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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
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update_24 विशाल कोशिश कर रहा था अदिति से कुछ जानने की

विशाल अब तो रुकने वाला नहीं था, क्योंकी वो पता लगाना चाहता कि, क्या अदिति ने उससे कुछ छुपाया था उन दिनों, तो उसने सवाल जारी रखा।

विशाल- “देखो जान, तुमको अच्छी तरह से पता है की यह खेल हम दोनों को कितना उत्तेजित करता है, और कितना जबरदस्त जमकर हम दोनों को चोदने का मजा आता है, है ना? तो सोचो हमारे जिश्म को किस किश्म का तगड़ा मजा आएगा, अब तो तुमको भी तजुर्बा होने लगा है इसका, तो मेरे सवालों का सच-सच जवाब देना। ठीक है? तो बताओ जान पापा ने तुमको कभी छुआ था या कम से कम छूने की कोशिश तो किया ही होगा मुझे पक्का यकीन है। बोलो...”

कुछ देर के लिए अदिति खामोश थी। वो कुछ सोच रही थी, जबकी विशाल उसके चेहरे को करीब से ध्यान से देख रहा था। अदिति उसको “पापा” बुलाती थी और विशाल “डैड” अदिति को खामोश देखकर विशाल ने फिर पूछा,

विशाल- “हाँ तो बताओ, तुम वापस खयालों में चली गई हो उस घर में। है ना? कुछ याद कर रही हो? तुम इस वक़्त उस घर में बीते कछ पल को याद कर रही हो। है कि नहीं जान? तो बताओ मझे...”

अदिति- “नहीं, मैं सोच रही हँ पापा किस तरह मेरा खयाल रखते थे। वो हमेशा मुझसे पूछते रहते थे की मुझे किसी चीज की जरूरत तो नहीं। वो हमेशा किचेन में मेरी मदद किया करते थे जब लीना पास नहीं होती थी। मैं पापा को बहुत पसंद करती थी.."

विशाल- “मुझको यह सब नहीं जानना है यार। यह बताओ की कितनी बार वो तुम्हारे करीब उस तरह से आये

जैसा मैं पूछ रहा हूँ? यह बताओ की कितनी बार उसके हाथ या जिश्म ने तुझको छुआ? बताओ ना जान... देखो सिर्फ इस बारे में बात करने से मेरा किस तरह जमकर खड़ा हो गया है, देखो..."

अदिति थोड़ी देर के लिए फिर खामोश हो गई और उसके चेहरे पर लाली आ गई। तब उसने अपने मुट्ठी से विशाल को मारते हुए बचपने आवाज में कहा- “तुम क्यों मुझसे वो कहलवना चाहते हो जो हुआ ही नहीं है, तुम क्यों ऐसा हो विशाल?"

विशाल को अनुमान हुआ की कुछ तो जरूर हुआ होगा, पर अदिति बताना नहीं चाहती है। हो सकता है ज्यादा कुछ नहीं हुआ, जो होना चाहिए था। मगर विशाल ने सोचा की उसके डैड जरूर अदिति के ज्यादा करीब गये होंगे, और इससे पहले की वो और करीब होते या कुछ करते तब तक दोनों वहाँ से निकल गये होंगे। विशाल ने याद किया की जब वो वहाँ से इस अपार्टमेंट में आना चाहता था तब अदिति नहीं आना चाहती थी। वो विशाल को लंबा सफर तय करने को कहती थी, मगर उसी घर में रहने को कह रही थी। यह मजबूर कर रहा था की अदिति वहीं रहना चाहती थी, ताकी वो उसके डैड के और करीब हो सके या डैड उसके और करीब आ सकें। कुछ तो था अब विशाल और भी सोचने लगा उस बारे में।

विशाल ने अपने होठों को उसके गाल पर रगड़ते हुए पूछा- “बोलो ना जान, मुझे कुछ ऐसा बताओ जो मुझे पता नहीं, और जिसको जानकार मुझे बेहद खुशी होगी बताओ ना अदिति मुआह्ह.."

अदिति ने अपने सिर को उसकी छाती पर रखते हुए नाक को बिगाड़ते हुए कहा- “कुछ नहीं, कुछ भी नहीं कभी भी कुछ भी नहीं हआ पापा के साथ..." और तब अदिति ने उसको और ज्यादा मारते हए अपनी एक जाँघ को उसकी जाँघ पर रखा।

विशाल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी और उसको यकीन था की कुछ जरूर था, मगर अदिति या तो शर्मा रही थी

या डर रही थी बताने से। तो उसने सोचा की अदिति को वक्त दिया जाए ताकी वो खुद अपने आप ही कुछ बताए चाहे ज्यादा दिन लगे बताने में। विशाल ने यह भी सोचा की जो नया रोल-प्ले खेलने जा रहा है शायद यह अदिति को और ज्यादा खोलेगी बात करने में। वो अदिति की एक्सप्रेशन को पढ़ने की कोशिश कर रहा था जो वो नहीं थे, जो हमेशा हआ करते थे, जहाँ तक वो अदिति को जानता था।

अदिति जैसे डरी हुई थी और बार-बार कुछ सोचने लगती थी, जब विशाल अपने डैड के बारे में बात कर रहा था। अदिति कभी ऐसे नहीं बिहेव करती थी, और हर बार उसका चेहरा लाल हो जाता था अपने ससुर के बारे में बात करते हए। यह सब विशाल ने नोटिस किया अच्छी तरह से। विशाल ने यह भी याद किया की जिन दिनों वो वहाँ रहता था और वहाँ से आफिस जाता था तो कितना दिन भर सोचा करता था की घर के मर्दो में से कोई अदिति के साथ फ्लर्ट तो नहीं कर रहा है। और इस वक़्त विशाल यह भी सोच रहा था की क्यों उसने उसी वक्त उसी घर में रोल-प्ले नहीं शुरू किया तो वहीं सब पता चल जाता उन्हीं दिनों।

विशाल ने फिर से बहत प्यार से अदिति से बात किया- “अदिति जान, उस घर में तीन मर्द थे और मैं तुमको 15 घंटों तक अकेली छोड़कर जाता था काम करने। मैं काम में बहुत ज्यादा बिजी था और कितना वक्त गुजरता था सफर करने में यह सब तुमको तो पता ही है। मैं उन्हीं दिनों तुमसे यह सब पूछना चाहता था, मगर हिम्मत नहीं हुई। अब याद करो एक रात को मैं लेट आया था? रात के 10:00 बजे आया था मैं, और तुम उस रात को राकेश के कमरे में थी याद है? तुमने कहा था की वो एक कंबल की तलाश में था जो लीना ने कहीं और रख दिया था और तुम उसको वो देने गई थी। उस रात को मेरे जिश्म में एक ठंडी लहर दौड़ी थी और उस रात को मैंने अपने दिमाग में खुद को राकेश समझकर तुमसे सेक्स किया था। अब तुम उसके और दीपक के भी बहुत करीब थी। है की नहीं? तो अब उन दोनों के बारे में कुछ बात करो की तुम कैसे उन लोगों के इतने करीब आ गई थी उन 8 महीनों में?”

जब विशाल यह सब कह रहा था तो अदिति के नाखून उसकी छाती पर गड़े हुए थे सुनते हुए। उसका चेहरा कछ उतरा सा था, और कहना मश्किल था की वो घबराई हई थी या उसको यह बातें सनना नापससंद थी उस वक्त। विशाल ने उस वक्त अदिति की तेज दिल की धड़कनों को महसूस किया अपने सीने पर। क्योंकी वो उसकी छाती पर लेटी हुई थी, उसकी धक-धक विशाल के सीने पर महसूस हो रही थी। विशाल उसके चेहरे में देखते हुए उसकी सूरत को पढ़ने की बेकार कोशिश कर रहा था।

अदिति ने अपने आपको संभालते हुए चेहरे पर एक झूठी मुश्कान लाते हुए कहा- “तो आज रात को तुमने अपने परिवार के बारे में बात करने को सोचा है हाँ? तुम्हें उन लोगों की याद आ रही है? उन सबको मिस कर रहे हो जान? क्या तुमने कभी पूछा की कोई वहाँ से कभी फोन भी करता है या तुमने फोन करके उन लोगों से कभी बात किया? यह तुम्हारा ड्यूटी है करने की। पर जब से हम यहाँ आए हैं एक दिन भी तुमने ऐसा नहीं किया क्यों?” अदिति का जवाब सुनकर विशाल का चेहरा देखने लायक था।

विशाल ने हैरत से पूछा- “क्या वो लोग तुमको फोन करते हैं? मुझे कभी टाइम ही नहीं मिलता जान, तो वो

लोग तुमसे फोन पर बात करते हैं और तुमने एक दिन भी मुझको बताना मुनासिब नहीं समझा? अच्छा कोई बात नहीं, कौन फोन करता है बताओ अब?

अदिति ने अपने हाथ को उसकी छाती के बालों पर फीराते हुए कहा- “सब लोग फोन करते हैं सबके सब। कभी हर रोज कभी हफ्ते में 3 या 4 बार। लीना बहुत गप्पें करती रहती है घर के मर्दो के बारे में, सबकी बुराई करते हुए हीहीहीही... वो तुमसे बहुत प्यार करती है और तुमसे बात करना चाहती है, मगर तुम कभी घर पर होते ही नहीं हो। मैंने उसको शाम को फोन करने के लिए कई बार कहा, मगर उस वक्त वो किचेन में बिजी रहती है और सबको खाना सर्व करने में.."

विशाल और ज्यादा जानना चाहता था तो पूछा- “और घर के मर्द लोग क्या बातें करते हैं? वो भी बताओ जान मेरी..”

अदिति ने विशाल की छाती के बालों को अपनी उंगली में रोड़ते हुए खयालों में आते हुए कहा- “पापा भी तुम्हारे बारे में पूछते है, और पूछते है की अपार्टमेंट पसंद है और सब यहाँ ठीक है की नहीं? और तुम्हारे काम के बारे में भी पूछते हैं..."

विशाल थोड़ा खिसियाते हुए पूछा- “वो लोग इतने फोन करते हैं और यही सब पूछते हैं डैड? और बताओ सब कुछ जो बोलते हैं बताओ, और राकेश और दीपक क्या कहते हैं सब बोलो मुझे?"

अदिति- “हे भगवान्... क्या उन लोगों की सभी बातें याद करना और बताना इतनी जरूरी है इस वक्त? बस करो अब तुम, क्यों इतना जिद्दी हो तुम?”

विशाल को पता नहीं था की अब क्या सोचें या कहे। उसके दिमाग में तरह-तरह की बातें आ रही थीं, अपने घर के 3 मर्दो को लेकर। अदिति को सोचते हए कभी उत्तेजित होता था तो कभी फिकर करता था की उन मर्दो में से किसी ने अदिति को छुवा होगा या कुछ ज्यादा किया होगा?

फिर खुद से कहा- “क्या यह मुमकिन है? कैसे? अदिति तो बहुत सहमी हुई सी अपने आप में बंद थी, शर्मीली थी, मासूम थी तो कैसे कोई उसके इतना ज्यादा करीब हो सकता था उन दिनों? नहीं नहीं मैं पागल हूँ जो ऐसा सोच रहा हूँ। यह सब सिर्फ मेरे दिमाग में हैं, इसको मुझे अपने गंदे दिमाग से निकाल फेंकना चाहिए."

विशाल तब तक अदिति के ऊपर था, वो अपनी पीठ पर लेती हुई थी, विशाल के होंठ उसके गले पर फिरते हुए उसके कान तक आ गये थे और उसने धीरे से कहा- “अच्छा जान... मैं डैड हूँ और तुम घर पर अकेली हो, यह जानते हुए की मैं आफिस से लेट आऊँगा पहले की तरह, वो तुमसे कुछ माँगने को आये तुम्हारे कमरे में और तुमको इस छोटी सी नाइटी में देखा बिना ब्रा के, जो तुमने अभी पहनी हुई है। तुम्हारे निपल खड़े थे इस पतली सी नाइटी में, उनको दिख रहे थे।

तुम उनकी तरफ एक शर्मीली मुश्कुराहट से देखती हो और पूछती हो- “उसको क्या चाहिए उस वक्त? हम इस रोल-प्ले को इस तरह से शुरू करेंगे। ओके जान? अच्छी तरह से जवाब करना और मुझको “पापा” बुलाना जैसे उसको बुलाती थी तुम..”

***** **** *

 
Update 25 विशाल कोशिश करता है नये रोल-प्ले की

अदिति फिर से उसको अपनी बंद मुट्ठी से मारते हुए अपने होंठों और नाक को ट्विस्ट करके अपनी बचपना आवाज में बोली- “नहीं मुझसे यह रोल-प्ले नहीं होगा, यह मत खेलो ना...”

विशाल बहुत उत्तेजित हो रहा था उन दिनों को सोचते हुए और अपने डैड को अदिति के साथ सोचते हुए गुर्राते हए कहा- “जान तमको भी पसंद आएगा मझे परा यकीन है. बस उन दिनों को लौट चलो और एक बार फिर उन लम्हों को जी लो। बिल्कुल वैसे जैसे आनंद को सोचकर खेलती थी वैसे ही डैड को सोचकर खेलना। चलो शुरू करते हैं, मैं उठ रहा हूँ बाहर जाकर दरवाजा खोलूँगा, तुम जाओ आईने के सामने अपने बालों को कंघी करो, बाद में बताऊँगा कैसे आगे बढ़ना है? ओके जाओ, मैं बाहर निकलता हूँ.”

अदिति कुछ नहीं कह पाई और विशाल एक पैंट बिना शर्ट के पहनकर बाहर गया फिर से अंदर आने को अपने डैड बनकर।

विशाल ने दरवाजा खोलते हुए कहा- “मैं चौंक जाऊँगा तुमको इस नाइटी में देखकर, और तुम अपने हाथों को अपनी चूचियों पर रखते हुए यह सोचोगी की मैं सारी कहकर दरवाजा बंद कर दूंगा, मगर मैं वो नहीं करूँगा बल्की अंदर आ जा ऊँगा, और तुम्हारी समझ में नहीं आएगा की तुम क्या करोगी? जब देखोगी की मैं तुम्हारी तरफ बढ़ रहा हूँ। ओके जान? दो मिनट के बाद दरवाजा खोलता हूँ तैयार रहो...”

कुछ देर बाहर ठहरते हए विशाल सोचने लगा की अदिति कैसे इस रोल-प्ले को निभाएगी? उसके अंदर क्या गुजरेगी? वो उसके डैड को कैसे सोचेगी? वो देखना चाहता था की अदिति उसको “पापा” बुलाएगी जैसे उसके डैड को बुलाती है और जिस तरह वो “आनंदजी” कहकर उस रोल-प्ले को निभाती थी, क्या वैसा ही करेगी अब भी या नहीं? आनंद का रोल-प्ले खेलने में अदिति बेहद खुश होती थी, और बहुत उत्तेजित हो जाती थी। क्या अपने ससुर के साथ वाला रोल प्ले करते वक्त भी वैसे ही खुश होगी। कुछ हिचकिचाहट दिखा रही थी अभी, मगर क्या पता खेल को खेलने दौरान वो इसमें रंग जाए और फिर विशाल को पता था की किस तरह अदिति को उस रंग में रंगा जाए।

अदिति आईने के सामने हाथ में एक कंघी लिए खड़ी थी और उसको ठंड महसूस हुई और जिश्म में एक अजीब सी लहर जो पहले नहीं हुई थी कभी, वो सोच रही थी की इस रोल-प्ले के दौरान उसपर क्या गुजरेगी? कैसा होगा, क्या करेगी? आनंद वाला रोल-प्ले खेलने में उसको बहुत मजा आया था। मगर अब जो विशाल खेलने को कह रहा है क्या यह कुछ ज्यादा था, या अदिति के लिए एक मामूली बात थी यह भी? वक्त आने पर पता चल जाएगा। वो अपने खुद के जिश्म को देख रही थी आईने में। और विशाल के दरवाजा खोलने का इंतेजार कर रही थी। सोच रही थी क्या जवाब देगी, कैसे रिएक्ट करेगी?

अचानक विशाल ने दरवाजा खोलकर उसको घूरतेट हुए देखा। अदिति ने उसको देखा, और अपने हाथों को अपनी छाती पर करते हए उसके चेहरे में लाली आ गई, जैसे के वो सच में किसी और को देख रही थी विशाल को नहाली

विशाल ने कहा- “बेटा मुझे नींद नहीं आ रही है, तो सोचा तुमसे दो बात कर लूँ। मगर लगता है की मैंने तुमको डिस्टर्ब किया क्या?"

अदिति चुलबुलाती हुई हँसी, क्योंकी विशाल ने उसको “बेटा” कहकर बुलाया था, बिल्कुल जैसे उसके डैड अदिति को बुलाते था।

विशाल ने थोड़ा नापसंद करते हुए कहा- “ओफफो... क्यों हँसी तुम? खेल को मत बिगाड़ो यार। क्या तुम ऐसे ही हँसती, अगर डैड तुम्हारे सामने खड़े होते, तुमको इस स्थिति में देखते हुए?"

अदिति ने और ज्यादा जोर से हँसते हुए कहा- “मुझे नहीं पता था की तुम मुझको “बेटा” कहकर बुलाओगे बिल्कुल जैसे पापा बुलाते थे। तुमने यह नहीं कहा था शुरू करने से पहले, कितना फन्नी लगता है तुम्हारे मुँह से मुझे “बेटा” बुलाते हुए सुनना, तुमको एक बूढ़े का रूप देता है..” और अदिति ने एक शैतानी स्माइल दिया विशाल को चुलबुलाते हुए।

विशाल फिर से कमरे से निकला यह कहते की मैं दोबारा वही लाइन बोलूंगा और अदिति वो जवाब दे जो उसको इस मौके के लिए सही लगे। तो विशाल ने वही किया, फिर से दरवाजा खोलकर अंदर आया, वही लाइन रिपीट किया।

अदिति ने वैसे ही हाथ से अपने छाती को ढकते हुए अपनी हँसी को कंट्रोल करते हुए जवाब दिया- “मगर पापा अभी सोने का वक्त हो गया है ना?"

विशाल उसकी तरफ बढ़ने लगा जबकी अदिति एक-दो कदम पीछे हो गई। मगर और पीछे जाने की जगह नहीं थी तो वो आईने से टकराई और रुक गई, विशाल के चेहरे में देखते हुए। विशाल उसके पास आया और हल्के से अपने हाथ को उसकी कंधे पर रखते हुए कहा।

विशाल- “बेटा मुझको बहुत कम तुमको इस ड्रेस में देखने का मौका मिला है, कमाल की दिख रही हो वाह... मेरा बेटा सच में बहुत खुशनसीब है री.."

बिना कुछ बोले अदिति ने अपना सिर नीचे झुका लिया, कंघी को टेबल पर रखते हुए उसका दिल जोरों से धड़कने लगा, जैसे के सचमुच उसका ससुर उसके सामने खड़ा उसके मुलायम नंगे कंधे को छू रहा था।

तब विशाल ने उसके कंधे से उसके पूरे बाजू पर हाथ फेरते हुए उसकी उंगलियों में अपने उंगलियों को डाला और अदिति को अपने जिश्म की तरफ हल्के से खींचा। उस वक़्त अदिति की समझ में नहीं आया की क्या करना चाहिए तो खामोश रही। और विशाल ने अपने हाथ को उसकी कंधे के ऊपर फिर से रखकर धीरे-धीरे हाथ को उसकी चूचियों की तरफ ले गया, और जब अदिति ने जवाब नहीं दिया तो बचानी से विशाल ने कहा- “तो तुम डैड को अपनी चूचियों को ऐसे छूने दोगी?”

अदिति अपने सिर को झुकाए हुए ही बोली- “मुझे बिल्कुल नहीं पता की क्या कहूँ या करूँ?"

विशाल बेचैन होते हुए बोला- “ओफफो... जान बस ऐसा समझो के वो सच में इस वक्त तुम्हारे सामने है और वही करो जो तुम करती या कहती, अगर वो इस वक्त तुम्हारे बेडरूम में तुम्हारे साथ ऐसा करते क्यों खेल को बिगाड़ रही हो यार?”

अदिति ने चेहरे में लाली भरे कहा- “क्या करती मैं, अगर सच में ऐसा होता तो? कैसे रिएक्ट करती, मैं रिएक्ट करना भूल जाती, कुछ आवाज ही नहीं निकलती मेरी और शायद मैं बेहोश हो जाती...”

विशाल ने अपने माथे को पीटते हुए कहा- “ओके सीन को चेंज करते हैं। तुम सो जाओ, सोई हुई गहरी नींद में हो और डैड तुम्हारे कमरे में आते हैं और तुम्हारे जिश्म पर अपना हाथ फेरते हैं, जब नींद में हो तुम। तुम आँख बंद किए हुए यह समझ रही हो की मैं हूँ, इसलिए करने देती हो। जब तक वो तुम्हारी पैंटी को किस करके उतारता है। यह ठीक रहेगा?”

अदिति को आराम महसूस हुआ और कहा- “हाँ यह बेहतर है, मुझको जवाब नहीं करना पड़ेगा, मैं नींद में हूँ, हाँ इसी को खेलो अब..."

तब अदिति बेड पर गई, कमरे की लाइट ओन करे हए, चादर अपने ऊपर किया और अपनी जाँघ को कवर नहीं किया और क्लीवेज को भी दिखने दिया और कहा- “लो तुम मुझको इस हालत में देखोगे अंदर आते हुए और उत्तेजित हो जाओगे इस हालत में मेरे जिश्म को देखकर, और मुझको छुओगे, मगर मैं नींद में ही रहूंगी और जब मेरी चूत में लण्ड घुसाओगे, तब जवाब करूँगी ओके?”

विशाल ने बहुत खुश होते हुए कहा- “वाउ बेबी ग्रेट... अब मैं फिर से बाहर जाता हूँ और अंदर दाखिल होते ही

तुमको इस स्थिति में देखकर पागल हो जाऊँगा, शाबाश मेरी जान मुउआह्ह... यह हुई ना बात। अब तुमको ऐसे देखकर मेरा खड़ा हो जाएगा और खुद को नहीं रोक पाऊँगा। तुमको चादर हटाकर और देलूँगा, दुलार करूँगा, तुम नींद में ही अंगड़ाइयां ले सकती हो और इसस्स्स... वगैरा कर सकती ही ओके?"

अदिति- “ओके फिकर मत करो मुझे अब पता है कब जवाब करना है और क्या कहना है? जाओ और वापस आओ अब। तुम चाहते हो की तुम्हारे डैड को मैं “पापा” ही बुलाऊँ जैसे बुलाती हूँ ना... तो वैसे ही बूलाऊँगी तुमको खुश करने के लिए। अब वापस आओ अब इंट्रेस्टिंग लग रहा है मुझे भी..” और वो चुलबुलाई फिर से यह सब कहकर।

विशाल बाहर निकलकर एक मिनट के बाद फिर अंदर आया। वो एक बहुत गरम और मजेदार सीन था देखने को, की एक ससुर अपनी बहू के कमरे में रात को आता है और बहू को सोते हुए पाता है, आधा जिश्म नजर आते हुए, सेक्सी जांघे, क्लीवेज, बहू की नर्म मुलायम चमड़ी कामुकता दिखाते करते हुए, उसकी नंगी पीठ, बाजू, कांखें, उसका गला, नर्म मुलायम चूचियां, उसके थोड़ा बाल बेड से नीचे लटके हुए। ऐसा नजारा था जब विशाल अंदर आया अदिति का ससुर बनकर उस वक्त।

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कड़ी_26 विशाल ने नया रोल-प्ले शुरू किया और अदिति ने जवाब दिया

विशाल ने उसकी पतली सी नाइटी को धीरे से ऊपर उठाया तो अदिति की जांघे, चूतड़ और पैंटी नजर आने लगी। नामंजूर करते हुए भी अदिति ने खेल में शामिल होने की कोशिश करते हुए कुछ अजीब महसूस किया

और उसको ऐसा लगा की विशाल के पापा सच में उस कमरे में मौजूद हैं उस वक्त और उसको छूने की कोशिश कर रहे हैं। यही था जो खेल को और दिलचस्प बना देता था, जब अदिति उस खेल में डूबने की कोशिश करती थी, और यही विशाल पसंद करता था अदिति के साथ की वो रोल-प्ले में भरपूर भाग लेती थी।

इस वक़्त तो विशाल यह देखना चाहता था की अदिति इस खेल में उसी तरह शामिल होती है की नहीं। क्योंकी वो अदिति के ससुर का रोल कर रहा था, विशाल को देखना था की अदिति किस तरह से अपने ससुर की छुवन को अपनाती है। बस पहली बार ही सिर्फ उसकी ड्रेस हटाने से ही विशाल को समझ में आ गया की अदिति इस वक़्त विशाल के पापा को ही महसूस कर रही है अदिति के चेहरे में देखते हुए।

यह सोच विशाल के जिश्म में खून की लहर को बढ़ा रही थी की उसकी बीवी अपने बिस्तर पर उसके पिता को अपने पास महसूस कर रही है, और उस खून की लहर उसके दिमाग से होकर जिश्म में फैलते हुए उसके लण्ड तक गई जिसने उसके लण्ड को जमकर खड़ा किया। विशाल ने एक गहरी साँस लिया, जबकी अदिति उसका हाथ अपनी जांघों के बीच महसूस करते हए कसमासाई और अपने एक हाथ को एक तरफ करके उसने भी एक गहरी सांस ली।

विशाल ने पूरा वक्त लेते हुए, बिल्कुल आराम से, बल्की ज्यादा धीरे-धीरे सब कुछ किया क्योंकी वो ज्यादातर अदिति के चेहरे को ध्यान से देख रहा था। उसने धीरे-धीरे अपने हाथ को फेरते हुए अदिति की पैंटी तक ले गया। अदिति ने ज्यादा गहरी सांस लेते हुए अपने दिल की धड़कन को तेज होते सुना और विशाल के हाथ को महसूस किया अपनी पैंटी पर ठीक चूत के पास जाते हुए जो गीली होना शुरू हो गई थी।

विशाल ने बिना अपनी आँख झपकाये जो अदिति के चेहरे पर थी, उसने अपनी उंगली को अदिति की पैंटी पर उस जगह गोल-गोल घमाया और भीगी हई महसूस किया। फिर अदिति ने अपनी एक टांग को हल्के से एक । तरफ किया विशाल की आसानी के लिए। मगर तब तक विशाल ने नीचे का हिस्सा छोड़कर उसके पेट की तरफ बढ़ गया था। विशाल ने उसकी नाइटी को उसकी चूचियों तक ऊपर उठाया जो बिना ब्रा के थी। उसने उसकी नाभि के इर्द-गिर्द गोल-गोल अपनी उंगली को घुमाया कई बार, जिससे अदिति के जिश्म में एक लहर सी दौड़ी। विशाल को अदिति की बेचैनी और उत्तेजित होते देखने में मजा आ रहा था।

विशाल ने अपने होठों को काम पे लगाया। अदिति के पेट से होंठ फेरते हुए उसकी चूचियों तक और तब उसकी जीभ काम पर लग गई। अदिति ने और गहरी साँसें लेते हए बिस्तर पर करवट लेने की कोशिश की, चादर को अपने मुट्ठी में जकड़कर खिंचते हुए। विशाल ने अपना अंडरवेर निकाल फेंका और बेड पर चढ़कर अपनी टाँगों को अदिति की जांघों के बीच किया। जबकी अपने मुँह से अदिति के गले के नीचे वाले हिस्से को चूमते, चाटते हुए चूचियों की तरफ बढ़ने लगा और भुनभुनाया।

विशाल- “अदिति बेटा तुम कमाल की हो, तुम्हारी जिश्म इतनी प्यारी और हाट है, सेक्सी है, आकर्षित करती है, अपनी तरफ खिंचती है। मेरे अंदर जवानी भर देने वाला ऐसी फिगर की जिश्म मुझसे पागल बना रहा है। तुम्हारी इस जवान बदन को मुझसे देखा नहीं जाता। अपने आप पर काबू रखना बेकार है बेटी। इस पापा को एक चान्स दो, अब इस गरम जिश्म का मजा ले लेने दो अपने इस पापा को मेरी जान। तुमको भी मजा आएगा मुझे पूरा यकीन है मुउआह... वाह... इसस्स्स... हाए मैं क्या करूँ? कहाँ से शुरू करूँ? पूरा के पूरा कमाल का बदन है यह तो... वाह मेरी प्यारी अदिति, मेरी जान अदिति, पापा की दुलारी अदिति, मेरी बेबी अदिति, वाउ क्या मैं सपना तो नहीं देख रहा, क्या सच में तम्हारे जिश्म को नंगा कर रहा हूँ मैं? अरे वाह... इसस्स्स्स ... सोती रह मेरी जान... मुझको मजा लेने दो, तुम बस सोती रहो। मत जागना तुम, मुझको यह सब सपने में अपने साथ करते हुए देखो, और मेरा गोश्त का टुकड़ा अपने अंदर सपनों में महसूस करो..."

... सस्स्स ...” जैसे और इस तरह करवट, लिया जिससे अदिति ने एक तड़पती जैसी आवाज निकली कुछ- “हम्म्म्म अपने जिश्म का ज्यादा हिस्सा उसके सामने आए।

विशाल ने हिलने नहीं रोका और अपने लण्ड को उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा, जो अब तक पैंटी में थी,

मतलब लण्ड पैंटी के ऊपर रगड़ रहा था। अदिति अच्छी आक्टिंग कर रही थी, जैसे सोई हुई थी। मगर अपने बदन को विशाल के पोजीशन के लिए ठीक कर रही थी जैसे नींद में होते हए।

अब विशाल का मुँह अदिति के पैंटी पर गया, जिसको उसने चूमा और चाटा, फिर अपने दाँतों से उसकी पैंटी उतारने लगा, उसके चूतड़ों को मजबूती से हाथों से पकड़े हुए, अदिति के गरम जिश्म को महसूस करते अपने हाथों में। अदिति खुद को खोने लगी और बिल्कुल गीली हो गई थी। जब विशाल का जीभ वहाँ गई तो उसने वो नमकीन लज्जत अपनी जीभ में महसूस किया, अदिति का रस नीचे निकल चुका था। विशाल ने अदिति की दोनों टाँगों को फैलाया जिसको अदिति ने अपने आप खोला और विशाल का सिर उसकी दोनों जांघों के बीच आ गया। विशाल ने एक हाथ से अदिति की ब्रा निकाल फेंका, उसकी चूत को चूसते हए, अब अदिति बिल्कुल नंगी थी बेड पर। फिर विशाल ने खुद को नंगा करते हुए और एक बार घूरते हुए बोला।

विशाल- “हाँ। यह है मेरी प्यारी बहू, मेरी जवान बहू जो इस वक्त मेरे साथ बिल्कुल नंगी है बिस्तर पर। मुझको इतना मजा देते हुए वाला रे वाह... कितना अच्छा लग रहा है तेरे जवान जिश्म को इस तरह से नंगी अपनी बाहों में लेना। अदिति आ जा, कम टु पापा डार्लिंग, कम टु पापा आअहह... लेट पापा पेनेटरेट यू नाउ बेबी सस्स्स्स ...

आघ्यघह...”

विशाल से अब नहीं रहा गया और अपने लण्ड को उसकी चूत पर रखते हए अपने मुँह को उसके मुँह तक ले

गया, अपनी बाहों में अदिति के जिश्म को समेटते हुए अपनी जीभ को अदिति के मुँह में डाला। अदिति ने भी मुँह खोल दिया, क्योंकी वो कब से इंतेजार कर रही थी इसके लिए। नीचे विशाल ने आराम से अपने लण्ड को अदिति के अंदर डाला, जिससे अदिति के जिश्म में एक और लहर आई और उसने अपने जिश्म को इस तरह से रगड़ा तड़पते हुए की उसकी आss निकली एक तड़प के साथ। आँखें बंद किए हुए उसकी तड़पती आवाज नहीं छिपा पाई उस वक़्त।

 
अब उसको नींद में ही होने की आक्टिंग करनी थी, तो ऐसा दिखाया की सो रही है तब भी। और उसने विशाल से कहा था के वो तब जवाब करेगी जब वो उसको पेनीटरेट करेगा। तो विशाल बेसब्री के साथ इंतेजार कर रहा था की अदिति अब क्या कहेगी जब आँख खोलेगी और देखेगी उसके ससुर का लण्ड उसके अंदर घुस चुका है,

और ससुर उसके जिश्म के ऊपर है उसके बिस्तर पर। इसका विशाल बेसब्री से इंतेजार कर रहा था।

विशाल अपने लण्ड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करते हुए अदिति के कान में धीरे से बोला- “अब पापा ने तुमको पेनिटरेट कर दिया है जान, अब जवाब करो, लिव दि रोल-प्ले बेबी, बिल्कुल डूबकर खेलो इसको, बहुत मजा आएगा जान। स्टार्ट रेस्पांडिंग नाउ। मुझको ऐसा महसूस कराओ की तुम पापा को अपने अंदर रिसीव कर रही हो। शुरू करो अब तो नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा..."

अदिति ने एक अंगड़ाई लेते हुए नींदध टूटने की आक्टिंग करके आँखें खोलते ही चिल्लाते हुए अपने दोनों हाथों को विशाल के छाती पर पुश करते हुए कहती है- “पापा ओह्ह... नो। यह क्या कर रहे हो आप? मैं तो सपना देख रही थी और मैंने सोचा विशाल है प्लीज... आप ऐसा मत कीजिए, यह ठीक नहीं है पापा हटिये आप..."

विशाल ने और ज्यादा मस्ती में अंदर-बाहर धक्का देते हुए, उसको चोदते हुए कहा- “क्या अदिति बेटा, अब अंदर डाल ही चुका हूँ तो अब पूरा कर लेने दो। मेरी बुलबुल कितनी हाट हो तुम, क्या बदन है तुम्हारा। इतने दिनों से क्यों मुझको नहीं दिखा था भला, सस्स्स्स... आअहह... बहुत मजा आ रहा है तेरे से अदिति। मैं अपनी बहू को चोद रहा हूँ, कितना खुश किश्मत हूँ मैं। मेरी अदिति पापा को खुश करो बेटा, खुश कर दो आज इस पापा को अपने आघघ्गघह..”

अदिति अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी जवाब करने की और बचपने आवाज में कहा- “नहीं नहीं... नहीं पापा, यह बिल्कुल सही नहीं है ऐसा करना। मैं आपकी बेटी की तरह हँ, ऐसा मत करिए रुकिये ना प्लीज...”

विशाल और भी जबरदस्त धक्का देता गया, उसकी चूचियों और गले को चाटते हए और कहा- “अरी अदिति

बेटी, तुम भी मजा लो इसका, तुम भी एंजाय करो ना... देखो कैसे भीग गई हो नीचे। तुमको भी उत्तेजना होनी चाहिए तो मत रोको अपने आपको मेरी जान... क्या तुमको मुझको अंदर लेते हुए मजा नहीं आ रहा है? मुझको अपने गहराई में महसूस नहीं कर रही हो? मेरा वाला मेरे बेटे वाले से ज्यादा बड़ा नहीं है क्या? तुमको पता होगा बोलो तो... हाँ तुम्हारी छेद बहुत टाइट है, मुझे तो बड़ा अच्छा लग रहा है। तुम भी एंजाय करो ना बेटा... सस्स्स्स ... आज तेरे इस जिश्म को अपनी बाहों में नंगी पकड़ा हूँ, बड़ा अच्छा लग रहा है बेटा हाँ हाँ..."

अदिति ने बहुत कोशिश किया उसको पुश करने को मगर नाकामयाब रही, और असल में वो भी महसूस कर रही थी उसको अपने अंदर, बल्की वो भी अपनी कमर को एक-दो बार हिलाई और विशाल ने महसूस भी किया की अदिति कितना एंजाय कर रही है।

विशाल ने तब अपने मुँह को अदिति के कान से लगाया यह कहते हुए- “कम ओन... अब पापा को किस करो, अपना मुंह खोलो और पापा की जीभ को अंदर महसूस करो और चूसो इसे, और साथ-साथ मेरे लण्ड को अपने अंदर महसूस करती जाओ... खूब मजा आएगा तुमको बेटा। चलो करो..."

अदिति ने एक छोटी सी मुश्कान दी, होंठों को दाँत से दबाया और विशाल के चेहरे में देखी। फिर अपने मुँह को खोलते हुए उसी बचपने की आवाज में कहा- “आप बहुत बुरे हो पापा, आप मेरे साथ यह कर रहे हो, मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था की आप भी मेरे साथ यह करोगे हम्म... आप बताइए मुझे कब से आप मुझसे यह चाहते थे हाँ..”

विशाल को अदिति की बातों को सुनकर बड़ा मजा आया और ज्यादा जोर से उसकी चूत में धक्का देता गया यह कहते और हाँफते हुए- “मैं तुमको बहुत पहले से चाहता था बेटा। पर तुमको अप्रोच करने से घबराता था, डर था की तुम इनकार ना कर दो। कई बार तुम्हारे जिश्म को छुआ है मैंने, मगर आगे बढ़ने से डरता था मैं। और आज तुमको एक अप्सरा की तरह सोते हुए देखा तो तुम्हारे जिश्म को खूब अच्छी तरह से निहारा मैंने। तुम्हारा पेट, नाभि, कमर, कांख सबको खुद तारीफ किया, चाहा, तुम्हारे पूरे के पूरे जिश्म को आराम से देखा टटोला मैंने आज। तुम गहरी नींद में तो थी मगर तुम्हारा जिश्म मुझको अपने ऊपर बुला रहा था, मुझको इन्वाइट कर रहा था, तो मुझसे रहा नहीं गया बेटा। बेटा अब तुम भी अपने आपको खुश कर ही लो ना.."

अदिति ने भी उसकी जीभ को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। फिर क्या था? अदिति ने अपनी बाहों को उसके कंधों के ऊपर किया और अपने दोनों टाँगों को उसकी कमर के ऊपर लपेट दिया खुद के जिश्म को उसने नीचे हिलाते हए। और सब बहुत तेजी के साथ होने लगा। विशाल के धक्के का रफ़्तार बढ़ गई, और अदिति भी बिल्कुल मगन हो गई, और जल्द ही विशाल ने एक शेर की तरह घुर्राना शुरू किया।

विशाल- “हाँ हाँ मेरी जान, मैं झड़ने वाला हूँ अब। आअघघ... वाओ... तुम बेहतरीन हो बेटा अपने पापा को कितना

खुश किया तुमने आज... आअहह... सस्स्स्स ... आहह.."

अदिति ने भी साथ-साथ अपने नाखून उसके पेट पर गड़ाते हुए और उसके नीचे अपनी कमर जोरों से हिलाते हुए उसके गले पर दाँत से जोर से काटा उस हिस्से को लाल करते हुए। तड़पती आवाज में हाँफते हुये अदिति चिल्ला उठी- “आहह... मुझे भी बहुत पसंद है और मजा आया पापा... मैंने कभी नहीं सोचा था की आपके साथ मुझको इतना मजा आएगा पापा... सस्स्स्स ... आप मुझको इतना अच्छा लग रहे हो पापा, आप बहुत प्यारे हो। हम्म्म्म... मैं भी झड़ रही हूँ पापा प्यारे आह्ह्ह.. उईई माँ..”

अदिति पगलाई हुई उसको दाँत काटती गई, गले और कंधे पर। दोनों जांघों को करीब लाते हए ताकी विशाल (या अपने ससुर) को और नजदीक से महसूस कर सके अपने जिश्म पर और अपनी गहराई के अंदर।

कुछ पल के लिए खामोशी सी छा गई। सिर्फ दोनों के हाँफने की आवाज सुनाई दे रही थी। दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़े हुए थे कसके, अदिति की टाँगें विशाल की कमर पर बँधी हुई थीं। जबकी विशाल का लण्ड धीरे-धीरे उसकी गीली चूत के अंदर नरम होता जा रहा था, और दोनों के मुँह एक दूसरे को चूम चाट रहे थे थूक से गीला करते हुए।

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कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कड़ी_27 दा डबल इट उस सेशन के बाद

अदिति को क्या महसूस हुआ अपने ससुर के साथ करते हुए? यह सवाल विशाल के मन में धमाल कर रहा था। दोनों सोए नहीं थे। एक दूसरे को बाहों में जकड़े दोनों खयालों में गुम थे। कोई बात नहीं कर रहा था। मगर उनके दिमाग काम कर रहे थे उस वक्त। विशाल अदिति को अपने पिता के साथ सोचे जा रहा था और राकेश के साथ भी। उसको फिर वो दिन याद आए जब वो काम पर होता था और अदिति को अपने घर के मर्दो के साथ सोचा करता था।

विशाल ने फिर से सोचा की क्या उसके पिता ने कभी अदिति के करीब जाने की कोशिश किया होगा सच में?

क्या अदिति ने कुछ बात छुपाई है उससे? विशाल को कुछ यकीन सा था की कुछ तो हुआ होगा, मगर अदिति ने नहीं बताया उसको। वो अपने पिता को बहुत अच्छी तरह से जानता था ऐसा सोचने के लिए। विशाल के डैड एक बहुत खूबसूरत और चार्मिंग आदमी थे, 50 साल के ऊपर होते हुए भी, बहुत अट्रॅक्टिव आदमी थे, और औरतें उनके इर्द-गिर्द हमेशा मंडराती थीं, जब विशाल की माँ जिंदा थी तब भी।

विशाल को यह भी पता था की उसके पिता का अपने दोस्तों के पत्नियों के साथ अफेयर्स थे और उसकी माँ को पता चल गया था जिन दिनों वह जिंदा थी। तो बहुत बड़ी लड़ाई हुई थी घर में उस बात को लेकर। विशाल की माँ ने उनमें से एक की पति को बता दिया था की उसके पति के साथ उसकी वाइफ की अफेयर चल रही है।

गमा हआ था उन दिनों। विशाल अपने पिता को खुब जानता था तो अपनी अदिति और अपने बाप को लेकर ऐसा सोचना लाजमी था उसके लिए। अदिति विशाल की बाहों में जकडी अपने सिर को उसके छाती पर रखे हुए वो भी खयालों में गुम थी उस वक्त। मगर किसको पता होगा की उस वक्त वो क्या सोच रही थी?

अदिति क्या अपने ससुर के बारे में सोच रही थी? क्या उसने उसको महसूस किया करते वक्त? क्या उसको लगा की उसके ससुर का लण्ड उसके अंदर-बाहर हो रहा था? अदिति को क्या महसूस हआ जब यह लाइन उसने विशाल को कहा था- “आप बहुत बुरे हो पापा... आप मेरे साथ यह कर रहे हो... मैंने सपने में भी कभी नहीं सोचा था की आप भी मेरे साथ यह करोगे हाँ... आप मुझे बताइए की कब से आप मुझसे यह चाहते थे हाँ? क्या अपने ससुर को महसूस किया था जिस वक्त यह लाइन बोली थी? क्या उसको यह महसूस हुई थी उस वक्त की वो ससुर से बात कर रही है, जबकी वो उसको चोद रहा है? किसको पता हो सकता है? वो कितनी मीठी तरह से कहा था उसने, नखरों के साथ। जैसे एंजाय कर रही थी सब करते हए।

विशाल अदिति को दुलारते जा रहा था और साथ-साथ उसको अपने घरवालों के साथ सोचते ही जा रहा था, जिससे उसका लण्ड फिर से जमकर खड़ा हो गया। उसने दुलारना चालू किया।

अदिति को उसका लण्ड अपनी जांघों पर महसूस हुवा तो विशाल के चेहरे में देखते हुए, नखरे भरी आवाज में कहा- “क्या हुआ फिर से? और चाहिए क्या?"

विशाल ने बिना कोई जवाब दिए अदिति को उल्टा घुमाया, उसको अपनी पेट पर लेटाकर उसके पीठ पर चढ़ गया, और उसकी पीठ और गले के पीछे वाले हिस्से को चूमने और चाटने लगा, जबकी उसका का तना हुआ लण्ड अदिति के चूतड़ों के बीच रगड़े जा रहा था। अदिति बिल्कुल पेट के बल बिस्तर पर थी, उसकी चूचियां गड्ढे पर कुचली हुई, और विशाल का वजन अपने ऊपर सहन कर रही थी।

अदिति फिर धीरे से अपनी नखरे वाली अंदाज में भुनभुनाई- “हम्म... क्या हो गया तुम्हें? अब सोने का टाइम हो गया है विशाल हम्म्म्म ..."

विशाल ने गुर्राते हुए कहा- “हम्मगघ... आज तुमको पीछे से लेना चाहता हूँ जान.”

अदिति ने झट से जोर लगाकर करवट बदला और गंभीर होकर कहा- “नहीं, वहाँ नहीं। वहाँ बहुत दुखेगा, दर्द होगा वहाँ नहीं, मुझे वहाँ पसंद नहीं.”

जबसे दोनों की शादी हुई है कई बार विशाल ने गाण्ड में करने की कोशिश की। मगर हर बार अदिति ने इनकार किया। विशाल जबरदस्ती नहीं करना चाहता था उसके साथ, इसलिए हर बार रुक जाता था। मगर उसको उसकी

गाण्ड में चोदने का बडा मन था हमेशा से। और इस वक्त लगता था की विशाल किसी कीमत पर भी वही करना चाहता था। वो आराम से अदिति को बाहों में लेते हए किस करने लगा, और धीरे-धीरे फिर से उसको पेट के बल लेटा दिया, किस करते हुए ही। क्योंकी दोनों नंगे थे, विशाल को आसानी से उसके जिश्म का कोई भी हिस्सा मिल जाता था चूमने या चाटने के लिए। और इस तरह से वो अदिति की चूचियां, निपलों को चाटते चूसते उसको डुबा देता था मदहोशी में, तो अदिति खयाल भी नहीं कर रही थी की वो दोबारा पेट पर लेट गई है। विशाल ने अपनी जीभ से थूक लेकर अदिति की गाण्ड में लीपा, और अपने लण्ड पर भी थूक लगाया। फिर धीरे से लण्ड को अदिति की गाण्ड में फिसलाकर घुसाया।

 
अदिति ने एक झटका देते हुए तड़पती आवाज में कहा- “नहीं वहाँ मत डालो दर्द होगा... निकालो उसे विशाल निकालो ना प्लीज...”

मगर विशाल ने अदिति को बेड पर थोड़ा जोर से दबाते हए उसको कुछ इस तरह से फुसलाया की वो चुप हो गई। विशाल का लण्ड जब धीरे-धीरे अदिति के अंदर घुस रहा था, अपने कामुक आवाज में अदिति के कान को चाटते हुए विशाल ने कहा- “जान यह सेक्स और लोव मेकिंग का एक हिस्सा है, यह भी प्यार का बराबर का हिस्सा है। अभी तुम वहाँ पर कुँवारी हो और मेरी बात मानो, शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा बिल्कुल जैसे आगे पहली बार हुई थी। मगर बाद में तुम खुद मजा भी करोगी वहाँ पे भी करने पर, मेरा यकीन करो तुम। बस थोड़ी देर तक सह लो, जब पूरा अंदर घुस जाएगा तब सब ठीक हो जाएगा। मेरी खातिर थोड़ा सा सह लो ना जान। मुझको बहुत ज्यादा मजा आएगा क्योंकी वहाँ बहुत टाइट हो अभी। और देखना कितनी जल्दी झड़ जाऊँगा वहाँ करने से। बस थोड़ा सा और..."

अपनी मुट्ठी से अदिति उसको मार रही थी, और बचपने आवाज में कहे जा रही थी- “नहीं वहाँ नहीं करो, मैं चिल्लाऊँगी नहीं नहीं...”

तब तक विशाल ने लण्ड को बाहर निकालकर दोबारा थूक लगाया लण्ड पर और अदिति की गाण्ड के छेदल पर, फिर लण्ड को छेद में ठूसा। अदिति के कमर को ज्यादा ऊपर उठाते हुए और उसकी दोनों टाँगों को चियारते हुए अपने लण्ड को छेद में घुसाया, एक चौथाई, फिर थोड़ा ज्यादा, जोर लगाकर और लण्ड अंदर।

अदिति सहते हुए अब चिल्लाई- “उफफ्फ... आईईई नहींऽऽ.."

मगर विशाल ने अपने मुँह को उसके चेहरे को अपनी तरफ मुड़ते हुए उसको किस किया और अंदर और थोड़ा लण्ड घुसा। जैसे ही आधा इंच और अंदर गया तो अदिति अपनी मुट्ठी जोर से बंद करके सह रही थी, अपने जबड़े को जोर से दबाते हुए सहन कर रही थी उस दर्द को। फिर और एक इंच अंदर घुसा तो अदिति नहीं सह पाई और रोने लगी। अपनी कमर को हिलाते हुए जैसे लण्ड को बाहर निकालना चाह रही हो। मगर विशाल ने उसको मजबूती से दबाया हुआ था बेड पर।

अदिति जब उस तरह से हिल रही थी तो विशाल ने अपने लण्ड को अंदर बरकरार रखे हुए, अदिति की कमर को एक हाथ से पकड़े हुए उससे कहा- “देखो जान अगर ऐसे हिलोगी तो लण्ड बाहर निकल जाएगा, और अगर निकल गया तो मैं दोबारा अंदर डालूँगा, तो ज्यादा दर्द होगा तुमको, तो बेहतर है की अंदर ही रहने दो उसे। बस धीरे-धीरे हौले-हौले, धीरे-धीरे अंदर लेती जाओ इसको। बस और थोड़ा सा घुसना बाकी है अब। देखो मैं आराम से कर रहा हूँ, बिल्कुल रफ नहीं हूँ। देखो कितने प्यार से लगा रहा हूँ, वो इसलिए की तुमको दर्द ना हो। अब जान इसको महसूस करो, पापा को सोचो दोबारा, बस सोचो की पापा ने अभी कुछ देर पहले किया और अब तुमको पीछे से ले रहा है। वही सोचो तो देखना एंजाय करोगी। पता है जान अधेड़ लोग पीछे करना ज्यादा पसंद करते हैं। तो पापा यही चाहेंगे तुमसे ज्यादा। वाह आघघ्गघह घुस गया बेबी। अब मुझे फिर से पापा बुलाओ ना जान... काल मी पापा हनी इट्स आल इनसाइड यू.. वाओव...”

विशाल फिर धीरे-धीरे लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। बहुत धीरे-धीरे क्योंकी बहुत ज्यादा टाइट था वहाँ। आसानी से नहीं हो रहा था। अदिति अपनी मुट्ठी बंद किए, सांस को थामे हुए इंतेजार कर रही थी की कब खतम होगा उसका अंदर आना जाना। उसने एक गहरी सांस लेते हुए खुद अपनी कमर को ऊपर उठाई क्योंकी उसको नहीं पता था किस पोजीशन में दर्द नहीं होगा। कमर ऊपर उठाने से विशाल को और मजा आया और पोजीशन मिली अंदर-बाहर करने को थोड़ा और जल्दी-जल्दी।

फिर विशाल ने आदिती की टाँगों को थोड़ा ऊपर किया, कुछ इस तरह की अदिति अपने घुटनों पर आ जाये और वो करता गया। अदिति की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी कमर हिलाते हुए लण्ड को गाण्ड के अंदर बाहर करने लगा। फिर जोर से ऐसा धक्का दिया की लण्ड परा के परा अदिति की गाण्ड के अंत

अदिति की चीख निकली बहुत जोर से- “आईईई... ओह माई गोड... ओह्ह... नहीं उफफ्फ... तुम मुझे मार डालोगे क्या विशाल? मुझको चक्कर आ रहा है। उईई माँ...”

विशाल सब अनसुना करते हये धक्का बराबर देता जा रहा था, ज्यादा जोर से नहीं ताकी अदिति को ज्यादा दर्द ना हो। उसकी गर्मी अपने लण्ड पर महसूस कर रहा था। कितना टाइट था और उसका लण्ड भी गरम हो गया था उसकी अंदर की गर्मी से। कमरे में पाद की बदब भी फैल गई थी, क्योंकी गाण्ड के छेद में से पाद निकल पड़ती है। मगर सब भूलकर उस वक़्त तो मजा लेने का वक्त था जो विशाल खूब ले रहा था।

विशाल गुर्राया- “मुझे 'पापा' बुलाओ ना... जल्दी बुलाओ पापा मुझे जाना तुम्हारे ससुर ने तुम्हारे पिछवाड़े में ढूंस दिया है बोलो उसको रुकने को... कम ओन बेबी..."

अदिति की अब भी अपनी साँस रुकी हुई थी दर्द को सहते हुए, और विशाल को खुश करने के लिए बोली- “पापा बस भी करो, निकालो बाहर बहुत दर्द हो रहा है, वहाँ जलन सी हो रही है, मुझसे से नहीं सहा जाता अब निकालो ना पापा, या जल्दी करो और जल्दी-जल्दी.."

विशाल को बहुत मजा आया अदिति के मुँह से सब सुनते हुए और उससे उसका नशा बढ़ गया और झड़ने को आया, रफ़्तार को तेज करते हुए शेर की तरह गुर्राते हुए विशाल की आवाज निकली- “हाँ बेबी हाँ... आई आम कम्मींग... आअघग... हाँ अब सब तुम्हारे अंदर छोड़ दूंगा अपने वीर्य को आह्ह... इट्स वंडरफुल...” हाँ हाँ हाँ सुपर्ब ओह माइ गोड... यू आर फैंटास्टिक स्वीट-हार्ट.."

अदिति फिर से पेट के बल बेड पर लेट जाती है। हाँफते हुए उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। और इस बार विशाल का लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में नर्म होने लगा।

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