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Adultery बुरी फसी लक्ष्मी आंटी (Completed)

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सन्नी


लक्ष्मी आंटी ने अपनी लंबी टांगों के लुभावने दर्शन करते हुए किले की रानी का पद जीता तो हम दोनों एक साथ पहुंचने के कारण राजा न बनते हुए सिपहसालार बने। किले के विशाल दरवाजे के अंदर एक छोटा सा नया कमरा बना था जहां से हमें टिकट लेनी पड़ी। रानी साहिबा ने बड़े शान से हम तीनों की टिकट खरीदी और हम अंदर गए।

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ डाले और हम सब किला देखने लगे। लोहगड़ देखने का सही मौसम सर्दी या बरसात का होता है उसमें भी हम गुरुवार की सुबह वहां पहुंचे थे। पूरा किला मानो अतीत की स्मृतियां केवल हमारे लिए दिखा रहा था। सुबह होटल से नाश्ता करके निकले थे इसलिए हम सुबह 6 बजे लोहगढ़ के नीचे पहुंचे थे। उपर चढ ने में और 1 घंटा लगा तो हम सब किले में 7 के थोड़ी देर बाद पहुंचे। सूरज अभी उगा था और किले की सरद हवाओं में सूरज की किरणों की गरमी एक सुखद अनुभव था। किले के चार बड़े दरवाजे पार कर अंदर घूमने लगे। धान के पुराने गोदाम के आगे एक दर्गा बना था और आगे कुछ कमरे थे जिसमें लोग रहा करते होंगे।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, आप को लगता है कि यहां लोग रहते थे?"

सन्नी, "हमारे घर अगर 300 साल बन्द रहें तो ऐसे ही दिखेंगे। जो चुराने लायक था वो अंग्रेज ले गए और जो बचा वो वक़्त खा गया।"

लक्ष्मी आंटी, "मैं आज इस किले की रानी हूं और आप दोनों मेरे सिपाही। याद है ना?"

हम दोनों ने अपने सर हिलाकर हां कहा।

लक्ष्मी आंटी, "मुझे भूक लगी है और आप दोनों अभी मेरे लिए इंतजाम करोगे।"

"लक्ष्मी आंटी! यहां पर कुछ खाने को नहीं मिलता। खाने को अब नीचे जाने के बाद मिलेगा। पानी पियोगी?"

लक्ष्मी आंटी ने मुंह फुलाकर कहा, "आप दोनों को तो कुछ समझ में नहीं आता।"

लक्ष्मी आंटी ने हमारे पीछे देखा और हमें खींच कर एक कमरे में ले गई। अंदर अंधेरा था और जमीन भी काफी मैली थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को दरवाजे के बगल में खड़ा कर दिया और हमारे सामने घुटनों पर बैठ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े पैंट के ऊपर से सहलाते हुए हमारी चैन खोली और हमारे लौड़े बाहर निकले। आगे क्या होगा यह जानकर हम दोनों चुप चाप खड़े हो गए।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मुठ्ठी में मोड़ कर हमें हिलाने लगी और हम दोनों बड़ी मुश्किल से अपनी आहें दबाकर लक्ष्मी आंटी की मुठ मारने का मजा उठाने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सुपाड़े को बारी बारी चूमकर उस गीला किया और उस पर आयी रस की पारदर्शी बूंद को चाट लिया। हम दोनों को उत्तेजना असेहनिय होने लगी थी कि लक्ष्मी आंटी अचानक उठकर बाहर भाग गई।

हम दोनों ने जैसे तैसे अपनी पैंट बन्द की और उसके पीछे भागने लगे। लक्ष्मी आंटी कुछ ही कदम दरवाजे के बाहर टिकिट बेचने वाले से टकराई थी और अब उसके पीछे छुप कर खड़ी थी। टिकट बेचने वाला हमारी ओर संदेह से देख रहा था।

"देखो साहब, यही है वो दो लोग जो मेरा पीछा कर रहे हैं। पकड़ो इन्हें!!", लक्ष्मी आंटी ने पीछे से कहा।

"लक्ष्मी आंटी! ये अच्छी बात नहीं! उस कमरे में हमें डराकर यहां हमारी शिकायत करना। चलो इन्हें सच बताओ!"

लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "हां, मैंने आप दोनों को परेशान किया तो क्या? आप दोनों मेरा पीछा करते हुए बाहर आए हो!"

टिकट बेचने वाले आदमी ने सब को डांटते हुए कहा कि हमें यहां कोई बचकाने खेल नहीं करने चाहिए और संभलकर रहना चाहिए। हमने हां कहा तो एक बार और डांट कर वह वापस अपनी जगह पर चला गया।

लक्ष्मी आंटी, "मैंने कहा था कि मैं इंसान को पहचानती हूं। अगर हम मस्ती करते पकड़े नहीं जाते तो ये हमारे पीछे पीछे आता रहता। चलो अब हमें कोई तंग नहीं करेगा।"

कभी कभी लक्ष्मी आंटी से डर लगता है।
 
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विक्की


लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ रख कर घूमना चालू रखा और जल्द ही हम वहां के महादेव मंदिर पहुंचे। हम सब ने वहां नमस्कार किया और आगे घूमने लगे। लोहगढ़ का किला जंग के हिसाब से बना था तो कई पानी की तालाब भी बने थे।

जैसे सूरज की गर्मी बढ़ने लगी तालाब के किनारे पर हम सब बैठ गए। लक्ष्मी आंटी ने तालाब के पानी से अपनी लंबी टांगों को धोते हुए कहा,
"पता नहीं, आप दोनों इतने कपड़े पहन कर इतनी गरमी कैसे सेह पाते हो? मेरा तो पूरा बदन जल रहा है।"

मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पानी में जाते ही बात कर ली थी। मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब की सीढियों पर मेरे पैरों के बीच में बैठने का इशारा किया। लक्ष्मी आंटी मेरे पैरों के बीच मेरी छांव में बैठी और मैंने उसके सर को पकड़ कर उसे चूमने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उस की पैंट उतार दी।

लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकने की कोशिश की पर मुंह बन्द होने के कारण कुछ बोल नहीं पाई। सन्नी ने पैंट को लक्ष्मी आंटी के घुटनों तक उतार कर उसके पैर उठाए। अब लक्ष्मी आंटी की गीली चूत और कसी हुई गांड़ सन्नी की जीभ का हमला झेलने के लिए सामने थी। मैं और सन्नी पिछले साल में लक्ष्मी आंटी की सारी कमजोरियां सीख चुके थे और अब सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की हर रग रग को चूम चाट कर छेडा। लक्ष्मी आंटी यूं खुले में होते प्रणय से डर गई थी पर साथी ही उत्तेजित भी थी। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चूम चाट कर उत्तेजना के शिखर पर पहुंचने पर अपनी जीभ को उसकी गरम योनि में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर को खींच कर मुझे चूमते हुए सन्नी को अपना पानी पिलाया।

जब पूरा पानी पी कर सन्नी उठा तो लक्ष्मी आंटी ने थक कर मेरे सीने पर अपने आप को छोड़ दिया। पर लक्ष्मी आंटी को इतनी सी सजा मिले यह कहां का न्याय होता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर मेरी जगह ले ली और उसकी जगह पर मैं बैठ गया। लक्ष्मी आंटी ने बस हलके स्वर में "कोई आ जाएगा।" की शिकायत की और मुझे अपने पैर खोल कर जगह दे दी। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन मणि को चूमते हुए उसकी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल दी। लक्ष्मी आंटी चिहक के अपनी कमर उठाते हुए मेरा साथ देने लगी। मैंने पूरी तेजी से अपनी उंगलियों को आगे पीछे करते हुए लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना में बनाए रखा पर झडने नहीं दिया। उत्तेजना वश लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ने लगा और वह कराहते हुए बोल पड़ी,
"बाबू ऐसे ना तड़पाओ! छुड़ा दो मुझे! झड़ा दो मुझे!."

लक्ष्मी आंटी की हालत मुझसे देखी नहीं गई। खास कर इतनी उत्तेजना मैं झेल नहीं पाया और मैंने अपनी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में से निकाल कर उसकी गांड़ में भरते हुए अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल कर हिलाने लगा।

लक्ष्मी आंटी की सहनशीलता का बांध टूटा और वह झड गई। लक्ष्मी आंटी के रस से मेरी जीभ ही नहीं बल्कि मेरा पूरा चेहरा भीग गया और मैंने उसके रस को तब तक पिया जब तक उसका बदन अकड़ना बन्द नहीं हुआ।

सुसताई लक्ष्मी आंटी को सन्नी ने चिढ़ाते हुए कहा, "क्यों लक्ष्मी आंटी? इतने में थक गई? अभी एक खास जगह देखनी बाकी है।"
 
52
सन्नी

लक्ष्मी आंटी ने जैसे तैसे अपने आप को संभाला और हम सब लड़खड़ाते कदमों से आगे निकल पड़े। लक्ष्मी आंटी के पैर झडने से नरम हो गए थे तो हमारे पैरों के बीच लोहे के गरम डंडे ने घर बना लिया था।

थोड़ी दूर जाते ही लक्ष्मी आंटी ने डर से एक गहरी सांस ली।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, ऐसी जगह पर भी लोग जाते हैं? अगर पैर फिसला तो?"

सामने एक पट्टी लगी थी जिस पर लिखा था "विंचू कट्टा"

एक पतली पगडंडी किले में से निकल कर आगे लंबे पतले पहाड़ की चोटी पर के जा रही थी। ये पहाड़ की बाहर निकली लकीर नक्शे में किसी बिच्छू की पूंछ लग रही होगी। लक्ष्मी आंटी को ऊंचाई से डर लगना कोई बड़ी बात नहीं थी और इस लिए हम दोनों ने उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़े।

दोनों ओर गहरी खाई और ठीक सीधे दूरी पर लगा झंडा। यह दृश्य जितना अनोखा था उतना ही डरावना। एक एक कदम आगे बढ़कर हम आगे बढ़े। आगे रस्ता चौड़ा हो गया तो हम सब ने चैन की सांस ली। आगे रास्ते में एक छोटा तालाब जैसा अवशेष था उस पार कर के हम झंडे तक पहुंचे।

दूर दूर तक हवा की आवाज के सिवा कुछ नहीं था। किनारे पर बनी दीवार से नीचे गांव के घर किसी खिलौने की तरह दिख रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों को चूमा। भूखे शेरों को सहलाने की गलती का अंजाम लक्ष्मी आंटी को तुरंत पता चला।

मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाकर झंडे के नीचे बने चबूतरे के नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लक्ष्मी आंटी ने "सन्नी बाबू!!" कर के मुझे रोकना चाहा पर अब रुकना मुमकिन नहीं था। मैंने लक्ष्मी आंटी की शॉर्ट्स को घुटनों के नीचे तक उतार कर उसके पैर फैलाए। अपनी पैंट की ज़िप खोल कर अपने गरम लोहे को आजाद किया।

लक्ष्मी आंटी ने ऐतराज़ में कहा, "कोई आ जाएगा. आ. हा. आह."

लक्ष्मी आंटी के टॉप ऊपर सरका कर मैंने उसके मम्मे दबोच लिए और तेज रफ्तार से चोदने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने मेरी पाशविक हवस से बचने के लिए विक्की की ओर देखते हुए पुकारा, "विक्की बाबू!! हा. बचाओ मुझे!! आ. कोई देख लेगा!! आह."

विक्की ने कहा, "सन्नी अगर किसी ने देख लिया तो बेहती गंगा में हाथ धो लेगा। हमें यहां ज्यादा वक़्त नहीं लगाना चाहिए।"

विक्की की बात समझ कर मैंने पलट कर लक्ष्मी आंटी को अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की एड़ियां शॉट्स में जकड़ कर मेरे घुटनों के बीच थी तो उसके घुटने मेरे दोनों ओर थे। लक्ष्मी आंटी ने उठने की कोशिश की तो मैंने उसे खींच कर चूमते हुए नीचे किया।

लक्ष्मी आंटी, "सन्नी बाबू, बाद में जो चाहे कर लो पर कोई आ गया आ!. आह. विक्की बाबू!!."

लक्ष्मी आंटी की चीख दूर की पहाड़ियों तक गूंज उठी और हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जोर जोर से पेलना शुरू किया। अब लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ दबाकर चुधने लगी पर उसकी आहें फिर भी निकल रही थीं।

"ऊंह. अम्म. हा. हनः. आह."

सुबह से भूखे आदमखोर बाघ अपने शिकार पर झपटे तो क्या होना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबोच कर उन्हें मसलते हुए पीने लगा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गरदन पकड़ कर उसके कानों को चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा।

लक्ष्मी आंटी अभी अभी झडकर जैसे तैसे अपनी सांसों को काबू में कर पाई थी पर अब उसका बांध फिर टूटने लगा। पर्वत के किनारे, सीधी गहरी खाई को देखते हुए मौत का डर होता है। साथ ही कभी भी किसी के भी हाथों पकड़े जाने का डर। इन सब के बीच चुधाई की जिंदगी की खुशी दिलाने वाला एहसास। ये सब मिलकर ऐसा उत्तेजक बनता है कि लक्ष्मी आंटी के गले से पतली चीख निकल पड़ी और उसकी चूत और गांड़ ने हम दोनों के लौड़ों को कस कर पकड़ कर निचोड़ लिया। हमारे लौड़ों ने तोप की तरह अपना गरम लोहा लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया और हम सब वहीं थक कर गिर गए।

"बुरे बाबू!! बारी बारी लेते तो क्या होता? उफ्फ अब मैं सीढ़ियों से नहीं उतरूंगी। आप दोनों मुझे नीचे ले चलो।", लक्ष्मी आंटी ने आदेश दिया।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को पीछे से चूमते हुए कहा, "अरे लक्ष्मी आंटी, ऐसा मज़ा आने के बाद हम दोनों तो सीढ़ियों के उपर भी ले जाएं।"

पकड़े जाने के डर से हम तीनों ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस जाने के लिए निकले। सुबह के 11 बज रहे थे और महादेव मंदिर के करीब हमें कुछ और सैलानी दिखे। शायद हमारे चेहरे से कुछ समझ आ रहा था कि लड़के लक्ष्मी आंटी को घुर रहे थे और लड़कियां आंखे फाड़ कर हमें देख रही थीं।

जब हम टिकट घर पहुंचे तो हमें देख टिकिट बेचने वाला हमें देखता रहा। हवस का नशा उतरने के बाद अब धीरे धीरे समझ आने लगा कि लोगों को पता कैसे चल रहा था। मेरी और लक्ष्मी आंटी के पीठ और घुटनों पर मिट्टी लगी थी तो विक्की के सिर्फ घुटनों पर मिट्टी थी। बालों की हालत, आंखों में चमक, लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली और हम सब के चेहरे की मुस्कान कुछ छुपाने के लिए नहीं थी। विक्की ने हंसना शुरु किया और हम दोनों उसके साथ मिल गए। मैंने विक्की का बैग पकड़ा और उसने ' रानी साहिबा' लक्ष्मी आंटी को अपनी पीठ पर उठा लिया। आधे रास्ते में विक्की से उसका हसीन बोझ छीन लेने के बाद जब मैं गाड़ी के पास पहुंचा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्म से अपना मुंह छुपा लिया था। लक्ष्मी आंटी की इस मासूम अदाने हम दोनों को छू लिया। ऐसे लग रहा था कि लक्ष्मी आंटी को यहीं बीच बाजार चोद दें पर हमें आगे जाना था।

लक्ष्मी आंटी पीछे बैठी और हम सब वहां से गाड़ी में बाहर निकले।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों तो हद कर दी!! अब तो आप दोनों के साथ मैं भीड़ की जगह कभी नहीं जाऊंगी।"

"क्यों? मज़ा नहीं आया?"
 
53

विक्की


थक कर चूर चूर लक्ष्मी आंटी अपना सर पीछे रख कर पड़ी रही और हम गाड़ी अपने अगले पड़ाव तक ले गए। आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी रोकी और नीचे उतरने लगे।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और पूछा,

"हम इतनी जल्दी वापस आ गए? (बाहर झांक कर) बाबू, हम कहां आए हैं? ये सब क्या है?"

"हमारी प्यारी लक्ष्मी आंटी, ये camping ground है और आज हम सब यहां रहेंगे।"

"बाबू आप दोनों को यूं खुले में करने से डर नहीं लगता? किसने देख लिया तो मैं बरबाद हो जाऊंगी।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

सन्नी, " लक्ष्मी आंटी तुम हमारे लिए कोई खिलौना नहीं जो हम औरों से बांटे। हमारी प्रेमिका सिर्फ हमारी रहेगी। ये जगह एक कैंपिंग साइट है और लोग यहां होटल की तरह ही रहते हैं। यहां खाना पानी तो है ही पर बिजली भी है। चलो दिखता हूं।"

लक्ष्मी आंटी को हम ने पूरे इलाके का मुआयना करने दिया। पावना तालाब के किनारे पर बना ये कैंप शहरी सुख सुविधाओं से लैस पर्यावरण का सुरक्षित आनंद लेने के लिए बना था। यहां शनिवार रविवार को भीड़ होती है पर गुरुवार को सब खाली था।

हम सब अपनी जगह पर लौट आए तब तक वहां कैंप के लोगों ने एक तंबू लगा दिया था और साथ ही बाहर सेंकने के लिए अलाव की व्यवस्था भी की थी। कैंप मैनेजर ने खाना परोसा था जो हम सब ने चट कर दिया। कैंप मैनेजर ने शाम को चाय लाने का वादा किया और चला गया।

सुबह की सैर या बाद में की गई खुले में चुदाई पता नहीं पर हम सब अब शांति का अनुभव कर रहे थे। गरमी के मौसम में दोपहर की धूप से बचने के लिए हम सब तंबू में पंखे के सामने बैठ कर गप्पे लडा रहे थे कि प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को कॉल किया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी खुशी का पिटारा खोल कर प्रतीक को बताया कि हम सब सैर करने आए हैं और बड़े अरसे के बाद उसे यूं खुले आसमान को देखने की खुशी मिली है।

लक्ष्मी आंटी की बातें सुनकर प्रतीक ने उसे विश्वास दिलाया कि वह लक्ष्मी आंटी की खुशी में ही खुश है। प्रतीक ने आगे बताया कि MBS को उसका बनाया काम बहुत पसंद आया है और उसने प्रतीक को अपने खास गिरोह में शामिल कर लिया है। प्रतीक ने कहा कि और भी अच्छी बातें हो सकती हैं पर वह होने के बाद ही पता चलेगा।

लक्ष्मी आंटी ने अपने पति के खुशी में खुशी मान कर फोन रखा। मै और सन्नी कुछ देर बाद पास में रखी नाव में सवार होकर तालाब की सैर के लिए निकले। हमें पता था कि लक्ष्मी आंटी अपनी पढ़ाई के लिए उतावली हो रही थी। तालाब के बीच जा कर हम दोनों ने मछली पकड़ने के लिए पानी में कांटा डाला। खाली दिमाग शैतान का घर होता है तो हम उस शैतान का पूरा इसतेमाल करने का ठान चुके थे।

बातों बातों में हमारे दिमाग में एक कंपनी बनाने की कल्पना बनी। सूरज जमीन की ओर निकला तब तक हमारे हाथों में खाली कांटे और दिल में नए सपने थे। वापस लौट कर देखा तो चाय और नाश्ता लाया गया था। हमने लक्ष्मी आंटी को अपनी कल्पना बताई तो लक्ष्मी आंटी ने उसमें कई खामियां निकलते हुए उन्हें ठीक करने की सलाह भी दी।

सूरज ढलते हुए पहाड़ों की चोटियों के बीच समाने लगा और हम तीनों तालाब के बीच में नाव में बैठकर ये नजारा देख रहे थे। कोई अनजान ताकत हमें बता रही थी कि हमारी जिंदगी फिर से बदलने वाली है।
 
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सन्नी


अगर कोई छुप कर हमारी निगरानी कर रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों कुछ करते हुए पकड़े जाएं तो उसे रात तक सिर्फ 3 दोस्त खेलते और हंसते हुए नजर आते। रात का खाना परोसा जाना था कि लक्ष्मी आंटी टॉयलेट की ओर गई। बस तभी प्रतीक ने मुझे message किया की उसका कॉल लक्ष्मी आंटी से छुप कर लिया जाए। इस प्रकार से उलझन में पड़ा था कि उसका कॉल आया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को बताया कि MBS के लिए काम करते हुए उसे एक बड़ा आदमी मिला जिसने उसे एक खास शर्त पर बड़ी मदद करने का वादा किया है। शर्त और मदद दोनों बातों के बारे में सुनकर मैं समझ गया कि सच में हम सब की जिंदगी बदलने वाली है।

विक्की की आंखों में भी इस बात का असर दिख रहा था। हम दोनों ने प्रतीक से वादा किया कि हम दोनों उसकी हर संभव मदद करने के लिए तयार हैं। लक्ष्मी आंटी ने इठलाते हुए टेबल पर रखा खाना उठाया पर हमारे गंभीर चेहरे देख कर रुक गई।

लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "क्या हुआ बाबू? आप दोनों मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?"

"कुछ नहीं, लक्ष्मी आंटी। हम दोनों बस ये सोच रहे थे कि पढ़ाई करना तो हमारी इच्छा थी जो हम दोनों की पूरी हो रही है। पर तुम तो मां बनना चाहती थी और हम दोनों ने तुम्हें अपनी इच्छा में खींच लिया।"

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में बैठ कर, "बाबू आप दोनों ने तो मुझे नई दुनिया दिखाई है। अगर मैं पहले मां बनती तो अपने बच्चे को क्या अलग जिंदगी देती? अब मैं अपना सपना साकार कर के अपने बच्चे को अच्छी तरह बढ़ाऊंगी। क्या ये कम है?"

हम सब ने अलाव जलाकर खाना खाया और बहुत जल्दी ही सोने चले गए। हम दोनों के मुरझाए चेहरे को देखकर लक्ष्मी आंटी ने मामला अपने हाथ में लिया। लक्ष्मी आंटी ने टेंट में रखे गद्दे पर हम दोनों को लिटाकर हमारी पैंट उतारी। हमारे तने हुए लौड़े टेंट की छत की ओर बढ़े देख लक्ष्मी आंटी मुस्कुराई।

लक्ष्मी आंटी, "चाहे जितना मुंह फुलाकर बैठो आप दोनों की चाबी मैं अच्छे से जानती हूं।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े को सहलाते हुए अपनी जीभ से बारी बारी चाटना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी को कोई जल्दी नहीं थी और वह हम दोनों को तड़पा तड़पा कर मज़े ले रही थी। हमारे लौड़े जब लोहे की लाल छड बन गए तब लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेकर पूछा,
"अब बताओ, एक एक करके आओगे या एक साथ? अपना माल मेरे मुंह में डाल कर उसे जाया मत करना।"

लक्ष्मी आंटी की बात से मेरी आंखे खुली और मैंने उसे पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों के बीच की गंगा को पीते हुए अपनी जीभ से उपर बने मोती सहलाने लगा। लक्ष्मी आंटी अब उत्तेजना से भर कर कसमसाने लगी। लक्ष्मी आंटी की बहती चूत में मैंने दो उंगलियां डाल कर उसकी योनी को अंदर से सहलाते हुए लक्ष्मी शरीर सुख के शिखर तक पहुंचाया। इस दौरान विक्की लक्ष्मी आंटी के मम्मों को निचोड़ कर चूमते हुए उस पर जड़ी बेरीयों को दांत लगाकर उत्तेजित कर रहा था।

लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए, "बाबू. आह. मत तड़पा. ओ. मुझे अपने आईं. लौड़े दो. चोदो.!!!"

मेरी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की तंग गली में पकड़ा गया और लक्ष्मी आंटी ने सिसकियां भर कर मेरी जीभ पर अपना रस उड़ेल दिया। लक्ष्मी आंटी झड कर निढाल हो गई तो मैंने विक्की के साथ अपनी जगह बदल ली।

ढीली पड़ी लक्ष्मी आंटी पर विक्की ने बेरहमी से हमला किया और अपनी उंगलियों से लक्ष्मी आंटी की चूत के रस लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ के पोतने लगा। लक्ष्मी आंटी कुछ सुध लेने से पहले ही दूसरे हाथ की उंगलियों ने चूत में अपनी जगह बना ली और लक्ष्मी आंटी फिर से सिहरने लगी। लक्ष्मी आंटी की चूचियों पर उभरे हुए लाल मेवे को अपने दातों और होंठों से चूसते हुए अपनी उत्तेजना मैंने लक्ष्मी आंटी पर न्योछावर कर दी। लक्ष्मी आंटी को इस तरह लगातार झडने की आदत पड़ चुकी थी और उसके बदन में थरथराहट से लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई।

लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर विक्की ने उन्हें लक्ष्मी आंटी के कंधों से लगाया। मैंने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए उसके बालों में से हाथ फेरे और विक्की ने धीरे धीरे अपना सामान लक्ष्मी आंटी की कुप्पी में भर दिया।

प्यासे को पानी मिले वैसे लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को लेते हुए मुझे चूमा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को लंबे और धीरे धक्का देते हुए उसे चरम सुख की ओर ले गया। इस तरह प्यार से कि गई चूधाई से लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही पर विक्की ने अपना संयम नहीं खोया।

लक्ष्मी आंटी की तालीम में हम दोनों बहुत सीख चुके थे और आज हमारी गुरु दक्षिणा थी। लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए जब विक्की को अपना नियंत्रण छूटता लगा तो मैंने उसकी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी की योनि गीली आग की तरह धुं धूं कर जल रही थी और मेरा लौड़ा इस हवन में जलकर उस आग को बढ़ा रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अब गिड़गिड़ाना छोड़ दिया था।

"हंह. हुम्मम. आनः. आह. हाः. ऊंह. उम्म्म. उम्मम. हा. हा. हा. हा.ह!!", की पुकार के साथ लक्ष्मी आंटी तो बस काम उत्तेजना में जलता हुआ देह था।

लक्ष्मी आंटी की गरम गहराइयों में अपनी शिक्षा से मिले हुनर को साबित करने के बाद मैंने अपने लौड़े के जड़ पर अपना उबलता हुआ वीर्य महसूस कर अपना लौड़ा बाहर खींच लिया। विक्की अब अपनी बेसबरी पर काबू पाने में सफल हो गया था और उसने मेरी जगह ले ली।

लक्ष्मी आंटी ने हमारी जगह बदलने का फायदा उठाकर विक्की को अपने पैरों से जकड़ लिया। विक्की भी अब ज्यादा रुक नहीं पता पर फिर भी उसने बड़ी हिम्मत से लक्ष्मी आंटी का पानी दो बार निकालने के बाद ही कराहते हुए अपना रस लक्ष्मी आंटी की कोख में उड़ेलकर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा।

लक्ष्मी आंटी की आंखों में थकान से आंसू थे और उसने विक्की को अपनी बाहों में भर कर मानो उसकी ताकत महसूस कि। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की बाहों में से बाहर निकलते हुए मुझे जगह दी तो लक्ष्मी आंटी ने विरोध किया।

लक्ष्मी आंटी, "मैं थक गई हूं सन्नी बाबू। कल सुबह आप जितना चाहे प्यार कर लो। छिल जाऊंगी अब और प्यार मिला तो। सन्नी बाबू आह. आ. हा. हा. उन्हहह. आहा. आ!"

मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत के अंदर सन्नी के वीर्य को अपने लौड़े से मथते हुए अपना हथियार जड़ तक भर दिया। लक्ष्मी आंटी के माथे को चूमते हुए उसकी भौं में जमे पसीने के अपने होठों पर लगाया। लक्ष्मी आंटी की योनि रसों की टंकी बन कर बह रही थी और मैंने अपने लौड़े को बाहर निकाल कर तेज धक्का दिया।

"मां. आह. सन्नी बाबू. पेलो. चोदो. लूटो मुझे. हां. हां. अन्ह. आंहा. और. और. और.", लक्ष्मी आंटी ने आहें चीखें बन गई और पूरा तालाब हमारे यौन मिलन के संगीत में डूब गया। लक्ष्मी आंटी के कान कि बाली को अपने होठों में दबा मैंने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार लंबे धक्कों से पेलना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी फिर से शब्द भूल कर जानवरों की तरह चिल्लाते हुए अपनी हवस का पिटारा खोल मेरा लौड़ा अपनी योनि से निचोड़ने लगी। अगर झडता तो गुरु दक्षिणा अधूरी रह जाती इसी लिए मैंने ताबड़तोड़ ठुकाई के बीच भी अपने नियंत्रण के कच्चे धागे को थामे रखा।

लक्ष्मी आंटी ने घायल शेरनी की तरह अपने नाखून मेरे पिछवाड़े में धंसा ते हुए अपनी कमर को उठाया। लक्ष्मी आंटी के दातों ने अब मेरा कंधा दबोच कर मेरी त्वचा फाड़ दी थी।

दर्द का भी अपना मज़ा होता है।

लक्ष्मी आंटी की दूसरी चीख ने मेरा बांध तोड़ा और मैंने लक्ष्मी आंटी को अपनी गरमी का पूरा मज़ा दिया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी बाहों में भर कर रोना शुरू किया दिया।

"क्या हुआ लक्ष्मी आंटी? दर्द हुए? छिल गया? तकलीफ हुई?"

लक्ष्मी आंटी ने बस मेरे गले में अपना मुंह छुपा कर मुझे पकड़े रखा। कुछ समय बाद लक्ष्मी आंटी ने मुझे थोड़ा छोडा पर सिर्फ विक्की को अपने साथ लेने के लिए। आगे शब्द बेकार थे और सांसे सच्चाई बयां कर रही थीं। हम सब अपने अपने विचारों में डूब कर सो गए।
 
55
विक्की


तालाब के किनारे पर सबेरे सर्दी होती है और रजाई में लक्ष्मी आंटी की गरमी और भी लुभावनी लगती है।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूमते हुए उसे चूसना शुरू कर दिया और अपना हाथ उसके पैरों को फैला गीली गरमी के उपर बने मोती को रगड़ने लगा। मैंने दूसरे मम्मे को अपने होठों से पकड़ते हुए अपनी जीभ से चूची को छेड़ते हुए चूमने लगा और अपनी उंगली को लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया। लक्ष्मी आंटी तिलमिलाकर उठी और आहें भरते हुए हमारे बाल पकड़ कर अपने भरे हुए मम्मों पर दबाने लगी।

लक्ष्मी आंटी की आग बुझाना उतनी ही हमारी जिम्मेदारी थी जितनी उस आग को जलाना हमारा फ़र्ज़ बनता था। लक्ष्मी आंटी का बदन थरथाया और लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई। लक्ष्मी आंटी ने झडने के बाद हमारे सर को बाल पकड़ कर उठाया और कहा,
"क्या हो गया है आप दोनों को? कल रात को आप दोनों ने कुछ कम परेशान किया था जो ऐसे उठाया? कोई देख या सुन लेगा तो?"

"अरे लक्ष्मी आंटी, आज यहां कोई नहीं होगा। यहां सिर्फ शनिवार रविवार को चहल पहल होती है। आज तो नाश्ता भी देर से आयेगा।"

लक्ष्मी आंटी को विश्वास नहीं हो रहा था तो मैंने तंबू के परदे खोल दिए और नंगा ही बाहर टहलने लगा। जहां तक नजर जाए इंसान का कोई पता नहीं था। सन्नी भी बाहर खड़ा था और अपने इर्द गिर्द देख रहा था।

कुछ समय बाद टॉयलेट में से flush के आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी बाहर आई। लक्ष्मी आंटी ने अब भी पतला satin gown पहन रखा था। बाहर भोर का हलका उजाला सुबह की याद दिला रहा था।

लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों की ओर देखते हुए एक पल में पहचान लिया के हमारा विचार क्या है और तंबू में छुपने भागी। हम दोनों ने लपक कर लक्ष्मी आंटी को दबोच लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रख लिया और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का gown उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने हलकी चीख से अपने बदन को ढकने की कोशिश की पर मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब किनारे रखे गद्दे पर पटक दिया।

लक्ष्मी आंटीने "आह. विक्की बाबू!!!" चिल्ला पड़ी की सन्नी ने उसके मुंह में अपना मूसल ठूंस दिया। आदत से मजबुर लक्ष्मी आंटी की तुरंत सन्नी के लौड़े को पूरा निगलकर चुस्कियां लेते हुए चूसने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की भट्टी में अपना लोहा पेल दिया और तेज रफ्तार से चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी एक हाथ से सन्नी को पकड़ा था तो दूसरे से अपने यौवन के दाने के साथ खेलने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी के दोनों गोले मेरे हाथों में लेकर उन्हें मसलते हुए लक्ष्मी आंटी को तेज धक्कों से चोदता रहा। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के लौड़े पर अपनी चीख को दबाकर झडते हुए मेरे लौड़े को कस कर निचोड़ा।

लक्ष्मी आंटी की उत्तेनापूर्ण चुदाई के कारण कम दोनों जैसे तैसे अपने आप को संभाल पाए। और सहना मुश्किल होगा यह जानकर मैंने लक्ष्मी आंटी के उपर लेट कर पलटी मारी। अब लक्ष्मी आंटी ने मेरी सवारी करते हुए सन्नी को चूसने के लिए हाथ बढ़ाया। सन्नी के दिमाग में कुछ और ही था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने पंजों से खोल कर अपने गरम लोहे के छड़ को लक्ष्मी आंटी के संकरी गली के मुहाने पर रखा। लक्ष्मी आंटी मुझे अपनी चूची खिलाते हुए चीखी,
"सन्नी बाबू! मेरी गांड़ मरो सन्नी बाबू!! भर दो अपनी लक्ष्मी को!! आह. मां. हा. हा. हा."

लक्ष्मी आंटी के मम्मो को पकड़कर उन पर उभरी चूचियों को दबा कर चूसते हुए मैं लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना के साथ ही आधार भी दे रहा था। लक्ष्मी आंटी तो अपनी सुध बुध छोड़ कर शरीर सुख के सागर में गोते लगाने में व्यस्त थी। लक्ष्मी आंटी अपनी छाती को मुझ पर दबाकर अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों प्रेमियों का पूरा मज़ा ले रही थी। सन्नी के लौड़े की रगड़न चूत और गांड़ के पतले परदे से मेरे लौड़े को और भी मज़ा दे रही थी।

अब सुबह से सुलगता वीर्य हमारे गोटों को गरमाते हुए दोबारा लक्ष्मी आंटी की गरमी में मिलने दौड़ा तो मैंने उसे नहीं रोका। सन्नी के तेज रफ्तार झटके बता रहे थे कि अब वह भी अपना रस उड़ेलने को बेताब है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उत्तेजना की हदें पार करते हुए झडने की लड़ी लगा दी। सन्नी के लौड़े से वीर्य की पहली पिचकारी से मेरा भी रस छूट गया और लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ गरमी भर गई। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उगते सूरज को हमारे रस की गरमी का गीत सुनाकर मेरे ऊपर लेट गई।

कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर किसीने कहा होता की सूरज का स्वागत ऐसे भी हो सकता है तो मैंने उसे पागल कहा होता। आप दोनों बहुत बुरे हो। आप मुझे बिगड़ दोगे।"

"अरे लक्ष्मी आंटी, अगर अब तक बिगड़ी नहीं हो तो यही हमारी नाकामयाबी होगी!"

हम सब ने हंसी मजाक में कपड़े पहन लिए और वापस तालाब किनारे बैठे की नाश्ता ले कर कैंप के लोग आ गए। नाश्ता करके मैं और सन्नी trekking करने गए तो लक्ष्मी आंटी ने सुबह की अधूरी पढ़ाई पूरी करना जरूरी समझ कर आने से मना कर दिया।

Trekking में आगे बढ़ने के बाद मैंने सन्नी से कहा, "लक्ष्मी आंटी के बारे में प्रतीक ने जो तय किया है उस बारे में सोच रहा हूं। हम प्रतीक की मदद कर लक्ष्मी आंटी को मुसीबत में न डाल दें।"

सन्नी, "जिंदगी कुछ ऐसी ही है मेरे दोस्त। किसने सोचा था कि हम दोनों किसी के साथ बलात्कार करेंगे?"
 
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सन्नी


पिछले दो महीने कुछ अलग थे। विरह की आने वाली चोट और साथ में खामोशी की चुभती जलन हम सब को तकलीफ दे रही थी। लक्ष्मी आंटी को अपने लिए वक़्त मिलना मुश्किल हो गया था।

लक्ष्मी आंटी को अब दोपहर को ही पूरी पढ़ाई करनी पड़ती थी क्यूंकि कॉलेज से वापस आते ही हम दोनों उस पर टूट पड़ते। कोई एक पढ़ाई करता तो दूसरा लक्ष्मी आंटी को चोदने में लगा रहता। लक्ष्मी आंटी ने तो चुदाते हुए ही खाना पकाना और बरतन मांजना शुरू कर दिया था। रात को सोते समय हम दोनों बड़े प्यार से उसे फिर से चोदते और उसे अपने बाहों में लेकर सोते।

लक्ष्मी आंटी समझ गई थी कि हम दोनों कोई राझ रख कर हैं पर उसने पूछा नहीं। कॉलेज में जाते हुए प्रतीक का कॉल आया और हम समझ गए कि अब वह दिन आ गया है। शाम को हमने लक्ष्मी आंटी को कहा कि वह कल फिर से दुल्हन का श्रृंगार कर अपने प्रेमी का इंतजार करे जैसे उसने पहले दिन किया था। लक्ष्मी आंटी हमारे सुझाव से चौंक गई और खुश भी हुई। उस रात मैं और विक्की लक्ष्मी आंटी को चोद नहीं पाए। हम दोनों बस लक्ष्मी आंटी के साथ बातें करते रहे और रात को उसे अपनी बाहों में भर कर सो गए।

अगली शाम को हम ने घर का दरवाजा खोला तो हॉल खाली था और लक्ष्मी आंटी ने आवाज दी की हम नहा कर अंदर आएं। मैं और विक्की अंदर गए और लक्ष्मी आंटी को बेड पर दुल्हन की तरह बैठे पाया।

"लक्ष्मी आंटी, तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो! पर आज बन्द आंखों से तुम्हे अपने पती को पहचानना होगा।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की आंखों पर पट्टी बांध दी और हम दोनों बाहर आ गए। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी के पति ने नहा कर तयारी कर ली और लक्ष्मी आंटी को प्यार करने अंदर पहुंचा।

लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसने लक्ष्मी आंटी के माथे पर लगे सिंदूर को चूमा।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू संभाल कर! सिंदूर को मत चेडना!!"

जैसे ही लक्ष्मी आंटी के होंठों से होंठ टकराए, लक्ष्मी आंटी के होंठ खुल गए और तुरंत बन्द हो गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने पति को धक्का दे कर दूर करते हुए कहा, "क. कौन.? कौन ? कौन है? सन्नी बाबू! विक्की बाबू! ये मजाक ठीक नहीं!! छोड़ो ! छोड़ो मुझे!! सन्नी बाबू!! विक्की बाबू!! बचाओ!!.."

छटपटाहट में लक्ष्मी आंटी की आंखों से पट्टी उतर आई और वह अचानक रुक गई।

लक्ष्मी आंटी, "जी? आप?"
 
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विक्की


लक्ष्मी आंटी की आहों से bedroom पूरी शाम गूंजती रही और हम दोनों बाहर बैठ कर खामोशी से लक्ष्मी आंटी की खुशी में अपनी खुशी मानते रहे। तीन घंटों के घमासान द्वंद्व के बाद लक्ष्मी आंटी बेड पर निढाल होकर पड़ी रही और प्रतीक लड़खड़ाते कदमों से बाहर आ गया।

प्रतीक की हालत देख मुझे farmhouse पर बिताई पहली रात याद आई। शर्माती हुई जीत की मुस्कान प्रतीक के चेहरे पर लाली बन कर फैली हुई थी। प्रतीक को चिढाना वैसे तो आम बात होती पर लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों ने बनाए संबंध को याद कर हम चुप रहे।

"एक भुख मिट गई हो तो दूसरी का हल ढूंढे?"

प्रतीक ने कहा कि उन्हें भी भुख लगी है तो मैंने फोन कर पिज़्ज़ा मंगवाया। हम सब हॉल में बैठ कर इधर उधर की बातें करते हुए पिज़्ज़ा का इंतजार कर रहे थे कि लक्ष्मी आंटी ने दीवार को पकड़ते हुए हॉल में कदम रखा। हम सब को बाहर देख लक्ष्मी आंटी शर्म से पानी हो गई तो प्रतीक ने उसे अपनी बाहों में लेते हुए हम सब के साथ बिठाया।

लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली छाई हुई थी और वह आंखों के किनारे से हम सब को देख रही थी। लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने से हम बाज नहीं आए।

"अरे लक्ष्मी आंटी, क्या हुआ? अभी इतना थक गई? प्रतीक जी तो आप के लिए ही छुट्टी पर आए हैं!"

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी तुम्हारे पास मेकअप का सामान है ना? लगता है कल सुबह गरदन, गाल और कान पर नहीं लगाया तो पूरा कॉलेज जान जाएगा कि जी छुट्टी पर आए हैं।"

लक्ष्मी आंटी शर्माती हुई प्रतीक के बाहों में मुंह छुपा कर हंसने लगी और प्रतीक किसी मोर की तरह खिल उठा।

पिज्जा आया तो हम सब खाने लगे और मुख्य बात बाहर लक्ष्मी आंटी ने लाई।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों ने जी के आने की बात छुपाई सो ठीक। पर क्या बाकी हिस्सों में जो हुआ है वह आप दोनों को पता नहीं था?"

"लक्ष्मी आंटी अंदर से आती आहें हम दोनों को कब से उलझाए हुए हैं। तुम ही बताओ कि ये माजरा क्या है?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी की उंगलियों को अपने होठों से छू कर अपनी कहानी बताने लगा।

प्रतीक, "जब मैं खाड़ी के पार पहुंचा तो मैं कई मजदूरों की भीड़ में से एक हो गया। लेकिन मेरे मन में ये आग जलती रही की इतने सालों तक लक्ष्मी को परेशान करने के बाद अब मुझे अपने आप को लक्ष्मी की नजरों में साबित करना है।

बदन की मेहनत करने वालों की वहां कोई कमी नहीं, इसलिए मैंने अकल से काम करना शुरू किया। पहले कुछ समय तक तकलीफ हुई पर अकेले काम करना मेरे लिए नया नहीं था और मैं अपना हुनर आजमाता रहा। इसी तरह एक दिन मुझे एक बड़े होटल का काम करते हुए Amber ने देखा। मेरी कारीगरी से खुश होकर उसने मुझे अपनी खास team में ले लिया। मुझे बाद में पता चला कि Amber कोई interior designer या architect नहीं बल्कि MBS की तीसरी बीवी है। उसके साथ काम करते हुए मैंने कई नामी हस्तियों से मुलाकात की और उन्हीं में से एक है Dr. Balakrishna जो पुरुष रोग के बड़े जानकार हैं।

दर असल बात ये है कि वहां के अमीरों में दिखावे की होड़ लगी रहती है। बड़ी गाडियां, बड़े जहाज, हवाई जहाज, ज्यादा और खूबसूरत बीवियां और ऐसे ही। लेकिन अब जब सब के पास यह सब है तो और किस बात का दिखावा हो? मर्दानगी का! Dr. Balakrishna ने मुझे check up के बाद बताया कि मेरी खड़ा करने की नस कट गई है पर संवेदना बाकी है। Dr Balkrishna ने मेरे लौड़े में कुछ ऐसा कर दिया है कि अब मेरा लौड़ा कभी नरम नहीं हो सकता।"

लक्ष्मी आंटी के मुंह से "हे भगवान!!" निकल आया और हम सब हंस पड़े।

सन्नी, "ये तो बहुत अच्छा हुआ। अब आप दोनों को अपनी जिंदगी जीने में कोई रुकावट नहीं रही। मुबारक हो।"

मुझे लगा था कि हम दोनों का आशीर्वाद मिलने से प्रतीक खुश हो जाएगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। प्रतीक ने अपना सर झुकाकर लक्ष्मी आंटी की ओर देखते हुए कहा,
"लक्ष्मी मुझे माफ करना पर दुनिया में मुफ्त कुछ नहीं होता। Dr Balkrishna ने जो operation किया है उसके लिए मुझे कॉन्ट्रैक्ट करने पड़े। एक शर्त यह है कि मैं अगले 3 साल तक वापस नहीं आ सकता। Dr Balkrishna न केवल वहां मेरी हालत पर नजर रखेंगे पर मुझे उनके कहने पर अलग अलग शेख के सामने उनके काम को साबित करना होगा।"

लक्ष्मी आंटी ने चौंक कर, "मतलब?"

प्रतीक ने एक गहरी सांस लेकर कहा, "सच्चाई तो यह है कि कुछ शेख को नवाबी शौक होता है। लोगों को दिखाने के लिए 4 बीवियां कर लें फिर भी प्यार अपने ड्राइवर या assistant से ही कर सकते हैं। मैं नाम नहीं ले सकता पर ऐसे ही एक बड़े आदमी ने मेरी मदद करने के बदले अगले 3 सालों तक अपनी बीवियों को संभालने की बात की है। अगर उसका या उसकी किसी भी बीवी का नाम आया या मैंने वादा तोड़ा तो शेख मुझे मार कर ही दम लेगा। मगर मैंने अपना वादा पूरा किया तो 3 साल बाद शेख न केवल मुझे लौटने देगा पर हमारे लिए कई दरवाजे खोल देगा।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को गले लगाया और रोने लगी।

लक्ष्मी आंटी, "क्यों किया ऐसा? मैं आप के साथ खुशी खुशी अपनी जिंदगी हमारे झोंपड़े में बीता लूंगी। आप मेरे दोस्त हो पर मैं फिर भी आप से प्यार करती हूं। मुझे बोल दिया होता तो मैं आप को रोक देती। क्यों अपनी जान जोखिम में डाल दी?"

प्रतीक, "लक्ष्मी मेरी तरफ देखो। क्या मेरी आंखों में डर है? मैंने ये तुम्हारे लिए नहीं किया। मैंने ये हमारे लिए किया है। मैं जानता था कि तुम मना कर देती इसीलिए तुम सब से ये बात छुपाई। लक्ष्मी मैं भी तुम से प्यार करता हूं। मैं तुम्हारे साथ एक फलता फूलता परिवार चाहता हूं। तुम्हें मां बनते हुए देखना चाहता हूं। इस के लिए ये बस छोटी सी कीमत है। तुम अपनी पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान देना और हम जल्द ही अपना घर बसाएंगे।"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के सीने में अपना मुंह छुपा कर कहा, "आप को उस शेख की बीवी पसंद आ गई तो?"

प्रतीक ने हंसकर, "तो उसे भी ले आऊंगा। दोनों मेरा खयाल रखना आ.!"

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को काट लिया देख हम दोनों हंसते हुए लोट पोट हो गए और लक्ष्मी आंटी ने अपनी मुंह को अपनी हाथों में छुपा लिया।

सन्नी, "प्रतीक, लक्ष्मी आंटी ने तुम्हे अपना मान लिया है। लक्ष्मी आंटी उन्हें ही तकलीफ देती है जिन्हे वो अपना मानती है।"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी का हाथ खोल कर उसके होंठों को चूमते हुए कहा, "जान तेरे लिए मैं मौत से खेल सकता हूं। अगर ऐसा है तो किसी और के लिए मैं तुम्हे कैसे छोड़ सकता हूं।"

लक्ष्मी आंटी को प्रतीक ने अपनी बाहों में भर लिया और हमारी ओर देखते हुए कहा,
"आप दोनों ने लक्ष्मी के लिए जो किया है मैं उसे कभी भूल नहीं सकता। अगले 3 साल लक्ष्मी का ऐसे ही खयाल रखना। हां. मैं सच में यही चाहता हूं।"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए बेडरूम की तरफ चलने लगा। Bedroom के दरवाजे में रुक कर प्रतीक ने कहा,
"आ जाओ! मुझे सीखोगे नहीं औरत को खुश करने के तरीके? पूरी रात है सीखने सिखाने के लिए।"
 
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सन्नी


प्रतीक के बुलाने पर हम दोनों भी बेडरूम में आ गए। लक्ष्मी आंटी बेड पर शर्माकर बैठी थी। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए उसके माथे पर लगे सिंदूर को चूमा और लक्ष्मी आंटी को बेड पर लिटाकर चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए प्रतीक को रोका और कहा,
"जी, मुझे शर्म आती है। बाबुओं के सामने कैसे? और आप? नहीं.?"

प्रतीक, "वहां जब मुझे दूसरी औरतों के साथ रहना होगा तब मुझे बुरा लगे कि मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूं, यह सही होगा? नहीं? जान, मैंने हमारे लिए खुशी और परिवार चुना है। लेकिन अगर तुम अपनी खुशी से मुंह मोड़ लोगी तो मैं कैसे खुश हो सकता हूं?"

प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी के हाथ उठाए और बेड के सिरहाने बांध दिए। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप को बेबस पाकर चैन की सांस ली। अब उसे अपने पति से धोका करने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। प्रतीक ने कमरे के उजाला कर दिया और कहा,
"बाबू, जैसा कि आप दोनों जानते हैं। मैंने जवानी के खेल में आज ही पहल की है। पर वहां शेख के हिसाब से मैं कई साल का माहिर हूं। अगर शेख की बीवी ने खुशी नहीं मिलने का कहा तो मुश्किल होगी। आओ अब मुझे वो सब सिखाओ जो आप दोनों ने सीखा है।"

मैंने और विक्की ने इस बात पर सोच कर फैसला लिया की प्रतीक को पहले सीखना होगा और फिर अनुभव करना होगा। प्रतीक ने हमारी बात मान ली और एक कुर्सी ले कर बेड के नीचे बैठ गया।

मैंने और विक्की ने प्रतीक को सिक्का उछाल कर हम दोनों में बारी तय करने को कहा। पहली बारी जीत कर विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए प्रतीक को चूमने की कला सिखाई। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेजना वश आहें भरते ही विक्की ने अपने होंठ नीचे लेते हुए दूधिया गोलों पर लाए। विक्की एक गोले को चूम रहा था तो दूसरे को अपने पंजे में दबोच कर उस पर बनी चूची को छेड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण हरकतों से अपनी पीठ उठाते हुए अपनी चूची विक्की के मुंह में दबाने लगी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसते हुए अपने घुटने से लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला दिया। लक्ष्मी आंटी की पनीयाई बुर से बहती धारा साफ नजर आ रही थी।

"प्रतीक औरत और मर्द के बीच एक खास फर्क यह है कि मर्द बिजली के बल्ब की तरह तुरंत तयार हो जाता है पर औरत बिजली की इस्त्री की तरह धीरे धीरे तपती है और काफी देर तक गरम रहती है। तो एक बात हमेशा याद रखना। लक्ष्मी आंटी को तब तक गरम करना जब तक तुम से रहा जाए और उसके बाद 10 मिनिट तक अधिक करना।"

प्रतीक सच में लक्ष्मी को खुश रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार था। वह लक्ष्मी आंटी को चुधते देखने के लिए भी तयार था ताकि वह उसे खुशी दे पाता। विक्की की हालत पस्त हो गई तो मैंने उसके साथ जगह बदल ली।

लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और मैंने उसके पैरों को फैला कर उसके गुपतांगों को अपनी उंगलियों से खोल कर उजागर किया।

"प्रतीक, औरत के निचले होटों की दो परतें होती हैं। बाहर की पाव रोटी जैसी मांसाल परत और अंदर की नाजुक पंखुरी सी पतली परत। बाहर की परत को चूमने से लक्ष्मी आंटी की रस की धारा बहना तेज हो जाता है।"

लक्ष्मी आंटी की खुली चूत के बाहरी होटों को बारी बारी चूमते हुए उसकी आहों से कमरा भर उठा। मैंने अपनी जीभ की नोक से निचले होटों के उपरी जोड़ को छू लिया और लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन झटक दिया।

विक्की, "प्रतीक, नीचे के बाहरी और अंदरूनी होठों के जोड़ने से बने उपरी हिस्से में छिपा होता है औरत के यौन सुख का खजाना। इसे हम दोनों लक्ष्मी आंटी का मोती कहते हैं। इसे चाटने, चूमने और चूसने से लक्ष्मी आंटी को वही होता है जो हमें अपना लौड़ा चाटने, चूमने और चूसने से होता है। लक्ष्मी आंटी की कोई चुदाई हम तब तक नहीं करते जब तक लक्ष्मी आंटी इस मोती का पूरा मज़ा नहीं लेती। देखो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को कस कर पकड़ लिया है कि वह सन्नी को हिला न पाए। लक्ष्मी आंटी अक्सर झडते हुए ऐसे तड़पती है कि हम हिल जाते हैं और लक्ष्मी आंटी अधूरी रह जाती हैं।"

मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को पकड़ कर अपने होठों से लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमा। लक्ष्मी आंटी तप कर तिलमिलाने लगी तो मैंने उसके मोती को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और मोती का अब उभरा हुआ हिस्सा अपनी जीभ से चाटने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी जांघो से मेरा सर पकड़ लिया और खुद सिसक सिसक कर आहें भरते हुए उत्तेजना वश तड़पने लगी।

बेड के पास बैठ कर हमारे दर्शक मेरी कला को निहार रहे थे और उस से सीख रहे थे। मैं और विक्की कई बार एक दूसरे के सामने लक्ष्मी आंटी का पानी निकाल चुके थे पर ऐसे जान कर किसी की बीवी को उसके सामने चोदना एक अलग ही अनुभव था। मैंने लक्ष्मी आंटी की आवाज और लक्ष्मी आंटी की बुर का रिसाव देख अपनी 1 उंगली को लक्ष्मी आंटी की तपती भट्टी में डाल दिया।

"आह. सन्नी बाबू. और मत तड़पाओ!!. चोदो मुझे!!. कोई तो चोदो मुझे!!!. कोई भी चोदो मुझे!!!.", लक्ष्मी आंटी गिड़गिड़ाई।

मैंने मुस्कुराकर जवाब में अपनी दो उंगलियां उसकी गर्मी में भर दी और लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमते हुए अपनी उंगलियों को तेज रफ्तार से चलाने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहें तेज होते हुए एक चोटी तक गई और एक ऊंची चीख के साथ लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए मेरा मुंह अपने रस से भर दिया। लक्ष्मी आंटी का बदन ढीला पड़ गया था पर अब भी उसमें कुछ कांपना जारी था।

"इस तरह लक्ष्मी आंटी के झडने से हम ये मान सकते हैं कि जब हम लक्ष्मी आंटी को चोद कर झड जाएं तो वह असंतुष्ट न रहे।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के उपर लेटते हुए मेरी जगह ले ली थी और अब उसके माथे को चूमते हुए उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों को बस छूने से ही पहचान लेटी है पर फिर भी बताकर करना अच्छा होता है। अगर घर में सिर्फ दोनों ही हो फिर भी अचानक अंदर जाना अच्छा नहीं लगता।"

लक्ष्मी आंटी ने विक्की को अपनी बाहों में भर लिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गाल चूमते हुए उसकी बुर पर अपना सुपाड़ा सटा दिया।

"अन्ह. आह. ऊंह.", लक्ष्मी आंटी ने अधीर होकर अपनी गांड़ उठाकर विक्की को अपने पैरों में पकड़ कर अपने अंदर खींच लिया।

"आह. हा. आ. हा. आनह. अम्म्म..", लक्ष्मी आंटी की यह पाष्वी उत्तेजना की भाषा हमें आगे का रास्ता दिखा रही थी और हम दोनों यही भाषा प्रतीक को सीखा रहे थे। विक्की को लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए चोदना पसंद था पर आज वह प्रतीक को सीखने के लिए लक्ष्मी आंटी के कान और गाल को चूमते हुए उसके सुख के स्वर सुना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की को कस कर पकड़ कर उसे तेज धक्कों से चोदने पर मजबुर कर दिया था।

"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी को कभी प्यार से धीरे और लंबे धक्के चाहिए होते हैं। कभी तो बस तेज रफ्तार झटके से मज़ा चाहिए होता है। ये हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसकी मर्जी को समझे और उसे उसकी मन चाही खुशी दें।"

विक्की ने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार चोदते हुए अपनी पूरी ताकत लगा दी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए उसका लौड़ा निचोड़ लिया। विक्की लक्ष्मी आंटी के उपर लेट गया और लक्ष्मी आंटी ने उसे पकड़ कर चूमते हुए उसका रस अपनी कोख में भर लिया।

कुछ देर बाद लक्ष्मी आंटी ने विक्की को छोड़ दिया और विक्की एक ओर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने दूसरी ओर मुड़ते हुए एक घुटना तकिए पर रख कर पेट के बल अधूरी लेट गई।

लक्ष्मी आंटी की योनि की पंखुड़ियां खुली हुई थी और उनमें जमा विक्की का माल एक गाढ़ी मलाई की बूंद की तरह धीरे धीरे बाहर आता दिख रहा था।
 
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सन्नी


विक्की के बगल में लेट ने से लक्ष्मी आंटी एक ओर मुड़ कर अपना घुटना तकिए पर रख पेट के बल अधूरी लेट गई जिस से लक्ष्मी आंटी की चूत में जमा वीर्य बाहर झांकने लगा। लक्ष्मी आंटी को ठंडा होने देना मेरे लिए बेवकूफी होती।

मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ के उपर अपना लौड़ा घुमाया।

"सन्नी बाबू!!. उफ्फ.", लक्ष्मी आंटी जानती थी कि मुझे रोकना मेरे साथ नाइंसाफी होती। प्रतीक धान से मेरे पैंतरे और उन पर लक्ष्मी आंटी की प्रतिक्रिया देख रहा था। मैंने अपने लौड़े पर विक्की के वीर्य की गाढ़ी मलाई लक्ष्मी आंटी की चूत के मुंह से उठाई और लक्ष्मी आंटी की गरमी चूत में मेरा लौड़ा पेल दिया।

"मां. आह. आह.", लक्ष्मी आंटी ने मेरा स्वागत किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लिया।

विक्की, "औरत चाहे जितनी तयार हो उसकी गांड़ मारने से पहले अपने लौड़े को रस में अच्छे से पोत लो। यौन रस से अच्छा अगर कुछ है तो वह है वीर्य से भरा यौन रस। वैसे vaseline gel भी काम करता है पर हमें तो यही पसंद है।"

मेरे लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की कसी गांड़ के सुराख को खोलने लगा तो लक्ष्मी आंटी फिर से आहें भरने लगी।

"आह. आंह. उंह. मां!!. हां. हा. हा. हा. आ.आह. आहा.", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गांड़ के अंदर लेते हुए आंहे भरी।

"सन्नी बाबू!! प्यार से करो!! मैं थक गई हूं।", लक्ष्मी आंटी ने मुझे समझाते हुए कहा।

मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल उसके माथे से पीछे लेते हुए अपने हाथ में लेकर उन्हें थोड़ा खींचा।

"सन्नी बाबू!! आह. आ.", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत करना शुरू किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया।

"मां. आंह. आ. आ.आआह.", लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरे लौड़े को दनदनाते हुए घुसता पाया।

"डरो मत। लक्ष्मी आंटी को गांड़ मराना पसंद है। यह एक हुनर है जो हर औरत नहीं कर पाती पर लक्ष्मी आंटी ने इस में महारथ हासिल कर ली है।", विक्की ने प्रतीक के व्याकुल भाव देख कर कहा।

मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसे पीछे खींच कर लक्ष्मी आंटी को उठा लिया था और खुद उस पर लेट कर उसकी गांड़ के लंबे ठाप लगाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से अपने आप को उपर उठाया और दूसरे हाथ से अपनी खाली चूत को सहलाने लगी।

"लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि लक्ष्मी आंटी की चूत खाली न रहे। अगर अब की तरह लक्ष्मी आंटी ने अपना इंतजाम खुद नहीं किया तो दो उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में डाल कर अंगूठे से लक्ष्मी आंटी का मोती चलते रहना चाहिए।", विक्की ने प्रतीक को गांड़ चुदाई की बारीकियां समझते हुए हम।

मैंने लक्ष्मी आंटी के गाल को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा। लक्ष्मी आंटी की उंगलियां मुझे चूत के परदे से महसूस हो रही थी। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना में बहते हुए मैंने जैसे तैसे अपने आप को लक्ष्मी आंटी के झडने तक रोके रखा। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए अपनी गांड़ को भींच लिया और मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी के छूट ते ही मेरा बांध टूटा और मेरे वीर्य की धार से लक्ष्मी आंटी की गांड़ रंग दी गई।

"आह. हा. हा. आ.ह। बड़े वो हो सन्नी बाबू!!," लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मेरे बालों में फेरते हुए मुझे डांटा।

प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी का माथा चूमा और मैंने पति पत्नी को उनकी जगह देते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर खींच लिया।

"आप को बुरा लगा?" लक्ष्मी आंटी ने डरते हुए प्रतीक से पूछा।

"जान जिस बात से तुम्हें इतनी खुशी मिले उस से में बुरा क्यों मान लूं?" प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए कहा।

विक्की का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था और पत्नी को चुदा हुआ पा कर पति कि खुशी देख मेरे लौड़े में भी तकद भर गई। हम दोनों के खड़े लौड़े देख लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए प्रतीक से कहा,
"अगर मैं इन दोनों को पहले सुला दूं तो चलेगा?"

प्रतीक बस सर हिलाकर हां बोल पाया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे बेड पर लिटाकर मेरा लौड़ा अपनी जीभ से चाट कर साफ़ करने लगी। जब मेरा लौड़ा फूल गया तब विक्की ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना मूसल ठूंस दिया।

"मां. आह.", लक्ष्मी आंटी ने अपनी आवाज को दबाने के लिए मेरा लौड़ा निगल लिया। थोड़ी देर में ही मैं पूरी तरह तयार हो गया और विक्की लक्ष्मी आंटी को पीछे से दनदनाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अचानक आगे बढ़ ते हुए मेरे ऊपर लेट गई जिस से विक्की का लौड़ा सुना रह गया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी बहती योनि को खोल दिया और मेरे लौड़े का सुपारा उपर घुमाने लगी। जब मेरे सुपाड़े को रस में अच्छे से धोया गया तब लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े पर बैठ गई।

"आह. आ. हा. हा. अन्ह. अम्मम. आह!!", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गरमी सही जगह रख कर नीचे झुक गई और अपनी चूची को मेरे मुंह पर रखा। इतना इशारा मेरे लिए काफी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसने में पूरा ध्यान लगा दिया।

लक्ष्मी आंटी ने उदास खड़े विक्की को पीछे मुड़ कर देखा और अपनी गांड़ पर हलके से थप्पड़ लगते हुए कहा,
"विक्की बाबू, अब और कितना इंतजार करोगे? आओ अपनी लक्ष्मी आंटी को प्यार करने।"

विक्की खुशी से ऐसे कूद पड़ा की सीधे लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में भरकर ही रुका।

"मां!!. आह. उफ्फ. बाबू प्यार करने को कहा था पेल देने को नहीं!..", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत की।

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद अपने लौड़े से पूरी तरह भर दिए पर रुक कर उसे अपनी लय पकड़ने दी। कुछ पल बाद लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर हमारे लौड़े अपने अंदर से सुपाड़े तक बाहर निकलने दिए और फिर धीरे से हमारे लौड़ों पर अपनी गांड़ दबाते हुए बैठ गई। प्रतीक फटी आंखों से देख रहा था कैसे लक्ष्मी आंटी अपनी कमर हिलाते हुए दो लौड़ों से अपनी चूत और गांड़ एक साथ मरवा रही है।

कुछ देर तक ऐसे ही अपनी मरवाते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय पकड़ ली और प्रतीक की ओर देखते हुए कहा,
"जी सुनिए! आप ने कहा कि आप को बुरा नहीं लगता इस लिए मैंने बाबुओं को लिया है। पर आप ऐसे दूर बैठ कर देखते हुए मुझे अच्छा नहीं लगता। इधर आइए।"

प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी को चूमा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय बदले बगैर प्रतीक से चुम्बन लिया और अब उसे खींच कर बेड के सिरहाने अपने मुंह के पास खड़ा कर दिया। प्रतीक अपने साथ क्या हो रहा है यह समझने से पहले ही हमारे खेल में शामिल हो गया था।

लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के लौड़े को चूमते हुए उसका सुपाड़ा अपने मुंह में लिया। प्रतीक इस अनुभव के लिए नया था और जल्द ही लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसका मुंह चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी प्रतीक का लौड़ा मुंह से निकालते हुए अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों के लौड़ों पर बैठ जाती। फिर उठाते हुए हमारे लौड़ों को सुपाड़े तक बाहर निकालते हुए अपने पति का पूरा लौड़ा निगल जाती।

लक्ष्मी आंटी ने इस तरह अपने प्रेमियों को संभालते हुए अपने पति को भी खुश किया। हम दोनों तो अभी झड़े थे पर प्रतीक ने भी शाम को काफी मजे लिए होंगे। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए भी अपनी चुदाई बन्द नहीं होने दी और तकरीबन दस मिनट की सामूहिक चुदाई के बाद विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लावा रस भर दिया।

विक्की अब थक कर चूर हो गया था और बगल में लेट गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर पलट दिया और लक्ष्मी आंटी का बदन ढकते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी। प्रतीक ने मेरे साथ घूमते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह से बाहर निकलने नहीं दिया। मैं लक्ष्मी आंटी की चूची को मुंह में लेकर उसे जोर जोर से लंबा और तेज पेल रहा था तो लक्ष्मी आंटी प्रतीक के लौड़े पर उं. उन्म. कर मेरे प्रशंसा के गीत गा रही थी। मुझसे और रहा नहीं गया और लक्ष्मी आंटी की कोख में मेरा वीर्य छूट गया। प्रतीक ने मानो मेरे इंतजार में खुद को रोक रखा था और उसने मुझे रस से लक्ष्मी आंटी की प्यास बुझा दी।

लक्ष्मी आंटी थक कर चूर हो गई थी और हम सब लेट गए। मेरी आंख लग रही थी कि लक्ष्मी की आह से मेरी नींद खुली। प्रतीक ने पिछले कुछ सालों का हिसाब करने की ठान ली थी और लक्ष्मी मदहोशी में प्रतीक का साथ दे रही थी। मैं मुस्कुराकर दूसरी ओर मुड़ कर सो गया।

मेरे मन में बस एक खयाल आया, "शुक्र है कि प्रतीक को लड़के पसंद नहीं वरना प्रतीक के ऑपरेशन के बाद ये रात खौफनाक हो जाती।
 
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