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सौंदर्या की कमर अजय की छाती से चिपक जाने से सौंदर्या को पहली बाद मर्द की छुवन का एहसास हुआ तो उसके जिस्म के तार झनझना उठे और बोली:"
" निकाल ना भाई, क्या कर रहा है इतनी देर से ?
अजय थोड़ा सा आगे को हुआ और उसकी जांघें अब पूरी तरह से सौंदर्या की टांगो में पीछे से चिपक गई और अजय अब बिल्कुल अपने पंजो पर खड़े होते हुए जितना हो सकता था आगे कि तरफ झुक गया जिससे उसे सौंदर्या की चूचियां पूरी नजर आ रही थी। बस निप्पल ही अंदर कैद थे और पूरी चूचियां बाहर।
अजय ने चूचियों को देखते हुए बालो को खोलना शुरू कर दिया। सौंदर्या के गर्म जिस्म की आंच पाकर उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा जिसका एहसास अब सौंदर्या को हो रहा था। अजय की सांसे तेज हो गई थी और सीधे सौंदर्या की गर्दन पर पड़कर उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी जिससे उसकी सांसे तेज गति से चलने लगी और उसकी चुचियों में कम्पन होने लगा और उसके जिस्म में चिंगारी सी उठने लगी और सौंदर्या मचलते हुए बोली:"
" आह भाई, तुम भी ना बस, एक क्लिप नहीं खुल रही तुमसे, इतने बड़े हो गए हो।
अजय:" दीदी देखो ना कितनी बुरी तरह से आपके बाल फंसे हुए हैं, थोड़ा जोर लगाता हूं तो आपको दर्द होता है।
सौंदर्या:" आह लगा दे जोर, लेकिन थोड़ा ध्यान से करना, कहीं मेरे बाल ही ना फाड़ दो।
अजय ने अपने एक हाथ को सौंदर्या के कंधे पर रखकर उसकी गर्दन को पीछे की तरफ किया तो सौंदर्या अपने पंजों के बल खड़ी हो गई और जिससे उसकी कमर उसकी छाती में घुस सी गई और अजय थोड़ा आगे को हुआ और तेजी से जोर से क्लिप को बाहर खींचा तो उसका पूरी तरह से खड़ा हो चुका लंड सौंदर्या की गांड़ में टकराया।
क्लिप के साथ कुछ बाल भी खींच गए और सौंदर्या को अपने पिछवाड़े में कुछ बहुत सख्त सा टकराता महसूस हुआ और सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल गई। ये आह बालो में हुए दर्द की वजह से कम और पीछे लंड टकराने की वज़ह से ज्यादा निकली थी। झटके की वजह से क्लिप निकल गई लेकिन हाथ से छूट कर वहीं गिर पड़ी छत पर।
सौंदर्या पलटी और उसने थोड़ा नाराजगी से अजय के सीने में कुछ घुस्से जमा दिए और शिकायती लहजे में बोली:"
" अज्जु भाई, पूरे ज़ालिम हो तुम, हर काम ताकत से नही होता, थोड़ा दिमाग भी लगाया करो। आज तो तुम मेरी जान ही निकाल देते। चलो लाओ मेरी क्लिप दो जल्दी।
अजय ने अपने हाथ में देखा तो क्लिप नहीं थीं। सौंदर्या ने उधर उधर देखा तो पाया कि क्लिप वहीं निकल कर गिर गई है तो वो क्लिप झुकाने के लिए जैसे ही नीचे झकी तो उसकी चूचियां काबू से बाहर होकर उछल पड़ी मानो अपनी आजादी चाहती हो।
अजय अपनी बहन के इस कामुक अंदाज को देख कर सम्मोहित सा हो गया और उसकी नजर एक बार फिर से अपनी बहन की चुचियों के उभार पर ठहर गई। सौंदर्या ने क्लिप को पकड़ना चाहा लेकिन छत पर बह रहे पानी के साथ वो थोड़ी आगे पहुंच गई और ठीक अजय के सामने पहुंच गई जिसका लंड अब पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया था। सौंदर्या ने तेजी से आगे होते हुए उसे पकड़ लिया और क्लिप हाथ में लेकर सौंदर्या जैसे ही उपर उठी तो उसका माथा अपने भाई के तम्बू से टकराया और उसके मुंह से फिर से आह निकल पड़ी। लंड पर अपनी बहन का माथा लगते ही अजय की नजरे उसकी चुचियों से हट गई और सौंदर्या ने एक बार खड़ी होते हुए उपर की तरफ देखा तो उसे एहसास हुआ कि उसके माथे पर क्या लगा था तो उसकी आंखे शर्म से झुक गई। हे भगवान उफ्फ ये क्या हो गया।
सौंदर्या तेजी से पलटी और नीचे की तरफ भागती हुई चली गई। वहीं अजय को जैसे कुछ समझ ही नहीं आया। उफ्फ ये मुझसे क्या पाप हो गया, पता नहीं दीदी अब मेरे बारे में क्या सोचेगी।
अजय भी अपनी बहन के पीछे पीछे ही नीचे की तरफ आ गया। नीचे लाइट आ गई थी और सौंदर्या तेजी से चलती हुई अपने कमरे में घुस गई और अपने कपड़े बदलने का सोचने लगी। उसने अपनी अलमारी को खोलना चाहा लेकिन वो नहीं खुल पाई क्योंकि उसका लॉक बुरी तरह से फंस गया था।
सौंदर्या को लगा कि अजय उसकी मदद कर सकता है लेकिन वो अपने भाई की नजरो का सामना कैसे कर पाएगी। छत पर जो हुआ उसके बाद अभी तक उसकी सांसे उखड़ी हुई थी और उसके जिस्म के रोम रोम में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी।
सौंदर्या को जब कोई उपाय समझ नही आया तो उसने बेड के नीचे रखे हुए संदूक से अपने कपड़े निकालने की सोची लेकिन संदूक तो भारी था। मतलब उसे दोनो ही हालत में अजय की मदद लेनी होगी लेकिन अगर अलमारी नहीं खुल पाई तो आज रात के उसके प्लान का क्या होगा क्योंकि डिल्डो तो अलमारी में ही बंद हैं। डिल्डो के बारे में सोचते ही उसके मन में मस्ती भरी तरंगे उठने लगी और वो बिना कुछ समझे बाहर की तरफ आई तो उसकी नजर अजय पर पड़ गई। अजय को देखते ही उसकी हालत फिर से खराब हो गई गर्दन अपने आप शर्म से नीचे झुक गई। लेकिन सौंदर्या शर्मीली जरूर थी पर हिम्मत की कोई कमी नहीं थी। उसने अपनी नजरे नीचे ही रखी और बोली:"
" भाई मेरे सारे कपड़े भीग गए हैं और मम्मी आ गई तो मुझे डांट पड़ेगी। क्या तुम मेरा संदूक निकाल सकते हो ? भारी हैं वो मुझसे बाहर नहीं आ रहा।
अजय अपनी बहन की बात सुनकर थोड़ा अच्छा महसूस किया और बोला:'
" ठीक है दीदी। मैं निकाल देता हूं इसमें कौन सी बड़ी बात हैं।
अजय उसके कमरे में घुस गया और बेड के नीचे रखे हुए संदूक को अपनी तरफ़ खींचने लगा लेकिन संदूक खड़ा हो गया था जिससे पुरा बेड हिल रहा था और सब कुछ उल्टा पुल्टा होने का खतरा था इसलिए सौंदर्या बोली:"
" भाई बस वहीं सीधा कर दो, कहीं बेड ही ना खींच जाए, मैं निकाल लुगी अंदर से ही।
अजय ने अपनी दीदी की बात मानते हुए संदूक को वहीं सीधा कर दिया और खड़ा हो गया तो सौंदर्या नीचे फर्श पर अपने घुटनों के बल झुक गई और अंदर झांकने लगी। सौंदर्या के झुकने से उसकी गांड़ पूरी तरह से उसकी गीली नाइटी में चिपक गई और पूरी तरह से खुल कर बाहर की तरफ उठ गई।
" निकाल ना भाई, क्या कर रहा है इतनी देर से ?
अजय थोड़ा सा आगे को हुआ और उसकी जांघें अब पूरी तरह से सौंदर्या की टांगो में पीछे से चिपक गई और अजय अब बिल्कुल अपने पंजो पर खड़े होते हुए जितना हो सकता था आगे कि तरफ झुक गया जिससे उसे सौंदर्या की चूचियां पूरी नजर आ रही थी। बस निप्पल ही अंदर कैद थे और पूरी चूचियां बाहर।
अजय ने चूचियों को देखते हुए बालो को खोलना शुरू कर दिया। सौंदर्या के गर्म जिस्म की आंच पाकर उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा जिसका एहसास अब सौंदर्या को हो रहा था। अजय की सांसे तेज हो गई थी और सीधे सौंदर्या की गर्दन पर पड़कर उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थी जिससे उसकी सांसे तेज गति से चलने लगी और उसकी चुचियों में कम्पन होने लगा और उसके जिस्म में चिंगारी सी उठने लगी और सौंदर्या मचलते हुए बोली:"
" आह भाई, तुम भी ना बस, एक क्लिप नहीं खुल रही तुमसे, इतने बड़े हो गए हो।
अजय:" दीदी देखो ना कितनी बुरी तरह से आपके बाल फंसे हुए हैं, थोड़ा जोर लगाता हूं तो आपको दर्द होता है।
सौंदर्या:" आह लगा दे जोर, लेकिन थोड़ा ध्यान से करना, कहीं मेरे बाल ही ना फाड़ दो।
अजय ने अपने एक हाथ को सौंदर्या के कंधे पर रखकर उसकी गर्दन को पीछे की तरफ किया तो सौंदर्या अपने पंजों के बल खड़ी हो गई और जिससे उसकी कमर उसकी छाती में घुस सी गई और अजय थोड़ा आगे को हुआ और तेजी से जोर से क्लिप को बाहर खींचा तो उसका पूरी तरह से खड़ा हो चुका लंड सौंदर्या की गांड़ में टकराया।
क्लिप के साथ कुछ बाल भी खींच गए और सौंदर्या को अपने पिछवाड़े में कुछ बहुत सख्त सा टकराता महसूस हुआ और सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल गई। ये आह बालो में हुए दर्द की वजह से कम और पीछे लंड टकराने की वज़ह से ज्यादा निकली थी। झटके की वजह से क्लिप निकल गई लेकिन हाथ से छूट कर वहीं गिर पड़ी छत पर।
सौंदर्या पलटी और उसने थोड़ा नाराजगी से अजय के सीने में कुछ घुस्से जमा दिए और शिकायती लहजे में बोली:"
" अज्जु भाई, पूरे ज़ालिम हो तुम, हर काम ताकत से नही होता, थोड़ा दिमाग भी लगाया करो। आज तो तुम मेरी जान ही निकाल देते। चलो लाओ मेरी क्लिप दो जल्दी।
अजय ने अपने हाथ में देखा तो क्लिप नहीं थीं। सौंदर्या ने उधर उधर देखा तो पाया कि क्लिप वहीं निकल कर गिर गई है तो वो क्लिप झुकाने के लिए जैसे ही नीचे झकी तो उसकी चूचियां काबू से बाहर होकर उछल पड़ी मानो अपनी आजादी चाहती हो।
अजय अपनी बहन के इस कामुक अंदाज को देख कर सम्मोहित सा हो गया और उसकी नजर एक बार फिर से अपनी बहन की चुचियों के उभार पर ठहर गई। सौंदर्या ने क्लिप को पकड़ना चाहा लेकिन छत पर बह रहे पानी के साथ वो थोड़ी आगे पहुंच गई और ठीक अजय के सामने पहुंच गई जिसका लंड अब पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो गया था। सौंदर्या ने तेजी से आगे होते हुए उसे पकड़ लिया और क्लिप हाथ में लेकर सौंदर्या जैसे ही उपर उठी तो उसका माथा अपने भाई के तम्बू से टकराया और उसके मुंह से फिर से आह निकल पड़ी। लंड पर अपनी बहन का माथा लगते ही अजय की नजरे उसकी चुचियों से हट गई और सौंदर्या ने एक बार खड़ी होते हुए उपर की तरफ देखा तो उसे एहसास हुआ कि उसके माथे पर क्या लगा था तो उसकी आंखे शर्म से झुक गई। हे भगवान उफ्फ ये क्या हो गया।
सौंदर्या तेजी से पलटी और नीचे की तरफ भागती हुई चली गई। वहीं अजय को जैसे कुछ समझ ही नहीं आया। उफ्फ ये मुझसे क्या पाप हो गया, पता नहीं दीदी अब मेरे बारे में क्या सोचेगी।
अजय भी अपनी बहन के पीछे पीछे ही नीचे की तरफ आ गया। नीचे लाइट आ गई थी और सौंदर्या तेजी से चलती हुई अपने कमरे में घुस गई और अपने कपड़े बदलने का सोचने लगी। उसने अपनी अलमारी को खोलना चाहा लेकिन वो नहीं खुल पाई क्योंकि उसका लॉक बुरी तरह से फंस गया था।
सौंदर्या को लगा कि अजय उसकी मदद कर सकता है लेकिन वो अपने भाई की नजरो का सामना कैसे कर पाएगी। छत पर जो हुआ उसके बाद अभी तक उसकी सांसे उखड़ी हुई थी और उसके जिस्म के रोम रोम में एक अजीब सी मस्ती छाई हुई थी।
सौंदर्या को जब कोई उपाय समझ नही आया तो उसने बेड के नीचे रखे हुए संदूक से अपने कपड़े निकालने की सोची लेकिन संदूक तो भारी था। मतलब उसे दोनो ही हालत में अजय की मदद लेनी होगी लेकिन अगर अलमारी नहीं खुल पाई तो आज रात के उसके प्लान का क्या होगा क्योंकि डिल्डो तो अलमारी में ही बंद हैं। डिल्डो के बारे में सोचते ही उसके मन में मस्ती भरी तरंगे उठने लगी और वो बिना कुछ समझे बाहर की तरफ आई तो उसकी नजर अजय पर पड़ गई। अजय को देखते ही उसकी हालत फिर से खराब हो गई गर्दन अपने आप शर्म से नीचे झुक गई। लेकिन सौंदर्या शर्मीली जरूर थी पर हिम्मत की कोई कमी नहीं थी। उसने अपनी नजरे नीचे ही रखी और बोली:"
" भाई मेरे सारे कपड़े भीग गए हैं और मम्मी आ गई तो मुझे डांट पड़ेगी। क्या तुम मेरा संदूक निकाल सकते हो ? भारी हैं वो मुझसे बाहर नहीं आ रहा।
अजय अपनी बहन की बात सुनकर थोड़ा अच्छा महसूस किया और बोला:'
" ठीक है दीदी। मैं निकाल देता हूं इसमें कौन सी बड़ी बात हैं।
अजय उसके कमरे में घुस गया और बेड के नीचे रखे हुए संदूक को अपनी तरफ़ खींचने लगा लेकिन संदूक खड़ा हो गया था जिससे पुरा बेड हिल रहा था और सब कुछ उल्टा पुल्टा होने का खतरा था इसलिए सौंदर्या बोली:"
" भाई बस वहीं सीधा कर दो, कहीं बेड ही ना खींच जाए, मैं निकाल लुगी अंदर से ही।
अजय ने अपनी दीदी की बात मानते हुए संदूक को वहीं सीधा कर दिया और खड़ा हो गया तो सौंदर्या नीचे फर्श पर अपने घुटनों के बल झुक गई और अंदर झांकने लगी। सौंदर्या के झुकने से उसकी गांड़ पूरी तरह से उसकी गीली नाइटी में चिपक गई और पूरी तरह से खुल कर बाहर की तरफ उठ गई।