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हमने उसे आवाज़ें देते रहने को कहा— तब उसके साथ ही निकोल की भी आवाज़ आई और हमें समझ आया कि वे दोनों साथ ही थे। कुछ भूलभुलैयां से गलियारों और कक्षों से गुज़र कर हम वहां पहुंच पाये, जहां एक लोहे के दरवाज़े वाली कोठरी में दोनों बंद मिले। वे इतने सहमे और घबराये हुए थे कि आज़ादी मिलते ही रोने लगे। बाद में उस जगह से वापसी के दौरान उन्होंने बताया कि दोपहर को खाने के बाद वे भी सो गये थे और फिर रात में किसी वक़्त उनकी आँख खुली थी तो ख़ुद को उस जगह बंद पाया और तब भेड़ियों की गुर्राहटों समेत कई ऐसी आवाज़ें हो रही थीं, जैसे आसपास ढेरों ख़तरे मौजूद हों। वे इतना डर गये थे कि उन्हें आवाज़ लगाने तक की हिम्मत न पड़ी और वे ससेटे से वहीं दुबक रहे। अभी जब हमारी पुकार सुनी, तब उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
उनकी हालत ऐसी थी कि वे उसी वक़्त वहां से भाग जाना चाहते थे— जबकि मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की थी कि फिलहाल हमें बाहर के हालात का पता नहीं, तो बेहतर है कि वे पहले फ्रेश हो लें, कुछ खा पी लें और तब हम बाहर निकल कर देखें। बात उनकी समझ में आई… इस बीच मैंने उससे गाड़ी की चाबी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह दराज में ही रहती थी— लेकिन जब वहां देखा तो चाबी नहीं थी। उन दोनों के पास भी फोन थे— लेकिन अब जब उन्होंने अपने कमरों में खोजे, तो बाकी सब सामान मौजूद था, बस फोन गायब थे।
हमें पहले से अंदाज़ा था, तो हम पर इस बात का क्या फ़र्क पड़ता— लेकिन वे बुरी तरह हताश हो गये… हमारी सलाह पर पहले उन्होंने बाथरूम का मुंह देखा, फिर किचन में आ कर खाया-पिया और आधे घंटे बाद फाईनली हम बाहर निकल पाने के लिये तैयार हो पाये।
अंदर भेड़ियों से निपटने के लिये कोई हथियार न मिला तो किचन से चाकू, एक डंडा और एक फावड़ा ही उठा लिया कि बिलकुल खाली हाथ तो न रहें।
बाहर इस वक़्त सुबह की रोशनी फैली हुई थी और दूर तक देखा जा सकता था। दूर पार्श्व में पहाड़ियां मौजूद थीं लेकिन हमारी निगाहें उस कैसल को घेरने वाली दीवार तक तक पहुंच कर थम गईं। वहां से जो गेट दिख रहा था, वह बंद था। दीवार की दशा वैसे भले ख़राब दिख रही हो, लेकिन सही-सलामत थी और इतनी ऊंची थी कि हमें अंदर रोके रखने में सफल थी। बिना किसी सीढ़ी या बड़े स्टूल के हम उसकी मुंडेर तक नहीं पहुंच सकते थे— या हमारे पास रस्सी और एंकर जैसा कुछ इंतज़ाम होता तो उसके सहारे भी दीवार पर चढ़ा जा सकता था। गेट का ऑप्शन हमारे लिये इस वजह से बेकार था कि उसमें इनबिल्ट आयरन लॉक लगा था और जिसकी चाबी हार्पर के पास ही रहती थी— जो कि दुर्भाग्य से अब मिसिंग थी।
"क्या हम वह ताला तोड़ नहीं सकते?" कॉनर ने हार्पर से पूछा।
"कैसे— वह कोई दरवाज़े में बाहर लटक रहा ताला नहीं है। गेट की चौड़ाई में ही फिक्स है कि उससे एंगल निकल कर सामने के लैंडिंग सॉकेट में फंस जाते हैं। कोई इलेक्ट्रिक कटर हो तो भले उससे काट लें— तोड़ना तो नामुमकिन है।"
"वह भेड़िये—" सहसा नैंसी चीख़ी।
हमने सिहरते हुए उधर देखा… गेट के बाईं ओर एक पेड़ के नीचे बैठे थे वे पांचों, जो अब हमें देखते खड़े हो गये थे। उनमें वह बड़ा भेड़िया नहीं था, जो कल रात दीवार से कूदा था— लेकिन वे पांचों भी काफी थे हमें फाड़ देने के लिये। हमारे पास कोई हथियार होता, तब भी हम उनका सामना करने का हौसला दिखाते… लेकिन डंडे, फावड़े और सब्ज़ी काटने वाले चाकू से भला उनका मुकाबला क्या होता। जब वे गुर्राते हुए हमारी तरफ़ बढ़े तो हमें पलट कर भागते ही बन पड़ा। नैंसी की हालत ऐसी नहीं थी कि इस तरह दौड़ सकती— तो मुझे ही उसे उठा कर कंधे पर लादना पड़ा। हालांकि इस तरह बाकियों के मुकाबले मैं धीमा तो हो गया, लेकिन नैंसी की चाल से तो फिर भी बेहतर था। वे भेड़िये आधी दूर तक ही पहुंच पाये थे कि हम कैसल के मुख्य गेट तक पहुंच गये।
फिर वे भी लॉन वाले एरिये तक पहुंच कर ठहर गये और वहीं पंजों से ज़मीन खुरंचने लगे— उनके खुले मुंहों से बहती लार उनके लंबे नुकीले दांतों को छूते घास तक पहुंच रही थी और शिकारी आँखें हम पर जमी हुई थीं। गेट पर पहुंच कर मैंने नैंसी को उतार दिया था।
हम अंदर हो गये और दरवाज़ा भिड़ा कर हांफने लगे।
"यह तो हमें ऐसे बाहर जाने भी नहीं देंगे… गेट अलग बंद है, गाड़ी की चाबी मिल भी जाये तो हमारे लिये बेकार है। दीवारों पर चढ़ने की सुविधा हमें है नहीं। हम करें तो क्या करें?" नैंसी ने दीवार से पीठ टिकाते हताश से स्वर में कहा।
"हमने पीछे की तरफ़ का एरिया नहीं देखा— उधर बाग़ है, उसके पार क्या है?" मैंने हार्पर और कॉनर को देखा।
"ऐसी ही दीवार चारों तरफ़ है— हालांकि पीछे चढ़ाई है, लेकिन उसे सीधे काट कर दीवार की शक्ल दे दी गई है। उस तरफ़ से ढलान के सहारे दीवार तक, और फिर दीवार के सहारे कूद कर अंदर तो आया जा सकता है, लेकिन अंदर से बाहर नहीं जाया जा सकता।" हार्पर ने नकारात्मक रूप से गर्दन हिलाते हुए कहा।
"दीवार पर चढ़ने का इंतज़ाम कहीं से नहीं?"
"नहीं— अमूमन कैसलों में होता है, लेकिन यहां नहीं है… और होता भी तो इन भेड़ियों के रहते हम वहां तक पहुंच नहीं सकते थे। वक़्त भी हमारे पास शायद दिन-दिन का ही है।" इस बार कॉनर ने जवाब दिया।
"और रात में फिर हमें वह सब झेलना पड़ेगा— जिसके बारे में सोच कर भी हिम्मत जवाब दे जाती है।"
"एक दिन मुझे मिस्टर ओलिवर ने बताया था कि एक रास्ता कैसल के तहखाने में मौजूद है… नीचे से एक ज़मीनी रास्ता हमें अंदर ही अंदर इस कैसल की सरहद से एकदम बाहर ले जा सकता है।" कुछ देर की खामोशी के पश्चात हार्पर ने सोचते हुए कहा।
"तुम्हें एग्जेक्टली उसके बारे में पता है?" निकोल ने पूछा।
"नहीं— पर मुझे तहखाने का रास्ता पता है और अगर हम वहां थोड़ी कोशिश करेंगे तो वह रास्ता हमें मिल सकता है।" हार्पर ने उम्मीद जताई।
"लेकिन तहखाने में—" नैंसी ने ज़ोर की झुरझुरी ली— "जैसी यह जगह है, उसे देखते तहखाने जैसी जगह जाना क्या रिस्की नहीं?"
"रात में तो वह अपनी मौत ख़ुद बुलाने जैसा हो सकता है, लेकिन दिन में ट्राई कर सकते हैं।" मैंने भी हिम्मत की यह कहने के लिये।
"फिर भी… वहां रोशनी नहीं होगी, पॉवर सप्लाई पर डिपेंड रहना पड़ेगा, जिसका हाल हम देख चुके हैं। मोबाइल से सपोर्ट मिल सकता था, पर वह हमारे पास रहने नहीं दिये गये। तो वहां देखने के लिये हम क्या करेंगे?"
"यहां कोई टॉर्च, लैंप या कैंडल वगैरह भी तो होंगी?" मैंने उन तीनों से सम्बोधित होते पूछा, जो यहां रह रहे थे।
"टॉर्च थी तो पर किचन में ही थी, जो अब नहीं दिख रही… माचिस और कैंडल अब भी मौजूद हैं।" हार्पर ने याद करते बताया।
"तो वही लो और चलो— यहां खड़े-खड़े बर्बाद करने के लिये हमारे पास वक़्त नहीं है।" इस बार मैं थोड़ा उतावला हो गया और सभी किचन की तरफ़ बढ़ लिये।
भले नैंसी के चेहरे से लग रहा था कि वह इस फैसले से खुश नहीं थी— लेकिन फिर भी अकेले उस फैसले को चुनौती देने की हालत में नहीं थी। तो हमने किचन से माचिस और मोमबत्तियां लीं और किचन से निकल कर उस ग़ैरआबाद हिस्से की तरफ़ बढ़ आये— जिधर से बकौल हार्पर, नीचे जाने का रास्ता था।
जहां निकोल और कॉनर बंद मिले थे, वहीं पास ही एक बाहर से बंद दरवाज़ा और भी मौजूद था— जिसे खोला तो नीचा जाती सीढ़ियां दिखीं, जो कुछ पायदानों के बाद अंधेरे में गुम हो रही थीं। शुरुआती सिरे पर ही स्विचबोर्ड मौजूद था— तो हमने सारे स्विच ऑन कर दिये और नीचे भरा अंधेरा रुख़्सत हो गया। हालांकि वहां भी बाकी कैसल की तरह ही बीमार सी पीली रोशनी मौजूद थी, लेकिन फिर भी सीढ़ियां नीचे तक देखी जा सकती थीं और हम ऊपर से ही देख सकते थे कि अंतिम पायदान पर कोई पड़ा था।
हमारा दिल ज़ोर से धड़का।
"कौन हो सकता है?" कॉनर के मुंह से निकला।
"मुझे तो मिस्टर ओलिवर ही लग रहे।" हार्पर ने तेज़ स्वर में कहा और हमारे रोक पाने से पहले ही वह नीचे उतरता चला गया।
हम ऊपर ही खड़े देखते रहे… वह नीचे उस मुर्दा से पड़े आदमी तक पहुंचा और उसे काउंट के रूप में पुकारते हुए हिलाया-डुलाया— फिर उसमें कोई हरकत न पा कर हमारी तरफ़ देखते निराशा से सर हिला दिया। हमें न समझ में आया कि अगर वह ओलिवर ही था तो मर कैसे सकता था। वह तो ख़ुद ही कोई खबीस रूह था। हम डरे-डरे और झिझकते हुए नीचे पहुंचे तो वह शरीर हमारी नज़र में आया।
पहचानना मुश्किल था, लेकिन अगर हार्पर निश्चित था तो हम भी कह सकते थे कि वह काउंट ओलिवर ही था। उसे जिस हाल में हमने देखा था, वहां आलरेडी उसके शरीर में खाल और हड्डियां ही बची थीं— लेकिन लाश देख कर लगता था कि उसमें जो नमी थी, वह भी सोख ली गई थी और वह लकड़ी के सूखे ठुंठ जैसा हो गया था। उसका मुंह खुला हुआ था, मसूढ़े काले पड़ कर ऊपर चढ़ चुके थे और लंबे दांत अपनी लंबाई में नज़र आ रहे थे। पथराई सी आँखें भी खुली हुई सामने देख रही थीं।
"लेकिन इन्हें हुआ क्या है… यह तो बिलकुल सूख गये हैं लकड़ी की तरह, जबकि कोई मरता भी है तो उसकी लाश गीली हो कर सड़ती है।" नैंसी ने गहरी उलझन से भरी निगाहों से मुझे देखा— लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था।
हमें पहले से समझ में नहीं आ रहा था कि जो भी हो रहा था, वह कैसे हो रहा था… और अब उस काउंट की भी लाश सामने पड़ी थी, जिसे हम उन सब बातों का ज़िम्मेदार समझ रहे थे।
27 October 2023
हमें यही नहीं समझ में आया कि अगर काउंट मर चुका था तो फिर हमें कैसल के अंदर कौन रोक रहा था… फिर कौन था इस खेल का असली सूत्रधार? कुछ देर वहीं सर खपाने के बाद जब हम आगे बढ़े तो नीचे हमें जैसे कैसल की पूरी एक मंजिल बनी मिली— जिसकी बनावट ऐसी थी कि हम जल्दी ही यह भी भूल गये कि हम आये किधर से थे… जब हमें बाहर ले जाने वाला कोई सुरंग टाईप रास्ता न मिला तो हम घबरा गये और जल्दी ही हमारा तनाव इतना बढ़ गया कि हम एक दूसरे को ब्लेम करते, एक दूसरे पर चिल्लाने लगे।
"हमें ऊपर ही रहना चाहिये था… वहां कम से कम खाने-पीने को तो था। यहां तो अगर हम फंसे रह गये तो भूखे मर जायेंगे।" थक कर एक चबूतरे पर बैठते हुए मैंने कहा।
"वहां रात भी हमें फेस करनी पड़ती और पता नहीं हमारा क्या अंजाम होता। हमारे पास एक उम्मीद थी कि हम निकल सकते हैं।" हार्पर ने अपनी झुंझलाहट प्रदर्शित की।
"मिला तो नहीं रास्ता।" नैंसी ने कटाक्ष किया।
"क्योंकि मैं पहले कभी नीचे नहीं आया… मुझे बस यही पता था कि यहां से बाहर जाने का एक रास्ता मौजूद है। मुझे तो यह भी नहीं पता था कि नीचे इतना सब बना हुआ है। मुझे लगा था कि कोई हॉल होगा, या दो-तीन कमरे होंगे… तहखाने के नाम पर और होता क्या है।"
"यार लड़ो मत… बाहर निकलने का कोई उपाय सोचो।" कॉनर ने याचना सी की।
"मिस्टर ओलिवर ने तुम्हें बताया किस परपज से होगा? था क्या उस आदमी के मन में?" मैंने हार्पर को देखा।
"अपने ग्रैंड सन को अपनी विरासत सौंपना चाहते थे और शायद सौंप कर मुक्त हो गये।" इस बार निकोल ने जवाब दिया।
"बकवास… मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं था। इंसान पहचानने की इतनी काबिलियत रखता हूँ मैं। मेरी दादी ने हो सकता है कि मेरे बाप को उसके जायज पति से न पैदा किया हो, लेकिन किसी अंग्रेज़ की पैदावार तो वे हर्गिज़ नहीं थे। किसी और दौर में ऐसे बचकाने दावे माने जा सकते थे, इस दौर में कोई नहीं मानेगा। काउंट को ऐसा लगा होता तो सबसे पहले वे मेरे पिता की या मेरी डीएनए टेस्टिंग करा के यह कनफर्म करते कि हम उनका ही वंश हैं। ऐसे ही कोई किसी के कहने से नहीं मान लेता— अगर मेरी दादी ने उनसे कहा भी था तो। मुझे तो वह कहानी भी फर्जी लगती है… मुझे नहीं लगता कि यह आदमी कभी इंडिया गया भी है या मेरी दादी ने इसे कभी देखा भी होगा।"
"क्या… फिर उन्होंने अपनी सारी धन-दौलत और करोड़ों की संपत्ति तुम्हारे नाम क्यों कर दी?" कॉनर ने चौंकते हुए मुझे देखा।
"जब मुझे यहां मर-खप ही जाना है तो भला किस काम की यह प्रापर्टी और यह दौलत… मुझे तो लगता है कि यह भी बस एक चारा थी मुझे यहां ला कर मेरा शिकार करने के लिये।"
"और यह शिकार किया किसने? काउंट तो ख़ुद ही मर चुके।" हार्पर ने तंज किया और मुझे कोई जवाब न सूझा।
"तुम आखिर इतने खास क्यों हो उस इंसान या ताक़त के लिये— जो इस सब तमाशों की ज़िम्मेदार है? जबकि तुम तो एक विदेशी हो और महीना भर पहले ही अमेरिका आये हो?" नैंसी का सवाल भी वही था, जो मेरे लिये ख़ुद एक पहेली था।
"नहीं जानता… ऊपरी तौर पर वही वजह नज़र आती है जो काउंट ने बताई थी, पर उस पर मेरा यक़ीन नहीं।" मैंने बेबसी से कंधे उचकाये।
कुछ देर और माथापच्ची करने के बाद हम फिर चल दिये। पहले जहां हम बाहर ले जाने वाले रास्ते को तलाश रहे थे, वहीं अब उन सीढ़ियों को ढूंढ रहे थे, जिनसे हम नीचे आये थे। बाहर शायद दोपहर हो चुकी होगी— लेकिन अंदर तो बस उन्हीं मरियल सी लाइटों का सहारा था, जो कि रात की तरह जलने-बुझने का तमाशा नहीं कर रही थीं, यही उनका बड़ा अहसान था हम पर।
आधा घंटा और भटके होंगे कि वे लाइटें मद्धम होने लगीं और हमारी सांसें अटकीं।
उनकी हालत ऐसी थी कि वे उसी वक़्त वहां से भाग जाना चाहते थे— जबकि मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की थी कि फिलहाल हमें बाहर के हालात का पता नहीं, तो बेहतर है कि वे पहले फ्रेश हो लें, कुछ खा पी लें और तब हम बाहर निकल कर देखें। बात उनकी समझ में आई… इस बीच मैंने उससे गाड़ी की चाबी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह दराज में ही रहती थी— लेकिन जब वहां देखा तो चाबी नहीं थी। उन दोनों के पास भी फोन थे— लेकिन अब जब उन्होंने अपने कमरों में खोजे, तो बाकी सब सामान मौजूद था, बस फोन गायब थे।
हमें पहले से अंदाज़ा था, तो हम पर इस बात का क्या फ़र्क पड़ता— लेकिन वे बुरी तरह हताश हो गये… हमारी सलाह पर पहले उन्होंने बाथरूम का मुंह देखा, फिर किचन में आ कर खाया-पिया और आधे घंटे बाद फाईनली हम बाहर निकल पाने के लिये तैयार हो पाये।
अंदर भेड़ियों से निपटने के लिये कोई हथियार न मिला तो किचन से चाकू, एक डंडा और एक फावड़ा ही उठा लिया कि बिलकुल खाली हाथ तो न रहें।
बाहर इस वक़्त सुबह की रोशनी फैली हुई थी और दूर तक देखा जा सकता था। दूर पार्श्व में पहाड़ियां मौजूद थीं लेकिन हमारी निगाहें उस कैसल को घेरने वाली दीवार तक तक पहुंच कर थम गईं। वहां से जो गेट दिख रहा था, वह बंद था। दीवार की दशा वैसे भले ख़राब दिख रही हो, लेकिन सही-सलामत थी और इतनी ऊंची थी कि हमें अंदर रोके रखने में सफल थी। बिना किसी सीढ़ी या बड़े स्टूल के हम उसकी मुंडेर तक नहीं पहुंच सकते थे— या हमारे पास रस्सी और एंकर जैसा कुछ इंतज़ाम होता तो उसके सहारे भी दीवार पर चढ़ा जा सकता था। गेट का ऑप्शन हमारे लिये इस वजह से बेकार था कि उसमें इनबिल्ट आयरन लॉक लगा था और जिसकी चाबी हार्पर के पास ही रहती थी— जो कि दुर्भाग्य से अब मिसिंग थी।
"क्या हम वह ताला तोड़ नहीं सकते?" कॉनर ने हार्पर से पूछा।
"कैसे— वह कोई दरवाज़े में बाहर लटक रहा ताला नहीं है। गेट की चौड़ाई में ही फिक्स है कि उससे एंगल निकल कर सामने के लैंडिंग सॉकेट में फंस जाते हैं। कोई इलेक्ट्रिक कटर हो तो भले उससे काट लें— तोड़ना तो नामुमकिन है।"
"वह भेड़िये—" सहसा नैंसी चीख़ी।
हमने सिहरते हुए उधर देखा… गेट के बाईं ओर एक पेड़ के नीचे बैठे थे वे पांचों, जो अब हमें देखते खड़े हो गये थे। उनमें वह बड़ा भेड़िया नहीं था, जो कल रात दीवार से कूदा था— लेकिन वे पांचों भी काफी थे हमें फाड़ देने के लिये। हमारे पास कोई हथियार होता, तब भी हम उनका सामना करने का हौसला दिखाते… लेकिन डंडे, फावड़े और सब्ज़ी काटने वाले चाकू से भला उनका मुकाबला क्या होता। जब वे गुर्राते हुए हमारी तरफ़ बढ़े तो हमें पलट कर भागते ही बन पड़ा। नैंसी की हालत ऐसी नहीं थी कि इस तरह दौड़ सकती— तो मुझे ही उसे उठा कर कंधे पर लादना पड़ा। हालांकि इस तरह बाकियों के मुकाबले मैं धीमा तो हो गया, लेकिन नैंसी की चाल से तो फिर भी बेहतर था। वे भेड़िये आधी दूर तक ही पहुंच पाये थे कि हम कैसल के मुख्य गेट तक पहुंच गये।
फिर वे भी लॉन वाले एरिये तक पहुंच कर ठहर गये और वहीं पंजों से ज़मीन खुरंचने लगे— उनके खुले मुंहों से बहती लार उनके लंबे नुकीले दांतों को छूते घास तक पहुंच रही थी और शिकारी आँखें हम पर जमी हुई थीं। गेट पर पहुंच कर मैंने नैंसी को उतार दिया था।
हम अंदर हो गये और दरवाज़ा भिड़ा कर हांफने लगे।
"यह तो हमें ऐसे बाहर जाने भी नहीं देंगे… गेट अलग बंद है, गाड़ी की चाबी मिल भी जाये तो हमारे लिये बेकार है। दीवारों पर चढ़ने की सुविधा हमें है नहीं। हम करें तो क्या करें?" नैंसी ने दीवार से पीठ टिकाते हताश से स्वर में कहा।
"हमने पीछे की तरफ़ का एरिया नहीं देखा— उधर बाग़ है, उसके पार क्या है?" मैंने हार्पर और कॉनर को देखा।
"ऐसी ही दीवार चारों तरफ़ है— हालांकि पीछे चढ़ाई है, लेकिन उसे सीधे काट कर दीवार की शक्ल दे दी गई है। उस तरफ़ से ढलान के सहारे दीवार तक, और फिर दीवार के सहारे कूद कर अंदर तो आया जा सकता है, लेकिन अंदर से बाहर नहीं जाया जा सकता।" हार्पर ने नकारात्मक रूप से गर्दन हिलाते हुए कहा।
"दीवार पर चढ़ने का इंतज़ाम कहीं से नहीं?"
"नहीं— अमूमन कैसलों में होता है, लेकिन यहां नहीं है… और होता भी तो इन भेड़ियों के रहते हम वहां तक पहुंच नहीं सकते थे। वक़्त भी हमारे पास शायद दिन-दिन का ही है।" इस बार कॉनर ने जवाब दिया।
"और रात में फिर हमें वह सब झेलना पड़ेगा— जिसके बारे में सोच कर भी हिम्मत जवाब दे जाती है।"
"एक दिन मुझे मिस्टर ओलिवर ने बताया था कि एक रास्ता कैसल के तहखाने में मौजूद है… नीचे से एक ज़मीनी रास्ता हमें अंदर ही अंदर इस कैसल की सरहद से एकदम बाहर ले जा सकता है।" कुछ देर की खामोशी के पश्चात हार्पर ने सोचते हुए कहा।
"तुम्हें एग्जेक्टली उसके बारे में पता है?" निकोल ने पूछा।
"नहीं— पर मुझे तहखाने का रास्ता पता है और अगर हम वहां थोड़ी कोशिश करेंगे तो वह रास्ता हमें मिल सकता है।" हार्पर ने उम्मीद जताई।
"लेकिन तहखाने में—" नैंसी ने ज़ोर की झुरझुरी ली— "जैसी यह जगह है, उसे देखते तहखाने जैसी जगह जाना क्या रिस्की नहीं?"
"रात में तो वह अपनी मौत ख़ुद बुलाने जैसा हो सकता है, लेकिन दिन में ट्राई कर सकते हैं।" मैंने भी हिम्मत की यह कहने के लिये।
"फिर भी… वहां रोशनी नहीं होगी, पॉवर सप्लाई पर डिपेंड रहना पड़ेगा, जिसका हाल हम देख चुके हैं। मोबाइल से सपोर्ट मिल सकता था, पर वह हमारे पास रहने नहीं दिये गये। तो वहां देखने के लिये हम क्या करेंगे?"
"यहां कोई टॉर्च, लैंप या कैंडल वगैरह भी तो होंगी?" मैंने उन तीनों से सम्बोधित होते पूछा, जो यहां रह रहे थे।
"टॉर्च थी तो पर किचन में ही थी, जो अब नहीं दिख रही… माचिस और कैंडल अब भी मौजूद हैं।" हार्पर ने याद करते बताया।
"तो वही लो और चलो— यहां खड़े-खड़े बर्बाद करने के लिये हमारे पास वक़्त नहीं है।" इस बार मैं थोड़ा उतावला हो गया और सभी किचन की तरफ़ बढ़ लिये।
भले नैंसी के चेहरे से लग रहा था कि वह इस फैसले से खुश नहीं थी— लेकिन फिर भी अकेले उस फैसले को चुनौती देने की हालत में नहीं थी। तो हमने किचन से माचिस और मोमबत्तियां लीं और किचन से निकल कर उस ग़ैरआबाद हिस्से की तरफ़ बढ़ आये— जिधर से बकौल हार्पर, नीचे जाने का रास्ता था।
जहां निकोल और कॉनर बंद मिले थे, वहीं पास ही एक बाहर से बंद दरवाज़ा और भी मौजूद था— जिसे खोला तो नीचा जाती सीढ़ियां दिखीं, जो कुछ पायदानों के बाद अंधेरे में गुम हो रही थीं। शुरुआती सिरे पर ही स्विचबोर्ड मौजूद था— तो हमने सारे स्विच ऑन कर दिये और नीचे भरा अंधेरा रुख़्सत हो गया। हालांकि वहां भी बाकी कैसल की तरह ही बीमार सी पीली रोशनी मौजूद थी, लेकिन फिर भी सीढ़ियां नीचे तक देखी जा सकती थीं और हम ऊपर से ही देख सकते थे कि अंतिम पायदान पर कोई पड़ा था।
हमारा दिल ज़ोर से धड़का।
"कौन हो सकता है?" कॉनर के मुंह से निकला।
"मुझे तो मिस्टर ओलिवर ही लग रहे।" हार्पर ने तेज़ स्वर में कहा और हमारे रोक पाने से पहले ही वह नीचे उतरता चला गया।
हम ऊपर ही खड़े देखते रहे… वह नीचे उस मुर्दा से पड़े आदमी तक पहुंचा और उसे काउंट के रूप में पुकारते हुए हिलाया-डुलाया— फिर उसमें कोई हरकत न पा कर हमारी तरफ़ देखते निराशा से सर हिला दिया। हमें न समझ में आया कि अगर वह ओलिवर ही था तो मर कैसे सकता था। वह तो ख़ुद ही कोई खबीस रूह था। हम डरे-डरे और झिझकते हुए नीचे पहुंचे तो वह शरीर हमारी नज़र में आया।
पहचानना मुश्किल था, लेकिन अगर हार्पर निश्चित था तो हम भी कह सकते थे कि वह काउंट ओलिवर ही था। उसे जिस हाल में हमने देखा था, वहां आलरेडी उसके शरीर में खाल और हड्डियां ही बची थीं— लेकिन लाश देख कर लगता था कि उसमें जो नमी थी, वह भी सोख ली गई थी और वह लकड़ी के सूखे ठुंठ जैसा हो गया था। उसका मुंह खुला हुआ था, मसूढ़े काले पड़ कर ऊपर चढ़ चुके थे और लंबे दांत अपनी लंबाई में नज़र आ रहे थे। पथराई सी आँखें भी खुली हुई सामने देख रही थीं।
"लेकिन इन्हें हुआ क्या है… यह तो बिलकुल सूख गये हैं लकड़ी की तरह, जबकि कोई मरता भी है तो उसकी लाश गीली हो कर सड़ती है।" नैंसी ने गहरी उलझन से भरी निगाहों से मुझे देखा— लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था।
हमें पहले से समझ में नहीं आ रहा था कि जो भी हो रहा था, वह कैसे हो रहा था… और अब उस काउंट की भी लाश सामने पड़ी थी, जिसे हम उन सब बातों का ज़िम्मेदार समझ रहे थे।
27 October 2023
हमें यही नहीं समझ में आया कि अगर काउंट मर चुका था तो फिर हमें कैसल के अंदर कौन रोक रहा था… फिर कौन था इस खेल का असली सूत्रधार? कुछ देर वहीं सर खपाने के बाद जब हम आगे बढ़े तो नीचे हमें जैसे कैसल की पूरी एक मंजिल बनी मिली— जिसकी बनावट ऐसी थी कि हम जल्दी ही यह भी भूल गये कि हम आये किधर से थे… जब हमें बाहर ले जाने वाला कोई सुरंग टाईप रास्ता न मिला तो हम घबरा गये और जल्दी ही हमारा तनाव इतना बढ़ गया कि हम एक दूसरे को ब्लेम करते, एक दूसरे पर चिल्लाने लगे।
"हमें ऊपर ही रहना चाहिये था… वहां कम से कम खाने-पीने को तो था। यहां तो अगर हम फंसे रह गये तो भूखे मर जायेंगे।" थक कर एक चबूतरे पर बैठते हुए मैंने कहा।
"वहां रात भी हमें फेस करनी पड़ती और पता नहीं हमारा क्या अंजाम होता। हमारे पास एक उम्मीद थी कि हम निकल सकते हैं।" हार्पर ने अपनी झुंझलाहट प्रदर्शित की।
"मिला तो नहीं रास्ता।" नैंसी ने कटाक्ष किया।
"क्योंकि मैं पहले कभी नीचे नहीं आया… मुझे बस यही पता था कि यहां से बाहर जाने का एक रास्ता मौजूद है। मुझे तो यह भी नहीं पता था कि नीचे इतना सब बना हुआ है। मुझे लगा था कि कोई हॉल होगा, या दो-तीन कमरे होंगे… तहखाने के नाम पर और होता क्या है।"
"यार लड़ो मत… बाहर निकलने का कोई उपाय सोचो।" कॉनर ने याचना सी की।
"मिस्टर ओलिवर ने तुम्हें बताया किस परपज से होगा? था क्या उस आदमी के मन में?" मैंने हार्पर को देखा।
"अपने ग्रैंड सन को अपनी विरासत सौंपना चाहते थे और शायद सौंप कर मुक्त हो गये।" इस बार निकोल ने जवाब दिया।
"बकवास… मेरा उनसे कोई रिश्ता नहीं था। इंसान पहचानने की इतनी काबिलियत रखता हूँ मैं। मेरी दादी ने हो सकता है कि मेरे बाप को उसके जायज पति से न पैदा किया हो, लेकिन किसी अंग्रेज़ की पैदावार तो वे हर्गिज़ नहीं थे। किसी और दौर में ऐसे बचकाने दावे माने जा सकते थे, इस दौर में कोई नहीं मानेगा। काउंट को ऐसा लगा होता तो सबसे पहले वे मेरे पिता की या मेरी डीएनए टेस्टिंग करा के यह कनफर्म करते कि हम उनका ही वंश हैं। ऐसे ही कोई किसी के कहने से नहीं मान लेता— अगर मेरी दादी ने उनसे कहा भी था तो। मुझे तो वह कहानी भी फर्जी लगती है… मुझे नहीं लगता कि यह आदमी कभी इंडिया गया भी है या मेरी दादी ने इसे कभी देखा भी होगा।"
"क्या… फिर उन्होंने अपनी सारी धन-दौलत और करोड़ों की संपत्ति तुम्हारे नाम क्यों कर दी?" कॉनर ने चौंकते हुए मुझे देखा।
"जब मुझे यहां मर-खप ही जाना है तो भला किस काम की यह प्रापर्टी और यह दौलत… मुझे तो लगता है कि यह भी बस एक चारा थी मुझे यहां ला कर मेरा शिकार करने के लिये।"
"और यह शिकार किया किसने? काउंट तो ख़ुद ही मर चुके।" हार्पर ने तंज किया और मुझे कोई जवाब न सूझा।
"तुम आखिर इतने खास क्यों हो उस इंसान या ताक़त के लिये— जो इस सब तमाशों की ज़िम्मेदार है? जबकि तुम तो एक विदेशी हो और महीना भर पहले ही अमेरिका आये हो?" नैंसी का सवाल भी वही था, जो मेरे लिये ख़ुद एक पहेली था।
"नहीं जानता… ऊपरी तौर पर वही वजह नज़र आती है जो काउंट ने बताई थी, पर उस पर मेरा यक़ीन नहीं।" मैंने बेबसी से कंधे उचकाये।
कुछ देर और माथापच्ची करने के बाद हम फिर चल दिये। पहले जहां हम बाहर ले जाने वाले रास्ते को तलाश रहे थे, वहीं अब उन सीढ़ियों को ढूंढ रहे थे, जिनसे हम नीचे आये थे। बाहर शायद दोपहर हो चुकी होगी— लेकिन अंदर तो बस उन्हीं मरियल सी लाइटों का सहारा था, जो कि रात की तरह जलने-बुझने का तमाशा नहीं कर रही थीं, यही उनका बड़ा अहसान था हम पर।
आधा घंटा और भटके होंगे कि वे लाइटें मद्धम होने लगीं और हमारी सांसें अटकीं।