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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

निर्मला का काम बन चुका था,, ना चाहते हुए भी उसे मजबूरी बस अपने बेटे को शीतल के पास भेजना पड़ रहा था क्योंकि इस समय उसे अब शीतल अपनी सौतन लग रही थी,,, कर भी क्या सकती थी बुरी तरह से फंस चुकी थी अपनी एक गलती की वजह से वह इतने दिन से जिस गलती पर पर्दा डाले हुए थे वह परदा शीतल के सामने खुल चुका था,, शीतल निर्मला के राज को जान चुकी थी,,, निर्मला को अपनी इज्जत बचाने की अपने परिवार को बदनाम होने से बचाना था बरसों से कमाई हुई इज्जत शोहरत सबकुछ बचाना था जोकी दांव पर लगा हुआ था,,
और यह सब तभी मुमकिन था जब वहां शुभम को शीतल के पास भेजेगी,,, और ईसी का जुगाड़ करके वह अभी-अभी शुभम के कमरे से बाहर आई थी,, बस अब यह बात उसे शीतल को बताना था और उसके बाद शीतल अपना इंतजाम खुद ही कर लेगी यह विश्वास था उसे,,,
निर्मला अपने बेटे को शीतल के पास भेजने का पूरा इंतजाम कर रही थी लेकिन इस बात का भी ध्यान रख रही थी कि इस बात की भनक तक शुभम को ना लगे कि शीतल ने उन दोनों की भरपूर चुदाई के द्श्य को अपनी आंखों से देख ली है और निर्मला को ब्लैकमेल करते हुए शुभम को अपने पास बुला रही है।
निर्मला बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी,,,और अशोक लैपटॉप पर ऑफिस का कुछ जरूरी काम कर रहा था,,निर्मला कल के कार्यक्रम के बारे में योजना बना रही थी कि कैसे क्या करना है,,,, यह सोचते हुए उसकी नाइटी हल्की सी टांग घुटनों के बल मोड़ने की वजह से नीचे सरक कर कमर तक आ गई जिससे उसकी मोटी मोटी दुधिया जांघे एकदम उजागर हो गई,,, या देखते ही अशोक के तन बदन में काम की ज्वाला भड़कने लगी,,,, उसके मन में अपनी पत्नी को भोगने की लालच जाग गई,,, वह लैपटॉप उठाकर बेड के एक किनारे रख दिया और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया,,, अपनी बीवी की नंगी मोटी मोटी जांघों को देखते ही उसका लंड खड़ा होने लगा था,, जोकि उसके लंड का तनाव उतना बिल्कुल भी नहीं होता था जितना कि एक औरत की जबरदस्त चुदाई करने के लिए होनी चाहिए,,, लेकिन फिर भी अशोक में काम भावना कुछ ज्यादा ही प्रज्वलित थी। वह निर्मला की तरफ देखा तो वह किसी विचार में डूबी हुई थी,,, जो कि वह कल के प्रोग्राम के बारे में ही सोच रही थी,,, अपने मन में ही सोच रही थी कि कल कैसे भी करके शीतल जो करना चाहती है कर ले लेकिन इस बात की भनक उसके बेटे को बिल्कुल भी ना लगे कि शीतल के साथ संभोग करने के लिए खुद उसकी मां ने ही उसे भेजा है,,, वरना उसका बेटा क्या सोचेगा कि कल तक जिसके आसपास भटकने की भी इजाजत नहीं थी आज ऐसा क्या हो गया कि खुद उसकी मा ही शीतल के पास भेजने के लिए तैयार हो गई,,,,,वो यही सब सोच रही थी कि इस दौरान अशोक कब उसकी टांगों के बीच आकर अपने लिए जगह बना लिया उसे पता ही नहीं चला उसे इस बात का एहसास तब हुआ जब अशोक अपना सुखा लंड निर्मला की खूबसूरत बुर में लंड डाल दिया और लंड के साथ-साथ बुर भी सुखी होने की वजह से उसे दर्द का एहसास हुआ और उसके मुंह से आह निकल गई,,,,,, वह जब तक अशोक को कुछ बोल पाती अशोक का वह छोटा सा बेजान सा लंड हरकत करता हुआ उसकी बुर में घुस गया,,, हल्की आह के साथ निर्मला को इतना तो पता चला कि अशोक का लंड उसकी बुर में घुस रहा है लेकिन कब घुस गया इस बात का अहसास तक नहीं हुआ,,, और अशोक अपनी कमर हिलाता हुआ निर्मला को चोदना शुरू कर दिया,,, बस यही फर्क था अशोक और उसके बेटे सुभम मे,,,, अशोक अपनी बीवी निर्मला को चोदने से पहले किसी भी प्रकार का प्यार या रोमांटिकबातें बिल्कुल भी नहीं किया करता था ना तो उसके खूबसूरत अंगों को सहलाता था और ना ही उससे खेलता था,,, बस एक ही काम से आता था टांग फैला कर डाल देना,, वही जब सुभम अपनी मां की चुदाई करता था,, तोअपनी मां को पूरी तरह से नष्ट कर देता था उसे खूबसूरत अंगूठी पर कितना चलता था कि एकदम बिस्तर पर कसमसा जाती थी तड़प उठती थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए और खुद ही अपनी दोनों टांगें फैलाकर ऊसका स्वागत करते हुए अपनी बुर की गुलाबी पतियों कोअपने हाथों से फैला देती थी,, और अपने बेटे से जबरदस्त चुदाई का भरपूर आनंद लेते हुए गदगद हो जाती थी,,, तभी कुछ दो-चार मिनट ही गुजरे थे कि अशोक अपनी बेबी निर्मला की गोल-गोल चूची पर सर रखकर हांफने लगा उसका काम हो चुका था उसे बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि उसकी बीबी खुशी हुई कि नहीं हुई,,, बस अपना काम निपटा कर उसके बगल में लेट गया ,,, निर्मला को इतना गुस्सा आ रहा था कि मन तो कर रहा था कि दो तमाचा उसके गा पर लगा दे,,, लेकिन वह बस मन मसोसकर रह गई,,,

दूसरे दिन सुबह होते ही निर्मला फोन करके शीतल को सारी बात बता दी,,, शीतल भी उसी से बस यही बात बोली कि किसी भी तरह से वह अपने बेटे को मेरे घर भेज दे वैसे तो वह तुरंत तैयार हो जाएगा लेकिन उसे यह पता नहीं लगना चाहिए कि यह सब क्यों हो रहा है बस उसका घर पहुंचने की देरी है उसके बाद वह सब कुछ संभाल लेगी,,,
घड़ी में रात के 8:00 रहे थे और निर्मला एकदम तैयार हो गई थी पीली ट्रांसपेरेंट साड़ी में उसका गोरा बदन बेहद जच रहा था,,शुभम तो अपनी मां को इस तरह से तैयार होता हुआ देखकर एकदम से कामोत्तेजना से भर गया उसकी बड़ी-बड़ी हिलती हुई गांड देखकर उसका लंड खड़ा होना लगा,,लेकिन अपने बाप की हाजिरी में वह अपनी मां के साथ कुछ भी कर नहीं सकता था इसलिए पैंट के ऊपर से अपने लंड को मसल कर रह गया,, निर्मला अपने बेटे की हालत को अच्छी तरह से भांप गई थी,,, अपने बेटे की यह तड़प निर्मला को अंदर तक उत्साहित कर दे रही थी। लेकिन इस बात से वादे हद बेचैन भी हो जा रही थी कि उसका बेटा अब शीतल के घर जाएगा और जो सुख वह अब तक उसे देता आ रहा है अब वही सुख शीतल को देगा,,, लेकिन मजबूरी थी जो उसे अपने से ही शीतल के घर भेजना पड़ रहा था,,, निर्मला तैयार होकर घर से बाहर निकलते निकलते शुभम से बोली,,,।

सुबह 9:00 बजे शीतल के घर पहुंच जाना,,,

पहुंच जाऊंगा मम्मी तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,

कैसे चिंता ना करु एक जवान लड़के को एक प्यासी औरत के पास जो भेज रही हु चिंता तो होगी ही ,,,,(निर्मला अपने मन में बडबडाते हुए घर से बाहर निकल गई,,,शुभम अपनी मां को जाता हुआ देखता रहा अब उसे 9:00 बजने का इंतजार था वह बड़ा बेसब्र नजर आ रहा था,,, बाथरूम में जाकर नहाने लगा क्योंकि वह पूरी तरह से शीतल को इंप्रेस करना चाहता था,,,
दूसरी तरफ शीतल की जो हालत थी,, वह शब्दों में बयां कर पाना बड़ा मुश्किल था,,, उसके पांव तो जमीन पर टिक ही नहीं रहे थे,,, वह बेहद खुश थी उसके सपनों का राजकुमार जो आज रात को उसके घर आने वाला था उसे इस वक्त उस तरह का ही एहसास हो रहा था जो एक नई नवेली दुल्हन को अपनी सुहागरात की रात को अपने बिस्तर पर अपने पति का इंतजार करते हुए होता, है,,। वह अपने आप तो पूरी तरह से दुल्हन की तरह तैयार करना चाहती थी इसलिए वह बाथरूम में जाकर सबसे पहले तो,,, बाथरूम के ड्राोवर में से वीट क्रीम निकाल कर अपनी रेशमी बालों के गुच्छे को क्रीम लगाकर साफ करके अपनी बुर को एकदम चिकनी कर दी,,,
 
शीतल अपनी खूबसूरती में और भी ज्यादा इजाफा करते हुए अपनी टांगों के बीच के उस रेशमी बालों के झुरमुट को अत्यधिक महीने और खुशबू से भरी हुई वीट क्रीम लगाकर उसे साफ कर के एकदम चिकनी कर दी थी,,, अब शीतल की रसीली मादकता से भरी हुई कचोरी की तरह फुली हुई बुर किसी औरत की नहीं बल्कि जवान लड़की की लग रही थी जिसे देखकर शीतल भी शरमा गई,,,,, एक बार वह खुद अपनी हथेली से अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को दबाने की लालच को रोक नहीं पाई और अपनी हथेली उस पर रखकर हल्के से रगड़ना शुरु कर दी अपनी बुर की गर्माहट शीतल को अपनी हथेली पर बराबर महसूस हो रही थी। अपनी बुर की गर्माहट से शीतल को इस बात का एहसास हो गया कि आज वह कुछ ज्यादा ही गर्म हो रही है और होती भी क्यों ना आज उसके सपनों का सौदागर जो उसके घर आने वाला था उसके महीनों की दबी हुई प्यास को बुझाने वाला था जिस मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड को अपनी बुर में लेकर उसे महसूस करने का सपना अपने मन में संजोए बैठी थी आज उसे पूरा करने का पल जो आने वाला था वह पूरी तरह से प्रसन्नता के साथ साथ उत्तेजना से भी भर्ती चली जा रही थी,,, शुभम से मिलने के अहसास से ही वह पूरी तरह मस्त हुए जा रही थी,,,, एक तरह से आज शीतल की सुहागरात ही थी जिसमें वह अपने पति के उम्र के व्यक्ति से नहीं बल्कि अपने बेटे के उम्र के लड़के के साथ पलंग तोड़ सुहागरात मनाने वाली थी,,,,। अपने आप को तैयार करने में वह कोई भी कसर बाकी रखना नहीं चाहती थी।

Sheetal or Shubham


शीतल संपूर्ण नग्न अवस्था में आदम कद आईने के सामने खड़ी थी और आगे पीछे गोल गोल घूम कर अपने बदन के हर एक अंग को बड़ी बारीकी से निरीक्षण करते हुए देख रही थी,,, उसे अपने बदन की खूबसूरती और अपने बदन के हर एक अंग की बनावट पर संपूर्ण विश्वास था कि इसे देखते ही शुभम पूरी तरह से पागल हो जाएगा और उसकी आगोश में आकर पिघलने लगेगा जिस तरह से वह अपनी मां की बाहों में पिघलता है,,, वैसे भी भगवान ने शीतल के खूबसूरत बदन पर खूबसूरती दोनों हाथों से लुटाए थे बस निर्मला खूबसूरती के मामले में एक कदम ही आगे थी बाकी सब कुछ वैसा ही था जैसा निर्मला के पास था,,,
शीतल अपने नंगे बदन को आईने में देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और धीरे-धीरे एक-एक करके अपने बदन के हर एक अंग को अपने हाथों से उंगलियों से स्पर्श करके उस का जायजा ले रही थी,,, वीट क्रीम से साफ करने के बाद उसकी रसीली बुर कुछ ज्यादा ही जवान लगने लगी थी,,, टांगे एकदम सुडोल चिकनी गोरी मोटी मोटी जांगो की खूबसूरती लिए कहां जा रही थी रसीली बुर की पतली दरार बेहद पतली लकीर की तरह थी,,, एकदम कम सीन जवान मात्र हल्की सी गुलाबी पत्तियां बुर की पत्नी दरार के मुहाने से बाहर झांकती हुई नजर आ रही थी जो कि उसकी खूबसूरती में बढ़ोतरी ही कर रही थी,,
Sheetal or Shubham

गुलाब की पत्तियों और खूबसूरत साबुन के झाग से बाथरूम का टब भरा हुआ था शीतल को हमेशा बाथ टब में घंटों नग्न अवस्था में नहाना अच्छा लगता था,,,, शीतल उसी तरह से चलते हुए बाथरूम में अपने दोनों टांग डालकर उसमें पसर गई,,,, बाथटब का ठंडा पानी उसके बदन की गर्माहट को शीतलता प्रदान कर रहा था,,, लेकिन यह तो बदन की ऊपर की गर्मी थी तन के अंदर धड़कते हुए शोलों को यह ठंडा पानी शांत नहीं कर सकता था उसके लिए तो शुभम के मोटे तगड़े लंड से निकला हुआ झरना ही इस ज्वाला को शांत करने की ताकत रखता था,,, बाथटब में जी भर के नहाने के बाद शीतल बात तब से बाहर आकर सावर चालू कर दी और बरसात के पानी की तरह पानी का फव्वारा उसके ऊपर गिरने लगा जिसमें वह अच्छे से अपने पूरे बदन को रगड़ रगड़ कर साफ करने लगी साबुन का झाग उसके पूरे बदन पर लगा हुआ था जिसे वह और भी ज्यादा रगड़ रगड़ कर साफ़ कर रही थी किसी भी तरह की कसर बाकी नहीं रखना चाहती थी इसलिए खास करके अपनी दोनों मद मस्त चूचियों और रसीली बुर पर कुछ ज्यादा ही ध्यान देते हुए साबुन से रगड़ रगड़ कर उसे साफ कर रही थी,,,। जिस तरह से मेहमान आने से पहले घर की सफाई की जाती है उसी तरह से शीतल अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर हल्की हल्की उंगली डालकर उसे साफ कर रही थी वह पूरी तरह से मेहमान को खुश करना चाहती थी ताकि मेहमान को किसी भी तरह की दिक्कत ना हो। क्योंकि उसी मेहमान को ही तो बुर का दरवाजा जो खोलना था,,,
शीतल नहा चुकी थी और नरम नरम टावल से अपने बदन पर से पानी को पोछ रही थी,,, बाथरूम से बाहर निकलने से पहले शीतल बाथरूम में ही टावर हैंगर में टांग दी और उसी तरह से एकदम नंगी ही अपने कमरे में घुस गई धीरे-धीरे वह तैयार होने लगी अपनी सबसे पसंदीदा लाल रंग की साड़ी पहनकर वह एकदम दुल्हन की तरह लग रही थी,,, हाथों में कांच की चूड़ियां पहन ले और इतनी ज्यादा पहनने की हाथ थोड़ा भी हिलता था तो खनखन की आवाज आने लगती थी। शीतल चाहती तो पारदर्शी नाइटी पहन सकती थी क्योंकि पारदर्शी नाइटी पहनने के बाद उसके बदन के हर एक अंग का कोना कोना नाइटी में से झलकता रहता। और उस पारदर्शी नाइटी में शीतल को देखकर दुनिया का कोई भी मर्द उसकी तरफ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता था लेकिन शीतल के मन में कुछ और चल रहा था आज वह शुभम के साथ एक तरह से सुहागरात मनाने के मूड में थी इसलिए सुहागरात मनाने के लिए उसे दुल्हन बनना जरूरी था इसीलिए भाई एकदम दुल्हन की तरह सजना चाहती थी और थोड़ी देर में ही वह एकदम दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार हो गई,,,,



शीतल पूरी तरह से दुल्हन की तरह तैयार हो चुकी थी और किचन में जाकर खाने का बंदोबस्त कर रही थी,,, उसने केक का ऑर्डर दे रखी थी जो कि थोड़ी ही देर में उसके घर पर आने वाला था।
एक तरफ शीतल की तरफ से इस तरह की बेहतरीन तैयारी चल रही थी और दूसरी तरफ शुभम शीतल को पूरी तरह से इंप्रेस करने के लिए अपने तरीके से वह भी तैयार हो रहा था उसने भी आज वीट क्रीम लगाकर अपने झांठ के बाल एकदम साफ करके अपने लंड को एकदम चिकना कर लिया था,,, और अपने लंड के बाल को साफ करते समय उसके जेहन में सिर्फ शीतल ही घूम रही थी जिसकी वजह से धीरे-धीरे करके उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था। शुभम को यह पक्के तौर पर तो बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि आज की रात शीतल के साथ उसकी संभोग वाली रात होगी लेकिन फिर भी उसके मन में यह विश्वास था कि आज उसकी किस्मत अच्छी ही होगी इसलिए वह पूरी तैयारी करके जाना चाहता था,,, पहली बार में ही हो शीतल की जबरदस्त चुदाई करना चाहता था जिससे वह पानी पानी हो जाए इसलिए जल्दी उसका लंड ना झड़ जाए इसलिए शीतल को याद करते हुए अपने लंड के बाल को साफ करते समय वह अपने लंड को हिला हिला कर पानी निकाल दिया था ताकि दोबारा संभोग करने पर ज्यादा देर तक वह टिका रहे,,,, जिस तरह से एक कुशल सैनिक युद्ध पर जाने से पहले अपने हथियार को बराबर चेक कर लेता है और उसे व्यवस्थित करके ही युद्ध के मैदान में उतरता है उसी तरह से शुभम भी पूरी तैयारी के साथ शीतल के साथ पलंग रूपी मैदान में उतरना चाहता था इसलिए वह सरसों के तेल से अपने लंड की बराबर 15 मिनट तक मालिश किया ताकि वह शीतल की बुर में जाकर गदर मचा सकें।
घर में इस समय उसके सिवा कोई नहीं था इसलिए वह भी पूरे घर में नहाने के बाद नंगा ही घूम रहा था और सच मानो तो उसे इस अवस्था में पूरे घर में घूमना बहुत अच्छा लग रहा था वह मिलने की सोच रहा था कि काश ऐसा हो जाता कि वह घर में कभी कपड़े पहनता ही नहीं इसी तरह से नंगा ही घूमता रहता तो कितना मजा आता ऐसा सोचते हुए अपने कमरे में जाकर अलमारी में से अपने लिए नए कपड़े निकालने लगा। थोड़ी ही देर में एक जींस एक अच्छी सी टी शर्ट पहन कर तैयार हो गया शुभम भी काफी हैंडसम लग रहा था,,, घड़ी की तरफ नजर उठाकर देखा तो 9:15 का समय हो रहा था समय हो गया था शीतल के घर जाने के लिए इसलिए वह सब कुछ ठीक करके घर से बाहर दरवाजे पर लॉक करके शीतल के घर की तरफ निकल गया जहां पर शीतल डाइनिंग टेबल पर खाने का हर एक सामान जो कि उसने खासतौर पर शुभम के लिए ही बनाई थी एकदम से सजा कर रखी हुई थी थोड़ी ही देर पहले जो उसने होटल से केक मंगाई थी वह भी आ चुकी थी,,,,



तभी दरवाजे की घंटी बजी और घंटी के साथ ही सीतल का दिल जोरो से धड़कने लगा,,, उसे एहसास हो गया कि दरवाजे पर शुभम खड़े होकर घंटी बजा रहा है वह लगभग दौड़ते हुए गई और तुरंत दरवाजा खोल दी सामने शुभम ही था उसे देखते ही शीतल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव के साथ-साथ मुस्कान तैरने लगी। शुभम की नजर शीतल पर पड़ी तो वह उसे देखता ही रह गया शीतल एकदम दुल्हन की तरह लग रही थी और वह भी नई नवेली हाथों में रंग बिरंगी चूड़ियां अलग ही कहानी कह रही थी माथे की बिंदी कानों का झुमका होठों पर लाल रंग की लिपस्टिक गली में मंगलसूत्र यह सब देख कर शुभम को एक अलग ही एहसास हो रहा था जिसका वह वर्णन नहीं कर सकता था।
शुभम को ना जाने क्यों ऐसा लग रहा था कि शीतल आज एक दुल्हन है और वह उसका दूल्हा,,,,, शुभम एक टक शीतल को देखे जा रहा था,,, इस तरह से शुभम को अपनी तरफ देखता हुआ पाकर शीतल शर्म से गड़ी जा रही थी,,,
वह शर्माते हुए कुछ बोलती से पहले ही शुभम बोला ,,,

आज तो आप एकदम दुल्हन की तरह लग रही हो मैडम,,,

मैडम नहीं शीतल कहो,,,,, दरवाजे पर खड़े रहोगे या अंदर भी आओगे,,,,

क्या करु मैडम सॉरी शीतल तुम्हारा यह रूप देख कर मैं तो एकदम दंग हो गया हूं,,,

क्यों मैं अच्छी नहीं लग रही हूं क्या,,,,

तुम तो एकदम दुल्हन लग रही हो सच में अगर मेरा बस चलता तो आज मैं तुमसे शादी कर लेता,,,

तो कर लो रोका किसने है,,,,। ( इतना कहकर वह हंसने लगी और शुभम भी मुस्कुराता हुआ कमरे में दाखिल हो गया और शीतल दरवाजा बंद करके लॉक कर दी वह ऐसी कोई भी गलती नहीं करना चाहती थी जो गलती निर्मला ने की थी अगर वह भी होश में रहकर दरवाजे को लोक कर दी होती तो इतना सुनहरा मौका शीतल को कभी नहीं मिलता,,।)

मैं तो सुना था शादी की सालगिरह की पार्टी है लेकिन यहां तो कोई भी नहीं है,,,

तुमने ठीक ही सुना है आज मेरी शादी की सालगिरह है लेकिन मेरे पतिदेव शहर से बाहर बिजनेस के सिलसिले से गए हुए हैं और मैं इस जगह पर नई-नई हूं इसलिए मैं यहां किसी को जानती नहीं हूं इसलिए मैं अपनी शादी की पार्टी मनाने के लिए सिर्फ और सिर्फ तुम ही को बुलाई हूं,,,,

मुझे बहुत खुशी हुई कि इतने बड़े घर में और वह भी रात के समय सिर्फ मैं और तुम है,,,

सच कहूं तो शुभम यह पार्टी में ने सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए ही रखी हुं,,,

लेकिन ऐसा क्यों,,,,?

यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है यह बात तुम भी अच्छी तरह से जानते हो,,,( इतना कहकर वह टेबल पर रखे हुए केक पर से पर्दा हटाने लगी और परदे के हटते ही केक सामने नजर आने लगा और उस पर जो लिखा था उसे देखकर शुभम एकदम खुश हो गया,,, खुश होने वाली बात ही थी क्योंकि केक पर शीतल ने शीतल लव शुभम लिखवाई थी,,,,)

यह क्या लिख लिखवाई हो शीतल,,,( शुभम हंसते हुए बोला)

क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या,,,,?

मैं बहुत खुश हूं मैं कभी सोचा भी नहीं था कि तुम मुझे इस तरह से सरप्राइस दोगी,,,,

यह केक हमारे प्यार के निशानी है,,,,, अब हम दोनों साथ मिलकर इसे काटे,,,( इतना कहकर शीतल केक काटने वाला चाकू लेकर तैयार हो गई और वह थोड़ा सा झुक गई और शुभम मौके का फायदा उठाते हुए ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और शीतल के बदन से एकदम से सज गया जिसकी वजह से शीतल के भारी-भरकम गोलाकार नितंबों से शुभम के पेंट का आगे वाला भाग एकदम सट गया जोकि शीतल को दुल्हन के रूप में देखकर खड़ा होने लगा था जिस तरह से शुभम शीतल के पीछे खड़ा था शीतल को इस बात का एहसास अपने नितंबों पर बराबर हो रहा था कि शुभम का लंड खड़ा होने लगा है और इस एहसास के वह गदगद होने लगी,,,, शुभम अगले ही पल अपना हाथ आगे बढ़ा कर शीतल का हाथ पकड़ लिया जिसमें वह चाकू पकड़े हुए थी शुभम की इस हरकत से शीतल एकदम से प्रसन्न हो गई और एक बार नजर घुमाकर शुभम की तरफ देखने और मुस्कुरा कर के काटने लगी शुभम भी उसका पूरा सहयोग करते हुए जिस तरह पूरा अपना हाथ ले जा करके काट रही थी वैसे वैसे वह भी अपना हाथ की तरफ घुमा रहा था और साथ ही उसके नितंबों पर अपने कड़क लंड का एहसास बराबर करा रहा था। शीतल एकदम पागल हुए जा रही थी शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड पर रगड़ता हुआ महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसका बस चलता तो इसी समय अपनी साड़ी ऊपर उठाकर उसके लंड को अपनी बुर में ले ली होती लेकिन इतनी जल्दी वह यह सब शुरू होने देना नहीं चाहती थी,,, इसलिए जल्दी से केक के टुकड़े को अपने हाथ में लेकर शुभम को खिलाने के लिए उसकी तरफ घूम गई अपनी तरफ शीतल का हाथ आता हुआ देखकर वजह से मुंह खोल दिया और शीतल भी बिना देर किए केक के टुकड़े को शुभम के मुंह में डाल दी और तुरंत आधे बचे केक को अपना मुंह आगे बढ़ाकर उसे अपने मुंह में ले ली,,, दोनों इस तरह से केक खाने का आनंद ले रहे थे देखते ही देखते कब दोनों के होंठ एक हो गए दोनों को पता ही नहीं चला शीतल पागलों की तरह शुभम के होंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी,,, शुभम भी मदहोशी के आलम में शीतल के लाल लाल होठों को चूसने का आनंद लेते हुए अपने हाथ को उसके बदन पर हर जगह घूम रहा था वह एकदम उत्तेजित हो चुका था वह कभी शीतल की चूची को दबा देता तो कभी उसकी बड़ी बड़ी गांड को वह शीतल के खूबसूरत बदन के हर अंग से खेल रहा था शीतल को शुभम की हरकत बेहद लुभावनी लग रही थी,,, वह भी शुभम का बराबर साथ दे रही थी वह शुभम को अपनी बाहों में कस के दबाए हुए थी,,, पूरे कमरे में दोनों की सांसो की तेज आवाज ही गूंज रही थी,,,,
मादकता भरी जवानी से भरपूर शीतल को अपनी बाहों में पाकर शुभम पूरी तरह से बहकने लगा था वह उतावला हो गया था शीतल की बुर में अपना लंड पेलने के लिए,, इसलिए बात तुरंत अपने दोनों हाथों से शीतल की साड़ी को ऊपर उठाने लगा शीतल को इस बात का एहसास हो गया कि सुबह मुश्किल साड़ी उठाकर अपने लंड को उसकी बुर में डालना चाहता है लेकिन शीतल नहीं चाहती थी कि यह सब इतनी जल्दी हो वह सब्र रखकर धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहती थी क्योंकि अभी पूरी रात बाकी थी इसलिए वह तुरंत अपने दोनों हाथ नीचे की तरफ करके शुभम के हाथ पर रख कर उसे रोक दी और तुरंत उसके हाथ से छिटक कर दूर खड़ी हो गई,,,और बोली,,,

इतनी जल्दी भी क्या है मेरे राजा अभी रात को अच्छी तरह से जवान तो होने दो,,,( इतना कहते हुए शीतल पीछे कदम बढ़ा कर अपनी भारी-भरकम नितंबों को डाइनिंग टेबल के सहारे टीका कर बड़े ही मादक स्वर में बोली,,,)
तुम्हारे लिए इतनी मेहनत करके जो मैं खाना बनाई हूं पहले उसका स्वाद तो चक लो फिर इसका (अपनी गोल-गोल चूचियों पर दोनों हाथों से इशारा करते हुए) मजा लेना।

लेकिन मुझे तो तुम्हारी खूबसूरत बदन की भूख है जी करता है कि तुम्हारा अंग अंग खा जाऊं खास करके तुम्हारी यह गोल गोल दोनों चूचियां जिसका गरम गरम दूध पीने के लिए मैं कब से बेकरार हूं।
( शुभम कि यह गरमा गरम बातें सुनकर शीतल पूरी तरह से पिघलने लगी थी उसकी पेंटिंग गीली होना शुरू हो गई थी उसकी सांसों की गति तेज होती जा रही थी क्योंकि वह नहीं जानती थी कि शुभम इस तरह की गंदी बातें भी कर सकता है क्योंकि अभी तक तो वह लोग स्कूल में मौका मिलती है थोड़ा बहुत छेड़छाड़ अंगों से खिलवाड़ कर लेते थे लेकिन इस तरह के शब्दों का प्रयोग पहली बार वह शुभम के मुंह से सुन रही थी इसलिए वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,, मदहोशी उसके पूरे बदन पर छाने लगी थी शुभम को उसकी बातों का जवाब देते हुए बोली।)

सब कुछ मिलेगा लेकिन उसके पहले भोजन ,,,,(इतना कहकर बार डायनिंग टेबल की तरफ खाना लगाने के लिए घूम गई,,, वह दो प्लेट निकाल कर खाना परोसने लगी,, जिसकी वजह से उसका खूबसूरत बदन थीरकन खा रहा था खास करके उसकी बड़ी-बड़ी मादक गांड जो की कसी हुई साड़ी में बेहद कातिल लग रही थी। शुभम से रहा नहीं जा रहा था वह शीतल से जुड़े हर एक पल को अपनी नजरों में कैद कर लेना चाहता था जब से वह शीतल के घर में प्रवेश किया था तब से शीतल के इतने समकक्ष होने की वजह से वह पूरी तरह से उत्तेजना से भरता चला जा रहा था। शीतल के बदन से उठती हुई मादक खुशबू उसके तन बदन को पागल बना रही थी। वह गहरी गहरी सांस लेते हुए बिना पलक झपकाए शीतल को ही घूर रहा था,,,
कुछ ही पल में शीतल ने दोनों प्लेट में खाना परोस कर तैयार कर दी और वह किचन की तरफ जाने लगी और बोली,,,

तुम खाना शुरू करो मैं जल्दी से आती हूं,,,( इतना कहकर किचन की तरफ जा ही रही थी कि शुभम पीछे से आवाज देते हुए बोला,,,)

जल्दी से आ जाओ साथ ही बैठकर खाएंगे ,,,,(शीतल उसके मुंह से यह बात सुनकर कुछ पल के लिए रुकी और शुभम की तरफ देख कर मुस्कुरा दी और फिर वापस किचन में चली गई। किचन में जाते हैं और फिर खोलकर उसमें से पानी की 2 बोतल निकालने लगी कि तभी उसका मोबाइल बज उठा मोबाइल की स्क्रीन पर निर्मला का नाम देखकर शीतल के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी वह कॉल को रिसीव कर के काम से लगाई थी कि सामने से आवाज आई,,,।

क्या हुआ शीतल शुभम आया कि नहीं ,,,,

हां आ गया है और खाना खाने की तैयारी हो रही है,,,
( शीतल की बातें सुनकर कुछ देर के लिए निर्मला एकदम खामोश हो गई और कुछ सोचने के बाद बोली।)

देखना शीतल संभालना वह अभी बच्चा ही है,,,( निर्मला की बातों में शुभम के लिए फिकर साफ झलक रही थी,,, निर्मला की यह बात सुनकर शीतल जोर जोर से हंसने लगी और हंसते हुए बोली।)

हां मैंने देखी हूं शुभम अभी बच्चा ही है जोकि कैसे अपनी मां के साथ पूरा पलंग हिला रहा था।
( शीतल की यह बात सुनकर निर्मला कुछ बोल नहीं पाए क्योंकि वह समझ गई थी कि शीतल क्या बोलना चाह रही है वह खामोश रही,,)
अच्छा निर्मला हम दोनों खाना खाने जा रहे हैं रखती हूं,,( इतना कह कर शीतल फोन काट दी और मोबाइल को फिर से किचन के टेबल पर रख कर कुछ सोचते हुए मुस्कुराने लगी।)
 
शीतल मन ही मन मुस्कुरा रही थी वह बहुत खुश थी क्योंकि आज जो उसे खुशी और तन का सुख मिलने वाला था उसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,, दूसरी तरफ निर्मला पार्टी में थी लेकिन उसका मन वहां पर बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वहां पर शहर के माने जाने लोग अपनी अपनी बीवी के साथ पार्टी में शामिल हुए थे लेकिन सभी की नजर घूम फिर कर निर्मला पर ही टिक जाती थी वैसे भी पार्टी में आए सभी लोगों की बीवी से सबसे ज्यादा खूबसूरत निर्मला ही थी और यह बात पार्टी में आई दूसरी औरतों को खटक भी रही थी क्योंकि किसी न किसी बहाने उन लोगों के पति अशोक से जाकर मिल रहे थे और उसकी पत्नी से हाय हेलो कर रहे थे,,,
शीतल किचन से बाहर निकलने से पहले एक बार साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर हाथ लगाकर यह देख लेना चाहती थी कि वाकई में उसकी पेंटी गीली हुई है कि नहीं और साड़ी के ऊपर से ही अपनी पेंटी पर हाथ लगाते हैं उसे इस बात का एहसास हो गया कि उसकी पेंटी बुरी तरह से गीली हो चुकी थी। अपने गीलेपन के एहसास से शीतल मन ही मन प्रसन्न होने लगी,,, और पानी की दोनों बोतल लेकर वह किचन से बाहर आ गई अभी तक शुभम ने खाना शुरू नहीं किया था।

शुभम तुमने तो अभी तक सच में खाना शुरू नहीं किया (दोनों बोतल को डाइनिंग टेबल पर रखते हुए अपनी बड़ी-बड़ी बड़ी गांड को कुर्सी पर रखकर बैठ गई)

तुम्हारी शादी की सालगिरह है भला तुम्हारे पहले खाए बिना मैं कैसे खा सकता हूं,,,

औहह शुभम तुम कितने अच्छे हैं सच में तुम्हारी जिस से भी शादी होगी वह दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की होगी,,

Sheetal

coin flip game
तुम बनना चाहोगी दुनिया की सबसे खूबसूरत और खुशनसीब लड़की,,,,

लड़की,,,,,,, तुम पागल तो नहीं हो गए हो मैं औरत हूं और तुम मुझे लड़की कह रही हो,,

सच कहूं तो तुम मुझे लड़की से कम नहीं लगती है अगर तुम्हारे सामने एक लड़की को खड़ा कर दिया जाए तो वह तुम्हारे सामने पानी भर्ती हुई नजर आएगी,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम पहला निवाला अपने हाथों से शीतल को खिलाते हुए बोला शीतल भी शुभम के द्वारा चलाए गए पहले निवाले को प्रसन्नता के साथ मुंह में भर ली और खाने लगी,,, शुभम की बातें सुनकर उसे बेहद खुशी हो रही थी दुनिया में ऐसी कोई भी औरत नहीं है जो अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर खुश ना हो,,,। वह कुछ बोल नहीं रही थी बस निवाले को अपने दांतो से चबाते हुए मुस्कुरा रही थी,,,

लेकिन शीतल मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है,,,( निवाला अपने मुंह में डालते हुए) कि जिस दिन से मम्मी तुमको और मुझे क्लास रूम में उस स्थिति में देखी थी तब से वह मुझे कभी तुम्हारे पास भी भटकने नहीं देती थी तो आज ऐसा क्या हो गया जो मुझे खुद तुम्हारे घर पर भेज दी और यह जानते हुए कि तुम घर पर अकेली हो और वह भी रात के समय,,,,

मैं अच्छी तरह से जानती थी कि यह सवाल तुम्हारे मन में जरूर उठ रहा होगा,,,,( शीतल मुस्कुराते हुए बोली)



मैं कुछ समझा नहीं,,,

यह समझ लो कि एक न एक दिन सब का दिन आता है और आज मेरा दिन है,,,,( इतना कहते हुए वह दूसरा निवाला लेकर खाना शुरु कर दी,,, शुभम को अभी भी कुछ भी समझ में नहीं आया था उसके लिए बहुत बड़ा प्रश्न था कि उसकी मां ने आखिर अकेले ही शीतल के घर पर क्यों उसे भेज दी,,, यह बात उसके लिए राज था,,, लेकिन वह कुछ बोला नहीं बस खाने का लुफ्त उठाने लगा। शीतल के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी आज उसे अपने मन की सारी मुराद को पूरी करना था,,, हर नीवाले के साथ उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि वह शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने गले के नीचे गटक रही है,,, पेंटी का चिपचिपा पन ऊसे बराबर महसूस हो रहा था,, पर वह अपने वजूद को अपनी पेंटी में पिघलता हुआ महसूस कर रही थी,,, कामुक और प्यासी औरतों का वजूद उनकी पैंटी तक ही सीमित रहता है जिस तरह से शीतल का था,,, शुभम जो कि उसके बेटे के ही उम्र का था अपनी कामुकता की वजह से उसे शुभम पर पूरी तरह से आकर्षण हो गया था और वह अपने बेटे की उम्र के लड़के की वजह से पूरी तरह से उत्तेजना से भर गई थी और वह अपनी पेंटी को भी दो होती हुई महसूस कर रही थी,,, शीतल पूरी तरह से चुदवाती हो गई थी और वह चलते-चलते शुभम को लेकर अपने कमरे में घुस जाना चाहती थी इसलिए वह जल्दी से खाने का कार्यक्रम से मिलाकर कुर्सी पर से खड़ी हुई,,, और शिवम को वहीं रुकने के लिए बोलकर बाथरूम की तरफ जाने लगी उसे बहुत जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने से पहले पूरी तरह से नमकीन पानी निकाल देना जाती थी इसलिए वह जल्दी से बाथरूम में घुस गई,,, शुभम उसे जाता हुआ देख रहा था और जब उसे इस बात का अहसास हुआ कि शीतल बाथरूम में गई है तो वह भी उसके पीछे पीछे चल दिया बाथरूम के दरवाजे के करीब पहुंचते ही उसे बहुत जोरों की सीटी की आवाज सुनाई दी और उस सिटी की आवाज सेवा अच्छी तरह से वाकिफ था क्योंकि इस तरह की सीटी की आवाज वह महीनों से सुनता आ रहा था उसे समझते देर नहीं लगी कि शीतल मुत रही है,,, यह ख्याल और एहसास उसके मन में आते वह पूरी तरह उत्तेजना से भर गया। शीतल को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि शुभम बाथरूम तक उसके पीछे-पीछे आ जाएगा इसलिए वह बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ रखी थी,,, लेकिन दरवाजा खुला पाकर शुभम का मन मचलने लगा उसने अब तक ना जाने कितनी औरतों को पेशाब करते हुए देखा था आज उसके मन में शीतल को पेशाब करते हुए देखने की लालच पनपने लगी और वह अपनी इस लालच को रोक नहीं पाया और सीधा बाथरूम के दरवाजे खड़े हो गया जहां से सीधा उसकी नजर शीतल पर पड़ी जो दरवाजे के ठीक सामने बैठकर पेशाब कर रही थी।,,,, शुभम के तो होश उड़ गए एक साथ चार बोतलों का नशा उसकी आंखों में उतर आया वो कभी सोचा नहीं था कि एक औरत पेशाब करते हुए इतनी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी लगती होगी ऐसा लग रहा था कि आसमान से कोई अप्सरा नीचे जमीन पर उतर कर आई है सिर्फ और सिर्फ पेशाब करने के लिए,,,
शुभम की तो आंखें फटी की फटी रह गई उसकी पलक झपकना भूल गई वो पागलों की तरह शीतल को मूतते हुए देख रहा था,,, कदमों की आवाज की आहट सुनकर शीतल को एहसास हो गया कि शुभम भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम में आ गया है,,, लेकिन शीतल के लिए यह पल ऐसा था कि शुभम पर सब कुछ अपना तन मन सब कुछ न्योछावर करने के लिए तैयार हो चुकी शीतल शुभम की इस हरकत से पूरी तरह से शर्मसार होने लगी क्योंकि आज तक उसने किसी मर्द के सामने पैसा आप नहीं की थी और ना ही किसी मर्द ने उसे पेशाब करते हुए देखा था,,,।
शीतल शर्मा से गाड़ी जा रही थी कि उसे मालूम था कि इस समय शुभम ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसकी बड़ी-बड़ी गांव को देख रहा होगा और उसके रसूलपुर से भूत आते समय निकल रही सीटी की आवाज जरूरत के कानों तक जा रही होगी इस आभासी से वह पूरी तरह से शर्म से घड़ी जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस पल का सामना कैसे करें जबकि वह शुभम से चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी और एक जब औरत एक मर्द से संपूर्ण रूप से चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है तो उसके लिए शर्म कोई मायने नहीं रखती लेकिन यहां पर शीतल के लिए यह पल बेहद शर्मनाक था लेकिन फिर भी शर्मसार होने के बावजूद भी उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी उसे उत्तेजना का भी एहसास हो रहा था कि वह आज एक गैर मर्द के सामने गैर मर्द क्या अपने ही बेटे के उम्र के लड़के के सामने वह अपनी गांड खोल कर मुत रही थी,,,, शीतल को इतनी जोरों से पेशाब लगी हुई थी कि वह अभी तक अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रही थी जो कि सामने की दीवार की चिकनी टाइल्स पर पडते ही मोतियों के दाने की तरह फैल जा रही थी,,,,, यह पल शुभम के लिए और खास करके शीतल के लिए बेहद अद्भुत उन्माद से भरा हुआ था। इस तरह का नजारा मर्द अपनी जिंदगी में बहुत ही कम ही बार देख पाता है खास करके दूसरी औरतों को इस अवस्था में देख पाना तो शायद ही किसी मर्द के लिए नसीब हो,,, लेकिन शुभम इन सब में अपवाद था वह कई बार औरतों को इस तरह से पेशाब करते हुए देख चुका था एक तरह से पेशाब करते हुए औरतों को देखना शुभम के लिए बेहद उत्तेजना वाला पल साबित होता था और इसी के लिए वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था और दरवाजे पर खड़े-खड़े ही अपने पेंट की चैन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे हिलाना शुरू कर दिया था जो कि अभी तक शर्म के मारे शीतल अपनी नजर घुमाकर पीछे खड़े शुभम को देखी नहीं थी वह बस शर्म का एहसास लिए पेशाब किए जा रही थी,,,,,,, तभी वह शुभम की बात सुनकर और ज्यादा शर्मसार होने लगी।



आहहहहह,,,,, मेरी जिंदगी का सबसे हसीन नजारा मैं अपनी आंखों से देख रहा हूं मैं कभी सोचा नहीं था कि एक औरत पेशाब करते हुए इतनी खूबसूरत लगती है मैंने तो अभी तक किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा हूं लेकिन तुमको देख कर मुझे यह एहसास हो रहा है कि यह पल मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल है।,,,
( शुभम किस तरह की बातें सुनकर शीतल को उत्तेजना का एहसास तो हो ही रहा था साथ ही उसे शर्मिंदगी का भी एहसास हो रहा था उसके चेहरे का रंग लाल सुर्ख हो गया था वह पूरी तरह से उत्तेजना से भर्ती चली जा रही थी शुभम की यह बात सुनकर वह शुभम की तरफ देखे बिना ही बोली।)

क्या कर रहे हो शुभम मुझे क्यों इस तरह से शर्मिंदा कर रहे हो,,,,,

इसमें शर्मिंदा करने वाली कौन सी बात है मेरा नसीब अच्छा था कि मैं तुम्हारे पीछे पीछे ईधर आ गया वरना इस तरह का खूबसूरत नजारा मैं अपनी आंखों से कभी नहीं देख पाता (शुभम अपने खड़े लंड को हाथ से हिलाते हुए बोला जो कि शीतल को इस बात का अहसास तक नहीं था कि शुभम ठीक उसके पीछे दरवाजे पर खड़ा होकर अपना लंड हिला रहा है।)

चले जाओ सुभम मुझे शर्म आ रही है मुझे इस तरह से मेरे पति ने भी कभी नहीं देखा है,,,,

इसका मतलब मैं दुनिया का पहला इंसान हूं जो तुम्हें इस तरह से पेशाब करते हुए देख रहा हूं,,,,,

अच्छा शीतल क्या सभी औरतें इतनी ज्यादा सेक्सी और खूबसूरत लगती है पेशाब करते हुए या सिर्फ तुम्ही लग रही हो,,,,

मुझे क्या मालूम मैं क्या सब को देखने जाती हूं क्या,,,,

देखने तो नहीं जाती लेकिन फिर भी जिस तरह से हम लड़के एक साथ पेशाब करते हैं और एक दूसरे का लंड कैसा है इस बारे में जान लेते है उसी तरह से तुम औरतें लोग भी तो एक साथ कहीं पेशाब करती होगी तो एक दूसरे का तो देख ही लेती होगी कि किसकी गांड कैसी है किसकी बुर कैसी है,,,,


धत्,,,,, तो बहुत शरारती लड़का है मुझे आज पता चल रहा है,,,। मैं कभी सोची नहीं थी कि तुम इस तरह की गंदी बातें भी करता होगा,,

हम लड़के लोग तो ऐसे ही होते हैं लेकिन तुम औरतें कैसी होती हो यह तो तुम्ही बता सकती हो,,,( शुभम का लंड अपनी औकात में आ चुका था वह धीरे-धीरे अपने लंड को आगे पीछे करते हुए हिला रहा था जिस पर अभी तक शीतल की नजर नहीं पड़ी थी,,, अब उसकी बुर से सीटी की आवाज आना बंद हो गई थी इसका मतलब साफ था कि वह पेशाब कर चुकी थी अब किसी भी वक्त वह खड़ी हो सकती थी इसलिए सुभम एक पल की भी देरी किए बिना धीरे-धीरे उसकी तरफ आगे बढ़ने लगा,,,, वह खड़ी होती है इससे पहले ही वह ठीक उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया उसी समय शीतल खड़ी हो रही थी और अपनी साड़ी को नीचे गिराते हुए सही कर पाती इससे पहले ही उसकी नजर शुभम के खड़े लंड पर पड़ गई और वह उसी तरह से जड़वंत तक खड़ी की खड़ी रह गई,,,, शीतल के होश उड़ गए जैसा पहले देखी थी उससे भी कई ज्यादा ताकतवर उसे आज शुभम का लंड लग रहा था उसकी मोटाई देखकर एक पल के लिए तो शीतल घबरा गई कि इतनी मोटे लंड को अपनी बुर की छोटे से छेद में ले पाएगी कि नहीं,,,, पेशाब करते हुए शुभम के द्वारा देख लिए जाने पर अभी तक शीतल के चेहरे पर शर्म का एहसास साफ झलक रहा था और इस तरह से शुभम का लंड देख लेने पर उसकी हालत खराब होने लगी। शीतल पूरी तरह से असमंजस में थी और शुभम उसकी असमंजस ता दूर करते हुए बोला,,,

तुम्हें मुतता हुआ देखकर मुझे भी पेशाब लग गई,,,,
( शुभम की यह बातें सुनकर एक बार फिर से शीतल के चेहरे पर शर्म की लालिमा छाने लगी क्योंकि इस तरह से तो आज तक उसके पति ने भी उसे से यह बात नहीं कही थी और शुभम उसके बेटे की उम्र का होने के बावजूद भी इतनी खुले शब्दों में उससे बात कर रहा था यह एहसास ही उसे एक दम शर्मिंदगी के साथ-साथ उत्तेजना से भर दे रहा था,,। शीतल से कुछ बोला नहीं जा रहा था वह बस एक एक शुभम के मोटे तगड़े लंड को देखे जा रही थी मानो उसने अपनी आंखों से कोई अद्भुत चीज देख ली हो,,, शुभम भी पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया था क्योंकि अभी तक शीतल अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए खड़ी थी अभी तक अपनी साड़ी को नीचे गिरा ही नहीं थी जिससे उसकी लाल रंग की पैंटी अभी भी उसकी घुटनों के ऊपर उसकी मांसल जांघों में फंसी हुई नजर आ रही थी और साथ ही उसकी चिकनी रसीली बुर एकदम मदहोश किए जा रही थी,,, बुर की पतली दरार देखकर शुभम के खुद होश उड़ने लगे,,,, क्योंकि शीतल की उम्र देखकर कोई भी नहीं कह सकता था कि शीतल की बुर इस तरह से दिखती होगी जैसे किसी जवान लड़की की दिखती है,,, शीतल अभी भी शुभम के लंड को देखे जा रही थी वह पूरी तरह से अपने होशो हवास खो बैठी थी,,, शुभम को भी अब जोरों की पेशाब लग चुकी थी उसे कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए वह शीतल से बोला,,,,

शीतल अपनी नरम नरम हाथों में अगर मेरा लंड पकड़ कर थाम लो तो मैं अच्छे से पेशाब कर लूंगा,,,,
( शीतल तो यही चाहती थी जो उसके मन में था वह बात शुभम अपने मुंह से बोल दिया था वह कब बेकरार थी शुभम के लंड को अपने हाथों से पकड़ने के लिए लेकिन पेशाब करते हुए जिस तरह की शर्मिंदगी का अहसास उसे हो रहा था उस एहसास तले वह दबे जा रही थी और बोल कुछ नहीं पा रही थी इसलिए शुभम की यह बात सुनते ही वह तुरंत एक हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में ले ली,,,, जैसे ही शीतल ने अपने हाथ में शुभम के मोटे तगड़े लंड को पकड़ी वैसे ही लंड की गर्माहट से उसका पूरा वजूद पिघलने लगा उसकी बुर से उसका नमकीन रस अमृत की बूंद बन कर नीचे टपक गया,,,, पूर्वा उत्तेजना के मारे कसके अपनी मुट्ठी में शुभम के लंड को दबोच ली,,,

ससससहहहह,,,, सुभम,,,,( उसके मुंह से इस तरह की कर्म सिसकारी फूट पड़ी और वह इससे आगे कुछ बोल नहीं पाए शुभम तुरंत अपने होंठ को उसके होठों पर रखकर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही मुतना भी शुरू कर दिया,,,, एक अद्भुत बेहद काम उत्तेजना से भरा हुआ नजारा बाथरूम में दर्शाया जा रहा था शीतल पूरी तरह से कामविभोर होकर शुभम के लंड को अपने हाथ में लेकर उसे मुतने में सहायता कर रही थी और शुभम अपनी उत्तेजना में पागल होकर शीतल के लाल लाल होठों को चूसता हुआ इस पल का पूरी तरह से आनंद ले रहा था,,, अभी भी है एक हाथ से शीतल अपनी साड़ी को उठाए हुए थे शुभम से रहा नहीं जा रहा था और वह वह अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी गरम-गरम हथेली को शीतल की तपती हुई बुर पर रखकर उसे मसलना शुरू कर दिया,,,
ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,उउउउममममममम,,,

( शीतल की बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसलिए शुभम उसके अंदर अपनी बीच वाली उंगली को डालने की लालच को रोक नहीं पाया और जैसे ही अपने बीच वाली उंगली को शीतल की बुर में प्रवेश कराया वैसे ही कामोत्तेजना से पागल होकर शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूटने लगी,,,,, शीतल पर चारों तरफ से शुभम हमला कर रहा था शीतल पूरी तरह से ध्वस्त हुए जा रही थी,,, शीतल का बदन उसके कामों में बिल्कुल भी नहीं था उसका एक हाथ शुभम के लंड पर था और शुभम के साथ किए जा रहा था साथ ही वहां अपना एक हाथ शीतल की बुर पर रखकर उसने उंगली पर रहा था जिसकी वजह से शीतल कसमस आते हुए अपनी गांड को शुभम की उंगली पर गोल गोल नचा रही थी,,, शीतल ने अपनी जिंदगी में इस तरह की उत्तेजना का कभी भी एहसास नहीं की थी जिस तरह का एहसास हुआ अपने बाथरूम में शुभम के साथ कर रही थी,,, वह पूरी तरह से मदमस्त हुए जा रही थी वह बिल्कुल भी अपने होशो हवास में नहीं थी वह पूरी तरह से शुभम के आकर्षण में अपने वजूद को निकलता हुआ महसूस कर रही थी शुभम उसके साथ मनमानी कर रहा था जो कि यही शीतल भी चाहती थी देखते ही देखते शुभम भी पेशाब कर लिया लेकिन अभी भी शीतल उसके लंड को जोर से अपनी मुट्ठी में कस के ऊपर नीचे करके हिला रही थी। शीतल का मंदिर कुल भी नहीं हो रहा था शुभम के लंड को अपने हाथ से जुदा करने के लिए शुभम अभी भी अपनी उंगली को उसकी बुर में पेले जा रहा था और शीतल भी अपनी गांड को गोल-गोल उसकी उंगली पर नचा रही थी,,,, शीतल के सब्र का बांध टूटता हुआ नजर आ रहा था वह अपने आप पर काबू कर पाने में बिल्कुल भी असमर्थ साबित हो रही थी अपने मुंह से तो कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन इशारों ही इशारों में शुभम से बहुत कुछ बोल दे रही थी अब उसकी बुर में उंगली नहीं बल्कि उसका नंबर चाहिए था जो कि वह अपना यह सारा दर्शाते हुए शुभम के लंड को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थी जो कि शुभम भी उसके सारे को समझ रहा था लेकिन वह इतनी जल्दी उसकी बुर में लंड पेलना नहीं चाहता था इसलिए वह तुरंत अपनी मर्दाना ताकत दिखाते हुए शीतल को उसी स्थिति में अपनी गोद में उठा लिया शीतल को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि शुभम इस तरह से उसे अपनी गोद में उठा लेगा और उसे विश्वास भी नहीं हो रहा था क्योंकि शुभम के मुकाबले शीतल का वजन बहुत ज्यादा था


लेकिन शुभम गठीला बदन का मर्दाना ताकत से भरपूर नव जवान लड़का था और वह अपनी ताकत दिखाते हुए शीतल को इस समय अपनी गोद में उठा लिया और उसे जरा भी दिक्कत नहीं हो रही थी उसे गोद में उठाने में,,,,
लेकिन शुभम की इस हरकत पर शीतल एक बार फिर से शर्मसार होने लगी,,, शर्म के मारे उसके गाल एक बार फिर से टमाटर की तरह लाल हो गए,,,,

क्रमशः
 
गजब का कामुकता से भरा हुआ दृश्य था शुभम अपनी जवानी का पूरा जोर लगा दिया था शीतल को अपनी गोद में उठाने के लिए भारी भरकम वजन वाली खूबसूरत शीतल अब उसकी गोद में थी,,, बार-बार शुभम शीतल के सामने कुछ ऐसी हरकत कर दे रहा था जिससे शीतल पूरी तरह से शर्मिंदा हो जा रही थी उसे पेशाब करते हुए देखकर शीतल को पहले ही वह शर्मसार कर चुका था और अब उसे गोद में उठा लिया था साड़ी अभी भी उसकी कमर तक उठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी नंगी गांड संपूर्ण रूप से साड़ी विहीन हो चुकी थी,,, शुभम बस्ती के सागर में गोते लगाते हुए शीतल को अपनी गोद में उठाए हुए थे और वह शर्म के मारे अपनी आंखों को मुंद चुकी थी बस उसके होठों पर हल्की हल्की मुस्कुराहट झलक रही थी और उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा छाई हुई थी,,,, शीतल इतनी ज्यादा कामुकता के एहसास में उत्तेजित हो चुकी थी कि उसकी रसीली बुर से उसका नमकीन रस बूंद के रूप में नीचे फर्श पर रह रह कर चु जा रहा था,,,, उसकी सांसे गहरी चल रही थी,,,। शुभम भी काफी उत्तेजित नजर आ रहा था पेंट की चैन खुली हुई थी और उसमें से उसका मोटा तगड़ा लंड एकदम छत की तरफ मोड़ में खड़ा था जो कि शीतल को गोद में उठाने की वजह से बार-बार उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी नरम नरम गांड पर स्पर्श कर जा रहा था और जब जब शुभम के मोटे तगड़े लंड कै सुपाड़े का स्पर्श शीतल को अपनी गांड पर महसूस हो रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना मैं गनगना जा रही थी,,, शुभम उसे अच्छे से अपनी गोद में उठाकर उसी अवस्था में बाथरूम से बाहर निकलने लगा अभी भी शुभम का लंड पेंट के बाहर मुंह उठाए खड़ा था,,, चलते समय शीतल की लाल रंग की साड़ी नीचे जमीन पर घिसडते हुए चल रही थी,,, दोनों पूरी तरह से उत्तेजना के मदहोशी में अपने होशो हवास खो बैठे थे,,,, बड़े आराम से सुगंध शीतल को अपनी गोद में उठाए चला जा रहा था शीतल हैरान थी शुभम की ताकत को देख कर उसे इस बात का अहसास हो गया कि जितना वह शुभम को आंकती थी उससे कहीं ज्यादा बलिष्ठ है शुभम।

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शुभम धीरे-धीरे अपनी कदम आगे बढ़ा रहा था उसे सीढ़ियां चढ़नी थी,,, शीतल अभी भी अपनी आंखों को बंद करके हर एक पल का आनंद लूट रही थी उसे इस बात का अहसास था कि शुभम को सीढ़ियां चढ़ी नहीं पड़ेगी और वह जरूर उसे नीचे उतार देगा क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि शुभम उसे गोद में उठाए हुए सीढ़ियां नहीं चढ़ आएगा लेकिन वह नहीं जानती थी कि जब एक मर्द जोश में आता है तो वह पहाड़ चढ जाता है तो यह सीढ़ियां क्या चीज थी मर्द के लिए सबसे कठिन काम होता है एक कामुक और प्यासी औरत पर चढ़ना और उस पर चढ़कर उसकी काम भावना और उसकी प्यास को बुझाना अगर इस काम में मर्द कामयाब हो जाता है तो वह दुनिया का हर एक काम कर सकता है और शुभम तो इस काम में एकदम माहिर था,,, उसके लिए शीतल के ऊपर चढ़ना और सीढ़ियां चढ़ना ज्यादा महत्व नहीं रखता था मौत रखता था सिर्फ शीतल को संपूर्ण रूप से इतना ज्यादा संतुष्टि का अहसास कराना कि वह तृप्त हो जाए पूरी तरह से मस्त हो जाए और हमेशा के लिए उसकी गुलाम बन जाए,,,, और इसीलिए शुभम उसे गोद में उठाए उसके शयनकक्ष में ले जा रहा था धीरे-धीरे करके शुभम सीढ़ियां चढ़ने लगा शीतल को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था वह अपनी आंख खोल कर देखने लगी तो वास्तव में वह बिना थके बिना किसी दिक्कत के उसे अपनी गोद में उठाए सीढ़ियां चढ़ रहा था मानो उसके लिए शीतल का वजन किसी खिलौने जैसा हो। अब तो शीतल की हालत और ज्यादा खराब होने लगी और पूरी तरह से शुभम के आकर्षण में डूबती चली जा रही थी क्योंकि अब तक उसने ऐसा पुरुष नहीं देखा जो इस तरह की ताकत और दमखम रखता हो,,,, शीतल शुभम के आगे सर हमसे एकदम घड़ी जा रहे थे क्योंकि शुभम अभी लड़का ही था जो धीरे-धीरे जवान हो रहा था और उसके बेटे की उम्र का ही था



अगर उसके बेटा होता तो,,,, और किस उम्र का लड़का उसे अपनी गोद में उठाए हुए था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उम्र दराज या 30 35 30 के करीब का हो,,, अगर सुभम उम्र के उस पड़ाव पर होता तो शायद शीतल इतनी शर्मिंदा नहीं होती,, लेकिन उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि कल का छोकरा उसे इस तरह से अपनी गोद में उठाया है इस बात को लेकर वह काफी शर्मिंदगी महसूस कर रही थी लेकिन उत्तेजना के परम शिखर पर अपने आप को विराजमान होता भी पा रही थी,,,, धीरे-धीरे करके शुभम अपनी मजबूत भुजाओं का बल दिखाते हुए सारी सीढ़ियां चढ़ गया,,,, देखते ही देखते वह शीतल को अपनी गोद में उठाए हुए ही,,, शीतल के शयनकक्ष के बाहर खड़ा हो गया दोनों अभी भी उसी तरह की अवस्था में थे शीतल की लाल रंग की पेंटी अभी भी उसके घुटनों में फंसी हुई थी और शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी गांड की मोटी मोटी गहरी दरारों के बीच दस्तक दे रहा था जिससे शीतल की हालत खराब होती जा रही थी शुभम शयन कक्ष के बाहर कुछ देर तक खड़ा होकर शीतल को ही देखे जा रहा था और शीतल शुभम कोई इस तरह से अपने चेहरे की तरफ देखता हुआ पाकर एकदम शर्म से सिकुड़ी जा रही थी उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा छाई हुई थी वह पूरी तरह से शर्मसार हुए जा रही थी उससे और ज्यादा देर तक अपनी आंखें खोली नहीं गई और वह अपनी आंखें एक बार फिर से बंद कर ली ऐसा लग रहा था कि मानो सच में वह एक नई नवेली दुल्हन हो उस एवं उसका पति हो और शुभम को क्या चाहिए था उसे तुमको ज्यादातर ऐसी औरतों को चोदने में ज्यादा मजा आता है जो शर्म और हया का चादर अपने बदन पर लपेटे हुए होती है तब जाकर धीरे-धीरे शर्म मर्यादा की चादर को धीरे-धीरे हटाने में शुभम को अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है यही अब शीतल के साथ होने वाला था शीतल पूरी तरह से शर्म की चादर ओढ़ ली थी जिसका शुभम को विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि शीतल जिस तरह की औरत थी शुभम कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे हालात में शीतल कभी इतना शर्माएगी,,,,
सुभम अभी भी शीतल के शयन कक्ष के बाहर खड़ा था दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था लेकिन वह अंदर नहीं जा रहा था क्योंकि वह शीतल के खूबसूरत चेहरे के दीदार करने में पूरी तरह से व्यस्त हो चुका था साथ ही वह अपनी कमर को हल्के हल्के ऊपर की तरफ उठा रहा था जिससे उसका मोटा तगड़ा लंड शीतल की गांड की गहरी दरार में हल्का हल्का घुसता हुआ महसूस हो रहा था,,,, मजा दोनों को बराबर आ रहा था। शुभम की नजर शीतल की दोनों मदमस्त खरबूजे जैसी गोलाइयों के बीच की पतली गहरी दरार पर थी जो कि बहुत ही लंबी थी,,, और उस पतली गहरी और लंबी दरार को देखकर शुभम समझ गया था कि शीतल के दोनों खरबूजे बेहद जानदार और शानदार है।


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शुभम भी जल्द से जल्द शीतल को उसके बिस्तर पर ले जाना चाहता था इसलिए वह पैर से हल्का सा दबाव देकर दरवाजे को खोल दिया,,,, कमरे में ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी दूधिया रोशनी में कमरे का हर एक कोना जगमगा रहा था,,, बहुत ही जल्दी शीतल ने भाड़े के अपने इस बंगले को अच्छी तरह से सजा दिया था खास करके अपने कमरे को,,,, शुभम की आंखों के सामने शीतल का बिस्तर जोकि किंग साइज का था वह बिछा हुआ था,,, अभी भी शीतल अपनी आंखों को बंद किए हुए थी,,,, क्योंकि उसका बदन बेहद कसमसा रहा था वो पागल हुए जा रही थी क्योंकि इस समय शुभम का लंड पूरी तरह से उसकी गांड की गहरी दरार में फंसा हुआ था,,,। वह बार-बार शर्म के मारे अपनी बड़ी बड़ी गांड को हल्के से ऊपर उठाने की कोशिश कर रही थी लेकिन उससे ऐसा हो नहीं पा रहा था जितना वह कोशिश कर रही थी उतना और ज्यादा धीरे-धीरे नीचे की तरफ जा रही थी जिससे शुभम का लंड पूरी तरह से उसकी गांड की दरार में फंसा हुआ था,,,
धीरे-धीरे शुभम बिस्तर की तरफ आगे बढ़ने लगा हूं जैसे ही बेड के करीब पहुंचा हुआ है शीतल को नरम नरम करते पर लगभग फेंक दिया लेकिन गद्दा इतना ज्यादा नरम था कि शीतल को इससे जरा भी फर्क नहीं पड़ा,,,, लेकिन एकदम शर्मिंदा हुए जा रही थी,,,, बिस्तर पर गिरने के बाद शीतल धीरे-धीरे अपनी आंखों को खोली तो सामने उसके शुभम खड़ा था जो कि धीरे-धीरे करके अपने कपड़े उतार रहा था और देखते ही देखते वह शीतल की आंखों के सामने एकदम नंगा हो गया,,, पेंट पहने होने के नाते शुभम का लंड जितना जबरदस्त लगता था उससे कहीं ज्यादा भयानक संपूर्ण रुप से नंगा हो जाने के बाद उसका लड लग रहा था शुभम के लंड में जरा भी शिथिलता नहीं थी वह पूरी तरह से खड़ा था छत की तरफ मुंह किए,,,,, शीतल को देखते हुए शुभम दिखा से अपने लंड को पकड़ कर उससे ऊपर नीचे करके हिलाने लगा जो कि बेहद कामोत्तेजना से भरा हुआ नजारा था शीतल के लिए,,, शुभम का इस तरह से अपना लंड हिलाना एकदम साफ था कि आज वह शीतल की जबरदस्त चुदाई करने वाला है इस बात का एहसास ऐसे ही शीतल एकदम से मस्त होने लगी,,,,,
कमल की खिड़कियां बंद थी अंदर छत पर पंखा चल रहा था लेकिन शीतल की मादकता भरी गर्म जवानी के चलते कमरे का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चला था,,, इसलिए शुभम नंगा ही खिड़की की तरफ जा कर खिड़की खोल दिया और जैसे ही खिड़की खोला बाहर से ठंडी हवा का झोंका पूरे कमरे में ठंडक फैलाने लगी,,, शुभम के पीठ शीतल की तरह थी जो कि शुभम एकदम नंगा खड़ा था शीतल की नजर शुभम की कमर के नीचे उसकी गांड पर थी जो कि एकदम पाव रोटी की तरह गोल थी शुभम की गांड को देखकर शीतल की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, उसका पतन कसमसा रहा था वह कभी शुभम की तरफ देख रही थी तो कभी बिस्तर की तरफ,,,, अभी भी उसकी लाल रंग की पेंटी उसके घुटनों में ही फंसी हुई थी तभी शुभम खिड़की के पदों को पूरी तरह से खोल दिया वैसे भी खिड़की से बाहर वालों को कुछ भी देखने वाला नहीं था घर की खिड़की में से सब कुछ देखा जा सकता था,,,, कुछ सेकंड के लिए सुभम खिड़की के पास खड़ा होकर खिड़की से बाहर देख रहा था जहां से मुख्य सड़क गुजर रही थी और उस पर से इक्का-दुक्का गाड़ियां आ जा रही थी स्ट्रीट लाइट पूरी तरह से जगमग आ रही थी जिसकी रोशनी में पूरी सड़क नहाई हुई थी। शीतल बड़े ध्यान से शुभम को ही देख रही थी,,,, बाहर का बेहद ठंडक वातावरण और कमरे के अंदर का बेहद गर्म और जोश से भरा हुआ माहौल शुभम को पूरी तरह से अपनी आगोश में लिए जा रहा था शुभम वापस शीतल की तरफ घुमा और अपने लंड को हिलाते हुए आगे बढ़ने लगा,,,, शुभम को इस तरह से अपनी तरफ आता हुआ देखकर शीतल की हालत खराब होने लगी उत्तेजना के चरम शिखर पर वह पूरी तरह से विराजमान होती जा रही थी उसका बदन कसमसा रहा था टांगों के बीच की पतली दरार में से लगातार नमकीन रस बह रहा था।
देखते ही देखते शुभम बिस्तर के करीब पहुंच गया और बोला,,,,,


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शीतल मेरी जान,,,,,( सहहहहह,,,आहहहहह,,, जान शब्द सुनते ही शीतल की हालत खराब होने लगी उसकी अंतरात्मा से सिसकारी की आवाज फूटने लगी शुभम इस तरह से उसे कभी नहीं बुलाया था लेकिन आज उसके मुंह से जान शब्द सुनकर वह पागल हुए जा रही थी उसके बदन का रोम-रोम पुलकित हुए जा रहा था लेकिन एक बार फिर से वह अपनी नजरों को शर्म के मारे नीचे कर ली उसे भी ना जाने कैसा एहसास हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वास्तव में आज वह नई नवेली दुल्हन है और शुभम उसका दूल्हा है जिसके सामने वह शर्मो हया के गहने में लदी हुई है शीतल अपने होशो हवास में बिल्कुल भी नहीं थी,,,) शीतल मेरी जान इस दिन के लिए मैं ना जाने कितने दिनों से इंतजार कर रहा था जितना तुम्हें इस पल का इंतजार था उससे कहीं ज्यादा मैं इस दिन के लिए तड़पा हूं,,,( शुभम उसी तरह से अपने लंड को हिलाते हुए बोला मानव के जैसे कोई जवान युद्ध से पहले अपनी बंदूक को पीला डुला के चेक कर लेता है उसी तरह से शुभम भी अपने लंड को हीला डुला कर चेक कर रहा था कि यह बराबर काम करेगा कि नहीं,,, यह तो शीतल के मन की धारणा थी लेकिन वास्तविकता यही थी कि युद्ध में लड़ते हुए एक सैनिक की बंदूक ऐन मौके पर धोखा दे सकती हैं लेकिन शुभम का लंड कभी धोखा नहीं दे सकता,,, इतना तो शुभम को अपने लंड पर विश्वास था और गर्व भी,,,, शुभम की बात सुनकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि वह इस पल के लिए ना जाने कितने महीनों से इंतजार कर रही थी,,, शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।) आज देखना शीतल मेरा यह लंड( अपने हाथ से अपने लंड को खींचकर शीतल की तरफ इशारा करते हुए) तुम्हारी बुर में जाकर ऐसा मजा देगी कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी,,,,( शीतल शुभम की यह बात सुनकर उत्तेजना से भर गई और तिरछी नजर से शुभम की तरफ देखने लगी जो कि अभी भी वह अपने हाथ में अपने लंड को लेकर हिला रहा था शुभम के तगड़े लंड को देखकर वह अंदर तक सिहर उठ रही थी,,, वह बस शुभम की बातों को सुन रही थी और उसकी हरकतों को देख रही थी उससे बोला कुछ भी नहीं जा रहा था सर मैं लिख एक एहसास चले वह इतना अंदर गड़ती चली जा रही थी कि उसके होठों से एक भी शब्द फूट नहीं रहे थे बस वह हर एक पल का अंदर ही अंदर प्रसन्नता के साथ आनंद ले रही थी,,, शुभम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था शीतल कीमत मस्त जवानी उसकी आंखों के सामने बिस्तर पर बिछी पड़ी थी जो कि शुभम से बर्दाश्त नहीं हो रही थी,,, उसकी आंखों के सामने शीतल बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी साड़ी कब तक उठी हुई थी जिससे उसकी रसीली चिकनी बुर साफ नजर आ रही थी और उसकी लाल रंग की पैंटी अभी भी उसके घुटनों में फंसी हुई थी जिसे वह अब तक नहीं निकाली थी,,,, बड़ा ही मनमोहक दृश्य था शुभम उस कामोत्तेजना से लथपथ दृश्य में अपने आप को भिगो लेना चाहता था,,,, शीतल की सांसे गहरी चल रही थी और सांसो की गति के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ब्लाउज के अंदर के ऊपर नीचे हो रही थी,,, मानो शीतल ने अपने ब्लाउज में दो बड़े-बड़े कबूतर छुपा कर रखी हो और वह बाहर आने के लिए अपने पंख फड़फड़ा रहे हैं,,,, शुभम शीतल के दोनों कबूतरों का दम घुटता हुआ नहीं देख सकता था इसलिए जल्द से जल्द उन कबूतरों को ब्लाउज की कैद से आजाद करना चाहता था लेकिन अभी भी उनकी आजादी में थोड़ा समय था,,,,
शीतल के घुटनों में फंसी हुई लाल रंग की पैंटी को देखते हुए शुभम अपना एक पैर बिस्तर के नरम गरम करके पर रखते हुए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाया और बोला,,,

मेरी जान इसे तो निकाल दी होती ,,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर शीतल की लाल रंग की पैंटी को पकड़कर उसे निकालने को हुआ ही था कि शीतल कसमसाने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बार-बार शुभम कि इस तरह की हरकत जो कि शीतल के सोच के परे थी वो पूरी तरह से शर्मसार हो जाती थी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कमरे में उसके साथ वही नादान सुबह में या उसकी शक्ल में कोई और है,,,, शीतल अपने मन में यही सब सोच रही थी कि शुभम एक झटके से उसकी लाल रंग की पेंटिं को उसकी चिकनी टांगों में से जुदा करते हुए उसे नीचे फर्श पर फेंक दिया कमर के नीचे शीतल पूरी तरह से नंगी हो गई मोटी मोटी मांसल चिकनी जांघें ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में और ज्यादा चमक रही थी और उसकी चमक से शुभम की आंखें चौंधिया जा रही थी,,,, जो कि शीतल शर्म के मारे अपनी दोनों टांगों को आपस में सटा कर अपनी बेशकीमती खजाने को छुपाने की भरपूर कोशिश कर रही थी,,, लेकिन शीतल की यह सब कोशिशें शुभम के सामने नाकाम थी,,, क्योंकि शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर दोनों हाथों से शीतल के दोनों घुटनों को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और वह आह की आवाज के साथ सीधा बिस्तर के किनारे पर पहुंच गई ,,, शीतल एकदम से बिस्तर के किनारे पहुंच गई थी उसके दोनों घुटने बिस्तर से नीचे लटक रहे थे और शुभम शीतल की दोनों टांगों के बीच में खड़ा था जो कि वह पहले से ही घुटनों को पकड़कर फैलाया हुआ था जिससे शीतल की चिकनी फूली हुई बुर उसकी आंखों के ठीक सामने थी,,,,, और वह शीतल की रसीली बुर को घूरते हुए बोला,,,,।

इसे क्यों छुपा रही हो मेरी रानी इसका दीदार करने के लिए तो मैं यहां आया हूं,,,,,( ऐसा कहते हुए शुभम गहरी गहरी सांसे लेता हुआ शीतल की फूली हुई बुर को ही घुरे जा रहा था,,,, शीतल को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या होता जा रहा है शुभम से इस तरह की मुलाकात के पहले वह अपने मन में क्या-क्या सोच कर रखी थी उसे यह लग रहा था कि शुभम के ऊपर वह पूरी तरह से छा जाएगी जैसा वह कहेगी वैसा ही सुभम करेगा,,, लेकिन यहां तो सब कुछ उल्टा होता चला जा रहा था बिस्तर पर वह खुद एक नई नवेली दुल्हन की तरह शर्माते हुए पीठ के बल लेटी हुई थी और शुभम उसके साथ मनमानी कर रहा था,,, शुभम को आंकने मे वह धोखा खा गई,,,, मुझे समझ लेना चाहिए था कि उसका पहला सीधे-साधे शुभम से नहीं बल्कि उससे मन से पड़ा है जो वह खुद अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करता है और जो अपनी मां को ही चोद सकता है वह सोचो क्या नहीं कर सकता,,, इसलिए तो वह शुभम के सामने पूरी तरह से ध्वस्त होती जा रही थी उसे लग रहा था कि शुभम को किस तरह से आगे बढ़ना है उसे सिखाना पड़ेगा लेकिन यहां पर वह शुभम के सामने खुद एक नौसिखिया लड़की की तरह पड़ी हुई थी लेकिन जो भी हो रहा था उसमें शीतल को बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी इतना मजा उसे कभी नहीं आया था वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में होती चली जा रही थी उसकी सांसों की गति तेज होती जा रही थी क्योंकि उसकी टांगों के बीच शुभम अपने घुटनों के बल बैठ चुका था जिसका मतलब साफ था कि अब वह उसकी बुर को अपने होठों से छूने वाला है इस बात का एहसास ही शीतल के अंदर उत्तेजना की चिंगारियां भर रहा था,,,
शुभम पागलों की तरह आंखें फाड़े शीतल की कचोरी जैसी फूली हुई बुर को देख रहा था जिसमें से उसका नमकीन रस धीरे-धीरे करके रिस रहा था,,,, वक्त आ गया था शुभम के लिए जिसका सपना वह स्कूल के दिनों से ही देखता चला रहा था उसकी सपनों की रानी शीतल बिस्तर पर टांगे फैलाए लेटी हुई थी और उसकी टांगों के बीच शुभम अपनी मंशा पूरी करने के लिए धीरे-धीरे अपनी होंठ आगे बढ़ा रहा था जैसे-जैसे शीतल शुभम के होठों को अपनी बुर की तरफ आगे बढ़ता हुआ देख रही थी वैसे वैसे उसका पूरा बदन उत्तेजना की आग में कसमसा रहा था वह पागल हुए जा रही थी उसके बदन में उत्तेजना चिकोटि काट रही थी,,,,

क्रमशः
Sheetal is tarah se apni Saree ko kamar Taj uthaye huye thi

 
शीतल की हालत पल-पल खराब होते जा रही थी उसके तन बदन में कामोत्तेजना कि चिंगारियां रह रह कर अपना शोला भड़का रही थी वह पागलों की तरह कसमसा रही थी उसकी सांसो की गति बहुत ही तेज होती जा रही थी वह यह देखने के लिए कि अब शुभम क्या करता है वह अपने दोनों हाथों की कोहनी का ठेका लेकर अपनी गर्दन को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर शुभम की तरफ देख रही थी जो कि उसकी टांगों के बीच अपने लिए जगह बना रहा था बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारा था शीतल बिस्तर पर लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगे बिस्तर के नीचे झूल रही थी और शुभम ठीक उसकी दोनों टांगों के बीच में घुटनों के बल नीचे जमीन पर बैठा हुआ था और उसके होंठ शीतल की कमर के नीचे के गुलाबी होठों से काफी नजदीक थे,,,,, शुभम के होंठ प्यासे थे और शीतल की टांगों के बीच नमकीन पानी का वह कुआं था जिससे अपने तन की प्यास बुझाई जा सकते थी,,, शुभम अपने दोनों हाथों से शीतल की मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघों को पकड़कर हल्के से एक दूसरे से दूर किए हुआ था जिससे शीतल की गुलाबी बुर फुले हुए कचोरी की तरह शुभम की आंखों के सामने अपना जलवा बिखेर रही थी,,,,, शुभम को अब कुछ भी नजर नहीं आ रहा था सिवाए शीतल की रसीली बुर के,,,, जैसे-जैसे शुभम के होंठ शीतल की बुर से नजदीक आता जा रहा था वैसे वैसे शीतल का पूरा बदन कसमसा रहा था वह अच्छी तरह से जानती थी कि अब शुभम क्या करने वाला है जिसके लिए आज तक वो तरस रही थी ,, वह पल आ चुका था,,,,



शुभम की आंखों के सामने शीतल की मोटी मोटी कचोरी जैसी फूली हुई बोर अपना जलवा बिखेर रही थी शुभम के लिए लक्ष्य था जिसे उसे भेदना था,,, इस पर अपना विजय पताका लहराना था शुभम के लिए लक्ष्य कोई बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं था लेकिन फिर भी इसे बहुत ही अच्छे तरीके से हासिल करना था ताकि इस लक्ष्य को हासिल करते ही सामने वाला पूरी तरह से घुटने देखते और हमेशा के लिए उसका गुलाम बन जाए,,, शुभम से रहा नहीं जा रहा था वह नीचे जमीन पर घुटनों के बल बैठा हुआ बिस्तर के किनारे तक वह शीतल की बड़ी बड़ी गांड को लाकर बिस्तर के किनारे पर ही स्थिर कर दिया था जो कि बेहद मनमोहक और सुहावनी लग रही थी शुभम से रहा नहीं जा रहा था उसका लंड बगावत के मूड में था वह इतना अत्यधिक कठोर हो गया था कि ऐसा लग रहा था कि जैसे वह हाड मांस का नहीं पत्थर का बना हो,,,, शीतल की मोटी मोटी बुर में से रिस रहे नमकीन रस को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था अब उसे से अत्यधिक बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह अपने होठों को तुरंत शीतल की तपती हुई भट्टी के समान तप रही बुर पर रख दिया,, और जैसे ही शुभम ने अपने प्यासे होठों को शीतल की बुर की गुलाबी पत्तियों से हटाया एक अद्भुत एहसास कामोत्तेजना से भरपूर पल मैं पूरी तरह से अपने आप को मदहोश होता हुआ पाकर शीतल के मुंह से सिसकारी की आवाज निकल गई,,,


ईससससस,,,,,,हहहहहहह,,,,,,, सुभम,,,,,( इससे ज्यादा शीतल के पास बोलने लायक शब्द नहीं थे क्योंकि दुनिया के सबसे बेहद खूबसूरत अद्भुत और उन्माद भरे आनंददायक पल में वह पूरी तरह से खोने लगी थी शीतल को यह पल कैसा लग रहा है था यह बताने के लिए उसके पास शब्द ही नहीं थे और वाकई में इस अद्भुत सुख को प्राप्त करके जो एहसास पूरे तन बदन में होता है उसे बयां करने के लिए दुनिया की डिक्शनरी में कोई भी शब्द बना नहीं है,,,, बस अलौकिक सुख जोकि शायद इसी सुख को पाने के लिए मर्द और औरत का जन्म होता है उसी सुख के एहसास में शीतल पूरी तरह से डूबने लगी थी,,,,, शीतल अपने दोनों हाथों की कोहनी बिस्तर पर टिकाए अपनी गर्दन उठाकर शुभम को ही देख रही थी,,,, जो कि उसकी टांगों के बीच में पूरी तरह से छाया हुआ था,,,
शुभम पागलों की तरह अपनी जीभ को शीतल की बुर की पतली दरार में डालकर उसमें से मदन रस को जीभ से निकाल निकाल कर गले के नीचे गटकने लगा,,, शुभम की हरकत से वह पूरी तरह से जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी शुभम पागलों की तरह शीतल की बुर को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया था,,, शुभम शीतल की बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच में तो अपनी जीभ डालकर चाट ही रहा था साथ ही बुर की पतली दरार के इर्द-गिर्द ऊपसे हुए भाग को भी अपनी जीभ से पूरी तरह से चाट चाट कर गीला कर दिया था शीतल तो एकदम पागल हुए जा रही थी इस तरह से उसकी बुर आज तक किसी ने भी नहीं चाटा था,,,



शीतल मस्ती के सागर में हिलोरे मार रही थी उसकी बड़ी बड़ी गांड पूरे बिस्तर पर इधर-उधर हो रही थी,,, जो कि सुबह मैंने अपने दोनों हाथ को नीचे ले जाकर उसके गोल को नितंबों को अपनी हथेली से पकड़ रखा था लेकिन फिर भी वह शुभम की पुर चटाई से इतनी पागल हुए जा रही थी कि वह छटपटा रही थी,,,,
ओहहहह ,,, शुभम मेरे राजा मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तू इस तरह से बुर चाटता है,, ऊफफफ,,,,,, मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,,,
( शीतल की इस तरह की बातें सुनकर शुभम और ज्यादा जोश में आ गया था वह पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना चीज को उसकी बुर में डालकर उसे चाट रहा था वह पागलों की तरह इतना जोर जोर से जीभ के साथ-साथ अपने होठों को उसकी बुर पर रगड़ रहा था कि उसकी सांस अटक जा रही थी वह रह रह कर अपनी पूरी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी उससे इस तरह की उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी बार बार उसकी बुर से नमकीन पानी का सैलाब फूट पड़ रहा था,,, जिसमें शुभम का पूरा मुंह गीला हो रहा था बुर से मादक खुशबू उठ रही थी जिससे शुभम का पूरा अस्तित्व मदहोश होता चला जा रहा था,,, शीतल की बुर चाटने में शुभम कोई भी इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि वह बता नहीं सकता वह पागलों की तरह कभी खड़ा हो जाता तो कभी बैठ जाता किस तरह से वह पूरी तरह से शीतल की बुर चाटने का आनंद उठा रहा था,,,,
शीतल कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी थी बार-बार वह अपनी दोनों टांगे को जितना हो सकता था उतना ज्यादा फैलाकर अपनी दूर की दरार को और ज्यादा खोल दे रही थी शुभम के लिए शुभम मस्ती मैं पूरा खोता चला जा रहा था बार-बार उसकी मोटी मोटी जांघों को अपनी हथेली में लेकर उसे दबाने का भी सुख भोग रहा था,,, शीतल की मोटी मोटी जांघे इतनी ज्यादा चिकनी थी कि शुभम का मन कर रहा था कि उस पर अपने लंड कए सुपाड़े को जी भर के रगड़े,,,,,

ससहहह आहहहह,,,ऊफफ,,,,,,ऊमममममम,,,,,,आहहहहहहह,,ओहहहह ,,, सुभम,,,,,,आहहहहहहह,,,,,

शीतल के मुंह से इस तरह की मदहोश भरी सिसकारी की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी,,, लेकिन उस मत बहोत भरी सिसकारी की आवाज सुनने वाला केवल शुभम ही था जो कि शीतल के मुंह से इस तरह की गरम आवाजों को सुनकर और ज्यादा जोस से भर जा रहा था,,,, तकरीबन 20 मिनट तक वह शीतल की बुर को चाट चाट कर एकदम लाल कर दिया था,,, और इस दौरान शीतल दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी चुदाई से पहले ही उसे दो बार चरम सुख का अहसास हो चुका था,,, इसी से शीतल शुभम की मर्दाना ताकत से पूरी तरह से वाकिफ हो चुकी थी कि जो इंसान बिना चुदाई कीए औरत को दो बार झाड़ सकता है तो सोचो जब उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में जाएगा तो पूरी तरह से तहलका मचा देगा,,,, यही सोचकर शीतल का तन बदन पूरी तरह से मचल जा रहा था,,,, वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी के अपने हाथों से ब्लाउज के ऊपर से ही अपने दोनों चुचियों को जोर जोर से दबा रही थी,,,, खिड़की से आ रही है शीतल ठंडी हवा के बावजूद भी दोनों के बदन पसीने से तरबतर हो चुके थे जिसका कारण था दोनों की गर्म जवानी जोकि ना तो पंखे की हवा से और ना ही खिड़की से आ रही शीतल हवा से ठंडी होने वाली थी,,,
दोनों की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी जी भर कर शुभम ने शीतल की बुर चटाई का आनंद ले लिया था और दो बार उसे झाड़ भी दिया था क्योंकि इस समय कचोरी जैसी फुली हुई शीतल की बुर लाल टमाटर की तरह एकदम लाल हो चुकी थी जिसे देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने उस पर दो चार तमाचा जड़ कर उसकी बुर के गईल को लाल कर दिया हो,,, शुभम अभी भी घुटनों के बल बैठा हुआ शीतल की लाल बुर को ही देख रहा था जो कि बड़ी ही मनमोहक लग रही थी,,, और वह उसे देख कर ऐसे खुश हो रहा था मानो जैसे क्रिकेट के मैदान पर कप्तान गिली पिच को देखकर खुश होता है,,,। एक अनुभवी खिलाड़ी होने के नाते शुभम को इतना तो पता ही था कि गीली पिच पर बैटिंग करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है भले ही थोड़ी सी दिक्कत हो लेकिन एक बार जम जाने के बाद तब तक पारी खत्म नहीं होती जब तक की पूरी तरह से लक्ष्य को हासिल ना कर लिया जाए।



धीरे-धीरे शुभम शीतल को पूरी तरह से अपनी आगोश में लेकर चला जा रहा था शीतल पर मदहोशी ही का नशा छाया हुआ था बुर चुदाई का संपूर्ण रूप से मजा लेकर शुभम खड़ा हुआ तो उसके होठों पर उसके गाल पर उसकी नाक पर शीतल की बुर से निकला हुआ मदन रस लगा हुआ था,,, एक तरह से वहां शीतल के मदन रस में नहाया हुआ था,,,, शुभम लंबी लंबी सांसे लेता हुआ शीतल को देख रहा था और मुस्कुरा रहा था शुभम को इस तरह से अपनी तरफ देखकर मुस्कुराता हुआ पाकर शीतल एक बार फिर से शर्म से लाल लाल हो गई वह शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेर ली तभी शुभम नीचे झुका और फर्श पर फेंकी हुई शीतल की लाल रंग की चड्डी को उठा लिया और उस चड्डी से अपने चेहरे पर लगे हुए उसके मदन रस को साफ करने लगा,,, शीतल तिरछी नजरों से शुभम को चोरी-छिपे देख रही थी और शुभम की इस हरकत पर वहां एक बार फिर से शर्मिंदा हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बार-बार शुभम की इस तरह की हरकत शीतल को पूरी तरह से उसका दीवाना तो बना ही रही थी लेकिन उसे शर्मसार भी कर दे रही थी,,,,, शीतल को इस तरह से चोरी छुपे अपनी तरफ देखता हुआ पाकर शुभम मुस्कुराता हुआ बोला,,,

ऐसे छुप-छुप चुप के क्या देख रही हो मेरी रानी अब शर्माने की कोई जरूरत नहीं है,,,, आज की रात तुम्हें जन्नत का मज़ा दूंगा,,,,( इतना कहते हुए शुभम शीतल की लाल रंग की चड्डी को वापस नीचे जमीन पर फेंक दिया और दूसरे हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए शीतल को उंगली से इशारा करके अपनी तरफ बुलाने लगा,,, शीतल एकदम मंत्रमुग्ध थी शुभम के आकर्षण में पूरी तरह से बंधी हुई थी वह अपने मन से कोई भी कार्य नहीं कर रही थी जो कुछ भी शुभम कह रहा था वैसा ही वह कर रही थी ऐसा लग रहा था जैसे शुभम ने उसे जादू से मोह लिया हो उसके दिमाग पर पूरी तरह से काबू पा लिया हो,,, शुभम के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर शीतल अपने आपे में बिल्कुल नहीं थी वह घुटनों के बल चलती हुई बिस्तर पर ही एकदम किनारे पहुंच गई जहां पर शुभम खड़ा था शीतल ललचाई आंखों से शुभम के लंड को देख रही थी,,,, शुभम अच्छी तरह से जानता था कि शीतल को अब क्या चाहिए इसलिए अपना एक कदम आगे बढ़ा कर वह अपने लंड को हिलाते हुए अपने लंड को शीतल के चेहरे के बिल्कुल करीब ले गया शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने चेहरे के इतने करीब पाकर उसकी गर्मी को शीतल अपनी गोरे गोरे गाल पर महसूस करने लगी,,, वह पागल हुए जा रही थी उसके मुंह में पानी आ रहा था साथ में उसकी बुर भी पूरी तरह से गीली होकर चिपचिपा रही थी,,, शुभम अपने लैंड को हाथ से पकड़ कर उसे शीतल के गोरे गोरे गाल पर रगड़ना शुरु कर दिया लंड के मोटे सुपाड़े की गर्माहट शीतल अपने गोरे गाल पर महसूस करके मदहोश हुए जा रही थी,,, सुभम अपने लंड को जोर-जोर से उसके चेहरे पर पटक रहा था,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड की चोट उसे अपने चेहरे पर लग रही थी लेकिन मोटे लंड की यह चोट दर्द कम मजा ज्यादा दे रहा था शुभम पागलों की तरह अपने लडके सुपाड़ा को शीतल के पूरे चेहरे पर रगड़ रहा था शीतल बार-बार अपने होठों को खोल कर उसे अपने मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम उसको तड़पाते हुए बार-बार अपने लंड को उसके होठों से लगाकर दूर कर दे रहा था,,,। अपने मुंह में लंड लेने की शीतल की यह तड़प देखकर सुभम मन ही मन बहुत खुश हो रहा था,,,,, शुभम शीतल को और ज्यादा ना तड़पाते हुए अपने लंड को उसके लाल-लाल होठों पर रगडते हुए बोला,,,,,

मुंह तो खोलो मेरी जान जरा लॉलीपॉप चूसने का मजा तो ले लो,,,,,,
( शुभम ने जैसे ही यह बात अपने मुंह से कहा वैसे ही तुरंत आज्ञा का पालन करते हुए शीतल अपने लाल लाल होठों को खोलकर शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेने का प्रयास करते हुए एक तरह से उसका स्वागत करने लगी शीतल के दोनों होठ खुले हुए नजर आते ही शुभम अपने मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को उसके होठों के बीच में फसा दिया,,,, बाकी का काम शीतल अपने आप कर गई वह धीरे-धीरे करके शुभम के मोटे तगड़े लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, शीतल की मनोकामना एक बार फिर पूरी होती नजर आ रही थी क्लास में रिशेष के समय सबसे नजरें बचाकर चोरी-छिपे शुभम के लंड का स्वाद वह एक दो बार ले चुकी थी लेकिन आज इत्मीनान से शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर जो मजा उसे मिल रहा था उसे वह बयां नहीं कर सकती थी,,,
देखते ही देखते शीतल धीरे-धीरे करके शुभम के लंबे लंड को अपने गले तक उतारकर उसे चूसने लगी शीतल को लंड चूसने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, शुभम भी मदहोश होता हुआ अपनी कमर को आगे पीछे कर के धक्के लगाना शुरू कर दिया शुभम को बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि शीतल बहुत ही मजे हुए खिलाड़ी की तरह शुभम के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी शुभम का लंड इतना मोटा था कि उससे बराबर अपना मुंह भी खोला नहीं जा रहा था,,,,,
पूरे कमरे का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में शीतल का गोरा बदन बेहद उत्तेजक लग रहा था शुभम पागलों की तरह अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए शीतल के मुंह को चोदना शुरू कर दिया था उसकी आंखों के सामने शीतल का ब्लाउज नजर आ रहा था जिसका एक बटन खुला हुआ था और उसके बीच से नजर आ रही थी उसकी दोनों को गोलाइयां,,, शीतल की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूची को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसके बड़े बड़े दूध को मसल ना शुरू कर दीया शुभम इतनी जोर से ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबा रहा था कि शीतल को दर्द होने लगा था लेकिन लंड चूसने के आनंद से वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी कि वह कुछ बोल नहीं रही थी,,,, बस उनके द्वारा दिए जाने वाले आनंद का लुफ्त उठा रही थी,,,।
धीरे-धीरे करके शुभम शीतल के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और ब्लाउज के खुलते ही उसकी लाल रंग की ब्रा नजर आने लगी जिसमें उसके बड़े बड़े दूध ठीक तरह से समा भी नहीं पा रहे थे,,, शीतल के खरबूजे जैसी बड़ी बड़ी चूची यों के लिए चिकन की लाल रंग की ब्रा बहुत ही छोटी थी जिसमें उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां संभाल नहीं पा रही थी और आधे से ज्यादा चूचियां तो उसके ब्रा से बाहर झांक रहे थे अगर वह जोर से सांस ले ले तो ऐसा लग रहा था कि ब्रा का हुक पीछे से खुल जाए,,,, शुभम बिना ब्रा का हुक खोलें अपने दोनों हाथों से सीकर की बड़ी बड़ी चूची को पकड़कर ऊपर की तरफ खींच लिया जिससे उसकी दोनों बड़ी बड़ी चूची फुटबॉल कितना बाहर आकर उछलने लगी और वह जोर-जोर से उन्हें दबाना शुरू कर दिया शीतल को दर्द हो रहा था लेकिन मुंह में लंड होने की वजह से वह खाली हूं हू कर रही थी,,, और बड़ी-बड़ी आंख निकालकर शुभम को देख रही थी शुभम उसके चेहरे के हाव-भाव को देखकर समझ गया था कि चूची दबाने से उसे दर्द हो रहा है लेकिन यह भी वह अच्छी तरह से जानता था कि दर्द में ही मजा है इसलिए वह चूची दबाना जारी रखा,,,, दोनों पागल हो रहे थे शुभम पागलों की तरह शीतल की चूचियों को दबाता हुआ अपनी कमर को आगे पीछे करके हिला रहा था कभी-कभी तो वह अपने लंड को पूरा शीतल के गले तक डालकर वैसे ही रुका रह जा रहा था जिससे शीतल को सांस लेने में तकलीफ हो जा रही थी और वह जोर से शुभम को धक्का दे देती थी और वापस फिर से उसे मुंह में लेकर चूसने लगती थी,,,,

मजा आ रहा है ना मेरी जान,,,( शुभम दोनों हाथों से शीतल की नंगी चूचियों को दबाता हुआ बोला,,, और शीतल सिर्फ हां में सिर हिला कर उसका जवाब देने लगी,,,)

आज देखना मेरी रानी तेरी बुर का कैसे भोसड़ा बनाता हूं अपने लंड से,,,,( शुभम के इस बात से शीतल बोली कुछ नहीं बस शुभम को देखती रही शुभम उसके चेहरे के हाव-भाव को पढता हुआ समझ गया कि वह भी उतावली है उसके मोटे लंड को अपनी बुर मे लेने के लिए,,, शुभम जोर-जोर से अपनी कमर हिलाने लगा,,,, शीतल भी बराबर का साथ देते हुए जबरदस्त तरीके से शुभम के लंड पर अपनी जीभ फेरने रही थी,,,, शुभम को डर था कि कहीं उसके मुंह में ही उसका पानी ना निकल जाए इसलिए वह तुरंत अपने लंड को उसके मुंह में से वापस खींच लिया,,,, शीतल के मुंह में से पक्क की आवाज के साथ शुभम का मोटा तगड़ा लंड बाहर आ गया,,,, शीतल पागलों की तरह शुभम के लंड को देखने लगी जो कि उसके थूक और लार से पूरी तरह से गिला होकर ऊपर नीचे हो रहा था,,,, शीतल गहरी गहरी सांसे लेते हुए ललचाए आंखों से अभी भी शुभम के लंड को देख रही थी उसका चेहरा पूरी तरह से सुर्ख लाल हो गया था,,,, शुभम जानता था कि शीतल अभी अपने मुंह से उसके लंड को निकलने देना नहीं चाहती थी इसलिए शुभम अपने लंड को हिलाते हुए बोला,,,।

हाय मेरी रानी शीतल मेरी जान अब समय आ गया है इस लंड को पूरा का पूरा तुम्हारी बुर में डालने का मैं जानता हूं तुम्हारी बुर एकदम तड़प रही है मेरे लंड को अपने अंदर लेने के लिए,,,( शुभम हल्के से छुपकर अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर बेशर्म की तरह शीतल की भूल पर अपनी हथेली रखकर उसे रगड़ते हुए बोला,,, शुभम के ऊन्मादक हरकत की वजह से शीतल पूरी तरह से सिहर उठी एक बार फिर से वह शुभम की हरकत से शर्मिंदा हो गई यह बात उसे कुछ अजीब लग रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसके साथ इस तरह की हरकत कर रहा है जबकि वह अपने घर पर बुलाई ही थी इसी तरह की हरकत करने के लिए लेकिन सितम को इस बात का एहसास हो रहा था कि दोनों के बीच की उम्र की दूरी काफी गहरी थी जिससे शुभम के द्वारा इस तरह की हरकत की अपेक्षा वह बिल्कुल भी नहीं की थी,,,, शुभम अभी भी पागलों की तरह अपनी हथेली से शीतल की गुलाबी बुर को मसल रहा था जिससे शीतल के बदन में उन्माद चढ रहा था,,, उत्तेजना के असर में वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी। शुभम की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से चुद वासी हो गई थी उसके लव कुछ बोलने के लिए खुल नहीं पा रहे थे,,, वह कुछ बोलने के लिए अपने होंठ खोली ही थी कि सुभम ऊसके लाल-लाल होठों को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और उसकी बुर को अपनी हथेली से रगड़ता हुआ अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, एक बार फिर से शीतल के बदन में खुमारी छाने लगी उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है वह खुद शुभम के लंड से कहना चाहती थी एक तरह से वह शुभम को अपने घर बुलाकर उसे खिलौना बना कर उसके साथ खेलना चाहती थी लेकिन उसके सोचने के मुताबिक कुछ भी नहीं हो रहा था बल्कि सब कुछ उल्टा होता चला जा रहा था शुभम ही उसके बदन से खेल रहा था अपनी मनमानी कर रहा था जैसा वह कह रहा था वैसा उसको करना पड़ रहा था,,,, शीतल शुभम को नादान समझ रही थी लेकिन वह यह नहीं समझ पाएगी शुभम कोई सीधा-साधा लड़का नहीं है जो उसके हाथों की कठपुतली बनकर जैसा वह कहे वैसा ही वह करें,, उसे तो शुभम के बारे में कभी समझ लेना चाहिए था जब वह पलंग पर अपनी मां को चोदते हुए पूरी पलंग हिला रहा था उसे समझ जाना चाहिए था कि शुभम सीधा साधा लड़का बिल्कुल भी नहीं है वह घाट घाट का पानी पिया हुआ लड़का है जिसके साथ वह मनमानी नहीं कर सकती बल्कि वह ही उसके मन में आए वैसे उसके साथ खेल सकता है और वैसा हो भी रहा था,,, शुभम अपने मन से शीतल के बदन से अपने तरीके से खेल रहा था और तभी तो वह इस समय उसके होठों को चूसता हुआ उसकी बुर को जोर-जोर से रगड़ रहा था जो कि यह वह उन्माद की स्थिति में कर रहा था लेकिन इसके पीछे भी एक राज था वह इस तरह से शीतल को पूरी तरह से गर्म कर देना चाहता था ताकि जैसे ही उसका लंड उसकी बुर में जाए वह पागलों की तरह अपनी गांड उछाल उछाल कर उसके लंड को अपनी बुर में लेने की भरपूर प्रयास करते हुए एक दम मस्त हो जाए तभी जबरदस्त तरीके से उसे चोदने में शुभम को आनंद ही आनंद प्राप्त होगा,,,
और वैसा हो गया था शुभम पागलों की तरह उसके होंठों को चूस रहा था वह जोर-जोर से अपनी हथेली से उसकी बुर को रगड़ रहा था जिससे थोड़ी ही देर में शीतल एकदम गरम हो गई पूरी तरह से मस्त हो गई उसकी आंखों में नशा छाने लगा मदहोशी छाने लगी उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि अब वह अपनी बुर में उसके मोटे लंड को लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है,,,,, और शुभम अपने होठों को उसके होठों से अलग करता हुआ सीधा खड़ा हुआ और बोला,,,

अब आएगा तुम्हें चोदने का असली मजा। ( ऐसा कहते हुए शुभम शीतल के बदन पर से बाकी के कपड़े भी उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते सुगंध शीतल के बदन पर से उसके ब्लाउज को उतार कर फेंक दिया साथ ही उसकी ब्रा की पट्टी को खोल कर उसे एक झटके से उसके बदन से अलग कर दिया,,, ऊपर और नीचे से शीतल पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकी थी बस बीच में उसकी साड़ी और पेटीकोट बची हुई थी जिसे शुभम धीरे से खुलता हुआ धीरे-धीरे उसकी साड़ी को भी उसके बदन से अलग कर दिया और देखते ही देखते पेटिकोट की दूरी को खोल कर पेटीकोट को उसकी टांगों से नहीं बल्कि पेटीकोट पकड़कर उसे ऊपर की तरफ से उसके हाथों से होते हुए उसके सर से बाहर निकाल कर फेंक दिया अब इस समय शीतल उसकी आंखों के सामने पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में शीतल का गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था पूरे कमरे में शीतल के हुस्न की चमक फैली हुई थी शुभम भी पूरी तरह से मंगा खड़ा था उसका लंड पूरी औकात में था लेकिन शीतल शर्मा रही थी अपने आप में सिमटती चली जा रही थी,,, जिस पल के लिए वह महीने से इंतजार कर रही थी वह पल उसके हाथों में था जिसके अंदर वह पूरी तरह से खो जाना चाहती थी अपने आपको निहाल कर लेना चाहती थी पागलों की तरह इस पल का मजा लेना चाहती थी लेकिन ना जाने क्यों इस समय वह शुभम से शर्मा रही थी शायद उसे इस बात का एहसास हो गया था कि शुभम और उसके बीच जो उम्र की दूरी है वह काफी गहरी है वह उसके बेटे के जैसा है जिसके सामने वह पूरी तरह से नंगी बैठी हुई है और वह खुद एकदम नंगा होकर अपना लंड उसके सामने हिला रहा है उसके लिए यह पल ना जाने क्यों शर्मसार लगने लगा जबकि यह नजारा उसके लिए बेहद उत्तेजक और आनंद से भरा हुआ था,,,,
शुभम सेवा अपनी नजरें चुरा रही थी जो कि शुभम एकदम बेशर्म की तरह अपने लंड को हिलाते हुए बार-बार शीतल के नंगे बदन को स्पर्श करके आनंद ले रहा था,,,, शीतल शुभम से नजरे बचाते हुए इधर उधर देख रही थी और शुभम पागलों की तरह शीतल की दोनों बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों को देख रहा था जिसे देखकर उसके होठों पर प्यास तैरने लगी,,,,, शुभम आगे बढ़ा और दोनों हाथों को एक बार फिर से शीतल की दोनों चुचियों पर रखकर उसे दबाने लगा,,,,

आहहहहहहह,,, शीतल मेरी जान मेरी रानी मेरी छम्मक छल्लो,,,,,( शुभम की यह सारी बातें खास करके छम्मक छल्लो वाले शब्द को अपने कानों से सुन कर शीतल शुभम के सामने शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही धीरे-धीरे करके शुभम उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर उसे हल्के हल्के दबाव देते हुए बिस्तर पर लेट आने लगा और देखते ही देखते वह पीठ के बल पूरी तरह से बिस्तर पर लेट गई और उसके ऊपर शुभम पूरी तरह से छा गया उसकी कमर के इर्द-गिर्द अपनी पैर के घुटने रखकर वह दोनों हाथों से शीतल की चूचियों को दबाता हुआ उसके निप्पल को मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दिया,,,, जैसे ही वह शीतल की कड़क निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू किया वैसे ही शीतल के बदन में आग लग गई वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगी और उसके मुंह से हल्की सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,

ससहहहह,,,आहहररहह सुभम,,,,
 
शीतल की गोल-गोल खरबूजे जैसी चुचियों को देखकर शुभम का मूड बदल गया था वह उसके ऊपर पूरी तरह से छाया हुआ था दोनों हाथों में शीतल के दोनों कबूतरों को पकड़कर उसके फडफडाते हुए पंख को काबू में करते हुए शुभम चॉकलेटी रंग की निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,, शुभम का पूरा बदन शीतल के नंगे बदन पर था शीतल शुभम की इस हरकत का भरपूर आनंद ले रही थी अपनी दोनों टांगे फैलाकर शुभम से अपनी चूची मर्दन का लुफ्त उठा रही थी शुभम पागलों की तरह शीतल के पके हुए आम से खेल रहा था,,, शुभम भारी बारिश है शीतल की दोनों चुचियों को मुंह में लेकर चूसने का आनंद ले रहा था जितना हो सकता था वह उतना चूची को निप्पल सहित मुंह में भरकर कुछ देर तक लगातार उसे दशहरी आम की तरह चूस रहा था। शीतल की गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी,,, साथ ही उसके मुंह से दर्द भरी कराहने की आवाज भी आ रही थी,,, क्योंकि शुभम बहुत जोर जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था शीतल शुभम के नीचे दबकर छटपटा रही थी लेकिन शुभम उसकी दोनों टांगों के बीच में लेटा हुआ था जिससे बार-बार उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर के मुख्य द्वार से स्पर्श हो जा रहा था,,, और जब जब शुभम का तगड़ा लंड का सुपाड़ा उसकी फिर से स्पर्श हो रहा था तब तक उसके बदन में जैसे बिजली दौड़ जा रही थी वह पूरी तरह से मजा लूट रही थी उसे अपनी पुर के अंदर लेने के लिए इसलिए उसका पूरा बदन कसमसा रहा था लेकिन शुभम पूरी ताकत से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर उसके पूरे बदन को अपने कब्जे में किए हुए था,,,, शीतल पागल हुए जा रही थी शुभम उसके बदन की उत्तेजना के केंद्र बिंदु को अपने दोनों हाथों मैं पकड़कर जोर-जोर से उसे दबाते हुए उसे चूस रहा था,,,, और जानबूझकर अपने लंड के सुपाडे को बार-बार उसकी बुर के मुख्य द्वार से स्पर्श करा रहा था,,, जिससे शीतल पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी,,, वो पागल हुए जा रही थी और उसकी तड़प को बढ़ाते हुए सुभम बार-बार अपने लंड का स्पर्श उसकी बुर से करा रहा था,,,, एक तरह से उसका लंड की उसकी बुर में घुसने के लिए लालायित था लेकिन शुभम का कंट्रोल अपने लंड पर पूरी तरह से था पैसा नहीं था कि लंड की इच्छा के अनुसार वह कभी भी बुर में घुस जाए अपने नेट पर से बंद का इतना ज्यादा कंट्रोल था कि वह घंटों बुर के बेहद करीब अपने लंड को रखने के बावजूद भी उसमें घुसा नहीं सकता था,,, इसलिए तो शुभम बाकी मर्दों से बिल्कुल अलग था क्योंकि अब तक सुरंग की जगह दूसरा कोई मर्द होता तो शीतल की बुर में अपना लंड डालकर कब से ठंडा होकर करवट लेकर सो गया था लेकिन आधी रात से ज्यादा का समय बीत चुका था और अभी तक शीतल की बुर में शुभम ने लंड डालकर उसका उद्घाटन नहीं किया था लेकिन फिर भी वह शीतल को दो बार झड़ चुका था,,,,
व शीतल को और ज्यादा तड़पाना चाहता था पूरी तरह से मस्त कर देना चाहता था,,, इसलिए तो वह अपने लंड का दबाव उसकी बुर पर इतना देता था कि उसके लंड का सुपाड़ा वाला हल्का सा भाग उसकी बुर की गुलाबी पतियों को हल्के से फैलाता हुआ अंदर की तरफ दस्तक देने लगता था लेकिन फिर वह उसे वापस खींच लेता था जिससे शीतल एकदम तड़प कर रह जाती थी,,,,



ओहहहह,,, शुभम मुझसे रहा नहीं जा रहा है मुझे कुछ हो जाएगा प्लीज अपने बंदे को मेरी बुर में डालो मुझसे रहा नहीं जा रहा मैं पागल हो जाऊंगी,,,( शीतल उत्तेजना के मारे अपने सर को इधर-उधर तकिए पर पटकते हुए बोली बहुत देर बाद शीतल खुलकर बोली थी क्योंकि वह शुभम की हरकत के आगे पूरी तरह से विवश हो चुकी थी,,, शुभम का धैर्य और उसकी हरकत देखकर समझ गई थी कि शुभम किसी और माटी का बना हुआ है वरना अब तक उसकी बुर कोरी ना होती,,,, और इसी बात पर भी हैरान थी कि घंटों से दोनों एकदम नग्न अवस्था में एक दूसरे के अंगों से खेल रहे हैं और वह उसकी हरकत के दो बार अपना पानी निकाल चुकी है लेकिन अभी तक सुभम का पानी निकला नहीं था और उसका लंड ऊसी तरह से पूरी तरह से टन टनाया हुआ खड़ा था उसमे जरा भी ढीलास नहीं आई थी,,, शुभम अपने लंड को उसकी बुर के मुख्य द्वार पर अपनी कमर के सहारे से ऊपर नीचे करके रगडते हुए बोला,,,,।

ससससहहहह,,,,,, मेरी छम्मक छल्लो तुम्हारी चूचियां दबाने में ईतनआ मजा आ रहा है कि मेरा मन ही इससे नहीं भर रहा,,,

तुम्हारा तो मन नहीं भर रहा लेकिन मेरी तो हालत खराब हो रही है,,,( शीतल एकदम मादक स्वर में बोली,,,)

तो क्या करूं मेरी जान तुम ही बोलो,,,, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है तुम इतनी खूबसूरत हो कि तुम्हारी अंग अंग से मदन रस टपक रहा है और उस रस को पीने के लिए मेरा मन बेचैन है मैं तुम्हारे हर एक अंग का मजा लेना चाहता हूं फीर चाहे वह चूची हो बुर हो गांड हो जांघ हो या पेट या तुम्हारे गाल तुम्हारे लाल लाल होंठ हो मैं तुम्हें हर एक जगह से मजा देना चाहता हूं लेना चाहता हूं,,,( शुभम मदहोशी के आलम में बोला जा रहा था और जोर-जोर से शीतल की चुचियों को दबाया जा रहा था जिससे रह-रहकर शीतल के मुंह से कराहने की आवाज आ रही थी,,,)


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लेकिन इस समय तो हमें तुम्हारा लंड अपनी बुर में चाहती हूं मैं तड़प रही हूं मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरी बुर में खुजली मची हुई है और इसे जल्दी से जल्दी मेरी बुर में डालकर मेरी खुजली मिटाओ शुभम वरना मैं मर जाऊंगी,,,,आहहरहहह,,, शुभम,,,,
( शीतल की गरम सिसकारी और उसकी तड़प देख कर शुभम समझ गया था कि अब शीतल पूरी तरह से तैयार हो गई है उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेने के लिए इसलिए अब शीतल को ज्यादा तड़पाना उचित नहीं समझ रहा था शुभम इसलिए कुछ देर तक और जोर-जोर से चूचियों से मजा लेते हुए शीतल के ऊपर से हट गया और उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाने लगा,,,, शीतल की बुर लपलपा रही थी शुभम के लंड को अपने अंदर लेने के लिए,,,,,

शीतल ललचाए आंखों से शुभम की तरफ देख रही थी उसकी हर एक हरकत पर अपनी नजर रखे हुए थी कुछ ही देर में उसकी बुर शुभम के मोटे तगड़े लंड से भर जाने वाली थी इस बात के एहसास से उसका पूरा बदन गनगना जा रहा था,,,, शुभम एक तकिया लेकर उसे शीतल की बड़ी बड़ी गांड के नीचे रखने लगा तो शीतल खुद उसका साथ देते हुए अपनी गांड को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा ली जिससे अच्छी तरह से शुभम उस नरम नरम तकिए को शीतल की गांड के नीचे रख सके,,,, शुभम अच्छी तरह से उस तकिए को शीतल की बड़ी बड़ी गांड के नीचे रख दिया जिससे शीतल की रसीली बुर थोड़ी सी ऊपर की तरफ हो गई और शुभम अपने घुटने मोड़कर उसे शीतल की दोनों मांसल जांघों के नीचे करके उसकी कमर को पकड़ कर हल्के से अपनी तरफ खींचा जिससे शुभम का लंड ठीक शीतल की रसीली बुर के सामने आ गई,,,,, शीतल का दिल जोरों से धड़क रहा था साथ ही वह शर्मिंदा भी होते जा रही थी,,, क्योंकि बार-बार उसके दिमाग में यह ख्याल आ रहा था कि सुबह में उसके लड़के की उम्र का था और किस तरह से वह उसे चोदने की पूरी तैयारी कर रहा था,,, लेकिन शुभम की मर्दाना ताकत पर वह बार-बार आफरीन हो जा रही थी क्योंकि आज की रात से पहले उसे ऐसे ही लग रहा था कि शुभम से जिस दिन भी मिलेगी उसे सब कुछ सिखाना पड़ेगा लेकिन यहां तो शुभम सीखा सिखाया हुआ था एक मजे हुए खिलाड़ी की तरह खुद अपने लिए जगह बना रहा था जिस तरह से एक बार शीतल की कमर पकड़कर अपनी तरफ खींचा था उसी से साफ पता चल रहा था कि वह अपनी मां को बहुत दिनों से चोदता रहा है और पूरी तरह से चुदाई में पूरा पक्का खिलाड़ी हो गया है,,,,, शर्मसार होने के बावजूद भी उत्तेजना के परम शिखर पर पूरी तरह से विराजमान हो चुकी थी शीतल,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था वह जानती थी अब क्या होने वाला है उसकी तेज चलती सांसों के साथ-साथ उसके खरबूजे जैसी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर शुभम का जोश बढ़ता जा रहा था,,,, शीतल पुरी तरह से चुदवासी हो गई थी उसकी बुर एकदम गीली हो चली थी,,, शुभम अपने खड़े लंड को हाथ से पकड़ कर उसे जोर जोर से शीतल की बुर के बीचो-बीच पटकने लगा,,,, पटपट की आवाज के साथ पूरा कमरा गूंजने लगा,,, इसमें शुभम को बेहद आनंद आ रहा था शीतल को भी मजा आ रहा था लेकिन जोर-जोर से लंड बुर पर मारने की वजह से उसे दर्द भी हो रहा था।।



आहहहह ,,,, शुभम आप डालो भी,,,, कितना तड़पाओगे,,,,

जितना तडपाऊंगा मेरी जान उतना मजा भी दूंगा,,,,, बस तुम्हारा इंतजार खत्म होगा मैं जानता हूं तुम भी इसी दिन के लिए महीनों से इंतजार कर रही हो जैसा कि मैं,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम ढेर सारा थूक अपनी हथेली पर लगाकर उसे अपने लंड की सुपाड़े पर रगड़ने लगा जिससे लंड का सुपाड़ा गिला होकर उसकी रसीली बुर में आराम से उतर जाए,,,, शुभम बिल्कुल भी देरी ना करते हुए अपने लंड के सुपाड़े को शीतल की गुलाबी बुर की पत्तियों के बीचोबीच रख कर उसे हल्के हल्के दबाने लगा गीलापन पाकर शुभम का मोटा तगड़ा लंड का मोटा सुपाड़ा धीरे-धीरे शीतल की बुर के अंदर सरकने लगा,,, शुभम के मोटे लंड कै सुपाडे को अपनी बुर के ऊपर महसूस करते ही शीतल समझ गई कि उसकी बुर की गुलाबी छेद के मुकाबले शुभम का मोटा तगड़ा लंड काफी मोटा है,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि शुभम अपनी मोटे लंड को उसकी बुर के अंदर डालेगा कैसे,,,, शुभम जी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसके लंड की मोटाई के आगे शीतल की बुर का छेद काफी छोटा था जिससे यह पता चलता था कि काफी दिनों से शीतल की बुर में लंड नहीं गया था,,,, इस बात से शुभम एकदम प्रसन्न हो गया क्योंकि उसे भी टाइट बुर चोदने में ज्यादा मजा आता था शुभम ज्यादा उतावलापन दिखाना नहीं चाहता था वह चाहता है तो एक झटके में ही अपने पूरे लंड को शीतल की बुर में डाल देता लेकिन इससे शीतल का मजा किरकिरा हो जाता वह दर्द से बिलबिला उठती और फिर चुदाई का मजा नहीं ले पाती,,, इसलिए शुभम बड़े आराम से धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था इसलिए वह धीरे-धीरे हल्के हल्के अपने लंड के सुपाड़े को रसीली बुर के अंदर डालना शुरू कर दिया,,,, मदन रस की वजह से शीतल की बुर के अंदर काफी चिकनाई हो गई थी जिससे थोड़ा सा ताकत लगाने पर शुभम का लंड धीरे-धीरे बुर के अंदर चला जा रहा था,,,


लेकिन जैसे-जैसे शुभम का लंड शीतल की बुर के अंदर घुसता चला जा रहा था वैसे वैसे शीतल के चेहरे पर दर्द की लकीरे साथ उपसती नजर आ रही थी,,,

दोनों का दिल जोरों से धड़क रहा था घड़ी में तकरीबन 1:00 बज रहा था ऐसे में शीतल के कमरे की लाइट पूरी तरह से जगमग आ रही थी और ट्यूबलाइट कीचड़ में हाथ में उसका नंगा बदन कांच की तरह चमक रहा था उसे काफी दर्द महसूस हो रहा था लेकिन आनंद की प्राप्ति अगर चाहती थी तो दर्द भी झेलना आवश्यक था इसलिए वह अपना मन कठोर करके शुभम के लंड को अपनी बुर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत दे रही थी और शुभम भी अपने लंड को पूरी गर्माहट के साथ शीतल की बुर के अंदर डालने का प्रयास कर रहा था देखते ही देखते शीतल की बुर का छोटा सा छेद रबड़ की तरह शुभम के लंड की मोटाई पाकर फैलने लगी,,, और शुभम अपने लंड के मोटे सुपाड़े को शीतल की कसी हुई बुर में डालने मैं सफल हो गया,,,,
शीतल के लिए बेहद खुशी की बात थी दर्द तो काफी हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे खास करके पसीने की बूंदे शीतल के माथे के साथ-साथ उसकी दोनों चूचियों पर ज्यादा उपसी हुई नजर आ रही थी,,,,, जोकि ओस की बूंद की तरह नजर आ रही थी जिसे अपने होठों पर रखकर शुभम अपनी प्यास बुझाना चाहता था लेकिन अभी इसमें समय था क्योंकि उसे आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले यह पड़ाव पार करना था,,, जो कि शुभम के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं था वह तो बस शीतल का ख्याल रख रहा था वरना अब तक उसका मोटा तगड़ा लंड शीतल की बुर की गहराई नाप रहा होता,,,,
एक बार सिर घुस जाए तो बाकी का शरीर घुसने में समय नहीं लगता,,, इसलिए शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अब उसका पूरा लंड धीरे-धीरे करके शीतल की बुर में घुस जाएगा,,,, इसलिए शुभम अपने जबर्दस्त प्रहार के लिए शीतल को तैयार करने हेतु जितना घुसा था उतना ही लंड आगे पीछे करते हुए शीतल को चोदना शुरू कर दिया,,,,
दोनों का मजा आने लगा उत्तेजना के मारे शीतल का गला सूखता चला जा रहा था अभी तो लंड का मोटर सुपड़ा ही पूछा था और उसे पाने की चुदाई से ही शीतल पूरी तरह से काम भीबोर होकर अपनी कमर हल्के हल्के ऊपर उठा रही थी,,,, कुछ ही देर में शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी शुभम को समझते देर नहीं लगी किसी कल पूरी तरह से तैयार हो चुकी है उसके हर धक्के को सहने के लिए,,,,, वह भी पूरी तरह से तैयार था शीतल के अंदर घुसने के लिए इसलिए वह है शीतल की कमर को बराबर अपनी हथेली मैं दबोच ते हुए एक जबर्दस्त प्रहार किया और उसका आधा लंड सब कुछ चीरता हुआ शीतल की बुर के अंदर समा गया,,, शुभम के इस जबर्दस्त प्रहार के साथ ही शीतल के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई,,,,

ओहहहहह,,,, मां,,,,, मर गई रे यह क्या कर दिया शुभम तूने पूरा लंड घुसा दिया,,,,,आहहहहहहह,,, बहुत दर्द कर रहा है शुभम इसे बाहर निकाल दें,,,, प्लीज रहने दे मैं तुझसे नहीं चुदवाऊंगी तेरा लंड बहुत मोटा है मेरी बुर फट जाएगी तु उसे निकाल ले,,,,,
( शीतल को काफी दर्द हो रहा था वह दर्द से छटपटा रही थी उसे रहा नहीं जा रहा था वह बार-बार शुभम से अपने लंड को बाहर निकाल लेने के लिए कह रही थी लेकिन शुभम जानता था कि एक बार अगर उसकी बुर से लंड वापस निकाल लिया तो शीतल उसे डालने नहीं देगी इसलिए शुभम सारा मजा किरकिरा करना नहीं चाहता था वह ज्यों का त्यों उसी स्थिति में स्थिर हो गया और शीतल की कमर को थामे हुए ही बोला,,,।)

क्या जान अभी से डर गई अभी तो आधा सफर पर ही पहुंची हो और अभी से वापस जाने के लिए कह रही हो अभी तो मंजिल दूर है,,,, अभी तो मेरा आधा लंड है तुम्हारी बुर में घुसा है मेरी छम्मक छल्लो,,,,
( यह सुनते ही शीतल के तो होश उड़ गए,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था उसे ऐसा ही लग रहा था कि सुबह मुझे अपना पूरा लंड उसकी बुर में डाल दिया है उसकी बात सुनकर वह हैरान होकर अपने दोनों हाथों की कहानी का सहारा लेकर अपनी गर्दन उठाकर अपनी टांगों के बीच की स्थिति का जायजा लेने के लिए उधर नजर दौड़ाई तो वह एकदम सन रह गई शुभम के कहे अनुसार वास्तव में उसका आधा लंड हई उसकी बुर में घुसा हुआ था अभी तो आधा लंड बाकी था आने वाले पल की दहशत में वह पूरी तरह से सिहर उठी,,,,, उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी लेकिन शुभम अच्छी तरह से जानता था कि औरतों को किस तरह से अपने बस में करना है किस तरह से उन्हें लाइन पर लाना है इसलिए वह आधे लंड को भी बुर में घुसा रहने दिया और झुककर शीतल की निप्पल पर पसीने की बूंद जो कि ओस की बूंद की तरह लग रही थी उसे मुंह में भर कर उसकी चूची को पीना शुरू कर दिया और साथ ही दोनों चूचियों को हाथ में लेकर दबाने लगा देखते ही देखते स्तन मर्दन और उसे पीने की वजह से शीतल का दर्द आनंद में बदलने लगा वह अपने दोनों हाथ को शुभम की पीठ पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और आनंद में डूबते हुए सिसकारियां लेने लगी इस बार शुभम कोई गलती नहीं करना चाहता था। इसलिए शुभम हल्के से अपनी आधी लंड को बाहर की तरफ खींचना और सुपाड़े भर को बुर के अंदर रहने दिया,,, और अपने दोनों हाथों को शीतल की पीठ के नीचे ले जाकर उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में कस लिया अब शीतल थोड़ा सा भी हिलडुल नहीं पा रही थी शुभम को पूरी तैयारी के साथ इस बार कच कचा करें सा धक्का मारा कि उसका पूरा लंड सब कुछ चीरता हुआ सीधे जाकर शीतल के बच्चेदानी से टकरा गया उसके मुंह से दर्द की चीख निकलती ईससे पहले शुभम उसके होठों को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया,,,,, मुंह बंद होने की वजह से शीतल के मुंह से घुटी घुटी सी चीख निकल रही थी बाहर जिसे शुभम अपने होंठों की गर्मी देकर उसे शांत करने की कोशिश कर रहा था,,, शीतल झटपट आने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन शुभम उसे अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था,,, जिससे वह छटपटा नहीं पा रही थी शुभम लगातार उसके होठों की चुसाई कर रहा था अभी भी उसका लंड पूरी तरह से शीतल की बुर में धंसा हुआ था,,,, शीतल को ईस बात का एहसास हो गया कि उसका लंड नहीं बल्कि मुसल है,,,
थोड़ी ही देर में शीतल एकदम शांत हो गई उसका दर्द कम हुआ तो शुभम फिर से उसके होठों से अपना मुंह हटा कर उसकी चूची पर मुंह रखकर पीने लगा होगा धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया अब धीरे-धीरे शीतल को मजा आने लगा धीरे-धीरे शुभम शीतल को चोद रहा था,,,
एक बार फिर से शीतल अद्भुत सुख के एहसास में डूबने लगी एक बार फिर से उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी,,, शुभम समझ गया कि अब कितने भी जबरदस्त धक्के लगा ले अब शीतल को सिर्फ मजा ही मजा आने वाला है,,, शुभम की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह हल्के हल्के कमर हिलाता हुआ उसकी रफ्तार बढ़ाने लगा फच फच की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी,,,,

शीतल जी से नादान बच्चा समझ रही थी और जिसके साथ मनमानी करने का इरादा रखती थी आज वही बच्चा पूरी अपनी मर्दाना ताकत दिखाते हुए खुद उसे अपने नीचे निकालकर उस को चोद रहा था और शीतल के मुंह से एक शब्द नहीं फूट रहे थे वह बस उसकी जबरदस्त चुदाई का आनंद ले रही थी,,,,, शुभम अपनी कमर हिलाता हुआ शीतल से बोला,,,,

अब कहो मेरी छम्मक छल्लो कैसा लग रहा है,,,,

बहुत मजा आ रहा है शुभम मैं कभी सोची नहीं थी की चुदाई में इतना मजा भी आता है,,,,( जब तक सितारे इतना कहती है शुभम लगातार दो-चार धक्के उसकी बुर में जड़ दिया जिससे शीतल के मुंह से आह निकल गई)
आहहहह,,आहहहहह,, शुभम कि पूछो मत बहुत मजा आ रहा है बस तू मुझे चोदता रहे,,,आआआहहहह,,आहहहहह,,,

बस फिर क्या था शुभम की रफ्तार तेज हो गई उसकी कमर बड़ी तेजी से चलने लगी मानो कोई मशीन चल रही है फच फच की आवाज से पूरा कमरा गूंज रहा था लेकिन उस मधुर आवाज में शीतल पूरी तरह से खो चुकी थी,,, शुभम के हर धक्के के साथ ही शीतल की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी,,,, अोर ऊन चुचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था,,, शुभम अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ाकर शीतल की बड़ी-बड़ी सूचियों को थाम लिया और से जोर-जोर से दबाते हुए धक्के पर धक्के पेलने लगा,,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे शुभम के हर धक्के के साथ शीतल के मुंह से आह निकल जा रही थी पूरा पलंग चर मरा रहा था।
शुभम अपनी पोजीशन बदलते हुए शीतल की बुर से अपना लंड बाहर निकाला और उसके बगल में पीठ के बल लेट गया और अपने लंड को हिलाने लगा शीतल को समझते देर न लगी कि उसे क्या करना है,,, अब शीतल की बारी थी अब गाड़ी को चला कर आगे शीतल को ही ले जाना था शीतल पोजीशन लेते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गाड़ी लाते हुए अपने दोनों को दोनों को शुभम की कमर के इर्द-गिर्द रख दी और एक हाथ से शुभम के नंगे को पकड़कर अपनी बड़ी बड़ी गांड को धीरे-धीरे उसके ऊपर रखने लगी देखते ही देखते शुभम का मोटा तगड़ा लंबा लंड शीतल की बुर में खो गया,,,, एक अद्भुत एहसास से शीतल पूरी तरह से भर गई उसे इस बात का अहसास हो गया कि औरत की बुर कितना भी मोटा लंड क्यों ना हो अगर थोड़ी सी सहूलियत दिखाएं तो उसे भी पूरा का पूरा अंदर ले सकती है,,,, कुछ देर पहले ही शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने से वह एकदम घबरा रही थी लेकिन अब उसी लंड को कूद कूद के अपनी बुर के अंदर छुपा ले रही थी,,, उसे बहुत मजा आ रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह आसमान में उड़ रही हो जैसे जैसे वह शुभम कै लंड पर कूद रही थी वैसे वैसे उसकी दशहरी आम की तरह बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में झूल रही थी जिसे लपक कर शुभम अपने हाथों में भर लिया और से दबाने लगा,,, शीतल गरम सिसकारियोंरियों के साथ शुभम के लंड पर कूद रही थी,,,, देखते ही देखते उसकी सांसों की गति तेज होने लगी और उसकी सिसकारियां की आवाज बढ़ने लगी तो शुभम को समझते देर नहीं लगी कि वह झड़ने वाली है वह भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गया था इसलिए,,, अपना एक हाथ बढ़ा कर शीतल की कमर को थाम लिया और अपने लंड को सीकर की बुर से बाहर निकाले बिना ही ऐसा पलटी मारा की शीतल एक बार फिर से पीठ के बल हो हो गई और वह उसके ऊपर सवार हो गया अब शुभम बिना रुके जोर-जोर से पूरा धक्का उसकी बुर में लगाने लगा शीतल की हालत खराब होती जा रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था हर धक्के के साथ शीतल को एहसास हो रहा था कि जैसे वह आसमान में उड़ रही हो उसके पंख लगाए हो उसे इतना आनंद मिल रहा था कि ऐसा आनंद उसने जिंदगी में कभी भी प्राप्त नहीं की थी,,,,
अपने जबरदस्ती धक्कों से वह शीतल के होश उड़ा रहा था साथ ही उसकी रसीली कसी हुई बुर का भोसड़ा भी बना रहा था,,, शीतल कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसे इतने मोटे तगड़े जवान लंड का सुख भोगने को मिलेगा लेकिन उसकी यह सोच के परे उसकी जिंदगी बदल रही थी उसे स्वर्ग का सुख मिल रहा था,,,।
ओहहहह शुभम में झड़ने वाली हूं मेरा पानी निकलने वाला है ओहहहह शुभम,,,,आहहहहहहह,,,,

शीतल चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई थी शुभम भी झड़ने वाला था इसलिए जबरदस्त धक्के पर धक्के लगा रहा था और देखते ही देखते हैं वह अपना गरम लावा शीतल की बुर में उड़ेलने लगा,,, शीतल भी अपना नमकीन पानी छोड़ने लगी शुभम एक बार फिर से उसे बाहों में जकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा हालांकि उसका पानी निकाल रहा था लेकिन फिर भी वह मजा लेना चाहता था देखते ही देखते दोनों एकदम से झड़ जाए शुभम उसे अपनी बाहों में लेकर उसके ऊपर पसर गया शीतल भी उसके पीठ पर अपना हाथ पैर में लगी दोनों की गर्म सांसे एक दूसरे की सांसो से टकरा रही थी शीतल कभी सपने में भी नहीं सोच इतनी कि उम्र के इस पड़ाव पर उसे एक जवान लड़का सुख भोगने को मिलेगा और वह भी अपने ही शादी की सालगिरह के दिन,,,शीतल काफी खुश नजर आ रही थी वह पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी तृप्ति का अहसास उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था,,,, दोनों उसी तरह से एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे लेकिन अभी खेल खत्म नहीं हुआ था अभी तो पूरी रात बाकी थी।
 
दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर कुछ देर तक यूं ही पसारे रहे,,, आनंद की सारी सीमाओं को पार करके दोनों एकदम मस्त हो चुके थे शुभम को भी शीतल की चुदाई करने में परम आनंद की अनुभूति हुई थी शीतल तो विश्वास नहीं कर पा रही थी कि वह शुभम से की चुदवाई है,,,, उसे सब कुछ सपना सा लग रहा था,,,, बरसों से इस तरह की जबरदस्त चुदाई की प्यासी थी वह आज तक अपनी प्यास नहीं बुझा पाई थी,,, और ना ही उसे आज तक मां बनने का सुख प्राप्त हुआ था,,, शुभम से चुदवाने में उसका एक अपना लालच था एक तो वह संपूर्ण रुप से तृप्ति के एहसास में डूब जाना चाहती थी और दूसरा वह मां बनने का सुख भोगना चाहती थी,,,, शुभम उसकी मोटी मोटी चुचियों पर सर रखकर उसके ऊपर लेटा हुआ था शीतल उसकी नंगी पीठ को अपने हाथ से सहला रही थी उसके चेहरे पर तृप्ति का एहसास साफ नजर आ रहा था,,,।
शुभम का लंड अभी भी उसकी बुर में घुसा हुआ था हालांकि धीरे-धीरे वह ढिला पड़ने लगा था,,, शीतल को बहुत जोरों की पेशाब लग गई,,, वह शुभम को अपने ऊपर से हटाते हुए बोली,,,

अब हटोगए भी या ऊपर ही चढ़े रहोगे और अभी तक तुम्हारा लंड मेरी बुर में है इसे निकालो तो सही,,,

मेरी छम्मक छल्लो मेरा बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा है कि मैं अपने लंड को तुम्हारी बुर से बाहर निकाल लो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,

मजा तो मुझे भी आ रहा है लेकिन तुम्हारा लंड ढीला होता जा रहा है,,,,

टाइट भी बहुत जल्दी हो जाता है बस एक बार इसे अपने मुंह में ले कर देखो फिर देखना कितनी जल्दी से तैयार हो जाता है,,,
( शुभम की ईस तरह की गंदी बेहद उत्तेजक बातें सुनकर शीतल मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने लगे और वह शुभम के सवाल का जवाब दिए बिना ही उसे अपने ऊपर से लगभग धक्का देते हुए उठने लगी शुभम इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं था इसलिए शीतल के धक्का देते ही वह दूसरी तरफ लुढ़क गया,,,, पक की आवाज के साथ है उसका लंड उसकी बुर से बाहर निकल गया जो कि अभी भी पूरी तरह से खड़ा था बस हल्का हल्का उसमें ढीलापन नजर आ रहा था,,, शीतल एक नजर शुभम के लंड पर डाली जो की पूरी तरह से उसकी नमकीन रस में नहाया हुआ था,,, शीतल मुस्कुराते हुए बिस्तर से नीचे उतर गई,,, और उसी अवस्था में एकदम नंगी अपनी गांड मटकाते हुए बड़े ही मादक चाल से अपने कदम आगे बढ़ाते हुए कमरे से बाहर निकल गई लेकिन कमरे से बाहर निकलते निकलते वह बोली,,,

मेरा इंतजार करना मैं अभी गई और अभी आई,,,,

लेकिन तुम जा कहां रही हो,,,?( शुभम अपने ढीले पड़ रहे लंड को एक हाथ से हिलाते हुए बोला,,,)

मुतने जा रही हुं,,, आएगा क्या,,,,? ( इतना कहकर शीतल वहां एक सेकंड भी नहीं रुकी और हंसते हुए चली गई मौत ने वाली बात शीतल एकदम मादक स्वर में बोली थी जिससे शुभम का रोम-रोम झनझना उठा,,,
शुभम उसे अपनी बड़ी बड़ी गांड मटका ते हुए जाते देख कर पागल होने लगा,,,, जो कि अभी एक बार झड़ने के बाद शुभम का लंड ढीला होना शुरू ही हुआ था कि एक बार फिर से ही शीतल की बड़ी बड़ी गांड को मटकता हुआ देखकर और उसकी मौत ने वाली बात सुनकर उसमें उत्तेजना भरने लगी,,,,,,, शीतल की जबरदस्त चुदाई करते करते वह पूरी तरह से पसीने से भीग चुका था इसलिए हवा लेने के लिए वह बिस्तर से खड़ा हुआ और सीधा जाकर खिड़की के पास खड़ा हो गया,,, खिड़की पर बेहद ठंडी हवा बह रही थी जिससे उसके तन बदन में ठंडक का एहसास हो रहा था,,,। शुभम खिड़की से बाहर का नजारा देख रहा था घड़ी में तकरीबन 2:15 हो रहा था,,, बाहर पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था,,, सड़क पर कोई भी नजर नहीं आ रहा था,,,,,,
 
बाहर का नजारा बेहद खुशनुमा रहा एकदम शांति छाई हुई थी और ऐसे में शीतल ठंडी हवा का झोंका शुभम के तन बदन में एक नई ताजगी जगा रहा था वह खिड़की पर खड़ा होकर बाहर का नजारा देख रहा था वह संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र था दूर-दूर तक कोई भी नजर नहीं आ रहा था सड़क पूरी तरह से स्ट्रीट की पीली रोशनी में नहाई हुई थी रह रह कर कुत्ते के भौंकने की आवाज आ रही थी जहां तक नजर जा रही थी वहां तक पूरी तरह से शांति छाई हुई थी हर घर की लाइट बंद थी केवल शीतल के कमरे की लाइट जल रही थी शुभम खिड़की पर एकदम नंगा खड़ा होकर बाहर के नजारे का लुफ्त ले रहा था लेकिन एक बात थी जो उसके समझ में नहीं आ रही थी कि उसकी मां ने उसे शीतल के पास क्यों भेजा और वह भी अकेले और रात के समय,,, शुभम के लिए यह सवाल एकदम पहेली की तरह था ऐसा लग रहा था कि जैसे बिल्ली को खुद दूध की रखवाली करने के लिए कहा गया हो,,,
लेकिन जो भी हो उसे बहुत मजा आ रहा था वैसे भी वह स्कूल के दिनों से ही शीतल के प्रति आकर्षित था और यह जानकर तो वह और भी ज्यादा शीतल को चोदने का इच्छुक हो गया था कि शीतल भी उसको चाहती है,,,। और तब से लेकर उसकी इच्छा आज जाकर पूरी हुई थी शीतल की मदमस्त खूबसूरत बड़ी बड़ी गांड से खेलते हुए उसे इतना आनंद आया था कि पूछो मत साड़ी के ऊपर से जितनी खूबसूरत शीतल दिखती है उतनी ही ज्यादा मादक शरीर की मालकिन वह साड़ी के अंदर से थी,,, खिड़की पर खड़े होकर व शीतल की हर एक अदा का जायजा लेते हुए मन ही मन में सोच रहा था उसका शर्माना घबराना बाथरूम में अपनी साड़ी उठाकर बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए मुतना,,, शीतल की सारी मादक अदाएं शुभम के ऊपर एक हमला सा था और शुभम इस हमले में पूरी तरह से शीतल की मादकता भरी जवानी में ध्वस्त हो चुका था,,,, तभी तो रात के 2:30 बज रहे थे लेकिन उसकी आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी उसके चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं था अभी वह और शीतल से मजा लेना चाहता था,,,

दूसरी तरफ सीतल संपूर्ण रूप से नंगी होकर उसी हालत में सीढ़ियां उतरकर बाथरूम में जाकर उसी तरह से बैठकर पेशाब कर रही थी जैसा कि थोड़ी देर पहले शुभम की आंखों के सामने उसे बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए मुत रही थी,,, शीतल शुभम से चुदवाने के लिए पूरी तरह से इच्छुक थी लेकिन यह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से वह शुभम की आंखों के सामने ही पेशाब करने बैठ जाएगी लेकिन फिर भी जो कुछ भी हुआ उसमें आनंद ही आनंद था औरत के लिए यह भी कल्पना के परे होता है मदहोशी से बड़ा होता है कि वह किसी गैर आदमी के सामने उसे अपना खूबसूरत अंग उसे अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही हो,,,, उस पल की झनझनाहट उसे अभी भी महसूस हो रही थी अभी भी हुआ शुभम को ही याद करके अपनी बुर से पेशाब की धार सामने की दीवार पर मार रही थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि काश सुभम एक बार फिर से बाथरूम में आ जाता तो वह बाथरुम में ही उससे चुदवाने का भरपूर आनंद ले लेती यह उसके लिए एक नया अनुभव होता,,,,
पेशाब करते हुए शुभम के बारे में सोच कर एक बार फिर से उसका बदन उत्तेजना से भरने लगा यही तो खासियत होती है औरत और मर्द में की एक कामोत्तेजना से भरपूर सोच ही उन्हें उत्तेजित करने के लिए काफी होती है भले ही वह कितनी ही बार झड़े हो लेकिन फिर भी हर मर्द के झड़ जाने के बाद उसका पुनरुत्थान होने में समय लगता है लेकिन शुभम के लिए यह एकदम दुर्लभ बात थी वह पल भर में ही अपनी कमजोरी नुमा औरत की बड़ी बड़ी गांड देखकर उत्तेजित हो जाता था तभी तो वह बिस्तर पर शीतल की भरपूर चुदाई करने के बाद जैसे ही चढ़ा था वैसे ही कुछ ही मिनटों बाद शीतल की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड देखकर फिर से उसका लंड अपनी औकात में आने लगा था,,,,

शीतल शुभम के मर्दाना ताकत बड़े हथियार की शक्ति देखकर पूरी तरह से उसकी दीवानी हो गई थी लेकिन इस बात से वह बिल्कुल भी अनजान थी कि एक बार चढ़ने के बाद शुभम तुरंत तैयार हो जाता है और यही सोच कर परेशान हो जा रही थी क्योंकि उसे फिर से अपनी बुर में खुजली होती हुई महसूस हो रही थी वह यही सोच रही थी कि क्या दोबारा शुभम उसकी चुदाई कर पाएगा या नहीं वह मन ही मन सोच रही थी कि अगर ऐसा नहीं हो पाया तो वह पूरा प्रयास करेगी शुभम के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने खड़ा करने के लिए क्योंकि आज की रात हुआ इस तरह से खाली नहीं जाने देना चाहती थी उसकी बुर कुल बुला रही थी सुभम के लंड को एक बार फिर से अपने अंदर लेने के लिए,,,, इसी कशमकश में वह पेशाब कर चुकी थी,,, वाह खड़ी हुई और बाद में से बाहर आकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी काश अगर कोई इस अवस्था में शीतल के नंगे बदन के दर्शन कर लेता तो उसकी जिंदगी सफल हो जाते हैं बेहद खूबसूरत मादकता भरे भजन की मालकिन शीतल संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र होकर जब घर में इधर-उधर टहलते हैं तो स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा ही लगती है उसकी चाल ढाल तब बेहद मदहोश कर देने वाली होती है जब वह धीरे-धीरे अपने पैर बढ़ाते हुए सीढ़ियां चढ़ती है उसके नितंबों का हर एक जोड़ पानी भरे गुब्बारों की तरह लहराता है और उस लहराते हुए गुब्बारे नुमा गांड को देखकर किसी भी मर्द का पानी तुरंत निकल जाए इस बात की शत-प्रतिशत गारंटी है,,,,

कमरे का दरवाजा खुला हुआ था शीतल जैसे ही कमरे में प्रवेश की तो देखी कि शुभम खिड़की पर खड़ा हुआ है और खिड़की पर अपनी पीठ दिखाएं उसी को देख रहा है साथ ही उसका एक हाथ उसके सेंड पर था जो की पूरी तरह से औकात में आ चुका था यह देखकर शीतल मन ही मन बहुत प्रसन्न हुई क्योंकि वह यही चाहती थी कि शुभम का लंड दुबारा तैयार हो जाए,,,, ताकि वह इस रात को अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन रात बना सके,,,, शुभम को देखकर शीतल दरवाजे पर खड़ी होकर मुस्कुराने लगी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट इसी बात से थे कि शुभम का लंड फिर से खड़ा हो चुका था जो कि कुछ ही देर में अब उसकी बुर के अंदर फिर से तशरीफ़ रखने वाला था,,,,

मुस्कुराती ही रहोगी या मेरे पास भी आओगी आओ मेरे पास आओ आज की रात में तुमसे एक पल भी दूर नहीं रहना चाहता,,,,,
( शुभम का यह कथन शीतल के लिए बेहद शर्मिंदगी भरा एहसास भर देने वाला था क्योंकि शुभम किसी अनुभवी उम्र दराज आदमी की तरह यह बात बोल रहा था जो कि उसकी उम्र के मुताबिक यह बात शीतल से कहे जाने पर बिल्कुल भी वाजिब नहीं लग रही थी क्योंकि शीतल एक तरह से उसकी मां की उम्र की ही थी और जिस तरह की बात सुप्रीम कर रहा था यह बात एक मर्द को एक लड़के को उसके हम उम्र साथी के साथ ही कहीं जाने पर वाजिब लगती है इसलिए शीतल एक बार फिर से शुभम के सामने एकदम शर्मसार हो गई लेकिन यह शुभम का आकर्षण ही था कि वह उसके कहे अनुसार धीरे-धीरे नंगी हालत में ही उसके पास जाने लगी जैसे ही वह शुभम के पास पहुंची शुभम एक हाथ सीधा उसकी बड़ी बड़ी गांड पर रखते हुए उसे जोर से दबा कर अपने बेहद करीब खींच लिया इतना करीब कि उसका खड़ा लंड उसकी टांगों के बीच रगड़ खाने लगा,,,,
लंड की जोरदार रगड़ ओर शुभम का हथेली पर कर उसकी नरम नरम गांड को किसी मांस की तरह खींचना शीतल को पूरी तरह से दर्द से भर दिया और उसके मुंह से लगभग कराने की आवाज निकल गई,,,।

ओहहहह ,, मां,,,,, दुखता है सुभम,,,,,
( शुभम उसके दर्द की परवाह न करते हुए सीधा उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगा पल भर में ही सीतल पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसे इस बात का भी ख्याल नहीं रहा के वह खिड़की पर खड़ी है और खिड़की पर खड़े होने के नाते उसे कोई भी देख सकता है,,, वह भी काफी उत्तेजित होकर शुभम का साथ देते हुए उसके होठों को चूसते हुए अपने जीव को उसके मुंह में डाल दी जिसे रसमलाई की तरह शुभम चाटने लगा और सुबह में खाट नीचे की तरफ ले जाकर उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपनी हथेली से रगड़ने लगा,,, साथ ही उसका खड़ा लंड बार-बार उसकी जांघों से टकरा जा रहा था जिससे शीतल रह रह कर जोश में आ जा रही थी शुभम अच्छी तरह से जानता था कि एक प्यासी औरत को किस तरह से काबू में किया जाता है और इस हुनर में पूरी तरह से पारंगत होने के बाद ही वह औरत को अपनी आंखों से मिलता है जो कि समय शीतल उसकी पूरी तरह आगोश में आ चुकी थी वह औरत पर एक साथ कई जगहों से हमला करते हुए अपनी हरकतों से इतना आनंद विभोर कर देता है कि औरत खुद उसका लंड पकड़ कर अपनी बुर की दरार पर रखकर
उसे चोदने के लिए कहने लगती है।
शुभम की हरकतों से शीतल पूरी तरह से मदहोश हो रही थी शुभम पूरी तरह से उसे खिड़की पर चोदने का मन बना लिया था उसे इस बात का भी परवाह नहीं था कि अगर कोई देख लेगा तो क्या होगा लेकिन उसे अपनी सोच पर पूरी तरह से विश्वास था कि आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था और ऐसे में सब अपने-अपने घरों में लाइट बंद करके चैन की नींद सो रहे थे अगर कोई औरत की चुदाई भी किया होगा तो अब तक सो ही गया होगा,,,
शुभम का लंड शीतल की बुर के बेहद करीब था और उस में घुसने के लिए फुंफकार रहा था,,,, शुभम अपनी हथेली को चिकन की पूर्व पर से हटा लिया था क्योंकि वह पूरी तरह से तैयार हो गया था शीतल को एक बार फिर से चुदाई की नाव में ले जाकर पार लगाने के लिए इसलिए मैं तुरंत अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके सुपाड़े को शीतल की बुर से सटा दिया,,,, गरमा गरम लंड के मोटे छुपाने का स्पर्श अपनी बुर की गुलाबी पत्ती पर होते ही शीतल के होश उड़ गए वह मदहोश होने लगी लेकिन साथ ही इस बात का एहसास हुआ कि वह खिड़की के करीब खड़ी थी जहां से कोई भी उसे देख सकता था इसलिए वह शुभम से बोली,,,

यहां पर नहीं सुभम बिस्तर पर चलो यहां कोई देख लेगा,,,

कोई नहीं देखेगा मेरी जान इतनी रात को कोई जागता नहीं है देख नहीं रही हो पूरी सोसाइटी में कितनी शांति छाई हुई है सबके घरों की लाइटें बंद है सब चैन की नींद सो रहे होंगे,,, ( शुभम अपने लंड को शीतल की बुर पर एडजस्ट करते हुए बोला,,,, जो कि ठीक से सहज नहीं हो पा रहा था इसलिए वह शीतल से बोला,,,।)
देखो रानी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो मुझ पर भरोसा रखो कोई भी नहीं देखेगा,,,, अब ऐसा करो अपनी टांग उठा कर इस खिड़की पर रखो ताकि मेरा लंड तुम्हारी बुर में आराम से जा सके,,,,
( शुभम की यह बात सुनकर शीतल कभी उसकी खड़े होने की तरफ देखती तो कभी खिड़की से बाहर की तरफ देख कर मन में आशंकित हो रही थी उस की आशंका को भांप कर शुभम फिर से बोला)
तुम बिल्कुल भी मत डरो शीतल मैं हूं ना मुझ पर भरोसा है कि नहीं बस जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करो तुम्हें जन्नत का मज़ा दूंगा बार-बार बिस्तर पर चुदाई करने में मजा नहीं आता जगह बदल लेने से चुदाई का मजा दोगुना हो जाता है और इसी मजा को लेना चाहती हो तो जैसा मैं कह रहा हूं वैसा ही करो,,
( शुभम की बातें सुनकर उसे शुभम पर भरोसा तो हो रहा था लेकिन मन में शंका भी हो रही थी कि कहीं नहीं कोई देखना है और इससे ज्यादा असर तो उसके ऊपर चुदाई का मजा लेने का था जिसके अधीन होकर वह ना चाहते हुए भी अपनी एक टांग उठा कर उसे खिड़की पर रख दी ऐसा करने से वह पूरी धनुष की तरह खींच गई अब शुभम अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर से सटाकर अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर उसकी बड़ी-बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली से थाम लिया,,,, एक बार शुभम का लंड अपनी बुर में ले लेने की वजह से शीतल की बुर में शुभम के लंड का पूरी तरह से सांचा बन चुका था जो कि धीरे-धीरे करके एक बार फिर से शुभम का लंड पूरी तरह से शीतल की बुर के मदन रस में डूब गया,,,, जैसे ही पूरा लंड शीतल की बुर में घुसा शीतल के मुंह से आह की आवाज आ गई भले ही शुभम ने जबरदस्त चुदाई किया हो लेकिन फिर भी शुभम का लंड ईतना मोटा था कि दोबारा किसी भी औरत की बुर में जाने पर उसके मुंह से दर्द भरी कराहने की आवाज निकल ही जाती थी,,,
शीतल एक बार फिर से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी,,, लेकिन बार-बार शुभम का तूफानी झटका भरा लहर वह सहन नहीं कर पा रही थी इसलिए बार-बार लड़खड़ा जा रही थी जिसे शुभम बार-बार अपनी मजबूत हथेलियों से थाम कर उसे संभाल लेता था,,, शुभम की कमर बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि सीतर बार-बार अपनी नजरें नीचे करके अपनी बुर के अंदर अंदर बाहर होते हुए सुभम के लंड को देख कर ली थी वाकई में शुभम का लंड बेहद मोटा था,,,ऊसए यकीन नहीं हो रहा था कि ईतना मोटा लंड उसकी बुर में कैसे घुस जा रहा है,,, लेकिन जो भी हो रहा था उसमें शीतल को परम आनंद की अनुभूति हो रही थी उसके बाल बंधे हुए थे जिसे शुभम अपना एक हाथ उसके बालों के जुड़े पर रखकर उसके बक्कल को खींचकर उसके रेशमी बालों को एकदम खुला छोड़ दिया खिड़की से आ रही शीतल हवा के झोंके में उसके रेशमी बाल लहराने लगे जिससे वह बेहद खूबसूरत लग रही थी वाकई में सीकर को इस बात का एहसास हुआ कि खुली खिड़की में इस तरह से आधी रात को चुदवाने में उसे बहुत ही मजा आ रहा था चुदाई का उसका मजा दुगुना आनंद दे रहा था,,, गरम सिसकारियों से एक बार फिर से पूरा कमरा गूंजने लगा,,, शुभम पागलों की तरह उसकी गर्दन गाल पर चुंबनो की बौछार कर दे रहा था,,, उसकी छातियों पर झूलते हुए दशहरी आम को देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था जिससे वह अपना मुंह आगे बढ़ा कर बारी-बारी से उसके दशहरी आम को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,, बार-बार शुभम उसके चॉकलेटी रंग की निप्पल को दांतों से काट लें रहा था जिससे वह पूरी तरह से सिहर उठती थी,,,,

औहहह सुभम में पागल हो जाऊंगी,,,,आहहहहहहह,,आहहहहह,,,,सससससस,,,,ऊफफफफ,,,,,, मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तू सुभम है,,,आहहहहहहह,,, तू तो मुझे साक्षात कामदेव लग रहा है।

और तू मुझे मेरी रति लग रही है जिसकी बोर मैंने अपना पूरा लंड डालकर उसे संभोग सुख का मजा दे रहा हूं,,,
( शुभम के लिए पहली बार था कि वह शीतल को इस तरह से बोल रहा था शीतल भी शुभम के मुंह से इस तरह की बात पहली बार सुन रही थी लेकिन ना जाने क्यों उसे इस तरह के हालात में इस तरह से बातें करना उसे अच्छा लग रहा था,,, शुभम अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला देख आज मैं कैसे तेरी बुर का भोसड़ा बनाता हूं इतने सालों से बहुत टाइट बुर लेकर इधर-उधर घूम रही थी ना अब देखना तेरी बुर में मेरे लंड का पूरा सांचा बन जाएगा,,



तो बनाना रोका किसने है तुझे मैं तो चाहती हूं कि तू अपना लंड मेरी बुर में डालकर मेरी बुर फाड़ दे,,,,

तो यह बात है तो देख अब मजा चुदाई का,,,,
( इतना कहने के साथ ही शुभम शीतल की बड़ी-बड़ी पावरोटी को अपने हाथों में जोर-जोर से दबाते हुए अपना लंड उसकी बुर में पेलने लगा एक ही धक्के में उसका पूरा का पूरा लंड शीतल की बुर में खो जा रहा था लेकिन शुभम का हर धक्का शीतल के लिए अतुल्य था अद्भुत था क्योंकि हर एक धक्के के साथ सुभम के लंड का सुपाड़ा उसकी बच्चेदानी से टकरा जा रहा था। खिड़की से लगातार ठंडी हवा बह रही थी जो कि पूरे कमरे को ठंडा कर रही थी लेकिन उस ठंडी हवा में इतनी भी सीतलता नहीं थी कि वह शीतल की मदमस्त गर्म जवानी को ठंडा कर सके उसके माथे से पसीने की बूंदें फिर से टपकने लगी एक बार फिर से दोनों पसीने से तरबतर हो गए,,,
शुभम लगातार उसकी बुर में लंड पेले जा रहा था कभी उसकी बड़ी-बड़ी पावरोटी को दबाता तो कभी उसके दोनों खरबूजा से खेलता कभी उसे मुंह में लेकर पीने लगता हर तरह से सुभम मजा ले भी रहा था और उसे मजा दे भी रहा था पूरे कमरे में शीतल की गरम सिसकारी की आवाज गूंज रही,,,, शीतल में अपनी बाहों का हार शुभम के गले में डाल दी एक तरह से वह शुभम के गले में अपनी बाहों का हाथ डालकर उस का सहारा ले रही थी क्योंकि शुभम का धक्का इतना दमदार था कि वह हर धक्के के साथ पीछे की तरफ लुढकने लगती थी,,,फच फच की मधुर संगीत लगातार शीतल की बुर से आ रही थी,,, बिना रुके शुभम अपनी कमर लगातार हिला रहा था वह आज की रात शीतल से हर तरह से मजा ले लेना चाहता था इसलिए कुछ सोचकर वह शीतल की बुर से अपना लंड बाहर निकाल लिया। वह एकदम मदहोश हो चुका था गहरी गहरी सांसे ले रहा था शीतल भी पूरी तरह से पागल हो गई थी उसका चेहरा सुर्ख लाल हो गया था बदन में मदहोशी पूरी तरह से बरकरार थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी वह इस तरह से लंड बाहर निकाले जाने की वजह से तड़प उठी थी उसके मुंह से कुछ बोला नहीं जा रहा था वो नीचे की तरफ देखी तो शुभम का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर उसके मदन रस में नहाया हुआ था जिसे देखते ही एक बार फिर से शीतल पूरी तरह से सिहर उठी,,, शुभम पोजीशन बदलना चाहता था लेकिन उसके मुंह से मदहोशी की वजह से कुछ निकल नहीं रहा था बस वह इशारे से शीतल को घूम जाने के लिए कहा,,, शीतल नादान नहीं थी पूरी तरह से परीपकव थी,,, भले ही वह भरपूर रूप से चुदाई कहानी में अपनी जिंदगी बना ली हो लेकिन शुभम के इशारे का मतलब अच्छी तरह से समझती थी उसे अब दुनिया की परवाह बिल्कुल भी नहीं थी वाह संभोग के सुख में पूरी तरह से खो जाना चाहती थी वह मदहोशी के आलम में सब कुछ भूल चुकी थी इसलिए शुभम जैसा बोला जैसा ही सारा किया वैसे ही वह खिड़की पर अपने दोनों हाथ रख कर जो कभी खिड़की से वहां अपना मुंह बाहर निकाल कर अपनी भारी-भरकम गोलाकार गांड को किसी तोप की भांति ऊपर की तरफ उठा दी जैसे दुश्मन को ललकार रही हो कि दम हो तो आ जाओ आगे,,,, शुभम भी पूरी तरह से खेला खाया था वह भी सामने वाले के हर बार का जवाब देना अच्छी तरह से जानता था शीतल की तोप के जवाब में शुभम अपनी लाजवाब बंदूक को मैदान में उतार दिया जो की पूरी तरह से दुश्मन का सीना छलनी करने के लिए तैयार था एक हाथ में अपने लंड को लेकर निशाना लगाकर अपनी बंदूक का ट्रिगर दबा दिया और इस बार पहले की तरह फिर से गोली निशाने पर लगी और सब कुछ चीरती हुई अपने लक्ष्य को भेंद दी,,,, दुश्मन पूरी तरह से परास्त हो गया उसके मुंह से दर्द भरी कराहने की आवाज निकल गई,,,, यह वह आवाज थी जिसे सुनकर निशाना भेदने वाले का जोश और ज्यादा बढ़ जाता है और वह पूरी ताकत से फिर से दुश्मन पर टूट पड़ता है और यही शीतल के साथ भी हुआ शुभम उसकी कमर को थामकर लगातार अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था सुभम को मोटा तगड़ा लंड किसी मशीन की तरह उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था ऐसा लग रहा था कि आज वह शीतल कि बुर का कचूमर बना देगा,,,, शुभम के इस तरह से लगातार धक्के पर धक्के मारते हुए चुदाई करने की वजह से शीतल का जोर जोर से चिल्लाने का मन कर रहा था और वह अपना मुंह खिड़की से बाहर निकालकर ठंडी हवा का आनंद लेते हुए शुभम से चुदवा रही थी,,,,


एक बार फिर से शीतल अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गई वह जोर से खिड़की को पकड़कर शुभम के हर धक्के को झेल रही थी शुभम भी झड़ने वाला था अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर शीतल के दोनों दशहरी आम को थाम लिया और जोर जोर से धक्के पर धक्के लगाने लगा दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और दोनों का नसीब भी बहुत तेज था कि खिड़की पर इस तरह से एकदम नंगे होकर जुदाई का आनंद लेते हुए किसी की भी नजर उन तक नहीं पहुंच पा रही थी क्योंकि इस समय सब लोग अपने अपने घर में सो रहे थे देखते ही देखते दोनों फिर से झड़ने लगी शुभम झड़ते झडते दो-चार धक्के और जड़ दिया,,,,

दोनों एकदम नंगे ही एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले बिस्तर पर पड़े हुए थे इस बार शुभम का लंड कुछ ढीला हो चुका था लेकिन फिर भी शीतल कुछ इस तरह से अपनी मोटी मोटी टांगों को उसके ऊपर फेंक कर दूसरी तरफ की ही थी कि उसकी बड़ी बड़ी गांड की दरार में शुभम का लंड हरकत कर रहा था,,,

आज तो मजा आ गया शुभम मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि यह सब हकीकत है मुझे तो सब कुछ सपना जैसा ही लग रहा है,,,

मुझे भी शीतल मुझे भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैं तुम्हारी चुदाई कर रहा हूं,,,, लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है कि मम्मी ने खुद मुझे तुम्हारे वहां अकेले क्यों भेज दिया और वह भी रात को,,,
( शुभम के इस सवाल के जवाब में शीतल मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

कर भी क्या सकती थी तुम्हारी मम्मी तुम्हारी मम्मी के पास तुम्हें मेरे पास भेजने के अलावा कोई चारा नहीं था,,,

मैं कुछ समझा नहीं।( शुभम अपने दोनों हाथों में पकड़ कर शीतल को अपनी बाहों में लिए हुआ था और वह उसकी दोनों चूचियों को दबाता हुआ बोला)

और तुम समझोगे भी नहीं यह बात मैं भी और तुम भी अच्छी तरह से जानते हो कि तुम्हारी मम्मी कभी भी तुम्हें मेरे पास नहीं भेजती जब से वह क्लास के अंदर हम दोनों को रंगे हाथ पकड़ी थी,,,,।

यही तो मैं कह रहा हूं शीतल कि आज यह कैसे हो गया,,

यही ना कि बिल्ली को खुद दूध की रखवाली करने के लिए क्यों भेजा गया है,,,,


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देखो शीतल अब मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है मुझसे पहेलियां मत बुझाओ साफ-साफ बताओ क्या हुआ है,,,

सुनना चाहते हो क्या हुआ है क्यों तुम्हारी मम्मी तुम्हें मेरे पास भेज दी,,,

हां बिल्कुल मैं जानना चाहता हूं,,,

तो सुनो ,,,,(शीतल अपने होठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए) मैं तुम्हें तुम्हारी मम्मी को चोदते हुए देख ली हूं,,,,
( इतना सुनते ही शुभम एकदम से सन में हो गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके कान क्या सुन रहे हैं,,,)
मैं जानती हूं तुम्हें मेरे कहने पर विश्वास नहीं होगा लेकिन रुको,,,( इतना कहते हुए वह बिना बिस्तर से उतरे अपना हाथ आगे बढ़ाकर टेबल पर से अपना मोबाइल उठा लिया और उसे चालू करके उसमें से एक वीडियो चालू करके शुभम को थमा दी,,, स्क्रीन पर जो दृश्य चल रहा था उसे देखते ही शुभम के होश उड़ गए उसका दिमाग काम करना बंद हो गया क्योंकि मोबाइल के स्क्रीन पर उसकी मां उसके लंड पर उछल उछल कर चुदवा रही थी,,,, लेकिन शुभम बहुत चालाक था वह ऐसी कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था जिससे शीतल पूरी तरह से उसके ऊपर हावी हो जाए,,,, शुभम अच्छी तरह से जानता था कि अगर यह वीडियो शीतल के मोबाइल में रहा तो आज नहीं तो कल उसका भांडा फोड़ सकता है या शीतल इस वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर सकती है उसकी बदनामी हो सकती है उसका परिवार बदनाम हो सकता है इसलिए पूरी तरह से सहज बना रहा और पूरा वीडियो देखने के बाद वह तुरंत उसे डिलीट कर दिया और से डिलीट होता देखकर शीतल को लगा जैसे उसके पैरों से जमीन निकल गए हो वो झट से उसके हाथ से मोबाइल छीन ते हुए बोली,,,)
यह क्या किया शुभम तुमने इसे डिलीट क्यों कर दिया,,,

अब इस वीडियो का कोई काम नहीं है शीतल मेरी जान मेरी छम्मक छल्लो अब तो मैं तुम्हारा हमेशा के लिए हो गया हूं,,,,( शीतल नहीं जानती थी कि वह बड़े चला कि से उसके मोबाइल में से उसकी और उसकी मां का चुदाई वाला वीडियो डिलीट कर दिया है वह शुभम की बात सुनकर खुश हो गई लेकिन शुभम का दिमाग खराब हो रहा था क्योंकि वह नहीं चाहता था कि कोई भी औरत उसकी मां और उसके बारे में कुछ भी जाने उन दोनों के बीच किस तरह का संबंध है इस बारे में दुनिया को पता चले इसलिए शुभम किसी और तरीके से शीतल को सबक सिखाना चाहता था वह शीतल को जरा भी एहसास नहीं होने देना चाहता था कि इस वीडियो को देख कर उसे गुस्सा आ रहा था वह एकदम सहज बना रहा और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) सच कहूं शीतल तो तुम्हें चोदने में मुझे जितना मजा आ रहा है उतना मजा मुझे अपनी मां को चोदने में कभी नहीं आया क्योंकि तुम जानती हो मेरी मां सीधी सादी है उसे चुदाई का मजा किस तरह से लेना है यह बिल्कुल भी नहीं पता,,,,

हां तभी तुम्हारी मां तुम्हारे लंड पर जोर जोर से उछल रही थी,,,

वह तो उस दिन मजबूरी थी मेरी कमर बहुत तेज दुख रही थी इसलिए वह खुद मेरे लंड पर चढ गई,,,

लेकिन तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आई अपनी मां को चोदने में,,,

देखो शीतल मेरी जान मेरे साथ साथ मेरी मां की भी जरूरत है जैसे शायद मेरे पापा पूरा नहीं कर पाते थे और बाहर कहीं जाने से अच्छा था कि उन्हें घर में ही मेरे जैसा जवान लड़का मिल गया उन्हें भरपूर चुदाई का सुख देने वाला मिल गया अगर सोचो बाहर किसी से चुदवाती तो बदनाम होने का पूरा का पूरा डर था जैसे तुम ही देख लो यह तो मुझे नहीं पता कि तुम बाहर किसी से चुदवाती हो या नहीं लेकिन तुम अगर मुझसे छुपा रही हो तो तुम एकदम से को सुरक्षित हो यह बात किसी को कानों कान तक नहीं खबर पड़ेगी लेकिन अगर बाहर कोई तो मेरी चुदाई करता है तो आज नहीं तो कल किसी न किसी को बक देगा बता देगा कि तुम कैसी हो,,,,

हां शुभम यह बात तो तुम बिल्कुल सच कह रहे इसीलिए तो मैंने आज तक बाहर किसी भी मर्द को इतनी छूट नहीं दी कि वह तुम्हारी तरह मेरे साथ मजे ले सके मेरी जिंदगी में तुम मेरे पति के बाद दूसरे मर्द हो जाओ मेरी चुदाई कर रहे हो वरना आज तक मैंने किसी के लिए भी अपनी दोनों टांगों को नहीं खोली हूं,,,,( इतना कहने के साथ ही सीतल एक बार फिर से अपनी दोनों टांगों को खोल दी,,, शुभम एक बार फिर से गर्म होने लगा था लेकिन वह जबरदस्त चुदाई कर के सितम को सबक सिखाना चाहता था पर इस बार उसका लंड उसकी गांड के छेद में दस्तक दे रहा था इसलिए शुभम के मन में आज शीतल की गांड मारने का इरादा हो गया,,,,)

वैसे ही खोली रहो मेरी रानी आज मेरा लंड तुम्हारे दूसरे बिल में घुसने की कोशिश कर रहा है,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम अपने लंड कै सुपाड़े को शीतल की गांड के छेद पर रगड़ने लगा,,,, शीतल को इस बात का एहसास हो गया कि शुभम क्या चाह रहा है वह मन ही मन में घबरा गई और बोली।)

नहीं-नहीं शुभम ऐसा मत करो मैंने आज तक जिंदगी में गांड मरवाई हूं और वैसे भी तुम्हारा लंड ईतना मोटा है कि मेरी गांड के छोटे से छेद में घुसेगा ही नहीं,,,( यह कहते हुए शीतल के चेहरे पर डर के भाव साफ झलक रहे थे एक औरत के नाते शीतल अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम का लंड काफी मोटा है उसकी गांड का छेद बहुत ही छोटा है जिसमें किसी भी कीमत में शुभम का लंड नहीं घुसता,,,,)

अरे नहीं मरवाई हो तो आज मरवा लो वैसे भी जिंदगी में हर इंसान हर एक काम पहली बार ही करता है,,,,
( इतना कहते हुए शुभम बिस्तर पर अपने लिए जगह बनाने लगा वह देखते ही देखते शीतल की दोनों टांगों को पकड़कर उसे हल्के से ऊपर की तरफ उठाते हुए इसकी भारी भरकम गांड को थोड़ा ऊंचा कर दिया,, और झट से उसके नीचे तकिया लगा दिया जिससे उसकी गांड का छेद थोड़ा ऊंचा हो गया,,, शीतल का पूरा बदन एक बार फिर से उत्तेजना से कसमस आने लगा हुआ शुभम की हर हरकत पर नजर रखे हुए थी उसे डर तो लग रहा था शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड के छेद में लेने के ही नाम से लेकिन ना जाने क्यों उसके मन के कोने में कहीं ना कहीं इच्छा हो रही थी कि आज शुभम के लंड को गांड के छेद में ले ही लेना चाहिए,,,, आज तक उसने औरतें गांड मरवाती है यह बात अपने कानों से सुन रखी थी लेकिन शुभम की बात को सुनकर उसका इरादा देख कर उसे लगने लगा था कि आज सुभम मैं उसकी गांड मार कर रहेगा,,,
उसका दिल जोरों से धड़क रहा था वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही शुभम अपने लिए जगह बनाते हुए अपने हो तो उसकी गांड के भूरे रंग के छेद पर रख दिया और उसे अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया,,,,,

आहहहहहहह,,,,,,,,( इस मादकता भरी आवाज के साथ ही शीतल मस्ती में आकर अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठाने लगी जिंदगी में पहली बार कोई जवान मर्द मिला था जो उसकी गांड के छेद को चाट रहा था शुभम पागलों की तरह अपनी जीभ उसकी गांड के छेद पर घुमा रहा था शीतल पागल हुए जा रही थी उसे अब जा कर यह एहसास हुआ की गांड चटवाने में कितना मजा आता है,,,, देखते ही देखते शीतल पागल होने लगी वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के बालों को अपने हाथों से भींचते हुए उसे जोर जोर से अपनी गांड पर दबाने लगी,,,, शीतल के लिए यह पल बेहद अद्भुत था अतुल्य सुख से भरा हुआ उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि कोई उसकी गांड चटेगा क्योंकि सोच कर ही कितना बुरा लगता है यह उन लोगों के लिए मन की धारणा है जिसने आज तक किसी मर्द से अपनी गांड नहीं चटवाई,,,, लेकिन शुभम की कामुकता भरी हरकत की वजह से आज शीतल की भी धारणा पूरी तरह से बदल गई थी उसे बिगाड़ कटवाने में बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी देखते ही देखते वह पूरी तरह से पागल हो गई,,,,
मौका देखकर शुभम अपनी एक उंगली को शीतल कि गाड़ के छोटे से छेद में उतार दिया,,, और से अंदर-बाहर करने लगा देखते ही देखते शीतल की ललक बढ़ने लगी उसे मजा आने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था की गांड में भी उतना मजा आता है देखते ही देते जब शीतल की गरम शिसकारियों की आवाज आने लगी तो शुभम अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गांड में पेल दिया,,,, शीतल को मजा आने लगा था वो मदहोश में जा रही थी वह खुद ही अपनी दोनों टांग को उठाए हुए शुभम की हरकत का मज़ा ले रही थी
थोड़ी देर में शुभम समझ गया कि अब यह लंड लेने के लिए तैयार हो गई है इसलिए वो बिस्तर पर से नीचे उतर गया और शीतल से बोला,,,,

शीतल यहां कमरे में तेल रखी हो क्या,,,?
 
यहां कमरे में तेल रखा है क्या शीतल,,,?

हा उस अलमारी में सरसों के तेल की शीशी रखी हुई है,,, लेकिन तेल का क्या करोगे,,,,?( शीतल आश्चर्य के साथ बोली,,,)

मेरी जान दिल के ही सहारे तो हमें तुम्हारी गांड में प्रवेश कर पाऊंगा और देखना इसी तेल के बदौलत तुम्हें जन्नत का मजा मिलता है,,,( ऐसा कहते हुए शुभम जोर-जोर से अपने लंड को आगे की तरफ खींच रहा था जिससे जैसे ही वह अपनी चारों उंगली में लंड के सुपाड़े को दबाकर उसे खींचता था और छोड़ता था तो उसका लंड स्प्रिंग की तरह ऊपर नीचे हो जाता था यह देखकर शीतल के तन बदन में हलचल मच जा रही थी,, शुभम उसी तरह से पूरा नंगा ही अलमारी की तरफ आगे बढ़ने लगा शीतल की नजर शुभम के गोलाकार नितंबों पर थी जो कि बेहद सुहावनी लग रही थी अपने पति के बाद शुभम उसकी जिंदगी में दूसरा मर्द था जिसे वह पूरी तरह से नंगा देख रही थी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर अपना पूरा जोर लगा रहे थे वह भी अपनी दोनों टांगों को ऊपर उठाए हुए थी जब उसे इस बात का अहसास हुआ तो वह एकदम शर्मिंदा हो गई और तुरंत अपने दोनों पैरों को फिर से फैला ली,,,, शुभम के व्यक्तित्व और उसके मर्दाना ताकत में पूरी तरह से अजीब सा आकर्षण था जिसके बस होकर औरत कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाती थी वही हाल शीतल का भी हो रहा था वह कभी सपने में भी गांड मारने के बारे में नहीं सोची थी,,, लेकिन यह शुभम की बदौलत ही आज वह अपनी दोनों टांगे फैला है अपनी गांड ऊपर उठाकर शुभम से गांड मरवाने के लिए तैयार हो गई थी,,, शीतल भी काफी उत्सुक थी अगले पल के लिए वह भी इस नए अनुभव के लिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी वैसे भी पहले से ही शुभम ने शीतल की मदमस्त अद्भुत भूगोल धारक गांड को चाट चाट कर मदमस्त कर दिया था जिससे शीतल का संपूर्ण तन बदन शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी गांड में महसूस कर के बदन में होने वाले हलचल के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया था लेकिन मन अभी भी विपरीत दिशा में भाग रहा था और वह भी शुभम के लंड की मोटाई को देखकर और अपनी गांड के छोटे से छेद को देखकर क्योंकि दोनों के आकार में विरोधाभास था,,, एक नींबू था तो दूसरा दमदार बैगन लेकिन फिर भी शुभम का लंड शीतल की बुर से तू डाल डाल मैं पात पात खेलने के मूड में था,,,,
देखते ही देखते शुभम अलमारी में से सरसों के तेल की शीशी को निकाल लिया और तुरंत बिस्तर पर पहुंच गया,,,
और शीतल को अपनी भारी भरकम गांड ऊपर की तरफ उठाने को बोला था कि वह सरसों के तेल को उसकी गांड के छोटे से छेद पर अच्छी तरह से लगा सके,,, शुभम सरसों के तेल की शीशी का ढक्कन खोल कर ढेर सारा तेल अपनी हथेली पर गिरा दिया और उसे धीरे-धीरे करके शीतल की मदमस्त गांड के छोटे से छेद पर मलने लगा,,, जैसे-जैसे शुभम शीतल के काम के छोटे से छेद को स्पर्श करता हुआ उस पर तेल लगा रहा था वैसे वैसे उत्तेजना के मारे सीता का बदन करना चाह रहा था वो काफी उत्तेजित नजर आ रही थी और उससे भी ज्यादा उत्तेजित उसकी गांड का छोटा सा छेद था जो कि उत्तेजना के मारे फूलता हुआ और पिचकता हुआ साफ नजर आ रहा था,,,, यह देखकर शुभम का लंड अपनी औकात में आ गया वो जल्द से जल्द शीतल की गांड के अंदरूनी दीवारों से रगड़ खाता हुआ अंदर तक जाना चाहता था,,,, शुभम शीतल की गांड को पूरी तरह से तेल से चुपड दिया था,,, और बाकी बचा तेल अपने लंड पर लगाना शुरू कर दिया वह अच्छी तरह से अपने लंड की मालिश कर रहा था और शीतल की तरफ मुस्कुराता हुआ देख रहा था शीतल को शुभम की मुस्कुराहट बेहद कामुक लग रही थी जिससे वह शरमा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ फैर ली ,,, कभी-कभी वह बेहद उन मादक परिस्थिति में अपने संपूर्ण वजूद को भूल कर शुभम के प्यार रस में पूरी तरह से डूब जाती थी,,, और रह रह कर उसे यह ख्याल आ जाता था कि शुभम उसके बेटे की उम्र कम है और वह बेशर्म की तरह उसके सामने अपनी गांड खोलकर टांगे फैलाए लेटी हुई है,,,, कभी-कभी मन कर रहा था कि जल्दी से अपने कपड़े पहन कर कमरे से बाहर निकल जाए लेकिन जब जब शुभम के मोटे तगड़े लंड की तरफ नजर जाती थी तो उसकी मान मर्यादा शरमाया रिश्ते नाते सब कुछ बुर से निकले हुए पानी की तरह बहता हुआ नजर आने लगता,,, वह सब कुछ भूल जाती हो और अपने वजूद को शुभम की बाहों में पिघलता हुआ महसूस करने लगती है,,,

आने वाले कल के इंतजार में शीतल का तन बदन मीठे दर्द की लहर में टूटता हुआ महसूस हो रहा था वह व्याकुल थी शुभम के लंड को अपनी गांड के छेद में लेने के लिए वह उससे अनमोल अद्भुत अतुल्य सुख को भोगना चाहती थी उसे महसूस करना चाहती थी गांड मरा ने का अपनी सबसे पहले मौके को पूरी तरह से मस्ती में मजे लेना चाहती थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता जा रहा था,,,,,, शुभम अभी भी सरसों के तेल की मालिश अपने लंड पर कर रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह तेल लगाकर अपने लंड को और मजबूती प्रदान कर रहा हो,,, शीतल शुभम के लंड की ताकत को देखकर पूरी तरह से उसकी कायल हो चुकी थी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि एक बार जुदाई के बाद ही दूसरी बार किसी भी मर्द का लंड खड़ा होने में समय लगता है लेकिन यहां तो सुबह उसकी चुदाई दो बार और वह भी जबरदस्त तरीके से कर चुका था और तीसरी बार फिर से उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था,,, यह अपने आप में ही बहुत बड़ी बात थी लेकिन शीतल इस बात से बेहद खुश थी कि शुभम जैसी मर्दाना ताकत से भरे हुए लड़के से वह चुदवा कर अपने आप को तृप्त कर रही है,,, वह गहरी गहरी सांसे लेते हुए शुभम को ही देख रही थी जो कि शुभम अपने लंड की मालिश करने में पूरी तरह से मशगूल हो चुका था,,,
शीतल की भूरे रंग की गांड का हुआ छोटा सा छेद हो शुभम का लंड जवानी की जोश में इतनी गरम हो चुकी थी कि सरसों का तेल की गर्माहट में कब धुआं बनकर उड़ गया पता ही नहीं चला इतना सारा तेल सब वाष्प की तरह हवा में उड़ गया था,,,

शुभम अब तैयार था बिस्तर के मैदान में उतरने के लिए जो कि पहले से ही घमासान जुदाई से बिस्तर पर बिछी चादर पर सिलवटें पड़ चुकी थी दोनों के मदन रस का धब्बा बिस्तर पर बिछे चादर पर अच्छी तरह से नजर आ रहा था,,,, यह धब्बा तो बाजार में बिकने वाले किसी भी सस्ते या महंगे पाउडर से धूल जाने वाले थे लेकिन आज की रात जो दाग शीतल के खूबसूरत तन बदन में लगाया था वह शीतल के जेहन से कभी नहीं मिटने वाले थे बल्कि शीतल आज की रात के हर एक पल को अपने मन में अमिट छाप की तरह संजोकर रखने वाली थी,,,, शुभम अपने लैंड को हिलाते हुए जोर से एक चपत शीतल की गांड पर लगाया।

आहहहह,,,,, क्या कर रहा है,,,,?

तेरी गांड में कितना दम है यह देख रहा हूं मेरी छम्मक छल्लो,,,

मेरी गांड में तो बहुत दम है पता नहीं तेरे लंड में दम है कि नहीं,,,

साली दो बार मेरे लंड का मजा ले चुकी है और कहती है कि लंड में दम है कि नहीं,,,,

यही तो देखना चाहती हुं हरामजादे अभी तक तो तू अपना दम तोड़ के दिखा रहा था पता नहीं गांड में कैसा दिखाएगा,,,?

भोसड़ी की इस लड़की की ताकत का एहसास तुझे अभी तक नहीं हुआ जो तेरी बुर को चोद कर पूरा भोसड़ा बना दिया है अब 9 महीने बाद जब बच्चा पैदा होगा तब तुझे पता चलेगा मेरी ताकत मेरे लंड की ताकत,,,

साले मादरचोद तुझे क्या लगता है कि तेरी इस चुदाई से मैं मां बन जाऊंगी,,,, तुझे बहुत घमंड है अपने लंड पर ना,,, मैं अब देखना चाहती हूं तेरा लंड मेरी गांड में क्या करामत दिखाता है जो तू कहता है ना की गांड मरवाने में कितना मजा आता है मैं भी देखना चाहती हूं कि तू सच कहता है या झूठ कहता है कहीं ऐसा ना हो कि अाधे तक जाकर ही तेरा पानी निकल जाए अगर ऐसा हुआ ना मादरचोद देख लात मारकर तुझे बिस्तर से नीचे गिरा दूंगी फिर तू कभी मेरे पास मत आना लंड हिलाता हुआ,,,

मेरी बुरचोदी,,,, मेरी छिनाल भोसड़ी की देख अब मैं दिखाता हूं तुझे,,,,, हरामजादी मुझ को चैलेंज करती है,,,,
( ऐसा कहते हैं शुभम शीतल के टांगों के बीच में जाकर अपने लिए जगह बना दिया उसकी बड़ी बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और अपने खड़े लंड को भी हाथ से पकड़ कर उसे हिलाता हुआ जोर-जोर से उसकी गांड के छोटे से छेद पर लंड की सुपाड़े से मारने लगा,,,,, शीतल को बहुत मजा आ रहा था लेकिन वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं रही थी क्योंकि जो जो उसने उसने शुभम को बहुत कुछ बोल गई थी और वह यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम उसकी कही हुई एक भी बात में गलत साबित नहीं होगा वह अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम उसको ऐसा सुख देगा जैसा कि वो कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी लेकिन जोश में आकर उसने जिंदगी में पहली बार इस तरह के शब्दों का प्रयोग करके एकदम गंदी गंदी गाली देते हुए शुभम से बात की थी ना जाने क्यों इस तरह की बातें करने में शीतल को और ज्यादा उत्तेजना का अनुभव हो रहा था और शुभम के द्वारा गाली-गलौज खुद पर सुनने के बावजूद उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी शायद इसीलिए चुदाई करते समय मर्द और औरत गंदी भाषा का प्रयोग करके एक दूसरे को गाली गलौज देते हैं तभी तो उनका आनंद और ज्यादा बढ़ जाता है शुभम के लिए शीतल ने चैलेंज वाली बात कह दी थी जो कि शुभम को गवारा नहीं था शुभम पूरी तरह से मदहोश हो चुका था अब तक उसने अपनी मां के साथ साथ रुचि और उसकी सास की गांड मार चुका था अब शीतल की बारी है और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि शीतल की गदराई हुई गांड मारने में उसे जन्नत का मज़ा मिलेगा,,,
इसलिए शुभम अपने लंड के मोटे सुपारी को शीतल की गांड के छोटे से छेद पर कुछ देर तक रगड़ता रहा और शुभम की इस हरकत की वजह से शीतल की हालत खराब होने लगी बार-बार उत्तेजना की मारे उसकी गांड का छोटा सा छेद फूल पिचक रहा था,,,,, वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,,, गहरी सांसे लेता हुआ शुभम धीरे-धीरे अपने लंड के सुपाड़े को सरसों के तेल की चिकनाहट का सहारा बनाकर उसकी गांड के छोटे से छेद में उतारना शुरू कर दिया वह अपनी कमर पर ज्यादा दबाव दे रहा था ताकि उसके लंड का सुपाड़ा एक झटके में उसकी गांड के छेद में घुस जाए लेकिन शीतल की गांड का छेद कुछ ज्यादा ही छोटा और संकरा था जिसमें सुभम को अपना लंड डालने में काफी मशक्कत उठाना पड़ रहा था,,,,
शीतल को दर्द होना शुरु हो गया था,,, वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम जिस कार्य को अंजाम देना चाहता था काम बहुत ही कभी नहीं लेकिन असंभव बिल्कुल भी नहीं इसलिए शीतल शुभम का बराबर साथ देते हुए उसी तरह से लेटी रही शुभम धीरे-धीरे करके अपने लड़के सुपारी को उसकी गांड के छोटे से छेद में उतारने की पूरी कोशिश कर रहा था और उसकी कोशिश सफल होती नजर आ रही थी तेल की चिकनाहट और शुभम के थुक और लार की वजह से सुभम के लंड का आधा सुपाड़ा शीतल की गांड के छेद में प्रवेश कर गया,,, शीतल अपने दर्द को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी वह अपने दांतो से अपने होठों को दबाए हुए थी,,,
शुभम भी काफी परेशान नजर आ रहा था उसके माथे से पसीना टपकने लगा था उसे शीतल की गांड में अपना मोटा लंड डालने में काफी मशक्कत उठानी पड़ रही थी इतनी कठिनाई तो उसे अपनी मां की गांड मारने में नहीं हुई थी जितना शीतल की हो रही थी,,, लेकिन शुभम था पक्का मादरचोद इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था हां उसकी जगह कोई और लड़का होता तो इतने से ही पानी फेंक दिया होता लेकिन शीतल की मदमस्त भरी हुई गदराई जवानी से खेलने के बावजूद भी शुभम बराबर का टिका हुआ था,,,, उसके हमउम्र उम्र छोकरो को ही ले लो मात्र निर्मला को बाथरूम में पेशाब करता हुआ देखकर उसकी बड़ी बड़ी गांड के दर्शन करके ही जितने भी लड़के निर्मला कीमत मस्त जवानी के दर्शन कर रहे होते हैं सब के सब दो-तीन मिनट में भी झड़ जाते हैं और शुभम था कि घंटों से बरकरार था वह तब तक नहीं सकता जब तक औरत को परम सुख की अनुभूति ना करा दे,,,,, इसलिए तो शुभम कोशिश में लगा हुआ था क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती और ऐसा ही को शुभम के साथ हो रहा था क्योंकि देखते ही देखते शुभम का पूरा सुपाड़ा शीतल के भूरे रंग के छेद में में घुस गया,,,,,
लेकिन अब शीतल के लिए परीक्षा की घड़ी थी,,, अब यह देखना था कि शीतल दर्द झेल लेती है या नहीं क्योंकि अब शीतल को बहुत दर्द होने वाला था आखिरकार बुर नहीं गांड मारने का इरादा जो बना ली थी,,, वैसे भी दर्द के आगे मजा ही मजा होता है कुछ देर पहले इसका उदाहरण उसे खुद पता चल गया था फिर भी दूर से ज्यादा गांड की चुदाई कुछ ज्यादा ही दर्द देती है इस बात का एहसास उसे शुभम का मोटा सुपड़ा घुसते ही हो गया था वह दांतो से अपने होठों को दबा कर अपने दर्द को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी,,,,

शुभम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि एक झटके में पूरा लंड डालने में शीतल को काफी दिक्कत हो सकती है वह शीतल को मजा तो चखाना चाहता था लेकिन इस तरह से नहीं कि शीतल को किसी भी प्रकार की चोट पहुंच जाए,,, इसलिए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था,,,
वह अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर शीतल के गोल गोल खरबूजे को पकड़कर उसे दबाते हुए शीतल से बोला,,,।

अब कैसा लग रहा है मेरी छम्मक छल्लो,,,,

बहुत दर्द हो रहा है शुभम सच कहूं तो मुझे नहीं मालूम था कि इतना दर्द होता है,,,,

पर अभी अभी तो मैंने तुमसे कहा था कि दर्द के आगे मजा ही मजा है,,, देखना जब मेरा पूरा लंड तुम्हारी गांड की गहराई नापेगा तुम कितनी मस्त हो जाओगी,,, मुझ पर विश्वास तो है ना तुमको,,,,,

आहहहहहहह,,,, विश्वास तो है लेकिन डर बहुत लग रहा है,,,,

डरो मत मेरी जान मैं हूं ना मैं सब संभाल लूंगा फिर देखना है गांड मारने में कितना मजा आता है तुम खुद मेरे लंड पर अपनी गांड जोर जोर से पटकोगी,,,,

काश जैसा तुम कह रहे हो वैसा ही हो,,,

तुम चिंता मत करो मेरी रानी सब कुछ वैसा ही होगा जैसा मैं कह रहा हूं,,,,,( इतना कहने के साथ ही शुभम और जोर-जोर से शीतल की चूचियों को दबाता हुआ अपनी कमर का दबाव शीतल की गांड पर बढ़ाने लगा और देखते ही देखते गांड के अंदर के सारे अवरोधों को दूर करता हुआ शुभम का लंड आगे बढ़ रहा था और यह देखकर शीतल के चेहरे पर प्रसन्नता के साथ-साथ दर्द का भाव भी साफ नजर आ रहा था क्योंकि जैसे दूसरे लंड उसकी गांड के अंदर घुसता चला जा रहा था वैसे वैसे दर्द की सीमा बढ़ती जा रही थी। अब शुभम का आधा लंड शीतल की गांड में घुस चुका था,,, शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि शीतल की गांड मारने मुझसे कुछ ज्यादा ही मुसीबत का सामना करना पड़ रहा था लेकिन फिर भी उसे विश्वास था कि वह अपने उसकी गांड में धंशा कर ही रहेगा,,, शुभम काफी मजा हुआ खिलाड़ी था उसे औरत के साथ कब कैसा बर्ताव करना है यह अच्छी तरह से मालूम था वह धीरे से शीतल के ऊपर पूरी तरह से झुक गया और उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में लेकर चूसते हुए अपने आधे लंड को भी बाहर निकाल कर उसे वापस हल्के से अंदर डाला थोड़ी देर तक वह शीतल की गांड को अपने आधे लंड से ही मार रहा था,,, देखते ही देखते दर्द भरी कराह मस्ती भरी सिसकारी में बदल गई,,,, शीतल को मजा आने लगा,,, अभी भी शुभम शीतल के लाल लाल होंठों को चूस रहा था और अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रहा था शुभम को इस बात का एहसास हो गया कि शीतल को मजा आ रहा है अब लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था अब हथोड़ा मारने की देरी थी,,,, शुभम बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था क्योंकि शीतल पूरी तरह से गरमा चुकी थी,,, शुभम अपने दोनों हाथों से शीतल की टांग को चौड़ा करते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से पसर गया और अपने लंड को लगभग बाहर निकालते हुए एकदम कच कचा के धक्का लगाया कि उसका लंड एक बारगी सब कुछ चीरता हुआ उसकी गांड में समा गया,,,, एक बार फिर से शुभम ने फतह हासिल कर लेगी लेकिन इस जीत की कीमत शीतल अपने दर्द से चुका रही थी,,,,, वह दर्द से बिलबिला उठी थी मुझे अपनी गांड में उठा रहे दर्द कि कोई थाह नहीं मिल रही थी,,, वो पागलों की तरह अपना सर इधर उधर भटक रही थी और शुभम उसके ऊपर चढ़कर अपना पूरा लंड उसकी गांड में घुसाए हुए उसी तरह से उसके ऊपर लेटा का लेटा रह गया था,,,
शुभम अच्छी तरह से जानता था कि शीतल के दर्द को कैसे शांत करना है,,, वह फिर से शीतल की दोनों चूचियों को अपने हाथों से थाम लिया उसे दबाते हुए उसके होठों का रसपान करने लगा,,,,, शीतल अभी भी दर्द से छटपटा रही थी बार-बार उसे अपने लंड को निकाल लेने का इशारा कर रही थी लेकिन शुभम जानता था कि एक बार लंड गांड से बाहर आ गया तो सब कुछ खत्म,,,, शीतल दोबारा ऊसे अपनी गांड मारने नहीं देगी,,,, इसलिए शुभम चालाकी दिखाते हुए आहीस्ता आहिस्ता उसे एक बार फिर से उत्तेजित करने में जुट गया,,,, और शुभम कि यह युक्ति काम कर गई धीरे-धीरे शीतल पूरी तरह से शांत होने लगी और कब उसका साथ देते हुए उसके होंठों को चूसने लगी यह शुभम को भी पता नहीं चला,,, अब सुबह मौका देखकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया शीतल खुद ही अपनी दोनों टांगों को ऊपर उठाए हुए थी जिससे शुभम को उसकी गांड मारने में आसानी हो रही थी,,,, देखते ही देखते शीतल को मजा आने लगा शीतल के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आने लगी शुभम पागलों की तरह उसकी दोनों चूचियों को दबाता हुआ अपनी कमर हिला रहा था शुभम को भी है सब सपना जैसा ही लग रहा था काफी महीना गुजर गया था शीतल से अपने मन की भड़ास निकालने में और जब यह मौका हाथ लगा तो शीतल के साथ-साथ शुभम इस मौके का भरपूर फायदा उठा रहा था,,, उसे नहीं मालूम था कितनी जल्दी उसे शीतल की गांड मारने का भी मौका मिल जाएगा और अपने सपने को हकीकत बनाते हुए एवं अपनी कमर हिलाता हुआ शीतल की गांड मार रहा था,,,
देखते ही देखते पूरे कमरे में शीतल की गर्म सिसकारी की आवाज गूंजने लगी वह काफी काम आते जीत हो चुकी थी वह अपने हाथ को शुभम के बदन पर चारों तरफ घुमा रही थी और बार-बार अपनी देने हथेली को लाकर शुभम की गांड पर रखकर उसकी गांड को पीट रही थी लेकिन ऐसा करने में शुभम को काफी मजा आ रहा था,,,,
दोनों आनंदित हो उठे थे सनम अपनी पोजीशन बदलता हुआ बिस्तर पर लेट गया और शीतल शुभम का इशारा समझते हुए उसके लंड पर धीरे-धीरे बैठते हुए एक बार फिर से सुभम के लंड को अपनी गांड के छेद में उतार ली,,, अब शुभम का लंड बड़े आराम से उसकी गांड के छेद में अंदर बाहर हो रहा था,,,, शुभम के कहे अनुसार शीतल को काफी आनंद की अनुभूति हो रही थी और वह खुद उसके लंड पर अपने गांड को पटक रही थी वो जितना जोर से शुभम के लंड पर अपनी गांड पटकती उतना और ज्यादा उसे मजा आता,,, देखते ही देखते दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी और एक बार फिर से दोनों चरम सुख को प्राप्त करते हुए एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर लंबी लंबी सांसे लेने लगे,,,
सुबह का 4:15 का समय हो रहा था,,, लेकिन अभी भी दोनों बिस्तर पर लेटे हुए थे एकदम नंगे दोनों का मदन रस पूरे बिस्तर पर चादर को गीला किए हुए था,,,, लेकिन फिर भी दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी हां शीतल काफी थक चुकी थी जिंदगी में इस तरह का मजा उसने कभी भी नहीं ली थी आज पहली बार उसने इतनी जबरदस्त चुदाई का भरपूर आनंद ली थी,,,,,,
लेकिन धीरे-धीरे एक दूसरे से बातें करते हुए दोनों कब सो गए दोनों को पता नहीं चला,,,,
सुबह डोर बेल की आवाज के साथ दोनों की नींद खुली तो दोनों हैरान रह गए घड़ी में सुबह के 9:00 बज रहे थे,,,
शीतल को समझते देर नहीं लगी थी कि डोर बेल बजाने वाली निर्मला ही है,,,, शुभम को भी इस बात का एहसास हो गया कि काफी देर हो गई है और दरवाजे पर उसकी मां ही होगी इसलिए वह काफी डर गया लेकिन शीतल उसे शांत करते हुए बोली,,,

तुम यही रुको कमरे से बाहर मत आना मैं जा कर देखती हूं कौन है,,,( इतना कहकर शीतल बिस्तर पर से नीचे उतरी और सामने की अलमारी खोलकर उसमें से एक छोटा सा गाऊन निकाल ली मरून कलर का,,, जो कि काफी छोटा था पहनने के बाद वह शीतल की आधी जांघ तक ही पहुंच पाता था,,, इसे छोटे से गाऊन में शीतल और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी,,, शीतल को इस लिबास में देखकर एक बार फिर से शुभम की उत्तेजना का पारा बढ़ने लगा शुभम ललचाई आंखों से उसे देखता रह गया और शीतल कमरे से बाहर चली गई,,,
 
शीतल अपने बदन पर मरून कलर का छोटा सा नाइट गाउन डालकर कमरे से बाहर निकल गई,,, शुभम के मन में इस बात का डर भी था कि,,, सुबह के 9:00 बज चुके थे ऐसे में दरवाजे पर उसकी मा ही होगी इस बात के डर के साथ-साथ शीतल ने जिस तरह से मरून रंग का छोटा सा गाउन अपने बदन पर डाल रखी थी उससे उसकी मोटी मोटी आधी जांगे एकदम साफ और सुडौल नजर आ रही थी जिसे देखते हैं शुभम के तन बदन में फिर से आग लगने लगी,,,, जाते समय उसके गोलाकार नितंबों के दर्शन करके शुभम एक बार फिर से धन्य हो गया उससे रहा नहीं जा रहा था,,, कमरे में शीतल के बिस्तर पर अभी भी वह एकदम नंगा ही था बस केवल अपने ऊपर चादर डाल रखा था लेकिन टांगो के बीच का वह हथियार जिस पर शुभम के साथ साथ हर उस औरत को गर्व होता है जो उसे अपने अंदर ले लेती है,,, शुभम का वही लटकता हुआ मर्दाना ताकत से भरपूर हथियार धीरे-धीरे अपनी औकात दिखाना शुरू कर दिया था,,,, एक बार फिर से शीतल को भोगने का मन हो रहा था,,, शीतल जानबूझकर छोटा सा गाउन अपने बदन पर डाल रखी थी उसे पूरा यकीन था कि दरवाजे पर निर्मला ही होगी क्योंकि इस जगह पर उसके सिवा उसे कोई नहीं जानता था वह देखना चाहती थी कि सुबह-सुबह उसे इस रूप में देखा कर उसके चेहरे के हाव-भाव कैसे बदलते हैं वह अपने मन में क्या सोचती है क्योंकि इतना तो उसे पूरा यकीन था कि रात भर वह अकेले अपने घर में एक जवान लड़के के साथ क्या करती होगी,,,,
दरवाजे की घंटी अभी भी बज रही थी,,, दरवाजे पर छोटा सा छेद बना हुआ था जिसमें से यह देखा जाता था कि दरवाजे के बाहर खड़ा इंसान कौन है और शीतल अपनी आंखों छोटे से छेद पर टिका कर बाहर देखी तो बाहर निर्मला ही खड़ी थी यह जानकर शीतल के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह झट से दरवाजा खोल दी,,,
शीतल को इतने छोटे से लिबास में देखकर निर्मला की आंखें फटी की फटी रह गई और वह निर्मला के सामने जानबूझकर उबासी ले रही थी। यह देखकर निर्मला से रहा नहीं गया और वह बोली,,,,

शीतल यह क्या पहनी हो जवान लड़का घर में है और सारी रात तुम्हारे साथ है और तुम इतना छोटा सा कपड़ा पहनी हुई हो,,,

निर्मला यह तुम क्या कह रही हो मैं तो हमेशा यही पहनती और सच कहूं तो रात को मैंने कुछ भी नहीं पहनी थी यह तो सुबह जब दरवाजे की घंटी बजी तो इसे अपने बदन पर डालकर यहां तक आई हूं,,,,, यकीन नहीं आ रहा है तू यह छोटी सी ड्रेस एकदम पारदर्शी है ध्यान से देखोगी तो तुम्हें सब कुछ नजर आएगा,,,,

शीतल की बात सुनते ही निर्मला अपनी आंखों को सीकोड कर अच्छी तरह से देखने की कोशिश करने लगी,,, और जो उसकी आंखों ने देखा उसे देखकर निर्मला एकदम से हैरान रह गई क्योंकि वास्तव में वह छोटा सा मरून रंग का गाउन पूरी तरह से पारदर्शी था जिसमें से शीतल का अंग अंग नजर आ रहा था निर्मला ने ऊपर से लेकर के नीचे तक के अंग को उस पारदर्शी गाउन से देख ली थी,,, जिसमें से शीतल की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी गोल गोल सूचियों के साथ-साथ उसका चिकना मांसल पेट और टांगों के बीच की वह पतली दरार जो कि एकदम चिकनी थी वह एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, एक पल के लिए तो शीतल का खूबसूरत बदन जोकि पारदर्शी गाउन में से एकदम बराबर नजर आ रहा था उसे देखकर निर्मला के बदन में झनझनाहट होने लगी और यह झनझनाहट कोई घबराहट से डर की वजह से नहीं था यह झनझनाहट एक औरत के खूबसूरत बदन को देख कर दूसरी औरत में होने वाली उत्तेजना का असर था जोकि निर्मला उसी झनझनाहट से गुजरी थी,,,,, निर्मला अपने आप को संभालते हुए बोली,,,

यह क्या कह रही हो शीतल तुम्हें शर्म नहीं आती रात भर बिना कपड़ों के सोते हुए,,,

मैं अकेली कहां थी निर्मला तुम्हारा बेटा भी मेरे साथ ही था और वह भी बिना कपड़ों के और अभी भी वह कमरे में बिना कपड़ों के ही लेटा हुआ है,,,,
( शीतल के मुंह से निकला हुआ एक एक शब्द निर्मला के कानों में शीशे की तरह घुल रहा था उसे यह सब सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था वह काफी क्रोधित हुए जा रही थी क्योंकि पहले से ही वह सोच रखी थी कि अपने बेटे को वह किसी भी औरत के साथ नहीं बांटेगी लेकिन उसकी एक गलती की वजह से उसे खुद ही अपने बेटे को दूसरी औरत के पास भेजना पड़ा था,,,,)

छी,,,,, शीतल तुम इस तरह की बातें करोगी मुझे यकीन नहीं होता जबकि तुम्हें एक टीचर हो,,,

तो तुम क्या हो निर्मला तुम भी तो एक टीचर हो जो हर एक लड़के को अच्छी तरह से जिंदगी जीने का हुनर सिखाती हो उन्हें काकाबिल बनाती हो,,,, और तुम क्या की और हां निर्मला तुम तो एक औरत एक टीचर होने के साथ-साथ एक मां भी हो और उसकी जिसके साथ तुम खुद चुदाई का खेल खेलती आ रही हो,,,, बहती गंगा में में थोड़ा सा हाथ धो ली तो तुम्हें इतना एतराज हो रहा है,,,,

शीतल तू समझती क्यों नहीं की अभी वह एक बच्चा है,,,

हमें सब अच्छी तरह से समझती हूं कि वह एक बच्चा ही है लेकिन जानती हो तुम्हारे बच्चे ने मेरी बुर (उंगली से अपनी बुर की तरफ इशारा करते हुए) की क्या हालत क्या है एक ही रात में बुर से भोसड़ा बना दिया है ना खुद सोया ना रात भर मुझे सोने दिया,,,, और तो और निर्मला आगे से तो लिया ही पीछे से भी नहीं छोड़ा,,,, सच कहूं तुम निर्मला तुम बहुत किस्मत वाली हो कि तुम्हें शुभम जैसा बेटा मिला है,,,,।( शीतल एक ही रात में बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी थी वह निर्मला से हंसी मजाक में बहुत कुछ बोल देती थी लेकिन आज वह एकदम किसी गंदी औरत की तरह हर एक बात बोल रही थी जिसे सुनकर निर्मला के होश उड़े जा रहे थे उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं थे वह आंखें फाड़ दे बस शीतल को ही देखे जा रही थी,,,)

तुम जाओ निर्मला वह भी सो रहा है उठेगा तो मैं खुद ही उसे भेज दूंगी,,,,( इतना कहकर शीतल निर्मला की बात सुने बिना ही दरवाजा बंद कर दी और मुस्कुराते हुए वापस सीढ़ियां चढ़ने लगी,,,, आज उसने विजय हासिल कर ली थी,,,, शुभम को पाकर आसमान में उड़ रही थी,,,, कमरे में पहुंचते ही वह अपने बदन पर से उस छोटे से गांऊन को निकाल कर फेंक कर एक बार फिर से नंगी हो गई,,,, शुभम बिस्तर पर अपने बदन पर चादर डाले बैठा हुआ था और शीतल उसके करीब जाते हैं उसके बदन पर से चादर खींच कर नीचे फेंक दी,,, एक बार फिर से शुभम भी एकदम नंगा हो गया शीतल के मदमस्त नितंबों को याद करके वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था इस समय उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था जिसे देखते ही शीतल बिस्तर के नीचे घुटने के बल बैठ गई और शुभम के लंड को अपने हाथ में लेकर उसे मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,,, देखते ही देखते शुभम की आंखें बंद होने लगी वह अपने दोनों हाथों से बिस्तर पर टेका लेकर शीतल द्वारा अपने लंड चुसाई का आनंद लूट रहा था,,, शीतल पागलों की तरह उसके लंड को पूरा मुंह में लेकर चूस रही थी,,,, उसे इतना मजा आ रहा था कि जैसे गन्ने की पहेली कटाई का पहला गन्ना हो और जिसे चूस कर उसके मधुर रस का आनंद लूट रही हो,,,

ओहहहह,,, सीतल,,,,आहहहहह,,,,

शीतल इतनी मदमस्त तरीके से शुभम के लंड को चूस रही थी कि शुभम के मुंह से सिसकारी की आवाज फुट रही थी,,,, देखते ही देखते दोनों एक बार फिर से गर्म हो गए,,,, और शीतल उसके मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल कर खड़ी हो गई,,,,,,, और शुभम की तरफ देखते हुए उसे लाल जाते हुए अपनी हथेली से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को रगड़ने लगी,,, शीतल की यह अदा शुभम पर बिजलियां गिरा रही थी वह अपने होश खो रहा था,,,, क्योंकि शीतल की यह हरकत शुभम को अपनी तरह पूरी तरह से लालायित कर रही थी,,,, शीतल की हरकत देखकर शुभम से रहा नहीं गया और वह अपने हाथ से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया,,,,, शुभम के हिलते हुए मोटे तगड़े लंड को देखकर शीतल एकदम से चुदवासी हो गई उसकी बुर में चीटियां रेंगने लगी,,,, और वह एकदम उत्तेजित अवस्था में एक पैर उठाकर शुभम के सीने पर रख कर उसे अपने पैर से धक्का देकर बिस्तर पर लेटा दी,,,,
शुभम चारों खाने चित हो ता हुआ पीठ के बल बिस्तर पर गिर गया शीतल की ईस मादक अदा से वह पूरी तरह से उसका कायल हो गया,,, उसे ऐसा महसूस होने लगा कि वह किसी सामान्य औरत,,, किसी टीचर के सामने नहीं बल्कि किसी प्रोफेशनल हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल के सामने है,,,,
शीतल की हर एक अदा के साथ-साथ शुभम पानी पानी हुआ जा रहा था,,,,

शुभम पीठ के बल बिस्तर पर लेटा हुआ था,,, उसका मोटा तगड़ा लंड मुंह उठाए छत की तरफ देख रहा था,,, शीतल अपने होठों पर मादक और कामुक मुस्कान लाते हुए बिस्तर पर चढ़ गई और देखते ही देखते घुटनों के बल आगे बढ़ते हुए शुभम की कमर के इर्द-गिर्द अपने दोनों घुटने टीका कर एक हाथ से अपनी बुर के गुलाबी पत्ती को खोलते हुए अपने दूसरे हाथ से शुभम के खड़े लंड को पकड़ कर उसे अपनी बुर के गुलाबी छेद पर सटाने लगी,,,, शीतल की बुर पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी थी उसमें से मदन रस बह रहा था जैसे ही शुभम के लंड का सुपाड़ा उसकी बुर की गुलाबी पत्ती से स्पर्श हुआ वैसे ही एक बार फिर से शीतल के मुंह से गर्म आह निकल गई और देखते ही देखते वह अपनी भारी-भरकम गांड को धीरे-धीरे उसका वजन शुभम के लंड पर लादती चली गई,,, और देखते ही देखते शुभम का लंड एक बार फिर से शीतल की बुर में खो गया,,, एक बार फिर से गाड़ी स्टार्ट हो चुकी थी इंजन से धुआं फेंक रहा था बस एक्सीलेटर देने की देरी थी,,, स्टेरिंग पर पूरी तरह से शीतल का कब्जा था और वह अपने दोनों हाथ को शुभम के कंधों पर रखकर एक्सीलेटर पर पैर दबा दी और अब धीरे-धीरे शीतल की भारी-भरकम गांड किसी मशीन की तरह शुभम के लंड पर ऊपर नीचे होने लगा,,,,

शीतल के बाल बिखरे हुए थे उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूची हवा में लहरा रही थी जिसे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ रहा था और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर दोनों दशहरी आम को अपने दोनों हथेली में पकड़कर दबाना शुरू कर दिया,,,, शुभम को ऐसा महसूस हो रहा था कि उसके ऊपर शीतल नहीं बल्कि रति चढ़ी हुई है,,, और वह खुद कामदेव बनकर बिस्तर पर लेटा हुआ है,,,, अब ऐसा लग रहा था शीतल की बारी है वह शुभम को स्वर्ग का सुख दे रही थी एक अत्यंत जबरदस्त लुभावने लय में शीतल की बड़ी-बड़ी गोरी गांड ऊपर नीचे हो रही थी,,,,
शुभम की आंखों के सामने उसका लंड कभी प्रगट हो जाता है तो कभी शीतल की बुर में आदश्य हो जा रहा था,,,,

आहहहहहहह,,,आहहहह,,,,आहहहहहहह,,,
इस तरह की मादक सिसकारियोर्यों के साथ शीतल लगातार अपनी बड़ी बड़ी गांड को सुभम के लंड पर पटक रही थी,,,,,,,

ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,, शीतल दरवाजे पर कौन था,,,,,,

ऊंहहहहहह,,,,,ससससहहहहह,,,,, शुभम मेरे राजा दरवाजे पर तुम्हारी मां आई थी,,,

कककक,, क्या तो क्या मम्मी को पता है कि मैं अभी भी तुम्हारे साथ हूं,,,

तुम्हारी मम्मी को सब कुछ पता है शुभम मैं सब कुछ बताती नहीं डरने की कोई जरूरत है,,,,आहहहहहहह,,,आहहहहहहह,,,( शीतल की बात सुनकर शुभम जोश में आ गया और नीचे से अपनी कमर को जोर-जोर से ऊपर की तरफ उछलने लगा जिससे शीतल के मुंह से आह निकल गई,,,,)

तो क्या मम्मी को सब कुछ पता है,,,( नीचे से अपनी कमर के साथ-साथ अपने दोनों हाथों का करतब शीतल की चुचियों पर दिखाता हुआ बोला,,,)

तुम्हारी मम्मी को सब कुछ पता है और हां थोड़ा सा वह परेशान भी थी और होना लाजमी भी है लेकिन तुम चिंता मत करो सब कुछ सही हो जाएगा,,,,, पर सही नहीं हो पाएगा तो मैं सब कुछ सही कर दूंगी,,,, अब तो तुम्हारे दोनों हाथों में लड्डू है,,,,( शीतल की यह बात सुनकर शुभम मुस्कुरा दिया,,,) लेकिन हां अपनी मम्मी को कभी यह मत बताना कि तुमने मेरे मोबाइल में से तुम दोनों की वीडियो को डिलीट कर दिए हो वरना मेरी मद मस्त जवानी से हाथ धो बैठोगे फिर चोदते रहना सिर्फ अपनी मां को और उसी की बुर का भोसड़ा बनाते रहना,,,।

नहीं नहीं मेरी जान मैं इतनी बड़ी गलती कभी नहीं करूंगा तुम्हें चोदने में जो मुझे मजा आ रहा है ऐसा मजा तो मुझे अपनी मां को चोदने में नहीं आता तुम कितना खुश कर देती हो,,,,
( शुभम कि ईस तरह की मीठी बातें सुनकर शीतल मुस्कुरा दी और जोश में आकर जोर-जोर से अपनी गांड को सुभम के लंड पर पटकने लगी,,,, दीवाल में तनी हुई घड़ी में 10:00 का समय हो रहा था बाहर सड़क पर गुजरते हुए गाड़ियों की आवाज के साथ साथ उनके होरन का शोर भी सुनाई दे रहा था सब लोग अपने अपने काम में लगे हुए थे और इधर शीतल और शुभम पूरी दुनिया को भूल कर अपनी मस्ती में खोए हुए थे दोनों चुदाई का मजा लूट रहे थे देखते ही देखते दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी दोनों के ऊपर मदहोशी पूरी तरह से छाई हुई थी और दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर एक बार फिर से जवानी के गर्म पानी को अपने अपने अंगों से बाहर निकाल दिए,,,,,
काफी समय हो गया था शुभम अपने कपड़े पहन कर शीतल के घर से बाहर निकल गया और अपने घर की तरफ जाने लगा लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी मां का सामना कैसे कर पाएगा उससे आंख कैसे मिला पाएगा यही सब सोचते हुए वह अपने घर पहुंच गया जहां पर शीतल बेहद चिंतित होकर कुर्सी पर बैठे हुए उसका इंतजार कर रही थी,,,।
 
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