S
StoryPublisher
Guest
यह वह जगह थी, जहां एक तरफ़ से आ कर नदी उस तालाब में मिलती थी और उसे पार करने के लिये छोटा सा पुल बना हुआ था। उसी पुल की सीढ़ियों वाली दीवार से उस पाईप का दूसरा सिरा सटा था, तो उधर से निकाल ले जाने का विकल्प ही नहीं था। भले उधर भी नीचे ढाई-तीन फुट तक धुंध फैली हो, लेकिन किसी पेड़ का साया न होने के चलते वहीं खड़े हो कर पैरों के पास देखा जा सकता था।
उन्होंने उस पाईप के दीवार से सटे सिरे पर ताक़त लगाई तो वह लुढ़क कर जगह छोड़ते इतना आगे सरक गया कि उसका दूसरी तरफ़ का मुंह खुल गया। अब उस पाईप के एक मुंह पर वरुण पहुंच गया तो दूसरे पर शाहज़ैन… नील्स और जेरर्ड भी वहां आ खड़े हुए थे।
"माहिरा— माही— माही—" शाहज़ैन ने अंदर के अंधेरे में झांकते पुकारा तो अंदर से गुर्राहट भरी आवाज़ आई और दोनों के शरीर में कई सिहरनें दौड़ गईं।
"वह भी पजेस हो चुकी अब… आप दोनों के लिये दुश्मन ही साबित होगी।" नील्स ने पास आते हुए कहा।
"तो?" शाहज़ैन ने ग़ुस्से से उसे देखा।
"उसे बाहर निकाल कर बेबस करते हैं और बांध कर रखते हैं, वर्ना वह किसी की भी जान के लिये ख़तरा बन जायेगी।" इस बार जेरर्ड बोला।
"वाऊ… आप लोगों को भी जान का ख़तरा है।" वरुण ने कटाक्ष भरे लहजे में कहा।
"आपके हिसाब से हम ज़िंदा नहीं हैं तो हमारे लिये न सही… आप लोगों के लिये तो ख़तरा है न। तो उसी हिसाब से सोच लीजिये।"
दोनों के दिमाग़ झटका खाये— यह तो ख़ुद उन्होंने ही तय किया था कि उनमें से कोई पजेस्ड हुआ तो बाकी उसे बांध कर बाज़ रखेंगे। फिर उसी बात पर अब उनमें हिचक क्यों पैदा हो गई? दोनों हारे हुए भाव से माहिरा को बाहर लाने की कोशिश करने लगे— लेकिन वह अब बदल चुकी थी और बस जानवर की तरह गुर्राते हुए उस पाईप के बीच में जा बैठी थी। वे उसकी तरफ़ बढ़ते तो वह पंजा मारने की कोशिश करती। गुर्राहट के सिवा बाकी कोई शब्द उसके मुंह से नहीं निकल रहा था कि वह बात करने की कंडीशन में लगती— जबकि नोमी और सिद्धार्थ तो इस हालत में भी बात कर पा रहे थे।
"पाईप को खड़ा कर के धकेल दो।" अचानक नील्स ने राय दी।
बात दोनों के समझ में आई और दोनों एक तरफ़ आ गये और उस तरफ़ से पाईप ऊपर उठाने लगे। यह देख नील्स और जेरर्ड भी पाईप में ताक़त लगाने लगे। हालांकि वह भारी पाईप था और उठना मुश्किल था, लेकिन फिर भी सबकी संयुक्त ताक़त से उठ गया तो उसे खड़ा करके दूसरी तरफ़ धकेल दिया गया और पहले ही नीचे पहुंच चुकी माहिरा उससे अलग हो कर उसी जगह गिरी रह गई। दोनों ने बिना देर किये उसे दबोच लिया और वह बुरी तरह गुर्राते हुए मचलने लगी।
"रस्सी— रस्सी दो।" वरुण ने जेरर्ड से कहा।
"हमें क्या पता कहां है रस्सी?" जेरर्ड ने सकपका कर उसे देखा।
"वह वहां— ज़मीन पर देखो। वहीं कहीं पड़ी होगी।" शाहज़ैन ने उसी तरफ़ हाथ उठाया, जिधर वे तीनों लेटे पड़े थे।
दोनों उधर लपक लिये और धुंध के बीच ज़मीन पर रस्सी ढूंढने लगे। मिल गई तो वे उसे लिये वापस दौड़े और उनसे रस्सी लेकर वरुण और शाहज़ैन माहिरा को बांधने में लग गये— जिसमें इन पलों में इतनी ताक़त आ गई थी कि दोनों की संयुक्त ताक़त भी कम पड़ रही थी। वह पूरा ज़ोर लगाये मचलती रही— लेकिन किसी तरह दोनों ने उसे हाथ-पैर से बांध कर वहीं डाल दिया और अलग हो कर घुटनों पर हाथ रखे हांफने लगे।
"अब इसका क्या करना है?" हांफते हुए वरुण ने शाहज़ैन ने देखा।
"बंगले में नीचे तहखाना है… इन्हें सुबह होने तक के लिये वहां रखा जा सकता है।" जेरर्ड ने राय दी।
"और वहां इसके लिये कभी सुबह होगी ही नहीं… हमें पता है कि अंदर जाने पर हमारे लिये बाहर का वक़्त रुक जाता है, तो प्लीज— अपनी राय अपने पास रखिये।" शाहज़ैन ने मुंह बनाया।
"क्या बात कर रहे हो… वक़्त भी कहीं रुकता है?" नील्स ने आश्चर्य से उन्हें देखा।
तभी फिर नोमी और सिद्धार्थ की पुकार गूंजी और वे उनकी तरफ़ आकर्षित हो गये।
"हमें उन्हें देखना चाहिये— अब उनकी आवाज़ नार्मल लग रही। ज़रूरी तो नहीं कि कोई पजेस हुआ है तो सुबह तक पजेस्ड ही रहेगा। हो सकता है कि उन आत्माओं ने दोनों को छोड़ दिया हो।" वरुण ने उम्मीद भरी आवाज़ में कहा।
"तुम्हारे लिये रिस्क हो सकता है मिस्टर… उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो।" जेरर्ड ने कहा।
"तुम लोग अपना मुंह बंद क्यों नहीं रखते… या एटलिस्ट अपने असली रूप में ही आ जाओ। इतना सब तो देख ही रहे हैं— वह भी बर्दाश्त कर लेंगे।" वरुण ने ताना मारते हुए कहा।
"मैं माही को अकेला नहीं छोड़ सकता— मैं यहीं हूँ इसके पास। तुम देखो उन दोनों को। अगर वह ठीक हो चुके हों तो उन्हें यहां ले आओ।"
"ठीक है।"
वरुण उन्हें देखते थोड़ी देर उल्टे क़दम चला, फिर सीधे हो कर बंगले की तरफ़ भाग लिया, क्योंकि नोमी और सिद्धार्थ की आवाज़ें उसी तरफ़ से कहीं आ रही थीं। दौड़ते हुए वह बंगले तक पहुंचा तो वहां मौजूद लोग उनकी तरफ़ देखने लगे। उसी पल में डान और स्टिन सामने की तरफ़ से दौड़ते हुए वहां पहुंचे थे। बंगले के लॉन में बची-खुची आग अभी भी जल रही थी— जिसके पास ही एलीम बैठी, लिआ की लाश का सर अपनी गोद में रखे रो रही थी और पास बैठा सैमुअल उसे संभालने की कोशिश कर रहा था, जबकि कोर्नेलिस पास खड़ा उन्हें देख रहा था। उनमें से रूबेन उनकी नज़र से कहीं दूर था।
"वह उधर है… लेकिन अब शायद पजेस्ड नहीं है।" स्टिन ने सामने की तरफ़ पेड़ों के झुरमुटों की तरफ़ हाथ उठाया।
और उसके इशारे के साथ ही वरुण उस तरफ़ दौड़ पड़ा।
उस तरफ़ बस उजाड़ सी जगह थी और बेतरतीब जंगली वनस्पति उगी हुई थी। कुछ पेड़ पुराने थे जो शायद गेरिट ने बाकी रहने दिये थे— ज्यादातर नये पेड़ थे जो बस पांच साल पुराने रहे होंगे, लेकिन बेशुमार पौधों और झाड़ियों की संगत में घने जंगल से हो गये थे। उधर से नोमी की आवाज़ आ रही थी जो अब उनके नाम के साथ मदद की भी पुकार लगा रही थी। वे सारे पेड़-पौधे अजीब ढंग से हिल रहे थे— जैसे उनमें जान पड़ गई हो। इधर-उधर फैली जंगली बेलें सांपों की तरह चलती लग रही थीं। धुंध और अंधेरे के बीच देखना दुष्कर था, लेकिन वह लाल रक्तिम चांदनी सहायक बनी हुई थी।
उसे दो पुराने पेड़ों के बीच लटकती बेलों में फंसी नोमी दिखी जो कोशिश करके भी ख़ुद को छुड़ा नहीं पा रही थी— लेकिन वरुण के लिये राहत की बात यह थी कि वह अब ठीक लग रही थी।
"नोमी— मैं हूँ वरुण। क्या तुम ठीक हो?" फिर भी उसने पुष्टि करनी चाही।
"स्टुपिड— क्या मैं तुम्हें ठीक लग रही हूँ। यहां मैं फंसी हुई हूँ— छुड़ाओ मुझे।"
"आ गया… डरो मत, मैं हूँ।" वह नज़दीक आ कर उसे उसके बदन से बुरी तरह लिपटी बेलों से छुड़ाने लगा— "लेकिन तुम यहां कैसे आ फंसी?"
"मुझे नहीं पता— कुछ ब्लैक आउट सा है… हम लॉन में बैठे बात कर रहे थे लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ कि बीच में सब अंधेरा-अंधेरा है, जैसे मैं सो गई होउं। फिर उठी तो वे लोग मुझे दौड़ा रहे थे और उनसे बचते मैं इधर आई तो इधर आ कर फंस गई।"
"तुम पजेस हो गई थी।"
"क्या? सच में?"
"हां… तुम और सिड, दोनों… और तुमने एलीम की बेटी को मार डाला तो वे सब तुम दोनों को मारने पर तुल गये थे। तभी भागे होगे तुम दोनों।"
"लेकिन मैं उन्हें कैसे मार सकती हूँ— वे सब तो पहले ही मर चुके हैं… और यह सिड कहां है। मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी।"
"मुझे भी— चलो मिल के ढूंढते हैं।"
उसने किसी तरह खींच कर, तोड़ कर बेलों को उससे अलग किया और उन पर लपकते पेड़ों से बचाते वहां से बाहर निकाल लाया।
"यह कैसे पेड़ हैं… एसा लगता है जैसे सबमें जान हो।" वह पीछे देखते झुरझुरी लेते बोली।
"हां, यहां सबमें ही जान है। शाहज़ैन और माहिरा तालाब की तरफ़ हैं— अब माहिरा पजेस्ड हो चुकी है। चलो सिड को ढूंढ कर उधर चलते हैं। सिड— सिद्धार्थ।"
वे सिद्धार्थ को आवाज़ें देने लगे।
कुछ देर बाद उसकी आवाज़ आई तो उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वह कहां होगा। वह फार्म हाउस के बाहरी गेट से बंगले तक आने वाले रास्ते के बीच में जो छोटा ब्लॉक था घने पेड़ों का— जहां से रास्ता मुड़ता था, वहीं गिरा पड़ा था। ऐसा लगता था जैसे अंधाधुंध भागने में वह कहीं ठोकर खा कर गिरा था और वहां मौजूद किसी पेड़ के ठुंठ से टकरा कर मुंह पर ही चोट खा बैठा था। जब उन्होंने पास पहुंच कर उसे उठाया तो उसका चेहरा ख़ून-खच्चर हो रहा था। उनके पहुंचने के साथ ही रूबेन और कोर्नेलिस भी वहां पहुंच गये थे।
"तुम ठीक तो हो सिड?" नोमी ने विचलित होते हुए पूछा।
"खाक ठीक हूँ— सर फट गया है, बुरी तरह चक्कर आ रहे हैं। यह साले फ़िर आ गये— कब से पीछे पड़े हैं।" कराहता हुआ वह उठा तो रूबेन और कोर्नेलिस को देख कर उसके मुंह से गाली निकल गई।
"तुम पजेस्ड थे सिड… उन पर हमला कर रहे थे, तभी वे तुम्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।" वरुण ने उसे संभाला।
"मैं पजेस्ड था, और यह साले तो ज़िंदा इंसान हैं— ब्लडी डेड्स।"
"अब वह जो भी हैं— पर फिलहाल वे ख़तरा नहीं हैं, हम ख़ुद ही एक दूसरे के लिये ख़तरा हैं। पहले तुम दोनों पजेस्ड थे, अब माहिरा पजेस्ड है।"
"क्या— कहां है वह?"
"पूल के पास… हमें उधर ही चलना होगा। आप लोग रहने दीजिये… आप अपने साथियों के पास जाइये और हमें अकेला छोड़ दीजिये— प्लीज।" रूबेन और कोर्नेलिस को पीछे बढ़ते देखा तो वरुण ने हाथ उठा कर उन्हें रोक दिया।
"तुम्हें हमारी मदद की ज़रूरत पड़ेगी।" कोर्नेलिस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा।
"हम देख लेंगे।"
वे मायूसी से सर हिलाते अलग रुख को बढ़ गये और यह तीनों उधर बढ़ आये, जिधर शाहज़ैन और माहिरा को छोड़ा था… लेकिन यह देख कर चकरा गये कि वहां अकेली माहिरा ही बंधी पड़ी कसमसा रही थी और बाकी तीनों लोग लापता थे। न वहां जेरर्ड और नील्स थे, न ही शाहज़ैन। वह लपकते हुए माहिरा के पास बैठ गये… अच्छी बात यह थी कि अब वह सामान्य थी।
"माही— माही… तुम ठीक हो? शाहज़ैन कहां गया?"वरुण ने इधर-उधर देखा।
"मुझे नहीं पता— और यह मुझे बांधा किसने है?" वह कसमसाते हुए बोली।
"शाहज़ैन ने— तुम पजेस्ड हो गई थी।"
"क्या!"
"हां— सिड, सिड मत खोलो इसे… यह बंधी थी, तभी सेफ रही। मुझे लगता है कि हम भी अपने आप को बांध लें, तो सेफ रहेंगे। सारी परेशानी हाथ-पैर खुले होने में है— बंधे होंगे तो पजेस्ड हो कर भी क्या हो जायेगा। रात तो गुज़र ही जायेगी जैसे-तैसे।" सिद्धार्थ ने माहिरा को खोलने की कोशिश की, तो वरुण ने उसे रोक दिया।
"क्या— खोलो मुझे।" माहिरा झुंझला गई।
"और वे सारे लोग जो वहां बैठे हैं— वह नहीं उस हालत में हमारे लिये ख़तरा बन जायेंगे? अभी उनकी बेटी नोमी के हाथों मारी गई है।" सिद्धार्थ ने संशक भाव से उसे देखा।
"अरे काहे की मारी गई यार— वह सारे लोग पहले ही मारे जा चुके हैं… हमारे आसपास जो भी ज़िंदा-मुर्दा दिख रहा है, वह सब बस भ्रम है।"
"कहीं गेरिट ने ही तो हमारे साथ कोई गेम नहीं खेल दिया… हो सकता है कि यह जगह वाक़ई हांटेड हो, लेकिन यह सारे लोग असली हों।"
"ऐसा नहीं हो सकता।"
"क्यों? हम जानते ही क्या हैं इस जगह के बारे में, या इन सब लोगों के बारे में… जो मिस्टर गेरिट ने बताया, हम वही मान के चल रहे हैं न। तो सच उससे कुछ अलग या एकदम उल्टा भी तो हो सकता है।"
"अब जो भी हो… पर मुझे वे ख़तरा नहीं लग रहे। हम ख़ुद को भी बांध कर यहीं पड़ जाते हैं और इस तरह बांधते हैं कि ख़ुद से न खोल सकें, लेकिन दूसरा हमें खोल दे— अगर ज़रूरत पड़े तो।"
"क्या बात कर रहे हो— मुझे खोलो।"
"पड़ी रहो यार… ऐसे ही सेफ हो। सिड के चेहरे का हाल देख रही हो, सर फट गया है इसका… और मैं छुड़ाने न पहुंचता तो नोमी भी फंसे-फंसे बेदम हो जाती। मैं तुम दोनों को बांध देता हूँ— तुम दोनों मिल के मुझे बांध देना किसी तरह।"
"नहीं— मैं बाधूंगी तुम दोनों को। फिर तुम मुझे बांध देना। उस पेड़ के साथ बांधते हैं— वह दिख ख़तरनाक रहा है लेकिन बस डराने भर ही है, यह मैंने वहां देख लिया है।"
"चलो ऐसे ही सही।" दोनों राज़ी हो गये।
उन्होंने उस पाईप के दीवार से सटे सिरे पर ताक़त लगाई तो वह लुढ़क कर जगह छोड़ते इतना आगे सरक गया कि उसका दूसरी तरफ़ का मुंह खुल गया। अब उस पाईप के एक मुंह पर वरुण पहुंच गया तो दूसरे पर शाहज़ैन… नील्स और जेरर्ड भी वहां आ खड़े हुए थे।
"माहिरा— माही— माही—" शाहज़ैन ने अंदर के अंधेरे में झांकते पुकारा तो अंदर से गुर्राहट भरी आवाज़ आई और दोनों के शरीर में कई सिहरनें दौड़ गईं।
"वह भी पजेस हो चुकी अब… आप दोनों के लिये दुश्मन ही साबित होगी।" नील्स ने पास आते हुए कहा।
"तो?" शाहज़ैन ने ग़ुस्से से उसे देखा।
"उसे बाहर निकाल कर बेबस करते हैं और बांध कर रखते हैं, वर्ना वह किसी की भी जान के लिये ख़तरा बन जायेगी।" इस बार जेरर्ड बोला।
"वाऊ… आप लोगों को भी जान का ख़तरा है।" वरुण ने कटाक्ष भरे लहजे में कहा।
"आपके हिसाब से हम ज़िंदा नहीं हैं तो हमारे लिये न सही… आप लोगों के लिये तो ख़तरा है न। तो उसी हिसाब से सोच लीजिये।"
दोनों के दिमाग़ झटका खाये— यह तो ख़ुद उन्होंने ही तय किया था कि उनमें से कोई पजेस्ड हुआ तो बाकी उसे बांध कर बाज़ रखेंगे। फिर उसी बात पर अब उनमें हिचक क्यों पैदा हो गई? दोनों हारे हुए भाव से माहिरा को बाहर लाने की कोशिश करने लगे— लेकिन वह अब बदल चुकी थी और बस जानवर की तरह गुर्राते हुए उस पाईप के बीच में जा बैठी थी। वे उसकी तरफ़ बढ़ते तो वह पंजा मारने की कोशिश करती। गुर्राहट के सिवा बाकी कोई शब्द उसके मुंह से नहीं निकल रहा था कि वह बात करने की कंडीशन में लगती— जबकि नोमी और सिद्धार्थ तो इस हालत में भी बात कर पा रहे थे।
"पाईप को खड़ा कर के धकेल दो।" अचानक नील्स ने राय दी।
बात दोनों के समझ में आई और दोनों एक तरफ़ आ गये और उस तरफ़ से पाईप ऊपर उठाने लगे। यह देख नील्स और जेरर्ड भी पाईप में ताक़त लगाने लगे। हालांकि वह भारी पाईप था और उठना मुश्किल था, लेकिन फिर भी सबकी संयुक्त ताक़त से उठ गया तो उसे खड़ा करके दूसरी तरफ़ धकेल दिया गया और पहले ही नीचे पहुंच चुकी माहिरा उससे अलग हो कर उसी जगह गिरी रह गई। दोनों ने बिना देर किये उसे दबोच लिया और वह बुरी तरह गुर्राते हुए मचलने लगी।
"रस्सी— रस्सी दो।" वरुण ने जेरर्ड से कहा।
"हमें क्या पता कहां है रस्सी?" जेरर्ड ने सकपका कर उसे देखा।
"वह वहां— ज़मीन पर देखो। वहीं कहीं पड़ी होगी।" शाहज़ैन ने उसी तरफ़ हाथ उठाया, जिधर वे तीनों लेटे पड़े थे।
दोनों उधर लपक लिये और धुंध के बीच ज़मीन पर रस्सी ढूंढने लगे। मिल गई तो वे उसे लिये वापस दौड़े और उनसे रस्सी लेकर वरुण और शाहज़ैन माहिरा को बांधने में लग गये— जिसमें इन पलों में इतनी ताक़त आ गई थी कि दोनों की संयुक्त ताक़त भी कम पड़ रही थी। वह पूरा ज़ोर लगाये मचलती रही— लेकिन किसी तरह दोनों ने उसे हाथ-पैर से बांध कर वहीं डाल दिया और अलग हो कर घुटनों पर हाथ रखे हांफने लगे।
"अब इसका क्या करना है?" हांफते हुए वरुण ने शाहज़ैन ने देखा।
"बंगले में नीचे तहखाना है… इन्हें सुबह होने तक के लिये वहां रखा जा सकता है।" जेरर्ड ने राय दी।
"और वहां इसके लिये कभी सुबह होगी ही नहीं… हमें पता है कि अंदर जाने पर हमारे लिये बाहर का वक़्त रुक जाता है, तो प्लीज— अपनी राय अपने पास रखिये।" शाहज़ैन ने मुंह बनाया।
"क्या बात कर रहे हो… वक़्त भी कहीं रुकता है?" नील्स ने आश्चर्य से उन्हें देखा।
तभी फिर नोमी और सिद्धार्थ की पुकार गूंजी और वे उनकी तरफ़ आकर्षित हो गये।
"हमें उन्हें देखना चाहिये— अब उनकी आवाज़ नार्मल लग रही। ज़रूरी तो नहीं कि कोई पजेस हुआ है तो सुबह तक पजेस्ड ही रहेगा। हो सकता है कि उन आत्माओं ने दोनों को छोड़ दिया हो।" वरुण ने उम्मीद भरी आवाज़ में कहा।
"तुम्हारे लिये रिस्क हो सकता है मिस्टर… उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो।" जेरर्ड ने कहा।
"तुम लोग अपना मुंह बंद क्यों नहीं रखते… या एटलिस्ट अपने असली रूप में ही आ जाओ। इतना सब तो देख ही रहे हैं— वह भी बर्दाश्त कर लेंगे।" वरुण ने ताना मारते हुए कहा।
"मैं माही को अकेला नहीं छोड़ सकता— मैं यहीं हूँ इसके पास। तुम देखो उन दोनों को। अगर वह ठीक हो चुके हों तो उन्हें यहां ले आओ।"
"ठीक है।"
वरुण उन्हें देखते थोड़ी देर उल्टे क़दम चला, फिर सीधे हो कर बंगले की तरफ़ भाग लिया, क्योंकि नोमी और सिद्धार्थ की आवाज़ें उसी तरफ़ से कहीं आ रही थीं। दौड़ते हुए वह बंगले तक पहुंचा तो वहां मौजूद लोग उनकी तरफ़ देखने लगे। उसी पल में डान और स्टिन सामने की तरफ़ से दौड़ते हुए वहां पहुंचे थे। बंगले के लॉन में बची-खुची आग अभी भी जल रही थी— जिसके पास ही एलीम बैठी, लिआ की लाश का सर अपनी गोद में रखे रो रही थी और पास बैठा सैमुअल उसे संभालने की कोशिश कर रहा था, जबकि कोर्नेलिस पास खड़ा उन्हें देख रहा था। उनमें से रूबेन उनकी नज़र से कहीं दूर था।
"वह उधर है… लेकिन अब शायद पजेस्ड नहीं है।" स्टिन ने सामने की तरफ़ पेड़ों के झुरमुटों की तरफ़ हाथ उठाया।
और उसके इशारे के साथ ही वरुण उस तरफ़ दौड़ पड़ा।
उस तरफ़ बस उजाड़ सी जगह थी और बेतरतीब जंगली वनस्पति उगी हुई थी। कुछ पेड़ पुराने थे जो शायद गेरिट ने बाकी रहने दिये थे— ज्यादातर नये पेड़ थे जो बस पांच साल पुराने रहे होंगे, लेकिन बेशुमार पौधों और झाड़ियों की संगत में घने जंगल से हो गये थे। उधर से नोमी की आवाज़ आ रही थी जो अब उनके नाम के साथ मदद की भी पुकार लगा रही थी। वे सारे पेड़-पौधे अजीब ढंग से हिल रहे थे— जैसे उनमें जान पड़ गई हो। इधर-उधर फैली जंगली बेलें सांपों की तरह चलती लग रही थीं। धुंध और अंधेरे के बीच देखना दुष्कर था, लेकिन वह लाल रक्तिम चांदनी सहायक बनी हुई थी।
उसे दो पुराने पेड़ों के बीच लटकती बेलों में फंसी नोमी दिखी जो कोशिश करके भी ख़ुद को छुड़ा नहीं पा रही थी— लेकिन वरुण के लिये राहत की बात यह थी कि वह अब ठीक लग रही थी।
"नोमी— मैं हूँ वरुण। क्या तुम ठीक हो?" फिर भी उसने पुष्टि करनी चाही।
"स्टुपिड— क्या मैं तुम्हें ठीक लग रही हूँ। यहां मैं फंसी हुई हूँ— छुड़ाओ मुझे।"
"आ गया… डरो मत, मैं हूँ।" वह नज़दीक आ कर उसे उसके बदन से बुरी तरह लिपटी बेलों से छुड़ाने लगा— "लेकिन तुम यहां कैसे आ फंसी?"
"मुझे नहीं पता— कुछ ब्लैक आउट सा है… हम लॉन में बैठे बात कर रहे थे लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ कि बीच में सब अंधेरा-अंधेरा है, जैसे मैं सो गई होउं। फिर उठी तो वे लोग मुझे दौड़ा रहे थे और उनसे बचते मैं इधर आई तो इधर आ कर फंस गई।"
"तुम पजेस हो गई थी।"
"क्या? सच में?"
"हां… तुम और सिड, दोनों… और तुमने एलीम की बेटी को मार डाला तो वे सब तुम दोनों को मारने पर तुल गये थे। तभी भागे होगे तुम दोनों।"
"लेकिन मैं उन्हें कैसे मार सकती हूँ— वे सब तो पहले ही मर चुके हैं… और यह सिड कहां है। मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी।"
"मुझे भी— चलो मिल के ढूंढते हैं।"
उसने किसी तरह खींच कर, तोड़ कर बेलों को उससे अलग किया और उन पर लपकते पेड़ों से बचाते वहां से बाहर निकाल लाया।
"यह कैसे पेड़ हैं… एसा लगता है जैसे सबमें जान हो।" वह पीछे देखते झुरझुरी लेते बोली।
"हां, यहां सबमें ही जान है। शाहज़ैन और माहिरा तालाब की तरफ़ हैं— अब माहिरा पजेस्ड हो चुकी है। चलो सिड को ढूंढ कर उधर चलते हैं। सिड— सिद्धार्थ।"
वे सिद्धार्थ को आवाज़ें देने लगे।
कुछ देर बाद उसकी आवाज़ आई तो उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वह कहां होगा। वह फार्म हाउस के बाहरी गेट से बंगले तक आने वाले रास्ते के बीच में जो छोटा ब्लॉक था घने पेड़ों का— जहां से रास्ता मुड़ता था, वहीं गिरा पड़ा था। ऐसा लगता था जैसे अंधाधुंध भागने में वह कहीं ठोकर खा कर गिरा था और वहां मौजूद किसी पेड़ के ठुंठ से टकरा कर मुंह पर ही चोट खा बैठा था। जब उन्होंने पास पहुंच कर उसे उठाया तो उसका चेहरा ख़ून-खच्चर हो रहा था। उनके पहुंचने के साथ ही रूबेन और कोर्नेलिस भी वहां पहुंच गये थे।
"तुम ठीक तो हो सिड?" नोमी ने विचलित होते हुए पूछा।
"खाक ठीक हूँ— सर फट गया है, बुरी तरह चक्कर आ रहे हैं। यह साले फ़िर आ गये— कब से पीछे पड़े हैं।" कराहता हुआ वह उठा तो रूबेन और कोर्नेलिस को देख कर उसके मुंह से गाली निकल गई।
"तुम पजेस्ड थे सिड… उन पर हमला कर रहे थे, तभी वे तुम्हें पकड़ने की कोशिश कर रहे थे।" वरुण ने उसे संभाला।
"मैं पजेस्ड था, और यह साले तो ज़िंदा इंसान हैं— ब्लडी डेड्स।"
"अब वह जो भी हैं— पर फिलहाल वे ख़तरा नहीं हैं, हम ख़ुद ही एक दूसरे के लिये ख़तरा हैं। पहले तुम दोनों पजेस्ड थे, अब माहिरा पजेस्ड है।"
"क्या— कहां है वह?"
"पूल के पास… हमें उधर ही चलना होगा। आप लोग रहने दीजिये… आप अपने साथियों के पास जाइये और हमें अकेला छोड़ दीजिये— प्लीज।" रूबेन और कोर्नेलिस को पीछे बढ़ते देखा तो वरुण ने हाथ उठा कर उन्हें रोक दिया।
"तुम्हें हमारी मदद की ज़रूरत पड़ेगी।" कोर्नेलिस ने चेतावनी भरे लहजे में कहा।
"हम देख लेंगे।"
वे मायूसी से सर हिलाते अलग रुख को बढ़ गये और यह तीनों उधर बढ़ आये, जिधर शाहज़ैन और माहिरा को छोड़ा था… लेकिन यह देख कर चकरा गये कि वहां अकेली माहिरा ही बंधी पड़ी कसमसा रही थी और बाकी तीनों लोग लापता थे। न वहां जेरर्ड और नील्स थे, न ही शाहज़ैन। वह लपकते हुए माहिरा के पास बैठ गये… अच्छी बात यह थी कि अब वह सामान्य थी।
"माही— माही… तुम ठीक हो? शाहज़ैन कहां गया?"वरुण ने इधर-उधर देखा।
"मुझे नहीं पता— और यह मुझे बांधा किसने है?" वह कसमसाते हुए बोली।
"शाहज़ैन ने— तुम पजेस्ड हो गई थी।"
"क्या!"
"हां— सिड, सिड मत खोलो इसे… यह बंधी थी, तभी सेफ रही। मुझे लगता है कि हम भी अपने आप को बांध लें, तो सेफ रहेंगे। सारी परेशानी हाथ-पैर खुले होने में है— बंधे होंगे तो पजेस्ड हो कर भी क्या हो जायेगा। रात तो गुज़र ही जायेगी जैसे-तैसे।" सिद्धार्थ ने माहिरा को खोलने की कोशिश की, तो वरुण ने उसे रोक दिया।
"क्या— खोलो मुझे।" माहिरा झुंझला गई।
"और वे सारे लोग जो वहां बैठे हैं— वह नहीं उस हालत में हमारे लिये ख़तरा बन जायेंगे? अभी उनकी बेटी नोमी के हाथों मारी गई है।" सिद्धार्थ ने संशक भाव से उसे देखा।
"अरे काहे की मारी गई यार— वह सारे लोग पहले ही मारे जा चुके हैं… हमारे आसपास जो भी ज़िंदा-मुर्दा दिख रहा है, वह सब बस भ्रम है।"
"कहीं गेरिट ने ही तो हमारे साथ कोई गेम नहीं खेल दिया… हो सकता है कि यह जगह वाक़ई हांटेड हो, लेकिन यह सारे लोग असली हों।"
"ऐसा नहीं हो सकता।"
"क्यों? हम जानते ही क्या हैं इस जगह के बारे में, या इन सब लोगों के बारे में… जो मिस्टर गेरिट ने बताया, हम वही मान के चल रहे हैं न। तो सच उससे कुछ अलग या एकदम उल्टा भी तो हो सकता है।"
"अब जो भी हो… पर मुझे वे ख़तरा नहीं लग रहे। हम ख़ुद को भी बांध कर यहीं पड़ जाते हैं और इस तरह बांधते हैं कि ख़ुद से न खोल सकें, लेकिन दूसरा हमें खोल दे— अगर ज़रूरत पड़े तो।"
"क्या बात कर रहे हो— मुझे खोलो।"
"पड़ी रहो यार… ऐसे ही सेफ हो। सिड के चेहरे का हाल देख रही हो, सर फट गया है इसका… और मैं छुड़ाने न पहुंचता तो नोमी भी फंसे-फंसे बेदम हो जाती। मैं तुम दोनों को बांध देता हूँ— तुम दोनों मिल के मुझे बांध देना किसी तरह।"
"नहीं— मैं बाधूंगी तुम दोनों को। फिर तुम मुझे बांध देना। उस पेड़ के साथ बांधते हैं— वह दिख ख़तरनाक रहा है लेकिन बस डराने भर ही है, यह मैंने वहां देख लिया है।"
"चलो ऐसे ही सही।" दोनों राज़ी हो गये।