और वो फिर से कड़क हो गया...अपने लंड को एडजस्ट करता हुआ वो वापिस घर की तरफ चल दिया.
घर पहुँचकर वो कुछ देर तक ईशा के पास बैठा, पैर में बेंडेज लगाने की वजह से उसने शॉर्ट्स पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी जाँघ चमकती हुई दिखाई दे रही थी...
राजेश का मन तो कर रहा था की जीभ निकाल कर उसकी चिकनी जाँघो को चाट ले पर उसे अंदर ही अंदर ये भी पता था की अभी तो नही पर एक बार वो नैकलेस पहन ले तो ये काम ज़रूर हो सकता है...
शेफाली उसकी बेटी को उसके लिए तैयार करेगी..
ये सोचते हुए वो मंद मंद मुस्कुराने लगा.
अपने पापा को ऐसे बेवजह मुस्कुराते हुए देखकर ईशा बोली : "पापा....क्या बात है, क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो...''
राजेश : "उम्म...ना.....नही ...कुछ भी तो नही....बस ऐसे ही...चलो अब तुम आराम करो, कल बात करते है, कल मॉर्निंग में एक एक्सरे करवाने के लिए तुम्हे मेरे साथ हॉस्पिटल चलना होगा ओके ...सो जाओ अभी...गुड नाइट.''
इतना कहकर उसने एक गीला सा चुम्बन उसके माथे पर किया और उपर बने बेडरूम की तरफ चल दिया..
और जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उसकी साँसे मानो वहीं रुक सी गयी
अंदर का सीन ही इतना सैक्सी था
उसकी बीबी रजनी अपने पूरे कपड़े उतारकर बेड पर नंगी लेटी हुई थी...
और उसकी गदरायी हुई गांड दरवाजे की तरफ थी,
राजेश को दूर से ही उसकी मोटी गांड में से झाँक रहे उसके दोनो छेद सॉफ नज़र आ रहे थे..
राजेश मन ही मन बुदबुदाया : "उफफफ्फ़ शेफाली....तुम तो मार ही डालगी मुझे...''
राजेश को वहीं दरवाजे पर खड़ा देखकर रजनी ने पीछे सिर घुमाकर उसे देखा और बोली : "अब वहीं खड़े रहोगे या मेरा भी चेकअप करोगे डॉक्टर साहब...''
वो समझ गया की वो उसे चाँदनी वाली बात पर अभी तक छेड़ रही है...
राजेश मुस्कुराता हुआ आगे आया और दरवाजा बंद करके उसने वहीँ खड़े-2 सारे कपड़े निकाल फेंके..
अभी एक घंटे पहले ही उसके लंड ने माल निकाला था चाँदनी के चेहरे पर और तब से वो अभी तक खड़ा ही हुआ था...
इन्फेक्ट रजनी के सहलाने के बाद और पार्क में शेफाली की मेहरबानियों के बारे में सोचकर उसके लंड का तनाव और भी बढ़ चुका था..
इसलिए जब उसने कपड़े उतारे तो उसका लंड अपनी चरम सीमा में खड़ा हुआ रजनी के नंगे बदन को लपलपाते हुए देख रहा था.
राजेश को आता देखकर रजनी ने अपनी कमर उपर उठा दी...
आज वो सीधा उसके तीर को अपनी चूत में घुसवाना चाहती थी....
राजेश ने भी बेड पर अपने दोनो घटने रखे, लंड पर ढेर सारी थूक लगाई और एक ही झटके में उसकी गांड को गाड़ी के स्टेयरिंग की तरह पकड़कर उसकी चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल दिया...
''आआआआआआआआआआहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... उम्म्म्ममममममममममममममम...... सही जगह पर वार किया है डॉक्टर साहब....यहीं सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा था....''
राजेश ने उसकी गोरी गांड पर एक जोरदार चपत लगाई और आगे झुकते हुए उसकी चूत में ज़ोर-2 से अपना लंड पेलने लगा...
पूरे कमरे में उहह आहहह की आवाज़ें गूंजने लगी...
ये वो वक़्त था जब साथ वाले कमरे में चाँदनी कुछ देर पहले की घटना के बारे में सोचकर अपनी चिपचिपी चूत को उंगलियों से सहला रही थी..
और जैसे ही उसे दूसरे कमरे से आती हुई आवाज़ें सुनाई दी तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
वो समझ गयी की क्या हो रहा है...
वो मन ही मन बुदबुदाई : 'वाह....क्या स्टेमीना है अंकल का...'
और फिर उछलकर अपने बेड से खड़ी हुई और दबे पाँव बाहर निकालकर दूसरे रूम की तरफ चल दी...
पर वो दरवाजा अंदर से बंद था...
उसकी बेचैनी बढ़ने लगी जब उसने फिर से अंदर से आ रही रजनी आंटी की वो मदहोशी भरी आवाज़ सुनी
''आआआआआआआआहह राजऐशssss ....... उम्म्म्मममममम..... और ज़ोर से चोदो मुझे ........ जोर से चोदो ना.......''
तभी उसे ध्यान आया की दोनो बेडरूम की बालकनी एक ही है,
वो फिर से भागती हुई अपने रूम में गयी और बालकनी का दरवाजा खोलकर दूसरे रूम के पीछे पहुँच गयी...
वो दरवाजा भी बंद था पर उसकी खिड़की पर लगा परदा हटा हुआ था, वहां से उसे अंदर की पूरी चुदाई दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर उसका दिमाग़ ही खराब हो गया...
शायद उसकी लाइफ का ये पहला मौका था जब वो ऐसी लाईव चुदाई देख रही थी...
घर पहुँचकर वो कुछ देर तक ईशा के पास बैठा, पैर में बेंडेज लगाने की वजह से उसने शॉर्ट्स पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी जाँघ चमकती हुई दिखाई दे रही थी...
राजेश का मन तो कर रहा था की जीभ निकाल कर उसकी चिकनी जाँघो को चाट ले पर उसे अंदर ही अंदर ये भी पता था की अभी तो नही पर एक बार वो नैकलेस पहन ले तो ये काम ज़रूर हो सकता है...
शेफाली उसकी बेटी को उसके लिए तैयार करेगी..
ये सोचते हुए वो मंद मंद मुस्कुराने लगा.
अपने पापा को ऐसे बेवजह मुस्कुराते हुए देखकर ईशा बोली : "पापा....क्या बात है, क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो...''
राजेश : "उम्म...ना.....नही ...कुछ भी तो नही....बस ऐसे ही...चलो अब तुम आराम करो, कल बात करते है, कल मॉर्निंग में एक एक्सरे करवाने के लिए तुम्हे मेरे साथ हॉस्पिटल चलना होगा ओके ...सो जाओ अभी...गुड नाइट.''
इतना कहकर उसने एक गीला सा चुम्बन उसके माथे पर किया और उपर बने बेडरूम की तरफ चल दिया..
और जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उसकी साँसे मानो वहीं रुक सी गयी
अंदर का सीन ही इतना सैक्सी था
उसकी बीबी रजनी अपने पूरे कपड़े उतारकर बेड पर नंगी लेटी हुई थी...
और उसकी गदरायी हुई गांड दरवाजे की तरफ थी,
राजेश को दूर से ही उसकी मोटी गांड में से झाँक रहे उसके दोनो छेद सॉफ नज़र आ रहे थे..
राजेश को वहीं दरवाजे पर खड़ा देखकर रजनी ने पीछे सिर घुमाकर उसे देखा और बोली : "अब वहीं खड़े रहोगे या मेरा भी चेकअप करोगे डॉक्टर साहब...''
वो समझ गया की वो उसे चाँदनी वाली बात पर अभी तक छेड़ रही है...
राजेश मुस्कुराता हुआ आगे आया और दरवाजा बंद करके उसने वहीँ खड़े-2 सारे कपड़े निकाल फेंके..
अभी एक घंटे पहले ही उसके लंड ने माल निकाला था चाँदनी के चेहरे पर और तब से वो अभी तक खड़ा ही हुआ था...
इन्फेक्ट रजनी के सहलाने के बाद और पार्क में शेफाली की मेहरबानियों के बारे में सोचकर उसके लंड का तनाव और भी बढ़ चुका था..
इसलिए जब उसने कपड़े उतारे तो उसका लंड अपनी चरम सीमा में खड़ा हुआ रजनी के नंगे बदन को लपलपाते हुए देख रहा था.
राजेश को आता देखकर रजनी ने अपनी कमर उपर उठा दी...
आज वो सीधा उसके तीर को अपनी चूत में घुसवाना चाहती थी....
राजेश ने भी बेड पर अपने दोनो घटने रखे, लंड पर ढेर सारी थूक लगाई और एक ही झटके में उसकी गांड को गाड़ी के स्टेयरिंग की तरह पकड़कर उसकी चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल दिया...
''आआआआआआआआआआहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... उम्म्म्ममममममममममममममम...... सही जगह पर वार किया है डॉक्टर साहब....यहीं सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा था....''
राजेश ने उसकी गोरी गांड पर एक जोरदार चपत लगाई और आगे झुकते हुए उसकी चूत में ज़ोर-2 से अपना लंड पेलने लगा...
पूरे कमरे में उहह आहहह की आवाज़ें गूंजने लगी...
ये वो वक़्त था जब साथ वाले कमरे में चाँदनी कुछ देर पहले की घटना के बारे में सोचकर अपनी चिपचिपी चूत को उंगलियों से सहला रही थी..
और जैसे ही उसे दूसरे कमरे से आती हुई आवाज़ें सुनाई दी तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
वो समझ गयी की क्या हो रहा है...
वो मन ही मन बुदबुदाई : 'वाह....क्या स्टेमीना है अंकल का...'
और फिर उछलकर अपने बेड से खड़ी हुई और दबे पाँव बाहर निकालकर दूसरे रूम की तरफ चल दी...
पर वो दरवाजा अंदर से बंद था...
उसकी बेचैनी बढ़ने लगी जब उसने फिर से अंदर से आ रही रजनी आंटी की वो मदहोशी भरी आवाज़ सुनी
''आआआआआआआआहह राजऐशssss ....... उम्म्म्मममममम..... और ज़ोर से चोदो मुझे ........ जोर से चोदो ना.......''
तभी उसे ध्यान आया की दोनो बेडरूम की बालकनी एक ही है,
वो फिर से भागती हुई अपने रूम में गयी और बालकनी का दरवाजा खोलकर दूसरे रूम के पीछे पहुँच गयी...
वो दरवाजा भी बंद था पर उसकी खिड़की पर लगा परदा हटा हुआ था, वहां से उसे अंदर की पूरी चुदाई दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर उसका दिमाग़ ही खराब हो गया...
शायद उसकी लाइफ का ये पहला मौका था जब वो ऐसी लाईव चुदाई देख रही थी...