुए अपने कमरे में चली जाती है औऱ अपने साड़ियों में से एक लाल कलर की साडी पहन लेती है.. औऱ गौतम के कमरे में आती है..
गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा तो याद आ ही गया आपको आज पूर्णिमा है.. मगर जब तक मेरी मांग पूरी नहीं होगी मैं आपका दूध नहीं पिने वाला..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम की गोद में आकर बैठती हुई अपना ब्लाउज खोलकर - मेरे इन दोनो कबूतरों को देखकर आज बहुत सारे मर्दो ने इन्हे पाने की कोशिश की थी.. औऱ एक तू है.. इतनी प्यार से मिन्नतें करके.. हाथ जोड़कर.. तुझे अपने बोबे चुसवाती हूँ फिर भी तू नखरे करता है..
गौतम - मैं नखरे करता हूँ या आप नखरे करती हो.. कब से बोल रहा हूँ सेक्स करते है पर आप हो की सुनती ही नहीं.. हम दोनों के बीच अकेले में इतना सब होता है.. सेक्स भी हो जाएगा तो कौन पूछने वाला है? आपको चाहिए तो कंडोम पहन के चोद लूंगा मुझे कोई परेशानी नहीं है उसमे.. बस आप हाँ कर दो बहुत प्यार करुंगा माँ आपको..
सुमन - बेशम.. भला कोई बेटा भी अपनी सगी माँ चोदता है? तू तो ऐसी बात कर रहा है जो आज तक कहीं नहीं हुई..
गौतम - हर दूसरे घर में होती है माँ.. पर आप मानने को ही तैयार नहीं हो..
सुमन - कहा होती? तेरे सपनो में? कुछ भी मत बोल.. चुपचाप अब मेरे बोबे चूस.. वापस भी चलना है..
गौतम - नहीं चूसने माँ मुझे आपके बोबे.. हर बार बोबे चूसा कर लंड खड़ा कर देती हो फिर खड़े लंड पर चोट करके चली जाती हो.. औऱ आप नहीं मानती इसका मतलब ये नहीं कि दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता.. दुनिया में बहुत कुछ होता है औऱ इंडिया में तो औऱ भी ज्यादा.. कहीं किसी घर कोई बेटा अपनी माँ चोद रहा है तो कहीं कोई बाप अपनी बेटी.. भाई बहन तो हर दूसरे घर में चुदाई कर रहे है.. लोग इसपर बात करने से डरते है इसलिए अब तक ये सब छीपा हुआ है.. इंटरनेट जानती हो ना.. उस पर कई ऐसे समाचार पत्र आते है जिनमे घर में होने वाली चुदाई के समाचार आते है वो भी पूरी डिटेल के साथ.. मगर आपको क्या पता.. आपको तो ये सब बकवास औऱ कोरी बातें लगती है..
सुमन - अच्छा होनसा अखबार छापता ऐसी खबर.. बता जरा..
गौतम - डार्क वेब करके कुछ होता है उस पर आते है.. मेने एक साइट को सब्सक्राइब किया है उसमे इंडिया की incest न्यूज़ आती है.. "भारत की पारिवारिक चुदाईया" नाम से आता है समाचार... हर वीकेंड पर.. पढ़ोगी..
सुमन कुछ पल रूककर -पढ़ा जरा.. मैं भी तो देखु तू सच कह भी रहा है या नहीं..
गौतम अपना फ़ोन निकालकर - लो पढ़ो ये पिछले वीकेंड का न्यूज़ पेपर है..
सुमन - तू ही पढ़ के सुना.. मुझसे फ़ोन में नहीं पढ़ा जाएगा.. आँखे कमजोर हो गई है मेरी..
गौतम फ़ोन दिखाते हुए - सुनो.. पहली खबर - बंगाल के सिलीगुड़ी में एक बाप पिछले 1 साल से कर रहा था अपनी बेटी के साथ गलत काम.. बेटी के प्रेग्नेंट होने पर आस पास के लोगों को इस बात का पता चला.. बेटी ने पुलिस से कहा की उसके बाप ने उसकी मर्ज़ी से उसके साथ सम्बन्ध बनाये थे औऱ अब वो अपने बाप के साथ ही रहना चाहती है..
दूसरी खबर - बिहार के मधुबनी में भाई ने रचाई अपनी ही बहन के साथ शादी.. दोनों का चार साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था.. घर में ही दोनों करते थे रात रातभर चुदाई.. एक बार बच्चा भी गिरा चुके है.. लड़की ने कहा.. पति शराब पीके मारपिट करता था इसलिए ससुराल छोड़कर अकेले रह रहे छोटे भाई के घर रहने आई थी.. घर आने के कुछ दिनों में ही लड़की को अपने छोटे भाई से प्यार हो गया औऱ दोनों में रात दिन चुदाई होने लगी.. पहला बच्चा तो समाज के डर से गिरा दिया मगर दूसरे बच्चे को वो पैदा करना चाहती है औऱ इसलिए दोनों भाई बहनो ने आपस में शादी करके साथ रहने का निर्णय लिया है..
तीसरी खबर - हरियाणा के रोहतक में अपने पति के कहने पर बाप की जायद में अपना हिस्सा मांग रही औरत को उसके दोनों भाइयो औऱ पांचो भतीजो ने हिस्सा देने के बदले 21 दिनों तक खूब चोदा.. औरत का कहना है की उसे जायदाद में हिस्सा लेने के लिए 21 की जगह 121 दिन भी चुदना पड़ता तो वो चुदने को तैयार थी.. भतीजो ने कहा कि बुआ की चुत बहुत टाइट थी सबको बुआ की चुत मारने में मज़ा आया..
चौथी ख़बर - उतर प्रदेश के शहर बरेली में एक शराबी बेटे के पास जब रांड चोदने के पैसे नहीं बचे तो उसने घर आकर अपनी ही माँ का घाघरा उठा दिया.. बीमार बाप की गैरमोज़ूदगी में शराबी बेटे ने रातभर में 4 बार अपनी माँ की चुत चोदकर माँ की चुत में अपना माल झाड़ दिया.. नशा उतरने पर बेटे ने माँ से पैर छूकर माफ़ी मांगी औऱ शराब छोड़ देने का वादा भी किया.. माँ का कहना है कि.. जो हुआ सो हुआ.. एकलौता जवान लड़का है औऱ ऊपर से घर चलाने वाला भी.. अगर फिर से बेटा चोदना चाहेगा तो वो अपनी मर्ज़ी से चुदवाएगी...
पाँचवी खबर - महाराष्ट्र के औरंगाबाद से सटे ग्रामीण इलाके में दो भाइयो का विवाद तब सुर्खियों में आ गया जब दोनों ने एकदूसरे पर अपनी अपनी पत्नियों को पेलने का आरोप लगाते हुए अपनी अपनी बात कही.. बड़े भाई का कहना था कि छोटा भाई उसकी पत्नी को खेतो में बुलाकर चोदता है तो छोटे भाई का कहना था कि बड़ा भाई उसकी पत्नी को छत पर बुला के चोदता है.. आखिर में पंचायत ने दोनों को पत्नियां अदला बदली करनी कि सलाह दी. दोनों भाइयो ने अपनी पत्नी को तलाक़ देकर एकदूसरे की पत्नी से शादी कर ली..
छटी खबर - उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रहने वाले जुनेद आलम नाम के शख्स को अपनी तलाक़शुदा बहन जमीला से तब निकाह करना पड़ गया जब जमीला को चोदते हुए उसे पड़ोसियों ने देख लिया.. जमीला का कहना है की जुनेद उसे हर तरह से खुश रखता है औऱ वो जुनेद के साथ निकाह करके खुश है..
सातवीं खबर - मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के लूलीपुर गाँव में एक 18 साल की युवती मीना को उसके 32 साल के मामा रघुवर से ऐसा इश्क़ हुआ कि लड़की ने घरवालों से मामा के साथ शादी करने की ज़िद पर अड़ गई.. परिवार ने चोरी छिपे लड़की की शादी करवाकर उसको उसके मामा के साथ शहर भेज दिया.. जहाँ दोनों एक किराए के घर में रहते है..
आठवीं खबर - छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहने वाले मज़ीद अली नाम के शख्स ने हवस में अंधे होकर अपनी माँ औऱ बहन को तब चोद डाला जब दोनों एक साथ सो रही थी..
बहन का कहना है की भाई ने पहले उसकी अम्मी चोदी औऱ जब भाई को अम्मी की चुत ढीली लगी तो भाई ने उसकी सलवार उतार कर उसकी चुत मारी.. माँ का कहना है की बेटा ब्लू फिल्मो का शौकीन है उसे ava adams कहकर बुलाता था औऱ बेटी को mia khalifa..
नवी खबर - बिहार के समस्तीपुर के छोटे से गाँव कुला में भाई बहन 2 साल से बना रहे थे सम्बन्ध.. पिता को पता लगने पर दोनों को घर से निकाला.. लड़का अपनी बहन के साथ पटना अपने दोस्तों के घर किराए पर रहने आ गया औऱ वही अपनी बहन से शादी करके रहने लगा..
दसवीं खबर - दिल्ली में अपने ही बेटे पर आ गया एक माँ का दिल.. 44 साल की सुशीला अपने 26 साल के बेटे संस्कार के साथ प्यार में ऐसी पड़ी कि समाज की मर्यादा तोड़कर अपने बेटे के साथ भाग निकली.. पति का कहना है कि सुशीला उसके सो जाने के बाद संस्कार के कमरे में जाकर चुदवाती थी.. बेटे के साथ आपत्तिजनक तस्वीर भी खिचवाती थी.. मना करने के बाद भी सुशीला ने अपने नाजायज सम्बन्ध अपने बेटे संस्कार से नहीं तोड़े औऱ घर में खुलकर गंद मचाने लगी.. कई बार उसने अपने बीवी बेटे को रंगरलिया मनाते हुए रंगे हाथ पकड़ा मगर समाज औऱ बदनामी के डर से कुछ बोल ना सका.. शुशीला जब संस्कार से प्रेग्नेंट हुई तो घर से सारा केश औऱ गहने के साथ संस्कार को लेके भाग निकली..
सुमन - हाय.. कैसी औरत होगी.. अपने ही बेटे को भगा के ले गई..
गौतम - तो.. सब क्या आपके जैसी डरपोक है? अभी औऱ भी बहुत सी खबर है.. एक तरफ सुशीला है औऱ एक तरफ आप.. आप तो कंडोम लगा के भी नहीं चोदने देती... चुत पूरी तरह गीली है मगर फिर भी चुदवाना नहीं है..
सुमन - तू मेरी मजबूरिया क्यों नहीं समझता शहजादे.. मेरी चुत औऱ गांड तुझसे बढ़कर थोड़ी है.. चल अब अच्छे बच्चे कि तरह मेरे दोनों बोबो को चूस वरना माँ नाराज़ हो जायेगी..
गौतम सुमन के दोनों बूब्स पकड़कर उसे बिस्तर पर पीठ के बल लेटा देता है औऱ बोबे मसलते हुए कहता है - बचपन से देख रहा हूँ आपको.. थोड़ी देर मेरी शकल ना दिखे तो बेचैन हो उठती हो आप.. कितनी भी बड़ी गलती कर दूँ कभी कुछ नहीं कहती.. बड़ी आई नाराज़ होने वाली..
सुमन - एकलौता सुकून है मेरी आँखों का तू ग़ुगु.. तुझसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..
गौतम सुमन के निप्पल्स चाटते हुए - तो फिर ले चलो मुझे भी भगा कर.. कहीं दूर पहाड़ो में.. एक छोटा सा घर होगा.. उसमें सिर्फ आप मैं औऱ एक बिस्तर.. दिन महीने साल बदल जायेगे पर हम दोनों वही उसी बिस्तर पर हमारे मिलन के सुख को भोगते रहेंगे..
सुमन मुस्कुराते हुए - खुली हुई आँखों से इतने बड़े बड़े औऱ पुरे नहीं होने वाले सपने मत देख मेरे शहजादे.. मैं तेरी माँ हूँ औऱ माँ बनकर ही तेरे साथ रहूंगी हमेशा..
गौतम निप्पल्स चूसते हुए - होगा माँ.. हर सपना पूरा होगा.. देखना एक दिन ऐसे ही किसी मुलायम बिस्तर पर आप इसी तरह मेरे नीचे लेटी रहोगी औऱ अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चुत में घुसाती हुई बोलोगी.. गौतम ज़ी.. आज जरा धीरे करना.. अभी अभी आपके बच्चे को दूध पीलाके सुलाके आई हूँ.. अगर वो कल की तरह उठ गया तो हिलाके ही सोना पड़ेगा आपको...
सुमन जोर से हसते हुए - हट बेशर्म.. कुछ भी उल्टा सीधा बोलता है.. कितना कुछ सोच रखा है तूने.. तू जितना प्यारा है उतना ही शैतानी दिमाग भी है तेरा... अब चल वापस चलते है..
गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है माँ.. कोनसी हमारे बिना शादी रुक जायेगी.. चलो थोड़ी देर ट्रुथ एंड डेयर खेलते है..
सुमन - नहीं ग़ुगु... तू ना बहुत गंदे गंदे सवाल पूछता है औऱ गंदे गंदे काम करवाता है मुझसे..
गौतम - तो आप भी पूछ लेना ना.. औऱ जो मन हो वो डेयर दे देना मैं मना नहीं करूँगा..
सुमन - ठीक है मगर इस बार आँख झपकाने वाला गेम नहीं चलेगा उसमे हर बार तू ही जीत जाता है..
गौतम - तो कोनसा गेम खेले?
सुमन - कोई भी दूसरा..
गौतम - अच्छा ठीक है.. मैं अलार्म सेट करता हूँ फ़ोन में जो एक मिनट होने पर बजेगा.. औऱ ये चिविंगम आप खा लो.. मैं आपके मुंह से आपको चूमकर चिविंगम निकालने की कोशिश करूँगा.. अलार्म बजते ही जिसके मुंह में चिविंगम होगी वही जीतेगा...
सुमन - ठीक है.. इस बार देखती हूँ तू कैसे जीतता है.. आओ चूमो मुझे औऱ अलार्म सेट कर दो.. एक मिनट क्या दस के बाद भी तू मेरे मुंह से चिविंगम नहीं निकाल पायेगा बच्चू...
गौतम - वो अभी पता चल जाएगा माँ..
गौतम औऱ सुमन का चुम्मा शुरू होता है गौतम अपनी जीभ से सुमन के मुंह में इधर से उधर चिविंगम तलाश करता है.. मगर अलार्म बजने पर सुमन के मुंह से गौतम चिविंगम निकालकर अपने मुंह में लेने में नाकाम रहता है..

सुमन अलार्म बजने पर चुम्मा तोड़कर - अब बोल बच्चू? बहुत गेम खेलने का शोक है ना तुझे..
गौतम मुस्कुराते हुए - बताओ क्या करू? डेयर लेता हूँ मैं..
सुमन थोड़ी देर सोचकर - हम्म.. अपने फ़ोन का पासवर्ड बताओ.. औऱ लोक चेंज मत करना..
गौतम - माँ नहीं यार.. ये बहुत पर्सनल है मैं भी तो आपके फ़ोन का पासवर्ड नहीं पूछता..
सुमन मुंह मोड़ते हुए - नहीं करना छोड़ दो.. वैसे भी तुम मेरी तरह डेयर तो कर नहीं सकते..
गौतम सुमन को देखते हुए - ताना मार रही हो मुझे.. आपकी डेट ऑफ़ बर्थ है मेरे फ़ोन का पासवर्ड.. अब खुश..
सुमन मुस्कुराते हुए - मेरी डेट ऑफ़ बर्थ? ग़ुगु तू भी ना.. तेरी इन्ही हरकतों की वजह से मुझे इतना प्यार आता है तुझ पर..
गौतम - अच्छा अब चिविंगम दो.. इस बार आप मेरे मुंह से निकालना..
सुमन अपने मुंह की चिविंगम गौतम के मुंह में डाल देती है औऱ गौतम अलार्म सेट करके फिर से सुमन को चूमने लगता है सुमन भी अपनी पूरी कोशिश करती है मगर गौतम के मुंह से चिविंगम अपने मुंह में लेने में असफल रहती है.. औऱ हार जाती है..
गौतम - बताओ मेरी सेक्सी माँ.. क्या लोगी ट्रुथ या डेयर?
सुमन - तूने जो लिए मैं भी वही लुंगी.. बता क्या करना है..
गौतम - एक काम करो.. अपना फ़ोन उठाओ औऱ पापा को फ़ोन करके उनसे झगड़ा करो गन्दा वाला औऱ पापा को एक दो गाली भी दे देना..
सुमन - इस वक़्त?
गौतम - अभी तो सिर्फ साढ़े दस हुए है..
सुमन अपना फ़ोन उठा कर - ठीक है..
सुमन फ़ोन स्पीकर पर डालकर - हेलो..
जगमोहन - हेलो.. हाँ बोलो..
सुमन - तुम शादी में आने वाले थे ना.. कल भी तुम्हे फ़ोन करके कहा था मैंने औऱ तुमने हां करी थी..
जगमोहन - सुमन अभी इंचार्ज साब के साथ गस्त पर आया हुआ हूँ बाद में बात करूँगा..
सुमन - इंचार्ज के साथ हो या अपनी उस रखैल माधुरी के साथ? मुझे छोटे से पुलिस क्वाटर में रखा है उस महारानी के लिए बड़ा मकान बनवाया है.. एक बार वापस आ जाऊ फिर देखती हूँ तुम दोनों को..
जगमोहन - तु अब वापस शुरू मत हो जाना.. कहा है ना मैंने. बात कर रहा हूँ माधुरी से.. जल्दी ही उसे मनाकर तुझे भी वहा से बुला लूंगा..
सुमन - उसकी परमिशन से आउंगी क्या मैं? वो होती कोन है हां या ना करने वाली.. मर्दानगी तो ख़त्म हो ही चुकी है तुम्हारे अंदर अब लगता है शर्म भी ख़त्म हो गई है..
जगमोहन - सुमन जबान संभाल के.. अपनी हद को मत भूल.. औऱ घर उसके नाम पर है उससे तो बात करनी पड़ेगी..
सुमन - वाह.. बहन दुगुनी उम्र के बूढ़े से शादी करके बैठी है औऱ भाई अपनी पत्नी को छोड़कर रखैल के नाम पर घर ले रहा है.. थोड़ी बहुत शर्म हो तो चुल्लू भर पानी में डूब जाओ..
जगमोहन - अपनी जबान को लगाम दे सुमन.. वरना घर छोड़ उस पुलिस क्वाटर से भी जायेगी.. हर महीने खर्चा भेज रहा हूँ उसे खुश किस्मती समझ..
सुमन - खर्चा भेजते हो तो अहसान करते हो क्या.. औऱ होता क्या है तुम्हारे भेजे 15 हज़ार रुपए में.. अपने बेटे की छोटी मोटी जरुरत भी पूरी नहीं कर पाती.. अब तो मेरे बेटे ने मुझसे कुछ माँगना भी छोड़ दिया है.. नपुंसक तो थे ही अब बेशर्म भी हो गए..
जगमोहन - मेरा तुझसे लड़ाई का कोई मूंड नहीं है फोन रख..
सुमन - औऱ कर भी क्या सकते हो फ़ोन रखने के अलावा? चोद तो मुझे पाओगे नहीं.. ढीला लंड एक मिनट में झड़ जाएगा.. पता नहीं उस डायन को क्या पसंद आया तुम्हारे अंदर? जो अब तक तुम्हारे साथ है..
जगमोहन - साली वो कम से कम मुझे इंसान मानकर तो बात करती है तेरी तरह ताने तो नहीं मारती.. जब तेरे पास आता हूँ.. तू मुझे हर बार मेरी नामर्दानगी का अहसास दिला देती है.. बेटे पर जादू किया हुआ है.. मेरी तो आज तक कोई बात नहीं मानी उसने.. औऱ तेरे साथ शादी में चला गया..
गौतम अपनी माँ औऱ बाप की बातें सुनता हुआ सुमन के चुचे चूस रहा था औऱ फिर एक सिगरेट जलाते हुए कश लेकर सुमन को मुस्कुराते हुए देखने लगा..
सुमन गौतम से सिगरेट लेकर कश मारके कहती है - मेरा बेटा है मेरी नहीं सुनेगा तो क्या तुम्हारी उस रखैल की सुनेगा? तुम्हारी बहन तो बदचलन थी ही.. उसके साथ साथ तुम्हे भी बाहर मुंह मारने की आदत है..
गौतम सुमन से सिगरेट लेकर कश मारता हुआ अपना लंड सुमन के मुंह के आगे ले आता है जिसे सुमन पकड़ते हुए धीरे धीरे मुंह में लेकर चूसने लगती है..
जगमोहन - तुझे किसने मना किया है साली.. तू भी बाहर किसी से गांड मरवा ले.. पर मुझे रोज़ रोज़ फ़ोन करके परेशान मत कर.. मैं तंग आ गया तुझसे..
सुमन लंड चूसते हुए - तुम्हारी बहन के जैसी रांड नहीं हूँ मैं जो बाहर गैर मर्दो से चुदवाती फिरू.. इज़्ज़तदार घरेलु औरत हूँ औऱ एक जवान बेटे की माँ.. बाहर मुंह मारना मेरी आदत नहीं है.. इतना कहते ही सुमन फिर से गौतम का लंड चूसने लगती है..
जगमोहन - तुझे जो करना है कर.. मुझे माफ़ कर.. मेरे पास तेरे घरवालों के लिए टाइम नहीं है..
सुमन धीरे धीरे लंड चूसते हुए गौतम से सिगरेट लेकर कश मारते हुए - हाँ.. आई ज़ी.. डीआईज़ी लगे हो ना तुम तो.. सिर्फ एक हेड कांस्टेबल हो.. देसी भाषा में ठुल्ला..
जगमोहन फ़ोन काटते हुए - हट बहनचोद.. तेरा फ़ोन ही नहीं उठाना चाहिए था..
गौतम सुमन के बाल पकड़कर अपना लोडा चुसवाता हुआ सिगरेट का कश लेकर - माँ बुआ के बारे में कुछ मत बोला करो.. आपकी तरह उनको भी बहुत प्यार करता हूँ मैं...
सुमन गुस्से में - सब जानती हूँ कितना प्यार करता है औऱ कैसे प्यार करता है तू अपनी बुआ को.. उस रात सब अपनी आँखों से देखा था मैंने...
गौतम - माँ कहा छुपा रखा था अपने अपना ये रूप.. पापा से जैसे बात की औऱ मुझसे कर रही.. गुस्से में कभी देखा नहीं आपको.. गुस्सा अच्छा लगता है आपके ऊपर.. मुझ पर भी किया करो..
सुमन मुस्कुराते हुए - तेरा तो आधे घंटे से पहले नहीं निकलने वाला.. चल अब वापस चलते है वरना बहुत देर हो जायेगी.. बहुत भूक भी लगी है मुझे तो..
गौतम - जैसा आप कहो..
सुमन - रुक मैं साडी बदल कर आती हूँ..
गौतम - रहने दो ना अच्छा लग रहा है आपके ऊपर ये भी..
सुमन - अच्छा चल ठीक है..

***********

इतना समय कैसे लग गया सुमन? औऱ ये साडी क्यों बदली है तूने..
भाभी वो कुछ गिर गया था साड़ी पर इसलिए बदल ली.. मैं गौतम के साथ खाना खाने जा रही हूँ..
अरे खाना मेरे साथ खा लेना.. कहा गौतम के पीछे पीछे घूम रही है अब वो बच्चा नहीं मर्द बन चूका है..
ठीक है भाभी चलो..

अधिकांश मेहमान वापस जा चुके थे और लोन में अब बहुत कम ही लोग बचे थे रात के 11:00 का समय था और अब स्टेज पर रितु और राहुल भी सभी मेहमानों के साथ तस्वीर खिचवा चुके थे..

लोन में खाली टेबल पर एक आदमी नशे में बैठा झूलता हुआ एक वेटर से अनाप-शनाप गाली-गलौज कर रहा था..
आदमी - भोस्डिके क्या मंगवाया था औऱ क्या लेके आया है तू?
वेटर - सॉरी सर.. अभी ला देता हूँ..
गौतम उसके नजदीक जाकर.. टेबल पर बैठता हुआ..
गौतम - बहुत ख़ास मेहमान लग रहे हो..
आदमी - तू कौन है..
गौतम झूठ बोलता हुआ - केटरिंग मेरी है.. मेरे ही आदमियों से आप बदसूलुकी कररहे थे..
आदमी - अरे समझाओ अपने वेटर को साला कहता कुछ हूँ करता कुछ है.
गौतम - नासमझ है साला.. कई बार पिट भी चूका है.. खैर छोडो.. मेरा नाम गौतम है.. आप?
आदमी - विक्रम..
गौतम - विक्रम ज़ी बराती लगते हो..
विक्रम - नहीं यार.. ना घराती ना बराती.. हम है अपनी मर्ज़ी के मेहमान..
गौतम - मतलब?
विक्रम - मतलब कि मैं वो हूँ जो इस शादी को दो मिनट में ख़राब कर सकता हूँ.
गौतम - अच्छा? कोई महान हस्ती लगते हो?
विकर्म - हाँ बेशक़.. दुल्हन का बॉयफ्रेंड हूँ मैं..
गौतम हैरानी से - क्या? पर मैंने तो सुना है दुल्हन बहुत भोली भाली शरीफ है..
विकर्म फ़ोन निकालते हुए - अरे मेरा लंड शरीफ है साली.. लपक लपक के लोडे लेती है मादरचोद.. थोड़ी देर पहले पीछे बाथरूम में चोद के आया हूँ रंडी को ये देख सबूत..
गौतम फोन में विकर्म औऱ ऋतू कि चुदाई का वीडियो देखकर - अरे बहनचोद.. लगता है बहुत टाइम से पेल रहे हो इस लड़की को.. फिर शादी क्यों नहीं कि?
विकर्म - रडियो से शादी नहीं करते छोटे भाई.. बस चोदके मज़े लेते है..
गौतम - समझा नहीं..
विकर्म - ये साली रांड मुझसे पहले औऱ कई लोगो से चुद चुकी है.. सबने एक एक करके चोदा है इसको..
गौतम - बड़े भाई.. खाना छोडो यार दारु पीते है औऱ.. आओ मेरे साथ चलो.. हर ब्राड है अपने पास..
विक्रम हसते हुए - लगता है तुझे भी इसकी लेनी है.. चिंता मत कर मैं दिलवा दूंगा..

गौतम विक्रम हो अपने रूम में जाता है औऱ दो पेग बनाकर एक बैठ जाता है..
गौतम - लकी तो हो यार आप.. मगर ये लड़की शादी के दिन भी आपसे चुदवा रही है.. कुछ तो बात है.
विकर्म पेग पीकर- अरे इसके बहुत वीडियो है मेरे पास.. एक बार बुलाने पर भाग के चली आती.. (बोतल लेकर पीते हुए) मैं कहता हूँ नहीं आएगी तो mms लीक कर दूंगा.. साली को आना ही पड़ता है..
गौतम - क्या बात है.. बहुत पहुचे हुए खिलाड़ी हो.. आप तो..
विक्रम हसते हुए बोतल से एक साथ बहुत सारी दारु पिता हुआ बेड पर गिर जाता है औऱ गौतम विकर्म के गिरने पर उसे बेड पर अच्छे से लेटा देता है औऱ उसके फोन को लेकर विकर्म कि ऊँगली से लॉक खोलकर ऋतू के सारे वीडियो अपने फ़ोन में ट्रांसफर करके विकर्म के फ़ोन से ऋतू के वीडियो डिलीट कर देता है.. इसके बाद गौतम चेतन को फ़ोन करता है..

गौतम - भईया?
चेतन - हाँ ग़ुगु?
गौतम - भईया उस आदमी के नम्बर दोगे जिसने रांडे बुलाई थी?
चेतन - तुझे क्यों चाहिए उसके नम्बर?
गौतम - अर्जेंट है भईया.. आप दो ना..
चेतन - ग़ुगु एक दो लड़की अभी यही है तुझे चाहिए तो भेज देता हूँ..
गौतम - भईया आप भेजो ना यार नम्बर.. लड़की नहीं चाहिए मुझे..
चेतन - ठीक है व्हाट्सप्प कर रहा हूँ.. पैसे मत देना मैं दे दूंगा..
गौतम - ठीक है भईया..

गौतम चेतन के भेजे हुए नम्बर डायल करके - हेलो
दलाल - हैल्लो..
गौतम - कालू ज़ी बोल रहे है..
दलाल - हाँ.. आप कौन?
गौतम - मैं चेतन का भाई हूँ.. आपने आज 11 औरते भेजी थी ना नाचने के लिए..
कालू - हाँ.. औऱ कुछ चाहिए तो बताओ? भेजना है औऱ किसी औरत को?.
गौतम - हाँ.. पर औरत को नहीं मर्द चाहिए जिसे लड़के पसंद हो..
कालू हसते हुए - अच्छा है आजकल लड़के भी डिमांड में है.. कितने भेजू?
गौतम - 1 ही भेज दो.. जितना बदसूरत हो उतना अच्छा..
कालू - 10 मिनट में आ जाएगा.. इस नम्बर के कांटेक्ट सेंड कर रहा हूँ. फ़ोन उठा लेना.. वसीम नाम है आदमी का..
गौतम - ठीक है..

हेलो ..
वसीम - ज़ी मैं पहुंच गया हूँ..
गौतम - लेफ्ट साइड में वाइट बिल्डिंग दिख रही है.. फर्स्ट फ्लोर पर रूम नम्बर 26 में आजा..
वसीम रूम में आकर गौतम से - आपने बुलाया है?
गौतम - हाँ ये आदमी दिख रहा है..
वसीम - मरा हुआ है क्या?
गौतम - अबे नशे में है..
वसीम - तो..
गौतम - तो क्या.. चोद इस आदमी को..
वसीम - पर आप वीडियो क्यों बना रहे है..
गौतम - बना नहीं रहा बनाऊंगा.. तुझे दिक्कत है वीडियो बनाने से?
वसीम - हाँ.. मैं वीडियो नहीं बना सकता..
गौतम - अबे डबल रेट दिलवा दूंगा..
वसीम कुछ सोचकर - मेरा फेस तो नहीं आएगा ना..
गौतम - अबे रुमाल बाँध ले.. चल अब शुरू कर फ़िल्म...
वसीम विकर्म को नंगा कर के खुद्द भी नंगा हो जाता है औऱ विक्रम के साथ चूमाचाटी करते हुए विक्रम के मज़े लेने लगता है.. विकर्म नशे में पूरी तरह से चूर हिलता दुलता हुआ वसीम को अपने ऊपर से हटाता है मगर वसीम विकर्म की गांड में थूक लगा कर अपने लंड से उसे चोदने लगता है.. विकर्म नशे में चूर था उसे सब दिखाई दे रहा था मगर वो कुछ नहीं कर पास रहा था.. गौतम विक्रम के फ़ोन से ही उसका mms बना रहा था..

विक्रम चुद चूका था औऱ उसका वीडियो उसी के फ़ोन में बन चूका था जिसे गौतम ने अपने फ़ोन में ट्रांसफर भी कर लिया था.. वसीम विकर्म को चोदकर निकल चूका था औऱ विकर्म आहे भरता हुआ अपनी गांड के हाथ लगा के लेता था उसकी हालात ऐसी थी की वो कुछ नहीं कर सकता था.. नशे में चुर विक्रम कुछ देर बाद गहरी नींद में सो गया.

गौतम ने विकर्म के फ़ोन से उसका mms बनाकर फ़ोन विक्रम के पास ही पटक कर रूम से बाहर आ गया.. विक्रम का mms गौतम के पास था औऱ अब विक्रम के पास ऋतू का एक भी वीडियो नहीं था..
 
Update 26


गौतम जब नीचे आया दूल्हे औऱ दुल्हन का खाना लग चूका था.. आरती ने गौतम का हाथ पकड़ कर उसे भी अपने साथ खाने की मेज पर बैठा लिया औऱ बोली..
आरती - क्यों देवर ज़ी.. आज तो अपनी भाभी से मिलने की फुर्सत ही नहीं मिली आपको.. कितना ढूंढा पर आप कभी यहां तो कभी वहा.. आज तो हवा की तरह बह रहे थे.. अब पकड़ में आये हो..
कोमल - अरे आरती क्यों तंग रही है ग़ुगु को..
सुमन भी खाने की टेबल पर बैठी थी उसने कोमल से कहा - अरे भाभी.. आप देवर भाभी के बीच क्यों बोलती हो.. अब आरती अपने देवर से हंसी मज़ाक़ नहीं करेंगी तो किस्से करेंगी.. आपसे?
आरती - सही कहा बुआ.. औऱ देवर जब इतना प्यारा हो तो मज़ाक़ के साथ साथ औऱ भी बहुत कुछ करना पड़ता है..
आरती की बात पर सब हँसने लगते है..
गौतम - भाभी छोडो मुझे.. मुझे दीदी के साथ बैठके खाना है आज.. बहुत सताया है मैंने दीदी को..
(गौतम उठकर ऋतू के साथ वाली कुर्सी पर बैठकर) दीदी जीजा ज़ी के हाथ से बाद में खाना पहले मेरे हाथ से खाओ..
ऋतू मुस्कुराते हुए गौतम का गाल चूमकर - ग़ुगु.. सच में बहुत सताया तूने मुझे..

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गौतम - मैंने जितना सताया उसका बदला आप ससुराल जाकर जीजाजी को सताकर पूरा कर लेना..
ऋतू हसते हुए गौतम को गले लगा कर - मेरा प्यारा भाई..
कोमल - अब खाना भी खालो.. दोनों भाई बहन क्या बात ही करते रहोगे..
गौतम - हाँ मामी.. मुझे तो बहुत भूख लगी है..
आरती - ऋतू जरा राहुल ज़ी को भी तो खिला अपने हाथो से..
सुमन - अब तो इसे सारी उम्र यही करना है आरती..
आरती - ये सच कहा बुआ आपने.. अब तो देवर ज़ी बचे है.. उनके लिए भी लड़की देखनी पड़ेगी..
गौतम - आप हो ना भाभी.. कोई औऱ लड़की देखने की क्या जरुरत है..
आरती - देख रही हो बुआ.. पहले तो बोलने से भी बात नहीं करता था.. अब केसे कैंची की तरह जुबान चलाने लगा है आपका ग़ुगु..
सुमन खाना खाते हुए - तुम अपनी देवर भाभी की बातों में मुझे मत खींचो..
गौतम - दीदी ये स्वाद है.. इसे लो ना..
आरती - देवर ज़ी हमें भी दे दो क्या स्वाद बना है.. आप तो अपनी दीदी से ही चिपके हुए हो..
गौतम अपनी जगह से उठकर आरती के पास जाता है औऱ एक निवाला उसे खिलाकर कहता है- लो कहा लो.. बस?
कोमल - अब तो खुश हो आरती? देवर ने अपने हाथों से भी खिला दिया..
आरती - मैं कल ही खुश हो गई थी देवर ज़ी से मम्मी ज़ी..
गौतम आरती को देखता हुआ - मतलब?
आरती - कल देवर ज़ी आपने गन्ने का जूस पिलाया था ना.. उसके बारे में बात कर रही हूँ..
गायत्री - जूस तो ग़ुगु ने आज मुझे भी पिलाया था..
कोमल - आप दोनों से पहले ग़ुगु मेरे पास आया था.. जूस लेकर.. मुझे तो दो दो बार पिलाया था.. जूस पीते पीते ही तो मेरे पैर में मोच आई थी..
संजय - ग़ुगु.. ये क्या बात हुई सिर्फ अपनी नानी मामी औऱ भाभी को ही तुमने जूस पिलाया.. हमसे क्या दुश्मनी है तुम्हारी?
गौतम - मामाजी.. वो एक ही गन्ना था.. बेचारे से कितना जूस निकालता.. मैंने तो अभी तक माँ औऱ ऋतू दीदी को भी नहीं पिलाया..
सुमन - छोडो ना भईया.. क्या गन्ने के पीछे पड़ गए सब लोग.. आज हमारी ऋतू कितनी प्यारी लग रही है..
गौतम - माँ सही कह रही हो.. दीदी तो बिलकुल चाँद जैसी लग रही है..

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ऋतू - चाँद तो तू है.. मेरा प्यारा सा ग़ुगु..
सुमन - अब ये प्यार अपने पति को करना ऋतू.. भाई को नहीं.
ऋतू - बुआ.. बड़ी मुश्किल से ग़ुगु मुझसे बात करने लगा है औऱ आप कह रही हो प्यार ना करू.. ग़ुगु को तो मैं बहुत प्यार करुँगी.. शादी होने से बदल थोड़ी जाउंगी..
गौतम खड़ा होता हुआ - मेरा तो खाना हो गया..
कोमल - इतनी जल्दी?
गौतम - औऱ भूख नहीं है मामी.. ये कहते हुए गौतम हॉल से बाहर निकल कर बाथरूम की तरफ चला जाता है..
गौतम बाथरूम करके बाथरूम के बाहर खड़ा हो जाता है औऱ सिगरेट सुलगा कर पहला कश लेता ही है की पीछे से आरती आकर उसे अपनी बाहों में भर लेती है..


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आरती - आज तो बहुत तड़पाया आपने देवर ज़ी..
गौतम मुड़कर आरती की बाहों से अपने आप को छुड़वाता है औऱ आरती का हाथ पकड़कर कहता है..
गौतम - भाभी यहां कोई देख लेगा.. इस तरफ आओ..
गौतम आरती को बाथरूम के दाई तरफ हलवाई के लिए बने कमरे के पीछे खाली जगह ले आता है.. जहा हलकी सी रौशनी के अलावा कुछ नहीं था..
आरती गौतम से सिगरेट लेकर कश मारती हुई - बताओ देवर ज़ी.. अपना लंहगा मैं उठाउ या इतनी मेहनत आप खुद कर लोगे?
गौतम लुहंगा उठाते हुए - देवर के होते हुए भाभी मेहनत करें.. ये तो गलत बात है..
गौतम अपनी पेंट चड्डी सहित नीचे करके अपने लंड को आरती की चुत में डाल देता है औऱ दिवार से लगा कर धीरे धीरे आरती को चोदने लगता है..

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आरती सिगरेट के कश लगाती हुई चुदते चुदते कहती है - देवर ज़ी आप तो जोनी सिंन्स के भी बाप हो.. आप चले जाओगे तो कैसे ज़ी पाउंगी मैं आपके बिना..
गौतम चोदते हुए - अब तो आना जाना लगा ही रहेगा भाभी.. क्यों चिंता करती हो..
आरती सिगरेट का कश लेकर अँधेरे में किसीको खड़ा देखकर - कौन? कौन है तू?
एक 25-30 साल का दुबला पतला सीधा साधा आदमी - ज़ी.. मैं बिरजू..
आरती गुस्से में - क्या कर रहा है चुतिया यहां खड़ा खड़ा.. निकल यहां से..
गौतम - अरे रुक रुक.. इधर आ..
बिरजू - ज़ी..
गौतम आरती का बोबा पकड़कर चूसते हुए - लड़की मस्त है ना..

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बिरजू आरती को देखकर हाँ में सर हिलता है ..
गौतम - ये पीछे कमरे में कौन है?
बिरजू धीरे से - कोई नहीं है.. मैं अकेला रहता हूँ.. लोन की देखरेख करता हूँ..
गौतम - देख बिरजू ये मेरी भाभी है.. औऱ मैं इसे तसल्ली से चोदना चाहता हूँ.. कोई जगह है तो बता.. तेरी तनख्वाह बढ़वा दूंगा..
आरती बिरजू का लंड उसके पज़ामे के बाहर से पकड़ कर सिगरेट का कश लेती हुई - देखो बिरजू भईया.. मुझे अपनी बहन समझो.. औऱ इनको अपने जीजाजी.. आपकी बहन आपके जीजाजी से चुदना चाहती है.. अंदर कमरे में कोई गद्दा वद्दा पड़ा है जिसपर आपकी ये बहन आराम से चुदवा सके तो बता दो..
बिरजू - गद्दा तो नहीं है.. एक खाट पड़ी है बस..
गौतम आरती से सिगरेट लेकर एक कश मारता है औऱ सिगरेट फेंककर बिरजू से कहता है - चल दिखा..
बिरजू गौतम औऱ आरती को पीछे कमरे में ले आता है जहा धीमी रौशनी वाला बल्ब जल रहा था औऱ एक पुरानी खाट पर चटाई बिछी हुई थी..
गौतम ने आरती को खाट पर बिठा दिया औऱ अपनी शर्ट निकालता हुआ बिरजू को एक 500 का नोट देकर बोला - बाहर जाकर खड़ा रह.. मैं तेरी ये बहन चोद ना दू तब तक कोई अन्दर नहीं आना नहीं चाहिए.. समझा..
बिरजू बाहर चला जाता है औऱ खिड़की से अंदर झांकने लगता है वही गौतम आरती को खाट पर लेटा कर लहंगा उठाते हुए अपना लोडा आरती की चुत में फिट करके आरती को चोदने लगता है...
गौतम के झटको पर आरती जोर जोर से खुलकर आहे भरने लगती है औऱ बाहर बिरजू आरती की कामुक सिस्कारिया सुनकर अपना लंड हिला कर मुठ मारने लगता है...

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आरती - आह्ह..देवर ज़ी यही रह जाओ ना.. मेरे पास.. बहुत प्यार दूंगी आपको.. अपनी इस चुत में घुसा के रखूंगी..
गौतम - आपके पास रह जाऊँगा भाभी तो आपकी उन बहनो का क्या होगा जो अपनी टाँगे चौड़ी करके मेरे इंतजार में लेटी है..
आरती - अब तक कितनी लड़कियों को दीवाना बना चुके हो देवर ज़ी?
गौतम चोदते हुए - लड़किया नहीं भाभी ऑन्टीया.. औऱ उनकी तो गिनती करनी पड़ेगी..
आरती चुदवाते हुए - देवर ज़ी सिगरेट..
गौतम चोदते हुए - पेंट में है भाभी..
आरती आवाज लगाते हुए - बिरजू भईया.. ओ बिरजू भईया..
बिरजू एक बार झड़ चूका था औऱ अब दूसरी बार लंड हिला रहा था.. आरती की आवाज सुनकर वो लंड पजामे में डालाकर अंदर आ गया.
बिरजू चुदवाती हुई आरती को देखकर - ज़ी दीदी..
आरती चुदवाते हुए प्यार से- बिरजू भईया.. आपके जीजाजी की पेंट वहा पड़ी है उसमे से सिगरेट का पैकेट औऱ लाइटर दो अपनी इस बहन को..
बिरजू गौतम की पेंट से दोनों चीज निकालकर आरती को दे देता है औऱ जाने लगता है तभी गौतम चोदते हुए कहता है..
गौतम - बिरजू यही बैठा जा.. किसी औऱ चीज की भी जरुरत पड़ सकती है..
आरती एक सिगरेट सुलगाकर बिरजू से - बिरजू भईया आप पिओगे सिगरेट?

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बिरजू नीचे सर करके - मैं नहीं पिता दीदी..
आरती सिगरेट का कश लेकर गौतम से चुदवाते हुए - देखो ना बिरजू भईया आपके जीजाजी अपकी बहन को कैसे चोद रहे है.. आप बच्चाओगे नहीं अपनी बहन को चुदने से..
गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - बिरजू तो तिरछी नज़रो से आपके बूब्स देख रहा है.. लगता आपके दोनों कबूतर देखने की इच्छा है बिरजू की..
आरती सिगरेट पीते हुआ - सच में बिरजू भईया? अब देखो मैं चोली तो उतार नहीं सकती आप चोली के ऊपर से ही मेरे बूब्स दबाना चाहो तो दबा लो..
गौतम - ले भाई बिरजू.. दे दीं परमिशन तुझे.. दबा ले अपनी बहन के बोबे..
बिरजू खाट के पास ही बैठा था उसने डरते हुए अपना रखा हाथ आरती के चुचे पर रख दिया औऱ धीरे से दबा दिया..
आरती सिगरेट के कश लेकर मुस्कुराती हुई - डर क्यों रहे हो बिरजू भईया.. खुलके दबाओ अपनी बहन के बोबे..
गौतम - दबा ना बिरजू.. क्यों शर्मा रहा है..
बिरजू पूरी ताक़त से आरती का बोबा अपने पंजे में लेकर मसल देता है जिससे आरती की आह निकल जाती है..
गौतम बिरजू से - मज़ा आया?
बिरजू - ज़ी..
आरती सिगरेट पीती हुई - इतना भी जोर से मत दबाओ बिरज्जू भईया थोड़ा धीरे..
गौतम - बोल बिरजू है ना मस्त मोटा बोबा तेरी बहन का..
बिरजू मुस्कुराते हुए - ज़ी भईया..
गौतम चोदते हुए - बिरजू ये बड़े घर की बेटी है इनके बोबे औऱ भोसड़े दोनों बड़े होते है..
आरती झड़ चुकी थी औऱ अब गौतम भी कुछ ही झटको में आरती की चुत में झड़ गया..

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आरती गौतम के सर को पकड़कर चूमने लगती है..
दोनों का चुम्बम ख़त्म होने पर गौतम खाट से खड़ा हो जाता है मगर आरती गौतम के रुमाल से अपनी चुत साफ करने लगती है..
गौतम चुपचाप बैठे हुए बिरजू को धीरे धीरे पज़ामे के ऊपर से अपना लंड मसलता देखकर - चोदेगा क्या बिरजू अपनी बहन को?
बिरजू शर्माते हुए कोई जवाब नहीं देता औऱ आरती उसे देखकर हँसने लगती है औऱ खाट से खड़ी होती हुई कहती है - बेचारा.. चलो देवरजी.. लगता है फेरे शुरू होने वाले है..
गौतम - हाँ भाभी.. आप जाओ.. मैं थोड़ी देर में आता हूँ..
आरती जाते हुए - ठीक है.. बाय बिरजू भईया..
आरती वहा से चली जाती है...
बिरजू - भईया ज़ी भाभी बहुत खूबसूरत है..
गौतम - तू अकेला ही रहता है यहां..
बिरजू - ज़ी भईया ज़ी..
गौतम - सुन.. रात में हो सकता है मैं औऱ भी किसी लड़की को यहां लेके आउ.. तू जागता रहना आज रात..
बिरजू - भईया ज़ी आप चिता मत करिये मैं पूरी रात जागता रहूँगा.. आप चाहे जितनी लड़की यहां ले आइये..
गौतम - साले लड़की के सामने जुबान नहीं खुली तेरी अब कैसे पक पक बोल रहे है.
बिरजू - वो भईया ज़ी.. मैं लड़की के सामने थोड़ा शरमाता हूँ.
गौतम - अबे शर्माना लड़कियों का काम है.. अच्छा याद रखना रात को आ सकता हूँ..
बिरजू - चिंता मत करिये भईया ज़ी.. आप कभी भी आइये.. हम जागते रहेंगे..
 
Update 28


गौतम जब अपने रूम में पहुंचा तो उसने देखा कि विक्रम वहां से कहीं जा चुका था और रूम में अब कोई नहीं था. गौतम ने थोड़ी देर बिस्तर पर आराम करने के बाद में फिर से शावर लिया औऱ फिर कुछ देर इधर-उधर घूमने लगा. होटल की छत से लेकर वेडिंग हॉल तक और फिर वेडिंग लॉन तक गौतम यहां से वहा टहलता रहा..

मेहमान अब उठने लगे थे और होटल में चहल पहल बढ़ने लगी थी मगर अब भी कुछ लोग रात को देर से सोने के कारण सो रहे थे सुबह के 6:30 बज चुके थे और मेहमानों को अब चाय की चुस्की लेने में आनंद आने लगा था.. कोई रात को अपने साथ हुए किस्से और कहानियों का जाएका एक दूसरे को चाय की चुस्कीया लेते हुए सुना रहा था तो कोई हमेशा की तरह शादी में कमी और खामी निकल रहा था.

गौतम के अंदर गोली का असर अभी बाकी था और वह अभी अपने लिए किसी शिकार की तलाश कर रहा था उसने हर जगह टहलती हुई लड़कियों और औरतों को देखा मगर उसे कहीं भी अपने लायक माल नहीं मिला और ना ही नानी मामी या भाभी अकेली मिली. गौतम की कामुकता बरकरार थी और वह सुमन के कमरे की ओर जाने लगा मगर बीच में ही उसने चाय के दो कप अपने साथ ले लिए थे. सुमन रात को देर से सोई थी इसलिए उसकी नींद अभी भी नहीं खुली थी सुबह के 6:30 पर भी वह इत्मीनान से सो रही थी.

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रात को सुमन आरती के साथ ही सोई थी मगर आरती अब कमरे से बाहर जा चुकी थी और कमरे में सिर्फ सुमन अकेली ही बिस्तर पर नींद में थी. गौतम ने रूम में घुसते हुए कैमरे का दरवाजा बंद कर दिया और चाय के दोनों कप लेकर होटल में एक तरफ रखी टेबल पर रख दिया. गौतम ने कप उठकर चाय की तीन-चार चुस्की ली और फिर अपनी मां सुमन को देखने लगा. सुमन नींद में किसी हसीन ख्वाब में खोई थी और गौतम को सुमन परियों की तरह लग रही थी.
गौतम ने अपने हाथ से चाय का कप टेबल पर रख दिया और धीरे-धीरे बिस्तर की तरफ बढ़ गया. गौतम ने सो रही सुमन की साड़ी धीरे-धीरे कमर तक उठा दी और उसकी चड्डी नीचे करते हुए सुमन की जांघों के जोड़ पर अपने होंठ लगा दिये.. गौतम ने अपनी जीभ सुमन की जांघोँ के जोड़ पर लगाकर उसके नारीत्व को छेड़ना शुरू कर दिया था और अपनी जीभ से सुमन की चुत को चाटने और चूसने लगा था.

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गौतम ने सुमन की दोनों टांगें फैलाकर उसकी चुत को चूसना और चाटना शुरू कर दिया था जिससे सुमन नींद के आगोश से बाहर निकलने लगी थी और उसकी नींद कमजोर पढ़ने लगी थी. गौतम ने अपनी जीभ को सुमन की चुत में डाल दिया था और जितना अंदर घुस सकता था घुसा कर अपनी जीभ से सुमन के नारीत्व को छेड़ने लगा था जिससे सुमन कामुक होती हुई नींद से बाहर आ गई थी और उसने अपनी आंख खोलकर गौतम को अपने साथ छेड़खानी करते हुए देख लिया.

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सुमन की जैसे ही नींद खुली उसकी कामुकता अपने शिखर पर थी और उसने ना चाहते हुए भी गौतम के मुंह में ही अपने पानी की पिचकारी को छोड़ दिया जिसे गौतम ने अमृत समझकर पीते हुए सुमन की चुत को वापस से चाट कर साफ कर दिया और फिर मुस्कुराते हुए सुमन को देखकर बोला..
गौतम - गुडमॉर्निंग माँ.. चाय पी लो..
सुमन अपनी चड्डी पहनती हुई अपनी साडी के पल्लू से गौतम के गीले होंठो को साफ करती हुई बोली - गुडमॉर्निंग बेटा.. मुझे जगा लेता ना.. नींद में ही तू ये सब करने लगा.. दरवाजा तो बंद किया है ना तूने?
गौतम - दरवाजा बंद है माँ.. आप फ़िक्र मत करो.. मैं इतना भी लापरवाह नहीं हूँ..
सुमन मुस्कुराते हुए चाय का कप लेकर चाय पीते हुए - रात को सोया नहीं ना तू.. आँखे बिलकुल लाल है तेरी..
गौतम - दिन में सो जाऊँगा माँ.. रात को नींद ही नहीं आई..
सुमन गौतम की गोद में बैठकर चाय की चुस्कीया लेती हुई - रात को नींद नहीं आई या किसी ने सोने नहीं दिया मेरे शहजादे को? हाय रे.. तेरे गले पर तो कितने निशान है.. कल तो नहीं थे.. सच बता? गर्लफ्रेंड के साथ था ना तू जो कल मिली थी.. उसीने दिए है ना ये निशान.. कितना बुरे नाख़ून लगाती है.. तूने रोका नहीं उसे?
गौतम सुमन की जांघ सहलाते हुए - किसीको प्यार करने से थोड़ी रोका जाता है माँ..
सुमन चाय का कप रखकर - थोड़ा कम प्यार करा कर ग़ुगु.. तू बहुत बिगड़ गया है आज कल.. हर दम बस यही सब चलता है तेरे दिमाग में..
गौतम सुमन के चेहरे पर लटक रही जुल्फ को उसके कान के पीछे करता हुआ सुमन के गाल पर चुम्बन देकर कहता है - मैं तो सुधर जाऊ माँ पर आपका ये छोटा ग़ुगु नहीं सुधारता.. जहाँ भी खड्डा देखता है अपनेआप उसमे कूद जाता है.. औऱ पानी निकाल कर ही बाहर निकलता है..
सुमन गौतम की बात पर हस्ती हुई - कल चल वापस घर.. तेरे इस छोटे ग़ुगु की शिकायत करती हूँ बाबाजी से.. बेलगाम हो गया है बहुत.. लगाम लगानी पड़ेगी इस पर..
गौतम सुमन की गर्दन को अपनी जीभ से चाटता हुआ - बाबाजी को शिकायत करने से कुछ नहीं होगा.. एक बार आप हाँ कर दो.. अपने आप लगाम लग जायेगी छोटे ग़ुगु पर..

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सुमन गौतम की गोद में से खड़ी हो जाती है औऱ कहती है - एक बार कह दिया ना ग़ुगु.. तू क्यों फालतू ज़िद करता है..
गौतम उठकर सुमन को बाहों में भरते हुए - अच्छा सॉरी माँ.. अब नहीं कहता कुछ.. आप जेसा चाहोगी वैसा होगा..
सुमन गौतम के लंड पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए - लगता बहुत देर से खड़ा है छोटा ग़ुगु.. पूरी खुराख़ मिली नहीं इसे..
गौतम सुमन के कंधे पर हाथ रखकर सुमन को नीचे बैठाते हुए - रात को सेक्स की गोली खा ली थी अब तक असर बाकी है..
सुमन गौतम की जीन्स खोलकर लंड पकड़ते हुए - तुझे कब से गोली की जरुरत पड़ने लगी ग़ुगु..
गौतम सुमन के बाल पकड़कर उसके चेहरे पर लंड रगढ़ते हुए - मैंने किसी के कहने पर खा ली.. छोडो उस बात को.. आप जल्दी से ठंडा कर दो छोटे ग़ुगु को..

सुमन गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसने ही लगी थी की दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई..
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गौतम गुस्से में - पता किसकी माँ चुद गई.. साला कौन है..
सुमन मुस्कुराते हुए - रुक मैं देखती हूँ..
गौतम लंड पेंट में डालकर बेड पर बैठ जाता है औऱ सुमन दरवाजा खोलती है.
सिमरन सुमन से - आपको मालिक औऱ मालकिन बुला रहे है..
सुमन - मैं आती हूँ तू जा.. (वापस दरवाजा बंद करके) ग़ुगु जाना पड़ेगा बेटा..
गौतम सुमन को बाहों में भरके - कोई बात नहीं माँ.. आप जाओ औऱ मामी से किसी बात पर लड़ाई झगड़ा मत करने लग जाना..
सुमन मुस्कुराते हुए - भला मैं भाभी से क्यों झगड़ने लगी..
गौतम सुमन के होंठ चूमकर - आई लव यू माँ..

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सुमन वापस गौतम के होंठ चूमकर - आई लव यू टू बेटा.. अच्छा अब जाने दे वरना औऱ भी कोई बुलाने आ जाएगा.. मुझे बहुत तेज़ सुसु भी लगा है..
गौतम नीचे बैठकर सुमन की साडी उठाते हुए चड्डी नीचे सरकाकर - माँ पहले बताना था ना.. मुझे भी प्यास लगी थी.. ये कहकर गौतम सुमन की साडी उठाकर चुत पर अपना मुंह लगा देता है औऱ चूसने लगता है सुमन भी शर्माती हुई गौतम के बाल पकड़ कर गौतम के मुंह में मूतने लगती है..

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गौतम सुमन का पेशाब पी जाता है औऱ अपना मुंह चुत पर से तब तक नहीं हटाता जब तक पेशाब की आखिरी बून्द नहीं पी जाता.. सुमन भी गौतम को अपना मुंह हटाने के लिए नहीं कहती..
मूत पिने के बाद गौतम चुत से मुंह हटाकर खड़ा हो जाता है सुमन मुस्कुराते हुए फिर से अपनी साडी के पल्लू से गौतम का मुंह साफ कर देती है.. औऱ कमरे से बाहर चली जाती है..


गौतम अपने रूम में आकर रेशमा को फ़ोन करता है..
रेशमा - हेलो..
गौतम - तू आई नहीं ना कुत्तिया कल शादी में?
रेशमा - माफ़ कर दे मेरे कुत्ते.. मैंने कोशिश तो बहुत की पर असलम माना ही नहीं.. मैं करती भी क्या, ना आने के सिवा..
गौतम - अकेली नहीं आ सकती थी?
रेशमा - अकेली कैसे आती? इतनी बंदिश है मेरे ऊपर.. घर निकल भी जाऊ तो आफत आ जाती है सवालों की.. तू लड़का है इसलिए नहीं समझ पायेगा.
गौतम - ज्यादा ना ज्ञान मत चोदे रेशमा.. नहीं मिलना तो बता दे..
रेशमा - थोड़ा औऱ सब्र कर ले मेरे कुत्ते.. दो तीन दिन बाद अब्बू के घर आ जाउंगी तब जितना मिलना हो मुझसे मिल लेना.. मैं रोकूंगी नहीं तुझे..
गौतम - खाना खा लिया?
रेशमा - इतनी सुबह कौन खाना खाता है? अभी तो खाना बनाउंगी.. फिर खाउंगी.. जब तुझसे मिलूंगी तब तू अपने हाथों खिला देना खाना..
गौतम - मुझसे मिलते ही लंड खाएगी तू..वो भी अह्ह्ह्ह.. उह्ह्ह... करके..
रेशमा हसती हुई - तू जो खिलायेगा वो खा लुंगी मेरे कुत्ते.. मेरा भी बहुत मन है तुझसे मिलने का..
गौतम - मन क्या है साली.. सीधा बोल ना तेरी चुत में खुजली चल रही है.. चुदवाना है तुझे भी..
रेशमा - हाँ चल रही है तू मिटायेगा ना मेरी खुजली..
गौतम - एक बार मिल रेशमा.. ऐसा चटूंगा ना तेरी चुत को.. तेरी साली खुजली मिट जायेगी...
रेशमा चुत में ऊँगली करते हुए - उफ्फ्फ.. मेरे कुत्ते.. तू चाटेगा ना मेरी चुत को, अपनी बात से मुकर तो नहीं जाएगा..
गौतम - चाटूँगा भी चोदुँगा भी.. चुत औऱ गांड दोनों.. कुतिया बच्चा नहीं हो रह ना तेरे.. एक बार में प्रेग्नेंट ना कर दिया तो कहना..
रेशमा ऊँगली करती हुई - आई लव यू मेरे कुत्ते.. अब तो मुझसे भी सब्र नहीं हो रह.. मन कर रहा है उड़ के आ जाऊ तेरे पास..

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गौतम - अच्छा शोहर कहा है तेरा? आज सुबह सुबह चला गया क्या?
रेशमा - छोड़ ना बेबी.. गया होगा हराम का जना अपनी अम्मी चुदवाने... तू मीठी मीठी बात कर ना मुझसे.. बता मिलूंगी तो क्या क्या करेगा तू मेरे साथ?
गौतम हस्ते हुए - चुत में ऊँगली कर रही है ना तू मेरी कुतिया?
रेशमा - लड़कियों से ऐसी बातें नहीं पूछते..
गौतम - अच्छा दरवाजे पर कोई आया है मैं बाद में बात करता हूँ..
रेशमा - कुत्ते फ़ोन मत काटना.. जो भी आया है भगा उसे.. औऱ बात कर मुझसे..
गौतम ने फ़ोन बिना काटे टेबल पर रख दिया औऱ कानो में इयरबड्स लगाकर बात करते हुए रेशमा से कहा..
गौतम - ठीक है रुक दो मिनट मैं देखता हूँ कौन है..

गौतम ने दरवाजा खोला तो सामने शबनम हाथ में एक ट्रे लेकर खड़ी थी जिसमें एक चाय का कप और कुछ खाने का सामान था.. शबनम ने गौतम को देखते हुए उसकी आंखों से आंखें मिलाकर कहा - ग़ुगु भैया आपकी मम्मी ने आपके लिए नाश्ता भिजवाया है.. गौतम ने बिना कुछ कहे इशारे से शबनम को नाश्ते की ट्रे टेबल पर रखने को कहा और दरवाजा अंदर से बंद करके शबनम के पीछे-पीछे आ गया औऱ शबनम को अपनी तरफ घुमा कर उसके मुंह पर हाथ रखते हुए फ़ोन म्यूट करके शबनम से बोला...
गौतम - तुझे समझाया था ना भईया मत बोला कर..
शबनम मासूमियत से गौतम का हाथ हटा कर - गलती हो गई..
गौतम शबनम के बूब्स पर हाथ फेरकर - अब गलती की है तो फिर से सजा मिलेगी..
शबनम अपने बूब्स पर गौतम का हाथ देखकर - छोटे मालिक आप ये क्या कर रहे है? कोई देख लेगा?
गौतम - कोई नहीं आएगा औऱ अब तू मुंह से आवाज मत निकालना.. सेटिंग से बात कर रहा हूँ.. उसे तेरी आवाज ना सुनाई दे.. मैं कुछ भी करू तू चुप रहना बिलकुल..
शबनम - पर छोटे मालिक.. मालकिन को पता चला तो मेरी जान ले लेगी..
गौतम - तू बतायेगी? नहीं ना.. फिर? औऱ ये छोटे मालिक बहुत चूतिया लगता है सुनने में.. मैं कोई मालिक नहीं हूँ यहाँ पर.. तू भईया ही बोल वो फिर भी ठीक है..
शबनम गौतम की तरफ देखती हुई - ज़ी.. ग़ुगु भईया..
गौतम शबनम को चुप रहने का इशारा करते हुए फ़ोन का म्यूट खोलकर इयरबड्स हटा देता है औऱ फ़ोन स्पीकर पर डाल कर कहता है - हेलो..
रेशमा - हाँ मेरे कुत्ते.. चला गया जो आया था?
गौतम शबनम को बाहों में भरकर बिस्तर पर आता हुआ - हम्म..
रेशमा - तो अब बता क्या क्या करेगा जब मिलूंगी तब?
गौतम शबनम के होंठों को चूमता हुआ - सबसे पहले तो मैं तेरे गुलाबी होंठों को अपने होंठों में गिरफ़्तार कर लूंगा औऱ तेरे मुंह में अपनी जीभ डालकर तेरे पुरे मुंह की तलाशी लूंगा..

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रेशमा ऊँगली करते - अहह... कुत्ते.. फिर..
गौतम शबनम के चेहरे औऱ गले को चूमकर चाटता हुआ - फिर तेरे चेहरे औऱ सुराही जैसी गर्दन पर अनगिनत चुम्बन करके lovebite दूंगा..
रेशमा - हाय.. मैं भी अपने कुत्ते को जीभर के चुमूँगी औऱ lovebite दूंगी.. उसके बाद क्या करोगे बेबी?
गौतम शबनम का बोबा अपने हाथ में पकड़कर मसलते हुए शबनम की आँखों में देखकर - फिर मैं तेरा दूध निकाऊंगा..

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रेशमा ऊँगली करते हुए - बेबी आराम से ज्यादा तेज़ मत दबाना मेरे चुचो को.. वरना दूध फट जाएगा..
गौतम शबनम की कुर्ती उतारकर ब्रा खींचकर निकालते हुए - फिर तेरे बोबो को बच्चों की तरह चूसूंगा मेरी कुतिया..
शबनम से अब रहा ना गया औऱ वो भी कामुकता के सागर में कश्तिया हाँकने लगी थी उसने अपने दोनों हाथों से गौतम के सर को पकड़कर गौतम को अपना बोबा चुसवाना शुरू कर दिया था..

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रेशमा - हाये अम्मी.. मैं भी तुझे बच्चों की तरह अपना दूध चुसवाउंगी मेरा बच्चा बनाकर.. पी लेना मेरा सारा दूध अपने मुंह से कुत्ते..
गौतम शबनम की आँखों में देखकर अपने हाथ में शबनम के बोबे पर कड़क होकर खड़े हुए चुचक को अपनी ऊँगली से पकड़ कर जोर से मरोड़ता हुआ - फिर मैं तेरे बोबे के दाने को मसलकर तुझे दर्द दूंगा रेशमा...
शबनम गौतम की आंखों में देखी हुई उससे अपने बोबे पर खड़े हुए चूचक को छोड़ने की आँखों से अपील कर रही थी. शबनम आह भरना चाहती थी मगर गौतम को बुरा ना लगे इसलिए उसने अपनी आवाज को अपने गले में ही दबा लिया और गौतम की आंखों में देखती हुई अपने चेहरे पर दर्द भरे भाव ला रही थी. गौतम से शबनम की हालत ज्यादा देर तक देखी नहीं गई और उसने बोबे पर खड़े हुए शबनम के चुचकों को मरोड़ना और मसलना बंद करके अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया..
रेशमा चूत में ऊँगली करती हुई - मैं जोर से चिंख पड़ूँगी बेबी अगर तू करेगा तो.. ज्यादा दर्द देगा ना तो अपने दांतो से तेरे होंठ काट खाउंगी..
शबनम रेशमा की बात सुनकर कामुकता से गौतम के होंठों को चुम लेती औऱ अपने दाँत से जोर से काट लेटी है.

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गौतम शबनम को हैरानी से देखता हुआ - साली काटती है.. रुक तुझे अभी बताता हूँ..
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगती है औऱ उसकी शर्ट के बटन खोलने लगती है वही गौतम को शबनम के बर्ताव से शबनम पर प्यार आने लगा था.. गौतम उसके बूब्स को मसलता हुआ चूसने लगता है..
रेशमा - अब क्या कर रहे हो जानु?
गौतम शर्ट उतार कर शबनम की चुत सहलाता हुआ - तेरी चुत को तैयार कर रहा हूँ..
शबनम अपनी चुत गौतम से सहलवाती हुई अपने एक हाथ से गौतम की जीन्स का बटन खोलकर उसकी जीन्स नीचे सरका देती है औऱ अपने पैरों की मदद से गौतम की जीन्स पूरी नीचे तक उतार देती है जिसे गौतम खुद पैरों से निकालकर अब सिर्फ चड्डी में आ जाता है..
रेशमा ऊँगली करते हुए - धीरे सहलाना जानू मेरी चुत को.. कहीं अभी ही ना झड़ जाए.. आहहह... अब मेरी सलवार खोल दो ना बेबी?
गौतम रेशमा की बात सुनकर शबनम की सलवार का नाड़ा खोलने लगता है पर गौतम से शबनम की सलवार का नाड़ा नहीं खुलता जिस पर शबनम गौतम को देखती हुई दबी हुई हंसी हँसने लगती है..
रेशमा फ़ोन पर - खोल दी क्या जानू मेरी सलवार..
गौतम - यार ये नाड़ा नहीं खुल रहा..
रेशमा फ़ोन पर - लाओ बेबी मैं खोल देती हूँ..
रेशमा की बात सुनकर शबनम अपना एक हाथ बढ़ाकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल देती है औऱ अपनी सलवार नीचे सरका देती है.. औऱ मुस्कुराते हुए गौतम की आँखों में देखकर इशारे से वही कहती है जो रेशमा फोन पर बोलती है..
शबनम इशारे से औऱ रेशमा फ़ोन पर - खुल गया जानू..
गौतम मुस्कुराते हुए शबनम की चड्डी नीचे सरकाकर शबनम की चुत देखकर - कितने सारे बाल है यार तुम्हारी चुत पर.. काट तो लेती इन्हे..
शबनम मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों से अपने दोनों कान पकड़कर गौतम से इशारे में बिना आवाज किये बोलती है - सॉरी..
रेशमा फ़ोन पर - अगली बार साफ कर लुंगी जानू.. आज माफ़ कर दो..

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शबनम गौतम की चड्डी नीचे सरकाकर उसके लंड को देखते ही हैरानी से कुछ बोलने ही वाली थी की गौतम ने शबनम के मुंह पर हाथ रखकर शबनम की चुत पर अपने लंड को रगढ़ते हुए रेशमा से कहा.
गौतम - चुत पर लंड रगड़ रहा हूँ रेशमा..
रेशमा ऊँगली करती हुई इस बार झड़ गई औऱ बोली - जानू तुमने तो रगड़ कर ही झड़वा दिया.. मैंने अंदर तक लेने का सोच लिया था..

गौतम धीरे से शबनम के मुंह से हाथ हटाकर उसे चुप रहने का इशारा करते हुए रेशमा से कहा - झड़ भी गई.. अब मेरा क्या होगा? मुझे तो चुत चाहिए थी..
रेशमा हसते हुए - फोन पर लेकर क्या करोगे जानू? जब मिलूंगी तो रियल में ले लेना.. अच्छा अब रखती हूँ खाना भी बनाना है.. बाय मेरे कुत्ते..
गौतम फ़ोन काटते हुए - ठीक है मेरी कुत्तिया...
शबनम फ़ोन कटने पर - ग़ुगु भईया आपका तो बहुत बड़ा है..
गौतम मुस्कुराते हुए - डर लग रहा है लेने में? नहीं लेना तो मना कर दो. मैं नाराज़ नहीं हूंगा..
शबनम थोड़ा थूक लगाकर गौतम का लंड पकड़ते हुए अपनी चुत में घुसाती हुई - मैं तो कब से लेना चाहती हूं ग़ुगु.. तभी तो कब से आगे पीछे घूम रही हूं..
गौतम - क्या बात है शबनम? ग़ुगु भईया से सीधा ग़ुगु?
शबनम अपनी गांड उठाकर धीरे धीरे गौतम का लंड चुत में अंदर लेती हुई - 10 साल छोटे हो तुम मुझसे.. इतना तो मै बोल ही सकते हूँ.
गौतम मिशनरी में पहला तेज़ झटका मारते हुए शबनम की चुत में अपना आधे से ज्यादा लंड घुसा देता है औऱ शबनम से कहता है - मुझे बड़ी औरते चोदने में बहुत मज़ा आता है शबनम..

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शबनम आह्ह करती हुई - इतनी जोरआजमाइश क्यों कर रहे हो ग़ुगु? तुमको जो चाहिए वो दे तो रही हूँ.. प्यार से नहीं ले सकते मेरी?
गौतम सॉरी बोलते हुए - तुम ठीक तो हो ना शबनम?
शबनम सिसकियाँ लेती हुई - अब तक तो ठीक हूँ पर आगे का पता नहीं.. तुम क्या हाल करोगे मेरा..
गौतम बिलकुल धीरे धीरे झटके मारकर चोदते हुए - दो बच्चे है तुम्हारे तो.. फिर भी इतनी टाइट है... अब्दुल लेता नहीं है क्या?
शबनम गांड उठाकर चुदाई में गौतम का बराबर साथ देती हुई - चुत का क्या है ग़ुगु.. कुछ टाइम ना चुदे तो सिकुड़ जाती है.. औऱ तुम्हारा इतना बड़ा है तुमको तो छोटी लगेगी ही..
गौतम झटको की रफ़्तार बढ़ाते हुए - सच सच बताना शबनम.. दोनों बच्चे अब्दुल के है या किसी औऱ के?
शबनम कामुक आहे भरती हुई - एक तो अब्दुल का..
गौतम झटके मारते हुए - औऱ दूसरा?
शबनम - दूसरा आरती भाभी के पापा का है..
गौतम हैरानी से - आरती का बाप कब चोद गया तुझे?
शबनम - चोद के नहीं गया ग़ुगु.. मैं औऱ अब्दुल पहले आरती भाभी के घर ही काम करते थे.. वहा अंकल ज़ी ने बहुत बार मेरा फ़ायदा उठाया था.. आरती भाभी से कहकर मैं यहां उनके पास आ गई..
गौतम - चोदने वाला अगर अपनी पसंद का आदमी ना हो तो कितना बुरा लगता है समझ सकता हूँ शबनम..
शबनम मुस्कुराते हुए - छोटी सी उम्र में कितनी समझदारी वाली बात करते हो गुगु.. अब जल्दी जो चाहिए वो लो औऱ मुझे जाने दो.. मैं नहीं मिलूंगी तो मालकिन हल्ला मचा देगी..
गौतम शबनम की चुत में पूरा लंड घुसाकर रुक जाता है औऱ शबनम के होंठ चूमकर कहता है - तुम्हारी मालकिन को मैं देख लूंगा.. तुम चिंता मत करो शबनम..

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शबनम कामुक निगाहो से गौतम को देखती हुई - कल शादी में बहुत प्यारे औऱ हैंडसम लग रहे थे तुम?
गौतम - तू छुप छुप के देख रही थी मुझे?
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों पर उंगलियां फेरती हुई - जब से आये तो मेरी निगाहे तो तुम्ही पर है..
गौतम - अच्छा इतना पसंद आय तुम्हे.. बहुत चालक हो..
शबनम कुछ कहती इससे पहले दरवाजा बज गया..
गौतम - हर बार कोई ना कोई अपनी माँ चुदाने आ ही जाता है... तू रुक मैं देखकर आता हूँ..

शबनम बाथरूम में चली जाती है औऱ अपने कपडे अपने हाथ में पकड़कर बाथरूम में एक तरफ रख देती.. वही गौतम तौलिया लपेटकर दरवाजा खोलता है सामने कोमल थी..
कोमल - बेटा.. तूने शबनम को कहीं देखा है? मिल नहीं रही..
गौतम कोमल को बाहों में भरके उसका बोबा मसलते हुए - शबनम को नहीं देखा मामी पर आपको आज बिस्तर में नंगा देखने की बहुत तलब है..
कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का कान खींचकर - रात ने देख लेना बेटा.. अभी घर जाना है तेरी बहन की विदाई भी होनी है.. ऊपर से वो शबनम भी नहीं मिल रही..
गौतम कोमल का बोबा ब्लाउज से बाहर निकाल कर चूसते हुए - शबनम को मैंने बाजार भेजा है मामी.. उसे आने में समय लगेगा.. कुछ काम है तो बोलो मैं कर देता हूँ..

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कोमल गौतम से अपना बोबा छुड़वा कर वापस ब्लाउज में डालती हुई - ये सब रात में कर लेना ग़ुगु अभी बहुत काम है.. शबनम वापस आये तो मेरे पास भेज देना..
गौतम - मामी एक kiss तो दे जाओ..
कोमल गौतम के होंठो को अपने होंठो में भरके एक लम्बा औऱ गिला चुम्मा करके - चल अब अपना ख्याल रख बेटा.. मैं जाती हूँ..
गौतम अपना तौलिया हटाकर अपना लंड हिलाते हुए - बाय मामी..
कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का लंड देखकर - बाय बेटा...
कोमल के जाने के बाद गौतम दरवाजा बंद कर देता है औऱ बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर पोट पर बैठी हुई शबनम से कहता - पोट्टी कर रही हो क्या?
शबनम खड़ी होकर - नहीं तो.. कौन था?
गौतम - मामी थी तेरे बारे में पूछ रही थी..
शबनम - तो? क्या कहा तुमने?
गौतम शबनम को बाहों में भरते हुए - मैंने कहा.. तुम्हे टाइम लगेगा.. बहुत जरुरी काम कर रही हो मेरा..
शबनम मुस्कुराते हुए - मालकिन ने क्या कहा?
गौतम - मामी ने कहा.. जब काम पूरा हो जाए तो भेज देना..
शबनम - सच में?
गौतम शबनम को बाहों से आजाद करते हुए - औऱ क्या मैं झूठ बोलूंगा?
शबनम मुस्कुराते हुए टेबल पर पड़ी सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए - ऐसा मैंने कब कहा?
गौतम - तु सिगरेट पीती है?
शबनम - जब इतनी सी उम्र में तुम पी सकते हो तो मैं तो तीस साल की हूँ.. मैं नहीं पी सकती?
गौतम बेड पर बैठके - सिर्फ सिगरेट ही पीना आता है मेरा ये सिगार भी पीना जानती हो..
शबनम गौतम के आगे फर्श पर बैठकर सिगरेट का कश लगाकर उसके लंड को पकड़ते हुए - मुझे सिगरेट पीते हुए सिगार पीना अच्छे से आता है ग़ुगु.. ये कहते हुए शबनम सिगरेट के कश लगाकर गौतम का लोडा मुंह में लेकर चूसने लगी..

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गौतम - उफ्फ्फ.. शबनम.. अहह..
शबनम थोड़ी देर लोडा चूसकर - मज़ा आ रहा है ना ग़ुगु? तुम्हारा तो झड़ने का नाम ही नहीं लेता.. इतनी देर में तो अब्दुल 4 बार अंकल ज़ी 6 बार झड़ जाते..
गौतम - ये मर्द का लंड है शबनम.. आसानी से नहीं झडेगा..
शबनम - ग़ुगु एक बात बोलू.. बुरा तो नही मानोगे?
गौतम - खुलके बोल शबनम.. बुरा मान जाऊंगा तो तुझे चोदके बदला भी ले लूंगा..
शबनम मुंह से लंड निकालकर - ग़ुगु मैं घर की नोकरानी हूँ.. कभी मालकिन नहीं बन सकती.. पर लाइफ में एक बार मुझे मालकिन बनकर चुदाई करनी है अपने नोकर की.. मैं चाहती हूँ कोई मेरा नौकर बनकर रहे.. मेरा हर हुकुम माने..
गौतम शबनम के होंठ चुम्मा कर - इतनी सी बात?
(गौतम अपनी पेंट से अपना बेल्ट निकालकर अपने गले में पहन लेता है औऱ बिलकुल किसी कुत्ते की तरह उसका पट्टा शबनम के हाथ में देकर कुत्ते की तरह फर्श पर अपने हाथ पैर रखकर kutta बनते हुए शबनम से कहता है..
गौतम - लो हाज़िर है तुम्हारा गुलाम या कुत्ता.. दो हुकुम अपने इस गुलाम को मालकिन..
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के सर को चूमकर - गुगु बुरा तो नहीं मानोगे ना तुम.. मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है..
गौतम - अगर तुने अपनी fantasy पूरी नहीं की तो जरूर बुरा मान जाऊँगा.. जो करना है करो.. समझी.. अब शुरू करो.. मुझे भी बहुत बोर हो गया था सिर्फ चुदाई करते हुए.. अब roleplay करके थोड़ा मज़ा लेता हूँ... भो भो.. मालकिन क्या हुकुम है अपने कुत्ते के लिए?
शबनम मूंड में आती हुई पट्टा अच्छे से पकड़ कर - क्या नाम है तेरा मेरे कुत्ते?
गौतम भोंकते हुए - ग़ुगु मालकिन..
शबनम बेड पर बैठकर अपने पैर का अंगूठा गौतम के मुंह में देती हुई - मालकिन के पैर की उंगलियां चूस मेरे कुत्ते..
गौतम अंगूठा औऱ उंगलियां चूसते हुए - ज़ी मालकिन..
शबनम कामुकता के अर्श पर थी उसने कहा - जीभ लगा के चूस.. मादरचोद..रंडी के बच्चे.. मालकिन नाराज़ हो गई तो जानता है ना क्या होगा?
गौतम रोने का नाटक करते हुए - चूसता हूँ मालकिन.. आप गुस्सा मत करो..
शबनम - रो मत साले कुत्ते.. चाट मेरे परो को अच्छे से.. जीभ लगा लगा के..
गौतम पैर चाटते हुए - जैसा आप बोलो मालकिन..

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शबनम पैर चटवाने के बाद पट्टा खींचते हुए गौतम का मुंह अपनी चुत के करीब लाती हुई उसे गाली बकती है - साले ग़ुगु मादरचोद, बहन के लोडे, रंडी के मूत, चुदाईखाने, भोस्डिके भड़वे.. चाट अपनी मालकिन की चुत को.. बाहर निकाल अपनी जीभ..
गौतम अपनी जीभ बाहर निकालकर चुत पर फिराते हुए - मालकिन बदबू आती है आपकी चुत से..
शबनम गौतम को एक थप्पड़ मारकर - तुझसे पूछा मैंने कुत्ते? चाटने के बोला है ना.. तो फिर चाट अच्छे.. साला नौकर मुझसे जबान लड़ायेगा..
ये कहते हुए शबनम अपनी दोनों टाँगे औऱ अच्छे से खोलकर बेड पर लेट गई औऱ ग़ुगु के बाल पकड़कर उसके मुंह को जबरदस्ती अपनी चुत पर लगाती हुई उसे चुत चटवाने लगी..

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इसके साथ ही शबनम ने एक सिगरेट जलाकर कश लेते हुए धुआँ ग़ुगु के मुंह पर छोड़ दिया.. औऱ बोली..
शबनम - अब आ रही है बदबू तुझे? साले नौकर.. छोटा सा होके अपनी मालकिन से जुबान लड़ायेगा.. चाट मादरचोद.. ठीक से चाट वरना काम से निकाल दूंगी औऱ झूठा केस लगाकर पुलिस स्टेशन में बंद भी करवा दूंगी..
गौतम रोते हुए - मालकिन नहीं आ रही बदबू.. मैं चाट रहा हूँ आपकी चुत को.. प्लीज मुझे पुलिस में मत देना.. पुलिस बहुत मारती है.
शबनम सिगरेट का कश लेकर मुझे मूतना है मेरे कुत्ते चल मेरे साथ बाथरूम में..
गौतम - ज़ी मालकिन...
शबनम बेल्ट का पट्टा पकड़ कर गौतम को बाथरूम ले जाती है औऱ गौतम कुत्ते की तरह ही अपने हाथ पैरों पर कुत्ते की तरह चलते हुए बाथरूम में चला जाता है..
शबनम पट्टा खींचते हुए गौतम को घुटनो पर बैठाकर एक थप्पड़ औऱ जमाती हुई - मुंह खोल साले नौकर.. तेरे मुंह में मूतेगी आज तेरी मालकिन..
गौतम मुंह खोलकर - लीजिये मालकिन..
शबनम एक हाथ से सिगरेट के कश लेकर दूसरे हाथ से गौतम के बाल पकड़कर उसके मुंह में मूतती हुई - पी साले कुत्ते.. गरीब.. तू मेरा मूत पिने लायक़ ही है..

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गौतम शबनम का सारा मूत पी जाता है औऱ चाट कर उसकी चुत भी साफ कर देता है..
शबनम - मुंह खोल मेरे कुत्ते.. मालकिन को थूकना है..
गौतम मुंह खोलकर - लो मालकिन थूक दो मेरे मुंह में..
शबनम गौतम के मुंह में थूक देती है फिर शबनम सिगरेट पोट में फेंककर फ्लश करती है औऱ पट्टा खींचकर वापस गौतम को कुत्ते की तरह बिस्तर पर ले आती है औऱ कहती है - आजा मेरे कुत्ते.. अपनी मालकिन के दोनों बोबो को चूस के सारा दूध निकाल दे..
गौतम शबनम के बोबे चूसता हुआ - ज़ी मालकिन.. बहुत बड़े बड़े दूदू है आपके.. आह्ह.. मालकिन आपका दूदू बहुत मीठा है.. बहुत स्वादिस्ट है..

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शबनम एक पल मुस्कुराते हुए गौतम को बेहद प्यार भरी नज़र से देखती है औऱ फिर गौतम के लंड को अपनी चुत में डाल कर कहती है - बहुत हो गई चूसाईं अब कर अपनी मालकिन की चुदाई मेरे कुत्ते..
गौतम लंड घुसते ही धमाकेदार धक्के मारना शुरू कर देता है - ज़ी मालकिन.. 161315f3171afe50f8b99db192a265e3
शबनम एकदम से सिसकती हुई - आह्ह.. कुत्ते थोड़ा धीरे.. मालकिन को धीरे चोद.. मालकिन को दर्द हो रहा है...
गौतम गले से पट्टा निकालकर - मालकिन की माँ की चुत.. साली..
शबनम कामुक सिसकियाँ लेते हुए - आहहह.. ग़ुगु थोड़ा आराम से..
गौतम मिशनरी में शबनम की चुत को कुछ देर चोदकर रुक जाता है औऱ शबनम झड़ जाती है मगर फिर भी कामुकता से भरी हुई आँखों से गौतम को देखती है और कहती है..
शबनम आहे भरती हुई - क्या हुआ ग़ुगु? करो ना..
गौतम चुत से लंड निकालकर - पोजीशन चेंज करनी है..
शबनम - बोलो ना.. क्या बनु? कुतिया या घोड़ी?
गौतम बेड से शबनम को उठाकर दिवार की तरफ मुंह करके खड़ा करते हुए पीछे से उसकी एक टांग उठाकर अपना लंड उसकी चुत में ड़ालते हुए कहता है - छिपकली...

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शबनम दोनों हाथ दिवार पर लगाकर पीछे से गौतम के झटके खाती हुई सिसकती - अहह.. ग़ुगु.. आहिस्ता थोड़ा करो ना...
गौतम कुछ देर उसी तरह चोदकर शबनम को अपनी गोद में उठकर चोदता हुआ कहता है - अंदर ही निकाल दू ना मालकिन..

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शबनम गौतम को चुमकर - जहा तुम्हारा मन हो ग़ुगु ..
गौतम शबनम चोदता हुआ बिस्तर पर पटककर शबनम की चुत में 8-10 धक्के पूरी ताकत से मारता हुआ झड़ जाता है औऱ अपना सारा माल शबनम की चुत में छोड़ देता है..
शबनम भी चीखती हुई गौतम से लिपटकर झड़ जाती है औऱ गीतम के होंठों को लगातार चूमने लगती है.. बहुत लम्बे समय तक दोनों उसी तरह से बिस्तर पर पड़े हुए एकदूसरे को चुम रहे थे..
गौतम चुम्बन तोड़कर - हैप्पी?
शबनम मुस्कुराते हुए - वैरी हैप्पी... थैंक्यू ग़ुगु भईया... औऱ सॉरी भी.. मैंने तुम्हारे इतने प्यारे चेहरे पर थप्पड़ मारा औऱ जो कुछ भी किया.. मगर तुम भी ना.. लंड घुसते ही औऱ छिपकली बनाके इतना कस के चोदा है मुझे कि क्या कहु.. बदला निकाल रहे थे ना जानू?
गौतम - बदला औऱ तुमसे? नहीं यार..
शबनम बेड से उठकर कपडे उठाकर पहनते हुए - अह्ह्ह्ह... हाय क्या हलात कर दी मेरी.. अब क्या जवाब दूंगी मालकिन को? कैसे प्यारे से दिखते हो पर बिलकुल शैतान हो शैतान.. पहली चुदाई से दस गुना ज्यादा दर्द दिया है तुमने..
गौतम बिस्तर पर लेटा हुआ - बुलाऊगा तो वापस आओगी ना..
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम के लंड को मुंह में लेकर साफ करती हुई - बस इशारा कर देना..
शबनम कमरे से जाने लगती है तो गौतम कहता है - शबनम लाइट बंद कर देना जाते हुए..

शबनम लाइट ऑफ करके चली जाती है औऱ गौतम सुबह 10 बजे गहरी नींद में सो जाता है औऱ एक सपना देखने लगता है...
 
Update 29

सपने में गौतम देखता है....

रानी सा.. आपने बुलाया?
हाँ.. जयसिंह ज़ी.. गढ़ पर जाने की तैयारी कीजिये.. रुक्मा (18) की सखी कुशाला का विवाह सकुशल संपन्न हो चूका है.. तीन दिवस के भीतर ही कुशाला की विदाई भी हो जावेगी.. अब गढ़ से रुक्मा को लिवाने के लिए प्रस्थान करना उचित होगा..
जयसिंह - किन्तु रानी सा.. हुकुम का आदेश है कोई भी सैनिक जागीर छोड़कर कहीं नहीं जाए.. औऱ आप तो भली भाति जानती है आज कल खतरा कितना बढ़ चूका है? कल ही जागीर कि सीमा में पड़ने वाले तीन गाँव में हुकुम के छोटे भाई गजसिंह ने बागियों औऱ डाकुओ के साथ मिलकर लूट की है.. ऐसे में महल छोड़कर गढ़ जाना वो भी हुकुम के आदेश की अवहेलना करते हुए.. माफ़ कीजिये रानी सा.. मैं ऐसा कदापि नहीं कर सकता..
सुजाता उर्फ़ रानी माँ (44)
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सुजाता (44)- जयसिंह ज़ी.. आप हुकुम के आदेश की चिंता मत कीजिये.. मैंने उनसे बात कर ली है औऱ उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी है.. कल प्रातः आप कुम्भसिंह को साथ लेकर गढ़ के लिए निकल जाए..
जयसिंह - रानी सा.. कुम्भसिंह कि यहां ज्यादा आवश्यकता है.. हुकुम की सुरक्षा औऱ महल की रखवाली कुम्भसिंह की ही जिम्मेदारी है.. मैं किसी औऱ सैनिक को अपने साथ ले जाऊँगा..
सुजाता - ठीक है जयसिंह ज़ी.. आप समर को भी अपने साथ ले जाइये.. वैसे भी उस जैसे कुशल योद्धा को महल के जनाना हिस्से की रक्षा मात्र तक सिमित रखना सही नहीं है..
जयसिंह - जैसी आपकी इच्छा रानी सा.. अनुभव में भले ही समर कुम्भसिंह से कमतर हो किन्तु युद्ध कौशल में समर बेजोड़ है.. मैं कल सुबह सूरज की पहली किरण निकलने से साथ गढ़ के लिए प्रस्थान कर दूंगा औऱ कुमारी रुक्मा को गढ़ से वापस महल ले आऊंगा..
सुजाता - सावधान रहिएगा जयसिंह ज़ी.. गजसिंह कपटी औऱ धूर्त है...
जयसिंह - रानी सा.. आप निश्चिन्त रहिये.. मैं राजकुमारी को पहाड़ी की तल्हाटी से गुजरे वाले गुप्त रास्ते से शीघ्र ही वापस ले लाऊंगा..
समर पास ही खड़ा हुआ जयसिंह औऱ सुजाता की बात सुन रहा था..

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लता उर्फ़ लीलावती (40)
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इतनी सुबह कहां निकालना है समर?
माँ.. रानी मां का आदेश है आज जयसिंह ज़ी के साथ गढ़ प्रस्थान करना है राजकुमारी रुकमा को गढ़ से वापस लीवाना है..
लता (40) - पर उसके लिए तो सकुशल योद्धा और अनुभवी योद्धाओं की अलग टुकड़ी जाती है रानी ने तुझे क्यों इस काम के लिए नियुक्त किया है..
समर (20) - वो तो मुझे नहीं पता माँ... आप तो जानती हैं रानी मां ने जागीरदार के हाथों मुझे मरने से बचाया है, उनका कहा तो मानना ही पड़ेगा..
लता - तेरी बात बिल्कुल सही है समर, पर महल से गढ़ और गढ़ से वापस महल आने में बहुत खतरा है.. रामप्यारी बता रही थी कि अभी कुछ दिनों पहले ही उसके गांव में बागी औऱ डाकुओं ने लूट की है.. ऐसे में तेरा गढ़ जाना मुझे तो बहुत चिंता हो रही है..
समर - रामप्यारी जो कह रही थी वह सत्य है मां.. गजसिंह डाकुओं के साथ मिल चुका है और अब वही जागीर के गांव में लूटपाट मचा रहा है..
लता डर से काँपते हुए - गजसिंह?
समर अपनी माँ लता को बाहों में थामकर गले लगाते हुए - आप चिंता मत करो माँ.. मुझे कुछ नहीं होगा.. इस बार अगर गजसिंह सामने आया तो मैं उसका सर अपनी तलवार से काट लूंगा औऱ आपके सामने लाकर रख दूंगा.. वैसे भी जब तक मैं आपके अपमान का बदला और पिताजी की मौत का बदला नहीं ले लेता मुझे चैन नहीं मिलने वाला..
लता - समर तू ऐसा कुछ नहीं करेगा.. तु मुझसे वादा कर कि तू गजसिंह और उसके साथियों से दूर रहेगा और अपना बदला लेने का संकल्प मन से निकाल देगा.. जो कुछ हुआ उसे भूल जायेगा औऱ कभी उस गजसिंह औऱ उसके साथियो के पास नहीं जाएगा..
समर - जो कुछ हुआ उसे आप भूल सकती है माँ.. मगर मैं उसे नहीं भूल सकता.. मुझे आज भी याद है जब उस रात जगसिंह ने मुझे बाहर बाँध कर यहां भीतर आपके साथ गलत काम किया था.. वह सब आज भी मेरी आंखों के सामने घूमता है माँ.. मैं आज भी रातों में उस पापी को याद करके चैन से सो नहीं पाता और हर बार यही सोचता हूं कि कैसे मैं उससे आपके अपमान का और पिताजी की मौत का बदला लूंगा..
लता - मैं तेरे पिताजी को खो चुकी हूं समर.. अब मैं तुझे नहीं खोना चाहती.. गजसिंह बहुत खतरनाक है और अब तो उसके साथ सुना है डाकुओं की टोली भी जुड़ गई है.. उसकी ताकत बढ़ती जा रही है ऐसे में तू अगर उसके पास जाएगा तो निश्चित ही वह तुझे मार डालेगा.. मैं तुझे नहीं खोना चाहती तुम मुझसे वादा कर कि तू ऐसा कुछ नहीं करेगा.. राजकुमारी को लिवाने के बाद तू सीधा वापस आएगा.. गजसिंह से बदला लेने का संकल्प त्याग देगा..
समर - कैसे मैं अपना संकल्प त्याग दूंगा माँ.. उस रात मेरे हाथ पांव रस्सीयो से बांधकर उसने इसी कमरे में आपको निर्वस्त्र किया था औऱ इसी जगह आपके साथ गलत काम किया था.. मैं कितना चीख और चिल्ला रहा था और उस दानव से आपको छोड़ने की कितनी विनती कर रहा था मगर मेरे आंसू औऱ चीख पुकार का उसपर कोई असर नहीं हुआ.. मैं उसे नहीं छोड़ने वाला माँ.. उसके कई लोगों को मैंने मौत के घाट उतारा है उसी तरह उसे भी उतार दूंगा..

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लता समर के चेहरे को अपने हाथो से पकड़कर - उस बात को 4 साल हो चुके हैं बेटा.. वह सब बातें अपने मन से निकाल दे.. आगे दुश्मनी रखने से किसी का भला नहीं होगा.. तेरे पिता ने गजसिंह से दुश्मनी की उसके कारण ही हमें वो सब झेलना पड़ा.. अब तू इसे आगे मत बढ़ा..
समर - धोखे से पिताजी को मारकर और मेरे सामने आपका मान सम्मान सब कुछ उतार कर, आपके साथ जबरन अपनी हवस मिटाकर वो गजसिंह अब तक बेखौफ घूम रहा औऱ आप कह रही है मैं अपना बदला भूल जाऊ? यह नहीं हो सकता माँ.. मैं अपने साथ हुई हर चीज भूल सकता हूं मगर आपके साथ और पिताजी के साथ गजसिंह ने जो किया उसे नहीं भूल सकता..
लता - तेरे सिवा मेरा है ही कौन जिसे मैं यह बात समझाऊं.. कई बार सबकुछ भूल जाने में ही सबकी भलाई होती है बेटा.. छोड़ दे ये हठ.. तू साधारण रास्ते से जाएगा औऱ वहा गजसिंह औऱ उसके साथी डाकुओ के साथ मिलके तुम पर हमला कर देंगे.. मेरा क्या होगा..
समर - मैंने आपका दूध पिया है माँ और आपके दूध का ऋण मैं जरूर चुका के रहूँगा.. मैं सब कुछ भूल जाने का वादा तो नहीं करता.. मगर यह वादा जरूर करता हूँ कि मैं गजसिंह का सर आपके कदमो में लाकर जरूर रख दूंगा.. हम साधारण रास्ते से जाएंगे जरूर पर आना हमारा गुप्त रास्ते से होगा.. जो पहाड़ की तल्हाटी से गुजरता है.. जाने की आज्ञा दीजिये..
समर ये कहते हुए लता के पैरों में झुक गया औऱ अपना सर लेता के पैरों में रखकर आशीर्वाद लेने लगा..
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लता समर को उठाकर अपनी छाती से लगा लेती है औऱ कहती है - जल्द लौटना बेटा.. मैं तेरी प्रतीक्षा करुँगी..
समर अपनी मां से आशीर्वाद लेकर वहां से चला जाता है और जयसिंह के साथ राजकुमारी रुकमा को लीवाने के लिए गढ़ की और प्रस्थान करता है..

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रुक्मा उर्फ़ राजकुमारी (18) सुजाता औऱ वीरेंद्र की बेटी
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how far is heaven lyrics
अरे अरे ऐसे क्यों चेहरा उदास किया है मेरी सखी ने? अब तो सब तुम्हे राजकुमारी नहीं, रानी कहकर पुकारेंगे.. अजमेर से भी बड़ी रियासत में विवाह हुआ है तुम्हारा.. सुना बहुत सुन्दर स्थान है जहा तुम जाने वाली हो..
क्या तुम भी सबकी तरह मुझे छेड़ने लगी.. रुक्मा.. अब क्या विदाई से पहले के कुछ मैं अपने अतीत के उन लुभावने पलों को याद भी नहीं कर सकती जिन्हे मैंने यहां बिताये है? मैं उदास नहीं हूँ रुक्मा बस निराश हूँ कि आगे का जीवन मैं यहां से कहीं दूर बताने वाली हूँ..
रुक्मा (18) - विवाह का नियम तो औरत के त्याग का परिचायक है कुशाला.. हर औरत को इस डगर से निकलना पड़ता है.. माँ कहती है कि औरत का मन औऱ ह्रदय धरती की तरह शांत औऱ सहनशील होता है अहिंसा, स्नेह, बलिदान, सहजता औऱ संवेदना ही औरत को औरत बनाती है.. काम, क्रोध, क्रूरता, कपट, हिंसा औऱ असंवेदना पुरुषो में होती है.. औरत का उससे कोई नाता नहीं.. तुम जल्द ही नए बदलाव में ढल जाओगी औऱ अब की बातें तब तुम्हे हसने वाली प्रतीत होगी.
कुशाला (19) - तुम तो बड़ी सयानी बात करने लगी हो रुक्मा.. पता ही नहीं चला हम कब छोटे से बड़े हो गए..
रुक्मा - कुशाला अब उठो औऱ चलो विदाई का समय हुआ जा रहा है..
कुशाला - विदाई तो आज तुम्हारी भी है रुक्मा..
रुक्मा - मैं समझी नहीं कुशाला..
कुशाला - माँ ने बताया है कि तुम्हे लिवाने के लिए जागीर से जयसिंह काका आये है..
रुक्मा - इसका अर्थ है कि आज आप यहां से अपने ससुराल जायेंगी औऱ मैं वापस अपने माता पिता के पास..
कुशाला - सही कहा सखी..
रुक्मा कुशाला से गले मिलते हुए - जीवन के ये अठरा वर्ष जो हमने हंस खेलकर एकदूसरे से रूठकर औऱ एकदूसरे को मनाकर बिताये है वो हमेशा याद रहेंगे सखी..
कुशाला - सही कह रही हो सखी.. किन्तु मैं खत लिखूँगी.. औऱ अगली बार जब हम मिलेंगे तब मेरे हाथों कि मेहंदी तुम्हारे हाथों में होनी चाहिए.. मैं भी अब तुम्हारे विवाह मैं तुमसे मिलूंगी..
रुक्मा औऱ कुशाला दोनों सखियों की आँखों में आंसू थे औऱ दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में कसके पकड़ा हुआ था जो ये बता रहा कि जैसे दोनों को ही अब ये चिंता हो की आगे वो अब कहा औऱ कैसे मिलेंगे.. मिल भी पाएंगे या नहीं.. नियति ने आगे उनके लिए क्या तय किया है.. दोनों की विदाई आज तय थी औऱ दोनों ही इस जगह को नहीं छोड़ना चाहती थी ना ही एकदूसरे को नहीं छोड़ना चाहती थी.. मगर जो होना है सो होकर ही रहता है.. कुशाला बरात के संग अपने ससुराल तो रुक्मा जयसिंह के साथ जागीर की तरफ जाने के लिए मुड़ गई..

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गढ़ से जागीर तक वापसी का दो दिन का ये सफर शुरू हो चूका था औऱ रुक्मा घोड़ागाडी मैं बैठी हुई अपनी सखी कुशाला को याद कर रही थी औऱ उसके साथ बिताये उन पलों को याद कर रही थी जिसमे दोनों बचपन से खेलकर बड़ी हुई थी.. दो दिनो के सफर में आधे दिन का सफर ख़त्म हो चूका था औऱ रास्ते में एक बड़े से बड़ के पेड़ के नीचे जयसिंह ने कुछ देर घोड़ो को सुस्ताने के लिए अपना काफ़िला रोका औऱ रुक्मा को इसकी खबर करके खुद भी पेड़ के नीचे बैठकर साथ लाया हुआ भोजन खाने लगा.

सभी लोग खाना खाने में व्यस्त थे पर समर का ध्यान खाने में नहीं था वो कई दिनों से बस उस परछाई के बारे में ही सोच रहा था जिसे उसने बैरागी से निकलते औऱ उसीमें लीन होते देखा था..
रुक्मा घोड़ा गाडी से नीचे उतर चुकी थी औऱ अपने साथ अपनी दासीयों को लेकर बड़ के पेड़ के पीछे जाकर थोड़ा ठहलने लगी. रुक्मा जयसिंह की आँखों के सामने ही थी इसलिए उसने रुक्मा को वहा टहलने से नहीं रोका औऱ खाना खाते हुए अपने बाकी सैनिको के साथ बात करने लगा.. समर आधा अधूरा खाने के बाद उठ गया था औऱ उसने अपने हाथ पानी से धोकर वापस अपनी तलवार हाथ में पकड़ ली थी औऱ वही पर इधर उधर मंडराने लगा था..
रुक्मा औऱ उसकी दासिया हंस बोल कर इधरउधर टहल रहे थे की उन्हें सामने से खूंखार भेड़िया भागता हुआ उन्ही की तरफ आता हुआ दिखाई दिया औऱ एक साथ रुक्मा औऱ उसकी दासिया चिल्लाते हुए वापस बड़ के पड़ की तरफ भागने लगी. जयसिंह औऱ बाकी सैनिक उठकर अपनी अपनी तलवार संभालते हुए रुक्मा की तरफ दौड़े लेकिन वो लोग बहुत दूर थे.. भेड़िया रुक्मा औऱ उसकी दासियों पर झपटा मारने ही वाला था कि समर ने वहा आकर एन मोके पर अपनी तलवार के एक वार से उस भेड़िये के दो टुकड़े कर दिए औऱ भेड़िये को मार डाला..
जयसिंह ने समर को ऐसा करते देखकर अपनी सांस में सांस ली औऱ रुक्मा को वापस घोड़ा गाडी में बैठाकर आगे का रास्ता शुरू कर दिया..

रुक्मा औऱ उसकी दासिया इस हादसे से कुछ देर के लिए सहम गई थी मगर समर की बहादुरी औऱ उसके रूप पर मोहित होकर रुक्मा ने समर को उसी वक़्त अपने ह्रदय में प्रेमी का स्थान दे दिया था.. घोड़ागाडी मैं बैठी रुक्मा दासीयों से बात करने लगी थी औऱ उससे समर के बारे में पूछने लगी थी..
रुक्मा - ये क्या कह रही हो सुधा? मैं तो बस यूँही पूछ रही थी..
सुधा(दासी 21) - मैंने कई साल आपके साथ बिताये है राजकुमारी.. मैं आपका मन अच्छे से पढ़ सकती हूँ.. जिस पल उस योद्धा ने आपकी औऱ हम दोनों बहिनों की जान बच्चाई उसी वक़्त आपने उस योद्धा को अपने मन में उतार लिया था.. क्यों लीला..
लीला (दासी 22) - सही कहा सुधा.. राजकुमारी को जब से उस योद्धा ने भेड़िये के वार से बचाया है राजकुमारी की आँखे बस उसी योद्धा पर टिकी है.. मगर याद रहे राजकुमारी.. आप जागीरदार की पुत्री हो एक साधारण योद्धा से प्रेम करना आपके लिए उचित नहीं.. आपके प्रेम को जागीरदार कभी स्वीकृति नहीं देंगे..
रुक्मा - तुम दोनों क्या बेतुकी बातें कर रही हो.. ऐसा कुछ नहीं है.. मैंने बस ऐसे ही उसका नाम पूछा था.. नहीं बताना तो मत बताओ..
सुधा - राजकुमारी हमें भी उतना ही पता है उस योद्धा के बारे में जितना आप जानती हो.. मगर आप निश्चिन्त रहिये आगे जैसे ही गढ़ की सीमा पर कुए से पानी लेने के लिए कुछ देर हम रुकेंगे मैं उस योद्धा के बारे में सब सुचना जुटा कर ले आउंगी..
रुक्मा मुस्कुराती हुई परदे से बाहर समर को देखने लगती है जो आगे घोड़े पर सवार था..

गढ़ की सीमा पर से काफिला औऱ घोड़ा गाडी रुकी और पानी लेने के लिए कुछ लोग कुए की बढे.. सुधा घोड़ागाडी से उतर गई औऱ एक सैनिक के पास जाकर कुछ देर बात करके वापस आ गई सभी लोग वापस आगे के लिए बढ़ने लगे..
रुक्मा - कुछ पता चला सुधा?
लीला - देखा सुधा.. कुछ समय पहले तक तो राजकुमारी कह रही थी कि ऐसा कुछ नहीं है मगर अब कितनी उत्सुकता से उस योद्धा के बारे में जानने के लिए लालायित है.. इसे अब प्रेम ना कहा जाए तो क्या कह कर पुकारा जाए?
सुधा मुस्कुराते हुए - अब जान बचाने वाले के बारे में जानना प्रेम थोड़े हुआ लीला.. राजकुमारी ज़ी तो बस यूँही उस योद्धा के बारे में जानना चाहती है.. उस योद्धा से प्रेम थोड़ी हुआ है राजकुमारी ज़ी को.. सही कहा ना राजकुमारी ज़ी.
रुक्मा - मैं अच्छे से समझ रही हूँ जो खेल तुम दोनों बहिने मिलकर मेरे साथ खेल रही हो.. लौटने दो वापस पिताज़ी से कहकर खूब खबर लुंगी तुम्हारी..
सुधा औऱ लीला - अरे नहीं नहीं.. राजकुमारी..
लीला - राजकुमारी हम तो बस यूँही हंसी ठिठोली कर रहे थे आपके साथ..
सुधा - ज़ी राजकुमारी.. आप पूछिए जो आपको पूछना है.. मैंने सबकुछ पता लगा लिया है उस योद्धा के बारे में..
रुक्मा जिज्ञासा से - तो बताओ जो पूछा था मैंने.. नाम?
सुधा - समर सिंह.
रुक्मा - समर... रुक्मा सुधा को अधीरता से देखती हुई.. औऱ?
सुधा - कुछ दिनों पहले तक कोषागृह का पहरेदार था.. हुकुम के मेहमान का अपमान किया था.. हुकुम ने मौत का फरमान सुनाया था औऱ उस मेहमान से समर को मारकर अपने अपमान का प्रतिशोध लेने को कहा मगर मेहमान की दया औऱ रानी की कृपा से बच गया.. रानी ने जनाना महल का पहरेदार बनाया था मगर इस बार जयसिंह के साथ आपको लिवाने भेज दिया..
रुक्मा - घर-परिवार के बारे में?
सुधा - राजकुमारी ज़ी.. पिता भी राजाजी की सेना में थे मगर उस गजसिंह औऱ उसके साथियो ने धुपसिंह को मार डाला.. घर में बस उसकी माँ है.. एकलौता है.. औऱ कोई नहीं.. मगर एक भ्रान्ति है, पता नहीं इसमें कितना सच है औऱ कितना झूठ.
रुक्मा - कैसी भ्रान्ति?
सुधा - भ्रान्ति ये है राजकुमारी ज़ी कि समर के जन्म के वक़्त लल्ली ताई औऱ शान्ति धुपसिंह के घर पहुंची थी मगर उसके कुछ देर बाद शान्ति अकेले किसी बच्चे को लेकर जंगल की औऱ जाती हुई गाँव के एक बुजुर्ग को दिखाई दी थी.. लोग कहते थे वो बुढ़ा मंदबुद्धि था.. मगर वो बुढ़ा कहता था की उसने सच में शांति को बच्चा लेकर जंगल में जाते हुए देखा था औऱ उस दिन लता ने एक नहीं बल्कि दो बच्चों को जन्म दिया था.. कुछ सालों बाद वो मर गया, उसके कुछ सालों बाद लल्ली ताई भी चल बसी.. अब सिर्फ शान्ति बच्ची है जो बूढ़े को मंदिबुद्धि कहकर ही इस भ्रान्ति को खारिज कर देती है..
रुक्मा - समर इस बारे में क्या कहता है..
सुधा - उसे तो फर्क ही नहीं पड़ता राजकुमारी ज़ी.. वो शान्ति की बात को सही मानकर उस बूढ़े को गलत समझता है...
लीला - रात होने वाली है राजकुमार ज़ी.. लगता है जयसिंह ज़ी ने चाल धीरे करने को कहा है.. आसपास ही अब रात के विश्राम हेतु रुका जाएगा..
रुक्मा - तुमने सही कहा लीला..


****************


समर से राजकुमारी रुकमा को वापस लीवाने की सूचना पाकर लता घर से निकल पड़ती है और जंगल के छोटे-मोटे रास्तों से होती हुई एक सुनसान जगह पहुंचती है जहां कई लोगों ने डेरा डाला हुआ था..
लता उसके पास पहुंचकर पहरेदारी कर रहे एक आदमी से कहती है..
लेता - सरदार से मिलना है.. औऱ इतना कहकर लता अपने घाघरे को ऊंचा करके अपनी गांड पर एक निशान पहरेदार को दिखाती है..
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पहरेदार लता की गांड पर निशान देखकर उसे अपने पीछे पीछे एक गुफा की तरफ ले आता है औऱ बाहर खड़ा होकर कहता है..
पहरेदार - सरदार.. आपकी एक रखैल आपसे मिलने आई है..
गुफा के अंदर गजसिंह किसी वैश्या से अपना लोडा चुसवा रहा था.. औऱ लोडा चुसवाते चुसवाते ही गजसिंह ने पहरेदार से रखैल को अंदर भेजने को कहा..
लेता पर्दा हटाकर गुफा में आगई औऱ वापस पर्दा लगाकर गजसिंह के सामने खड़ी होकर अपने हाथ जोड़कर गजसिंह से बोली..
लता - छोटे हुकुम..
गजसिंह ने अपना लंड चूस रही लड़की को वहा से जाने का इशारा किया औऱ लता से करीब आने का इशारा किया.. लता गजसिंह का इशारा समझ कर उसके करीब आ गयी औऱ उसी जगह बैठ गई जहा लड़की बैठी थी..
गजसिंह अपने करीब रखे मदिरा के प्याले को उठाकर मदिरा पीते हुए - क्या बात है लीलावती.. तू अपने छोटे हुकुम को भूल ही गई.. कितने समय बाद आई है..
लता उर्फ़ लीलावती - आपको कैसे भूल सकती हूँ छोटे हुकुम.. आपने ही तो इस वैश्या को वैश्यालय से निकालकर अपने साथ रखा है.. मेरा नाम लीलावती से लता करके मेरा विवाह धुपसिंह से करवाया ताकि मैं आपको जागीर से जुडी हुई गुप्त सुचना दे सकूँ औऱ आप अपने भाई वीरेंद्र सिंह को हराकर जागीरदार बन सके.. मेरी जैसी कितनी वैश्या को आपने नई जिंदगी दी है छोटे हुकुम.. ये कहकर लता गजसिंह का लोडा मुंह में भरके चूसने लगती है..

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गजसिंह बाल पकड़ कर लंड चुसवाते हुए - समर का क्रोध शांत किया तूने या नहीं.. पिछली बार भी मेरे 4 साथियो को उसने मौत के घाट उतार दिया.. सिर्फ तेरे कहने पर मैंने उसे अब तक जीवित छोड़ा है..
लता मुंह से लंड निकालकर - उसकी रगो में आपका ही खून है छोटे हुकुम.. इतनी आसानी से कैसे ठंडा हो जाएगा.. अब तक उस रात जो हुआ उसे याद करके क्रोध से भर जाता है.. मैंने आपसे कहा था छोटे हुकुम मैं आपके पास जंगल में आ जाउंगी आप यहां कुछमत कीजिये.. मगर आप धुपसिंह से इतने क्रोधित थे कि आपने तो समर के सामने मेरे ही ऊपर चढ़ाई करके मेरे साथ अपनी हवस मिटाइ.. बेचारा अपनी माँ के साथ जो कुछ हुआ उसे नहीं भूल पाया है..
गजसिंह - धुपसिंह ने आखिरी मोके पर मुझे वीरेंद्र को मारकर जागीरदार बनने से रोक दिया था लीलावती.. मैं उस आग में जल रहा था.. मुझे औऱ कुछ नहीं सूझ रहा था.. मैं अपने हाथों से धुपसिंह को मारना चाहता था.. मगर तूने मुझसे वो मौका भी छीन लिया..
लता - मैं क्या करती छोटे हुकुम.. धुप सिंह को मेरे बारे में सब सच पता चल गया था औऱ वो मुझे मारने के लिए हाथों में तलवार उठाने ही वाला था.. मैं अगर उस कटार से धुपसिंह को नहीं मारती तो वो मुझे मार देता.. फिर मैं आपके किसी काम की नहीं रहती.. ना ही आपको कोई औऱ सुचना दे पाती..
गजसिंह लता के बाल पकड़कर - तो बता लीलावती.. इस बार क्या गुप्त सुचना लेकर आई है तू? या फिर इस बार भी मेरे साथ बस रात बिताकर मुझे खुश करने के लिए आई है?
लता मुस्कुराते हुए - सुचना तो बहुत गुप्त है छोटे हुकुम.. मगर पहले आपको मुझसे एक वादा करना होगा..
गजसिंह - केसा वादा लीलावती..
लता (लीलावती) - आप समर को कुछ नहीं करेंगे.. औऱ उसके प्राण बक्श देंगे..
गजसिंह - ये वादा मैंने पहले भी तुझसे किया है औऱ वापस करता हूँ लीलावती.. तू जानती है गजसिंह अपने वादे का कितना पक्का है.. अब बता क्या गुप्त सुचना है..
लता (लीलावती) - जागीरदार ने राजकुमारी रुक्मा को गढ़ से लिवाने के लिए एक 40 सैनिको की टुकड़ी भेजी है..
जागीरदार - इतना तो मुझे मेरा पहरेदार भी बता सकता है लीलावती.. कुछ औऱ बताना हो तो कहो..
लता (लीलावती) - मगर हर बार आप नाकाम रहे है छोटे हुकुम.. इस बार मुझे उनके वापसी के रास्ते का भी पता है..
गजसिंह - इतनी गोपनीय सुचना तुझे कैसे मिली लीलावती..
लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. समर ने जाने से पहले मुझसे बात कर रहा था.. मैंने बातों बातों में उससे ये सुचना उगलवा ली.. वो लोग वापसी में पहाड़ी की तल्हाटी वाले रास्ते से आएंगे.. छोटे हुकुम आप राजकुमारी को वहा से अगुवा कर वीरेंद्र सिंह से जागीरदारी छीन सकते है.. राजकुमारी को अगुवा कर आप सभी सैनिको को ख़त्म कर सकते है किन्तु समर को जीवित जाने देंगे..
गजसिंह लता के चुचे पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए - वाह.. लीलावती आज तूने सिद्ध कर दिया कि तू मेरी असली रखैल है.. जब मैं जागीरदार बन जाऊँगा तब तुझे महल में साथ रखूँगा..
लता - आराम से छोटे हुकुम.. चोली फट जायेगी..
गजसिंह चोली फाड़कर उसका घाघरा खोल देता है औऱ लता को नंगा करके अपने नीचे लेटा कर उसकी चुत में अपना लोडा डालकर लता को चोदने लगता है..

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गजसिंह - लीलावती तेरी योनि तो आज बहुत मज़ा दे रही है मुझे..
लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. आठ माह हो गया.. पिछली बार भी आपने ही मुझे अपने नीचे लेटाया था.. तब से अब तक किसीने मेरे साथ कुछ नहीं किया..
गजसिंह लता को पीठ के बल लेटाते हुए - लीलावती तू अब वैश्या नहीं लगती.. ऐसा लगता है सच में किसी घर कि घरेलु औरत है..
लता (लीलावती) - ये आपका बड़प्पन है छोटे हुकुम.. मुझे वैश्या को इतना सम्मान देने के लिए..
गजसिंह पैर फैलाकर लता को चोदते हुए - समर को समझा लीलावती.. अपनी हठ छोड़ दे.. मैं बार बार उसके प्राण नहीं बक्शऊँगा.. उसने अब तक मेरे 26 आदमी मार दिए औऱ मैं बस तेरे कारण हर बार उसे माफ़ कर देता हूँ..

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लता (लीलावती) - छोटे हुकुम.. समर मुझ वैश्या की कोख से पैदा हुआ है तो क्या हुआ.. है तो आपका अपना खून.. आपने एक बेटे के सामने उसकी माँ का चीरहरण किया था.. वो कैसे ये सब भूल जाएगा.. पर छोटे हुकुम मैं आपसे वादा करती हूँ.. मैं जल्द ही समर को लेके यहां से दूर चली जाउंगी.. औऱ जब आप जागीरदार बन जाएंगे तब समर को किसी भी तरह समझाकर मना लुंगी..
गजसिंह लता को घोड़ी बनाकर चोदता हुआ - ठीक है लीलावती.. इस बार मैं नहीं चुकने वाला.. वीरेंद्र से जागीरदारी छीनकर ही रहूँगा..

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गजसिंह लता को चोदकर उसकी चुत से लोडा निकालकर उसके बदन पर अपना माल झाड़ते हुए गुफा से बाहर आ गया औऱ लता अपनी फ़टी हुई चोली औऱ घाघरा पहन कर रात के अँधेरे में छुपते छुपाते अपने घर वापस आ गई..

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वीरेंद्र सिंह - आओ बैरागी.. इतनी सुबह बुलवा लिया तुम्हे.. तुम्हारी नींद में विघ्न पड़ा होगा..
बैरागी - मुझे रातों में नींद नहीं आती हुकुम.. मैं तो बस अपने प्रियतम से ही बात करके अपनी राते गुज़ारता हूँ.. कहिये आपने जिस उद्देश्य से मुझे बुलवाया है उसका क्या प्रयोजन है? मैं आपके क्या काम आ सकता हूँ?
वीरेंद्र सिंह - तुम अच्छे से जानते हो बैरागी मैं तुमसे क्या चाहता हूँ.. फिर भी तुम मुझसे पूछ रहे हो तो मैं वापस तुम्हे बता दू.. मेरे डर औऱ चिंता को दूर करो बैरागी..
बैरागी - मैंने आपसे पहले भी कहा था हुकुम.. आपका डर केवल आपके मन की उपज मात्र है जिसे आप स्वम ही ठीक जर सकते है..
वीरेंद्र सिंह - अगर मेरे बस में होता तो मैं कई सालों से इस तरह बावरा बनकर अपना उपचार नहीं कर रहा होता बैरागी.. तुम कोई ना कोई उपाय तो जरूर जानते होंगे.. मुझे तुम्हारी क़ाबिलियत का अनुमान है.. तुम बस मुझे मेरा उपचार बताना नहीं चाहते..
बैरागी - ऐसा नहीं है हुकुम.. प्रकृति ने सब बहुत सोच समझ कर बनाया है.. उसके नियम हमारे नियमो से बहुत ऊपर है.. उसके साथ हेरफेर करना प्रकृति की संरचना को ललकारने जैसा है.. इसमें किसी का हित नहीं है हुकुम..
वीरेंद्र सिंह - बैरागी मुझे उपदेश नहीं उपचार चाहिए.. मैं तुम्हे जो भी चाहिए दे सकता हूँ.. हर वो पौधा जो इस जमीन पर वरदान बनकर उगा है, भले ही किसी किस्म का हो मेरे पास उपलब्ध है..
बैरागी - इस जमीन पर उगने वाली औषधि का समस्त भण्डार आपके पास होना.. ये तो बहुत विचित्र बात है हुकुम..
वीरेंद्र सिंह -चलो बैरागी मैं तुम्हे महल का वो हिस्सा दिखाता हूँ जो सिर्फ मेरे लिए ही सिमित है.. औऱ तुम्हारा संशय अभी दूर किये देता है..
बैरागी - अगर ऐसा है तो मैं भी आपके साथ उस हिस्से को देखने के लिए उत्सुक हूँ हुकुम..
वीरेंद्र सिंह बैरागी को अपने साथ महल के बीच एक हिस्से में ले आते है जहा किसी को आने की अनुमति नहीं थी औऱ एक बड़े से जमीनी हिस्से पर उगे हुए पौधे औऱ जड़ो को दिखाता हुआ बैरागी से कहता है..
वीरेंद्र सिंह - लो बैरागी.. देख लो अपनी आँखों से.. यहां 5 सो से ज्यादा अलग अलग किस्म के पौधे है जो किसी ना उपचार में काम आते है.. सबकी अपनी पहचान है.. मैं तो कुछ पौधों के बारे में ही जान पाया हूँ अभी तक..
बैरागी - राजा महाराजा जागीरदार ठिकानेदार सब धन दौलत सम्पति अर्जित करते है औऱ उन्हें पहरे में रखते है.. पर आपने तो इन पौधों को पहरे में रखा हुआ है..
वीरेंद्र सिंह - धन से ज्यादा जरुरी देह होती है बैरागी.. तुझे जिस किसी औषधि औऱ पौधे की जरुरत है तू यहां से ले जा सकता है मगर मेरा भय ख़त्म होने के पश्चात..
बैरागी - आपका भय मृत्यु से जन्मा है हुकुम...
वीरेंद्र सिंह - तो कुछ ऐसा प्रबंध कर कि मेरी मृत्यु कभी हो ही ना बैरागी..
बैरागी - धरती पर अमर तो ईश्वर भी नहीं रहे हुकुम.. उन्होंने भी प्रकृति के नियम नहीं बदले..
वीरेंद्र सिंह - जो ईश्वर नहीं कर पाए उसे मैं करना चाहता हूँ बैरागी.. मैं मरना नहीं चाहता.. हमेशा अमर रहना चाहता हूँ.. अगर तू मेरी मदद कर दे तो.. मैं इस जगह को तुझे सौंप दूंगा.. फिर तू इन पौधों औऱ औषधियौ से किसी भी उपचार की दवा बनाकर अपने उद्देश्य में सफलता पास सकता है..
बैरागी उस जगह उगे हुए पौधे औऱ औषधियों को देखकर - ठीक है हुकुम.. अगर आपकी यही शर्त है तो मुझे मंज़ूर है.. मैंने जो कुछ भी सीखा औऱ पाया है उससे मैं आपका ये भय दूर कर दूंगा..
वीरेंद्र सिंह मुस्कुराते हुए - अब तुमने मेरे ह्रदय को जितने वाले मधुर शब्द बोले है बैरागी.. आज से ये जगह तुम्हारी.. तुम्हे जो कुछ चाहिए पहरेदार लाकर देगा.. बस जल्दी से मुझे अमर कर दो..
बैरागी उस जगह पर घूमते हुए - सवान की पहली बारिश जब दूर पश्चिम की रेतीली जमीन पर गिरती है तो उस रेतीली जमीन से एक अलग किस्म की पिली खरपतवार निकलती है. जिसकी जड़ में सफ़ेद दानेदार बेल भी लगती है.. अगर वो बेल उगने के 3 दिवस में मुझे मिल जाए तो मैं आपको अपके जीवन से 11 गुनाह लम्बे समय तक जीवित रख सकता हूँ..
वीरेंद्र सिंह - सावन की पहली बारिश तो कभी भी बरस सकती है बैरागी.
बैरागी - फिर तो आपको देर नहीं करनी चाहिए हुकुम.. इस वक़्त पश्चिम के लिए किसी सैनिक को भेजना चाहिए..
वीरेंद्र सिंह उस जगह से बाहर जाते हुए - मैं अभी कुछ सैनिकों को इस काम के लिए भेजता हूँ वैरागी..

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कुछ देर बाद जागीर की सीमा पर पहुंचकर जयसिंह के इशारे पर सभी लोग पहाड़ी की तल्हाटी में एक समतल जगह देखकर घोड़ा गाडी औऱ बाकी की बैलगाड़ी रोक देते है औऱ घुड़सवार सैनिक भी घोड़े से नीचे उतर कर अपना घोड़ा खुटा गाड के बाँध देते है समर भी यही करता है.. सभी साथ लाये भोजन को ही खाने लगते है.. रुक्मा भी भोजन करने लगती है औऱ उसकी दोनों दासिया भी रुक्मा के कहने पर उसीके साथ बैठकर भोजन करती है..
खाना खाने के बाद लगभग आधे लोग पहरेदारी के लिए तैनात हो जाते है बाकी के आधे आराम करते है..
रात आधी बीत चुकी थी औऱ अब पहरेदार बदल चुके थे जो लोग अब तक आराम कर रहे थे वो लोग अब पहरेदारी करने लगे थे औऱ जो अब तक पहरेदारी कर रहे थे वो लोग आराम के लिए लेट गए थे..

समर खाना खाने के बाद लगातार एक पत्थर पर जलती हुई आग के सामने बैठकर किसी ख्याल में घूम था.. उसकी आँखों में नींद नहीं थी औऱ नींद तो रुक्मा की आँखों में भी नहीं थी.. रुक्मा अपना दिल समर पर हार चुकी थी.. रुक्मा ने दिन के हादसे के बाद से समर से अपनी नज़र नहीं हटाइ थी औऱ अब वो समर को ही देखे जा रही थी..
लाली औऱ सुधा दोनों को नींद आ चुकी थी.. आधी रात से ज्यादा का समय हो चूका था..

पहाड़ी के पीछे से गजसिंह डाकुओ के मुखिया कर्मा के साथ जयसिंह के इस काफ़िले को देख रहा था जो इस वक़्त रुका हुआ था..
कर्मा - अब किस बात की प्रतीक्षा सरदार.. मुट्ठी भर सैनिक ही तो है.. चलिए रोंध देते है इन सबको औऱ राजकुमारी का अपहरण कर लेते है.. उसके बाद तो वीरेंद्र सिंह अपने हथियार त्याग ही देगा..
गजसिंह - अभी नहीं कर्मा.. हमला सूरज की पहली किरण निकलने के साथ होगा.. इस अँधेरे में अगर कहीं रुक्मा को हानि होती है तो इस हमले का कोई मतलब नहीं रह जाएगा..
कर्मा - मगर सरदार सुबह की पहली किरण पर तो सभी सैनिक फिर से पहरे पर होंगे.. अभी आधे सैनिक नींद में है..
गजसिंह - तुझे कितने सैनिक दिखाई देते है कर्मा?
कर्मा - आग की रौशनी में देखने से लगता है लगभग 20 होंगे सरदार.. औऱ इतने ही सैनिक सोये हुए लगते है..
गजसिंह - तो क्या तुझे लगता है की हमारे 200 लोगो का मुकाबला ये 40 लोग कर सकते है?
कर्मा - वो बात नहीं है सरदार मुझे इस जयसिंह का डर है.. पिछली बार जब भिड़ंत हुई थी इसने अकेले ही मेरे बारह आदमियों को मार गिराया था.. बहुत सख्त जान है..
गजसिंह - इस जयसिंह का मुक़ाबला मुझसे होगा कर्मा.. मैं खुद जयसिंह को हराकर उसके अभिमान को परों से कुचल दूंगा.. तू अपने सभी आदमियों को समझा दे.. राजकुमारी रुक्मा औऱ उस आग के पास बैठे योद्धा समर को एक भी खरोच नही आनी चाहिए..
कर्मा - उस योद्धा को क्यों सरदार..
गजसिंह - कर्मा अभी ये तेरे जानने का समय नहीं है.. तू बस तेरे हर आदमी को ये समझा दे.. उन दोनों में से किसी को भी कुछ नहीं होना चाहिए.. औऱ सब सूरज की पहली किरण पर मेरे इशारे पर एक साथ हमला करेंगे..
कर्मा - जैसा आप कहे सरदार..
गजसिंह ने अपने बागियो औऱ कर्मा ने अपनी डाकुओ से राजकुमारी रुक्मा औऱ समर को छोड़कर सभी को जान से मार डालने का आदेश सुना दिया औऱ हमले के लिए त्यार रहने को कहा..

भोर होने में बहुत थोड़ा समय था गजसिंह का हमला होने वाला था.. समर आँख कुछ पल के लिए लगी थी जो अपने आसपास किसी के होने की आहट पाकर खुल गई थी.. समर ने देखा की राजकुमारी रुक्मा उसके समीप खड़ी हुई उसे देख रही थी..
समर झट से उठकर सर झुकाते हुए - राजकुमारी..
रुक्मा - बहुत कच्ची नींद है तुम्हारी.. राजकुमार.. रातभर इस पत्थर पर बैठकर पहरेदारी करते रहे औऱ कुछ पल आँख लगी तो मेरी आहट पर तुरंत ही नींद भी टूट गई..
समर - मैं कोई राजकुमार नहीं हूँ राजकुमारी.. बस एक साधारण सैनिक हूँ..
रुक्मा समर के थोड़ा नजदीक आकर - मुझे पता है तुम कौन हो.. मैंने तुम्हे उस नाम से बुलाया है जो मैं तुम्हे बनाना चाहती हूँ.. अब से तुम मेरे पहरेदार हो.. अब से मेरी अंतिम सांस तक मेरी रक्षा तुम्हारी जिम्मेदारी है.. मेरे प्राण बचाने के लिए आभार.. तुम्हारी बहादुरी औऱ सुंदरता मेरे मन को भा गई है..

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समर - राजकुमारी.. ये आप क्या कह रही है.. जीवनभर आपकी रक्षा मेरे जिम्मेदारी? मैं एक साधारण योद्धा हूँ.. सूर्यउदय होने वाला है.. आपको वापस जाकर अपनी दासियों के साथ बैठना चाहिए..
रुक्मा - मुझे तुमसे प्रेम हो गया है राजकुमार.. अपनी राजकुमारी की रक्षा तो अब तुम्हे ही करनी पड़ेगी..
जयसिंह - क्या हुआ राजकुमारी.. कोई गलती हो गई इस योद्धा से?
रुक्मा - नहीं.. काका.. मैं तो बस कल मेरे प्राण बचाने के लिए आभार कहने आई थी.. औऱ अपनी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध करने..
जयसिंह - आपकी रक्षा के लिए तो सभी प्रतिबद्ध है राजकुमारी.. महल तक आपको सकुशल पंहुचा कर ही हम चैन से बैठेंगे.. भोर होने वाली सूरज की पहली किरण के साथ महल की औऱ आगे बढ़ेंगे.. आप जाकर घोड़ागाड़ी मैं बैठ जाइये..
रुक्मा - जैसा आप कहे.. काका..

पहली किरण के साथ ही चारो तरफ से गजसिंह कर्मा के साथ मिलकर काफ़िले पर हमला कर देता है औऱ जयसिंह अपने सैनिको के साथ गजसिंह औऱ कर्मा के साथ उनके लोगों से मुक़ाबला करने लगता है.. समर अपनी जगह छोड़कर रुक्मा के करीब आ जाता है औऱ रुक्मा के करीब आने वाले हर सैनिक को अपनी तलवार के एक ही वार से काट कर मार डालता है..
जयसिंह के साथ 40 लोग थे औऱ गजसिंह के साथ दो सो.. मगर फिर भी मुक़ाबला कड़ा हो रहा था.. जयसिंह के 22 आदमी मर चुके थे मगर अब तक गजसिंह भी अपने 90 से ज्यादा आदमी खो चूका था.. जयसिंह ने अकेलेपन ही 30 से ज्यादा आदमियों को मार गिराया था औऱ समर भी अब तक 22 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चूका था.. गजसिंह औऱ कर्मा का जो भी साथी रुक्मा की तरफ बढ़ता समर अपनी तलवार से उसके प्राण हरण कर लेता.. गजसिंह के कहे अनुसार उसके औऱ कर्मा के किसी भी साथी ने समर पर हमला नहीं किया जिसकी कीमत उन सबको अपनी जान देकर चुकानी पड़ी..
देखते ही देखते.. लाशों का जमघट लग गया औऱ औऱ उस स्थान पर रक्त ही रक्त बिखरा हुआ नज़र आने लगा.. आखिर में घोड़ागाड़ी में बैठी रुक्मा औऱ उसकी दासिया के अलावा जयसिंह औऱ समर ही जिन्दा बचे रह गए.. वही गजसिंह की तरफ से गजसिंह औऱ कर्मा के साथ उनके 3 औऱ साथी ज़िंदा बचे रह गए थे.. बाकी सब जमीन पर अपनी जान गवा कर पड़े हुए थे..
समर के सामने जैसे ही गजसिंह का चेहरा आया वो क्रोध से भर गया औऱ गजसिंह की तरफ भागते हुए उस पर हमला कर दिया.. गजसिंह इस हमले से बच गया लेकिन उसके दो साथी जो इस हमले को रोकने के लिए बीच में आये थे उनको जान गवाना पड़ा..
गजसिंह औऱ कर्मा अब पीछे हट गये थे औऱ मुड़कर घोड़े पर बैठकर भागने लगे..
समर का सर गजसिंह का चेहरा देखकर क्रोध औऱ बदले की अग्नि से फटा जा रहा था.. समर ने भी अपने घोड़े की लगाम खींची औऱ उस पर बैठकर गजसिंह का पीछा करने लगा..
जयसिंह भयानक रूप से घायल हो चूका था मगरफ़िर भी उसने आखिर में बचे गजसिंह के एक आखिरी साथी को मार गिराया और खुद भी उसके वार से जमीन पर गिरकर लहूलुहान हो गया..
समर गजसिंह का पीछा करते हुए पहाड़ी के दूसरी तरफ आ गया जहा से खाई शुरू होती थी. समर ने कर्मा डाकू को अपनी तलवार के एक ही वार से मार डाला.. पहाड़ी पर आगे रास्ता ख़त्म हो चूका था भागने की जगह नहीं थी.. औऱ समर अब गजसिंह के सामने खड़ा था..
गजसिंह घोड़े से उतर कर - बहुत बड़ी गलती की मैंने तुझे ज़िंदा छोड़कर.. मुझे अगर पता होता की तू आज मेरा जागीरदार बनने का सपना चकनाचूर कर देगा तो मैं पहले ही तुझे मार डालता..
समर - गलती तो तूने की गजसिंह.. मगर मुझे ज़िंदा छोड़कर नहीं बल्कि मेरे पिता को मारके औऱ मेरी माँ का अपमान करके..
गजसिंह जोर से हसते हुए - तेरा पिता? कौन तेरा पिता समर? वो धुपसिंह? अरे वो तेरा पिता नहीं था.. तेरा पिता तेरे सामने खडा है.. औऱ कोनसे अपमान की बात कर रहा है तू? तेरी माँ का अपमान? अरे उसको मैं तब से जानता हूँ जब तू इस धरती पर आया भी नहीं था.. दिल्ली के एक वैश्यालय में वैश्यवर्ती करती थी तेरी माँ.. औऱ सिर्फ तेरी माँ ही नहीं औऱ भी कई औरतों को मैंने उस वैश्यालय से खरीद कर उनका विवाह वीरेंद्र सिंह की रक्षा में तैनात सैनिको से करवाया था ताकि मुझे उन वैश्याओं से वीरेंद्र के बारे में गुप्त सुचना मिलती रहे..
समर - अपनी मौत को सामने देखकर कहानी बना रहा है गजसिंह.. मगर आज मैं अपनी तलवार से तेरा सर काटकर अपने पिता की मौत का बदला जरूर लूंगा..
गजसिंह हसते हुए - कितनी बार कहु तुझे.. तेरा बाप धुपसिंह मैं हूँ.. यकीन ना हो तो जाकर पूछ ले अपनी माँ से.. जिसे वैश्यालय की लीलावती से साधारण घरेलु लता बनाकर मैंने धुपसिंह से विवाह करवाया था. औऱ धुपसिंह की हत्या मैंने नहीं बल्कि तेरी माँ लीलावती ने अपने हाथों से की थी.. क्युकी धुपसिंह लीलावती के वैश्या होने रहस्य औऱ उसके कूल्हे पर मेरी निशानी का अर्थ वो जान गया था..
समर क्रोध से - चुपकर गजसिंह.. तुझे क्या लगता है मैं तेरी इन बातों पर विश्वास कर लूंगा? औऱ तू मुझे मुर्ख बनाकर यहां से निकल जाएगा? आज तेरा बचना संभव नहीं है गजसिंह..
गजसिंह अपने बाजू पर बनी निशानी दिखाते हुए - अगर मेरी बात पर विश्वास नहीं है तो जा औऱ जाकर अपनी माँ के दाए कूल्हे को देख.. ऐसी ही एक निशानी तुझे तेरी माँ के दाए कूल्हे पर भी दिखाई देगी जो मेरी हर बात सही सिद्ध कर देगी कि तेरी माँ मेरी रखैल है.. तुझे औऱ एक बात बताऊ? राजकुमारी को जयसिंह किस रास्ते से वापस जागीर ला रहा है ये गुप्त सुचना भी तेरी माँ ही मुझे देने आई थी.. औऱ जब आई थी तो सुचना के साथ अपना रूप औऱ जोबन भी देकर गई थी मुझे.. जिसके निशान उसकी छाती औऱ गले पर अब तक होंगे जा जाकर देख.. बदले में तुझे ज़िंदा छोड़ने वादा लिया था उसने मुझसे, इसिलए आज मेरे किसी आदमी ने तेरे ऊपर प्रहार नहीं किया.. राजकुमारी को किस गुप्त रास्ते से लाया जा रहा है.. तूने ही लीलावती को बताया था ना इस बारे में? लाल घाघरा चोली पहनी थी ना तेरी माँ ने उस दिन? अब भी कहेगा की मैं मनगढंत बात बना रहा हूँ? अरे तुझे तो उस रात से लेकर अब तक कई बार लीलावती मेरे हाथों मरने से बचा चुकी है.. कभी सोचा तूने कि मेरे इतने साथी मारे पर मैं कभी तुझे मारने क्यों नहीं आया? क्युकी तेरे अंदर मेरा भी खून है औऱ मैंने लीलावती से वादा किया तुझे ना मारने का..
समर का मन उथल पुथल था - गजसिंह.. अगर तेरी बातें सच हुई तो भी क्या मैं तुझे यहाँ से जीवित जाने दूंगा?
गजसिंह - मुझे मारकर तुझे कुछ हांसिल नहीं होने वाला समर.. वीरेंद्र सिंह पूछेगा भी नहीं तुझे.. उसके लिए तू बस एक प्यादा है जिसके होने या ना होने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता.. मेरी बात मान जा समर.. मुझे रुक्मा का हरण करने दे.. मैं वीरेंद्र सिंह को जागीरदारी से हटाकर खुद जागीरदारी संभाल लूंगा औऱ फिर तुझे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दूंगा.. तू जानता मेरा कोई उत्तराधिकारी नहीं है..
समर आगे बढ़ते हुए - बात अगर वीरेंद्र सिंह की होती तो शायद में अपना मन बदलने के बारे में सोचता.. मगर गजसिंह तूने ये कैसे सोच लिया कि मैं तुझे राजकुमारी रुक्मा का हरण करने दूंगा..
इतना कहकर समर ने गजसिंह का सर अपनी तलवार से काट दिया औऱ गजसिंह का सर लेकर वापस उसी जगह आ गया जहा गजसिंह औऱ जयसिंह के बीच लड़ाई हुई थी..
समर जब वापस आया तो उसने देखा कि जयसिंह पत्थर का सहारा लेकर बैठा हुआ है औऱ रुक्मा औऱ उसकी दासिया जयसिंह के जख्मो पर कपड़ा बाँध रही है..
समर ने गजसिंह का सर एक कपडे में लपेटकर घोड़ागाड़ी पर लटका लिया औऱ जयसिंह को घोड़ागाड़ी पर लादकर राजकुमारी रुक्मा औऱ उसकी दासियों से वापस घोड़ागाड़ी में बैठने को कहा.. फिर खुद उस घोड़ागाडी को चलाकर जागीर की सीमा पर तैनात सिपाहीयों तक ले आया.. जहा समर ने तैनात सैनिको को सुबह हुई लड़ाई के बारे में बताया औऱ जयसिंह के प्राथमिक उपचार का कार्य किया.. औऱ कुछ सैनिको को वहा जाकर पड़ी हुई लाशों को लाने का कहा औऱ स्वम राजकुमारी रुक्मा औऱ उसकी दासियो को लेकर सीमा पर तैनात कुछ सैनिको को साथ लेकर सांझ होने तक महल आ पंहुचा..
महल पहुंचने पर वहा के सैनिको ने जयसिंह को घोड़ागाड़ी से उतरा औऱ वैध के पास ले गए.. रुक्मा समर को मुस्कुराते हुए एक नज़र देखकर महल में चली गई औऱ बाकी सैनिक वापस सीमा की तरफ चले गए..
समर घोड़ागाड़ी महल में छोड़कर गजसिंह का सर लेकर महल से चला गया.. उसने किसी से भी कर्मा औऱ गजसिंह की मौत की बात नहीं की थी..
वीरेंद्र सिंह को जब इसका पता चला तो वो क्रोध में आग बबूला हो गया औऱ अपने सैनिको से हर जगह गजसिंह औऱ डाकुओ के मुखिया कर्मा को ढूंढने औऱ उसके ठिकानो का पता लगाने का आदेश सुना दिया वही खुद भी इस काम को करने के लिए महल से निकलने लगा पर सुजाता के समझाने पर रुक गया..
 
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समर का मन बार बार उसे गजसिंह की बातों पर यक़ीन करने रोक रहा था.. मगर कहीं ना कहीं समर गजसिंह की कही हुई बातों में छुपी सच्चाई की तलाश कर लेना चाहता था.. समर अपने मन में ये प्राथना कर रहा था कि गजसिंह की कहीं हर बात झूठ निकले औऱ उसके मन की जीत हो.. मगर गजसिंह ने जो जो बात समर को बताइ थी उनमे से कुछ ऐसी बात थी जो सिर्फ समर जानता था औऱ उसने अपनी माँ लता को बताइ थी..

समर गजसिंह का कटा हुआ सर लेकर जब अपने घर पहुंचा तब लता धान साफ कर रही थी औऱ बाहर द्वार पर किसी के आने की आहट पाकर लता उठ खड़ी हुई औऱ बाहर झाँक कर देखी तो उसे समर खून से लथपथ दिखाई दिया.. लता द्वार पर जाकर ही समर को देखने लगी..
लता - इतना लहू? कहा चोट लगी है? मैं जाकर वैद को बुला लाती है तू बैठ यहां..
समर - मैं ठीक हूँ माँ.. ये खून उन शत्रुओ का है जिन्होंने रास्ते में राजकुमारी पर हमला किया था..
लता - तेरे ऊपर हमला हुआ था?
समर थैले से गजसिंह का सर निकालते हुए - हाँ माँ.. मैंने कहा था ना.. तेरे दोषियों को सजा दूंगा.. देख उस चांडाल का सर..
लता गजसिंह का कटा हुआ सर देखकर कुछ भी नहीं बोल सकी औऱ सन्न खड़ी रह गई..

समर अपनी माँ के चेहरे पर गजसिंह का कटा सर देखने के बाद भी ख़ुशी औऱ उल्लास के स्थान पर एक फ़िक्र औऱ बेकसी देखकर हैरान था उसके मन की हार होने लगी थी औऱ वो अब औऱ भी चिंता में डूबे जा रहा था लता के हावभाव उसके मन के मेड़ को बहा ले जा रहे थे..

लता सन्न खड़ी हुई उस कटे सर को देखकर ऐसे चुप थी जैसे जमींदार का फरमाबरदार डांट खाकर हो जाता है.. अपनी माँ की ऐसी हालत देखकर समर का शक अब यकीन में बदलने लगा था मगर अब भी उसके मन में कहीं ना कहीं अपनी माँ के लिए इज़्ज़त औऱ सम्मान था जिसके करण वो अब भी पूरी तरह यक़ीन करने में असमर्थ था..
समर - ख़ुशी नहीं हुई माँ आपको?
लता सन्नाटे से बाहर आती हुई - समर तूने सच में गजसिंह को मार डाला..
समर - माँ आपका अपमान करने वाले को मैं कैसे छोड़ सकता हूँ? मेंने कहा था ना मैं इस जालिम को एक ना एक दिन जरूर ढूंढ़ के मौत के घाट उतार दूंगा.. मैंने उतार दिया..
लता आगे कुछ नहीं बोलती औऱ भीतर चली जाती है.. समर लता का ये व्यवहार समझ नहीं पाया था उसके मन में लता के मन के भाव जानने की इच्छा थी जो अब पूरी नहीं उसी थी.. समर ने गजसिंह का सर घर से थोड़ा दूर लेकर लकड़ियों के साथ जला दिया औऱ वापस घर आ गया..

रात होने पर लता ने खाना पकाया था मगर अब तक लता ने समर से कुछ बात ना की थी.. रात का खाना खाते हुए समर ने लता से कहा..
समर - माँ आप इतनी बेचैन क्यों है?
लता मुस्कुराते का नाटक करती हुई - नहीं तो बेटा.. मैं तो बहुत खुश हूँ तूने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेकर साबित कर दिया कि तू भी सच्चा मर्द है.. एक माँ को इससे ज्यादा औऱ क्या ख़ुशी होगी.. ले.. खा ना.. आज स्वाद नहीं बना भोजन?
समर लता की बातों के पीछे उसके भाव उसके बनावटी चेहरे से बखूबी पढ़ रहा था उसने खाना खाया औऱ उठकर सोने चला गया.. अब उसके मन में गजसिंह की बातें पूरी तरह उतर चुकी थी.. उसे लग्ने लेगा था कि गजसिंह जो कुछ कह रहा था सब सच औऱ सत्य है..
समर को गजसिंह की एक बात याद आने लगी.. गजसिंह ने कहा था उसके बाजू पर बना निशान लता की गांड पर भी है गौतम ने तय करलिया था की वो अपनी माँ के गांड के निशान को देखकर रहेगा..

आधी से ज्यादा का समय बीत चूका था समर चारपाई से उठकर भीतर सो रही अपनी माँ लता के पास जाने लगा.. अंदर दिए की रोशनी में उसे लता सोती दिखी.. देखने से लगता था कि लता सो गई है मगर वो सोइ नहीं थी.. समर लता के करीब जाकर चटाई पर लेट गया जिसका आभास लता को हो चूका था औऱ उसका मन उथल पुथल मचाने लगा था.

लता ये सोच कर शाम से ही डरही थी कहीं गजसिंह ने समर को सारी सच्चाई ना बता दी हो वही समर इस बात से डर रहा था कि गजसिह की बटाइ बातें सच ना हो..

समर बाती की रोशनी जमीन पर चटाई पर सो रही अपने माँ लता की गांड के पास लेजाकर अपनी माँ लता के घाघरे को धीरे धोरे ऊपर करने लगा.. लता समझ गई थी की समर निशान देखने की कोशिश कर रहा है..
समर ने धीरे धीरे जांघो तक घाघरा उठा लिया औऱ अब उसे गांड पर बना निशान हल्का सा दिखने लगा था कि लता ने समर का हाथ पकड़ते हुए उसे अपना घाघरा औऱ ऊपर उठाने से रोक दिया औऱ बोली..
लता - औऱ ऊपर मतकर समर.. रात बहुत हो गई है.. यही मेरे पास सो जा..
समर अपनी माँ लता के बदल में चटाई पर लेटते हुए - यानी जो कुछ गजसिंह कह रहा था सब सच है.. (समर की आँखों से आंसू बहने लगे थे)
लता समर के आंसू पोंछकर - मैंने अबतक जो भी किया कभी मज़बूरी में तो कभी हमारी भलाई के लिए किया है समर..
समर - आपने बाबूजी को..
लता समर का गाल सहलाती हुई - अगर मैं नहीं मारती तो वो मुझे मार देता बेटा..
समर - उस रात जो हुआ सब आपकी मर्ज़ी से हुआ?
लता - उन बातों को भूला दे समर.. उनसे किसी का भला नहीं होगा..
समर - वापसी का रास्ता भी आपने ही बताया था गजसिंह को?
लता समर को बाहों में लेकर सर सहलाती हुई - मैं मजबूर थी बेटा..
समर - माँ राजकुमारी को कुछ भी हो सकता था. वो डर गई थी..
लता - वो तो राजकुमारी है समर.. हम जेसो का क्या? इतने बड़े खतरे को टालने के बाद भी जागीरदार ने तुझे याद तक नहीं किया..
समर लता को देखकर - मैंने किसी को नहीं बताया कि मैंने गजसिंह औऱ कर्मा को मार दिया है.. इसलिए सब उन दोनों को ढूंढ़ रहे है..
लता - बता भी देगा तो कोनसा वीरेंद्र सिंह तेरे लिए महल के दरवाजे खोल देगा? समर मैंने दुनिया देखी है मुझे परख है सबकी.. तू मुझसे प्रेम करता है ये तुझे अब साबित करना होगा.. मेरी गलती के लिए तू मुझे माफ़ कर.. और मेरी बात सुन समर.. वीरेंद्र सिंह औऱ जागीर के प्रति तेरी निष्ठा तुझे तकलीफ ही देगी..
ये कहते हुए लता ने समर को अपने गले से लगा लिया औऱ उसके समर के सर को अपनी चाती में घुसाती हुई बातों में हाथ फेरकार सुलाने लगी.. समर थका हुआ बोझाल आँखों के साथ नींद के हवाले होने लगा था. कुछ देर बाद उसे लता की बाहों में नींद आ गई..

सुबह समर उठा तो लता ने उसके आगे रसोई परोस दी जिसे ठुकराते हुए समर ने लता से कहा..
समर - मैं अब आपके हाथ का खाना नहीं खा सकता.. मेरी निष्ठा औऱ कर्त्तग्यता जागीरदार के प्रति है.. मैं उनसे गद्दारी नहीं कर सकता है.. आपने जो किया गलत किया.. मैं आपके साथ अब औऱ नहीं रह सकता..
लता चिंता से सुबकती हुई - समर तू जागीरदार को अपनी माँ के बारे में सब बता देगा? बेटा तू जानता है गद्दार को कैसी सजा मिलती है.. मेरी बात सुन बेटा.. मैं तेरी माँ हूँ.. मेरे साथ ऐसा मत कर..
समर - मेरा हाथ छोड़ दो.. मैं अब औऱ यहां नहीं रुकने वाला.. रात को सच्चाई जानने के बाद एक पाल के लिए में गुम राह जरूर हुआ था मगर अब मुझे होश आ गया है..
लता भय चिंता औऱ क्रोध से भरते हुए बोली - समर अगर तूने घर से कदम बाहर रखा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.. मैं आखिरी बार कहती हूँ रुक जा समर..
समर लता की बात नहीं सुनता औऱ घर से चला जाता वही लता सोचने लगती है की समर जागीरदार को उसके सच्चाई बता देगा औऱ जागीरदार गद्दारों को मिलने वाली दर्दनाक मौत की सजा लता को भी देगा.. मगर समर के मन में लता के प्रति प्रेम औऱ सम्मान पूरी तरह से नहीं निकला था.. उसने लता के बारे में जागीरदार को बताने के बारे में नहीं सोचा था औऱ ना ही वो अपनी माँ की जासूसी के बारे में बताना चाहता था.. वो जानता था की जागीरदार को अगर वो लता की सच्चाई बता देगा तो लता कितनी कड़ी सजा मिलेगी..

लता को समर पर क्रोध आ रहा था वही उसके चिंता भी थी की समर्थन अब जागीरदार को सब सच बता देगा औऱ भय इस बात का था कि जागीरदार उसे एक दर्दनाक भयानक मौत देगा.. लता ने अपने एक साथी लंगड़ू के पास चली गई जिसे समर अपने मामा के रूप में जानता था क्युकी लता ने बचपन से लंगड़ू को अपना भाई बनाकर समर से मिलवाया था...

क्रोध भय औऱ चिंता से भरी हुई लता ने लंगड़ू से कुछ बात की औऱ उसके 4-5 साथियो से साथ हो गई वही समर महल के जनाना कश के बाहर पहरेदारी ओर खड़ा हो गया..

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सुन रे कागा नगर बता
जहा जाकर ढूँढू मीत पुराना
कबतक औऱ किस-किस को सुनाये
मिलन की रतिया गीत पुराना
विराह की बाते कर मो से
उ याद दिलावे भीत पुराना
हाय रे बैरी ज़ी ना छोड़े
ज़ी से गावे संगीत पुराना
सुन रे कागा नगर बता
जहा जाकर ढूँढू मीत पुराना

बैरागी सांझ ढले महल के पीछे उद्यान में बैठे हुए गीत गुनगुना रहा था..
उसके आस पास औऱ कोई नहीं था.. रात्रि का काला प्रकाश उजाले को निगलने ही वाला था.. बैरागी बंद आँख से अपने अतीत की स्वर्णिम यादो की मिठास में खोया हुआ था उसे कब सुबह से दिन हुआ औऱ दिन से रात हुई पता ही नहीं चल सका था.. बैरागी बस गीत गाता हुआ एक नीम की ठंडी चाव में सुबह का बैठा रात तक बैठा ही रहा था..

प्रेम अगर रोग बन जाए तो रोग का उपचार आवश्यकत बन जाता है.. आपके मधुरम गीत.. सुनने वाले के कान में मिश्री सी मिठास घोल देते है मगर इसके पीछे की विराह को जानना उनके लिए चोसर के खेल से कम नहीं..
समर ने बैरागी के समीप बैठते हुए उससे कहा तो समर की बात का प्रतिउत्तर देते हुए बैरागी बोला..
प्रेम तो अपनेआप में उपचार है.. जिसके होने से फूल खिल उठता है औऱ बारिश बरसने लगती है.. पपीहे गाने लगते है औऱ पंछी गुनगुनाने.. प्रेम तो जीवन का आधार है.. प्रेम के बिना तो सब वासना है..
समर - प्रेम औऱ वासना में अंतर मनुष्य के लिए आसान नहीं रागी भईया..
बैरागी - प्रकृति के लिए तो है समर.. प्रेम करुणा है औऱ वासना क्रोध.. प्रेम कोमल है वासना क्रूर.. प्रेम कुछ देता है वासना कुछ मांगती है.. प्रेम किसी के साथ भी हो सकता है वासना हर किसी पे नहीं होती..
समर - प्रेम औऱ सम्बन्ध का अल्पज्ञान मेरी सोच की सीमाओ को सिमित रखता है रागी भईया.. आपकी बातें मेरे जैसे साधारण योद्धा के कहा समझा आ सकती है..
बैरागी - तो फिर आने का प्रयोजन बताओ समर.. बिना कारण ही तुम मुझे इस तरह मेरे एकान्त से नहीं निकालोगे.. अभी तो रात्रि भोजन में भी समय है..
समर - रानी माँ.. मेरे आने का करण रानी माँ है बरागी भईया.. उन्होंने आपको अविलम्ब उनके समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है..
बैरागी खड़ा होता हुआ - तो चलिए.. चलकर उनके बुलावे का करण जान लेते है..
समर साथ चलते हुए आसमान देखकर - लगता है पहली बारिश कभी भी हो सकती है.. बदल मंडराने लगे है..
बैरागी - बदलो के आने से वर्षा नहीं होती समर.. ये तो बस एक ऊपरी दिखावा है जों कुछ पल उम्मीद दे चला जाता है..
समर - इतना निराश होना मृत्यु के सामान है रागी भईया.. जयसिंह ज़ी कहते है.. औऱ आप देखना आज पहली बारिश होकर ही रहेगी..
बैरागी - तुमसे किसने कहा मैं निराश हूँ? मैं तो हर पल अपने मीत की प्रीत में गीत गाते हुए आनंदित रहता हूँ.. आशातीत रहता हूँ.. उसके साथ भी उसका था उसके बाद भी उसका हूँ..
समर - कुछ बताओ ना उनके बारे में..
बैरागी - क्या बताऊ समर.. उसके बारे में कुछ भी तो शब्दो से बयाँ कर पाना कठिन है.. हाँ बस एक बात मुझे आश्चर्य की लगती है.. मृदुला का मुख तुम्हारे मुख से बिलकुल मेल खाता है.. उसके नयननक्श, रंग औऱ आँखे बिलकुल तुम्हारे जैसी थी.. जैसे तुम्हारी जुड़वाँ बहन हो..
समर - उस दिन परछाई में मैं अपना अक्स देखा था.. तब से मैं यही सोच रहा था की ये कैसे संभव है? मैं औऱ आपकी मृदुला एक सामान मुख वाले कैसे हो सकते है?
बैरागी - मुझे ये जानने में कोई रूचि नहीं समर.. हाँ तुम चाहो तो अपनी संतुस्टी के लिए जान लो.. मृदुला ने बताया था की उसे कोई औरत जंगल में छोड़ कर चली गई थी.. उसके बाद जंगल में एक साधना करने वाले आदमी ने उसे पाला.. जिसे मृदुला बाबा बोलती थी.. औऱ वो आदमी भी मृदुला को बेटी ही समझता था.. लो.. हम पहुंच गए..

बैरागी महल के जनाना हिस्से में रानी सुजाता के साथ चला जाता है औऱ समर बैरागी से बात करके महल के जनाना हिस्से के बाहर पहरेदारी पर खड़ा हो जाता है..

समर के सर में बैरागी की कही एक एक बात वापस घूमने लगी औऱ वो सोचने लगा कि क्या सच में ऐसा हो सकता है कि उसकी कोई जुड़वाँ बहन हो?
समर को रह रह कर उस पागल की याद आ रही थी जो ये बात बताता था की उस रात उसने शान्ति को बच्चा ले जाते देखा था.. समर ने ये तय कर लिया था की अब वो शान्ति से इस सच्चाई को उगलवा के रहेगा.. चाहे कुछ भी हो जाये वो सच्चाई जानकार रहेगा.. वो अधीरता से अपने पहरेदारी के समय की समाप्ति का इंतजार करने लगा..

बैरागी जब जनाना महल में पंहुचा तो उसे सुजाता रुक्मा के कश में ले गई जहा रुक्मा ज्वार में थी वैद्य भी वही बैठा था..
बैरागी के आते ही वैद्य ने कहा - मेरी उम्र तुमसे तीन गुना है बैरागी.. मगर मैं जानता हूँ मेरा ज्ञान तुमसे उतना ही अल्प है..
बैरागी - बात क्या है वैद्य ज़ी.. कुछ बताएंगे..
सुजाता - रुक्मा जब से गढ़ से वापस आई है रागी.. उसपर ज्वार चढ़ा हुआ है.. तीन दिनों से ना ठीक से खाया है ना पिया है.. बस नींद में राजकुमार कहकर चुप हो जाती है.. मुझे तो लगता है रास्ते में जो कुछ हुआ उसका भय रुक्मा के मन में बैठ गया है.. जागीरदार भी गजसिंह औऱ कर्मा की तलाश में जा चुके है उन्हें संदेसा भिजवाया है पर उनका कोई पता नहीं.. अब मुझे समझ नहीं आ रहा रागी मैं क्या करू?
वैद्य - ज्वार में जो औषधि दी जाती है मैं राजकुमारी को दे चूका हूँ पर ये ज्वार तो जाने का नाम ही नहीं लेता.. तुम ही कुछ उपाए बताओ बेटा..
बैरागी नींद में लेटी रुक्मा की जांच करके - ज्वार तो बहुत तेज़ है औऱ आपकी दी हुई औषधि भी सही है.. फिर राजकुमारी के स्वास्थ्य में सुधार क्यों नहीं हो रहा? ये आश्चर्य की बात है रानी माँ..
सुजाता - रागी अब तुम ही कोई उपाय करो..
बैरागी - मैं कुछ करता हूँ रानी माँ.. आप बाहर से समर को बुलवा दीजिये.. मुझे उससे कुछ मँगवाना है..
सुजाता ने एक पहरेदार से समर को अंदर भेजनें को कहा..
समर अंदर आकर सर झुकाते हुए - रानी माँ..
समर की आवाज रुक्मा के कानो में जाते ही उसकी आँख खुल गई औऱ उसकी नज़र समर पर पड़ते ही रुक्मा की आँखों में चमक आ गई..
बैरागी की नज़र भी रुक्मा पर पड़ गई औऱ रुक्मा जिस प्रेम लगाव औऱ तृष्णा की भावना से भरकर समर को देख रही थी उससे बैरागी को समझते देर न लगी कि रुक्मा का ज्वार किसी औषधि से नहीं बल्कि समर की उपस्थिति से ठीक होगा..
सुजाता बैरागी से - रागी.. बताओ क्या लिवाना है.. समर उपस्थित है..
बैरागी मुस्कुराते हुए - अब कुछ लिवाने की आवश्यकता नहीं है रानी माँ.. आप खाने का आदेश दीजिये.. राजकुमारी को भूख लगी है..
रुक्मा समर को देखे जा रही थी औऱ अब समर की नज़र भी रुक्मा से मिल चुकी थी मगर समर ने होनी आँख नीचे झुका ली..
सुजाता ये बात नहीं समझ सकी थी वो बोली - क्या कह रहे हो रागी? रुक्मा ने तीन दिनों से खुश नहीं खाया..
बैरागी मुस्कुराते हुए - रानी माँ.. अब आप खिलाइये.. राजकुमार सब खा लेगी.. औऱ वैद्य ज़ी के साथ समर को भी यही रहने दीजिये.. उसे राजकुमारी के कश की पहरेदारी पर लगा दीजिये.. वैद्य ज़ी को आसानी होगी..
सुजाता खाना मंगवाती है औऱ रुक्मा को खिलाने लगती है रुक्मा कश के बाहर तैनात समर को खिड़की के झरोखे से देखती हुई खाना खा लेती है..

***********

बैरागी बाहर आ जाता है औऱ बाहर होती बरखा देखकर मुस्कुराता आसमान औऱ फिर धरती की तरफ देखता है..
रुक्मा को खाना खिलाने के बाद सुजाता वहा से आ जाती है औऱ बैरागी को गलियारे के किनारे पर खड़ा देखकर उसके पास आ जाती है..

सुजाता - सावन की पहली बरखा.. कितनी मनोरम होती है.. मन में मोर नाचते हुए प्रतीत होते है.. कोयल की मधुर आवाज औऱ पपीहे की कुहू ह्रदय को कितना सुख देती है.. ऐसे में साजन या सजनी साथ ना ही तो सावन भी जेठ लगने लगता है..
बैरागी सुजाता को देखकर - रानी माँ.. सावन प्रेम के बंजर को हरा भरा रखने के लिए प्रकृति का वरदान है.. किसी के लिए ये वियोग का विलाप है तो किसी के लिए मिलन की मधुर बेला.. इसे देखना अपनी अपनी आँख की बात है.. जिसे जैसा लगता है वैसा कहता है.. मेरे लिए तो ये आज भी मृदुला की मनमोहक यादो से जुडा हुआ है..
सुजाता - इतना प्रेम? रागी.. मैं ये कहने की अधिकारी तो नहीं, मगर तुम मेरे पुत्र सामान हो तो कह देती हूँ.. प्रेम अविरल बहने की रीत है.. रुकने पर जैसे नदी का पानी सड़ जाता है वैसे ही प्रेम भी रुकने पर मानव के सम्पूर्ण जीवन को सड़ा कर नस्ट कर देता है.. जो हो गया उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ो.. मृदुला के प्रति तुम्हारा प्रेम, मृदुला के बाद तुम्हारे जीवन को नस्ट कर रहा है.. केवल 24 वर्ष की आयु मैं यूँ बैराग धारण करना सही नहीं है.. तुम अब भी फिर से प्रेम करने औऱ प्रेम पाने के योग्य हो.. अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे विवाह योग्य स्त्री ढूंढती हूँ.. किसी के जाने से जीवन नहीं समाप्त होता..
बैरागी मुस्कुराते हुए - मिलन औऱ विरह दोनों ही प्रेम के पूरक है रानी माँ.. मैंने जितना मेरे प्रियतम के साथ मिलन का सुख भोगा है उतनी ही उसके वियोग में विराह की पीड़ा भी भोगने का पात्र हूँ..
सुजाता बैरागी के करीब आकर - रागी.. मैं कामना करती हूँ तुम्हारी पीड़ा का जल्द ही समापन हो. औऱ कोई तुम्हे उसी तरह चाहे जैसे तुम मृदुला से प्रेम करते हो..
बैरागी मुस्कुराते हुए सुजाता को देखता है औऱ सुजाता भी मुस्कुराते हुए बैरागी को देखकर वहा से चली जाती है..

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जब समर के पहरदारी करने का समय समाप्त हुआ था वो सीधा शान्ति के पास चला गया.. शांति घर के अंदर थी औऱ उसका पति खेत में गया हुआ था.. आँगन में उसके 14 का बेटा औऱ 9 की बेटी खेल रहे था.. समर ने लड़के को अपने पास बैठा लिया औऱ लड़की को अंदर शान्ति को बुलवाने भेजा..
शान्ति जब बाहर आई तो उसने समर को देखकर कहा..
शान्ति - अरे समर तू कब आया? कुछ काम था?
समर अपनी कटार निकाल कर लड़के की हथेली पर चुभाते हुए - हाँ.. मौसी.. काम तो था.. औऱ बहुत जरुरी काम था..
शान्ति - समर क्या कर रहा है.. उसे लगेगा.. रक्त आ जाएगा..
समर - आएगा.. मगर तब जब आप झूठ बोलोगी..
शान्ति - मैं समझी नहीं समर तू क्या कह रहा है?
समर - वो बुढ़ा पागल.. जो कहता ये था कि उसने तुम्हे मेरे जन्म की रात मेरे घर से एक बच्चा ले जाते हुए देखा था.. कहा ले गई थी आप वो बच्चा?
शान्ति हड़बड़ाती हुई - कोनसा बच्चा समर? क्या कह रहा है.. देख उसे लग जाएगा..
समर लड़की की हथेली पर कटार चुबो कर रक्त निकाल देता है औऱ कटार अब लड़के के गले पर लगा देता है..
समर - एक औऱ झूठ औऱ ये यही चित... मैं वापस नहीं बताऊंगी मौसी.. कहा लेकर गई थी आप वो बच्चा?
शान्ति डर से चिल्लाते हुए - जंगल.. समर छोड़ उसे..
समर - मुझे पूरी बात जाननी है मौसी..
शान्ति डरते हुए जमीन पर बैठकर समर को सारी सच्चाई बता देती है.. औऱ समर सच्चाई जानने के बाद लड़के को छोड़कर शांति के घर से निकल जाता है औऱ जंगल की तरफ उसी दिशा में जाने लगता है जहा शान्ति ने उसे बताया है..

***********

समर के पीछे उसकी माँ लता औऱ उसके 4-5 साथी लंगड़ू के साथ समर का पीछा कर रहे थे..
जंगल में एक जगह समर जाकर खड़ा हुआ औऱ जमीन पर गिरे हुए जामुन को खाने की नियत से उठाने के लिए नीचे झुका की पीछे से लंगड़ू का चलाया तीर समर के झुकने से उसे ना लगकर पेड़ को लगा औऱ समर अपनी तलवार निकालकर पीछे मुड़ गया जहा उसने 6 लोगो को खड़ा देखा.. लता पेड़ के पीछे छुप गई थी..
उन लोगों ने आव देखा ना ताव.. औऱ समर को मारने के लिए उसपर कुच कर दी मगर सभी लोग एक एक करके समर की तलवार के वार से जीवन को छोड़ कर चले गए.. लंगड़ू घायल होकर जमीन पर था..
लंगड़ू - समर मुझे छोड़ दे समर.. मैं तेरा मामा हूँ ना.. देख मैं तुझे नहीं मारना चाहता था.. समर... मुझे तो तेरी माँ यहाँ लाई थी..
लता एक मरे हुए साथी की तलवार उठा कर पीछे से समर पर हमला कर देती है मगर समर उसके तलवार का वार नाकाम करके एक जोरदार थप्पड़ लता के गाल पर मार देता है जिससे लता के हाथ से तलवार छुटकरा गिर जाती है औऱ लेता भी जमीन पर गिर जाती है..
समर लंगड़ू को मार देता है औऱ लेता जब वापस समर पर हमला करती है तो समर वापस उसके गाल पर थप्पड़ जड़ देता है औऱ एक लात लता की गांड पर मारकर उसको जमीन पर गिरा देता है..
लेता गुस्से में देखते हुए - खड़ा खड़ा देख क्या रहा है मार दे मुझे भी.. जागीरदार की सजा से तड़पकर मरू उससे अच्छा है तेरे हाथो से मर जाऊ...



गौतम लता की ओढ़ानी खींचकर उससे अपनी तलवार साफ करता हुआ कहता है - वैश्या को मारा नहीं जाता.. उसके साथ बदन की आग बुझाई जाती है..

ये कहते हुए समर ने अपनी तलवार एक तरफ रख दी औऱ अपनी माँ के ऊपर आ जाता है औऱ उसकी चोली फाड़ देता है..
लता एक थप्पड़ मारकर - छोड़ मुझे..
समर लेता का घाघरा उठा कर उसकी झंगिया नीचे सरका देता है औऱ अपना फंफनता हुआ लंड अपनी माँ की चुत में घुसा देता है औऱ अपनी माँ को चोदने लगता है..


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लता लंड घुसते ही - समर.. अह्ह्ह्ह...
समर लगातार लता की चुत में झटके पर झटके मारके अपनी माँ लता उर्फ़ लीलावती को चोदने लगता है जिससे लता भी अब कामुक होने लगती है.. पहलेपहल विरोध औऱ बगावत करने वाली लता अब काम पीपासा से भर गई थी.. उसकी सारी चिंता, भय औऱ क्रोध अब काम की अग्नि में जलकर स्वाह हो गई थी...

कुछ देर पहले तक लता अपने बेटे समर के प्राण लेने पर उतारु थी मगर अब वो समर के नीचे पड़ी हुई समर की मर्दानगी से प्रभावित होकर समर को देख रही थी.. समर के सुन्दर मुखमंडल को देखते हुए लता चुदाई का सुख भोगने लगी थी अभी तक उसने अपनी औऱ से कोई शुरुआत नहीं की थी मगर अब उसने समर का विरोध करना भी छोड़ दिया था.

समर लगातार चोदते हुए अपनी माँ को गुस्से की नज़र से देख रहा था मगर अब लता की आँखों में समर के प्रति गुस्सा नहीं था बल्कि प्रेम उतर चूका था..
समर के मजबूत औऱ बड़े लंड की चोट खाकर लता गजसिंह के बूढ़े पतले औऱ अदमरे लंड को भूल चुकी थी..
समर के लंड की ठोकरे खाकर लता की चुत ने अपने बाँध का पानी छोड़ दिया औऱ वो झड़ गई जिससे अब समर का लंड औऱ आसानी से लता की चुत में अंदर बाहर होने लगा औऱ थप थप घप घप की आवाज का औऱ भी अधिक मधुरम संगीत आस पास सुनाई देने लगा..


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समर चोदते हुए लता का एक बोबा पकड़कर मसलते हुए पहली बार अपने होंठ लता के होंठों ओर रख देता है जिसे लता अपने होंठों से चूमने लगती है औऱ अपने दोनों हाथ समर के गले में डालकर उसके बाल सहलाते हुए समर के मुंह में अपनी जीभ डाल देती है औऱ समर एक दम से लता के इस व्यवहार से चौंक जाता है मगर लता की कामकला में पारंगत होने के करण समर लता को रोक नहीं पाता औऱ लता के मुख का स्वाद लेने लगता है..
समर को चोदते हुए काफी देर हो गई थी मगर उसका निकला नहीं था लता ने समर को धक्का देते हुए पलट दिया औऱ उसके ऊपर आकर जोर जोर से अपनी गांड हिलाने लगी जिससे समर सम्भोग के जाल में बुरी तरह फंस गया.. स्मार्ट अब लता को अपनी माँ या गद्दार के रूप में नहीं बल्कि एक चुदाई के सामान के रूप में देखने लगा था..


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उसे लगा था की वो लता को चोद कर सजा देगा मगर अब लता ही समर को चोद रही थी औऱ उसके साथ अपनी भी काम इच्छा संतुष्ट कर रही थी..
लता फिर से झड़ने की कगार पर थी औऱ समर भी लता के गांड हिलाने की कला से अब झड़ने के नज़दीक था..
दोनों एक साथ झड़ते हुए सम्भोग के शिखर तक पहुंच गए.. फिर लता समर के ऊपर ही गिर गई...


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लता के चुचक समर के सीने में चुभ रहे थे.. जो उसे एक मीठा औऱ दिलकश अहसास देने लगे थे.. समर का सारा गुस्सा लता की चुत ने शांत कर दिया था औऱ अब समर को केवल लता से नाराजगी थी..
वही लता का भी सारा डर चिंता औऱ भय समाप्त हो चूका था.. उसके मन में अब अपने बेटे समर के प्रति काम इच्छा का उदय हो चूका था..
कुछ देर यूँही पड़े रहे के बाद समर लता को अपने ऊपर हटाते हुए खड़ा हो गया औऱ अपने वस्त्र ठीक करने लगा.. लता ने भी कपडे पहन लिए औऱ समर के हाथो में उसकी तलवार देकर बोली - जान नहीं लेगा मेरी?


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समर लता का घाघरा उठाकर उससे अपना लंड साफ करता हुआ - मुझे अगर तुम्हारी जान लेनी होती तो मैं सुबह ही ले लेता लीलावती... या जागीरदार को सच्चाई बताकर तुझे क़ैद करवा लिया होता..
लता समर के हाथ से घाघरा लेकर खुद समर का लंड साफ करते हुए शर्म औऱ पछतावे भरे स्वर में - मुझे क्षमा कर दे समर.. मैं तेरी दोषी हूँ.. मैंने तेरी जान लेने की कोशिश की है..
समर जाते हुए - तुम मेरे लिए मर चुकी हो लीलावती.. अच्छा होगा कि तुम भी मुझे अब मरा हुआ मान लो.. तुम्हे जैसे जिसके साथ भी जीना है जाओ जिओ..
लता खड़ी खड़ी समर को जाते हुए देखती रहती है औऱ तब तक देखती जबतक समर आँखों से ओझल नहीं हो जाता.. फिर लता जंगल से निकलकर घर चली जाती है औऱ समर को मनाने का निर्णय करने लगी.. समर भी जंगल में इधर उधर घूमकर वापस आ जाता है उसे कहीं मृदुला के निशान नहीं मिले थे. समर घर जाने बजाये किसी औऱ के पास जाकर रात बिताता है औऱ सुबह फिर पहरेदारी पर तैनात हो जाता है..

समर पहरेदारी पर तैनात था.. रुकमा अपने कक्ष से रह रहकर समर को देख रही थी.. खिड़की से मिलती समर की झलक रुकमा के मन में प्रेम की छाप आपको और प्रगाढ़ कर रही थी.. रुक्मा अब तक समर से बात नहीं की थी वह समर से बात करना चाहती थी मगर वेद जी की उपस्थिति सुजाता के आने जाने और अन्य पहरेदारों के होने से उसकी हिम्मत समर से बात करने की नहीं हो रही थी.. रुकमा की बीमारी में सुधार आया था ये वैध जी की औषधि ने काम नहीं किया किंतु समर की उपस्थिति में रुकमा के स्वास्थ्य को सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई..
समर अपने प्रति रुकमा के मन में भरे प्रेम से पूरी तरह अनजान था.. समर को अब तक नहीं पता लगता था कि रुकमा उसे पर पूरी तरह से अपना दिल और जान हार बैठी है..

पहरेदारी के दौरान जब बैरागी और समर की बातचीत हुई तब समर ने बैरागी को बताया कि किस तरह शांति ने जन्म के दौरान उसकी जुड़वा बहन को जंगल में ले जाकर छोड़ दिया था.. बैरागी ये जानकार कर पूरी तरह समझ हो चुका था कि समर मृदुला का ही जुड़वाँ भाई है.. समर ने बैरागी से मृदुला के बारे में जानने की कोशिश की.. और बैरागी ने बड़े इत्मीनान और ठहराव के साथ समर को मृदुला के स्वभाव और गुणो के बारे में बताना शुरू कर दिया.. समय मृदुला की एक मनोरम छवि अपने हृदय में बना कर उसके बारे में सोचने लगा.. जिस तरह बैरागी में मृदुला का गुणगान किया था उससे समर को अपनी बहन से ना मिल पाने और उसे ना देख पाने का पछतावा और दुख हो रहा था.. उसे लग रहा था कि क्यों उसने उस बूढ़े आदमी कि बात पर पहले विश्वास नहीं किया और पहले अपनी बहन को नहीं खोजा..

बैरागी बैठा हुआ पौधों को देखा और परख रहा था.. विरेंद्र सिंह की बताई हुई जगह पर बैठकर बैरागी ने चार दिनों के भीतर कई रोग का इलाज ढूंढ लिया था जिसमें से एक स्त्री रोग भी था.. बैरागी किसी और रोग का उपचार ढूंढ रहा था कि वहां सुजाता आ गई और बैरागी को देखकर उससे बात करने लगी.. बैरागी और सुजाता की बात बैरागी के काम के साथ चलने लगी बैरागी पौधों की जांच और परख करता हुआ औषधि निर्माण कर रहा था और सुजाता उससे उस बारे में बातचीत करते हुए औषधीय और पौधों के बारे में जानकारी ले रही थी..

वीरेंद्र सिंह गजसिंह और कर्मा डाकू को ढूंढने के लिए निकल चुका था मगर उसे दोनों कहीं नहीं मिले.. और ना ही उसे इस बात की खबर मिली कि समर में उन दोनों को पहले ही मार गिराया है.. वीरेंद्र सिंह जंगल में यहां वहां भटकता हुआ जागीर की सीमा के बाहर भीतर आ जा रहा था और गजसिंह और कर्मा के सारे ठिकानों पर ढाबा बोल रहा था जहां उसे कोई नहीं मिल रहा था.. हर जगह बस उसे गजसिंह औऱ कर्मा के गांब होने की खबर मिल रही थी..

वीरेंद्र सिंह ने जिन सैनिको को पश्चिम में भेजा था वो लोग वही ठहर कर पहली बारिश का इंतजार कर रहे थे औऱ बटाइ गई चीज लाने को आतुर थे.. पश्चिम में अभी सावन की पहली बरखा नहीं गिरी थी..

लता समर के साथ सम्भोग के बाद पूरी तरफ बदल गई थी औऱ अब वो समर से माफ़ी मांगकर उसे अपने पचाताप का अहसास दिलाना चाहती थी.. इसके साथ ही लता चाहती थी की समर उसके जोबन की अभिलाषा को शांत कर उसके साथ नया रिश्ता कायम करें..


गौतम ने सपने में इतना सब देखा औऱ फिर उसकी नींद खुल गई.. उसने सपने के बारे में कुछ देर सोचा फिर उसे एक सामान्य सपना मानकर अपने ख्याल से निकाल दिया..
 
Update 31

सुबह 10:00 बजे नींद के आगोश में सोए गौतम की नींद दिन के 2:00 खुली.. गौतम ने जो सपना देखा था उसके बारे में काफी देर तक वो सोचता रहा कि कैसे उसे ऐसे अपने आ रहे है.. लेकिन फिर अपना ध्यान सपने से हक़ीक़त में लाता हुआ बेड से खड़ा हो गया... गौतम ने होटल में देखा तो लगभग सब घर जा चुके थे.. होटल में सिर्फ कुछ मेहमान लोग ही बचे थे. गौतम ने सुमन को फोन किया तो सुमन ने उसे घर आने के लिए कहा.. गौतम का सारा सामान सुमन अपने साथ घर ले जा चुकी थी बस एक शराब की बोतल यही पड़ी थी अभी तक.. और नींद में होने के कारण सुमन ने गौतम को जगाना जरूर नहीं समझा क्योंकि सुमन जानती थी कि गौतम रात भर का जगा हुआ है. सुमन से बात करके गौतम ने फोन रख दिया और फिर अपना मुंह धो कर होटल से घर के लिए निकल गया उसने देखा की यहां आज भी किसी ना किसी की शादी तैयारी चल रही थी..


गौतम जब घर पहुंचा तो उसने देखा कि ऋतु के विदाई की तैयारी चल रही है और घर पर कुछ खास मेहमानों के अलावा घर के लोग ही थे. गौतम अपने कमरे में जाकर नहाने लगा. जब गौतम बाथरूम से नहा कर निकाला तो उसके सामने चाय का कप हाथ में लिए गायत्री खड़ी थी गायत्री ने चाय का कप टेबल पर रखा और फिर गौतम के गाल को सलाहकार उसपर एक प्यारा सा चुंबन करती हुई बोली..
गायत्री - गूगु चाय पी ले और जल्दी से तैयार होकर नीचे आ जा.. तेरी दीदी की विदाई होने वाली है..
गौतम ने गायत्री की कमर में हाथ डालकर उसे अपने बिल्कुल करीब खींचते हुए गले से लगा लिया और दीवार से चिपक कर उसके होठों के बिल्कुल करीब अपने होंठ लाकर गायत्री से बेहद कामुक अंदाज में बोला..
गौतम - विदाई तो होती रहेगी नानी थोड़ी सी चुदाई करें?
गायत्री गौतम के होठों से अपने होंठ सटाती हुई बोली - अभी नहीं बेटा.. पिछली बार का दर्द अब तक बाकी है जब ठीक हो जाएगा तब कर लेना..

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गौतम ने कुछ पल गायत्री के होठों का चुम्मा ही था कि उसे किसी के आने की आहट सुनाई दी और वह गायत्री से दूर हटकर टेबल पर रखे चाय के कप को उठाकर चुस्कियां लेते हुए चाय पीने लगा और दरवाजे के बाहर से अंदर आते हुए उसे संजय दिखा जिसने आते ही गायत्री से कहा..
संजय गायत्री से - माँ चलो ना ऋतू को विदा करना है..
गायत्री - चल संजय मैं तो ग़ुगु को चाय देने आ गई थी..
संजय - ग़ुगु तू जल्दी नीचे आजा बेटा..
गौतम - ज़ी मामा ज़ी.. नहाने लग गया था मैं बस तैयार होकर आता हूँ..

गायत्री संजय के साथ नीचे चली गई थी और गौतम अपने कपड़े पहनने लगा था.. गौतम तैयार होकर जैसे ही नीचे आया उसने देखा कि हॉल में बहुत सारे लोग एकत्रित हो रखे थे और बीच में ऋतु में बैठे हुए थी राहुल के साथ. दोनों से मेहमान हंसी स्टोरी कर रहे थे और अपनी अपनी बातें एक दूसरे को बता रहे थे जब विदाई की बारी आई तो ऋतु के आंसू निकलने लगे और वह रोती हुई संजय औऱ गायत्री से लिपट गई..

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ऋतू तो फूट के रोने लगी और एक-एक करके सबसे मिलने लगी उसने सबसे पहले अपने पिता संजय फिर गायत्री फिर कोमल सुमन चेतन आरती और फिर ग़ुगु के गले लगते हुए रोना जारी रखा.
गौतम के गले लगकर रितु बहुत जोर से फूट-फूट कर रोने लगी जिस पर गौतम ने धीमी आवाज में ऋतु के कान में कहा.. दीदी इतना ड्रामा मत करो.. मैं जानता हूं आपको घंटा रोना नहीं आ रहा..
गौतम की बात सुनकर रितु रोना कम कर देती है मगर रोना बंद नहीं करती.. ऋतू आम लड़कियों की तरह ऐसा जता रही थी जैसे वह घर से विदा नहीं होना चाहती और हमेशा यही रहना चाहती है मगर गौतम को ऋतू की ये नाटक और ड्रामेबाजी अच्छे से समझ आ रही थी. सबके बार-बार समझाने पर भी रितु रोने का नाटक करने के राहुल के साथ विदा होने से इनकार कर कर रही थी और जाने से मना कर रही थी..

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घर के दरवाजे पर गाड़ी तैयार थी मगर ऋतू उसमे बैठने को तैयार नहीं थी उसने अब तक घर के हाल से कदम आगे नहीं बढ़ाया था और सब उसे बारी बारी से समझा कर थक चुके थे की बेटी लड़की को ससुराल जाना पड़ता है लड़की पराया धन होती है. जब ऋतू किसी के समझाने से नहीं समझी और अपना रोने धोने का नाटक जारी रखते हुए हाल में ही बैठ गई तो गौतम में रितु को अपनी गोद में उठा लिया और हाल से उठकर बाहर लाते हुए गाड़ी में बैठा दिया..

गौतम इमोशनल ड्रामा करते हुए ऋतू के बगल में बैठे हुए राहुल से कहा - जीजा जी ख्याल रखना मेरी बहन का.. फूलों की तरह कोमल नाजुक प्यारी है.. बहुत संस्कारी सुशील औऱ पवित्र भी.. कभी दिल मत तोडना मेरी बहन का..
राहुल - आप फ़िक्र मत कीजिये.. मैं ऋतू को खुश रखूँगा..

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गौतम इतना कहकर गाड़ी से दूर हो गया और फिर बारी-बारी से घर के लोग ऋतू से मिलने लगे और उसे समझने लगे की ससुराल में उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. इतना सब हो ही रहा था कि गौतम घर के गेट पर खड़ा हो गया.. औऱ अपने फ़ोन में पिंकी का कॉल आते देखकर ऊपर छत पर चला गया और पिंकी का कॉल उठाकर बोला..
गौतम - हेलो बुआ?
पिंकी - केसा है मेरा ग़ुगु?
गौतम - आपके बिना केसा हो सकता हूँ बुआ? कल कितने फ़ोन किये आपको.. पर आप फ़ोन बंद करके बैठी थी.. उस दिन कहा था ना शादी में आना है.. आपके बिना बोरिंग थी सादी..
पिंकी - सॉरी ग़ुगु.. वो फ्लाइट इतनी डिल्य हो गई की आना हो ही नहीं पाया.. फ़ोन भी चार्ज नहीं किया था मैंने.. अभी अभी घर पहुंची हूँ..
गौतम - कहाँ गई थी आप?
पिंकी - तेरे फूफा ज़ी के साथ लन्दन गई थी ग़ुगु.. तेरे लिए बहुत से गिफ्ट लाई हूँ.. अभी यही है ना?
गौतम - हाँ.. दीदी की विदाई का नाटक चल रहा है..
पिंकी हसते हुए - अच्छा वो सब छोड़ जल्दी मेरे पास आजा..
गौतम - एड्रेस पहले वाला ही है ना?
पिंकी - नहीं बाबू अब वहा नहीं रहते.. मैं तुझे व्हाट्सप्प करती हूँ अड्रेस.. तू जल्दी से आजा अपनी बुआ के पास.. मुझे तेरे प्यारे से होंठ चूमने है..
गौतम - आता हूँ बुआ..
पिंकी - बाय बाबू..
गौतम - बाय बुआ..

ऋतू की विदाई हो चुकी थी औऱ गौतम अपने कमरे में जूते पहन रहा था तभी सुमन अंदर आते हुए बोली - खाना खा ले ग़ुगु..
गौतम - होटल में खा लिया था माँ.. अब रात को ही खाऊंगा..
सुमन - कहीं जा रहा है..
गौतम - हाँ.. उस दिन आपने बुला लिया तो शहर अच्छे से घूम नहीं पाया था.. कल तो वैसे भी वापस घर चले जाएंगे तो आज बाकी का शहर घूम लेता हूँ..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम के सर को चूमकर - वापस आने में ज्यादा देर मत करना..
गौतम - I'll be back soon माँ..
सुमन - हम्म्म.. क्या ग़ुगु?
गौतम सुमन के गाल पर चूमा देकर - मैंने कहा मैं जल्दी आ जाऊंगा..
सुमन मुस्कुराते हुए - हाँ तो ऐसे बोल ना.. अंग्रेजी में क्या गिटर पीटर करता मेरी तो कुछ समझ नहीं आता..
गौतम - आपने ही बड़े स्कूल में डलवाया था याद है?
सुमन - हा हा तो क्या अपनी अंग्रेजी अपनी अनपढ़ माँ पर झाड़ेगा?
गौतम सुमन का हाथ पकड़ते हुए - अनपढ़ कैसे हुई आप.. पढ़ना लिखना तो अच्छे से आता है आपको.. टीवी देखकर सारे इंग्लिश के वर्ड भी सिख गई हो.. औऱ घर का सब काम भी कितनी अच्छे से करती हो.. आप तो भारतीय संस्कारी नारी का परफेक्ट एक्साम्प्ल हो..
सुमन गौतम के होंठों को उंगलियों से पकड़कर - अब इतनी भी तारीफ़ मत कर अपनी माँ की..
गौतम सुमन ऊँगलीयों को चुमकर - काश मैं आपकी तारीफ़ कर सकता माँ.. आपकी तारीफ़ के लायक़ शब्द हो नहीं बने दुनिया में..
सुमन हसते हुए - हट बदमाश.. चल अब जा.. मुझे भी बहुत काम है अभी..
गौतम प्यार से बच्चों जैसा फेस बनाकर - किस्सी तो दे दो माँ..
सुमन मुस्कुराती हुई गौतम के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसके होंठों से अपने होंठ मिलकर एक छोटा सा चुम्मा करती हुई गौतम से बोली - खुश? चल अब जाने दे..
सुमन चली जाती है औऱ गौतम भी घर से निकल जाता है..
200


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अरे अरे कहा घुसे चले आ रहे हो भाई? क्या काम है, किससे मिलना है?
गॉर्ड ने बँगले के गेट पर गौतम को रोककर कहा..
गौतम - ज़ी मुझे पिंकी बुआ से मिलना है..
बँगले के गेट पर खड़े दो गार्डो में से एक ने कहा - यहां कोई पिंकी नहीं रहती जाओ यहां से..
गौतम फ़ोन में एड्रेस देखकर - पर ये अड्रेस तो यही का है..
एक गार्ड ने एड्रेस देखकर कहा - एड्रेस तो यही का है भईया पर यहां कोई पिंकी नहीं रहती.. गलत अड्रेस भेजा है किसी ने आपको.. आप जाइये यहां से मालकिन बहुत गर्म मिज़ाज़ की है.. उन्होंने किसी अजनबी को देख लिया तो हमारी नौकरी खतरे में पड़ जायेगी..

गौतम पिंकी को फ़ोन लगाता हुआ - हेलो.. बुआ?
पिंकी बँगले के गेट के पास अंदर बने गार्डन में एक चेयर पर बैठी हुई कोई फेशन मैगज़ीन पढ़ रही थी की गौतम का फोन आने पर फोन उठती हुई बोली - हाँ बाबू..
गौतम - बुआ ये अड्रेस तो गलत है शायद.. गेट पर खड़े गार्ड बोल रहे है यहां कोई पिंकी नहीं रहती है..
पिंकी गुस्से में मैगज़ीन सामने रखी टेबल पर फेंककर - तू रुक वही.. मैं आती हूँ..
गौतम को तुरंत ही रूपा का फ़ोन आ जाता है औऱ वो रूपा से बात करते हुए गेट से दूर चला जाता है..
पिंकी गुस्से से तिलमिलती हुई गार्डन से गुजरते हुए बंगले के गेट पर पहुंची..

पिंकी को देखकर दोनों गॉड सर झुकाकर एक साथ बोले - नमस्ते मेम साब..
पिंकी गुस्से में - तुम दोनों की हिम्मत कैसे हुई मेरे भतीजे को गेट पर रोकने की? इतनी भी तमीज नहीं है कि किसे रोकना है औऱ किसे नहीं? ये सब भी सीखना पड़ेगा तुम लोगों को..
एक गार्ड सर झुका कर - माफ़ करना मेमसाब.. हम नहीं जानते थे भईया ज़ी कौन है.. गलती हो गई हमसे..
पीछे से पिंकी के पति फ़कीरचंद आता हुआ..
फ़कीरचंद - क्या हुआ प्रमिला.. क्यों चिल्ला रही हो इन दोनों बेचारो पर..
पिंकी गुस्से में - चिल्लाऊ नहीं तो क्या करू.. पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है औऱ उसे अंदर आने से रोक दिया दोनों ने.. इनको अभी नौकरी से निकालती हूँ मैं..
दूसरा गार्ड सर झुका कर - मालिक.. हमें माफ़ कर दो.. हमें गलतफेहमी हो गई थी.. हमें पता नहीं था प्रमिला मेमसाहेब के घर का नाम पिंकी है..
फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए - अरे छोडो ना प्रमिला.. गलतफहमी हो जाती है.. इंसान है.. औऱ ग़ुगु आया है? कहा है वो?
प्रमिला गेट के बाहर आकर देखती है तो गौतम थोड़ी दूर पर रूपा से फ़ोन पर बात कर रहा होता है..
पिंकी आवाज लगा कर - ग़ुगु..
गौतम पिंकी को देखकर रूपा से बाद में बात करने की बात बोलकर फ़ोन रख देता है औऱ वापस आ जाता है..
फ़कीरचंद मुस्कुराते हुए - कितना बड़ा हो गया है ग़ुगु? बिलकुल हीरो लगने लगा है..
पिंकी गौतम को जोर से गले लगाती हुई - लगने क्या लगा है.. है ही हीरो मेरा ग़ुगु..
गौतम - बुआ आराम से..
फ़कीर चंद हसते हुए - अब छोड़ भी दो अपने भतीजे को प्रमिला..
प्रमिला - सॉरी तुझे वेट करना पड़ा गेट पर..
गौतम - कोई बात नहीं बुआ.. ये तो बहुत छोटी सी बात है..
पिंकी - पैर वेर छूना नहीं सिखाया भाभी ने तुझे..
गौतम मुस्कुराते पिंकी के पैर छूकर - अच्छा लो..
पिंकी - अरे मेरे नहीं अपने फूफाज़ी के.. पागल बच्चा.. चल अंदर.. तेरे लिए तेरी मनपसंद चीज बनाई है..
फ़कीरचंद - अच्छा तभी आज अपने हाथों खाना बनाया जा रहा था..
पिंकी - तो ना बनाउ? पहली बार मेरा ग़ुगु मेरे पास आया है..
फ़कीरचंद - अच्छा तुम बुआ भतीजे बात करो मैं जरा बाहर हो आता हूँ..
पिंकी - अब आप कहा जा रहे हो?
फ़कीरचंद - फैक्ट्री हो आता हूँ.. मुकेश को कुछ कागजो पर दस्तखत चाहिए थे..
पिंकी - तो उसे ही यहां बुलवा लिया होता.. आपको मैनेजर के पास जाने की क्या जरुरत?
फ़कीरचंद - वो तो आ रहा था मैंने ही मना कर दिया.. सोचा थोड़ा टहल भी आऊंगा.. बहुत समय हो गया फैक्ट्री गए हुए.. आते हुए कारखाने की तरफ भी हो आऊंगा..
पिंकी - दवाइया साथ लेकर जाना.. औऱ ड्राइवर से कहना गाडी धीरे चलाये..
फ़कीरचंद - ठीक है..
गौतम पानी पीते हुए - दवाइया कैसी?
पिंकी - मधुमय है तेरे फूफाजी को.. तू चल बैठ टेबल पर.. मैं अपने हाथ से खाना खिलाऊंगी मेरे बाबू को आज..
गौतम - खाना तो खा चूका हूँ बुआ..
पिंकी - ठीक पर खीर तो खानी पड़ेगी.. पसंद है ना तुझे? (पिंकी आवाज लगाकर) कम्मो.. ख़िर लेकर आना जरा.. एक औरत ख़िर की प्याली लेकर आती है जिसे पिंकी लेकर गौतम के बगल में डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसे खिलाने लगती है..
गौतम ख़िर खा कर - बस बुआ.. औऱ नहीं..
पिंकी - अच्छा.. ये बता भईया भी आये है शादी में?
गौतम मुंह साफ करता हुआ - नहीं बुआ.. उनको कहा फुर्सत.. मैं भी नहीं आने वाला था मगर माँ ने कसम खिला दी औऱ ले आई..
पिंकी गौतम को ऊपर अपने कमरे में लेजाती हुई - अच्छा किया भाभी.. वरना तू मुझसे मिलने कैसे आता?
गौतम - वैसे बुआ उस दिन फूफाजी को देखकर लगा नहीं था इतने अमीर होंगे वो..
पिंकी कमरे का दरवाजा लगाकर मुस्कुराते हुए - सही हाथ मारा है ना तेरी बुआ ने?
गौतम - ऐसे क्यों बोल रही हो बुआ.. आप कितना ख़याल रखती हो फूफाजी का.. उनको आपका शुक्रगुजार रहना चाहिए..
पिंकी अपनी साडी उतारते हुए - शुक्रगुजार तो है ही.. इसलिए मेरे नाम पर ये बांग्ला ख़रीदा है उन्होंने औऱ कुछ दिनों में दोनों फैक्ट्री औऱ कारखने भी मेरे नाम करने वाले है..
गौतम मुस्कुराते हुए - वो तो करना ही था.. आगे पीछे है भी कौन फूफाजी के आपके अलावा.. सही खेल गई बुआ आप तो..
पिंकी हसती हुई अपनी साडी कमरे में रखे सोफे पर पटककर बेड पर गौतम के पास आती हुई - मान गया ना अपनी बुआ को? है ना मेरा शातिर दिमाग.. पहली मुलाक़ात में ऐसा फसाया की अब तक फसा रखा है..
गौतम - वो तो है.. अच्छा लन्दन केसा है? सिर्फ तस्वीरों में देखा है मैंने.. जैसा फिल्मो में दीखता है वैसा ही है?
पिंकी गौतम के ऊपर आती हुई - काश में तुझे वहा ले जा पाती.. भाभी को फ़ोन किया था पर तेरी माँ तो जैसे मेरे पिछले जन्म की बैरी है.. मेरे कहते ही बोलने लगी.. ग़ुगु वहा जा कर क्या करेगा? तू अकेले ही चली जा.. ग़ुगु के इम्तिहान भी आने वाले है.. फलाना ढिमकाना.. औऱ एक हफ्ते से तुझे यहां शादी में लाकर बैठी है.. अब भाभी को तेरे इम्तिहान की परवाह नहीं है.. चालक चुड़ैल कहीं की..
गौतम - बुआ माँ को चुड़ैल मत बोलो..
पिंकी - क्यों तुझे बहुत तकलीफ होती है.. वो जब मेरे बारे में इतना कुछ कहती है तब तुझे तकलीफ नहीं होती?
गौतम - जब माँ आपके बारे में कुछ गलत बोलती है तो मैं उनको भी मना करता हूँ चाहो तो पूछ लो.. मुझसे तो आप औऱ माँ दोनों एक जैसा प्यार करती हो.. मैं आप दोनों के लिए कुछ गलत नहीं सुन सकता..
पिंकी - अच्छा छोड़.. मुझे अब मेरी किस्सी चाहिए..
गौतम पिंकी को चूमते हुए - ठीक है बुआ..
पिंकी चूमते हुए - बहुत सॉफ्ट लिप्स है तेरे बाबू..

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गौतम - आपके भी तो कितने प्यारे लिप्स है बुआ मन करता है खा जाऊ..
पिंकी जीभ से चाटते हुए - खा जा ना बाबू.. बुआ मना थोड़ी करेंगी अपने ग़ुगु को..
गौतम चूमता हुआ - बहुत miss किया बुआ आपको..
पिंकी गौतम की टीशर्ट उतारकर - ये सब क्या है ग़ुगु.. तेरे गले पर सीने पर इतने निशान किसने किये?
गौतम मुस्कुराते हुए - ये शादी में मिले है बुआ.. एक लड़की ने बहुत तंग किया मुझे..
पिंकी मुस्कुराते हुए - क्या नाम था उसका?
गौतम - सिमरन..
नाम लेटे ही सिमरन का फ़ोन गौतम के फ़ोन पर आ गया जिसे देखकर गौतम हसता हुआ बोला - देखो ना बुआ.. शैतान का नाम लिया शैतान हाज़िर..
पिंकी मुस्कुराते हुए - उठा ना.. बात कर क्या कहती है..
गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..
सिमरन - क्या कर रहे हो?
गौतम - तुम्हे याद कर रहा था..
सिमरन - झूठ.. बड़े आये तुम मुझे याद करने वाले.. कल तो कितना भाव खा रहे थे..
गौतम - आखिर में प्यार भी तो किया था भूल गई?
सिमरन - कैसे भूल सकती हूँ रसगुल्ले.. अब तक चुत में आतंक मचा हुआ है.. सुबह तुझे याद करके बहुत गालिया दी मैंने..
गौतम हसते हुए - खतरों से खेलने का शोक तो तुम्हे ही था.. वापस कब मिलोगी?
सिमरन - मिलना चाहो तो आज रात को मिल सकती हूँ.. पर याद रखना सुरंग में नहीं घुसने दूंगी..
गौतम - तेरा बाप मान जाएगा? तूने तो कहा था बहुत स्ट्रिक्ट है वो..
सिमरन - वो सब मुझपर छोड़ दो.. सिटी मॉल में मिलना आठ बजे.. मूवी देखेंगे साथ.. लेट मत करना रसगुल्ले वरना घर से उठवा लुंगी..
गौतम हसते हुए - उठवाने की जरुरत नहीं पड़ेगी मैं पहुंच जाऊँगा.. फ़ोन कट हो जाता है..
पिंकी गौतम को छेड़ती हुई - रसगुल्ले.. हम्म्म..
गौतम मुस्कुराते हुए - बुआ आप भी ना..
पिंकी - अच्छा फोटो तो दिखा सिमरन की.. आवाज तो बहुत प्यारी है.
गौतम फोटो दिखाकर - लो.. कैसी है..
पिंकी - है तो मस्त.. चुचे औऱ चुत्तड़ भी अच्छे है फेस भी बड़ा प्यारा है.. पहली बार कैसे चोदा तूने इसको?
गौतम अपनी गांड मराई याद करते हुए - मैंने कहा चोदा बुआ.. यही मुझे चोद गई..
पिंकी हसते हुए - उसका क्या कसूर? तू है ही इतना चिकना..
गौतम - आप भी ना बुआ.. अब जल्दी से अपना ये घाघरा उठाओ बहुत मन कर रहा है आपकी गुफा में घुसने का..
पिंकी पेटीकोट कमर तक ऊपर करके - घाघरा नहीं पेटीकोट बोलते है इसे बाबू..
गौतम जीन्स खोलकर - पेंटी तो उतारो..
पिंकी गौतम के लंड को पकड़कर मसलते हुए - उतारने की क्या जरुरत है बाबू.. साइड हटा के घुसा दे.. (पिंकी पेंटी को एक हाथ से साइड करके दूसरे हाथ से गौतम का लंड अपनी चुत में घुसाती हुई)
गौतम पूरा लंड चुत में पेलकर - आह्ह.. बुआ अब मिली है असली जन्नत...

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पिंकी सिसकती हुए - आह्ह... बाबू.. बहुत याद किया इसे मैंने..
गौतम अपने दोनों हाथ से पिंकी के ब्लाउज को पकड़कर एक झटके में पूरा फाड़ देता है औऱ उसकी ब्रा ऊपर करके पिंकी के बूब्स चूसते हुए पिंकी को धीरे धीरे चोदने लगता है..

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पिंकी - ग़ुगु चूसके खाली कर अपनी बुआ के बोबो को बेटा.. आहहह...चोद बुआ को अच्छे से.. रांड समझके चोद मुझे बाबू.. मार झटके मेरी चुत में..
गौतम चोदने की स्पीड बढ़ाते हुए - लो बुआ सम्भालो.. अपने ग़ुगु के लंड को..
पिंकी - आह्ह.. ग़ुगु.. आह्ह... चोद मुझे.. आह्ह.. बहुत मज़ा आ रहा है बाबू.. आह्ह..
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गौतम मिशनरी में चोदने के बाद पिंकी को घोड़ी बनाता हुआ चोदने लगता है - कितनी मोटी गांड है बुआ आपकी.. फूफाजी ने तो नहीं की चोदकर इतनी बड़ी.. कौन है बुआ आपका आशिक आवारा?
पिंकी आह करती हुई - बाबू तूने ही पेला था पिछली बार.. तब से किसीके साथ नहीं किया..
गौतम बाल पकड़ कर पीछे से झटके मारता हुआ - चल मेरी बुआ टूक टुक टुक.. चल मेरी बुआ टुक टुक टुक..
पिंकी - अहह.. अहह... अहह..

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गौतम बाल छोड़कर पिंकी के दोनों हाथ पकड़ कर पीछे से चोदने लगता है - बुआ गांड कब दोगी मुझे?

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पिंकी - बड़ा है तेरा ग़ुगु.. चुत में दर्द कर देता है गांड का पता नहीं क्या हाल करेगा..
गौतम पिंकी को उठाकर अपनी गोद में लेलेता है औऱ चोदने लगता है - तो क्या मैं आपकी गांड से वंचित रह जाऊँगा बुआ?

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पिंकी चुदवाते हुए आहे भरकर - इस बार चुत से काम चला ले मेरे बाबू.. अगली बार पक्का गांड दे दूंगी.. पिंकी झड़ चुकी थी औऱ अब झड़ने के साथ अब मूतने भी लगी थी जिसमे उसे शर्म आ रही थी मगर गौतम ने लंड निकालकर अपना मुंह पिंकी चुत पर लगा दिया औऱ उसकी चुत से निकलते मूत को पिने लगा.. पिंकी ये देखकर हैरान औऱ रोमांचित हो उठी थी औऱ बार बार गौतम को अपना मूत पिने से रोकने की कोशिश कर रही थी मगर गौतम ने पिंकी की आखिरी मूत की बून्द तक अपने मुंह में लेकर पी ली..

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मूत पिने के बाद गौतम पिंकी की चुत चाटने लगा औऱ पिंकी गौतम के बाल पकड़ कर फिर से काम के दारिया में गोते खाने लगी. पिंकी ने अपनी चुत चटवाने का आनंद भोगते हुए गौतम का सर बहुत जोर से अपनी चुत पर दबा दिया जिससे गौतम की सांस घुटने लगी मगर गौतम ने जैसे तैसे अपने आप को पिंकी के हाथ से छुड़वा कर पिंकी दोनों टाँगे हाथों से उठा कर उसकी चुत चाटने लगा..
गौतम चुत चाटने के बाद पिंकी को उठाकर दिवार के सहारे खड़ा करते हुए उसी तरह छिपकली बनाकर चोदने लगा जैसे उसने सुबह शबनम को चोदा था..

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पिंकी चुदवाते हुए कामुक सिसकियाँ लेकर - थोड़ा धीरे ग़ुगु.. तेरी बुआ को दर्द हो रहा है.. अहह...
गौतम थोड़ी देर छिपकली पोज़ में चोदने के बाद पिंकी को पलट कर अपनी तरफ घुमा लेता है औऱ दिवार से सटाकर पिंकी की दोनों टाँगे उठाकर उसे चोदने लगता है.

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पिंकी गौतम के गले में दोनों हाथ डालकर उसे चूमते हुए सिस्कारिया भरके चुदवाती रहती है. वो वापस झड़ने वाली थी औऱ अब गौतम का भी निकलने वाला था..
गौतम - बुआ होने वाला है..
पिंकी - मेरा भी वापस होने वाला है बाबू.. मुझे बेड पर लेटा दे..
गौतम पिंकी को अपने ऊपर में लेटा कर पेलने लगता है औऱ कुछ देर बाद पिंकी के साथ ही झड़ते हुए पिंकी की चुत में अपना वीर्य भर देता है..

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पिंकी औऱ गौतम एक दूसरे की शकल देखते हुए मुस्कुराने लगते है पिंकी अपने फटे हुए ब्लाउज से गौतम के चेहरे पर आ रहा पसीना पोछती है..
पिंकी थोड़ी देर उसी तरह लेटी रहकर गौतम से बात करके बोलती है - अब इस शैतान को तो मेरी गुफा से बाहर निकाल लो..
गौतम - रहने दो ना बुआ थोड़ी देर गुफा के अंदर.. बेचारा बहुत दिनों बाद अपनी बुआ से मिला है..
पिंकी पलटकर- अच्छा ठीक है..
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गौतम पिंकी के ऊपर ही उसकी चुत में लंड घुसा के हल्का हल्का झटका मारते हुए लेटा रहता है औऱ पिंकी गौतम के होंठों को चूमते हुए उसके बालों में उंगलियां फिराती हुई गौतम के नीचे लेटी रहती है.. कुछ देर चूमने के बाद गौतम की आँख लग जाती है औऱ पिंकी भी अपने ऊपर लेटे हुए गौतम को सोने देती है करीब एक घंटे बाद जब गौतम की आँख खुलती है तो वो देखता है की पिंकी अभी भी उसके नीचे लेटी हुई है औऱ उसका लंड अभी भी पिंकी की चुत में घुसा हुआ है.
गौतम की नींद टूटने पर पिंकी - उठ गया मेरा बाबू?
गौतम - टाइम क्या हुआ है बुआ?
पिंकी - सात बजे है..
गौतम चुत से लंड निकाल कर खड़ा होता हुआ - जाना है बुआ..
पिंकी मुस्कुराते हुए खड़ी होकर - सिमरन के पास?
गौतम कपडे पहनते हुए - हाँ..
पिंकी पास में पड़े अपने पर्स से एक कार्ड निकाल कर गौतम की जीन्स में रखती हुई बोली - 2002..
गौतम एटीएम कार्ड देखकर वापस देता हुआ - बुआ मुझे नहीं चाहिए.. आप इसे अपने पास रखो..
पिंकी गौतम के होंठ चूमकर एटीएम वापस उसकी जेब में डालती हुई - मैंने पूछा नहीं है तुझसे लेना है या नहीं.. चुपचाप रख ले.. कुछ भी चाहिए हो खरीद लेना.. शर्माना मत.. मैंरे पास औऱ भी दो है..
गौतम पिंकी का बोबा पकड़कर उसके होंठ चूमते हुए - आई लव यू बुआ..
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पिंकी - लव यू टू मेरा बच्चा...
गौतम - अच्छा बुआ अब चलता हूँ.. जल्दी मिलूंगा आपसे..
पिंकी ब्रा औऱ पेंटी के बाद nighty पहनते हुए - ग़ुगु रुक..
गौतम - हाँ बुआ..
पिंकी एक बेग निकालकर - इसे लेजा..
गौतम - इसमें क्या है..
पिंकी - कुछ कपडे है घड़ी परफ्यूम औऱ शूज भी तेरे लिए..
गौतम - बुआ इतना सब लाने की क्या जरुरत है हर बार..
पिंकी - क्यों जरुरत नहीं है.. तेरे सिवा मेरा है ही कौन जिसके लिए मैं कुछ खरीदू.. आगे जाके इन सब चीज़ो का वारिस तुझे ही तो बनना है.. ये तुझे ही तो संभालना है..
गौतम मुस्कुराते हुए पिंकी को बाहों में भरके - मुझे पैसो में कोई दिलचस्पी नहीं है बुआ, चुत में है... कम पैसो से भी मेरा काम चल जाता है.. पैरों में जूते जॉर्डन के हो या कैंपस के मुझे फर्क नहीं पड़ता..
पिंकी गौतम का चेहरा अपने हाथों में लेकर - पर मुझे फर्क पड़ता है ग़ुगु.. अपनी पसंद की चीज के लिए जैसे मैं तरसी हूँ वैसे मैं तुझे तरसते नहीं देखना चाहती.. मेरे पास जो कुछ है सब तेरा है.. तू मेरा सबकुछ है ग़ुगु.. तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. किसी की जान भी ले सकती हूँ..
गौतम - माँ सच कहती है बुआ.. आप ना सनकी हो..
पिंकी चूमते हुए - ऐसा सोचती है मेरे बारे में तेरी माँ..
गौतम - बुआ आप अब यूँही मुझे पकड़े रहोगी तो मैं जा नहीं पाऊंगा..
पिंकी गौतम अपनी बाहों से आजाद करती हुई - चल जा.. मज़े कर अपनी उस गर्लफ्रेंड के साथ.. मगर कंडोम लगा कर.. नहीं तो इतनी सी उम्र में बाप बन जाएगा..
गौतम पिंकी के सर औऱ गाल को चूमते हुए - बाय मेरी प्यारी बुआ..
पिंकी गौतम के होंठों को डांत से खींचकर चूमती हुई -
बाय बच्चा..

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गौतम पिंकी के पास से सिटी मॉल की तरफ चल देता औऱ कार पार्किंग में लगा कर मॉल के बाहर बनी एक चाय की टपरी पर बैठते हुए सिमरन को फ़ोन करता है..
गौतम - कहा रह गई यार..
सिमरन - आ रही हूँ बाबा.. जरा भी सब्र नहीं है तुम्हे तो.. अभी तो सिर्फ पौने आठ बजे है.. मूवी शुरू होने में डेढ़ घंटा है..
गौतम - मतलब अभी घर पर ही हो तुम.. ठीक है आ जाओ अपनी मर्ज़ी से.. मैं इंतजार कर लूंगा..
सिमरन - अच्छा सुनो भईया भी साथ आ रहे है उनकी भी टिकट बुक कर देना..
गौतम - वो कबाब में हड्डी बनने क्यों आ रहा है?
सिमरन - बाबा.. मम्मी ने अकेले जाने से मना किया इसलिए भईया को लाना पड़ेगा.. तुम उनकी फ़िक्र मत करो.. भईया थोड़ा दूर बैठ जाएंगे..
गौतम - ठीक है सिम्मी..
सिम्मी - क्या पहन के आउ रसगुल्ले?

गौतम - कुछ भी पहन के आजा मेरी रसमलाई.. होना तो नंगा ही है तुझे.. चल बाय.. मैं वेट कर रहा हूँ..
 
Update 32

गौतम सिटी मॉल के बाहर इधर-उधर घूम रहा था उसने सिटी मॉल के पास ही सडक पर एक चाय की टपरी के पीछे एक औरत को उदास बैठे हुए देखा तो गौतम के मन में उसके पास जाकर उसे औरत से बात करने की और उसकी उदासी का कारण जानने की इच्छा हुई..

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औरत की हालत ऐसी थी कि जैसे मानो अब वह रोने ही वाली हो.. औरत की उदास आंखों को देखकर गौतम से रहा ना गया और वह चाय की टपरी के पीछे पड़े हुए खाली डिब्बो में से एक डिब्बे पर बैठी हुई औरत के करीब आकर उसके पास वाले डिब्बे पर बैठकर उसे औरत को देखा हुआ बोला..
गौतम - क्या हुआ आंटी?
औरत उदास आँखों से गौतम को देखकर - हम्म्म...

औरत इतनी उदास और अपने आप में खोई हुई अपने ख्यालों में उलझी हुई इतनी हताश और निराशा थी कि उसे गौतम के अपने पास आकर बैठने का अंदाजा ही नहीं हुआ और ना ही उसे पता चला कि गौतम ने अभी-अभी उससे क्या कहा है. गौतम के सवाल पर वह सिर्फ हम्म्म करके ही रह गई..
औरत अपनी उदास आंखों से एक नजर को गौतम को देखकर फिर से नीचे जमीन की ओर देखने लगी.. तभी गौतम ने वापस अपने सवाल को अलग अंदाज़ में दोहराते हुए कहा..
गौतम - आंटी आप ठीक तो है..
इस बार गौतम का सवाल औरत के कान तक ठीक-ठाक पहुंच गया और औरत गौतम की तरफ देखती हुई उसी निराशा और हताशा के साथ बोली..
औरत - हम्म्म..
गौतम औरत की मनोदशा समझ रहा था और वह जानता था कि उस औरत को कुछ ना कुछ समस्या जरूर है.. मगर वह औरत उस समस्या को किसी से बयां नहीं करना चाहती गौतम ने वापस औरत की तरफ देखते हुए कहा..
गौतम - आंटी आप सच में ठीक है? मैं बहुत देर से आपको यूं ही गुमसुम उदास और अकेले बैठे हुए देख रहा हूं.. आपको कोई प्रॉब्लम है तो आप मुझसे शेयर कर सकते हो..
गौतम के मासूम चेहरे और अपनेपन से भरी हुइ इन बातों को देख सुनकर औरत ने मुस्कुराते हुए अपनी आंखों की नमी पोछते हुए अपने हाथ से गौतम के गाल को सहलाया और जवाब दिया..
औरत - मैं ठीक हूँ बेटा..
गौतम - आप सच में ठीक हो?
औरत इस बार हल्का सा मुस्कुराते हुए - हम्म्म.. मैं सच में ठीक हूँ..

गौतम और उस औरत के अलावा चाय की टपरी के पीछे पड़े हुए दिन खाली डब्बे पर कोई और बैठा हुआ नहीं था जो उन दोनों को देखा और सुन सके. गौतम ने वापस इस अपनेपन से औरत से सवाल किया..
गौतम - आप किसी का इंतज़ार कर रही हो.. कोई आने वाला है?
औरतों में गौतम के सवाल पर भावुक होकर अपनी आंखों से एक बार फिर नामी पहुंचते हुए कहा..
औरत - आने वाला था बेटा.. पर अब नहीं आएगा..
गौतम मुस्कुराते हुए - लगता है आपकी हस्बैंड से लड़ाई हुई है..
औरत गौतम को देखकर - मैं शादीशुदा नहीं हूँ बेटा..
गौतम - अच्छा तो बॉयफ्रेंड था आपका?
औरत उदासी से - हम्म्म..
गौतम - तभी मैं सोचु.. आप इस तरह क्यों उदास है.. लड़ाई हुई है ना?
औरत ना में सर हिला देती है औऱ कहती है - अब उसे मेरे साथ नहीं रहना.. कोई औऱ मिल गई होगी इसलिए मुझे छोड़ दिया..

यह कहते हुए औरत की आंखों में आंसू आ जाते हैं जिसे गौतम अपने रुमाल से पोछता हुआ औरत से कहता है..
गौतम - आंटी आप फिक्र मत करो.. जो बुरा करता है उसके साथ बुरा ही होता है.. देखना कर्मा उसे ऐसा रुलाएगा कि वह याद रखेगा..
औरत इस बार गौतम को देखकर मुस्कुराती हुई बोली - बहुत प्यारी बातें करते हो तुम.. नाम क्या है तुम्हारा?
गौतम - मेरा नाम गौतम है आंटी.. आपका..
औरत गौतम के गाल पर हाथ फेरते हुए बोली - पूनम..
गौतम - बहुत प्यारा नाम है आंटी आपका..
पूनम मुस्कुराते हुए - thanks बेटा..

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गौतम - आप मुझे उस आदमी का नम्बर दे सकती हो.. मैं सबक सीखा दूंगा उसे.. इतनी खूबसूरत औरत के साथ इतना गलत वो कैसे कर सकता है?
पूनम की उदासी गौतम की बातों से कम हो रही थी और वह बार-बार गौतम के चेहरे को देखकर अपने हाथ से गौतम के गाल को सहलाती हुई गौतम के मासूमियत भरे सवाल का जवाब दे रही थी..
पूनम - गलती मेरी थी बेटा.. खुद 45 साल की होकर एक 35 साल के आदमी से प्यार करने लगी थी. सोचा था एकदिन शादी करके साथ रहेंगे मगर मुझे क्या पता था उस आदमी का मकसद कुछ और था.. 2 साल प्यार के झूठे वादे करने के बाद जब उसका मन मुझसे भर गया तो वह मुझे छोड़ कर चला गया..

इस बार पूनम की बात सुनकर गौतम ने उसे कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप इस तरह बैठा रहा.. पूनम की आंख एक बार फिर से नम हो गई थी जिसे गौतम ने एक बार फिर अपने रुमाल से साफ कर दिया और अपना एक हाथ पूनम के कंधे पर रख कर कन्धा सहलाता हुआ बोला..
गौतम - आंटी पता है सबसे ज्यादा दुख दर्द इंसान को कोनसी चीज देती है..
पूनम यह देखकर हैरान थी की कैसे उससे आधी उम्र का लड़का बिना उसकी इज़ाज़त उसके कंधे पर इतनी आसानी से हाथ रखकर उससे कोई सवाल पूछ रहा है.. गौतम की बातों में आत्मविश्वास था और उसकी बॉडी लैंग्वेज उसके बात में विश्वास को झलका रही थी.. पूनम थोड़ी देर चुप रहकर गौतम की तरफ देखकर बोली..
पूनम - कोनसी?
गौतम पूनम की आँखों में देखता हुआ - उम्मीद.. जो हम किसी से लगा बैठते है.. हम भूल जाते हैं कि इंसान की फितरत में छलकपट भरा हुआ है.. आपने उस इंसान से शादी की उम्मीद लगाईं.. भरोसा किया यही आपके दुखो का करण है.. मेरी सलाह मानो तो फिर कभी किसी पर भरोसा मत करना.. ना ही कोई उम्मीद किसी से लगाना..

पूनम गौतम को देखती हुई - अकेली औरत का बड़े शहर में रहना आसान नहीं है बेटा.. हम जब अकेले घर से निकलते हैं और रात को जब अकेले घर आते हैं तो रास्ते में कहीं निगाहें हमें इस तरह से देखती है जिस तरह हम किसी अलग दुनिया में रहते हैं.. सैकड़ो लोग 1000 उल्टी सीधी बातें करते हैं.. सही गलत लांछन लगते हैं.. अकेली औरत का कम कमाई में इतने बड़े शहर में अकेले जीना बहुत मुश्किल है.. उसे किसी न किसी का सहारा चाहिए ही होता है..
गौतम - कॉफ़ी पीती हो आंटी?
गौतम के इस सवाल पर पूनम हैरानी से - हम्म्म.. क्यों..
गौतम पूनम का हाथ पकड़कर - चलो मेरे साथ..

गौतम ने पूनम की इजाजत लिये बिना ही उसका हाथ पकड़ते हुए उसे खड़ा कर लिया था और अपने साथ सड़क क्रॉस करके दूसरी तरफ बने एक कॉफ़ी कैफ़े में ले आया था.. गौतम जानता था कि इस वक्त पूनम की हालत मृगतृष्णा में पड़ी हुई हिरनी की सी है. पूनम 45 साल की थी मगर एक 20 साल के लड़के के साथ इस तरह जा रही थी जैसे मेले में कोई मां-बाप अपने बच्चों को हाथ पकड़ कर ले जाता है..

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गौतम ने कैफे का दरवाजा खोलते हुए अंदर प्रवेश किया और पीछे-पीछे हाथ पकड़ कर पूनम को भी ले आया. कैफे के अंदर पुराने गांव जैसी झुग्गियां टाइप बैठने की व्यवस्था थी जो इस तरह बनाई गई थी कि वहां बैठने वालों को फुल प्राइवेसी मिले.. अक्सर यहां लव बर्ड्स आते थे..
गौतम ने एक केबिननुमा झुग्गी मैं बैठते हुए अपने पास ही पूनम को बैठा दिया.. और वेटर के आते ही उसे दो काफी का ऑर्डर दे दिया..
पूनम हैरानी औऱ सवालों भरी नज़रो से गौतम को देख रही थी की गौतम बोला..
गौतम - देखो आंटी में तुम्हारे अकेलेपन का तो कुछ नहीं कर सकता.. मगर तुम्हारे लिए इतना जरूर कर सकता हूं कि तुम्हे एक अच्छी जॉब दिलवा सकूं.. जिससे तुम्हें शहर में रहने में कोई परेशानी नहीं होगी..

पूनम ये देखकर बिल्कुल हैरान थी की कैसे उसकी आधी उम्र का लड़का उसे बच्चों की तरह समझा रहा है और अब वह आप की जगह तुम पर आ चुका है.. गौतम की इन बातों से हालांकि पूनम को कोई एतराज नहीं था ना ही उसे गौतम के मुंह से ये सब सुनने में कोई परेशानी थी. वह बस यह देखकर हैरान थी कि गौतम कितना आत्मविश्वास से भरा हुआ है और उसके मुकाबले में पूनम कितनी खोखली और डरी हुई औरत है.. उसे जीने के लिए सहारो की जरूरत पड़ रही है.. पूनम ने गौतम को देखकर कहा..
पूनम - तुम मुझे अच्छी जॉब दिलवा सकते हो..
गौतम - कोशिश कर सकता हूं.. उम्मीद तो है कि मिल जाएगी.. रुको मैं कॉल करता हूं.. अभी क्या करती हो तुम?
पूनम - मैं यही सामने मॉल में टॉय शॉप में जॉब करती हूँ.. सुबह से शाम तक यही सड़ना पड़ता है औऱ पैसे सिर्फ 14 हज़ार कुछ..

गौतम चेतन को कॉल करता है औऱ फ़ोन स्पीकर पर डालकर सामने टेबल पर रख देता है - हेलो चिटू भईया?
चेतन - हाँ ग़ुगु..
गौतम - आप कल कह रहे थे ना.. नई दूकान के लिए स्टाफ की जरुरत है.
चेतन - हाँ ग़ुगु.. तू संभालेगा दूकान?
गौतम - मुझसे कहाँ काम होता है.. आप तो जानते हो मैं कितना आलसी औऱ कामचोर हूँ.. आपकी तरह सुबह से शाम तक बैठना मेरे बुते के बाहर की बात है.. मेरी एक फ्रेंड है उसे जॉब की need है..
चेतन - ठीक है ग़ुगु.. कल सोहन काका के पास भेज दे अपनी फ्रेंड को.. मैं उनको फ़ोन कर दूंगा वो 3 में से किसी ना किसी दूकान में जॉब दिलवा देंगे..
गौतम - भईया.. सेलेरी थोड़ी ठीक रखना.. जरुरत में है अभी..
चेतन - ठीक है ग़ुगु मैं बोल दूंगा सोहन काका को.. 30-35 तक दिलवा दूंगा..
गौतम - बाय भईया...
चेतन - तू कब तक घर आएगा? बुआ पूछ रही थी..
गौतम - भईया 9.15 का शो है मूवी देखने आया हूँ लेट हो जाऊँगा..
चेतन - ठीक है चल.. एन्जॉय कर..

गौतम पूनम से - खुश?
पूनम मुस्कुराते हुए - हम्म्म.. तुम बहुत अच्छे हो.. पहली मुलाक़ात कोई किसी के लिए इतना कुछ नहीं करता..
गौतम कंधे पर हाथ रखकर कन्धा सहलाते हुए - अब आप उस आदमी को भूल जाओ औऱ आगे का सोच कर जिओ..
पूनम मुस्कुराते हुए - उम्र क्या तुम्हारी..
गौतम - क्यों बॉयफ्रेंड बनाना है? आई ऍम 18 प्लस.. अगर बनाना है तो आई ऍम रेडी...
पूनम हसते हुए - कितनी प्यारी बातें करते हो..
गौतम पूनम का कन्धा पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए - प्यार भी बहुत प्यार से करता हूँ.. ट्राय करना हो बताना..
इतने में वेटर कॉफ़ी ले आता है.. औऱ टेबल पर रख देता है..
गौतम - कुछ खाना है?
पूनम शर्माती हुई - नहीं..
गौतम वेटर से - एक पिज़्ज़ा.. लार्ज़..
वेटर चला जाता है गौतम कॉफ़ी का सीप लेकर पूनम से भी पिने को कहता है..
पूनम - पिज़्ज़ा क्यों मंगवाया मुझे भूक नहीं है..
गौतम पूनम के पेट पर हाथ रखकर पेट दबाते हुए कहता है - भूक कैसे नहीं है.. पूरा खाली तो लग रहा है तुम्हारा पेट.. जैसे सुबह से कुछ खाया ही ना हो..
पूनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर - तुम सच में 18 प्लस हो ना? मैं बॉयफ्रेंड बनाऊ तो..
गौतम कॉफ़ी पीते हुए - मैंने बता तो दिया.. अब क्या मेरा आधार कार्ड देखोगी तुम?
पूनम मुस्कुराकर कॉफ़ी पीते हुए - कोई जरुरत नहीं है.. मुझे यक़ीन है तुमपर..

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गौतम थोड़ा पीछे होकर तिरछी नज़र से पूनम की कमर देखता हुआ - 32.. नहीं 30..
पूनम गौतम को देखकर - 28...
गौतम आगे देखते हुए - हम्म्म क्या?
पूनम मुस्कुराते हुए - 28 है मेरी कमर का साइज.. वही देख रहे थे ना तुम?
गौतम - नहीं.. मैं क्यों तुम्हारी कमर देखने लगा..
पूनम मुस्कुराते हुए - झूठ भी बोलते हो तुम?
गौतम - मेरी गर्लफ्रेंड का फ़ोन आ रहा है शायद आ गई..
पूनम - वही जिसे मूवी देखने बुलाया है..
गौतम - हाँ यार.. (फ़ोन उठाकर) हेलो
सिम्मी - कहा है रसगुल्ले..
गौतम - सामने कैफ़े में कॉफ़ी पी रहा था बस आ रहा हूँ..( फ़ोन काटते हुए )
सिम्मी - ठीक है..
गौतम - पूनम फ़ोन दो तुम्हारा..
पूनम फ़ोन देते हुए - जा रहे हो..
गौतम - हाँ यार.. लो ये नम्बर है मेरा.. व्हाट्सप्प करना..
वेटर पिज़ा लाते हुए - सर आपका आर्डर..
गौतम - कितना हुआ..
वेटर - 480..
गौतम पैसे दे देता है औऱ वेटर चला जाता है..
पूनम - कोनसी मूवी देखने जा रहे हो?
गौतम मुस्कुराते हुए - पहली मुलाक़ात..
पूनम - मैं भी चलू?
गौतम असमंजस में - ले तो चलता आंटी पर गर्लफ्रेंड नाराज़ हो जाएगी..
पूनम - मैं अलग बैठ जाउंगी..
गौतम पिज़्ज़ा का एक स्लाइस खाते हुए - ठीक है तुम व्हाट्सप्प पर hi भेजो. मैं टिकट बुक करके टिकट व्हाट्सप्प करता हूँ तुम्हे..
पूनम - ठीक है बेटा..
गौतम मुस्कुराते हुए पूनम के गाल चूमकर - बेटा नहीं हूँ तुम्हारा समझी..
पूनम मुस्कुराते हुए - मैं कब कहा तुम मेरे बेटे हो? पर आधी उम्र के हो तो अपने आप मुंह से बेटा निकल जाता है..
गौतम उठते हुए - अच्छा तुम ये फिनिश करके आ जाओ.. मैं नहीं गया तो गर्लफ्रेंड यहां आ जायेगी..
पूनम हसते हुए - बहुत लकी है तुम्हारी गर्लफ्रेंड...

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गौतम - नहीं.. मैं बहुत लक्की हूँ.. चलो चलता हूँ...

गौतम इतना कहकर पूनम को वही केफे मैं छोड़कर वापस सिटी मॉल की तरफ आ जाता है जहां एंट्री पर सिमरन अपने भाई मनोज के साथ खड़ी हुई थी..

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सिमरन गौतम को देखते ही भाग कर उसके गले से लिपट जाती है और एक चुम्मा उसकी गाल पर करते हुए पूछती है..
सिम्मी - प्यारे लग रहे हो..
गौतम - कैसी हो?
सिम्मी - सुरंग में खुदाई का दर्द बाकी है उसके अलावा सब ठीक है..
गौतम - 2-3 बार औऱ खुदाई होगी तो दर्द गायब हो जाएगा.. वैसे सलवार में लुटेरी लगती थी पर साडी में तो क़ातिल लगती हो..
सिम्मी - तुम्हारे आगे तो कुछ भी नहीं हूँ..
मनोज पीछे से - क्या खुसर फुसर चल रही है दोनों में..
गौतम - कुछ नहीं.. चलो चलते है..
सिम्मी - अभी आधा घंटा मूवी शुरू होने में..
गौतम - तो क्या करें फिर?
सिम्मी - यही बैठ जाते है बाहर.. उस चाय की टपरी पर.. मैं चाय पी लुंगी आप दोनों सुट्टा पी लेना..
मनोज - हाँ चलो यार..

पूनम केफे से निकल कर मॉल में जा रही थी गौतम औऱ पूनम की नज़र बीच बीच में मिल भी रही थी.. इस बार पूनम औऱ गौतम ने एक दूसरे को ऊपर से नीचे तक फुल चेक आउट किया.. जिसका अंदाजा दोनों को एक दूसरे की नज़रे देखकर हो चुका था..
गौतम - अरे ये चाय अच्छी नहीं बनाता.. चलो सामने केफे में चलते है तु कॉफ़ी पी लेना..
सिम्मी - ठीक है.. चलो भईया वही चलते है..
मनोज - हाँ.. सिम्मी... चलो..
गौतम वापस सिम्मी औऱ मनोज के साथ केफे में आ जाता है औऱ एक झुग्गीनुमा केबिन में सिम्मी के साथ अगल बगल बैठ जाता है औऱ सामने मनोज बैठ जाता है..
वेटर आता है..
सिम्मी - तीन कॉफ़ी..
मनोज - एक बड़ी एडवांस भी..
गौतम - इतनी देर कैसे हुई तुमने तो आठ का कहा था..
सिम्मी - यार बहाना बनाना पड़ा.. पूछो ना भईया से
मनोज - हाँ गौतम.. आज पापा घर पर ही थे..
गौतम सिमरन के गले में हाथ डालकर उसके गाल चूमता हुआ - thanks आने के लिए..
सिम्मी - बेबी सामने भईया बैठे है.. कुछ तो शर्म करो.. ये सब बाद में..
गौतम - भईया बैठे है तो मैं क्या करू यार..
मनोज - मैं मुंह घुमा लेता हूँ तुम्हे जो करना है कर लो..
वेटर कॉफ़ी लेकर आता हुआ.. सर सिगरेट.. एंड लाइटर
सिम्मी - कॉफ़ी तो बहुत सही है..
गौतम - कहा था ना..
मनोज सिगरेट जलाकर - लो गौतम..
गौतम कॉफी का सिप लेकर अपना फ़ोन देखता है जिसमे पूनम का hi आ चूका था.. गौतम ने एक टिकट बुक करके पूनम को व्हाट्सप्प पर सेंड करते हुए लिखा.. तुम्हे अकेले बैठना पड़ेगा उसके लिए सॉरी..
पूनम ये देखकर मुस्कुराते हुए लिखती है - कोई बात नहीं.. औऱ एक लव का इमोजी भी साथ में सेंड कर देती है..
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सिम्मी - कहा ध्यान है गौतम?
गौतम मनोज से सिगरेट लेकर सिगरेट सिम्मी को देते हुए - कुछ नहीं.. यार.. फ़्रेंड का मैसेज था.. रिप्लाई कर रहा था..
सिम्मी सिगरेट लेने से मना करती हुई - गोतम भईया बैठे है..
गौतम - तो? मनोज तुम्हे सिमरन के सिगरेट पिने से ऐतराज़ है?
मनोज - मुझे क्यों होने लगा.. सिम्मी की अपनी मर्ज़ी है..
गौतम - बस.. लो अब..
सिम्मी सिगरेट लेकर कश मारती हुई - भईया बता रहे थे बहुत अच्छी मूवी है..
मनोज - मैंने तो बस सुना है कल एक दोस्त बता रहा था.. उसकी बातों पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता..
गौतम - ट्रेलर देखा है.. काफी एडल्ट सीन्स है मूवी में..
सिम्मी मुस्कुराते हुए सिगरेट का अगला कश लेकर सिगरेट गौतम को देती हुई - वो तो होंगे ही हीरोइन सनी लियॉन जो है मूवी में..
गौतम सिम्मी के गले में हाथ को थोड़ा नीचे करके उसका बोबा पकड़ते हुए - हीरोइन तो तुझे होना चाहिए मेरी..
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सिम्मी अपने बूब्स पर से गौतम का हाथ हटाती हुई - गौतम तुम भी ना.. कहीं भी शुरू हो जाते हो.. बेशर्म कहीं के..
गौतम - इसमें क्या गलत है.. मनोज तुम ही बताओ.. अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रोमांस करना गलत है क्या?
सिम्मी - भईया से क्या पूछ रहे हो.. उनकी कोई गर्लफ्रेंड थोड़ी है.. उनको तो लड़की से बात करना तक नहीं आता..
गौतम - इतनी सी बात मैं बनवा दूंगा.. बस थोड़ा सा तुम्हारे भईया कॉन्फिडेंस दिखा दे तो..
सिम्मी - पक्का..
गौतम - पक्का मेरी रसमलाई..
ये कहते हुए गौतम ने सिगरेट मनोज को दे दी औऱ सिमरन के होंठों को मनोज के सामने ही चूमने लगा औऱ उसके बूब्स को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा..

मनोज सिगरेट का कश लेकर - भाई यहां तो छोड़ दे मेरी बहन को.. अंदर हॉल में तो पता नहीं क्या क्या करेगा तू..
सिम्मी खुदको छुड़वाकर एक हलका सा थप्पड़ गौतम के गाल पर मारकर - रसगुल्ले तू ना बहुत बेशर्म है.. चल अब टाइम हो रहा है मूवी निकल जायेगी..
गौतम - ठीक है मेरी जान..
मनोज - भाई सच में गर्लफ्रेंड बनवाएगा मेरी?
गौतम - तेरी बहन की कसम..
सिम्मी हसते हुए - अब चलो..
मनोज बिल पे करके मॉल में आ जाता है जहा लगभग खाली पड़े सिनेमा हॉल आगे कोने में तीनो बैठ जाते है हॉल में कुछ ही लोग थे जो पीछे बैठे थे औऱ उनमे से ज्यादातर लवबर्ड्स जो अपनी अपनी gf bf के साथ कहीं ना कहीं लगे हुए थे.. कोने में मनोज बैठा उसके बगल में सिम्मी औऱ उसके बगल में गौतम.. पूनम दो सीट पीछे बैठकर गौतम को देख रही थी..

मूवी शुरू हो चुकी थी और तीनों बैठकर मूवी देखने लगे थे मूवी शुरू होने की कुछ ही देर बाद गौतम ने सिमरन के गले में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचते हुए उसके होठों को अपने होठों से लगाकर चुंबन की शुरुआत कर दी मनोज अपनी बहन और गौतम को चूमता देखकर वहां से उठने की कोशिश करता हुआ बोला मैं कहीं और बैठ जाता हूं. जिस पर गौतम में चुंबन तोड़कर मनोज कहा अरे बैठे रहो यार यहीं पर.. सिमरन इस पर कुछ नहीं बोला और मनोज भी गौतम की बात सुनकर वहीं बैठ गया और मूवी देखने लगा.. गौतम फिर से सिम्मी को चूमने लगा और उसके होंठों का रस पीने लगा.. सिम्मी इस हॉल के अंधेरे में गौतम को पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए चूम रही थी और उसके होठों को बराबर साथ देते हुए उसके मुंह का स्वाद ले रही थी और अपने मुंह का स्वाद उसे चखा रही थी..

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गौतम ने सिम्मी को कुछ देर चूमने के बाद उसके गले में हाथ जो डाला हुआ था उसे थोड़ा और नीचे सरका दिया और सिमरन की ब्लाउज में हाथ डालते हुए उसके बूब्स को पड़कर मसलने और दबाने लगा.. मनोज अपनी बहन के बूब्स दबाते हुए देख रहा था और अब कुछ भी करने में असमर्थ था..

गौतम ने ब्लाउज के बटन खोलके अंदर हाथ डालकर ब्रा को ऊपर सरकार दिया था जिससे सिमरन के बूब्स पूरी तरह नंगे हो चुके थे ब्लाउज के अंदर नंगे हो चुके बूब्स को गौतम चूसना चाहता था इसलिए वह सिमरन की तरफ झुकते हुए उसके पल्लू को उठाकर उसके बूब्स को अपनी तरफ कर दिया और अपने होंठ उसके बूब्स पर लगाते हुए उसके बूब्स चूसने लगा..

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मनोज के सामने उसकी बहन के बूब्स खुलकर आ चुके थे जिन्हें गौतम मजे से चुस्त हुआ सहला रहा था और मसल रहा था.. मनोज कुछ भी करने में असमर्थ था वह केवल पिक्चर देखे जा रहा था और अपने बगल में अपनी बहन और गौतम का रोमांस देखकर वह भी अब काम भावना से उत्प्रोत होने लगा था..

गौतम ने ब्रा को खोलते हुए सिमरन की ब्रा को उतार कर अपनी जेब में रख लिया था और अब सिमरन सिर्फ एक ब्लाउज में ही थी जिसे उठा उठा कर गौतम बार-बार उसके बूब्स को चुम औऱ चाटते हुए उसके निपल्स दबा दबा कर मरोड़ रहा था और सिमरन अपने भाई मनोज के बगल में बैठी हुई कामुक सिस्कारिया अपनी दबी हुई आवाज में ले रही थी जिसको सुनते हुए मनोज भी काम भावनाओं से भर रहा था.. दो सेट पीछे बैठी पूनम भी यह सब होता देख रही थी मगर उसे कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था वह इतना जरुर जानती थी कि गौतम अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रोमांस कर रहा है.. पूनम के दिल में गौतम के लिए एक अलग जगह बन चुकी थी.. जिस तरह से उसने पूनम को समझाया था और मदद की थी इसी के साथ में गौतम ने जिस तरह पूनम को अपनी हम उम्र की लड़की मान कर बातें की थी उससे पूनम गौतम के प्रति आकर्षित हो चुकी थी और वो गौतम से और बात करना चाहती थी.. गौतम में पूनम को एक नई उम्मीद दिख रही थी यह उम्मीद वैसी नहीं थी जैसी उसने अपने पिछले आशिक से लगाई थी जो उसे छोड़कर चला गया था. वो उम्मीद एक दोस्त की थी कि गौतम उसका एक अच्छा दोस्त बनाकर उसकी बातों को सुन सकता है और उससे ढेर सारी बातें कर सकता है.. पूनम एक अच्छे मित्र के रूप में गौतम को देखने लगी थी.. पूनम के मन में भरी हुई उदासी को गौतम ने कुछ ही देर में निकाल कर फेंक दिया था और अब पूनम आगे की ओर देखने लगी थी..

मनोज अपनी बहन की कामुक आवाजो को सुनते हुए वहीं बैठा हुआ अपने लंड को अपनी पैंट के ऊपर से सहला रहा था और साइड में अपनी बहन औऱ गौतम का रोमांस देखकर मन ही मन कामुक हो रहा था..
गौतम सिमरन के बूब्स इस तरह चूस और चाट रहा था कि सिमरन के मुंह से कामुक सिसकियाँ आप निकलने लगी थी हालांकि यह सिस्कारिया और कामुक आवाज केवल उसके पास में बैठे हुए मनोज को ही सुनाई दे रही थी उसके अलावा कोई और आसपास वहां सुनने वाला था ही नहीं..

सामने चलते सनी लियोन के मूवी के चुदाई सीन और साइड में बैठी हुई अपनी बहन सिम्मी और गौतम के चूसाईं सीन देख कर मनोज सब रहा नहीं गया और वह उठकर मुठ मारने बाथरूम की तरफ चला गया..
उसके जाने के बाद गौतम ने भी सिमरन को अपनी तरफ झुका लिया और अपना लंड बाहर निकाल कर सिमरन का सर अपने लंड पर झुकते हुए सिमरन के मुंह में आपका लौड़ा घुसा कर सिमरन को सिनेमा हाल में ही अपना लंड चूसने लगा..

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सिमरन भी गौतम के अनुसार उसके ऊपर झुक गई और गौतम को खुश करने में लग गई.. सिमरन किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह गौतम के लिंग को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और चाट रही थी औऱ अपने हाथ से उसके अंडकोष भी सहला रही थी जिससे गौतम को बहुत संतुष्टि का अनुभव हो रहा था.. गौतम प्यार से सिमरन के बाल सहलाते हुये जुल्फे सवारते हुए उसे अपना लोडा चूसने में मसरूफ था..
मनोज बाथरूम में अपना हिला कर वापस अपनी सीट पर है तो उसने देखा कि सिमरन गौतम के उपर झुकी हुई है और गौतम उसे अपना लंड चूसा रहा है ये देखकर मनोज फिर से कामुक होने लगा था.. मगर इस बार मनोज बगल में बैठकर सामने मूवी देखने लगा सिमरन लोडा चूस रही थी और मनोज अपनी बहन सिमरन को चुसता हुआ देख रहा था गौतम सिमरन लंड चूसाईं का आनंद ले रहा था..
मनोज औऱ पीछे बैठी पूनम ने जब गौतम के लंड की झलक देखी तो दोनों अचरज में पड़े हुए उसके लंड को देखते ही रह गए..

गौतम अब काम भावना से भरकर चुदाई के मूंड में चुका था गौतम ने सिमरन का हाथ पड़कर उसे सीट से उठा लिया और बाथरूम ले गया.. जहां मेल टॉयलेट में ले जाकर गौतम ने एक बाथरूम में घुसकर सिमरन के साथ दरवाजा बंद कर लिया. गौतम और सिमरन दोनों काम भावनाओं से भरे हुए थे कि उनको किसी और का कोई ख्याल नहीं था.. गौतम ने सिमरन की साडी खोल दी और सिम्मी को पलट कर उसकी चुत में अपना लिंग घुसते हुए धीरे-धीरे उसके बाल पड़कर पीछे से चोदने लगा.. सिमरन सिसकियाँ लेते हुए गौतम से चुत मरवाने लगी थी..
गौतम ने सिमरन का ब्लाउज उतार कर साइड में रख दिया और उसकी पेंटी भी उतार कर अपनी जेब में रख ली.. सिमरन अपनी चुत में गौतम का लौड़ा लेते हुए बहुत ही मस्ती से चुदवा रही थी.. गौतम अपना पूरा लौड़ा घुसा घुसा के सिमरन की चुत मारे जा रहा था और सिमरन चुत मरवाते हुए सिसकियाँ लेकर गौतम को मुड़ मुड़कर देखते हुए कामुकता से आहे भर रही थी..

मनोज कुछ देर बाद ही सीट से उठकर बथरूम में आ गया था औऱ उसके जस्ट बगल वाले बाथरूम में घुस गया.. मनोज अपनी बहन की सिस्कारिया सुनते हुए वापस मुट्ठी मारने लगा औऱ मुट्ठी मारके वापस चला गया..

गौतम जब झड़ने वाला हुआ तो उसने सिमरन को पलट कर नीचे घुटनों पर बैठा दिया और उसके मुंह में अपना लौड़ा डालकर उसके बाल पकड़ते हुए लौड़ा चूसने लगा और थोड़ी देर में उसके मुंह में अपना सारा माल भर के झड़ गया..

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सिमरन पूरा माल पीते हुए मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगी औऱ गौतम ने सिमरन को चुम लिया..


मूवी का मध्यांतर हो चुका था और सभी अब कुछ ना कुछ खाने का सामान लेने जा रहे थे मगर गौतम उसी तरह बैठा हुआ वही एक बात सोच रहा था कि कैसे सिमरन और वो उसकी खुली आंखों से देखे गए सपने में संभोग करते हुए एक दूसरे को अलग नाम से बुला रहे थे और दोनों पूर्ण रूप से सम्भोग कर रहे थे..

सिम्मी - क्या खाना है रसगुल्ले?
सिम्मी ने गौतम का ध्यान तोड़ते हुए कहा तो गौतम ने कहा- कुछ नहीं.. भूख नहीं है..
मनोज - कुछ तो खा ले भाई. इतनी मेहनत की है तूने..
गौतम - अभी कुछ खाने की इच्छा नहीं है..
सिम्मी मनोज के साथ जाती हुई - चलो भईया.. मुझे तो पॉपकोन खाने है.. वो लेकर आते है..
मनोज - ठीक है सिम्मी.. चल..

मनोज और सिमरन सिनेमा हॉल से बाहर पॉपकोन लेने चले जाते हैं और पूनम मौका देखकर गौतम के बगल वाली सीट पर आकर बैठ जाती है..
पूनम - गर्लफ्रेंड बहुत खूबसूरत है तुम्हारी..
गौतम पूनम की तरफ देखकर - thanks आंटी..
पूनम - पीछे से देखा मैंने.. बहुत तंग कर रहे थे तुम बेचारी को.. बाथरूम में भी बहुत सताया तुमने उसे..
गौतम - तुम हमारे पीछे बाथरूम तक आई थी? यार आंटी क्या है ये..
पूनम अपना एक कान पकड़कर मुस्कुराते हुए - सॉरी.. पर वो साथ वाला लड़का भी गया था..
गौतम - अच्छा.. मूवी कैसी है?
पूनम - पूरी मूवी में सनी लियॉन के अलावा कुछ औऱ हो तब तो बताऊ..
गौतम - बोर हो गई ना..
पूनम - हाँ अकेली तो बोर ही होंगी...
गौतम - मैं भी बोर हो गया.. मैंने अब जाने वाला हूँ यहां से..
पूनम - बिना बताये मत चले जाना.. इशारा करना.. कुछ औऱ बात करनी है तुमसे..
गौतम - ठीक है..
पूनम - मैंने पीछे जाती हूँ.. तुम्हारी गर्लफ्रेंड आने वाली होगी..
इतना कहकर पूनम पीछे वापस अपनी सीट पर जाकर बैठ जाती है और कुछ देर बाद मनोज और सिमरन वापस गौतम के पास आकर बैठ जाते हैं और पॉपकॉर्न खाते हुए बातें करने लगते हैं जिसमें मूवी से जुड़ी हुई बातों के अलावा के बहुत सी बातें हो रही थी गौतम ने अपनी बात करते हुए मूवी के बोरिंग होने का हवाला देते हुए यहां से चलने की बात कही जिस पर मनोज और सिमरन एक मत से हामी भरते हुए बोले..
सही कहा.. चलते है..

आगे आगे मनोज और सिमरन जाने लगे तो पीछे से गौतम ने पूनम को जाने का इशारा कर दिया.. तीनों मॉल के गेट के बाहर आ चुके थे और पार्किंग में जाते हुए दूसरे से बात कर रहे थे..
गौतम और सिमरन का हाथ एकदूसरे के हाथ में था और दोनों अब आखरी बार एक दूसरे से गले मिलते हुए एक दूसरे को चूम रहे थे मनोज उनके चुम्मी के खत्म होने का इंतजार कर रहा था..
पूनम पीछे छूपके खड़ी हुई यह सब देख रही थी..
मनोज पार्किंग से अपनी बाइक ले आया था और अब वह गौतम और सिमरन से कहने लगा था..
मनोज - आज ही करनी है क्या सारी चुम्मी तुम दोनों को.. सिम्मी अब चल यार..
सिम्मी चुम्बन तोड़ते हुए - बाय रसगुल्ले.. जल्दी मिलने आना वरना मैंने आ जाउंगी..
गौतम अपनी जेब से सिम्मी की ब्रा पेंटी निकालकर सिम्मी को देते हुए - रास्ते में सुनसान जगह पहन लेना.. औऱ अपना ख्याल रखना..
सिम्मी मनोज के पीछे बाइक पर बैठ जाती है औऱ बाय करते हुए वहा से मनोज के साथ चली जाती है..
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गौतम जैसे ही पार्किंग की तरफ बढ़ता है उसके सामने पूनम आकर खड़ी हो जाती है..
गौतम - घर छोड़ दू आंटी?
पूनम - हाँ बेटा..
गौतम पार्किंग से कार निकालकर - आओ आंटी अंदर बैठ जाओ..
पूनम - तुम्हारी कार है?
गौतम - नहीं.. किसी औऱ की है मैंने तो बस चला रहा हूँ.. अच्छा किस तरफ है आपका घर..
पूनम - घर कहा है बेटा.. किराए का कमरा है..
गौतम - पर शहर के किस हिस्से में है आंटी आपका वो कमरा.. जगह तो बताओ..
पूनम उसी वेडिंग हॉटल के आसपास की जगह का नाम बताती है जहा कल ऋतू की शादी हुई थी..
गौतम गाडी चलाते हुए - मुझे भूख लगने लगी लगी है आंटी.. चलो पहले कहीं खाना खाते है फिर मैं आपको छोड़ दूंगा..
पूनम - बेटा यहां आसपास कोई अच्छा रेस्टोरेंट नहीं है.. तुम मेरे साथ चलो मैं अपने हाथ से बनाके खिला दूंगी..
गौतम उसी होटल की जगमग देखकर - रेस्टोरेंट की क्या जरुरत है आंटी..

ये कहते हुए गौतम गाडी वेडिंग होटल की पार्किंग में लगा देता है.. जहा चकाचोध देखकर लग रहा था कि आज भी यहां किसी की शादी है..
पूनम - बेटा.. बिन बुलाये नहीं जाना चाहिए कोई रोक लेगा..
गौतम - डरो मत आंटी.. मैं हूँ ना आपके साथ.. चलो उतरो.. आ जाओ..
गौतम पूनम को लेकर वेडिंग होटल के अंदर ले आता है औऱ होटल से गुजरते हुए पीछे वेडिंग लोन में चल रहे फंक्शन में आ जाता है.. रात के लगभग 10.45 का समय हो रहा था औऱ फंक्शन में अब कम भीड़ थी.. गौतम बिना किसी शर्म औऱ झिझक के खाना लेकर टेबल पर पूनम के साथ बैठ गया औऱ खाने लगा जहाँ गोतम को देखकर बिरजू उसके पास आ गया..

बिरजू - भईया ज़ी.. नमस्ते... कल रात आप आये नहीं.. मैं पूरी रात जाग रहा था..
गौतम बिरजू से - कल नींद आ गई थी बिरजू.. तू चिंता मत कर अभी तेरी जरुरत पड़ेगी..
बिरजू पूनम की तरफ देखकर - भईया आपकी माँ है..
गौतम मुस्कुराते हुए पूनम की तरफ देखकर - हाँ बिरजू ये मेरी माँ है..
पूनम गौतम की तरफ देखकर उसके झूठ में शरीक हो गई औऱ बोली - हाँ मैं इसकी माँ हूँ.
बिरजू झुक कर प्रणाम करते हुए - नमस्ते आंटी ज़ी..
पूनम एक झलक गौतम को देखने के बाद बिरजू से - नमस्ते..
बिरजू चला जाता है..
पूनम - कौन था ये?
गौतम खाना खाते हुए - यहां की निगहेबानी करता है आंटी.. तुम्हे देखकर उसे लगा होगा की तुम मेरी माँ हो.. मैंने भी उसके भरम नहीं तोड़ा..
पूनम खाना खाते हुए - कल क्यों जाग रहा था वो.. औऱ तुम क्यों जाने वाले थे उसके पास..
गौतम - पीछे हलवाईखाने के बगल में थोड़ा दूर इसका रूम है जहा ये रहता है.. मैंने इसे कहा था रात को गर्लफ्रेंड के साथ आ सकता हूँ तेरा रूम खुला रखना.. इसिलए..
पूनम खाना खाते हुए - कल भी तुम बिन बुलाये खाना खाने आये थे यहां? डर नहीं लगता तुम्हे?
गौतम पूनम को खाने की एक कोर खिलाते हुए - कल मेरी बहन की शादी थी यहां.. अब समझी? मैंने कोई भूखा नंगा थोड़ी हूँ.. जो जहाँ कहीं बिन बुलाये आता जाता रहूँगा.. आसपास कोई रेस्टोरेंट नहीं था यहां आना पड़ा.. औऱ कुछ नहीं..
पूनम मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर उसके हाथ का निवाला खाते हुए - मैंने कब वैसा कहा..

कुछ देर बाद दोनों खाना खा कर उठ गए औऱ पूनम ने गौतम से कहा.. अब चले यहां से?
गौतम - एक सेकंड आंटी.. बिरजू से मिलके आता हूँ.. बेचारा रात भर जाग रहा था कुछ तो मिलना चाहिए उसे..
पूनम गौतम का हाथ पकड़ कर - मैं भी चलती हूँ बेटा.. बिन बुलाये यहां इतनी बड़ी शादी में मुझसे अकेले नहीं रहा जाएगा..

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गौतम पूनम के साथ बिरजू के कमरे की तरफ आ जाता है जहा बाहर अंधेरा था औऱ अंदर कमरे में वही धीमी रौशनी का लट्टू जल रहा था.. बिरजू आसपास नहीं था..
गौतम पुनम के साथ उस छोटे से कमरे में आ जाता है औऱ दरवाजा अंदर से बंद करने लगता है बगैर कुंदी लगाए...
पूनम - यहां कोई नहीं है बेटा.. अरे तुम दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो?
गौतम मुड़कर पूनम को देखता हुआ - क्यों आंटी आपको डर लग रहा है? कहीं मैं आपके साथ कुछ गलत काम ना कर दूँ..
पूनम हसती हुई - मुझे क्यों डर लगेगा? वो भी तुम्हारे जैसे इतने खूबसूरत और प्यारे लड़के से.. डरना तो तुम्हे मुझसे चाहिए.. कहीं मैंने तुम्हारा फ़ायदा उठा लिया तो...
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गौतम पूनम के करीब आता हुआ उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर पूनम को अपनी तरफ खींचते हुए - अच्छा? तुम ऐसा क्या कर सकती ही आंटी.. जो मुझे तुमसे डर लगना चाहिए..
पूनम को देखकर हैरानी से - बेटा.. क्या कर रहे हो तुम.. छोडो मुझे.. तुमसे इतनी बड़ी हूँ मैं.. तुम्हारी माँ जैसी..
गौतम - आंटी मैं जानता हूँ आप अंदर से बहुत अकेली हो.. आपको एक दोस्त की जरुरत है.. मैं आपका दोस्त बनने के लिए तैयार हूँ.. आपकी ख़ुशी के लिए मैं सब कुछ कर सकता हूँ..
पूनम - बेटा तुम मुझे गलत समझ रहे हो.. तुमने इतने प्यार से बात की, मेरी इतनी मदद भी की उसके लिए मैं तुम्हारी अहसानमंद हूँ.. मगर अपनी ख़ुशी के लिए तुम्हारे जैसे इतने प्यारे बच्चे का फ़ायदा नहीं उठा सकती.

गौतम की नज़र खाट के किनारे पड़े हुए सिगरेट के पैकेट औऱ लाइटर पर पड़ी जो कल उसने यही छोड़ दिया था.. उसने पूनम को बाहों की क़ैद से आजाद कर दिया.. औऱ एक सिगरेट निकालकर सुलगाकर कश लेते हुए बोला - औऱ अगर ये बच्चा तुम्हारा फ़ायदा उठाना चाहे तो आंटी? तुम तब भी मुझे मना करोगी?
पूनम खाट पर बैठती हुई - बेटा तुम्हारे साथ मुझसे ये सब नहीं होगा.. तुम बहुत छोटे हो.. कहाँ मैंने 45 साल की औऱ कहा तुम 18-19 साल के..
गौतम खाट पर पूनम के बदल में बैठकर सिगरेट के कश लेता हुआ - 20 साल.. आंटी पुरे बीस साल का हूँ.. (कमर में हाथ डालता हुआ) आंटीलवर सुना है तुमने.. मैं वही हूँ.. आपके जैसी खूबसूरत आंटीया मुझे बहुत पसंद है.. मैं एक बात सच बताऊ तुम्हे आंटी?
पुनम अपनी कमर से गौतम का हाथ नहीं हटाती औऱ गौतम को देखकर कहती क्या - क्या?
गौतम सिगरेट का कश लेकर - मैं तुम्हे उदास देखकर तुम्हारे पास नहीं आया था आंटी.. तुम्हारा फिगर औऱ उम्र देखकर तुम्हारी तरफ खींचा चला आया था.. सोचा था तुम्हारा फ़ायदा उठा लूंगा.. मगर तुम्हारा दिल टुटा हुआ था इसलिए मैंने कोशिश नहीं की.. मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ आंटी.. मेरी दोस्त बनोगी?

पूनम गौतम की बात सुनकर उसे ही देखे जा रही थी..
इस बार जैसे ही गौतम ने सिगरेट अपने होंठो से लगाई पूनम ने अपनी उंगलि से गौतम के होंठों से सिगरेट लेकर फर्श पर फेंककर अपने पैरों की चप्पल से बुझा दी औऱ गौतम को देखकर कहा - सिगरेट पीना अच्छा नहीं होता बेटा..
गौतम ने अपनी कलाई का धागा लाल होते देखा तो वो समझा गया की पूनम उसके साथ सोने के लिए तैयार हो चुकी है..
गौतम पूनम को बाहों में भरता हुआ खड़ा हो गया औऱ उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा.. इस बार पूनम ने उसे कुछ भी करने से नहीं रोका उलटे दोनों हाथों से गौतम की कमर को पकड़कर चुम्बन में बराबर उसका साथ देने लगी..

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कमरे के बीचो-बीच खड़े होकर गौतम और पूनम एक दूसरे को चुम ही रहे थे कि बिरजू गेट खोलकर अंदर घुस गया.. बिरजू ने जब गौतम और पूनम को एक दूसरे को चूमता देखा तो वह हैरानी से भर गया कि कैसे एक माँ बेटा आपस में चुम सकते है.. बिरजू के आने से गौतम और पूनम का चुंबन भी टूट गया..
गौतम बिरजू को देखकर अपनी जेब से 500 का नोट निकालकर देता हुआ - अरे बिरजू.. ले..
बिरजू पैसे लेकर - कुछ लाना है भईया ज़ी..
गौतम - नहीं यार.. कल तू मेरी वजह से पूरी रात जागता रहा है..
बिरजू - धन्यवाद भईया ज़ी..
गौतम पूनम को बाहों में भरता हुआ - अच्छा बिरजू.. अभी कुछ देर मैं यही तेरे कमरे में इस खाट पर अपनी माँ के साथ सोऊंगा.. तू नीचे बिछा के सो जा.. औऱ दरवाजा बंद कर दे..
बिरजू - पर भईया ज़ी.. आपकी माँ..
गौतम - बिरजू मैं अपनी माँ से सच्चा प्यार करता हूँ.. औऱ मेरी माँ भी मुझसे.. क्यों माँ..
पूनम झिझकती हुई धीरे से गौतम से - बेटा.. इसके सामने..
गौतम अपनी शर्ट उतारकार पूनम को खाट पर लेटाता हुआ - अरे बिरजू की चिंता मत करो माँ.. ये मेरा पक्का दोस्त है किसी को कुछ नहीं कहेगा.. क्यों बिरजू..
बिरजू फर्श पर चटाइ बिछाकर लेटता हुआ - ज़ी भईया..
गौतम पूनम को चूमता हुआ उसके बूब्स पर हाथ फेरकर मसलने लगता है औऱ धीरे धीरे साडी का पल्लू हटाकर ब्लाउज खोलने लगता है.. साडी औऱ ब्लाउज उतारकर एक तरफ करने के बाद गौतम जैसे ही पूनम के पटीकोट के नाड़े पर हाथ लगाता है पूनम गौतम का हाथ पकड़ कर बोलती है..
पूनम - खोलो मत बेटा वैसे ही कर लो..
गौतम - चुदाई तो नंगे होकर ही की जाती है माँ... अब छोडो मेरा हाथ.. पूनम हाथ छोड़ देती है औऱ गौतम पुनम का पेटीकोट भी निकाल देता है.. अब पूनम सिर्फ पैंटी औऱ ब्रा में थी.. गौतम भी अपनी जीन्स खोल चूका था औऱ वो भी चड्डी में था..
बिरजू दोनों से पीठ करके सब सुन रहा था औऱ लेटा हुआ लंड को पज़ामे के ऊपर से हिला रहा था..

गौतम पूनम से - कंडोम पहनु?
पूनम गौतम को चूमकर - नहीं.. मेरे पास गोली है.. बेटा बस थोड़ी शर्म आ रही है..
गौतम बिरजू से - बिरजू मेरी माँ को शर्म आ रही है.. ये लट्टू बंद कर दे.. अंधरा होगा तो शर्म चली जायेगी औऱ खुलके कुछ कर पाएगी....
बिरजू लट्टू बंद करके वापस लेट जाता है औऱ गौतम अपनी चड्डी नीचे सरका कर पूनम की पेंटी नीचे कर देता है औऱ चुत को टटोल कर लंड सेट करता हुआ पुनम से कहता है - मैं अंदर डाल रहा हूँ.. चिल्लाना मत..
पूनम मुस्कुराते हुए - मैं क्यों चिल्लाने लगी बेटा..
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गौतम एक जोरदार धमाकेदार धक्का देखकर
एक बार में अपना सारा का सारा लंड पूनम की चुत में घुसा देता है जिससे पूनम एक दम से पूरी आवाज के साथ चीख पडती है..
बिरजू चिंख सुनकर डरता हुआ खड़ा होकर लट्टू जला देता है औऱ दोनों को देखता है.. खाट पर पूनम पीठ के बल लेटी थी औऱ गौतम उसके ऊपर उसकी चुत में लंड डालकर..
गौतम बिरजू से - लट्टू बंद कर मादरचोद..
बिरजू - पर भईया आपकी माँ..
गौतम गुस्से में - अबे मेरी माँ है मैं कैसे भी चोदू.. तू लाइट बंद कर..
बिरजू लाइट बंद कर देता है..
पूनम की चीख बहुत जोर की थी मगर लोन में बजते dj की आवाज में उसका पाता किसीको चलने वाला नहीं था.. केवल बिरजू औऱ गौतम ही उसकी चिंख सुन पाए थे..
गौतम - बोला था चिल्लाना मत..
पूनम सिसकती हुई - ये क्या डाल दिया तूने..
गौतम - लंड डाला है मेरा औऱ क्या डाला है..
पूनम - इतना बड़ा? मुज्जे तो दर्द होने लगा है..
गौतम चोदना शुरू करते हुए - बिरजू..
बिरजू - हाँ भईया ज़ी..
गौतम - दारु पड़ी है?
बिरजू - नहीं है भईया ज़ी मेरे पास तो..
गौतम - होटल के रूम नम्बर 26 में जा सकता है अभी.. दिन में मैं छोड़ आया था एक बोतल..
बिरजू - ज़ी भईया.. दिन से बंद ही पड़ा है.. शाम को सफाई वाले ने चाबी मुझे ही दी थी.. मैं अभी लाता हूँ..
बिरजू चला जाता है औऱ एक थैले में बोतल ले आता है.. साथ में दो गिलास भी..
गौतम पूनम को धीरे धीरे चोदते हुए - दो लर्ज़ पेग बना बिरजू..
बिरजू पेग बनाकर - लो भईया..
गौतम पेग पूनम को देकर - लो ये पिलो फिर दर्द नहीं होगा..
पूनम गौतम को देखते हुए दोनों पेग पी जाती है औऱ किसी रांड की तरह पेर फैलाकर लेट जाती है एक पेग गौतम भी पी लेता है औऱ फिर से चुदाई का सुभारम्भ कर देता है..
गौतम - अब थोड़ी दर्द हो रहा है?
पूनम - नहीं बेटा.. अब मज़ा आ रहा है..

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घप घप की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था औऱ बिरजू भी झड़ चूका था वो बस दोनों को माँ बेटा समझा कर उनकी चुदाई की कामुक भारी आवाजे सुन रहा था..
गौतम फूल स्पीड में चोद रहा था औऱ पूनम भी मज़े से अब चुदवा रही थी उसे लगा था गौतम मामूली लड़का होगा पर चुदाई के पहले झटके ने उसकी सोच बदल दी.. गौतम ने काफी देर तक सुमन को मिशनरी में छोड़ा और फिर पूनम के झड़ने पर उसे कुतिया बना लिया औऱ चोदने लगा...

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गौतम पूनम को कुतिया बनाकर कुतिया की तरह ही चोद रहा था औऱ साथ में पूनम के बदन की औऱ उसके फिगर की तारीफ़ भी करहा था जिससे पूनम चुदाई के साथ अपनी तारीफ़ सुनकर भी मस्त हो गई थी..

थोड़ी देर कुतिया बनाके चोदने के बाद गौतम ने पूनम को अपने ऊपर ले लिया औऱ नीचे से झटके मारते हुए पेलने लगा.. जिसमे अब वापस पूनम झड़ने को हो रही थी औऱ गौतम भी उसकी कगार पर था.. कुछ देर में दोनों ने एक साथ अपना पानी छोड़ दिया औऱ झड़ गए..

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पूनम की संतुष्टि सातवे आसमान पर थी उसे आज तक ऐसी चुदाई नसीब नहीं हुई थी जिसने उसके रोम रोम को प्रफुलित कर दिया था.. पूनम अपने दोनों हाथों से गौतम को अपने गले से लगाकर अपने ऊपर लेटाए हुए खाट पर पड़ी थी..
गौतम बिरजू को लाइट ऑन करने का बोलकर पूनम से - मज़ा आया माँ?
पूनम हलके नशे में - हां बेटा.. बहुत मज़ा आया..
बिरजू - भईया ज़ी आपका फ़ोन आ रहा है..
गौतम खाट से खड़ा होकर फ़ोन उठाते हुए - अबे इस वक़्त क्यों फ़ोन किया चूतिये?
आदिल - कुछ फोटो भेजी है व्हाट्सप्प पर चेक कर..
गौतम - ऐसा क्या भेज दिया गांडू? आधी रात को चैन नहीं है.. बाद में देखूंगा..
आदिल - तेरी मर्ज़ी भोस्डिके मत देख..
गौतम फ़ोन रखकर पूनम से - माँ चल अब चलते है..
पूनम भी बिरजू के सामने नाटक करते हुए - ठीक है बेटा.. ले चल अपनी माँ को..
बिरजू - भईया ज़ी मेरा भी कुछ करवा दो..
गौतम बनावटी गुस्से में - भोस्दीके माँ है मेरी..तू चोदेगा इसे?
बिरजू - नहीं भईया ज़ी मैं ऐसा नहीं बोल रहा था.
पूनम साड़ी पहनकर - क्यों बेचारे पर चिल्ला रहे हो बेटा..
गौतम - अरे मुंह मत लटका बिरजू.. सुन.. सुबह वो मुन्नी आती ना होटल में.. ले उसे ये दो सो रूपये देकर पेल लेना.. मैंने देखा है उसे कल वॉचमैन के साथ.. उसीने ये बताया..
बिरजू - सच में भईया..
गौतम पूनम को बाहों में लेकर बिरजू के सामने उसके बूब्स पकड़कर - मेरी माँ के बोबो की कसम.. बिरजू..
पूनम - बेटा.. क्या कर रहा है चल अब..

गौतम पूनम को वहां से लेकर होटल की पार्किंग में आ जाता है और गाड़ी में पूनम के साथ बैठ जाता है..
पूनम एक सिगरेट गोतम के होंठों पर लगाकर जलाती हुई - फिर कब मिलने आओगे मुझसे?
गौतम कश लेकर - पता नहीं यार.. कल वापस जा रहा हूँ अजमेर.. लेकिन तुम्हे जब भी मेरी जरुरत हो मुझे फ़ोन कर देना..
पूनम गौतम से सिगरेट लेकर कश मारती हुई - पहली मुलाक़ात में ही तूने मेरे साथ सब कर लिया.. बिलकुल उस मूवी की तरह.. क्या नाम था उसका.. पहली मुलाक़ात..
गौतम - तुमने तो सिगरेट पिने से रोका था..
पूनम - बच्चा समझके रोका था मगर मुझे क्या पता था तुम तो मर्द हो..
गौतम रास्ते में एक सुनसान जगह गाडी रोकता है..
पूनम - क्या हुआ? अभी तो थोड़ा आगे औऱ है..
गौतम - बाथरूम लगा है करके आता हुआ..
पूनम मुस्कुराते हुए गौतम की जीन्स खोलकर उसका लंड हाथ में ले लेती है औऱ गौतम से कहती है - मैं हूँ ना.. मेरे मुंह में कर दो..
गौतम पूनम के हाथ से सिगरेट ले लेता है और बाहर फेंककर उसका सर अपने लंड पर झुकता हुआ उसके मुंह में मूतने लगता है

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जिसे पूनम पी जाती है फिर गौतम को अपने पुरे अनुभव से एक कामुक blowjob देने लगती है..
गौतम गाडी चला कर पूनम की के मोड़ पर गाडी रोक देता है.. आधी रात का वक़्त सुनसान सडक थी औऱ पूनम के मुंह में गौतम का लंड..
गौतम पूनम के सर पर हाथ फेरकर - आपका ठिकाना आ गया आंटी..
पूनम लोडा मुंह से निकालकर - आंटी नहीं बेटा पूनम.. दोस्तों को नाम से बुलाते है...
गौतम - अच्छा ठीक है पूनम.. अब जाओ मुझे भी जाना है.. औऱ कल याद से सोहन काका से जाकर मिल लेना..
पूनम - ठीक है पर ये खड़ा लंड लेकर कहा जाओगे? थोड़ी देर रुको मैं चूसकर झाड़ देती हूँ..
गौतम चूमकर - इतना खुश मत करो.. मैं संभाल लूंगा इसे तुम जाओ..
पूनम - इतना प्यारा दोस्त मिला है खुश तो रखना पड़ेगा ना.. बस पांच मिनट...
पूनम पूरी तन्मयता के साथ लूँ को जोर जोर से औऱ चूसने लगती है औऱ आंड भी चाटने लगती है गौतम प्यार से पूनम के बाल एक तरफ करके उसके सर पर हाथ फेरता हुआ पूनम को लोडा चूसवाता है.. औऱ कुछ देर बाद झड़ जाता है...
पूनम लंड का माल पीकर लोडा साफ कर देती है औऱ गौतम से कहती है - चल बाये बेटा...
गौतम - बाय पूनम..
पूनम मुस्कुराते हुए - अगली बार मिलोगे तो पूरी रात बितानी पड़ेगी मेरे साथ..
गौतम लंड पेंट में डालकर - पक्का पूनम..
गौतम पूनम को उसके घर छोड़कर अपने मामा के घर चल देता है और गाड़ी घर के बाहर पार्क करके घर के अंदर आ जाता है वो देखता है की उसकी नानी मामी भाभी औऱ माँ सब एक कमरे में साथ सो रहे थे जैसे एकसाथ बातें करके यही सो गए हो.. गौतम अपने कमरे में चला जाता है औऱ वो भी सो जाता है....
 
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