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HIndi XXX kahani बदनसीब फुलवा; एक बेकसूर रण्डी

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सुबह की पहली किरण का स्वागत प्रिया ने अपने पति को चूसकर उठाते हुए किया। जूलियस अंकल नाश्ता लेकर आए तब तक चिराग ने प्रिया को अच्छे से सबक सिखाकर बिना हड्डी की गुड़िया बना दिया था।

जूलियस अंकल ने दोपहर के खाने के बाद पहनने के कपड़े लाए थे। पार्टी ड्रेस देख कर प्रिया चौंक गई।

प्रिया, "हम कहीं जा रहे हैं?"

चिराग मुस्कुराकर, "गोवा के कैसिनो लूटने!!"

जूलियस अंकल ने लाया ड्रेस प्रिया ने जल्दी पहने जिस वजह से चिराग ने उसे उसकी खूबसूरती की तारीफ करते हुए वापस भर दिया। दोपहर 2 बजे जूलियस अंकल के आते हुए दोनों ने जल्दबाजी में अपने कपड़े दोबारा पहने और तयार हो गए।

दोपहर का खाना खाकर तीनों boat में बैठ कर किनारे पहुंच गए। जूलियस अंकल ने अपनी गाड़ी चिराग को दी और enjoy करने का आदेश भी दिया।

चिराग प्रिया को लेकर वहां से सीधे एक कैसिनो पहुंचा और उसने प्रिया को खेल के नियम सिखाते हुए 1000 रुपए दिए।

प्रिया अपनी फोटोग्राफिक मेमोरी के कारण जल्द ही जितने लगी और उसके 1000 2 घंटों में 1 करोड़ रुपए बन गए। चिराग के कहने पर प्रिया ने 1000 रुपए की टिप दी और दोनों वहां से बाहर निकले। प्रिया ने नाचते हुए फिर चिराग को गले लगाया और एक क्लब में जाकर दोनों नाचे।

आधे घंटे बाद प्रिया को अगले कैसिनो जाने का मन हुआ और 2 घंटे बाद वहां से भी 1000 के करोड़ बनाकर दोनों बाहर निकले। सबेरे जब गोवा के आखरी कैसिनो को साफ कर जब दोनों हंसते हुए बाहर निकले तब तक प्रिया 5000 से 4 करोड़ 99 लाख 95 हजार बना चुकी थी।

कैसिनो में से बाहर निकलते ही उन्हें एक पुलिस ऑफिसर ने रोका।

DSP सालसकर, "तुम दोनों बहुत होशियार हो की 1 करोड़ जितने के बाद 1 हजार की टिप देकर कैसिनो के complain से बच गए पर याद रखना तुम्हें दोबारा कैसिनो में आने नहीं दिया जाएगा!"

प्रिया मासूमियत में हंसकर, "हम तो हनीमून पर मजा करने कैसिनो आए थे। वापस जाने की हमें कोई इच्छा नहीं!"

DSP सालसकर, "प्रियाजी, आपके बारे में हमने छानबीन की और आपका कोई अतीत नहीं मिला। पर फोटोग्राफिक मेमोरी अक्सर अनुवांशिक होती है। क्या आप के किसी रिश्तेदार में यह खूबी है?"

प्रिया को अपनी मां याद आई और वह कोई चीज याद रखना चाहे ऐसे उसकी हालत नहीं थी। चिराग ने आगे बढ़कर कहा की प्रिया का अतीत नहीं क्योंकि वह अनाथ है। सालसकर ने दोनों को आइंदा कैसिनो से दूर रहने को कहते हुए उन्हें उनके रिसॉर्ट तक पहुंचाया।

प्रिया ने चिराग को जूलियस अंकल को उठाने से रोका और दोनों ने बाकी रात boat में बैठ कर बिताई। प्रिया का मन डर से भरा हुआ था।

प्रिया चिराग की बाहों में समा कर, "मुझे नहीं लगता कि मेरी मां को फोटोग्राफिक मेमोरी थी। मेरे अब्बू को यकीनन यह नहीं थी। मेरे बाकी रिश्तेदार की मुझे कोई खबर नहीं। अगर मुझे कोई बीमारी हुई तो?"

चिराग, "अगर कल मुझे कुछ हो गया तो क्या तुम मुझे छोड़ दोगी?"

प्रिया गुस्से में, "क्या बकवास है!"

चिराग मुस्कुराकर, "बिलकुल!!"

प्रिया अपने प्यार की बाहों में समा कर अपनी मां की अच्छी यादें याद करने लगी।

3 दिन चिराग की बाहों में बिताकर प्रिया जूलियस अंकल को शुक्रिया अदा कर वापस लौटने के लिए हवाई पट्टी पर पहुंची। मानव शाह के दोस्त ने दोनों को अपने नुकीले तीर में बिठाया और सब लोग वापसी के सफर में लग गए।

प्रिया, "आप मानव शाह को कैसे जानते हो?"

आदमी, "उन्होंने मेरी रिटायरमेंट के बाद मुझे कुछ काम के कॉन्ट्रैक्ट दिए।"

प्रिया, "आप रिटायरमेंट की उम्र के नहीं लगते! आप क्या करते थे?"

आदमी मुस्कुराकर, "मैं एक तरह का पत्रकार था जो वहां की खबर यहां लाने का काम करता था।"

चिराग, "आप हमेशा दस्ताने पहनते हो। जिसका मतलब आप के हाथ पर चोट के निशान हैं। ऐसे लोगों को हवाई जहाज का लाइसेंस नहीं मिलता पर आप के पास है। आप आम पत्रकार नहीं थे! आप वह खबर लाते जिसे लाना मना किया गया था!"

प्रिया, "आप जासूस थे!! James Bond की तरह!"

आदमी, "नहीं। मैं पकड़ा गया और मेरी पहचान खुल गई। अनजाने में किए एक एहसान ने मेरी जान बचाई पर मुझे रिटायर किया गया। अब मैं वही काम मानव शाह के लिए करता हूं और जाहिर सी बात है। (जहाज को छू कर) अच्छी कीमत में करता हूं।"

प्रिया और चिराग जुहू से गाड़ी में बैठे और वापस आने लगे जब प्रिया ने चिराग को बताया,
"मैंने उस आदमी को कैसिनो में कुछ बुरे लोगों के साथ देखा। अब मुझे पता है कि मानव शाह ड्रग्स की तस्करी कैसे रोकता है!"

चिराग, "इसी वजह से उसका नाम पता वह किसी को नहीं बताता। हमारी खामोशी की कीमत उसकी जान है!"

दोनों ने एक और राज़ अपने सीने में दबाया और घर लौटे।

प्रिया ने मानव को हनीमून के लिए शुक्रिया कहने की कोशिश की पर उसने उस रिजॉर्ट को उसका खाली पड़ा कमरा कहकर टाल दिया। चिराग ने प्रिया को बताया की जब वह लगभग 5 करोड़ जीती तब वह भी 5 लाख जीता था पर प्रिया की जीत में उसकी जीत आसानी से छुप गई।

चिराग ने इन पैसों से एक इन्वेस्टमेंट फंड बनाया और वह प्रिया के नाम कर दिया। इस तरह प्रिया कभी भी किसी के पैसों की मोहताज नहीं होगी। प्रिया ने अपने इन्वेस्टमेंट फंड को खुद चलाने का जिम्मा उठाया। मानव शाह ने प्रिया की फोटोग्राफिक मेमोरी का लोहा मानते हुए उसके इन्वेस्टमेंट फंड में अपने 5 करोड़ लगाए।
 
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दो साल बाद

अब सब जानते थे कि चिराग ही C corp का असली वारिस है तो चिराग पर मरने वाली लड़कियां कम नहीं थीं। जवान, अमीर और होशियार चिराग को उसी के घर में उसी की शादी की दूसरी सालगिरह की पार्टी में ललचाने की वजह भी थी। अंदेशा था कि चिराग ने प्रिया को 6 महीनों से छुआ नहीं था। मर्द ऐसी हालत में अक्सर फिसलते हैं!

पार्टी में चिराग के साथ नाचती लड़की ने उसे खूब रगड़ा पर चिराग की पैनी नजर प्रिया पर थी जो पेस्टन दारूवाला का हाथ पकड़ कर उसका दुखड़ा सुन रही थी। गाना खत्म होते ही चिराग प्रिया के बगल में पहुंचा और प्रिया को वादा करते हुए सुना।

प्रिया, "पेस्टन तुम डरता कैसे? मैं आयेगी डिंपी से मिलने और उसके लिए गिफ्ट भी लाएगी!"

पेस्टन, "डिकरा, हम 30 साल जवान होता तो तुम्हारा चिराग को हरा के तुमको उठाता!"

प्रिया, "come on! आप अभी भी कितना active हैं! डिंपी को रोज आप थकाते हो!"

प्रिया को चिराग के हवाले करते हुए पेस्टन, "इसको संभालो! इसका कीमत तुमको मेरी उमर में पता चलेगा!"

पेस्टन दारूवाला चला गया और चिराग प्रिया को देखता रहा।

चिराग, "उस खडूस दारूवाला पर तुमने क्या जादू किया?"

प्रिया अकड़ते हुए, "पेस्टन की डिंपी पेट से है और वह डिंपी के लिए परेशान है!"

चिराग पेस्टन को देखते हुए, "खडूस बुड्ढा 80 के नीचे नही हो सकता। डिंपी कितनी बूढ़ी होगी!"

प्रिया, "12 साल की।"

चिराग, "क्या!! पेस्टन ने 12 साल की लड़की को पेट से किया है?"

प्रिया मुंह बनाकर, "दिमाग गटर में से बाहर निकालो! डिंपी उसकी पालतू कुत्ति है। और वह बूढ़ी होकर भी पेट से हो गई है इस लिए खास अस्पताल में है।"

चिराग, "मुझे इस से क्या मतलब?"

प्रिया मुस्कुराकर, "वह बूढ़ी कुत्ति और उसके बच्चे पेस्टन के 3000 करोड़ के वारिस हैं। अगर तुम्हें डिंपी की अभी फिकर है तो शायद अगली बार दारूवाला इतना खुसट नहीं होगा!"

चिराग हार कर, "ठीक है! मैं उस डिंपी से मिलने जाऊंगा। उस से खेलूंगा भी।"

प्रिया मुस्कुराकर, "डरो मत! मैं तुम्हारे साथ रहूंगी!"

चिराग का गुस्सा फूट पड़ा।

चिराग, "बिलकुल नहीं! तुम जानवरों के अस्पताल में नहीं जा रही! बस!!"

प्रिया, "मुझसे बेहतर डिंपी को कौन समझ सकता है?"

चिराग, "वही तो! अगर डिंपी के पेट में दारूवाला का वारिस है तो तुम्हारे पेट में हमारा वारिस है। तुम जानवरों के हस्पताल में नहीं जा रही!"

सब की आंखें प्रिया के 8 महीने फूले हुए पेट से चिराग के लाल चेहरे पर गई।

प्रिया, "मां!!. चिराग मुझे डांट रहा है!"

फुलवा ने प्रिया की तरफदारी करते हुए चिराग को डांटना शुरू किया।

फुलवा, "डिंपी एक अच्छी पालतू कुत्ति है? वह एक अच्छे अस्पताल में है? अगर मैं अस्पताल में रही तो क्या तुम प्रिया को मुझसे मिलने से रुकोगे?"

चिराग, "हां!. हां!. और हां!!. जब प्रिया अस्पताल में जायेगी तब वह हमारे बच्चे के लिए जायेगी! तब तक मैं उसके साथ कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहता!"

दारूवाला चिराग से, "तुम इस प्यारी बच्ची को मेरी बेबी से मिलने से रोकेगा? मेरे खिलाफ जायेगा?"

चिराग गहरी सांस लेकर, "दारूवाला जी, मैं आप की भावनाओं की कदर करता हूं पर एक पति, एक बाप की हैसियत से मैं प्रिया को अभी डिंपी से मिलने नहीं दे सकता!"

दारूवाला अपना सर हिलाकर चला गया और सब लोगों ने पूरा वाकिया न देखने का नाटक किया।

काम्या के पति मोहन गांधी ने चिराग के कंधे पर हाथ रखकर उसे एक तरफ लाया।

मोहन गांधी, "दारूवाला Alpha prime male है। ऐसा alpha male जो बाकी सब alpha का बॉस है। उस से अपने परिवार की हिफाजत के लिए आज तक सिर्फ 2 alpha male लड़े हैं।"

चिराग थक कर, "क्या हुआ उनका?"

मोहन गांधी मुस्कुराकर, "मानव शाह को तो तुम जानते हो। अब देखना है कि तुम्हारे साथ क्या होता है!"

चिराग अचरज में, "Thank you?"

फुलवा और प्रिया को देख हर औरत को ऐसी सास बहू की चाहत होती और चिराग की आंखों को प्रिया पर देख कर है औरत को प्रिया होने की चाहत होती।

आज की पार्टी में किसी वजह से छोटेलाल और मानव शाह नहीं आ पाए थे। पार्टी ख़त्म होने के बाद जब सब घर लौटे तो फुलवा अपनी बहु को अपनी गोद में सर रख कर आराम करने देते हुए प्लान बना रही थी कि कैसे दोनों डिंपी से मिलने जाएं। चिराग उन्हें देख कर सोच रहा था की दो alpha prime females को एक मर्द भला कैसे काबू करे।

फोन की घंटी ने सबको चौकाया और चिराग ने फोन उठाया।

मानव फोन पर, "चिराग!! वक्त नहीं है! प्रिया को ढूंढने वाले तुम्हारे दरवाजे पर कभी भी पहुंची जायेंगे! मैं और छोटे उन्हें रोक नहीं सकते! प्रिया को अभी अंदर छुपा! अभी!!"

दरवाजे पर दस्तक हुई और सबकी नजरें दरवाजे पर रह गई। चिराग ने प्रिया को बेडरूम में बंद कर दिया और अपने फोन से उसे इस कमरे की बातें सुनाने लगा ताकि वह बाहर ना आए।

फुलवा ने शांत चेहरे से दरवाजा खोला और बाहर खड़े आदमी को देख कर उसका मुंह खुला रह गया।

आदमी ठंडे स्वर में, "अंदर आ सकता हूं?"

फुलवा ने उसे अंदर आने दिया और कुर्सी की ओर इशारा किया।

आदमी, "आप के पास ज़िन नाम की लड़की है। मुझे वह चाहिए!"

चिराग, "मैं ऐसी किसी लड़की को नहीं जानता।"

आदमी, "मैं किसी भी इंसान से मिलने से पहले उसकी सारी जानकारी इक्कठा करता हूं। फुलवा कोई विदेश में रही औरत नहीं! वह एक रण्डी और डकैत थी! और तुम चिराग! तुम्हें एक हिजड़े ने पाला है! में तुम दोनों को चुटकियों में बरबाद कर सकता हूं! तुम्हें दोबारा रण्डी और अनाथ बना सकता हूं! या फिर ज़िन को मेरे हवाले कर कई गुना तरक्की के मालिक बनो!"

अगर वह आदमी फुलवा और चिराग को डराना चाहता था तो उसका असर उल्टा हुआ।

फुलवा, "आप से मुझे ज्यादा उम्मीद थी, लाला ठाकुर! आप मुझे रण्डी बना दोगे पर मैं तो वैसे भी जी चुकी हूं। मुझे कोई फरक नही पड़ेगा!"

चिराग, "मैंने अपनी जिंदगी के पहले 18 साल अपनी मां को ढूंढने में बीता दिए। लेकिन अब मैं उस से मिल चुका हूं। अब आगे जो भी हो, मैं अनाथ नहीं हूं!"

लाला ठाकुर, "मैं SP अधिकारी की इज्जत मिटा दूंगा!"

चिराग, "मां, अधिकारी सर ने अपनी सारी दौलत हिजड़ों को मदद करने वाली संस्था को दी। उन्हें मरे अब कई साल हो चुके हैं। अब हमें उनकी सच्चाई सब को बतानी चाहिए! इस से अगली पीढ़ी के बच्चों को प्रेरणा मिलेगी!"

फुलवा ने अपने सर को हिलाकर चिराग की बात मानी तो लाला ठाकुर उनकी आंखों के सामने मानो टूट कर बिखरने लगा।

लाला ठाकुर, "तुम दोनों नहीं जानते की तुम्हारे कितने अच्छे दोस्त हैं। मैं अब बस एक तरीके से ज़िन को हासिल कर सकता हूं। ऐसा तरीका जिसे मैने कभी नहीं आजमाया। सच्चाई से!"

लाला ठाकुर फुलवा की आंखों में देख कर, "तुम गरीब थी। भूख जानती हो। भूख कई तरह की होती है। आम भूख खाने से थमती है। गरीबी की भूख में सिर्फ इतना खाना मिलता है कि उसकी जलन रुकती है। मजबूरी की भूख खाने के लिए पेट को अंदर से खाने लगती है। वहशत की भूख वह होती है जब इंसान जीने के लिए दूसरे इंसान को खा जाए। आखरी होती है मौत की भूख जब इंसान खाना खा नही पता और फिर मर जाता है।"

लाला ठाकुर चिराग को देख कर, "एक और भूख होती है। श्रापित भूख! यह ऐसी वहशी भूख होती है जो महापापियों को मिलती है। जहां इंसान कुछ भी खाए उसकी भूख न मिटती है और न ही वह मरता है। इस श्राप का इलाज है एक खास निवाला। ऐसा निवाला जिसे पाने से पाप मुक्त हो कर वह मर पाए! ज़िन मेरा इलाज वाला निवाला है! उसे मुझे दे दो!!"

मां बेटे के डरे हुए चेहरे देख कर लाला ठाकुर मुस्कुराया।

लाला ठाकुर, "मैं श्रापित हूं। मैं कभी नहीं भूलता। पिंकी मैंने अपना वादा निभाया और तुम्हारे भाइयों को न केवल तुम्हारा पैगाम दिया पर इंसाफ के लिए तुम्हारे पिता का पता भी दिया। 2 महीनों बाद मैं तुम्हें बचाने आया था। पर दो दिन पहले ही तुम्हारे भाई तुम्हें छुड़ा कर ले गए थे। उसके बाद मैंने तुम्हें ढूंढने की कोशिश नहीं की।"

फुलवा रो पड़ी और लाला ठाकुर अपनी कहानी बताने लगा।
 
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लाला ठाकुर, "मैं स्कूल में था जब एक अनजान आदमी ने मुझे एक्सीडेंट से बचाया। मैं उसे अपने घर ले गया और उसे अपने घर में नौकरी दिलाई। यही मेरा महापाप था!"

फुलवा की आंखों में देखते हुए लाला ठाकुर, "ठीक एक महीने बाद वह मेरी प्रिया दीदी को अगवा कर ले गया। पुलिस ने कहा कि मेरी दीदी अपनी मर्जी से भागी है और रिपोर्ट लेने से इंकार किया। मैने कसम खा ली की मैं प्रिया दीदी को वापस लाऊंगा।"

चिराग को देखते हुए लाला ठाकुर, "मेरी भूख उस दिन शुरू हुई। मुझे फोटोग्राफिक मेमोरी का श्राप है। मैं कभी कुछ नहीं भूलता। मेरे माता पिता ने मुझे मदद करने से मना किया तो मैने अपना पैसा खुद बनाया। पैसा कोई मायने नहीं रखता अगर तुम अपना निवाला उन पैसों से खरीद ना पाओ।"

फुलवा को देखते हुए, "उम्र के 25 वे साल तक मैं लगभग पूरे देश के हर रंडीखाने को ढूंढ चुका था। शायद उतनी रंडियां चोद चुका था। पर मेरी भूख बस बढ़ रही थी। जहां मुमकिन था मैने लड़कियों को बचाया पर मेरी भूख नहीं थमी। वह मेरा निवाला नहीं थी!"

चिराग को देखते हुए, "तुमने अपना बचपन बिताया अपनी मां को ढूंढने में। मैने अपनी जिंदगी लूटा दी प्रिया दीदी की एक झलक के लिए।"

अधर में नजर लगाए, "30 साल बीत गए। मां बापू मर गए। मेरी भूख न मुझे जीने देती और ना ही मरने देती। ऐसे अधूरे इंसान से कौन शादी करे? पैसे के लिए कई आईं और मैने उन्हें पैसे दे कर भगा दिया पर मेरा दिल कब का मर चुका था। उसे मेरा भूखा पेट खा चुका था!"

कुछ होश में आ कर फुलवा को देखते हुए, "4 साल पहले मुझे एक कॉल आया। डरी हुई आवाज न बताया की मेरी आपा मर चुकी है और अब मैं उसे ढूंढना बंद कर दूं। कॉल बहुत कम वक्त का था पर मैंने उसका पता लगा लिया और अपने गुंडों के साथ पुरानी दिल्ली पहुंचा। वहां मुझे वह दगाबाज मिला जिसने मेरी दीदी को अगवा किया था। मेरे सर पर खून संवार था। मैंने पूछताछ की तो पता चला कि दगाबाज ने पिछले हफ्ते मेरी दीदी की सीढ़ियों से गिराकर मार डाला था।"

लाला ठाकुर के चेहरे पर किसी खूंखार जानवर के भाव थे।

लाला ठाकुर, "दगाबाज ने मुझ से वादा लिया की अगर वह मुझे अपनी दीदी की आखरी निशानी का पता बता दे तो मैं उसे नहीं मारूंगा। भूख बड़ी बेरहम सजा है। मैने वादा किया कि मैं उसे नहीं मारूंगा पर उसके सामने उसे 30 साल से पनाह देने वाले सब को मार डाला।"

फुलवा को देखते हुए, "दगाबाज को मैं जंगल में ले गया और वहां पर उसे एक टीले पर बांध कर छोड़ दिया। अपनी जीत की खुशी मनाते हुए दगाबाज ने बताया की ज़िन को नरबली के लिए बेचा गया है और उसने एक बात छुपाई थी। यही की अब तब ज़िन राज नर्तकी की भेंट चढ़ चुकी होगी। मैंने अपना वादा निभाया और उसे जिंदा छोड़ दिया। मैने भी उसकी तरह एक बात छुपाई थी। यही की जिस टीले पर हाथ पांव बांध कर उसे रखा था वह लाल चिटियों का छत्ता था। कुछ ही पलों में जंगल दगाबाज की चीखों से गूंज उठा जब चीटियां उसे जिंदा खा गई।"

अपने ससुर की दर्दनाक मौत से चिराग को कोई अफसोस नहीं था।

फुलवा को देखते हुए, "मैं राज नर्तकी की हवेली पहुंचा तब दोपहर का वक्त था। हवेली की जगह पर एक खंडहर था। कई सौ लाशों को जंगली जानवर नोच कर खा रहे थे। पता लगाना मुश्किल था कि कौनसी लाश कब मरे हुए इंसान की है! ज़िन जैसे गायब हो गई थी।"

चिराग को देखते हुए, " मैंने तहकीकात जारी रखी और पता चला कि कुछ लोगों को उनका चोरी हुआ सामान वापस मिल गया है। साथ ही किसी चूतपुर के मुनीम ने राज नर्तकी के जेवरात museum को दान कर दिए थे। लेकिन चूतपुर के मुनीम से कुछ हाथ नहीं आया!"

अपनी आंखें बंद कर लाला ठाकुर, "उस रात मैंने अपनी पिस्तौल में एक गोली भरी, नली को अपने मुंह में लिया और घोड़ा दबाया। पिस्तौल चली, गोली पर चोट लगी पर गोली नहीं चली! मैने कहा था ना, इस श्राप का कोई इलाज नहीं!"

"चार साल नाउम्मीद होकर जीने के बाद पिछले हफ्ते मैं भक्तावर सेठ से मिलने गया जब उसकी बीवी एक पेंटिंग की जगह बदल रही थी। पेंटिंग का नाम राज नर्तकी था और उसके पहने जेवरात मैने लखनऊ के म्यूजियम में देखे थे। कलाकार का नाम प्रिया लिखा था पर भक्तावर ने कोई जवाब नहीं दिया। भक्तावार के पहचान की प्रिया को ढूंढना मुश्किल नहीं था और मैं यहां तक पहुंच गया।"

लाला ठाकुर की आंखें नम हो गई थी और वह अपने घुटनों पर बैठ गया।

लाला ठाकुर गिड़गिड़ाते हुए, "मुझे कोई फरक नहीं पड़ता कि आप लोगों ने प्रिया की निशानी को कैसे रखा है। उसे जिंदा रखने के लिए मैं आप का एहसानमंद हूं। बस ज़िन को एक बार मैं उसके घर ले जाऊं! बस एक बार मैं उसे उसकी मां का हक लौटाऊं तो मेरी जिंदगी भर की तड़प मिट जाए! अपनी भांजी को एक बार देख लूं तो शायद गोली धोखा ना दे!"

लाला ठाकुर पूरी तरह टूट गया था। जब उसके कंधे पर सहानुभूति भरा हाथ रखा गया तो वह रोने लगा।

लाला ठाकुर, "मैं थक गया हूं। दीदी से किया वादा मुझे जीने नहीं देता और यह भूख मुझे मरने नहीं देती! बस एक बार मैं प्रिया दीदी को किसी तरह उसके घर ले जाऊं तो शायद मैं मर पाऊं!!"

प्रिया ने लाला ठाकुर के बगल में बैठ कर, "अम्मी जानती थी कि आप उन्हें ढूंढ रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने मरने के बाद अपनी सहेली उर्फी के जरिए आप को संदेश भिजवाया। उर्फी मौसी कैसी है?"

लाला ठाकुर ने प्रिया का चेहरा अपने हाथों में लेकर, "हमेशा दूसरों के बारे में सोचना अच्छा नहीं होता दीदी! (सिसक कर) अब उर्फी नही रही पर चंदा गल्फ में नौकरी कर काफी अमीर बन कर अपने गांव लौट गई है। तुम नही जानती पर तुम अपनी मां की छवि हो! क्या तुम प्रिया का हक लेकर मुझे आज़ाद करोगी? अपने गांव लौटकर अपनी विरासत संभालोगी?"

प्रिया, "अम्मी हर रक्षा बंधन के दिन एक धागा मेरे हाथ पर बांध कर कहती की एक दिन मेरे मामाजी मुझे मिलेंगे। मुझे यकीन नहीं हो रहा की वह बात सच है! लेकिन मामाजी मैं अभी गांव नहीं आ सकती!"

लाला ठाकुर, "तुम डरना मत! कोई तुम्हें नहीं रोकेगा!! (चिराग को देख कर) इसे कितने में खरीदा था? छोड़ो! कितना चाहते हो? जो चाहे मांग लो! करोड़? 10 करोड़? सौ करोड़? कितना?"

प्रिया खड़ी हो गई और दोबारा बोली,
"मामाजी, मैं कोई गुलाम नहीं, चिराग की बीवी हूं। अब देख रहे हो ना की मैं अभी गांव क्यों नहीं आ सकती?"

लाला ठाकुर प्रिया का खिलता बदन निहारते हुए, "तुम मजबूर गुलाम नहीं हो? इज्जतदार अमीर बहु हो? तुम मां बनने वाली हो? मैं. मैं नाना बनूंगा?"

प्रिया, "फुलवा मां ने मुझे नरबली होने से बचाया, मुझे पढ़ाया, मुझे काबिल बनाया और मुझे अपने प्यार से भी मिलाया! मैं आज ज़िन नहीं प्रिया हूं क्योंकि फुलवा मां मुझे मिली!"

लाला ठाकुर फुलवा के पैरों में गिर गया और रोते हुए बोला,
"मैंने अपनी दीदी को बरबाद होने दिया, तुम्हें रंडीखाने में छोड़ा और ज़िन को भी बचाने में नाकाम रहा पर तुमने न केवल खुद को बचाया पर मेरी दीदी की आखरी निशानी को भी बचाया! उसे अपनी बहु बनाया! उसे सम्मान दिया! मैं नालायक आप का गुलाम रहूंगा!"

फुलवा ने लाला ठाकुर को उठाते हुए, "आप ने मुझे औरत होने का एहसास दिलाया। अगर आप ना होते तो मैं अंदर ही अंदर कब की मर चुकी होती। आप हमेशा मुझे याद रहे क्योंकि आप अकेले थे जिन्होंने मुझे इज्जत दी। मेरे भाइयों ने भी मुझ में एक रण्डी देखी पर आप ने प्यार को तरसती लड़की को पहचाना। आप दुखी न होना। जो हुआ वह बस नसीब की बात थी। सोचो, अगर आप मुझे Peter अंकल से बचा लेते तो ना चिराग पैदा होता और ना ही मैं प्रिया को बचा पाती!"

लाला ठाकुर ने हाथ जोड़कर मां बेटे से उन्हें धमकाने की माफी मांगी और अपनी भांजी से उसे न बचा पाने के लिए भी माफी मांगी। लाला ठाकुर वह राक्षस था जो कुछ मिनटों में अपना अहंकार और गर्व त्याग कर अचानक इंसान बन गया था।

लाला ठाकुर को कमरे में आए आधा घंटा हुआ था जब दोबारा घंटी बजी।

चिराग ने दरवाजा खोलते ही मानव शाह, छोटेलाल और भक्तावर ने अंदर कदम रखा। तीनों दोस्त बातें करने के तय समय बाद उन्हें बचाने आए थे। प्रिया को लाला ठाकुर का हाथ अपने हाथों में लेकर बातें करते हुए देख कर तीनों पीछे मुड़ कर चले गए।

फुलवा ने प्रिया से बात करके तय किया कि लाला ठाकुर हर रोज प्रिया के साथ एक घंटा फुलवा की मौजूदगी में बीता सकता है। प्रिया अपने बच्चे को जन्म देने के 2 महीनों बाद अपने पूरे परिवार समेत अपने मामाजी के साथ अपना गांव देखने जायेगी।

हालांकि चिराग को लाला ठाकुर पर पूरा भरोसा नहीं हुआ था वह बस उसके alpha prime male होने का हिस्सा था। चिराग ने दारूवाला से मदद मांगी और लाला ठाकुर के अतीत को खंगाला।

लाला ठाकुर ने अपने माता पिता से मिली पूरी दौलत को अपनी दीदी के नाम से एक ट्रस्ट में रख कर उसे बढ़ाते हुए C corp के बराबरी का कारोबार बनाया था। यह पूरी दौलत अब वह अपनी भांजी को देने के लिए उतावला था। सास बहू और मामाजी रोज मिलते, बातें करते और चिराग के मना करने के बावजूद डिंपी से भी मिल कर आए।

लाला ठाकुर की अपनी निजी संपत्ति थी जो उसने बड़ी बेरहमी से उन लोगों से छीन कर बनाई थी जो औरतों को देह व्यापार में झोंकना अपना धंधा समझते थे। इस संपत्ति की शुरुवात मासूमों के खून से हुई थी पर अंत दगाबाजों के खून से हुआ था। लाला ठाकुर ने इस दौलत को दुनिया में कई जगह लगाकर बड़े और खतरनाक दोस्त बनाए थे जिन में कई देश शामिल थे।

लाला ठाकुर गुनाहों का मानव शाह था।

फुलवा के जन्मदिन के 7 दिन बाद चिराग को लाला ठाकुर ने जल्दबाजी में अस्पताल बुला लिया। प्रिया को दर्द शुरू हो गया था और दोनों मर्द हॉस्पिटल के गलियारों के चक्कर काटते हुए अगले 11 घंटों में दोस्त बन गए।

प्रिया की चीखें सुनकर दोनों ने तय किया कि अगर चिराग ने प्रिया को दुबारा छूने की कोशिश की तो उसका लौड़ा काट दिया जाए। उनकी बेवकोफियों पर काम्या और काली हंस पड़ी पर मानव और मोहनजी ने हमदर्दी जताई।

डॉक्टर जब फुलवा के साथ चिराग की बेटी को लाए तब चिराग ने प्रिया के बारे में पहले पूछा और लाला ठाकुर ने उसे अपना दामाद मान लिया। प्रिया थकी हुई थी पर अपने बेटी को सीने से लगाए काफी खुश और डरी हुई थी।

सबने प्रिया की तारीफ की और डॉक्टर ने प्रिया को 3 दिन बाद हॉस्पिटल से रिहा करने का वादा किया। सवा महीने बाद छोटी साक्षी अपने माता पिता दादी और नाना के साथ मंदिर गई और दो महीने बाद अपने पहले सफर पर निकली।

गांव में दिवाली जैसी रोशनाई थी कि बरसों के बाद प्रिया लौट रही थी। चिराग और प्रिया अपनी बेटी से साथ प्रिया के घर में कुछ दिन रहे लेकिन दोनों को मुंबई लौटना पड़ा। C corp अब चिराग खुद चला रहा था तो प्रिया अपने मामाजी से मिली फोटोग्राफिक मेमोरी के कारण अपनी इन्वेस्टमेंट फंड के साथ अब धीरे धीरे अपनी विरासत में मिली कंपनी भी संभालने वाली थी।

मामाजी से विदा लेकर चिराग और प्रिया लौटने के लिए गाड़ी में बैठे तो फुलवा ने दोनों के माथे को चूमा और उनके साथ आने से मना कर दिया।

चिराग, "मां, यहां रहकर क्या करोगी? आप के सारे दोस्त रिश्तेदार मुंबई में है!"

फुलवा शर्माकर, "मैं मुंबई आती जाती रहूंगी लेकिन मुझे अपनी जिंदगी का छूटा हुआ एक पड़ाव पूरा करना है। मैं बेटी, प्रेमिका, मां और दादी बन चुकी हूं पर (लाला ठाकुर का हाथ पकड़ कर) मुझे पत्नी बन कर जीना है।"

प्रिया ने चिराग का हाथ पकड़ कर उसे बिना बोले समझाया और दो मर्दों ने आंखों ही आंखों में एक दूसरे को धमकाया। चिराग ने फुलवा से कहा कि वह फोन पर बात करते रहेगा और लाला ठाकुर को तीखी नजर से देखते हुए चला गया।

एक महीने बाद गांव दोबारा रौशनाई से चमक रहा था क्योंकि गांव के ठाकुर ने गांव के मंदिर में शादी कर ली थी। आज फुलवा अपने पहले प्यार को अपना आखरी प्यार बना चुकी थी।

अपनी पोती को गोद में लिए अपने पति, बेटे और बहु को देखते हुए फुलवा मुस्कुराई। फुलवा जानती थी कि वह न कभी बदनसीब थी और न कभी रण्डी। किस्मत ने बस उसे थोडा इंतजार कराया था।

समाप्त
 
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