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mastram kahani एक अधूरी प्यास.... 2

शुभम कहते दोनों हाथ में लड्डू था वह बहुत खुश और उत्तेजित नजर आ रहा था रुचि के कहे अनुसार वह एकदम नंगा होकर कुर्सी पर बैठा हुआ था,,,, उसके लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था रुचि को अपनी गांड मटका के जाते हुए देख कर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई थी,,, शुभम को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि बिना कपड़ों में रुचि एकदम क़यामत लग रही थी उसका गोरा रंग और उसके खूबसूरत अंग को देखकर उसके मुंह के साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,
जो कि अभी भी पूरी औकात में था अगर रुचि ने उसे अंतिम क्षण में रोका ना होता तो अब तक उसका पूरा लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा होता,,

थोड़ी ही देर में रूचि संपूर्ण नग्नावस्था में रसोई घर में से खाना लेकर आ गई और उसे डाइनिंग टेबल पर रख कर परोसने लगी,, शुभम परोसे गए स्वादिष्ट भोजन को तो कम लेकिन रूची के खूबसूरत बदन पर लटके हुए उसके दोनों दशहरी आम को देख रहा था जो कि अभी पूरी तरह से पके भी नहीं थे,, रुचि की चूची का भूगोल संपूर्ण रूप से एकदम व्यवस्थित था सुगठित शरीर के हिसाब से एकदम सुडोल एकदम गोलाकार स्थिति में और वह भी तनी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी को ललकार रही हो कि हिम्मत हो तो इसे छू कर दिखाओ,,,,
दोनों ने खाना खाना शुरु कर दिया था पनीर की सब्जी के साथ नरम नरम पूरी साथ में मीठी खीर जो कि यह सब शुभम को बहुत ही स्वादिष्ट लगती थी,, दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे,,, दोनों एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखते हुए स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे,,, लेकिन शुभम भाई यूं ही स्वादिष्ट भोजन का आनंद बड़े चाव से दे रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान नरम गरम पूरी से ज्यादा रुचि गोलाकार चुचियो पर थी,,,

क्यों शुभम खाना अच्छा तो बना है ना,,,
Shubham k samne Ruchi kapde utarti huyi


हां हां भाभी क्यों नहीं आपके हाथों से खाना अच्छा ही बनेगा लेकिन सही कहु तो भाभी इस समय मेरा खाने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा है ,,,,,

ऐसा क्यों ,,,,,,?

मेरी आंखों के सामने ईतनी खूबसूरत औरत एकदम नंगी बैठी हो तो उसे देखकर कहीं किसी का मन खाने में लगेगा,,,,

तो कहां लगेगा,,,,

तुम्हारी गोल-गोल चुचियों में तुम्हारे नंगे बदन में तुम्हारे गोरे-गोरे मदमस्त कर देने वाली गांड पे और तुम्हारी रसीली बुर में,,,,

ससससहहहह,,,, कितना गंदा बोलता है तू,,,,,

जिसे तुम गंदा कह रही हो भाभी ,,, मेरे लिए तो अमृतवाणी है,,,,

बातें बहुत बनाता है तू,,,,, चल खाने का मजा ले ले इसके बाद तो तुझे इसका भी मजा मिल ही जाएगा (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करते हुए,,,)

क्या करूं भाभी मन को तो मना लूं लेकिन यह साला नहीं मानता ना (अपने हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए)

क्या अभी तक वो शांत नहीं हुआ,,, अभी तक खड़ा है क्या,,,?

हां भाभी ईतनी आसानी से यह शांत होने वाला नहीं है,,,,

मैं जानती हूं कैसे शांत होगा जब तक यह मेरी बुर में जाएगा नहीं तब तक शांत नहीं होने वाला,,,,

लगता तो ऐसा ही है भाभी जल्दी से मेरे पर ऊपकार कर दो और इसे अपनी बुर में ले लो,,,,
Ruchi Shubham ko uttejit karti huyi

अरे थोड़ा तो सब्र किया कर आज की रात तुझे जी भर के प्यार करना है थोड़ा सब्र करेगा तभी तो सब्र का फल मीठा होगा,,,,

तुम कह रही हो तो शांत हु वरना अब तक ईसी डायनिंग टेबल पर पटक कर तुम्हारी बुर में डाल दिया होता,,,,

हहहह,,,, औरत के साथ कभी भी जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए सारा मजा किरकिरा हो जाता है औरत अगर अपनी मर्जी से देखना तभी उसकी लेने में आनंद ही आनंद आता है ,,,,(रुचि यह बात मुस्कुरा कर बोली।)

मे ये बात अच्छी तरह से जानता हूं भाभी तभी तो शांत हूं वरना आप जैसी खूबसूरत औरत और वह भी आंखों के सामने नंगी हो तो भला कौन मर्द अपने आपको रोक पाएगा,,,,,

तेरे में इतना सब्र है तभी तो औरत को तू मस्त कर देता है वरना अभी तक ना जाने कब से तेरा पानी निकल गया होता है और तू बिस्तर पर लंबा लेट गया होता,,,
( इस तरह की बातों के साथ दोनों ने अपना खाना समाप्त कर लिया दोनों इस तरह की गरमा गरम बातें करके एक दूसरे को काफी गर्म कर चुके थे शुभम तो पहले से ही अपने खड़े लंड को लेकर परेशान था उसका लंड था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था वह बार-बार उसे बैठाने के लिए उसे पकड़कर नीचे कर देता लेकिन वह फिर से अपना मुंह उठाकर ऊपर हो जाता है ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे रुचि की बुर को देखने की कोशिश कर रहा हो,,, दोनों के बदन में सुरूर चढ़ चुका था शुभम जब खाकर कुर्सी पर से खड़ा हुआ तो उसके खड़े होने के साथ ही उसका मोटा खड़ा लैंड लहराने लगा और सीधा डायनिंग टेबल पर ऐसे बीछ गया मानो उसे आराम से उस पर रखा गया है जिसे देखते हैं उसकी मर्दाना ताकत के अधीन होकर रुचि की बुर से मदन रस की दो बूंद नीचे जमीन पर चु गई,,, जो कि रुचि की तरफ से इशारा था कि अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,,, रुची अभी भी कुर्सी पर बैठी हुई थी और सुभम उसकी तरफ देखते हुए अपने लंड को डायनिंग टेबल पर पटकते हुए बोला,,,

अब कुछ होगा भाभी कि नहीं,,,,,
( शुभम की हरकत देखकर रुचि पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसके मुख से उसके मोटे तगड़े करने को देख कर ही गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,)

ससससहहहह,,,,,आहहहहह,, अब तो बहुत कुछ होगा मेरे राजा,,,,,, मैं अपने कमरे में जा रही हूं लेकिन तू 15 मिनट बाद आना ,,,,,

लेकिन क्यों भाभी मुझसे रहा नहीं जा रहा है ,,,,,

तभी तो कह रही हूं 15 मिनट बाद आना तुझे सरप्राइस देना है ,,,,,।

सरप्राइस कैसा सरप्राइस ,,,,,

अगर अभी बता दूंगी तो सरप्राइज का मतलब क्या रह जाएगा,,, इसलिए जैसा मैं कहती हूं वैसा ही कर,,,,( इतना कहकर वह कुर्सी पर से उठ कर खड़ी हो गई और मादक अदा बिखेरते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगी शुभम वही डाइनिंग टेबल की करीब खड़ा रुचि की मदमस्त अदाओं को देखकर मस्त हुआ जा रहा था जैसे जैसे रुचि सीढ़ियों पर अपने पैर रखने की वजह से उसकी गोल गोल गांड अद्भुत लचक के साथ इधर-उधर मटक रही थी जिसे देखकर शुभम का हौसला कमजोर होता नजर आ रहा था उसे इस बात का डर सता रहा था कि कहीं रुचि के सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते उसका पानी ना निकल जाए,,,, लेकिन फिर भी वह अपने आप को संभाल ले गया और उसकी आंखों के सामने अपनी मादक अदाओं का जाल बिछाते हुए रुचि अपने कमरे में चली गई यह उसके लिए एक अद्भुत एहसास था पूरे घर में हर एक कोने में संपूर्ण रूप से नंगी होकर घूमना यह अनुभव उसके लिए पहला था जिसमें उसे काफी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था जैसे-जैसे वह सीढ़ियों पर चढ़ रही थी उसे मालूम था कि उसकी गोलाकार गांड पर शुभम की नजर होगी और इस बात का एहसास ही उसे उत्तेजित किए जा रहा था,,,। कमरे में पहुंचते-पहुंचते रुचि काफी गर्म हो चुकी थी उसकी बुर से मदन रस की धार चु रही थी,,,,

जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे शुभम की दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह बार-बार अपने लंड को हाथ में लेकर उसे हिलाते हुए अपने समय को व्यतीत करने की कोशिश कर रहा था और देखते-देखते तकरीबन 20 मिनट गुजर गए अब उससे रहा नहीं जा रहा था वह भी उसी तरह से नंगा ही सीढ़ियां चढ़ने लगा,,,
अब वह कमरे के बाहर खड़ा था अब तक उसे इतना तो पता ही चल गया था कि रुचि का कमरा कौन सा है,, दरवाजा बंद था लेकिन लोग बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि अंदर की रोशनी बाहर तक आ रही थी इससे साफ जाहिर था कि रुचि कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ रखी थी शुभम की दिल की धड़कन बड़ी तेजी से बढ़ रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ना जाने कैसा सरप्राइस रोजी देने वाली है,,, क्योंकि यहां आने के बाद सब कुछ उसके लिए सरप्राइस ही था,,, क्योंकि कपड़े उतार कर एकदम नंगा रहने का आईडिया भी उसी का था जिसमें उन दोनों को काफी आनंद की अनुभूति हुई थी,,, अब क्या होने वाला है कमरे में कैसा सरप्राइस है इस बारे में शुभम को बिल्कुल भी पता नहीं था और इसी बारे में सोच सोच कर परेशान हुआ जा रहा था और साथ ही उत्तेजित भी क्योंकि इतना तो जानता था कि जो कुछ भी होगा उसके फायदे का ही होगा इसलिए वह धड़कते दिल के साथ दरवाजे पर हाथ रख कर उसे अंदर की तरफ हल्के से ठेलने लगा और दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया,,, पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहाया हुआ था,,,
तभी शुभम की नजर बिस्तर पर गई और सामने का नज़ारा देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई वह दंग रह गया,,,
 
शुभम हैरान था उसकी आंखों के सामने नजारा ही कुछ ऐसा था वह दरवाजे पर ही एकदम ठिठक कर खड़ा रह गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें पूरे कमरे में ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी फैली हुई थी पूरा कमरा फूलों की खुशबू से महक उठा था,,, शुभम को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि वह दरवाजे पर एकदम नंगा खड़ा था और सामने बिस्तर पर रुचि एकदम दुल्हन की तरह सज धज कर बैठी थी और पूरा बिस्तर फूलों से सजाया हुआ था मानो किसी की सुहागरात हो,,,
शुभम की नजर कमरे में चारों तरफ घूम रही थी वह हक्का-बक्का रह गया था बिस्तर पर सज धज कर दुल्हन की तरह बैठी हुई रूचि बहुत ही खूबसूरत परी की तरह लग रही थी,,, शुभम समझ नहीं पा रहा था कि रुचि है सब क्या कर रही है कुछ देर पहले कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई थी और खुद भी उसे नंगा रहने के लिए ही बोली थी लेकिन यहां कमरे में आकर वह खुद तैयार होकर लाल साड़ी पहनकर एकदम दुल्हन की तरह सज धज कर बैठी थी और वह इस समय एकदम नंगा ही था,,, शुभम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था फिर भी वह कमरे में प्रवेश कर के दरवाजे को बंद कर दिया हालांकि यह जरूरी नहीं था लेकिन फिर भी तसल्ली के लिए वह दरवाजे को लॉक कर दिया और धीरे धीरे चलते हुए बिस्तर के करीब आने लगा रुचि उसे तिरछी नजरों से चोरी छिपे देख रही थी जो कि चलते चले उसका लंड ऊपर नीचे हिल रहा था जिसे देखकर रुचि के मुंह के साथ-साथ उसकी रसीली बुर में भी पानी का सैलाब उठने लगा,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था मन में तूफान उठा रहे थे वह अपने जज्बातों पर काबू किए हुए बैठे थे माहौल पूरी तरह से मादकता से भरा हुआ था आज उसकी शादी की सालगिरह थी और ऐसे में वह शुभम को पाकर बहुत खुश थी और यही उसके लिए सरप्राइस था कि वह आज की रात उसकी दुल्हन बनी हुई थी और उसे पत्नी की तरह सुख देना चाहती थी या यूं समझ लो कि आज वह एक रात के लिए उसकी पत्नी थी और उसका बिस्तर सुहागरात का सेज बना हुआ था,,, हालांकि वह रोज की चुदाई जरूर करता था लेकिन आज की रात दोनों के लिए कुछ खास थी जो कि शुभम को समझ में नहीं आ रहा था इसलिए वह रुचि के बेहद करीब आकर खड़ा हो गया और रुचि से बोला,,,


यह सब क्या है भाभी आप एकदम दुल्हन की तरह सज कर बैठी हो और बिस्तर को ऐसे सजा दी हो कि जैसे आज आप की सुहागरात हो,,,,

सुहागरात ही समझो शुभम वैसे भी तुम मेरी चुदाई करने के लिए कमरे में आए हो लेकिन आज की रात कुछ खास है मैं चाहती हूं कि तुम आज की रात मुझे आशिक बनकर नहीं बल्कि मेरा पति बनकर मेरी चुदाई करो और मैं आज की रात तुम्हारी दुल्हन हूं,,,

यह क्या कह रही हो भाभी,,,( शुभम आश्चर्य से बोला )


मैं ठीक कह रही हूं शुभम और तुम मुझे भाभी नहीं मेरा नाम लेकर बुलाओ रुचि कहो,,,, मेरा नाम लेकर बुलाओ ऐसा बर्ताव करो जैसा कि एक पति पहली रात को अपनी पत्नी के साथ करता है,,,
( रुचि की बात सुनकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा सूची की बात उसे अच्छी लग रही थी और वैसे भी कौन नहीं चाहेगा रुचि जैसी पत्नी को पाना भले ही वह समय उसकी पत्नी नहीं थी लेकिन फिर भी जिस तरह से रुचि उसे कह रही थी उससे उसे इस बात का अहसास होने लगा कि इस समय वह उसकी पत्नी ही है ऐसा एहसास उसके लंड के तनाव को 10 गुना बढ़ा दिया,,, शुभम भी उत्साहित होता हुआ बोला ,,,)

क्या तुम सच कह रही हो भाभी ,,,

भाभी,,,, नहीं रुचि,,,,,

हां रुचि मेरी जान क्या तुम सच कह रही हो,,,

हां मैं सच कह रही हूं,,,, शुभम तुम नहीं जानते एक औरत के लिए उसकी जिंदगी की पहली रात उसकी सुहागरात कितनी खास होती है जिस तरह से दूसरी लड़कियां इस रात के लिए सपने देखते हैं सपने संजो कर रखी है मैंने भी ऐसे ही सपने से जो कर रखी थी की सुहागरात के दिन मेरा पति मुझसे बहुत प्यार करेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,

क्यों,,,

क्योंकि मेरा पति मेरे सपनों का राजकुमार बिल्कुल भी नहीं था वह पहली रात को ही मेरे सपने को चकनाचूर कर दिया उसे तो औरत से कैसे बात करना चाहिए कैसे रिझाना चाहिए यह सब बिल्कुल भी नहीं आता,,,

मुझे तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता भाभी,,,( शुभम के मुंह से भाभी शब्द सुनकर उसे आंख दिखाई तो तुरंत शुभम अपनी बात को पलट दिया,,,) सॉरी ,,,,,सॉरी रुचि,,,,

अगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता तो आज की रात तुम मेरे कमरे में नहीं होते समझे,,,, उसे तो एक औरत को कैसे चोदा जाता है यह बिल्कुल भी नहीं पता था,,,

यह क्या कह रही हो रुचि भला एक मर्द को औरत को कैसे चोदा जाता है यह भी नहीं आता मुझे तो नहीं लगता,,,

हां शुभम मैं भी तो इसी बात से हैरान थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था तुझे पता है सुहागरात की रात को वह अपना लंड मेरी बुर में डाल ही नहीं पाया उसे समझ में नहीं आता था कि डाला कैसे जाता है,,,

फिर उसने सुहागरात कैसे मनाई,,,,


कहां मनाया जैसे अपने लंड को मेरी बुर से सटाया साले का पानी ही निकल गया और उसके बाद वो खड़ा ही नहीं हुआ मैं तकिए को अपनी बाहों में लेकर सो गई तब से लेकर आज तक मुझे उस रात को लेकर बहुत ही दुख होता है लेकिन मैं आज उस कमी को पूरा कर लेना चाहती हूं मैं चाहती हूं कि तुम मुझे पत्नी की तरह प्यार कर जिस तरह से पति सुहागरात को अपनी पत्नी को चोदकर त्रप्त कर देता है उसी तरह से तू भी मेरे साथ आज प्यार कर सुहागरात मना ले मेरे साथ,,,,,

तो देर किस बात की है रुचि मेरी जान शुरुआत इसी से कर लो ,,,,(अपने लंड को पकड़ कर उसके चेहरे के सामने हिलाते हुए बोला और रुचि शुभम का इशारा समझ गई वैसे भी उसके खड़े लंड को बार-बार देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था वह उसको मुंह में लेना चाहती थी इसलिए वह भी तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके लंड को लपक ली और उसे अपने होठों से लगाकर उसके सुपाड़े को रगड़ने लगी,,,)

ससससहहहह,,,,आहहहहह,,,,,ऊमममममम,,,,( रुचि को बहुत मजा आ रहा था रुचि उसके पूरे लंड को अपने गुलाबी होठों पर रगड़ रही थी हालांकि वह अभी तक अपने मुंह में उसे लिए नहीं थी लेकिन फिर भी उसे लंड की गर्माहट को अपने होठों पर महसूस करके इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि पूछो मत और पूरी तरह से मस्त हो गई थी शुभम भी उसके लाल-लाल होठों पर अपने लंड का स्पर्श कराकर मस्त हुए जा रहा था वैसे भी रुचि घूंघट में कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही थी सिर्फ उसका चेहरा और वो भी खास करके उसके होंठ ही नजर आ रहे थे जिस पर पूरी तरह से वह लंड रगड़ रही थी,,,, लंड को रगड़ने के साथ-साथ वहां अपने मुंह से कर्म संस्कारी की आवाज भी छोड़ रही थी जिससे शुभम को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था लेकिन इतने से रूचि का काम कहां होने वाला था देखते ही देखते वह अपने गुलाबी होठों को खोलकर शुभम के लंड के मोटे सुपाड़े को अंदर ले ली और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,, शुभम के मोटे तगड़े लंड की गर्माहट उसे बेचेन और चुद वासी बना रही थी,,,, जैसे-जैसे रुचि शुभम के मोटे लंड को धीरे धीरे इंच इंच करके अंदर ले रही थी वैसे वैसे मानो शुभम हवा में उड़ रहा हो उसे स्वर्ग का सुख महसूस हो रहा था,,
धीरे-धीरे करके शुभम अपने हाथों से रुचि के घूंघट को हटा दिया वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी मानो सचमुच की दुल्हन हो,,,, शुभम को अब साफ नजर आ रहा था कि उसका मोटा लंड पूरी तरह से उसके लाल-लाल होठों के बीच में जाकर उसके गले को गीला कर दे रहा था,,,
अभी तक रुचि जी भर के शुभम के लंड को मुंह में लेकर उसका स्वाद नहीं चख पाई थी इसलिए आज वह अपनी कमी को पूरा कर लेना चाहती थी आज वह किसी लॉलीपॉप की तरह शुभम के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी उसका कसैला स्वाद उसे बेहद मधुर लग रहा था,,,
गजब का नजारा बना हुआ था रुचि अपने कमरे में अपने ही पड़ोस के नौजवान लड़के को लेकर दुल्हन की तरह सज कर बैठी हुई थी और उसके खड़े लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी,,, शुभम एकदम मतवाला हो गया था उसके मुंह से भी गरम सिसकारी की आवाज आने लगी थी क्योंकि रूचि ईतने सरीके से इतने बेहतरीन अंदाज में उसके लंड को चूस रही थी कि उसे डर था कि कहीं उसका पानी उसके मुंह में ही ना निकल जाए,,, ना चाहते हुए भी खुद ब खुद उसकी कमर आगे पीछे होने लगी वह इस तरह से रुचि के मुंह को ही चोदना शुरू कर दिया था,,,, रुचि अपनी रेशमी बालों को हेयर बैंड से बांधी हुई थी जिसे शुभम खींचकर निकाल दिया और उसके रेशमी बालों को एकदम खुला छोड़ दिया जिसमें वह काफी खूबसूरत और हसीन लगने लगी थी अब शुभम उसके रेशमी बालों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर अपनी कमर को हिलाता हुआ उसके मुंह को चोदना शुरू कर दिया,,, लंड की मोटाई इतनी अधिक थी कि उसके छोटे से मुंह में बराबर घुस नहीं रहा था जिसकी वजह से रुचि को अपना मुंह कुछ ज्यादा ही खोलना पड़ रहा था,, रुचि के मुंह से घुटी घुटी सी आवाज आ रही थी लेकिन फिर भी वह अपने कदम पीछे लेने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी वह मैदान में बराबर डटी हुई थी,,, लेकिन इस बार शुभम अपने पैर पीछे ले लिया क्योंकि वह जानता था कि कुछ देर अगर वो इसी तरह से उसके मुंह में लंड पेलता रहा तो उसका पानी निकल जाएगा,,,,



लेकिन जैसे ही रुचि के मुंह में से शुभम का मोटा तगड़ा लंड बाहर निकला वो एकदम से छटपटा गई,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई उसके हाथों से उसकी पसंदीदा चीज छीन लिया हो,,, वह दोबारा शुभम कैलेंडर खोल आप अपना चाहती थी लेकिन शुभम जानता था कि इस बार उसके हाथ में लंड आ गया तो वह फिर से मुंह में लेकर से चूसना शुरु कर देगी इसीलिए तुरंत फुर्ती दिखाते हुए वह नीचे झुका और उसके लाल-लाल होठों को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, दोनों इस कदर उस बेहतरीन चुंबन के सुख में खो गए कि दोनों के मुंह से केवल उमममम,,,,ऊमममममम,,,की आवाज आ रही थी,,।

शुभम रुचि के गले में अपनी बाहें डालकर उसे धीरे-धीरे बिस्तर पर लेट आने लगा देखते ही देखते वह कुछ देर में रुचि के ऊपर था और उसके लाल-लाल होठों को चूसता हुआ ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था जिससे रुचि के मुंह में से मस्ती भरी घुटी घुटी सी चीख निकल रही थी,,,,
ऊऊऊमममम,,,ऊमममममम,,,( इस तरह की गर्माहट भरी आवाज निकालने के साथ ही रुचि शुभम को अपनी बाहों में भर ली और उसकी नंगी पीठ पर अपनी हथेली को घुमाते हुए धीरे-धीरे अपनी हथेली को नीचे ले जाने लगी और कुछ ही देर बाद शुभम के नितंबों को अपनी हथेली में भरकर उसे दबाते हुए उसका दबाव अपनी टांगों के बीच बढ़ाने लगी जिससे साड़ी के ऊपर सही शुभम के मोटे तगड़े लंड की चुभन उसे अपनी बुर के ऊपर होने लगी यह एहसास उसे अंदर तक एकदम से उत्तेजना से भर दिया वह पागलों की तरह शुभम के नितंबों को अपनी हथेली में भर-भर कर नोचना शुरु कर दी,,, रुचि की हरकत की वजह से शुभम एकदम बदहवास हो गया मदहोशी उसके तन बदन को मजबूर करने लगी कि वह और ज्यादा ताकत लगाकर रुचि के बदन से खेले और इसीलिए वह रुचि के ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी दोनों चूचियों को जोर-जोर से दबाता हुआ उसके ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया,,,
पूरे कमरे में दोनों की गरम सिसकारियां गूंज रही थी । जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खुलता जा रहा था वैसे वैसे रुची की गर्म सिसकारियों की आवाज और तेज होती जा रही थी वह जोर-जोर से शुभम के नितंबों को अपनी टांगों के बीच में दबा रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कपड़े के ऊपर से ही शुभम से चुदवा लेना चाहती हो,,,, देखते ही देखते शुभम सुहागरात की शुरुआत करते हुए रुचि के ब्लाउज का बटन खोल कर उसे उसके बदन से अलग कर दिया लेकिन अभी भी इसके नारंगीयो तक पहुंचने में उसकी ब्रा अड़चन रूप बन रही थी। जिसे शुभम अपने दोनों हाथ रूचि की पीठ की तरफ ले जाकर अपने दोनों हाथों से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और देखते ही देखते उसके बदन से उसकी लाल रंग की ब्रा भी अलग हो गई,,,, रुचि की कसी हुई दोनों नारंगीयों को देखकर शुभम की आंखों में चमक आ गई उसके तन बदन में मदहोशी छाने लगी वह एकदम बदहवास हो गया,,, शुभम की आंखों में खुमारी छाने लगी,,,
वह बैठ गया रुचि उसी तरह से पीठ के बल लेटी रही उसकी आंखों में शर्म की हया नजर आ रही थी क्योंकि वह आज शुभम के सामने एक दुल्हन के रूप में आई थी,,, इसलिए सुहागरात की पहली रात को दुल्हन का इस तरह से शर्माना जायज होता है,,,, वो पागलों की तरह लंबी लंबी आहें भरते हुए रुचि की चूची को देख रहा था जो कि बेहद खूबसूरत लग रही थी उसे इस तरह से अपनी चूची को निहारते हुए देखकर रूचि बोली,,,

ऐसे क्या देख रहा है जैसे कि पहले कभी देखा ही नहीं है,,,

देखा तो हूं रुची मेरी जान लेकिन आज की बात कुछ और है आज तुम मेरी दुल्हन और मैं तुम्हारा दूल्हा आज हमारी सुहागरात है,,, आज जी भर के तुम्हारी चूची से खेलूंगा,,,

तो खेलो इंकार किसने किया है,,,,

आज इंकार भी करोगी तो भी मैं मानने वाला नहीं हूं,,,
( इतना सुनकर रुचि खुद अपनी दोनों चूची को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर शुभम की तरफ बढ़ाते हुए बोली,,,)

मैं भला इंकार क्यों करूंगी मैं तो खुद ही अपनी चूची को तेरे सामने परोस रही हूं कि घर पर इन से प्यार कर उनसे खेल इन्हें मुंह में भर कर के मस्त कर दे मुझे,,( रुचि एकदम मदहोश होकर शुभम से मादक स्वर में बोल रही थी उसकी बातों में विनती थी वह एक तरह से उसके बदन से खेलने के लिए शुभम से विनती कर रही थी उसे मना रही थी कि वह उसके बदन से खेले उसे मस्त कर दें भला इस आमंत्रण शुभम कैसे इंकार कर सकता था रुचि की बात सुनते ही वह रुचि की दोनों चुचियों पर टूट पड़ा,,, वो जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया और उसे मुंह में भर कर पीना शुरु कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे अब दोबारा उसे रुचि की चूची पीने को नहीं मिलेगी,,, एक बार फिर से कमरे में रुचि की गर्म सिसकारियो की आवाज गूंजने लगी,,, अब शुभम कहां रुकने वाला था उसके हाथों में तो जैसे दो लड्डू आ गए थे और वह जन्म का भूखा हो इस तरह से उसे खाना शुरू कर दिया था,,,, वह बारी-बारी से रुचि की दोनों चुचियों का स्वाद ले रहा था उत्तेजना के मारे रुचि की चूची की निप्पल ईतनी कड़क हो गई थी कि मानो छोटी सी कैडबरी चॉकलेट हो,,, जिसका चॉकलेटी स्वाद लेकर सुभम अपनी जवानी को मदहोश कर रहा था,,,
,,,,सससससस,,,, आहहहहहहह,,,,,शुभम,,,,,ं ऐसे ही पी,,, मेरे राजा,,,,, मेरी चूची को पूरा मुंह में भर भर कर पी ,,,,मस्त कर दे तू इन्हें,,, ऊफफफ,,,,,, सुभम,,,,आहहहहह,,,( रुचि मस्ती की गरम सिसकारियां ले रही थी तभी तो हम उसके निप्पल को दांतों से काट लिया जिससे उसके मुंह से आह निकल गई)

क्या करता है रे,,,,

तुम्हारी चॉकलेट का स्वाद ले रहा हूं,,,,

पागल तू चॉकलेट के पीछे पड़ा है नीचे रसमलाई छलक रही है उसे कौन चाटेगा,,,,( रुचि शुभम से एकदम मादक स्वर में बोली,,,)

मैं हीं चाटुंगा मेरी रानी तेरी कटोरी खोल खोल कर चाटुंगा बस थोड़ा सा सब्र कर मेरी जान,,,

ससससहहहह,,,,,,, शुभम मेरे राजा मुझसे जरा भी सब्र नहीं होता मेरी टांगों के बीच में आग लगी हुई है जल्दी से अपना फुआरा मार कर उसे ठंडा कर,,,,,
( रुचि पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी वह पूरी चुदवासी हो चुकी थी उसे अपनी बुर के अंदर सुभम के मोटे लंड को लेने की बहुत जल्दी पड़ी थी,,, लेकिन शुभम को रुचि की दोनों नारंगी ओ में कुछ ज्यादा ही साथ मिलने लगा था वह जोर-जोर से उसकी चूची को दबाता हुआ मुंह में भरकर पी रहा था उसकी प्यास बुझ नहीं रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था वह गुरु जी की बातों को अनसुना करके लगातार उसकी चूची पर ही डटा रहा देखते ही देखते उसकी चूची एकदम लाल टमाटर की तरह हो गई। लेकिन इस दौरान वह अपने खड़े लंड को बराबर उसकी पूर्व के ऊपर दबा रहा था साड़ी के ऊपर से भी रुचि को ऐसा एहसास हो रहा था कि शुभम का एकदम खड़ा कड़क लंड साड़ी फाड़ कर उसकी बुर में ना घुस जाए क्योंकि उसके लंड की चुभन किसी भाले की नोक की तरह ही महसूस हो रही थी,,
आखिरकार सुबह रुचि की चूची को मन भर के खेलने के बाद वहां से हटा और सीधे रुचि की लाल रंग की दुल्हन वाली साड़ी को उतारना शुरू कर दिया देखते ही देखते हुए उसके बदन पर से उसकी लाल रंग की साड़ी को उतार कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,,,, रुचि की सांसो की गति तेज होती जा रही थी वह प्यासी नजरों से सुमन की हरकतों को देख रही थी और इसी दौरान उसकी नजर बार बार उसकी खड़े लंड पर चली जा रही थी जो कि बेहद भयानक सपने में आ चुका था शुभम का लंड पूरी औकात में था,, आज रूचि शुभम के लंड को नजर भर कर देख रही थी तब उसे ऐसा एहसास हुआ कि इतना मोटा लंड उसकी बुर के लिए शायद कुछ ज्यादा ही मोटा है जबकि वह रोज उसी लंड से चुदाई करवा रही थी,,,

शुभम की आंखों के सामने रूचि केवल पेटीकोट में ही थी जिस की डोरी को वह अपनी नाजुक उंगलियों में लेकर इधर-उधर घुमा रही थी जो कि शुभम के लिए इशारा था कि वह उसे भी उतारने के लिए बोल रही हैं,,, और शुभम भी रुचि का इशारा समझ कर अपने हाथ से उसके पेटीकोट की दूरी को खींच कर खोल दिया और उसे अपने हाथों से पकड़कर नीचे की तरफ खींचने लगा जो कि रुचि की गोलाकार नितंबों के बाहर के नीचे दबे होने की वजह से निकल नहीं रही थी और तभी रुचि ने अपनी गोल-गोल गांड को कमर से हल्के से ऊपर उठाकर उसकी मदद करते हुए उसे पेटीकोट निकालने में उसकी मदद की शुभम भी जैसे ही रुचि ने अपनी गांड को ऊपर उठाई वह तुरंत उसकी पेटीकोट को खींच कर नीचे कर दिया,,,

लाल रंग की पैंटी में ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में रुचि की खूबसूरत जवानी और ज्यादा आग उगल रही थी,,, वह तो सुमन था कि अपनी गर्म लावा को बाहर आने से रोक रखा था दूसरा कोई होता तो इतने से ही पानी फेंक दिया होता,,,, शुभम की निगाहें रुचि की दोनों टांगों के बीच के उस स्थान पर टिकी हुई थी जहां पर लाल रंग की पैंटी का आगे वाला हिस्सा हल्का सा उठा हुआ था जिससे साफ पता चल रहा था कि रुचि पूरी तरह से मस्त हो चुकी है उत्तेजना से भर चुकी है और उसकी बुर कचोरी की तरह फुल कर अपना असर दिखा रही है,,, शुभम भी उसकी पूरी हुई बुर का असर भी असर नहीं होने देना चाहता था इसलिए अगले ही पल वह पैंटी को भी उतारने लगा और रुचि उसी तरह से अपनी गांड उठा कर पेंटी को भी निकलवाने में उसकी मदद की,,,, क्षण भर में ही शुभम की आंखों के सामने रूचि एकदम नंगी हो गई दोनों इस समय बिस्तर पर एकदम नंगे थे सुहागरात मनाने के लिए वाकई में इस समय शुभम रुचि का पति ही लग रहा था,,,

कमरे का वातावरण अब एकदम गर्म हो चुका था माहौल बदल चुका था,,, खूबसूरत मदहोश कर देने वाली जवानी से भरपूर रुचि बिस्तर पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और वहीं पास में मर्दाना ताकत से भरा हुआ नौजवान लड़का अपने खड़े लंड को हाथ में हिलाते हुए रुचि की मदहोश कर देने वाली जवानी का रस पी रहा था,,,,

निर्मला अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर करवटें बदल रही थी उसे भी ईस समय शुभम की जरूरत थी लेकिन वह समझ रही थी कि उसका बेटा उसके दोस्त के घर पार्टी में गया था लेकिन उसे कहा मालूम था कि दो कदम की दूरी पर उसका बेटा उसके पड़ोस की बहू की मदहोश जवानी से खेल रहा है,,,

रात के 11:00 बज रहे थे ऐसे में रुचि अपने कमरे में पड़ोस के लड़के से अपनी जवानी लूटवा रही थी वह बिस्तर पर पीठ के बल लेटकर अपनी टांगों को फैला कर अपनी गुलाबी बुर की गुलाबी पतियों को अपनी हथेली से रगड़ रही थी या एक तरह से शुभम को उकसा रही थी उसकी बुर से खेलने के लिए,,,, रुचि की हरकत देखकर शुभम की हालत खराब हुए जा रही थी उसकी आंखों के सामने जवानी से भरपूर मदद कर देने वाली जवानी से भरी हुई औरतों की नंगी लेटी थी और वह अपने लंड को हाथ से पकड़ कर हिला रहा था ऐसे में कोई दूसरा मर्द होता तो अब तक उसकी बुर में डाल दिया होता लेकिन शुभम की यही खास बात है कि उसने सब्र कूट कूट कर भरा हुआ था वह औरत को तब तक उसकी बुर में नहीं डालता था जब तक औरत एकदम गरम होकर उसे अपनी बुर में डालने के लिए ना बोले,,,,

शुभम पूरी तरह से तैयार था रुचि की रसीली बुर से खेलने के लिए उसकी रसमलाई को अपनी जीभ से चाट कर उसका स्वाद लेने के लिए इसलिए वह अपनी जगह को उसकी दोनों टांगों के बीच में बनाते हुए अपने हाथों से उसकी दोनों जांघों को पकड़कर हल्के से फैला दिया,, जिससे उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर हल्का सा खुल गई ऐसा उसकी हल्की सी खुली हुई बुर ऐसी लग रही थी मम्मी जैसे थोड़ी सी खिड़की खुली हो और उसमें से वह उसे अंदर आने के लिए बुला रही है,,,, मदमस्त बुरे देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया अब वह ज्यादा देर अपने आप को रोक नहीं पाया और दोनों टांगों के बीच अपना मुंह डाल दिया उसकी फुली हुई कचोरी जैसी बुर पर जैसे ही शुभम की जीभ का स्पर्श हुआ रुचि पूरी तरह से गनगना गई एक दम मस्त हो गई हल्कै से अपनी कमर को उठाकर अपने दोनों हाथों को शुभम के सर पर रख कर उसे अपनी बुर पर दबा दी,,,,


सहहहहहह,,,आहहहहहहह,,, शुभम ,,,,,

रुची की आवाज सुनकर सुभम समझ गया कि रुचि को मज़ा आने लगा है और वह अपनी पूरी जीभ डाल डाल कर उसकी रसमलाई को चाटने लगा जितना अंदर तक जीभ रुची की बुर में जाता रुचि को उतना ज्यादा मजा आता वह मदहोश हुए जा रही थी उसका पूरा बदन बिस्तर पर कसमसा रहा था उसकी कसमसाहट से उसके बिस्तर पर बिछी चादर पर सिलवटें पड़ चुकी थी,,, जो कि उसकी मस्ती भरी कहानी कह रही थी,,,, तुझे की पुरका कसैला स्वाद शुभम को स्वर्ग का अमृत समान मधुर लग रहा था रुचि पूरी मस्ती के साथ अपनी कमर को उठा उठा कर शुभम से अपनी बुर चटवा रही थी,,

शुभम से रहा नहीं जा रहा था रुचि की मदमस्त जवानी उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी,, वह अपनी जीभ के साथ-साथ अपनी दो उंगली भी रुचि की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करके उसे चोदना शुरू कर दिया,,, शुभम की हरकत की वजह से रुचि की गरम शिकारियों की आवाज और तेज हो गई लेकिन उसे सुनने वाला पूरे घर में उन दोनों के सिवा कोई नहीं था रुची की गर्म सिसकारियां शुभम के कानों में मधुर संगीत की तरह बज रही थी,,, तकरीबन 35 मिनट तक शुभम रुचि की बुर की सेवा करता रहा उससे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था अब उसका काम उंगली से नहीं बल्कि उसके लंड से होने वाला था वह पागल हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे अपना सर इधर उधर पटक रही थी,,,

ओहहहह,, शुभम मेरे राजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है अब उंगली नहीं तेरा लंड मेरी बुर में चाहिए डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में आज की सुहागरात को सफल कर दे मेरी जिंदगी की यादगार रात बना दे सुभम,,,,आहहहहह,,,

ओ मेरी रानी मेरी रुचि मेरी रंडी आज की रात तेरे लिए यादगार कर दूंगा मेरा मोटा लंड तेरी बुर की ऐसी चुदाई करेगा कि तेरी बुर की धज्जियां उड़ जाएगी,,, मेरी रंडी मेरी रुचि,,,,,

हां हां मैं तेरी रंडी हूं साले हरामजादे मैं तेरी रंडी हूं ,,,मुझे चोद मुझे मस्त कर दे,,,अपना मोटा लौड़ा मेरी बुर में डाल दे,,, मादरचोद,,,,( रुचि बदहवास होकर अब उसे गाली दे रही थी क्योंकि उसे गाली देने में उसे मजा आ रहा था पहली बार जिंदगी में वह किसी को गाली दे रही थी और वह भी इतनी गंदी गंदी,,, लेकिन शुभम को उसकी दी हुई गंदी गंदी गालियां भी आज बहुत ही अच्छी लग रही थी बल्कि वह गालियां उसका जोश बढ़ा रही थी और उसी गांधी के बदौलत वह अपनी पोजीशन बदलते हुए दोनों टांगों के बीच में एकदम बराबर घुटने के बल बैठ गया और रुचि की मदमस्त गांड को अपनी दोनों हथेली नीचे ले जाकर उसकी गांड को पकड़कर उसे ऊपर की तरफ खींच कर अपनी जांघों पर रख लिया,, शुभम की इस हरकत के चलते हैं रुचि की सांसो की गति धुकनी की तरह चलने लगी,,, क्योंकि उसे पता था कि अब अगले ही पल उसका मोटा लंड उसकी बुर में घुसने वाला है उसका मुंह खुला का खुला था वह अपनी प्यासी आंखों से अपनी टांगों के बीच की स्थिति का जायजा ले रही थी,,,, धीरे-धीरे करके उसे सुभम का मोटा लंड अपनी बुर के अंदर जाता हुआ नजर आ रहा था जैसे-जैसे अंदर जा रहा था वैसे उसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी साथ में उसके बदन की मस्ती भी बढ़ती जा रही थी देखते ही देखते शुभम ने अपने पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया,,,
शुभम अब अपना लंड रुचि की बुर में गाड़ दिया था अब वह अपनी हल्के हल्के कमर हिलाना शुरू कर दिया था रूचि की चुदाई उसके कमरे में उसी के पलंग पर हो रही थी,,, रुचि पागलों की तरह शुभम को अपनी बाहों में लेकर उसके हरित धक्के का आनंद लेना चाहती थी इसलिए अपनी दोनों बाहें फैलाकर शुभम को अपनी और आने का इशारा की और शुभम भी रुचि का इशारा पाकर उसके ऊपर पसर गया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया देखते ही देखते शुभम के कमर की रफ्तार बढ़ने लगी,,,
रुचि की गीली बुर में से फच फच की आवाज आ रही थी रुचि मदहोश हुए जा रही थी वह शुभम को अपनी बाहों में कस के दबोचे हुए थी,,,
शुभम अपनी पोजीशन बदले बीना उसी स्थिति में लगभग 30 मिनट तक रुचि की चुदाई करता रहा आखिरकार रूचि हांफने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी,,, शुभम की भी यही स्थिति थी आखिरकार वह काफी देर से अपने लंड के उबलते हुए लावा को रोक कर रखा था दस पंद्रह जबरदस्त धक्को के साथ ही दोनों एक साथ झड़ गए,,,,

रुचि के शादी की सालगिरह वाली रात को सुभम सुबह के 5:00 बजे तक उसकी जबरदस्त हर आसन में चुदाई किया रुचि एकदम मस्त हो गई बहुत थक कर चूर हो गई और सुबह 5:00 बजे उसकी आंख लग गई उसके सोते ही सुबह मुझे कमरे से बाहर निकल कर अपने घर में चला गया,,,।
 
तकरीबन 11:00 बजे के करीब रुचि की नींद टूटी तो अंगड़ाई लेते हुए अपने बिस्तर पर उठ कर बैठ गई,, शुभम को अपने बिस्तर पर ना पाकर वह इतना तो समझ ही गई कि वह चला गया उसके बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था जो कि रात भर की तृप्ति भरी चुदाई का नतीजा था ,,,,अपनी शादी की सालगिरह शुभम के साथ मनाकर रुचि बेहद प्रसन्न नजर आ रही थी और प्रसन्न होती भी क्यों नहीं आखिरकार शादी की सालगिरह की रात ही इतनी जबरदस्त गुजरी थी। रात की बात को याद करके उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी वह काफी खुश थी,, शुभम जैसे जबरदस्त मर्दाना ताकत और जोश से भरे हुए नौजवान लड़के से चुदवा कर रुचि एकदम मदहोश हो चुकी थी रुचि के चेहरे पर एक अद्भुत आभा नजर आ रही थी उसके बदन में फुर्ती पन महसूस हो रहा था,,, वह भी पूरी तरह से नंगी थी,,, रात में शुभम ने हीं अपने हाथों से उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी किया था वैसे भी औरतों के कपड़े उतारने में शुभम पूरी तरह से माहिर था,,, और शुभम ने यह कला अपनी मां से ही सीखा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार किसी औरत के कपड़े उतारकर उसे नंगी किया था तो वह उसकी मां ही थी जिसके कपड़ों को अपने हाथों से उतारकर उसे नंगी करके जिंदगी में पहली बार संभोग सुख का अनुभव लिया था,,,,, कुछ दिनों में ही रुचि अपने व्यक्तित्व को पूरी तरह से बदल चुकी थी वह एक सीधी-सादी संस्कार वाली औरत नहीं रह गई थी बल्कि अब उसके अंदर खुलापन आ गया था व्याभिचार आ गया था अपनी प्यास बुझाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती थी,,, वैसे भी एक औरत होने के नाते उसे अपना सुख प्राप्त करना प्राथमिक था औरत हमेशा से दूसरों के लिए जीते हैं लेकिन वह खुद अपने लिए जीना सीख जाती है जब उसे अपनों से कोई खुशी ना मिले तो,,,,
रुचि अपने बिस्तर पर से उसी तरह से एकदम नंगी उतर कर खड़ी हो गई और बिना कपड़े पहने ही अपने कमरे से बाहर निकल गई जाते जाते हो अभी एक नजर नीचे फर्श पर गिरे उसके दुल्हन वाले जोड़े पर मारती गई,,, पर बाथरूम में घुसकर फ्रेश होने लगी दूसरी तरफ शुभम नहा धोकर तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर बैठा था सामने उसकी मां बैठी थी।

तुम कब आए थे शुभम ,,,,

मैं तो मम्मी सुबह 5:00 या 6:00 बजे आया था काफी रात हो गई थी तो दोस्त के मम्मी पापा ने वहीं सोने के लिए बोल दिया था और सुबह में मेरा दोस्त मुझे यहां तक छोड़ कर गया,,

पार्टी तो अच्छी थी ना,,,,

हां मम्मी बहुत मजा आया बहुत दिनों बाद इस तरह की पार्टी करने को मिली है,,,।

क्या करूं बेटा पार्टी में आना जाना ही नहीं होता है तुझे याद ही ना पिछली बार शीतल ने अपनी शादी की सालगिरह पर बुलाई थी तो क्या हुआ था,,,,( निर्मला शुभम की तरफ तिरछी नजर से देखते हुए चाय की चुस्की लेते हुए बोली,,,)

मुझे अच्छी तरह से याद है मम्मी भला में वह रात कैसे भूल सकता हूं तूफानी बारिश की वह रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन रात थी वह रात मेरी जिंदगी को एकदम से बदल कर रख दी थी सच कहूं तो मम्मी उस रात बहुत मजा आया था (शुभम की बातें सुनकर निर्मला मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसे भी उस रात की सारे दृश्य उसकी आंखों के सामने चलते हुए नजर आने लगे,,, उसे वह सारे दृश्य याद आने लगे जो उस रात को घटे थे किस तरह से कामा दूर होकर वह शुभम को अपनी तरफ आकर्षित करने की पूरी कोशिश कर रही थी और शुभम भी चोरी छुपे उसके खूबसूरत अंगों को देखने का प्रयास कर रहा था,,, चाय पीते हुए निर्मला यही सोच रही थी कि अच्छा हुआ उस रात को तूफानी बारिश हो गई और उन्हें न चाहते हुए भी एक पेड़ के नीचे अपनी गाड़ी खड़ी करके उसी में रुकना पड़ा,,,, निर्मला को अच्छी तरह से याद था कि किसी भी प्रकार की हरकत शुभम की तरफ से बिल्कुल भी नहीं हो रही थी उसी में इतनी ज्यादा काम भावना जागरूक हो गई थी कि ना चाहते हुए भी उसे पेशाब का बहाना करके गाड़ी के अंदर से ही गाड़ी की खिड़की के सहारे खड़े होकर खिड़की के बाहर पेशाब करना पड़ा था और शुभम किस तरह से ललचाई आंखों से उसकी रसीली बुर को देख रहा था,,,, निर्मला कोई अभी अच्छी तरह से याद था कि उसी ने उसके बेटे को एक शादी थी कि वह भी उसी खिड़की पर खड़ा होकर पेशाब करें और जिस समय वह कार की खिड़की से लंड को बाहर निकाल कर बाहर पेशाब कर रहा था तो कैसे वह अपने ही बेटे के लंड को देखकर पूरी तरह से कामातुर हो गई थी और उसके मुंह में पानी आ गया था,,,, अपने बेटे के मोटे तगड़े खड़े लंड को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई थी और उसे छूने की लालच को रोक नहीं पाई और वह खुद अपने बेटे को लंड को पकड़ कर उसे पेशाब करने में मदद की उस रात को निर्मला खुद बेहद कामातुर हो चुकी थी और अपनी मां को पेशाब करते हुए देखकर शुभम भी अपना सब्र खोने लगा था,,, इतने पास से पेशाब करता हुआ देखकर शुभम भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया था और कर भी क्या सकता था इतनी नजदीक से अपनी मां की रसीली पुर के दर्शन करके वह पूरी तरह से छुड़वा सा हो गया था लेकिन वह अपनी तरफ से किसी भी प्रकार का प्रयास नहीं कर रहा था कि वह अपनी मां की चुदाई करें जबकि उससे ज्यादा खुद उसकी मां पर याद कर रही थी कि कब वह मोटे तगड़े लंड को अपने बुर में ले ले,,, आखिरकार दोनों की काम भावनाओं ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया अपने जिस्म की प्यास की जरूरत को ठीक समझते हुए निर्मला ने आखिरकार उस तूफानी बारिश वाली रात को मौके का फायदा उठाते हुए अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेकर उससे चुदवा ली,, और वह सिलसिला एक बार शुरू हो गया तो आज तक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था शुभम उस रात की बात को याद दिलाता हुआ बोला,,,)

मम्मी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि उस रात को हम दोनों के बीच यह सब हो जाएगा सच कहूं तो मैं पागल हो गया था आपकी खूबसूरती को देखकर,,,

तो क्या उस दिन मुझे पहली बार देख रहा था जो पागल हो गया था,,,

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन उस रात की बात कुछ और थी उस रात आप एक मां कम एक औरत ज्यादा लग रही थी क्योंकि कैसे बिना शर्माए आप मेरी आंखों के सामने खिड़की में से पेशाब कर रही थी सच कहूं वह नजारा इतना जबरदस्त था कि मेरा तो उसी समय पानी निकलने वाला था,,,,

तो निकला क्यों तेरा पानी ,,,,(निर्मला हंसते हुए बोली )

क्या करूं मम्मी मैं अपने आप को कितना रोका था मेरा बस चलता तो मैं खुद पहल करके तुम्हारी बुर में अपना लंड डाल दिया होता,,,,,,( शुभम चाय की चुस्की लेता हुआ बोला,,,)

मैं जानती थी तो कुछ नहीं कर पाएगा तो से कुछ होगा नहीं इसलिए मुझे ही पहल करना पड़ा,,, सच कहूं तो अगर मैं पहल नहीं करती तो हम दोनों के बीच आज तक यह सब कुछ भी नहीं होता क्योंकि इस तूफानी रात में मेरे दहन करने के बाद ही तूने सब कुछ दिया था वरना उस रात हम लोग वही रूके रह जाते और हम दोनों के बीच कुछ नहीं हो पाता,,,,

हां मम्मी यह बात सच है चाहता तो मैं बहुत कुछ था करने को लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती थी,,,

मुझे मालूम है चोरी छुपे तू मेरे खूबसूरत बदन के हर एक अंग को देखता था यह बात मुझे अच्छी तरह से पता थी तभी तो मेरी भी इच्छा होने लगी कि मैं भी उन औरतों की तरह तेरे साथ सब कुछ करो जो अपनी खुशी की खातिर अपनी मर्यादा को भूल जाती हैं लेकिन सच कहूं तो शुभम मर्यादा में रहने में वह मजा नहीं है जो मर्यादा को लांघ कर स्वर्ग का मजा आता है,, बस शर्त यही है कि जो तुम करते हो कुछ बारे में किसी तीसरे को बिल्कुल भी पता नहीं होना चाहिए तब तक यह सब कुछ बिल्कुल जायज है वरना सब कुछ नाजायज,,, और हां तुझे मालूम है उस रात को मुझे पेशाब नहीं लगी थी लेकिन मैं जानती थी कि अगर तेरे सामने ऐसा वैसा कुछ नहीं करूंगी तो तू मेरे सामने खुल नहीं पाएगा इसीलिए मैं तेरे सामने पेशाब का बहाना करके तेरी आंखों के सामने मुंह उतनी लगी और वह भी अपनी बुर तुझे दिखा कर,,,( अपनी मां के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर शुभम का लंड खड़ा होने लगा था उसे अपनी मां की बात सुनकर मजा आ रहा था भले यह सब भूली बिसरी बातें थी लेकिन बेहद लजीज बातें थी,,, जिसे सुनकर किसी के भी लंड में पानी आ जाए,,,) अच्छा शुभम सच-सच बताना उस रात को जब मैं अपनी साड़ी उठाकर तेरी आंखों के सामने अपनी गुलाबी बुर दिखा कर पेशाब कर रही थी तो तुझे कैसा लग रहा था मेरी बुर देख कर,,,

मेरे तो होश उड़ गए थे मम्मी मुझे तो ऐसा लग रहा था मुझे कुछ हो जाएगा जिंदगी में पहली बार मैं खूबसूरत औरत की खूबसूरत बुर को देखा था मुझे तो दुनिया की सबसे बेहतरीन चीज देखने को मिल गई थी,,,( शुभम एकदम प्रसन्नता और जोश के साथ उस रात का वर्णन करते हुए बोला,,)



दुनिया की सबसे बेहतरीन चीज तुझे देखने को मिली थी तो उसके साथ तू अपने आप किया कुछ क्यों नहीं,,,?

कैसे करता हूं मम्मी मुझे क्या मालूम था कि तुम्हारे मन में क्या चल रहा है मेरी इच्छा तो बहुत हो रही थी लेकिन सच बताऊं तो मुझे उस समय औरत को कैसे चोदा जाता है या ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था और करता भी तो क्या करता ,,,

तू सच कह रहा है औरतों के प्रति तेरा यह अज्ञान ही मेरे लिए सबसे बड़ा शस्त्र बन गया तुझे पाकर तुझसे चुदवा कर मैं जिंदगी का सबसे हसीन सुख भोग रही हुं,, सच कहूं तो शुभम शीतल की सालगिरह में जाते समय मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन उस तूफानी बारिश ने मेरे सारे इरादे को बदल कर रख दिया ना हम लोग तूफानी बारिश में फंसते ना उस पेड़ के नीचे रुकते और ना हम दोनों के बीच में सब कुछ होता लेकिन सही कहा तो जो भी हुआ वह अच्छा ही हुआ मुझे एक सच्चे मर्द से चुदाई करवाने का सुख क्या होता है इस बारे में पता तो चला महसूस हुआ कि एक स्त्री सुख क्या होता है वरना मैं तो ऐसे ही जिंदगी जिए जा रही थी जिसका कोई मतलब नहीं था,,, मैं अपने आप को संभाल भी ले जाती लेकिन तेरा मोटा तगड़ा मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड देखकर मेरा इरादा फिसल गया मैं ना चाहते हुए भी तेरे साथ सब कुछ कर बैठी,,।
( दोनों की इस तरह की भुली बिसरी यादों के साथ गरम बातें करते हुए पूरे कमरे का माहौल फिर से गर्म हो गया ,,, शुभम का लंड एकदम कड़क लोहे की रोड की तरह हो गया और निर्मला की बुर पसीज के गीली होने लगी,,, कुछ तूफानी बारिश में दोनों के बीच किसी बात को लेकर दोनों में किसी भी प्रकार का अफसोस होता बल्कि खुशी उनके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव दिख रहे थे दोनों ने अपना नाश्ता खत्म भी कर लिया था सुभम चाय पीकर कप को टेबल पर रख कर जैसे ही खड़ा हुआ तो निर्मला की नजर पेंट में उसके तने हुए तंबू पर गई जो की पूरी तरह से तैयार हो चुका था,,, निर्मला का दिल किया कि एक बार फिर से शुभम के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदाई करवा ले,,, लेकिन वह अपनी भावनाओं पर काबू कर ले गई और शुभम भी बिना कुछ बोले अपने हाथ को धोने चला गया,,, और निर्मला अपने बेटे को जाता हुआ देख कर मुस्कुराने लगी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट इसलिए आई थी ,, क्योंकि उसे उसके बेटे को चुदाई करने के लिए ज्यादा तैयार नहीं करना पड़ता था उसे बस अपनी मादकता भरी गांड दिखाकर ही उसके लंड को खड़ा कर देती है,, शुभम के लंड को खड़ा करने के लिए उसे ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी इसीलिए तो उसे अपने बेटे पर गर्व होता था,,।

देखते ही देखते 15 दिन जैसे गुजर गए सरला अपने घर वापस लौट आई थी,,, लेकिन उसे अपनी बहू पांव भारी होने वाले एक भी लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे,, उसे इस बात से चिंता होने लगी,,, क्योंकि वह अपनी सारी इज्जत को दबा कर रख कर अपनी बहू को पड़ोस के जवान लड़के के साथ चुदवाने के लिए बोल चुकी थी और उसकी बहू भी मां बनने की खातिर अपने पड़ोस के लड़के से भरपूर चुदाई का आनंद ले चुकी थी लेकिन उसे भी इस बात की चिंता सताए जा रही थी कि अब तक उसे ऐसा कुछ भी महसूस नहीं हुआ था कि जिससे उसे लगने लगी कि उसका पांव भारी हो गया है,,, इस बारे में सरला भी अपनी बहू से बात कर चुकी थी,, तो रुचि का यही कहना था कि वह अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर चुकी है ऐसा एक भी दिन खाली नहीं गया था जिस दिन शुभम उसकी भरपूर चुदाई ना किया हो और उसने अपनी शादी की सालगिरह वाली भी बात को एकदम बराबर वर्णन करते हुए अपने सास से बता चुकी थी,,, अपनी बहू की बात सुनकर सरला को चिंता होने लगी उसे लगने लगा कि शायद शुभम से भी वह गर्भवती नहीं हो पाएगी,,,, लेकिन रुचि को इस बात से बिल्कुल भी फिक्र नहीं थी हां थोड़ी बहुत उलझन उसे जरूर हो रही थी कि इतने दिन से वह शुभम से चुदवा रही है लेकिन अभी तक वह मां बनने में सफल नहीं हो पाई,, कहीं ऐसा आगे भी चलता रहा तो सब कुछ बेकार हो जाएगा भले ही उसे शारीरिक सुख तो मिल जाएगा लेकिन मां बनने का सुख नहीं मिल पाएगा,,,



सास बहू दोनों चिंतित थे रुचि तो ज्यादा चिंता नहीं करती थी लेकिन अपनी सास के सामने आ जाने पर वह भी झूठ मुठ का चिंता का बहाना करने लगती थी क्योंकि वह इसमें अपनी किसी भी प्रकार की गलती शामिल नहीं होने देना चाहती थी कि उसे मां बनने से ज्यादा चुदाई का सुख अहम था,, लेकिन दो दिन बाद ही रुचि को इस बात का एहसास होने लगा कि उसके शरीर के अंदर कुछ बदलाव आना शुरू हो गया है उसका जी मचलना शुरू हो गया था और सुबह से दो बार उल्टी भी हो गई थी इस बात की खबर सरला को लगते ही वह मारे खुशी से पागल हो गई,,, क्योंकि उसके बेटे के माथे से कलर का जो हटने वाला था भले ही उसकी बहू के पेट में किसी और का बच्चा था लेकिन नाम तो उसका ही आने वाला था दुनिया को क्या खबर की उसकी बहू ने अपने पड़ोस के लड़के से चुदवा चुदवा कर मां बनी है,,, सरला बेहद खुश थी लेकिन रुचि के शरीर में आए इस बदलाव को पूरी तरह से कंफर्म करने के लिए वह रुचि से अपनी प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए बोली,, और रुचि भी अपनी सास की बात मानते हुए मेडिकल से प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाकर उसे से टेस्ट की तो वास्तव में हुआ मां बनने वाली थी उसकी पेट में शुभम का बच्चा पल रहा था उसका पांव भारी हो गया था वह भी मारे खुशी के अपने सास के गले लग गई उसे इस बात की खुशी थी कि उसके पेट में पल रहा बच्चा खूबसूरत मर्दाना ताकत से भरपूर लड़के का था और उसकी खूबसूरती भी उसके संतान में भी उतर आएगी,,, दोनों काफी खुश थे लेकिन उन दोनों ने आपस में बात करके यह तय कर लिया था कि किसी भी हाल में शुभम को पता नहीं चलना चाहिए कि उसके पेट में पल रहा बच्चा उसका ही है वरना भविष्य में गजब हो जाएगा और रुचि को भी इस बात से इनकार बिल्कुल भी नहीं था वह भी नहीं चाहती थी कि ऐसी हालत में उसकी बदनामी हो ,,,भले ही उसके पति का बच्चा उसके पेट में ना होकर पड़ोस के शुभम का बच्चा उसके पेट में पल रहा था लेकिन फिर भी वह मां बनने का सुख तो भोग लेगी,,,, दूसरी तरफ उसका पति इस बात से बिल्कुल अनजान था कि उसकी पत्नी के पेट में बच्चा है और वह मां बनने वाली है और वह बाप बनने वाला है,,, सरला नहीं रुचि से कहीं कि वह फोन करके उसे बता दे कि वह मां बनने वाली है क्योंकि सरला अच्छी तरह से जानती थी कि औरत के पेट में पल रहे बच्चे के महीने से उसके बेटे को कुछ भी फर्क पड़ने वाला नहीं है उसे इस बात का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं है इसलिए रुचि भी अपने पति को फोन करके उसे बाप बनने की बधाई देने लगी उसका पति खुश तो था लेकिन इतनी खुशी रुचि को महसूस नहीं हुई जितना कि एक पति को बाप बनने की खबर सुनकर होती है वह समझ गई थी उसका पति एकदम बुद्धू है,,,,।



धीरे धीरे दिन गुजरने लगे और रुचि के बदन में बदलाव आना शुरू हो गया उसका शरीर धीरे-धीरे भारी होने लगा लेकिन शुभम को इस बारे में जरा भी पता नहीं था वह सरला के घर में होने के बावजूद भी चोरी-छिपे रुचि की चुदाई कर रहा था रुचि भी अच्छी तरह से जानती थी कि कुछ महीने तक वह भी शुभम की चुदाई का आनंद ले ले उसके बाद चुदाई करना उचित नहीं था,,, साला की बुर में भी आग लगी हुई थी वह मौका ढूंढ रही थी शुभम से चुदवाने के लिए लेकिन उसे मौका मिल नहीं रहा था सब कुछ जानते हुए भी उसे अपनी बहू के सामने शर्म महसूस होती थी वह नहीं चाहती थी कि जो एक बार गलती ऊससे हो गई दोबारा वही गलती उससे हो,,, वह मौके की तलाश में ही थी,,,

दूसरी तरफ स्कूल की छुट्टियां चल रही थी शीतल निर्मला दोनों के संबंध फिर से पहले की तरह हो गए थे दोनों में किसी भी प्रकार की झिझक नहीं थी खास करके शुभम को लेकर,,,, शीतल निर्मला के घर कभी भी आने जाने लगी थी दोनों घंटों बैठकर बातें करने लगे थे लेकिन निर्मला इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि शीतल के मन में कुछ और चल रहा है,, बातों ही बातों में शीतल ने अपने घर का रिनोवेशन कराने का जिक्र छेड़ दी और उसे किराए का घर चाहिए था जिसके बारे में जानते ही निर्मला ने अपने ही पड़ोस के खाली बंगले के बारे में उसे बता दी,,, शीतल बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहती थी वह शुभम के इतनी पड़ोस में रहने के लिए हाथ में आया मौका गंवाना नहीं चाहती थी इसलिए तुरंत शीतल से बात करके उस बंगले को देखने के लिए चली गई,,,,। उसे बंगला पसंद आ गया बंगले पर उसका ध्यान कहां था उसे तो बस शुभम के करीब रहना था सब कुछ तय हो गया एक हफ्ते बाद हुआ इस बंगले में अपना सामान खाली करके रहने आने वाली थी,,
इस बात को जानकर शुभम भी काफी खुश नजर आ रहा था लेकिन अपनी खुशी अपने चेहरे पर अपनी मां के सामने जाहिर नहीं होने दिया,,, निर्मला को शीतल के बिछाए जाल के बारे में रत्ती भर भी खबर नहीं थी बहुत शुभम को किसी भी तरह से अपना बनाना चाहती थी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती थी और ऐसा कुछ करना चाहती थी कि निर्मला को सब कुछ मालूम हो लेकिन वह कुछ बोल ना पाए ना तो अपने बेटे को रोक पाए इसीलिए वह फूंक-फूंक कर कदम रख रही थी,,,

शुभम का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि कल उसे अपना रिजल्ट लेने जाना था और वह नहीं चाहता था कि उसके रिजल्ट में उसके रंगीले पन की वजह से जरा भी कमी आए क्योंकि वह जानता था कि पढ़ाई से ज्यादा उसका मन चुदाई में लगने लगा था लेकिन फिर भी भाई मैं वह किसी से पीछे नहीं था,,, लेकिन एक टीचर का बेटा होने के नाते उसके ऊपर ज्यादा दबाव बना हुआ था अगर वह रिजल्ट में कम नंबर लाता है तो एक तरह से उसकी बदनामी हो जाती जो कि वह नहीं चाहता था,,,, रात भर उसे नींद नहीं आई,,,, रात के 3:00 बज रहे थे और वह अपने कमरे में उठकर इधर-उधर चलते हुए चहल कदमी कर रहा था,,,, उससे रहा नहीं जा रहा था तो वह ठंडी हवा खाने के लिए छत पर चला गया जहां परिजन ठंडी हवा चल रही थी उसे ठंडी हवा से राहत महसूस होने लगी क्योंकि घबराहट की वजह से उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,
कुछ देर तक वह छत पर खड़ा होकर ठंडी हवा का मजा ले रहा था कि तभी उसे चूड़ियों के खाने पीने की आवाज आई और वह चूड़ियों की खनक ने की आवाज वाली दिशा में नजर घुमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए वहां पर सरला सोई हुई थी छत पर नरम नरम गद्दे बिछाकर वह सोई हुई थी। वह एकदम बेसुध होकर सोई हुई थी,,, और वह भी पीठ के बल जिसकी वजह से साड़ी का पल्लू उसकी बड़ी बड़ी छातियों पर से नीचे आ गए थे,,, घुटनों को मोड़कर सोने की वजह से उसकी साड़ी ऊपर की तरफ सरक गई थी जिससे उसकी मोटी मोटी जांगे चांदनी रात में और भी ज्यादा चमक रही थी इस अवस्था में सरला को सोता हुआ देखकर शुभम की सारी चिंताएं हवा में फुर्र हो गई,,,,
 
कुछ देर पहले शुभम के माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थी लेकिन छत पर सरला को ईस अवस्था में सोते हुए देखकर उसकी आंखों में चमक आ गई थी,,, उसकी सारी चिंताएं पलभर में ही हवा में जैसे फुर्र हो गई,,,, उसके चेहरे के हाव भाव तुरंत बदल गए ठंडी हवाओं का झोंका उसके तन बदन में ठंडक फैलाने लगा,,, सोती हुई उम्र दराज सरला भी उसे स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की तरह लग रही थी,, भारी बदन की सरला एकदम गोरी थी जिसकी वजह से उसके अंगों का उतार-चढ़ाव बेहद कामुक लगता था शुभम तो उसे देखता ही रह गया चांदनी रात में उसका गोरा बदन बेहद खूबसूरत लग रहा था बेहद गहरी नींद में होने की वजह से उसके वस्त्र क्षेत्र विकसित हो गए थे जिसकी वजह से उसके खूबसूरत बदन का विकसित अंग बाहर को झलक रहा था छाती पर से साड़ी हट जाने की वजह से शुभम को साफ दिखाई दे रहा था कि उसके ब्लाउज के दो बटन खुले हुए थे और ब्लाउज के दोनों बटन खुले होने की वजह से उसकी चुचियों का आधे से ज्यादा भाग बाहर को झूल रहा था वैसे भी सरला की चूचियां आकार में कुछ ज्यादा ही बड़ी थी,,, चिकना मोटा पेट जिसके अगल बगल जवानी की रेखा दर्शाती हुई लकीर पड़ी हुई थी जो कि मर्दों को हमेशा से बेहद कामुक लगती थी,,, गहरी नाभि सरला की रसीली बुर से कुछ कम नहीं थी अगर मर्द चाहे तो उसकी नाभि में भी अपना लंड आगे पीछे करके उसमें अपना पानी निकाल सकता था,,,, सरला अपनी दोनों टांगों को घुटनों के बल मोड़ कर लेटी हुई थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी कसक कर उसकी कमर तक आ गई थी जिसकी वजह से उसकी मोटी मोटी मांसल चिकनी जांघें शुभम की आंखों के सामने अपना जलवा बिखेर रही थी शुभम उसकी मोटी जांघों को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,,

Sarlaa or Shubham


सरला की अर्धनग्न बदन को देखकर शुभम के तन बदन में आग लगने लगा वैसे भी सरला को चोदे हुए काफी समय हो गया था सरला को इस अवस्था में देखकर अब उसे उसको चोदने का मन कर रहा था वैसे भी इसमें कोई बड़ी बात नहीं थी,,, शुभम मौका देखकर जब चाहे तब सरला की चुदाई कर सकता था लेकिन कुछ दिनों से उसे मौका ही नहीं मिला था,,, आज यह मौका उसकी झोली में आ गई राधा तो इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था सरला अभी भी गहरी नींद में सो रही थी उसे इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके बगल में शुभम आकर खड़ा है और उसे देखकर शुभम के साथ-साथ उसका लंड भी खड़ा हो गया है वैसे भी अगर सल्ला को इस बात का आभास हो जाता तो अब तक वह उसकी बाहों में होता और उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुस गया होता क्योंकि सरला भी काफी दिनों से अपनी बुर की खुजली से परेशान हो चुकी थी लेकिन अपनी बहू की मौजूदगी में वह शुभम से चुदवाने में डरती थी,,

Sarlaa chachi ki chuchiyaa

आधी रात से भी ज्यादा का समय हो रहा था यह वह समय था जब सभी लोग एकदम गहरी नींद में होते हैं,,, सुभम अपनी मां की तरफ से पूरी तरह से निश्चिंत था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां छत पर नहीं आने वाली है,, अब वह साला की खूबसूरत बदन के साथ खेलना चाहता था उसके तन बदन में कसमस आहत हो रही थी बस अल्लाह की बड़ी बड़ी चूची को अपने हाथ में लेकर उसे दबाना चाहता था उसे मुंह में भर कर पीना चाहता था उसकी रसीद ईपुर का स्वाद एक बार फिर से अपने होठों से लगा कर लेना चाहता था,,, इसलिए वह घुटनों के बल बैठ गया चांदनी रात में सरला की गहरी नाभि बेहद खूबसूरत लग रही थी और शुभम उसकी गहरी नाभि को चूमने की अपनी लालच को दबा नहीं पाया और धीरे से अपने होंठ को उसकी नाभि पर रखकर हल्का सा चुंबन ले लिया लेकिन फिर भी सरला की नींद नहीं खुली,,, शुभम को इस बात की बिल्कुल भी टिकट नहीं थी कि अगर शर्मा जाग गई तो क्या होगा क्योंकि वह दोनों के बीच में सब कुछ हो चुका था जिससे ना तो सरला को फर्क पड़ने वाला था और ना ही इस बात की चिंता से जानते थे इसलिए वह निश्चिंत होकर सरला के बटन से खेलना शुरू कर दिया और इसीलिए वह अपनी जीभ को हल्के से बाहर निकालकर उसकी नाभि की गहराई में डालकर उसे गोल-गोल घुमाते हुए चाटना शुरू कर दिया,,, शुभम की इस हरकत की वजह से सरला की नींद तो नहीं खुली लेकिन उसके बदन मे कसमसाहट होने लगी वह हल्के हल्के अपने बदन को कसमसाहट भरी हलन चलन देने लगी,,, और उसके मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज नहीं बल्कि ऊमममम ,,,,,,ऊंहहहहहह,,, की आवाज आने लगी शुभम को उसकी इस तरह की आवाज सुनकर इतना तो पता चल गया कि उसे अभी इस बात का बिल्कुल भी आभास नहीं था कि वह उसकी नाभि को अपनी जीभ से चाट रहा है या कोई मर्द उससे बेहद करीब आकर उसके बदन से खेल रहा है वह अभी भी नींद में ही थी,,,, कुछ देर तक यूं ही शुभम उसकी गहरी नाभि को उसकी रसीली बुर समझ कर उसको चाटने का पूरा मजा लेता रहा,,,,
शुभम का लंड एकदम टन्ना गया था,,, और शुभम का टनटनाया हुआ लंड जिस औरत की बुर में जाता है पूरा धमाल मचा कर ही वापस आता है,,, लेकिन अभी शुभम का ऐसा कुछ भी इरादा नहीं था,,, अभी वह जी भरके सरला की खूबसूरत बदन से खेलना चाहता था शुभम की हरकतों की वजह से सरला की नींद बिल्कुल भी नहीं टूटी थी,,, सरला की बड़ी-बड़ी अर्धनग्न चूचियां शुभम की उत्तेजना के केंद्र बिंदु बने हुए थे इसलिए वह अपने दोनों हाथों से उसके ब्लाउज के बटन धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दिया,,, शुभम की दिल की धड़कन बड़ी जोरों से चल रही थी क्योंकि यह शुभम के लिए पहला मौका था जब वह एक सोई हुई औरत के ब्लाउज के बटन को खोल रहा था,,,
देखते ही देखते शुभम ने सलाह के ब्लाउज के बाकी के सारे बटन खोल दिए और जैसे ही बटन खुला वैसे ही सरला की बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छातियों पर लहराने लगी और उसकी बड़ी-बड़ी गोल गोल लहराती हुई चुचियों को देखकर शुभम के मुंह में पानी आ गया,,, वह निप्पल को मुंह में भर कर पीने की अपनी लालच को दबा नहीं पाया और झुककर सरला की दोनों चूचियों को हाथों से पकड़कर उसे मुंह में भर कर पीना शुरु कर दिया,,, शुभम की इस हरकत की वजह से सरला की नींद खुल गई एकदम से छटपटा गई क्योंकि वह एकदम नींद में थी उसे नहीं मालूम था कि उसके ऊपर कौन बैठा है और उसकी चूची को मुंह में भरकर पी रहा है वह एकदम से घबरा गई और चिल्लाने ही वाली थी कि अब तक शुभम उसके मुंह पर हाथ रखकर उसका मुंह दबा दिया और बोला,,,



चाची में हूं शुभम चिल्ला क्यों रही हो,,,,

शुभम तू ,,,,तु इतनी रात को यहां क्या कर रहा है सरला घबराहट भरे स्वर में बोली ,,,,)

क्या करूं चाची मुझे नींद नहीं आ रही थी,,,,( सरला की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हथेली में भरकर दबाते हुए,,)

क्यों नींद क्यों नहीं आ रही थी मेरी याद आ रही थी क्या तुझे,,,,,

चाची तुम्हारी याद तो मुझे हमेशा आती है पता है कितने दिन हो गए तुम्हारी चुदाई किए मैं तो पागल हो गया था तुमसे मिलने के लिए,,,

चल झूठा इतने दिन से आई हूं लेकिन कभी मिलने तो आया नहीं,,,,

मैं मजबूर था चाची क्या करता तुम्हारी बहू के सामने तुम्हारी साड़ी उठाकर तुम्हारी बुर में लंड डाल देता तो क्या यह अच्छा होता,,, इसलिए मैं नहीं आ रहा था कहीं तुम्हारी बहु को पता चल जाता तो मुसीबत हो जाती वह तुम्हारे बारे में क्या सोचती मेरे बारे में क्या सोचती सब गड़बड़ हो जाता ,,,,( शुभम शर्मा की चूचियों से खेले जा रहा था और उससे सफाई देते जा रहा था वह नहीं जानता था कि दोनों सास बहू को एक दूसरे का राज पता है और सरला भी शुभम की बात सुनकर एकदम निश्चिंत हो गई थी कि उन दोनों के बारे में उसे बिल्कुल भी नहीं पता कि दोनों एक दूसरे का राज जानती है इसलिए वह मुस्कुरा कर बोली,,)

तो बहुत अच्छा है शुभम जो मेरी इज्जत के बारे में इतना सोचता है ,,,,

चाची तुम्हारी इज्जत के बारे में सोचता हूं तभी तो तुम अपनी इज्जत मेरे से लूटवा रही हो,,( दोनों चूचियों को जोर-जोर से मसलते हुए)

लेकिन तुम इतनी रात को छत पर कैसे आ गया कितना समय हो रहा है अभी,,,( सरला उसी तरह से नरम नरम गद्दे पर लेटे हुए ही बोली)
sarlaa ki gori gori gaand

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बोल तो रहा हूं कि तुम्हारी याद आ रही थी और सही कहो तो मैं बहुत परेशान था कल मेरा रिजल्ट आने वाला है मुझसे रहा नहीं जा रहा था एक तो तुम्हारी याद सता रही थी ऊपर से यह कल रिजल्ट आने वाला था इसलिए मैं थोड़ा अपने मन को हल्का करने के लिए छत पर आ गया और छत पर देखा तो तुम यहां बेसुध होकर सो रही हो तुम्हारे खूबसूरत मोटी मोटी जांघों को देखकर मेरा मन डोल गया,,,
( शुभम की बातों को सुनकर सलाह मन ही मन में प्रसन्न होने लगी अभी भी उसकी दोनों चूचियां उसके हाथों में थी और वह जोर जोर से दबा रहा था जिससे रह-रहकर बीच में सरला की कराहने की आवाज निकल जा रही थी लेकिन सच पूछो तो शुभम के द्वारा इस तरह से जोर-जोर से चूचियां दबाने में सरला को ही अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी)



अच्छा हुआ तू इधर आ गया तेरा रिजल्ट अच्छा ही जाने वाला है मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है बस तू एक बार मेरी बुर के दर्शन कर ले ,,,,(इतना कहने के साथ ही सरला एकदम बेशर्मो की तरह अपने दोनों हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी टांग को एकदम सीधे फैला दी और अपनी गांड को हल्के से उठाकर अपनी साड़ी को एकदम कमर तक चढ़ा दी जिससे उसकी नंगी रसीली हल्के बालों वाली बुर नजर आने लगी सरला की कामुक हरकत और उसकी टांगों के बीच की रसीली दरार को देखकर शुभम के तन बदन में उत्तेजना का पारा एकदम आसमान छूने लगा,,, एकदम बदहवास हो गया मदहोशी उसके तन बदन को जब जोड़ने लगे वह मदहोशी के हालत में अपना एक हाथ सरला की टांगों के बीच ले जाकर उसकी गुलाबी बुर को जोर-जोर से मसलते हुए बोला,,,,)

ओहहहह, मेरी प्यारी चाची तुम अपनी बुर के दर्शन मुझे करा कर मेरा दिल बना दिया अब मुझे पूरा यकीन है कि मेरा रिजल्ट अच्छा जाएगा,,,,,( इतना कहते हुए शुभम सरला की बुर में अपनी दो उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करने लगा जिससे सरला के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,)
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ससससहहहह,,,,आहहहहहहह,,,सुभम,,,,, उफ़फ,,,
( सरला शुभम की गर्माहट भरी रगड़ से एक दम मस्त हो जा रही थी शुभम घुटनों के बल बैठ कर अच्छे से सरला की बुर में अपनी उंगली पेल रहा था जिससे उसके पजामे में बना तंबू सरला की आंखों के सामने अपना जलवा बिखेर रहा था सरला झट से अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर तुरंत शुभम के पजामे को नीचे खींच ली और उसका लंड हवा में लहराने लगा वह शुभम के लंड को पकड़कर हल्के हल्के हिलाने लगी,,,,, वह भी काफी दिनों बाद शुभम के लंड को अपने हाथों में ली थी इसलिए वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई शुभम सरला की हरकत को देखकर उसे नहीं तरीके से मजा देना चाहता था इसलिए वह अपना पजामा उतार कर एकदम नंगा हो गया हो सरला के कंधों के अगल-बगल अपने घुटने टेक कर झुक कर अपने लंड को सरला के मुंह पर लहराने लगा और खुद उसकी टांगों के बीच झुक गया और उसकी रसीली बुर को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया शुभम की इस हरकत की वजह से सरला एकदम से चुदवासी हो गई उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट गई और शुभम की इस युक्ति को वह समझते हुए तुरंत लपक कर शुभम के लंड को अपने मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरु कर दी,,,, सरला ने अपनी पूरी जिंदगी में इस आसन का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं की थी आज सुबह द्वारा इस आसन का प्रयोग करके उसे दोगुना आनंद मिल रहा था एक तो उसी समय उसकी बुर पर शुभम की जीभ चल रही थी और उसी समय उसके मुंह में सुभम का लंड भी था जिसे वह लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी,,, दोनों को इसमें आनंद की प्राप्ति हो रही थी खुली छत पर यह उन दोनों का दूसरा मौका था जब दोनों एक दूसरे में खोने की पूरी चेस्टा कर रहे थे,,, ठंडी ठंडी हवा चल रही थी और चांदनी रात ऐसे में दो जिस्म एक होने में जुटे हुए थे गजब का नजारा छत पर बना हुआ था,, शुभम तो अपनी जीभ की करामत दिखाते हुए उसकी बुर को चाट चाट कर ही उसे एक बार झाड़ दिया सरला जितना मजा जवानी के दिनों में नहीं पाई थी उससे कहीं ज्यादा मजा इस उम्र में उसे एक नौजवान लड़का दे रहा था वह काफी खुश थी,,,, क्योंकि सरला को एक बेहद मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड प्राप्त हुआ था जो उसकी बुर में कसा हुआ तो घुसता ही था उसके मुंह में भी एकदम कसके जा रहा था,,,,, शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह सरला की बुर चाटते हुए अपनी कमर हिला रहा था,,, शुभम नहीं चाहता था कि उसके लंड का पानी सरला के मुंह में निकल जाए इसलिए वह अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर खींच लिया और उसकी टांगों के बीच अपने लिए जगह बना लिया,,,, देखते ही देखते शुभम अपने लंड को उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी बुर में डाल दिया और उसकी गहराई नापते हुए धक्के पर धक्के लगाने लगा,,,, उन दोनों को चुदाई का बेहतरीन आनंद प्राप्त हो रहा था कि तभी उन्हें छत पर किसी के पैरों की आहट सुनाई दी,,,, दोनों एकदम चौकन्ने हो गए सरला तो एकदम घबरा गई,,,, पायल की आवाज को सुनकर शुभम समझ गया कि छत पर उसकी मां आ गई है वो एकदम से घबरा गया,,,, वह तुरंत सरला के ऊपर लेट गया अभी भी फर्नांडिस की बुर के अंदर था वह धीरे से चला के कान में बताया कि उसकी मां छत पर आ गई है सरला की तो जैसे सांस ही बंद हो गई एकदम से घबरा गयी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वास्तव में यह बेहद शर्मनाक हादसा हो जाता अगर उसकी मा सरला को इस तरह से उसके बेटे से चुदवाते हुए देख लेती तो,,,,
Shubham 69 position me uski boor chatte huye or sarla shubham ka lund chuste huye


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ऐसे में सरला का दिमाग काम कर गया सुभम को तो पता ही नहीं चल रहा था कि वह क्या करें उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था सरला फुर्ती दिखाते हुए अपने पास में पड़े मोटे कंबल को झट से उठा ली और उसे अपने साथ-साथ शुभम को भी ओढ़ा दी,, और उसे अपने बदन से एकदम से चिपका ली,,,, शुभम भी मौके की नजाकत को समझते हुए उसे अपनी बांहों में भरकर एकदम ऊससे चिपक गया था कि किसी को पता नहीं चले कि उसके ऊपर कोई लेटा हुआ है,,,, सरला पूरी तरह से कंबल से अपने बदन को ढक ली थी और केवल अपने मुंह को खुला छोड़ दी थी और अपनी आंखों को बंद कर ली थी लेकिन हल्के हल्के आंखों को खोल कर देख ले रही थी कि क्या हो रहा है,,,
सरला को चांदनी रात में साफ नजर आ रहा था कि निर्मला छत पर इधर-उधर घूम रही थी ऐसा लग रहा था कि किसी को ढूंढ रही थी उसे समझते देर नहीं लगी कि वह शुभम को ही ढूंढ रही थी,,, वह धीरे-धीरे खुश हो जाते हुए शुभम को सब कुछ बता रही थी कि क्या हो रहा है अभी भी उसका मोटा तगड़ा लंड सरला की बुर में घुसा हुआ था जिससे वह अपनी कमर हिलाने से बाज नहीं आ रहा था वह इतने नाजुक समय में भी सरला की चुदाई हल्के हल्के झटकों के साथ कर रहा था जिससे सरला को भी मजा आ रहा था लेकिन वह बार-बार उसे इशारा करके उसकी कमर को रोक दे रही थी,,, तभी निर्मला उसकी छत की तरफ आती दिखाई दी और वह शुभम को इशारा करके एकदम शांत रहने को बोली अपनी आंखों को बंद कर ली थी,,,,
निर्मला शुभम को ढूंढते हुए धीरे-धीरे सरला के बेहद करीब आ गई जहां पर वह बिस्तर बिछा कर सो रही थी,,, सरला अभी भी अपनी आंखों को बंद किए हुए थी उसकी दिल की धड़कन बड़ी जोरों से चल रही थी वह घबराई हुई थी लेकिन अपनी घबराहट को अपने चेहरे पर आने नहीं दे रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं निर्मला को पता ना चल जाए कि उसके ऊपर उसका बेटा लेट कर उस की चुदाई कर रहा है वरना गजब हो जाएगा,,,,
निर्मला को भी अजीब लग रहा था कि सरला छत पर इस तरह से सोई हुई है,,, बेहद करीब आने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाई की तभी पास में पड़ा पानी का जग जोकी एकदम खाली था वहां निर्मला के पेर से टकराकर गिर गया जिसकी आवाज से सरला जानबूझकर अपनी आंखें खोलने का नाटक करते हुए हड़बड़ाहट में बोली,,,

कककक,, कौन है,,, कौन है,,,,,

अरे मैं हूं निर्मला,,,,

निर्मला तुम यहां क्या कर रही हो,,,,

कुछ नहीं बस ऐसे ही नींद नहीं लग रही थी तो इधर आ गई लेकिन तुम यहां क्यों सो रही हो कमरे में अच्छी तरह से सोना चाहिए था ना,,,

नहीं मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी मुझे थोड़ा घबराहट सा हो रहा था इसलिए मैं इधर छत पर आ गई,,,

घबराहट हो रही है तो इस तरह से मोटा कंबल ओढ़ कर सोई हो,,,,( निर्मला की इस बात से सरला एकदम से घबरा गए और शुभम भी क्योंकि सच में किसी को भी शंका हो सकती है कि गर्मी के मौसम में इस तरह से कंबल ओढ़ के क्यों सोई हुई है लेकिन सरला अपना दिमाग दौड़ाते हुए झट से बोली,,)

मैं जानती हूं निर्मला लेकिन मुझे बुखार जैसा लग रहा था इसलिए ओढ़ कर सोई हूं और वैसे भी इस तरह से खुले छत पर ओस गिरती है जिससे तबीयत खराब होने का डर रहता है इसीलिए मैं कंबल ओढ़ कर सोई हूं,,,( सरला के तेज चलते दिमाग से शुभम काफी प्रभावित हो रहा था और इस तरह से अपनी मां को बेहद करीब खड़ा पाकर शुभम की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वह हल्के हल्के अभी भी अपनी कमर को हिला रहा था और सरला उसकी हिलती हुई कमर को छुपाने के लिए अपने घुटनों को इधर-उधर कर रही थी ताकि निर्मला को बिल्कुल भी शक ना हो कि कुछ गड़बड़ हो रहा है,,, निर्मला को इस तरह से अपने पास में खड़ी हुई देखकर ना जाने क्यों सरला का भी जोश बढ़ता जा रहा था उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर ज्यादा जोर मार रही थी और शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में महसूस करके उसकी हालत खराब हुए जा रही थी,,, शुभम सरला के बदन से एकदम चिपका हुआ था उसकी चुचियों पर सर रखकर अपनी कमर को हल्के हल्के हिला कर उसकी चुदाई कर रहा था,,, निर्मला ऊपर से नीचे तक बराबर सरला के बिस्तर पर नजर डाल कर देख रही थी क्योंकि उसके मन में शंका भी हो रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं इतनी रात के बाद शुभम उठकर सरला के पास ना आया हो क्योंकि कुछ भी हो कभी कभी उसे शुभम पर भरोसा नहीं होता था उसे ऐसा लगता था कि शुभम किसी भी औरत की चुदाई कर सकता है,,,, लेकिन सरला को ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था जिससे उसकी संघ का हकीकत में बदल जाए बस हल्की हल्की कंबल इधर उधर ही रही थी जो कि उसे ऐसा लग रहा था कि सरला की टांग हिलाने से ऐसा हो रहा है जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसकी आंखों के सामने कंबल के नीचे उसका बेटा पड़ोस की औरत की जमकर चुदाई कर रहा था,,, और इतने पास होने के बावजूद भी निर्मल को इस बात की भनक तक नहीं लग पाई थी क्योंकि सरलाने इस कदर से पूरे माहौल को संभाल जो ली थी,,,, अभी भी शुभम अपनी कमर को हल्के हल्के हिला रहा था सलाह को साफ महसूस हो रहा था कि ऐसे हालात में भी शुभम का लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और उसे अच्छी तरह से उसके कड़क पन का एहसास भी हो रहा था जिससे वह एकदम मदमस्त हुए जा रही थी,,,, पूरी तरह से तो शादी कर लेने के बाद निर्मला वहां से जाने लगे और सरला से बोली,,)



अच्छा तुम आराम करो मैं चलती हूं,,,

नींद ना आ रही हो तो यही कुछ देर बैठ जाओ ठंडी हवा का मजा लो,,,

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है सच कहूं तो मैं शुभम को ढूंढने आई थी इतनी जल्दी उठ कर पता नहीं कहां चला गया,,,,

अरे नौजवान लड़का है कहीं कसरत करने के लिए दौड़ने के लिए गया होगा आ जाएगा,,,,,

चलो कोई बात नहीं तुम आराम करो मैं भी कुछ देर जाकर सो जाती हूं अभी सुबह होने में समय है ,,,

इतना कहकर निर्मला वहां से चली गई और उसकी जाने के बाद ही शुभम अपनी कमर की रफ्तार एकदम तेजी से बढ़ा दिया क्योंकि उसे पता चल गया था कि उसकी मां उसे ढूंढते ढूंढते छत पर आई है इसलिए उसे जाना बहुत जरूरी था,,, शुभम जोर जोर से धक्के लगा रहा था निर्मला की हर धक्के के साथ उसकी आह निकल जा रही थी ऐसा लग रहा था कि 15 20 दिनों की कसर आज के दिन ही वह निकाल लेगा,,,,, सरला को बहुत मजा आ रहा था शुभम से इस तरह से चुदवाने में देखते ही देखते शुभम और सरला दोनों एक साथ झड़ गए,,,,


शुभम अगर इस तरफ से अपने घर में जाता तो दिक्कत हो जाती है इसलिए सरला ने हीं उसे बताई कि वह उसकी सीढ़ियों से नीचे उतर कर रोड पर चला जाए और वहां से अपने घर पर जाए तब उसकी मां को बिल्कुल शक भी नहीं होगा शुभम ने ऐसा ही किया वह सरला की सीढ़ियों से नीचे उतर कर उसके घर से होता हुआ बाहर आ गया और तकरीबन आधे घंटे बाद जब सुबह की पहली किरण फैलने लगी तब वह अपने घर में प्रवेश किया,,,
 
, सरला और शुभम के बीच जो कुछ भी हुआ था बेहद रोमांचक और जबरदस्त हुआ था,,,जिंदगी में पहली बार शुभम अपनी मां की मौजूदगी में किसी ‍गैर औरत की जबरदस्त चुदाई कर रहा था और वह भी उसकी मां के इतने करीब होने के बावजूद,, केवल उन दोनों के बीच में एक कंबल की अड़चन थी वरना सब कुछ निर्मला की आंखों के सामने था लेकिन सारे मामले को सरला इतने सहज भाव से संभाल ले गई कि निर्मला को शक तक नहीं हुआ कि कंबल के नीचे सरला अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई करवा रही है,,,,


निर्मला काफी चिंतित है क्योंकि ऐसा कभी भी नहीं हुआ था कि इतनी सुबह सुबह शुभम घर से बाहर चला जाए इसलिए शुभम को घर में वापस आता देखकर वह बहुत प्रसन्न हुई और आते हैं तुरंत सवालों की झड़ी बरसा दी,,, लेकिन शुभम अपनी मां के सवालों का एकदम ठंडे भाव में जवाब देते हुए बोला,।

मम्मी तुम क्यों इतना परेशानहो रही हो तुम तो जानती ही हो कि आज रिजल्ट निकलने वाला है और इस बात को लेकर मैं कितना परेशान था रात भर मुझे नींद नहीं आई,,,इसलिए अपने मन को थोड़ा शांत करने के लिए मैं ठंडी हवा खाने के लिए सड़क पर निकल गया और अभी वापस लौटा हूं क्यों क्या हुआ,,,?

लेकिन तू क्यों इतना परेशान होता है मालूम है मैं कितना घबरा गई थी मैं समझ नहीं रही थी कि तू रिजल्ट की वजह से इतना परेशान हो जाएगा अरे मुझे पूरा यकीन है कि तू पास हो जाएगा और अच्छे नंबर से पास हो जाएगा,,,(इतना कहते हो गए निर्मला शुभम को अपने गले से लगा ले लेकिन शुभम एक बेटे के साथ-साथ सबसे पहले एक मर्द का जो कि गले लगाने की वजह से उसकी नरम नरम चुचियों का स्पर्श अपने सीने पर होते ही,,,शुभम की संभावना एक बार फिर से जागने लगी अभी अभी कुछ देर पहले ही वह अपनी मां की आंखों के सामने ही कंबल के नीचे पड़ोस की सरला आंटी की जबरदस्त चुदाई करके आया था और फिर से अपनी मां का नरम कामुक स्पर्श पाकर फिर से एकदम से चुदवासा होने लगा था इसलिए वह अपनी मां को अपनी बाहों में कस कर अपनी हथेली को उसकी बड़ी बड़ी गांड पर ले जाकर दबाना शुरू कर दिया उसकी मां उसे आश्चर्य से देखते हुए बोली,,,,


अच्छा तो जनाब को आज रिजल्ट निकलने का बहुत ज्यादा चिंता है और चिंता में रात भर नींद नहीं आई यही ना,,,

हां मम्मी मैं सच कह रहा हूं ,,,(इतना कहने को साथ ही शुभम धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को उपर की तरफ सरकाने लगा तो उसकी मां उसका हाथ झटक ते हुए बोली,,)

अभी कुछ भी नहीं रिजल्ट आ जाने दे शाम को तुझे खुश कर दूंगी ,,,(इतना कहकर शुभम की तरफ देखे बिना ही वह हंसकर रसोई घर में चली गई और शुभम बाथरूम में,,)

शुभम तकरीबन 12:00 बजे अपनी स्कूल पहुंच गया,,आज उसकी मां स्कूल नहीं गई थी इसलिए अकेला ही स्कूल गया था और जैसे ही रिजल्ट उसके हाथ में आया वह मारे खुशी के पागल हो गया क्योंकि उसका 92 परसेंट आया था,,, सबसे पहले उसने अपना रिजल्ट शीतल को दिखाया शीतल उसके रिजल्ट को देखते ही एकदम खुश हो गई और बोली ,,,, shital k sath masti karte huye..


आज तो तुमने मैदान मार लिया मुंह मीठा कब करा रहे हो,,,(दोनों बातचीत करते हुए सीढीओ से उतर रहे थे..)

जल्दी आपका मुंह मीठा करा दूंगा शीतल मैडम अभी तो मेरे पास पैसे बिल्कुल भी नहीं है,,,



लेकिन मुझे तो अभी मुंह मीठा करना है,,,( इतना कहते हुए शीतल सीढ़ी पर ही रुक गई शुभम उससे एक सीडी नीचे उतर कर वहीं खड़ा हो गया,,,)

मैडम जी समझा करो मेरे पास अभी पैसे बिल्कुल भी नहीं है मैं अकेला ही स्कूल आया हूं,,,

यह जरूरी नहीं सुभम की मिठाई खाकर ही मुंह मीठा किया जाए दूसरा तरीका भी है मुंह मीठा करने का,,,(इतना कहकर शीतल मुस्कुराने लगी शुभम समझ नहीं पा रहा था कि शीतल क्या कहना चाहिए इसलिए वहां बोला..)

मैडम जी आप क्या कहना चाह रही हैं मैं समझ नहीं पा रहा हूं,,,

इसमें समझने वाली बात नहीं है शुभम करने वाली बात है (इतना कहने के साथ ही शीतल अपनी गुलाबी होठों को अपना चेहरा झुका कर उसे शुभम के सामने परोस अपील की इस हरकत को देखकर शुभम समझ गया कि उसे क्या करना है लेकिन फिर भी वह अपने आजू-बाजू दृष्टि डालकर निश्चित कर लेना चाह रहा था कि कहीं कोई देख तोनहीं रहा है जब उसे कोई भी नजर नहीं आया तो वह भी अपने गुलाबी होठों को आगे करके शीतल के तपते हुए होंठ पर रख दिया और उसे चुमना नहीं बल्कि चुसना शुरू कर दिया,,,जैसे ही शुभम को शीतल के गुलाबी होंठों का स्पर्श अपने होठों पर हुआ उसके तन बदन में आग लग गया उसके पैंट के अंदर उसका लंड फुफकारने लगा,,,शीतल भी मर्दाना जोश से भरे हुए होंठों का स्पर्श अपने होंठ पर कर के अंदर तक उत्तेजना के मारे सिहर उठी,,,,लो कट ब्लाउज पहने होने की वजह से उसकी आधी से ज्यादा चूचियां झुकने की वजह से और ज्यादा ब्लाउज के बाहर आ गई जिसे शुभम उत्तेजना के मारे अपने दोनों हाथों से थाम लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया जिससे शीतल के तन बदन में यह काम आग में घी डालने का कर रहा था,,,, शुभम की यह हरकत शीतल को मोटे तगड़े लंड के लिए तड़पाने लगी और शीतल उत्तेजना बस अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर शुभम के पेंट के ऊपर से ही उसके तने हुए लंड को दबाना शुरू कर दी,,,, शुभम के खड़े लंड को पेंट के ऊपर से पकड़कर शीतल एकदम मदहोश होने लगी मदहोशी उसके तन बदन में छाने लगी वह जोर-जोर से सुभम के लंड को पेंट के ऊपर से दबाना शुरु कर दी,,, शीतल एकदम से चुदवाती हो रही थी वह भी भूल गई कि वह इस वक्त स्कूल में स्कूल की सीढ़ी पर खड़ी है जहां पर किसी भी वक्त किसी के भी आने की


आशंका हो सकती है तो पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी और शुभम भी शीतल के गुलाबी होंठों को चूस कर एकदम मस्त हुए जा रहा था उसके अंदर जैसे लग रहा था कि 4 बोतलों का नशा होने लगा है वह दोनों हाथ से शीतल की दोनों चूचियों से खेल रहा था उसका बस चलता तो ब्लाउज के बटन खोल कर उन्हें बाहर निकाल लेता और होंठों की जगह उसको मुंह में भरकर चूसना शुरू कर देता,, शुभम की हालत खराब होने जा रही थी काफी दिनों बाद उसे शीतल के लाल लाल होठों को चूसने का मौका जो मिला था यही अच्छा तोहफा था शीतल की तरफ से शुभम के लिए और मुंह मीठा कराने का शुभम की तरफ से शीतल के लिए,,,, दोनों काम भावना के अधीन होकर एक दूसरे की अंगों को खंगालने की पूरी कोशिश कर रहे थे,,।
दोनों लगातार एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए एक दूसरे के नाजुक अंगों से खेल रहे थे,,, शुभम शीतल की कसी हुई ब्लाउज में कैद दोनों कबूतरों को जी जान से दोनों हाथों से दबा रहा था ,,, ऐसा लग रहा था मानो वह दोनों कबूतरों का गला घोट रहा हो,,, लेकिन इसमें दोनों कबूतरों की जान निकलने की संभावना बिल्कुल भी नहीं थी,,, इससे दोनों की खूबसूरती में और चार चांद लग जाने का गुंजाइश पूरा था।
shital ki madmast gaand

शुभम के खड़े लंड को पेंट के ऊपर से जोर जोर से दबाने की वजह से उसकी पेंटी पूरी तरह से गीली हो गई थी वह लगातार मदन रस बरसा रही थी,,,,,शीतल की तो इच्छा हो रही थी कि अभी इसी वक्त अपनी साड़ी उठाकर पीछे से शुभम के लंड को अपनी बुर में दाखिल करवा ले ,,,और यही अच्छा शुभम की भी हो रही थी काम भावना में दोनों इतने मस्त हो गए थे कि इस बात का भान तक दोनों में नहीं था कि वह दोनों कहां खड़े हैं,,पहले से ही सुभम की शीतल को चोदने की इच्छा बहुत होती थी लेकिन आज इस तरह की हरकत की वजह से वह शीतल को इसी समय चोदने के मूड में था,,, वह अपने लंड में काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे डर था कि कहीं उसका लंड पानी ना फेंक दे,,, इन दोनों का कार्यक्रम कुछ और ज्यादा आगे बढ़ता इससे पहले ही उन दोनों को किसी के आने की कदमों की आहट सुनाई देने लगी दोनों झट से एक दूसरे से अलग हो गए और शीतल जल्दी से अपने कपड़े को व्यवस्थित करने लगी तभी सामने से प्रिंसिपल सर आते हुए नजर आए,,, प्रिंसिपल को देखते ही दोनों की हालत खराब होने लगी वह दोनों कुछ कहते हैं इससे पहले ही प्रिंसिपल बोल पड़े,,,

शीतल यहां क्या कर रही हो तुम्हें शर्मा मैडम बुला रही हैं,,,

कुछ नहीं सर शुभम का रिजल्ट आया था तो वही देख रही थी,,,

अच्छा यह तो अपने निर्मला मैडम के लड़के हैं ना,,,,

हां सर उन्हीं के लड़के हैं दिखाओ तो अपना रिजल्ट(बड़ी मुश्किल से सुदामा अपने पेंट के तंबू को प्रिंसिपल सर के नजरों से बचाकर अपना रिजल्ट उनके हाथ में थमा दिया जिसे देख कर खुश होते हुए प्रिंसिपल बोले,,,)
मुझे पूरा यकीन था शुभम की एक टीचर के लड़के होने के नाते तुम बहुत ही अच्छा नंबर लाओगे,,, और मेरी उम्मीद से तुम कहीं ज्यादा खरे उतरे हो वेल्डन माय बॉय,,,(इतना कहकर प्रिंसिपल शुभम की पीठ थपथपाते हुए सीढ़ियों से नीचे उतर गया,,,प्रिंसिपल के जाते ही शुभम एक बार फिर से शीतल के लाल लाल होठों का स्वाद लेना चाहता था लेकिन तभी 2 4 विद्यार्थी वहां आते हुए दिखाई दिए तब ना चाहते हुए भी दोनों को एक दूसरे से अलग होना पड़ा,,,

घर पहुंच कर जैसे ही वह रिजल्ट को अपनी मां के हाथों में थमाया,, रिजल्ट देख कर निर्मला एकदम खुश हो गई उसकी आंखों में चमक देखकर शुभम खुश होने लगा उसकी मां तुरंत उसे अपने गले लगा कर उसके माथे को चूम ली,,, लेकिन इतने से शुभम कहां मानने वाला था,,शीतल ने अपनी कामुक हरकतों से वैसे ही पहले से उसे काफी एकदम से चुदवासा बना दिया था,,, इस तरह से उसकी मां के द्वारा गले लगाने की वजह से खूबसूरत बाहों में आते ही एक बार फिर से शुभम का लंड खड़ा हो गया,,, वह प्यार से उसके माथे को चूम रही थी तो शुभम जवाब में उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया,,,निर्मला को लगा कि उसका बेटा बस ऐसे ही दुलार में उसके होंठों को चूस रहा है लेकिन पलभर में ही उसे समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा काफी उत्तेजित हो चुका है और जोर-जोर से अपने मुंह में भर कर निर्मला के लाल लाल होठों का रस पीना शुरू कर दिया और साथ ही अपने दोनों हाथों को उसके पूरे बदन पर घुमाने लगा,,,,
वह कभी ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चूचियों को दबाता तो कभी उसकी साड़ी के ऊपर से बड़ी बड़ी गांड को मसल देता,,,साथ ही प्रिंट में बने अपने कमरों को बाहर बार उसकी दोनों टांगों के बीच दबा दे रहा था जिससे निर्मला को भी उसके लंड का खड़े होने का एहसास हो रहा था,,, लेकिन निर्मला के समय कुछ भी करवाना नहीं चाहती थी लेकिन शुभम कहां मानने वाला था वह धीरे-धीरे निर्मला के साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा और निर्मला उसे रोकते हुए बोली,,,

अभी नहीं सुभम बाद में आराम से तुझे दूंगी अभी मत ले,,,

नहीं मम्मी मुझे अभीतुम्हारी लेना है क्योंकि तुमने मुझे वादा की थी कि रिजल्ट आने के बाद तुम मुझे दोगी इसलिए मे मानने वाला नहीं हूं ,,,,(इतना कहने के साथ ही उत्तेजना बस सुभम में इतनी ज्यादा ताकत आ गई थी कि वह अपना दोनों हाथ निर्मला के नितंबों को लगाकर उसे उठा लिया,, धीरे-धीरे वह सीधा अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया जो कि बेहद काम उत्तेजना से भरा हुआ ना जा रहा था क्योंकि निर्मला का बदन काफी भारी था शुभम जी अपनी जवानी की दौड़ में था और प्रकृति बदन होने की वजह से ऊसमें काफी ताकत थी और उससे भी ज्यादा तो वह उत्तेजित था और उत्तेजना में इंसान कुछ भी कर सकता है और उत्तेजना के चलते वह अपनी मां को गोद में उठा लिया था उसकी साड़ी पूरी कमर तक उठी हुई थी उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, सुबह एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपने पजामे को नीचे कर दिया और अपने खड़े लंड को हाथ में लेकर हिलाना शुरू कर दिया,,, उसकी मां उसे रोकती रही लेकिन वह माना नहीं और अपने लंड के सुपाड़े को उसकी गांड के बीचों बीच रखकर जैसे ही दबाया तो उसे इस बात का आभास हुआ कि उसकी मां ने पैंटी पहन रखी है इसलिए उसे एक हाथ से पेंटी को उसकी बुर वाली जगह से हटाने लगा ताकि ऊतनी सी जगह में अपने लंड को डालकर उसकी बुर में प्रवेश करा सके लेकिन जिस तरह से अपनी मां को गोद में उठाए हुए थाउस स्थिति में पेंटी का थोड़ा सा भी उसके स्थान से सड़क जाना नामुमकिन था इस बात को अच्छी तरह से समझ गया था इसलिए जहां पर उसकी मां सीढ़ियों के पास खड़ी थी पर वह अपनी मां को लिटा दिया,,, साड़ी अभी भी कमर तक चढ़ी हुई थी जिससे उसकी मोटी मोटी मांसल गुदाज गोरी जांघें नजर आ रही थी जिसे देखते ही शुभम की आंखों में वासना की चमक उभर आई,,,,, उसकी मां दोनों टांगों को फैला कर रखी हुई थी जिससे शुभम उसकी पैंटी को निकाल नहीं पाए,,शुभम गहरी गहरी सांसे लेता हुआ अपनी मां के मदमस्त बदन को देख रहा था वह सीढ़ियों पर पीठ के बल लेटी हुई थी,,, ओर सुभम उसके पास ही खड़ा होकर अपने लंड को हिला रहा था जो कि हीलता हुआ खड़ा लंड देखकर निर्मला के भी अरमान मचलने लगे लेकिन फिर भी वह ऊपरी मनसे ना नुकुर कर रही थी,,,
देखते ही देखते अपने खड़े लंड को हाथ से हिलाते हुए शुभम अपनी मां के ऊपर पूरी तरह से झुक गया और केवल उसकी पैंटी को बिना उतारे मात्र उसकी फूली हुई बुर पर से उसकी पैंटी को हटाकर अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश करा दिया,, शुभम ने अपने लंड को धीरे से नहीं बल्कि एक झटके से निर्मला की बुर में डाल दिया था जिससे उसकी मुंह से दर्द भरी आह निकल गई,,


temporary image upload
घोड़ा मैदान में उतर चुका था और घोड़े की रेस पूरी हो चुकी थी ऐसे में घुड़सवार का घोड़ा रोक देना नामुमकिन था,,,क्योंकि वह भी विजय हासिल करने के लिए ही रेश में ऊतरा था इसलिए सुभम बिना रुके और बिना थके अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया ,,,और उसके कमर हिलाने के साथ ही उसका लंड बुर के मैदान में दौड़ लगाना शुरू कर दिया,,, शुभम की कमर चाबुक का काम कर रही थी और जितना जोर देकर अपनी कमर को हिलाता उसका लंड उतनी ही तेजी के साथ निर्मला की बुर के अंदर दौड़ लगाना शुरु कर देता था ,,, लंड के अंदर बाहर होने की वजह से निर्मला के गर्म बुर से गर्म आंच निकल रही थी,,,
हर धक्के के साथ निर्मला की आह निकल जा रही थी ,,,
काम भावना के अधीन होकर शुभम सीढ़ियों पर ही अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,
दोनों को काफी आनंद की अनुभूति हो रही थी देखते ही देखते शुभम अपने तेज धक्कों के साथ अपनी मां की बुर में झड़ गया,,, निर्मला शुरू शुरू में इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी लेकिन शुभम की जबरदस्ती की आंखें और उसकी हरकत की वजह से उसके अंदर भी काम भावना जागरूक हो गई थी जिसकी वजह से वह शुभम कि इस तरह की चुदाई से मस्त हो गई,, शुभम हाफते हुए अपनी मां के ऊपर निढाल होकर गिर गया था थोड़ी देर बाद अपनी सांसो को दुरुस्त करके वह खड़ा हुआ और पजामे को ऊपर करने लगा,,, तो निर्मला भी अपने कपड़ों को दुरुस्त करते हुए बोली,,,।

थोड़ा सब्र नहीं कर सकता था कह तो रही थी शाम को आराम से दूंगी तुझे अभी जल्दी पड़ी थी,,

लेकिन मेरा मन अभी कर रहा था तो मैं क्या करूं,,, वैसे भी मम्मी तुम्हें जब भी देखता हूं मेरा खड़ा हो जाता है इसलिए मैं आज अपने आप को रोक नहीं पाया वैसे आप को बुरा लगा हो तो उसके लिए माफी चाहता हूं,,,
(भला निर्मला को कब बुरा लगने वाला था से तो अच्छा ही लगा था मजा ही आया था,,,इसलिए वो कुछ बोली नहीं बस मुस्कुरा कर रसोई घर में चली गई,,, दूसरे दिन शीतल निर्मला से मिलने आई और बात ही बात में शुभम के रिजल्ट वाली बात करने लगी,,, निर्मला से ज्यादा खुश शीतल नजर आ रही थी,,, शुभम के अच्छे नंबर से पास होने की खुशी में निर्मला ने शीतल को खाने पर बुला ली,,

दूसरे दिन तीनों खाने की मेज पर स्वादिष्ट खाने का आनंद ले रहे थे कि तभी शीतल निर्मला से बोली,,,

निर्मला अब में इस हफ्ते हीतुम्हारे पड़ोस वाले घर में शिफ्ट होना चाहती हैं क्योंकि घर का रिनोवेशन का काम जल्द ही शुरू करना है,,,

यह तो बहुत ही अच्छी बात है तुम जितनी जल्दी मेरे पड़ोस में आ जाओ मुझे तो ऊतनी ज्यादा खुशी मिलेगी,,,(निर्मला और शीतल दोनों की बातें सुनकर शुभम मन ही मन खुश हो रहा था,,,)

तो ठीक है मैं अभी अपने घर का सामान इधर लिफ्ट कराती हैं और 2 दिन बाद यहां रहने आ जाऊंगी,,, (शीतल बात तो निर्मला से कर रही थी लेकिन कनखियों से शुभम की तरफ देख रही थी वह अपनी बात के जरिए उसे बताना चाहती थी कि 2 दिन बाद वह उसके पड़ोस में ही रहने वाली है तब हम दोनों को बहुत ज्यादा मौका मिल जाएगा अपनी इच्छा पूरी करने के लिए,, थोड़ी देर बाद तीनों ने खाना खा लिया था,,, शीतल अपने घर चली गई और निर्मला शुभम को लेकर अपने कमरे में चली गई,,, क्योंकि उसकी बुर में कुछ ज्यादा ही खुजली हो रही थी,,,

धीरे-धीरे शीतल अपने घर का सारा सामान अपने भाड़े के बंगले में शिफ्ट करने लगी,,, और 2 दिन बाद में खुद उसे घर में रहने आ गई,,, शीतल निर्मला और शुभम तीनों अपने अपने तरीके से खुश नजर आ रहे हैं उन तीनों का अलग ही स्वार्थ था निर्मला इसलिए खुश थी कि उसकी सबसे अच्छी सहेली उसके पड़ोस में आ गई थी जिसे वह आप जब चाहे तब बात कर सकती थी शीतल इसलिए खुश थी कि उसके मन का मीत शुभम उस के बेहद करीब था और यहां पर उसे जरूर मौका मिल ही जाएगा अपनी प्यास बुझाने का और शुभम इसलिए खुश था कि अपने पड़ोस में उसके सपनों की मल्लिका शीतल रहने आ गई थी अब वह जब चाहे तब शीतल की खूबसूरती से अपनी आंखों को सेंक लेगा,,,
अब जब दिल करता था तब निर्मला शीतल के घर चली जाती थी या तो शीतल निर्मला के घर चली आती थी दोनों का दिन बहुत अच्छे से कट रहा था ,,,, लेकिन अभी तक शुभम और शीतल दोनों को ऐसा कोई भी मौका प्राप्त नहीं हुआ था जिसमें वह लोग अपने मन की ख्वाहिश को पूरी कर सके,,,

ऐसे ही 1 दिन दोपहर का समय था और शुभम अपने कमरे में आराम कर रहा था निर्मला घर का काम कर रही थी,,,निर्मला को अपने बदन में दर्द महसूस हो रहा था इसलिए वह शुभम को यह कहकर अपने कमरे में चली गई की अलमारी में से सरसों के तेल की शीशीलेकर आ जाए और उसके कमर की मालिश कर दे क्योंकि उसे बहुत ज्यादा दर्द कर रहा था,,,, शुभम अपनी मां की बात मानते हुए अलमारी में से सरसों की तेल की शीशी निकाला और अपनी मां के कमरे की तरफ चल दिया,,,
Nirmala ki khubsurat gaand se masti karte huye ,,,jiska Deewana Shubham hamesha se raha hai
 
शुभम हाथों में सरसों के तेल की शीशी लिए अपनी मां के कमरे की तरफ जा रहा था। उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां के बदन में दर्द हो रहा है इसलिए पूरी तरह से सामान्य तौर पर एक दम सहज था लेकिन निर्मला के मन में तूफान उमड़ रहा था,,, दुपहरी धूप में उसे अपनी काम भावना पर जरा भी सब्र नहीं हो रहा था,, मालीश का तो बस बहाना था,,, शुभम हाथ में सरसों के तेल की शीशी लिए अपनी मां के कमरे के बाहर पहुंच गया,,, दरवाजा खोलने की कोई जरूरत नहीं थी दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था बस सीटकनी नहीं लगी हुई थी,,, एक हाथ मे शीशी लिए शुभम दूसरे हाथ से दरवाजे पर हल्का सा दबाव दिया दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया,, और जैसे ही दरवाजा खुला सामने बिस्तर पर का नजारा देखकर शुभम की सांस अटक गई,,, बिस्तर पर निर्मला एकदम नंगी पेट के बल लेटी हुई थी उसकी बड़ी-बड़ी गुदाज गांड शुभम की आंखों के सामने कहर ढा रही थी,,,, निर्मला एकदम निश्चिंत होकर बिस्तर पर पेट के बल लेट कर मैगजीन के पन्ने को इधर-उधर कर रही थी और अपने दोनों पैरों को घुटने से मोड़कर ऊपर उठाकर आपस में पैरों को हिलाते हुए पायल को बजा रही थी,,,,, इस अवस्था में अपनी मां को देखकर शुभम को एक बार फिर से अपनी मां पर गर्व होने लगा क्योंकि इस उम्र में भी उसकी मां एक नौजवान औरत की तरह लगती थी,, वो तेरे से कमरे में दाखिल हुआ और दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन उसे ब्लॉक नहीं किया क्योंकि उसे मालूम था कि घर पर उन दोनों की सिवा तीसरा कोई भी नहीं था और कोई दिन में आने वाला भी नहीं था इसलिए वह निश्चिंत होकर सरसों के तेल की शीशी लेकर अपनी मां के पास पहुंच गया,,,वह अभी भी शुभम की तरफ ध्यान दिए बिना ही अपने नंगे पन का रस शुभम की आंखों में झोंकते हुए मैगजीन के पन्ने पलट रही थी,,,, शुभम अपनी मां की कामुकता और उसके नंगे बदन को देख कर अपने आप पर सपना नहीं कर पाया और सरसों के तेल की शीशी को बगल के कपाट पर रखकर एक हाथ से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,


central plumbing and heating

वाह मम्मी आज तो कयामत लग रही हो,,,

आहहहहहह,,,(गांड पर जोर से चपत पड़ने के कारण उसके मुंह से आहह निकल गई,,) क्या करता है,,,. लगता है तुझे मेरी गांड कुछ ज्यादा ही पसंद,,, है,,,

पसंद के बाहों के हिंदी गाने दुनिया की सबसे खूबसूरत गांड तुम्हारे पास है जिसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,(शुभम उसी तरह से थोड़ा सा झुककर अपनी मां की गोरी गोरी गांड को अपने हाथ से सहलाते हुए बोला,,,)

ला दीखा तो मैं भी देखूं क्या तु सच कह रहा है या झूठ (इतना कहने के साथ ही निर्मला लेटे-लेटे ही बस थोड़ा सा अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपने आपको थोड़ा ऊपर उठा ली और अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर शुभम के पजामे के ऊपर से उसके लंड को टटोलने लगी जो कि वाकई में धीरे-धीरे बढ़ने लगा था,,,)

तू तो सच कह रहा रे,,, (पजामे के ऊपर से ही सुभम के लंड को जोर से दबाते हुए जिसकी वजह से शुभम की चीख निकल गई,,,)
आहहह,,, मम्मी,,,



क्यों क्या हुआ,,? दर्द किया ना बेटा मुझे भी दर्द करता है जब तु जोर-जोर से मेरी गांड पर चपत लगाता हैं,,,

लेकिन मम्मी मजा भी तो आता है ना ,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से जोर से अपनी मां की गांड पर चपत लगा दिया जिसकी वजह से पलभर में ही निर्मला की गोरी गांड लाल हो गई,,,)

तु नही सुधरने वाला,,,(इतना कहने के साथ ही वह वापस लेट गई और उसी तरह से मैगजीन के पन्ने पलटने लगी,,,और इस बार अपने पैरों के साथ-साथ अपने नितंबों पर भी लहराव देते हुए उसे लहराने लगी,,, यह देखकर शुभम का मन डोलने लगा,,, हालांकि वह अभी भी अपनी मां की गांड को हाथों से सहला रहा था,,, निर्मला की कामुक अवस्था को देखते हुए शुभम का मन डोलने लगा था,,, और वह अपनी मन की बात को अपनी मां से बताते हुए बोला,।

मम्मी तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर आज मेरा मन फिर से कर रहा है तुम्हारी गांड मारने को,,, (इस बार शुभम अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड के दोनों फांकों के बीच की गहरी दरार में धंसाते हुए बोला,,, जिसकी वजह से निर्मला के बदन में उत्तेजना भरी सिहरन होने लगी,, अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला पूरी तरह मदहोश हो गई,,, लेकिन वह अपनी मदहोशी भरी आहहह को अपने चेहरे पर लाना नहीं चाहती थी और वह अपने बेटे से बोली,,,)


शुभम तुझे तो बस वही चीज दिखता है और कुछ दिखता ही नहीं है तुझे मालूम है मेरे कमर में दर्द हो रही है पहले मेरे कमर पर तेल से मालिश करके मुझे राहत दे दे उसके बाद तुझे जो करना है कर लेना,,,(इच्छा तो निर्मला की भी आई हो रही थी कि वह अपने बेटे के मोटे लंड को एक बार फिर से अपने कान के भूरे रंग के छेद में लेकर मस्त हो जाए क्योंकि गांड मारने का एहसास उसे जबरदस्त उत्तेजना के सागर में गोते लगाने पर मजबूर कर देता था लेकिन वह अपने मन की बात को अपने बेटे से बताना नहीं चाहती थी,, क्योंकि उसे गांड मरवाने वाली बात को सोचकर ही शर्म महसूस होती थी लेकिन मजा भी बेहद आता था इसलिए वह एक बहाने से मालिश करवाना चाहती थी,,,क्योंकि उसे विश्वास था कि उसकी गांड की मालिश करते करते सुभम उसकी गांड मारे बिना नहीं रह पाएगा,,,,
( शुभम की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी आंखों के सामने थी,, उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड़ जो कि पहले से शुभम के आकर्षण उत्तेजना का केंद्र बिंदु रहा है,,,वह अपनी मां की बात सुनकर कपाट पर से सरसों के तेल की शीशी ले लिया और उसके ढक्कन को खोल कर सरसों के तेल की धार को अपनी मां की गांड के बीचो बीच की गहरी दरार पर गिराने लगा,,

सससहहहहह,,,,आहहरह,,,(सरसों के तेल की धार को अपने गांड के बीचोबीच महसूस करके निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,अपनी मां की हालत को देखकर शुभम समझ गया था कि आज फिर उसे गांड का द्वार खोलने का सुख मिलेगा,,, वह पूरी तरह से अपनी मां की गोरी गोरी गांड को सरसों के तेल से भिगो दिया,, और अपने दोनों हाथों की हथेली को अपनी मां के गोलाकार नितंबों पर कसते हुए जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,

केवल दबीता ही रहेगा या मालिश भी करेगा,,,,,

कर तो रहा हूं मम्मी थोड़ा सा तुम्हारी गांड से खेल लेने दो,,,

रोज उससे खेलता है लेकिन तेरा मन भरा नहीं,,,

क्या बात कर रही हो मम्मी अगर मर्दों का मन औरत के अंगो से भर जाए तो बार-बार औरत की जरूरत ही कहां रहती है,, फिर तो मर्द अपने रास्ते और औरत अपने रास्ते,,, फिर मर्द लार टपकाते हुए औरतों के आगे पीछे नजर नहीं आएंगे,,,

हंममम,, बातों का जाल बुनना तो कोई तुझसे ही सीखे, चल अब बातों में मुझे मत ऊलझा और मेरी मालिश कर,,,,
(एक बार फिर शुभम की हथेली उसकी मां की मदमस्त गांड शिरकत करने लगी,,, शुभम अपनी मां के गोल गोल गांड को देखकर पागल हुए जा रहा था,,क्योंकि उनकी मां की गांड ऐसी वैसी सामान्य गांड नहीं थी जबरदस्त मादकता से भरी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा की गांड हो,,, जिसे देख कर दुनिया का हर मर्द पागल हो जाता था,,और वह खूबसूरत बेशकीमती मादकता से भरी हुई गांड ईस समय सुभम के हाथों में थी जिसे व जोर-जोर से दबाते हुए मालिश कर रहा था,,
Shubham Nirmala ki malish karte huye

khan lab school

सससहहहहह,,,आहहहह,,,,, सुभम,,,ऐसे ही,,, बेटा,,,,ऊफफ,,,, बहुत अच्छा दबा रहा है तू,,,ऊमममम,,
( हम जानता था कि उसकी मां के बदन में दर्द नहीं हो रहा है बस एक बहाना था,, क्योंकि उसके मां के मुंह से निकलने वाली इस तरह की आवाज राहत भरी नहीं बल्कि मादकता भरी सिसकारी की आवाज थी,,,,अपनी मां की गर्म सिसकारी की आवाज सुनकर सुभम की हालत खराब होने लगी थी और बार-बार अपने लंड को एक हाथ से एडजेस्ट करने की कोशिश कर रहा था लेकिन जब ऊससे सब्र नहीं हुआ तो वह अपने पजाम् को उतार फेंका और कमर के नीचे पूरा नंगा हो गया,,, उसकी सांसे अटक रही थी,, निर्मला कनखियों से यह देख रही थी कि उसका बेटा अपने पजामे को उतारकर एकदम नंगा हो गया था उसके खड़े लंड को देखकर उसके मुंह में भी पानी आ रहा था,,,, लेकिन बोल कुछ नहीं रही थी,,,शुभम फिर से अपनी मां की गांड की मालिश करते हुए इस बार अपनी बीच वाली उंगली को अपनी उंगली से टटोलते हुए अपनी मां की गांड के भुरे रंग के छेंद के ऊपर रखकर ऊसे हल्के हल्के से दबाना शुरू कर दिया जो कि सरसों के तेल की चिकनाहट के कारण धीरे-धीरे अंदर की तरफ से सरकने लगा,,, अपने बेटे की हरकत की वजह से निर्मला का गला सूखने लगा,,, उसे साफ एहसास हो रहा था कि उसका बेटा अपनी उंगली को उसकी गांड के छेद में डाल रहा है,, उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,दोनों में से कोई एक शब्द भी नहीं बोल रहा था बस उस पल का एहसास अपने अंदर समेट कर आनंद के सागर में डूबते चले जा रहे थे,,।

क्रमश:....
 
निर्मला के कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म आ चुका था एक तो वातावरण में गर्मी का असर ऊपर से कमरे में गरमा गरम द्रश्य के साथ सबसे अधिक गर्म औरत निर्मला अपने सारे कपड़े उतार कर अपने बिस्तर पर एकदम नंगी लेटी हुई थी और अपने बेटे से अपने नितंबों की मालिश करा रही थी शुभम भी कुछ कम नहीं था वह अपनी कामुक हरकतों से से अपनी मां को पूरी तरह से उत्तेजित किए जा रहा था इस समय उसकी बीच वाली उंगली उसके दोनों के बीच की गहरी दरार की गहराई में धंसती चली जा रही थी,,,,शुभम के भी सांसो की गति तेज हुए जा रही थी और उसके लंड का पारा बढ़ता चला जा रहा था,,,, निर्मला की गोरी गांड सरसों के तेल की चिकनाहट से पूरी तरह से ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में चमक रही थी ,,सुभम पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था ,,वह धीरे-धीरे अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद में घुसाता चला जा रहा था,,, और जैसे-जैसे शुभम की बीच वाली उंगली निर्मला की गांड की गहराई नाप रही थी वैसे वैसे निर्मला का बदन उत्तेजना के मारे कसमसाता हुआ ऊपर नीचे हो रहा था,, निर्मला का दिल जोरों से धक धक हो रहा था,, शुभम ने अपनी कामुक हरकतों से एक बार फिर से निर्मला के बदन में वो एहसास भर दिया था जब वह पहली बार उसकी गांड के छेद में अपना मोटा लंड डालकर उसे छल्ले के आकार का कर दिया था,,



उत्तेजना के मारे शुभम के माथे से पसीना टपकने लगा,, उसका गला सूखता चला जा रहा था,

सससहहहहह,,, आहहहहहह,,, शुभम ये क्या कर रहा है,,,
तुम मुझे फिर मजबूर कर रहा है,,,

किस लिए मम्मी,,,,

उसी के लिए जो तू चाहता है,,,

क्या तुम नहीं चाहती,,,

मैं नहीं चाहती क्योंकि मुझे बहुत दर्द करता है,,,

पर मजा भी तो देता है,,

फिर भी मुझे सब अच्छा नहीं लगता,,,

क्या अच्छा नहीं लगता,,,(शुभम धीरे-धीरे करके अपनी बीच वाली उंगली को जितना घुस सकती थी उतना घुसा दिया था और उसे गोल गोल घुमा रहा था जिससे निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फुटने लगी थी,,,)
Shubham ka mota taGDAA LUND JISE DEKHTE HI NIRMALA KA MAN MACHALNR LAGA


सससहहहहह,,,,,, गांड मराना,,,(निर्मला एकदम सिसकते हुए मादक स्वर में बोली,,,)

हाय मेरी रानी गांड मराना इतना खराब लगता है तो तुम्हारी गांड में जब मैं अपना मोटा लंड डालकर तुम्हारी गांड मार रहा था तो क्यों गांड उछाल उछाल कर मजे ले रही थी (शुभम एकदम उत्तेजित होकर अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड के अंदर बाहर करता हुआ बोला,,)

आहहहहहह,,, उस दिन की बात कुछ और थी लेकिन अब मुझे डर लगता है,,,

क्यों अप क्यों डर लगता है,,,,

देखता नहीं तेरा लंड कितना मोटा है ,,,(अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर अपनी बेटे के खड़े लंड को हाथ पकड़ते हुए बोली,,)

पर घुस तो जाता है ना,,,,

लेकिन,,,,,



लेकिन लेकिन कुछ नहीं मम्मी,,, फिर से तुम्हारी गांड मारने का मन कर रहा है,,(शुभम अपनी उंगली गांड के छेद से बाहर निकालकर दोनों हाथों में अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पकड़कर उसे फैलाते हुए बोला और इसके साथ ही अपना मुंह गांड के भूरे रंग के छेद पर डाल दिया और उसे जीभ से चाटना शुरू कर दिया बस फिर क्या था निर्मला एकदम से मदहोश होने लगी,,, और मदहोशी के आलम में उसका पूरा बदन सिहरने लगा,,उसका मन भी अपने बेटे से गांड मराने को कर रहा था लेकिन वह अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी बस बहाना बना कर इधर-उधर की बातें कर रही थी,,,शुभम लगातार अपनी मां को मदहोश करते हुए उसकी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटता रहा,,,
NIRMALA ki aankho k samne shubham ka mota lund


गांड के छेद को जीभ से चाटने में शुभम को नशा सा महसूस होने लगा था,,, वह पागल हुए जा रहा था ,,,
अब वह पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की गांड में अपना मोटा लंड डालकर उसकी गांड मारने के लिए और निर्मला भी पूरी तरह से तैयार थी अपने बेटे से एक बार फिर से गांड मरवाने के अहसास से भर जाने के लिए ,,,,
शुभम अपना मुंह अपनी मां की भारी-भरकम गांड से हटाकर अपनी टी-शर्ट को निकालकर एकदम नंगा हो गया,,, अब बिस्तर पर दोनों मां-बेटे संपूर्ण नग्न अवस्था में थे,,, निर्मला जिस स्थिति में पेट के बल लेटी हुई थी उसी स्थिति में थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा उसी पोजीशन में उसके पीछे से लेने वाला है,,,,शुभम भी पूरी तरह से तैयार था पीछे से एक बार फिर से अपनी मां की लेने के लिए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि गांड मारने के एहसास से वह पूरी तरह से भर चुका था,,, शुभम अपने लिए योग्य स्थिति बनाने हेतु अपने दोनों हाथ को अपनी मां की पेट के नीचे ले जाकर उसे हल्के से उठाने लगा ताकि निर्मला घुटनों के बल होकर अपनी मद मस्त बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहरा दे,,, जैसा शुभम चाहता था ठीक वैसा ही निर्मला ने की,, वह घुटनों के बल होकरअपने सिर को नीचे तकिए के सहारे कर दी और अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में लहराने लगी ऐसा लग रहा था कि मानो कोई अपने आप को सामने वाले पक्ष की ताकत के अधीन होकर समर्पण कर रहा और अपने समर्पण स्थिति को दर्शाने के लिए हवा में पताका लहरा रहा हो,,,

Shubham or nirmla

अपनी मां की लहराती हुई बड़ी बड़ी गांड को देखकर शुभम एकदम उत्तेजना से भर गया,,, एक उसके पीछे वह भी घुटनों के बल बैठा हुआ था उसका लंड पूरी तरह से टन टनाकर खड़ा हो गया था मानो लोहे की छड़ हो। वह पोजीशन लेते हुए अपनी उंगलियों पर थूक लगाकर उसे अपने लंड के सुपाड़े पर रगड़ने लगा ताकि उसका लंड गीला हो जाए और गीलेपन के कारण उसका लंड आराम से उसकी मां की गांड के छेद में चला जाए,, अपनी नजर को पीछे की तरफ करके निर्मला अपने बेटे की हरकत को देखकर कसमसा रही थी ,,, वह आने वाले पल के लिए बेहद उत्सुक थी,,देखते देखते शुभम ठीक है अपनी मां के पीछे आगे जैसे ही वह एकदम पीछे आया निर्मला बोल पड़ी,,
nirmala ki badi badi gaand


संभाल कर बेटा,,,

तुम चिंता मत करो मम्मी कुछ भी नहीं होगा,,, बस मजा ही मजा आएगा,,,,(इतना कहने के साथ ही शुभम एक हाथ में अपना लंड पकड़ कर उसे हिलाते हुए उसके गरम मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गांड के भूरे रंग के छेद पर टिका दिया,,

ससशससहह,,, आहहहहहह,,,, सुभम,,,,, ऊफफफफ,,,
(निर्मला अपने बेटे के मोटे लंड की गर्माहट को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके एकदम मचल उठी.. उसके मुंह से केवल उसकी गर्म आहें निकल रही थी,,,पहले से ही शुभम ने अपनी जीत से चाट चाट कर अपनी मां की गांड के छेद को पूरा गीला कर दिया था और लंड पर भी थूक लगाकर उसे एकदम चिकना कर दिया था जिसकी वजह से धीरे-धीरे शुभम के दबाव के कारण उसका मोटा लंड का सुपाड़ा निर्मला की गांड के छेद में सरकने लगा,,,
Nirmala piche se lete huye


पहले भी शुभम का मोटा लंड उसकी गांड में घुसकर उसकी गहराई नाप चुका था लेकिन फिर भी इस समय निर्मला को दर्द महसूस हो रहा था और वह अपने होंठों को दांत से काटकर अपने दर्द को छिपाने की कोशिश कर रही थी और एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर ना चाहते हुए भी शुभम को रोकने के लिए इशारा कर रही थी लेकिन शुभम कहां मानने वाला था,,,, घोड़ा अस्तबल से निकल चुका था,,, अब घोड़ा अपना काम किए बगैर अस्तबल में वापस लौटने वाला नहीं था शुभम उसी तरह से अपनी कमर पर जोर देकर अपने मोटे लंड का सुपाड़ा को धीरे-धीरे करके अपनी मां की गांड की उस बेहतरीन खूबसूरत कसी हुई छेद में घुसा,, दीया,,,जैसे ही शुभम के लंड का सुपाड़ा निर्मला की गांड के छेद में प्रवेश किया वैसे ही निर्मला के मुंह से एक बार फिर से गर्म चीख निकल गई,,,

आहहहहहह,,, शुभम,,,

सुभम अपनी मां के साथ मस्ती करते हुए

miss porters school
बस बस मम्मी होने वाला है इसके बाद मजा ही मजा है,,,
(एक बार मुंह खुल जाए तो पूरा शरीर घुसने में ज्यादा तकलीफ नहीं होती ठीक उसी तरह से शुभम भी अपने लंड के सुपाड़े को जैसे ही अपनी मां की गांड के छेद में प्रवेश कराया अगले ही धक्के के साथ ही अपना आधा लंड अपनी मां की गांड में घुसा दिया,,,,, एक बार फिर से कमरे में दर्द भरी कराह गुंजने लगी,,, लेकिन जल्द ही उसकी दर्द भरी कराह आनंददायक सिसकारीयो में बदल गई,,,
क्योंकि शुभम अब अपनी मां की मदमस्त जवानी और उसकी भारी-भरकम नितंबों पर पूरी तरह से छा चुका था, दोनों हाथ से अपनी मां की भारी-भरकम गांड को पकड़कर अपने लंड को उसकी गांड में पेलना शुरू कर दिया,,,,
हर धक्के के साथ निर्मला सूखे हुए पत्ते की तरह हवा में लहरा उठती थी,, उसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी चूचियां पेड़ पर पके हुए आम की तरह लटक कर झूल रही थी जोकि शुभम से देखा नहीं जा रहा था और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां को थाम कर जबरदस्त धक्के लगाना, शुरू कर दिया,,,,।
सससहहह,,, आहहहहहह,,,,, आहहहहहह,,,, ऊफफफफ,,,ऊमममममममंं,,,,

शुभम के हर धक्के के साथ ही निर्मला के मुंह से इस तरह की आवाजें आ रही थी,,,और शुभम अपनी मां की मादक सिसकारियो की आवाज का भरपूर आनंद लेते हुए धक्के पर धक्का पेल रहा था। निर्मला को भी अब गांड मराने में आनंद आने लगा था,, इस समय एकदम दोपहर का समय था ऐसे में सोसाइटी के सभी लोग अपने अपने घरों में ठंडी हवा का आनंद लेते हुए आराम करते रहते हैं और ऐसे में निर्मला अपने बेटे के साथ गांड मरवाने का भरपूर लुफ्त उठा रही थी,,, एक शिक्षक होने के नाते और समाज में मर्यादा से नारी की छाप रखने वाली निर्मला के बारे में कोई सपनों में भी सोच नहीं सकता था कि वह इतनी गंदी औरत होगी,,,गंदी औरत इसलिए कि समाज के नजर में जो कुछ भी वह अपने ही बेटे के साथ कर रही थी वह बिल्कुल गलत था,, भले ही अपनी जरूरतों को देखते हुए उन दोनों के नजरिए में यह बिल्कुल सही था लेकिन चारदीवारी के बाहर बिल्कुल असामान्य था, समाज में निर्मला का काफी रहता था खास करके उसकी मर्यादा सीन और संस्कारी होने के कारण वह कुछ ज्यादा ही इज्जत दार महिला थी,,
लेकिन जिस समाज में वह इज्जत की हकदार थी मर्यादा सील के रूप में जिसे पूजा जाता था,,, स्कूल में चीज का इतना रुतबा था इतनी इज्जत थी उन लोगों को क्या मालूम कि चारदीवारी के अंदर वह क्या गुल खिलाती है,,,

निर्मला अपने बेटे को मस्त करते हुए

उन समाज के लोगों को क्या मालूम जिसके चरित्र को लेकर आज तक कभी कोई उंगली नहीं उठी थी वह अपने ही घर में अपने कमरे में अपने बेटे के साथ गांड मरवाने का सुख भोग रही थी,,, लेकिन निर्मला जैसी थी आज भी समाज में उसकी उतनी इज्जत और उतना ही आहो भाव था क्योंकि दुनिया की नजर में अभी वह गलत साबित नहीं हुई थी ना तो उसे गलत करते हुए किसी ने देखा था,,, लेकिन यह सब छुपाए ज्यादा दिन तक छुपता नहीं है इसलिए ऐसा लग रहा था कि तुम दोनों के साथ आज कुछ और ही लिखा गया था क्योंकि जिस समय निर्मला एकदम नंगी होकर अपने बेटे की भरपूर जवानी के नंगे पन को मर्दानगी भरी धक्कों से अपनी गांड मरवा रही थी,,,, उसी समय पड़ोस में आई हुई शीतल दिन में समय ना कटने की वजह से उससे मिलने के लिए उसके घर आ रही थी,,, उसके घर के गेट के पास आकर शीतल खुद ही अपने हाथों से गेट खोल दी,,, और अंदर आने लगी सीकर के किस्मत तेज का हो या निर्मला की बदकिस्मती घर का दरवाजा भी खुला हुआ था मात्र ऊसे बंद किया गया था जो कि जल्दबाजी में ना तो निर्मला ने और ना ही शुभम ने दरवाजे को लोक नहीं किया था,,,
जब कुछ बुरा होने वाला रहता है तो बना बनाया काम भी बिगड़ जाता है कुछ ऐसा ही निर्मला के साथ हो रहा था और जब किस्मत अच्छी होती है तो सब कुछ अच्छा होता चला जाता है ना चाहते हुए भी अपने सामने आने वाले बंद दरवाजे भी खुद ब खुद खुल जाते हैं ऐसा ही कुछ शीतल के साथ हो रहा था,,, एक अच्छी खांसी सहेली होने के नाते उसका इतना तो हक बनता था कि दरवाजा खुला देखकर बिना दरवाजे पर दस्तक दिए कमरे में दाखिल हो सके और उसने वही की दरवाजे पर दस्तक दिए बिना ही कमरे में दाखिल हो गई और खुद ही दरवाजे को बंद करके उसे लॉक कर दी,,
Aaaaaahhhh... shubham

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दूसरी तरफ इस बात से अनजान किसी तरह घर में प्रवेश कर चुकी है दोनों मां-बेटे बिस्तर पर एकदम नंगे होकर एक दूसरे की जवानी को लूट रहे थे,,, निर्मला पर पूरी तरह मदहोशी छाई हुई थी,,, और शुभम पूरी तरह से पता वास हो चुका था उसे दोनों तरफ से मजा लेना था क्योंकि,,,जिस समय से सुभम का मोटा लंड निर्मला के गांड में दस्तक दे रहा था उसी समय निर्मला अपना हाथ नीचे की तरफ ले जाकर जोर-जोर से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल रही थी जिसे देखकर शुभम समझ गया कि इसकी बुर में भी खुजली हो रही है,, इसलिए वह अपना लैंड अपनी मां की गांड में से निकाल कर उसे थोड़ा सा नीचे ले जाकर उसके गुलाबी पुर में डाल दिया और उसे अंदर बाहर करके उसकी बुर चोदने लगा,,, इससे निर्मला का भी मजा दोगुना होता जा रहा था,,वह ,पागलों की तरह अपने मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज निकालते हुए अपने बेटे को उकसाने लगी,,
सुभम निर्मला की लेते हुए


यस,,,,, यस ,,,,,,बेटा ऐसे ही ऐसे ही जोर-जोर से,,,आहहरहह,,, बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा ऐसे ही ऐसे करता रे, आहहहह,,,ऊमममम,,,,,

मुझे भी बहुत मजा आ रहा है मेरी रानी देख तुझे किसी रंडी की तरह चोदता हूं,, साली गांड भी बहुत मस्त मरवाती है तू,,,,आहहररह,,, एकदम रंडी है तु छिनार,,,,आहहह,,,

तू भी तो मादरचोद ही रे भोसड़ी वाले,,, अपनी ही मां को चोद रहा है,,,,

हां चौद रहा हूं तो,,,, इसमें हर्ज ही क्या है जब घर में इतनी मस्त माल हो तो लड़का तो घर में ही चोदेगा ना,,,

मस्त माल हो तो इसका मतलब अपनी मां पर ही चढ जाएगा,,,

जब पूरे घर में इतनी बड़ी बड़ी गांड को हिलाते चलोगी तो किसी भी बेटे का लंड हिचकोले खाएगा,,,,

तू पक्का मादरचोद है,,, ऐसे चल रहा है जैसे किसी रंडी को चोद रहा है,,,

तू किसी रंडी से कम है क्या अपने बेटे का लंड अपनी बुर और गांड दोनों में ले रही है,,,,

तो इसमें मेरी गलती नहीं तेरे बाप की गलती है जिसका खड़ा ही नहीं होता,,,वह तो मेरा एहसान मान कि तुझे जवानी के दिनों से ही अपनी बुर का स्वाद चखा कर तुझे बड़ा कर दिया,,, वरना बाथरूम में जाकर मुठ मारना पड़ता,,,

तू भी साली मेरा एहसान मान के मेरा मोटा लंड से चुदवाकर मस्त हो गई वरना इधर उधर मुंह मारती फिरती ना जाने किस किस का अपने अंदर लेकर रोज मजे लेती और फिर भी तुझे इतना मजा नहीं आता जितना कि मेरे लंड से आ रहा है,,,।

अच्छा तो तुझे बहुत घमंड है अपने लंड पर तो मैं देखती हुं कितना अच्छा चोद पाता है,,, साली माधर्चोद दिखा अपनी ताकत मैं भी देखती हूं कि तू कितना बड़ा चुदक्कड़ है,,,


अच्छा तो तू मेरी ताकत देखना चाहती है मेरे लंड की ताकत तो देख तेरी चूत का भोसड़ा ना बना दिया तो मेरा नाम शुभम नहीं,,,,(इतना कहने के साथ ही सुभम अपने धक्को की रफ्तार को तेज कर दिया,,,इसी के साथ निर्मला भी अपनी पूरी ताकत के साथ अपनी बड़ी बड़ी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी,, दोनों किस तरह की गंदी बातों में बेहद आनंद मिलता था और तब जब वह दोनों एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तैयार होकर चुदाई का खेल खेल रहे हो,,, दोनों स्तर की गंदी बातें करके एक दम मस्त हो चुके थे साथ ही दोनों की उत्तेजना भी अत्यधिक बढ़ चुकी थी,, शुभम पागलों की तरह अपनी मां की बुर में अपना लंड पेल रहा था,,,वह बार-बार अपनी निगाहों को नीचे करके अपनी मां की गांड की भूरे रंग के छेद को देख ले रहा था जो कि एकदम छल्ले की तरह हो चुका,,था। उछलने को देख कम से रहा नहीं जा रहा था और वहां अपने लंड अपनी मां की दूर में से बाहर निकाल कर फिर से गांड के छेद में डाल दिया और उसे चोदना शुरू कर दिया लगातार सुभम की हरकत जारी थी कभी वह गांड में लंड डालता था तो कभी उसमें से निकाल कर फिर से उसकी बुर में पेल देता था,,, सुभम कि ईस तरह की हरकत की वजह से निर्मला एकदम मस्त हो गई थी दोनों आनंद विभोर हो चुके थे,, शुभम अपनी मां के दोनों छेद की एक साथ चुदाई कर रहा था,,, कभी बुर में डालता तो कभी गांड में,,,
यह शुभम के साथ-साथ निर्मला का भीतरिया इमरान हाशमी शुभम अपने लंड को अपने गांव में डालकर उसे चुदाई का आनंद ले रहा था तो कभी बुर में पेल कर उसकी खुजली मिटा रहा था,,,,दोनों चुदाई का भरपूर आनंद ले रहे थे इस बात से बेखबर कि उनके दरवाजे के बाहर ही तूफान आने के लिए बेकरार खड़ा है,,,, शीतल धीरे-धीरे निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी और चारों तरफ अपनी नजरें घुमा कर देख रही थी कि घर में इतना सन्नाटा क्यों है कोई घर में है कि नहीं और घर का दरवाजा भी खुला था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है वह धीरे-धीरे निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी,,,
जैसे-जैसे शीतल निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे ही निर्मला की मदहोशी और शुभम की बदहवासी बढ़ती जा रही थी,,, शुभम निर्मला की गांड के साथ-साथ उसकी बुर भी मार रहा था,,,निश्चिंत होकर निर्मला अपने बेटे की चुदाई से भरपूर आनंद लेते हुए गरमा-गरम सिसकारी की आवाज अपने मुंह से निकाल रही थी,,,
निर्मला सीढ़ियों पर चढना शुरू कर दी थी,,, सीढ़ियो पर पैर रखते ही निर्मला के कानो में हल्की हल्की आवाज आना शुरू हो गई,,, लेकिन शीतल समझ नहीं पा रही थी की आवाज कैसी है,,,,, जैसे-जैसे सीढ़ियों पर वह कदम बढ़ाते हुए आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे उसके कानों में आवाज की ध्वनी तेज होती जा रही थी,,, अब शीतल का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे समझते देर नहीं लगी कि यह किसी औरत की चुदाई से भरपूर आनंद की आवाज थी ,,गरम सिसकारी कि आवाज थी,,, अब वह पूरी सीढ़ियां चढ़ चुकी थी सीढ़ियों से महज 10 कदम की दूरी पर निर्मला का कमरा था जहां से सिसकारी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी,,,,। अब शीतल को समझते देर नहीं लगी कि निर्मला कमरे के अंदर चुदवा रही है,, ऐसे हालात में शीतल को वहां से चले जाना चाहिए,, एक टीचर होने के नाते और एक औरत होने के नाते शीतल का फर्ज बनता था कि किसी को इस तरह के खास करके पति पत्नी की संभोग रत नहीं देखना चाहिएं यही एक अच्छी संस्कारी औरत की निशानी होती है,, और शीतल भी यही करना चाहती थी लेकिन उसके मन में जिज्ञासा पैदा होने लगी ,कौतुहल जगने लगी,,, इस तरह की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शीतल वहां से चले जाना चाहती थी लेकिन उसका मन नहीं माना वह देखना चाहती थी कि जब एक मर्यादाशील संस्कारी औरत अपनी बुर में लंड लेती है तो उसके चेहरे का हाव भाव किस तरह से बदलता है और यही देखने की लालच वह रोक नहीं पाई,, और निर्मला के कमरे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,,

अंदर घमासान चुदाई चालू थी शुभम कभी अपनी मां की गांड में लंड डालता तो कभी उसकी बुर में डालता ,दोनों छेद एक साथ एक समान मजा दे रहा था जिससे निर्मला उत्तेजना के सागर में डूबने लगी उसके गाल उत्तेजना के मारे लाल हो गए,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,
दूसरी तरफ सीतल निर्मला के कमरे के ठीक बाहर खड़ी थी दरवाजे पर दस्तक देने की देरी थी कि सारा मजा किरकिरा हो जाता,,,लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहती थी वह कमरे में अंदर देखने के लिए खिड़की ढूंढ रही थी लेकिन खिड़की कहीं उसे नजर नहीं आई तो वह दरवाजे की की होल से देखने के लिए जैसे ही दरवाजे पर अपना हाथ रखी दरवाजा हल्का सा खुलने लगा जिसे देखकर शीतल को समझते देर नहीं लगी की दरवाजा लॉक नहीं है,,, वह मन बहुत प्रसन्न हुई क्योंकि अब निर्मला की तेज सिसकारियो की आवाज उसे साफ सुनाई दे रही थी,,, उसे अब तक नहीं लग रहा था कि निर्मला कमरे के अंदर अपने पति से चुदवा रही हैं,,,, लेकिन जब उसके कानों में निर्मला की गर्म सेस कार्यों की आवाज के साथ-साथ शुभम का नाम सुनाई दिया तो उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक ती हुई महसूस होने लगी उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ उसे ऐसा लगा कि उसे वहम हुआ है लेकिन बार-बार ऊसके कानो में सुभम का नाम सुनाई दे रहा था,,,

ओहहहह ,,,शुभम मेरे बेटे,,,,, ऐसे ही चोद,,,,,आहहहहहह, तु फाड़ दे मेरी बुर को मेरे बेटे शुभम ,,,,,,मेरा राजा जल्दी जल्दी कमर हिला,,,आहहहहहह,,,,
(निर्मला के मुंह से शुभम का नाम सुनकर शीतल की हालत खराब होने लगी उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था अब उसे कमरे में देखने की जल्दबाजी और बढ़ गई थी,, इसलिए वह हल्के से दरवाजे को थोड़ा सा खोल कर अंदर की तरफ देखने लगी,,, अंदर का नजारा बिल्कुल साफ नजर आ रहा था कि लाइट की रोशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी कि तभी शीतल की आंखों के सामने वह नजारा नजर आया जिसके बारे में कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी हालांकि इस तरह की कल्पना अपने साथ शुभम को लेकर कर चुकी थी लेकिन जो उसकी आंखें देख रही थी इस बारे में कभी वो सपने में भी सोच नहीं सकती थी,,,
बिस्तर पर का नजारा देख कर उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसकने लगी,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई नजारा भी बेहद रोमांचक और गरमा गरम था,, निर्मला घोड़ी बनकर एकदम नंगी कितनी गाना हवा में लहरा कर हाथ की कोनी के सहारे झुकी हुई थी और उसके ठीक पीछे उसका बेटा शुभम एकदम नंगा अपनी मां की बुर में लंड डालकर खड़ा था और अपनी कमर को जोर-जोर से हीला रहा था,,,
शीतल का वजूद पूरी तरह से हिल गया जब वह एक बेटे को अपनी मां को चोदते हुए देखा,, और एक मां की अपने बेटे को जोर जोर से चोदने के लिए बोल रही थी यह देख कर शीतल की हालत बुरी तरह से खराब हो गई,,,,
उसे अभी भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वह कोई सपना देख रही है क्योंकि उसकी आंखों के सामने जो नजारा दीख रहा था उस पर विश्वास कर पाना एक औरत के लिए तो बेहद मुश्किल था,,, लेकिन जो नजारा उसकी आंखें देख रही थी वही सच्चाई थी,,, और बहुत ही जल्द अपने आप को संभाल कर शीतल इस सच्चाई से वाकिफ होते हुए कमरे के अंदर के नजारे का आनंद लेने लगी। उसे साफ दिखाई दे रहा था कि दोनों बेहद आनंदित होकर चुदाई का मजा ले रहे थे,,,
शुभम इतना मदहोश हो चुका था कि उसकी आंखें बंद हो चुकी थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को अपने दोनों हाथों से थामैं अपनी कमर जोर जोर से हिला रहा था,,,,, शीतल के लिए इतना काफी था उत्तेजना के मारे उसका भी गला सूखने लगा,, जिंदगी में पहली बार अपनी आंखों के सामने एक औरत और एक मर्द को चुदाई करते हुए देख रही थी,, शीतल बहुत ही संभाल कर दरवाजे को मात्र इतना ही खोली थी कि जहां से उसे कमरे का पूरा नजारा दिखाई दे रहा था,,,
निर्मला से पुरानी दोस्ती होने के बावजूद भी ईतना तो वह जानती थी कि निर्मला खूबसूरत है लेकिन आज उसे पहली बार एकदम नंगी देख कर उसे इस बात का एहसास हुआ कि निर्मला दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत है,,
शुभम द्वारा लगाए गए जबरदस्त धक्को को देखकर शीतल का वजूद डोलने लगा,,, उसका मन मचलने लगा क्योंकि जिस तरह से शुभम अपनी मां की चुदाई कर रहा था वह बेहद लुभावना द्रश्य था,, शुभम की ऊस हरकत को देखकर शीतल की टांगों के बीच की हलचल बढ़ जा रही थी जब वह अपना पूरा लंड निर्मला के बुर से बाहर निकाल कर केवल लंड़ के सुपाड़े का आगे वाला भाग हल्का सा उसमें रहने देता ओर फिर जोरदार धक्का मारकर ऊसे बुर के अंदर तक पहुंचा देता था,,,यह नजारा देखकर शीतल अंदर तक सिहर उठी उसका मन मचलने लगा शुभम के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए,,, शीतल को और ज्यादा झटका तब लगा जबशुभम अपने लंड को अपनी मां की बुर से पूरा बाहर निकाल कर उसकी गांड के छोटे से छेद में डाल दिया और जैसे ही लंड उसकी गांड के छेद को चीरता हुआ अंदर गया निर्मला के मुंह से आह निकल गई,, यह नजारा देखते ही शीतल की पेंटी पूरी गीली हो गई क्योंकि उसने अब तक मात्र सुनी भर थी की ओरते गांड मरवाती है लेकिन आज वह अपनी आंखों से देख रही थी ,,, और वह भी ऐसे औरत को जिसके बारे में वह कभी सपने में सोच भी नहीं सकती थी,,,,

गरम सिसकारियो की आवाज अभी भी पूरे कमरे में गूंज रही थी,,,

सशरहहह ,,,आहहहहहह,, मेरे राजा बहुत मजा आ रहा है तेरा लंड है की मुसल गांड के साथ-साथ मेरी बुर की भी हालत खराब कर दे रहा है,,,,,सहहहहह ,,,आहहहहहहह,,,

इसी को तो लंड कहते हैं मेरी रानी तेरे पति जैसा नहीं की बुर में जाए तो भी पता ना चले कि क्या गया है,,

(उन दोनों की बात सुनकर तो शीतल का माथा चकराने लगा वह दोनों पूरी तरह से एक मर्द और औरत की तरह बर्ताव कर रहे दोनों को देखकर बिल्कुल भी पता नहीं चल रहा था कि दोनों मां बेटे हैं,, और यह देखकर शीतल की हालत खराब हो जा रही थी उसका तो मन कर रहा था कि इसी समय कमरे में चली जाए और वह भी बीच में कूद जाए और इसी समय सुभम के लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा ले लेकिन वह अपने आप को रोके रही,,,
उसे आए 15 मिनट हो चुके थे लेकिन इन 15 मिनट में एक भी बार ऐसा नहीं लगा कि सुभम का पानी निकलने वाला है वह उसी रफ्तार से अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी इस मर्दाना ताकत को देखकर शीतल की बुर पानी पानी हो गई,,,,, दोनों में से अभी तक किसी की भी नजर दरवाजे पर नहीं पड़ी थी,,,, दोनों मां बेटे की चुदाई का दृश्य देखकर शीतल के दिमाग की बत्ती जलने लगी वह तुरंत अपने पर्स में से अपना मोबाइल निकाल कर दोनों का वीडियो शूट करने लगी क्योंकि अब उसे अपनी मंजिल बेहद करीब होती नजर आ रही थी क्योंकि वह अब इस वीडियो के सहारे शुभम से बिना रोक-टोक की चुदाई का सुख भोग सकती थी,, वह अपनी मोबाइल में वीडियो बनाने लगी कि तभी निर्मला उसे अपने ऊपर से दूर हटने का इशारा की क्योंकि अब वह पोजीशन लेना चाहती थी,,, देखते ही देखते शुभम पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया और निर्मला पोजीशन लेकर उसके ऊपर आ गई और अपने हाथ से अपनी बेटे के लंड को पकड़कर अपनी बुर में डाल दी और खुद ऊपर नीचे होने लगी,,, यह देखकर शीतल के होठों पर कामुक मुस्कान तैरने लगी वह समझ गई कि निर्मला जैसी दिखती है वैसी बिल्कुल भी नहीं है,,, घर के बाहर ऐसी रहती है कि जैसे सती सावित्री हो और घर के अंदर रति बनकर संभोग सुख भोग रही है,, लेकिन कुछ भी हो शीतल को तो अपना काम बनता हुआ नजर आने लगा,,,
जैसे-जैसे निर्मला अपने बेटे के लंड पर कूद रही थी वैसे वैसे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में झूल रही थी जिसे तुरंत शुभम अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी हथेली में भरकर उसे जोर जोर से दबाने लगा,,, एक बार फिर से शीतल की गरम सिसकारियो की आवाज पूरे कमरे में गुंजने लगी,,, शीतल का भी दिल जोर-जोर से धड़क रहा था अपनी आंखों के सामने के गर्म नजारे को देख कर उसका मन डोलने लगा वह अपने हाथ से ही कभी अपनी चूची को दबा देती तो कभी साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल दे रही थी ,,, और लगातार मोबाइल से वीडियो बना रही थी,,,

थोड़ी ही देर बाद दोनों की सांसो की गति तेज होने लगी साथ ही निर्मला की गरम सिसकारीयों की आवाज भी तेज हो गई,,, दोनों झड़ने वाले थे कि तभी मदहोशी के आलम में इधर-उधर अपना बदन हिलाते हुए निर्मला की नजर दरवाजे में से झांक रही शीतल पर पड़ गई उसके तो होश उड़ गए ,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि यह पल कैसा पल था जिसमें दुनिया को भूल जाना पड़ता है बेहद सुख की अनुभूति पाने के लिए सब कुछ भूल जाना पड़ता है,,,,, निर्मला चरमसुख के बेहद करीब थी या युं कहलो की उसको चरम सुख प्राप्त होने ही वाला था,,, ऐसे में वह रुक जाए ऐसा संभव बिल्कुल भी नहीं था वह दरवाजे की तरफ देखती रही और अपने बेटे के लंड पर कूदती रही,,, शीतल भी जान गई थी कि निर्मला उसे देख चुकी है,,,बदहव्सी और मदहोशी के आलम में निर्मला का मुंह खुला का खुला रह गया था अपनी आंखों के सामने वह शीतल को दरवाजे पर खड़ी होकर ऊन दोनों मां बेटे की चुदाई देखती हुई देख रही थीं,,, नीचे से शुभम जोर जोर से अपनी कमर को ऊपर की तरफ फेंक रहा था वह भी झड़ने वाला था,,,, निर्मला अभी भी अपने बेटे के लंड पर कुदते हुए शीतल की तरफ देख रही थी,, लेकिन चरम सुख के उस परमसुख को वह खोना नहीं चाहती थी,,, शुभम की आंखें अभी भी बंद थी तो अपनी आंखों को बंद किए हुए ही जोर जोर से धक्के लगा रहा था ,,,शीतल का काम हो गया था अब और ज्यादा निर्मला को शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी इसलिए वहां से धीरे से खिसक ली,,, लेकिन जाते-जाते भी उसे अपने कानों में निर्मला की गर्म सिसकारीर्यों की आवाज सुनाई दे रही थी,,,,

शीतल के जाने के बाद भी निर्मला अपने बेटे के लंड पर कुदना जारी रखी,,, और तब तक कुदती रही जब तक कि दोनों झड़ नहीं गए,,,
 
वासना का तूफान थम चुका था सुभम ने एक बार फिर से अपनी मां की मदमस्त जवानी पर फतेह पाते हुए अपनी जीत का झंडा गाड़ दिया था,,, शुभम गहरी गहरी सांसे लेते हुए अपनी आंखों को मूंदकर उस जबरदस्त अतुल्य पल में खो चुका था,,, एक तरफ शुभम के चेहरे पर संतुष्टि भरा एहसास था तो दूसरी तरफ निर्मला के चेहरे पर चरम सुख पाने की तृप्ति के साथ साथ चिंता भरी लकीरें भी साफ नजर आ रही थी,,,,। उसके सामने अब हजार सवाल खड़े हो गए थे जिनमें से निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा था,,,, उसे अपनी गलती पर पछतावा भी हो रहा था लेकिन अब पछताने से कुछ होने वाला नहीं था तीर कमान से निकल चुका था और ठीक शीतल के द्वारा निशानी पर ही लगा था,,,,
निर्मला भी गहरी गहरी सांसे ले रही थी चिंताओं के बादल तो उमड़ रहे थे लेकिन सावन की बूंदे अभी भी बरस रही थी,,, शुभम का मोटा तगड़ा लंड अभी भी उसकी मां की बुर के अंदर हरकत कर रहा था रह रहे थे उसमें से गरम पानी की बूंदे निकल रही थी जो कि इस समय निर्मला की बुर को पूरी तरह से भर दी थी। पानी निकलने के बावजूद भी शुभम का मोटा तगड़ा जबरजस्त लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा था ,,,बस उसमें हल्का-हल्का ढीलापन आ रहा था,,, लेकिन फिर भी इस अवस्था में अभी सुबह किसी भी औरत की जबरदस्त चुदाई करने में सक्षम था,,, निर्मला एकदम शांत अपने बेटे के लैंड पर बैठी हुई थी कोई और समय होता तो शायद इस अनमोल पल का भरपूर फायदा उठाती लेकिन एक बार बार चरम सुख को प्राप्त कर चुकी थी लेकिन यह चरम सुख के साथ-साथ उसे चिंताओं का दुख भी मिल चुका था अब आगे क्या होगा यह तो भगवान ही जानता था। अपनी गलती पर उसे बार-बार बहुत गुस्सा आ रहा था और अपने बेटे शुभम पर भी जो कि इस समय उसे जबरदस्त चुदाई का सुख देकर मस्ती में नींद की आगोश में जा रहा था,,,, वह मन ही मन सोच रही थी कि अगर वह घर का दरवाजा बंद करना भूल भी गई थी तो शुभम को तो कमरे का दरवाजा बंद करना था लेकिन ऐसे तो बस चुदाई चुदाई चुदाई नहीं दिखाई देती है एक बार इसे इतना समझा चुकी थी फिर भी वह नहीं माना और अपनी एक गलती के कारण जिंदगी बर्बाद कर दीया,,, अगर यह कमरे का दरवाजा भी बंद कर लेता तो आज यह सब ना होता जो कुछ हो चुका है,,, निर्मला यह सब बातें अपने मन में सोच रही थी अपने आप से ही बातें कर रही थी आज उसे अपने बेटे पर बहुत गुस्सा आ रहा था,,, लेकिन वह अपने बेटे को इस बात का एहसास भी नहीं होने देना चाहती थी कि शीतल ने हम दोनों को चुदाई करते हुए देख ली है,, इसलिए वह भी मन से अपने बेटे के खड़े लैंड पर से धीरे-धीरे अपनी गांड उठा कर उसे अपने बुर से बाहर निकालते हुए बिस्तर से नीचे खड़ी हो गई,,,, वह उसी तरह से एकदम नंगी ही अपने कमरे से बाहर निकल गई और बाथरूम में चली गई जहां पर जाकर वहां ठंडे पानी से अपने बुर को अच्छे से साफ करी,,,
Shubham ka taGDAA lund


एक तरफ आंखों से आंसू बह रहे तो तो दूसरी तरफ खुशियों के जाम छलक रहे थे,,, शीतल अपनी फ्रिज खोल कर उसमें से कोल्ड्रिंक्स निकाल कर पी रही थी और मन ही मन खुश हो रही थी,,,, क्योंकि आज ऐसा लग रहा था कि जैसे भगवान ने उसका दामन खुशियों से भर दिया हो मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई हो,, शीतल बहुत खुश थी वह कोल्ड ड्रिंक पीकर उसे वापस फ्रीज में रख कर ड्राइंग रूम में आकर कुर्सी पर बैठ गई और सारी घटनाओं के बारे में सोचने लगी,,,, वजह सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि आज दिन में शीतल के घर चली गई वरना शीतल का इतना बड़ा राज वह कभी अपनी आंखों से देख नहीं पाती जिसे आज तक वह कभी सपने में सोच भी नहीं सकती थी,,,

उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी उसकी आंखों ने देखा है वह सच है क्योंकि शीतल के बारे में इस तरह का सोचना भी पाप था क्योंकि शीतल बेहद मर्यादा सेल और संस्कारों से भरी हुई औरत थी क्योंकि यह बात पूरा समाज पूरी स्कूल जानता था और एक सहेली होने के नाते शीतल बहुत ही अच्छी तरह से निर्मला से अवगत थी लेकिन आज की दिन वाली घटना ने शीतल के ख्यालों को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि निर्मला इस तरह से चुदवाती है और तो और एक मां होकर अपने ही बेटे का लंड अपनी बुर में लेकर कितनी मस्ती के साथ चुदवा रही थी यह नजारा अपनी आंखों से देख पाना ही सीतल के लिए बेहद रोमांचकारी था,,, शीतल कुर्सी पर बैठे बैठे अपने आप से ही सवाल करते हुए बोली क्या सच में एक मां अपने बेटे से इस तरह से चुदवा सकती है क्या उसे जरा भी शर्म नहीं आई अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड़ को अपनी नंगी बुर के अंदर लेने में और तो और पूरी तरह से एकदम नंगी होकर अपने बेटे के ऊपर चढ़कर इस तरह से चुदवाने में क्या निर्मला को बिल्कुल भी झिझक नहीं हुई,,,, अगर यह शीतल का मात्र ख्याल पर होता तो इसका जवाब शायद उसके पास नहीं था लेकिन यह हकीकत थी जिसे वह अपनी आंखों से प्रत्यक्ष रूप से देख चुकी थी और उसे अपने मोबाइल में कैद भी कर चुकी थी इस बात का ख्याल आते ही वह अपने पर्स से मोबाइल निकाल कर उस बेहतरीन जबरदस्त नजारे को एक बार फिर से अपने मोबाइल की स्क्रीन पर देखने लगी जिसमें निर्मला खुद अपने बेटे शुभम के मोटे तगड़े लंड पर अपनी बड़ी बड़ी गांड रखकर उसके लंड पर उछाल रही थी और जोर-जोर से गर्म सिसकारी भर ले रही थी,,,। शीतल मोबाइल पर निर्मला की रंगीन काली करतूत को देखकर मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि इसी के सहारे वह अपनी मंजिल को पा सकती हैं । शुभम के मोटे तगड़े लंड को अपनी भी बुर में लेकर वह तृप्त हो सकती है,,,, मोबाइल की स्क्रीन पर शीतल निर्मला के छिपे हुए चेहरे को देख कर यकीन नहीं कर पा रही थी कि यह वही निर्मला है जो कि बार-बार संस्कारों और मर्यादा में रहने की डींगए हांका करती थी,,, उसे वह दिन याद आ गया जब इसी तरह से एक दिन वह क्लास में शुभम के मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और उसी समय निर्मला आ गई थी तो वह शीतल को कितना भला बुरा खरी-खोटी सुनाई थी शीतल निर्मला के इस व्यवहार से इतना शर्मिंदा हुई थी कि वह अपने आपकी नजरों में गिरती हुई महसूस कर रही थी आईने में अपने चेहरे से नजर नहीं मिला पा रही थी,,, लेकिन आज उसी मर्यादा सीन संस्कारों से भरी हुई औरत का नया रूप देखकर शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे महसूस हो रहा था कि अब वह शुभम से आराम से चुदवा सकती है और संभोग का भरपूर आनंद ले सकती है,,,, अब निर्मला और शुभम दोनों उसे अपनी मुट्ठी में आते हुए महसूस होने लगे थे उसे पक्का यकीन था कि इस वीडियो के जरिए और जो कुछ भी उसने अपनी आंखों से गरमा गरम नजारा देखा है उससे वह शुभम को पूरी तरह से अपना बना सकती हैं आप निर्मला को इसमें जरा भी दिक्कत नहीं होगी और ना तो उसे कोई परेशानी होगी,,,, क्योंकि वह अपनी इज्जत बचाने के लिए कुछ भी कर सकती हो और उसे ज्यादा कुछ तो करना नहीं था बस जो कुछ भी अपने बेटे के साथ कर रही थी वही क्रिया शुभम के द्वारा उसे अपने साथ करना था यह ख्याल मन में आते ही शीतल के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैरने लगी,,,
NIRMALA kursi par bethinhuyi



लेकिन एक पक्की सहेली होने के नाते उसे इस बात का भी एहसास था कि वह ऐसा कुछ भी नहीं करेगी जिससे निर्मला की इज्जत पर कोई आंच आए जो कुछ भी होगा वह बड़े आराम से संभाल लेगी,,,, इस बात का हुआ दृढ़ निश्चय करके मोबाइल में एक बार फिर से दोनों मां-बेटे की जबरदस्त चुदाई के दिल से देखकर पूरी तरह से कामुकता के ज्वर में जलने लगी और खुद ही अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी दो उंगली एक साथ अपनी गीली बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करने लगी,,, शीतल का ड्राइंग रूम उसकी गर्म सिसकारी से गुजरने लगा,,,, और देखते ही देखते अपनी दो उंगली के द्वारा ही वह चरम सुख को प्राप्त कर ली,,,

धीरे-धीरे शाम ढलने लगी थी और निर्मला का मन काम में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था वह अभी भी कुर्सी पर बैठकर दिन वाली बात के बारे में सोच रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसे इस बात का डर था कि सीतल कहीं किसी को भी इन दोनों मां-बेटे के रिश्ते के बारे में बता दी तो उन दोनों का क्या होगा वह तो जीते जी मर जाएगी समाज में जितना रुतबा इज्जत उसने कमाई है सब मिट्टी में मिल जाएगी स्कूल में हो सकता है नौकरी से भी हाथ धोना पड़े समाज में कितनी बड़ी बदनामी होगी यही बात सोच सोच कर उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था उसे कमजोरी महसूस हो रही थी वह उसी तरह से कुर्सी पर बैठी हुई थी,,

और दूसरी तरफ शीतल के मन में लड्डू फूट रहा था वह अपनी छत पर खड़ी होकर शुभम का घर से जाने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वह ऐसा कुछ भी नहीं चाहती थी किसी से इस बारे में कोई भी बात हो जो कि निर्मला की इज्जत पर बन आए,,, वह जल्द से जल्द निर्मला से मिलना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि अपने बेटे से चुदवाते समय किसी गैर की नजरों में पकड़े जाने पर उसके सामने आने पर चेहरे का भाव किस तरह से बदलता है,,,, शीतल अपनी छत पर चहलकदमी करते हुए नीचे निर्मला के घर की तरफ देख रही थी कि तभी उसे शुभम घर से बाहर निकलता हुआ नजर आया उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव उमड़ पड़े,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि सुभम को देख कर उसके मासूम चेहरे को देख कर कोई भी यह नहीं सोच सकता की लड़का अपनी मां की चुदाई करता होगा,,,, थोड़ी ही देर में शुभम अपने घर से बाहर निकल कर सड़क पर जाने लगा,,, शीतल खुश होते हुए जल्दी-जल्दी अपनी सीढ़ी से नीचे उतर कर अपने घर से बाहर आ गई निर्मला के घर की तरफ चल दी,,,,


दरवाजे के बाहर खड़ी होकर वह डोर बेल बजाने लगी,,,
घंटी की आवाज सुनते ही निर्मला एकदम से डर गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस वक्त दरवाजे पर कौन होगा क्योंकि अभी अभी तो शुभम घर से बाहर गया था तो इतनी जल्दी वापस लौट कर आने वाला देखा नहीं उसे यकीन हो गया कि हो ना हो दरवाजे पर शीतल ही खड़ी है उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अगर शीतल होगी तो वह कैसे उसे नजरे मिला पाएगी,,, उससे क्या कहेगी कि क्या सफाई देगी,,,, यह सोच सोच कर ही उसका बुरा हाल हुए जा रहा था बार-बार शीतल डोरबेल बजाई जा रही थी आखिरकार उसे शीतल का सामना तो करना ही था इसलिए वह अपना मन करत करके कुर्सी पर से खड़ी हुई और दरवाजे पर जाकर कुछ सोचने के बाद दरवाजा खोल दी उसके सोचने के अनुसार दरवाजे पर शीतल ही खड़ी थी लेकिन वह शीतल से नजरें नहीं बना पा रही थी सर मैं सी गाड़ी जा रही थी आखिरकार एक औरत उस औरत के सामने कैसे नजरे मिला सकती है जो कि उस औरत ने उसे अपने ही बेटे से एकदम नंगी होकर चुदवाते हुए देखा हो,,,

क्या हुआ इतनी देर क्यों लगी दरवाजा खोलने में मैं कब से घंटी बजाए जा रही हूं,,,

ककककक,,, कुछ नहीं बस थोड़ा सा आंख लग गई थी,,,,


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आंख लग गई थी लेकिन तुम तो पसीने से भीगी हुई हो क्या हुआ,,,

नहीं कुछ नहीं यूं ही थोड़ी तबीयत खराब लग रही थी थोड़ा चक्कर जैसा आ रहा था( निर्मला शीतल से नजरे मिलाए बिना ही इधर-उधर देखते हुए बोली।)

अब ऐसे काम करोगी तो चक्कर तो आएगा ही,,,
( शीतल के कहने के मतलब को निर्मला अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए कुछ बोली नहीं बस रोने लगी उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे,,,, निर्मला को इस तरह से रोता हुआ देखकर शीतल से रहा नहीं क्या हुआ जिंदगी में पहली बार निर्मला को रोते हुए देख रही थी इसलिए वह तुरंत अपनी साड़ी का आंचल थाम कर उसके आंसू को पोंछते हुए बोली,,,)

अरे अरे रो क्यों रही हो मैं कुछ कह थोड़ी रही हूं,,,,,
( लेकिन निर्मला के पास अब बोलने के लिए शब्द नहीं थे वह बहुत रोती जा रही थी वह शीतल के गले लग कर रोने लगी उसे शीतल बार-बार चुप कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह रोए जा रही थी,, निर्मला के आंखों से आंसू का इस तरह से निकलना शीतल के सामने पूरी तरह से समर्पण की भावना दर्शा रही थी जोकि उसकी आंखों से बहते हुए आंसू को देखकर शीतल समझ गई कि अब उठ पूरी तरह से पहाड़ के नीचे आ गया है,,, निर्मला रो रही थी लेकिन शीतल मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,, आखिर वह प्रसन्न क्यों ना होती उसका सपना जो पूरा होने वाला था मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंड उसे अब अपनी बुर में महसूस होने लगा था क्योंकि वह जानती थी कि निर्मला को अब बनाना कोई बड़ी बात नहीं है और नहीं मानी तो उसके पास उन दोनों का वीडियो तो है ही वह उंगली सीधी नहीं तो उंगली टेढ़ी करके भी अपना काम बना लेगी,,, शीतल शुभम से शारीरिक संबंध बनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी यह उसके मन में आए इस ख्याल से प्रतीत हो रहा था,,, शीतल बार-बार निर्मला को चुप कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन रंजना ठीक ही चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी,,, और निर्मला भी यही चाह रही थी कि किसी भी तरह से शीतल मान जाए और यह बात कमरे के बाहर ना जा पाए इसलिए वह चुप होने का नाम नहीं ले रही थी मुंह से तो शब्द निकल नहीं रहे थे इसलिए आंसू के जरिए ही अपना बयान शीतल को दे रही थी।)
 
निर्मला शीतल के गले लग कर रोए जा रही थी और शीतल उसे शांत कराने की कोशिश कर रही थी लेकिन निर्मला के आंसू थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे,,,,

अब बस भी करो निर्मला रोती ही रहोगी या चुप भी होगी,,,,

मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई शीतल,,,, मैं भावनाओं में बहक गई,,,( निर्मला शीतल के गले लगे हुए ही रोते-रोते बोली,,,)

मैं समझ सकती हूं निर्मला पहले अपने आप को शांत करो,,,( ऐसा कहते हुए वह निर्मला को अपने गले से दूर करते हुए उसे वापस कुर्सी पर बैठाने लगी और निर्मला लड़खड़ाते हुए कुर्सी पर ऐसे बैठी जैसे कि उसे चक्कर आ रहा हो,,) रुको मैं तुम्हारे लिए पानी लाती हूं,,,,( इतना कहकर शीतल रसोई घर की तरफ जाने लगी निर्मला को तो समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या कहें यह सब कैसे हो गया वह क्या बहाना बनाए वह इसी उधेड़बुन में लगी हुई थी कि तब तक शीतल ठंडे पानी का गिलास लेकर उसके पास आ गई,,,)

यह लो निर्मला पहले तुम ठंडा पानी पियो अपने मन को शांत करो फिर हम बात करते हैं,,,,
( इतना कहकर शीतल ठंडे पानी के ग्लास को निर्मला के हाथ में थमाने लगी और निर्मला भी नजरें नीचे झुकाए हुए ही हाथ आगे बढ़ाकर पानी के गिलास को थाम ली और पीने लगी निर्मला दो-तीन घूंट पानी पीकर वापस उसे टेबल पर रख दी,,, अब वह शांत नजर आ रही थी। लेकिन शीतल से नजरें मिलाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी कुछ देर तक यूं ही दोनों के बीच खामोशी छाई रही तो शीतल ही बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)

यह सब क्या था निर्मला तुम पर मैं इतना भरोसा करती थी कोई भी औरत बहक सकती थी यह तो मैं समझ सकती हूं लेकिन तुम्हारी जैसी औरत जो इतनी मर्यादा में रहने वाली संस्कारों से भरपूर इतनी अच्छी औरत होने के साथ-साथ तुम एक मां भी हो जो कि एक अच्छी मां लेकिन फिर भी तुम इस कदर ,,,,वो भी अपने ही बेटे के साथ,,,,,, छी छी मुझे तो सोचकर ही शर्म आती है लेकिन क्या करूं मेरी तो नसीब फुटी थी कि मैंने अपनी आंखों से एक मां बेटे के पवित्र रिश्ते को कलंकित होता हुआ देख ली,,,,( इतना कहकर शीतल खामोश हो गई,,, वह जानबूझकर निर्मला के सामने बुरा सा मुंह बना रही थी वह ऐसा दर्शना चाह रही थी कि उन दोनों की चुदाई देख कर उसे बहुत बुरा लगा है और निर्मला शीतल की इस तरह की बातें सुनकर फिर से फूट-फूट कर रोने लगी एकदम से घबरा गई क्योंकि शीतल की बातों से उसे लगने लगा कि वास्तव में वह बहुत ही गंभीर गुनाह कर दी थी जिसके पछतावे के रूप में वह शीतल के सामने दोनों हाथ जोड़ ली और हाथ जोड़ते हुए बोली। )

मुझे माफ कर दो शीतल मुझे माफ कर दो मुझसे अब यह गलती दोबारा नहीं होगी ,,,( इतना कहते ही निर्मला कुर्सी पर से उठ खड़ी हुई और सीधा जाकर शीतल के पैर पकड़कर,,,) मुझे माफ कर दो शीतल मैं जानती हूं मैं बहुत बड़ी गलती कर चुकी हूं मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं जो कुछ भी तुमने अपनी आंखों से देखी हो वह किसी को मत बताना वरना मैं मर जाऊंगी मैं कसम से आत्महत्या कर लूंगी तुम यह बात किसी से मत बताना,,,,( निर्मला फूट-फूटकर रोए जा रही थी और यह बात शीतल से बोले जा रही थी निर्मला को इस तरह से अपने पैरों में गिरा देखकर शीतल को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन उसे अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा था कि अपनी बेइज्जती का बदला व निर्मला से इस तरह से ले रही है लेकिन इस बात का एहसास वह निर्मला को नहीं होने देना चाहती थी कि वह बहुत खुश है इसलिए वह तुरंत शीतल की दोनों बाह पकड़ कर उसे उठाते हुए वह बोली।)

निर्मला,,,,, यह क्या कर रही हो तुम,,,, पागल हो गई हो मेरे पैर पकड़ रही हो,,, तुम मेरी सबसे अच्छी सहेली हो जिसके साथ में अब तक अपनी जिंदगी के बहुत सारे किस्से शेयर करते आई हूं तुम मेरे लिए आदर्श हो एक टीचर होने के नाते और एक अच्छी औरत के साथ-साथ एक मां होने के नाते मैं जानती हूं कि तुम से गलती तो हुई है और वह भी बहुत बड़ी गलती हुई है किसी और के साथ अगर तुम शारीरिक संबंध बनाती तो शायद एक बार में इस बात को नजरअंदाज कर जाती लेकिन तुम खुद अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध और वह भी इस तरह से एकदम गंदे तरीके से मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं कैसे कहूं,,,,

शीतल तुम मुझे बस माफ कर दो,,,,,,( एक बार फिर से निर्मला झुक कर उसके पैर पकड़ ली और शीतल तुरंत उसका हाथ पकड़कर उसे ऊपर उठाने लगी और बोली,,,)

तुम फिर पागल जैसी हरकत कर रही हो मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा है कि तुम मेरे पैर पकड़ रही हो,,,, तुम्हारी हरकत की वजह से मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही है,,,

मैं जानती हूं मेरी गलती ही ऐसी है कि किसी को भी शर्मिंदगी महसूस होने लगेगी,,,, लेकिन मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं शीतल इस बारे में तुम किसी को कुछ नहीं कहोगी अगर किसी को इस बात की भनक भी लगी तो तुम मेरा मरा मुंह देखोगी,,, मैं मर जाऊंगी आत्महत्या कर लूंगी लेकिन बदनामी का दाग अपने दामन पर लेकर जी नहीं पाऊंगी,,,

निर्मला तुम यह बात अगर पहले सोची होती तो आज यह दिन ना देखना पड़ता इतनी अच्छी खासी औरत होने के साथ-साथ एक टीचर होने के बावजूद भी तुम अपनी मर्यादा से बाहर निकल कर अपनी तन की वासना मिटाने के लिए अपने ही बेटे के साथ शारीरिक संबंध बना ली,,

क्या करूं शीतल में बहक गई थी,,,,,( इतना कहते हुए वह दूसरी तरफ मुंह कर ली,,,)

लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम इतना ज्यादा बहक गई कि कोई और नहीं मिला अपने ही बेटे के साथ,,,,,

क्या करूं शीतल मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,।

क्यों समझ में नहीं आ रहा था तुम्हारी आंखों पर किस तरह की पट्टी पड़ गई थी कि तुम्हें दूसरे मर्द और अपने बेटे में कोई फर्क नहीं लगा अपने ही बेटे को जवान मर्द समझ कर उसके साथ शारीरिक संबंध बना ली अरे इतना तो लिहाज की होती कि वह तुम्हारा बेटा है तुम्हारा सगा बेटा कोई सोतेला भी नहीं सोतेला होता तो कहने को तो की छोडो जवान लड़का देखकर एक सौतेली मा बहक गई और उसके साथ चुदवा ली,,,,,
( शीतल जानबूझ के निर्मला से इस तरह की बातें कर रही थी कि निर्मला को इस बात का एहसास हो कि वह बहुत बड़ी गलती कर चुकी है और उसकी एक मात्र एक गवाह शीतल ही है जो कि सारी बाजी अब उसके हाथ में थी इसलिए तो शीतल की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर शिकन की लकीरें नजर आने लगी वाह घबराने लगी,,,।)

मैं क्या करूं शीतल उस समय मुझे कुछ समझ में नहीं आया,,,,

क्या हुआ तुम्हारे साथ जबरदस्ती कर रहा था जो तुम्हें समझ में नहीं आया,,, जहां तक मैं जानती हूं कि शुभम इस तरह का लड़का बिल्कुल भी नहीं है कि अपनी मां के साथ जबरदस्ती करेगा अरे अपनी मां तो क्या वह किसी लड़की के साथ जबरजस्ती कर ही नहीं सकता,,, तुम सब कुछ रोक सकती थी लेकिन निर्मला कहीं ना कहीं मुझे इन सब में तुम्हारी गलती सबसे ज्यादा लगती है,,,।
( शीतल कि ईस तरह की कड़वी बातें सुनकर निर्मला खामोश रही बोलने के लिए उसके पास शब्द ही नहीं थे वह जानती थी कि शीतल जो कुछ भी कह रही थी सच था,,, वह चाहती तो सब कुछ रुक सकता था बल्कि पवित्र रिश्ते को तार-तार करने में उसका ही पूरा हाथ था उसका बेटा तो मात्र उसकी इच्छा के मुताबिक सहयोग दे रहा था,, निर्मला को इस तरह से खामोश देखकर शीतल अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए और एक तरह से धमकाते हुए बोली,,,।)

तुम जानती हो निर्मला अगर कमरे के अंदर की बात घर के बाहर चली गई तो क्या होगा,,( इतना सुनकर निर्मला के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी उसके चेहरे का रंग बदलने लगा वह घबराने लगी और फिर से सुबक -सुबक कर रोना शुरू कर दी,,,, शीतल निर्मला को इस तरह से रोता हुआ देखकर उसे ढांढस बंधाते हुए बोली,,,।)
लेकिन तुम इत्मीनान रखो निर्मला यह राज,,,, राज ही रहेगा,,, मैं कभी नहीं चाहूंगी कि तुम्हारी किसी भी तरह से बदनामी हो,,,, ( शीतल की बात सुनकर निर्मला के चेहरे पर राहत का एहसास साफ झलकने लगा,,,,) लेकिन मैं इतना जरूर जानना चाहूंगी कि ऐसा क्या हो गया कि इतनी अच्छी औरत होने के बावजूद अपने ही बेटे के साथ तुम्हें शारीरिक संबंध बनाना पड़ा,,,,( इतना कहते हुए शीतल कुर्सी पर बैठ गई क्योंकि अब उसकी दिलचस्पी निर्मला की बातों में बढ़ती जा रही थी वह जानती थी कि वह सब कुछ बताएगी और वह यही जानना चाहती थी यह सब कैसे हो गया,,, शीतल अंदर ही अंदर बहुत खुश थी शीतल की बात मानने के सिवा निर्मला के पास और कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह भी फिर से कुर्सी पर बैठकर अपनी बात शुरू करते हुए बोली,,,।)

यह सब कैसे शुरू हो गया शीतल यह तो मैं नहीं जानती लेकिन आज मैं तुम्हें अपना एक राज बताना चाहती हूं जोकि आज तक इस राज को सिर्फ मेरा बेटा ही जानता है और अब तुम जानो गी,,,,

कैसा राज,,,,

यही कि मैं अपने पति से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं या यह कह लो कि मेरा पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते मुझे वह खुशी नहीं दे पाते जो एक मर्द औरत को देता है,,,

लेकिन निर्मला तुम्हें देखने के बाद तो कभी ऐसा लगता ही नहीं कि तुम अपने पति से नाखुश हो तुम तो हमेशा खुश रहती थी बल्कि मैं तो तुमसे सब कुछ पूछती भी थी लेकिन कभी तुम ने इस बात का जिक्र तक नहीं की,,,,

यही तो बात है शीतल हंसते हुए चेहरे के पीछे का दर्द यह दुनिया नहीं देख पाती यह तो मैं ही जानती थी कि मैं कैसे अपनी जिंदगी जी रही थी या यूं कह लो मेरी आत्मा कब से मर चुकी थी मेरा शरीर जिंदा लाश की तरह था जिंदगी का सुख क्या होता है यह मैं सब कुछ भूल चुकी थी स्कूल से घर घर से स्कूल बस यही मेरी जिंदगी रह गई थी,,,,( शीतल को निर्मला की बातें सुनने में मजा आ रहा था वह भले ही अपने चेहरे पर निर्मला की बातें सुनकर उसका दर्द के भाव उपसा रही थी लेकिन अंदर ही अंदर खुश हो रही थी,,,)
हां मैं अच्छी औरत थी संस्कारों से भरी हुई है मर्यादा संपन्न मेरे मां बाप ने मुझे इसी तरह के संस्कार दिए थे,,, और मैं उस पर कायम भी थी लेकिन ना जाने फिर कैसा तूफान मेरी जिंदगी में आया कि सब कुछ बदल कर रख दिया,,,

कैसा तूफान,,,?

बहुत ही भयंकर तूफान शीतल,,, मैं पहले अपने बेटे में अपना बेटा ही देखती थी लेकिन तुम्हारी बातें सुनकर मेरा नजरिया बदलने लगा,,,

मेरी बातें मैं कुछ समझी नहीं ,,,, (शीतल आश्चर्य से बोली)

तुम्हारी चटपटी मजाकिया बातें,,,( निर्मला अपने चेहरे पर भाव हीन एहसास लाते हुए बोली।)

मेरी मजाकिया बातें मैं कुछ समझी नहीं,,,

शीतल तुम शायद भूल चुकी हो लेकिन मुझे याद है कि तुम मजाक मजाक में मेरे बेटे को लेकर मजाक किया करती थी कि तुम्हारे पास जवान बेटा है सोचो उसका लंड कैसा होगा मैं अगर उसकी मां होती तो अब तक उस से चुदवा ली होती,,, ( निर्मला की यह बात सुनकर शीतल को याद आ गया कि वह इस तरह की बातें निर्मला से किया करती थी लेकिन वो बोली कुछ नहीं बस सुनती रही) तुम्हारी इस तरह की बातें मुझे खराब लगती थी लेकिन यह तुम्हारी बातों का ही असर था कि ना जाने क्यों अपने बेटे को देखकर मुझे अब उसमें एक मर्द नजर आने लगा था,,, और मेरा बेटा कब जवान मर्द बन गया मुझे इस बात का अहसास तक नहीं हुआ,,,, मैं उसे बच्चा समझती थी लेकिन तुम्हारी बातों ने मुझे उस बच्चे में एक जवान मर्द दिखाने लगा जोकि अनजाने में ही मैंने एक बार उसके लंड को अपनी आंखों से देख ली तब से उसे देखने का नजरिया मेरा पूरी तरह से बदल गया,,,, इस बात को तो तुम भी अच्छी तरह से जानती हो कि मेरे बेटे का लंड कैसा है,,,( निर्मला की यह बात सुनते ही शीतल के चेहरे के भाव बदल गए वह असमंजस में पड़ गई।)
मेरा मन बहकने लगा मेरा तन बदन पूरी तरह से मचलने लगा,,, मैं अपने पति से पूरी तरह से प्यासी थी अपने पति से कभी भी शारीरिक सुख नहीं महसूस कर पाई थी इसलिए बार-बार मेरी इच्छा होती थी कि मैं अपनी बेटे के लंड को देखूं,,,,

फिर क्या हुआ,,,?



फिर क्या रोज-रोज मेरे बेटे को लेकर तुम्हारा मजाक करना आग में घी का काम कर रहा था,,, फिर क्या था तुम्हारी शादी की सालगिरह आ गई और हम लोग तुम्हारी सालगिरह मनाने के लिए कार लेकर निकल पड़े लेकिन क्या जानते थे कि भगवान को कुछ और मंजूर था तूफानी बारिश में हम लोग तुम्हारे घर पहुंच नहीं पाए और घने पेड़ के नीचे आसरा ले लिए,,, तूफानी बारिश और ऐसे में मैं और शुभम दोनों अकेले थे मेरा नजरिया पहले से ही शुभम को देखने का बदल चुका था सुभम में मुझे अपना बेटा नहीं बल्कि एक जवान मर्द नजर आने लगा था मैं उसे पूरी तरह से रिझाने की कोशिश करने लगी थी,,, लेकिन मेरे बेटे ने कभी भी पहले आगे बढ़कर इस तरह की हरकत नहीं किया कि वह मेरी तरफ से पूरी तरह से आकर्षित है मुझे ही कदम आगे बढ़ाना पड़ा मैं अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से मैं उसके मर्दाना अंगों को देखकर पूरी तरह से बहक चुकी हूं वह भी अगर मेरे खूबसूरत अंग को देखेगा तो वो भी पूरी तरह से बहक जाएगा उस में जिस तरह से मुझे एक बेटा नहीं बल्कि मर्द नजर आने लगा था उसे भी मुझ में मां नहीं बल्कि एक औरत नजर आने लगेगी और यही सोचकर में उसके सामने जोर से पेशाब आने का बहाना की,,,

( निर्मला कि ईस तरह की बातें सुनकर शीतल की दिलचस्पी उसकी बातों को सुनने में बढ़ने लगी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी क्योंकि निर्मला बात ही कुछ इस तरह की कर रही थी कि उसकी भी हालत खराब होती जा रही थी वह मादक स्वर में बोली।)

फिर क्या हुआ निर्मला,,,,

फिर क्या वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था मैं उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर कार की खिड़की से पेशाब करने लगी और जानबूझ कर उसे अपनी बुर दिखाने लगी,,, जैसा मैं सोच रही थी वैसा ही हुआ मेरा बेटा मेरी बुर देखकर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया उसका मन मचलने लगा उसे छूने के लिए उसे पकड़ने के लिए,,,
( निर्मला अपनी कामोत्तेजना से भरपूर बातों से कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म कर दी,,) मेरे ईसारे भर की देरी थी और शुभम पूरी तरह से तैयार हो जाता मुझे चोदने के लिए लेकिन मैं अभी अच्छी तरह से जानती थी कि यह काम उसने पहले कभी नहीं किया था इसलिए धीरे-धीरे बढ़ना ही उचित था मैं जानती हूं कि इसमें सारी गलती मेरी ही थी लेकिन एक औरत होने के नाते मेरी भी कुछ जरूरते थी,, जिसके आगे में घुटने टेक चुकी थी,,, सुभम मुझे एक टक पागलों की तरह देख रहा था मेरी उठी हुई साड़ी के अंदर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज देख ली हो,,, उसकी सांसे बहुत ही गहरी चल रही थी वह मेरी बुर को तब तक देखता रहा जब तक मैं उसे नजर भर कर दिखाती रही वह पागल हो जा रहा था क्योंकि मैं उसकी आंखों के सामने उसे अपनी नंगी बुर दिखाते हुए मुत रही थी यह नजारा शायद उसके लिए बेहद काम उत्तेजना से भरपूर था वह इस नजारे का भरपूर फायदा अपनी नजरों से उठा रहा था,,,, जैसे ही मैं अपनी साड़ी नीचे गिराई ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके अरमानों पर पर्दा गिर गया है उसके चेहरे पर उदासी के बादल नजर आने लगे,,,,



मैं जिंदगी में पहली बार इस तरह की हरकत और वह भी अपने ही बेटे के सामने कर रही थी जिससे मैं पूरी तरह से चुदवासी हो गई थी,,, मैं देखना चाहती थी कि मुझे उस हालत में देखकर क्या उसका बेटा भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका है इसलिए मैं भी उसे पेशाब करने के लिए उकसाने लगी,,, बरसात का तूफानी माहौल पूरी तरह से वातावरण को बदल दे रहा था मेरी मादकता भरी जवानी देख कर मेरा बेटा भी पिघलने लगा था,,,, आखिरकार वह भी शर्माते शर्माते पेशाब करने के लिए तैयार हो गया वह भी कार की खिड़की से अपने लंड को बाहर निकालकर पेशाब करना शुरू कर दिया,,, मैं अपने बेटे के खड़े मोटे तगड़े लंड को देखकर अपनी लालच को रोक नहीं पाई और हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे का लंड को पकड़ कर उसे पेशाब कराने में मदद करने लगी,,,, मेरी नाजुक नाजुक उंगलियों का स्पर्श अपने लंड पर महसूस करके मेरा बेटा पूरी तरह से पागल हो गया उसके चेहरे का भाव बदलता हुआ महसूस हो रहा था वह शर्म के मारे एकदम गनगनाने लगा,,,, मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैं भी प्यासी औरत थी अपने हाथ में इतने मोटे तगड़े लंड को देखकर मैं अपनी लालच को रोक नहीं पाई और उसके लंड को हिलाने लगी वह पेशाब करता जा रहा था और मेरी नाजुक नाजुक उंगलियों का मजा भी लेता जा रहा था,,,,
मैं पूरी तरह से मचल रही थी मैं अपने भावनाओं पर काबू कर पाने में असमर्थ थी लेकिन,,, लेकिन उस दिन मुझे क्या हुआ कि मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी सब कुछ बेअसर होता जा रहा था,,, मेरे बेटे का लंड इतना मोटा तगड़ा और लंबा था कि मेरे पति का लंड उससे आधा भी नहीं था,,,,
मेरी शारीरिक जरूरतें और मेरे बदन का प्यासा पन और साथ ही तूफानी बारिश पूरी तरह से मुझे घुटने टेकने पर मजबूर कर रही थी मैं चाहती तो सबकुछ रोक सकती थी लेकिन मैं अपने भावनाओं पर काबू नहीं कर पा रही थी शीतल तुम एक औरत हो और एक औरत होने के नाते तुम अच्छी तरह से जानती हो कि बरसात के तूफानी माहौल में एक औरत हमेशा पुरुष का संग चाहती है और वही मेरे साथ हो रहा था,,, मुझे अपने बेटे में एक जवान मर्द नजर आ रहा था जिसका मोटा तगड़ा लंड मेरे हाथ में था,,, और ऐसा लंड जीससे में बरसों से अपनी अतृप्त भावनाओं को तृप्त कर सकती थी,,,( निर्मला की गरमा गरम बातें सुनकर शीतल पूरी तरह से गीली होती जा रही थी।)
मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपने बेटे के सामने कार की सीट पर अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी रसीली बुर को उसकी आंखों के सामने उसके लिए परोस दी,,,, मुझे इस तरह से टांग फैलाए हुए देखकर मेरा बेटा हक्का-बक्का रह गया ऐसे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करें वह तो मेरी बुर को टकटकी बांधे देखे जा रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी आंखों के सामने दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज रख दी गई हो,,,, मैं यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि इससे पहले मेरे बेटे ने कभी भी किसी भी लड़की या औरत के साथ चुदाई का खेल नहीं खेला था तो इसलिए उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि औरत की चुदाई कैसे की जाती है,,,,
मैं स्कूल में टीचर थी और वहां बच्चों को किताब के मुताबिक हर चीज सिखाती थी लेकिन यहां पर मैं आज अपने बेटे को एक नई और जिंदगी की बेहद जरूरी शिक्षा देने जा रही थी इसलिए खुद ही उसके लंड को पकड़ कर अपनी बुर से सटा दी और उससे वही करने को बोली जो एक मर्द औरत के साथ करता है जैसा जैसा मैं बोलती गई वैसा वैसा मेरा बेटा करता गया,, देखते ही देखते मेरे बेटे का लंबा मोटा तगड़ा मुसल जैसा लंड मेरी बुर की गहराई में खो गया,,,, मेरा बेटा पागल हुए जा रहा था आज वह जिंदगी में पहली बार औरत का अनुभव ले रहा था वह हैरान था इस चुदाई के खेल को खेल कर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि पूरा लंड बुर में डालने के बाद क्या किया जाता है मैं ही उसे बताया कि अपनी कमर को आगे पीछे कर के अपने नंबर को उसकी बुर में जोर-जोर से अंदर बाहर करे,,, और उसने ठीक वैसा ही किया मुझे लग रहा था कि पहली बार मैं मेरा बेटा बहुत ही जल्दी निपट जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ मैं उसे धीरे धीरे से अपनी कमला रानी को बोलती थी तो वह जोश में आकर बड़ी रफ्तार से अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने लंड को मेरी बुर में पेल रहा था,,, शीतल मैं सच बता रही हूं मेरा बेटा पहली बार मुस्कुरा कर किसी औरत की चुदाई कर सकता है यह मुझे यकीन नहीं हो रहा था,,, करीब 45 मिनट तक धक्के पर धक्का लगाता रहा मैं तो पागल हुए जा रही थी वह एक भी बार नहीं झढ़ा था लेकिन मैं दो बार निपट चुकी थी,,, सच कहूं तो शीतल जिंदगी में पहली बार मुझे औरत होने पर गर्व हो रहा था जिंदगी में पहली बार में चुदाई का असली मजा लूट रही थी और उस तूफानी रात में सुबह तक हम दोनों ना जाने कितनी बार चुदाई का खेल खेलते रहे,,, उस दिन से जो सिलसिला शुरू हुआ तो आज तक रुकने का नाम नहीं लिया बस यही मेरी कहानी है,,,,

बाप रे बाप ,,,(शीतल लंबी सांस लेते हुए बोली) जिस तरह से तुम बता रहे हो निर्मला अगर तुम्हारी जगह दुनिया की कोई भी मां होती तो शायद वही करती जो तुमने की थी,,, तुम्हारी बातें सुनकर तो मैं पूरी तरह से गीली हो गई,,
( शीतल की बातें सुनकर निर्मला खामोश रही कुछ बोल नहीं रही थी बस नजरे झुकाए नीचे फर्श को देखे जा रही थी,,,)
 
शीतल निर्मला के घर से जा चुकी थी लेकिन जाते-जाते अपने पीछे तूफान छोड़ गई थी,,, और उस तूफान से कैसे निकलना है इस बारे में खुद निर्मला को फैसला लेना था,,, शीतल की बात माल लेने में ही निर्मला के लिए भलाई थी,,, यह बात निर्मला भी अच्छी तरह से जानती थी। निर्मला को एक बार फिर से अपनी गलती पर गुस्सा आने लगा और शीतल पर भी जिसकी नजर पहले से ही उसके लड़के पर बिगड़ी हुई थी भले ही वह सब कुछ निर्मला से मजाक में कह जाती थी लेकिन उसके मजाक के पीछे का जो राज था वह खुलकर आज उसके सामने आ गया था,,, वह कुर्सी पर धम्म से बैठ गई,, और अपनी गलती का क्या क्या परिणाम हो सकता है उस बारे में सोचने लगी,,, हजार बार सोचने के बाद उसे अच्छी तरह से समझ में आ गया था कि शीतल की बात ना मानने की वजह से उसकी जिंदगी में भूचाल आ जाएगा जिसका परिणाम बेहद डरावना और भयानक होगा,, वह शुभम को किसी और औरत से बांटना भी नहीं चाहती थी,,, लेकिन अब वह पूरी तरह से मजबूर हो चुकी थी,,,अगर वह शीतल के कहे अनुसार कल रात 9:00 बजे उसके घर नहीं भेजेगी तो वह कुछ भी कर सकती है क्योंकि यह बात निर्मला अच्छी तरह से जानती थी कि एक कामांध नारी पुरुष संसर्ग के लिए किसी भी हद तक जा सकती है,,,,, और शीतल की बातों से यही लग रहा था कि अगर वह शुभम को उसके घर नहीं भेजेगी तो वह उसे पूरे समाज में बदनाम कर देगी,,, निर्मला उसकी बातों को झुठला भी सकती थी लेकिन निर्मला की काम लेना की वीडियो जो उसके पास थी जिसे वह झुठला नहीं सकती थी सारा समाज झुठला नहीं सकता था,,, लाख सोचने विचारने के बाद ही निर्मला ईसी निष्कर्ष पर आई कि अगर पूरे परिवार की उसकी खुद की इज्जत को बचाना है तो शुभम को ना चाहते हुए भी शीतल के पास भेजना ही होगा,,,
यह बात सोच कर ही निर्मला के माथे पर पसीना आ गया क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि शुभम को शीतल के पास भेजने का मतलब है कि शीतल उससे चुदवाएगी,, और एक खूबसूरत नारी के संसर्ग में आकर दुनिया का कोई भी मर्द उस नारी को भोगने की इच्छा को मार नहीं सकता भले ही उस पर कितनी भी जिम्मेदारी और भरोसे का दबाव हो,,
और शीतल तो इस काम में पूरी तरह से माहिर थी अपनी खूबसूरत बदन अपने अंगों का जलवा दिखा कर वो किसी भी मर्द को आकर्षित करने में सक्षम थी और शुभम तो अभी नादान था,,, वह अब तक अपनी मां के ही खूबसूरत अंगो और बदन को देखता आया है और उसे ही भोगता आया है,,, अगर वह किसी दूसरी औरत का खूबसूरत नंगा बदन देखेगा तो अपने आप को रोक नहीं पाएगा और वह उसके साथ भी वही करेगा जो अपनी मां के साथ करता आया है,,,, यह सब ख्याल निर्मला के मन में आ रहा था और वह परेशान हो जा रही थी क्योंकि मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह सुभम को किसी और औरत से बांटेगी,,, वह सुभम पर अपना ही हक समझती थी,,, लेकिन अब पल भर में ही हालात बदल चुके थे,,, शीतल की बात मानने के सिवा उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था,,,,। निर्मला का मनभारी होता जा रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि अब क्या होने वाला है ना चाहते हुए भी वह शुभम को उसके पास भेजेगी और शीतल उसके साथ मनमानी करेंगी,,, सुभम तो एक और खूबसूरत ओरत को देखकर पागल हो जाएगा और वह वहीं करेगा जो वह कहेगी,, मतलब साफ था जिस तरह से शुभम उसकी बुर में लंड डालता था उसी तरह से वह अब शीतल की बुर में लंड डालेगा,,, उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भर कर चुसेगा,,, उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को जोर-जोर से दबाएगा उसके निप्पल को मुंह में लेकर वैसे ही पिएगा जैसे कि वह उसकी चूची को पीता आ रहा था,,,, उसकी बुर को अपनी जीभ से चाट कर उसे भी मस्ती के सागर में हिलोरे मारने के लिए ले जाएगा,,, उसकी गांड के भूरे रंग के छेद को चाटेगा जिस पर पहली बार वह अपनी जीभ का स्पर्श कराके उसे उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंचा दिया था,,, अब वह शीतल को भी इसी प्रकार का सुख देगा जिसे पाकर शीतल पूरी तरह से उसकी दीवानी हो जाएगी जैसा कि वह खुद अपने बेटे की दीवानी हो गई है।
शीतल यही सब सोच सोच कर पागल हुए जा रही थी कि उसका बेटा शीतल के साथ वह सब कुछ करेगा जो कि अब तक वह उसके साथ करता आया है।,,, अपने मोटे तगड़े मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड से ऊसकी चुदाई करके उसे पूरी तरह से अपनी गुलाम बना देगा,,, वो पागल हो जाएगी और बार-बार सुभम से चुदवाने के लिए अातुर रहेगी,,,, निर्मला को सब कुछ अपने हाथ से फिसलता हुआ महसूस हो रहा था उसकी आंखों में आंसू आ गए थे क्योंकि वो सपने में भी कभी नहीं सोची थी कि शुभम किसी गैर औरत के साथ जिस्मानी ताल्लुकात रखेगा लेकिन वक्त ऐसा बदला था कि उसे खुद अपने बेटे को उस औरत के पास भेजना था और वह भी शारीरिक संपर्क बनाने के लिए। उसे सोच कर ही घृणा और खुद पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि जिस औरत के साथ उसे गंदी अवस्था में पकड़ कर उस औरत को इतना बड़ा बुरा कही थी और उसे कभी भी अपने बेटे के आसपास ना आने की हिदायत भी दी थी लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि सब कुछ बदल गया जिस औरत से अपनी बेटे को दूर रहने के लिए बोली थी अब उसी औरत के पास उसे खुद अपने बेटे को भेजना था,,,
थक हार का निर्मला यह मान चुकी थी कि शीतल के पास उसे अपने बेटे को भेजना ही है लेकिन अब सवाल यह था कि ,,,, वह अपने बेटे को क्या कहकर शीतल के पास भेजेगी जिससे दूर रहने की खुद ही वह उसे हिदायत दे रखी थी और वह भी रात के समय,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कह कर शुभम को शीतल के पास भेजें बाकी वहां पर पहुंचने के बाद शीतल को क्या करना है यह शीतल अच्छी तरह से जानती थी आगे के प्रकरण को वह खुद संभाल लेगी क्योंकि मर्दों को कैसे रिझाना है शीतल अच्छी तरह से जानती थी,,, शीतल के एक इशारे पर उसका बेटा उसकी टांगों के बीच में होगा यह बात भी निर्मला अच्छी तरह से जानती थी,,, वह अपने बेटे की सबसे बड़ी कमजोरी को अच्छी तरह से समझती थी,,, शीतल की बड़ी-बड़ी मटकती हुई गांड खुद ही शीतल के अंतर्मन को बयां कर देगी शीतल को अपने होठों को खोलने की जरूरत भी नहीं होगी कि वह क्या चाहती है,,, शुभम शीतल के खूबसूरत अंगों की मादकता भरी हरकतों से ही समझ जाएगा कि शीतल क्या चाहती है और उसे क्या करना है,,,
निर्मला कुर्सी पर बैठे-बैठे यही सोच रही थी कि तभी दीवार पर कहीं घड़ी में 8:00 बजे का अलार्म बजने लगा और अलार्म बजने की आवाज के साथ ही निर्मला की तंद्रा भंग हुई तो उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसे काफी देर हो चुकी है वह जल्दी से कुर्सी पर से उठे और रसोई घर में चली गई अब तक सुबह घर पर वापस नहीं आया था वह जल्दी-जल्दी खाना बनाने लगी और इसी उधेड़बुन में थी कि वह सुभम से क्या कहें और कैसे कहे,,,,

गैस के दोनों चुल्हो पर दाल और चावल रखकर रोटी बनाने की तैयारी कर ही रही थी कि एक बार फिर से डोरबेल बज गई,,, वह समझ गई कि शुभम आ गया है,,, वह अपनी साड़ी से हाथ को साफ करते हुए दरवाजा खोल दी और दरवाजे पर शुभम ही खड़ा था जो कि काफी खुश नजर आ रहा था उसे खुश होता हुआ देखकर निर्मला के चेहरे पर भी मुस्कुराहट तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए सुभम से बोली,,,

क्या बात है आज बहुत खुश नजर आ रहा है ,,,,

हां मम्मी आज मैं बहुत खुश हूं क्योंकि आज बात ही कुछ ऐसी है ,,,,

क्या बात है मुझे भी तो बता,,,

अरे पहले मुझे अंदर तो आने के लिए सब दरवाजे पर खड़े खड़े बात करनी है,,,

बोल तो ऐसे रहा है जैसे मेहमान बनकर इस घर में आया है,,,

मेहमान तो नहीं मम्मी लेकिन तुम्हारा लवर बनके घर में आया हुं,,,,,(ऐसा कहते हुए शुभम घर में प्रवेश किया और निर्मला दरवाजा बंद करके लॉक कर दी...)

लवर प्रेमी आशिक सब कुछ तो है तू मेरा,,,,(इतना कहकर निर्मला दरवाजा लॉक करके जैसे ही पलटी तो उसकी नजर शुभम पर पड़ी छोटी अपने दोनों हाथ के पीछे की तरफ ले जाकर कुछ छुपा रहा था उसे इस तरह से हरकत करता हुआ देखकर निर्मला बोली,,,)
तु मुझसे क्या छुपा रहा है दिखा तो,,,,

मैं तुमसे भला क्या छुपाऊंगा तुम्हारे लिए ही तो लाया हूं,,,

क्या लाया है मुझे भी तो दिखा ,,,,(निर्मला उत्सुकता के साथ बोली,,)

यह लो मम्मी,,,,,( इतना कहकर शुभम अपना दोनों हाथ आगे की तरफ ले आकर अपनी मां को गुलाबों से भरा हुआ गुलदस्ता देते हुए बोला,,,गुलाबों का गुलदस्ता देखकर बेहद खुशी उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई वह हंसते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाई और गुलाब के गुलदस्ते को थाम ते हुए बोली,,,)

सच में तु मेरा लवर बन कर आया है,,, लेकिन यह फूलों का गुलदस्ता क्यों,,,?

तुम भूल गई हो मम्मी लेकिन मुझे पूरा याद है आज ही के दिन हम दोनों के नए रिश्ते की शुरुआत हुई थी,,,

नए रिश्ते कि मैं कुछ समझी नहीं,,,!

याद है मम्मी आज के दिन शीतल मैडम की सालगिरह थी,, और तुम अच्छी तरह से जानती हो कि आज की रात को क्या हुआ था,,,,
( इतना सुनते ही निर्मला हंसने लगी,,, उसे खुशी इस बात की थी कि उसका बेटा उसके लिए गुलाब लाया था और वह भी आज ही के दिन शुरू हुए नए रिश्ते के लिए जो कि मां बेटे के बीच का रिश्ता खत्म होकर एक औरत और मर्द के बीच का रिश्ता रह गया था,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे को याद दिलाते हुए बोली,,,)

मेरा राजा बेटा आज के दिन नहीं बल्कि वह कल के दिन से हम दोनों के बीच का नया रिश्ता शुरू हुआ था तुम थोड़ा सा धोखा खा गए,,,,
( अपनी गलती का एहसास होते ही शुभम बुरा सा मुंह बना लिया लेकिन फिर भी वह अपनी मां की तरफ आगे बढ़ता हुआ बोला,,)

कोई बात नहीं मेरे रानी मुड़ तो मेरा बन चुका है,,, इसलिए हम दोनों के बीच के रिश्ते की शुरुआत आज हुई थी या कल इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इस बात को याद करके मैं इस पल को और भी बेहतरीन और रंगीन बनाना चाहता हूं,,,( शुभम ऐसा कहता हुआ निर्मला की तरफ आगे बढ़ रहा था और निर्मला इस तरह से अपने बेटे को अपनी तरफ आगे बढ़ता हुआ देखकर सब कुछ समझ गई कि सुभम क्या चाहता है,,, इसलिए वह उसे दर्शाते हुए पीछे की तरफ अपने कदम लेने लगी वह जितना पीछे जा रही थी शुभम इतना उत्सुकता और आतुरता के साथ आगे बढ़ रहा था,,,)

आज तो मैं तुम्हें नहीं छोडूंगा मम्मी,,, मेरी हालत खराब नहीं है तुम्हारी मदमस्त जवानी देखकर मेरा लंड खड़ा हो रहा है,,,

लेकिन मेरा अभी बिल्कुल भी मूड नहीं है मैं खाना बना रही हूं,,, (ऐसा कहते हुए निर्मला पीछे जा रही थी और शुभम आगे आ रहा था)

लेकिन मुझे अभी भूख लगी है,,,

तू खाना बन जान दे फिर खा लेना,,,

मुझे वह खाना नहीं खाना जो तुम किचन में बना रही हो मुझे वह खाना है जिसका मैं जन्मों से भूखा हूं,,,

तो क्या खाना है तुझे,,,,? (निर्मला अपनी बेटे को तरसाते हुए पीछे की तरफ कदम लेते हुए मादक स्वर में बोली,,,)

मुझे वह खाना है जो तुम अपनी टांगों के बीच में छुपा कर रखी हो जोकि थाली में नहीं चड्डी में सजा कर रखी हो,,,, मैं तुम्हारी टांगों के बीच की उस रसमलाई का स्वाद लेना चाहता हूं और वह भी अपने मुंह से नहीं बल्कि अपने लंड से ,,,,(पजामे के ऊपर से अपने खड़े लंड को पकड़ता हुआ बोला,,,)

देख अभी नहीं सुभम,,,,

नहीं मेरी जान में इसीलिए तो तुम्हारे लिए गुलाब का गुलदस्ता लाया था कि इसे पाकर खुशी खुशी अपनी टांगें फैला दोगी लेकिन तुम तो नखरा कर रही हो,,,

तेरे लिए मैं अपनी टांगे फैला देती लेकिन क्या करूं अभी व्यस्त हूं काम में,,,

तो कब तुम काम में व्यस्त नहीं रहती हो,,, (ऐसा कहते हुए शुभम आगे बढ़ रहा था और निर्मला पीछे,,, तभी निर्मला सोफे से टकराकर खुद ही सोफे पर गिर कर बैठ गई,,,अपनी मां की हालत को देखकर शुभम हंसने लगा और बोला अब कहां जाओगे मेरी रानी,,,,)

देख शुभम मुझे परेशान मत कर रात में आना मेरे कमरे में तुझे खुश कर दूंगी,,,

लेकिन मुझे अभी खुश होना है,,, रात की बात रात को देखेंगे,,,,(इतना कहते हुए शुभम पूरी तरह से अपनी मां के ऊपर छा गया और उसकी लाल लाल होठों को जबरदस्ती अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया वह जानता था कि उसकी मां कब कैसे और किस तरह से चुदवाने के लिए तैयार हो जाएगी,,,और वह तुरंत ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की बड़ी चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,शुभम इतनी जोर से अपनी मां की चूची को दबा रहा था कि मानो वह किसी गैर औरत के साथ यह सब कर रहा है,,, निर्मला को दर्द हो रहा था लेकिन सुभम की हरकत की वजह से उसे मजा भी आने लगा था,,, शुभम काफी उतावला हो चुका था इसलिए देखते ही देखते अपनी मां के ब्लाउज के बटन खोल कर उसकी नंगी चूचियों को बाहर निकाल कर उसे जोर जोर से दबाते हुए अपनी मां के लाल लाल होठों को चूसने का आनंद ले रहा था । थोड़ी ही देर में निर्मला के मुंह से गर्म सिसकारीयो की आवाज आने लगी,,, अपनी मां की मादकता भरी गरम सिसकारी की आवाज सुनकर शुभम का जोश बढ़ने लगा ,,,वह पागल हुए जा रहा था देखते ही देखते अपने दोनों हाथों से अपनी मां की साड़ी को उठाकर कमर तक कर दिया,, उसकी आंखों के सामने उसकी मां सोफे पर लाल पेंटिं मैं बैठी हुई थी,,, और उसके चेहरे पर उत्तेजना का असर साफ नजर आने लगा था। गहरी गहरी सांसें लेते हुए अपने बेटे की हर हरकत को देख रही थी ,,,

लाल पेंटिं में तो कयामत लगती हो मेरी जान,,, अब इसे उतार दो तो आगे का कार्यक्रम शुरू हो,,,

इतना कुछ कर लिया है तो पेंटी भी अपने हाथ से उतार ले,,,

जो आज्ञा महारानी,,,,सच कहूं तो मम्मी तुम्हारी पेंटी को अपने हाथ से उतारने का मजा ही कुछ और है इतना कहने के साथ ही सुभम अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मम्मी की लाल रंग की पैंटी को दोनों हाथों से पकड़कर खींचने लगा ,,


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लेकिन सोफे पर निर्मला की भारी-भरकम गांड का दबाव होने की वजह से पेंटी निकल नहीं रही थी इसलिए अपने बेटे का साथ देते हुए निर्मला अपनी बड़ी बड़ी गांड को हल्के से ऊपर की तरफ उठाई और मौके का लाभ लेते हुए शुभम तुरंत अपनी मां की पेंटिंग को खींचकर उसके चिकनी चिकनी टांगों से बाहर निकाल दिया और पेंटी को नीचे फर्श पर फेंक दिया,,, कमर से नीचे निर्मला पूरी तरह से नंगी हो गई,, शुभम की आंखों के सामने उसकी मां की कचोरी जैसी फूली हुई बुर ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपने पास बुला रही थी शुभम पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की मोटी मोटी नंगी गोरी जांघ देखकर और जांघों के बीच की उस खूबसूरत रसीली बुर को देखकर,, शुभम भी तुरंत उत्तेजना बस अपना पैजामा उतार कर कमर के नीचे वह भी एकदम नंगा हो गया ,,, निर्मला अपने बेटे का खड़ा मोटा तगड़ा लंड देख कर ललचाने लगी,,, ऊसके मुंह के साथ साथ ऊसकी बुर में भी पानी आ गया,,,



लेकिन वह अपनी मनोस्तिथि को अपनी बेटे से बयां नहीं कर रही थी वह चुपचाप सोफे पर लेटी हुई थी,,, शुभम से रहा नहीं जा रहा था और वह अपना मोटा तगड़ा लंड हिलाते हुए आगे बढ़ा अपने दोनों हाथों से अपनी मां की टांगों को फैला कर अपने लिए जगह बनाने लगा,,,और देखते ही देखते अपने मोटे लंड को अपनी मां की बुर में धीरे-धीरे करके पूरा का पूरा उतार दिया,,,, और दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थामकर चोदना शुरु कर दिया,,, हर धक्के के साथ निर्मला एकदम मस्त हुए जा रही थी दूसरा से उसे इस तरह से अपने बेटे से चुदवाने में परम आनंद की अनुभूति हो रही थी,, वह भी यही चाह रही थी लेकिन झूठ मूठ का नाटक कर रही थी,, अपने बेटे की जबरदस्त चुदाई में पूरी तरह से मस्त होकर वह यह बात भी भूल गई थी की कुछ देर पहले ही शीतल आकर उसे धमका गई थी कि कल रात 9:00 बजे मां अपने बेटे को उसके घर पर भेज दे वरना उसका अंजाम बुरा होगा,,,
अपने नए रिश्ते की शुरुआत की बात से उसे एक नया आईडिया आया और उसके चेहरे पर उत्तेजना के असर के साथ-साथ खुशी भी झलकने लगी,,, रात को सोते समय अपने बेटे से अपने मन में आए आइडिया को कहना चाहती थी इसलिए वह इस समय अपने बेटे से चुदवाने का भरपूर आनंद लूटने लगी,,,,


तकरीबन 30 मिनट की घमासान चुदाई के बाद दोनों मां बेटे एक साथ झड़ गए,,,इसके बाद निर्मला अपने कपड़े व्यवस्थित करके किचन में चली गई और खाना बनाने लगी,,,

रात को 9:00 बजे अशोक घर पर आ गया जिसको देखते ही दोनों मां बेटे का मूड खराब हो गया,,, क्योंकि निर्मला आज की रात अपने बेटे से भरपूर चुदाई का मजा लेना चाहती थी क्योंकि कल तो उसे शीतल के पास भेजना था।
शुभम इस बात से खुश था कि अच्छा हुआ थोड़ा जबरदस्ती करते हुए अपनी मां से चुदाई का मजा ले लिया,,, खाना खाते समय अशोक ने निर्मला से कहां की कल ऊसे पार्टी में चलना है जहां पर सभी लोग अपनी पत्नी के साथ मौजूद होंगे,,, निर्मला कल के प्लान के बारे में ही सोच रही थी,,
खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में जाने से पहले अपनी बेटे के कमरे में चली गई जिसका दरवाजा खुला हुआ था,,
वह अपने बेटे के कमरे में जाकर देखी तो वह कुछ मोबाइल में पढ़ रहा था,,,वह उसके पास जाकर बैठ गई लेकिन सुभम मैं उसकी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा था तो निर्मला ही बोली,,

तेरे पापा आ गए ,,,आज तो मेरा पूरा मूड खराब हो गया वरना आज की रात तुझे बहुत मजा देती,,

मुझे मालूम था मम्मी तभी तो मैं पहले ही तुम्हारी चुदाई कर दिया,,,(वह मोबाइल में ही पढ़ते हुए बोला)

कल शीतल की शादी की सालगिरह किसी को बुलाई तो नहीं है लेकिन तुझे उसके घर जाना होगा क्योंकि वह पार्टी नहीं रखी थी उसका पति शहर से बाहर है और वह अपने घर पर नहीं बल्कि किराए पर रह रही है इसलिए पार्टी नहीं रखी है,,,और कल तो मुझे तेरे पापा के साथ किसी दूसरी पार्टी में जाना है इसलिए तुझे अकेले हीं शीतल के घर जाना होगा,,,(शुभम अपनी मां की सारी बातें सुन रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान मोबाइल पर ही था जिसमें वह कोई कहानी पढ़ रहा था,,,)

तू मेरी बात सुन भी रहा है कि नहीं ,,,,

सुन रहा हूं मम्मी लेकिन मैं एक कहानी पढ़ने में मस्त हूं क्योंकि आज की रात तो तुम्हारी मिलेगी नहीं इसलिए कहानी पढ़कर ही अपना काम चला लु,,

अच्छा ऐसी कौन सी कहानी है जिसे पढ़ने में ईतना मस्त हो गया है,,,

बहुत अच्छी कहानी है मम्मी कहानी का नाम है,,,,, होता है जो वह हो जाने दो,,,,,

यह कैसी कहानी है,,,

मम्मी बहुत मस्त कहानी है जैसे हम दोनों मां बेटे अपनी अपनी जरूरतों के मुताबिक मां बेटे का रिश्ताहोने के बावजूद कि हम दोनों के बीच मर्द और औरत वाला रिश्ता है उसी तरह से इस कहानी में भी राहुल नाम का लड़का है और उसकी मां का नाम अलका है जो कि एक विधवा औरत है और काफी बरसों से वह चुदवाई नहीं है,,,जोकि धीरे-धीरे अपने बेटे की तरफ आकर्षित होकर एक दिन अपनी सारी मर्यादा भूल जाती है जैसा कि हम दोनों भूल गए थे और वह औरत अपने बेटे से शारीरिक सुख भोग ती है,,, इसमें नायक राहुल का एक दोस्त भी है विनीत जो कि पैसे की मदद करके अपने दोस्त की मां का फायदा उठाते हुए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है,,, और इसमें एक नायिका भी है नीलू जो कि पहले विनीत के साथ प्यार करती थी लेकिन धीरे-धीरे राहुल के साथ प्यार करने लगी,,,

क्या सच में यह इस तरह की कहानी है,,,

हां मम्मी बहुत अच्छी कहानियां कम पढ़ोगी तो तुम्हें भी बहुत मजा आएगा,,,

ठीक है तू कहता है तो मैं जरूर पढुगी लेकिन अभी मैं जा रही हूं तेरे पापा मेरा इंतजार कर रहे,, है,,

ठीक है मम्मी तुम जाओ मैं कहानी पढ़ता हूं,,,
 
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