S
StoryPublisher
Guest
जय हैरानी से सारी बातें सुन रहा था। कुणाल ने एक पेपर पेन लेकर जय को समझाना शुरू किया-
"अगर हम इस केस को आसानी से समझने की कोशिश करते हैं। राज और डॉली की शादी होने वाली थी। राज के सम्बन्ध ग़लती से ज्योति से बन गये जिसका फ़ायदा ज्योति राज को ब्लैकमेल करके उठाने लगी। यहाँ तक कि वो राज के पीछे केरल भी आ गयी। यहाँ पर फिर एक रात डॉली को इस सच्चाई के बारे में पता चल जाता है.. कैसे?" उसने जय की तरफ़ सवाल उछालते हुए पूछा।
जय-"ज़ाहिर है डॉली ने राज के मोबाइल में ज्योति और राज का वो अश्लील वीडियो देख लिया था!" कुणाल ने आगे की कड़ी जोड़ते हुए कहा-
"फिर ज्योति के बयान के मुताबिक़ डॉली राज का मोबाइल लेकर ज्योति के कमरे में जाती है जहाँ वो ज्योति को राज के मोबाइल में वो वीडियो दिखाती है। वहाँ दोनों बहनों के बीच कहा-सुनी होती है और ज्योति डॉली और राज की ज़िन्दगी से दूर जाने का फ़ैसला कर लेती है। वो डॉली को वहीं उसी कमरे में यानी के रूम नंबर 224 में छोड़कर जाती है!" जय ने कुणाल को बीच में टोकते हुए पूछा-
"हाँ.. इसमें नयी बात क्या है?"
कुणाल- "अगर ज्योति की कही हर बात सही है तो इसका मतलब राज का मोबाइल वहीं उसी कमरे में होना चाहिए था, यानी के रूम नंबर 224 में?
जय- "हाँ!"
कुणाल- "पर पुलिस को राज का मोबाइल वहाँ नहीं मिला। वो मिला उसके कमरे में यानी रूम नंबर 331 में। कैसे? और इस बात का ज़िक्र राज ने अपने बयान में नहीं किया। यहाँ तक कि इस पूरे घटना क्रम में राज ने दो मर्तबा रागिनी दुबे से बात की पर उसने
उस बात का भी ज़िक्र नहीं किया.. क्यों?" जय अब कुणाल की बातें समझ रहा था। शायद उसके दिमाग़ में इन सवालों के जवाब भी रूप लेने लगे थे।
"कुणाल जी आपके इन सभी.. 'क्यों'..के जवाब मैं निकल लूँगा बस आप मुझ पर छोड़ दीजिये!" कहकर वो निकल गया। जय ने तो कुणाल के घर से नीचे उतरने के लिए लिफ़्ट का भी इंतज़ार नहीं किया। अपने सर पर हैट पहनता हुआ वो सीधा अपनी जीप में जा बैठा। उसे अब हॉस्पिटल पहुँचने की जल्दी थी। जय जानता था अभी खेल ख़त्म नहीं हुआ था। अभी तो कहानी में और भी मोड़ आने बाक़ी थे और अब बारी थी राज के साथ सख़्ती से पेश आने की।
जय ने हॉस्पिटल पहुँचकर आव देखा न ताव राज के कमरे में जाकर अंदर से दरवाज़ा बंद किया और राज को बैड पर झटके से बिठा दिया। राज हैरान था कि बिना कोई बात किये जय उसके साथ ऐसा क्यों कर रहा है।
राज ने रोते हुए पूछा- "क्यों कर रहे हैं आप ऐसा, मैं ज़ख़्मी हूँ मर जाऊँगा!"
जय- "मर तो तू पहले ही गया था, हमने ही तुझे बचाया है और अब अगर तू मर भी गया तो मुझे कोई दुःख नहीं होगा!" कहते हुए वो राज की बाज़ू से डिरिप्स निकलने शुरू कर दिए। राज ने जय का हाथ पकड़ते हुए पूछा-
"क्यों कर रहे हैं आप ये?"
जय- "झूठ बोला तूने!!.. तूने रागिनी दुबे के बारे में कुछ नहीं बताया। जबकि उस रात दो बार तेरी रागिनी दुबे से बात हुई थी.." राज के बाल खींचते हुए क्रोध में जय ने कहा।
राज ने रोते हुए कहा- "हाँ रागिनी मेरी अच्छी दोस्त है, पर उसका इस केस से कोई लेना देना नहीं है!"
"उसका इस केस से लेना-देना है या नहीं वो हम तय करेंगे। तेरी रागिनी दुबे से कितनी गहरी दोस्ती है? मुझे सारी कहानी जाननी है एकदम सच-सच। नहीं तो २ मिनट बाद मैं एक रिपोर्ट बनाऊँगा कि राज शर्मा नाम के लड़के ने पहले अपनी पत्नी का क़त्ल किया और फिर हॉस्पिटल में उसने दम तोड़ दिया!" कहते ही उसने राज के ज़ख़्म को ज़ोर से दबा दिया। दर्द के मारे राज ने चिलाते हुए कहा-
"बताता हूँ सब सच बताता हूँ!" जय ने अपने मोबाइल का रिकॉर्डर ऑन कर दिया और राज ने बताना शुरू किया कि वो और रागिनी बचपन के दोस्त हैं। मेरठ में दोनों के पिता एक ही ऑफ़िस में काम करते थे और एक ही मोहल्ले में रहते थे। बचपन से साथ बड़े हुए। फिर बाहरवीं के बाद मैं कॉलेज चला गया और वो लन्दन चली गयी पढ़ने। तीन
साल बाद वो वापस आयी थी। मुझे जब पता चला तो मैं उससे मिलने उसके घर गया। कहते हुए वो जय को अतीत में ले गया-
"उस दिन दोपहर की गर्मी थी, मैं रागिनी से मिलने के लिए बहुत उतावला हो रहा था। बचपन की दोस्ती थी हमारी। मैं बेसब्री से उसकी डोर बेल बजा रहा था कि अचानक रागिनी ने जब दरवाज़ा खोला तो मैं उसे देखकर दंग रह गया। वो अब पहले जैसी बच्ची नहीं रही थी। तीन साल में काफ़ी बदल गयी थी। वो बचपन को पीछे छोड़ जवानी में क़दम रख चुकी थी। उसका गठीला बदन इस बात का प्रमाण था। वो तो मुझे देखकर चहक उठी और मेरे गले लग गयी और मुझे कसकर जकड़ लिया। उसका स्पर्श पाते ही मैंने भी पल भर में अपने बचपन को अलविदा कह दिया था। वो बहुत चहक रही थी आख़िर ३ साल बाद हम मिल रहे थे। वो मेरे लिए लन्दन से टीशर्ट लेकर आयी थी और बिना परवाह किये उसने मेरी टी शर्ट उतार दी और उसकी वाली टी शर्ट पहनने की ज़िद करने लगी!"
अब जय राज की कहानी की कल्पना कर रहा था मानो सब कुछ उसका सामने किसी फ़िल्म के मंज़र की तरह घूम रहा हो। राज का ध्यान टी शर्ट में कम रागिनी के नये नवेले यौवन में ज़्यादा था। रागिनी ने ये महसूस कर लिया था। उसने झेंपते हुए पूछा-
"ऐसे क्या देख रहे हो राज? टी शर्ट ट्राई करो न!" राज ने रागिनी के नजदीक आते हुए कहा-
"एक साथ करते है ना..." इतना सुन रागिनी और झेंप गयी।
"क्या मतलब है तुम्हारा?"
राज- "बचपन से लेकर आज तक जो भी किया है ना? तो अब टी शर्ट भी साथ ही बदलेंगे।"
रागिनी ने वहाँ पड़े कपड़े समेटते हुए कहा, "पहले बात और थी!"
राज- "तो अब क्या बदल गया है? जो इन तीन सालों में तुम्हारे साथ बदला है वही बदलाव तो मुझमे भी आये हैं ना!" रागिनी राज की इस बात का जवाब नहीं देना चाहती थी।
"राज जल्दी से ये टी-शर्ट ट्राई करो फिर ये परफ़्यूम भी तुम्हारे लिए है.." कहते हुए उसने एक परफ़्यूम की बोतल राज के आगे कर दी थी। राज ने रागिनी की आँखों में ऑंखें डालते हुए पहले परफ़्यूम ख़ुद पर छिड़क लिया और फिर रागिनी पर छिड़कना शुरू कर दिया जब तक बोतल से सारा परफ़्यूम ख़त्म नहीं हो गया। राज हैरान था कि रागिनी ने कुछ नहीं कहा वो बस अब ऊपर से नीचे तक महक रही थी।
रागिनी- "क्या चाहते हो?" राज ने हिम्मत करते हुए कहा, "तुम्हें छूना.." रागिनी ने अपना हाथ बड़ा दिया, "लो छू लो.." राज ने उसका हाथ नीचे करते हुए एक लम्बी आह भरते हुए कहा, "नहीं! पूरा का पूरा, जैसे तुमने मेरी टी शर्ट उतारी, मैं भी तुम्हारी ..." कहते हुए रुक गया, उसे लगा शायद ये बात रागिनी को अच्छी नहीं लगेगी। पर उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं था रागिनी अपने दोनों हाथ ऊपर करके, नज़रें झुकाकर खड़ी हो गयी। मानो वो राज को आमंत्रण दे रही थी और राज ने मौक़े का फ़ायदा उठाकर रागिनी की टी शर्ट उसके सर के ऊपर से धीरे-धीरे खिसकानी शुरू कर दी। जैसे-जैसे रागिनी की टी शर्ट ऊपर की और खिसक रही थी, राज के सामने रागिनी की सुन्दरता एक नये स्वरूप में उभर रही थी। उसकी कमर पहले से काफ़ी पतली थी। उसकी नाभी पर एक चाँदी का छल्ला टंगा हुआ था। जैसे ही उसने रागिनी की टी शर्ट और ऊपर खिसकाई उसके गोर बदन की बनावट राज को और आकर्षित करने लगी। रागिनी ने जवानी में क्या क़दम रखा, उसके बदन की बनावट ही बदल गयी थी। उसका हर अंग राज को उसे छूने का आमंत्रण दे रहा था। उसने रागिनी की टी शर्ट उतार कर फेंक दी। वो अब रागिनी के बदन के हर उतार-चढ़ाव का स्पर्श लेना चाहता था। वो अभी सोच हो रहा था कि रागिनी ने उसके दिमाग़ को पढ़ते हुए अपने बदन से हर छोटे-बड़े वस्त्र को आज़ाद कर दिया। रागिनी भी भी किसी चित्रकार की पेंटिंग की तरह हाथ ऊपर करके एक पोज़ बनाकर खड़ी थी। राज अब रागिनी की सुंदरता देखकर मुग्ध था और रागिनी नज़रें झुकाए राज को हर इजाज़त दे चुकी थी। राज के लिए उस वक़्त ये नया अनुभव था। उसके लिए रागिनी को छूना एक नयी खोज जैसे था। राज की साँसे अब तीव्र गति से दौड़ रही थीं। उसने देखा कि रागिनी के बदन उसके वक्षों से होकर फिर कमर और फिर कमर के नीचे तक एक लहराता हुआ आकर बना रहा था। उसकी नाभी पर एक छल्ला लटक रहा था। जो रागिनी ने गुदवाया था। उसने किसी भी लड़की के बदन को इतने क़रीब से नहीं देखा था। उसने पाया कि उसने अंदर एक अजीब-सी ऊर्जा का संचार होने लगा था। उसका अंग-अंग रागिनी के बदन को छूने के लिए मचल रहा था। उसने अपने हाथ बढ़ाकर रागिनी की कमर को क्या छुआ कि रागिनी भी सिहर उठी। राज के लिए अब हर पल एक नया अनुभव था। वो रागिनी के बदन को जगह-जगह से छूकर ऐसे महसूस कर रहा था जैसे रागिनी कोई अजूबा हो। अपने बदन पर राज के हाथों की छूवन को महसूस कर अब तो रागिनी भी नहीं चाहती थी कि राज और विलम्ब करे। उसने ख़ुद ही राज के दोनों हाथ अपने तने हुए वक्षों पर रख दिए। राज के लिए तो रागिनी इस क्रीड़ा में उसकी अध्यापिका बनी हुई थी। राज ने महसूस किया कि उसका लिंग अब उसके बस में नहीं है, वो तो बस आज़ाद होकर अपनी मंज़िल को पा लेना चाहता था। जैसे कोई पालतू टॉमी अपने मालिक के हाथ से बंधे पट्टे से छूटने के
लिए छटपटा रहा हो। पर इस टॉमी को जाना कहाँ था ये राज को नहीं मालूम था। तब रागिनी ने धीरे से राज को अपने ऊपर खींच लिया और फिर राज ने अपने टॉमी को आज़ाद छोड़ दिया और टॉमी ख़ुद ही अपना रास्ता ढूँढ़ने लगा। रागिनी ने भी टाँगे फैलाकर राज का साथ दिया। राज अब अपने और रागिनी के गुप्त अंगों के बीच एक तरल पदार्थ को महसूस कर रहा था और फिर थोड़ी सी कोशिश के बाद राज रागिनी के भीतर एक ही झटके से समा गया। इसके बाद तो राज को किसी अध्यापक या शिक्षा की ज़रूरत नहीं पड़ी। सबकुछ अपने आप ही होता चला गया। एक मधुर अनुभव राज को स्वर्ग की सैर पर ले गया और बचपन का रिश्ता एक जवान रिश्ते में बदल गया।
"अगर हम इस केस को आसानी से समझने की कोशिश करते हैं। राज और डॉली की शादी होने वाली थी। राज के सम्बन्ध ग़लती से ज्योति से बन गये जिसका फ़ायदा ज्योति राज को ब्लैकमेल करके उठाने लगी। यहाँ तक कि वो राज के पीछे केरल भी आ गयी। यहाँ पर फिर एक रात डॉली को इस सच्चाई के बारे में पता चल जाता है.. कैसे?" उसने जय की तरफ़ सवाल उछालते हुए पूछा।
जय-"ज़ाहिर है डॉली ने राज के मोबाइल में ज्योति और राज का वो अश्लील वीडियो देख लिया था!" कुणाल ने आगे की कड़ी जोड़ते हुए कहा-
"फिर ज्योति के बयान के मुताबिक़ डॉली राज का मोबाइल लेकर ज्योति के कमरे में जाती है जहाँ वो ज्योति को राज के मोबाइल में वो वीडियो दिखाती है। वहाँ दोनों बहनों के बीच कहा-सुनी होती है और ज्योति डॉली और राज की ज़िन्दगी से दूर जाने का फ़ैसला कर लेती है। वो डॉली को वहीं उसी कमरे में यानी के रूम नंबर 224 में छोड़कर जाती है!" जय ने कुणाल को बीच में टोकते हुए पूछा-
"हाँ.. इसमें नयी बात क्या है?"
कुणाल- "अगर ज्योति की कही हर बात सही है तो इसका मतलब राज का मोबाइल वहीं उसी कमरे में होना चाहिए था, यानी के रूम नंबर 224 में?
जय- "हाँ!"
कुणाल- "पर पुलिस को राज का मोबाइल वहाँ नहीं मिला। वो मिला उसके कमरे में यानी रूम नंबर 331 में। कैसे? और इस बात का ज़िक्र राज ने अपने बयान में नहीं किया। यहाँ तक कि इस पूरे घटना क्रम में राज ने दो मर्तबा रागिनी दुबे से बात की पर उसने
उस बात का भी ज़िक्र नहीं किया.. क्यों?" जय अब कुणाल की बातें समझ रहा था। शायद उसके दिमाग़ में इन सवालों के जवाब भी रूप लेने लगे थे।
"कुणाल जी आपके इन सभी.. 'क्यों'..के जवाब मैं निकल लूँगा बस आप मुझ पर छोड़ दीजिये!" कहकर वो निकल गया। जय ने तो कुणाल के घर से नीचे उतरने के लिए लिफ़्ट का भी इंतज़ार नहीं किया। अपने सर पर हैट पहनता हुआ वो सीधा अपनी जीप में जा बैठा। उसे अब हॉस्पिटल पहुँचने की जल्दी थी। जय जानता था अभी खेल ख़त्म नहीं हुआ था। अभी तो कहानी में और भी मोड़ आने बाक़ी थे और अब बारी थी राज के साथ सख़्ती से पेश आने की।
जय ने हॉस्पिटल पहुँचकर आव देखा न ताव राज के कमरे में जाकर अंदर से दरवाज़ा बंद किया और राज को बैड पर झटके से बिठा दिया। राज हैरान था कि बिना कोई बात किये जय उसके साथ ऐसा क्यों कर रहा है।
राज ने रोते हुए पूछा- "क्यों कर रहे हैं आप ऐसा, मैं ज़ख़्मी हूँ मर जाऊँगा!"
जय- "मर तो तू पहले ही गया था, हमने ही तुझे बचाया है और अब अगर तू मर भी गया तो मुझे कोई दुःख नहीं होगा!" कहते हुए वो राज की बाज़ू से डिरिप्स निकलने शुरू कर दिए। राज ने जय का हाथ पकड़ते हुए पूछा-
"क्यों कर रहे हैं आप ये?"
जय- "झूठ बोला तूने!!.. तूने रागिनी दुबे के बारे में कुछ नहीं बताया। जबकि उस रात दो बार तेरी रागिनी दुबे से बात हुई थी.." राज के बाल खींचते हुए क्रोध में जय ने कहा।
राज ने रोते हुए कहा- "हाँ रागिनी मेरी अच्छी दोस्त है, पर उसका इस केस से कोई लेना देना नहीं है!"
"उसका इस केस से लेना-देना है या नहीं वो हम तय करेंगे। तेरी रागिनी दुबे से कितनी गहरी दोस्ती है? मुझे सारी कहानी जाननी है एकदम सच-सच। नहीं तो २ मिनट बाद मैं एक रिपोर्ट बनाऊँगा कि राज शर्मा नाम के लड़के ने पहले अपनी पत्नी का क़त्ल किया और फिर हॉस्पिटल में उसने दम तोड़ दिया!" कहते ही उसने राज के ज़ख़्म को ज़ोर से दबा दिया। दर्द के मारे राज ने चिलाते हुए कहा-
"बताता हूँ सब सच बताता हूँ!" जय ने अपने मोबाइल का रिकॉर्डर ऑन कर दिया और राज ने बताना शुरू किया कि वो और रागिनी बचपन के दोस्त हैं। मेरठ में दोनों के पिता एक ही ऑफ़िस में काम करते थे और एक ही मोहल्ले में रहते थे। बचपन से साथ बड़े हुए। फिर बाहरवीं के बाद मैं कॉलेज चला गया और वो लन्दन चली गयी पढ़ने। तीन
साल बाद वो वापस आयी थी। मुझे जब पता चला तो मैं उससे मिलने उसके घर गया। कहते हुए वो जय को अतीत में ले गया-
"उस दिन दोपहर की गर्मी थी, मैं रागिनी से मिलने के लिए बहुत उतावला हो रहा था। बचपन की दोस्ती थी हमारी। मैं बेसब्री से उसकी डोर बेल बजा रहा था कि अचानक रागिनी ने जब दरवाज़ा खोला तो मैं उसे देखकर दंग रह गया। वो अब पहले जैसी बच्ची नहीं रही थी। तीन साल में काफ़ी बदल गयी थी। वो बचपन को पीछे छोड़ जवानी में क़दम रख चुकी थी। उसका गठीला बदन इस बात का प्रमाण था। वो तो मुझे देखकर चहक उठी और मेरे गले लग गयी और मुझे कसकर जकड़ लिया। उसका स्पर्श पाते ही मैंने भी पल भर में अपने बचपन को अलविदा कह दिया था। वो बहुत चहक रही थी आख़िर ३ साल बाद हम मिल रहे थे। वो मेरे लिए लन्दन से टीशर्ट लेकर आयी थी और बिना परवाह किये उसने मेरी टी शर्ट उतार दी और उसकी वाली टी शर्ट पहनने की ज़िद करने लगी!"
अब जय राज की कहानी की कल्पना कर रहा था मानो सब कुछ उसका सामने किसी फ़िल्म के मंज़र की तरह घूम रहा हो। राज का ध्यान टी शर्ट में कम रागिनी के नये नवेले यौवन में ज़्यादा था। रागिनी ने ये महसूस कर लिया था। उसने झेंपते हुए पूछा-
"ऐसे क्या देख रहे हो राज? टी शर्ट ट्राई करो न!" राज ने रागिनी के नजदीक आते हुए कहा-
"एक साथ करते है ना..." इतना सुन रागिनी और झेंप गयी।
"क्या मतलब है तुम्हारा?"
राज- "बचपन से लेकर आज तक जो भी किया है ना? तो अब टी शर्ट भी साथ ही बदलेंगे।"
रागिनी ने वहाँ पड़े कपड़े समेटते हुए कहा, "पहले बात और थी!"
राज- "तो अब क्या बदल गया है? जो इन तीन सालों में तुम्हारे साथ बदला है वही बदलाव तो मुझमे भी आये हैं ना!" रागिनी राज की इस बात का जवाब नहीं देना चाहती थी।
"राज जल्दी से ये टी-शर्ट ट्राई करो फिर ये परफ़्यूम भी तुम्हारे लिए है.." कहते हुए उसने एक परफ़्यूम की बोतल राज के आगे कर दी थी। राज ने रागिनी की आँखों में ऑंखें डालते हुए पहले परफ़्यूम ख़ुद पर छिड़क लिया और फिर रागिनी पर छिड़कना शुरू कर दिया जब तक बोतल से सारा परफ़्यूम ख़त्म नहीं हो गया। राज हैरान था कि रागिनी ने कुछ नहीं कहा वो बस अब ऊपर से नीचे तक महक रही थी।
रागिनी- "क्या चाहते हो?" राज ने हिम्मत करते हुए कहा, "तुम्हें छूना.." रागिनी ने अपना हाथ बड़ा दिया, "लो छू लो.." राज ने उसका हाथ नीचे करते हुए एक लम्बी आह भरते हुए कहा, "नहीं! पूरा का पूरा, जैसे तुमने मेरी टी शर्ट उतारी, मैं भी तुम्हारी ..." कहते हुए रुक गया, उसे लगा शायद ये बात रागिनी को अच्छी नहीं लगेगी। पर उसकी हैरानी का ठिकाना नहीं था रागिनी अपने दोनों हाथ ऊपर करके, नज़रें झुकाकर खड़ी हो गयी। मानो वो राज को आमंत्रण दे रही थी और राज ने मौक़े का फ़ायदा उठाकर रागिनी की टी शर्ट उसके सर के ऊपर से धीरे-धीरे खिसकानी शुरू कर दी। जैसे-जैसे रागिनी की टी शर्ट ऊपर की और खिसक रही थी, राज के सामने रागिनी की सुन्दरता एक नये स्वरूप में उभर रही थी। उसकी कमर पहले से काफ़ी पतली थी। उसकी नाभी पर एक चाँदी का छल्ला टंगा हुआ था। जैसे ही उसने रागिनी की टी शर्ट और ऊपर खिसकाई उसके गोर बदन की बनावट राज को और आकर्षित करने लगी। रागिनी ने जवानी में क्या क़दम रखा, उसके बदन की बनावट ही बदल गयी थी। उसका हर अंग राज को उसे छूने का आमंत्रण दे रहा था। उसने रागिनी की टी शर्ट उतार कर फेंक दी। वो अब रागिनी के बदन के हर उतार-चढ़ाव का स्पर्श लेना चाहता था। वो अभी सोच हो रहा था कि रागिनी ने उसके दिमाग़ को पढ़ते हुए अपने बदन से हर छोटे-बड़े वस्त्र को आज़ाद कर दिया। रागिनी भी भी किसी चित्रकार की पेंटिंग की तरह हाथ ऊपर करके एक पोज़ बनाकर खड़ी थी। राज अब रागिनी की सुंदरता देखकर मुग्ध था और रागिनी नज़रें झुकाए राज को हर इजाज़त दे चुकी थी। राज के लिए उस वक़्त ये नया अनुभव था। उसके लिए रागिनी को छूना एक नयी खोज जैसे था। राज की साँसे अब तीव्र गति से दौड़ रही थीं। उसने देखा कि रागिनी के बदन उसके वक्षों से होकर फिर कमर और फिर कमर के नीचे तक एक लहराता हुआ आकर बना रहा था। उसकी नाभी पर एक छल्ला लटक रहा था। जो रागिनी ने गुदवाया था। उसने किसी भी लड़की के बदन को इतने क़रीब से नहीं देखा था। उसने पाया कि उसने अंदर एक अजीब-सी ऊर्जा का संचार होने लगा था। उसका अंग-अंग रागिनी के बदन को छूने के लिए मचल रहा था। उसने अपने हाथ बढ़ाकर रागिनी की कमर को क्या छुआ कि रागिनी भी सिहर उठी। राज के लिए अब हर पल एक नया अनुभव था। वो रागिनी के बदन को जगह-जगह से छूकर ऐसे महसूस कर रहा था जैसे रागिनी कोई अजूबा हो। अपने बदन पर राज के हाथों की छूवन को महसूस कर अब तो रागिनी भी नहीं चाहती थी कि राज और विलम्ब करे। उसने ख़ुद ही राज के दोनों हाथ अपने तने हुए वक्षों पर रख दिए। राज के लिए तो रागिनी इस क्रीड़ा में उसकी अध्यापिका बनी हुई थी। राज ने महसूस किया कि उसका लिंग अब उसके बस में नहीं है, वो तो बस आज़ाद होकर अपनी मंज़िल को पा लेना चाहता था। जैसे कोई पालतू टॉमी अपने मालिक के हाथ से बंधे पट्टे से छूटने के
लिए छटपटा रहा हो। पर इस टॉमी को जाना कहाँ था ये राज को नहीं मालूम था। तब रागिनी ने धीरे से राज को अपने ऊपर खींच लिया और फिर राज ने अपने टॉमी को आज़ाद छोड़ दिया और टॉमी ख़ुद ही अपना रास्ता ढूँढ़ने लगा। रागिनी ने भी टाँगे फैलाकर राज का साथ दिया। राज अब अपने और रागिनी के गुप्त अंगों के बीच एक तरल पदार्थ को महसूस कर रहा था और फिर थोड़ी सी कोशिश के बाद राज रागिनी के भीतर एक ही झटके से समा गया। इसके बाद तो राज को किसी अध्यापक या शिक्षा की ज़रूरत नहीं पड़ी। सबकुछ अपने आप ही होता चला गया। एक मधुर अनुभव राज को स्वर्ग की सैर पर ले गया और बचपन का रिश्ता एक जवान रिश्ते में बदल गया।