11
सन्नी
"7 बज गए, चल निकालते हैं। तुझे क्या लगता है, कहां छुपी होगी?"
विक्की "लक्ष्मी आंटी 4 साल से शहर में है लेकिन पहले गांव से आई है। वोह घर में नही छुपेगी। बाहर देखते हैं।"
हमने farmhouse के हिस्से बांट लिए। विक्की ने आगे का हिस्सा और garage ढूंढा तो मैं पीछे सब्ज़ियों के बाग़ और आम की बाग़ ढूंढ़ने लगा। बेचारी लक्ष्मी आंटी, उसे ऐसे पूंछ निकली हुई थी कि वह ना दौड़ पाती और न छुप पाती। मैंने सब्ज़ियों की बाग़ देखी तो वहां छुपने लायक कुछ नहीं था। मै आम के बगीचे में पहुंचा तो मेरे अंदर के शिकारी को मानो गंध मिल गई। पता नहीं क्यों, मै आम के पेड़ के पीछे छिप गया। फिर आंखे बंद कर सुनने लगा। मेरे पीछे सरसराहट हुई तो मैंने कोने में से झांक कर देखा। पेड़ों के बीच में से कुछ रंगीन हिलता नजर आया। मैं छिप कर उसके नजदीक गया और अचानक से सामने खड़ा हो गया।
https://pixbb.com/image/yHVCk
लक्ष्मी आंटी ने मुझे देखा और घास में छिपने की कोशिश करने लगी।
https://pixbb.com/image/yHyGs
मैंने घड़ी में देखा तो 7.15 बजे थे।
"लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि तुम छिपना नहीं चाहती थी। चलो इधर आओ और अपनी इठलाती बलखाती दुम तो दिखाओ। देखूं तो सही, कैसी अदा से लक्ष्मी आंटी की पूंछ निकली हुई है।"
लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ निकली और मुंह बनाया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सामने आकर गोल चक्कर लगाया। अपनी रंगीन पूंछ हिलाकर, आम के पेड़ का सहारा ले कमर में मुड़कर अपनी पूंछ उपर कर दी। मैंने और इंतजार न करते हुए लक्ष्मी आंटी की पूंछ पकड़ कर उसे उठाया।
लक्ष्मी आंटी की आह निकल गई और उसने अपने ऐड़ियों को उठकर गांड़ और उठाई। मैंने पैंट उतार कर ' लोमड़ी मारने की बंदूक ' निकली और लक्ष्मी आंटी ' लोमड़ी ' की गीली गुन्फा की ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
लक्ष्मी आंटी की गांड़ में फंसा butt plug उसकी गीली चूत में से मेरे लौड़े को दबा रहा था। ये एक अलग ही एहसास था जो अजीब पर मजेदार था। लक्ष्मी आंटी ने अब उस पेड़ को लिपट कर पकड़ा था और इसी लिए वो लाचार होकर मेरे लौड़े का मार खा रही थी। मैंने 10 मिनट तक लक्ष्मी आंटी की कुटाई की और फिर उसे पकड़ कर अपनी ओर मोड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को नीचे घास में लिटाया और झड़कर गीले हुए उसकी जांघों को फैलाया। पनियाई चूत के रस से भिगती उस रंगीन पूंछ को पकड़ कर खींच निकाला। 'चपाक' की आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी की पूंछ अलग हुई और मैंने Simon को एक तरफ फेंक दिया। लक्ष्मी आंटी झड़कर घास में फैली पड़ी थी तो मैंने लक्ष्मी आंटी की एडियों को पकड़ कर उन्हें अपने कंधो पर रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ चिर दी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों में घास पकड़ कर अपने शरीर को सहारा देने की कोशिश की मगर मेरी तलवार की वार से उसके हाथ में घास के पत्ते टूट कर आते। लक्ष्मी आंटी अपना सर हिलाकर अपनी गांड़ में पेल कर बन रही काम उत्तेजना को बता रही थी।
हर झटके से लक्ष्मी आंटी के मम्मे हिचकोले खाते उसके शानदार कपड़ों में से अपना प्रदर्शन कर रहे थे। मैंने लक्ष्मी आंटी का टॉप खींच उतार फेंका। उसके दोनों दूधिया गोले पकड़कर अपनी रफ्तार बढ़ा दी। मेरा स्खलन अब नजदीक आ गया तो मैं लक्ष्मी आंटी को पकड़ तेज झटके देने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े से आने वाले रस की धार को अपनी गांड में लेने के लिए मुझे पैरों से जकड़ लिया।
गरम विर्य के फव्वारों ने लक्ष्मी आंटी की गांड भरना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने पलटी मार दी। मेरा पूरा खूंटा अपने अंदर समाकर लक्ष्मी आंटी मुझपर सवार हो बैठी।
थोड़ी देर में मेरा हथियार लक्ष्मी आंटी कि गांड से निकलने को था तभी हमें विक्की की आवाज सुनाई दी।
विक्की "Simon तू इधर है तो लक्ष्मी आंटी किधर चुध रही है? सन्नी!!!"
लक्ष्मी आंटी झटसे उठी और मेरा रस अपनी गांड से टपकाते भाग खड़ी हो गई।
सन्नी
"7 बज गए, चल निकालते हैं। तुझे क्या लगता है, कहां छुपी होगी?"
विक्की "लक्ष्मी आंटी 4 साल से शहर में है लेकिन पहले गांव से आई है। वोह घर में नही छुपेगी। बाहर देखते हैं।"
हमने farmhouse के हिस्से बांट लिए। विक्की ने आगे का हिस्सा और garage ढूंढा तो मैं पीछे सब्ज़ियों के बाग़ और आम की बाग़ ढूंढ़ने लगा। बेचारी लक्ष्मी आंटी, उसे ऐसे पूंछ निकली हुई थी कि वह ना दौड़ पाती और न छुप पाती। मैंने सब्ज़ियों की बाग़ देखी तो वहां छुपने लायक कुछ नहीं था। मै आम के बगीचे में पहुंचा तो मेरे अंदर के शिकारी को मानो गंध मिल गई। पता नहीं क्यों, मै आम के पेड़ के पीछे छिप गया। फिर आंखे बंद कर सुनने लगा। मेरे पीछे सरसराहट हुई तो मैंने कोने में से झांक कर देखा। पेड़ों के बीच में से कुछ रंगीन हिलता नजर आया। मैं छिप कर उसके नजदीक गया और अचानक से सामने खड़ा हो गया।
https://pixbb.com/image/yHVCk
लक्ष्मी आंटी ने मुझे देखा और घास में छिपने की कोशिश करने लगी।
https://pixbb.com/image/yHyGs
मैंने घड़ी में देखा तो 7.15 बजे थे।
"लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि तुम छिपना नहीं चाहती थी। चलो इधर आओ और अपनी इठलाती बलखाती दुम तो दिखाओ। देखूं तो सही, कैसी अदा से लक्ष्मी आंटी की पूंछ निकली हुई है।"
लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ निकली और मुंह बनाया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सामने आकर गोल चक्कर लगाया। अपनी रंगीन पूंछ हिलाकर, आम के पेड़ का सहारा ले कमर में मुड़कर अपनी पूंछ उपर कर दी। मैंने और इंतजार न करते हुए लक्ष्मी आंटी की पूंछ पकड़ कर उसे उठाया।
लक्ष्मी आंटी की आह निकल गई और उसने अपने ऐड़ियों को उठकर गांड़ और उठाई। मैंने पैंट उतार कर ' लोमड़ी मारने की बंदूक ' निकली और लक्ष्मी आंटी ' लोमड़ी ' की गीली गुन्फा की ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
लक्ष्मी आंटी की गांड़ में फंसा butt plug उसकी गीली चूत में से मेरे लौड़े को दबा रहा था। ये एक अलग ही एहसास था जो अजीब पर मजेदार था। लक्ष्मी आंटी ने अब उस पेड़ को लिपट कर पकड़ा था और इसी लिए वो लाचार होकर मेरे लौड़े का मार खा रही थी। मैंने 10 मिनट तक लक्ष्मी आंटी की कुटाई की और फिर उसे पकड़ कर अपनी ओर मोड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को नीचे घास में लिटाया और झड़कर गीले हुए उसकी जांघों को फैलाया। पनियाई चूत के रस से भिगती उस रंगीन पूंछ को पकड़ कर खींच निकाला। 'चपाक' की आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी की पूंछ अलग हुई और मैंने Simon को एक तरफ फेंक दिया। लक्ष्मी आंटी झड़कर घास में फैली पड़ी थी तो मैंने लक्ष्मी आंटी की एडियों को पकड़ कर उन्हें अपने कंधो पर रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ चिर दी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों में घास पकड़ कर अपने शरीर को सहारा देने की कोशिश की मगर मेरी तलवार की वार से उसके हाथ में घास के पत्ते टूट कर आते। लक्ष्मी आंटी अपना सर हिलाकर अपनी गांड़ में पेल कर बन रही काम उत्तेजना को बता रही थी।
हर झटके से लक्ष्मी आंटी के मम्मे हिचकोले खाते उसके शानदार कपड़ों में से अपना प्रदर्शन कर रहे थे। मैंने लक्ष्मी आंटी का टॉप खींच उतार फेंका। उसके दोनों दूधिया गोले पकड़कर अपनी रफ्तार बढ़ा दी। मेरा स्खलन अब नजदीक आ गया तो मैं लक्ष्मी आंटी को पकड़ तेज झटके देने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े से आने वाले रस की धार को अपनी गांड में लेने के लिए मुझे पैरों से जकड़ लिया।
गरम विर्य के फव्वारों ने लक्ष्मी आंटी की गांड भरना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने पलटी मार दी। मेरा पूरा खूंटा अपने अंदर समाकर लक्ष्मी आंटी मुझपर सवार हो बैठी।
थोड़ी देर में मेरा हथियार लक्ष्मी आंटी कि गांड से निकलने को था तभी हमें विक्की की आवाज सुनाई दी।
विक्की "Simon तू इधर है तो लक्ष्मी आंटी किधर चुध रही है? सन्नी!!!"
लक्ष्मी आंटी झटसे उठी और मेरा रस अपनी गांड से टपकाते भाग खड़ी हो गई।