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Guest
तीन-चार दिन के बाद हिना ने फिर वही ख्वाब देखा। इस बार यह सपना थोड़े से परिवर्तन के साथ दिखाई दिया था। यह सपना उसने रात के बजाय दिन में देखा। कालेज से आने के बाद वह खाना खाकर कुछ देर आराम करती थी। नींद के इस अंतराल में उसे यह सपना दिखाई दिया।
इस बार उसने देखा कि वह दरिया पर लाइन में खड़ी है... जब पानी पीने का उसका नम्बर आता है और वह उस काले लबादे में छिपे शख्स के निकट पहुंचती तो वो अपने चेहरे पर पड़ा हुआ कपड़ा अचानक हटाता है और उसे अपनी गिरफ्त में लेकर कहता है
"याद रखना, तुम मेरी हो...कोई और बीच में आया तो उसे जिन्दा नहीं छोड़गा...।"
हिना उसकी धमकी सुनकर भयभीत हो जाती है और उसकी आंख खुल जाती है। उसका पूरा बदन पसीने में नहाया होता है। वह निश्चल-साकत अवस्था में पड़ी काफी देर तक लम्बे-लम्बे सांस लेती है।
और फिर जब उसके हवास वहाल होते हैं...वह अपने आपको सम्भालती है तो सपने में देखे उस काले लबादे वाले के चेहरे पर गौर करती है...लेकिन उसे कुछ याद नहीं आता कि उसकी शक्ल कैसी थी
लेकिन फिर भी उसके जहन में जाने यह बात क्योंकर कुन्द हो जाती है कि 'वो रनतारो था...सुनहरा सांप।'
फिर एक दिन एक विचित्र घटना घटी। हिना कालेज गई हुई थी। नौकरानी सरवरी... सितारा की मां... किचन में थी। सितारा ने नाश्ता कर लेने के बाद अपनी मां से कहा-
"मैं हिना बीवी के कमरे की सफाई करने जा रही हूँ...।"
"जा...और दीवारें वगैरह भी अच्छी तरह देख लेना कि कोई जाला-वाला न लगा हो। हिना बीवी को जाले देखकर गुस्सा आ जाता है....।" सरवरी ने उसे हिदायत दी।
सितारा हिना के कमरे तक पहुंची और फिर उसने अभी दरवाजा खोलकर कमरे में कदम रखा ही था कि उसका दिल जैसे गले में आ गया।
वह दृश्य ही कुछ ऐसा था।
कमरे में हल्का-सा अंधेरा था...लेकिन इतना भी नहीं कि चीजें नजर न आएं।
'वो' हिना के बेड पर बैठा हुआ था। काला लिबास पहने उस शख्स का चेहरा खिड़की की तरफ था। जब सितारा ने दरवाजा खोला तो उसने एकदम गर्दन घुमाई और फिर फौरन ही बेड से उठ भी गया।
वो एक लम्बा-चौड़ा शख्स था। वो धीरे-धीरे दरवाजे की तरफ बढ़ा। सितारा इस मंजर की ताव न ला सकी। उसके मुंह से घुटी घुटी-सी चीख निकली और वह वहीं त्यौराकर गिरी व बेहोश हो गई।
हिना कालेज से वापिस आई तो उसने आशा के विपरीत अपने कमरे का दरवाजा खुला हुआ देखा। उसे बड़ी हैरत हुई। वह तेजी से कमरे में दाखिल हुई। पर भीतर दरवाजे के पास ही सितारा बेहोश पड़ी थी।
उसने किताबें बेड पर फेंकी और सितारा पर झुक गई। सितारा की आंखें बन्द थीं और मुंह खुला हुआ था। हिना ने जल्दी-जल्दी उसका चेहरा थपथपाया और उसका नाम लेकर पूछा-"सितारा... सितारा...।"
फिर सहसा हिना को जाने क्या ख्याल आया सितारा सीधी लेटी हुई थी।
हिना ने उसकी कमीज सरका उसके पेट को देखा। पेट का निरीक्षण कर हिना ने एक गहरी सांस ली। यह सुकून व राहत की सांस थी।
इस बार उसने देखा कि वह दरिया पर लाइन में खड़ी है... जब पानी पीने का उसका नम्बर आता है और वह उस काले लबादे में छिपे शख्स के निकट पहुंचती तो वो अपने चेहरे पर पड़ा हुआ कपड़ा अचानक हटाता है और उसे अपनी गिरफ्त में लेकर कहता है
"याद रखना, तुम मेरी हो...कोई और बीच में आया तो उसे जिन्दा नहीं छोड़गा...।"
हिना उसकी धमकी सुनकर भयभीत हो जाती है और उसकी आंख खुल जाती है। उसका पूरा बदन पसीने में नहाया होता है। वह निश्चल-साकत अवस्था में पड़ी काफी देर तक लम्बे-लम्बे सांस लेती है।
और फिर जब उसके हवास वहाल होते हैं...वह अपने आपको सम्भालती है तो सपने में देखे उस काले लबादे वाले के चेहरे पर गौर करती है...लेकिन उसे कुछ याद नहीं आता कि उसकी शक्ल कैसी थी
लेकिन फिर भी उसके जहन में जाने यह बात क्योंकर कुन्द हो जाती है कि 'वो रनतारो था...सुनहरा सांप।'
फिर एक दिन एक विचित्र घटना घटी। हिना कालेज गई हुई थी। नौकरानी सरवरी... सितारा की मां... किचन में थी। सितारा ने नाश्ता कर लेने के बाद अपनी मां से कहा-
"मैं हिना बीवी के कमरे की सफाई करने जा रही हूँ...।"
"जा...और दीवारें वगैरह भी अच्छी तरह देख लेना कि कोई जाला-वाला न लगा हो। हिना बीवी को जाले देखकर गुस्सा आ जाता है....।" सरवरी ने उसे हिदायत दी।
सितारा हिना के कमरे तक पहुंची और फिर उसने अभी दरवाजा खोलकर कमरे में कदम रखा ही था कि उसका दिल जैसे गले में आ गया।
वह दृश्य ही कुछ ऐसा था।
कमरे में हल्का-सा अंधेरा था...लेकिन इतना भी नहीं कि चीजें नजर न आएं।
'वो' हिना के बेड पर बैठा हुआ था। काला लिबास पहने उस शख्स का चेहरा खिड़की की तरफ था। जब सितारा ने दरवाजा खोला तो उसने एकदम गर्दन घुमाई और फिर फौरन ही बेड से उठ भी गया।
वो एक लम्बा-चौड़ा शख्स था। वो धीरे-धीरे दरवाजे की तरफ बढ़ा। सितारा इस मंजर की ताव न ला सकी। उसके मुंह से घुटी घुटी-सी चीख निकली और वह वहीं त्यौराकर गिरी व बेहोश हो गई।
हिना कालेज से वापिस आई तो उसने आशा के विपरीत अपने कमरे का दरवाजा खुला हुआ देखा। उसे बड़ी हैरत हुई। वह तेजी से कमरे में दाखिल हुई। पर भीतर दरवाजे के पास ही सितारा बेहोश पड़ी थी।
उसने किताबें बेड पर फेंकी और सितारा पर झुक गई। सितारा की आंखें बन्द थीं और मुंह खुला हुआ था। हिना ने जल्दी-जल्दी उसका चेहरा थपथपाया और उसका नाम लेकर पूछा-"सितारा... सितारा...।"
फिर सहसा हिना को जाने क्या ख्याल आया सितारा सीधी लेटी हुई थी।
हिना ने उसकी कमीज सरका उसके पेट को देखा। पेट का निरीक्षण कर हिना ने एक गहरी सांस ली। यह सुकून व राहत की सांस थी।