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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

चार हसीन मुसीबतें सीरीज़

यह कहानी हैं एक लड़के अजय की, 26-27 साल की उमर हैं. आगे की कहानी अजय की ज़ुबानी सुनिए.

मैं अजय, 2 साल पहले ही अर्चना से शादी हुई हैं. अर्चना मुझसे 1-2 साल छोटी हैं. यह मेरे और मेरी बीवी की कहानी हैं पर कहानी की शुरुआत अपने ससुर रमाकांत जी से करता हूँ.

रमाकांत जी एक बहुत ही धार्मिक आदमी हैं. सरकारी नौकरी मे हैं. मगर वो पहले इतना धार्मिक नही थे. सुना हैं की वो धार्मिक तब बने जब उनको एक के बाद एक दो बेटियाँ पैदा हो गयी.

कइयो की तरह उनकी भी तमन्ना थी की उनको भी एक लड़का हो. जब दूसरा बच्चा भी लड़की निकली तो अचानक से उपर वाले मे आस्था कुच्छ ज़्यादा ही बढ़ गयी. अलग अलग धार्मिक स्थानो पर माथा टेकने लगे इस उम्मीद मे की अगली बार लड़का ही हो.

रमाकांत की बीवी लड़का लड़की मे कोई फ़र्क नही करती थी. वो दो लड़कियो को पैदा करने के बाद थोड़ा बीमार रहने लगी थी और थक चुकी थी और आगे फिर से मा नही बनना चाहती थी.

मगर रमाकांत जी की ज़िद थी की वो एक बार फिर से लड़के का ट्राइ करे. रमाकांत की बीवी को बात माननी पड़ी. मगर तबीयत खराब रहती थी इसलिए कुच्छ साल वेट करना पड़ा.

मेरे पिताजी रमाकांत जी के अच्छे दोस्त थे. मेरे पिता का अच्छा ख़ासा खानदानी कारोबार था. मेरी मम्मी भी रमाकांत जी की बीवी की पक्की सहेली थी.

जब रमाकांत जी को दो लड़किया हो गयी तो नौकरी पेशा रमाकांत जी को भी चिंता हुई और मेरे पिता जी से वादा ले लिया की वो अपने दोनो बेटों की शादी उनकी दोनो बेटियो से करेंगे.

मेरा घर मे मम्मी पापा के अलावा एक बड़ा भाई विनोद भी हैं. इस तरह बचपन मे ही मेरे बड़े भाई और मेरी शादी के लिए लड़किया पसंद कर ली गयी.

रमाकांत जी की बड़ी बेटी वंदना की शादी मेरे बड़े भाई विनोद के साथ और मैं अजय, मेरी शादी रमाकांत की दूसरी बेटी अर्चना से पक्की हो गयी. मगर यह बात तब सिर्फ़ रमाकांत जी और मेरे पिता को ही पता थी.

रमाकांत जी की थोड़ी टेन्षन कम हुई की उनकी दोनो बेटियो की शादी का इंतज़ाम उन्होने अपने ही दोस्त के घर मे कर लिया हैं. जब रमाकांत जी की बीवी की तबीयत थोड़ी सुधरी तो रमाकांत जी ने अपने तीसरे बच्चे की तैयारी की.

रमाकांत जी की बीवी की तबीयत बिगड़ती गयी और बच्चा पैदा करते हुए उनकी मरने जैसी हालत हो गयी. रमाकांत जी को तीसरी बार भी लड़की ही पैदा हुई.

रमाकांत जी की बीवी ने अपनी सहेली यानी मेरी मेरी मम्मी को अपने पास बुलाया और कहा की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले ले क्यू की मेरी मम्मी को भी एक बेटी चाहिए थी जब की मेरे पापा तीसरी संतान नही चाहते थे.

मेरी मम्मी ने देखा की उस वक़्त रमाकांत जी की बीवी की हालत अच्छी नही हैं इसलिए यूही उनसे झूठा वादा कर दिया की वो उनकी तीसरी बेटी को गोद ले लेगी.

मम्मी को नही पता था की रमाकांत जी की बीवी असली मे चल बसेगी. एक दूध मूही बच्ची को छोड़ कर उसकी मा चली गयी. मेरी मा को सदमा लगा. उन्होने एक मरते इंसान से एक वादा किया था.

मेरी मम्मी ने गोद वाली बात मेरे पापा को बताई. पापा ने उनको अपना खुद का दिया वादा बताया की उन्होने दोनो बेटों की शादी का वादा पहले ही रमाकांत जी से कर दिया हैं.

पर मेरी मम्मी अपना वादा नही तोड़ना चाहती थी. वैसे भी नवजात बच्ची को पालने वाली मा घर मे नही थी. मा ने उस बच्ची को गोद ले लिया.

मुझे याद हैं तब मे 4 साल का था और मेरी मम्मी एक छोटी बच्च्ची को गोद मे लेकर घर आई और मुझे और मेरे भाई विनोद को कहा की वो हमारी बहन हैं.

उस उम्र मे हमे तो यही लगा की वो हमारी रियल बहन हैं और मा ने उसको जनम दिया हैं. अपनी दोनो बड़ी बहनो वंदना और अर्चना की तरह तीसरी बच्ची का नाम पूजा रखा गया. तीनो बहनो के नाम का एक ही मीनिंग था.

मैं और मेरे बड़े भाई विनोद को छोटी बहन पूजा मिल गयी. दूसरी तरफ हम दोनो की होने वाली बीविया वंदना और अर्चना रमाकांत जी के घर मे बड़ी हो रही थी.

हम पाँचो बच्चे इस बात से अंजान थे की पूजा के असली मा बाप कौन हैं. जो भी था रमाकांत जी की एक चिंता और कम हो गयी.

अपना बेटा पैदा करने की चाह रमाकांत जी मे अभी भी ज़िंदा थी. उन्होने एक विधवा औरत से शादी कर ली ताकि उनको एक बेटा हो जाए.

वंदना और अर्चना को एक सौतेली मा मिल गयी. मगर फिल्मी सौतेली मा की तरह वो उन पर ज़ुल्म नही करती थी. खैर रमाकांत जी फिर से बाप बनने वाले थे.

रमाकांत जी की प्रार्थना इस बार भी काम नही आई और उनके घर फिर एक बेटी पैदा हुई. रमाकांत जी टूट गये और फ़ैसला किया की अब और कोई बच्चा पैदा नही करेंगे.

रमाकांत जी ने अपनी छोटी बेटी का नाम श्रद्धा रखा. हालाँकि दुनिया की नज़रो मे श्रद्धा उनकी तीसरी बेटी थी क्यू की तीसरी बेटी पूजा को तो वो मेरे मम्मी पापा को गोद दे चुके थे मगर उनकी चार बेटियाँ थी वंदना, अर्चना, पूजा और श्रद्धा.

यह तो था हम दोनो परिवार वालो का इंट्रोडक्षन और हिस्टरी. एक तरफ मेरे मम्मी पापा के तीन बच्चे, विनोद, अजय और गोद ली बेटी पूजा. तो दूसरी तरफ रमाकांत जी के साथ उनकी दूसरी पत्नी और तीन बेटियाँ वंदना, अर्चना और श्रद्धा.
 
रमाकांत जी की दोनो बड़ी बेटियाँ वंदना और अर्चना समझदार निकली और अपने पैरो पर खड़ी हो गयी. मेरी होने वाली बीवी अर्चना ने क्ब किया और वकील बनने के लिए प्रॅक्टीस शुरू कर दी.

बड़ी बेटी वंदना ने म्बबस किया और रेसिडेंट डॉक्टर थी. दूसरी तरफ मेरे बड़े भाई विनोद और मैने पिताजी का कारोबार जाय्न कर लिया था. पढ़ाई मे हमे ज़्यादा कुच्छ करना नही था.

मेरे घर मे पढ़ाई का इतना माहौल नही था और इसका असर हमारी छोटी बहन पूजा पर भी पड़ा. पूजा की असली बड़ी बहनो ने तो खूब पढ़ाई की पर पूजा हमारे साथ रह कर पढ़ाई मे थोड़ी फिसड्डी रह गयी.

पूजा के शौक थे सेल्फिे लेना, घूमना फिरना, सज सवर कर रहना और मौज मस्ती करना. पूजा दिखने मे बहुत खूबसूरत थी और फिल्म्स देखने का शौक था और वो हेरोयिन भी बनना चाहती थी, हालाँकि उसको आक्टिंग आती नही थी.

रमाकांत की सबसे छोटी लड़की श्रद्धा भी उनके घर मे अपवाद(सबसे अलग) थी. दोनो बड़ी बहनो की विपरीत वो थोड़ी पढ़ाई मे कमजोर थी. मगर वो ज्योतिषी बनना चाहती थी जो वो आगे जाकर बन भी गयी.

श्रद्धा अपने पिता की तरह बहुत ही धार्मिक थी, और बहुत सात्विक थी. लड़को से नफ़रत करती और दुनिया उसके लिए मो माया थी. वो ज़िंदगी भर शादी भी नही करना चाहती थी.

जैसा की मेरे पिता ने वादा किया था मेरे बड़े भाई और मेरी शादी एक ही दिन वंदना और अर्चना से कर दी गयी. एक ही दिन विनोद वेड्स वंदना और अजय वेड्स अर्चना का कार्ड छप गया.

हालाँकि मेरी छोटी बहन पूजा को एक दिन शादी करके दूसरे घर जाना था पर उसको मिला कर देखा जाए तो रमाकांत जी की तीन बेटियाँ अभी हमारे घर का हिस्सा थी.

मेरी बीवी अर्चना वकील थी, तो बहुत तेज तर्रार थी. घर मे कोई बहस हो तो उसको हराना नामुमकिन था. झूठ नही बोलूँगा पर मैं भी हमेशा अर्चना से दबा दबा ही रहता था.

एक ही समय होता हैं जब मैं अपनी बीवी अर्चना को दबाता हूँ और वो हैं जब मैं उसके उपर चढ़ कर उसकी चुदाई करता हूँ. वैसे अधिकतर वो ही मुझ पर चढ़ मेरी चुदाई करती हैं, क्यू की वो मुझे दबाना पसंद करती हैं.

मेरी भाभी डॉक्टर वंदना थोड़ी शांत किस्म की हैं. विनोद भाय्या वंदना भाभी को थोड़ा दबा कर रखते थे. वंदना भाभी बहुत समझदारी की बातें करती हैं. मगर वंदना भाभी मेरे साथ बहुत कूल हैं.

इसी तरह मेरी बीवी अर्चना भी मेरे बड़े भाई विनोद को रेस्पेक्ट करती हैं. या यू कहे की रेस्पेक्ट कम और मज़ा मस्ती ज़्यादा क्यू की मेरे बड़े भाई अर्चना के ज़िजज़ि भी हैं तो साली जीजा वाली मस्ती रहती हैं.

एक हरा भरा घर हैं तो मम्मी पापा भी खुश हैं. दोनो बहुए सेवा करती हैं. मेरी छोटी बहन पूजा जितनी काम चोर हैं, दोनो बहुए उतनी ही ज़्यादा काम करती हैं. अब तो पूजा और भी काम नही करती थी.

वंदना और अर्चना भी पूजा को ननंद ना मान कर अपनी छोटी बहन की तरह रखती, वैसे भी वो उनकी छोटी बहन ही थी.

मेरे और मेरी वाइफ अर्चना की सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी. मेरी जब भी चोदने की इक्षा होती तो वो तैयार रहती. कभी निराश नही किया बल्कि जितना चाहा उस से ज़्यादा ही मज़ा दिलाया.

मैं जब भी अर्चना को चुदाई का नया आसान बताता तो वो करने को मान जाती. मेरे कुच्छ दोस्त हैं जिनको हमेशा शिकायत रहती की उनकी बीविया इस मामले मे चूज़ी हैं, मगर मैं खुशकिस्मत था.

वैसे पूजा मेरी साली थी पर बचपन से हमेशा उसको छोटी बहन ही माना था. मेरी एक और साली थी, श्रद्धा. उसको लड़को से बहुत नफ़रत थी पर अगर किसी लड़के से वो सबसे ज़्यादा बात करती और भरोसा करती तो वो लड़का मैं ही था.

मुझे भी पता नही की उसकी मेरे से इतनी अच्छी क्यू बनती हैं. श्रद्धा मेरे बड़े भाई विनोद से भी इतनी बात नही करती.

एफेक्टिव्ली मेरे बड़े भाई विनोद की एक ही साली थी अर्चना जो की मेरी बीवी भी हैं, और मेरी एक ही साली थी श्रद्धा.

हम लोगो को पिक्निक जाने का बहुत शौक था. मम्मी पापा तो अधिकतर नही आते क्यू की वो हम यंग लोगो को घूमने देते. हम लोग श्रद्धा को भी साथ ले लेते क्यू की वो अपनी बहनो की शादी के बाद अकेले पड़ गयी थी.

शारढा का 18त ब्रिथड़े था तब हम सबको पेरेंट्स ने बता दिया था की पूजा को गोद लिया गया हैं पर हमको इस से कोई फ़र्क नही पड़ा और पुराने रिश्ते बरकरार थे.

हम दोनो भाई और वो चारो बहने खूब मज़ाक मस्ती करते और घूमते फिरते. शादी के बाद दो साल कैसे गुज़रे पता ही नही चला.

मम्मी पापा की नज़रो मे उनकी दोनो बहू की वॅल्यू हम दोनो भाइयो से भी ज़्यादा थी. पूजा की शादी की ज़िम्मेदारी भी वंदना भाभी और अर्चना को दी गयी.

अर्चना ने अपने ही किसी वकील साथी पीयूष के साथ पूजा की शादी की बात चलाई. लड़का सबको पसंद आया और पूजा की शादी कर दी गयी.

पूजा की विदाई के समय वंदना और अर्चना से ज़्यादा मैं और विनोद भाय्या रो रहे थे. रमाकांत जी से ज़्यादा मेरे मम्मी पापा उदास थे. पालने वाले रिश्ते पैदा करने से बड़े होते हैं.

हमारे गुम को देखते हुए रमाकांत जी ने थोड़े दिन के लिए श्रद्धा को भी हमारे यहा भेज दिया ताकि पूजा की कमी ना खले.

विनोद भैया से तो श्रद्धा ज़्यादा बात नही करती थी पर मुझे थोड़ी सांत्वना मिली. थोड़े दिन बाद श्रद्धा चली गयी पर वो हमारे घर आती रहती थी.

जब लगता हैं की ज़िंदगी की नाव बहुत सही चल रही हैं तभी शायद तूफान आता हैं. हमारी खुशहाल ज़िंदगी मे भी तूफान आने वाला था और एक नाजायज़ रिश्ता खुलने वाला था.

अगले एपिसोड मे पढ़िए वो तूफान क्या था.

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अब आगे की कहानी अजय की ज़ुबानी जारी हैं…

पूजा की शादी हमारे ही शहर मे हुई थी इसलिए वो हफ्ते मे 1-2 बार हमारे घर आ जाती थी. हम सब घर वालो को अच्छा लगता था. उसके पति पीयूष के पेरेंट्स दूसरे शहर मे रहते थे इसलिए पूजा पर ज़्यादा पाबंदी नही थी.

एक दिन मैं अपने काम पर था तब मा का फोन आया की पूजा घर आई हुई हैं. मैं सारा काम अपने बड़े भाई विनोद के हवाले छोड़कर लंच के बहाने घर पहुचा.

हमारा घर दो मंज़िल का हैं. नीचे की मंज़िल पर मम्मी-पापा और विनोद भैया-वंदना भाभी के बेडरूम थे. उपर की मंज़िल पर एक कमरे मे मैं और मेरी वाइफ अर्चना रहते तो दूसरा कमरा पूजा का था. वो जब भी ससुराल से आती तो अपने ही कमरे मे रहती थी.

मम्मी नीचे ही थी और उन्होने मुझे बताया की पूजा उपर अपने कमरे मे हैं. मैं भागते हुए उत्साह मे उपर गया. पूजा के कमरे का दरवाजा जोश के साथ खोला.

अंदर का नज़ारा देख कर मेरे प्राण सुख गये. आँखें फट कर बाहर आ गयी थी. मेरी छोटी बहन पूजा टॉपलेस और सिर्फ़ एक पैंटी मे थी और मेरी बीवी अर्चना से च्चती से च्चती मिलाए चिपकी हुई किस कर रही थी.

अर्चना भी पूजा की ही तरह टॉपलेस थी और सिर्फ़ पैंटी मे थी. उनको इस हालत मे देख कर मेरी हल्की सी चीख निकली और वैसी ही चीख पूजा की भी निकली.

मैं मूर्ति के समान खड़ा था और पूजा ने जल्दी से चादर लिया और अपने नंगे बदन को ढक दिया. अर्चना ने अपना नंगा शरीर ढकने का कोई प्रयास नही किया. क्यू की उसको पिच्छले दो साल मे मैं काई बार पूरा नंगा देख चुका हूँ और उसके बड़े बूब्स चूस चुका हूँ.

मैं पलट कर अपने कमरे मे आ गया. जो देखा उस पर यकीन नही हो रहा था. यही दुआ कर रहा था की मैने जो देखा वो हक़ीकत नही हो और मेरी छोटी खूबसूरत बहन पूजा जिसको हेरोयिन बनना था वो अभी कोई आक्टिंग कर रही थी.

कुच्छ मिनिट्स मे अर्चना कपड़े पहने हमारे बेडरूम मे आई और दरवाजा बंद किया. मैं सवालीयो नज़रो से बिना पुच्छे ही काई सवाल कर रहा था. अर्चना ने भी मेरी मन की बात भाप ली और और खुद ही बोल पड़ी.

अर्चना: “हा मैं बाइसेक्षुयल हूँ. तुम्हारे अलावा मेरी ज़िंदगी मे और कोई मर्द नही हैं, सिर्फ़ दो लड़किया हैं. पहली मेरे साथ काम करने वाली मेरी एक सहेली और दूसरी हमारी छोटी बहन पूजा”

मैं यह सुनना नही चाहता था पर यही हक़ीकत थी और कोई आक्टिंग नही थी. मेरी बोलती वैसे भी अर्चना के सामने बंद हो जाती हैं, तो मैं चुप ही रहा.

अर्चना: “मैं मेरी सहेली से शादी करना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नही थी. यह समाज दो लड़कियो की शादी स्वीकार नही करता. वैसे भी हम बाइसेक्षुयल थे, इसलिए उसने किसी लड़के से शादी कर ली और मैने तुमसे. अब हम दोनो नही मिलते”

फिर मैने हिम्मत करके अर्चना से सवाल पुच्छ ही लिया.

अजय: “मगर पूजा के साथ!”

अर्चना: “पूजा इतनी खूबसूरत हैं, जवान हैं और उसका कोई बाय्फ्रेंड नही हैं, फिर भी तुम लोगो को कभी शक नही हुआ की पूजा लेज़्बीयन हो सकती हैं!”

अजय: “लेज़्बीयन!!”

अर्चना: “हा, लेज़्बीयन. मैने तुम्हारे घर मे आते ही एक महीने मे यह पता कर लिया था. फिर मैं और पूजा एक दूसरे के लेज़्बीयन पार्ट्नर बन गये”

अजय: “और घर मे किसी को भनक भी नही लगी!”

अर्चना: “क्यू की पूजा और हमारा कमरा दूसरी मंज़िल पर हैं तो हमारे लिए आसान हो गया”

अजय: “मगर पूजा के हज़्बेंड पीयूष का क्या होगा! पूजा तो लेज़्बीयन हैं, उसको मर्दो मे कोई इंटेरेस्ट ही नही होगा!”

अर्चना: “इसलिए तो पीयूष के साथ मैने पूजा की शादी करवाई. पीयूष भी मेरी कम्यूनिटी का ही हैं. पीयूष गे हैं. उसको सिर्फ़ मर्दो मे इंटेरेस्ट हैं. वो पूजा को हाथ भी नही लगाता. मैने इसीलिए पूजा की शादी पीयूष से करवाई”

अजय: “मगर ऐसे कब तक चलेगा! लोगो को पता नही चल जाएगा?”

अर्चना: “मैं बाइसेक्षुयल हूँ किसी को पता चला? पूजा लेज़्बीयन हैं वो भी पता नही चलता अगर हमने थोड़ी लापरवाही ना करके दरवाजा लॉक कर दिया होता तो”

अजय: “मतलब इसलिए तुम और पूजा कई बार उसके कमरे मे बंद रहते थे और मुझे लगता था तुम गप्पे लड़ा रहे हो”

मैने अपना सिर पीट लिया. मेरी नाक के नीच यह सब खेल चल रहा था और मुझे पता ही नही चला.
 
अर्चना: “तुम हमारे राज को राज रखने मे मदद करोगे? मैने तुम्हे प्यार देने मे कभी कोई कमी नही आने दी. मैं बाइसेक्षुयल हूँ इस वजह से तुम्हारी सेक्स लाइफ कभी अफेक्ट नही हुई और आगे भी नही होगी”

अपनी बीवी के आर्ग्युमेंट के सामने मैं कभी जीत नही पाया तो आज कैसे जीतता. वो सही थी, उसकी वजह से मुझे कभी कोई तकलीफ़ नही हुई थी.

क्या मैं उसको उसकी ज़िंदगी जीने दूं जो मेरी नज़र मे ग़लत हैं पर मेरी ज़िंदगी उसकी वजह से डिस्टर्ब भी नही थी! मैने अर्चना को हामी भर दी और उसने मुझे गले लगा लिया.

अर्चना: “पूजा बहुत डरी हुई हैं. लेज़्बीयन लोग हमेशा डरे हुए ही रहते हैं. उनको समाज स्वीकार नही करता. तुम उसके पास जाओ और उसको शांत करो”

मैं डर गया. पूजा का सच जानने के बाद और अपनी जवान बहन को उस नंगी हालत मे देखने के बाद मैं उस से नज़रे कैसे मिलाता. मगर अर्चना मुझे पकड़ कर पूजा के रूम मे ले गयी.

पूजा वहाँ एक कोने मे डरी सहमी सी खड़ी थी. एक नज़र हमे देखने के बाद उसने नज़रे नीचे झुका ली. पूजा ने कपड़े पहने हुए थे और मुझे फिर से उसमे अपनी छोटी चुलबुली बहन नज़र आई.

मैने हिम्मत की और उसके पास गया. उसके सिर पर हाथ फेरा और वो एक झटके मे मेरे से गले लग गयी. मैं तो वही पर पिघल गया. पूजा के सिर और पीठ पर हाथ मलता ही रह गया.

वो लेज़्बीयन हैं उसमे उसकी कोई ग़लती नही थी. मैने वो घटना भुलाते हुए ज़िंदगी मे आगे बढ़ना शुरू किया. मगर अपनी बहन और बीवी को नंगी हालत मे देखने का वो दृश्य मेरी आँखों से जा नही रहा था.

अपनी बीवी अर्चना को जब भी चोदता तो वो दृश्य याद कर रुक जाता. अर्चना भी मेरी मनोस्तिति समझ चुकी थी और वो खुद मेरे उपर चढ़ कर मुझको चोद देती.

पूजा जब भी मेरे घर आती तो अर्चना मेरी इजाज़त लेकर ही पूजा के कमरे मे जाती. मुझे भी पता था वो क्या करने जा रही हैं. शुरू शुरू मे मुझे सच स्वीकारने मे बहुत दिक्कत हुई.

मेरी हालत देख अर्चना मुझे गले लगाती और पहले मुझे चोदने की बात कहती पर मैं उसको जाने देता. धीरे धीरे मैने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया.

पूजा और अर्चना दोनो खुश थे इसलिए मैं भी खुश था. मगर मैं अब हर लड़की को लेज़्बीयन या बाइसेक्षुयल नज़रिए से देखने लगा.

वंदना भाभी भी कही लेज़्बीयन तो नही, या फिर मेरी साली श्रद्धा जिसको लड़को से नफ़रत हैं क्या वो भी लेज़्बीयन हैं! मेरे सवाल बढ़ने लगे.

अर्चना और पूजा थोड़ा और खुल चुके थे, क्यू की अब वो दोनो मेरी प्रोटेक्षन मे थे. काई बार मैने उनके कमरे के बाहर पहरेदारी भी की हैं ताकि घर मे किसी और को पता ना चले.

काई बार उनके दरवाजे पर नॉक करते हुए मैने उनको सिसकिया और आहें धीरे करने को कहा ताकि घर मे कोई और सुन ना ले. कभी कभी सोचता की एक मर्द औरत का तो ठीक हैं मगर वो दोनो लड़किया मज़ा कैसे लेती होगी! मगर यह सवाल पुच्छने की हिम्मत नही होती थी.

कुच्छ समय बाद वो दोनो मेरी आँखो के सामने भी एक दूसरे को किस कर दिया करते या आपस मे चिपक जाते. मेरा दिल धक धक करने लगता और शुरू शुरू मे मैं वहाँ से खिसक जाता.

फिर मुझे आदत पड़ गयी और मुझे वो नॉर्मल लगने लगा. कभी अर्चना के उपर पूजा लेटी होती तो कभी पूजा के उपर अर्चना और एक दूसरे के शरीर को दबाती और किस करती.

वो दोनो मेरे सामने कपड़े नही खोलती थी, सिर्फ़ च्छुने के और किस करने के मज़े ही लेती थी. मैं नही होता तभी वो कपड़े खोल कर उनका कार्यक्रम करती थी.

एक बार रात को रुकने के लिए पूजा हमारे घर आई हुई थी. सबके सोने के बाद वो मेरे कमरे मे आई. मैं और अर्चना बिस्तर पर बैठे बात कर रहे थे. आते ही पूजा ने अर्चना को बिस्तर पर लिटा कर उस पर सवार हो गयी और झुक कर अर्चना को किस करने लगी.

किस करने के बाद वो दोनो मेरी तरफ देखने लगे और स्माइल कर रहे थे. वो शायद मुझे बाहर भेजना चाह रहे थे. मैं नही गया और वही बैठा रहा.

पूजा ने अर्चना का नाइट गाउन निकाल दिया और उसको नंगा कर दिया. अर्चना को तो मैं नंगा देखता रहता हूँ तो मैं नही हिला. फिर वो लोग मुझे ही देख रहे थे की अब तो मैं बाहर जाऊ.

पूजा ने अपना टीशर्ट उपर करना शुरू किया और सिर से बाहर निकाल दिया. मुझे यह उम्मीद नही थी. मैने उसको डाट दिया.

अजय: “मुझे बाहर भेजना हैं तो सीधा बोल दो मैं चला जाता. मेरे सामने कपड़े तो मत खोलो”

मैं बिस्तर से खिसक कर कर नीचे उतरा और जाने लगा. पूजा मेरे पास आई और मुझे गले लगा कर सॉरी और थॅंक यू बोला. पूजा हाइट मे मुझसे 6 इंच छोटी हैं. मैने उसका चेहरा देखा पर मेरी नज़र ब्रा के उपर से दबे हुए नंगे बूब्स की झलक पर गयी.
 
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