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Guest
सलवार कुछ नीचे होते ही मैने अपना हाथ उस की चड्डी के अंदर डाला तो वो सीधे उसकी बड़ी बड़ी रेशम की तरह मुलायम झान्टो से
टकराने लगा….मैने उसकी बुर को टटोल कर छेद मे बीच वाली उंगली खच से पेल दी जिससे चिहुक कर उसकी आँखे खुल गयी.
वो—आआअहह….….ये आपने मेरी सलवार क्यो उतार दी….?
मैं—कुछ नही…वो बस देखने के लिए की खुजली कहाँ हो रही है…?
बुर गीली होने के कारण उंगली अंदर पेलने मे ज़्यादा दिक्कत नही हो रही थी….हालाँकि वो कसी कसी अंदर बाहर हो रही थी उस की बुर
मे….उस को भी धीरे धीरे मज़ा आने लगा था.
वो—आआआअहह…..…..धीरीई…..आआअहह
कुछ समय तक बुर मे उंगली पेलने के बाद मैने उसकी सलवार चड्डी सहित नीचे कर दी…उसकी झान्टो वाली बुर खुल कर मेरे सामने आ गयी…मैने झुक कर उसकी बुर को चाट लिया जिससे उस को एक करेंट सा झटका लगा…वो काँप गयी..उसकी एक चुचि को पकड़ कर
दबाते हुए मैने बुर मे जीभ भिड़ा दी और उसकी बुर से निकलते शहद को चाट चाट कर पीने लगा.
वो—आआआआहह…..….बहुत गुदगुदी हो रही है…..आआआहह……लेकिन अच्छा भी लग रहा है..एयेए ऐसे ही करते
रहो…..ऊहह..
वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारी ले रही थी… मैं बिना रुके उस की बुर को चूस्ता रहा जिससे वो खुद को संभाल नही पाई और जल्दी ही अपने
पहले चरमोत्कर्ष पर पहुच गयी….उसके झड़ने के बाद भी मैं उसकी बुर और चुचि से खेलता रहा.
वो—….अब बस करो ना….मुझसे ये गुदगुदी बर्दास्त नही हो रही है अब…..
मैं —क्या कर रहा हू मैं ….?
वो—आप ना…..आप ना वो…मेरी चूस रहे हो…
मैं—क्या चूस रहा हू तेरी….?
वो—मुझे ना…शरम आती है…
मैं—अब मुझ से कैसी शरम…? चल बता ना ..की मैं तेरी क्या चूस रहा हू….?
वो—आपने मुझ को पूरी नंगी कर दिया है, तो क्या शरम नही आएगी मुझे…?
मैं—चल मैं भी नंगा हो जाता हूँ…ठीक है..
मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया….उस की नज़र जैसे ही लंड महाराज पर पड़ी तो उसकी आँखे चौड़ी हो गयी… उसने अपने मूह पर
हाथ रख लिया आश्चर्य चकित हो कर.
वो (हैरान)—हे भगवान
मैं —क्या हुआ…?
वो—ये..क्या है …?
मैं—ये खुजली विनाशक इंजेक्षन है …
वो—धत्त…कुछ भी बोलते हो…जैसे की मैं कुछ जानती ही नही
मैं—तो तू ही बता दे कि क्या है…?
वो—नही बताती...आप तो फुल बेशरम हो...मुझ से इतनी गंदी गंदी बाते करते हुए ज़रा भी लाज़ शरम नही है आपको..सही मे आप बहुत गंदे हो..
मैं—इसमे शरम कैसी... ?
मैने उस की चुचि को दबाते हुए अपने होठ उसके होंठो से चिपका दिए और उनका मधुर रस पीने लगा...वो भी इस समय चुदासी थी तो आँखे बंद कर के मेरा साथ देने लगी....मैने लंड को उसकी बुर पर टिका कर उसमे घिसने लगा .. अपनी बुर मे मेरे लंड को महसूस करते ही वो हड़बड़ा गयी.
वो (हड़बड़ा कर)—नहिी..भैया...अंदर नही घुसेड़ना...
मैं—मैं अंदर नही घुसेड रहा हूँ बहन...बस तेरी बुर मे थोड़ा सा लंड को घिस रहा हूँ खुजली मिटाने के लिए..
वो—धत्त..कितना गंदा बोलते हो आप....
मैं—इसमे गंदा क्या है...बर को बर और लंड को लंड ही कहूँगा ना....क्या ये तेरी बुर नही है... ?
वो—हां है, तो क्या इसका नाम लेना ज़रूरी है.... ?
टकराने लगा….मैने उसकी बुर को टटोल कर छेद मे बीच वाली उंगली खच से पेल दी जिससे चिहुक कर उसकी आँखे खुल गयी.
वो—आआअहह….….ये आपने मेरी सलवार क्यो उतार दी….?
मैं—कुछ नही…वो बस देखने के लिए की खुजली कहाँ हो रही है…?
बुर गीली होने के कारण उंगली अंदर पेलने मे ज़्यादा दिक्कत नही हो रही थी….हालाँकि वो कसी कसी अंदर बाहर हो रही थी उस की बुर
मे….उस को भी धीरे धीरे मज़ा आने लगा था.
वो—आआआअहह…..…..धीरीई…..आआअहह
कुछ समय तक बुर मे उंगली पेलने के बाद मैने उसकी सलवार चड्डी सहित नीचे कर दी…उसकी झान्टो वाली बुर खुल कर मेरे सामने आ गयी…मैने झुक कर उसकी बुर को चाट लिया जिससे उस को एक करेंट सा झटका लगा…वो काँप गयी..उसकी एक चुचि को पकड़ कर
दबाते हुए मैने बुर मे जीभ भिड़ा दी और उसकी बुर से निकलते शहद को चाट चाट कर पीने लगा.
वो—आआआआहह…..….बहुत गुदगुदी हो रही है…..आआआहह……लेकिन अच्छा भी लग रहा है..एयेए ऐसे ही करते
रहो…..ऊहह..
वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारी ले रही थी… मैं बिना रुके उस की बुर को चूस्ता रहा जिससे वो खुद को संभाल नही पाई और जल्दी ही अपने
पहले चरमोत्कर्ष पर पहुच गयी….उसके झड़ने के बाद भी मैं उसकी बुर और चुचि से खेलता रहा.
वो—….अब बस करो ना….मुझसे ये गुदगुदी बर्दास्त नही हो रही है अब…..
मैं —क्या कर रहा हू मैं ….?
वो—आप ना…..आप ना वो…मेरी चूस रहे हो…
मैं—क्या चूस रहा हू तेरी….?
वो—मुझे ना…शरम आती है…
मैं—अब मुझ से कैसी शरम…? चल बता ना ..की मैं तेरी क्या चूस रहा हू….?
वो—आपने मुझ को पूरी नंगी कर दिया है, तो क्या शरम नही आएगी मुझे…?
मैं—चल मैं भी नंगा हो जाता हूँ…ठीक है..
मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया….उस की नज़र जैसे ही लंड महाराज पर पड़ी तो उसकी आँखे चौड़ी हो गयी… उसने अपने मूह पर
हाथ रख लिया आश्चर्य चकित हो कर.
वो (हैरान)—हे भगवान
मैं —क्या हुआ…?
वो—ये..क्या है …?
मैं—ये खुजली विनाशक इंजेक्षन है …
वो—धत्त…कुछ भी बोलते हो…जैसे की मैं कुछ जानती ही नही
मैं—तो तू ही बता दे कि क्या है…?
वो—नही बताती...आप तो फुल बेशरम हो...मुझ से इतनी गंदी गंदी बाते करते हुए ज़रा भी लाज़ शरम नही है आपको..सही मे आप बहुत गंदे हो..
मैं—इसमे शरम कैसी... ?
मैने उस की चुचि को दबाते हुए अपने होठ उसके होंठो से चिपका दिए और उनका मधुर रस पीने लगा...वो भी इस समय चुदासी थी तो आँखे बंद कर के मेरा साथ देने लगी....मैने लंड को उसकी बुर पर टिका कर उसमे घिसने लगा .. अपनी बुर मे मेरे लंड को महसूस करते ही वो हड़बड़ा गयी.
वो (हड़बड़ा कर)—नहिी..भैया...अंदर नही घुसेड़ना...
मैं—मैं अंदर नही घुसेड रहा हूँ बहन...बस तेरी बुर मे थोड़ा सा लंड को घिस रहा हूँ खुजली मिटाने के लिए..
वो—धत्त..कितना गंदा बोलते हो आप....
मैं—इसमे गंदा क्या है...बर को बर और लंड को लंड ही कहूँगा ना....क्या ये तेरी बुर नही है... ?
वो—हां है, तो क्या इसका नाम लेना ज़रूरी है.... ?