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मैं: “मुश्किल शायद ये हैं कि क्या मर्द अपनी बीवियों को दूसरे मर्द के साथ रात भर लेटा हुआ सहन कर पाएंगे कि नहीं. भले ही उनके बीच कुछ गलत नहीं हो रहा हो.”
पायल: “एकदम सही, उनके मन में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहेगा. खास तौर से जब उनकी बीवी बिना कपड़ों के किसी से चिपक कर सो रही होगी.”
डीपू: “कुल मिला के आप अपनी बीवी पर कितना भरोसा करते हो इसका टेस्ट.”
अशोक: “विजेता का फैसला कैसे होता हैं?”
पायल: “जो बीवीयां सुबह उठ कर बोल दे कि उन्होंने हार नहीं मानी.”
डीपू : “ऐसे तो कोई बीवी झूठ भी बोल सकती हैं.”
मैं: “आस पास दूसरे लोग भी तो होंगे. खास तौर से वो मर्द जो उसके साथ लेटा हैं. वो मर्द किसी ओर को जितवाने के लिए के लिए अपनी बीवी को तो नहीं हरवायेगा.”
अशोक: “सही कहा, दरअसल ये खेल मिया बीवी को मिल कर खेलना हैं. एक को उकसाने का काम करना हैं तो दूसरे को सहने का.”
पायल: “हैं न मजेदार चेलेंज?”
डीपू: “तो ये लेवल पहले करवा देती, शुरू के दो लेवल की क्या जरुरत थी?”
मैं: “मुझे बहुत नींद आ रही हैं अशोक, चलो हम चलते हैं.”
पायल: “प्रतिमा तुम सोने जाओ, वैसे भी तुम्हे कल मैंने लिखी वो सजा मिलेगी.”
मैं: “मुझे क्यों सजा मिलेगी ! मैंने चेलेंज करने से मना थोड़े ही किया था.”
पायल: “चेलेंज के रूल तोड़ने की सजा. हमने कपड़े से ढकने का रूल बनाया था, पर तुमने मेरे ऊपर से कपडा हटा दिया था.”
मैं: “पर तुमने भी तो मुझे कपड़ा नहीं लगाने दिया था.”
पायल: “क्युकी वो तुम्हारी चॉइस थी. तुमने ही तो पहले कहा था कि तुम बिना कपड़ा लगाए करवाओगी.”
डीपू: “हां प्रतिमा ने बोला था वो बिना कपड़े के ढके करवाने को रेडी थी.”
मैं: “पर ये तो गलत हैं, मैं जीती फिर भी मुझे ही सजा. अशोक कुछ तो बोलो, मैं ये सजा नहीं ले सकती.”
अशोक: “अब तुम्ही लोगो ने रूल बनाये, तुम्ही ने तोड़ा और सजा भी बनाई.”
पायल: “अशोक ये अब तुम्हारी जिम्मेदारी हैं कि तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”
अशोक: “अरे करवा दूंगा. पर सजा हैं क्या? ”
पायल: “सजा तो कल ही दे पाएंगे. अभी तुम अपनी मम्मी की कसम खाके बोलो तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”
मैं: “मत खाना कसम, फंस जाएंगे.”
अशोक: “अरे ऐसा क्या हैं सजा में?”
डीपू : “क्या फर्क पड़ता हैं, छोडो ना, कोई शरारत होगी. तुम खा लो कसम.”
अशोक: “ठीक हैं बाबा, माँ की कसम, प्रतिमा से सजा पूरी करवा दूंगा.”
पायल: “यस, अब मजा आएगा प्रतिमा का.”
अशोक: “वैसे सजा तो तुम्हे भी मिलेगी, रूल तो तुमने भी तोडा था.”
पायल “कौन सा रूल तोडा था?”
अशोक: “आखिरी के दो मिनट में तुमने प्रतिमा की छाती को मसाज दिया. रूल के हिसाब से मसाज सिर्फ डीपू को ही देना था.”
मैं: “यस, वैरी गुड अशोक. डीपू अब तुम कसम खाओ कि पायल से सजा पूरी करवाओगे.”
डीपू: “रूल तो सबके लिए बराबर हैं. दोनों को सजा मिलेगी. मैं भी मम्मी की कसम खाता हूँ, पायल से सजा पूरी करवाऊंगा.”
पायल: “एक काम करो, हम दोनों की सजा को आपस में कैंसिल कर दो.”
मैं: “हां, ये ठीक हैं.”
अशोक: “एक तो तुम हमको बता नहीं रहे हो कि सजा क्या हैं और अब खुद ही कैंसिल करवा रहे हो.”
डीपू: “हमने तो माँ की कसम भी खा ली, अब कुछ नहीं हो सकता. सजा तो पूरी करनी ही पड़ेगी. लाओ चिठ्ठी क्या सजा हैं.”
पायल: “अब कल ही देख लेना क्या है सजा.”
मैं: “चलो अशोक नींद आ रही हैं”.
पायल: “हां तुम सोने ही जाओ, अगर चेलेंज का तीसरा लेवल शुरू हो गया तो तुम्हारी सहनशक्ति की पोल खुल जाएगी.”
मैं: “तुम्हे जो बोलना हैं वो बोल दो, अब मैं तुम्हारी बातों में आ कर कोई चेलेंज नहीं करने वाली.”
अशोक: “पर तूम लोग तो बोल रहे थे कि इस लेवल में असली चेलेंज तो मर्दो के लिए हैं.”
डीपू: “अब सोना ही हैं तो उस कमरे में सोओ या यहाँ, क्या फर्क पड़ता हैं. बेड वैसे भी किंग साइज हैं, चार लोग सो सकते हैं.”
पायल: “एकदम सही, उनके मन में शक का कीड़ा कुलबुलाता रहेगा. खास तौर से जब उनकी बीवी बिना कपड़ों के किसी से चिपक कर सो रही होगी.”
डीपू: “कुल मिला के आप अपनी बीवी पर कितना भरोसा करते हो इसका टेस्ट.”
अशोक: “विजेता का फैसला कैसे होता हैं?”
पायल: “जो बीवीयां सुबह उठ कर बोल दे कि उन्होंने हार नहीं मानी.”
डीपू : “ऐसे तो कोई बीवी झूठ भी बोल सकती हैं.”
मैं: “आस पास दूसरे लोग भी तो होंगे. खास तौर से वो मर्द जो उसके साथ लेटा हैं. वो मर्द किसी ओर को जितवाने के लिए के लिए अपनी बीवी को तो नहीं हरवायेगा.”
अशोक: “सही कहा, दरअसल ये खेल मिया बीवी को मिल कर खेलना हैं. एक को उकसाने का काम करना हैं तो दूसरे को सहने का.”
पायल: “हैं न मजेदार चेलेंज?”
डीपू: “तो ये लेवल पहले करवा देती, शुरू के दो लेवल की क्या जरुरत थी?”
मैं: “मुझे बहुत नींद आ रही हैं अशोक, चलो हम चलते हैं.”
पायल: “प्रतिमा तुम सोने जाओ, वैसे भी तुम्हे कल मैंने लिखी वो सजा मिलेगी.”
मैं: “मुझे क्यों सजा मिलेगी ! मैंने चेलेंज करने से मना थोड़े ही किया था.”
पायल: “चेलेंज के रूल तोड़ने की सजा. हमने कपड़े से ढकने का रूल बनाया था, पर तुमने मेरे ऊपर से कपडा हटा दिया था.”
मैं: “पर तुमने भी तो मुझे कपड़ा नहीं लगाने दिया था.”
पायल: “क्युकी वो तुम्हारी चॉइस थी. तुमने ही तो पहले कहा था कि तुम बिना कपड़ा लगाए करवाओगी.”
डीपू: “हां प्रतिमा ने बोला था वो बिना कपड़े के ढके करवाने को रेडी थी.”
मैं: “पर ये तो गलत हैं, मैं जीती फिर भी मुझे ही सजा. अशोक कुछ तो बोलो, मैं ये सजा नहीं ले सकती.”
अशोक: “अब तुम्ही लोगो ने रूल बनाये, तुम्ही ने तोड़ा और सजा भी बनाई.”
पायल: “अशोक ये अब तुम्हारी जिम्मेदारी हैं कि तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”
अशोक: “अरे करवा दूंगा. पर सजा हैं क्या? ”
पायल: “सजा तो कल ही दे पाएंगे. अभी तुम अपनी मम्मी की कसम खाके बोलो तुम प्रतिमा से सजा पूरी करवाओगे.”
मैं: “मत खाना कसम, फंस जाएंगे.”
अशोक: “अरे ऐसा क्या हैं सजा में?”
डीपू : “क्या फर्क पड़ता हैं, छोडो ना, कोई शरारत होगी. तुम खा लो कसम.”
अशोक: “ठीक हैं बाबा, माँ की कसम, प्रतिमा से सजा पूरी करवा दूंगा.”
पायल: “यस, अब मजा आएगा प्रतिमा का.”
अशोक: “वैसे सजा तो तुम्हे भी मिलेगी, रूल तो तुमने भी तोडा था.”
पायल “कौन सा रूल तोडा था?”
अशोक: “आखिरी के दो मिनट में तुमने प्रतिमा की छाती को मसाज दिया. रूल के हिसाब से मसाज सिर्फ डीपू को ही देना था.”
मैं: “यस, वैरी गुड अशोक. डीपू अब तुम कसम खाओ कि पायल से सजा पूरी करवाओगे.”
डीपू: “रूल तो सबके लिए बराबर हैं. दोनों को सजा मिलेगी. मैं भी मम्मी की कसम खाता हूँ, पायल से सजा पूरी करवाऊंगा.”
पायल: “एक काम करो, हम दोनों की सजा को आपस में कैंसिल कर दो.”
मैं: “हां, ये ठीक हैं.”
अशोक: “एक तो तुम हमको बता नहीं रहे हो कि सजा क्या हैं और अब खुद ही कैंसिल करवा रहे हो.”
डीपू: “हमने तो माँ की कसम भी खा ली, अब कुछ नहीं हो सकता. सजा तो पूरी करनी ही पड़ेगी. लाओ चिठ्ठी क्या सजा हैं.”
पायल: “अब कल ही देख लेना क्या है सजा.”
मैं: “चलो अशोक नींद आ रही हैं”.
पायल: “हां तुम सोने ही जाओ, अगर चेलेंज का तीसरा लेवल शुरू हो गया तो तुम्हारी सहनशक्ति की पोल खुल जाएगी.”
मैं: “तुम्हे जो बोलना हैं वो बोल दो, अब मैं तुम्हारी बातों में आ कर कोई चेलेंज नहीं करने वाली.”
अशोक: “पर तूम लोग तो बोल रहे थे कि इस लेवल में असली चेलेंज तो मर्दो के लिए हैं.”
डीपू: “अब सोना ही हैं तो उस कमरे में सोओ या यहाँ, क्या फर्क पड़ता हैं. बेड वैसे भी किंग साइज हैं, चार लोग सो सकते हैं.”