• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.
और वो फिर से कड़क हो गया...अपने लंड को एडजस्ट करता हुआ वो वापिस घर की तरफ चल दिया.

घर पहुँचकर वो कुछ देर तक ईशा के पास बैठा, पैर में बेंडेज लगाने की वजह से उसने शॉर्ट्स पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी जाँघ चमकती हुई दिखाई दे रही थी...
राजेश का मन तो कर रहा था की जीभ निकाल कर उसकी चिकनी जाँघो को चाट ले पर उसे अंदर ही अंदर ये भी पता था की अभी तो नही पर एक बार वो नैकलेस पहन ले तो ये काम ज़रूर हो सकता है...
शेफाली उसकी बेटी को उसके लिए तैयार करेगी..
ये सोचते हुए वो मंद मंद मुस्कुराने लगा.

अपने पापा को ऐसे बेवजह मुस्कुराते हुए देखकर ईशा बोली : "पापा....क्या बात है, क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो...''

राजेश : "उम्म...ना.....नही ...कुछ भी तो नही....बस ऐसे ही...चलो अब तुम आराम करो, कल बात करते है, कल मॉर्निंग में एक एक्सरे करवाने के लिए तुम्हे मेरे साथ हॉस्पिटल चलना होगा ओके ...सो जाओ अभी...गुड नाइट.''

इतना कहकर उसने एक गीला सा चुम्बन उसके माथे पर किया और उपर बने बेडरूम की तरफ चल दिया..
और जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उसकी साँसे मानो वहीं रुक सी गयी

अंदर का सीन ही इतना सैक्सी था
उसकी बीबी रजनी अपने पूरे कपड़े उतारकर बेड पर नंगी लेटी हुई थी...
और उसकी गदरायी हुई गांड दरवाजे की तरफ थी,
राजेश को दूर से ही उसकी मोटी गांड में से झाँक रहे उसके दोनो छेद सॉफ नज़र आ रहे थे..

101d32c347ab4a74b.jpg
राजेश मन ही मन बुदबुदाया : "उफफफ्फ़ शेफाली....तुम तो मार ही डालगी मुझे...''

राजेश को वहीं दरवाजे पर खड़ा देखकर रजनी ने पीछे सिर घुमाकर उसे देखा और बोली : "अब वहीं खड़े रहोगे या मेरा भी चेकअप करोगे डॉक्टर साहब...''

वो समझ गया की वो उसे चाँदनी वाली बात पर अभी तक छेड़ रही है...

राजेश मुस्कुराता हुआ आगे आया और दरवाजा बंद करके उसने वहीँ खड़े-2 सारे कपड़े निकाल फेंके..
अभी एक घंटे पहले ही उसके लंड ने माल निकाला था चाँदनी के चेहरे पर और तब से वो अभी तक खड़ा ही हुआ था...
इन्फेक्ट रजनी के सहलाने के बाद और पार्क में शेफाली की मेहरबानियों के बारे में सोचकर उसके लंड का तनाव और भी बढ़ चुका था..

इसलिए जब उसने कपड़े उतारे तो उसका लंड अपनी चरम सीमा में खड़ा हुआ रजनी के नंगे बदन को लपलपाते हुए देख रहा था.

राजेश को आता देखकर रजनी ने अपनी कमर उपर उठा दी...
आज वो सीधा उसके तीर को अपनी चूत में घुसवाना चाहती थी....
राजेश ने भी बेड पर अपने दोनो घटने रखे, लंड पर ढेर सारी थूक लगाई और एक ही झटके में उसकी गांड को गाड़ी के स्टेयरिंग की तरह पकड़कर उसकी चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल दिया...

''आआआआआआआआआआहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... उम्म्म्ममममममममममममममम...... सही जगह पर वार किया है डॉक्टर साहब....यहीं सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा था....''

3.gif

राजेश ने उसकी गोरी गांड पर एक जोरदार चपत लगाई और आगे झुकते हुए उसकी चूत में ज़ोर-2 से अपना लंड पेलने लगा...

पूरे कमरे में उहह आहहह की आवाज़ें गूंजने लगी...

ये वो वक़्त था जब साथ वाले कमरे में चाँदनी कुछ देर पहले की घटना के बारे में सोचकर अपनी चिपचिपी चूत को उंगलियों से सहला रही थी..

और जैसे ही उसे दूसरे कमरे से आती हुई आवाज़ें सुनाई दी तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
वो समझ गयी की क्या हो रहा है...
वो मन ही मन बुदबुदाई : 'वाह....क्या स्टेमीना है अंकल का...'

और फिर उछलकर अपने बेड से खड़ी हुई और दबे पाँव बाहर निकालकर दूसरे रूम की तरफ चल दी...
पर वो दरवाजा अंदर से बंद था...
उसकी बेचैनी बढ़ने लगी जब उसने फिर से अंदर से आ रही रजनी आंटी की वो मदहोशी भरी आवाज़ सुनी

''आआआआआआआआहह राजऐशssss ....... उम्म्म्मममममम..... और ज़ोर से चोदो मुझे ........ जोर से चोदो ना.......''

तभी उसे ध्यान आया की दोनो बेडरूम की बालकनी एक ही है,
वो फिर से भागती हुई अपने रूम में गयी और बालकनी का दरवाजा खोलकर दूसरे रूम के पीछे पहुँच गयी...
वो दरवाजा भी बंद था पर उसकी खिड़की पर लगा परदा हटा हुआ था, वहां से उसे अंदर की पूरी चुदाई दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर उसका दिमाग़ ही खराब हो गया...

शायद उसकी लाइफ का ये पहला मौका था जब वो ऐसी लाईव चुदाई देख रही थी...
 
राजेश के झटकों से रजनी अपने चौपाये से फिसलकर नीचे गिर चुकी थी और पूरी तरह से बेड पर उल्टी होकर लेटी थी, पर राजेश का लंड उसी तरह से पीछे से उसकी चुदाई कर रहा था जैसे पहले कर रहा था...
इस पोज़ में लंड थोड़ा टाइट होकर अंदर बाहर हो रहा था जिसमें उसे पहले से ज़्यादा मज़ा मिल रहा था और शायद इसलिए इसकी सिसकारियों में पहले से ज़्यादा नशा था..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...... ओह राजेश...... माय डार्लिंग................. ऐसे ही डालो..... अंदर तक........चोदो मुझे.....''

राजेश अभी कुछ देर पहले ही झड़ा था और इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो पूरी रात इसी तरह रजनी की चुदाई कर सकता है और उसका लंड तब भी नही झाड़ेगा.

उधर चाँदनी की हालत भी फिर से खराब होने लगी....
उसने अपनी टी शर्ट के स्ट्रेप्स नीचे खिसका दिए और अपने बूब्स बाहर निकाल लिए.

और जैसे ही उसने बूब्स बाहर निकाले, राजेश की नज़र उसपर पड़ गयी,
वो खड़ी ही ऐसी जगह थी, बालकनी में , बिल्कुल सामने,

अभी तक मस्ती में रजनी की चूत मार रहे राजेश की हालत खराब होने लगी उसे ऐसा करते देखकर...
वो बड़ी ही बेशर्मी और बेबाकी के साथ अपने बूब्स बाहर निकाल कर उसे मसल रही थी..
और दूसरे हाथ से अपनी चूत भी सहला रही थी..

अपनी बीबी की चूत में लंड होने के बावजूद उसे दूर से चमक रही चाँदनी की चूत अपनी और आकर्षित कर रही थी..
काश वो पहले ही उसकी चूत मार लेता, बेकार में सिर्फ़ मुट्ठ मरवाकर उसे छोड़ दिया..

वो ये सोच ही रहा था की उसे अचानक रजनी की फुसफुसाती हुई आवाज़ सुनाई दी

''राजेश.....वो देखो सामने....चाँदनी हमे छुप कर देख रही है...''

राजेश की तो गांड ही फट्ट गयी ये सुनकर....
उसने तो ये सोचा भी नही था की जैसे वो उसे देख सकता है , बेड पर उल्टी लेटी हुई रजनी को भी तो वो दिखाई ही दे रही होगी...
वो तो मज़े में अपनी चूत में अंदर बाहर हो रहे लंड का मज़ा ले रही थी,
थोड़ा सा चेहरा उपर किया तो सामने शीशे के पीछे खड़ी चाँदनी दिखाई दे गयी, जो इस वक़्त अपनी आँखे बंद किए बड़े ही मज़े में अपनी चुचि और चूत मसल रही थी...

राजेश ये सुनते ही रुक गया....
रजनी ने जब उसे रुकता देखा तो बोली : "अरे ...तुम क्यों रुक गये...उसे देखने दो..यही तो उम्र है ये सब सीखने की...यू प्लीज़ फक मी हार्ड.....''

राजेश समझ गया की ये शेफाली की आत्मा ही रजनी से बुलवा रही है , उसे और क्या चाहिए था, रजनी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वो पहले से ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा...
आज तो सच में उसका लंड स्टील जैसा बन चुका था...

और ये चुदाई कम से कम आधा घंटा और चलने वाली थी...

और राजेश ये नही जानता था की इस वक़्त रजनी के मन में क्या चल रहा है..
पर उसे अच्छे से पता था की अगले आधे या एक घंटे में जो भी होगा उनके बेडरूम में वो मजेदार ही होगा.
 
UPDATE - 8


''राजेश.....वो देखो सामने....चाँदनी हमे छुप कर देख रही है...''

राजेश की तो गांड ही फट्ट गयी ये सुनकर....उसने तो ये सोचा भी नही था की जैसे वो उसे देख सकता है , बेड पर उल्टी लेटी हुई रजनी को भी तो वो दिखाई ही दे रही होगी...वो तो मज़े में अपनी चूत में अंदर बाहर हो रहे लंड का मज़ा ले रही थी, थोड़ा सा चेहरा उपर किया तो सामने शीशे के पीछे खड़ी चाँदनी दिखाई दे गयी, जो इस वक़्त अपनी आँखे बंद किए बड़े ही मज़े में अपनी चुचि और चूत मसल रही थी...राजेश ये सुनते ही रुक गया....रजनी ने जब उसे रुकता देखा तो बोली : "अरे ...तुम क्यों रुक गये...उसे देखने दो..यही तो उम्र है ये सब सीखने की...यू प्लीज़ फक मी हार्ड.....''

राजेश समझ गया की ये शेफाली की आत्मा ही रजनी से बुलवा रही है , उसे और क्या चाहिए था, रजनी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वो पहले से ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा...
आज तो सच में उसका लंड स्टील जैसा बन चुका था...और ये चुदाई कम से कम आधा घंटा और चलने वाली थी...और राजेश ये नही जानता था की इस वक़्त रजनी के मन में क्या चल रहा है..
पर उसे अच्छे से पता था की अगले आधे या एक घंटे में जो भी होगा उनके बेडरूम में वो मजेदार ही होगा.

**********
अब आगे
***********

राजेश के हर झटके से अब रजनी और भी ज़्यादा कामुक तरीके से अपनी चुदाई करवा रही थी...
वो ज़ोर से चीख रही थी ताकि बाहर खड़ी चाँदनी तक उसकी सिसकारियाँ पहुँच सके..

''ओह राजेश....... ज़ोर से चोदो मुझे...... उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारा ये मोटा लंड ..... आअहहह मज़ा आ रहा है आज तो बहुत चुदवाने में....... आज ये कुछ.....अहह ज़्यादा ही .....उफफफफफफ्फ़ ....मोटा लग...... रा है........ अहह...... ऐसे ही चोदो मुझे.....डार्लिंग.......''

राजेश भी मंद -2 मुस्कुराते हुए अपने काम में लगा रहा....

राजेश अब उसके ऊपर लेट कर उसे चोद रहा था....
इस पोज़ में तो राजेश के लंड का आखरी कतरा भी रजनी की चूत में उतर चुका था..
ये शायद रजनी के लिए भी काफ़ी आनंददायक पोज़ था
क्योंकि उसके बाद उसका ध्यान चाँदनी से हट सा गया
और वो आँखे बंद करके अपने पिछवाड़े कब्बड्डी कर रहे राजेश के लंड का मज़ा लेने लगी
जो उसकी चूत की अंदरूनी रेखा तक जाता और उसे छूकर फिर से वापिस भाग जाता.

रजनी ने अचानक आँखे खोली और एक बार फिर से चाँदनी की तरफ दौड़ाई जो उन्हे देखकर अभी तक अपनी मुनिया को मसल रही थी..
अब उसने अपनी टी शर्ट उपर कर ली थी और शॉर्ट्स को नीचे...
एक तरह से वो लगभग नंगी खड़ी होकर अपनी चूत की जबरदस्त घुटाई कर रही थी....अब शायद रजनी के दिमाग़ में कुछ शैतानी उभरने लगी थी...
वो धीरे से राजेश से बोली : "डार्लिंग...मुझे उपर आने दो...''

राजेश तो मस्ती में उसकी चूत मारने में लगा था,
आज तक वो ऐसे बोलकर उपर नही आई थी उसके...
वो समझ गया की वो चाँदनी के लिए शो का इंतज़ाम कर रही है..
उसे तो वैसे भी कोई दिक्कत नही थी इसमें..
उसने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और बेड पर उल्टा होकर लेट गया...
वो बेड पर तिरछा होकर इस पोज़ में लेटा की थोड़ा सा सिर पीछे करने से उसे भी चाँदनी दिखाई दे रही थी.

चूत से निकलने के बाद राजेश के लंड की शक्ल बहुत ही ख़तरनाक नज़र आ रही थी,
ऐसा लग रहा था जैसे किसी जंगली सूअर के उपर चमकीले तेल की मालिश कर दी हो..और उसके इस भयानक और मोटे लंड को देखकर चाँदनी की हालत और भी ज़्यादा खराब हो गयी...
पहले रूम में तो इतना मोटा और चमकीला नही लग रहा था अंकल का लंड, ये चूत में जाने के बाद उसे क्या हो गया है...
बेचारी यही सोचकर अपनी चूत मसलने लगी की अगर ये भयानक शक्ल वाला लंड इस वक़्त अगर उसकी चूत में चला गया तो उसका क्या हाल होगा.

इस बात को सोचकर ही उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ गयी..

वो ज़्यादा नही देख पाई उसके लंड को क्योंकि एक बार फिर से रजनी उसके उपर आ बैठी थी और उसके घोड़े जैसे लंड की सवारी करते हुए दूर तक दौड़ती चली जा रही थी..
राजेश की भी आँखे बंद होती चली गयी ,
मज़ा ही इतना ज़्यादा मिल रहा था उसे आज...

शादी के इतने सालो बाद अब उसे असली मज़ा मिल रहा था चुदाई का अपनी बीबी के द्वारा...
वो मन ही मन शेफाली को धन्यवाद दे रहा था रजनी के इस बदलाव के लिए..
और नीचे से लंड को उपर की तरफ धक्के मारते हुए जोरों से उसकी चुदाई भी कर रहा था.

और जल्द ही राजेश के लंड ने शोले उगलने शुरू कर दिए....
सिर्फ़ 1 घंटे में ये दूसरी बार था जब उसके लंड ने अपना गाड़ा माल निकाला था.

बाहर खड़ी चाँदनी ने भी अपनी चूत से चाँदनी टपका डाली...
तीनो अब अपनी-2 जगह पर पड़े गहरी साँसे ले रहे थे.

चाँदनी दबे पाँव अपने रूम में वापिस गयी, कपड़े पहने और सो गयी..
आज के लिए उसके साथ भी काफ़ी कुछ हो चुका था.
 
अगली सुबह राजेश ने ईशा को भी साथ लेकर जाना था हॉस्पिटल उसका एक्सरे करवाने,
चाँदनी को उसके घर छोड़ना था रास्ते में, इसलिए वो भी नहा धोकर जल्दी तैयार हो गयी और करीब 10 बजे वो तीनों एक साथ कार में बैठकर घर से निकल गये.

रास्ते भर राजेश चाँदनी के नशीले बदन को देखता रहा और वो भी अपने सीने को उभार-2 कर राजेश को अपने बदन के जलवे दिखाती हुई पीछे बैठी ईशा से गप्पे लड़ाने में व्यस्त रही.

जब उसका घर आया तो वो उतार गयी, राजेश को बाइ बोलकर वो जाने लगी तो उसने चाँदनी से कहा : "अपना ही घर समझो चाँदनी बेटा...आते रहा करो...''

चाँदनी मुस्कुराती हुई बोली : "जी अंकल...अब तो आना जाना लगा रहेगा...वैसे भी ईशा को कॉलेज के नोट्स देने आती ही रहूंगी....''

फिर अचानक वो जाते- 2 पलटी और बोली : "ओह्ह शीटssss ....अरे ईशा ये अंगूठी तो रह ही गयी तेरे उस सेट की...''

इतना कहते हुए उसने अपनी उंगली से वो अंगूठी निकाल कर ईशा को दे दी जो शेफाली वाले सेट का ही हिस्सा थी,ईशा ने उसे लिया और अपनी उंगली में पहन ली.

राजेश तो मन ही मन खुश हो गया, ये सोचकर की चलो, अब शेफाली अपनी अंगूठी के मध्यम से उसकी बेटी को भी उसके लिए तैयार करेगी.

अंगूठी लौटाकार चाँदनी अपनी नन्ही सी गांड मटकाती हुई अपने घर में चली गयी.

राजेश उसे दूर तक जाते हुए देखता रहा, तभी पीछे से ईशा ने पुकारा : "हो गया पापा....चली गयी वो....अब चलो .''

बेचारे राजेश को बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई ...
उसकी बेटी ने उसे रंगे हाथो पकड़ लिया था अपनी सहेली को ऐसे घूरते हुए...
पर वो मंद-2 मुस्कुरा भी रही थी, यानी उसे इस बात का गुस्सा नही था.

राजेश बेक मिरर में उसे मुस्कुराते हुए देखता हुआ जल्द ही हॉस्पिटल पहुँच गया..

राजेश ने हॉस्पिटल से व्हील चेयर मँगा ली और उसे अपनी गोद में उठाकर चेयर पर बिठाया..
राजेश ने उसके पैर का एक्सरे करवाया , उसमें हेयर लाइन फ्रेक्चर निकला , इसलिए राजेश ने तुरंत उसे एक महीने का कच्चा प्लास्टर करवा दिया, दिक्कत बस यही थी की अब उसे एक महीने तक हर काम के लिए दूसरे पर डिपेन्ड होकर रहना पड़ेगा..
कॉलेज की तो छुट्टी ही करनी पड़ेगी शायद.

खैर, उसे चेयर पर बिठाकर वो अपनी कार तक ले गया और गोद में लेकर उसे कार की अगली सीट पर बिठाया..
ईशा ने अपनी बाहें राजेश के गले में डाल दी थी और इस वजह से उसे सीट पर बिठाते हुए राजेश का चेहरा बिल्कुल उसके करीब था...
ईशा की तेज साँसे उसके चेहरे से टकरा रही थी.
वो जैसे राजेश की गंध सूंघ रही थी और अपनी गर्म साँसे छोड़कर राजेश को उत्तेजित भी कर रही थी...
सीट पर बिठाने के बाद भी उसने अपनी बाहें नही निकाली राजेश की गर्दन से...
और जैसे ही राजेश उसे कुछ बोलने को हुआ उसने झट्ट से अपने होंठ अपने पापा के गालों से सटा कर एक लंबा किस्स कर दिया.

हालाँकि आज से पहले भी कई बार ईशा ने उसके चीक्स पर किस्स किया था पर आज का ये चुंबन कुछ अलग ही था...
वो अपना सिर हिला कर अपने होंठो को उसके गाल पर रगड़े जा रही थी...
अगर उसने लिपस्टिक लगाई होती तो राजेश का पूरा गाल रंगीन हो जाना था.

राजेश ने भी उसे नही रोका और उसके नाज़ुक होंठो का स्पर्श महसूस करके आनंद लेता रहा...
करीब 2 मिनट बाद जब वो रुकी तो राजेश का गाल गीला हो चुका था...
ईशा के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी.

वो बोली : "आप कितने क्यूट हो पापा...मन करता है आपको किस्स करती रहूं..करती रहूं...''

राजेश बेचारा बस मुस्कुरा कर रह गया...
वो समझने की कोशिश कर रहा था की वो किस वे में ऐसा बोल रही है...
पर अंदर ही अंदर वो जानता था की अंगूठी पहनने के बाद उसपर शेफाली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है...
और ये किस्स वो किस वे में करने को बोल रही थी..

उसने कार स्टार्ट की और मंद-2 मुस्कुराते हुए घर की तरफ चल दिया...
अब उसकी लाइफ का नया चेपटर जो खुलने वाला था.
 
वो अपना सिर हिला कर अपने होंठो को उसके गाल पर रगड़े जा रही थी...अगर उसने लिपस्टिक लगाई होती तो राजेश का पूरा गाल रंगीन हो जाना था. राजेश ने भी उसे नही रोका और उसके नाज़ुक होंठो का स्पर्श महसूस करके आनंद लेता रहा...करीब 2 मिनट बाद जब वो रुकी तो राजेश का गाल गीला हो चुका था...ईशा के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी.

वो बोली : "आप कितने क्यूट हो पापा...मन करता है आपको किस्स करती रहूं..करती रहूं...''

राजेश बेचारा बस मुस्कुरा कर रह गया...वो समझने की कोशिश कर रहा था की वो किस वे में ऐसा बोल रही है...
पर अंदर ही अंदर वो जानता था की अंगूठी पहनने के बाद उसपर शेफाली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है...और ये किस्स वो किस वे में करने को बोल रही थी..उसने कार स्टार्ट की और मंद-2 मुस्कुराते हुए घर की तरफ चल दिया...अब उसकी लाइफ का नया चेपटर जो खुलने वाला था.

************
अब आगे
************
घर पहुँचकर भी राजेश ने ईशा को गोद में उठाया और अंदर ले गया...
ईशा ने अपनी बाहें राजेश के गले में डालकर अपने नन्हे बूब्स उसकी छाती से सटा रखे थे.

रजनी को वो पहले ही फोन पर प्लास्टर वाली बात बता चुका था, उसने ईशा के रूम को ढंग से सॉफ सुथरा करके उसके लिए नर्म गद्दा लगा दिया ताकि लेटे रहने में उसे ज़्यादा परेशानी ना हो.

ईशा को उसके बेड पर लिटाते हुए राजेश ने जब उसे छोड़ा तो ईशा ने अपनी बाहे उसके गले से निकाली ही नही...
बेचारे राजेश को उसके साथ-2 बेड पर झुक कर बैठे रहना पड़ा..

राजेश : "छोड़ो ईशा...ये क्या कर रही हो...''

ईशा : "नो पापा...आप मेरे पास ही रूको आज...कहीं नही जाना..''

नंदिनी उन बाप बेटी की नोक झक देखकर हंसते हुए बोली : "आप दोनो आपस मे निपटो, मैं किचन में जाकर डिन्नर बना लेती हूँ ''

इतना कहकर वो उन्हे उसी हालत मे छोड़कर किचन में चली गयी...
रजनी के जाते ही ईशा ने राजेश को पूरा अपने उपर खींच लिया..
उसकी ताक़त देखकर राजेश भी हैरान रह गया, उसने शूज़ भी नही उतारे थे,
उस हालत में वो पूरा अपनी फूल जैसी बेटी पर लेटा हुआ था.

राजेश : "ये क्या बचपन है ईशा...छोड़ो मुझे...शूज़ भी नही उतारे मैने..''

ईशा ने राजेश को अपनी बगल में लिटाया और उपर उठकर उसके शूज़ निकाल फेंके और वापिस आकर अपने पापा से लिपट कर आँखे बंद कर ली...
राजेश उसके मासूम से चेहरे को देखकर ये अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था की ये उसे सच में अपने पापा पर प्यार आ रहा है या फिर शेफाली की आत्मा उस से ये सब करवा रही है...
पर वो कुछ समझ नही पाया.

वो भी आँखे बंद करके अपनी बेटी के साथ लेट गया..
काम तो ज़्यादा नही किया था आज उसने पर आने-जाने मे ही उसकी कमर दुखने लगी थी,
ऐसे लेटने में उसे भी आराम मिल रहा था.

उसकी आँख कब लग गयी उसे भी पता नही चला...ईशा भी सो चुकी थी.

रात 9 बजे रजनी ने आकर उसे जगाया की खाना बन चुका है, वो उठा और कपड़े बदलकर फ्रेश हुआ और रजनी के साथ बैठकर खाना खाया..ईशा अभी तक सो रही थी..शायद गोलियों का असर था.

डिन्नर के बाद रजनी बोली : "ऐसा करो आज आप ईशा के साथ ही सो जाओ...उसे आप पर कुछ ज़्यादा ही लाड़ आ रहा है..ऐसा ना हो की रात को उठकर आपको आवाज़ें लगाने लगे..और उसे भूख लगे तो प्लीज़ खाना गर्म करके दे देना उसे, मुझे भी आज कुछ ज़्यादा नींद आ रही है..''

इतना कहकर वो अपने बेडरूम में चली गयी...
राजेश बेचारा अवाक सा बैठा देखता रह गया...
उसने सोचा की रजनी भी तो ईशा के पास सो सकती थी, उसे खाना भी गर्म करके दे सकती थी, आज एकदम से ये पापा पर लाड़ वाली बात निकालकर वो खुद उसे सोने के लिए कह रही है, यानी शेफाली उससे ये सब करवा रही है...

ईशा के साथ रात भर सोने की बात सोचते ही राजेश का लंड सुर सुर करने लगा...
अभी कल ही उसकी कमसिन सहेली को अपना लंड चुस्वाकार और उसके कच्चे बदन को नंगा देखकर उसे ये तो यकीन हो ही चुका था की ईशा अपनी सहेली से एक कदम आगे ही निकलेगी, क्योंकि ईशा का शरीर थोड़ा भरा हुआ और ज़्यादा कटावदार था.

खैर, वो अपनी तरफ से कोई भी ऐसी हरकत नही करना चाहता था जिससे उसकी बेटी को बुरा लगे...
क्योंकि अंदर ही अंदर उसे अभी तक यही लग रहा था की ये सब शायद उसका वहम है,
रजनी में आए बदलाव शायद नेचुरल थे और चाँदनी भी शायद अपनी दोस्त के पापा पर मोहित होकर वो सब कर बैठी थी...
पर ईशा के बारे में ऐसा कुछ भी नही था...
वो हमेशा उसकी बातो का विरोध ही करती थी,
ये तो बस वो उसकी इतनी तिमारदारी कर रहा था शायद इसलिए उसे अपने पापा पर लाड़ आ गया था वरना आज तक उसने इस तरह से कभी प्यार नही किया था उसे.
 
वो आँखे बंद करके ये सब सोच रहा था की अचानक ईशा ने अपनी एक टाँग और बाजू उसके उपर रख दी और उससे लिपट कर सो गयी..

उसने अपना घुटना जहां रखा था उसके ठीक नीचे राजेश का लंड था...
हालाँकि वो सो रहा था इस वक़्त पर ईशा के जिस्म के एहसास ने उसके अंदर तरंगे उठानी शुरू कर दी थी.

उसने ईशा के चेहरे की तरफ देखा और उसे पुकारा पर वो शायद नींद में थी,
उसने जवाब नही दिया और उसी हालत में सोई रही.

राजेश भी आँखे बंद करके सोने की कोशिश करने लगा...
पर उसे काफ़ी देर तक नींद नही आई, फिर भी बिना हीले डुले वो लेटा रहा.

अचानक उसे ईशा के हाथ हिलते हुए महसूस हुए,
वो अपने हाथ की उंगलियो से उसकी छाती पर उगे बालों को सहला रही थी...
टी शर्ट के बटन खोलकर उसके हाथ कब अंदर आ गये थे ये उसे भी पता नही चला था.

कुछ देर बाद उसके हाथ नीचे की तरफ आने लगे और सीधा आकर वो राजेश के लंड पर जम गये..

अब तो राजेश को पूरा विश्वास हो गया की ये लाड प्यार एक बाप बेटी वाला नही रह गया था...
पर वो देखना चाहता था की वो कितना आगे जा सकती है, इसलिए बिना आँखे खोले वो अंजान बनकर सोया रहा...
वो काफ़ी कोशिश भी कर रहा था की किसी दूसरी चीज़ के बारे में सोचे ताकि उसका लंड एकदम से खड़ा ना हो,
पर जिस अंदाज से ईशा उसके लंड को सहला रही थी, उसे निचोड़ रही थी,वो दूसरी तरफ ध्यान रख ही नही पाया और उसके लंड में अपने आप वृद्धि होने लगी.

जैसे ही ईशा को खड़े लंड का एहसास हुआ, उसकी गर्म साँसे राजेश को अपनी गर्दन पर महसूस होने लगी....
और फिर उसने अपनी गीली जीभ निकाल कर राजेश को चाटना शुरू कर दिया...
राजेश भी हैरान सा होकर बिना हीले डुले ईशा का ये रूप देख रहा था क्योंकि वो जिस अंदाज में चाट रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत खेली खाई लड़की है....
बिल्कुल पोर्न स्टार जैसी प्रोफेशनल की तरह बिहेव कर रही थी वो...
धीरे-2 ईशा राजेश के चेहरे को चाट्ती हुई उपर तक आई और उसके गालो को चाटने लगी. उनपर किस्स करने लगी....
राजेश के सूखे होंठ फड़क से रहे थे इस अंदाज़े से की कुछ ही पलों में शायद उनका नंबर भी आने वाला है, और उसे ज़्यादा इंतजार भी नही करना पड़ा, ईशा ने अपने गर्म और गीले होंठ उसके होंठो पर रखकर उन्हे सींचना शुरू कर दिया...

ये पहली बार था जब वो अपनी ही बेटी के होंठो को अपने होंठो पर महसूस कर पा रहा था...
वो तो राजेश के होंठो को ऐसे चूसने मे लगी हुई थी जैसे बरसो से उनकी प्यासी हो...
एक हाथ उसका अपने पापा के लंड पर था, और होंठ उसके होंठो पर...

राजेश से अब सोए रहना मुश्किल सा हो रहा था...
उसने ऊंघते हुए अपनी आँखे खोली और चौंकने का नाटक करते हुए ईशा से कहा : "उम्म्म्म......ईशा.....ये ये.....क्या कर रही हो बेटा...''

''शःह्ह्ह्ह डोंट से एनिथिन्ग पापा....... जस्ट रिलॅक्स.....''

और इतना कहते हुए वो उसे चूमती हुई नीचे की तरफ चल दी....
और ठीक उसके लंड के उपर जाकर जब उसका चेहरा रुका तो राजेश को समझते देर नही लगी की शेफाली अब ईशा से क्या करवाने वाली है.....
ईशा ने उसके पयज़ामे को नीचे किया और उसके लंड को बाहर निकाल कर उसपर अपनी गर्म सांसो का फव्वारा छोड़ा और फिर एकदम से गप्प करते हुए वो उसके लंड को निगल गयी....

''आआआआआआआआआआआअहह ईशा..................... मेरी बच्चीइइइइइइइइईईईईईईईईईईईईईईईईई''

बेचारा कुछ और नही बोल पाया सिवाए उसके सिर को अपने लंड पर पूरा दबाने के....

ईशा का मुँह तो छोटा सा था पर उसने एक ही बार मे अपने बाप के लंड को पूरा मुँह में लेकर नीचे तक नाप डाला...

और फिर सडप -2 करते हुए वो पूरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी...
अभी तक दोनो के कपड़े अपनी जगह थे , सिर्फ़ राजेश का लंड ही बाहर था जिसे चूसकर वो उसे मज़ा दे रही थी....

राजेश ने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसकी ब्रा के हुक्स को चुटकी से खोलने की कोशिश की पर वो असफल रहा , एक दो बार फिर से तरय किया पर हुआ ही नहीं, ईशा की हंसी निकल गयी ये देखकर ,
वो बोली : "रुको... में करती हूँ''
 
वो बेड पर बैठी और अपनी टी शर्ट उतार फेंकी और फिर हाथ पीछे करते हुए उसने अपनी ब्रा भी उतार कर नीचे कर दी...
उसकी मस्त और चिकने बूब्स देखकर राजेश के खड़े लंड ने एक जोरदार झटका मारकर उसकी सराहना की
फिर वो थोड़ा आगे झुकी और उसने एक बार फिर से अपने पापा का लंड मुंह में लिया और उसे चूसने लगी , ऐसा करते हुए वो मुंह से आवाजें भी निकाल रही थी

उम्मम्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह्हह पापा। ....... इटस सोओओ टेस्टीssssssss उम्मम्मम्मम्मम आई वांट आलsssssss ''

और फिर उसने हाथ नीचे करके उसकी बॉल्स को भी मसला

ये लम्हा राजेश को इतना उत्तेजित कर गया की उसके लंड ने बर्फ़ीली आग उगलनी शुरू कर दी जिसे उसने बड़ी ही कुशलता से अपने मुँह में लेकर निगल लिया....
उसके लंड को पूरा चाटने के बाद वो फिर से उपर आई और मुस्कुराते हुए उसने राजेश को देखा और ''आई लव यू पापा'' कहते हुए उसे फिर से स्मूच करने लगी....

इस बार राजेश के हाथ उसकी नंगी कमर को सहला रहे थे, उसकी नजरें इस वक़्त ईशा के तने हुए स्तनों पर थी ...
उसके भरे हुए बूब्स देखकर राजेश पलके झपकना भी भूल गया....

राजेश को ऐसे अपलक अपनी आप को निहारते देखकर ईशा ने खुद ही उसके हाथ पकड़े और अपने बूब्स पर रख दिया..

उफफफफ्फ़ कितने मुलायम थे वो....
रुई के गोले जैसे

राजेश ने उन्हे अपनी हथेलियो में पकड़कर ज़ोर से भींच दिया...
वो उसकी उंगलियो के बीच से इधर उधर निकलकर ऐसे झाँकने लगे कैसे पानी के गुब्बारे को पकड़कर दबाने से होता है..

''आआआआआआआआहह पापा.......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... धीरे......प्लीज़.....''

अब राजेश से सब्र नही हुआ और उसने आगे बढ़कर उसके बूब्स को अपने मुँह में रखकर चुभलाना शुरू कर दिया..

''ओह्ह माय डार्लिंग पापा.....प्लीज़ सक इट....... हाआरडररर ''

राजेश ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ ज़ोर से दबोच सा लिया....
और उसके बूब को पूरा मुँह में रखकर खा गया.

उफफफफफ्फ़ क्या सेक्सी नज़ारा था....
ईशा का पूरा मुम्मा अपने पापा के मुँह में था,
जिसे वो चुसवा भी रही थी और आनंद से भरी किलकरियाँ भी मार रही थी...

''ओह पापा......... इट्स फीलिंग सोओ गुड....... यससस्स पापा........ ऐसे ही......सक्ककक मिि हार्ड........ काटो इन्हे......ज़ोर से.....चबा जाओ.......निप्पल्स चूसो ना पापा...... उम्म्म्मममममममममममममम यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ऐसे ही...... अहह......''

ऐसा करते हुए वो राजेश की गोद में चड़कर उसकी जाँघ पर बैठ गयी...
एक पैर इधर और दूसरा उधर...
और अपनी चूत को उसपर घिसते हुए जोरों से रगड़ने लगी....
और जल्द ही अपना मुम्मा चुस्वाते हुए, अपने पापा की गोद में झटके मारते हुए वो जोरों से झड़ने लगी....

''आआआआआआआआआआआअहह पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममम......... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... आई एम् कमिंग........''

राजेश को भी अपनी बेटी की गर्माहट अपनी जाँघो पर पिघलती हुई महसूस हुई..

और एक बार फिर से दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर एक लंबी स्मूच में बदल गये...

अभी तो ये शुरूवात थी...
आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी.
 
ऐसा करते हुए वो राजेश की गोद में चड़कर उसकी जाँघ पर बैठ गयी...एक पैर इधर और दूसरा उधर...
और अपनी चूत को उसपर घिसते हुए जोरों से रगड़ने लगी....और जल्द ही अपना मुम्मा चुस्वाते हुए, अपने पापा की गोद में झटके मारते हुए वो जोरों से झड़ने लगी....
''आआआआआआआआआआआअहह पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममम......... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... आई एम् कमिंग........''
राजेश को भी अपनी बेटी की गर्माहट अपनी जाँघो पर पिघलती हुई महसूस हुई..और एक बार फिर से दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर एक लंबी स्मूच में बदल गये...अभी तो ये शुरूवात थी...आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी.

************
अब आगे
***********

अभी तक वो सिर्फ़ टॉपलेस थी
नीचे उसने स्लेक्स अभी तक पहनी हुई थी,
जो झड़ने के बाद काफ़ी गीली हो चुकी थी,
ईशा का बदन अभी तक ऑर्गेज़म के झटके मार रहा था...
रह रहकर उसकी नन्ही चुचियों में एक सिहरन सी दौड़ जाती जिसका कंपन राजेश को भी महसूस होता....
शायद इतने जबरदस्त तरीके से वो पहली बार झड़ी थी.

राजेश की बाहो में लेटे हुए जब उसने अपनी नशीली आँखे खोली तो ऐसा लगा जैसे वो किसी गहरी नींद से जागी हो...
और अचानक उसे लगा की वो ईशा को नही बल्कि शेफाली को देख रहा है...
वही नशीलापन,
वही कशिश,
वही गहराई
और
वही सैक्सीनेस.
सब दिख रहा था उन आँखो मे.

ईशा ने अपना एक हाथ उसके चेहरे पर रखा और उसे सहलाने लगी...
सहलाते हुए वो अपनी उस उंगली को उसके होंठो तक ले आई जिसमे ईशा ने वो शेफाली की अंगूठी पहनी हुई थी...
और वो बुदबुदाई : "कैसा फील हो रहा है डार्लिंग....''

ये शायद राजेश की लाइफ में पहली बार था जब ईशा ने उसे बिना 'पापा' बोले सबोधित किया था.

एक पल के लिए तो उसकी गांड ही फट गयी ये सोचकर की इस वक़्त उसकी बाहों में उसकी जवान बेटी नही बल्कि शेफाली है...
पर फिर उसने उस विचार को झटका देकर निकाल दिया क्योंकि वो पहले ही जान चुका था की शेफाली जो भी कर रही है उसे मज़े देने के लिए और उसके भले के लिए ही कर रही है...

वो मुस्कुराया और बोला : "बहुत मज़ा आ रहा है जानेमन ''

ये सुनते ही वो पागलों की तरह उसके चेहरे और होंठो को चूमने लगी और अपनी जीभ और होंठों से चूम-चूमकर उसे भिगो ही डाला उसने..

और बोली : "इतने सालो से इस प्यार के लिए तरस गयी थी मैं ...अब मिला है मुझे ये प्यार...अब देखना , कितना प्यार करती हू तुम्हे और करवाती हूँ ...''

ये कहकर वो राजेश के गले लगकर चिपक गयी...
राजेश को शेफाली के इस इक़बालनामे को सुनकर काफ़ी खुशी भी हो रही थी और आने वाली दिनों में मिलने वाले मज़े को सोचकर उसे अपनी किस्मत पर नाज़ भी हुआ की इतने करोड़ों लोगो के होते हुए इस शेफाली ने मज़े देने के लिए उसे चुना है.

खैर, अभी के लिए तो उसे अपनी प्यास बुझानी थी और एक जवान जिस्म से बह रहे रस से अच्छी ड्रिंक कोई हो ही नही सकती थी,
इसलिए उसने हाथ नीचे करते हुए उसकी स्लेक्स को उसकी गांड से नीचे खिसका दिया,
ऐसा लगा जैसे फुटबॉल के उपर से रबड़ का कवर निकाल फेंका हो..
नीचे से हश्ट पुष्ट और स्वस्थ गांड निकल आयी राजेश के सामने,

उसने उन्हे पकड़कर भींच दिया,
ईशा को ऐसा फील हुआ जैसे किसी ने उसकी गांड नही बल्कि नींबू निचोड़ दिया हो,
जिसके नीचूड़ने से उसकी चूत का रस पानी की तरह छींटे मारता हुआ बाहर गिरने लगा.

''आआअहह......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... मज़ा आ गया ......''

राजेश ने उसकी गांड अपनी तरफ घुमा ली और अपने लंड को उसकी गांड के गद्दे पर दबाकर उसकी पीठ से जोरदार तरीके से चिपक गया..

ईशा ने खुद ही बाकी की बची हुई स्लेक्स को नीचे खिसका कर अपनी टाँगो से निकाल फेंका...
अब वो जन्मजात नंगी थी,
एकदम नंगी...
अपने प्यारे पापा की बाहों में जकड़ी हुई,
नंगी ईशा.
 
राजेश ने उसका मुँह अपनी तरफ किया और उसे गले लगाकर उसके हर मुलायम अंग को अपने जिस्म पर महसूस करने लगा..

वो हग कब किस्स में बदल गया उसे भी पता नही चला....
होंठो को अच्छी तरह चूसने के बाद वो नीचे गया और उसके दोनो अमरूदों को भी चबाया और निचोड़ा...
और फिर, नीचे से आ रही भीनी-2 खुश्बू ने उसे अपनी तरफ खींचना शुरू किया...
राजेश पर जैसे उस गंध का नशा सा चढ़ रहा था...
एक तो वो कुँवारी चूत की खुश्बू थी उपर से उसकी खुद की बेटी की चूत से निकल कर आ रही थी वो गंध...
ऐसे में उस से बर्दाश्त करना मुश्किल सा हो रहा था,
वो खिसकते हुए जब नीचे तक पहुँचा तो उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत चूत दिखाई दी....
एकदम सफाचत...
एकदम कोरी...
एकदम गोरी

राजेश ने जब उसकी गांड को मसला था तो उसकी चूत का सारा रस निकलकर बेड पर गिर चुका था....
और अब उसमें से रिस रिसकर एक-2 बूँद गाड़े पानी की निकलकर बाहर आ रही थी.

राजेश नीचे हुआ और उसने झुकते हुए अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत के लबों पर रख दी.

उफफफफफफफफ्फ़....
ये तो उपर वालो होंठो से भी ज़्यादा मुलायम थे.

एक गहरी सिसकारी मारी ईशा ने जब उसे अपनी चूत पर पहली बार एक जीभ का एहसास हुआ तो...

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.....उम्म्म्मममममममममममममम पापा.............. अहह''

राजेश ने उसकी चूत की फांको को फेलाकर अपनी जीभ अंदर डालनी चाही तो वो चीख ही पड़ी....
''ओह नो पापा......प्लीज़.................... ऐसे मत करो......दर्द हो रहा है............''

उसका कहना लाज़मी था,
क्योंकि आवेश में आकर राजेश ने शायद कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से उसकी चूत के किवाड़ खोल दिए थे..
पर वो शायद आराम से करता तब भी ईशा को यही शिकायत होनी थी,
क्योंकि वो चूत थी ही इतनी टाइट.

राजेश ने उपर मुँह करते हुए उसके चेहरे को देखा और बोला : "बैबी...अभी तो ये सिर्फ़ मेरी जीभ है, जब मेरा पेनिस अंदर जाएगा तो कैसे सहन करोगी...''

ईशा (डरते हुए) : "वो कैसे जाएगा अंदर....उसमें तो काफ़ी पेन होगा ना...और आपका पेनिस तो है भी काफ़ी मोटा...और आगे से देखा है उसे...एकदम गोल्फ की बॉल जैसा मोटा है आगे से...''

राजेश उसकी बात सुनकर हंस पड़ा...
पर अंदर ही अंदर उसे हैरानी भी हुई की शेफाली की आत्मा के होते हुए ईशा को डर क्यों लग रहा है...
अभी थोड़ी देर पहले तक तो उसका असर था उसके उपर...
फिर अचानक ये बदलाव कैसे आ गया ईशा मे...

उसे ऐसी गहरी सोच मे डूबे देखकर ईशा बोली : "क्या सोचने लगे पापा....''

राजेश : "उम्म कुछ नही....वो बस...तुम्हारी बात को सोच रहा था...''

फिर अचानक राजेश उठा और उसने स्टडी टेबल पर पड़ी गोल्फ बॉल उठा ली जो शायद ईशा उसकी गोल्फ किट में से निकाल लाई थी, उसी को देखकर शायद उसके जहन में राजेश के लंड को बॉल के साथ कम्पेयर करने का ख़याल आया होगा..

उसे बॉल उठाते देख ईशा बोली : "ये ये....क्या कर रहे है आप पापा...''

राजेश : "कुछ नही....बस तुम्हे कुछ दिखा रहा हूँ...''

फिर उसने उस बॉल को उसकी चूत से निकल रहे रस में अच्छी तरह से भिगोया ,
जिसके बाद वो एकदम हीरे की तरह दमकने लगी...
फिर उसने धीरे-2 करते हुए उस बॉल को ईशा की चूत में धकेलना शुरू किया.

ये देखकर ईशा की हवाइयां उड़ने लगी.
तब उसे एहसास हुआ की उसके पापा शायद उसका डर मिटाने के लिए अपने लंड के टोपे के बराबर की बॉल उसकी चूत में डालकर दिखा रहे है ताकि लंड लेते वक़्त उसे ज़्यादा डर ना लगे...

पर अभी के लिए उसकी हालत काफ़ी खराब होने लगी...
क्योंकि बॉल ने उसकी चूत के होंठो को लगभग अपने चारों तरफ लपेट सा लिया था और उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था..
पर मीठा वाला..

वो सिसकारी मारती हुई अपनी फटी हुई आँखो से उस छोटी सी बॉल को अपनी चूत में जाते हुए देखने लगी...
और धीरे-2 उसके पापा ने वो प्रयोग पूरा करते हुए वो बॉल उसकी चूत में पूरी घुसा दी

उसकी चूत के होंठो ने बॉल को चारों तरफ से लपेटकर उसे बाहर निकलने से रोका हुआ था और अंदर की संकरी दीवार ने उसे और अंदर जाने से.
 
पर बड़ा ही मनमोहक दृश्य था वो...
और आनंदमयी भी.

शायद अंदर ही अंदर ईशा चाह रही थी की काश वो बॉल अंदर तक चली जाए...
पर ये कैसे पासिबल हो सकता था...
हाँ, उसके पापा का लंड ज़रूर जा सकता था अंदर...
और अगर ऐसा हुआ तो कितना अच्छा लगेगा ना उसे...
बॉल की तरह मोटा लंड उसकी चूत में से रास्ता बनाता हुआ जब अंदर तक जाएगा तो कितना अच्छा लगेगा उसे,
उस एहसास हो जीने का एक अलग ही मज़ा होगा..
ये सोचकर वो मंद-2 मुस्कुराने लगी.

राजेश ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और बोला : "देखा...ये तो अभी सिर्फ़ शुरूवात है, अभी और अंदर जाएगा तो ज़्यादा मज़ा आएगा...''

उसने हाँ में सिर हिला कर अपनी मोन स्वीकृति दे डाली.

पर पहले ही दिन राजेश उसे पूरी तरह से भोगना नही चाहता था...
उसके लंड में अब उतनी भी ताक़त नही रह गयी थी जितनी जवानी के दिनों में होती थी...
हालाँकि एक बार और झड़ने के लिए उसका लंड तैयार था पर एक नयी नवेली चूत को चोदने के लिए जिस कडकपन की ज़रूरत एक मर्द को होती है वो अभी के लिए नही थी उसमें...
आज के कड़कपन का रिचार्ज ख़त्म को चुका था उसका...
हाँ , कल या परसो में वो एक नये दिन के साथ नयी शुरूवात करके उस चूत का उद्घाटन ज़रूर कर सकता था.

इसलिए अभी के लिए उसने उस रसीली बॉल को उसकी चूत के घरोंदे से बाहर निकाला और उसकी जगह अपना मुँह लगाकर वहाँ से अवीरल बह रहे रस को चूसने लगा...

ईशा एक बार फिर से उसी गहरे एहसास में डूब गयी जो कुछ देर पहले उसे मिला था...
और अपने पापा के सिर को अपनी चूत में अंदर तक समेटते हुए उनके होंठो को अपनी चूत के होंठो से रगड़ने लगी...

''आआआआआआआआआहह पापा.................. उम्म्म्ममममममममममम..... मज़ा आआआआआ रहा है.......... अहह....ऐसे ही करते रहो........ अहह....''

राजेश ने अपने होंठो को गोल करते हुए जितना हो सकता था आगे तक निकाला और उन्हे एकसाथ उसकी चूत के अंदर घुसेड दिया, उसके होंठों को ईशा की चूत के होंठों ने ढक सा लिया, और फिर वो उन्न्नध्ह हुउन्न्न् करते हुए उस एक इंच के छोटे से लंड से उसकी चूत की खुजली दूर करने लगा...

वो ज़ोर से चीखी : "अहह..... पापा........................... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... अहह.... मार डालोगे क्या................. उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़...... कितना मज़ा आ रहा है ऐसे करवाने में .....अहह....''

मज़ा तो उसे ही आ रहा था....
राजेश का लंड तो ऐसे ही झूल रहा था बेड से नीचे लटका हुआ,
उसने भी एक छलाँग मारी और उछलकर बेड पर आया और 69 के पोज़ में उसे अपने उपर लिटाया और एक बार फिर से उसकी चूत चूसने लगा......
जो ईशा इतनी देर से सिसकारियाँ और चीखें मार रही थी उसके मुँह को बंद करने के लिए इससे अच्छा कोई ओर उपाय हो ही नही सकता था..

और जल्द ही दोनो की घुटि-2 सिसकारियाँ निकलने लगी
और अगले ही पल ईशा की चूत का ढेर सारा रस निकलकर राजेश के मुँह में जाने लगा और राजेश के लंड का पानी निकलकर ईशा के मुँह में.

ईशा ने अच्छी तरह से अपने पापा के लंड को सॉफ किया, उनके लंड की आख़िरी बूँद तक निचोड़कर पी डाली और फिर फिसलकर वापिस अपने पापा की तरफ मुँह किया और उनसे लिपटकर आँखे बंद कर ली....

राजेश भी झड़ने के बाद गहरी साँसे लेता हुआ ईशा के मखमली बदन को सहलाते हुए आँखे बंद करके लेट गया....
और उसकी आँख कब लग गयी उसे भी पता नही चला..

अचनका लगभग 1 घंटे बाद उसे कुछ हिलता हुआ सा महसूस हुआ....
कमरे में अंधेरा था इसलिए उसे कुछ सॉफ-2 दिखाई नही दे रहा था...
ईशा और वो अभी तक नंगे होकर एक दूसरे से लिपटकर सो रहे थे...
कोई सामने खड़ा हुआ ईशा को हिला कर उठाने की कोशिश कर रहा था

और तभी उसे फुसफुसाति हुई सी आवाज़ सुनाई दी , जो उसकी बीबी रजनी की थी

वो उनके बेड के पास खड़ी हुई ईशा को झंझोड़ कर उठाने की कोशिश कर रही थी..

रजनी को देखते ही राजेश की सिट्टी पिटी गुम सी हो गयी....
उसकी जवान बेटी नंगी होकर उससे लिपट कर सो रही थी और उसकी बीबी उनके कमरे में आकर ईशा को उठाने का प्रयास कर रही थी,
उसे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे...
अब वो उठकर भाग तो नही सकता था,
इसलिए उसने गहरी नींद में सोए रहना ही बेहतर समझा...
पर आने वाले पल उसकी लाइफ को पूरी तरह से बदलने वाले थे.
 
Back
Top