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Adultery The Innocent Wife (hindi version)



अपने मन की गहराई में अदिति ने यह सोचा की उसका पति वहीं पर है और वो किसी दूसरे मर्द की बाहों में उस तरह से चिपकी हुई है और पति को कोई ऐतराज नहीं हो रहा है। इस सोच ने अदिति में एक और गरम एहसास जगाया और उसने खुद को बहने दिया उस मौके के बहाव में। आनंद की खुशी की इंतेहा नहीं थी की वो अपनी बाहों में एक इतनी हसीन जवान औरत को लेकर झूम रहा था उसके पति की हाजिरी में, और पति कुछ नहीं कर सकता था।

उधर विशाल सब कुछ देखते हुए इस बात से खुश हो रहा था की अब उसका सपना पूरा जरूर होगा अदिति को किसी और से चुदवाते हुए देखने का। तीनों के दिमाग में कुछ ना कुछ था सबके सकारात्मक होने के लिए। जिसके लिए सब अपने-अपने में मगन थे उस वक्त।

आनंद का मोटा खड़ा लण्ड रगड़ता जा रहा था अदिति की जांघों के बीच ठीक चूत के ऊपर, और अदिति सब महसूस करते हुए आनंद को बाहों में जकड़े डान्स करती जा रही थी। ऊपर आनंद हर बार उसके बालों को गले से हटाते हुए उसके गले को चूम और चूस रहा था। अदिति होश खोती जा रही थी और ऐसा बिहेव कर रही थी जैसे उस वक़्त दोनों अकेले हैं वहाँ, जैसे विशाल वहाँ है ही नहीं उसके लिए।

जब आनंद ने उसके गले से उसके बाल हटाए तो अदिति ने आनंद की गरम साँसों को महसूस किया अपने गले के ऊपर। अदिति ने फिर उसकी गरम मगर भीगी हुई जीभ को महसूस किया अपने गले पर, जिससे अदिति के जिश्म के सभी रोंयें खड़े हो गये और उसके जिश्म में एक कांपती हुई लड़र दौड़ी। अदिति को पता था आनंद क्या चाहता था उस वक्त। और कुछ पल के लिए अदिति भी वही चाहती थी। मगर जब भी वो अपने आपको आनंद को समर्पण करना चाहती थी तो विशाल का खयाल उसको वैसा करने से रोकती थी।

अदिति तुरंत मुड़कर विशाल को नजरों से ढूँढने की कोशिश करने लगी, मगर विशाल ने अपने आपको छुपा रखा था उधर।

आनंद का हाथ धीरे-धीरे अदिति की ड्रेस के नीचे गया और उसकी पैंटी पर पहुँचा और आनंद ने उसके चूतड़ों को जोर से दबाया अपने हाथ में, और ऊपर आनंद का मुँह अदिति के मुँह को ढूँढ़ रहा था, और अदिति ने प्यासी जैसी होकर अपने मुँह को खुद जल्दी से खोल दिया और आनंद के मुँह को अपने मुँह में ले लिए। उसकी बाहें आनंद को जकड़े हुए थीं, जिश्म एक दूसरे से चिपके हुए इस तरह से किस कर रहे थे जैसे जिंदगी में कभी नहीं किया हो। एक दूसरे के मुँह, होंठ, जीभ, गाल को जैसे दोनों खा रहे थे भूखों की तरह। म्यूजिक बजता जा रहा था, दोनों एक दूसरे को बाहों में जकड़े और किस में डूबे उस धुन की लहर पर झूम रहे थे।

उधर विशाल अपने कोने में से दोनों को प्यासा देख रहा था।

किस के दौरान आनंद ने अपनी उंगली को अदिति की चूत में डालने की कोशिश की, तकरीबन डाल ही दिया

था, मगर पूरी तरह से नहीं। क्योंकी उस वक्त अदिति का जिश्म उसके जिश्म से एकदम से चिपका हवा था, और आनंद को पूरी पोजीशन नहीं मिली वो करने की। आनंद ने उस तरफ देखा जहाँ विशाल बैठा होना चाहिए था और क्योंकी वो नजर नहीं आया तो आनंद ने अपनी जिप खोली, लण्ड को बाहर निकाला, अदिति की ड्रेस को ऊपर किया, उसकी पैंटी को नीचे किया उसकी घुटनों तक और गरम साँसों के साथ अपनी टाँगों को थोड़ा टेढ़ा करते हुए, जैसे ही अपने लण्ड को अदिति की चूत के अंदर डालने जा रहा था, म्यूजिक सिस्टम में सी.डी. स्किप हुआ और एक ऐसा जोर से कान को फाड़ देने वाला शोर हुआ की सब कुछ बिगाड़ दिया इन दोनों के बीच।

दोनों को तुरंत एक दूसरे को छोड़ना पड़ा और म्यूजिक सिस्टम के पास जाकर सी.डी. को बदलना पड़ा। उसी वक़्त, लाइट को ओन किया गया सब ठीक करने के लिए, तो जो माहौल बना था उस वक्त, सब खराब हो गया, मूड बदल गया और कुछ भी वैसा नहीं था जो उस वक्त था। अगर वो सी.डी. स्किप नहीं होता तो आनंद अपने लण्ड को डालने वाला था अदिति के अंदर।

अदिति जैसे इंतेजार कर रही थी उस वक़्त आनंद के लण्ड को अपने अंदर घुसाने को, उसकी पैंटी घुटनों तक नीचे कर दी गई थी और उसने कुछ नहीं कहा था, किस करती जा रही थी आनंद को उस वक़्त। आनंद को बहुत गुस्सा आया जब डिस्क स्किप हुआ, क्योंकी वो करने ही वाला था अदिति से।

आनंद भी अब हिम्मत हार गाया, और खुद सोचा- “वो मुझे करने दे रही थी, उसकी पैंटी को मैं उसके घुटनों तक नीचे किया मगर उसने कुछ भी नहीं कहा। जब मेरी उंगली उसकी चूत में घुसी तब भी उसने कुछ नहीं कहा। जब मैंने अपने लण्ड को बाहर निकाला पैंट से तब भी अदिति ने कुछ नहीं कहा। मुझको जकड़े हुए किस किए जा रही थी, मतलब वो भी चाहती थी के मैं उसको चोदूं इस बार। साला मेरा किश्मत ही खराब है आज।

सही मौका मिला भी तो सब गड़बड़ हो गया। मूड खराब हो गया अब तो मेरा भी..”

आनंद चलकर उस हिस्से में गया जहाँ विशाल सोने का नाटक कर रहा था।

अदिति ने लाइट ओन किया और विशाल को हिलाते हुए कहा- “विशाल, विशाल, उठो... उठो ना..."

आनंद तब अदिति के पास आया और धीरे से उसके कानों में कहा- “सुनो मत जगाओ उसे, अगर नींद में है तो रहने दो उसे। बहुत अच्छा मौका है चलो तुम्हारे बेडरूम में चलते हैं अब। ऐसा मौका कहाँ मिलेगा, कम ओन लेट्स गो बेबी...”

मगर तब तक अदिति का भी मूड बिगड़ गया था तो इनकार किया। आनंद ने कई बार कहा मगर वो नहीं मानी। और तभी आनंद और भी निराश हो गया क्योंकी उसका मोबाइल तभी बजा और टैक्सी ड्राइवर जो उसको घर वापस छोड़ने वाला था वो आ गया था नीचे, और इंतेजार कर रहा था। अफसोस के साथ उदास नजरों से उसने अदिति को देखा। अदिति ने हँसते हुए आनंद को छेड़ते हुए कहा- “बहुत अच्छा हुआ, अब क्या करोगे, कुछ भी नहीं कर पाओगे अब, जाओ अपनी वाइफ के साथ ही करना सब कुछ हिहीहीही...”

आनंद ने उससे कहा- “मेरा मजाक उड़ा रही हो, इतना कोशिश किया मैंने तेरे साथ और ठीक जब सब ठीक होने वाला था सब बिगड़ गया, कितना बदनसीब हूँ मैं भी। मगर मैं सब कुछ ठीक कर सकता हूँ अभी के कभी। मेरा मजाक उड़ाया तुमने। देखना चाहती हो की टैक्सी को वापस भेज दूं और आज रात यहीं ठहर जाऊँ रात भर। तब कैसे बचोगी मुझसे बोलो?”

अदिति ने कहा- “ओके साड़ी सारी... मगर आप वापस जाइए अब, हमको और मौका मिलेगा कोई जल्दी नहीं है...” और अदिति ने विशाल को फिर हिलाते हुए जगाया।

विशाल ने नींद से उठने का ड्रामा करते हुए पूछा- “क्या हुआ?”

अदिति ने बताया- “आनंद की टैक्सी आ गई है और वो वापस जा रहे हैं...”

आनंद ने बाइ कहा और निकल गया वहाँ से।

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कड़ी_21 नया लड़का

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आनंद चला गया तो मियां बीवी अपने बिस्तर पर आ गये।

यह पहली बार थी जब अदिति ने कहा- “अच्छा आज रात को मैं रोल-प्ले खेलूँगी ओके जान?"

विशाल बेशक बहुत खुश हुआ और उसको पता था की कौन सा रोल-प्ले अदिति खेलने वाली थी।

अदिति ने कहा- “ओके तुम आनंदजी हो और मैं घर पर अकेली हूँ और तुम मुझे चोदने आए हो, और अब मैं तुमसे घुल-मिल गई हूँ, हमारी दोस्ती हो गई है और तुम्हारे बहुत करीब आ गई हूँ, और तुम मुझको कहीं भी अक्सर मेरे जिश्म को छूते रहते हो तो मुझको पता है की किसलिए आए हो."

विशाल उत्तेजित हो रहा था मगर इतना पिया हवा था की अदिति को जवाब नहीं दे पा रहा था। अदिति ने बिना ब्रा के वो सेक्सी नाइटी को पहना और विशाल के ऊपर चढ़कर अपने नीचे वाले हिस्से को विशाल के लण्ड पर रगड़ते हुए ऊपर उसके छाती और गले को चूम और चाट रही थी। उस वक्त अदिति एक भूखी शेरनी की तरह थी। सच बात यह थी की आनंद ने उसको बहुत ज्यादा गरम कर दिया था। आनंद ने आग बहुत पहले लगा दिया था। अब विशाल का इश्तेमाल किया जा रहा था उस आग को बुझाने के लिए। इस रात को अदिति सब कुछ कर रही थी।

विशाल पीठ के बल लेटा हुआ था और अदिति अपनी दोनों टाँगों को उसकू कमर के दोनों तरफ करते हुए उसके ऊपर बैठी थी और रगड़ती जा रही थी अपने चूतड़ हिलाते हुए। फिर अदिति ने विशाल के कपड़े उतारे। आखीर में उसका अंडरवेर निकालकर जल्दी से नीचे फेंका। विशाल बहुत नशे में था, उसकी जुबान लड़खड़ा रही था बात करते वक्त। और जब अदिति ने उसके लण्ड को हाथ में लिया तो देखा की वो एक मरे हुए साँप की तरह मुरझाया हुआ था। अदिति नेतुरंत विशाल के चेहरे में देखते हुए बचपने की आवाज में कहा।

अदिति- “यह क्या जान, यह तो मरा हुआ है आज। आज मुझे इसकी सख़्त जरूरत है तो यह किसी काम का नहीं। मुझे यह मोटा और तना हुआ चाहिए आज। इसको जमकर खड़ा करो जल्दी।

विशाल ने लड़खड़ती जुबान से कहा- “आज हम सेक्स नहीं करेंगे, चलो सो जाते हैं। मुझे बहुत नींद आ रही है.."

अदिति ने बिल्कुल नहीं सोचा था की विशाल ऐसा जवाब देगा, उसको सेक्स की बहुत सख़्त जरूरत थी इस वक़्त, बिल्कुल गरम और तैयार थी चुदवाने के लिए। इसलिये अदिति ने जारी रखने की कोशिश किया, उसने लण्ड को सहलाया, मुँह में लिया, उसको उठाने की बहुत कोशिश किया, मगर वो एक रब्बर की तरह लचकिला खिलोना लग रहा था उस वक्त। और जल्द ही अदिति को विशाल की खर्राटे की आवाज सुनाई देने लगी।

और उसको समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे?

अदिति ने विशाल की छाती पर पूंसे मारते हुए कहा- “तुम बहुत बुरे हो विशाल, जब मुझे इसकी बहुत जरूरत है तो तुमने इतनी शराब पी ली की अब कुछ भी नहीं कर सकते हो, अब मैं क्या करूँ? कैसे खुद को खुश करूँ अब?"

अदिति ने अपने गीली चूत को विशाल के घुटनों पर रगड़ा, उसके छाती और गले को चाटते हुए वहाँ रगड़ती गई बार-बार। मगर मजा नहीं आ रहा था उसे। उसको चिल्लाने का मन कर रहा था और गुस्सा भी आया अदिति को। फिर सोने की कोशिश किया मगर नहीं सो पाई। तब वो बिस्तर से उतरी, अपनी नाइटी पर एक रोब डाला और छत पर गई, आसमान को देखने लगी। फिर नीचे गेट की तरफ देखा तो अचानक ओम याद आया उसे। उसके दिमाग में कुछ बात आई तो मुड़कर अपने कमरे में देखा और फिर एक गहरी ठंडी सांस लिया। वापस कमरे गई तो देखा विशाल बेहाल सोया हुआ था खर्राटों के साथ।

फिर अचानक अदिति अपार्टमेंट से निकली और लिफ्ट की तरफ जाने लगी। अपनी सेक्सी नाइटी में बहुत हाट दिख रही थी। हालांकी ऊपर से रोब पहनी हुई थी, फिर भी उसकी नाइटी की स्ट्रैप्स नजर आ रहे थे, और उसकी बिना ब्रा की चूचियां भी आधा नजर आ रही थीं उस पतले सी कपड़े में। उसके खुले बाल और नशीली आँखें बस अपनी तरफ किसी भी मर्द को बुला रही थीं।

अचानक जब एक औरत को सेक्स की जरूरत पड़ सकती है खासकर इतनी देर तक गरम होने के बाद, फिर जरूरत पड़ने पर वो अपनी प्यास नहीं बुझा पाती है तो इतने नीचे तक जा सकती है की किसी भी मर्द की तलाश में निकल पड़े। अदिति से तो यह उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। मगर किधर जा रही थी इतनी रात गये अपनी प्यास बुझाने को वो? वो शर्मीली, मासूम लड़की जिसको सेक्स का मजा क्या होता है यह भी नहीं पता था। आज इतनी गरम और उत्तेजित थी की उसे खुद को पता नहीं था की क्या कर रही थी उस वक्त। उसने लिफ्ट लिया और ग्राउंड फ्लोर गई। फिर उस गेट वाले गुमटी तक पहुँची। अपने रोब को ऊपर छाती पर थोड़ा खोल दिया जिससे उसकी क्लीवेज, नाइटी की स्ट्रैप, उसका नंगा कंधा और बाजू साफ नजर आ सके।

 
अदिति ओम से मिलने जा रही थी, मगर उसको झटका लगा वहाँ एक 50 साल के ऊपर वाले अधेड़ आदमी को पाकर। उस आदमी ने अदिति को देखते हए हैरानी में अपनी गहरी आवाज में कहा- “कोई प्राब्लम है? क्या मैं कोई मदद कर सकता हूँ मेडम?"

उस आदमी को देखकर अदिति को जबरदस्त झटका लगा। उसने रियलाइज नहीं किया था नीचे उतरने से पहले की ओम तो दिन की शिफ्ट करता है और रात को कोई और होता है वाचमैन के काम के लिए।

उस आदमी ने अदिति को ऊपर से नीचे तक देखा, कैसे भी हो वो भी मर्द था और कोई भी मर्द उसको उस रूप में आधी रात में अपने सामने देखकर अपने लण्ड को रोक नहीं पाता। मगर वो आदमी ने अपने काम को सीरियसली लेते हुए अदिति को गौर से देखा और पूछा- “मेरे खयाल से आप ऊपर रहती हो। है ना? कोई प्राब्लम है? मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ क्या?”

अदिति को बहुत शर्म आई की वो एक अजनबी मर्द के सामने तकरीबन नंगी खड़ी थी, वो भी बाहर। तो नशे में होने का नाटक करते हुए, लड़खड़ाती जुबान से कहा- “मेरे पति की बर्थ-डे पार्टी खतम हो गई और मैं एक सिगरेट की तलाश में निकली हूँ..” फिर अदिति ने बढ़िया आक्टिंग किया और खुद को नहीं संभालने की ढोंग करते हुए एक कदम मिस किया और जैसे गिरने वाली थी।

वाचमैन ने जल्दी से उसको संभालते हुए कहा- “ठीक है। मैं आपको सिगरेट दूंगा। मगर मुझे आपको वापस छोड़ने जाना होगा, आप नशे में हो और आप गिर कर खुद को चोट पहुँचा सकती हो। ठहरो मैं चलता हूँ आपके साथ..”

वाचमैन अदिति को थामकर लिफ्ट की तरफ चलने लगा। लिफ्ट के अंदर उस आदमी का हाथ अदिति के कंधों पर था, और अदिति ने अपना सिर उसकी छाती पर रख दिया आराम के लिए, जैसे वो सच में बिल्कुल नशे में थी। उसकी छाती उस आदमी की छाती पर दबी हुई थी। उस आदमी को कुछ-कुछ होने लगा इतनी खूबसूरत जवान औरत को आधी रात में अकेले अपनी बाहों में पाकर। वाचमैन ने उसकी क्लीवेज को देखा तो खुद को संभालना मुश्किल था उस वक्त।

फिर भी उस वाचमैन ने कंट्रोल किया और कहा- "तो आपके पति के पास बिल्कुल सिगरेट नहीं है?"

अदिति ने अपने आँखों को और ज्यादा नशीली बनाकर उसको जवाब दिया- “नहीं वो सिगरेट नहीं पीता, एक दोस्त आया था और वो चला गया और मैं सिगरेट पीना चाहती हूँ अभी। मेरा पति सो रहा है, मगर मुझको नींद नहीं आ रही है...”

वाचमैन ने सोचा- "इसका पति सो रहा है और यह इतनी जवान और खूबसूरत औरत इतनी रात गये बाहर है, ऐसे ही अच्छी औरतें रंडी बन जाती हैं जब पति उनके खयाल नहीं रखते। मैं खुद इसको अभी के अभी चोद सकता हूँ। चलो ट्राई मारता हूँ। घर के अंदर तक छोड़ने जाता हूँ और पति सोया होगा नशे में तो पटक के चोद दूँगा इस हसीन कन्या को..."

दोनों लिफ्ट से निकलकर अदिति के अपार्टमेंट तक गये और अदिति अपने दरवाजे के बाहर ही खड़ी हो गई उससे बात करते हुए बैंक यू कहकर। वाचमैन ने उसको धीरे बोलने को कहा। क्योंकी रात के उस वक्त सब लोग सो रहे थे। मगर अदिति नशे में होने का नाटक करते हुए और जोर-जोर से बात करने लगी। वाचमैन ने अदिति को दरवाजा खोलने को कहा और कहा- “मैं अपको आपकी बेडरूम तक छोड़ दूंगा.."

अदिति ने जोर से जवाब दिया- “क्या? मेरे बेडरूम? तुम मेरे बेडरूम में चलोगे?"

वाचमैन ने तुरंत अदिति के मुंह पर अपना हाथ रखते हुए कहा- “ऐसा मत बोलो कोई भी सुन सकता है..."

ठीक उसी वक्त पास वाले अपार्टमेंट में एक लड़का नेट सरफिंग कर रहा था। उसने बाहर आवाजें सुनी तो बाहर निकला और देखा की अदिति वाचमैन के साथ दरवाजे को थामे खड़ी हैं। जैसे ही वाचमैन ने लड़के को देखा उसने अदिति को छोड़ दिया दरवाजे पर और वापस लिफ्ट की तरफ जाने लगा।

वो लड़का जो सिर्फ 18 साल का था, अदिति की तरफ बढ़ा जो तब तक दरवाजे को थामे खड़ी थी वाचमैन को जाते देखते हुए। अदिति के करीब आकर लड़के ने आराम से पूछा- “कोई प्राब्लम है मेडमजी?"

अदिति ने अब भी नशे में होने का नाटक करते हुए लड़खड़ाती जुबान से उस लड़के की तरफ देखते हुए कहा “कौन हो तुम?”

लड़के ने जवाब दिया- “मैं राकेश हूँ आपका पड़ोसी। मैंने आपकी आवाज सुनी तो सोचा इतनी रात गये क्या हुआ होगा तो देखने आ गया...”

अदिति ने उससे कहा- “कोई प्राब्लम नहीं है...”

राकेश ने अदिति को नीचे से ऊपर तक देखा तो उसका खड़ा हो गाया। अदिति ने अपना दरवाजा बंद करते हुए राकेश को गुडनाइट कहा, तब तक वाचमैन जा चुका था। राकेश अपने कमरे में वापस गया और सेक्सी औरतों की पिक्स देखने लगा जो अदिति जैसी दिखती हों, और सोचा की अदिति के पास वापस जाएं। फिर बाहर निकला और अदिति के दरवाजे को नाक किया।

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कड़ी_22 विशाल अदिति को डिनर के लिये ले गया

अदिति ने अंदर से जवाब दिया- “मैं दरवाजा नहीं खोलूंगी राकेश।

राकेश ने कहा- “मेडमजी आप अकेली दिख रही हो, मैं आपको कंपनी देना चाहता हूँ। एक मिनट के लिए खोलिये ना, हम एक-दो बात तो कर सकते हैं..."

अदिति को खुद अजीब सा महसूस हुआ, जिस तरह वो बिहेव कर रही थी और सोचा की एक बच्चे से क्यों बात कर रही है, तो अंदर से ही जवाब दिया- “राकेश, तुम्हारे पेरेंट्स तुम पर चिल्लाएंगे, इस वक़्त तुमको सोना चाहिए था जाओ सो जाओ..."

मगर राकेश ने जिस तरह पोर्न साइट पर उन औरतों को देखा, रंडियों को देखा तो उसको अदिति को छूने का मन किया, उसको उस सेक्सी नाइटी में देखकर। उसने सोचा क्योंकी अदिति नशे में दिख रही थी तो वो उसको छू सकता था और अगर वो करने देती तो वो आगे भी बढ़ सकता था। मगर वो निराश हो गया क्योंकी अदिति ने दरवाजा नहीं खोला। सोने से पहले राकेश मूठ मारने गया अदिति को सोचते हुए तब सोया जाकर।

उधर अदिति ने एक बहुत खराब रात बिताई। सुबह के 5:00 बज चुके थे, मगर तब तक वो सोई नहीं थी और बेचैन थी। तकरीबन 6:00 बजे वो टायलेट गई और विशाल के जागने का इंतेजार करती रही। विशाल 6:30 जागा और तब तक अदिति को नींद लग गई थी।

विशाल ने अदिति को डिस्टर्ब नहीं किया, खुद उसको बुरा हैंगोवर हुआ था कल रात की वजह से। उसने चाय बनाया और जल्दी से एक शावर लिया और काम पर जाने के लिए तैयार हो गया। जाने से पहले उसने अदिति को बेड पर किस करते हुए उसको याद दिलाया की आनंद अपनी कार लेने आएगा अंडरग्राउंड पार्किंग से। अदिति को लगा के सब सपने में सुन रही थी, क्योंकी उस वक़्त वो बहुत गहरी नींद में थी। विशाल चला गया आफिस और अदिति सोती रही।

आनंद अपनी कार लेने आया ठीक जैसे ही विशाल आफिस के लिए निकल गया था। जरूर वो पहले अदिति से मिलने गया ऊपर। 15 मिनट तक आनंद ने दरवाजा खटखटाया और डोरबेल बजाया। मगर अदिति इतनी गहरी नींद में थी के उसको कुछ भी सुनाई नहीं दिया, रात भर नहीं सोई थी तो अब नींद की आगोश में थी।

अदिति सपने में देख रही थी की कोई बेल बजा रहा है और दरवाजा ठोंक रहा है, मगर उसके पैर नहीं उठ रहे थे, उठकर दरवाजा खोलने को। सपना ऐसा ही होता है। राकेश ने आनंद को देखा अदिति का दरवाजा खटखटाते हए। जितनी देर तक आनंद खड़ा रहा अदिति के दरवाजे के पास राकेश सब देखता रहा। राकेश सोचने लगा की कौन था यह आदमी जो इतने सवेरे अदिति को दरवाजा खोलने को कह रहा था, मगर अदिति नहीं खोल रही थी।

राकेश ने खुद से कहा- “हो सकता है की यह आदमी भी वही चाहता हो अदिति से जो मैं चाहता हूँ। मैं उसको चोदना चाहता हूँ इसलिए अदिति ने नहीं खोला तो क्या यह भी उसको वोदना चाहता है? आखिर यह है कौन? राकेश सोचता गया।

आनंद को आफिस के लिए देर हो रही था तो ज्यादा इंतेजार नहीं किया और चला गया वहाँ से। आफिस ड्राइव करते वक्त आनंद को याद आया की अदिति ने कहा था- “यह सही वक़्त नहीं है, मैं तुमको सही वक़्त आने पर खुद बताऊँगी...” जसका का मतलब यह था की अदिति आनंद से चुदवाने के लिए तैयार थी, मगर वक़्त वो बताएगी। यह सोचकर आनंद को आनंद मिला।

अदिति को हर वो मर्द जो पाना चाहता था, बस एक कदम दूर था। मगर कोई कामयाब नहीं हो रहा था।

 
राकेश एक स्टूडेंट था जो 8:00 बजे अपार्टमेंट से निकला, मगर उसकी नजरें अदिति के दरवाजे पर टकी हुई थीं। उसने अपने कान भी दरवाजे से लगाया यह सुनने के लिए की अदिति कुछ काम काज कर रही होगी तो उसको वह आवाज आएंगी। मगर कोई भी आवाज नहीं आई तो वो स्कूल चला गया। स्कूल में राकेश ने अपने दोस्तों से अदिति के बारे में कहा तो सभी ने उसको आगे बढ़ने को कहा अदिति के साथ।

दिन के दो बजे अदिति सोकर उठी तो उसका सिर दर्द कर रहा था। उसको इतना याद था की जाते वक्त विशाल ने कहा था की आनंद कार लेने आएगा मगर उसको कुछ पता नहीं की आनंद ने दरवाजा खटखटाया था

या नहीं। गरम पानी से नहाने के बाद अदिति ने गरम चाय पी और रात की बीती बातों को याद किया। वो सब भूलना चाहती थी मगर भुला नहीं पाई। हर वक्त उसको आनंद की गरम साँसें अपने गले पर महसूस हो रही थी, आनंद के छुवन, उसका रगड़ना, चूमना सब अदिति अब भी महसूस कर रही थी। आनंद की आवाज उसकी मिन्नतें सब सुन रही थी अदिति। अदिति ने याद किया की किस तरह एक बार आनंद उसकी चूत को चाट रहा था और अदिति बिल्कुल गीली हो गई थी और बहुत मन कर रहा था करने को फिर बी उसको माना किया था।

अदिति ने फिर याद किया के कल रात को कितनी सख़्त जरूरत थी उसको चुदने की। मगर विशाल नहीं कर पाया। रात की सभी बातें उसके दिमाग में एक मूवी की फ्लैशबैक की तरह चमकी और उसको फिर से बेचैनी हुई तो वो छत पर गई थोड़ा हवा खाने के लिए, तो ओम नीचे नजर आया। अदिति ने खुद से एक तकरार शुरू किया। सोचा की ओम से शरारत करें, फिर सोचा की खुद को परेशान करेगी वैसा करके। तो अपने रूम में वापस गई, बहुत बेकाबू थी, बेचैन थी, तो बिस्तर पर लेट गई तो फिर से नींद लग गई उसको।

विशाल ने उसको जगाया जब वो शाम को काम से वापस आया। अदिति जागी और उठकर रोने लगी। विशाल ने उसको बाहों में भरके बहुत प्यार से पूछा- “क्यों रो रही हो?

अदिति ने कहा- “मैंने कुछ नहीं बनाया है खाने को और दिन भर सोती रही.."

विशाल ने डिसाइड किया की आज बाहर रेस्टोरेंट में खाना खाने ले चले अदिति को। अदिति ने एक शर्त रखा की विशाल बिल्कुल शराब नहीं पिएगा। वो मान गया शर्त को। अदिति ने आराम से अपने ड्रेस सेलेक्ट किए बाहर जाने के लिए, मेकप वगैरा किया और रात के 8:00 बजे दोनों घर से निकले और उस एरिया की सबसे लग्जीरीयस रेस्टोरेंट पहुँचे।

राकेश ने दोनों को जाते हुए देखा। अदिति बहुत हाट दिख रही थी। एक ब्लैक ड्रेस में जिसकी गर्दन लो-कट थी

और उसकी क्लीवेज दिख रही थी। उसके बाल भी अच्छी तरह से बनाये हये थे और मेकप भी टाप था। उसकी क्लीवेज और घुटनों के ऊपरी हिस्से को देखिएगा। यही राकेश ने चेक किया जब अदिति और आनंद निकले थे घर से। अब यह बताने की जरूरत नहीं के रेस्टोरेंट में किस तरह दूसरे मर्द अदिति को देख रहे थे। उस ब्लैक ड्रेस में।

और इस ड्रेस में भी उसकी ब्रा के स्ट्रैप्स दिख रहे थे साथ में क्लीवेज और जांघे। अब सोचने की बात है जब वो टेबल के पास चेयर पर बैठी तो ड्रेस ऊपर गई और वेटर को क्या नजारा मिला देखने को और विशाल की नजरें वेटर पर थीं उस वक्त। विशाल के लिए यह एक बहुत अच्छा मौका था दूसरे मर्दो को अदिति को देखते हए देखना। यही कारण था की विशाल ने वैसी ड्रेस खरीदी थी अदिति के लिए। वो अदिति जो सिर्फ ट्रेडिशनल ड्रेस पहना करती थी उसको विशाल ने बिल्कुल माडर्न, हाट और सेक्सी बना दिया था, तो दूसरे मर्द कैसे नहीं देखते उसको।

खैर, डिनर जल्द ही खतम हो गया और दोनों गलियों में थोड़ा टहलने गये घर वापस जाने से पहले। शहर की उन अंधेरी गलियों में दोनों आशिक दिख रहे थे एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर घूमते हुए। घर वापस आते ही दोनों को सेक्स की जल्दी थी, क्योंकी कल रात को दोनों मिस किया था।

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
Update 23 विशाल और अदिति बिस्तर पर,

एक नये रोल-प्ले में विशाल के दिमाग में उस वक्त कुछ पक रहा था। अदिति को बाहों में लिए बेड पर उसको दुलारते हुए वो कुछ सोच रहा था। अदिति उस महीन नाइटी में थी बिना ब्रा के, उसकी चूचियां विशाल के छाती पर कचल रही थीं, अदिति की बाहें विशाल के कंधों से होकर उसके जिश्म के दोनों तरफ जोर से जकड़ी हुई थी। अदिति उस वक्त पूरी तरह विशाल के लिए थी, उसका तन पूरा का पूरा विशाल के आगोश में था।

विशाल ने उसके कान के नीचे अपनी जीभ फेरते हुए कहा- “हम्म... कल रात को आनंद ने तुमसे खूब मजा किया.."

अदिति खुश थी की उस वक़्त वो विशाल की बाहों में थी और उसकी मीठी बातों से पिघली जा रही थी, और अदिति के दिमाग में उस वक्त सिर्फ एक बात थी, वो यह की विशाल का मोटा तना हुआ लण्ड को अपने अंदर ले ले, जितनी जल्दी हो सके। उसको कोई ऐतराज नहीं था की वो आनंद के बारे में बात करे। क्योंकी वो नाम उनके सेक्स लाइफ का एक जरिया बन गया था। उसको मतलब था सिर्फ चुदने से और आर्गेज्म तक पहुँचने से।

अदिति उस वक्त हँसते, चुलबुलाते हुए विशाल को बिना रुके किस करती जा रही थी कभी उसके होंठों पर, कभी गले पर, तो कभी उसकी छाती पर अपने हाथों को विशाल के जिश्म पर चारों तरफ फेरते हए।

विशाल ने तब कहा- “तो बताओ क्या तुमने आनंद के साथ मजा नहीं किया कल रात को, जब मैं सो गया था। तब खूब मजा किया ना तुम दोनों ने?"

अदिति भी विशाल को दाँत काटते हए फिर उसके कान के नीचे वाले हिस्से को दाँतों से दबाते हए बोली- “क्या यही रोल-प्ले करना है आज? की वो मुझको बेड पर पटके जब तुम नशे में सो जाओ? हम्म.” कहकर अदिति खुद विशाल के ऊपर चढ़ गई और अपनी उंगलियों को उसके अंडरवेर के अंदर डालते हए उसके लण्ड को हाथ से पकड़ा और उसको बाहर निकाला।

विशाल ने कहा- “नहीं, आज मैं कुछ और ही खेलना चाहता हूँ मेरी जान। बोलो की तुम उस आदमी को जवाब करोगी जिसका नाम मैं अभी बताने वाला हूँ। बोलो बोलो?”

अदिति ने उसके लण्ड को हाथ में दबाते हुए उसको देखा, फिर अपनी दोनों जांघों को विशाल के जिश्म के दोनों तरफ करते हुए अदिति ने उसके पेट और छाती को चूमते हुए पूछा- “कौन है एक नया आदमी?” और उसने । अपनी जीभ को विशाल की छाती पर फेरते हुए उसके होंठों को अपने दाँतों में हल्के से दबाया। जिससे विशाल ने हल्के से दर्द से “अफफ्फ” किया और कहा।

विशाल- “हाँ आज उस आदमी से राल-प्ले करेंगे, जिससे आज तक नहीं किया है कभी। मैं चाहता हूँ की तुम बिल्कुल उसी तरह जवाब करो जैसे आनंद से खेलते हुए जवाब करती हो, बोलो ठीक है?"

अदिति- पर बताओ तो कौन? कौन है वो, क्या मैं उसको जानती हूँ?"

विशाल- “हाँ तुम उसको जानती हो अच्छी तरह से, वो रिश्तेदार है तुम्हारा."

अदिति ने उसको छूना बंद किया और उसके चेहरे में देखते हुए थोड़ी हैरानी से पूछा- “क्या.. मेरा रिश्तेदार? कौन... किसके बारे में बात कर रहे हो तुम?”

विशाल- “जान आज मेरे पापा तुमसे करेंगे। मैंने यह तब से सोच रखा है जिन दिनों हम उनके साथ उनके घर में रहते थे इसस्स्स्स ... मुझे बहुत उत्तेजना हो रही है, और बेताब हूँ उस राल-प्ले को खेलने के लिए। मैं तुम्हारा ससुर और तुम मेरी बहू... वाह... मजा आ जाएगा आज...”

 
विशाल ने यह सब कहते हुए अदिति को कसके बाहों में जकड़ा था और अपने लण्ड को जोर से उसकी जांघों के बीच रगड़ा। अदिति उसकी बाहों से निकलकर उठ बैठी, थोड़ा रूठी हुई अपनी एक उंगली को दाँतों के बीच दबाते हुए। विशाल ने उसको सहलाया।

अदिति ने उसके हाथ को हटाते हुए कहा- “आई डोन्ट लाइक इट, मैंने नहीं सोचा था की तुम यहाँ तक आ जाओगे, मुझे यह बिल्कुल नहीं पसंद। तुम हद से आगे बढ़ रहे हो अब..."

विशाल ने कहा- “कम ओन डार्लिंग, यह सच थोड़ा ही है। यह सिर्फ एक खेल है, हमारे सेक्स लाइफ को और मसालेदार बनाने के लिए और तुमको अच्छी तरह पता है की ऐसे खेल कर कितना मजा आता है चुदाई करने में, तो फिर बराई क्या है?"

मगर अदिति का मन नहीं कर रहा था और कहा- “शायद मैं ठीक से जवाब नहीं दे पाऊँगी इस रोल-प्ले को अदा करने में..”

विशाल ने कहा- “एक बार जो खेल शुरू हो गया तो सब ठीक हो जाएगा... तुमको बस इस रोल-प्ले में गुस्सा जाना है और यूँ आक्ट करना है की मैं ससुर हूँ और तुम अदिति बहू। मतलब विशाल अपने बाप का रोल करेगा

और अदिति, अदिति ही होगी."

विशाल ने उसको बहुत फुसलाया और धीरे-धीरे अदिति अपने रंग में वापस आई, और चुप हो गई। विशाल ने अपने उन दिनों के बारे में बात करना शुरू किया जब वह 8 महीनों तक वहाँ अपने पिता के घर में बिताया था शादी के बाद। अदिति वापस विशाल की बाहों में थी और अपना सिर उसके सीने पर रखे हए, वो भी उन दिनों को याद करने लगी, जो उस घर में बिताए थे। और दोनों ने विशाल के भाई और बहन के बारे में बातें किया। विशाल ने जानबूझ कर बात को टेढ़ा मेढ़ा करके वहाँ तक आया जहाँ आना चाहता था।

विशाल- “पापा, तुमको बहुत पसंद करते थे ना?"

अदिति- “हाँ..”

विशाल- “और तुम भी उनको पसंद करती थी, मुझे पता है...”

अदिति- “वो हमेशा मुझसे अच्छा बर्ताव करते थे, और मुझमें और तुम्हारी बहन में कभी फर्क नहीं समझते थे, हाँ मुझे वो बहुत पसंद करते थे। क्या तुमको उन दिनों जलन होती थी?"

विशाल- “मैं बहुत सारी चीज सोचता था उन दिनों."

अदिति- “कौन सी चीज?"

विशाल- “तुमको पता है क्या कहना चाहता हूँ.”

अदिति- “हाँ... तुम और तुम्हारा गंदा दिमाग ना विशाल......"

विशाल- “एक दिन मैंने पापा को तुम्हारे बहुत करीब देखा था, किचेन में जब तुम पका रही थी, तुम साड़ी में थी, पल्लू तुम्हारी कमर में अंदर घुसाया हुआ था और तुम्हारी कमर, नाभि सब दिख रही थी, और पापा हाथ बिल्कुल करीब तुम्हारी कमर के पास था."

अदिति- “झूठा कहीं का। यह सब तुमने अभी-अभी बनाया किया है ना?"

विशाल- “नहीं यह सच है, याद है वो दिन जब तुमने कुछ मीठा बनाया था और तुम्हारा हाथ थोड़ा सा जल गया

थी और पापा ने क्रीम लगाया था तुम्हारे हाथ पर?”

अदिति- “ओह्ह... वो दिन? वो तो एक छोटा सा आक्सिडेंट था और पापा ने मेरा खयाल रखा था बस...”

विशाल- “तुम पापा के बहुत करीब थी और ज्यादा वक्त उनके साथ गुजारती थी, मुझसे भी ज्यादा, वो मुझसे

ज्यादा घर पर होते थे...”

अदिति- “यह तो मामूली बात थी। क्योंकी तुम 15 घंटे से ज्यादा काम पर गुजारते थे, और वो शाम दो से तीन बजे घर वापस आ जाते थे तो उनके साथ मेरा ज्यादा वक़्त होता था, और राकेश और लीना भी तो घर पर होते थे तब...”

विशाल- “तुम्हारी बहुत अच्छी दोस्ती राकेश और दीपक से भी हो गई थे, कैसे तुमने सबसे इतनी अच्छी दोस्ती

कर ली थी?"

अदिति- “एक ही घर में रहने से दोस्ती तो हो ही जाती है...”

विशाल- “एक बात बताओ, पापा ने तुम्हें कभी नहीं छुआ था, कभी नहीं? मुझे पूरा यकीन है की पापा ने छुवा होगा, मगर तुमने मुझे कभी बताया नहीं..”

अदिति बंद मुट्ठी से उसकी छाती पर मारते हुए- “बस करो शैतानी करना...”

विशाल- “मैं अपने पापा को अच्छी तरह से जानता हूँ। जानता हूँ वो कितना ठरकी हैं, और तुम्हारी तरह की

खूबसूरत बहू को घर में अकेली पाकर उसने जरूर कुछ ना कुछ ट्राई किया होगा, मगर तुमने बात को अपने तक ही रखा है ना... जान बताओ आज मुझे प्लीज..”

अदिति- “वो मुझको कैसे छू सकते थे जबकी लीना और बाकी के लोग घर में हुआ करते थे?"

विशाल- “लीना तो सिलाई की ट्यूशन लेने जाती थी हफ्ते में 3 दिन। तब क्या तुम पापा के साथ अकेली नहीं होती थी जान? हाँ..."

अदिति- “अब बस करो वर्ना मैं खेल नहीं खेलूँगी हाँ."

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