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Adultery बुरी फसी लक्ष्मी आंटी (Completed)

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विक्की


परसों शाम को हम दोनों को मम्मियां एक बढ़िया salon में ले गई और हमारे बालों को कॉलेज के लिए स्टाइलिश लुक दिया। श्वेता मम्मी ने कहा कि उनके बच्चों को कोई घोंचू नहीं बुलाएगी। मम्मी ने हंसते हुए कहा कि उसने पापा को पहली बार देख कर यही कहा था पर अब उनका बच्चा कॉलेज जायेगा।

हंसी मजाक के साथ हमारे लिए नए कपड़े, बैग और बाकी समान लिया गया। घर पहुंचते ही खाना खाने बैठ गए और लक्ष्मी आंटी के हाथ का खाना उसकी याद दिला गया। सन्नी की हालत कुछ अलग नहीं थी तो हमें तसल्ली थी कि कोई हमारी बात समझ सकता है।

कल सुबह सबके जाने के बाद हम दोनों बाइक सवार होकर शहर के दूसरे कोने पहुंचे। वहां हम ने कंडोम का variety pack खरीद लिया और लक्ष्मी आंटी से मिलने लौट आए।

लक्ष्मी आंटी ने हमारे नए रूप को सराहा और हमें गले लगाते हुए कहा कि अब हम कॉलेज की नकचढ़ी लड़कियों को पटाने के लिए तयार हैं। कल दोपहर लक्ष्मी आंटी ने पहले अपना पूरा काम निपटा दिया और मेरे कमरे में सन्नी को बुला लिया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू, कल मैं गुस्से में थी और मैंने बिना सोचे कंडोम खरीद लिए। आज मेरे पास वो नहीं है।
मैंने भी बाद में सोचा और आप ने सही कहा था। आप कॉलेज जाओगे तो मैं भी यहां कॉलेज जाऊंगी। जब तक आप लौटोगे मैं भी अपने बच्चे को बड़ा बनाने के काबिल हो जाऊंगी। हमारा बच्चा भी बड़े कॉलेज में जाएगा।
उफ्फ. मैं भी किस बात पर अटक गई। मेरा मतलब है कि आप दोनों आज सिर्फ मेरी गांड़ मारो। ठीक है?"

कमिने तो हम हैं ही। तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को नंगा करके अपने लौड़े बारी बारी उसकी गांड़ में चलाए। लक्ष्मी आंटी ने मज़े लेते हुए अपनी कमर उठकर पूरे जोश से अपनी गांड़ को हमारे लौड़े की भेट चढ़ा दी। लक्ष्मी आंटी को हम नहीं छोड़ते पर पप्पू के घर आने का वक्त हो गया और लक्ष्मी आंटी को जाना पड़ा। लड़खड़ाते कदमों से चलती लक्ष्मी आंटी को हमने बताया की आज हम दोनों ने कंडोम का बड़ा पैकेट खरीद लिया है।

लक्ष्मी आंटी ने बदले से भरी नजर से देखते हुए कहा, "मैं कल सुबह जल्दी आउंगी। आप दोनों शैतानों से मुझे हिसाब बराबर करना है।"

आज सुबह पापा मम्मी के जाने के बाद मैंने और सन्नी ने घर की साफ सफाई कर ली ताकि लक्ष्मी आंटी को हिसाब बराबर करने के लिए ज्यादा वक्त मिले। लक्ष्मी आंटी भी वादे के मुताबिक जल्दी आ गई और हमारी मदद से कुछ ही देर में काम पूरा हो गया।

लक्ष्मी आंटी मेरे बेडरूम में किसी रानी की तरह दाखिल हुई तो हम दोनों उसके आदेश का इंतजार करने लगे। लक्ष्मी आंटी ने पैकेट अपने हाथों में लिया और अलग अलग तरह के कंडोम का मतलब पूछने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने हमें कपड़े उतारने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मुझे पान मसाला कंडोम पहनाया, तो सन्नी को केला कंडोम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने हमें बेड के किनारे बिठाया और खुद हमारे कदमों में बैठ कर हमारे लौड़े चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अच्छे से चूसा और चिढ़ाया पर झडने से पहले रुक गई।

लक्ष्मी आंटी बोली, "इन दोनों का स्वाद उतर गया है। कुछ और लगाते हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने फिर मुझे स्ट्रॉबेरी पहनाया और सन्नी को आम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ और हाथों से हम दोनों को सुख के कगार पर खड़ा कर गिरने से रोक रखा था।

"लक्ष्मी आंटी, अब और मत तड़पाओ। छूट जाने दो ना।"

लक्ष्मी आंटी ने कड़े स्वर में कहा, "दुबारा अपनी लक्ष्मी आंटी से कुछ छिपाओगे?"

हम दोनों ने सर हिलाकर ना कहा तो लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ मेरे लौड़े पर रख कर चूसा। मेरा रस कंडोम के अंदर भर रहा था कि लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को भी झड़ा दिया। हम दोनों बेड पर लेट गए तो लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उतार फेंके और हम दोनों से कहा,
"चलो उठो!! बताओ ये long lasting कितनी देर तक काम करता है?"

हम दोनों ने कहा कि हम नहीं जानते तो लक्ष्मी आंटी ने 2 पैकेट खोलकर कहा, "पता लगाना चाहते हो?"

नेकी और पूछ पूछ?

हम दोनों कंडोम पहन कर लेट गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटनों को मेरी कमर के दोनों तरफ रखते हुए अपनी चूत के मुंह पर मेरा सुपाड़ा रखा। मेरी आंखों में देखते हुए लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"खबरदार अगर जरा भी हिले डुले। चुप चाप पड़े रहो।"

लक्ष्मी आंटी के इशारे पर सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर अपना लौड़ा लगाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ के इशारे से उसे भी रोक दिया। हम दोनों के सुपाड़े लक्ष्मी आंटी के गरमी से भरे खजाने के दरवाजों पर दस्तक देकर खड़े थे।

लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेते हुए मेरी आंखों में देखा और बैठ गई।

मां. अन्हह. हां. आह.

लक्ष्मी आंटी ने अपने दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए और अब गहराई में उनके एहसास का मज़ा लेते हुए बैठ गई।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता है, इन कंडोम पर बने छोटे छोटे नक्काशी से मेरे अंदर तक आप दोनों के लौड़े कुछ अलग ही मजा देते हैं। उफ्फ. काश कि यह पल यहीं रुक जाए। मुझे प्यार करो बाबू। मुझे चोदो बाबू! मुझे फ़ाड़ दो!!!"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी का झूलते मस्त गोले पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए। लक्ष्मी आंटी ने हमें अभी चूसा था और उपर से long lasting condom पहनाया था। वक़्त तो लगना था। 10 मिनट लक्ष्मी आंटी को चोदने के बाद सन्नी थकने लगा और मैं उसकी जगह लेने के लिए तयार था।

सन्नी ने अपने बदन से लक्ष्मी आंटी को हम दोनों के बीच दबा दिया। बिना अपनी ताल बदले लक्ष्मी आंटी के साथ हम ने पलटी मारी। अब सन्नी पीठ पर लेटे हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ मार रहा था और लक्ष्मी आंटी अपने पैरों से अपनी कमर उठकर मुझसे अपनी चूत मरवा रही थी।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी कमर हिलाई और हम दोनों से एक साथ चुधाते हुए झड़ने लगी। सन्नी और मैंने भी ठान ली थी कि long lasting condom पहनाया है तो उसमें ही झड़ेंगे। 10 मिनट और लक्ष्मी आंटी झडते हुए जम कर चुधी। लक्ष्मी आंटी कभी मेरा नाम लेती, तो कभी सन्नी का पर चीखती रही। आखिर में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का नाम लेते हुए अपनी तोप चला दी। लक्ष्मी आंटी सन्नी के बदन पर लेट गई और मैं उसकी चूत को चोदता रहा। 1 मिनट बाद मैंने भी कंडोम भर दिया और लक्ष्मी आंटी की चूचियों को चूमते हुए सुस्ताया।

लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में उंगलियां घुसा कर मेरे गाल को चूमते हुए कहा, "आप दोनों बड़े वो हो। ऐसे लगा जैसे. पप्पुजी!!"

लक्ष्मी आंटी के हाथ पैर ठंडे पड़ गए। मैंने मुड़कर देखा तो दरवाजे में एक हट्टा कट्टा आदमी खड़ा था। मैं लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन को अपने नीचे छुपाने लगा तो उसने कहा,
"कपड़े पहन कर बाहर आ जाओ। मैं खाना परोसता हूं।"
 
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सन्नी


मैंने और विक्की ने कपड़े पहन लिए पर लक्ष्मी आंटी अपने बदन से कपड़े लगाए डर कर बैठी रही। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को हिम्मत दी और उसे कपड़े पहनाकर बाहर ले आए। पप्पू डायनिंग टेबल पर बैठा था और उसकी तेज नजरें हम पर गड़ी हुई थी।

"इस में लक्ष्मी आंटी की कोई गलती नहीं है। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी का बलात्कार किया है।"

पप्पू ने एक सर्द मुस्कान के साथ कहा, "बिल्कुल!! मैं 20 मिनट से लक्ष्मी की यही चीखें तो सुन रहा था। लक्ष्मी ने मुझे देखने से पहले 10 मिनट तक मैं दरवाजे में खड़ा था। मुझे सब पप्पू बुलाते हैं इसका मतलब ये नहीं कि मैं पप्पू हूं। चलो तीनों मेरे सामने बैठो। आज मैं एक कहानी सुनाऊंगा।"

हम लक्ष्मी आंटी को हमारे बीच बिठाकर पप्पू की बात सुनने लगे।

पप्पू बोला, "मेरा नाम प्रतीक है पर बचपन से सब पप्पू बुलाते हैं। कम उम्र में ही मैंने अपने काम में हुनर को दिखाया और अचानक मेरे पास काम आने लगे। पर ये किसी से देखा नहीं गया। उसने एक रात मेरे पेट में चाकू से वार करने की कोशिश की। मैंने बचते हुए उसका हाथ हिलाया और चाकू नीचे लग गया। डॉक्टर अच्छा आदमी था। उसने जो हो सके वो बचाया पर उसने अकेले में मुझे बताया कि मैं कभी शादी ना करूं। मेरा लौड़ा अब किसी औरत के काम का नहीं। शादी की जिद घरवालों ने पकड़ ली तो मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन गया। आखिर ऐसे इंसान को कोई अपनी बेटी क्यों देगा?

फिर लक्ष्मी आई। अपना राझ छुपाने के लिए एक सुंदर और अच्छी लड़की की जिंदगी मुझे बरबाद करनी पड़ी। मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन कर लक्ष्मी को बहुत सताया करता पर लक्ष्मी पूरी पतिव्रता नारी निकली। पहले एक साल इसने मुझे सुधारने की कोशिश की, फिर एक साल संभालने की कोशिश की और आगे मुझे झेलती रही। जो सुख मैं लक्ष्मी को नहीं दे सकता वो उसे मिले इसके मेरे पास 2 रास्ते थे। 1 मैं बस्ती के किसी आदमी को बुलाता पर फिर वो लक्ष्मी की इज्जत नहीं करता, उसके बारे में बाहर बोलता, उसे अपने दोस्तों में बांटता और मैं भी अपना राझ नहीं छुपा पता। 2 कोई बड़ी उम्र का अमीर आदमी लक्ष्मी की जवानी पर लट्टू हो जाए और लक्ष्मी को अपना बनाए, तो वो अपनी इज्जत के लिए लक्ष्मी की इज्जत बचाता। इसी लिए मैंने लक्ष्मी को पवन साहब और अश्वेत साहब के पास काम करने भेजा। सोचा कि दोनों अब भी जवान है तो कोई अपनी बीवी से किसी दिन लड़ कर लक्ष्मी को आजमा सकता है। 4 साल तक कुछ नहीं हुआ और मै शरीफों की शराफत को कोसने लगा।

पर पिछले एक हफ़्ते में सब बदल गया। पिछले हफ़्ते जब मैंने लक्ष्मी के पैसे चुराए तो बिजली कट गई और लक्ष्मी गुस्सा हो कर गई। अगले दिन शाम को बिजली लौट आई थी पर लक्ष्मी बहुत डरी हुई थी। उसने बताया कि 3 दिन बाहर जा कर खाना बनाने की लिए उसे 1500 मिलने वाले हैं। ये तो डरने की बात नहीं थी। मैं समझ गया कि किसी साहब ने लक्ष्मी को फंसा लिया है।

लक्ष्मी के जाने के बाद मैंने ताक झांक कर देखा तो पता चला दोनों साहब अपनी बीवियों के साथ है। मुझे लगा कि मैं गलत था पर लक्ष्मी लौटी तो उसके तेवर बदले हुए थे। उसने मेरा बहुत अच्छा खयाल रखना शुरू किया। लक्ष्मी गुनगुना रही थी। मैं समझ गया कि कोई ऐसा है जो लक्ष्मी को चाबी दे रहा है। लक्ष्मी की बैग में एक satin में बना नाइट गाउन मिला जो उसने कहा कि उसने खरीदा था पर कैसे? पैसे तो उसके पास नहीं थे। सोमवार को उसने गाउन को प्यार से अपने बक्से में रख दिया। Satin गाउन पति के लिए होता है या फिर प्रेमी के लिए। पति के लिए पहना नहीं तो बचा कोन? मंगलवार को लक्ष्मी उदास लौटी और satin dress पहनकर सो गई। बुधवार को मैंने देखा कि लक्ष्मी ने कंडोम खरीद कर अपने पर्स में रखें। कोई कुंवारी कंडोम ले कर काम पर जाए तो उसका आशिक वहीं होगा। तब मुझे आप दोनों याद आए। बच्चे अब जवान हो गए हैं। सोचा की आप दोनों में से किसी ने लक्ष्मी को जवानी का मजा दिलाया होगा। कल मैंने आप दोनों के बारे में सारी बातें जान ली तो पता चला कि आप दोनों तो कुछ ही दिनों में दूसरे शहर के कॉलेज जाओगे। मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी प्यारी दोस्त लक्ष्मी का दिल टूटेगा। सोचने लगा कि जिस कॉलेज में आप जाओगे उस शहर में मैं भी लक्ष्मी के साथ रहने आ जाऊं। लेकिन होनी को ये बात भी मंजूर नहीं।

कल शाम को Gulf across seas job में से मुझे कॉल आया। अच्छे तनखा के साथ मुझे 4 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। अब लक्ष्मी को मुझे परेशान करने की जरूरत नहीं पर किसी को लक्ष्मी के साथ होना चाहिए। सोचो क्या करें?"

"गल्फ में शराब, जुआ और नशा तीनों को बहुत ज्यादा सजा है। रह पाओगे?"

प्रतीक ने जोर से हंसते हुए कहा, "अब तक समझे नहीं? मैं अपने उपर शराब उड़ाकर घर लौटता हूं। मैं ना शराब पीता हूं और ना नशा करता हूं। जुआ खेलने के नाम पर बाहर जा कर काम करता हूं। कितने हट्टे कट्टे नशेड़ी शराबियों को जानते हो? मेरी पूरी तनख़ा और लक्ष्मी से चुराया एक एक पैसा मैंने बचाया है, संभाल कर रखा है।"

प्रतीक टेबल से उठकर हमारी ओर आया तो मैंने उस से लक्ष्मी आंटी को बचाने की तयारी कर ली। प्रतीक लक्ष्मी आंटी के पैरों में बैठ गया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे उठाने की कोशिश की। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के हाथ अपने हाथों में पकड़ कर कहा,
"लक्ष्मी, मैंने तुम्हें धोका दिया है, बहुत ज्यादा सताया है। पर शादी के दिन हम पहली बार मिले और मैं तुम्हारी मासूमियत देख तुम्हें कैसे बताता की खोट तुम में नहीं मुझ में है। पिछले 4 सालों में तुम मेरी दोस्त बनी ये जानते हुए कि मैं तुम्हारा फायदा उठा रहा था। अपने मन से ये बात निकाल दो के तुम मुझ से धोका कर रही हो। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूं कि मैं चाहता हूं कि तुम्हे वो सारी खुशियां मिले जो मैं तुम्हें देने के काबिल नहीं।"

लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए प्रतीक के सर को अपनी बाहों में भर कर अपने दिल पर बना धोखे का बोझ उतार दिया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को देखते हुए कहा,
"बाबू, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि लक्ष्मी को एक से ज्यादा प्रेमी मिलेंगे पर मैं लक्ष्मी को अपमानित होने नहीं दूंगा। आप दोनों लक्ष्मी के साथ सुख बांटो तो मुझे शिकायत का कोई हक़ नहीं पर लक्ष्मी को आप दोनों से आपकी प्रमिका का सम्मान भी मिलना चाहिए। मैं जाने से पहले लक्ष्मी का अच्छा इंतजाम करके जाऊंगा पर मुझे खुशी होगी अगर आप दोनों भी लक्ष्मी पर नजर रखें। समझे?"

पप्पू हमारी नज़रों के सामने प्रतीक बन गया। प्रतीक ने हमारे साथ खाना खाया और लक्ष्मी आंटी अपनी मर्जी से प्रतीक के साथ अपने घर चली गई। आज उन दोनों को पिछले 4 सालों की काफी बातें करनी थीं। मैं और सन्नी सोच में पड़ गए थे कि लक्ष्मी आंटी को प्रतीक के साथ जाने देना सही था या गलत? प्रतीक अगर अब भी पप्पू हुआ तो घर जाकर लक्ष्मी आंटी के साथ कुछ कर सकता है और रोकें तो कैसे?

शाम को मम्मियों को पापाओं ने बताया कि कॉलेज के बाहर ही एक अच्छा फ्लैट मिल गया है और हम दोनों के खाने और सफाई का इंतजाम हो जाए तो अगले 4 साल हमें कोई कमी नहीं होगी। समीरा मम्मी ने कहा कि वह लक्ष्मी आंटी से पूछेगी अगर उसके पहचान कि कोई लड़की या औरत अच्छे तनख़ा के लिए हमारे साथ रहने को तैयार हो जाए। जब पापा ने कहा कि पराई औरत पर विश्वास नहीं कर सकते तो मम्मी ने लक्ष्मी आंटी को शराबी विक्की से दूर करने की बात की।

हम दोनों मेरे कमरे में बैठ कर बड़ों की बातें कंप्यूटर पर सुन रहे थे। मम्मी ने लक्ष्मी आंटी से सुबह बात करने की ठान ली और हमारे मन में लड्डू फ़ूटने लगे।

शनिवार को सब बड़ों ने छुट्टी ली थी ताकि लक्ष्मी आंटी से सीधी बात की जाए। लेकिन लक्ष्मी आंटी के साथ प्रतीक भी आया। प्रतीक को देख मम्मियां चौंक गई तो पापा एक दूसरे की ओर देखने लगे। प्रतीक ने बताया कि उसे दुबई के बिजनेसमैन MBS, मोहम्मद बिन सलीम ने अपनी कंपनी में नौकरी दी है। अच्छी तनखवाह के कारण लक्ष्मी आंटी को अब काम करने की जरूरत नहीं पर लक्ष्मी आंटी को अकेले छोड़ना प्रतीक के मन को नहीं भाता।

पापा ने प्रतीक को पासपोर्ट, विसा और टिकट के लिए एक लाख की मदद देने का वादा किया। प्रतीक ने कहा कि कल वह अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ जीता है और अब उसे पैसों की कमी नहीं। जब पवन अंकल ने फिर भी मदद करनी चाही तो प्रतीक ने कहा कि उसे लक्ष्मी का बस्ती में अकेले रहने से डर लगता है।

समीरा मम्मी ने मौके का फ़ायदा उठाया और कहा कि बच्चों को दूसरे शहर में खाना बनाने और सफाई के लिए कोई चाहिए होगा। अगर प्रतीक को ऐतराज नहीं है तो लक्ष्मी आंटी उनके साथ वहीं रह सकती है। प्रतीक तुरंत मान गया और सब अपनी अपनी वजह से खुश हो गए।
 
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सन्नी


अगले 10 दिन मानो पर लगाकर उड़ गए। पप्पू यानी प्रतीक के कागजात तैयार हो गए तो उसकी भी तैयारी हो गई। हम दोनों का कॉलेज selection final हो गया तो मम्मियां छुट्टी ले कर अपने बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहती थी। लक्ष्मी आंटी रविवार को एक नई औरत को लेकर आई जो घर के सारे काम करेंगी। इसका नाम गंगा मासी था और वह किसी भी तरह से दादी से कम नहीं थी। मैंने पापा को पवन अंकल से कहते सुना कि बच्चे बंगाली मिठाई खा गए और हमें तो सुखा डिब्बा भी नसीब नहीं हुआ।

मंगलवार को दोनों पप्पा हमें ले कर मुंबई आ गए। Admission करवाने के बाद हम सब नए फ्लैट को देखने गए। टैक्स के लिए फ्लैट कंपनी के नाम पर था और बिल्कुल खाली था। पवन अंकल ने कहा कि 10 दिन में अंदर हमारे लिए एक अच्छा डबल बेड और वॉर्डरोब लगा होगा। पढ़ाई और बैठने के लिए हॉल में समान लगा दिया जाएगा। कमरा 1BHK है तो साफ सफाई के लिए ज्यादा नहीं है।

मैंने भोलेपन से कहा, "पर लक्ष्मी आंटी का क्या?"

दोनों पापा ने एक दूसरे की ओर देखा और उन्होंने हमारे कान पकड़ कर मोड़ दिए।

पापा ने हमें डांटते हुए कहा, "हम तुम्हारे बाप हैं!! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई लक्ष्मी आंटी के साथ ऐसा करने की। 4 साल से वो हमारे भी सामने खड़ी थी। नौकर ऐसा करे तो वह जेल जाता है और मालिक ऐसा बरताव करे तो नौकर उसका गला काट देता है। लक्ष्मी आंटी नाजाने क्यों तुम दोनों का साथ दे रही है। पर उसके साथ के कारण हमने पप्पू को नौकरी के बहाने दूर भगाया। हम नहीं जानना चाहते कि यहां क्या होता है और कैसे। बस इतना याद रखो कि ये चार साल वापस नहीं आएंगे। दिल लगाकर पधो और लक्ष्मी आंटी का खयाल रखना। जानते हो मर्द को 21 से पहले शादी क्यों मना है? क्यूंकि शादी के बाद उसे अपने साथ अपनी बीवी की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। लक्ष्मी आंटी से कोई शिकायत आए तो हम उस वापस बुला लेंगे और तुम दोनों अपना हाल खुद संभालो। समझे?"

पवन अंकल ने कहा, "लक्ष्मी आंटी को हम ने कंपनी में नौकरी पर रखा है। उसे हेल्थ इंश्योरेंस भी मिलेगा जिसमें मैटरनिटी की अनुमति है। गलती से भी उसका इसतेमाल मत करना!!! औरत को रिझाया है तो आटे दाल का भाव जान लो। दुबारा गडबड की तो शायद उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"

ये बताने की जरूरत नहीं की हम दोनों की अकल ठिकाने आ गई थी। एजेंसी को चाबी दे कर हम सब लौट आए। मम्मियों ने हमारा ऐसे स्वागत किया की हम जंग से लौटे हो। पापा ने गुस्सा थुंक दिया और हमारे कॉलेज और कमरे के बारे में सब बताने लगे।

प्रतीक के जाने की तारीख आते हुए हम सब में दोस्ती हो गई। प्रतीक को हम दोनों से 2 दिन पहले जाना था। मैं, विक्की और लक्ष्मी आंटी उसे एयरपोर्ट पर छोड़ने गए तो लक्ष्मी आंटी रो पड़ी। प्रतीक ने उसे गले लगाते हुए उसके कान में कुछ कहा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर हां कहा। उन्हें देख कर कोई भी उनके बीच के प्यार को महसूस कर सकता था। प्रतीक ने कहा कि उसने पापा से बात कर ली थी और लक्ष्मी आंटी आगे जा कर कमरा ठीक कर देगी।

प्रतीक का हवाई जहाज सुबह 10 बजे उड़ गया और लक्ष्मी आंटी ने शाम की ट्रेन पकड़ ली। अगले 2 दिन पॅकिंग और नसीहत में उड़ गए। जाने के दिन मम्मियां चिड़चिड़ी हो गई थी और दोनों पापा अकसर उनसे दूर भागते नजर आ रहे थे। आखिर में दोनों मम्मियों ने रोना शुरू किया और हमें गले लगाते हुए अपना खयाल रखने को कहा। सुबह की फ्लाइट से हम दोनों मुंबई पहुंचे तो थके हुए थे और लक्ष्मी आंटी को पकड़ने के लिए बेताब थे। कमरे का दरवाजा खटखटाया तो लक्ष्मी आंटी ने अंदर आने को कहा।

लक्ष्मी आंटी ने अपने चेहरे पर कुछ हरा लेप लगाया था और उसके बालों को एक जालीदार टोपी में ढका हुआ था। हाथों और पैरों में अजीब प्लास्टिक के मोजे थे। Satin dress छोड़कर लक्ष्मी आंटी को पहचानना मुश्किल था।

लक्ष्मी आंटी ने डांटते हुए कहा, "ऑफो, अब ऐसे ही खड़े मत रहो!! आप दोनों के कॉलेज से चिट्ठी आई है कि आज 12 बजे सब को मिलना है। यहां से आप के जहाज को चक्कर काटते देख मेरी जान गले में आ गई। अब पहले ही दिन देर से जाओगे क्या? चलो बाथरूम में घुस जाओ तब तक मैं आप दोनों के कपड़े रख देती हूं। चिट्ठी में लिखा था कि प्रोग्राम देर तक चलेगा तो सीधे खाने पर मिलेंगे।"

मैं और विक्की एक साथ नहाने लगे तो बड़ा अजीब लगा। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को तौलिए दिए। लक्ष्मी आंटी को हम ने अंदर खींच लेते इस से पहले ही वो भाग गई। बाहर आ गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे कॉलेज के कपड़े पहनने के लिए तयार रखे थे और साथ में खाना भी लगाया था। लक्ष्मी आंटी के अंदर शायद कोई मिलिट्री का अफसर या कोई मम्मी आ गई थी जो हम दोनों को वक़्त पर तयार कर भेज रही थी। मुंह पर लगे लेप और हाथ पर लगे प्लास्टिक मोजे को दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी ने हमारे साथ खाने से मना कर दिया।

उलझे हुए विचार और भारी लौड़े से हम दोनों भी कॉलेज गए। कॉलेज के गेट से अंदर जाते हुए विक्की बोल पड़ा,
"सन्नी, अगले 4 साल ऐसे ही बीते तो."

"शुभ शुभ बोल विक्की। शुभ शुभ बोल।"
 
34a
विक्की


कॉलेज की अगर ये शुरुवात थी तो अगले 4 साल जालिम होंगे ये बताने की जरूरत नहीं थी। बड़ी बड़ी हस्तियां हमें सिखाने के लिए आयेंगी और हमें परखेंगी। कॉलेज के अधिकतर लोग स्कूल से सीधे आए लग रहे थे और कुछ हसीनाओं ने हम से बात की। शायद पापा कि डांट या प्रतीक को दिया वादा या लक्ष्मी आंटी की लुभावनी छवि, किसी न किसी वजह से हम इनके हुस्न से बाहर निकल आए।

शाम के 7 बजे थोड़े डर और थोड़ी उत्तेजना से हम दोनों ने दरवाजा खटखटाया। जवाब न मिलने पर चाबी से दरवाजा खोला। पूरे घर में अंधेरा था और मेज पर एक मोमबत्ती के नीचे चिट्ठी रखी थी।

"नहाकर वापस यहां आओ। मैं आप दोनों का इंतजार कर रही हूं। आप दोनों की
लक्ष्मी आंटी"

हम दोनों ने बाथरूम की ओर दौड़ लगाई और बिना कुछ सोचे नहा कर साफ हो गए। हम दोनों ने दाढ़ी बनाई। दोनों के तौलिए अंदर ही रखे हुए थे तो उन्हें पहनकर हम वापस बाहर आए।

कमरे में एक और मोमबत्ती जल रही थी और मेज पर एक नई चिट्ठी थी।

"मेज के नीचे रखे हुए कपड़े पहन कर रोशनी के साथ आओ।
लक्ष्मी आंटी"

कमरे में अब दो मोमबत्तियां थी। एक मेज पर तो दूसरी बेडरूम के दरवाजे में। हमने लक्ष्मी आंटी की तयारी कि कदर करते हुए नीचे से कपड़े निकाले। दो जोड़ी कुर्ता और पजामा देख हम ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। मैंने मेज पर रखी मोमबत्ती उठाई तो सन्नी ने आगे बढ़ कर बेडरूम के दरवाजे में रखी मोमबत्ती उठाई।

हम दोनों ने बेडरूम में देखा तो वहां पूरा अंधेरा था। हम दोनों अंदर गए तो अलग अलग जगह पर मोमबत्तियां लगी हुई थी। हमें लक्ष्मी आंटी की आवाज सुनाई दी,

"बाहर से अंदर तक उजाला कर दो पर जो मेरी ओर देखेगा वह कल सुबह तक सिर्फ देखेगा।"

लक्ष्मी आंटी की बात मान कर, हम दोनों ने सारी मोमबत्तियां जलाई। आखरी मोमबत्तीयां बेड किनारे बनी मेजों पर रखी थी। मोमबत्ती जलाने पर वहां हमें दूध का एक एक प्याला मिला जिसके नीचे एक और चिट्ठी थी।

"दूध ले कर बेड पर आ जाओ।"

हम दोनों को पता था कि लक्ष्मी आंटी ने क्या किया है पर फिर भी लक्ष्मी आंटी को देख दिल की धड़कन बढ़ गई। लक्ष्मी आंटी दुल्हन का जोड़ा पहने बेड के बीच में बैठी थी। लक्ष्मी आंटी ने सर से घूंघट में अपना चेहरा छिपाया था। लक्ष्मी आंटी के मेहंदी से रंगे हाथों से उसके घुटनों को घेरा था। पायल में बंधे हुए मेहंदी लगे पांव अपनी हिचकिचाहट में कांपती उंगलियों को गद्दे पर दबा रहे थे। हम दोनों लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ बैठ गए।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के घूंघट को हाथ लगाया तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे हाथ पकड़ लिए।

लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "ऐसे नहीं होता बाबू!! पहले मुंह दिखाई कि कीमत चुकानी पड़ेगी। बोलो क्या दोगे आप दोनों?"

ये तो हम ने सोचा ही नहीं था। खड़े लौड़े के सिवा हमारे पास देने लायक कुछ नहीं था।

सन्नी ने दिमाग लगाया और कहा, "रामायण के भगवान राम के तरह हम तुम्हें वचन देते हैं कि."

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होटों पर मेहेंदी लगी उंगली रख कर उसे रोक दिया। लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू, वादा ऐसा करो जो निभा पाओ। क्यों न आप दोनों मुझे कैकई की तरह 2 वचन दो?"

हम दोनों को लक्ष्मी आंटी पर विश्वास था और हम दोनों ने हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "आप मुझे वचन देते हो के जब तक हम साथ हैं आप किसी और लड़की के प्यार में नहीं पड़ेंगे। मेरे साथ धोका नहीं करेंगे। यहां सिर्फ पढ़ाई करोगे और बाकी मुझ पर छोड़ दोगे। मंजूर है?"

हम दोनों ने खुशी खुशी हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी दूसरी शर्त कही, "बाबू आप दोनों अब मुझे दूसरा वादा करो कि आप दोनों मुझे किसी और के साथ बांटोगे नहीं। अब आप दोनों बड़े शहर के कॉलेज के लड़के हो गए हो और शहरी लोगों से डर लगता है बाबू।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से वादा किया कि हम उसके प्यार को उसके खिलाफ इस्तमाल नहीं करेंगे। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और लक्ष्मी आंटी ने हमारे बीच में बैठ कर हमारे सर पर हाथ रखा। हम पीछे हो गए और लक्ष्मी आंटी का घूंघट उठने लगे। लक्ष्मी आंटी के सर से घूंघट उतर गया और लक्ष्मी आंटी के अवर्णनीय रूप ने हमें मोह लिया।

नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई लक्ष्मी आंटी को हम दोनों आंखे फाड़कर देखते रह गए। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कहा,
"बाबू, ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने भी आप दोनों के लिए कुछ किया है। अभी दिखाऊं?"

हम दोनों बस सर हिलाकर हां कर पाए। लक्ष्मी आंटी ने तकिए के नीचे से कुछ निकाल कर हमें दिया। मोमबत्तियों के उजाले में, लक्ष्मी आंटी के रूप से चोंधियाई आंखों को वह चीज पहचानने में थोड़ी दिक्कत हुई । वह गर्भनिरोधक गोलियों का चौकोनी पैकेट था जिस में से 6 गोलियों खाई गई थी।

सन्नी के दिमाग की बत्ती जली तो उसने लक्ष्मी आंटी की ओर देखा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए अपने मेहंदी लगे हाथ को आगे कर दिया। सन्नी ने एक गोली लक्ष्मी आंटी के हाथ में रख दी और लक्ष्मी आंटी ने हमारी नज़रों में देखते हुए उसे निगल लिया। मैंने होश में आ कर दूध का ग्लास लक्ष्मी आंटी को दिया और उसने शरमाते हुए आधे से थोड़ा कम पी लिया। सन्नी ने भी लक्ष्मी आंटी को अपना ग्लास दिया तो उसके ग्लास को भी जूठा कर लक्ष्मी आंटी ने लौटाया। आगे की बात समझकर हम दोनों ने बाकी दूध गटक लिया और ग्लास मेजों पर रख दिए।
 
34b
सन्नी


आज शाम को कॉलेज की कई हसीनाओं ने शरमाते हुए हम से बात की थी पर लक्ष्मी आंटी को देख उन्हें याद करना भी मुश्किल था। घूंघट बना दुपट्टा उतरने के बाद लेहेंगे चोली में बैठी लक्ष्मी आंटी पर झपट पड़ने से हम दोनों ने खुद को रोका। मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के उंगलियों को सहलाकर चूमते हुए उसके पायल को अपनी जीभ से बजाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के बालों में सजे मांग टिक्के को चूमकर हटाया तो उसके नीचे लक्ष्मी आंटी की मांग में सिंदूर भरा हुआ था।

हमें याद आया की लक्ष्मी आंटी प्रतीक कि बीवी है। लेकिन प्रतीक कि अनुमति याद करते हुए सोचा कि बीवी किसी की हो तो भी हम दोनों की सुहागन है। मैंने इंच इंच करके लक्ष्मी आंटी के लेहेंज को मोड़ते हुए उसके सुडौल पैरों को उजागर किया। मोमबत्तियों के उजाले में लक्ष्मी आंटी की काया सोने की तरह चमक रही थी। विक्की ने मांग टिक्के से मिलती बालियों को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना से बन्द होती आंखों को चूमा। लक्ष्मी आंटी के घुटनों को चूमकर मैंने फैलाया तो लक्ष्मी आंटी बेड पर लेट गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को चूमते हुए उसकी चोली के गले में जाते मंगलसूत्र को भी चूमा।

प्रतीक कि अनुमति से उसे धोका देने की बात से लक्ष्मी आंटी के बदन में उत्तेजना से लहर दौड़ गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पेट के बल लिटा दिया और उसके पीठ पर लगी चोली की गांठ को अपने दातों से खोलने लगा। मैंने मौके का फायदा उठाकर लक्ष्मी आंटी के घुटनों के पीछे का हिस्सा चूमा। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उत्तेजना से आह भरी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चोली खोली और पीठ चूमते हुए कंधे पर से चोली का कपड़ा सरकाकर उतारने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी की मांसल जांघों को चूमते हुए उसकी गोल मटोल गांड़ को छिपाते पैंटी के किनारे चूमे।

लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण नजरों से हमें देख कर कहा, "बाबू अब और मत तड़पाओ। मेरा बदन जल रहा है। इस आग को अपने प्यार से बुझाओ।"

मैंने लक्ष्मी आंटी के लहंगे का नाड़ा खींच लिया तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर उसे उतारने में मेरी मदद की। लहंगा घुटनों तक उतार दिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पलट दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और पैर उठाए और हम दोनों ने लहंगा चोली उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने सेक्सी लाल ब्रा और पैंटी कि जोड़ी पहनी थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को चूमते हुए खोला। लक्ष्मी आंटी की गीली पैंटी से आती उसकी यौन खुशबू ने मुझे बुलाया। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत को उस पैंटी में से चूमना और चूसना शुरू किया।

लक्ष्मी आंटी से अब और इंतजार नहीं हुआ और उसने अपनी पैंटी उतार फेंकते हुए अपनी जांघों को फैलकर मुझे जगह दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की ब्रा उतारी और लक्ष्मी आंटी के रसीले फलों को चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से विक्की के बालों को सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की चूत को मेरा कुर्ता पजामा में बन्द लौड़ा रगड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को अपने स्तन पर दबाते हुए मेरे पजामे का नाड़ा तोड दिया।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देख कर सिर्फ 1 शब्द कहा, "चोदो!!"

मैंने पल दो पल में अपने सारे कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली और मुझे अपनी धधकती गरमी में खींच लिया। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी चूत की गहराई नापने अंदर गया तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को पकड़ कर उसे चूमते हुए उसके होंठों से अपनी चीखें दबाई।

लक्ष्मी आंटी ने विक्की का भी नाड़ा तोड दिया और उसके लौड़े को हिलाने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की लाल बरियों को चूमते, चूसते हुए अपनी रफ़्तार बढ़ा दी तो लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन अकड़ते हुए मुझे अंदर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी के खजाने में से यौन रस की नदी फुट कर बहने लगी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए अपना बदन ढीला छोड़ दिया। मैं झडने के करीब था पर मैंने विक्की को आंख मारी और वह समझ गया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की पकड़ से खुद को छुड़ाकर अपने कपड़े उतार दिए। विक्की जल्द ही मेरे पास आ गया और मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। लक्ष्मी आंटी ने बस पल भर के लिए विरोध किया था कि विक्की ने मेरी जगह ले ली।

"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी ने पुकारते हुए अपने दूसरे प्रेमी को आलिंगन में भर लिया। विक्की ने तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी को चोदना चालू रखा और लक्ष्मी आंटी ने तप कर दुबारा अपना पानी छोड़ दिया। विक्की लक्ष्मी आंटी को बाहों में भर कर चूमते हुए चोद रहा था और मुझे डर था कि वह अपने आप को रोक नहीं पायेगा। विक्की के तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी ने लगातार दूसरी बार पानी छोड़ा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घोड़ी बनाया। विक्की ने मुझे आंख मारी और मैंने विक्की कि जगह ले ली।

"बाबू! आप दोनों क्या कर रहे हो! उन्हहह. मुझे भर दो ना. मैं आपके प्यार की प्यासी हूं।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

लक्ष्मी आंटी को मैंने पैर फैलाकर घुटनों पर खड़ा किया और अपने लौड़े को एक झटके में पूरा पेल दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होठों को दातों में पकड़ कर अपनी चीख निगल ली। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की हालत का मजा लेते हुए उसके नीचे सरक गया और लक्ष्मी आंटी के झूलते मम्मों को अपने हाथों में पकड़ कर उन मम्मों की लाल बेरियों को चूसने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने बात करने की सारी कोशिशों को भूल कर अपने बदन को छूट दी।

"हनहह.हम्ममम. अन्ह. आंह. आईआईइश. आह. अम्म्म. मां. अंहह. हां. हा हा हा.", करते हुए लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही।

दूसरी बार लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर निकल पाना मुझसे नहीं हुआ और मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर उसे अपने लौड़े पर खींच कर दबाया।

"अहहह. आंटी. आह. हुँहह." करते हुए मैंने अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी को भेंट चढ़ा दिया।

विक्की मेरे लिए तयार था और मेरा लौड़ा बाहर निकलते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पीठ पर लिटाकर उसकी गांड़ के नीचे एक तकिया रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई और मेरा रस लक्ष्मी आंटी के अंदर जमा रहा। विक्की ने अब अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी की चूत में उतार कर लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चोदना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे अपने पैरों से जकड़ लिया। विक्की के तेज धक्के अब लंबे नहीं थे पर हर धक्के से ऐसा आवाज आता जैसे भरी बाल्टी में लोटा गिरने से होता है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कामुक आवाज से उसका साथ दिया और विक्की ने अपनी ताल पकड़ ली।

"पुच्च. अन्ह. चुपक. पुच्च. आह. चूपाक. पुच्च. हां."

इस संगीतमय कामक्रीड़ा को कोई ज्यादा भोग नहीं पता और विक्की जल्द ही लक्ष्मी आंटी को पुकारते हुए उस से चिपक गया।

लक्ष्मी आंटी अपनी टांगे फैला कर बेड पर लेटी छत देख रही थी और हम दोनों उसकी बगल में लेट कर उसके कंगन, बाली और पायल के साथ खेल रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "बाबू, मैं ये मंगलसूत्र उतार कर रख दूं? पहले मैंने इसे गिरवी रखा था और प्रतिकजी ने इसे छुड़ाकर छिपा दिया था। पर शायद अब ये आप दोनों को पसंद नहीं आए।"

"जानू, ये मंगलसूत्र निशानी है प्रतीक ने हम दोनों पर तुम्हे खुश रखने की दी हुई जिम्मेदारी कि। इसे कभी नहीं निकालना।"

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों मेरी बात मान लीजिए कि मै आप दोनों को बाबू ही कहूंगी और आप दोनों मुझे लक्ष्मी आंटी कहोगे। इस से किसी और के सामने हमारा भेद नहीं खुलेगा। ठीक है?"

विक्की और मैं लक्ष्मी आंटी की इस बात में छिपी सच्चाई को स्वीकार कर मान गए। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हमारे लौड़े फिर से बढ़ने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारा इरादा पहचानते हुए कहा, "अब क्या 1/2 ग्लास दूध पीकर पिलाकर पूरी रात गुजारनी है? चलो खाना तयार है। (शर्माकर) बाकी का काम खाना खाने के बाद करेंगे।"

लक्ष्मी आंटी का शर्माना हमारा दिल जीत गया और हम लक्ष्मी आंटी के पीछे पीछे गए। खाने में लक्ष्मी आंटी की दिन भर की मेहनत दिख रहा थी और हम दोनों खाने पर टूट पड़े। खाना खाने के बाद विक्की बड़े नटखट अंदाज में बोला,
"लक्ष्मी आंटी, कल कॉलेज को छुट्टी है। हमें किताबें खरीदने और शहर देखने को कहा है। तो जल्दी सोने की जरूरत नहीं। चाहें तो पूरी रात जाग सकते हैं।"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसके होंठों से, "हे राम." निकल गया।

लक्ष्मी आंटी सोने से पहले ही बेसुध हो गई पर हम दोनों सबेरे 3 तक हर तरह अपनी सुहागरात मनाते रहे।
 
35
विक्की


थक कर चूर होकर मानो आंखें बंद की ही थी कि फोन की घंटी ने उठाया। मैंने एक आंख खोल कर देखा तो दीवार पर घड़ी सुबह के 8 बता रही थी। सन्नी भी मेरी तरह बिल्कुल नंगा बेड पर लेट कर देख रहा था। बेड के बीच में बने दाग के सिवा लक्ष्मी आंटी की कोई निशानी नहीं थी।

लक्ष्मी आंटी की आवाज के पीछे गया तो लक्ष्मी आंटी को मेरे फोन पर बात करते हुए पाया।

लक्ष्मी आंटी बोल रही थी, ". और वहां कोई दिक्कत तो नहीं? सुना है पाकिस्तानी लोग भी आप के साथ काम करेंगे। जरा संभलकर रहिए। खाना अच्छा है ना?.
आह हा हा. मुझे तो कभी नहीं बताया कि मेरी रोटियां ऐसी होती हैं।.
एम्म. हम्म.
नहीं!! मुझे शर्म आती है!!.
नहीं!!!!.
छाहह.
हां किया.
नहीं ना!!.
ठीक है, बाबा! बताती हूं। आप ने जैसे बताया था उस से भी बेहतर हुआ। सुबह दोनों बाबू हवाई जहाज से आए तो उन्हें कॉलेज में तुरन्त जाना पड़ा और हमारी तयारी कि भनक तक नहीं लगी। शाम को दोनों थक कर लौटे.
नहीं! इतने भी थके नहीं थे!!.
हां। तो जैसे आप ने बताया था वैसे तयारी कर के मैं छुप गई और दोनों को नहाने भेजा। उन्हें पता था कि आगे क्या होगा पर ये नहीं कि कैसे। हां दोनों ने मुझे आधा आधा दूध पिलाया।. आप तो शराब में नहाकर आए थे!! डर के मारे मैंने खाना नहीं खाया था और दूध रात में मैंने पी लिया था।. हां. गोलियां देख कर दोनों की आंखे चमक उठी।.
बड़ी मुश्किल से उठी हूं। दोनों बाबू मुझे झड़ा कर अदला बदली कर लेते। इस से मुझ बेचारी को न जाने कब तक.
हां.
चलने में तकलीफ हो रही है। अंदर से जैसे कोई नदी बह रही थी!!.
हां!! बहुत ज्यादा मजा आया!!. उफ्फ.
आप सच में खुश हो?.
मेरे इकलौते दोस्त हो आप!! मैं आप को नहीं खो सकती!.
ठीक है। अब दोनों के लिए नाश्ता बनाकर उन्हें उठाऊंगी।.
नहीं। कल बाबुओं को कॉलेज जाना है। हम कल शाम को बात करें?. ठीक है। मैं उन्हें बता दूंगी। अपना खयाल रखना. "

लक्ष्मी आंटी ने फोन रखा और किचन से चाय का ट्रे लेकर आई। हम दोनों को हॉल में बैठा देख शर्माकर मुस्कुराते हुए बोली,
"प्रतीक जी आप दोनों को बधाई दे रहे थे और उन्होंने कहा कि आप दोनों पर उन्हें भरोसा है। चलो अब मुंह धो कर जल्दी आ जाओ। नाश्ता अभी लग जायेगा।"

लक्ष्मी आंटी को पता भी नहीं था कि उसके रूप का हम पर क्या असर हो रहा था। हम दोनों ने अपने पैरों को खींच कर बाथरूम में गए। मुंह धोकर बाहर आते हुए मेरी नजर किचन में गई तो वहां एक बिस्तर लगा हुआ था।

"लक्ष्मी आंटी, ये बिस्तर किस के लिए बिछाया है?"

लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसते हुए कहा, "वो मेरा बिस्तर है। प्रतीक जी ने जाने से पहले कुछ बातें बताई थी और उसमें से एक बात यह है। भले हम अपने आप को कितना ही छुपा लें पर घर में कोई न कोई आयेगा ही। अगर मेरा बिस्तर अलग लगा दिखे तो शक हो सकता है पर सबूत नहीं मिलता। समझते हो ना बात को।"

मैंने और सन्नी ने सर हिलाकर हां कहा और मन ही मन प्रतीक को हम सब के बारे में इतना सोचने के लिए धन्यवाद करने लगे। लक्ष्मी आंटी को हम ने अपने साथ नाश्ता करने पर मजबूर किया और उसे अपने हाथों से खिलाया। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़कर चोदने की कोशिश की पर लक्ष्मी आंटी ने हमें रोक दिया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों को आज कि छुट्टी अपनी माशूका के बाहों में सोने के लिए नहीं मिली। चलो नहा धो कर खरीददारी करने निकलो। किताबें ख़तम हो गई तो लक्ष्मी आंटी से सजा मिलेगी!! समझे?"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए पूछा, "लक्ष्मी आंटी तुम हमें पिटोगी? हमारे खुले पिछवाड़े पर पट्टी से मारोगी? या 2 दिन सुखी रोटी और पानी पर रखोगी?"

लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए अपनी दो उंगलियों को फैलाया और कहा, "जब तक आप दोनों की सारी किताबें न मिलें." लक्ष्मी आंटी ने अपनी दोनों उंगलियों को एक दूसरे पर चढ़ा दिया।

"हाय रे जालिम!! ये कैसी सजा हैं!! पहले अफीम चखा दी और अब ऐसी कीमत मांगते हो!!"

लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए अपनी उंगली मेरे नाक पर लगाकर कहा, "विक्की बाबू नौटंकी कोई आप से सीखे!! चलो निकलो!! और हां घर में कुछ चीजें चाहिए उन्हें भी लाइए, नहीं तो हफ़्ते भर सिर्फ दाल चावल पर गुजारा करना पड़ेगा।"

पापा की शादी, औरत और आटे दाल की बात अचानक मेरे दिमाग में घूम गई और मैं नहाने चला गया। सन्नी अब भी लक्ष्मी आंटी को छेड़ते हुए उसे हंसा रहा था।
 
36
सन्नी


हम दोनों ने नहा कर कपड़े पहन लिए तो लक्ष्मी आंटी भी नहाने चली गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हम दोनों कुछ देर नीचे हो आते हैं। हम दोनों कॉलेज के पास बने बुक स्टोर पहुंचे और वहां से हमारी सारी किताबें खरीद ली।

विक्की ने पवन पापा को फोन करके कॉलेज के बारे में बताया और खरीददारी कैसे करते हैं उसके बारे में पूछा। अकेले रहने का हमें कोई तजुर्बा नहीं था। पवन पापा ने लक्ष्मी आंटी की मदद लेने की सलाह दी तो मैं ने कहा तीन लोग शहर में पैदल ज्यादा नहीं घूम सकते। बस तो काफी थीं पर कुछ समझ नहीं आ रहा था। पापा ने हंसते हुए कहा कि बड़ा होने का मतलब है हालात के साथ बदलना। वैसे मम्मियों ने कुछ करने का प्लान बनाया है पर इसके बारे में वह कुछ बता नहीं सकते।

किताबें ले कर हम घर पहुंचे तो वहां लक्ष्मी आंटी ने साफ सफाई कर ली थी और हमारा बेड ठीक कर रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हमें देख कर कहा,
"बाबू इतनी जल्दी किताबें खरीद ली? अगर पता होता तो मैं घर के सामान की पर्ची देती। दुबारा जाना नहीं पड़ता "

विक्की ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, हमने किताबों की दुकान कल कॉलेज से आते हुए देख ली थी पर बाकी खरीददारी के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी। हम बाकी खरीददारी के लिए मॉल जा रहे हैं। आओगी हमारे साथ?"

लक्ष्मी आंटी की आंखे चमक उठी। उसने कहा,
"मॉल में मैं कभी गई नहीं। सुना है वहां सब महंगा होता है और कई चीजें एक साथ मिलती हैं। क्या मुझे आने देंगे? मैं कोई मेमसहाब नहीं।"

मैंने हंसकर कहा कि हम दोनों के होते हुए उसे कोई नहीं रोक सकता। लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए अपने बाल बनाए और अपने अच्छे कपडे पहन कर बाहर आ गई। हम ने बाहर से रिक्शा कर ली और मॉल पहुंचे। मॉल कि चमक देख लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा। मॉल के अंदर जाने पर वहां के स्टॉल और दुकानों में मेकअप से बनठन कर खूबसूरत लड़कियां समान बेचती लक्ष्मी आंटी को दिखी।

लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती किसी पाउडर या लिपस्टिक की मोहताज नहीं थी पर उसके कपड़े काफी पुराने और सस्ते थे। बस्ती में लोगों की नजरों से छुपने के लिए बने कपड़े यहां उसे बुरा महसूस करा रहे थे। हम सब एक बड़े स्टोर में गए जहां काफी समान किफायती दाम पर रखा था। लक्ष्मी आंटी बाकी सब को देखते हुए हमारे पीछे पीछे चल रही थी। मैं जानबूझकर लक्ष्मी आंटी को स्टोर के हर कोने में घूमाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अब यहां से भागने का मन बना लिया था और उसन जल्दी से हमारा पर्ची में रखा सामान भर लिया। अपने कपड़ों से संकोच में लक्ष्मी आंटी को विक्की का खयाल नहीं रहा और उसने मेरे साथ सामान भर लिया। जब हम पैसे देने की कतार में खड़े हो गए तो लक्ष्मी आंटी सामान के ढेर को देख कर चौंक गई।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "हे भगवान, मैंने इतना सामान भर लिया? बाबू इस में से कम कर देंगे तो चलेगा।"

मैंने लक्ष्मी आंटी को कतार से बाहर निकाल कर कहा कि विक्की बिल चुका देगा तब तक हम कुछ और करते हैं। विक्की ने आंख मारी और हां कहा।

लक्ष्मी आंटी ने बाहर आ कर भी सामान कम करने की बात की तो मैंने कहा कि अब हम अपना घर बना रहे हैं तो पहली खरीददारी बड़ी होनी है। अगली बार कम सामान लगेगा। लक्ष्मी आंटी ने माना कि यह बात सही थी और उसने अपनी नजर घुमाई। वहां तकरीबन खाली पड़े दुकान को लक्ष्मी आंटी किसी खजाने की तरह देख रही थी। मैं लक्ष्मी आंटी को अंदर ले गया तो उसने शर्माकर बाहर भागने की कोशिश की।

पूरे दुकान में किताबों के ढेर लगे थे। कहीं बच्चों की किताबें थीं, तो कहीं आत्मकथा और कहीं और स्कूल की किताबें। कॉपियां और पेन के अलग अलग ढेर और गुच्छे थे। लक्ष्मी आंटी ने किसी जेवर की तरह उन पर अपनी उंगली घुमाई। मैंने पीछे से लक्ष्मी आंटी के कान में कहा,
"लक्ष्मी आंटी, अब तुम्हारी की तनख़ा बढ़ गई है और तुम जो चाहो खरीद सकती हो। मैं जानता हूं कि तुम अपनी पढ़ाई अपने दम पर करना चाहती हो। तुम जो खरीद लोगी उसके पैसे तुम्हारी तनख़ा से काट लेंगे।

लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर दौड़ना शुरू किया। उसने अलग अलग तरह की कॉपियां और पेन लिए। लक्ष्मी आंटी ने कुछ 10 वी कक्षा की किताबें खरीद ली और साथ में इंग्लिश सीखने की किताब भी ली। मैंने लक्ष्मी आंटी के हाथ में भारी वजन को देखा पर लक्ष्मी आंटी को उस का कोई ग़म नहीं था।

विक्की दुकान के बाहर से ही लक्ष्मी आंटी को देख रहा था और हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने लगा।

लक्ष्मी आंटी अपने कपड़ों के बारे में पूरा भूल गई। उस वक़्त अगर कोई हमें देखता तो उसे बस कॉलेज के 3 दोस्त दिखते। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को होटल में ले गए और लक्ष्मी आंटी को मुंबई कि पाव भाजी खिलाई। लक्ष्मी आंटी तो सातवे आसमान में उड़ रही थी कि उसका दिन ऐसे बिता। पेट भरने के बाद जब हम ने बिल चुकाया तो कीमत देख लक्ष्मी आंटी चौंक गई।

लक्ष्मी आंटी बोल पड़ी, "बाबू, इतने में तो मैं आप दोनों को 3दिन ये सब्जी बना कर खिलाऊं!!"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को हंसकर कंधे से धक्का देते हुए कहा, "लेकिन थकने के बाद अच्छा खाना तुरन्त मिलने की भी कीमत होती है ना?"

लक्ष्मी आंटी ने सोच कर हां कहा और हम सब ने रिक्शा कर घर लौट आए। लक्ष्मी आंटी ने हमारी भरी हुई थैलियां घर में जा कर खोली। पहले उसने बड़े प्यार से अपनी किताबें हमारे पढ़ाई के समान के साथ में रख दी। बाकी सामान ले कर लक्ष्मी आंटी किचन में गई। हम दोनों हॉल में बैठ कर घड़ी देखने लगे।

लक्ष्मी आंटी ने किचन में से कहा, "बाबू, अब जब सारा सामान आ गया है तो मै आप दोनों को परेशान नहीं करूंगी। ताजी सब्जियां मै यहीं से खरीद लूंगी पर कोई सब्ज़ी पसंद ना हो तो मुझे अभी. आ!!!"

लक्ष्मी आंटी ने थैला बाहर लाते हुए कहा, "बाबू उन्होंने आप के थैले में किसी और का सामान भर दिया है। हमें इसे लौटकर पैसे वापस लेने होंगे!"

"तो तुम्हें ये कपड़े पसंद नहीं आए? कुछ ज्यादा ही बड़े हैं पर सोचा शहरी लड़कियों के छोटे कपडे तुम्हे पसंद नहीं आयेंगे।"

लक्ष्मी आंटी वहीं जमीन पर थैला ले कर बैठ गई। उसने एक एक कपड़ा बाहर निकलते हुए उसे छुआ।

लाल और सफेद टॉप के साथ पहनने के लिए हरी लेगिंग्स थी। अनेक रंगों के डिजाइन से बनी नीली सलवार कमीज़ कि जोड़ी थी। इन कपड़ों के नीचे एक गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पतलून थी। पतलून के साथ satin में बना पट्टा निकल आया। यह गुलाबी satin में बना camisole और boy-shorts थे।

लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर देखा तो मैंने कहा, "घर में पहनने के लिए दूसरी जोड़ी भी होनी चाहिए। नीचे देखो, कुछ और भी होगा।"

लक्ष्मी आंटी के हाथ एक पैकेट लगा जिस में कॉम्पैक्ट पाउडर, कुछ लिपस्टिक और सिंदूर कि एक डिब्बी थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को गले लगाया और कहा कि वह हमारा शुक्रिया कैसे अदा करे।

"लक्ष्मी आंटी क्यों न तुम ये कपड़े पहन कर देखो? इन कपड़ों के नाप बड़ी मुश्किल से लिए थे।"

लक्ष्मी आंटी थैला बेडरूम में ले गई और एक एक ड्रेस कि नुमाईश हमारे लिए करने लगी। गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पैंट पहन कर लक्ष्मी आंटी किसी बड़ी कंपनी की अफसर लग रही थी पर उसे इन कपड़ों की आदत नहीं थी और उसने सुडौल पैरों को हाथों से छिपा रही थी।

शिकायत के स्वर में लक्ष्मी आंटी बोली, "बाबू ये किस काम आयेगा?"

विक्की ने गूढ़ अर्थ से कहा, "हर चीज का वक़्त होता है।"

लक्ष्मी आंटी समझ गई कि उसे जवाब आसानी से नहीं मिलेगा और आखरी जोड़ी पहनने के लिए अंदर चली गई।
 
37
विक्की


लक्ष्मी आंटी को बाहर आने में कुछ ज्यादा समय लगा पर इंतजार करना बिल्कुल ठीक था। लक्ष्मी आंटी ने दरवाजा खोल कर अपना पैर हॉल में रखा और मेरी नजर उसकी खुली टांग पर से उठती हुई satin में रंगी हुई उसकी जांघ पर अटकी। दो पैरों के बीच में शॉर्ट्स जहां जुड़कर जवानी का खजाना छुपाते हैं वहां camisole का किनारा हमें ललचा रहा था। Camisole का कपड़ा लक्ष्मी आंटी के पेट की झलक हर सांस के साथ दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी के भरे स्तन को उजागर कर रहा था। Camisole का गला और पीठ गहरी थी और लक्ष्मी आंटी के गोलों की उपरी गोलाई पतली पट्टी से छुप नहीं रही थी।

अपने शरीर से हमारी हालत बिगड़ती देख लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू मेरा एक छोटा सा काम करोगे?"

ना तो हम बोल नहीं सकते थे तो हमने सर हिलाकर हां कर दी। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सामने घुटनों पर बैठ कर कहा,
"बाबू प्रतीक जी के नाम से मेरी मांग भर दीजिए।"

मेरे लौड़े में मानो कोई बम फट गया। मेरी पैंट तन कर मुझे दर्द होने लगा। मैंने बड़ी मुश्किल से लक्ष्मी आंटी की मांग में प्रतीक का नाम लेते हुए सिंदूर भरा। लक्ष्मी आंटी ने अपना मोर्चा सन्नी कि ओर मोड़ते हुए उस से पूछा,
"सन्नी बाबू, इन कपड़ों में मेरा मंगलसूत्र ठीक लग रहा है ना?"

Camisole की पट्टियां लक्ष्मी आंटी के कंधों पर थीं और लक्ष्मी आंटी के गले में बंधे मंगलसूत्र को किसी फ्रेम कि तरह उजागर कर रही थी। लक्ष्मी आंटी का मंगलसूत्र उसके दूधिया गोलों के बीच झूलता हुआ उन्हें छेड कर हमें तड़पा रहा था। मुझसे और रहा नहीं गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रखा और उसे उठाकर बेडरूम में ले गया।

"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी हंसते हुए उत्तेजना से चीख पड़ी।

लक्ष्मी आंटी को बेड पर मैंने फेंका तो लक्ष्मी आंटी ने भागने की कोशिश की। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर झपटा और लक्ष्मी आंटी के कंधों पर से camisole के पट्टे नीचे उतारे। लक्ष्मी आंटी की लाल बेरियां खुल गईं और सन्नी उन्हें दबाकर चूसने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के boy-shorts उतारे तो देखा कि लक्ष्मी आंटी के कामरस से उसकी पैंटी भीग गई है।

"ये तो ना इंसाफी हुई लक्ष्मी आंटी। उपर से सीधा रस्ता था और नीचे दरवाजा अब भी बाकी है।"

लक्ष्मी आंटी ने मुझे पैर मार कर हटाने की झूठी कोशिश करते हुए कहा, "अगर उपर ब्रा पहनती तो उसके पट्टे नजर आते इसलिए नहीं पहनी थी।"

मैं लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उठते हुए अपना मुंह लक्ष्मी आंटी के खजाने तक ले गया। लक्ष्मी आंटी मेरा इरादा भांप कर चीखने लगी तो सन्नी ने उसका मुंह दबा दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी को दातों में पकड़ा और उसे उठाकर उतारने लगा। पैंटी के घुटनों में पहुंचने पर मेरा मकसद पूरा हो गया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी के अन्दर सर डालकर उसकी काम अग्नि की ज्वाला को अपनी जीभ से भड़काया। लक्ष्मी आंटी ने अपना सर हिलाकर अपनी उत्तेजना पर से काबू छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी के पैरों में मेरा सर पकड़ कर लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटने मोड़ दिए। मेरा शरीर बेड पर दब गया और लक्ष्मी आंटी ने मेरी पीठ पर जोर देते हुए अपनी बहती योनी को मेरे मुंह पर लगा दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन कांपते हुए मेरी जीभ पर रसों की बाढ बहा दी और बेड पर लेट गई।

मैं इतना तप चुका था कि सन्नी को इंतजार करना पड़ा। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी उतार फैंकी और लक्ष्मी आंटी पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी को सन्नी चूम रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के गरदन को जोर से चूमते हुए उसकी भट्टी में अपना लोहा डाल दिया।

मुझ में मानो कोई जानवर जग गया था जिसके इशारों पर मैं लक्ष्मी आंटी को नहीं बल्कि अपनी मादा को चोद रहा था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को खुली छूट दी। मेरे तेज धक्के लक्ष्मी आंटी को पूरा हिला रहे थे। मैं जल्द ही लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना पानी छोड़ कर गिर गया।

"Sorry लक्ष्मी आंटी। मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया।"

लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरा और कहा, "मुझे बहुत मजा आया और मुझे नहीं लगता कि इतने पर आप मुझे सोने दोगे।"

मैं लक्ष्मी आंटी के होंठ चूमकर बगल में लेट गया और सन्नी ने मेरी जगह ले ली। सन्नी तयार था पर मेरी गलती से सीख कर उसने लक्ष्मी आंटी को धीरे धीरे चोदना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी जल्द ही जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए सन्नी को अपने गले लगाकर रोते हुए झड़ने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को अपनी बाहों और टांगों से अपने अंदर खींचते हुए कहा, "सन्नी बाबू! अपनी लक्ष्मी आंटी पर रहम करो! फट रही हूं मैं! अपना पानी छोड़ो! भर दो मुझे अपने प्यार से। मेरी कोख भर दो सन्नी बाबू!!"

इतने प्यार से कि गई मिन्नत को सन्नी मना कैसे करता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के गले के दूसरी तरफ जोर से चूमते हुए अपने रस की धारा लक्ष्मी आंटी की नदी में बहा दी। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर लेटा रहा और लक्ष्मी आंटी छत को देखती गहरी सांसे लेती रही।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता नहीं कि पिछले जनम में मैंने ऐसा क्या किया था कि मैं आप दोनों की प्रेमिका बनी। पाप तो नहीं होगा पर उफ्फ."

हम सब एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और फिर लक्ष्मी आंटी उठ गई। हमारी कुश्ती में उड़ी हुई लक्ष्मी आंटी की पैंटी उसे नहीं मिल रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि वह satin के नीचे पैंटी ना पहने और वह पैंटी वैसे भी गीली हो गई थी तो सुबह उसे ढूंढ लेना। लक्ष्मी आंटी को दूसरा रास्ता नहीं मिला और वह मान गई।

रात को हम ने दुबारा जिद करके पिज़्ज़ा मंगवाया। यह नहीं चीज लक्ष्मी आंटी ने बड़े चाव से खाते हुए हम दोनों से पढ़ाई के लिए मदद मांगी। हम दोनों मान गए और लक्ष्मी आंटी को 10वी कक्षा का अभ्यास कराते हुए काफी बातें की। रात के 9 बजे लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में भेजा क्योंकि कल कॉलेज में सुबह 8 बजे हाजिर होना था।

लक्ष्मी आंटी ने किचन में अपना बिस्तर लगाया और बेडरूम में आ गई। पेट की भूख मिट चुकी थी और वासना की आग पहले भड़क कर अब अंगारों की तरह हलके से हमें सेंक रही थी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने अपनी बाहों में भर लिया और उसके दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए। धीरे धीरे चोदना औरत को कैसे पागल कर देता है यह बात हम दोनों ने सीखी। लक्ष्मी आंटी के पागल पन के मज़े ले लेकर हम दोनों झड़ कर सो गए।

सुबह 6 बजे लक्ष्मी आंटी उठ गई तो हम दोनों भी कॉलेज के लिए तयार होने उठ गए। हमें जल्दी होगी जान कर लक्ष्मी आंटी ने हमें नहाने और तयार होने हो कहा। जब तक हम दोनों तयार हो गए लक्ष्मी आंटी ने हमारे लिए नाश्ता बनाया और दोपहर के खाने में क्या चाहिए पूछा। हम ने लक्ष्मी आंटी को छेड़ने की कोशिश की तो उसने नाश्ता पहले खत्म करने को कहा। नाश्ता 4 मिनट में हम ने खा लिया और अब लक्ष्मी आंटी पर लपके।

हॉल में लक्ष्मी आंटी को मेज पर लिटाकर सन्नी ने उसकी boy-shorts को उतारा। लक्ष्मी आंटी ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला तो मैंने उसे अपना लौड़ा खिला दिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैर उठाकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना भाला पूरा भर दिया। सन्नी के हर धक्के से लक्ष्मी आंटी मेरा लौड़ा निगल लेती और सांस लेने जब नीचे सरकती तब अपनी गांड़ को सन्नी के लौड़े पर दबाती। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को अपने कंधे पर रखा और आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर पेलने लगा। लक्ष्मी आंटी को चूधाई का नशा चढ़ गया और उसने मेरे लौड़े को जोर से चूसते हुए अपने मम्में दबाने लगी। सन्नी ने अच्छे से पेल कर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पलटा और उसकी कमर उठाई। लक्ष्मी आंटी की थूक से गीला लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फैलाते हुए उसके अंदर सन्नी का वीर्य फेंटने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबाते हुए उसे तेज धक्के से चोद दिया। सन्नी के साथ हुई चुसाई के कारण मैं लक्ष्मी आंटी को ज्यादा चोदे बिना झड गया और उसके बदन पर लेट गया।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर रोज सुबह ऐसे ही जाना तय कर लिया है तो रोज जल्दी सोना पड़ेगा।"

हम दोनों ने हंसकर अपने कपड़े ठीक किए और लक्ष्मी आंटी को आखरी बार चूम कर कॉलेज के लिए निकले। रास्ते में मैंने सन्नी से कहा कि हमें लक्ष्मी आंटी को प्यार से चोदना चाहिए। हम दोनों ने कल जो किया उस से आज सुबह लक्ष्मी आंटी के गले पर लाल नीले निशान बन गए थे। सन्नी ने सोचते हुए कहा कि शायद हमें दाग के बारे में लक्ष्मी आंटी को बताना चाहिए पर देर हो रही थी और हम ने शाम को लक्ष्मी आंटी को बताने का तय किया।
 
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लक्ष्मी आंटी ने अपनी boy-shorts पहनकर लड़खड़ाते कदमों से हॉल को फिर से साफ करते हुए खुद से कहा, "कल सुबह उठते ही मैं दोनों से अपनी गांड़ मरवा लूंगी। कम से कम दो बार सफाई नहीं करनी पड़ेगी।"

अचानक अपनी बातों का मतलब समझ कर लक्ष्मी आंटी हंसने लगी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। कचरा बाहर रखा था पर शायद कोई बाबू को शैतानी सूझी हो। ये सोच कर लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए एक हाथ से अपने बाल पीछे करते हुए दरवाजा खोला।

"Surprise!!!"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा डर से बर्फ हो गया और उसने दरवाजे को पकड़ कर अपने आप को संभाला। दोनों मम्मियां लक्ष्मी आंटी को आंखें फ़ाड़ कर देख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला और उन्हें हाथ से अंदर बुलाया। श्वेता और समीरा सिर्फ सहेलियां नहीं बिजनेस पार्टनर्स भी थीं और बिना बोले सब समझने और समझाने की ताकत रखती थी।

श्वेता ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, "लगता है कि हमें आने में देर हो गई है।"

समीरा की आंखों में कुछ ऐसे भाव थे मानो किसी शेरनी ने दूसरी शेरनी के मुंह में अपना बच्चा देख लिया हो। सर्द स्वर में समीरा बोली, "हां बहुत ज्यादा देर हो गई है। बच्चे कॉलेज गए हैं?"

समीरा ने जहरीला सवाल पूछते हुए अपनी गरदन पर हाथ फेरा। लक्ष्मी आंटी ने झट से कहा,
"हां, दोनों बाबुओं को परसों ही कॉलेज बुला लिया गया था और आज 8 बजे क्लास शुरू होना था। दोनों बाबू आप के आने से 10 मिनट पहले ही चले गए। आप बैठिए, मैं आप के लिए कुछ लाती हूं।"

लक्ष्मी किचन में जाने के लिए मुड़ी और श्वेता ने चौंक कर समीरा की ओर देखा। समीरा लक्ष्मी आंटी के पीछे से इशारा कर हाथ पैर धोने गई। श्वेता भी हाथ पैर धोकर घर देखने लगी। लक्ष्मी आंटी डर कर किचन में नाश्ता बनाने के बहाने से छुप गई। समीरा ने किचन में चक्कर लगाते हुए सब देख लिया और हॉल के श्वेता के बगल में बैठ गई।श्वेता ने अपना सर सोफे पर रख कर छत को अनदेखी आंखों से ताक रही थी।

समीरा गुस्से से लाल हो कर फुसफुसाई, "4 दिन हो गए उसे यहां आए अब तक किचन ठीक से लगा नहीं है। नाश्ता इतना ही बनाया था कि ख़तम हो गया और धोने के लिए 2 प्लेट्स ही है। चाय भी अब बना रही है। बच्चों के साथ अगर ऐसा होता है तो हमें कुछ करना पड़ेगा!"

श्वेता ने सर को ठंडा रखते हुए कहा, "समीरा जरा अपनी बात सुन। ऐसे लगता है कि कोई सास अपनी बहू का घर देख रही है। यहां आने से पहले अश्वेत ने कहा था कि चाहे जो हो जाए मैं हर बात समझने की कोशिश करूं। उसे कुछ तो खबर थी।"

समीरा ने शांत होते हुए कहा, "कम से कम लक्ष्मी का बिस्तर किचन में है। शायद अब भी देर नहीं हुई। जब समीर ने मुझे ठंडा दिमाग रखने को कहा मैं नहीं जानती थी कि ऐसा कुछ होगा। लक्ष्मी हमारे बच्चों को ऐसे कपड़े पहन कर ललचा रही है। उसे जल्दी नहीं रोका तो हमारे बच्चे."

श्वेता ने समीरा की बात काटते हुए कहा, "बच्चे नहीं रहे!! बेडरूम में ड्रेसर के नीचे मुझे इस्तमाल कि हुई पैंटी मिली। इस घर में पैंटी सिर्फ 1 व्यक्ति इस्तमाल करती है। जरा गहरी सांस लेकर देख। हम अगर आधे घंटे पहले आते तो कुछ और देख रहे होते।"

समीरा ने अपना सर हाथ में रख कर कहा, "नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! वो बच्चें है! नहीं! मैं ऐसा होने नहीं दूंगी। हम लक्ष्मी को निकाल देंगे! नहीं तो उसे वापस अपने यहां बुला लेंगे। उसे ज्यादा तनख़ा देकर किसी और के घर भेज देंगे।"

श्वेता ने सिर्फ समीरा की ओर देखा और चुप रही। समीरा ने अपनी सहेली की आंखों में देखा और समझ गई। समीर और अश्वेत इस बात के बारे में जानते थे और उन्होंने ऐसा इंतजाम किया था कि बच्चों को महफूज रखते हुए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो।

लक्ष्मी आंटी नाश्ता ले कर आ गई तो दोनों मम्मियों की आंखों में आंसू भर आए थे। श्वेता ने चुपके से पूछा, "क्यों?"

लक्ष्मी आंटी किसी मां को यह नहीं बता सकती थी कि उसके बेटे ने लक्ष्मी की इज्जत लूटी थी पर राज़ खुल गया है इस बात में कोई शक नहीं था। लक्ष्मी आंटी ने हिचकिचाते हुए अपने बचपन और शादी की कहानी बताई। चोरी पकड़ी जाने पर उसने farmhouse में काम कर के पैसे लौटाने का ठान लिया। Farmhouse में बात से बात बढ़ी और सब अपना आपा खो बैठे। वापस लौटने पर प्रतीक को नौकरी लग गई और उसने अपनी सच्चाई बताते हुए विक्की और सन्नी को लक्ष्मी का ख्याल रखने को कहा।

समीरा समझ गई कि न केवल पूरी सच्चाई उसे समीर से निकालनी होगी बल्कि लक्ष्मी दोनों बच्चों को बचाते हुए उसे बता रही थी कि वह पप्पू के लौटने तक ही बच्चों के साथ रहेगी। समीरा और श्वेता ने नाश्ता किया और लक्ष्मी से कहा कि वह दोपहर के खाने के वक़्त बच्चों से मिलने आयेंगी। दोनों मम्मियां घर से निकल कर अपने होटल गई जहां से उन्होंने समीर और अश्वेत को फोन किया। सच्चाई जान लेने के बाद दोनों ने बैठ कर काफी देर तक बातें की और बच्चों से मिलने गई।

सन्नी और विक्की खुशी में मदहोश दोपहर को घर खाना खाने गए। दोनों ने तय किया था कि लक्ष्मी आंटी की अगाडी और पिछाडी कौन बजाएगा। बिल्डिंग के नीचे सन्नी कुछ देख कर रुक गया। विक्की ने सन्नी को देखा और उसकी नजर का पीछा किया। वहां सन्नी कि गाड़ी खड़ी थी।

दोनों ने धीरे से दरवाजे पर दस्तक दी तो समीरा ने अंदर बुलाया। मम्मियों के इस सरप्राईज से खुश पर राज खुलने के डर से सेहमे लड़कों ने मम्मियों के गले लगते हुए नजरों से लक्ष्मी आंटी को ढूंढा। लक्ष्मी आंटी ने नया नीला सलवार सूट पहना था और काफी खुश लग रही थी। लक्ष्मी आंटी बाद में खाना खाने वाली थी पर श्वेता मम्मी ने जिद की और सब ने मिलकर खाना खाया। कॉलेज की बातें हुई तो पता चला कि आज कई लोग अपने घरवालों के साथ आए थे।

खाने का समय ख़तम हो रहा था तो मम्मियों ने दोनों के साथ कॉलेज देखने की जिद की। घर से बाहर जाने के बाद मम्मियों ने अपने बेटों को पकड़ा और धीमी आवाज में खूब खरी खोटी सुनाई। अच्छी तरह डांटने और धमकाने के बाद उन्होंने दोनों को लक्ष्मी आंटी का खयाल रखने की सलाह दी और दो बिजनेस कार्ड दिए।

दोनों लड़कों की क्लास शुरू हो गई और मम्मियां अपने पतियों को सच छुपाने की सजा देने के लिए चली गई।
 
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सन्नी


शाम को 6 बजे हम दोनों घर लौटे तो मैंने देखा लक्ष्मी आंटी उदास बैठी थी। हमारी ओर देखते ही उस ने कहा,
"बाबू, मैंने उन्हें नहीं बताया पर मै दोनों मेमसाहब से झूठ नहीं बोल पाई। आप मुझे वापस भेज देंगे?"

"लक्ष्मी आंटी, गलती हमारी है। तुम्हारे गले पर चूमते हुए हमने निशान बना दिए और अब मम्मियों को पता चल गया है। दोनों पापा पहले से ही सब समझ चुके थे और इसीलिए उन्होंने तुम्हारे यहां आने का इंतजाम किया। लक्ष्मी आंटी, डरो मत। अब हमें अपने घरवालों से छुपने छुपाने की जरूरत नहीं है। तुम हमारी हो और हम दोनों तुम्हारे।"

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कर मुस्कुराते हुए हमें गले लगाया और फ्रेश होने को कहा। हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी ने चाय बिस्किट लाए थे। उन्हें खाने के बाद लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को कम से कम दो घंटे पढ़ाई करने का हुकुम सुनाया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में खींच कर कहा,
"अब भी थोड़ी भूख बाकी है। सुबह से भूकों को रात तक यूं ही छोड़ोगी!"

लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"छोड़ो विक्की बाबू! आप दोनों की भुक तो कभी नहीं मिटती। अभी खाना परोसा तो भी सुबह तक खाते रहोगे।"

"बात तो सच है लक्ष्मी आंटी। पर जरा सोचो अगर खाना इतना लजीज हो तो पेट कैसे भरे।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को एक साथ खड़े खड़े बाहों में पकड़ कर उसे चूमने लगे। लक्ष्मी आंटी ने विरोध करते हुए हमें काफी डांटा और हमारे कपड़े उतार फेंके। फर्श पर मेरे शर्ट और विक्की कि पैंट के बीच लक्ष्मी आंटी का satin gown पड़ा था। लक्ष्मी आंटी ने घुटनों पर बैठते हुए हम दोनों के कड़े लौड़ों को चूसकर गीला कर दिया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी दहिने हाथ की दो उंगलियां दिखाते हुए हमें चुनने को कहा। मैंने बीच वाली उंगली पकड़ी तो विक्की ने पहली उंगली पकड़ी।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "सन्नी बाबू, पकड़ो मुझे।"

लक्ष्मी आंटी ने मेरे गले में अपनी बाहों से पकड़ लिया और मैंने उसे अपने बाहों में लिया। लक्ष्मी आंटी ने कुदकर अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गीली गरमी को रगड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर कुछ बार अपनी चूत को मेरे लौड़े की लंबाई पर घुमाया। मुझसे और रहा नहीं गया और मैंने लक्ष्मी आंटी के अगले उठने पर अपने भाले को सीधा कर दिया।

"आह. मां. उन्मम.", के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गरमी में मुझे अपनाया।

मैंने लक्ष्मी आंटी को उठकर चोदते हुए विक्की को देखा। विक्की बेडरूम में से lubricant jel को अपने लौड़े पर लगाते हुए लक्ष्मी आंटी के पीछे आ गया। लक्ष्मी आंटी की अगली उठा पटख पर विक्की पीछे से तैयार था।

"आह. हा. हा. अनहह. विक्की बाबू. मैं आप. आह. का इंतजार . उन्म. कर रही. ऊंह. थी। हा. चोदो मुझे!", लक्ष्मी आंटी ने चुदाते हुए कहा।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जम कर अपने लौड़ों पर उठाकर पटखा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी होटों को मेरे होटों पर दबाते हुए मुझे अपनी सारी चीखें खिला दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी और मेरे बीच हाथ डालकर लक्ष्मी आंटी के मम्मे दबा कर पकड़े।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चोदने की दौड़ लगाई। हमेशा कि लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ ने अपने लौड़े को ऐसा निचोड़ा की विक्की ने कांपते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने लौड़े पर खींच कर दबाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा और लक्ष्मी आंटी भी झड़ने लगी। उन दोनों के कामसुख का मजा लेते हुए मैंने भी अपनी तोप चला दी।

हम सब ऐसे ही थोड़ी देर सोफे पर बैठ गए और अपनी फुली सांसों को काबू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी को टेबल पर रखा पानी पिलाया और उसने अपनी प्यास बुझाने के बाद हमें बॉटल दी। हम दोनों ने पानी पिया तब तक लक्ष्मी आंटी ने उठ कर गाउन पहना और कहा,
"आप दोनों तो किसी औरत को सुख से मार दोगे। चलो अभी दो घंटे पढ़ाई करने के बाद ही कोई भी भूख मिटेगी।"

लक्ष्मी आंटी ने किचन में जाते हुए satin gown को उपर उठते हुए अपनी रसीली टपकती गांड़ दिखाते हुए कहा और चली गई।

"आज रात इसे सोने देंगे। कल Mr. शास्त्री सुबह 8 बजे सर पर बैठेंगे। शुक्रवार रात को देखते हैं।"

विक्की ने सर हिलाकर हां कहा और हम पढ़ाई करने लगे। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी भी बाहर आकर हॉल में बैठ गई और अपनी किताब से पढ़ने लगी।
 
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