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वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.
उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.
मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.
मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”
मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.
पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”
मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”
डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”
अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”
पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”
मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”
पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”
डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”
पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”
अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”
पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”
अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”
पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”
डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”
पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”
मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”
पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”
अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”
पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”
डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.
अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”
डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”
मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”
पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”
मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”
पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”
मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”
पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”
अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”
पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”
डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”
अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”
मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”
पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”
मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”
पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”
डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.
उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.
मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.
मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”
मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.
पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”
मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”
डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”
अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”
पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”
मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”
पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”
डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”
पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”
अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”
पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”
अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”
पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”
डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”
पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”
मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”
पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”
अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”
पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”
डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.
अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”
डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”
मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”
पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”
मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”
पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”
मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”
पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”
अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”
पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”
डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”
अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”
मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”
पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”
मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”
पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”
डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.