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मांगलिक बहन

अजय अपनी बहन की टांगो के बीच में आ गया और उसकी नाइटी को उपर सरका दिया जिससे उसकी जांघें पूरी तरह से नंगी हो गई और अजय ने आगे बढ़ते हुए सौंदर्या की जांघो पर अपना मुंह टिका दिया और सूघने लगा। सौंदर्या मचल उठी और बोली:"

" आह भाई, बस हट जा, उफ्फ मेरी पेंटी गीली हो गई है, आह। नहीं मान जा मेरे अच्छे भाइं।

अजय ने उसकी जांघो को खोल दिया और जांघों पर लगे चूत रस पर अपनी जीभ फिरा दी और बोला:" आह दीदी ये क्या अच्छी अच्छी खुशबू हैं उफ्फ। आपकी जांघो से भी रस निकल रहा है

सौंदर्या अपनी जांघो पर जीभ फेरते ही मचल उठी और सिसक उठी:" आह भाई, मेरी पेंटी गीली गई है पूरी तरह।

अजय:" हाय दीदी, कितनी ज्यादा गीली होती है आपकी पेंटी, हाय जांघो को भी गीला कर दिया आपकी।

सौंदर्या मस्ती से सिसक उठी और अपनी चूचियों को खुद ही मसलने लगी और बोली:"

" आह भाई बहुत ज्यादा गीली होती है, उफ्फ बिल्कुल गीली,

अजय ने अपनी बहन को अपनी चुचियों को मसलते हुए देखा तो सिसक उठा:"

आह दीदी, उफ्फ गीली हो गई है तभी तो अच्छे से खुशबू आएगी मेरी प्यारी बहना। हाय उतार दूं क्या दीदी आपकी गीली पेंटी?

सौंदर्या ने शर्म के मारे अपनी जांघो को कस लिया और सिसक उठी:" आह भाई नहीं, पेंटी मत उतार देना मेरी, आह नहीं भाई।

अजय का लंड तो फटने के लिए तैयार था और अजय ने धीरे से फिर से अपनी दीदी को जांघो को खोल दिया और उसके घुटनो के उपर अपना हल्का सा वजन टिकाते हुए अपने लंड को उसके घुटनो के बीच में सरका दिया और बोला:"

" आह दीदी नहीं उतारूंगा आपकी पेंटी।

इतना कहते हुए अजय ने अपनी नाक को पेंटी के के पास किया तो सौंदर्या उसकी गर्म गर्म सांसे महसूस करके मचल उठी और उसकी चूत अपने आप उपर की तरफ उठ गई और अजय से नाक से टकरा गई।

अजय:" हाय मेरी सौंदर्या, उफ्फ कितनी तड़प रही है तेरी पेंटी, हाय खुद ही उछल उछल उछल पड़ रही है ।

सौंदर्या अब दीदी से जान बन गई थी और उसने अपने घुटनों का दबाव लंड पर बढ़ा दिया तो अजय ने धीरे से डिल्डो को सौंदर्या की गांड़ के नीचे सरका दिया बिल्कुल उसकी गांड़ के छेद के एकदम नीचे और सौंदर्या के रहा सहा धैर्य भी जवाब दे गया और वो सिसक उठी

" आह भाई, ये क्या कर दिया, उफ्फ आज तो मेरी जान ही ले लेगा, हाय मा मैं पागल हो जाऊंगी ऐसे तो।

अजय ने अपनी नाक को सौंदर्या की पेंटी पर टिका दिया तो उसकी चूत से कुछ बूंदे और छलक उठी मानो उसकी चूत ने अजय का स्वागत किया हो। सौंदर्या की जालीदार पेंटी से रस की बूंदे अजय की नाक में समा गई और अजय ने सौंदर्या की दोनो जांघो को पकड़ कर डिल्डो पर दबा दिया और बोला:'

" हाय दीदी अच्छा ना लग रहा है तो निकाल लू क्या ?

इतना कहते हुए उसने अपने हाथ को डिल्डो की तरफ बढ़ा दिया और सिसक रही सौंदर्या ने बिना कुछ बोले उसका हाथ पकड़ लिया। अजय ने अपनी नाक को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और सौंदर्या का बदन झटके पर झटके खाने लगा। अजय के लंड में तनाव बढ़ता जा रहा था और सौंदर्या उसके लंड को अपने घुटनों के बीच रगड़ सा रही थी।

पागल से हो चुके लालची अजय ने अपनी नाक के साथ साथ जीभ को भी बाहर निकाल लिया और जैसे ही उसने सौंदर्या की जालीदार पेंटी पर अपनी जीभ फिराई तो सौंदर्या के मुंह से एक एक जोरदार सिसकी निकल पड़ी और उसने अपने भाई के सिर को अपनी जांघो के बीच कस लिया और उसकी चूत से निकलती हुई रस की बूंदे अजय के मुंह को भिगोती चली गई। अजय भी ये बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लंड ने अपनी बारिश से अपनी बहन के घुटनो को तर कर दिया।

सौंदर्या की ज़िन्दगी का पहला स्खलन इतना जबरदस्त रहा कि मदहोशी में उसकी चूत के साथ साथ उसकी आंखो से भी खुशी के आंसू छलक उठे।तूफान गुजर जाने के बाद जैसे ही सौंदर्या को होश आया तो उसने अपनी जांघो को ढीला किया तो अजय को कुछ सुकून मिला और लाइट भी आईं मानो सौंदर्या ने लाइट को अपनी जांघो में बंद कर रखा था। लाइट में शर्म की वजह से सौंदर्या की आंखे फिर से बंद हो गई और अजय ने अपनी दीदी के खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में भर लिया और धीरे से बोला:"

" मेरी दीदी से अच्छी संस्कारी और सुशील लड़की दुनिया में दूसरी कोई हो ही नहीं सकती। मुझे आप पर खुद से और उस भगवान से भी ज्यादा यकीन है मेरी प्यारी दीदी।

इतना कहकर अजय ने अपनी दीदी को गले लगा लिया और सौंदर्या भी उससे लिपट गई। अपने भाई का प्यार देखकर उसकी चूत के साथ साथ अब उसकी आंखे भी भर आईं अजय ने अपनी दीदी के आंसू को अपनी जीभ से चाट लिया और सौंदर्या एक बार फिर अपने भाई का प्यार देखकर उससे लिपट पड़ी।

अपनी दीदी से अजय बिना कुछ बोले चुपचापअपने कमरे की तरफ चल पड़ा।

दोनो के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे लेकिन थके होने के कारण दोनो को जल्दी ही नींद आ गई

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अगले दिन सुबह रविवार था इसलिए आज दोनो भाई बहन देर तक सोते रहे।

कमला रोज की तरह सुबह जल्दी ही उठ गई थी और घर के काम काज को खत्म कर दिया और उसके बाद नाश्ते की तैयारी में जुट गई। उसे याद आया कि अभी तक उसके बच्चे तो उठे ही नहीं है तो वो देखने के लिए उपर की तरफ आई ताकि उन्हें उठा सके। सबसे पहले अजय का कमरा पड़ता था इसलिए वो अजय के कमरे में घुस गई। अजय अपने कमरे में सिर्फ अंडर बाहर पहनकर सोया था और उसकी चादर में एक बहुत बड़ा उभार साफ दिख रहा था। ये देखते ही कमला के होंठो पर स्माइल आ गई और समझ गई कि उसका बेटा पूरी तरह से जवान हो गया है क्योंकि ऐसा उभार तो कभी उसने अपने पति की चादर में भी नहीं देखा था। कमला की अपने बेटे को इस हालत में उठाने की हिम्मत नहीं हुई और उसके रूम से बाहर निकल गई।

सौंदर्या के बाद जल्दी ही इसकी भी शादी करनी पड़ेगी ये सोचते हुए वो अपनी बेटी के रूम में घुस गई और सौंदर्या ऐसे ही सोई पड़ी हुई थी। उसकी नाइटी के जांघो तक सरकी हुई थी और चूचियां साफ़ साफ़ अपना आकर दिखा रही थी। कमला को अपने जवानी के दिन याद आ गए कि वो भी अपने जवानी के दिनों में कुछ कुछ ऐसी ही लगती थी लेकिन उसकी बेटी तो उससे भी ज्यादा ही आगे निकल गई है। कमला अपनी बेटी के पास बेड पर बैठ गई और उसे उठाने लगी

" सौंदर्या उठ जाओ बेटी। काफी समय हो गया है।

सौंदर्या अपनी मम्मी की आवाज सुनकर एकदम से उठ गई और उसने अपनी नाइटी की हालत को देखा तो अपनी मा से शर्मा गई और अपनी नाइटी ठीक करने लगी। कमला ये सब देख कर फिर से मुस्कुरा उठी और बोली:"

" इतनी उम्र हो गई है तेरी, थोड़ा ध्यान से सोया कर, अब तो तेरा भाई भी घर लौट आया है। तुझे ऐसी हालत में देखा तो क्या सोचेगा वो ?

सौंदर्या को अपने भाई का नाम सुनते ही उसकी आंखो के आगे रात हुई घटना याद आ गई। उसका मुंह शर्म से लाल हो गया और सारे बदन में सिरहन सी दौड़ गई और उसने अपना सिर अपनी मा की गोद में रख दिया। कमला अपनी बेटी के बालो को सहलाते हुए बोली:"

" चल जल्दी से नहाकर आ जा तब तक मैं नीचे कुछ बना देती हूं तुम दोनो के लिए।

सौंदर्या:"ठीक हैं मम्मी, देखो ना मौसम रात से ही कितना अच्छा हैं बस इसलिए देर तक सो गई। मा भाई उठ गया क्या ?

कमला:" क्या उठा हैं ? सोने में तो वो तुझसे भी चार कदम आगे हैं।

" मा आप और दीदी दोनो मिलकर मेरी बुराई कर रही हो ? देखो मैं तो उठ गया हूं।

अजय की आवाज सुनकर दोनो ने गेट की तरफ देखा जो उनकी बाते सुनकर उठ गया था। अपने बेटे को देखते ही कमला बोली:"

" बुराई नहीं तारीफ कर रही थी अपने बेटे की। सोने में एक्सपर्ट हो तभी तो इतना लेट उठे हो तुम। और तुम्हारी दीदी भी कम नहीं हैं सोने में। रविवार के दिन तो दोपहर से पहले कभी नहीं उठती है बेचारी।

अजय और कमला दोनो हंस पड़े तो सौंदर्या खीज सी गई और अपनी मा से लिपट गई और बोली:'

" मा ये अच्छी बात नहीं है आपकी। मेरी जैसी मेहनती लड़की गांव में कोई दूसरी नहीं मिलेगी आपको। हाँ बता देती हूं आपको।

कमला:" अच्छा चल बहुत बाते हो गई। जाओ जल्दी से दोनो नहा कर आ जाओ। मैं तब तक नाश्ता लगा देती हूं।

इतना कहकर कमला नीचे की तरफ आ गई और अजय अपने कमरे में घुस गया और अपने कपड़े लेकर बाथरूम में का दरवाजा खोला तो उसकी नजर अपनी दीदी की नंगी कमर पड़ी क्योंकि उसने अपने पीठ पर बंधी हुई ब्रा की डोरी को खोल दिया था।
 
दरवाजा खुलने से सौंदर्या एक झटके के साथ हैरानी से पलट गई और उसकी बड़ी बड़ी गोल ठोस चूचियां अजय के सामने एक पल के लिए ही सही लेकिन पूरी तरह से बिल्कुल बेपर्दा हो गई और अजय इससे पहले कुछ बोलता सौंदर्या ने एक झटके के साथ गेट को बंद कर दिया और उसे डांटते हुए बोली:"

" बदतमीज बेशर्म, ये मेरा बाथरूम हैं, भाग यहां से नीचे।

अजय अपनी बहन की चुचियों को देखकर अवाक सा खड़ा रह गया और अब उसकी डांट सुनकर बिना कुछ बोले चुपचाप नीचे की तरफ आ गया और बाथरूम में नहाने के लिए घुस गया। वहीं सौंदर्या को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था कि उसने बाथरूम का बंद क्यों नहीं किया, लेकिन वो तो पहले भी कभी नहीं करती थी लेकिन अब जरूर करना पड़ेगा क्योंकि पहले घर में मर्द नहीं था और अब उसका भाई वापिस लौट आया है।

सौंदर्या ये सब सोचते हुए नहाने में जुट गई और थोड़ी देर बाद ही वो नहाकर एक साडी सुंदर सी साडी पहनकर बाहर आ गई और खाने की टेबल पर बैठ गई जहां अजय और उसकी मम्मी पहले से ही बैठे हुए थे।

कमला:" आओ देवी जी आपका ही इंतजार था बस।

सौंदर्या स्माइल करते हुए खाने लगीं और सभी लोग नाश्ता करने लगे। अजय अपनी बहन की डांट से हल्का सा उदास था लेकिन वो जानता था कि गलती उसकी ही है और अभी तक उसकी आंखो के आगे उसकी बहन की चूचियां घूम रही थी। काश वो उन्हें थोडी देर और देखा पाता। लेकिन अब क्या हो सकता था, कुछ भी नहीं । उसने फिर से अपनी नजर उठाकर अपनी दीदी की चुचियों की तरफ देखा और उसके होंठो पर स्माइल आ गई।

अजय खाते हुए बार बार अपनी गर्दन को इधर उधर घुमा रहा था जिस पर कमला का ध्यान पड़ा तो उसने पूछा :'

" अजय क्या हुए बेटा ? तेरी गर्दन में दर्द हैं क्या ?

अजय:" हाँ मम्मी बहुत दर्द हैं रात से ही, घूम नहीं रही हैं ठीक से मेरी गर्दन।

कमला हल्की सी परेशान होते हुए:" क्या हुआ बेटा तुझे ?

अजय को रात हुआ हादसा याद आया कि किस कदर उसकी दीदी ने उसकी गर्दन को अपनी जांघो में कस लिया था। उसके होंठो पर स्माइल आ गई और बोला:"

" हुआ तो कुछ नहीं है मम्मी, ऐसा लग रहा है जैसे किसी शेरनी ने मेरी गर्दन को जोर से दबोच किया हो , बिल्कुल जोर से कसकर।

अजय ने अपनी मा की नजरे बचाकर अपनी दीदी की तरफ देखा तो उसकी बात का मतलब समझ कर पहले तो सौंदर्या के होंठो पर तीखी सी स्माइल आ गई कि उसका भाई उसे ही शेरनी बोल रहा है और फिर बोली:"

" लेकिन भाई तुम तो अपने कमरे में सो रहे थे, शेरनी कहां से आ गई ? सपना देखा था क्या ?

अजय से पहले ही कमला बोल पड़ी:" ज्यादा सपने मत देखा करो तुम। शेरनी बहुत ज्यादा खतरनाक होती है तुझे कुछ पता भी हैं ?

अजय ने अपनी मम्मी की तरफ देखा और स्माइल करते हुए कहा:"

" ठीक है मम्मी आगे से नहीं देखा देखूंगा, लेकिन रात तो लगता था जैसे भूखी शेरनी से पाला पड़ गया था मेरा।

भूखी शेरनी सुनते ही सौंदर्या के तन बदन में मीठी मीठी टीस सी उठ गई और चुपचाप खाती रही।कमला बोली:"

" बेटा भूखी शेरनी तो और भी ज्यादा खतरनाक होती है, ऐसे सपने मत देखा कर।

अजय:" मम्मी सपने तो सपने होते हैं, उन पर किसी का जोर थोड़े ही चलता है।

सब्जी खत्म हो गई थी तो कमला सब्जी लेने के लिए अंदर रसोई में चली गई तो सौंदर्या अपनी बड़ी बड़ी लाल लाल आंखो से अजय को घूरती हुई बोली:"

"चुपचाप खाना खा ले। आजकल बहुत ज्यादा सपने आ रहे हैं तुझे।

अजय:" दीदी खाना ही तो खा रहा हूं, वैसे ही रात जो हुआ वो किसी हसीन सपने की तरह ही तो था।

तभी कमला आ गई और दोनो चुप चाप अपना खाना खाने में जुट गए।

कमला:" अरे अजय आज राजू अपना नौकर नहीं आयेगा वो शहर किसी काम से गया है। तुम एक काम करना खेत से भैंसो के लिए घास लेते आना।

अजय:" ठीक है मम्मी, मैं चला जाऊंगा, आप फिक्र ना करे।

खाना खत्म हो गया तो सौंदर्या अपने कमला बर्तन और रसोई में साफ सफाई करने में जुट गए और अजय अपने कमरे में आ गया और पिंकी के बारे में सोचने लगा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसके कातिलों का कैसे पता लगाया जाए। जब तब वो नहीं पकड़े जाते उसकी दीदी पर भी खतरा रहेगा।

अजय नीचे आ गया और ट्रैक्टर ट्राली को बाहर निकाला और मम्मी से बोला:"

" मम्मी में खेत में जा रहा हूं घास लेने के लिए, मजदूरों ने अब तक तो घास काट ही दिया होगा।

कमला ने एक पल के लिए सोचा और बोली:" बेटा काट दिया होगा लेकिन हल्की हल्की बारिश हो रही है रात से ही, मौसम खराब हैं, मैं चलती हूं तेरे साथ रुक जरा।

सौंदर्या को बारिश में भीगना बहुत पसंद था और उसे लगा कि ये बहुत सुनहरा मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए इसलिए बोली:"

" मम्मी आप रहने दो। मैं भाई के साथ चली जाती हूं।

कमला:" लेकिन बेटी तुम क्या करोगी वहां ? तुम्हे तो घास का काम भी नहीं आता। और जंगल में जवाब लड़की का बारिश में जाना ठीक नहीं होता।

सौंदर्या:" मम्मी आप चिंता मत कीजिए। भाई हैं ना मेरे साथ। वो सब संभाल लेगा।

इससे पहले की कमला कुछ बोलती सौंदर्या ट्रैक्टर पर बैठ गई और अजय अपनी दीदी को देखते ही खुश हो गया।

कमला:" अरे बेटे इसका ध्यान रखना, ज्यादा मत भीगने देना नहीं तो बीमार पड़ जाएगी ये। अच्छा ले छाता लगा ले ये बड़े वाला। दोनो भीगने से बच जाओगे

अजय ने अपनी मम्मी से छाता लिया और अपनी दीदी को पकड़ा दिया।

अजय:" मम्मी आप फिक्र मत करो। मैं ध्यान रखूंगा और जल्दी ही वापिस आ जाऊंगा।

अजय ने अपनी मम्मी को समझाया और ट्रैक्टर आगे की तरफ बढ़ा दी। सौंदर्या अजय के बराबर में बैठी हुई थी और हल्की हल्की बारिश बाहर पड़ रही थी। सौंदर्या ने छाता खोला तो उसके अंदर की तड़िया एक झटके से टूट गई और बोली:"

" भाई अब क्या करू , छाता तो टूट गया।

अजय:" दीदी अब क्या कर सकती हो, भीगो बारिश में वैसे भी आपको बहुत पसंद है ना भीगना।

सौंदर्या:" पसंद तो हैं भाई, लेकिन छाता टूट गया और उपर से भीग जाऊंगी तो मा मुझे बहुत ज्यादा डांट देगी।

अजय:" कोई बात नहीं दीदी, मैं सब संभाल लूंगा।

सौंदर्या ने कुछ राहत की सांस ली और जल्दी ही ट्रैक्टर गांव से बाहर निकल गया। बारिश की स्पीड अब थोड़ी बढ़ गई थी।

गांव से थोड़ी दूर जाते ही उन्हें मजदूर आते दिखाई दिए और राजू की पत्नी अजय को देखते ही बोली:"

" साहब जी घास काट कर खेत में छोड़ दी हैं, काले काले बादल उमड़ते देखकर हम तो आ गए।

अजय:" कोई बात नहीं है, मैं खुद उठा कर ट्रैक्टर में रख लूंगा। आप आराम से घर जाए।

इतना कहकर अजय ने ट्रैक्टर आगे की तरफ बढ़ा दिया। अजय को लग रहा था कि ऐसे मौसम में खेत में कोई नही होगा इसलिए उसका मन नाचने लगा जिसका असर उसके लंड पर दिख रहा था और उसने अपनी दीदी की तरफ देखते हुए कहा

" दीदी बारिश तेज हो सकती हैं और जंगल में मुझे नहीं लगता कि कोई दूर दूर तक होगा। इसलिए आप एक काम कीजिए इन्हीं मजदूरों के साथ घर चली जाए।

जंगल में दूर दूर तक कोई नहीं होगा ये बात सुनकर एक पल के लिए सौंदर्या सी सिरहन सी छूट गई और फिर अगले ही पल बोली:

" भाई जब कोई नहीं तभी तो तेरे साथ कोई ना कोई जरूर होना चाहिए। मैं तुझे अकेला नहीं छोड़ सकती।

अजय:" मुझसे कोई खतरा नहीं हैं किसी से, वैसे भी एक लड़की को लड़के के साथ ऐसे मौसम में अकेले जंगल में नहीं होना चाहिए।

सौंदर्या ने उसकी तरफ तिरछी नजरों से देखा और बोली:"

" ओए मिस्टर मैं लड़की होने से पहले तेरी बहन हू। और तू जानता है कि मैं किसी से नहीं डरती समझे तुम।

सौंदर्या ने अपनी बात कहते हुए अपना सीना तान दिया जिससे उसकी चूचियां बाहर की ओर तन गई और अजय ने अपनी नजर उन पर टिका कर कहा:"

" हाँ दीदी आपको डरने की क्या जरूरत है, आप तो शेरनी हैं एकदम भूखी शेरनी।

भूखी शेरनी सुनते ही सौंदर्या को वो पल याद आ गया जब उसने अपने भाई का सिर अपनी जांघो के बीच कसकर दबा दिया था। सौंदर्या का चेहरा शर्म से लाल हो गया और अपनी नजरे नीचे झुका ली तो अजय भी अपने ट्रैक्टर पर ध्यान देने लगा।
 
गांव की ईंटों वाली सड़क पर ट्रैक्टर के चलने से झटके लग रहे थे जिससे सौंदर्या का जिस्म हिलने से बार बार सौंदर्या की चूचियां उछल रही थी अजय को नजर बीच बीच में उन पर पड़ रही थी जिसका सीधा असर उसके लंड पर हो रहा था। आंखो के आगे वो दृश्य आ गया जब उसने एक पल के लिए ही सही लेकिन अपनी अपनी बहन की चुचियों को पूरी तरह से बेपर्दा देखा था और सड़क पर बने हुए गड्ढे पर उसका ध्यान नहीं गया और जैसे ही उसमे ट्रैक्टर का पहिया गिरा सौंदर्या के झटके के साथ उसकी गोद में आ गिरी और मुंह से एक दर्द भरी आह निकल गई और इसके साथ ही अजय के होंठो से भी एक कराह निकल पड़ी अजय ने ट्रैक्टर को ब्रेक लगा दिया और सौंदर्या जैसे ही उठने लगी तो उसे एहसास हुआ कि उसने गिरने से बचने के लिए जिस डंडे को हाथ में पकड़ लिया था वो उसके भाई का लंड था जिसके जोर से पकड़ने से उसके भाई के मुंह से आह निकल पड़ी थी। सौंदर्या की सांसे तेजी से चलने लगी और उसने अपने भाई के लंड को छोड़ दिया और फिर से अपनी सीट पर बैठ गई और बोली:"

" भाई ध्यान से चलाओ, अच्छा हुआ तुम्हे मुझे गिरने से बचा लिया। थैंक्स।

अजय अपनी बहन की हालत देखकर मस्ती से भर उठा और बोला:" दीदी मुझे क्यों थैंक्स बोलना, बोलना ही हैं तो उससे बोलिए जिससे पकड़ कर आप गिरने से बची हैं।

अपनी भाई की बात सुनकर सौंदर्या का मुंह शर्म से लाल हो गया और उसने होंठो पर हल्की आ गई तो उसने शर्म और हया के चलते अपने मुंह को दूसरी तरफ घुमा लिया और उसके होंठो पर एक गहरी मुस्कान आ गई।

अजय:" दीदी एक बार मेरी तरफ देखो ना आप, बताओ ना बोलोगी किया थैंक्स ?

सौंदर्या ने अपनी मुस्कान को जैसे तैसे रोका और अजय की तरफ देखकर आंखे निकालते हुए बोली:"

" चुप रह बेशर्म। मार दूंगी तुझे।

अजय अपनी बहन की इस अदा पर मोहित हो गया और उसकी तरफ स्माइल करते हुए बोला:"

" मार दो ना दीदी, भूखी शेरनी से मरने के लिए मैं तो कब से तैयार बैठा हू।

सौंदर्या को समझ नहीं आया कि अपने भाई को क्या जवाब दे, तभी उसकी नज़र सड़क में बने हुए दूसरे गड्डे पर पड़ी और वो चिल्ला उठी

" भाई सड़क में गढ्डा....

इससे पहले कि सौंदर्या आगे बोलती ट्रैक्टर का पहिया गड्ढे में गिर गया और वो फिर से अपने भाई की गोद में जा गिरी। अजय को अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन गलती का इनाम सोचकर खुश हो गया। उसकी बहन फिर से उसकी गोद में आ गिरी थी। लेकिन सौंदर्या सचेत थी इसलिए उसने लंड के बजाय अपने भाई के हाथ को बचने के लिए पकड़ लिया था।

सौंदर्या उठने लगी और उसे डांटते हुए बोली:" बाते तो बड़ी बड़ी करता है तू, ट्रैक्टर चला आराम से कहीं चोट लग गई तो ?

अजय ने सामने सड़क पर नजर डाली और अपनी दीदी का हाथ पकड़ते हुए बोला:"

" दीदी देखो ना सड़क टूटी हुई हैं, और बारिश का पानी भरने से गड्ढे नहीं दिख रहे हैं। आप एक काम करो मेरी गोद में बैठ जाओ, बार बार गिरने से बच जाओगी।

सौंदर्या ने उसकी तरफ एक अदा के साथ देखा और अपनी गर्दन तिरछी करती हुई बोली:"

" तुझे पता भी हैं तू क्या कह रहा है? तू मुझे अपनी सगी बहन को अपनी गोद में बैठाएगा पागल।

अजय:" तो उसमे दिक्कत क्या हैं दीदी? गिरकर चोट लग गई तो दिक्कत होगी ना ?

सौंदर्या को अपने भाई की बात ठीक लगी लेकिन अभी वो इतनी बेशर्म नहीं हुई थी अपने भाई की गोद में बैठ जाए इसलिए बोली:"

" ना बाबा ना, मुझे नहीं बैठना, तुम बस ध्यान से चलाओ। मैं इस बार सीट को अच्छे से पकड़ लूंगी।

इतना कहकर वो उसकी गोद से उठ गई और फिर से सीट पर बैठ गई। बारिश अब तेज हो रही थी, काले काले बादल होने से चारो तरफ हल्का अंधेरा हो गया था और सौंदर्या के कपडे पूरी तरह से भीग गई थी जिससे उसके जिस्म के कटाव फिर से नजर आ रहे थे और अजय अपनी दीदी को ऐसी हालत में देखकर अपनी गोद में बैठाए जाने के लिए मरा जा रहा था इसलिए अपनी टांगो को अच्छे से खोल दिया और जान बूझकर एक तेज झटके के साथ ट्रैक्टर गड्ढे में गिरा और सौंदर्या उसकी गोद में बिल्कुल उसकी जांघो के बीच।
 
सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी और वो फिर से उठने लगी तो अजय ने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला:"

" बस करो दीदी, आराम से मेरी गोद में ही बैठ जाओ। आप बार बार गिर रही हो।

सौंदर्या उठते हुए बोली:" भाई बैठ तो जाऊ लेकिन किसी ने देख लिया तो क्या सोचेगा ? कैसी बेशर्म बहन हैं जो अपने भाई की गोद में सड़क पर ही बैठी हुई है ?

अजय समझ गया कि उसकी बहन उसकी गोद में बैठना तो चाहती है लेकिन डर रही है तो उसने उठती हुई सौंदर्या का हाथ पकड़ कर फिर से अपनी गोद में गिरा दिया और बोला:"

" दीदी ऐसे मौसम में सड़क पर कोई नहीं आएगा, वैसे भी अंधेरा हो रहा है इसलिए दूर से कोई आ भी गया तो दिखेगा नहीं। अभी थोड़ी देर बैठ जाओ फिर घर जाकर चाहो तो पूरी रात अपने भाई की गोद में बैठना कोई देखेगा भी नहीं ।

अजय ने रात के लिए भी अपनी बहन को ऑफर दे दिया तो अपनी भाई की बात सुनकर सौंदर्या ने सुकून की सांस ली और अपने आपको उसकी गोद में ढीला छोड़ दिया। अजय की तो चांदी हो गई और आगे ट्रैक्टर बढ़ा दिया। सौंदर्या की जांघो में लंड चुभ रहा था जिससे उसकी सांसे तेज हो गई और उसने जोर से अपने भाई के हाथ को कस कर पकड़ लिया। देखते ही देखते अजय का लन्ड पत्थर की तरह कठोर हो गया लेकिन उसकी बहन की जांघो में दबा पड़ा हुआ था। अजय ने एक बार सौंदर्या को उपर उठने का इशारा किया और सौंदर्या जैसे ही उपर उठी अजय ने अपनी टांगो को अच्छे से खोल दिया और सौंदर्या ठीक उसकी जांघो के बीच बैठ गई तो लंड उसकी गांड़ की दरार में कपड़ों के उपर से ही घुस गया। सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल पड़ी और उसने और जोर से अपनी भाई को कस लिया और अजय अपनी बहन की हालत देखकर मुस्करा दिया और बोला:_

" क्या हुआ दीदी आप ठीक तो हो ?

इतना कहकर उसने लंड को उपर की तरफ जोर दिया तो सौंदर्या के मुंह से एक आह निकल पड़ी और बोली:"

" उफ्फ भाई क्या कर रहा हैं, जल्दी से चलाओ ना ट्रैक्टर जिससे खेत में पहुंच जाए।

अजय:" दीदी तेज चलाने से झटके तेज लगेंगे और गिरने का खतरा होगा।

इतना कहकर अजय ने अपनी लंड का फिर से दबाव डाला तो सौंदर्या ने दूसरे हाथ से अपनी भाई को जांघ को कस लिया और सिसक उठी:"

" लगने दे ना तेज झटके, मैं सब सह लुंगी अपने भाई की गोद में, मेरा भाई मुझे गिरने नहीं देगा इतना तो मुझे यकीन है।

अजय तो अपनी बहन की बात सुनकर पागल सा हो गया और बोला:" दीदी आपका भाई आपको अपनी बांहों से नहीं गिरने देगा। रुको पहले आप अच्छे से बैठ जाओ नहीं तो तेज धक्कों में दिक्कत होगी।

अजय ने जान बूझकर झटके की जगह धक्के शब्द का इस्तेमाल किया तो सौंदर्या को रोम रोम मस्ती से भर उठा। उसे लग रहा था मानो वो अपने भाई की गोद में चुदने के लिए बैठ रही हैं ये सोचकर उसकी चूत में गीलापन आ गया। अजय ने सौंदर्या को उपर की तरफ उठाया और लंड को बिल्कुल रॉकेट की तरह सीधा करते हुए अपनी जांघो को कस लिया और सौंदर्या को सीधे अपने लंड पर टिका दिया। लंड पर बैठते ही सौंदर्या का जिस्म पूरी तरह से कांप उठा क्योंकि लंड उसकी चूत से जा लगा था।

अजय:" दीदी ट्रैक्टर शुरू कर दू क्या ?

सौंदर्या बोल पाने की स्थिति में कहां थी उसने बस अपनी गर्दन को हिला कर अपनी सहमति दे दी। ट्रैक्टर से पहले अजय का लंड चल पड़ा और सौंदर्या हिलने लगी।

ट्रैक्टर अब स्पीड पकड़ चुका था और उससे कहीं ज्यादा स्पीड अजय का लन्ड। अजय के लंड के इशारों पर सौंदर्या तेजी से उछल रही थी जिससे उसकी साड़ी धीरे धीरे अपने आप खिसकती चली गई और अब सिर्फ पेटीकोट में अपने भाई के लंड पर बैठी हुई थी। लंड अब ज्यादा अच्छे से उसकी चूत को छू रहा था जिससे सौंदर्या की सांसे तूफान बन गई थी और उसकी चूचियां ब्लाउस में उछल उछल पड़ रही थी। तभी सड़क में एक मोड़ आया और सौंदर्या अपने भाई पर गिरती चली गई और अजय ने मौके का फायदा उठाते हुए मोड़ की वजह से लंड उसकी चूत पर पूरी लंबाई में रगड़ दिया और सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी।

सौंदर्या की उछलती हुई चूचियों को देखकर अजय मदहोश सा हो गया और धक्के तेज करते हुए बोला:"

" दीदी इतना मत उछलो, आपका सब कुछ उछल उछल पड़ रहा है।

सौंदर्या की जुबान को जैसे लकवा मार गया था। उसके मुंह से आवाज नहीं बस सिसकियां निकल रही थी। उसने एक नजर अपनी चुचियों को देखा और वो समझ गई कि उसका भाई उसकी चूचियों की बात कर रहा है जिससे उसकी हालत हो खराब हो गई। कमीना एक तो इतने तेज धक्के मार कर खुद उछाल रहा है इसलिए उल्टा मुझे ही बोल रहा है। गिरने से बचने के लिए उसने दोनो हाथों से अपने भाई की जांघो को पकड़ लिया और खुद ही मस्ती से अपनी कमर पूरी तरह से उसकी छाती से जोड़ दी।

अजय जानता था कि खेत आने वाला है इसलिए उसने ट्रैक्टर की स्पीड पूरी बढ़ा दी और अपने लंड की पूरी आजादी दे दी जिससे सौंदर्या उसकी गोद में रबड़ की गुड़िया की तरह उछल उछल पड़ रही थी। लंड कभी उसकी जांघो पर, कभी चूत तो कभी गांड़ के छेद पर टकरा रहा था जिससे सौंदर्या मस्ती से आह भर रही थी लेकिन गिरने का डर लग रहा था इसलिए उसने खुद ही अपने भाई का हाथ उठाकर अपने सीने पर रख दिया और अजय ने उसकी दोनो चूचियों को अपने हाथ से कपड़ों के उपर से ही दबा दिया। सौंदर्या का धैर्य जवाब दे गया और उसने खुद ही अपनी गांड़ को उठाकर रगड़ना शुरू किया तो अजय ने जोश में आते हुए नीचे से एक जोरदार झटका मारा जिससे लंड का सुपाड़ा उसकी बहन की पूरी तरह से भीग गई चूत के छेद पर दबाव डालते हुए अंदर की तरफ घुसा और लंड ने पिचकारी मार दी अजय सिसक उठा और अपनी बहन के हाथ को पकड़ कर उसकी जांघो पर ले गया तो वीर्य से सौंदर्या का हाथ पूरा भीग गया और अजय सिसकते हुए बोला:"

" आह दीदी खेत आ गया, उफ्फ देखो कितनी बारिश हो रही है, उफ्फ पानी पानी हो गया है सब कुछ ।

सौंदर्या ने अपने हाथ को अपनी जांघो पर फिराया और लंड को अपने चूत की दीवारों पर महसूस करते हुए तड़प उठी और सिसकी

" आह भाई, देखो ना सारा पानी बाहर ही बह गया है।

अजय ने ट्रैक्टर को रोक दिया और अपनी दीदी को अपनी बांहों में कस लिया। अजय ने देखा कि उसके खेत से मेढ़ तोड़कर पानी बाहर निकल रहा है। सौंदर्या ने भी ये देख लिया और बोली:"

" उठो जल्दी, कहीं मेरे इस खेत से भी पानी सारा पानी बाहर ना निकल जाए।
 
अजय अपनी बात की बात सुनकर तेजी से उठा और ट्रैक्टर से फावड़ा निकाल कर मेढ़ को ठीक किया और उसकी जांघो में देखते हुए बोला:"

" दीदी इस खेत तो क्या मैं तो आपके किसी भी खेत से पानी बाहर ना निकलने दू।

सौंदर्या ने फावड़े के लड़की के हत्थे को देखा तो उसे लगा कि उससे भाई का लंड भी ऐसा ही ज्यादा मोटा और लम्बा होगा। उसका जिस्म पूरी तरह से दहक रहा था।

अजय ने फावड़े को एक तरफ रख दिया और खेत में पड़ी हुई घास को उठा उठा कर ट्रैक्टर में रखने लगा। बारिश के कारण भीग चुकी अपनी शर्ट को उसने उतार दिया और उसकी चौड़ी छाती देख कर सौंदर्या फिर से उसकी ओर देखने लगी।

सौंदर्या को अपनी जांघो में गीलापन महसूस हुआ तो उसने अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर देखा तो उसके हाथ में उसके भाई का वीर्य लग गया जिसे देखते ही सौंदर्या के जिस्म में तेज सनसनाहट सी दौड़ गई और उसने तेज हो गई बारिश में उसने अपने पेटीकोट को धोने की सोची और थोड़ा सा पीछे की तरफ जाते हुए एक पेड़ के पीछे खड़ी हो गई और दोनो हाथ फैला कर बारिश का मजा लेने लगी। अजय घास को ट्रैक्टर में रख चुका था और अपनी दीदी को देखा तो वो उसे नहीं मिली तो उसने इधर उधर देखा और पेड़ के पीछे उसे देखने चला आया। सौंदर्या के कपडे भीग चुके थे और उसने अपनी साडी को अपने कंधे पर से हटाने लगी ताकि आराम से अपने पेटीकोट को धो सके। साडी जैसे ही उसके कंधे से हटी तो उसकी लाल रंग की ब्रा में कैद उसकी गीली भीगी हुई ठोस गोल गोल चूचियां बाहर की तरफ उछल पड़ी।

अपनी बहन की गोल गोल पपीते के आकार की चुचियों को ऐसे हिलते हुए देखकर अजय के मुंह से आह निकल पड़ी। उफ्फ क्या माल है उसके बहन। जीती जागती क़यामत हैं। सौंदर्या ने अपनी साडी को एक तरफ किया और अपने पेटीकोट को धोने लगी लेकिन बीच में से ठीक से नहीं धो पा रही थी तो उसने अपनी जांघो को चौड़ा कर लिया ताकि अंदर तक पानी गिर सके। अजय तो पूरी तरह से बेकाबू सा हो उठा और उसने अपने लंड को सहलाना शुरू कर दिया।

सौंदर्या ने अपने भाई के वीर्य को अच्छे से साफ किया और उसकी नजर ब्रा के बंद अपनी चूचियों पर गई तो उसे खुद पर गर्व हुआ। तभी जोर से बिजली कड़की और सौंदर्या बुरी तरह से डर गई और उसकी हालत में अपने भाई की तरफ दौड़ पड़ी। अजय ये सब देखा रहा था और उस पर तो जैसे क़यामत सी टूट पड़ी। सौंदर्या के भागने से उसकी लाल रंग की ब्रा में बंद चूचियां बहुत ही कामुक अंदाज में उछल उछल पड़ रही थी।

अजय अपनी बहन की हालत देखकर उसके सामने आ गया और तेजी से उसकी तरफ दौड़ी और अपने भाई को अपनी चुचियों को उछलते हुए देखकर उसकी सांसे तेज हो गई और तभी फिर से बिजली कड़की तो एक झटके के साथ वो अपने भाई के सीने में घुस सी गई। अजय ने ऐसे अपनी बांहों में कस लिया और सौंदर्या डरते हुए बोली

" उफ्फ ये बिजली भी आज कुछ ज्यादा ही गिर रही हैं जोर जोर से

अजय ने अपनी बहन की कमर को थाम लिया और सहलाते हुए बोला:"

" हाय दीदी तुम से कहीं ज्यादा बिजलियां तो मुझ पर गिर रही हैं। उफ्फ क्या होगा आज मेरा।

सौंदर्या अपनी कमर सहलाने से मचल उठी और बोली:"

" तुम पर कहां से बिजलियां गिर गई भाई ?

अजय ने अपने मुंह को अपनी दीदी के सामने किया और उसके चेहरे को उपर किया और आंखो में देखते हुए बोला

" दीदी आप बिल्कुल क़यामत लग रही हो। आपकी हर एक अदा जानलेवा हैं उस आसमानी बिजली से कहीं ज्यादा।

सौंदर्या के होंठो पर स्माइल आ गई और बोली:"

" भाई मैं कहां से तुम पर बिजलियां गिरा रही हूं। कुछ भी बोल देते हो।

अजय ने बिना कुछ कहे सौंदर्या को अपनी बांहों से आजाद किया और उसे हाथ पकड़ पर तेजी से गोल गोल घुमा दिया जिससे उसकी चूचियां फिर से उछल कर उधर उधर डोल गई और अजय उसकी चूचियों को घूरते हुए बोला:"

" दीदी देखो ना आपकी लाल लाल बिजलियां कैसे मुझ पर गिर रही हैं, बड़ी बड़ी गोल गोल बिजलियां।

सौंदर्या ने अपनी चुचियों की तरफ देखा तो उन्हें लाल रंग की ब्रा में बेलगाम उछलते हुए देखकर समझ गई कि उसका भाई उसकी चूचियों को लाल लाल बिजलियां कह रहा है तो सौंदर्या उसको मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ी और अजय उससे दूर हुआ तो सौंदर्या उसकी तरफ भागी जिससे उसकी चूचियां फिर से अपनी औकात दिखाने लगी। अजय उसे मुड मुड कर देख रहा था और सौंदर्या उसके पीछे अपनी चूचियों को उछालती हुई भाग रही थी।
 
अजय ट्रैक्टर के पास रुक गया और उसकी चूचियों को देखने लगा तो सौंदर्या उसके पास आई और उसके कान पकड़ कर खींचते हुए बोली:"

" बहुत बिगड़ गया है तू। मैं तो तुझे बच्चा समझती थी।

अजय:" आह दीदी मेरा कान छोड़ो, ये बच्चा अब बच्चे पैदा करने लायक हो गया है।

तभी फिर से आसमान में काले काले बादल छा गए और सौंदर्या डरते हुए बोली:"

" भाई शायद बारिश और ज्यादा होगी, घर जाकर तुझे ठीक करती हूं। बहुत बोलता है।

अजय ने भी मौसम के हालात को समझते हुए ट्रैक्टर को चालू कर दिया और जल्दी ही वो अपने घर पहुंच गए। कमला बहुत परेशान थी और उन्हें देखकर राहत की सांस ली।

अजय ने घास को अंदर डाला और तब तक सौंदर्या नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। घास उतारकर अजय भी नहाने के लिए घुस गया और उसके बाद दोनो भाई बहन ने अपनी मा के साथ खाना खाया।

बारिश में ज्यादा भीगने के कारण दोनो का शरीर अकड़ गया था इसलिए बिस्तर पर लेटते ही दोनो नींद के आगोश में चले गए जबकि कमला अपने घर के काम खत्म करने में जुट गई।

शाम को सौंदर्या की आंख खुली और वो अपनी मम्मी के साथ घर के काम में जुट गई तो उसे देखते ही कमला बोली:"

कमला:" उठ गई मेरी प्यारी बेटी, काफी देर तक सोती रही।

सौंदर्या:" हाँ मम्मी, भीग गई थी इसलिए नींद बहुत अच्छी आई मुझे। समय का पता ही नहीं चला।

कमला:" सो ले बेटी जी भरकर, उसके बाद तो अगले हफ्ते आचार्य जी आ रहे हैं तो तेरी कुंडली का दोष दूर होते ही तेरी शादी होते देर नहीं लगेगी। फिर कहां तुझे आराम मिलेगा ससुराल में बेटी !

सौंदर्या अपनी मम्मी की बात सुनकर स्माइल करी और बोली:"

" मैं कहीं नहीं जाऊंगी आपको छोड़कर। शादी के लिए कोई ऐसा लड़का देख लुंगी जो हमारे ही साथ रहे।

कमला:" अरे बेटी मेरे लिए तो शादी हो जाए बस वही बड़ी बात है, घर जमाई कहां मिलते है आजकल ? ।

सौंदर्या:" मिल जाएगा मम्मी, मैं कोशिश करूंगी।

कमला:" अच्छा ठीक है। सभी बन गई है। तुम रोटी बना लो तब तक मैं भैंस का दूध निकाल लेती हूं मौसम भी थोड़ा खराब है आज।

कमला बाल्टी लेकर दूध दुहने चली गई और सौंदर्या रोटी बना रही थी। उसके मन में आज दिन भर हुई घटना घूम रही थी खास तौर से वो ट्रैक्टर वाला दृश्य।

सौंदर्या सोच रही थी कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। ये सब गलत हैं क्योंकि वो मेरा सगा भाई है। तभी उसके मन में दूसरा विचार आया कि सौंदर्या उसके साथ मजा बहुत आ रहा था, टू खुद ही ट्रैक्टर के बहाने उसकी गोद में उछल रही थी। नहीं नहीं ये सब मुझे बंद करना ही होगा, आज नहीं तो कल इसका अंजाम बहुत बुरा हो सकता है।

सौंदर्या ने अपने मन को पक्का किया और रोटी बनाती रही। रोटी बन गई थी और कमला भी दूध लेकर आ गई थी।

रात के करीब आठ बज गए थे और सारा परिवार साथ में खाना खा रहा था।

अजय बार बार अपनी दीदी की तरफ देख रहा था और उससे बाते कर रहा था लेकिन सौंदर्या कोई भाव नहीं दे रही थी जिससे उसका मूड खराब हो रहा था।

कमला:" क्या हुआ बेटा ? कुछ परेशान सा लग रहा है?

अजय के चेहरे के भाव बदल से गए और बोला:"

" नहीं मम्मी, बस बारिश में भीग गया था इसलिए थोड़ा थकान महसूस हो रही है।

कमला:"इतने दिन के बाद खेत का काम किया है तो थकान तो होगी ही बेटा। अरे बेटी एक काम करना, सोने से पहले अजय को एक गर्म ग्लास दूध दे देना। थोड़ा ताकत मिलेगी तो सारी थकान दूर हो जायेगी।

सौंदर्या:" ठीक है मम्मी। मैं दे दूंगी सोने से पहले।

उसके बाद सभी लोग खाना खाकर करीब 10 बजे तक टीवी देखते रहे और फिर कमला को नींद आने लगी तो वो भी सोने के लिए चली गई। अजय को अपनी बात करने का मौका मिल गया और बोला:"

" क्या हुआ दीदी? आप जब से जंगल से आई हो कुछ बदली बदली सी नजर आ रही हो? मुझसे कुछ गलती हुई हैं क्या ?

सौंदर्या:" नहीं भाई ऐसा कुछ नहीं हैं, सब ठीक है।

अजय:" अच्छा दीदी मैं कमरे में जा रहा हूं। नींद आ रही है अगर ही सके तो एक ग्लास दूध दे देना आप मुझे।

इतना कहकर अजय ऊपर अपने कमरे में चला गया। अजय समझ रहा था कि उसकी दीदी शायद अपराध बोध महसूस कर रही है इसलिए उससे बात करनी होगी। लेकिन नीचे उसे अपनी मम्मी का खतरा था इसलिए उपर चला गया ताकि आराम से बात हो सके।

सौंदर्या भी सब समझ रही थी कि अजय ऊपर क्यों गया है और दूध के बहाने वो उसे भी उपर आने के लिए कह गया है। सौंदर्या उसकी चाल समझ गई थी लेकिन अपने भाई को दूध देना जरूरी था।

सौंदर्या ने रसोई से दूध गर्म किया और उपर की तरफ आ गई। अपने दीदी को अपने कमरे में देखकर अजय ने राहत की सांस ली और बोला:"

" आओ दीदी मैं आपका ही इंतजार कर रहा था।

सौंदर्या ने दूध का ग्लास उसकी तरफ किया और बोली:"

" लो तुम जल्दी से ग्लास पकड़ो, मुझे नींद आ रही है।

अजय ने ग्लास लिया और बोला::" दीदी इतनी जल्दी भी क्या हैं सोने की, बैठो थोड़ी देर बाते करते हैं।

सौंदर्या:" नहीं भाई। आज नहीं, मैं थक गई हूं। नींद आ रही है बहुत ज्यादा आज।

इतना कहकर वो बाहर की तरफ चल पड़ी तो अजय की कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या करे। उसने दूध का ग्लास रखा और तेजी से आगे बढ़ कर अपनी बहन का हाथ थाम लिया। सौंदर्या अपना हाथ छुड़ाने लगी लेकिन अजय ने कसकर पकड लिया और बोला:"

" क्या दीदी ? क्यों ऐसे कर रही हो? बताओ तो मुझे ?

सौंदर्या:" अजय मेरा हाथ छोड़ो, मत भूलो कि मैं तुम्हारी बहन हूं। नहीं तो मुंह तोड़ दूंगी तेरा।

सौंदर्या ने गुस्से से कहा तो अजय के होंठो पर स्माइल आ गई और बोला:"

" अच्छा जी, आप अपने लाडले भाई का मुंह तोड़ दोगी ?

सौंदर्या पूरी ताकत से अपना हाथ छुड़ाने लगी लेकिन अजय की मजबूत पकड़ उससे टस से मस भी नहीं हुई तो उसने गुस्से से उसे घूरते हुए कहा:"

" अजय मुझे मजबुर मत कर, आखिरी बार बोल रही हो।

अजय ने अपनी पकड़ को और मजबूत किया तो गुस्से से सौंदर्या की आंखे लाल हुई और जबड़े भींच कर उसने दूसरे हाथ से एक जोरदार थप्पड़ अपने भाई के गाल पर कसकर मार दिया।

अजय की आंखे खुली की खुली रह गई और उसने अपनी बहन का हाथ छोड़ दिया और सौंदर्या एक झटके के साथ पलटी और बाहर की तरफ निकल गई। अजय को समझ नहीं आया कि ये सब क्या हुआ और वो दुखी मन से वहीं अपने बेड पर बैठ गया।

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मनोज अपने सामने बैठे हुए आदमी की बाते बड़े गौर से सब सुन रहा था और उसके चेहरे पर ज़हरीली मुस्कान नाच रही थी।

मनोज:" मैं कैसे तुम्हारी बात का यकीन मान लु? साबित करो वरना अगर झूठ निकला तो समझो तुम्हारी कहानी खत्म।

आदमी:" मालिक सच बोल रहा हूं, रुको आपको सबूत दिखाता हूं

इतना कहकर उस आदमी ने वो सबूत उसके सामने कर दिया तो मनोज की आंखे चमक उठी। उसे यकीन हो गया कि वो सोच बोल रहा था।

मनोज:" बहुत ही बढ़िया। मजा आ गया भाई। इस काम के लिए इतने दिन से परेशान था मै और तूने तो एकदम से मेरी सारी दिक्कत दूर कर दी। आज से तू मेरा खास आदमी बनकर रहेगा और पैसा भी ज्यादा मिलेगा।

आदमी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और बाहर की तरफ निकल गया। मनोज ने शेरा को फोन करके सारी बाते बता दी और दोनो आगे का प्लान करने लगे। दोनो जानते थे उन्हें क्या करना है।

वहीं दूसरी तरफ अजय और सौंदर्या दोनो पूरी रात अपने अपने बिस्तर पर करवटें बदलते रहे। अजय को अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि उसे अपनी दीदी के साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी।

वहीं सौंदर्या सोच रही थी कि ये सब उसकी वजह से ही हुआ हैं। ना मैं डिल्डो के चक्कर में पड़ती और ना ही आज ये दिन देखना पड़ता। अजय को मैंने ही बढ़ावा दिया है लेकिन उसे भी समझना चाहिए कि ये सब ठीक नहीं हैं इसलिए ये सब बंद करना जरूरी हैं। उसे बुरा लगा होगा लेकिन ये होना बहुत जरूरी था। अब मैं आगे उससे दूरी बनाकर रखूंगी।

ये ही सब सोचते सोचते वो सो गई। अजय ने भी थक हर कर अपनी सोच को विराम दिया और सोने का फैसला किया।

वहीं दूसरी तरफ अमेरिका में शादाब अपनी अम्मी के साथ मजे से रह रहा था क्योंकि उसे एक अच्छा खासा पैसा स्कॉलरशिप के रूप में मिल था। वैसे की तो वैसे भी कोई कमी नहीं थी क्योंकि जमीन बेचकर और ठेके पर देकर उसने अच्छा पैसा बचा लिया था। उन्हें गए हुए करीब छह महीने हो गए थे और दोनो की ज़िन्दगी खुशियों से भरी हुई थी।

वहां के माहौल का शहनाज़ पर बहुत गहरा असर पड़ा और उसकी सोच और कपडे पहनने का तरीका सब बिल्कुल बदल गया। घर से बाहर कदम रखते हुए डरने वाली शहनाज़ अपने बेटे के साथ काफी घूम चुकी थी और उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि अब तो अकेले ही घूम लेती थी। पहले अपने शरीर की उंगलियां तक ढक कर रखने वाली शहनाज़ अब शॉर्ट स्कर्ट और टॉप पहनकर अपने बेटे की बांहों में बांहे डालकर खुलेआम सड़को पर अपने कातिल हुस्न और कामुक अदाओं का जलवा बिखेर रही थी।

शादाब ने उसके बालो को अच्छे से कट कराया और शहनाज ने जिम भी ज्वाइन कर लिया था। उसने अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत करी और जल्दी ही उसकी मेहनत रंग लाई। उसका पहले से ही भारी फिगर अब क़यामत बन चुका था। जिम के कारण उसके पेट पर जो थोड़ी सी चर्बी थी अब खींच कर उसके सीने पर आ गई थी जिससे उसकी पहले से ही टाइट चूचियां अब पूरी ठोस हो गई थी और निप्पल पूरी तरह से कस गए थे। शहनाज़ की कमर अब लचक खाने लगी थी और पहले से बहुत ज्यादा पतली हो गई थी। उसकी गांड़ के तो कहने ही क्या, बिल्कुल गोल गोल नितम्ब, चौड़े पहले से ज्यादा फैले हुए लेकिन लटकन का नामो निशान तक नहीं। शादाब ने शहनाज़ पर खुलकर पैसा खर्च किया और उसकी पूरी तरह से काया पलट हो गई थी।

उसका फिगर 39:29:42 हो गया था। शहनाज़ अब 27 या 28 साल की लगती थी। कोई भी देखकर नहीं कह सकता है कि वो शादाब की अम्मी हैं। दोनो गोरे चिट्टे, लगता था जैसे दोनो एक दूसरे के लिए ही बने हुए है।

शहनाज़ की दोनो फोटो उसके जिस्म और उसकी सोच में बदलाव दिखाते हुए।।

शहनाज़ पहले ऐसी दिखती थी।

शहनाज़ अपने बेटे से शादी के बाद कुछ ऐसी दिखती हैं।

शहनाज़ और शादाब दोनो एक साथ की बांहों में लेते हुए थे और शादाब बोला:"

" अम्मी क्यों इतना ज़ुल्म कर रही हो मुझ पर ?

शहनाज़ ने अपने बेटे को स्माइल देते हुए कहा:" बेटा तुम तो जानते ही हो कि मेरे पीरियड चल रहे हैं

शादाब ने शहनाज़ की चुचियों की तरफ हाथ बढ़ाया तो उसने उसका हाथ बीच में ही पकड़ लिया और बोली:"

" नहीं मेरे शादाब। मुझे दिक्कत होगी फिर बेटा। आज और सब्र करो, आप पांचवा दिन हैं। ब्लड बस रुक सा गया है।

शादाब:" अम्मी ये आपके पीरियड भी ना मेरी जान निकाल देते हैं। इस बार तो आपने मुंह से नहीं चूसा। देखो ना कैसे अकड़ रहा है मेरा मूसल आपकी औखलीं में जाने के लिए।

शादाब ने उसका एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखना चाहा तो उसने अपना हाथ पीछे खींच लिया और शहनाज़ के होंठो पर स्माइल आ गई और बोली:"

" तुझे अब तब ओखली और मूसल याद हैं क्या ?

शादाब:" क्या बात कर दी अम्मी, मैं कैसे भूल सकता हूं। ज़िन्दगी में खुशियां इसी ओखली और मूसल की वजह से तो आई थी।

शहनाज़:' अच्छा ये बात भी है। तुम अब जल्दी से हो जाओ, नहीं तो कॉलेज कर लिए लेट हो जाओगे।

शादाब ने एक किस अपनी अम्मी के गाल पर किया और तेजी से उठकर तैयार होने लगा और फिर नाश्ता करके जाने लगा तो शहनाज़ ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके गाल चूम कर बोली:"

" जल्दी आना, मेरा मन नहीं लगता तेरे बिना।

शादाब ने जल्दी से शहनाज़ का एक हाथ अपने लंड पर रख दिया और बोला:"

" आपके प्यारे इस मूसल के बिना या मेरे बिना?

शहनाज़ ने उसके होंठो को चूम लिया और बोली:" दोनो के बिना अब खुश। जाओ जल्दी अब और जल्दी आना।

शादाब:" अच्छा जाता हूं, अगर जल्दी आया तो क्या दोगी ?

शहनाज़:" पहले आओ तो तुम, उसके बाद बात करते हैं।

शादाब ने अपनी अम्मी की चूत की तरफ इशारा किया और बोला:" बात कुछ नहीं करनी मुझे आज आपकी ये चाहिए।

इतना कहकर शादाब उसकी तरफ जीभ निकाल कर कॉलेज चला गया और शहनाज़ अपने विचारो में खोई हुई थी कि किस तरह उसके बेटे ने उसकी ज़िन्दगी को पूरी तरह से बदल दिया था। मैं सुंदर हूं इसलिए मेरे बेटे ने मेरे जिस्म को नहीं हासिल किया बल्कि उसने एक आशिक का पूरा फर्ज़ निभाया। मायके वालों को मेरी कद्र नहीं रही अम्मी पापा के बाद और ससुराल वालों ने भी मुझे पूरी तरह से निराश ही किया।

करीब सुबह के 10 बजे रहे थे और अपने विचारो में खोई हुई शहनाज़ को याद आया कि आज उसके पीरियड खत्म हो गए हैं और उसे अच्छे से सिर धोकर नहा लेना चाहिए। शादाब पिछले पांच दिन से सेक्स के लिए तड़प रहा था लेकिन मेरे पीरियड के चलते मजबूर था और बेचारे का इस बार तो मैंने चूसा भी नहीं। सुबह आज वो पूरी खुशी के साथ कॉलेज गया है कि आज शाम को जोरदार धमाका करेगा।

शहनाज़ नहाने के लिए बाथरूम में बाथरूम में घुस गई और पूरी तरह से नंगी हो गई। उसने अपने जिस्म को देखा तो उसे खुद पर गर्व महसूस हुआ। उसकी चूचियां और गांड़ सचमुच जानलेवा हो गई थी। शहनाज़ ने देखा कि उसकी चूत पर पिछले कुछ दिनों में छोटे छोटे बाल उग आए थे पीरियड की वजह से। इसलिए शहनाज ने सबसे पहले अपने बालो को साफ करने का फैसला किया। उसने क्रीम लगाई और थोड़ी देर बाद ही उसे अपनी से धो दिया। उसकी चूत बिल्कुल सुंदर और चिकनी हो गई थी, एक भी बाल नहीं। उसने कांपते हाथो से चूत को छुआ तो उसे एहसास हुआ कि उसकी चूत बिल्कुल रेशम की तरह मुलायम हैं।

शहनाज़ अपनी चूत के साथ ज्यादा छेड़ छाड़ नहीं करना चाहती थी इसलिए बस अच्छे से साफ किया और ब्रा पेंटी पहन ली और अपने कमरे में आ गई और अपने कपड़े बदल लिए।

वो टीवी देखने लगी और कब दो बज गए उसे पता ही नहीं चला। वो जानती थी कि उसके बेटे के आने का समय हो गया है तो उसन अपने बालो को खोल दिया और उसके बाद उसके खूबसूरत चेहरे के चारो और फैल गए और उसने अपनी टी शर्ट को निकाल दिया और सिर्फ एक डार्क ब्लू रंग की जीन्स और गहरे लाल रंग की डिजाइनर ब्रा में बाहर बालकनी में खड़ी हो गई और सड़क की तरफ देखने लगी।

शादाब की कार उसे सड़क पर आती दिखाई दी और शहनाज़ के होंठो पर स्माइल आ गई। शादाब ने अपनी अम्मी को देखा और कार की स्पीड को कम कर दिया और शहनाज़ को बालकनी में खुले बालों में देखकर उसे खुशी के साथ साथ हैरानी भी हो रही थी। शहनाज के दूध से गोरे कंधे दूर से ही साफ नंगे नजर आ रहे थे और शादाब ने अपनी अम्मी को एक फ्लाइंग किस दी तो शहनाज़ हल्की सी शरमाई और शादाब ने गाड़ी को घर के अंदर घुसा दिया।

गाड़ी खड़ी करने के बाद शादाब तेजी से उपर की तरफ दौड़ा क्योंकि उसे अपनी अम्मी से दूरी अब बर्दाश्त नहीं हो रही थी। शादाब जैसे ही उपर पहुंचा तो उसे शहनाज़ दिखाई दी जो एक डार्क ब्लू कलर की जीन्स पहने हुए थी और उसकी गांड़ बाहर की तरफ निकली हुई थी। उपर उसकी कमर पर एक लाल गहरे रंग की ब्रा थी बस।

कदमों की आहट से शहनाज़ को एहसास हो गया कि शादाब आ गया है तो उसने अपनी गांड़ को पूरी तरह से बाहर की तरफ निकाल दिया ।

शादाब पागल सा हो उठा और आगे बढकर उसने शहनाज़ की मोटी गांड़ को अपनी दोनो हाथो में भर लिया और जोर से मसल दिया तो शहनाज़ के मुंह से आह निकल पड़ी

" आह क्या करता हैं शादाब, उफ्फ थोड़ा प्यार से बेटा।

शादाब ने अपने हाथो की पकड़ को और टाइट किया और शहनाज़ की गांड़ को कस कस कर मसलने लगा तो शहनाज़ बावली सी होकर पलटी और उससे लिपट गई और बोली।

" आह यहां नहीं बेटा, अंदर ले चल ना मुझे, अपने बेड पर

शादाब ने उसे अपनी बांहों में उठा लिया और शहनाज़ ने अपनी बांहे उसके गले में लपेट दी।

शादाब ने अपनी अम्मी को बेड पर लिटा दिया और शहनाज़ ने उसे अपने ऊपर खींच लिया तो शादाब ने अपने होंठ अपनी अम्मी के होंठो पर टिका दिए और चूसने लगा। शहनाज़ भी अपने बेटे के होंठ चूसने लगी।

शादाब ने अपने दोनो हाथ पीछे ले जाते हुए शहनाज़ की ब्रा को खोल दिया तो उसकी चूचियां आजाद होकर उछल पड़ी। शादाब ने जैसे ही उसकी चूचियों को अपने हाथो में भरा तो उसका फोन बज उठा।

शहनाज़ और शादाब की नजरे मिली तो शहनाज़ ने उसे फोन उठाने का इशारा किया तो शादाब ने देखा कि उसकी बुआ का फ़ोन था इंडिया से।

शादाब कुछ बोलता उससे पहले ही रेशमा की डरी सहमी हुई आवाज आई

" शादाब तेरे फूफा की तबियत बहुत ज्यादा खराब हैं बेटा। हॉस्पिटल में एडमिट हैं लेकिन आराम नहीं मिल रहा हैं।

शादाब और शहनाज़ दोनो ने ये सुना तो उनकी नजरे आपस में मिली और शादाब बोला:"

" आप फिक्र ना करे बुआ, मैं अभी इंडिया के लिए निकल रहा हूं। तब तक आप उनका ख्याल रखें। पैसे की फिक्र ना करे आप।

शहनाज़ अपने कपड़े पहन चुकी थी और थोड़ी देर बाद ही उनकी फ्लाइट इंडिया के लिए उड़ चुकी थीं। शहनाज़ और शादाब दोनो को अब वसीम की चिंता हो रही थी क्योंकि उसके बाद रेशमा का क्या होगा ये ही सोचकर दोनो बहुत ज्यादा परेशान थे।

अगले दिन सुबह सौंदर्या उठी तो रात भर ठीक से ना सो पाने के कारण उसकी आंखे पूरी तरह से लाल हो गई थी। आज उसे कॉलेज जाना था इसलिए वो नहाने के लिए बाथरूम में घुस गई। सौंदर्या को अपनी टांगो के बीच हल्का हल्का दर्द सा महसूस हो रहा था। उसने नहाने के लिए अपने सभी कपडे उतार दिए और अपनी जांघो के बीच झांका तो उसे अपनी चूत लाल सी नजर आईं। उसने अपनी एक उंगली की चूत जी की फांकों पर रखा तो उसके मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी। उसकी चूत के दोनो होंठ सूजकर लाल हो गए थे और हल्का हल्का दर्द हो रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ये सब कैसे हुआ। तभी याद याद आया कि किस तरह ट्रैक्टर पर वो अपने भाई की गोद में उछल रही थी और उसके भाई का लंड उसकी चूत को रगड़ रहा था।

सौंदर्या की सांसे एक बार फिर से ये सब सोचकर तेज हो गई कि उसके भाई के अंदर इतनी ताकत हैं कि कमीने के कपड़ों के ऊपर से ही मेरी चूत की ये हालत कर दी है। तभी सौंदर्या को अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसे ऐसा नहीं सोचना चाहिए क्योंकि ये सब गलत है। मैं अपने सगे भाई के बारे में ऐसा नहीं सोच सकती। सौंदर्या नहाने लगी और थोड़ी देर बाद वो नहाकर बाहर आ गई और अपने कमरे ने तैयार होने लगी। आज उसे कॉलेेज जाना था और वो अब डर रही थी क्योंकि उसे अब पिंकी की याद आ रही थी कि किस तरह से गुण्डो ने उसे मार डाला।

अकेले जाने के उसकी हिम्मत नहीं थी और रात अपने भाई को थप्पड़ मारने के बाद वो किस मुंह से उसे अपने साथ जाने के लिए कहेगी उसकी समझ में नहीं आ रहा था। उसने अजय से बात करने का फैसला किया क्योंकि वो जानती थी कि उसका भाई उसे इनकार नहीं करेगा।

आखिरकार वो अपने भाई के कमरे में आई तो उसे अजय नहीं दिखाई दिया तो उसे चिंता हुई कि पता नहीं सुबह सुबह कहां घूमने चला गया होगा। सौंदर्या नीचे आ गई तो उसने देखा कि अजय नहा धोकर तैयार बैठा हुआ था और उसने सुकून की सांस ली।

सबने नाश्ता किया तो अजय खुद ही बोल पड़ा:"

" दीदी मुझे शहर में काम हैं। मैं आपको छोड़ दुगा और शाम को मैं काम खत्म करके आपको लेता भी आऊंगा।

सौंदर्या ने अपने भाई को प्यार भरी नजरो से देखा और बोली:"

" ये तो बहुत अच्छी बात हैं भाई। मैं भी अकेले परेशान हो जाती हूं, अच्छा हूं कि आज तुम जा रहे हो मेरे साथ भाई।

कमला अपने बच्चो का प्यार और दोनो एक दूसरे की कितनी देखभाल करते है ये देखकर बहुत खुश हुई और बोली:"

" भगवान करे कि तुम दोनो भाई बहन के बीच ये प्यार ऐसे ही ज़िन्दगी भर बना रहे।

अजय और सौंदर्या की नजरे आपस में मिली मानो अपने आपसे पूछ रहे हो कि क्या मम्मी ठीक बोल रही है।

अजय उठा और गाड़ी निकाल कर आ गया तो सौंदर्या भी गाड़ी में बैठ गई और अजय ने गाड़ी को आगे बढ़ा दिया।

............................
 
अजय ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। धीरे धीरे अपनी रफ्तार से चलती हुई गाड़ी गांव से बाहर निकल गई और सड़क पर आते ही एक तेज रफ्तार के साथ दौड़ पड़ी। गाड़ी में पूरी शांति थी, ऐसा लग रहा था मानो अजय और सौंदर्या दोनो गूंगे हो। दोनों एक दूसरे से बात करना चाह रहे थे लेकिन हिम्मत नही हो रही थी। आखिकार हिम्मत करके अजय ने चुप्पी तोड़ी और बोला:"

" दीदी आप किस टाइम तक फ्री हो जाएगी शाम को ?

सौंदर्या ने एक नजर अपने भाई पर डाली और भावहीन चेहरे के साथ बोली:"

" करीब 5 बज जाएंगे। आप उससे पहले ही आ जाना भाई।

अजय;" आप फिक्र मत कीजिए। मैं आपको बाहर ही मिल जाऊंगा जब आप आओगी।

सौंदर्या ने राहत की सांस ली और कार में एक बार फिर से खामोशी ने अपना डेरा डाल दिया। सौंदर्या ने अजय की तरफ देखा जो भावहीन चेहरे के साथ गाड़ी चला रहा था तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसे अपने भाई को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था। आखिर गलती उसकी भी तो हैं। थप्पड़ के बजाय उसे अपने भाई को प्यार से समझाना चाहिए था।

सौंदर्या का कॉलेज आ गया और उसने एक प्यार भरी नजर के साथ अपने भाई को देखा और अंदर चली गई। अजय उसे अंदर जाते हुए देखता रहा और थोड़ी देर बाद ही सौंदर्या आगे मुड़कर आंखो से ओझल हो गई।

अजय ने गाड़ी को शहर की तरफ घुमा दिया और उस जगह पहुंच गया जहां उसने शेरा और उसके गुण्डो को मारा था। उसने आस पास नजर दौड़ाई लेकिन उसे कुछ खास नजर नहीं आया।

पिंकी की लाश यहां से थोड़ी ही दूर मिली थी इसलिए अजय ने सोचा कि घटना स्थल पर एक बार जरूर जाया जाए। अजय ने अपनी कार आगे बढ़ाई और थोड़ी देर बाद वो उस जगह आ गया जहां से पिंकी की लाश मिली थी। चारो और लोगो की भीड़ सड़क से आ जा रही थी और अजय ने काफी देर तक इधर उधर देखा लेकिन उसे कुछ खास नहीं मिला तो उसने अपनी गाड़ी को वापिस लिया और घूमने ही वाला था कि उसे एक बाइक पर बैठे हुए व्यक्ति पर शक हुआ लेकिन अजय ने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया मानो उसने देखा ही नहीं और गाड़ी को हल्की रफ्तार से आगे बढ़ा दिया। शीशे से उसने धीरे से देखा तो उसके दिमाग़ में हलचल मच गई क्योंकि बाइक भी उसकी तरफ आ रही थी। अजय ने जान बूझकर गाड़ी को सड़क पर बाई तरफ घुमा दिया तो थोड़ी दूर जाने पर बाइक भी उसी दिशा में घूम गई। अब अजय के दिमाग में शक की कोई बात ही नहीं रह गई थी और वो समझ गया था कि बाइक उसका पीछा कर रही है। लेकिन क्यों कर रही हैं और ये बाइक पर कौन आदमी हैं और उसके पीछे यहीं से क्यों लगा जहां पिंकी की हत्या हुई हैं।

कोई तो है जो मुझे ये नहीं जानने देना चाहता हूं कि पिंकी की मौत क्यों और किसने की जबकि मैं तो कोई पुलिस ऑफिसर भी नहीं हु। अजय ने अपने दिमाग पर जोर दिया तो उसे एक बात समझ आ गई कि उसकी दीदी पिंकी को बचाने के लिए ही तो गुण्डो से भिड़ गई थी तो कहीं अब पिंकी के बाद दीदी ही तो उनके निशाने पर नहीं है।

अजय के दिमाग में खतरे की घंटी बज उठी और उसने तुरंत गाड़ी को सौंदर्या के कॉलेज की तरफ दौड़ा दिया। गाड़ी हवा से बातें कर रही थी और थोड़ी देर बाद ही वो कॉलेज के सामने था।

कॉलेज के बाहर पहले से पुलिस की गाडियां देखकर उसके दिमाग को झटका सा लगा और वो तेजी से नीचे उतरा तो देखा कि कॉलेज के प्राचार्य बुरी तरह से डरे हुए थे और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही थी।

ऑफिसर:" आपके स्कूल से दिन में ही एक महिला टीचर का किडनैप हो गया कैसे ? आपके पास तो अपने गार्ड है।

प्राचार्य: मेरे गार्ड बेहोश और जख्मी हालात में मिले हैं। ये तो आपको सोचना चाहिए कि शहर में पुलिस के होते हुए गुण्डो की हिम्मत इतनी कैसे बढ़ गई ?

अजय का दिल किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा और वो तेजी से आगे आया और एक महिला अध्यापक से पूछा :"

" क्या हुआ हैं यहां ? किसका किडनैप हो गया है ?

मैडम के चेहरे पर खौफ के मारे हवाइयां उड़ी हुई थी और वो डरते हुए बोली:"

" हमारे कॉलेज की एक टीचर सौंदर्या का।

अजय अपनी बहन का नाम सुनते ही परेशान हो गया क्योंकि वो जानता था कि उसकी बहन बहुत बड़े खतरे ने पड़ चुकी है। अजय ने तुरंत पीछे नजर दौड़ाई क्योंकि वो जानता था कि जो बाइक वाला उसका पीछा कर रहा हैं जरूर उसके है गैंग ने उसकी बहन का किडनैप किया है। लेकिन अजय को बाइक वाला दूर दूर तक कहीं नहीं दिखाई दिया।

अजय परेशान हो उठा और तेजी से गाड़ी से बाहर निकला और इधर उधर बाइक वाले को देखने लगा लेकिन उसे वो कहीं नजर नहीं आया। अजय को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे ?

अजय तेजी से आते हुए अपनी गाड़ी में बैठा और गाड़ी सीधे रोड की तरफ दौड़ा दी और बाइक की तलाश में जुट गया।

एक बहुत ही वीरान सा खंडर था ये शहर से बाहर की तरफ। मुख्य सड़क से हटकर एक कच्छी मिट्टी की सड़क बस यहां आने के लिए एक मात्र रास्ता थी। बरसात की वजह से सड़क पर जगह जगह पानी भरा हुआ था और कीचड़ बहुत ज्यादा हो गई थी।

इसी सड़क पर एक स्कॉर्पियो मुड़ी और धीरे धीरे खंडर की तरफ बढ़ने लगी। स्कॉर्पियो के पीछे तीन गाडियां और थी जो गुण्डो से पूरी तरह से भरी हुई थी। शेरा ने गाड़ी को खंडर के ठीक सामने रोक दिया और उसके साथ ही सारे गुंडे गाड़ी से बाहर निकल गए।

शेरा ने गाड़ी की डिक्की खोली तो उसमे सौंदर्या बेहोश पड़ी हुई थी। शेरा की आंखों चमक उठी और उसने सौंदर्या के अचेत जिस्म को कंधे पर उठाया और अंदर की तरफ चल पड़ा। एक एक करके सभी गाड़ियों से गुंडे उतर गए थे गाड़ियों को घास और लकड़ियों से ढक दिया गया। अब दूर दूर से गाड़ी नजर नहीं आ रही थी बल्कि घास का एक ढेर नजर आ रहा था।

शेरा सौंदर्या को लिए हुए एक अंदर घुस गया और शेरा को देखते ही सामने बैठे हुए मनोज की आंखे चमक उठी।

मनोज अपनी कुर्सी से उठ गया और एक विजयी मुस्कान के साथ बोला:" शाबाश मेरे शेर, तुम सचमुच शेर हो। मानना पड़ेगा तुम्हारी हिम्मत को क्योंकि आज तुमने जो किया हैं उसके लिए सचमुच शेर का ही दिल चाहिए।

शेरा ने सौंदर्या को एक चारपाई पर पलट दिया और स्माइल करते हुए बोला:" डरता नहीं हूं इसलिए ही तो मेरा नाम शेरा हैं। लीजिए जिसकी आपको तलाश थी आपके सामने पड़ी है।

मनोज ने एक नजर सौंदर्या की तरफ देखा और शेरा के कंधे पर हाथ रखकर उसे शबासी दी और बोला:"

" शेरा मुझे अपने बाद पर सिर्फ तुम पर ही तो सबसे ज्यादा भरोसा है। सच में तुम एक सच्चे वफादार हो।

शेरा अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और उसके बाद मनोज ने सभी को बाहर जाने का इशारा किया तो एक के बाद एक सभी लोग बाहर चले गए। शेरा भी बाहर चला गया जबकि मनोज ने उसे जाने के लिए नहीं बोला था।

मनोज ने सौंदर्या में मुंह में ठूंसा हुआ कपड़ा बाहर निकल लिया और एक बॉटल से थोड़ा सा पानी लेकर सौंदर्या में मुंह पर छिड़क दिया तो सौंदर्या ने एक झटके के साथ अपनी आंख खोल दी और अपने आप को एक बिल्कुल अंजना जगह पर पाया।उसकी नजर अपने सामने बैठे हुए मनोज पर पड़ी तो उसकी समझ में आ गया कि ये सब उसी का किया धरा है।

सौंदर्या:" मनोज ये क्या बदतमीजी हैं ? मुझे इस तरह क्यों उठा कर लाया गया ?

इतना कहकर सौंदर्या उठ खड़ी हुई और गुस्से से उसकी तरफ देखने लगी। मनोज ने उसकी तरफ एक स्माइल दी और बोला:_

" मेरी प्यारी सौंदर्या तुमने और तुम्हारे भाई ने मेरी इज्जत मिट्टी में मिला दी, मेरे गुण्डो पर पहली बार किसी ने हाथ उठाया और उन्हें बुरी तरह से मारा अजय ने सिर्फ तुम्हारी वजह से।
 
सौंदर्या के चेहरे पर गुस्से के भाव बढ़ गए और बोली:" अच्छा तो तुम गांव में शरीफ होने का नाटक करते हो और ये शहर में फैले हुए सारे अपराध की असली वजह तुम हो।

मनोज:" सही समझी तुम सेक्सी सौंदर्या, मेरे आदमी ही सब कुछ करते हैं और पिंकी की मौत भी मेरी वजह से ही हुई हैं क्योंकि उसने मेरी बहन के खिलाफ जाने की कोशिश करी थी।

सौंदर्या की आंखे लाल सुर्ख हो गई और वो गुस्से से अपने शब्दो को चबाते हुए बोली:"

" बस मनोज, अब तुम्हारे पापो का घड़ा भर गया हैं और मैं सारी दुनिया को तुम्हारी करतूत बताउंगी।

मनोज ने उसकी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा मानो वो कोई जोक सुना रही हो।

सौंदर्या:" हंस लो अपनी आखिरी हंसी तुम क्योंकि फिर इसके बाद कोई तुम्हे जेल में रोना पड़ेगा।

मनोज:' मर गए मुझे जेल भेजने वाले, जरा पहले यहां से निकल कर तो दिखाओ तुम।

सौंदर्या तेजी से आगे की तरफ बढ़ी और मनोज ने सामने लगे स्विच को दबा दिया तो कमरे का एक मात्र दरवाजा तेजी से बंद हो गया और सौंदर्या के माथे पर परेशानी और डर को रेखाएं उमड़ आई।

सौंदर्या:" देखो मनोज तुम मुझे जाने दो नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा तुम्हारा।

मनोज थोड़ा सा आगे आया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:" मेरे अंजाम की छोड़, अपनी फिक्र करो। दुनिया की कोई ताकत मेरी मर्जी के बिना ये दरवाजा नहीं खोल सकती। मान लो तुम बाहर चली भी गई तो मेरे आदमी भूखे कुत्तों की तरह तुम्हे नोच डालेंगे। ये देखो।

इतना कहकर उसने टीवी ऑन किया तो बाहर खड़े और बेहद डरावनी सूरत के गुंडे नजर आए जिन्हे देखते ही सौंदर्या का पसीना टपक पड़ा।

मनोज:" मान लो तुम गुण्डो से भी बच गई तो यहां से बाहर कैसे निकल पाओगी ? ये एक घणा जंगल हैं और तुम्हे कोई दूर रास्ता नजर नहीं आएगा। बाहर तुम्हे जंगली जानवर खा जाएंगे।

सौंदर्या समझ गई थी कि वो बेहद बुरी तरह से फंस गई है और उसका बचना मुश्किल है लेकिन उसे अपने भाई पर पूरा भरोसा था कि वो उसे जरूर बचा लेगा।

सौंदर्या सोच में डूब गई।

मनोज" किस सोच में डूब गई मेरी जान ? देखो तुम्हे अब सारी ज़िन्दगी यहीं रहना होगा मेरी रखैल बन कर, कहां तो तुम एक लंड के लिए तरस रही थी यहां अब तुम्हे हर रोज लंड मिलेंगे, एक नहीं काफी सारे। मेरे सारे आदमी तुम्हारी साथ बारी बारी से मस्ती करेंगे।

सौंदर्या मनोज की बात पूरी होते ही बेहोश हो गई और मनोज ने उसके उसे उठा कर बेड पर पटक कर और कमरे को बाहर से बंद करने के बाद बाहर आ गया और अपने गुण्डो से बात करने लगा।

अजय को समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी बहन को कहां तलाश करे। दोपहर हो गई थी लेकिन उसे अभी तक कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

अजय ने गाड़ी को सड़क के किनारे रोक दिया और सोच में डूब गया कि आखिर उसकी दीदी का किडनैप क्यों और किसने किया तो उसके आगे सिर्फ एक ही वजह उभरी। वहीं पिंकी वाली और वो समझ गया कि ये दोनो काम जरूर एक ही आदमी के है।

अजय ने अपने दिमाग को उधर इधर दौड़ाया तो उसे एक उम्मीद की किरण नजर आईं। उसे सामने सड़क पर सीसीटीवी कैमर लगा नजर आया जिसमे वो उस बाइक का नंबर पता कर सकता था जो उसका पीछा कर रही थी।

अजय ने सावधानी से उसकी डिटेल निकाली तो बाइक सवार उसे जाना पहचाना सा लगा मानो अजय उसे बहुत अच्छे से जानता हो। अजय ने बाइक का नंबर नोट किया और बार बार वो उस आदमी की फोटो देखने लगा जो बाइक पर बैठा हुआ था।

अजय ने उस आदमी की पेंट की जेब पर ध्यान दिया तो उसकी जेब से कुछ बाहर की तरफ निकला हुआ था। अजय ने वीडियो को स्टार्ट किया तो थोड़ा आगे जाकर मोड़ पर उसकी जेब से कुछ गिरा और अजय ने बिना देर किए कार को उस दिशा में दौड़ा दिया और जल्दी ही वो उस जगह पहुंच गया और उसे सड़क पर अपना अज्जु भाई का मास्क दिखाई दिया।

अजय को आंखे चमक उठी और उसने वो मास्क उठा लिया और वो समझ गया कि ये सब इस मास्क की वजह से हुआ है क्योंकि गुण्डो को पता चल गया होगा कि मैंने ही उनके लोगो को मारा था इसलिए उन्होंने मेरी बहन को उठा लिया। अजय एक बात तो साफ समझ गया था कि उसकी दीदी बहुत बड़े खतरे में पड़ गई है।

अजय ने बहुत ध्यान से फिर से वीडियो को देखा और उस आदमी के बारे में सोचने लगा कि ये कौन हो सकता हैं। अजय अपनी सोच में डूबा हुआ था कि उसका फोन बज उठा ।

उसकी मम्मी का फोन था। अजय अपनी मम्मी को अभी कुछ भी बताकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहता था।

कमला: अरे बेटा, अजय शाम को थोड़ा जल्दी आ जाना, रामू आज काम पर नहीं आया है इसलिए घास तुम्हे ही लाना होगा। आज फिर से शहर गया है वो किसी काम से।

अजय:" ठीक है मम्मी। आप फिक्र मत कीजिए। मैं जल्दी आ जाऊंगा।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया। अचानक अजय के दिमाग में एक विस्फोट सा हुआ और उसने फिर से वीडियो देखी तो उसकी आंख हैरत से खुलती चली गई और उसे सारी कहानी समझ में आ गई।

शाम हो गई थी और अजय ने गांव से थोड़ी दूर ही अपनी कार को एक पेड़ की साइड में छुपा है और खुद एक पेड़ के पीछे छुपकर किसी का इंतजार करने लगा। थोड़ी ही देर हुई थी कि एक बाइक उसे सामने से आती हुई नजर आईं और जैसे ही बाइक उसके पास आई उसने जंप लगा दी और बाइक सवार सड़क पर गिर पड़ा और अजय ने उसे बिना कोई मौका दिए हुए उस पर हमला कर दिया।

रामू तड़प उठा। हाँ ये रामू ही तो था। उसके घर का नौकर। अजय ने उसे पकड़ लिया और उसकी गर्दन की एक नस दबाई तो तो वो बेहोश होता चला गया।

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