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Adultery बुरी फसी लक्ष्मी आंटी (Completed)

40
विक्की


दो घंटे तक हम सब ने मन लगाकर पढ़ाई की और फिर लक्ष्मी आंटी किचन में खाना गरम करने चली गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांकते हुए पूछा कि खाना कब परोसना है?

हम दोनों ने हाथ मुंह फिर से धोए और लक्ष्मी आंटी को खाना परोसने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने सब के लिए खाना परोसा और हम ने खाना खाते हुए लक्ष्मी आंटी को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।

लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर कहा कि कुछ साल बीच में जाने के कारण थोड़ी देर लग रही है। लक्ष्मी आंटी को डर था कि उसे आज वापस भेज दिया जाएगा और इसलिए उसने दोपहर को ही हमारे लिए खाना बनाया था। कल से वह दोपहर को पढ़ाई करेगी और शाम को हमारे आने के बाद खाना बनाएगी। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई में मदद करने का वादा किया।

खाने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के मना करने पर भी उसे साफ सफाई में हाथ बटाया और काम ख़तम होने पर नहाने चले गए। हम दोनों नहाकर बाहर आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में इंतजार करने को कहा और नहाने चली गई। हम दोनों ने बेडरूम में जा कर बत्तियां बुझा दी और बेसब्री से लक्ष्मी आंटी का इंतजार करने लगे।

बाथरूम में से पानी की आवाज बन्द हो गई और अंधेरे में से एक एक कदम हॉल में आया। हॉल में बत्ती जली और लक्ष्मी आंटी की मोहनी मूर्ति बेडरूम के दरवाजे में नजर आई। लक्ष्मी आंटी के पीछे उजाला था और आगे अंधेरा था। इसलिए हम दोनों को गीले बालों से satin में अर्ध पारदर्शी gown में रती की मोहक छवि नजर आई। लक्ष्मी आंटी ये जानती थी कि हम दोनों पर क्या असर होगा क्योकि वह वहीं खड़ी हो गई।

अब लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहों को फैलकर दरवाजे के दोनों तरफ छुआ और अपने आप को दरवाजे के बीच लाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी गिली जुल्फें चेहरे से पीछे लेते हुए अपने कामुक बदन की झलक दिखाई। लक्ष्मी आंटी ने फिर अपने हाथों से अपने गले पर बने पाशवी प्रणय के निशानों को सहलाते हुए हमें तड़पाया। लक्ष्मी आंटी के हाथ धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उसके मम्मे दबाने लगे। कोई औरत अपने बदन को सहलाते हुए इतना तड़पा सकती है यह बात हमें अब समझ आई। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और नीचे लाते हुए अपने पेट पर satin gown को लगाते हुए अपनी उंगलियों को गाउन के डोर में फंसाया।

लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और गाउन का डोर खुल गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने कंधे गोल घुमाए तो लक्ष्मी आंटी के संगमरमरी बदन से satin के परदे का फिसलना तय था। लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर घुटनों को सीधे रखते हुए नीचे गिर gown उठाया।

अगर 3 घंटे पहले लक्ष्मी आंटी ने राहत नहीं दी होती तो हमारे गोटे फटकर बेड पर हमारा रस फैला चुके होते। हम दोनों मंत्रमुग्ध हो कर रती के यौवन का छलकता प्याला देख रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने अपने satin gown को हॉल के सोफे पर उड़ाया और एक ओर मुड़कर खड़ी हो गई। लक्ष्मी आंटी का एक हाथ उसकी पीठ पर उपर होते हुए satin bra की निचली गांठ को लगा। दो उंगलियों से गांठ को खींच कर छुड़ाने के बाद वह हाथ नीचे गया। दूसरे हाथ ने बालों को कंधों पर लेते हुए गले के पीछे की गांठ खींचकर खोली। उंगलियों से छूटते ही लक्ष्मी आंटी की satin bra नीचे गिर गई।

लक्ष्मी आंटी ने दुबारा झुककर जब अपनी ब्रा उठाई तो उसके जुलते गोलों पर जड़ी बेरीयां साफ नजर आई। लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर पीठ करके ब्रा को गाउन के साथ रख दिया। लक्ष्मी आंटी ने वैसे ही खड़े होकर कमर में थोड़ी झुक गई। लक्ष्मी आंटी के हाथ उसके घुटनों के से उपर उसकी जांघों को सहलाते हुए satin पैंटी कि कमर में लगी गांठों को लगे। दोनों हाथों की दो दो उंगलियों से दोनों ओर के डोर खींच लिए। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि हम दोनों ने बिना बोले एक दूसरे से बात कर ली थी।

दोनों ओर की गांठें खुल गई और satin की वह गीली पैंटी लक्ष्मी आंटी की उंगलियों में झूलने लगी।

लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों तो. आह!!! मां!!!."

मैंने झुकी हुई लक्ष्मी आंटी की रस भरी योनि में अपना लिंग भर दिया और बिना वक्त गंवाए उसकी तेज चुदाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से दरवाजे के दोनों छोर पकड़ कर अपनी चुदाई के लुफ्त उठाने लगी।

मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उन्हें खींच कर लक्ष्मी आंटी को थोड़ा उठाया। लक्ष्मी आंटी के उठने से लक्ष्मी आंटी की चूत में रगड़ते मेरे सुपाड़े की दिशा बदली और लक्ष्मी आंटी के G-spot में झनझनाहट हुई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत में मुझे कस कर पकड़ लिया और रस की फुहार उड़ाते हुए झड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी के डांस से उत्तेजित मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कोख में ठूंस कर झड़ने लगा।

लक्ष्मी आंटी ने दरवाजे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और नीचे घुटनों पर बैठ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाया और बेड की ओर ले गया। लक्ष्मी आंटी थक कर चूर बेड पर पेट ओर जमीन पर पैर रखकर लेट गई। लक्ष्मी आंटी के फैले हुए पैरों के बीच में मेरा रस टपक कर जमीन पर दाग बना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और मेरी ओर देख मुस्कुराई। मैंने लक्ष्मी आंटी के बालों को पीछे कर के अपने होंठों को उसके होठों पर लगाया।

लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने से पीछे ध्यान नहीं दिया। सन्नी ने अपने लौड़े को वेसलीन से पूरा पोत लिया था और उसकी नजर लक्ष्मी आंटी की तंग गली पर थी। लक्ष्मी आंटी ने अपना चुंबन तोड़कर मुझे पूछा,
"सन्नी बाबू? वोह. आह. सन्नी. बाबू!!! अन्ह. हा.."

सन्नी ने अपने भाले की जड़ को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाते हुए उसे अपने प्यार का पूरा नाप दिया। वेसलीन और लक्ष्मी आंटी को इस चुदाई की आदत हो जाने के कारण सन्नी अपना काम पूरा कर पाया था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए तेज धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बड़ी ही आसानी से अब सन्नी के हर धक्के का साथ देना शुरू किया।

सन्नी लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए उसे बता रहा था कि वह उसे कैसे रात भर तड़पाएगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे साथ देते हुए उकसा रही थी कि वह और ज्यादा जोर से और तेज धक्कों से उसे चोदे। लक्ष्मी आंटी के उकसाने के बाद सन्नी के साथ मै भी गरमाने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को बेड पर दबाते हुए उसकी गांड़ कि गहराई में अपना पानी छोड़ दिया और खुद बाहर निकल आया।

लक्ष्मी आंटी अपनी चूत और गांड से गरम वीर्य टपकाते हुए बेड के किनारे पड़ी थी कि सन्नी बेड के सिरहाने बैठ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को खींच कर बेड पर ऐसे लिटाया कि पेट के बल लेटी लक्ष्मी आंटी के मुंह में सन्नी का लंबा चिकना लौड़ा था। मुंह भरा हुआ हो तो बातें नहीं करते इस बात को स्वीकार कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में डुबकी लगाकर आए हुए लौड़े को अच्छे से चूस कर साफ़ करने लगी। खींच कर बेड पर लाते हुए लक्ष्मी आंटी के पैर अब जुड़ जाए थे। उसकी गदराई गांड़ और चिकने बदन ने मुझे बुलाया और मैं खींचा चला गया। लक्ष्मी आंटी के घुटनों के बगल में अपने घुटनों को रख कर मै लक्ष्मी आंटी की पीठ पर लेट गया।

मेरे मूसल का सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ के सुराख पर दब गया तो लक्ष्मी आंटी ने अपना सर उठा कर,
"विक्की बाबू!!" की गुहार लगाई।

क्या लक्ष्मी आंटी चाहती थी कि मैं उसकी गांड़ मारूं या गांड़ नहीं मारूं?

समझदार लोग हमेशा दूसरों के भलाई की बात सोचते हैं। इसलिए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। सन्नी के लौड़े पर अपना मुंह दबाकर चीखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर फैलाने की कोशिश की। मेरे घुटनों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को दबोच लिया था और उसकी वीर्य से लबालब भरी गांड़ को दबाकर पतली बना दिया था। वेसलीन, वीर्य और लक्ष्मी आंटी की अंदरूनी चिकनाहट से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। लक्ष्मी आंटी का सर सन्नी ने अपने लौड़े पर दबा दिया और मुझे देख कर सन्नी ने आंख मारी।

अभी अभी तो मै झड़ा था और लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ को काफी देर चोदना बाकी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ उसी अंदाज में मारते हुए उसे बता रहा था कि उसकी गांड़ मुझे कितना सुख दे रही है। लक्ष्मी आंटी भी कराहकर सन्नी का लंबा लौड़ा चूसते हुए अपनी गांड़ को दबाकर मुझे साथ दे रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहला कर चूमते हुए उसकी गांड़ मारना जारी रखा।

लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए सन्नी का लौड़ा देखना मुझे रास नहीं आ रहा था और शायद यही तकलीफ सन्नी को भी थी।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के मुंह से अपना लौड़ा बाहर निकाला और बगल में लेट कर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से सन्नी का हथियार सहलाते हुए तयार रखा जब मैंने अपने लौड़े के धक्के का जोर बढ़ा दिया। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में अपना रस छोड़ कर मैं लक्ष्मी आंटी के उपर से सरक गया।

इस से पहले कि सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ लेता लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू आप दोनों को सुबह जल्दी उठना चाहिए इस लिए अब आप दोनों सो जाओ। बाकी का खेल कल सुबह खेलेंगे।"

सन्नी ने शिकायद की तो लक्ष्मी आंटी ने उसे पीठ पर लिटाकर उस पर चढ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी थुंक से सन्नी का लौड़ा गीला कर दिया और खुद उसके लौड़े को अपनी योनी मुख पर रगड़ने लगी। कुछ ही पल में सन्नी के लौड़े पर थुंक, वीर्य और स्त्री उत्तेजना का काम रस मल दिया गया। लक्ष्मी आंटी ने अब सन्नी के लौड़े पर अपना वजन रखा और सन्नी के लौड़े ने लक्ष्मी आंटी की गरमी का नाप लिया। सन्नी आराम से लेट कर लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहा था और लक्ष्मी आंटी भी अपनी मर्जी से अपनी ताल पर चुदाने में व्यस्त हो गई थी। लक्ष्मी आंटी झडते हुए चुदा रही थी और चुदाते हुए झड रही थी।

रात के अंधेरे में यौन सुख की किलकारियों के बीच हम सब की कामक्रीड़ा कब खत्म हुई और कब सोए किसी को पता नहीं चला।
 
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सन्नी


कराहने की आवाज़ से मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को अपनी चूत में भर लिया था और वह विक्की कि घुड़सवारी करने में लगी हुई थी। विक्की कि आंखें ऐसी खुली थी कि वह समझ नहीं पा रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ मिलने वाले मज़े सच है या सपना। मैं लक्ष्मी आंटी को चूधता देख पूरा तन गया और मैंने बेड़पर खड़े होकर अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से चुदाते हुए मुझे चुसा। हर बार लक्ष्मी आंटी अपनी कमर को उठाती तो वह मेरा लौड़ा गले तक निगल लेती। विक्की को अपने अंदर रखते हुए नीचे बैठ जाती तो लक्ष्मी आंटी के मुंह में मेरा सुपाड़ा बाकी रहता।

विक्की कि नींद उड़ गई और उसने लक्ष्मी आंटी के गोले दबाते हुए उसकी उत्तजना बढ़ाने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के गले को चोदते हुए अपने लौड़े को अच्छे से गीला कर दिया और पीछे हट गया। मेरा लौड़ा हटते ही लक्ष्मी आंटी झुककर विक्की को चूमने लगी।

मैंने लक्ष्मी आंटी के पीछे जाते हुए अपने आप को सही दिशा में बना लिया और ताल पकड़ कर आगे बढ़ा।

"मां. आह. हां. हां. हां.", की चीखों के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरा स्वागत किया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से लिपट कर कमर हिलाकर चुधना चालू रखा। लक्ष्मी आंटी खुद ही अपनी चूत और गांड़ चूधवा रही थी और हम दोनों सुबह के morning wood का सही मज़ा उठा रहे थे।

"हनः. अन्ह. आनः. ऊंह. अम्हह. आह. हन. अन्ह.", करते हुए लक्ष्मी आंटी पूरे जोश में अपनी गांड़ मरवा रही थी। विक्की लक्ष्मी आंटी की चूचियों को दबाने, चूमते और चूसते हुए अपनी बढ़ती बेताबी बता रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के ताल से अपनी ताल बनते हुए उसे और जोर से चोदने लगा।

लक्ष्मी आंटी के इस सरप्राईज से खुश हो कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद हमारे प्रेम रस से लबालब भर दिए। लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच लेटी हुई अपनी कोख और आतों में जमा हमारी गीली गरमी को महसूस करते हुए सुस्ताने लगी। लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहलाकर चूमते हुए मेरा लौड़ा फिर से फूलने लगा और विक्की के लौड़े की बढ़ती सख्ती भी मुझे और लक्ष्मी आंटी को महसूस हुई।

लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर हम दोनों को गिरा दिया और कहा,
"उफ्फ. आप दोनों बाबू तो किसीको अपने प्यार से मारोगे। हटो.!!"

लक्ष्मी आंटी बेड से उठ कर बाहर भागी तो हम दोनों उसके पीछे पीछे हॉल में गए। लक्ष्मी आंटी ने हमें फ्रेश होने को कहा और बोली,
"मैं जानती हूं कि आप दोनों को मेरे दोनों छेद पसंद है पर अगली बारी दोपहर को खाना खाने के बाद। अब चलो तयार हो जाओ तब तक मैं नाश्ता लगा देती हूं।"

लक्ष्मी आंटी ने सिर्फ satin gown को पहना और किचन में चली गई। हम दोनों तयार हो गए और लक्ष्मी आंटी ने परोसा हुआ नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकले। लक्ष्मी आंटी ने किसी माशूका की तरह दरवाजे में हमें चूमकर दोपहर के खेल का वादा करते हुए हमें गले लगाया। मेरी उंगलियों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच में उसकी जांघों को सहलाने पर वहां हमारे रस की धारा को छुआ। लक्ष्मी आंटी को देखते हुए मैंने उसे चाटा तो लक्ष्मी आंटी शर्माकर अंदर भाग गई।

मैं और विक्की हंसते हुए कॉलेज के लिए निकले।
 
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विक्की


"सन्नी, रीटा से बच के रहना। जब वो तुझसे चिपक रही थी तब अमित ने मुझे बताया कि उसके क्लासेस के एक लडके की वह गर्ल फ्रेंड हुआ करती थी। उसे इस्तमाल करके फेंक दिया और यहां वह किसी और को ढूंढ रही है।"

सन्नी ने दरवाजा खोलते हुए कहा, "हां, मैं उसे पहले ही दिन पहचान गया था। वह आदमखोर बाघिन है। पहले बुलाकर खेलेगी और फिर खा कर हड्डियां छोड़ जायेगी।"

अंदर देखा तो लक्ष्मी आंटी की किताबें खुली पड़ी थी और लक्ष्मी आंटी किचन में खाना बनाने में व्यस्त थी। लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारा खयाल रखा था पर हमें रीटा जैसी आदमखोर से भी बचाया था। मन में लगा कि शायद हम सब अब भी उसके सपनों को नजर अंदाज कर रहे हैं। मेरी नजरें देख सन्नी भी मेरा इशारा समझ गया।

लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांक कर देखा और कहा,
"अरे बाबू आप दोनों आ गए! चलो खाना खा लो, अभी गरमा गरम परोस देती हूं।"

हम दोनों ने अपने हाथ मुंह धोकर मेज पर बैठे और लक्ष्मी आंटी को भी अपने साथ खाना खाने के लिए कहा। लक्ष्मी आंटी से बातें करते हुए हमारा मन हलका हो गया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी और मुझे रीटा से दूरी बनाने के लिए कहा। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को कहा कि हम दोनों ने वादा किया था और हम दोनों अपना वादा पूरा करेंगे। खाना खाते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने कहा कि जैसा वक्त मिले वह अपनी पढ़ाई कर रही है। मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को इस बारे में ज्यादा नहीं बोला। लक्ष्मी आंटी के कारण हमारा खाना 15 मिनट में हो गया। हम दोनों ने हाथ धोते हुए कुछ बातें तय की और हॉल में आ गए। लक्ष्मी आंटी शरमाते हुए हॉल में हमारे हमले के इंतजार में थी।

दिल पर पत्थर रख कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हमें कॉलेज के लिए तुरंत जाना होगा। लक्ष्मी आंटी ने सर झुकाकर हां कहा और हम दोनों अपनी बैग उठाकर चल पड़े। बिल्डिंग के नीचे से सन्नी ने मम्मियों ने दिए हुए कार्ड पर छपे नंबर पर फोन किया और उसे मिलने गए।

शाम को कॉलेज से आते हुए हम दोनों को थोड़ी देर लग गई तो लक्ष्मी आंटी बेचैन हो गई। हमारे आते लक्ष्मी आंटी ने देरी की वजह पूछी। जवाब में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक थैली दी। थैली में लक्ष्मी आंटी को दो हलके नीले रंग के टॉप और 2 भुरी पैंट मिली।

"बाबू एक ही रंग के दो जोड़ी क्यों लाए? वैसे भी आप के साथ मैंने काफी अच्छे कपडे लाए हैं। इसकी कोई जरूरत नहीं थी।", लक्ष्मी आंटी ने उन बेजान रंगो को देखते हुए कहा।

"इनकी जरूरत पड़ेगी और उसकी वजह अब भी थैली में है।"

लक्ष्मी आंटी ने थैली को ठीक से देखा तो अंदर से प्लास्टिक का एक कार्ड निकला। लक्ष्मी आंटी कार्ड पर छपे अक्षर पढ़ते हुए जमीन पर बैठ गई। जब लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर हमारी ओर देखा तो उसकी आंखों में आंसू भर आए थे। लक्ष्मी आंटी ने उस कार्ड को अपने सीने से लगा कर हमें खुशी के आसुओं से देखा।

सन्नी बोल पड़ा, "नहीं, हमें कुछ मत कहना। प्रतीक ने तुम्हारे कागजात मम्मियों के पास दिए थे और यहां से जाते हुए सारे इंतजाम मम्मियां कर के गई थी। हम ने बस फॉर्म भरने और कपड़े लाने का काम किया है।"

लक्ष्मी आंटी के गले से अचरज की आवाज निकली, "मैं कॉलेज जाऊंगी। मैं भी पढ़ाई करूंगी। अब ऐसे खड़े मत रहो!!"

लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए हमें गले लगाया और हम दोनों को चूमने लगी।

मैंने लक्ष्मी आंटी को दूर करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, जल्दी से मुंह धो लो। प्रतीक थोड़ी ही देर में कंप्यूटर पर कॉल करेगा। उसे नहीं बताओगी?"

लक्ष्मी आंटी ने जल्दी से अपना चेहरा धोया, हमें चाय बिस्किट देते हुए पढ़ाई करने को कहा और थैली ले कर बेडरूम में भागी। लक्ष्मी आंटी ने कॉलेज के नीले टॉप और भुरी पैंट के uniform में प्रतीक से काफी देर तक बातें की और फिर बड़ी खुशी से रात का खाना बनाने में जुट गई।
 
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विक्की


शाम को लक्ष्मी आंटी बहुत खुश थी और उसने हमें खाना परोसा तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से बात करने के लिए उसे हमारे साथ बिठाया।

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, हम सब ने, मतलब हम दोनों, मम्मियां और प्रतीक ने तुम्हारे कॉलेज के दाखिले का काम किया है पर आगे सब तुम्हें करना होगा। 6 महीने में 12 वी कक्षा की परीक्षा होगी। उसकी पढ़ाई के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। क्या तुम तैयार हो?"

लक्ष्मी आंटी ने निश्चय से कहा, "हां बाबू। मैं अच्छे नंबर ला कर सब को दिखाऊंगी की मैं आप सब के विश्वास के काबिल हूं।"

"लक्ष्मी आंटी, ये आसान नहीं होगा। तुम्हारा कॉलेज हमारे साथ शुरू होता है और हम दोपहर को खाना खाने आएंगे तब तक चलेगा। साथ ही पूरे साल की पढ़ाई 6 महीने में करनी पड़ेगी। घर के काम करके इतना सब कुछ नहीं हो पाएगा।"

अपना सपना हाथों से फिसलता देख लक्ष्मी आंटी उदास हो गई। उसने कहा,
"बाबू आप चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूंगी। मुझे जल्दी उठने की आदत है। मैं सब तयारी करके जाऊंगी। दोपहर के खाने के लिए कोई तकलीफ़ नहीं होगी और शाम का खाना पकाते हुए अपनी पढ़ाई कर लूंगी। मैं कर सकती हूं बाबू। मुझे एक मौका दो।"

लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा तो मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके बाल चूमते हुए कहा,
"अरे बुद्दु, हमारा मतलब ये नहीं है। हम दोनों ने तय किया है कि अब से घर में तुम्हारा काम कम किया जाएगा। सुबह और शाम खाना बनाने की जगह सिर्फ एक बार खाना पकाने का काम किया जाएगा, कपड़े दो दिन में एक बार धोए जाएंगे और बरतन मांजे और बाकी कामों में हम दोनों तुम्हारा हाथ बटाएंगे। कॉलेज की टीचर इसी building में रहती हैं और उनके पास रोज दोपहर को जाकर 2 घंटे पढ़ाई करने से सीखना आसान होगा। प्रतीक ने तुम्हारी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी ली है। हम दोनों बस मदद कर रहे हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी समझदारी दिखाते हुए हमारी मदद कुबूल की और हमें अपने गले लगाकर शुक्रिया कहा। हम सब बिना कुछ कहे बेडरूम में गए और एक दूसरे को नंगा करते हुए हमने अपने प्यार का इजहार किया। हम दोनों के प्यार से खुश होकर लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच में खुशी खुशी सो गई।

सुबह 5 बजे लक्ष्मी आंटी ने उठकर पूरे दिन की तैयारी शुरू कर दी। सुबह 6 बजे तक लक्ष्मी आंटी ने रोटी, सब्जी और नाश्ता बना दिया था और वह अपनी कॉलेज के पहले दिन की तैयारी में जुट गई। हम दोनों फ्रेश होकर हॉल में आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने भी नाश्ता किया। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि उसने हमें अभी तक अपना कॉलेज uniform पहनकर नहीं दिखाया तो लक्ष्मी आंटी किसी चुलबुली लड़की की तरह नया यूनिफॉर्म पहनने के लिए भागी।

लक्ष्मी आंटी हलका नीला टॉप और भुरी पैंट पहन कर बाहर आई तो मेरा गला सूख गया। यह यूनिफॉर्म 16-17 साल की नवयुवतियों के लिए बना था, पकी हुई कहर ढाती औरतों के लिए नहीं। लक्ष्मी आंटी को इन कपड़ों में अपने रूप के असर का कोई अंदाज नहीं था। एक हाथ में किताबों की बैग और दूसरा कमर पर रख कर लक्ष्मी आंटी ने पूछा,
"कैसी लग रही हूं? बिल्कुल किसी कॉलेज गर्ल जैसी?"

सन्नी ने बड़ी मुश्किल से पूछा, "कॉलेज गर्ल ऐसे दिखती है ये पता कैसे चला?"

लक्ष्मी आंटी ने भोले मन से कहा, "हमारे गांव में एक आदमी जीप में थिएटर लाता था। वह फिल्म देखने गांव के सारे मर्द जाते थे। उसके पोस्टर पर ऐसी ही लड़की थी जिसे कॉलेज गर्ल कहते थे।"

"लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि कॉलेज के कुछ नियम हमें समझाने पड़ेंगे।यहां आओ और हमारे सामने खड़ी हो जाओ।"

लक्ष्मी आंटी ने अपनी बैग मेज पर रखी और हमारे सामने खड़ी हो गई।

सन्नी ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, फिल्मों में जो होता है वह असलियत में नहीं होता ना? फिल्म के पोस्टर कि तरह तुमने कपड़े पहने हैं पर फिल्म में क्या है यह पता है?"

लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर ना कहा, "हमारे गांव में औरतें फिल्म नहीं देखती थी। फिल्म में क्या है?"

"शुरुवात कुछ ऐसी है कि लड़की बिल्कुल ऐसे ही कॉलेज जाती है। टॉप के ऊपर से 2 बटन खुले और बाकी टॉप को पैंट में इन कर के। कॉलेज के गेट पर ही लडके उसपर मरने लगते हैं तो लड़कियां जलने लगती हैं। क्लास में मास्टर ने लड़की को एक नजर देख कर ही head master को मिलने भेज देता है। फिर हेड मास्टर (लक्ष्मी आंटी के सोफे पर बैठा कर खुद खड़े होते हुए) लड़की को सोफे पर बैठा कर समझता है कि लड़कियां यूनिफॉर्म ऐसे पहनेंगी तो कॉलेज के नियम का उललघंन होगा।"

सन्नी ने कहा, "क्लास मास्टर भी आ गया और उसने कहा कि यूनिफॉर्म को ठीक से कैसे पहनना चाहिए यह अब हमें बताना होगा। क्लास मास्टर ने."

सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी का मुंह दबाया और हाथ पकड़े। मैंने लक्ष्मी आंटी की टॉप के सारे बटन खोल कर उसकी ब्रा में कैद चूचियों को दबाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पैर पठखते हुए अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की पर दो मर्दों की हवस उस पर भारी पड़ी। मैंने लक्ष्मी आंटी कि पैंट की बटन खोल कर उसकी पैंटी के साथ ही सब कुछ खींच कर उतारा। सन्नी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने सर हिलाकर हां कहा। सन्नी लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन पर लेट गया और मैंने उसकी भी पैंट और अंडरवियर उतार दी।

लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश की पर सन्नी ने तब तक निशाना साधते हुए अपने लौड़े को कॉलेज गर्ल लक्ष्मी की चूत में पेल दिया। लक्ष्मी की चीख को सन्नी के हथेली ने रोक दिया। लक्ष्मी के पैर सन्नी के दोनों ओर बेबस झटक कर उसे दूर करने की विफल कोशिश कर रहे थे।

मैंने उपर होते हुए लक्ष्मी के हाथ पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी को चूमते हुए अपने हाथ को नीचे किया। सन्नी ने लक्ष्मी की चीखों को निगलते हुए उसकी ब्रा खोली और लक्ष्मी के मंम्मों को कस कर पकड़ते हुए उसकी चूत में अपना लौड़ा पेलने लगा। लक्ष्मी ने अपने हाथ छुड़ाने की कई कोशिशें की पर मैंने लक्ष्मी को नहीं छोड़ा।

"बस, बस लक्ष्मी। अब तुम सीख गई ना ऐसे यूनिफॉर्म पहनने से क्या होता है? हम दोनों तो तुम्हारी भलाई के लिए ये सब कर रहे हैं।", कहते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी के मुंह पर हाथ रख दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के कंधे दबाते हुए उठकर उसे चोदने लगा। लक्ष्मी की छटपटाहट अब भी जारी थी जब सन्नी के लौड़े ने तेज धक्के देने शुरू किए। आगे क्या होगा यह पहचानकर लक्ष्मी ने पूरे जोर से बचने की कोशिश की और सन्नी ने लक्ष्मी की कोख में अपना रस उड़ेल दिया।

सन्नी लक्ष्मी पर से उठ गया तो लक्ष्मी का बदन कांप रहा था। लक्ष्मी ने अपने पैरों को साथ लाते हुए अपनी चूचियों को हाथों से ढक दिया। मैंने लक्ष्मी के सर पर चूमते हुए उसके कान में कहा,
"टॉप के बटन बंद रखने से पैंट के बटन की हिफाजत होती है।"

लक्ष्मी ने सर झकाकर हां कहा और अपने कपड़े ढूंढने लगी। लक्ष्मी नीचे पड़ी पैंट को उठाने के लिए झुकी और उसकी गदराई मस्त गांड़ पर मेरी नजर जड़ गई। मैंने झट से अपने लौड़े को अपने हाथों में लिया और लक्ष्मी आंटी की चिकनी चूत में पेल दिया।

"आह. नहीं. रुक जाओ. बस करो.", लक्ष्मी हर ठाप के साथ कह रही थी पर उसे पता चलने से पहले मेरा चिकनाहट में लिपटा लौड़ा उसकी चूत में से बाहर निकल कर अपने सही निशाने पर जा लगा।

"मां!!! आह. अन्ह. हा. नहीं. रुको ना. आह. आः.", लक्ष्मी की आहो ने पूरा कमरा भर दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के साथ बैठते हुए उसके होंठों को चूम कर उसकी आहें दबा दी और एक हाथ उसकी चूत पर रख कर उसे छेड़ने लगा। लक्ष्मी जल्द ही गरम हो कर झडने लगी। मैंने लक्ष्मी की गांड़ मारते हुए उसे कंधे पकड़ कर सीधा कर दिया और सन्नी को लक्ष्मी की चूत में उंगलियां दौड़ाने की सलाह दी। सन्नी ने अपनी उंगलियों को मोड़ कर अंदर डाल दिया और हिलाने लगा। लक्ष्मी की योनी में छुपा G-spot हरकत में आते ही लक्ष्मी तड़पने लगी। लक्ष्मी के रसों की बौछार में सन्नी का हाथ भीग गया और लक्ष्मी के नाखून सन्नी के कंधों में धस गए। लक्ष्मी इस तरह झडने लगी कि मेरा लौड़ा निचोड़ लिया गया। मेरे गरम वीर्य से लक्ष्मी की आतें रंग दी गई और मैं लक्ष्मी को अपने लौड़े पर बिठाकर हांफने लगा।

हालांकि सन्नी रुक गया था पर लक्ष्मी का झडना अब भी रुक रुक कर चल रहा था। आखिर में लक्ष्मी रुक गई और उसने अपने आप को मेरे लौड़े से उठाया।

सन्नी ने पूछा, "लक्ष्मी आंटी, जब मैंने अपना लौड़ा अन्दर डाला तो दर्द हुआ था?"

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होंठों को चूमते हुए कहा, "नहीं तो।"

"फिर इतना चीखी क्यों?"

लक्ष्मी आंटी ने आंख मारी और कहा, "एक कुंवारी कॉलेज गर्ल को दो मर्द लूटेंगे तो वो चीखेगी ना?"

सन्नी ने हंसकर कहा, "बिल्कुल सही।"

लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उठाए और टॉयलेट की ओर निकली। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया और कहा कि वह ऐसे ही कपड़े पहन कर कॉलेज जाए।

लक्ष्मी आंटी ने विरोध में कहा, "पर मेरी पैंटी में आप दोनों का रस उतर आयेगा और पूरा दिन मुझे ऐसे ही रहना होगा।"

जब लक्ष्मी आंटी ने समझ की मैं भी यही चाहता था तो उसने,
"धत् बाबू!" कहकर मेरी बात मान ली और अपने कपड़े ठीक से पहन कर तैयार हो गई।

हम सब सुबह 8 बजे से थोड़ी देर पहले घर से निकले तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से पूछा,
"लक्ष्मी आंटी, आज सुबह के सरप्राईज की तरकीब कब सोची?"

लक्ष्मी आंटी ने शरमाते हुए कहा, "ये तरकीब प्रतीक जी ने कल शाम को मेरा यूनिफॉर्म देख कर बताई थी।"

हम सब हंस पड़े और मैंने देखा की लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती यूनिफॉर्म में छुप नहीं रही थी पर अब लक्ष्मी आंटी सच में कॉलेज गर्ल लग रहा थी न कि कोई पॉर्नस्टार।
 
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सन्नी


शाम को हम दोनों घर लौटे तो लक्ष्मी आंटी को चिंता में बैठा पाया। खोद कर पूछा तो पता चला कि टीचर को उसके हमारे साथ रहने से शक है। हमने लक्ष्मी आंटी को विश्वास दिलाया कि जब तक हम खुद किसी को कुछ बताते नहीं तब तक शक करने से ज्यादा लोग कुछ नहीं कर सकते। वैसे भी मुंबई एक खुले विचारों का शहर है और हमें कोई परेशान नहीं करेगा।

लक्ष्मी आंटी ने हमारे बात पर सोचा और मान गई। रोज की तरह हम दोनों ने फ्रेश होकर नाश्ता किया। लक्ष्मी आंटी भी हमारे साथ पढ़ने लगी और 2 घंटे मन लगाकर पढ़ने के बाद हम सब ने खाना खाया, बरतन मांजे और सोने चले गए।

हमारी एक तय दिनचर्या बनने लगी थी और आम शादीशुदा लोगों की तरह हम भी रहने लगे। अगर आम में दो पति अपनी एक पत्नी को रोज जोड़ी में तीन बार चोदते हो। हमारे दिन बीतते गए और जल्द ही लक्ष्मी आंटी की 12वी की परीक्षा आ गई। लक्ष्मी आंटी काफी चिड़चिड़ी हो गई पर हम दोनों ने उसे संभाला।

दोनों पापा और मम्मी अक्सर मिलने आते और लक्ष्मी आंटी को कोई गलत बरताव या बोल नहीं लगाते। लक्ष्मी आंटी ने 12वी कक्षा की परीक्षा के बाद रुकना ठीक नहीं समझा और सीधे आगे की पढ़ाई में जुट गई। हम दोनों भी engineering exams में गले तक डूबे हुए थे। अक्सर तो हम सब सेक्स को दवाई या नशे की तरह अपने मन को हलका करने के लिए इसतेमाल करने लगे।

Engineering exams पूरे होने के दिन हमें पवन अंकल का कॉल आया। उन्होंने सलाह दी कि गाड़ी एक ही रास्ते पर ज्यादा देर दौड़े तो टूट सकती है इस लिए कभी कभी रास्ता बदलना जरूरी हो जाता है। मैं समझ गया और विक्की से बात कर शाम को लक्ष्मी आंटी को तयार रहने को कहा।

"हम घूमने जा रहे हैं!!"

लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा और वह खुशी खुशी गुनगुनाते हुए घर में गई। हम दोनों भी कॉलेज में अपना इम्तिहान पूरा करने गए तो हमें अभी से खुश लग रहा था।
 
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विक्की


परीक्षा में जाने से पहले ही हमारा मन छुट्टी के बारे में सोच हलका हो गया था और परीक्षा अचानक से बहुत आसान लगी। दोपहर तक सब ख़तम कर के हम लक्ष्मी आंटी से मिलने भागे।

घर पहुंच कर देखा तो लक्ष्मी आंटी ने खाने के साथ और भी कई चीजें बनाई थी। जब हमने लक्ष्मी आंटी से कहा की जहां जाएंगे वहां खाने को मिलेगा तो लक्ष्मी आंटी थोड़ी उदास हो गई। उसने हमारे लिए की हुई तयारी देख मैं समझ गया कि लक्ष्मी आंटी को लगा था कि हम उसे छोड़ कर जा रहे हैं। मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से अपनी बाहों में लेते हुए कहा,

"तुम्हें इतनी आसानी से नहीं छोड़ेंगे लक्ष्मी आंटी। तुम भी तयार हो जाओ। हम सब 1 घंटे में निकल रहे हैं।"

लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर पूछा, "इतनी वक़्त की पाबंदी क्यों? अगर छुट्टी पर जाना है तो ऐसे भागा दौड़ी क्यों?"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चाल पकड़ ली और कहा,
"ये सब तो वहां जाने पर ही समझ जाओगी। बस इतना बताऊंगा कि ज्यादा कपड़े लेने की कोशिश भी मत करना।"

लक्ष्मी आंटी की जिज्ञासा को शांत किए बगैर हम सब गाड़ी में बैठ गए। लक्ष्मी आंटी पीछे की सीट से आगे झांक कर देख रही थी कि हम किस ओर जा रहे हैं।

"सन्नी, याद कर की पिछली बार जब हम सब घूमने निकले थे तो लक्ष्मी आंटी कैसे चुपके से पीछे बैठकर आहें भर रही थी। एक दिन वो था और एक दिन आज है।"

लक्ष्मी आंटी, "आह हा हा!! आप दोनों ने मेरे अंदर जो झुनझुना डाल रखा था उसके बारे में भूल गए? आज भी उस बारे में सोचा तो पसीने छूट जाते हैं।"

"और चूत गीली हो जाती है, ये भी बता दो।"

हंसी मजाक में रास्ता कटने लगा और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से असली सवाल पूछा,
"लक्ष्मी आंटी, तुम्हें अपने गांव की याद नहीं आती?"

लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, वहां कोई अपना बचा हो तो उस बारे में सोच कर मतलब है। किसी दिन अगर बहुत उदास हो गई तो पहाड़ों के बीच से ढलते सूरज को याद कर अपना मन बहला लेती हूं। बाबू शहर में सब मिलता होगा पर सूरज आते और जाते हुए नहीं दिखता।"

हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए उसका ध्यान भटकाया और गाड़ी पुराने मुंबई पुणे हाईवे पर लग गई। शहर को गुजरता देख लक्ष्मी आंटी खुली जमीन और हरियाली को निहारने लगी। बीच बीच में लक्ष्मी आंटी हम दोनों से हमारी मंजिल के बारे में पूछती पर अब वह भी समझ गई थी कि हम Lonavala जा रहे थे।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू पहले बोल दिया होता कि हम Lonavala जा रहे हैं तो कुछ गरम कपड़े लाती। सुना है वहां साल भर सरदी रहती है।"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक अय्याश मुस्कान देते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी हम दोनों तुम्हें अंदर- बाहर आगे - पीछे से हमारी गरमी से भर देंगे।"

लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के कंधे पर हलकी चुटकी लेते हुए कहा, "हट बदमाश!"

तभी मैंने सिग्नल दिया और गाड़ी रास्ते छोड़ कर पुराने घाट को चढ़ने लगी। बुधवार की शाम होने से यहां कोई और नहीं था।

लक्ष्मी आंटी, "बाबू, यहां हम क्यों आए हैं? यहां पर तो दूर दूर तक कोई नहीं है।"

गाड़ी से उतरते हुए मैंने कहा," लक्ष्मी आंटी, यहां पर वेताल का मंदिर है। अगर यहां किसी औरत की बली चढ़ा दी तो हम दोनों को सिद्धि मिलेगी।"

लक्ष्मी आंटी हंस पड़ी, "बाबू ये पट्टी कॉलेज की किसी लड़की को पढ़ना। बली कुंवारियों की दी जाती होगी, तीन पतियों के बीवी की नहीं।"

चलते चलते हम सब उस घाट की चोटी पर पहुंच गए थे। ढलते सूरज ने अपना रंग बदला और सह्याद्रि की पहाड़ श्रृंखला को छूने चला। दूर नीचे गाडियां इस मंत्रमुग्ध करने वाले नजारे से अंजान छोटे छोटे खिलौनों की तरह दौड़ रही थीं।

मैंने एक चादर फैलाई और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी ने बनाई खाने की चीजें लाई। हम सब चुप रह कर ढलता सूरज देख रहे थे। इस अनुभव में शब्द बेकार ही नहीं बल्कि बोझ थे। सूरज जमीन के पीछे छिपने लगा तो लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में लेते हुए बहती आंखों से सूरज की आखरी किरणों को देखा। हम दोनों जानते थे की लक्ष्मी आंटी के इस आलिंगन में दोस्ती और ममता के अलावा और कुछ नहीं था। हमने भी अच्छे दोस्त की तरह लक्ष्मी आंटी का साथ दिया।

सूरज ढलते ही अंधेरा छा गया और हम सब गाड़ी में बैठ गए।

लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, मैं नहीं बता सकती की इतने सालों बाद ये देख कर कैसा लग रहा है पर यह किसी भी तोहफे से कीमती तोहफा दिया है आप दोनों ने।"

सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी, अब जब हम दोनों को तुमने इतना पूजनीय बना दिया है तो शायद हमें अपनी हवस का शिकार किसी और को बनाना पड़ेगा।"

गाड़ी में माहौल अचानक हलका हो गया जब लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर सन्नी के कान को खींचकर उसके गाल को चूम लिया। हाईवे पर लगने से पहले एक छोटा पर अच्छा होटल दिखा और हमने यहां रात गुजारना ठीक समझा।

बुधवार शाम को यहां कोई रहता नहीं और सारे कमरे खाली होते हैं। होटल मैनेजर ने कमरे का भाड़ा 1500 कहा तो मैंने लोक लाज के खातिर 2 कमरे मांगे। मैनेजर ने कहा कि होटल के नियमों के अनुसार दो मर्द एक कमरे में नहीं रह सकते। 3 कमरे लेने के बारे में सोच रहा था कि लक्ष्मी आंटी बीच में आ गई।

लक्ष्मी आंटी (मैनेजर से), "अजीब बात है! क्या एक मर्द और एक औरत एक साथ रह सकते हैं? शादीशुदा ना हो तो भी? (मैनेजर ने सर हिलाकर हां कहा) क्या एक मर्द और एक औरत के साथ उस कमरे में एक और इंसान रह सकता है? (फिर से हां) क्या दो मर्द एक दूसरे से कुछ करेंगे या एक दूसरे की इज्जत लूटेंगे? चलो हम सब एक ही कमरे में रहेंगे।"

मैंने लक्ष्मी आंटी को समझने की कोशिश करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, अगर यहां."

लक्ष्मी आंटी, "पुलिस आ गई तो क्या होगा? आप दोनों ने पिछले एक साल में मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की तो क्या अब करोगे?"

सच में, पिछले साल में हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कोई जबरदस्ती नहीं की थी। जरूरत ही नहीं थी!

लक्ष्मी आंटी ने आगे कहा, "और क्या? साहब मेमसाब को बताएंगे? उन्होंने ही तो मुझे आप का खयाल रखने की जिम्मेदारी दी है। (मैनेजर से) हम सब एक ही कमरे में रहेंगे। एक चाबी दो और सुबह की चाय और नाश्ता वक़्त पर नहीं मिला तो समझ लेना।"

लक्ष्मी आंटी फिर मुड़ी और गाड़ी की ओर गई। 3 जोड़ी मरदाना आंखों ने उसके ठुमकते पिछवाड़े का दरवाजे तक पीछा किया और एक दूसरे से टकराई।

मैनेजर ने हमारी बेचैन जवानी के अधूरे सपनों पर अपनी नजरों से अफसोस दिखाते एक चाबी सौंपी। मैनेजर,
"रेस्टोरेंट में रात को veg non veg खाना मिलता है और सुबह 6 बजे से नाश्ता मिलेगा।"

हम सब अपना सामान गाड़ी से ले कर कमरे में पहुंचे। कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,
"कैसी रही?"

समझ नहीं आ रहा था कि लक्ष्मी आंटी के पैर पकडूं या उस बेड पर पटख दूं। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को कंधे पर उठाकर बेड पर पटक दिया और .
 
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सन्नी


लक्ष्मी आंटी की चुलबुली जवानी तो खुद कामदेव को बलात्कारी बना देती, मैं तो सिर्फ जवान था। जिस तरह लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारे पैसे बचाए बल्कि रात को दो कमरों के बीच छुपना भी नहीं पड़ेगा।

कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,
"कैसी रही?"

मैंने लक्ष्मी आंटी को सीधे अपनी बाहों में लेते हुए बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने तुरंत अपने हाथ मेरे गले में डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा। लक्ष्मी आंटी के होटों को चूमते ही दिमाग के बाकी हिस्सों ने काम करना बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी नाज़ुक उंगलियों से मेरे बाल पकड़ लिए तो मैंने लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स को खींच कर उतारने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पिछले एक साल में elastic band वाली लेगिंग्स पहनना जरूरी समझा था क्योंकि हम दोनों उसकी कई सलवार के नाड़े तोड़ चुके थे। लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स और पैंटी को नीचे घुटनों तक उतार कर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर को भी अपने घुटनों तक उतारा।

मेरा तपा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की पनियाई बुर से टकराया तो लक्ष्मी आंटी सिहर उठी। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर में एक जोर का धक्का दिया और अपना पूरा झंडा गाड़ दिया।

लक्ष्मी आंटी, "मां. आह. हां. सन्नी बाबू. शैतान. चोदो."

लक्ष्मी आंटी को आज सुबह से चोदा नहीं था और मैं बहुत उतावला हो गया था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधों को पकड़ा और उसके गाल को चूम कर उसके कानों में अपनी खुशी बताते हुए अपनी हवस की आग को बुझाने में जुट गया। लक्ष्मी आंटी भी शायद सुबह से चुदाने के लिए उतावली थी और उसके बाहों ने मुझे जकड़ लिया और वह झडने लगी।

लक्ष्मी आंटी की चूत में बढ़े गरमी, कसाव और रस की अनुभूति ने मुझे चरम सुख के पार कर दिया और अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी की सुनी कोख में भर कर मैं निढाल हो गया।

अब मेरा दिमाग काम करने लगा और मुझे विक्की की याद आई। मै लक्ष्मी आंटी के उपर से हट गया और देखा तो विक्की बगल में sofa bed पर बैठा अपना सामान मल रहा है। मेरे हटते ही विक्की उठा और हमारी ओर बढ़ा।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को लेगिंग्स के साथ पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को बेड से आधा नीचे खींचा। लक्ष्मी आंटी की गीली बुर अब बेड के किनारे पर लग हमारे रस टपका रही थी। मैंने बेड पर ठीक से बैठते हुए विक्की की मुद्रा को देखा।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों में फंसी लेगिंग्स और पैंटी को अपने गले के पीछे फंसाकर उठाया तो लेगिंग्स थोड़ी और उतरी पर साथ ही लक्ष्मी आंटी की गेंद भी बेड से उठ गई।

लक्ष्मी आंटी ने सुस्ताई मादक मुस्कान से विक्की का स्वागत किया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर के छेद पर अपना मोटा लौड़ा रगड़ कर उसके टोपे को मेरे गाढ़े वीर्य से पोत लेते हुए मेरा वीर्य लक्ष्मी आंटी की खुली चूत में फिर से भरा।

लक्ष्मी आंटी की भरी हुई चूत अब ऐसे उठी थी कि वह बिना छलके मेरा वीर्य संजो कर रही थी। विक्की के पंजों ने लक्ष्मी आंटी के गोल मटोल गांड़ के गोलों को कस कर पकड़ लिया और उनके बीच में छिपे हुए छेद को चौड़ा किया। विक्की का इरादा पहचान कर लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"रुक जाओ विक्की बाबू! आप का बहुत मोटा. आ. आह. हा. हा. उन्ह."

विक्की बोल पड़ा, "अरे लक्ष्मी आंटी, सन्नी से चुदा चुदा कर मुझे तडपाने के बाद मैंने आसानी से छोड़ दिया तो मुझ पर शक करना बनता है। अब तक तो समझ लेना चाहिए था कि तेरा दूसरा आशिक हमेशा बेरेहम होता है।"

विक्की ने मेरे वीर्य से चिकना अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ से सुपाड़े की गीली चोंच तक बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी को एक हवस भरी कातिलाना मुस्कान देते हुए विक्की ने लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ एक धक्के में पूरी तरह पेल दी। लक्ष्मी आंटी ने अगर पिछले एक साल में हम दोनों से कुछ सीखा था तो वो था कि जब भी गांड़ मारी जाए तो उसका मज़ा उठाया जाए।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को अपने गले में लटका कर उसकी गांड़ फैला कर मारी। लक्ष्मी आंटी ने भी उसे साथ देते हुए अपनी गांड़ से विक्की के लौड़े को निचोड़ते हुए अपनी लंबी उंगलियों से अपनी चूत पर रखे यौन सुख के मणि को सहलाते हुए अपनी काम ज्योति को भड़काकर विक्की के बदन में आग लगा दी। विक्की बेचारा सुबह से भूका, मेरे कारण पहले से तपा लौड़ा रगड़ बैठा कितनी देर लक्ष्मी आंटी की अनुभवी प्रेम क्रीड़ा को सेहेता?

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को एक गहरे धक्के से पेलते हुए अपनी काम अग्नि समर्पित कर दी। विक्की पीछे सरक कर सोफ़ा बेड पर मेरे बगल में बैठ गया और हम दोनों लक्ष्मी आंटी का अद्भुत रूप निहारते रहे।

लक्ष्मी आंटी के पैर सलवार में बंधे हुए थे पर घुटने फैल कर लक्ष्मी आंटी की खुली चूत और गांड़ में से बहती हमारी गंगा जमुना की धाराओं का संगम होते दिखा रहे थे।

लक्ष्मी आंटी ने उठकर अपने कपड़े उतारे और satin की camisole और शॉर्ट्स पहन कर सोफे पर बैठ गई।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू वो मैनेजर यहां तांक झांक करने के लिए उतावला हो रहा होगा। जल्दी से खाना मंगवा लो और बताती हूं वैसा करो।"

मैनेजर खुद खाना ले आया तब मैं और विक्की बेड पर बैठ कर वीडियो game खेल रहे थे तो लक्ष्मी आंटी सोफ़ा बेड पर बैठ अपना एक पैर बेड के हाथ पर रख पैरों में nail polish लगा रही थी। Camisole में जैसे तैसे सिमटती चूचियां घुटने से दब कर विद्रोह कर बाहर आने की कोशिश कर रही थीं। शॉर्ट्स पहने होने के कारण लक्ष्मी आंटी की मनमोहक काया का बिना अश्लीलता के दर्शन हो रहा था। लक्ष्मी आंटी गाना गुनगुना रही थी,
"aai main to aai nazaro ke
anjane ek jahan se
layi main to layi bahaaro ke
afsaane bhi waha se
na na mujhe chhuna na door rakhna
pari hun main
aye koi meri panaho le jaye ye nazare
dekhe koi meri nigaaho me pahchane ye ishaare
na na mujhe chhuna na door hi rakhna
pari hun main
pari hun main, mujhe na chhuna
pari hun main."

मैनेजर ने हमारे लिए खाना परोसा तो लक्ष्मी आंटी हाथ धोने भागी।

मैनेजर (दबी आवाज में), "मैं समझ सकता हूं कि आप दोनों पर क्या गुजर रही होगी। मैं होता तो नजदीक के बार से शराब ला कर थोड़ी खुद पिता बाकी सब (बाथरूम की ओर देखते हुए) दूसरों को पिलाता। सुबह सर पकड़ कर सब शराब के नाम बोल देता। अफसोस मैं ऐसा करने की सलाह नहीं दे सकता।"

"बात हमारे घर तक की है और इसीलिए हमें ये अफसोस नजाने कब से है।"

मैनेजर अफसोस का भाव चेहरे पर रख चला गया और लक्ष्मी आंटी के बाहर आते ही हम सब कमरे का दरवाजा बंद करके हंसने लगे।
 
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विक्की


खाना खाने के बाद हम ने plates भिजवा दिए और वहीं नीचे टहलने लगे। मैनेजर को आंखे दिखाकर लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में आते हुए हमारे हाथ पकड़ लिए और हम सब बाहर गए।

"लक्ष्मी आंटी, उस मैनेजर को इतना भी मत डांटो। बेचारा अपना काम कर रहा है।"

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों को बड़ी बड़ी बातें समझ आती हैं पर मैं इंसान पहचानती हूं। ये कामिना आप को 3 कमरे लेने पर मजबुर करता और मालिक को 1 कमर दिखाकर बीच में खुद मलाई खाता। अगर मेरे साथ आप दोनों में से एक का नाम लिखवाते, तो जरूर बाद में फोन कर के ब्लैकमेल करने की कोशिश जरूर करता।"

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए कहा, "तो लक्ष्मी आंटी, आज रात को चुप चाप सो जाना पड़ेगा?"

लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा, "बस आप दोनों मुझे इतना तंग मत करना की मेरी चीख निकल आए।"

हम सब ने हंसते हुए वापस होटल को रस्ता पकड़ा। मैंने होटल मैनेजर से बात की और सुबह जल्दी नाश्ता तयार रखने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मेरी बात सुन कर पूछा,
"बाबू, यहां तो छुट्टी पर आए हैं। तो आप को जल्दी क्यों उठना है? सो जाओ 1 दिन आराम से!"

"अरे लक्ष्मी आंटी, कल सुबह से बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है। शाम होने तक पूरा हो जाए तो भी काफी।"

लक्ष्मी आंटी ने झूठे गुस्से में कहा, "आप प्लान मुझ से छुपाकर मुझे परेशान कर रहे हो।" और अपनी कमर मटकाती हुई कमरे में चली गई। तीन जोड़ी मर्दानी आंखें फिर मिली तो सन्नी ने बड़े भारी मन से कहा,
"चल हम भी सो जाते हैं। कल बहुत घूमना है।"

हम दोनों कमरे में दाखिल हुए तो लक्ष्मी आंटी बेड के बीच में सर तक चादर ओढ़े लेटी हुई थी। सन्नी ने दरवाजा बंद करके लॉक किया और बेड कि ओर बढ़ा।

लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकते हुए कहा, "रुको! ये हमारे लिए नया बेड है। इसके साथ अच्छी यादें बनाना हमारा फ़र्ज़ बनता है।"

मुझे शक हुए और मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों पर से चादर को नीचे खींचा।

लक्ष्मी आंटी के बाल तकिए पर फैले हुए थे तो लक्ष्मी आंटी की आंखे शरारत से चमक रही थी। लक्ष्मी आंटी के कंधे खुले थे और उन पर camisole के पट्टे नहीं थे। चादर और नीचे खींचने पर लक्ष्मी आंटी के नंगी चूचियों पर जडी लाल बेरियों के ललचाते दर्शन हुए। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर पर अपना camisole फेंका और अपनी बाहों को खोल कर अपने खूबसूरत बदन को दिखाया। सन्नी ने मेरे हाथ में से चादर को खींच लिया और तेजी से नीचे खींचने लगा। लक्ष्मी आंटी के कसे हुए पेट के बीच में बने नाभि के कुंवे की गहराई साफ झलक रही थी। लक्ष्मी आंटी का बदन चादर के नीचे से खुलता गया और उसकी साफ गुप्तांग को पैरों के बीच दबाकर छुपाया देख हमारी हवस की आग और भड़क उठी। तभी लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैला कर घुटनों को मोड़ते हुए उठाया।

लक्ष्मी आंटी की बुर बुरी तरह से पनिया रही थी और उसके चादर पर टपकते काम उत्तजना के आंसू हमसे देखे नहीं गए। लक्ष्मी आंटी के इस चाल का मतलब समझते हुए हम दोनों ने अपने कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी पर कूद पड़े।

सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, चाहे जो हो जाए पर चिल्लाना मत।"

अपना ही इशारा खुद को मिलने से लक्ष्मी आंटी चौंक गई। सन्नी ने अपने घुटनों को लक्ष्मी आंटी के फैले हाथों पर ऐसे रख दिया कि लक्ष्मी आंटी अपने हाथ बिना किसी तकलीफ के रख सकती थी और कोहनी से मोड़ सकती थी पर हाथ मिटा नहीं पाती। सन्नी का लंबा भाला लक्ष्मी आंटी के होठों को चूम रहा था तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ से सन्नी के सुपाड़े को चाटते हुए अपनी होठों को सुपाड़े के ऊपर लगी खुली त्वचा पर लगाते हुए चूमने लगी। सन्नी ने बेड के सिरहाने को पकड़ बिना आवाज किए लक्ष्मी आंटी के अत्याचार को सहना शुरू किया।

अपने मित्र को बचाने के परम कर्तव्य के कारण मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उसके पैर अपने कंधों पर रख दिए। मेरी नाक में लक्ष्मी आंटी की जवानी की मादक खुशबू चलने लगी तो लक्ष्मी आंटी को अपनी हार का अंदाजा हो गया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे रोकने के लिए अपने पैरों को बन्द करने की कोशिश की पर मेरा सर बीच में पकड़ा गया और वह अपने हाथों से सन्नी को हटाने की कोशिश करने लगी।

सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उसे अपने लौड़े को ज्यादा गहराई तक चूसने से रोका। मैंने अपनी जीभ से थुंकी की एक बूंद को लक्ष्मी आंटी के यौन मणि पर टपका दिया और फिर अपनी जीभ की नोक से उस बूंद को मणि पर मालिश करने के लिए इसतेमाल करने लगा। लक्ष्मी आंटी की बुर में सैलाब उमड़ पड़ा और काम रस की धारा बह उठी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी उत्तेजना को सन्नी के सुपाड़े पर लगाया तो वह बेचारा कराहने लगा। मैंने अपने दोस्त को मिलती यातना को वापस देने की ठान ली और

लक्ष्मी आंटी के यौन मणि ने उत्तेजित हो कर त्वचा से बना अपना घर छोड़ दिया था और बाहर आ कर मेरी जीभ के हमले का सामना कर रहा था। मैंने अपने होठों को उस मणि के इर्द गिर्द बनी त्वचा पर रखते हुए जोर दिया और मणि को ज्यादा बाहर निकाला। अब अपने होटों को उस त्वचा से लगाकर अपनी जीभ से मणि को छेड़ते हुए चूमने लगा।

चूमने से मणि की उत्तेजना बढ़ी और होठों से मणि का पूरा आकार मेरे जीभ की पहुंच में था। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना ऐसे बढ़ी की उसका शरीर कांपने लगा और लक्ष्मी आंटी की चूत में से फव्वारे फुट पड़े। लक्ष्मी आंटी की चीखें सन्नी के सुपाड़े से होती हुई उसके अंडकोष तक पहुंची।

सन्नी बुदबुदाने लगा, "विक्की की गांड़! काले भैंसे की गोबर लगी गांड़! मोटे बूढ़े प्रोफेसर राव की ढीली पतलून!."

सन्नी ने बड़े संयम से अपने स्खलन को रोका और लक्ष्मी आंटी बेड पर बेहोश हो गई। मैंने सन्नी की मदद करते हुए अपनी जगह उसे दे दी। लक्ष्मी आंटी की आज खैर नहीं थी!!
 
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सन्नी


मैंने विक्की के साथ 2 बार जगह बदली और लक्ष्मी आंटी से कभी चुसाया तो कभी चूसकर चाटा। जब दूसरी बार मेरा लौड़ा बड़ी मुश्किल से रोक कर लक्ष्मी आंटी के रसीले होंठों से दूर किया तो और सेह पाना ना मुमकिन था। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में अपना मूसल ढ़क्कन की तरह लगा दिया और मैंने लक्ष्मी आंटी के बाएं मम्मे को दबाते हुए उस पर जड़ी बेरी को अपने होठों में कस कर पकड़ लिया।

लक्ष्मी आंटी चुध चूध कर बेसुध हो गई थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसा तो वह बस "ऊंह!" कर पड़ी रही। मैंने लक्ष्मी आंटी की बहती यौन गंगोत्री को उसके भक्त की चोंच से स्पर्श किया तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया। मेरे सुपाड़े ने बिना किसी तकलीफ के एक साफ धक्के में अपने आप को लक्ष्मी आंटी की गहराई में गाड़ दिया।

लक्ष्मी आंटी, "अंह. हां. आंह. "

मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया और 1 पल के लिए वैसे ही रुक गया। लक्ष्मी आंटी ने सिसकते हुए अपनी कमर उठाते हुए अपनी टांगों से मुझे पकड़ने की कोशिश की।

लक्ष्मी आंटी, "अन्ह. उम्म. उम्. "

मेरे धीरज की हालत धागे से टंगे पर्वत की तरह थी और धागा तो टूटना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली चूत के मज़े लेने के लिए अपने लौड़े को खुली छूट दे दी। लक्ष्मी आंटी के दूधिया गोले मेरे हर धक्के से हिचकोले खा रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी ताकत से विक्की का लौड़ा चूसना शुरू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन कूंवे से उड़ते गरम पानी के फव्वारों की मधुरता में खुद को भुलाकर उससे एक हो गया। लक्ष्मी आंटी अब तेज झड़ते हुए मानो एक बहुत लंबे स्खलन की शिकार हो गई। लक्ष्मी आंटी की झडती चूत में मेरा लौड़ा ऐसे निचोड़ लिया गया कि मैं अपनी एक एक बूंद उसकी कोख में उड़ेलकर ही रुका।

विक्की ने मुझे रुकने के बाद सुस्ताने का मौका नहीं दिया। मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लेते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अंदर मेरी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी को झडने से कोई राहत नहीं मिले यह जैसे विक्की ने ठान लिया था।

विक्की ने लक्ष्मी आंटी की तेज रफ्तार से ठुकाई करते हुए उसकी कोख में मेरा वीर्य पेल कर भर दिया। बचा कुचा जो रस अंदर रह नहीं पाया वह झाग बन कर लक्ष्मी आंटी की गीली चूत की शोभा बढ़ाने लगा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को कस कर पकड़ लिया और अपने लौड़े को जड़ तक घुसा दिया।

लक्ष्मी आंटी की आहें विक्की की आह में मिल गई और दोनों ढेर हो गए। रात के 10 बजने से पहले ही हम सब थक कर चूर होकर एक दूसरे की बाहों में सो गए।
 
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विक्की


मैनेजर ने तय समय पर सुबह 5 बजे फोन कर हमें उठाया। मैंने सन्नी को उठाया पर लक्ष्मी आंटी पहले ही उठ चुकी थी और टॉयलेट की बत्ती जल रही थी।

"नशेड़ी को नशा और लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई से दूर रखना मुश्किल है।"

लक्ष्मी आंटी ने मुस्कुरा कर अपनी कॉपी बन्द करके कहा, "टीचर ने कहा है कि अगर मैं जल्दी से सब सीख लूं तो एक साल में मेरी डिग्री पूरी हो जाएगी। कल रात आप दोनों ने मुझे ऐसे थका दिया कि सुबह जल्दी आंख खुली। मैं आप दोनों को सोने को मिले इस लिए यहां बैठ गई।"

सन्नी ने मुंह धोते हुए कहा, "हमने बताया वैसे लक्ष्मी आंटी ने कोई कपड़े नहीं लिए पर अपनी कॉपी लेना नहीं भूली।"

हम दोनों ने वहीं अपने कपड़े उतारे और शॉवर में नहाने लगे।

लक्ष्मी आंटी, "वो सब छोड़ो। बाबू आप दोनों इतनी जल्दी क्यों उठ गए? अभी तो सूरज भी नहीं उगा!"

"यही सही वक़्त है यहां से निकलने का। मैनेजर ने चाय और नाश्ता तयार किया है। बेड पर तुम्हारे लिए नए कपड़े रखे हैं। जल्दी से निकलना है, तो कपड़े पहन कर नीचे आ जाओ।"

इतना कह कर हम चकराई लक्ष्मी आंटी को छोड़ बाहर आ गए और कपड़े पहन कर बैग भर दी। लक्ष्मी आंटी नहाकर बाहर आने से पहले ही हम सामान गाड़ी में रखने ले जा चुके थे।

लक्ष्मी आंटी ने लाउंज में अपने कदम रखने की खबर हमें मैनेजर के चेहरे से हुई। मैनेजर ने झट से अपने हाथ में से चाय का tray मेज पर रखा और सूखे गले के लिए पानी गटक लिया।

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लक्ष्मी आंटी हमारे पीछे से इठलाते हुए आई और हमें पीछे से एक साथ गले लगते हुए कहा,
"पता नहीं था कि कल रात मैं इतना थक गई थी। ऐसे सोई की अब नींद खुली। मैनेजर साहब आप का होटल मुझे बहुत पसंद आया। आप दोनों ये मत समझो कि मैं गांव से हूं तो गंवार हूं। मैं खूब जानती हूं कि बेड पर क्या बू आ रही थी। अगर मेरे होते हुए ऐसा दोबारा किया तो आप दोनों की शिकायत कर दूंगी।"

हम सब नाश्ता कर के जल्द ही गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी निकल पड़ी। लक्ष्मी आंटी किसी बच्ची की तरह उतावली हो रही थी कि हम सब कहां जा रहे हैं? इतनी जल्दी से क्यों निकले? कब तक पहुंचेंगे? आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी एक गांव की ओर मोडी और गाड़ी खुली जगह पर पार्क की। लक्ष्मी आंटी ने गाड़ी से बाहर दौड़ कर इर्द गिर्द देखा।

लक्ष्मी आंटी, "यहां पर कुछ नहीं दिख रहा! बस ये गांव का मंदिर और वो पहाड़।"

"अगर मैं ये कहूं कि इस मंदिर में मांगी हर बात मिल जाती है तो?"

लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों के हाथ लगने के बाद मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो गई है। और ज्यादा मांग कर लालची क्यों बनूं?"

सन्नी, "हाय लक्ष्मी आंटी! ऐसा कह कर तो तुमने हमें धर्म संकट में डाल दिया! ऐसे इंसान को क्या दें किसके पास सब कुछ है।"

"लक्ष्मी आंटी, कपड़ों से तो समझ गई होगी कि मंदिर नहीं जाने वाले। तो चलो सूरज बढ़ने से पहले पहाड़ चधते हैं।"

पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी और हम सब खेल खेल में चढ़ने लगे। थोड़ी ही देर में लक्ष्मी आंटी ने साबित कर दिया कि वह अब भी किसी पहाड़ी घोड़ी की तरह अपनी लंबी टांगों से कोई भी चढ़ाई पार कर सकती है। लेकिन हम दोनों शहरी अड़ियल टट्टू निकले जो रोज दिन में तीन बार लक्ष्मी आंटी की चढ़ाई कर झंडा गाड़ने के बाद भी आधे रास्ते में हांफने लगे।

लक्ष्मी आंटी, "हा! हा! हा! बड़े आए मुझे चौंकाने वाले! लगता है कि आप दोनों का पासा उल्टा पड़ गया! वैसे ये किला है ना? इसका नाम क्या है? ये इतना सुनसान क्यों है? यहां कोई आता जाता नहीं क्या?"

"हुफ. बताता हूं लक्ष्मी आंटी, बताता हूं। इस किले का नाम लोहगड है और यह एक जाना माना tourist spot है। पर आज गुरुवार की सुबह लोग बहुत कम आयेंगे। शनिवार रविवार को यहां भीड़ होती है। हम लगभग पहुंच गए हैं। उपर बैठ कर बात करते हैं।"

लक्ष्मी आंटी, "जो पहले पहुंचा वो राजा!!"

लक्ष्मी आंटी अपनी लंबी टांगों से सीढियों को पार करते हुए भाग गई।

सन्नी, "तुझे लगता है यहां हमें कोई पकड़ेगा?"

"पता लगाने का एक ही तरीका है। जो पहले पहुंचा वो राजा!!"

हम दोनों लक्ष्मी आंटी के पीछे भागने लगे।
 
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