रजनी की हालत ऐसी हो रही थी की उसे किचन से बाथरूम तक का सफ़र कोसो दूर लग रहा था...
वो अपनी गीली छूट को जाँघो के बीच दबाती हुई धीरे-2 कदमो से उस तरफ जा रही थी ,
और उसकी चूत हर कदम पर जांघो के बीच दबकर निम्बू की तरह खुद ब खुद निचुड़ रही थी
इस वक़्त अगर उसकी रसीली गांड पर कोई ज़ोर से चांटा मारता तो चूत में से झनझनाकर गाड़े रस की बारिश हो जाती..
उसने कुरती और नीचे एक ढीला सा पयज़ामा पहना हुआ था, कुरती उसने निकाल फेंकी और ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी...
इतनी बेशरम शायद वो आज से पहले कभी नही हुई थी जब उसकी बेटी घर पर हो और वो राजेश के साथ ऐसी रासलीला मनाने जा रही हो..
पर इस वक़्त शायद उसका खुद पर भी काबू नही रह गया था और ये बात उसके खड़े हुए निप्पल्स सॉफ दर्शा रहे थे...
नंगे होने के बाद उसके मुम्मे और उनपर लगे निप्पल्स और भी कठोर हो चुके थे.
अब तो बस उसका मन कर रहा था की राजेश उन्हे पकड़े और निचोड़ डाले...
अंदर ही अंदर उसकी रगों में जो मीठा सा दर्द उठ रहा था वो इसी तरीके से जा सकता था.
उसने जल्दी से अपना पायजामा भी उतार फेंका और बाथरूम के अंदर जा घुसी.
अंदर का नज़ारा देखकर उसके तन बदन की आग और भी भड़क उठी...
राजेश अपने पूरे शरीर में साबुन लगाकर अपने खड़े लंड को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लेकर मसल रहा था...
शायद ईशा के जवान जिस्म को सोचकर वो अपने नाग को सहला कर शांत करने की कोशिश कर रहा था.
उसने भी जब रजनी को नंगी ही अंदर आते देखा तो उसके हाथो की गति और तेज हो गयी...
पर फिर उसने हाथो को बड़ी मुश्किल से रोका, क्योंकि ऐसा करके तो वो खुद ही अपना माल निकाल देता और फिर रजनी को बुलाने का कोई मतलब ही नही रह जाना था.
और आज तो उसे रजनी की चूत अच्छी तरह से चोदनी थी...
उसने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने गले से लगाकर उसके पूरे शरीर पर अपना बदन रगड़ने लगा...उसके होंठो को मुँह में लेकर उन्हे चूसने लगा और उसकी देसी शराब जैसे होंठो का मज़ा लेने लगा.
रजनी भी अपने भरे पूरे मुम्मो को राजेश के बदन से रगड़कर अपनी खुजली कम करने की कोशिश करने लगी... राजेश ने उसे सामने से पूरा रगड़ा और फिर उसे पलटाकार उसकी गांड से चिपक गया और अपने हाथ आगे करके उसके मोटे मुम्मो को अपने हाथो से निचोड़ने लगा.
उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जादू था राजेश के हाथो में...
इन्फेक्ट मुम्मो को कैसे निचोड़ा जाता है ये एक मर्द ही अच्छे से जान सकता है
यही तो सोचती हुई आ रही थी वो की उसका पति उसके मुम्मो को पकड़े और निचोड़ डाले.
राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर फिसलकर उनकी मसाज करने लगे..
साथ ही साथ वो उसकी भरंवा गांड पर अपने खड़े लंड की रगड़ाई भी कर रहा था...
साबुन की फिसलन इतनी थी की वो अगर अपने लंड को पकड़कर उसकी गांड पर लगाता तो भी वो वहाँ जा घुसता...
हालाँकि आज तक राजेश ने कभी गांड नही मारी थी रजनी की पर अब शायद शेफाली की कृपा से वो काम भी कर सकता था...
पर ये जगह पहली बार गांड मरवाई के लिए सही नही थी क्योंकि उसमे दर्द भी होना था उसे
और इस वक़्त वो उसे दर्द नही बल्कि मज़े देना चाहता था
वो अपनी गीली छूट को जाँघो के बीच दबाती हुई धीरे-2 कदमो से उस तरफ जा रही थी ,
और उसकी चूत हर कदम पर जांघो के बीच दबकर निम्बू की तरह खुद ब खुद निचुड़ रही थी
इस वक़्त अगर उसकी रसीली गांड पर कोई ज़ोर से चांटा मारता तो चूत में से झनझनाकर गाड़े रस की बारिश हो जाती..
उसने कुरती और नीचे एक ढीला सा पयज़ामा पहना हुआ था, कुरती उसने निकाल फेंकी और ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी...
इतनी बेशरम शायद वो आज से पहले कभी नही हुई थी जब उसकी बेटी घर पर हो और वो राजेश के साथ ऐसी रासलीला मनाने जा रही हो..
पर इस वक़्त शायद उसका खुद पर भी काबू नही रह गया था और ये बात उसके खड़े हुए निप्पल्स सॉफ दर्शा रहे थे...
नंगे होने के बाद उसके मुम्मे और उनपर लगे निप्पल्स और भी कठोर हो चुके थे.
अब तो बस उसका मन कर रहा था की राजेश उन्हे पकड़े और निचोड़ डाले...
अंदर ही अंदर उसकी रगों में जो मीठा सा दर्द उठ रहा था वो इसी तरीके से जा सकता था.
उसने जल्दी से अपना पायजामा भी उतार फेंका और बाथरूम के अंदर जा घुसी.
अंदर का नज़ारा देखकर उसके तन बदन की आग और भी भड़क उठी...
राजेश अपने पूरे शरीर में साबुन लगाकर अपने खड़े लंड को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लेकर मसल रहा था...
शायद ईशा के जवान जिस्म को सोचकर वो अपने नाग को सहला कर शांत करने की कोशिश कर रहा था.
उसने भी जब रजनी को नंगी ही अंदर आते देखा तो उसके हाथो की गति और तेज हो गयी...
पर फिर उसने हाथो को बड़ी मुश्किल से रोका, क्योंकि ऐसा करके तो वो खुद ही अपना माल निकाल देता और फिर रजनी को बुलाने का कोई मतलब ही नही रह जाना था.
और आज तो उसे रजनी की चूत अच्छी तरह से चोदनी थी...
उसने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने गले से लगाकर उसके पूरे शरीर पर अपना बदन रगड़ने लगा...उसके होंठो को मुँह में लेकर उन्हे चूसने लगा और उसकी देसी शराब जैसे होंठो का मज़ा लेने लगा.
रजनी भी अपने भरे पूरे मुम्मो को राजेश के बदन से रगड़कर अपनी खुजली कम करने की कोशिश करने लगी... राजेश ने उसे सामने से पूरा रगड़ा और फिर उसे पलटाकार उसकी गांड से चिपक गया और अपने हाथ आगे करके उसके मोटे मुम्मो को अपने हाथो से निचोड़ने लगा.
उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जादू था राजेश के हाथो में...
इन्फेक्ट मुम्मो को कैसे निचोड़ा जाता है ये एक मर्द ही अच्छे से जान सकता है
यही तो सोचती हुई आ रही थी वो की उसका पति उसके मुम्मो को पकड़े और निचोड़ डाले.
राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर फिसलकर उनकी मसाज करने लगे..
साथ ही साथ वो उसकी भरंवा गांड पर अपने खड़े लंड की रगड़ाई भी कर रहा था...
साबुन की फिसलन इतनी थी की वो अगर अपने लंड को पकड़कर उसकी गांड पर लगाता तो भी वो वहाँ जा घुसता...
हालाँकि आज तक राजेश ने कभी गांड नही मारी थी रजनी की पर अब शायद शेफाली की कृपा से वो काम भी कर सकता था...
पर ये जगह पहली बार गांड मरवाई के लिए सही नही थी क्योंकि उसमे दर्द भी होना था उसे
और इस वक़्त वो उसे दर्द नही बल्कि मज़े देना चाहता था