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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

update_17 आनंद वीशाल के घर अदिति को दुलार करने पहुँचा

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विशाल को आनंद के मुँह से अदिति की तमैरीफ सुनकर बहुत अच्छा लगा और वो बहुत ही खुश हुआ। फिर उसने आनंद से कहा- “एक बात बताओ यार आनंद, जो तुमने उस आफिस की औरत के बारे में कहा था, क्या वैसा सोचोगे अदिति के बारे में?”

आनंद का चेहरा यह सुनकर लाल हो गया और उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे? विशाल को ओर झिझकते हुए देखकर कहा- “यार तुम मेरे दोस्त हो तो तुम्हारी बीवी के बारे में वैसा कैसे सोच सकता हूँ मैं? हाँ अगर अदिति तुम्हारी बीवी नहीं होती तो जरूर वैसा सोचता और कहता मैं। अफसोस की अदिति मेरे दोस्त की वाइफ है हेहेहेहे...”

विशाल मुश्कुराया और पूछा- “अगर यह तुम्हारा दोस्त तुमको उससे फ्लर्ट करने की इजाजत दे तो?”

आनंद थोड़ा सा मुश्कुराया और जवाब देने जा ही रहा था की अदिति के कदमों की आहट आते हुए सुनाई दी कारिडोर में तो दोनों चुप हो गये।

जब अदिति बीच वाले टेबल पर ग्लास रखने के लिए झुकी तो विशाल ने उसकी क्लीवेज को देखा और बेशक आनंद की नजरों का भी पीछा किया जिसकी नजर अदिति की लटकी हुई चूचियों पर थी। चूचियां उस वक़्त थोड़ा अदिति के बाल से ढकी हुई थीं, जो उस वक्त खुले थे और आनंद को क्लीवेज आधा ही नजर आया। आनंद को अदिति की ब्रा की एक कप पूरा दिखाई दिया और उसमें से निपल भी थोड़ा सा दिख गया, और आनंद खुद को संभाल नहीं सका। उसको सीट पर हिलते हए अपने लण्ड को पैंट में मैनेज करना पड़ा। क्योंकी बेशक उसका लण्ड खड़ा हो गया था।

अदिति विशाल के पास बैठ गई और विशाल शैम्पेन की बोतल खोल रहा था। जब विशाल बोतल खोलने में बिजी था तब तक आनंद ठरकी नजरों से अदिति कि जिश्म को नीचे से ऊपर तक घूर रहा था और अदिति कभी उसको तो कभी विशाल के चेहरे में देख रही थी। अदिति को पता था की आनंद उसके जिश्म को घूर रहा है। वो अपने चेहरे पर एक मुश्कान सजाई हुई थी और रह-रहकर आनंद को झाँक लिया करती थी।

आनंद सोचने लगा- “क्यों विशाल अपनी बीवी के बारे में वैसा बोल रहा था उससे? क्यों अदिति ने ऐसे कपड़े पहने हैं, जबकी उसको पता था की मैं आने वाला हूँ? क्यों विशाल ने पूछा की मैं क्या करूँगा अगर वो मुझको अपनी वाइफ से फ्लर्ट करने देगा? क्या करना चाहते हैं यह दोनों? क्या इरादा है इनका? मुझे विशाल को क्या जवाब देना चाहिए? कहीं वो मुझको आजमा तो नहीं रहा है? क्या वो देखना चाहता है की कहीं मैं उसकी वाइफ पर लाइन तो नहीं मारूँगा? और अगर मैंने उसको हाँ में जवाब दिया तो क्या होगा? अगर उसने मुझको गालियां देते हुए घर से बेइज्जत करके निकाला तो? तब तो वो कल आफिस में सबको बता देगा की मैं उसकी बीवी पर बुरी नजर रखता हूँ। ओहह... नो। नहीं आफिस में मेरी कितनी इज्जत है। मुझको इस सिचुयेशन से निकलना चाहिए। मैं अपने इज्जत को खोना नहीं चाहता..."

विशाल ग्लास भर रहा था, और अदिति ने ग्लास को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था। वो उसके लिए थी सिर्फ एक चूंट पीने के लिए, क्योंकी वो शराब पीना पसंद नहीं करती बिल्कुल। उसने विशाल से कहा था की विशाल का बर्थ-डे था तो उसको खुश करने के लिए थोड़ा सा शैम्पेन पिएगी।

और फिर दो और ग्लास भरे गये। तीनों ने चियर्स किए और शैम्पेन पीने लगे विशाल को विश करते हुए। आनंद की नजरों ने अदिति को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ा, और विशाल उसको देख रहा था रह-रहकर।

अदिति भी बार-बार आनंद को देखते हए सोच रही थी की किस तरह रात को- “आनंदजी, आनंदजी, ऐसा मत करो, वैसा मत करो मेरा पति आ जाएगा। हाँ इसको और मेरे अंदर डालो मजा आ रहा है आनंदजी..” यह सब सोचते हुए अदिति एक बार जोर से हँसी।

आनंद और विशाल दोनों ने उससे पूछा- “क्या बात है क्यों हँसी वो?"

अदिति ने उनको नजर अंदाज करने को कहा- “क्योंकी मैं एक जोक को सोच रही थी उस वक्त..."

थोड़ी देर बाद अदिति को किचेन से कुछ और लाना था, तो वो गई तो आनंद और विशाल अकेले हो गए।

विशाल ने कहा- “मैं तुमको इजाजत देता हूँ उसके साथ कुछ भी बात करने को, सेक्सुअल या कुछ भी, बस मेरे सामने मत करना, मैं छत पर सिगरेट पीने जाऊँगा तब तुम करना, जो भी जी में आए करना। वो कुछ नहीं कहेगी। तुम उससे कोई भी बात करो। मेरा यकीन करो, बस सिर्फ मेरे सामने कोई ऐसी वैसी बात मत करना। तुम उसको छू भी सकते हो। मुझे यकीन है वो कुछ नहीं कहेगी। मैं उसको बेहतर जानता हूँ। मगर याद रहे सिर्फ मेरी गैरहाजिरी में। ओके आनंद?"

यह सब सुनकर आनंद को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था, तो पूछा- “विशाल वो तुम्हारी बीवी ही है या कोई और यार? सच बताओ यार मजाक मत करो प्लीज..” ।

विशाल बोला- “तुम हमारी शादी की फोटोस देखना चाहते हो? रुको..” फिर उसने अदिति को आवाज देते हुए

कहा- “अदिति, हमारे शादी वाले फोटो अल्बम तो लाना जरा, आनंद फोटो देखेंगे..."

अदिति ने किचेन से जवाब दिया- “ठीक है लाती हूँ, बस यह काम पूरा कर लूँ जरा...”

आनंद ने कहा- “अगर वो तुम्हारी वाइफ है तो क्यों तुम.......” और इससे पहले की आनंद जुमला खतम करता विशाल ने बीच में उसको …….

विशाल- “यार तुम बस वो करो जो मैं कह रहा हूँ। कल तुमको सब समझा दूंगा। मगर अभी के लिए वो तो करो, जो करने को कह रहा हूँ ना यार.”

आनंद ने पूछा- “आर यू श्योर विशाल?"

विशाल ने कहा- “आई आम डैम श्योर। यार गो अहेड जस्ट गो अहेड और ये करो इट। भूल जाओ की वो मेरी बीवी है। बस ऐसा सोचो की वो आफिस वाली औरत है जिसको तू निहार रहा था और यहाँ शुरुवात करो अदिति को वो औरत समझकर। जब मैं तुम दोनों के बीच नहीं हूँ तो मुझको भूल जाओ तुम। जब-जब मैं बाहर जाऊँ तुम कुछ अलग ट्राई करो अदिति के साथ। उसकी खूबसूरती की तारीफ करो, उसको बोलो की वो सेक्सी और

हाट दिख रही है, बोलो की वो आकर्षक है और उसको छूने की कोशिश करो। फिर देखना उसकी क्या जवाब होती है? देखना नाराज नहीं होगी और कुछ खास नहीं कहेगी तुमको। मैं जानता हूँ उसे। अब इसलिए की मैं यहीं कहीं हूँ, इसलिए हो सकता है थोड़ा घबराएगी। मगर तुम्हारे छूने से उसको बिल्कुल ऐतराज नहीं होगा आई आम श्योर। उसके करीब जाओ, और ज्यादा करीब जाने की कोशिश करो। समझ गये आनंद यारा?"

 
आनंद मान गया और अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था की उसको एक ऐसा मौका मिल रहा है, जहाँ एक पति ही अपने वाइफ को छूने को बोल रहा है उससे। यह तो एक लाटरी की तरह है, और आनंद मौके का इंतेजार करने लगा।

जब अदिति शादी की फोटो अल्बम लेकर आई तो आनंद को दे दिया देखने के लिए।

विशाल ने कहा- “मैं छत पर सिगरेट पीने जा रहा हूँ.”

आनंद ने अल्बम लेकर देखते हुए पूछा- “यह तुम्हारा पिता हैं?"

अदिति अपने सीट से उठकर आनंद के पास गई, झुक कर उसको अल्बम में बताने लगी की कौन-कौन है फोटोस में? बाहर से विशाल छुपकर उन दोनों को देख रहा था। अदिति उस वक़्त झुकी हुई थी अल्बम में फोटोस दिखाने के लिए, और आनंद की नजरें अल्बम की बजाए अदिति के क्लीवेज पर थे। उसकी दोनों चूचियां ब्रा में लटकी हुई थीं और आनंद के बहुत नजदीक थीं। वो घूर रहा था लालच भरी नजरों से।

विशाल बाहर से सब देख रहा था।

आनंद ने अदिति का हाथ पकड़कर खींचते हुए आराम से कहा- “यहाँ इधर बैठो मेरे पास और बताओ ना तुम्हारे पेरेंट्स कौन-कौन हैं इनमें."

अदिति आनंद वाले सोफे पर बैठ गई और छत की तरफ देखा की विशाल देख रहा है की नहीं? उसको विशाल नहीं दिखा, तो अदिति अपनी उंगली को तस्वीरों पर करके आनंद को बताने लगी।

आनंद ने तब बिना झिझक के अपने एक बाजू को अदिति के कंधे पर रखकर उसके कान में धीरे से कहा- “तुम बहुत बहुत ही खूबसूरत लग रही हो अदिति। विशाल बहुत खुशकिश्मत है तुमको पाकर, मुझे उससे जलन हो रही है...”

अदिति का चेहरा लाल हो गया, उसके शरीर में एक ठंडी लहर सी चली और तुरंत मुड़कर छत की तरफ देखा और महसूस किया की आनंद अपना हाथ उसके कंधे पर फेर रहा है धीरे-धीरे। अपनी प्यारी सी आवाज में थोड़ा शर्माते हुए अदिति ने कहा- “बैंक्स फार दि कांप्लिमेंट आनंदजी..."

अदिति ने जैसे ही “आनंदजी” शब्द कहा, तो उसको लगा की रात वाली रोल-प्ले खेल रही है और उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी। अदिति अपने आपको रोल-प्ले की दुनियां में खोने लगी। यह महसूस करते ही अब सेक्स उसके जिश्म के हर अंग को चढ़ेगी और थोड़ी देर में वो आनंद की बाहों में होगी।

अदिति को ऐसा महसूस हुआ की सब रोल-प्ले हो रहा है एक पल के लिए। वो आदमी जिसको वो हर रात को सोचते हुए सेक्स करती थी, जिसको खयालों में लाकर उससे चुदवाती थी, जिसको सोचकर रातों को विशाल से चुदवाती थी, आज इस वक्त उस आदमी का हाथ उसके कंधे को सहला रहा था। अदिति किसी और दुनियां में खोने लगी। अदिति उस वक्त एक ऐसी दुनियां में थी, जो हकीकत और बनावटी के बीच का होता है। वो बिल्कुल अपने आप में नहीं थी।

जब आनंद ने अदिति को बिल्कुल खामोश देखा तो उसने अपने दूसरे हाथ को उसके घुटनों पर रखा, और धीरे धीरे उसकी ड्रेस के नीचे हाथ को ऊपर की तरफ बढ़ाने लगा, तो अदिति ने धीरे से “हम्म्म्म ” किया। तब तक आनंद ने अपने मुँह को अदिति के गाल पर धीरे से फेरा और अपनी जीभ को उसके गाल पर फेरते हए उसकी होंठ तक ले गया।

विशाल सब देख रहा था और अपने लण्ड को जोर से अपने हाथों में दबाया, और उसी वक्त मूठ मारने को मन किया अपनी पत्नी को अपने दोस्त के साथ उस हालत में देखते हुए।

आनंद ने अपनी भीगे जीभ को अदिति के होंठों पर फेरते हुए जीभ को उसके मुँह के अंदर डालने की कोशिश किया। जबकी उसका हाथ जांघों के बीच बिल्कुल ऊपर चला गया था, और पैंटी के बिल्कुल करीब था। अदिति ने दोनों जांघों को दबाते हुए आनंद के हाथ की गर्मी अपनी दोनों जांघों के बीच महसूस किया। उसकी दिल की धड़कनें और भी तेज हो गईं और वो तेज-तेज लंबी साँसें लेने लगी।

अदिति अचानक जैसे एक सपने से जाग रही थी कहा- “नहीं, नहीं विशाल वापस आने वाला है..."

फिर उठकर सामने वाली सोफे पर बैठ गई। वहाँ बैठकर अदिति ने छत के तरफ जल्दी से देखा की विशाल वापस तो नहीं आ रहा? फिर अपने होठों को पोंछा जो आनंद ने अपनी भीगे जीभ से भीगो दिया था। तब अदिति ने आनंद को एक शर्मीली मुश्कान से देखा और होठों को दाँतों में दबाते हुए अपनी नजरें नीचे कर लिया। उसको लगा की वो एक सपने से अभी-अभी जागी है।

आनंद का बिल्कुल खड़ा हो गया था और अदिति के सामने उसने अपने लण्ड को पैंट के अंदर ठीक किया। अदिति ने खूब देखा, मगर ऐसे देख रही थी की जैसे नीचे जमीन पर देख रही हो। मगर नजर उठाकर अच्छी तरह से देखा की आनंद ने क्या किया।

आनंद ने अपनी जगह पर बैठे हुए कहा- “अदिति तुम बहुत कमाल की हो, मैं तुम्हारे साथ सोना चाहता हूँ, तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हारे साथ होने का मन कर रहा है। मुझे एक मौका दो जानेमन, मैं तुम्हारे पूरे शरीर को चखना चाहता हूँ अब। विशाल को कुछ भी मत बताना। उसको कुछ पता नहीं चलेगा यह हमारी राज रहेगी..”

अदिति ने ना में सिर हिलाया बिना कुछ बोले, जमीन पर ही देखते हुए अपनी साँस को थामे एक हाथ को अपनी छाती पर रखे हुए।

तभी विशाल छत वाला दरवाजा खोलकेरअंदर दाखिल हुआ, जैसे उसको कुछ भी पता नहीं था। उसने वहीं से जोर से कहा- “आनंद शैम्पेन का मजा ले रहे हो?"

आनंद ने उसकी जांघों को अच्छी तरह से महसूस किया था। जब हाथ अंदर डाला था, उसकी उंगली ने तकरीबन उसकी चूत को छू लिया था, जब वो उठी थी। जब उसका हाथ अंदर घुस रहा था तो वो खामोश थी, उसने दोनों जांघों को सटा लिया था। फिर भी आनंद के हाथ को अंदर जाने दे रही थी, यह सब सोचते हुए आनंद ने सोचा “अदिति ने क्यों इतना कुछ करने दिया मुझको.”

विशाल ने सब कुछ देखा था। उसने आनंद का हाथ अदिति की जांघों के बीच अंदर जाते हए खूब देखा था और विशाल ने यह भी देखा था की आनंद का दूसरा हाथ अदिति के कंधे पर उसकी ब्रा की स्ट्रैप में उंगली डालकर खींचते हए खेल रहा था। फिर भी अदिति ने उसका हाथ नहीं हटाया और उसको करने दिया था वैसा। उसने आनंद को सही कहा था की वो ऐतराज नहीं करेगी। विशाल ने अदिति को बहुत खूब तैयार किया था। उसने उन रोल-प्ले के जरिये अदिति के मन में इतना कुछ बसा दिया था की अदिति उन रोल-प्ले को हकीकत में जीना चाहती थी। यह विशाल को पता हो गया था इसीलिए आनंद को बोला था की वो ऐतराज नहीं करेगी। विशाल को खुशी और गर्व महसूस हो रहा था की उसने एक इनोसेंट (मासूम) अदिति को, एक हाट और आकर्षक औरत में बदल दिया था।

विशाल को अब पूरा यकीन था की उसका सपना पूरा होगा, और वो अदिति को किसी गैर मर्द से चुदवाते हुये देख पाएगा, और वो उसको किसी और के नीचे कराहते हुए, सिसकते हुए देख सकेगा। विशाल को कितने दिनों से यह देखने की चाह थी की अदिति किसी और से करते वक्त कैसे रिएक्ट करती है? किस तरह किसी और से करते वक़्त बिहेव करती है? यह जानने के लिए विशाल बेताब था की किसी और का लण्ड उसके अंदर घसेगा । तो क्या अदिति उसी तरह से रिएक्ट करेगी जिस तरह उसके साथ करती है या किसी और तरह से? यह जानने के लिए भी बेकरार था की अदिति की सिसकियां और तड़प वैसे ही होगी, जैसे उससे करते वक्त होती हैं या दूसरी तरह? बहुत कुछ ध्यान से देखाना चाहता था अदिति में किसी और से करने के वक्त। और अब खुश था की अब वो दिन आ गया जब वो यह सब होते देख पाएगा।

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update_18 आनंद ने अपनी पूरी कोशिस की अदिति के साथ

विशाल आकर अदिति के पास बैठा और आनंद को देखते हुए उसे एक आँख मारी उसने। जबकी अदिति नीचे देख रही थी और उसकी दिल की धड़कनें तब भी तेज थि। आनंद का तब भी खड़ा ही था और वो अदिति की जांघों और क्लीवेज को ही देखे जा रहा था, क्योंकी वो उसके ठीक सामने बैठी हई थी और लार टपक जाती थी

आनंद की अदिति के जिश्म के उन हिस्सों को देखते हुए।

अदिति खड़ी हुई और यह कहते हुए चली गई- “मुझे कुछ बर्तनों को धोना है, थोड़ी देर बाद वापस आऊँगी.." इधर ये दोनों धीरे-धीरे बातें करने लगे।

विशाल ने पूछा- “तो बताओ कैसी थी? तुमने थोड़ा एंजाय किया ना उसको छूकर?” हालांकी विशाल ने तो सब कुछ देख लिया था। मगर आनंद को पता नहीं लगने दिया कि उसने क्या-क्या देखा। क्योंकी वो देखना चाहता था की आनंद उसको सब बताता है की नहीं? और विशाल को हैरानी हई जब आनंद का जवाब वो नहीं मिला जो होना चाहिए था।

आनंद ने कहा- “नहीं कुछ खास तो नहीं, वो हिचकिचा रही है शायद। मुझे कुछ और वक्त चाहिए उसके साथ, मैं उसको उस तरह से छू नहीं पाया जैसा तुमने कहा था। और अदिति तो उस सोफे पर बैठी रही जबकी मैंने उसको यहाँ आकर फोटोस दिखाने को कहा फिर भी..”

अब विशाल सोचने लगा की आनंद क्यों झूठ बोल रहा है? फिर विशाल ने कहा- “वो इस वक़्त बर्तन धो रही है सिंक के पास। तुम जाओ वहाँ जल्दी, उसके पीछे खड़े होकर उसको अपनी बाहों में जकड़ो और अपने जिश्म को उसके जिश्म पर दबाओ। फिर देखो के वो ऐतराज करती है की नहीं? जाओ जल्दी हम्म..”

आनंद तुरंत गया और बेहद खुश था। उधर विशाल छत वाले दरवाजे से बाहर निकला और पीछे की तरफ से ऊपर चढ़कर अपने किचेन में उन दोनों को छत वाली खिड़की से देखने गया। जो उसने देखा उससे वो बहुत खुश हुआ और फिर से अपने लण्ड को जोर से हाथों में लेकर दबाया।

आनंद ने पीछे से अदिति को जकड़ा हआ था। उसकी बाहें अदिति के बाहों के नीचे से होकर उसकी पेट पर मसल रहे थे, और आनंद का लण्ड अदिति के चूतड़ों पर दबा हुवा था, आनंद अदिति के पिछवाड़े में ड्रेस के ऊपर ही धीरे-धीरे कमर को हिलाते हुए लण्ड को पैंट समेत रगड़ रहा था, और क्योंकी अदिति झुकी हुई थी बर्तन को धोते हए तो आनंद अपना मुँह अदिति के पीछे वाले गले के हिस्से पर फेर रहा था। उसके होंठ और जीभ अदिति के पीछे के गले के हिस्से पर थी।

अदिति तब भी लाल हो गई थी, और थोड़ा बहुत पुश कर रही थी आनंद को, और कुछ कह रही थी जो विशाल को सुनाई नहीं दे रहा था। असल में अदिति धीरे-धीरे फफुसाकर आनंद से कह रही थी- “प्लीज... ऐसा मत कीजिए, विशाल यहाँ आ सकता है। छोड़ दीजिए मुझे प्लीज आनंदजी, आप जाइए ना प्लीज...”

 
अब दोस्तों आप लोग खुद सोचिए की अदिति उस ड्रेस में, उसकी नंगी पीठ और ब्रा की स्ट्रैप आनंद की नजरों के सामने, जिसने अदिति को पीछे से बाहों में जकड़ा हुआ था, उसकी जीभ और होंठ अदिति के नंगे कंधे और पीठ पर फेर रहा था, सब आनंद की जीभ से भीगे हुए थे। अदिति को क्या महसूस हो रहा था उस आदमी की बाहों में, जिसको सोचकर वो हर रात चुदती थी?

अदिति को यूँ लग रहा था की अपनी रोल-प्ले को जीवित कर चुकी है, और असल में सब कर रही है। बल्की उसका मन कर रहा था की सच में सब होने दे अब। उसका मन कर रहा था की आनंद की बाहों में समा जाए उसी वक्त। बहुत मुश्किल हो रहा था अदिति को कंट्रोल करना। और आनंद को अपने मोटे लंबे लण्ड को अदिति के नरम पिछवाड़े पर रगड़ते हुए बहुत अच्छा महसूस हो रहा था, साथ-साथ आनंद का हाथ पीछे से अदिति की चूचियों को मसलने लगा था, और उसकी नंगी पीठ पर जीभ फेरे जा रहा था, पीछे रगड़ते हुए।

इस तस्वीर को देखकर खुद अंदाजा लगाएं की ऐसी नर्म, बेदाग गोरी पीठ सामने हो। जब वो आपकी बाहों में हो तो क्या आप अपने आपको रोक सकते हो? नहीं ना? तो आनंद कैसे रोकता खुद को?

अदिति इसी तरह झुकी हुई थी बर्तन धोते हुए जैसे इस पिक में झुकी हुई है, और आनंद ने उसको पीछे से जकड़ा हुआ था, तो अदिति का पूरा पिछवाड़ा आनंद के लिए हाजिर था। और लगता तो ऐसा था की अदिति

खुद अपनी गाण्ड दे रही थी आनंद को लगाने के लिए। आनंद लगातार अपना लण्ड रगड़े जा रहा था उसके चूतड़ों के ऊपर, और उसको ऐसा लगा की वो झड़ने वाला है बिना अंदर घुसाए ही। आनंद ने एक बार थोड़ा सा झुक कर उसकी ड्रेस को ऊपर करते हुए उसकी जांघों के बीच में हाथ डाला, और पीठ पर मुँह चलाते हुए नीचे हाथ से काम किया उसकी पैंटी पर उंगली फेरते हुए।

मगर इस बार अदिति ने पोजीशन चेंज कर लिया उसको माना करते हए की वैसा ना करे। मगर आनंद जोश में था तो जमीन पर बैठ गया और अदिति की जांघों को जोर से बाहों में कस लिया उसकी ड्रेस को ऊपर उठाते हुए। फिर बहुत तेजी से अपना मुँह अदिति की गोरी जांघों पर फेरने लगा, चाटने लगा उसकी जांघों को। जांघे इतनी खूबसूरत और बेदाग थी की आनंद को उसको काटकर खाने का मन किया। आनंद ऐसा बिहेव कर रहा था

जैसे बंदर को सेब मिल गया हो खाने के लिए, अदिति की दोनों जांघों के बीच मुँह डालकर ऐसे चाटे जा रहा था के जैसे पागल हो गया हो।

अब अगली पिक्स में देखो इन जांघों को, आनंद भला खुद को कैसे रोक सकता था ऐसी जांघे जब सामने हो तो? कितनी गोरी और गदराइ हैं। गोश्त ही गोश्त हैं इनमें। उन हिस्सों को देखो, जहाँ जांघे थोड़ा ज्यादा गोरी हैं, ऊपर की तरफ। जितना ड्रेस ऊपर उठाते जाओ उतना ही ज्यादा गोरी दिखती जाएंगी ड्रेस के नीचे। जितना छुपी हुई होती हैं उतनी ही गोरी होती हैं अंदर। और वो जगह इतना सेन्सिटिव होती है की जब एक मर्द की जीभ जांघों के ऐसे हिस्से पर पड़ती हैं तो ना मर्द रोक सकता है अपने आपको, ना ही औरत। तो आनंद का भी यही हाल था। मगर उसको कंट्रोल करना था। क्योंकी उन दोनों के खयाल से विशाल तो लाउंज में बैठा हुआ था।

अब अदिति भी नीचे बैठ गई आनंद को रोकने के लिए। जब तक वो खड़ी थी आनंद को जांघों का मजा लेना आसान था। पर जब वो बैठ गई तब मुश्किल हो गया।

अदिति मिन्नतें करती हुई बोली- “नहीं आनंदजी नहीं, रुकिये। विशाल कभी भी आ सकता है वो लाउंज में ही है, बाहर नहीं गया स्मोक करने...”

अब आनंद हाँफने लगा था स्ट्रगल की वजह से और उसको अदिति को छोड़ना पड़ा उस स्ट्रगल के लिए, और दोनों साथ चलते कारिडोर से होते हुए लाउंज की तरफ गये। और दोनों हैरान हुए यह देखकर की विशाल वहाँ नहीं था।

अदिति को फिकर हुई और आनंद के चेहरे में देखते हुए पूछा- “कहां है वो?”

आनंद ने कहा- “देखा जानेमन... हम चाजू रख कर सकते थे किचेन में, वो तो है ही नहीं अंदर। तुमने मुझे खमखाह रोक दिया हाट जवान औरत...”

मगर अदिति ने चारों तरफ देखते हुए कहा- “मगर विशाल है कहाँ? वो तो सिगरेट पीकर अंदर वापस आ गया था?” और अदिति छत के दरवाजे के तरफ बढ़ने लगी। ।

तभी विशाल दरवाजा बाहर से खोलते हुए अंदर आया यह कहते हुये की उसने अपने सिगरेट का पैकेट बाहर छोड़ दिया था। अदिति को चैन आई और आनंद अपनी साँसों को थामने की कोशिश कर रहा था, क्योंकी वो अब भी हाँफ रहा था।

15 मिनट के बाद तीनों लाउंज में बैठे हुए थे। दोनों मर्द एक और ग्लास शैम्पेन की पी रहे थे और अदिति जूस। अदिति रह-रहकर आनंद को देख रही थी और वो उसको लगातार देखे जा रहा था जो विशाल ने देखा मगर नजरें चुराते हुए।

अदिति ने महसूस क्या की वो गीली हो चुकी है और खुद को साफ करने के लिए अपने कमरे में गई। अंदर जाते ही खुद की चूत को देखी और सोचा की आनंद वहाँ पहुँचना चाहता है अब, और मुश्कुराते हुए वापस गई लाउंज में। आनंद के सामने बैठी और एक नजर उसपर दौड़ाते हुए मगर विशाल से नजरें बचाते हुए। क्योंकी उसको मालूम था की विशाल उसको ध्यान से देख रहा है। ऐसे ही कुछ बातें कर रहे थे सब और विशाल ने तब टीवी ओन किया।

 
अदिति ने महसूस क्या की वो गीली हो चुकी है और खुद को साफ करने के लिए अपने कमरे में गई। अंदर जाते ही खुद की चूत को देखी और सोचा की आनंद वहाँ पहुँचना चाहता है अब, और मुश्कुराते हुए वापस गई लाउंज में। आनंद के सामने बैठी और एक नजर उसपर दौड़ाते हुए मगर विशाल से नजरें बचाते हुए। क्योंकी उसको मालूम था की विशाल उसको ध्यान से देख रहा है। ऐसे ही कुछ बातें कर रहे थे सब और विशाल ने तब टीवी ओन किया।

तब तक शाम ढाल चुकी थी और सूरज भी डूब चुका था तो बाहर अंधेरा हो गया था। आनंद ने अदिति से स्पेशल स्नैक सर्व करने को कहा, उसके बाद डिनर सर्व करना था।

आनंद खड़ा हुआ विशाल से यह कहते हुए- “ठीक है तुम टीवी देखो, मैं अदिति की मदद करता हूँ प्ले वगैरा लाने में यहाँ..."

मगर अदिति ने विशाल के चेहरे में देखते हुए आनंद से कहा- “नहीं आप फिकर मत कीजिए मैं ला दूँगी सब..."

पर आनंद ने जिद किया की वो हेल्प करेगा।

अदिति विशाल को देखती रही तो उसने कहा- “रहने दो अगर वो हेल्प करना चाहता है तो उसको किचेन से कुछ दे दो यहाँ तक लाने के लिये..."

अदिति किचेन के तरफ जाने लगी तो आनंद उसके पीछे गया। आनंद ने अपने कदमों को तेज बढ़ाते हुए अदिति को कारिडोर में ही बाहों में पकड़ लिया और उसको दीवार से चिपका के किस करना चाहा। अदिति की भुनभुनाहट और दोनों के पकड़ा पकड़ी विशाल को नहीं सुनाई दिया, क्योंकी टीवी का वाल्यूम तेज था। विशाल ने खुद बिल्कुल नहीं सोचा था की आनंद इतना जल्दबाजी में होगा कि अदिति को कारिडोर में ही चिपका देगा।

विशाल ने अपनी सीट पर से ही थोड़ा जोर से कहा- “मैं और एक सिगरेट पीने जा रहा हूँ छत पर, तब तक तुम लोग सर्व करना...”

और जैसे ही विशाल की आवाज सुनाई दिा, आनंद ने झट से अदिति को छोड़ दिया और वो भागकर किचेन में गई। और जब आनंद ने विशाल को छत का दरवाजा बंद करते सुना तो किचेन में गया अदिति के पास। अब फिर दोनों अकेले थे और आनंद ने कहा- “देखो हमारे पास कम से कम 10 मिनट हैं इससे पहले वो वापस नहीं आएगा तो चलो इस मौके का फायदा उठाते हैं मेरी जान.”

फिर झट से अदिति को बाहों में फिर से जकड़ा और अदिति के गले को चाटते हुए अपने एक हाथ से उसकी ड्रेस को बिल्कुल ऊपर उठाते हुए इस बार अपने हाथ को सीधे अदिति की पैंटी पर ले गया, और पैंटी को निकालने की कोशिश करने लगा। मगर अदिति ने अपने हाथ को उसके हाथ पर रखते हए कहा- “नहीं प्लीज आनंदजी यह नहीं, अभी यह नहीं कर पाएंगे। उतना टाइम नहीं मिलेगा यह करने को..” ।

मगर आनंद गुर्राते हुए उसके कंधों पर दाँत गड़ाते हुए और चाटते हुए कहा- “जानेमन तुम इतनी हाट हो, और मुझे इतना मन कर रहा है के एक पल में ही झड़ जाऊँगा, करने दो ना... देखना सिर्फ एक-दो धक्के में अपने वीर्य को निकालकर तुम्हारी खूबसूरत जांघों पर छोडूंगा। एक बार घुसा लेने दो ना.”

अदिति तब तक उसको पुश करते हुए उसके मुँह से अपना मुँह बचा रही थी, क्योंकी आनंद अपने पैंट की जिप को खोलते हुए किस करने जा रहा था। मगर अदिति ने कहा- “नहीं सुनो, सुनो ना आनंदजी... यह सही वक्त नहीं है, अभी नहीं। सुनिए मैं खुद आपको कहूँगी जब मौका आएगा तो ठीक है? आपसे रिक्वेस्ट करती हूँ अभी ठीक नहीं है प्लीज... मेरी बात मानिए आप..” और वो आनंद के बाहों में स्ट्रगल कर रही थी, कभी उसका हाथ अपने चूचियां से हटाते हुए तो कभी दूसरा हाथ अपनी जांघों के बीच से हटाते हुए और फिर अपने पैंटी से उसका हाथ हटाते हुए।

आनंद उसको किचेन की दीवार से चिपका कर अदिति के सामने सीधा खड़ा हुआ। उसका जिश्म अदिति के जिश्म से बिल्कुल सटा हुआथा, और कहा- “अच्छा ठीक है सिर्फ अपनी जीभ को मेरे मुँह में डालो। तुम्हारी जीभ के रस को तो चूस लूँ पहली बार कम से कम। चलो एक मसालेदार किस करो मुझे मुँह में मुँह वाला। तब रुक जाऊँगा, मगर किस लंबी वाली होनी चाहिए चाहे 5 मिनट तक किस करते जाना है। ओके? चलो मुँह खोलो और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पिघल जाने दो अब..”

अदिति के पास और कोई चारा तो था नहीं, उसने आनंद की आँखों में उसकी प्यास देखी और ऐसा महसूस हुआ की फिर से वो रोल-प्ले करने जा रही है।

विशाल तब तक छत के ऊपर जा चुका था। और क्योंकी बाहर अंधेरा था तो यह लोग उसको नहीं देख सकते थे मगर वो सब कुछ साफ देख रहा था क्योंकी अंदर तो रोशनी थी।

अदिति की पीठ दीवार से सटी हुई थी और आनंद के दोनों हाथ दीवार पर चिपके हुये, अदिति उसकी बाहों के बीच कैद थी जैसे। और किस के लिए अदिति ने सरेंडर कर ही दिया।

आनंद ने धीरे से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और भुनभुनाया- “बहुत तीखी मिर्ची हो तुम जानेमन, और शहद से ज्यादा मीठी होगा तुम्हारे मुँह का रस... अब इससे चखने दो, पीकर मदहोश हो जाने दो मुझे। मुझे पूरा यकीन है की ऐसा किस मैंने कभी नहीं किया होगा जिंदगी में, और ना तुमने ही कभी किया होगा ऐसा किस। अब मुँह खोल भी दो ना.."

अदिति ने आँखें बंद करते हुए धीरे-धीरे अपने मुँह खोला और आनंद के होठों को खुद के होंठों से टकराते महसूस किया। वो हॉफ रही थी, दोनों के साँसें गरम थी, और एक दूसरे की गरम साँसें भी महसूस कर रहे थे।

धीरे-धीरे आनंद का जीभ अदिति के मुंह के अंदर दाखिल होने लगा। फिर धीरे से अदिति ने अपनी जीभ को भी बाहर किया और दोनों की जीभ एक दूसरे से मिली। अदिति ने अपनी जीभ को आनंद के गरम मुँह में जाते महसूस किया। फिर क्या था... आनंद चूसने लगा अदिति की जीभ के रस को और अदिति की बाहें खुद-ब-खुद उठकर आनंद के कंधों पर जा बसी।

अदिति ने भी आनंद को जकड़ लिया अपने बाहों में। उसकी छाती आनंद की छाती पर बिल्कुल जोर से दबी हुई टी। अदिति किस को एंजाय करने लगी थी और खुद को खो बैठी थी उस समय। आनंद धीरे-धीरे यह जरूर कर रहा था गीला करते हुए की जब अदिति पूरी तरह किस में डूब जाए तो उसका हाथ कमाल के काम करेगा उसके जिश्म पर।

अदिति जब किस में डूब गई तो आनंद का हाथ अदिति के पीछे की तरफ से उसकी ड्रेस को उठाते हए हाथ उसकी पैंटी पर गया और उसके चूतड़ों के बीच अपनी उंगली से आनंद ने पैंटी को हल्के से एक तरफ किया,

और आगे से तो उसका लण्ड पैंट के अंदर से ही अदिति की कपड़े के ऊपर से उसकी चूत पर धीरे-धीरे रगड़ ही रहा था। और उसी वक्त आनंद अदिति की जीभ का रस चूसे जा रहा था। जबकी उसका हाथ नीचे पैंटी के अंदर काम कर रहा था।

अदिति भी किस का बहुत अच्छी तरह जवाब देती गई जैसे की अपने किसी पुराने आशिक को किस कर रही थी, या खुद विशाल को ही। अदिति बिल्कुल ही खो चुकी थी मदहोशी में, और उसकी बाहें आनंद के चौड़े कंधों के ऊपर से होकर अदिति के जिश्म से सटी हुई थीं। उसको मालूम भी नहीं पड़ा की उस वक्त आनंद के हाथ कहाँ पर है उसके जिश्म पर।

आनंद ने दूसरे हाथ से अदिति की ड्रेस को उसकी छाती पर से थोड़ा नीचे किया तो उसकी एक चूची बिल्कुल बाहर आ गई। उसकी खड़े निपल को आनंद ताक रहा था। फिर झट से किस को तोड़कर आनंद निपल को मुंह में लेकर चूसने लगा, जैसे के एक बंदर को केला मिल गया हो खाने के लिए।

अदिति अपने हाथ आनंद के बालों में फेरने लगी और कसमसाती गई “हम्म्म्म ” करते हुए। फिर अचानक उसने अपने आँखें खोली और जैसे एक सपने से जागते हुए जल्दी से अपने ड्रेस को नीचे करके आनंद के हाथ को हटाया और पैंटी को ठीक किया और चूची को ड्रेस के अंदर डाला फिर कहा- “बस बहुत मिल गया आपको जो चाहिए था। पहली बार के लिए इतना काफी है। अब जो मिला उसी से खुश हो जाओ। मैं अब यह प्लेटें लाउंज में रखने जा रही हूँ।

आनंद हाँफते हुए नीचे फर्श पर बैठ गया, और ठरकी नजरों से अदिति को कारिडोर में प्लेट लेकर जाते हुए देखता रहा।

***** **** *

 
कड़ी_19 अदिति अपने घर में अभी भी आनंद से फँसी हुई

विशाल भी अंदर वापस आ गया। खाने का समान सर्व हो गया था और एक बोतल लिकर भी टेबल पर रखा हुआ था। दोनों मर्दो को नशा होने लगा था, और बात करते वक्त दोनों की जुबान थोड़ा बहुत लड़खड़ाने लगी थी। अदिति किचेन से लाउंज तक बार-बार आती जाती थी कुछ न कुछ लाने को। प्लेटें वापस सिंक में रखने को और समान वापस करने में लगी हुई थी। हर बार जब अदिति किचेन में चली जाती थी तो विशाल धीरे-धीरे

आनंद से अदिति के बारे में ही बात किया करता था, पूछता था की लास्ट टाइम खूब एंजाय किया या नहीं? अब क्योंकी नशा चढ़ने लगा था तो कुछ भी बोलने और पूछने में बिल्कुल हिचकिचाहट नहीं हो रही थी और आनंद भी मजे से बात करते जा रहा था की अदिति बहुत सेक्सी और हाट है एट्सेटरा।

आनंद यह उम्मीद कर रहा था की विशाल को बिल्कुल नशा हो जाए, ताकी वो अदिति को उसके बिस्तर पर पटक कर मजे से चोद सके। आनंद को यकीन था के सिर्फ 15 मिनट के लिए विशाल कहीं चला जाए तो वो काफी होगा उसके लिए, अदिति के मुंह और चूत में अपने लण्ड को तूसने के किये। मगर आनंद को मालूम था की जब तक विशाल वहाँ है, वो उससे नहीं करने देगी। डिनर हो गया। आनंद और विशाल दोनों की जुबाने लड़खड़ाने लगी थीं बात करते वक्त। शराब अपना काम कर रही थी। अदिति को हँसी आ रही थी दोनों को बातें करते हुए सुनकर और विशाल को डाँट रही थी, क्योंकी उसने ज्यादा पी लिया था।

अदिति आनंद को भी देख रहि थी थी बार-बार। क्योंकी विशाल काफी नशे में था तो अदिति कुछ ज्यादा ही करीब से बात कर रही थी आनंद के साथ। क्योंकी उसको पता था की विशाल को कुछ भी पता नहीं की क्या हो रहा है? जब अदिति डिनर या कुछ और सर्व कर रही थी तो विशाल उसके चूतड़ों पर अपना हाथ फेर रहा था हर बार और उसके जिश्म को कहीं भी छू रहा था, ये भूलकर के उस वक़्त आनंद भी वहीं था। हर बार जब । विशाल वैसा कर रहा था तो बस आनंद के लिए ऐसा था की आग में तेल लगाने के समान। क्योंकी वो बहुत ही उतेजित होता जा रहा था अदिति को अपने सामने विशाल से चुदते हुए देखकर।

अदिति अपनी तरफ से जैसे आनंद को जला रही थी। अपने पति से सहलवा कर उसके सामने और विशाल को खुद बढ़ावा दे रही थी वैसा करने को, कभी विशाल की गोद में बैठ जाती थी अपने छाती को उससे दबाते हुए, या कभी हल्के से विशाल के मुँह पर किस करती थी आनंद को देखते हुए, और एकाध बार विशाल का हाथ अदिति की जांघों पर भी फिर रहा था, उसकी ड्रेस को इतना ऊपर करते हए की उसकी पैंटी थोड़ा दिखने लगे।

अदिति एक आँख से आनंद को देखा करती जब-जब उसकी ड्रेस जाँघ के ऊपर उठ रही थी। अदिति समझ रही थी की आनंद को जला रही है, मगर उसको यह नहीं पता था की वो एक शेर की भूख को और भी बढ़ा रही है वैसा करके।

एक बार ऐसा हुआ की अदिति जब प्लेटें धो रही थी सिंक के पास तो आनंद मूतने गया टायलेट। टायलेट तो किचेन के दूसरी तरफ था, और टायलेट से निकलकर किचेन से होकर गुजरना होता था, कारिडोर में वापस जाने के लिए। जैसे ही आनंद निकला तो देखा की अदिति प्लेट धो रही तो करना क्या था। तुरंत उसको फिर से पीछे से जकड़ा और उसका हाथ जहाँ-जहाँ भी पड़ता अदिति के जिश्म पर वहीं मसलने लगा कसके जोश में आकर और लण्ड को फिर रगड़ने लगा उसकी गाण्ड पर कपड़े के ऊपर से ही।

अदिति इनकार कर रही थी स्ट्रगल करते हुए, और बैठ जाती थी नीचे। मगर उसकी बाहों में ही जकड़ी हुई थी तो आनंद उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेने की कोशिश कर रहा था, उसके गले को चाटते हुए। उसने अपनी उंगलियों से उसकी एक ब्रा की स्ट्रैप को बिल्कुल नीचे कर दिया बाजू पर, और उसकी कांख को चाटने लगा था।

अदिति के जिश्म के सभी रोंयें खड़े हो गए थे। अदिति कांपती आवाज में बोली- “रुक जाइए प्लीज... रुक जाइए, आप अभी नशे में हो, ऐसे सही नहीं है, मुझे ऐसे पसंद नहीं है, रुकिये रुकिये प्लीज, वरना मैं चिल्लाऊँगी अब...”

और जैसे अक्सर होता रहता है की नशे में होने वाला आदमी हिंसक हो जाता है, आनंद भी वैसे ही गुस्से में आकर बोला- “क्या कहा, चिल्लाओगी? किसलिए चिल्लाओगी? मैं तुमको चोदना चाहता हूँ और तुम भी तो वही चाहती हो। चलो अब अपने बिस्तर पर चलो। मेरा लण्ड और इंतेजार नहीं कर सकता, इसको तुम्हारे अंदर गहराई में घुसाना है मुझे घर वापस जाने से पहले। और मुझे पक्का यकीन है की तेरा पति भी यही चाहता है की मैं तुझको चोदूं मजे से..” कहकर आनंद लड़खड़ाया और उसकी पीठ दीवार से टकराई।

अदिति ने उसको एक और धक्का दिया अपनी तरफ से और थोड़ा गुस्से में कहा- “मैं कोई रंडी नहीं हूँ की आपका जब जी चाहे मुझे बिस्तर पर लेटाएं। बहत हो चुका, मुझे एक बार और छने की कोशिश की तो यहाँ से धक्के देकर बाहर निकाल दूंगी। समझे आप?” कहकर अदिति भागते हुए लाउंज में चली गई सभी प्लेटों को सिंक में छोड़कर।

आनंद ने किचेन में फर्श पर बैठकर खुद से कहा- “साला लगता है मैंने बकवास कर दिया यह सब कहकर उसे। लगता है मुझको चढ़ गई है। क्यों ऐसे बकवास बातें की मैंने उसके साथ। चलो अब माफी माँगना पड़ेगा मुझे..."

अदिति अपना सिर विशाल की छाती पर रखकर बैठी हुई थी। उस वक्त विशाल का चेहरा टीवी पर गड़ा हुआ था और वो समझ रहा था की आनंद तब भी टायलेट में ही है। आनंद वहाँ आया और हिम्मत करके उसी सोफे पर बैठा, जहाँ मियां बीवी बैठे हुए थे, तो अदिति बीच में पड़ गई, उसके दोनों तरफ दो मर्द बीच में अदिति। जैसे ही आनंद बैठा अदिति खड़ी हो गई उठने के लिए। मगर आनंद ने उसका हाथ पकड़कर बैठने को कहा।

विशाल ने हँसते हुए पूछा- “क्या हुआ?” अदिति तब भी गुस्से में थी और आनंद को तिरछी नजरों से देख रही थी, तो विशाल ने उसको बैठने को कहा।

आनंद बोला- “विशाल तुम्हारी बीवी मुझसे नाराज हो गई भाई। शायद मैंने कुछ ऐसा कह दिया जो मुझे नहीं कहना चाहिए था। उसको बोलो मुझे माफ करने को यार.”

विशाल ने अदिति को फिर से हँसते हुए देखा और कहा- “आनंद भाई इसकी गुस्से की चिंता मत करो, यह भी सभी बीवियों की तरह है। तुम उससे बातें करो, मैं छत पर और एक सिगरेट पीकर आता हूँ...”

जब विशाल खड़ा हुआ चलने को तो लड़खड़ाया और अदिति जल्दी से उठी उसको सहारा देने के लिए और कहा “विशाल मुझे डर है के तुम गिर ना जाओ, बाहर मत जाओ, यहीं पर सिगरेट पी लो, बस एक खिड़की खोलकर सिगरेट का धुआँ बाहर फेंकना..."

मगर विशाल जिद करते हुए बाहर चला गया अदिति से- "चिंता मत करो। मैं ठीक हूँ...” कहकर।

अदिति छत वाले दरवाजे के पास खड़ी विशाल को देख रही थी और उसने हाथ से अदिति को वापस अंदर जाने को कहा। अपने हाथ में पर्दा पकड़े हुए अदिति मुड़कर जहाँ आनंद बैठा था देखने लगी। अपनी आँखों के झरोंखों से उसको देखा और एक गहरी साँस लेते हुए वापस सीधे उसके चेहरे में देखते हुए कहा- “मैं आपके पास नहीं आऊँगी..”

यह लाइन अदिति ने बिल्कुल उस तरह से कहा जैसे एक बच्चा किसी से नाराज होकर कहता है। जब अदिति विशाल को छत पर देख रही थी उस वक्त आनंद अदिति के पिछवाड़े को तारीफ कर रहा था, और जब अदिति ने मुड़कर वो लाइन कहा तो आनंद ने दोनों हाथों को जोड़कर उसके सामने अपने सिर को झुका दिया जैसे मंदिर में भगवान के सामने किया जाता है।

आनंद ने कहा- “मुझे बेहद अफसोस हैं उन बातों के लिए जो मैंने किचेन में कहा था। मुझे माफ कर दो प्लीज्ज... देखो यह सब इस शराब का कसर है। तम जैसी खबसरत लडकी. अच्छी नहीं दिखती है नाराज होते हुए, हँसती और मुश्कुराती हुई बेहद हसीन लगती हो तो छोड़ो गुस्सा और माफ करो ना प्लीज... डार्लिंग.."

 


उसकी बातों को सुनकर अदिति मश्कराई और उसके तरफ चलते हए बढ़ी, और उसके सिर पर धीरे से हाथ मारते हुए कहा- “तो तुमको पीना नहीं चाहिए जब किसी औरत के साथ जाना है तो स्टुपिड..”

आनंद ने झट से अदिति को अपनी गोद में खींचा। जब वो उसकी जांघों पर गिरते हुए बैठी तो उसकी ड्रेस और भी ऊपर उठ गई और उसकी खूबसूरत गदराई जां फिर से आनंद की आँखों से सामने आ गई। उसने भी बिल्कुल देर नहीं किया अपने हाथों को उसपर फेरने के लिए। उसी वक्त उसका मुँह अदिति के होठों को चूम रहा था और अदिति मुड़कर छत कि तरफ देख रही थी की कहीं विशाल देख तो नहीं रहा।

अदिति फिर बोली- “नहीं यहाँ विशाल को सब नजर आ सकता है, यहाँ नहीं यहाँ नहीं। छोड़ो छोड़ो ना...” और उठकर फिर से छत की तरफ देखते हुए चलकर कारिडोर से होकर किचेन की तरफ जाने लगी।

आनंद ने खुद से कहा- “हम्म... रसोई की तरफ जा रही है ताकी वहाँ उसके पति को कुछ नहीं दिखे और मुझको नजरों से इन्वाइट करते हुए गई क्योंकी उसने कहा- “यहाँ नहीं.” मतलब यहाँ नहीं बल्की किचेन में। ठीक है तो चलता हूँ एंजाय करने अब।

अदिति इस बार अपने आप ही दीवार से पीठ किए हए खड़ी थी, लगता था की जैसे वो आनंद का इंतेजार कर रही ही। जैसे ही वहाँ आनंद गया, अदिति की चूचियों को दबाया अपनी छाती से और अदिति ने अपना सिर ऊपर उठाते हुए आँखें बंद कर लिया जैसे किस करने के लिए इंतेजार कर रही हो।

विशाल बाहर कैसे भी करके छत वाली खिड़की के पास जाते वक्त गिरते-गिरते बचा क्योंकी नशे में था। अगर गिर जाता तो वहीं कांक्रीट फ्लोर पर चिपक के मर जाता। तब उसको डर लगा और छत पर लौट गया क्योंकी बेकाबू था, कंट्रोल नहीं था और छत से गिरने की संभावना थी। वो देखना चाहता था उन दोनों को, मगर छत वाली खिड़की तक नहीं चला गया उससे।

आनंद ने अदिति के गालों पर हाथ दबाकर उसके मुँह को खोलने को कहा, और अदिति ने मुँह खोला तो आनंद ने अपना जीभ उसके मुँह में डालते हुए उसको चूसने को कहा, जैसे कुछ देर पहले चूस रही थी। अदिति उसकी जीभ को मुँह में लेकर जोश में चूसने लगी, तब तक आनंद अपने हाथों से काम कर रहा था। उसकी ड्रेस उठाकर उसका हाथ ने बिल्कुल देर नहीं की उसकी पैंटी तक जाने में। इस बार अदिति उसको नहीं रोक रही थी, वो किस एंजाय कर रही थी और कुछ ऐसी आवाज सुनाआई दे रही थी उसके मुँह से- “हम्म्म्म ... हम्म्म्म ....

हम्म्म्म ...” किस करते वक्त।

उसी समय आनंद के हाथ नीचे उसकी पैंटी को नीचे करने की कोशिश में लग गये। फिर जब आनंद ने देखा के अदिति ऐतराज नहीं कर रही है तो धीरे से पैंटी को नीचे किया उसकी आधी जांघों तक और रुका। धीरे से उसकी चूत पर हाथ फेरा ऊपर किस करते हए। अदिति अपने पैर की उंगलियों पर खड़ी हो गई और जिश्म में जैसे मस्ती आ गई हो, वो आनंद की जीभ को बड़े जोश में चूमने लगी, अपने दोनों हाथों को आनंद की पीठ पर मसलते हुए।

आनंद खुश हो गया क्योंकी अब तो पैंटी आधा नीचे थी, चूत फ्री थी घुसाने को तो आनंद ने जल्दी से अपना जिप खोला। दोनों खड़े थे और आनंद को थोड़ा झुकना पड़ा अपने लण्ड को हाथ में लेकर अदिति की चूत में डालने के लिए। अपने दोनों पैरों को आनंद ने थोड़ा टेढ़ा किया और हल्के से जैसे ही उसने लण्ड को चूत से रघड़ा। अदिति ने किस खतम करते हुए अपने पैंटी को दोनों हाथों से ऊपर खींचा।

आनंद बिल्कुल भीखारी की तरह भीख माँगने लगा यह कहते हुए- “सुनो मेरी जान, प्लीज... प्लीज.. पैंटी को नीचे करो ना... बस दो मिनट में कर लूँगा। देखना जैसे ये अंदर घुसेगा तुमको और मुझे भी बेहद मजा आएगा

और मेरा यकीन करो कुछ ही पल में खतम हो जाएगा। मुझे इतनी जल्दी है की झट से झड़ जाऊँगा प्लीज... करने दो मेरी जान। बहत मन कर रहा है, देखो मेरा लण्ड बाहर ही निकल दिया है मैंने। बस तुम्हारे अंदर डालना है। करने दो अदिति प्लीज... पैंटी नीचे करो ना..”

अदिति बिना कुछ बोले सिर्फ अपने सिर को ना में हिला रही थी। उसके हाथ आनंद के कंधे पर थे और अदिति ने उसके लण्ड को देखा, तो आनंद उसका एक हाथ पकड़कर अपने लण्ड तक ले गया और अदिति ने अपने हाथ को वहाँ जाने दिया, उसके लण्ड को छूने दिया अपने हाथ को, फिर तुरंत एक पल में झट से वापस खींच लिया गहरी सांस लेते हुए।

तब आनंद ने अदिति के सिर को नीचे की तरफ दबाते हुए उसको नीचे बैठने के लिए पुश किया। अदिति नहीं बैठ रही थी मगर आनंद की बिनती भरी आवाज ने उसको बैठने पर जैसे मजबूर कर दिया। और फिर बहुत जल्द अदिति का मुँह आनंद के लण्ड के सामने था। उसके लण्ड को अपने मुँह के पास देखकर अदिति ने अपना चेहरा दीवार के तरफ कर लिया। वो जोर से हाँफती जा रही थी गहरी साँसें लेते हुए। उसके दिल की धड़कनें बहुत ही तेज थी। आनंद ने अपने लण्ड को हाथ में लेकर अदिति के गाल, चेहरे, मुँह, होठों पर रगड़ा, और अदिति से अपने मुँह में लेने को कहा।

आनंद- “ले लो, ले लो ना मेरी जान प्लीज ले लो। विशाल देर नहीं करेगा। इससे पहले की वो वापस आए ले लो जानम, चूस लो एक बार प्लीज... मुझे बहुत ही मन कर रहा है। इंतेजार नहीं हो रहा मुझसे, ले लो ना मेरी जान प्लीज.."

हाँफते हुए अदिति सिर को ना में हिलाती जा रही थी और एक तड़पती हुई आवाज में कहा- “नहीं आनंदजी हमें यह नहीं करनी चाहिए, यह ठीक नहीं है। मैंने आपको इतना किस किया यही बहुत है। अब बस मुझे जाने दीजिए प्लीज..” जब अदिति ने इस जुमले को कहा तो फिर से उसी रोल-प्ले की दुनियां में खो गई और उसको लगा की वो विशाल के साथ है और आनंद का रोल-प्ले खेल रही है।

मगर आनंद कुछ नहीं सुनना चाहता था, तो इस बार अदिति को ऊपर खड़ा किया और वो नीचे गया, अदिति की ड्रेस को जोश में ऊपर उठाकर उसकी पैंटी को जैसे गुस्से में नीचे खींचा बड़ी जोर से, और अपने मुंह को सीधे अदिति की चूत पर लगाया। आनंद ने यह सब कुछ इतना जल्द किया की अदिति को अपने पैंटी को ऊपर उठाने का मोका ही नहीं मिला।

अदिति दीवार से एक बुत की तरह चिपकी हुई थी और जब आनंद की जीभ उसकी चूत के बीचोबीच फिरने लगी तो रुक-रुक के गहरी साँसें लेते हुए बंद आँखों से जिश्म को ऐंठने लगी। आनंद खुश और बहुत ज्यादा उत्तेजित था, उसकी चूत को चाट रहा था और एक हाथ से उसकी दोनों जांघों को अलग करने की कोशिश कर रहा था, ताकी चूत को चूसने, चाटने में असानी हो। अदिति ने अपने टाँगों को अलग करने से नहीं रोका। मान गई और दोनों पैरों को एक तरफ कर दिया ऊपर छत देखते हुए फिर आँखें को बंद करते हुए। जैसे ही आनंद का जीभ उसकी चूत की पंखुड़ी के बीच में दाखिल हुई जहाँ वो गीली होनी शुरू हो गई थी। अदिति ने एक गहरी सांस लेते हुए तड़पती आवाज में कहा- “ओहह... हम्म्म्म ... उहह...” किया।

तब आनंद ने अपने एक उंगली को उसकी चूत के छेद पर धीरे से फीराया, जो बिल्कुल भीगी हुई थी, तो आनंद ने खुद से कहा- “एकदम गीली हो गई है, मतलब बिल्कुल गरम और तैयार है करने के लिए, फिर भी इनकार कर रही है..."

आनंद ने अपने जीभ से अदिति को समझ लो चोदा। जीभ को अंदर लूंसा जितना हो सका। जीभ को अंदर-बाहर करते हुए उसकी नमकीन लज्जत को महसूस किया, वो नमकीन रस आनंद को और भी बहुत ज्यादा उतेजित करता जा रहा था। उसका लण्ड एक रोड के माफिक खड़ा हो गया था और अदिति को चोदने के लिए बेकरार था। अदिति तड़पती गई, अपने पैर की उंगलियों पर खड़ी हो गई और अपने हाथों से आनंद के बालों को जोर से पंजे में लेकर खींचती गई।

अदिति का जिश्म साँप की तरह ऐंठ रहा था, काँप रही थी तड़प रही थी और उसी तड़पती आवाज में बोली “बस अब रुकिये आनंदजी बस... मुझसे और नहीं सहा जाता बस कीजिए आनंदजी..” यह सब बहुत हाँफते हुए अदिति बोले जा रही थी, उसकी सांसें भारी हो गई थी, उसकी आवाज बदल रही थी, उसकी धड़कन अबनार्मल थी।

फिर उसी तड़पती हुई आवाज में कहती गई- “बस रुकिये अभी नहीं, अभी ठीक समय नहीं है। रुकिये ना आनंदजी... हे भगवान्... मैं क्या करूँ अब?” और फिर अदिति जल्दी से नीचे बैठ गई और आनंद के मुँह को अपने मुँह में ले लिया चूसने को और अपने एक हाथ को आनंद के लण्ड पर खुद रख दिया, और आनंद की जीभ चूसते हुए हाथ से आनंद के लण्ड को हाथ में सहलाने लगी।

तभी छत का दरवाजा बंद होते सुनाई दिया, मतलब विशाल अंदर आ रहा था। दोनों जल्दी से खड़े हुए। अदिति ने अपनी पैंटी को झट से ऊपर खींचा और आनंद ने अपने लण्ड को अंदर करके जिप को ऊपर खींचा।

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_20 आनंद ने अदिति के साथ डांस किया

तीनों फिर लाउंज में एकठे बैठे थे।

आनंद को एक आइडिया आया, और उसने कहा- "हे विशाल... यार तेरा बर्थ-डे है तो एक डान्स क्यों नहीं करता अदिति के साथ तू?"

विशाल को आइडिया पसंद आया। क्योंकी उसको पता था की उसके बाद वो खुद अदिति से डान्स करना चाहेगा।

तो म्यूजिक सिस्टम ओन किया गया एक स्लो डान्स की सी.डी. स्टार्ट की गई, और विशाल ने अदिति को डान्स के लिए उठाया सीट से। और लाउंज में जगह बनाया गया, सोफा वगैरा को हटाकर।

आनंद ने कहा- “लाइट को डिम करना चाहिए, या कुछ बुझा देना चाहिए, तब ज्यादा मजा आएगा डान्स का.."

विशाल ने कहा- “लाइट को डिम किया जा सकता है रिमोट से, और वही किया गया। लाइट को बिल्कुल धीमी

कर दिया गया और विशाल और अदिति स्लो डान्स करने लगे, एक दूसरे को बाहों में लिए।

लाउंज की धीमी रोशनी में आनंद एक कोने में सोफे पर बैठा पति पत्नी को एक दूसरे से जकड़े डान्स करते देख रहा था। उसकी नजर तो सिर्फ अदिति पर थी, और अपने लण्ड को दबाता जा रहा था, उसको और उसके जिश्म को निहारते हुए। दोनों के पंजे की उंगलियां एक दूसरे की उंगलियों में जकड़े और दूसरा हाथ एक दूसरे की पीठ पर, और दोनों के जिश्म एक दूसरे से बिल्कुल सटे हुए उस म्यूजिक की धुन पर दोनों बिल्कुल जैसे एक लोरी सुनते हुए मस्त झूम रहे थे धीरे-धीरे, हौले-हौले। जब-जब विशाल तुर्न ले रहा था और अदिति आनंद को फेस कर रही थी, तो हर बार वो आनंद को देख रही थी और उसको अच्छी तरह से पता था की वो भी सिर्फ उसी को देख रहा है।

अब क्योंकी विशाल ने ज्यादा पी रखा था तो उससे ठीक से डान्स नहीं किया जा रहा था। वो थोड़ा लड़खड़ा रहा था और अदिति को उसे पकड़ना पड़ रहा था, और ऐसे में एक बार विशाल के जूते अदिति की पैर की उंगलियों पर पड़े और वो चिल्ला उठी। तभी विशाल ने अदिति को आनंद के साथ डान्स करने को कहा। अदिति नहीं चाहती थी आनंद के साथ। मगर इनकार भी नहीं कर पाई नहीं तो बदतमीज कहा जाता उसे।

आनंद ने हाथ बढ़ाया अदिति की तरफ डान्स के लिए, तो अब अदिति आनंद की बाहों में थी डान्स करते हुए। विशाल बेशक दोनों को देख रहा था, मगर इस तरह से की उन दोनों को पता ना चले की वो देख रहा है। लाउंज के जिस साइड में दोनों डान्स कर रहे थे उधर की रोशनी कम कर दी गई थी पहले से। मगर अब विशाल ने उस साइड की रोशनी को और भी धीमी कर दिया, ताकी उन दोनों को और भी एरोटिक फीलिंग्स हई डान्स करते हए। और खुद जिस साइड में विशाल बैठा था सोफे पर उधर की लाइट बिल्कुल आफ कर दिया ताकी वह लोग उसको नहीं देख सके की वो किस तरफ देख रहा है।

आनंद ने अदिति को खूब टाइट पकड़ा अपने जिश्म से जकड़ते हुए और उसके हाथों को अपने कंधों पर ले गया।

अदिति ने ना चाहते हुए भी विशाल की तरफ देखते हुए अपने हाथों को आनंद के कंधों पर किया और धीरे से आनंद के कान में कहा- “उसने उधर के बत्ती बुझा दी है, वो इधर ही देख रहा होगा, हमको वो नजर नहीं आ रहा। मगर हम उसको दिख रहे हैं."

आनंद ने उसके नंगे कंधे पर से अपने हाथ को धीरे-धीरे फेरते हए, उसकी कांख तक गया और अपने हाथ को उसकी चूचियों पर फेरा और जवाब दिया- “वो बिल्कुल नशे में है, अगर कुछ देख भी रहा होगा तो इतनी दूर से उसको ठीक से नजर नहीं आएगा क्योंकी लाइट बहुत धीमी है, और वैसे इतना नशे में होते हुए कुछ भी ठीक से नजर नहीं आता और सुबह कुछ याद भी नहीं रहेगा उसे, फिकर मत करो..."

आनंद का हाथ तब तक अदिति के चूतड़ों पर गया और उसको जोर से दबाया इस तरह के अदिति का आगे वाला हिस्सा आनंद के आगे से जोर से दब गया और उसका लण्ड ठीक उसकी चूत के ऊपर था कपड़े के अंदर से ही, और वो बिल्कुल खड़ा था तो अदिति ने उसके लण्ड महसूस किया अपने जिश्म पर। ऊपर से आनंद अपने होंठ अदिति के गले पर, कान के कोने में फेर रहा था, अपनी गरम साँसों से अदिति के जिश्म को गरम करते हुए।

डान्स काम्क होने लगा और विशाल यही देखना चाहता था और छुपकर खूब मजा ले रहा था, उसको बहुत मजा आता था अदिति को किसी और की बाहों में देखते हुए और जिस तरह से अदिति कसमसा रही थी आनंद की बाहों में उसकी शैतानी की वजह से वो विशाल को बहुत ही मजा दे रहा था। आनंद, अदिति को दुलारने लगा डोलते हुए।

अदिति के गले का दोनों हिस्सा भीग चुका था आनंद की जीभ से, और जिश्म तो बिल्कुल ही चिपके हुए थे। दोनों के एक दूसरे के साथ। अदिति ने भी बड़े जोर से आनंद को जकड़ लिया था अपनी बाहों में, जिससे आनंद को बेहद मजा आ रहा था। अदिति कुछ देर के लिए जैसे विशाल को बिल्कुल भूल गई हो और अपने आपको आनंद की बाहों में इस तरह से खो दिया जैसे वही उसका पति था।

उस मधुर म्यूजिक की धुन और धीमी रोशनी। ऊपर से आनंद के बाहों की गर्मी और उसका दुलार अदिति को मदहोश कर रहे थे। वो सच में एक रोमांटिक और बहत रोमांचक पल था तीनों के लिए, डान्स सेनयल था, जिश्म में गर्मी थी और सुनहरा मौका था। आनंद से भी इंतेजार नहीं हो पा रहा था।

 
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